💄 HUL के अधिग्रहण के बाद भी Minimalist की रफ्तार बरकरार,

Minimalist

हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) के स्वामित्व वाली D2C स्किनकेयर ब्रांड Minimalist ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में मजबूत ग्रोथ दर्ज की है। जयपुर स्थित इस कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू साल-दर-साल 48% बढ़कर ₹514.8 करोड़ तक पहुंच गया। हालांकि, 46 करोड़ रुपये के एकमुश्त (exceptional) खर्च के कारण कंपनी को शुद्ध घाटा दर्ज करना पड़ा।

Registrar of Companies (RoC) से प्राप्त समेकित वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, FY24 में 347.4 करोड़ रुपये रहे रेवेन्यू के मुकाबले FY25 में यह आंकड़ा 514.8 करोड़ रुपये हो गया।


🌿 2020 में हुई शुरुआत, D2C मॉडल पर फोकस

Minimalist की स्थापना वर्ष 2020 में मोहित यादव और राहुल यादव ने की थी। यह ब्रांड स्किन और हेयर केयर प्रोडक्ट्स जैसे serums, toners, moisturizers आदि पेश करता है।

कंपनी अपने उत्पादों की बिक्री:

  • अपनी आधिकारिक वेबसाइट
  • Amazon
  • Nykaa
  • Flipkart

जैसे प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के जरिए करती है।

FY25 में कंपनी की पूरी आय केवल प्रोडक्ट सेल्स से आई, जो इसके मजबूत D2C (Direct-to-Consumer) मॉडल को दर्शाती है।


📊 कुल आय ₹517.6 करोड़

ऑपरेशंस से 514.8 करोड़ रुपये के अलावा कंपनी को ₹2.84 करोड़ नॉन-ऑपरेटिंग इनकम भी हुई। इस तरह FY25 में कंपनी की कुल आय बढ़कर ₹517.6 करोड़ तक पहुंच गई।

यह ग्रोथ दर्शाती है कि Minimalist ने भारतीय ब्यूटी और पर्सनल केयर मार्केट में अपनी मजबूत पहचान बना ली है।


📢 विज्ञापन पर भारी खर्च

Minimalist ने FY25 में अपनी ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर जमकर खर्च किया।

  • विज्ञापन और प्रमोशन पर ₹154 करोड़ खर्च किए गए
  • यह कंपनी के कुल खर्च का 30% से अधिक है
  • FY24 के मुकाबले इसमें 28% की वृद्धि हुई

D2C ब्रांड्स के लिए डिजिटल मार्केटिंग और सोशल मीडिया प्रमोशन बेहद अहम होता है, और Minimalist ने इसी रणनीति पर जोर बनाए रखा।


🏭 मटेरियल और डिस्ट्रीब्यूशन खर्च भी बढ़े

रेवेन्यू में बढ़ोतरी के साथ-साथ लागत भी बढ़ी।

  • मटेरियल कॉस्ट 57% बढ़कर ₹146.7 करोड़ हो गई (FY24: ₹93.7 करोड़)
  • डिस्ट्रीब्यूशन खर्च, जिसमें मार्केटप्लेस कमीशन शामिल है, ₹84.3 करोड़ रहा
  • कर्मचारी लाभ खर्च 29% बढ़कर ₹36.8 करोड़ हो गया

इसके अलावा, किराया, ट्रांसपोर्टेशन, वेयरहाउसिंग, लीगल और प्रोफेशनल फीस जैसे अन्य ओवरहेड्स पर ₹82 करोड़ खर्च हुए।

इन सभी को मिलाकर FY25 में कंपनी का कुल खर्च बढ़कर ₹504 करोड़ हो गया, जो FY24 में 333.2 करोड़ रुपये था। यानी खर्चों में 51% की वृद्धि दर्ज की गई।


📉 EBITDA पॉजिटिव, लेकिन शुद्ध घाटा

दिलचस्प बात यह है कि कंपनी का EBITDA ₹18 करोड़ पॉजिटिव रहा। यानी ऑपरेशनल स्तर पर कंपनी लाभ में रही।

हालांकि, 46 करोड़ रुपये के एकमुश्त (exceptional) खर्च के कारण Minimalist को FY25 में ₹31.5 करोड़ का शुद्ध घाटा उठाना पड़ा।

इन exceptional items का विवरण वित्तीय दस्तावेजों में स्पष्ट नहीं किया गया है।


📈 मार्जिन और वित्तीय स्थिति

  • ROCE (Return on Capital Employed): 10.55%
  • EBITDA मार्जिन: 3.45%

FY25 में कंपनी ने हर 1 रुपये की ऑपरेटिंग आय कमाने के लिए ₹0.98 खर्च किए

मार्च 2025 तक कंपनी के पास ₹229 करोड़ के करंट एसेट्स थे, जिनमें से ₹48 करोड़ कैश और बैंक बैलेंस शामिल हैं।


🤝 HUL ने खरीदी 90.5% हिस्सेदारी

जनवरी 2025 में FMCG दिग्गज Hindustan Unilever Limited (HUL) ने Minimalist में 90.5% हिस्सेदारी खरीदी।

यह सौदा ₹2,955 करोड़ (लगभग $350 मिलियन) के प्री-मनी वैल्यूएशन पर हुआ, जो हाल के वर्षों में D2C सेक्टर के सबसे बड़े अधिग्रहणों में से एक है।

यह ट्रांजैक्शन FY26 की पहली तिमाही (Q1 FY26) में पूरा होने की उम्मीद है।


💰 निवेशकों की हिस्सेदारी

अधिग्रहण से पहले Minimalist ने कुल $17 मिलियन फंडिंग जुटाई थी।

  • Peak XV ने $15 मिलियन की Series A राउंड लीड की थी
  • Peak XV के पास 27.9% हिस्सेदारी है
  • को-फाउंडर्स मोहित और राहुल यादव के पास 62% हिस्सेदारी थी

🔮 HUL का प्रभाव अभी सीमित

अब तक Minimalist के वित्तीय नतीजों में HUL के अधिग्रहण का कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आया है। यह कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत हो सकता है, क्योंकि ब्रांड को स्वतंत्र रूप से काम करने और अपनी रणनीति लागू करने का समय मिल रहा है।

HUL ने इस ब्रांड के लिए प्रीमियम वैल्यूएशन चुकाया है, जिससे साफ है कि कंपनी Minimalist की ग्रोथ क्षमता पर भरोसा जता रही है।


📌 निष्कर्ष

Minimalist ने FY25 में शानदार रेवेन्यू ग्रोथ दिखाई और ₹500 करोड़ का आंकड़ा पार किया। हालांकि, बढ़ते खर्च और exceptional items के कारण शुद्ध घाटा दर्ज हुआ, लेकिन ऑपरेशनल स्तर पर कंपनी लाभ में बनी रही।

HUL के अधिग्रहण के बाद Minimalist के पास मजबूत वित्तीय बैकअप और वितरण नेटवर्क का फायदा होगा। आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या Minimalist अपनी ग्रोथ को स्थायी मुनाफे में बदल पाती है या नहीं।

भारतीय D2C ब्यूटी मार्केट में Minimalist की यह यात्रा फिलहाल तेजी से आगे बढ़ती नजर आ रही है।

Read more :🏢 IndiQube Q3 FY26 Results रेवेन्यू में 45% की तेजी,

🏢 IndiQube Q3 FY26 Results रेवेन्यू में 45% की तेजी,

IndiQube

मैनेज्ड वर्कस्पेस सॉल्यूशंस प्रोवाइडर IndiQube ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) की तीसरी तिमाही (Q3) के अपने वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने इस दौरान ऑपरेशनल स्तर पर मजबूत ग्रोथ दर्ज की, लेकिन बढ़ती लागत और फाइनेंस खर्च के कारण उसका घाटा साल-दर-साल (YoY) बढ़ गया।

Ind AS के अनुसार, Q3 FY26 में कंपनी का ऑपरेटिंग स्केल 45.5% बढ़ा, जबकि घाटे में 21% की वृद्धि दर्ज की गई।


📈 रेवेन्यू 390 करोड़ रुपये पहुंचा

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर उपलब्ध वित्तीय विवरण के मुताबिक, IndiQube का ऑपरेशंस से रेवेन्यू Q3 FY26 में बढ़कर 390 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही (Q3 FY25) में 268 करोड़ रुपये था।

इस तरह कंपनी ने साल-दर-साल आधार पर लगभग 45% की वृद्धि दर्ज की।

इसके अलावा, कंपनी को नॉन-ऑपरेटिंग सोर्सेस से 21 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हुई, जिससे कुल आय Q3 FY26 में बढ़कर 411 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।


📊 नौ महीनों में 38% की वृद्धि

अगर पूरे नौ महीने (अप्रैल से दिसंबर अवधि) की बात करें तो बेंगलुरु स्थित IndiQube ने FY26 के पहले नौ महीनों में 1,049 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया।

यह पिछले साल की समान अवधि (FY25) में दर्ज 762 करोड़ रुपये के मुकाबले 38% की वृद्धि दर्शाता है।

यह आंकड़े बताते हैं कि कंपनी अपने मैनेज्ड ऑफिस और फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस मॉडल के जरिए लगातार विस्तार कर रही है।


💼 खर्चों में भी तेज बढ़ोतरी

जहां एक तरफ कंपनी का रेवेन्यू तेजी से बढ़ा, वहीं दूसरी तरफ खर्चों में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।

👩‍💼 कर्मचारी लाभ खर्च

Q3 FY26 में कर्मचारी लाभ से जुड़े खर्च 34% बढ़कर 23.5 करोड़ रुपये हो गए। यह बढ़ोतरी कंपनी के विस्तार और नए सेंटर्स जोड़ने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

💳 फाइनेंस कॉस्ट

कंपनी का सबसे बड़ा खर्च फाइनेंस कॉस्ट रहा, जो कुल खर्च का करीब 26% हिस्सा है।

यह खर्च Q3 FY26 में बढ़कर 112 करोड़ रुपये हो गया, जो Q3 FY25 में 86 करोड़ रुपये था। यानी इसमें 30% की वृद्धि दर्ज की गई।

🏗️ डिप्रिसिएशन और अमोर्टाइजेशन

इसी तरह, डिप्रिसिएशन और अमोर्टाइजेशन खर्च भी बढ़कर 144 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह आमतौर पर नई प्रॉपर्टीज, इंफ्रास्ट्रक्चर और एसेट्स में निवेश के कारण बढ़ता है।


📉 कुल खर्च 434 करोड़ रुपये

इन सभी कारकों को मिलाकर Q3 FY26 में कंपनी का कुल खर्च बढ़कर 434 करोड़ रुपये हो गया, जो Q3 FY25 में 313 करोड़ रुपये था।

इस तरह कुल खर्च में साल-दर-साल आधार पर 39% की वृद्धि हुई।


🔻 घाटा 17 करोड़ रुपये

बढ़ते खर्चों के चलते IndiQube का घाटा भी बढ़ा।

Q3 FY26 में कंपनी का शुद्ध घाटा 17 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही में 14 करोड़ रुपये था। यानी घाटे में 21% की वृद्धि हुई।

हालांकि, एक सकारात्मक संकेत यह है कि तिमाही आधार (QoQ) पर कंपनी के घाटे में कमी आई है।

Q2 FY26 में जहां कंपनी का घाटा 30 करोड़ रुपये था, वहीं Q3 में यह घटकर 17 करोड़ रुपये रह गया। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी अपने खर्चों को धीरे-धीरे संतुलित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।


📌 शेयर प्राइस और मार्केट कैप

आज के ट्रेडिंग सेशन के अंत में IndiQube का शेयर प्राइस 177 रुपये पर बंद हुआ।

इस कीमत पर कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 3,751 करोड़ रुपये (करीब $414 मिलियन) रहा।


🏙️ विस्तार की रणनीति पर फोकस

IndiQube देशभर में मैनेज्ड ऑफिस स्पेस और फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस उपलब्ध कराती है। हाइब्रिड वर्क कल्चर और स्टार्टअप इकोसिस्टम के विस्तार के चलते इस सेक्टर में मांग लगातार बढ़ रही है।

कंपनी अपने नेटवर्क को बड़े शहरों के साथ-साथ उभरते बिजनेस हब्स तक विस्तार देने पर ध्यान दे रही है। हालांकि, इस विस्तार के साथ फाइनेंस कॉस्ट और डिप्रिसिएशन जैसे खर्च भी बढ़ रहे हैं, जो फिलहाल मुनाफे पर दबाव बना रहे हैं।


🔮 निष्कर्ष

कुल मिलाकर Q3 FY26 में IndiQube ने मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ दिखाई है। कंपनी का ऑपरेटिंग स्केल 45% से अधिक बढ़ा है और नौ महीने की अवधि में भी शानदार वृद्धि दर्ज की गई है।

हालांकि, बढ़ते फाइनेंस कॉस्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के कारण घाटा साल-दर-साल बढ़ा है। फिर भी, तिमाही आधार पर घाटे में कमी आना एक सकारात्मक संकेत है।

आने वाले समय में अगर कंपनी अपने खर्चों को बेहतर तरीके से मैनेज कर पाती है और फाइनेंस कॉस्ट को नियंत्रित करती है, तो यह ग्रोथ को मुनाफे में बदलने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।

IndiQube फिलहाल ग्रोथ और स्केल पर फोकस कर रही है, और निवेशक इसकी लागत प्रबंधन रणनीति पर नजर बनाए हुए हैं।

Read more :⚡️ AI से बदलेगा एनर्जी सेक्टर लंदन की tem ने जुटाए $75 मिलियन,

⚡️ AI से बदलेगा एनर्जी सेक्टर लंदन की tem ने जुटाए $75 मिलियन,

tem

एनर्जी सेक्टर लंबे समय से जटिल कॉन्ट्रैक्ट्स, छुपे हुए चार्जेस और पुराने सिस्टम्स से जूझ रहा है। बिजली खरीदना और बेचना आज भी कई बिज़नेस के लिए एक confusing और महंगा प्रोसेस बना हुआ है, जहां जोखिम और inefficiency साफ नजर नहीं आते। लेकिन अब इस सेक्टर में AI आधारित टेक्नोलॉजी के जरिए बड़ा बदलाव आने वाला है।

लंदन स्थित एनर्जी टेक स्टार्टअप tem इसी समस्या को हल करने के मिशन पर काम कर रहा है। कंपनी ने हाल ही में अपने Series B फंडिंग राउंड में $75 मिलियन जुटाए हैं, जो कि oversubscribed रहा यानी निवेशकों की मांग उम्मीद से ज्यादा थी।


💰 Series B में Lightspeed की अगुवाई, कुल फंडिंग $94 मिलियन

tem के इस Series B राउंड का नेतृत्व Lightspeed Venture Partners ने किया है। इस राउंड के साथ Lightspeed के पार्टनर Paul Murphy कंपनी के बोर्ड में भी शामिल होंगे।

अन्य प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:

  • Hitachi Ventures
  • Voyager Ventures
  • Schroders Capital
  • AlbionVC
  • Atomico
  • Allianz

इस नए निवेश के बाद tem की कुल फंडिंग $94 मिलियन तक पहुंच गई है।


📈 2030 तक 165% बढ़ेगी एनर्जी डिमांड

डेटा सेंटर्स, AI, और बड़े पैमाने पर electrification की वजह से 2030 तक एनर्जी डिमांड में करीब 165% की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। ऐसे में मौजूदा एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर इस बढ़ते दबाव को संभालने में सक्षम नहीं दिखता।

tem इसी gap को भरने के लिए AI-driven transaction infrastructure तैयार कर रहा है, जो एनर्जी खरीद-फरोख्त को उतना ही आसान और पारदर्शी बनाना चाहता है, जितना fintech ने बैंकिंग को बनाया।


🤖 Rosso AI और RED: tem का टेक्नोलॉजी मॉडल

tem का प्लेटफॉर्म दो मुख्य हिस्सों में काम करता है:

🔹 Rosso AI Engine

  • एनर्जी कॉन्ट्रैक्ट्स को automate करता है
  • अनावश्यक fees को खत्म करता है
  • data-driven pricing के जरिए 30% तक लागत कम करता है

🔹 RED Neo-Utility Platform

  • बिज़नेस और ब्रोकर्स के लिए user-friendly इंटरफेस
  • बिजली खरीदने, बेचने और मैनेज करने की सुविधा
  • कोई hidden cost नहीं, पूरी transparency

कंपनी के मुताबिक, Rosso और RED मिलकर हर साल 2 TWh (टेरावॉट ऑवर) एनर्जी ट्रांजैक्शन मैनेज कर रहे हैं।


🏢 2,600 से ज्यादा UK ग्राहक, $300 मिलियन का GTV

2025 में tem ने:

  • $300 मिलियन का annual gross transaction value (GTV)
  • 2,600+ UK बिज़नेस कस्टमर

कंपनी के प्रमुख ग्राहकों में शामिल हैं:

  • Boohoo
  • Fever-Tree
  • Silverstone
  • Newcastle United FC

यह आंकड़े दिखाते हैं कि tem का मॉडल सिर्फ आइडिया नहीं, बल्कि commercially proven भी है।


🧠 फाउंडर्स का विज़न: “एनर्जी के लिए वही करेंगे जो Fintech ने बैंकिंग के लिए किया”

tem की स्थापना 2021 में Joe McDonald (CEO) ने अपने co-founders Jason Stocks, Bartlomiej Szostek और Ross Mackay के साथ मिलकर की थी। इन सभी ने पहले utility और energy trading सिस्टम्स की खामियों को करीब से देखा था।

tem के फाउंडर्स के अनुसार:

“हम एनर्जी इंडस्ट्री के transaction infrastructure को दोबारा बना रहे हैं। हमारा लक्ष्य है कि एनर्जी मार्केट भी transparent, efficient और scalable बने – ठीक वैसे ही जैसे fintech ने बैंकिंग को बदला।”


⚔️ प्रतिस्पर्धा: Enel X और Octopus Energy से मुकाबला

tem का मुकाबला:

  • Enel X से है, जो global energy management पर काम करता है
  • Octopus Energy से है, जो UK retail energy market में मजबूत है

हालांकि tem खुद को अलग इसलिए मानता है क्योंकि उसने शुरू से ही core infrastructure को नए सिरे से rebuild किया है, न कि पुराने सिस्टम पर नया लेयर जोड़ा है।


🌍 आगे क्या? UK से Texas और Australia तक विस्तार

इस $75 मिलियन की फंडिंग का इस्तेमाल tem:

  • UK में अपने operations को और मजबूत करने
  • Texas (USA) और Australia जैसे markets में entry
  • Rosso AI को ज्यादा कंपनियों के लिए available बनाने
  • Pricing accuracy बढ़ाने के लिए data pool expand करने

में करेगा।

फाउंडर्स का मानना है कि अगले 3–5 सालों में tem का infrastructure दुनिया भर की energy कंपनियां, neo-utilities और नए ब्रांड्स अपनाएंगे।


🔮 निष्कर्ष

AI, data और automation के दौर में tem एनर्जी सेक्टर को fair, clear और efficient बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। जिस तरह fintech ने बैंकिंग को आसान बनाया, उसी तरह tem आने वाले समय में एनर्जी इंडस्ट्री की तस्वीर बदल सकता है।

जैसे-जैसे एनर्जी डिमांड बढ़ेगी, tem जैसे प्लेटफॉर्म्स की भूमिका और भी अहम होती जाएगी।

Read more :🔹 InCred Wealth का Future Plan और Growth Strategy

🔹 InCred Wealth का Future Plan और Growth Strategy

InCred Wealth

भारत में private wealth management सेक्टर तेज़ी से विस्तार कर रहा है। InCred Wealth यह सेक्टर FY24 में $1.1 ट्रिलियन से बढ़कर FY29 तक $2.3 ट्रिलियन तक पहुंच सकता है। यानी आने वाले कुछ सालों में यह इंडस्ट्री लगभग दोगुनी हो जाएगी।

इस तेज़ ग्रोथ के चलते बीते एक दशक में कई नए wealth platforms सामने आए हैं और इस सेक्टर में funding activity भी लगातार बढ़ी है।


🚀 InCred Wealth ने बनाया बड़ा मुकाम

इसी बदलते माहौल में Mumbai-based InCred Wealth ने एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। कंपनी ने महज़ छह साल में $10 बिलियन (₹1 लाख करोड़ से ज्यादा) का Assets Under Management (AUM) पार कर लिया है।

मार्केट से जुड़े लोगों का मानना है कि InCred Wealth की इस तेज़ ग्रोथ के पीछे consistent execution और एक मज़बूत leadership व client-facing team की अहम भूमिका रही है।


🧠 Wealth Business में Talent सबसे अहम

Wealth management इंडस्ट्री में अक्सर कहा जाता है कि scale, talent के पीछे चलता है। InCred Wealth भी अपनी hiring strength को अपने founder Bhupinder Singh के अनुभव से जोड़ता है।

Bhupinder Singh ने 20 से अधिक साल Deutsche Bank में काम किया, जिसके बाद उन्होंने 2016 में InCred Group की स्थापना की। साल 2023 में InCred Finance के unicorn बनने से पूरे ग्रुप की credibility और भी मज़बूत हुई, जिससे senior professionals और high-net-worth clients का भरोसा बढ़ा।


👥 700 से ज्यादा Relationship Managers

कंपनी के मुताबिक, InCred Wealth के पास इस समय 700 से ज्यादा relationship managers हैं, जो:

  • Family Offices
  • Ultra High Net Worth Individuals (UHNI)
  • Emerging affluent ग्राहकों

को सेवाएं दे रहे हैं।

यह बड़ी टीम InCred Wealth को ग्राहकों के साथ long-term और personalized relationships बनाने में मदद करती है।


🌍 Global और Private Market तक पहुंच

InCred Wealth के CEO Nitin Rao के अनुसार, कंपनी सिर्फ traditional advisory तक सीमित नहीं है।

उन्होंने Entrackr से बातचीत में कहा:

“हमने अपने clients के लिए global और private market opportunities तक पहुंच बढ़ाई है। इसमें late-stage private companies, overseas themes और alternative strategies शामिल हैं।”

यानी InCred Wealth अपने ग्राहकों को सिर्फ Indian markets तक सीमित नहीं रखता, बल्कि global investment ideas भी ऑफर करता है।


👔 CEO Nitin Rao का अनुभव

Nitin Rao 2020 में InCred Wealth की शुरुआत से ही कंपनी के साथ जुड़े हुए हैं। इससे पहले वे:

  • HDFC Bank में private banking franchise बना चुके हैं
  • Reliance Wealth Management का नेतृत्व भी कर चुके हैं

Rao का कहना है कि InCred Wealth को “ground up” approach के साथ बनाया गया है, ताकि global-quality investment ideas को Indian wealth management में लाया जा सके।


📊 Open Architecture और Alternatives पर फोकस

InCred Wealth का बिज़नेस मॉडल open-architecture पर आधारित है। इसका मतलब है कि कंपनी किसी एक product या fund house तक सीमित नहीं रहती।

कंपनी का खास फोकस है:

  • Private Equity
  • Private Credit
  • Market-linked Debentures (MLDs)
  • अन्य alternative investment products

इस मॉडल को सपोर्ट करता है कंपनी का structured products desk और InCred Group की अन्य verticals, जैसे:

  • Broking
  • Institutional Research
  • Investment Banking
  • Capital Markets

🤝 Client Needs के करीब रहने की रणनीति

InCred Wealth की एक और खासियत है उसकी team का अनुभव। कंपनी के relationship managers का median experience करीब 20 साल का है।

यह अनुभव उन्हें clients की ज़रूरतों को बेहतर समझने और बदलते market conditions के हिसाब से सलाह देने में मदद करता है।


🌐 Offshore बिज़नेस भी मज़बूत

InCred Wealth सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। कंपनी ने एक offshore platform भी खड़ा किया है, जिसका नाम है InCred Global Wealth

CEO Nitin Rao के मुताबिक:

“हम Singapore, Dubai और London में मौजूद teams के ज़रिए $3 बिलियन से ज्यादा के assets manage कर रहे हैं।”

इससे InCred Wealth को global investors और NRIs के बीच भी मजबूत पकड़ मिलती है।


🔮 आगे की राह

भारत में wealth creation तेज़ी से बढ़ रही है और इसके साथ ही professional wealth management की मांग भी। ऐसे माहौल में InCred Wealth का scale, experienced leadership और global outlook उसे एक मजबूत position में खड़ा करता है।

आने वाले वर्षों में कंपनी का फोकस संभवतः इन बातों पर रहेगा:

  • Alternative investments का विस्तार
  • Global markets में और गहराई
  • Technology-driven client experience
  • UHNI और family office segment में पकड़ मज़बूत करना

🧾 निष्कर्ष

भारत का private wealth management सेक्टर तेज़ी से बदल रहा है और InCred Wealth इस बदलाव का एक बड़ा चेहरा बनकर उभरा है। सिर्फ छह साल में $10 बिलियन AUM तक पहुंचना, मज़बूत leadership, अनुभवी team और global सोच—ये सभी फैक्टर InCred Wealth को इंडस्ट्री में अलग पहचान देते हैं।

अगर wealth management में scale + talent + execution की बात की जाए, तो InCred Wealth इस फॉर्मूले पर पूरी तरह फिट बैठता है।

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📱 PhonePe की ग्रोथ पर सवाल

phonePe

डिजिटल पेमेंट्स कंपनी PhonePe ने FY26 की पहली छमाही (H1 FY26) में 22% revenue growth दिखाई है। काग़ज़ों पर यह ग्रोथ मज़बूत लगती है, लेकिन जब कंपनी के Draft Red Herring Prospectus (DRHP) को ध्यान से देखा जाता है, तो एक अलग ही तस्वीर सामने आती है।

असल में, PhonePe की इस ग्रोथ का करीब 19% हिस्सा ऐसे revenue sources से आया है जो या तो अब बंद हो चुके हैं या फिर सरकारी incentives पर निर्भर हैं। यही वजह है कि IPO से पहले निवेशकों के लिए यह एक clear red flag माना जा रहा है।


📊 H1 FY26 में PhonePe का रेवेन्यू

DRHP के अनुसार, PhonePe ने सितंबर 2025 को खत्म हुई छह महीनों की अवधि में:

  • Revenue from operations: ₹3,918 करोड़

यह आंकड़ा पिछले साल की समान अवधि से ज़्यादा है, लेकिन असली सवाल यह है कि यह ग्रोथ किन स्रोतों से आई।


❌ किन रेवेन्यू सोर्स को हटाया गया

जब PhonePe के उन revenue streams को हटाया जाता है जो अब उसके core बिज़नेस का हिस्सा नहीं हैं, तो तस्वीर बदल जाती है।

निम्नलिखित तीन revenue sources को हटाया गया:

  • Rent और related payment services
  • Real Money Gaming (RMG)
  • Payment Infrastructure Development Fund (PIDF) incentives

इन तीनों को हटाने के बाद PhonePe का adjusted operating revenue घटकर ₹3,162 करोड़ रह जाता है।


💰 ₹756 करोड़ का फर्क कहां से आया

H1 FY26 में कुल ₹756 करोड़ का revenue इन non-core या policy-dependent sources से आया था:

  • ₹518.5 करोड़: Rent और related payment categories
  • ₹70.9 करोड़: Real Money Gaming (RMG)
  • ₹167 करोड़: PIDF incentives

इनमें से RMG और rent payments को कंपनी पहले ही regulatory दबाव के चलते या तो बंद कर चुकी है या काफी हद तक scale down कर चुकी है। वहीं PIDF एक सरकारी incentive scheme है, जो permanent income source नहीं माना जा सकता।


🚨 Core Payments बिज़नेस पर असर

इन adjustments के बाद PhonePe के core payments business की हालत कमजोर दिखाई देती है।

👤 Consumer Payments

  • Reported revenue: ₹2,200 करोड़
  • Adjusted revenue: ₹1,631 करोड़
  • गिरावट: 26%

Rent और gaming income हटने के बाद consumer payments से आने वाली कमाई में तेज़ गिरावट दिखती है।


🏪 Merchant Payments

  • Reported revenue: ₹1,206 करोड़
  • Adjusted revenue: ₹1,019 करोड़
  • गिरावट: लगभग 16%

यह गिरावट मुख्य रूप से PIDF incentives को हटाने की वजह से आई है।


🎮 Gaming और Rent का रोल

यह analysis साफ़ दिखाता है कि PhonePe की revenue growth में gaming और rent-related payments का बड़ा योगदान था। लेकिन चूंकि ये दोनों ही segments अब कंपनी के भविष्य के revenue profile का हिस्सा नहीं रहेंगे, इसलिए आगे की ग्रोथ पर सवाल उठते हैं।


🏦 Lending और Insurance ही राहत

एकमात्र segment जो इन adjustments से प्रभावित नहीं हुआ, वह है:

  • Lending और Insurance distribution revenue
  • Revenue: ₹513 करोड़

यह revenue पूरी तरह market-led है और policy incentives या बंद हो चुके बिज़नेस पर निर्भर नहीं है।

हालांकि, यहां भी चुनौतियां हैं:

  • Lending aggregation पर नए नियम
  • Growth की सीमित संभावनाएं
  • Insurance में अभी profitability दूर

Insurance को भविष्य का सबसे बड़ा opportunity माना जा रहा है, लेकिन वहां भी profits आने में समय लगेगा, क्योंकि कंपनियां अभी market share की लड़ाई में हैं।


🔴 नुकसान अब भी जारी

इन सभी adjustments के बावजूद PhonePe की bottom line में कोई सुधार नहीं होता।

  • Net loss (H1 FY26): ₹1,444.4 करोड़

यानी revenue growth दिखाने के बावजूद कंपनी अभी भी profitability से काफी दूर है।


📉 IPO से पहले क्यों अहम है यह विश्लेषण

DRHP में दिखाया गया 22% growth figure filing के लिहाज से ठीक हो सकता है, लेकिन जब discontinued और policy-driven income को हटाया जाता है, तो PhonePe की sustainable revenue base कमजोर नज़र आती है।

IPO से पहले यह distinction इसलिए भी ज़रूरी हो जाता है क्योंकि:

  • Valuation scrutiny तेज़ होगी
  • Regulatory जांच बढ़ेगी
  • Investors sustainable growth देखना चाहेंगे

🧠 निवेशकों के लिए संकेत

Walmart-backed PhonePe एक बड़ा और भरोसेमंद नाम है, लेकिन मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि:

  • Core payments बिज़नेस दबाव में है
  • Non-recurring income ने growth को inflate किया है
  • Profitability अब भी दूर है

📌 निष्कर्ष

PhonePe की H1 FY26 revenue growth पहली नज़र में मजबूत दिखती है, लेकिन DRHP के अंदर छुपे आंकड़े बताते हैं कि असल ग्रोथ उतनी मज़बूत नहीं है जितनी दिखाई जा रही है।

IPO से पहले निवेशकों के लिए यह समझना बेहद ज़रूरी है कि PhonePe की मौजूदा ग्रोथ का बड़ा हिस्सा policy incentives और बंद हो चुके बिज़नेस से आया है, जबकि core बिज़नेस में गिरावट देखने को मिल रही है।

आने वाले समय में PhonePe के लिए असली चुनौती होगी —
sustainable revenue growth और profitability हासिल करना

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🏠 Wakefit में नई CFO की एंट्री

Wakefit

होम और स्लीप सॉल्यूशंस कंपनी Wakefit Innovations Limited ने अपनी लीडरशिप टीम को और मज़बूत करते हुए Parul Gupta को कंपनी का नया Chief Financial Officer (CFO) नियुक्त किया है। यह जानकारी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में दाखिल की गई रेगुलेटरी फाइलिंग से सामने आई है।

Wakefit हाल ही में शेयर बाजार में लिस्ट हुई है और ऐसे समय में CFO की नियुक्ति को कंपनी के लिए एक अहम रणनीतिक कदम माना जा रहा है।


👩‍💼 Parul Gupta कौन हैं?

Parul Gupta के पास करीब 20 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर में Strategic Finance, Business Partnering, Financial Planning और Compliance जैसे अहम क्षेत्रों में काम किया है।

Wakefit से पहले Parul Gupta कई बड़ी कंपनियों में सीनियर लीडरशिप रोल निभा चुकी हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • Syngene International
  • Myntra
  • Jabong
  • Aircel
  • Airtel

इन कंपनियों में काम करते हुए उन्होंने बड़े स्केल के बिज़नेस, तेजी से बढ़ते स्टार्टअप्स और कॉर्पोरेट फाइनेंस स्ट्रक्चर को संभालने का अनुभव हासिल किया है।


🚀 Wakefit के लिए क्यों अहम है यह नियुक्ति

Wakefit इस समय IPO के बाद के फेज में है, जहां फाइनेंशियल डिसिप्लिन, इन्वेस्टर कम्युनिकेशन और ग्रोथ प्लानिंग बेहद ज़रूरी हो जाती है।

Parul Gupta की नियुक्ति से Wakefit को इन क्षेत्रों में मजबूती मिलने की उम्मीद है:

  • फाइनेंशियल प्लानिंग और कंट्रोल
  • रेगुलेटरी कंप्लायंस
  • ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी का बैलेंस
  • इन्वेस्टर रिलेशन मैनेजमेंट

कंपनी तेजी से स्केल कर रही है और ऐसे में एक अनुभवी CFO की भूमिका और भी अहम हो जाती है।


📊 Q3 FY26 में Wakefit का प्रदर्शन

Wakefit ने Q3 FY26 में अपने फाइनेंशियल नतीजे भी घोषित किए हैं, जो कंपनी की मज़बूत ग्रोथ की ओर इशारा करते हैं।

  • Revenue from Operations:
    Q3 FY26 में कंपनी का रेवेन्यू बढ़कर ₹421 करोड़ हो गया
    (Q3 FY25 में यह ₹385 करोड़ था)
  • यानी साल-दर-साल आधार पर लगभग 9% की ग्रोथ

यह दिखाता है कि मैट्रेस, फर्नीचर और होम सॉल्यूशंस की डिमांड लगातार बनी हुई है।


💰 मुनाफे में ज़बरदस्त सुधार

Wakefit के लिए सबसे पॉज़िटिव संकेत उसकी प्रॉफिटेबिलिटी रही।

  • Q2 FY26 में प्रॉफिट: ₹16 करोड़
  • Q3 FY26 में प्रॉफिट: ₹32 करोड़

यानि एक ही तिमाही में कंपनी का मुनाफा डबल हो गया।

यह बताता है कि Wakefit सिर्फ ग्रोथ ही नहीं, बल्कि कॉस्ट कंट्रोल और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर भी काम कर रही है।


🛏️ Wakefit का बिज़नेस मॉडल

2016 में स्थापित Wakefit एक Direct-to-Consumer (D2C) ब्रांड है। कंपनी के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में शामिल हैं:

  • मैट्रेस
  • पिलो और स्लीप एक्सेसरीज़
  • फर्नीचर
  • होम इम्प्रूवमेंट प्रोडक्ट्स

Wakefit ऑनलाइन चैनल के साथ-साथ ऑफलाइन एक्सपीरियंस सेंटर्स के ज़रिए भी ग्राहकों तक पहुंच बना रही है।


📉 IPO के बाद शेयर बाजार में प्रदर्शन

Wakefit ने हाल ही में शेयर बाजार में डेब्यू किया, लेकिन इसकी लिस्टिंग काफी शांत रही।

  • IPO Issue Price: ₹195
  • NSE पर लिस्टिंग: लगभग फ्लैट
  • BSE पर ओपनिंग: ₹194.10 (करीब 0.5% डिस्काउंट)

यानी लिस्टिंग के समय निवेशकों में ज्यादा उत्साह देखने को नहीं मिला।


📈 मौजूदा शेयर प्राइस और मार्केट कैप

हालांकि लिस्टिंग के बाद Wakefit के शेयर में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल रहा है।

  • Current Share Price: ₹199 (13:33 PM पर)
  • Market Capitalization: ₹6,249 करोड़
    (लगभग $689 मिलियन)

यह दिखाता है कि निवेशक कंपनी की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ स्टोरी पर नजर बनाए हुए हैं।


🔮 आगे की राह

Parul Gupta की CFO के रूप में नियुक्ति, बेहतर फाइनेंशियल प्रदर्शन और IPO के बाद की स्थिरता—ये सभी संकेत देते हैं कि Wakefit अब अगले ग्रोथ फेज की तैयारी में है।

आने वाले समय में कंपनी का फोकस हो सकता है:

  • प्रॉफिट मार्जिन बढ़ाने पर
  • ऑफलाइन और ऑनलाइन चैनल्स के बेहतर इंटीग्रेशन पर
  • इन्वेस्टर कॉन्फिडेंस मज़बूत करने पर

🧾 निष्कर्ष

Wakefit Innovations के लिए Parul Gupta की CFO के रूप में नियुक्ति एक स्ट्रैटेजिक मूव है। मजबूत तिमाही नतीजों और बेहतर प्रॉफिटेबिलिटी के साथ कंपनी यह संकेत दे रही है कि वह सिर्फ ग्रोथ नहीं, बल्कि सस्टेनेबल बिज़नेस बनाने पर भी फोकस कर रही है।

IPO के बाद का यह दौर Wakefit के लिए चुनौतीपूर्ण भी है और अवसरों से भरा भी—और नई CFO इसमें अहम भूमिका निभा सकती हैं।

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📊🚀 Groww सबसे आगे, सबसे ज्यादा नए यूज़र

Groww

भारत की retail broking industry में जनवरी 2026 के दौरान हल्की लेकिन सकारात्मक ग्रोथ देखने को मिली है। NSE के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी महीने में 3 लाख से ज्यादा नए active clients जुड़े, जिससे कुल active demat accounts की संख्या 4.48 करोड़ से बढ़कर 4.51 करोड़ तक पहुँच गई।

हालांकि overall industry growth सीमित रही, लेकिन इस दौरान Groww ने एक बार फिर बाजार में अपना दबदबा साबित किया। Groww ने अकेले ही बाकी पूरे industry से ज्यादा नए clients जोड़े, जबकि ICICI Securities ने Upstox को पीछे छोड़ते हुए चौथा स्थान हासिल कर लिया।


🚀 Groww बना Market Leader, Client Addition में सबसे आगे

NSE data के अनुसार, Groww ने जनवरी 2026 में 3.5 लाख से ज्यादा नए active demat accounts जोड़े। इसके साथ ही:

  • Total clients: लगभग 1.24 करोड़ (12.48 million)
  • Market share: 27.66%

Groww फिलहाल भारत का सबसे बड़ा retail broker बना हुआ है। आसान user interface, zero-brokerage delivery trades और mutual funds से लेकर stocks तक की all-in-one offering ने Groww को mass market में काफी लोकप्रिय बनाया है।

📈 Financial Performance भी मजबूत

Groww की parent company के financials भी इसकी growth story को support करते हैं:

  • Q3 FY26 Revenue: ₹1,216 करोड़ (YoY 25% growth)
  • Net Profit: ₹547 करोड़

📉 Stock Market Snapshot

  • Current share price: ₹165.4 (1:07 PM के आसपास)
  • Market capitalization: ₹1,02,080 करोड़
    • (करीब $11.3 billion)

🔄 Zerodha में गिरावट के बाद हल्की रिकवरी

देश के सबसे पुराने discount brokers में से एक Zerodha के लिए जनवरी का महीना राहत लेकर आया।

  • January additions: 10,000 नए clients
  • Total user base: 68.62 लाख
  • Market share: 15.21%

हालांकि यह संख्या बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन पिछले दो महीनों की तुलना में यह एक positive संकेत है। Zerodha ने:

  • November: करीब 1 लाख users गंवाए
  • December: 72,000 users की और गिरावट

Industry experts मानते हैं कि aggressive competitors और changing user preferences के चलते Zerodha की growth थोड़ी धीमी हुई है।


📉 Angel One और Upstox को झटका

👼 Angel One

  • Clients: 67.45 लाख
  • Market share: 14.95%
  • January loss: करीब 13,000 users

Angel One की market share में हल्की गिरावट दर्ज की गई है, हालांकि कंपनी अभी भी top brokers की लिस्ट में मजबूती से बनी हुई है।

📉 Upstox को सबसे बड़ा नुकसान

जनवरी में Upstox को सबसे बड़ा झटका लगा:

  • User loss: 41,000 से ज्यादा
  • Month-on-month decline: करीब 2%
  • Market share: गिरकर 4.51%

इस गिरावट के चलते Upstox पांचवें स्थान पर खिसक गया, और ICICI Securities ने इसे पीछे छोड़ दिया।


🏦 Traditional Brokers की स्थिर ग्रोथ

जहाँ नए-age brokers में volatility दिखी, वहीं कुछ traditional brokerage firms ने steady growth दर्ज की।

📌 Client Addition

  • ICICI Securities: +19,000 accounts
  • SBI Securities: +3,680 accounts
  • Kotak Securities: +4,725 accounts
  • Paytm Money: +14,000 accounts

ICICI Securities की यह growth खास तौर पर अहम रही, क्योंकि इसी के चलते उसने Upstox को पछाड़कर चौथा स्थान हासिल किया।

📉 Decline भी देखने को मिला

वहीं दूसरी ओर:

  • HDFC Securities
  • Kotak Securities
  • Motilal Oswal

इन ब्रोकर्स ने जनवरी में clients की संख्या में गिरावट रिपोर्ट की।


🌱 Emerging Brokers: Dhan और INDmoney की मजबूत पकड़

Emerging platforms में Dhan और INDmoney ने अच्छी growth दिखाई।

  • Dhan: +14,900 users
  • INDmoney: +3,860 users

🦄 Dhan की Unicorn Story

हाल ही में unicorn बने Dhan ने FY25 में शानदार financial performance दिखाई:

  • Revenue from operations: 2.3X से ज्यादा growth
  • Profit: 2.6X उछाल
  • Net profit: ₹400 करोड़ के पार

Low-cost trading, advanced analytics और pro-traders पर focus ने Dhan को तेजी से grow करने में मदद की है।


🧠 Industry Trend: Slow Growth लेकिन Competition तेज

जनवरी 2026 के आंकड़े यह दिखाते हैं कि:

  • Overall industry growth slow लेकिन stable है
  • User acquisition अब पहले जितना आसान नहीं रहा
  • Competition बेहद intense हो चुका है

अब brokers के लिए सिर्फ नए users जोड़ना ही नहीं, बल्कि existing users को retain करना, बेहतर product experience और value-added services देना ज्यादा जरूरी हो गया है।


🔮 आगे क्या?

Experts के मुताबिक, आने वाले महीनों में:

  • Market volatility
  • Regulatory changes
  • IPO और derivatives activity

Retail broking industry की growth को प्रभावित कर सकती है।


📌 निष्कर्ष

जनवरी 2026 में भारत की retail broking industry ने भले ही सीमित growth दर्ज की हो, लेकिन Groww ने market leadership को और मजबूत किया, जबकि Zerodha ने गिरावट के बाद हल्की वापसी की। Upstox और Angel One के लिए यह महीना चुनौतीपूर्ण रहा, वहीं ICICI Securities और Dhan जैसे players ने मौके का फायदा उठाया।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन से brokers सिर्फ scale नहीं, बल्कि sustainable और profitable growth हासिल कर पाते हैं।

Read more :🛏️ Wakefit Q3 FY26 Results

🛏️ Wakefit Q3 FY26 Results

Wakefit

Bengaluru-based home और sleep solutions कंपनी Wakefit ने भारतीय शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद अपने Q3 FY26 (अक्टूबर–दिसंबर 2025) के वित्तीय नतीजे घोषित कर दिए हैं। कंपनी के लिए यह तिमाही कई मायनों में अहम रही, क्योंकि IPO के बाद यह पहला पूरा क्वार्टर था।

Wakefit ने इस तिमाही में 9% revenue growth दर्ज की है, जबकि कंपनी ने ₹32–34 करोड़ के करीब मुनाफा कमाया है। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को नुकसान हुआ था, ऐसे में यह turnaround Wakefit के लिए एक मजबूत संकेत माना जा रहा है।


📊 Q3 FY26 में Revenue ₹421 करोड़ तक पहुँचा

NSE से प्राप्त financial statement के अनुसार, Wakefit की revenue from operations:

  • Q3 FY26: ₹421 करोड़
  • Q3 FY25: ₹385 करोड़

यानि साल-दर-साल आधार पर करीब 9% की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा, कंपनी को ₹11 करोड़ की other income भी हुई, जिससे:

  • Total income: ₹432 करोड़

तक पहुँच गया।

IPO के बाद Wakefit की financial stability और revenue consistency पर निवेशकों की खास नजर थी, और ये आंकड़े कंपनी के steady growth को दर्शाते हैं।


📈 9 महीनों में 18% की ग्रोथ

अगर पूरे साल के नजरिए से देखें, तो Wakefit का प्रदर्शन और भी मजबूत नजर आता है।

दिसंबर 2025 तक के 9 महीनों में:

  • Revenue: ₹1,145 करोड़
  • पिछले साल (9M FY25): ₹971 करोड़

यानि कंपनी ने 18% की growth दर्ज की है। D2C brand होने के बावजूद Wakefit का इतना मजबूत topline growth दिखाता है कि उसकी products की demand urban India में लगातार बनी हुई है।


🧾 Costs और Expenses का पूरा ब्रेकअप

Wakefit की profitability के पीछे costs पर tight control भी एक बड़ा कारण रहा है।

🔧 Cost of Material

  • Total cost का करीब 49%
  • Q3 FY26: ₹194.5 करोड़
  • Q3 FY25: ₹187 करोड़

यानी raw material cost में सिर्फ 4% की बढ़ोतरी हुई।

👥 Employee Benefit Expense

  • ₹43 करोड़ (Q3 FY26)

📉 Total Expense

  • Q3 FY26: ₹397 करोड़
  • Q3 FY25: ₹395 करोड़

कुल मिलाकर कंपनी का overall expense लगभग flat रहा, जबकि revenue बढ़ा — यही वजह है कि margins में बड़ा सुधार देखने को मिला।


💰 Loss से Profit तक का सफर

Wakefit के लिए सबसे बड़ी highlight रही इसकी profitability

  • Q3 FY25: ₹2.4 करोड़ का नुकसान
  • Q3 FY26: ₹32 करोड़ का मुनाफा

यानि एक साल में कंपनी ने strong turnaround दिखाया है।

🔁 Sequential Growth भी शानदार

  • Q2 FY26 Profit: ₹16 करोड़
  • Q3 FY26 Profit: ₹32 करोड़

Sequential basis पर Wakefit का profit double हुआ है, जो operational efficiency और scale के बेहतर इस्तेमाल को दर्शाता है।


🏠 Wakefit का बिजनेस मॉडल

Wakefit की स्थापना 2016 में हुई थी और यह एक direct-to-consumer (D2C) brand के तौर पर काम करती है।

कंपनी के प्रमुख product segments में शामिल हैं:

  • 🛏️ Mattresses
  • 💤 Pillows
  • 🪑 Furniture
  • 🏡 Home improvement products

Wakefit ने traditional retail के बजाय digital-first approach अपनाई, जिससे उसने pricing और customer experience पर बेहतर control बनाया।


📉 Stock Market में कैसा रहा Wakefit का प्रदर्शन?

Wakefit ने पिछली तिमाही में भारतीय stock exchanges पर debut किया था, लेकिन इसका listing performance थोड़ा muted रहा।

📌 IPO Details

  • Issue price: ₹195 प्रति शेयर
  • (IPO price band का upper end)

📉 Listing Day Performance

  • NSE: Flat से थोड़ा नीचे
  • BSE: ₹194.10
    • Issue price से करीब 0.5% discount

IPO के बाद stock में कोई तेज़ उछाल नहीं दिखा, लेकिन कंपनी का focus short-term stock movement के बजाय long-term fundamentals पर नजर आता है।


📊 Current Share Price और Market Cap

  • Current share price: ₹191
    (12:20 PM के आसपास)
  • Market capitalization: ₹6,249 करोड़
  • (करीब $689 मिलियन)

हालांकि शेयर अभी IPO price से नीचे ट्रेड कर रहा है, लेकिन मजबूत financial performance भविष्य में investor confidence को बेहतर कर सकता है।


🔍 आगे Wakefit से क्या उम्मीद?

Wakefit का Q3 FY26 performance दिखाता है कि:

  • Company revenue growth track पर है
  • Costs पर control बेहतर हुआ है
  • Profitability sustainable बनती जा रही है

IPO के बाद Wakefit से निवेशक अब:

  • Margin expansion
  • Consistent profitability
  • Offline + online expansion strategy

पर नजर रखेंगे।


🧠 निष्कर्ष

Wakefit ने Q3 FY26 में यह साफ कर दिया है कि वह सिर्फ growth नहीं, बल्कि profitable growth की दिशा में आगे बढ़ रही है। D2C space में जहां कई कंपनियाँ losses से जूझ रही हैं, वहीं Wakefit का profit में लौटना इसे एक strong listed consumer brand के तौर पर स्थापित करता है।

आने वाली तिमाहियों में यह देखना दिलचस्प होगा कि Wakefit अपने IPO के बाद investor expectations पर कितना खरा उतर पाती है।

Read more :🐶 Petcare Startup Supertails ने जुटाए $30 मिलियन,

🐶 Petcare Startup Supertails ने जुटाए $30 मिलियन,

Supertails

भारत के तेजी से बढ़ते petcare ecosystem में एक और बड़ी फंडिंग डील सामने आई है। Petcare startup Supertails ने अपने लेटेस्ट फंडिंग राउंड में $30 मिलियन (करीब ₹250 करोड़) जुटाए हैं। इस राउंड की अगुवाई Venturi Partners ने की है, जबकि इसमें Nippon India Alternative Investments, Titan Capital Winners Fund और मौजूदा निवेशक Fireside Ventures, RPSG Capital Ventures, Sauce VC और Saama Capital ने भी हिस्सा लिया है।

इस नए निवेश के साथ Supertails अब भारत के शहरी इलाकों में अपने petcare बिजनेस को और तेज़ी से स्केल करने की तैयारी में है।


💰 फंडिंग का इस्तेमाल कहाँ होगा?

Supertails के अनुसार, इस फंडिंग का इस्तेमाल कई अहम क्षेत्रों में किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं:

  • 🏥 Veterinary clinic network का विस्तार
  • 🏠 At-home petcare services को स्केल करना
  • 🚚 Fulfillment और logistics infrastructure को मजबूत करना
  • 📱 App और platform पर personalization बढ़ाना
  • 🌆 Urban India में तेजी से expansion

कंपनी का फोकस pet parents को end-to-end, seamless और भरोसेमंद petcare experience देने पर है।


🐾 Supertails क्या करता है?

Supertails की स्थापना 2021 में
Varun Sadana, Aman Tekriwal और Vineet Khanna द्वारा की गई थी।

यह एक full-stack digital petcare platform है, जो pet parents की लगभग हर जरूरत को कवर करता है। Supertails का mobile app pet owners को एक ही जगह पर कई सुविधाएं देता है:

  • 🥩 Pet food और treats
  • 🧸 Toys और accessories
  • 💊 Pet pharmacy products
  • 📦 Daily essentials

कंपनी खुद को सिर्फ एक e-commerce प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि pet parenting solutions provider के तौर पर पोजिशन कर रही है।


🩺 At-home Veterinary Services पर खास फोकस

Supertails ने at-home veterinary services भी शुरू की हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • Vet consultations
  • Vaccinations
  • Preventive healthcare
  • Routine check-ups

इसके अलावा, कंपनी ने देशभर में 100+ veterinarians का नेटवर्क बनाया है, जिसमें:

  • Specialist vets
  • Tele-vets
  • Preventive care experts

यह मॉडल खासतौर पर busy urban pet parents के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रहा है।


⚡ Quick Delivery और 30,000+ Products

Supertails ने Bengaluru में quick delivery service भी लॉन्च की है, जहाँ कंपनी:

  • ⏱️ Fast delivery
  • 📦 30,000 से ज्यादा petcare products
  • 💊 Pharmacy items

ऑफर करती है।

अब कंपनी इस rapid delivery model को अपने टॉप शहरों में विस्तार देने की योजना बना रही है।


🍖 Fresh Pet Meals और 500+ Brands

Services के अलावा Supertails ने अपने product portfolio को भी काफी diversify किया है। कंपनी ने:

  • 🥘 Fresh pet meals category में एंट्री की
  • 🛒 500+ petcare brands को अपने प्लेटफॉर्म पर onboard किया

इससे Supertails pet owners को ज्यादा choices और बेहतर quality products उपलब्ध करा पा रही है।


📊 अब तक की फंडिंग और Financial Performance

इस लेटेस्ट राउंड के बाद Supertails की कुल फंडिंग करीब $51 मिलियन हो गई है।

अब तक की फंडिंग डिटेल्स:

  • 💼 Seed round: $2.6 मिलियन
  • 🚀 Series A: $10 मिलियन
  • 📈 Series B: $15 मिलियन
  • 💰 Latest round: $30 मिलियन

💹 Revenue Growth

Supertails का revenue भी तेज़ी से बढ़ रहा है:

  • FY24: ₹64.63 करोड़
  • FY25: ₹108.26 करोड़

यानी साल-दर-साल revenue में मजबूत growth देखने को मिली है।

📉 Losses भी बढ़े

हालांकि expansion और investments की वजह से losses भी बढ़े हैं:

  • FY24 Loss: ₹41.13 करोड़
  • FY25 Loss: ₹52.47 करोड़

कंपनी फिलहाल growth-first strategy पर काम कर रही है।


🇮🇳 भारत में Petcare Market क्यों बन रहा है Hot?

भारत में pet ownership तेजी से बढ़ रही है, खासकर:

  • Urban millennials
  • Nuclear families
  • Work-from-home culture

Pet parents अब pets को family member की तरह treat कर रहे हैं, जिससे:

  • Premium pet food
  • Healthcare services
  • Grooming और accessories

की demand तेज़ी से बढ़ रही है।

Supertails इसी trend का फायदा उठाकर खुद को एक category-defining brand बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।


🔮 आगे क्या?

इस नए निवेश के साथ Supertails:

  • Clinics network को तेजी से बढ़ाएगा
  • At-home services को और cities में ले जाएगा
  • Tech और AI-based personalization पर फोकस करेगा
  • Petcare ecosystem में leadership position मजबूत करेगा

कुल मिलाकर, Supertails भारत के petcare startup space में एक strong long-term player के तौर पर उभरता दिख रहा है।

Read more :💎 Lab-Grown Diamond Startup Ethera ने जुटाए ₹25 करोड़,

💎 Lab-Grown Diamond Startup Ethera ने जुटाए ₹25 करोड़,

Ethera

भारत के तेजी से उभरते lab-grown diamond jewellery segment में काम कर रही startup Ethera ने ₹25 करोड़ (करीब $2.75 million) की fresh funding जुटाई है। इस investment को BlueStone ने lead किया है, जिसने कंपनी में अपना निवेश दोगुना कर दिया है। यह कदम Ethera के अगले growth phase और खासकर offline retail expansion को सपोर्ट करने के लिए उठाया गया है।

Industry experts के मुताबिक, यह funding इस बात का संकेत है कि बड़े jewellery brands अब lab-grown diamonds को serious long-term opportunity के रूप में देखने लगे हैं।


🏬 Offline Retail Expansion पर रहेगा फोकस

Ethera के अनुसार, इस नए capital का सबसे बड़ा हिस्सा:

  • 🏪 Offline retail footprint बढ़ाने
  • 📍 नए physical stores लॉन्च करने

पर खर्च किया जाएगा।

कंपनी ने बताया है कि आने वाले कुछ हफ्तों में कई नए stores खोलने की योजना है। फिलहाल Ethera की मौजूदगी Bengaluru और New Delhi जैसे प्रमुख metropolitan markets में है, और नए stores के साथ brand अपनी reach को और मजबूत करना चाहता है।

Jewellery जैसे high-involvement category में physical stores ग्राहकों के भरोसे और experience के लिए बेहद अहम माने जाते हैं।


🧠 Design, Technology और Brand Building में निवेश

Retail expansion के अलावा Ethera इस funding का इस्तेमाल:

  • 🎨 In-house design capabilities मजबूत करने
  • 💻 Technology systems upgrade करने
  • 📢 Brand building और marketing

पर भी करेगा।

कंपनी का मानना है कि long-term success के लिए सिर्फ store expansion काफी नहीं है, बल्कि:

  • Unique designs
  • Smooth omnichannel experience
  • Strong brand recall

भी उतने ही जरूरी हैं।


👥 Founders और Business Model

Ethera की स्थापना 2024 में Nitesh Jain और Sharad Arora ने की थी।
Startup lab-grown diamond jewellery के क्षेत्र में काम करता है और एक omnichannel business model फॉलो करता है।

फिलहाल:

  • Ethera के पास 5 retail stores हैं
  • जो Bengaluru और New Delhi में स्थित हैं
  • साथ ही एक digital platform भी है, जो पूरे भारत में customers को serve करता है

यह omnichannel approach ग्राहकों को:

  • Online discovery
  • Offline trial
  • और flexible buying options

देने में मदद करता है।


💍 Product Portfolio और Quality Standards

Ethera की jewellery खासतौर पर:

  • IGI-certified lab-grown diamonds
  • BIS-hallmarked gold

का इस्तेमाल करके बनाई जाती है।

Brand के product categories में शामिल हैं:

  • Earrings
  • Bracelets
  • Solitaires
  • Pendants
  • Necklaces

कंपनी का दावा है कि वह:

  • हर महीने 200 से ज्यादा नए designs लॉन्च करती है

यह तेजी से बदलते fashion trends और consumer preferences को ध्यान में रखते हुए किया जाता है।


🔍 Internal Quality Control पर जोर

Lab-grown diamonds के segment में trust और transparency बेहद अहम होती है। Ethera इसके लिए:

  • Strong internal quality control processes
  • Certification-based sourcing
  • Design-to-delivery checks

पर जोर देता है।

Industry analysts का कहना है कि जैसे-जैसे lab-grown diamonds mainstream हो रहे हैं, वैसे-वैसे customers quality और certification को लेकर ज्यादा aware हो रहे हैं।


📈 BlueStone का बढ़ता भरोसा

BlueStone द्वारा निवेश को दोगुना करना इस बात का संकेत है कि:

  • Ethera की execution capability
  • Brand positioning
  • और market potential

ने investor का भरोसा जीता है।

BlueStone खुद भारत का एक बड़ा omnichannel jewellery brand है, और उसका Ethera में निवेश lab-grown diamond segment की strategic importance को दिखाता है।


🌱 Lab-Grown Diamonds: Market क्यों तेजी से बढ़ रहा है?

भारत में lab-grown diamond jewellery market तेजी से grow कर रहा है। इसके पीछे कई वजहें हैं:

  • 💰 Natural diamonds की तुलना में lower price
  • 🌍 Environment-friendly production
  • 📜 Clear certification और traceability
  • 👩‍💼 Younger consumers की बदलती preferences

Younger buyers अब:

  • Sustainability
  • Value-for-money
  • Modern designs

को ज्यादा महत्व दे रहे हैं, और lab-grown diamonds इन सभी criteria पर fit बैठते हैं।


🏆 Competition और Differentiation

हालांकि lab-grown jewellery space में competition भी बढ़ रहा है। कई D2C और legacy brands इस segment में उतर चुके हैं।

Ethera खुद को अलग बनाने के लिए:

  • Rapid design refresh
  • Physical + digital presence
  • Strong quality assurance

पर फोकस कर रहा है।


🔮 आगे की रणनीति क्या हो सकती है?

Industry observers का मानना है कि Ethera आगे चलकर:

  • More Tier-1 और Tier-2 cities में stores
  • Bridal jewellery segment में entry
  • Private-label collections
  • Stronger online customization tools

पर काम कर सकता है।

अगर company अपनी expansion को disciplined तरीके से execute करती है, तो वह अगले कुछ वर्षों में lab-grown diamond jewellery space में एक मजबूत brand बन सकती है।


✍️ निष्कर्ष

₹25 करोड़ की fresh funding के साथ Ethera अपने अगले growth phase में प्रवेश कर चुका है। BlueStone का बढ़ता भरोसा, offline retail expansion पर स्पष्ट focus और मजबूत product pipeline इस बात का संकेत है कि startup lab-grown diamond jewellery market में long-term खिलाड़ी बनने की तैयारी कर रहा है।

अब देखना यह होगा कि Ethera:

  • तेजी से बढ़ते market का कितना फायदा उठा पाता है
  • और omnichannel model को कितनी कुशलता से scale करता है।

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