भारत में राइड-हेलिंग सेवाएं देने वाली कंपनी Uber की भारतीय इकाई Uber India Systems Pvt Ltd के ताज़ा वित्तीय नतीजों ने चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है। वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में कंपनी की राइड-हेलिंग से होने वाली शुद्ध आय (नेट रेवेन्यू) में भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि कुल कमीशन आय (ग्रॉस रेवेन्यू) लगभग स्थिर रही।
कंपनी के 31 मार्च 2025 को समाप्त वित्त वर्ष के समेकित वित्तीय विवरणों के अनुसार, राइड-हेलिंग से शुद्ध राजस्व FY24 के 807 करोड़ रुपये से गिरकर FY25 में केवल 88 करोड़ रुपये रह गया। यानी 89% की बड़ी गिरावट 📊।
💰 ग्रॉस रेवेन्यू स्थिर, फिर भी नेट रेवेन्यू क्यों गिरा?
दिलचस्प बात यह है कि राइड्स से मिलने वाला कुल कमीशन (ग्रॉस रेवेन्यू) FY25 में 2,604 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष के लगभग बराबर है।
तो फिर सवाल उठता है — जब कुल कमीशन आय स्थिर रही, तो शुद्ध आय इतनी तेजी से क्यों गिर गई? 🤔
इसका मुख्य कारण है — ड्राइवर इंसेंटिव और भारी छूट (डिस्काउंट) 🎁
FY25 में Uber ने इंसेंटिव और डिस्काउंट पर अपना खर्च 33% बढ़ाकर 2,516 करोड़ रुपये कर दिया। कंपनी की लेखा नीति के अनुसार ड्राइवरों को दिए जाने वाले इंसेंटिव को कुल आय से घटा दिया जाता है।
यानी जितना ज्यादा इंसेंटिव, उतनी कम दिखने वाली शुद्ध आय। यही वजह है कि ग्रॉस रेवेन्यू स्थिर रहने के बावजूद नेट रेवेन्यू लगभग खत्म हो गया।
⚔️ प्रतिस्पर्धा का असर: Rapido की चुनौती
भारतीय राइड-हेलिंग बाजार में प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है। FY25 में Rapido ने जीरो-कमीशन और फ्लैट सब्सक्रिप्शन मॉडल अपनाया, जिससे बाजार में नया दबाव बना।
हालांकि दोनों कंपनियों के आंकड़ों की सीधी तुलना नहीं की जा सकती, फिर भी Rapido ने FY25 में अपना शुद्ध घाटा 30.5% घटाकर 258 करोड़ रुपये कर लिया 📉।
इसके विपरीत, Uber India को FY25 में 1,512 करोड़ रुपये का समेकित घाटा हुआ, जो FY24 के 89 करोड़ रुपये की तुलना में कई गुना अधिक है।
राइड-हेलिंग से जुड़े घाटे की बात करें तो यह FY24 के 330 करोड़ रुपये से बढ़कर FY25 में 1,407 करोड़ रुपये तक पहुंच गया — यानी चार गुना से ज्यादा वृद्धि 🚨।
📊 कुल परिचालन आय में हल्की बढ़त
राइड-हेलिंग से शुद्ध आय घटने के बावजूद Uber India की कुल परिचालन आय में 2.3% की मामूली बढ़ोतरी हुई।
FY25 में कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू 3,849 करोड़ रुपये रहा, जो FY24 में 3,762 करोड़ रुपये था।
इस बढ़त का मुख्य स्रोत राइड-हेलिंग नहीं, बल्कि सपोर्ट सर्विसेज रहा 🏢। कंपनी ने अपनी मूल कंपनी और समूह इकाइयों को दी जाने वाली सेवाओं से 3,664 करोड़ रुपये कमाए, जो पिछले वर्ष के 2,936 करोड़ रुपये से काफी अधिक है।
इसके अलावा, कंपनी ने शिफ्ट ट्रांसपोर्टेशन सेवाओं से 79 करोड़ रुपये की आय भी अर्जित की 🚐।
📉 बाजार की बदलती तस्वीर
पिछले दो वर्षों में भारतीय राइड-हेलिंग बाजार में बड़ा बदलाव आया है।
- Rapido राइड्स की संख्या के आधार पर अग्रणी खिलाड़ी बनकर उभरा है।
- Uber दूसरे स्थान पर है।
- Ola तीसरे स्थान पर पहुंच गया है और उसकी बाजार हिस्सेदारी घट रही है।
डेटा एनालिटिक्स फर्म SensorTower के अनुसार मासिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं और डाउनलोड के मामले में Rapido की वृद्धि अधिक तेज रही है 📲।
🧾 लेखांकन नीति और असर
Uber की लेखा नीति के अनुसार ड्राइवरों को दिए गए इंसेंटिव को ऑपरेशनल रेवेन्यू से घटाया जाता है।
सरल शब्दों में कहें तो — कंपनी जितना अधिक इंसेंटिव और छूट देती है, उतनी ही कम उसकी टॉपलाइन दिखाई देती है।
इस नीति ने FY25 में मोबिलिटी बिजनेस की आय को काफी हद तक कम कर दिया।
🏛️ आगे की चुनौतियां
सरकार समर्थित ‘भारत टैक्सी’ जैसे संभावित प्लेटफॉर्म की चर्चा भी हो रही है। अगर यह ऐप सफल होता है, तो मौजूदा एग्रीगेटर्स के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि राइड-हेलिंग बिजनेस का मॉडल अब दबाव में है:
- बढ़ती प्रतिस्पर्धा
- इंसेंटिव पर निर्भरता
- सब्सक्रिप्शन मॉडल की ओर झुकाव
- कम मार्जिन और स्थिर लागत
इन सब कारणों से यह व्यवसाय बेहद संवेदनशील बन गया है ⚖️।
🔍 क्या आगे सुधार संभव है?
Uber का कहना है कि भारत उसके लिए प्रमुख विकास बाजार बना हुआ है और प्लेटफॉर्म पर राइडर मांग मजबूत है।
लेकिन लगातार बढ़ते घाटे और इंसेंटिव आधारित रणनीति को देखते हुए यह सवाल उठता है कि क्या यह मॉडल लंबे समय तक टिकाऊ रहेगा?
कई विश्लेषकों का मानना है कि ये कंपनियां डॉलर में खर्च करती हैं और रुपये में कमाई करती हैं 💵➡️💸 — और यही असंतुलन उनकी वित्तीय सेहत पर भारी पड़ रहा है।
अब देखना यह है कि आने वाले वर्षों में Uber भारत में अपने मॉडल को कैसे ढालती है और क्या वह घाटे से निकलकर मुनाफे की राह पकड़ पाती है या नहीं। 🚀











