Ixigo में बेचा हिस्सा, ₹226 करोड़ से ज्यादा का मुनाफा,

Ixigo

भारतीय ट्रैवलटेक स्टार्टअप Ixigo की पेरेंट कंपनी Le Travenues Technology में अपने हिस्सेदारी को आंशिक रूप से बेचते हुए, वेंचर कैपिटल फर्म Elevation Capital ने ₹226 करोड़ से ज्यादा की कमाई की है।

📊 1 करोड़ से अधिक शेयरों की बिक्री

Elevation Capital ने लगभग 1.01 करोड़ शेयर ₹226 प्रति शेयर की औसत कीमत पर बेचे। इस सौदे के साथ ही कंपनी को इस निवेश पर 31.6 गुना रिटर्न (31.6X Return) मिला है, जो भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।

डील से पहले, Elevation Capital के पास Ixigo की कुल 9.04% हिस्सेदारी थी। लेटेस्ट बिक्री में उन्होंने 2.59% हिस्सेदारी बेची है, जिसके बाद अब उनके पास कंपनी की 6.45% हिस्सेदारी बची है।

📈 पिछले 3 महीनों में तीसरी आंशिक बिक्री

यह Elevation Capital की बीते तीन महीनों में तीसरी आंशिक बिक्री है। इससे पहले मई 2025 में कंपनी ने 21.5 लाख शेयर ₹38.3 करोड़ में बेचे थे और जून में 53.9 लाख शेयर ₹97.4 करोड़ में बेचे थे। इस नवीनतम सौदे के साथ अब तक की कुल secondary sale की कमाई ₹361 करोड़ से अधिक हो गई है।

🏦 Schroder Investment बना बड़ा निवेशक

Entrackr द्वारा समीक्षा किए गए एक अन्य स्टॉक एक्सचेंज डिस्क्लोजर के अनुसार, Schroder Investment Management ने ओपन मार्केट से 16.6 लाख अतिरिक्त शेयर खरीदे हैं। इस खरीद के बाद Schroder की Ixigo में हिस्सेदारी बढ़कर 5.176% हो गई है, जिससे वह कंपनी के एक प्रमुख संस्थागत निवेशक के रूप में उभरे हैं।

गौरतलब है कि Schroder ने Elevation की पिछली दोनों exits में भी भाग लिया था और उसकी लगातार हो रही खरीदारी से यह संकेत मिलता है कि वह कंपनी की दीर्घकालिक संभावनाओं पर भरोसा रखता है।

🧭 Elevation Capital: Ixigo के शुरुआती निवेशक

Elevation Capital, जिसे पहले SAIF Partners के नाम से जाना जाता था, Ixigo के शुरुआती संस्थागत निवेशकों में से एक रहा है। इस फंड ने अपने शुरुआती निवेश से multi-bagger returns हासिल किए हैं, जो दर्शाता है कि भारत के ट्रैवलटेक सेक्टर में रणनीतिक निवेश किस तरह बड़ा मुनाफा दिला सकता है।

🚀 IPO के बाद भी मजबूत प्रदर्शन

Ixigo ने अपने IPO के बाद से लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है। Q1 FY26 में कंपनी का राजस्व साल-दर-साल 72.5% बढ़कर ₹314 करोड़ हो गया, जबकि इसी अवधि में नेट प्रॉफिट 26.7% बढ़कर ₹19 करोड़ तक पहुंच गया।

लेख लिखे जाने तक (12:50 PM IST), कंपनी का शेयर ₹216.95 पर ट्रेड कर रहा है और इसका मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹8,467 करोड़ (~$1 बिलियन) तक पहुंच गया है।

🛫 Ixigo: भारत की ट्रैवलटेक लीडर

Ixigo भारत में ट्रैवल टिकट बुकिंग, ट्रेन, बस और फ्लाइट बुकिंग सेवाएं देने वाली प्रमुख कंपनियों में से एक है। IPO के बाद इसका निरंतर प्रदर्शन और संस्थागत निवेशकों की भागीदारी यह साबित करती है कि कंपनी का बिजनेस मॉडल और ग्रोथ रणनीति निवेशकों के लिए भरोसेमंद है।


📌 निष्कर्ष

Elevation Capital की आंशिक एक्सिट और ₹361 करोड़ से अधिक की सेकेंडरी सेल यह दिखाती है कि भारत का ट्रैवलटेक सेक्टर निवेशकों के लिए लगातार आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। साथ ही, Schroder जैसे बड़े संस्थागत निवेशकों की भागीदारी से Ixigo की दीर्घकालिक स्थिरता और ग्रोथ को और बल मिला है।

इस डील के साथ, एक तरफ Elevation को शानदार रिटर्न मिला है, वहीं दूसरी तरफ Ixigo को नए दीर्घकालिक निवेशकों का समर्थन भी प्राप्त हो रहा है – जो कंपनी को आने वाले समय में और मजबूती देगा।


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💰 SIMPL पर ईडी का शिकंजा: ₹913.76 करोड़ के FDI उल्लंघन में मामला दर्ज

SIMPL

🚨 भूमिका
भारत में फिनटेक और BNPL (Buy Now, Pay Later) सेक्टर की तेज़ी से बढ़ती लोकप्रियता के बीच एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate – ED) ने One Sigma Technologies Pvt. Ltd. के खिलाफ FEMA (Foreign Exchange Management Act) के तहत शिकायत दर्ज की है। यह वही कंपनी है जो पॉपुलर BNPL ऐप SIMPL का संचालन करती है।

ED का आरोप है कि SIMPL ने ₹913.76 करोड़ के विदेशी निवेश में अनियमितताएं की हैं।


📍simpl जांच की शुरुआत कैसे हुई?
बेंगलुरु स्थित ईडी जोनल ऑफिस ने बताया कि उन्हें भरोसेमंद इनपुट मिला था कि SIMPL ने अमेरिका से भारी मात्रा में विदेशी निवेश हासिल किया है, और यह भारत की FDI (Foreign Direct Investment) नीति का उल्लंघन करता है।

जांच के दौरान पता चला कि कंपनी ने—

  • ₹648.87 करोड़ रुपये FDI के रूप में हासिल किए
  • ₹264.88 करोड़ रुपये convertible notes के जरिए जुटाए
  • और इन दोनों को 100% automatic route के तहत दर्ज किया

🖥️ IT सेक्टर बताकर FDI का फायदा?
SIMPL ने FDI नियमों के तहत अपने व्यवसाय को “Information Technology and computer service activities” के रूप में वर्गीकृत किया था ताकि उसे सरकार की मंजूरी के बिना विदेशी निवेश हासिल करने की छूट मिल सके।

लेकिन ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि SIMPL का वास्तविक संचालन वित्तीय सेवाओं (financial activities) से जुड़ा है – जो कि सरकारी मंजूरी वाले मार्ग (Government Approval Route) में आते हैं, न कि automatic route में।


⚠️ Convertible Notes पर भी नियमों का उल्लंघन
भारत के FDI नियमों के अनुसार, यदि कोई स्टार्टअप financial services ऑफर करता है और वह विदेशी निवेशकों से convertible notes जारी कर फंड जुटाना चाहता है, तो इसके लिए सरकार की पूर्व मंजूरी ज़रूरी होती है।

ईडी का आरोप है कि SIMPL ने ऐसा कोई अप्रूवल भारत सरकार से नहीं लिया और सीधे विदेशी निवेश हासिल कर लिया।

इस तरह, कंपनी ने—

🔹 FDI नियमों
🔹 Convertible note जारी करने के नियमों

— दोनों का उल्लंघन किया।


📄 FEMA के तहत शिकायत दर्ज
अब ईडी ने SIMPL और उसके डायरेक्टर नित्यनंद शर्मा (Nithya Nand Sharm) के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कर दी है। यह मामला FEMA की धारा 13 (Section 13 of FEMA) के तहत भेजा गया है, जहां adjudicating authority तय करेगी कि कंपनी और निदेशक पर क्या दंड लगाया जाए या अन्य कोई कानूनी कार्रवाई हो।


🔎 पिछली फंडिंग और इतिहास
SIMPL ने नवंबर 2021 में अपनी Series B फंडिंग राउंड में $40 मिलियन (लगभग ₹300 करोड़) जुटाए थे। उस समय कंपनी तेजी से भारतीय डिजिटल क्रेडिट और BNPL मार्केट में पांव जमा रही थी।

अब यह कार्रवाई उसके उसी फंडिंग पैटर्न पर सवाल खड़ा करती है।


📊 ED की दूसरी बड़ी कार्रवाई – Myntra पर भी शिकंजा
इस कार्रवाई से ठीक एक दिन पहले ईडी ने Myntra Designs Pvt Ltd पर भी ₹1,654 करोड़ के FDI उल्लंघन का मामला दर्ज किया था। आरोप है कि Myntra और उसके सहयोगी संस्थान multi-brand retail trading (MBRT) कर रहे थे, लेकिन इसे wholesale cash & carry बिज़नेस के रूप में दिखाया जा रहा था — जो कि भारत के FDI नियमों के तहत प्रतिबंधित है।


📌 BNPL और फिनटेक सेक्टर को चेतावनी
SIMPL के खिलाफ हुई इस कार्रवाई से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत सरकार अब फिनटेक और BNPL ऐप्स के कामकाज और फंडिंग स्ट्रक्चर पर कड़ी निगरानी रख रही है।

भारत का BNPL सेक्टर ऐसे ऐप्स से भरा है जो टेक्नोलॉजी की आड़ में वित्तीय सेवाएं दे रहे हैं – और इनमें से कई कंपनियां FDI के नियमों का सही तरीके से पालन नहीं करतीं।


📢 विशेषज्ञों की राय
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि:

“यह कार्रवाई एक संकेत है कि अगर कोई स्टार्टअप ‘टेक कंपनी’ होने का दावा करके वित्तीय सेवाएं देगा और FDI नियमों को दरकिनार करेगा, तो वह मुश्किल में आ सकता है। BNPL मॉडल, खासकर Simpl जैसे ऐप्स को अब पारदर्शिता और अनुपालन पर ज़्यादा ध्यान देना होगा।”


🧠 निष्कर्ष
SIMPL पर ईडी की कार्रवाई एक माइलस्टोन केस है, जो भारत के स्टार्टअप और फिनटेक इकोसिस्टम को यह संदेश देता है कि FDI नियमों का पालन अनिवार्य है, चाहे कंपनी कितनी भी टेक्नोलॉजिकल क्यों न हो।

फिनटेक कंपनियों को अब अपने बिज़नेस मॉडल और फंडिंग स्ट्रक्चर को कानूनी और नियामकीय दिशानिर्देशों के अनुसार संचालित करना होगा, वरना उन्हें भी इसी तरह की जांच का सामना करना पड़ सकता है।


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Read More: Bharatsure ने जुटाए ₹6 करोड़, इंश्योरेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को देगी रफ्तार

🔒 Bharatsure ने जुटाए ₹6 करोड़, इंश्योरेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को देगी रफ्तार

Bharatsure

📍 परिचय
भारतीय इंश्योरटेक स्टार्टअप Bharatsure ने हाल ही में ₹6 करोड़ की फंडिंग जुटाई है। यह फंडिंग Inflection Point Ventures (IPV) के नेतृत्व में हुई, जिसमें Capital A और Atrium Angels ने भी भाग लिया। इस फंडिंग का मकसद कंपनी के इंश्योरेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को स्केल करना और भारत में embeddedgroup insurance को विस्तार देना है।


🛠️ क्या करता है Bharatsure?

Bharatsure एक Infrastructure-as-a-Service (IaaS) प्लेटफॉर्म है, जिसकी स्थापना Anuj Parekh और Sanil Basutkar ने की थी। यह प्लेटफॉर्म कंपनियों, SMEs (छोटे-मध्यम उद्योगों), और पार्टनर-आधारित इकोसिस्टम को सक्षम बनाता है कि वे अपने प्रोडक्ट्स और सर्विसेज में सीधे मॉड्यूलर व ग्रुप इंश्योरेंस को एम्बेड कर सकें।

इसका फोकस है —

  • स्केलेबल इंश्योरेंस इंफ्रास्ट्रक्चर देना
  • एम्प्लॉयी बेनिफिट्स और वेलनेस सॉल्यूशंस को ऑफर करना
  • रेवेन्यू कमाना पॉलिसी डिस्ट्रीब्यूशन, प्रीमियम कमीशन, और इंश्योरेंस टेक्नोलॉजी सेवाओं के ज़रिए

📊 अब तक का प्रदर्शन

  • Bharatsure देशभर में 1,500 से ज़्यादा स्टेशनों और 70,000 ड्राइवर्स के नेटवर्क के साथ 50 शहरों में सक्रिय है।
  • कंपनी ने अब तक 2 लाख से ज़्यादा लोगों को बीमा सुरक्षा दी है।
  • अब तक 10,000 से ज़्यादा क्लेम प्रोसेस कर चुकी है।
  • Google पर कंपनी को 4.9/5 की शानदार रेटिंग मिली है।
  • FY25 में रेवेन्यू डबल किया और CM3 स्तर पर ब्रेक-ईवन भी किया।
  • लक्ष्य है कि FY28 तक ₹100 करोड़ का रेवेन्यू पार किया जाए।

🤝 नई साझेदारी: Battery Smart के साथ इनोवेशन
हाल ही में Bharatsure ने Battery Smart के साथ साझेदारी की है, जो EV (इलेक्ट्रिक व्हीकल) के लिए बैटरी-स्वैपिंग नेटवर्क है। इस पार्टनरशिप के तहत Bharatsure ने एक प्राकृतिक आपदा बीमा स्कीम लॉन्च की है, जो स्टेशन पार्टनर्स को आग, बाढ़, भूकंप और व्यक्तिगत दुर्घटनाओं से सुरक्षा देती है।

यह कदम बताता है कि Bharatsure सिर्फ तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं दे रहा, बल्कि सामाजिक और व्यावसायिक सुरक्षा की ज़रूरतों को भी समझकर उन्हें संबोधित कर रहा है।


🚀 टेक्नोलॉजी के साथ नया युग
Bharatsure का फोकस सिर्फ बीमा को डिजिटल बनाना नहीं है, बल्कि वह बीमा को accessibility और affordability के लिहाज़ से भी नया आकार दे रहा है।

  • कंपनी का modular insurance model संस्थानों को उनकी ज़रूरत के अनुसार बीमा उत्पाद चुनने की सुविधा देता है।
  • यह विशेष रूप से उन संस्थाओं के लिए फायदेमंद है जो gig workers, delivery staff, EV नेटवर्क, या लो-इनकम कर्मचारियों के साथ काम करती हैं।

📈 प्रतिस्पर्धा और बाज़ार की स्थिति
Bharatsure भारतीय इंश्योरटेक स्पेस में SecureNow, BimaKavach, और Pazcare जैसे खिलाड़ियों से प्रतिस्पर्धा करता है।

लेकिन Bharatsure का IaaS मॉडल, उसका स्टेशन-आधारित नेटवर्क, और real-time embedded insurance capabilities इसे एक अलग मुकाम पर रखते हैं।


📣 संस्थापकों का बयान
कंपनी के को-फाउंडर Anuj Parekh ने कहा:

“हम इंश्योरेंस को उन लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं जो अब तक इसके दायरे से बाहर थे। हमारा लक्ष्य है कि हम हर संस्थान को अपना खुद का बीमा नेटवर्क देने में सक्षम बनाएं – वो भी बिना किसी भारी निवेश के।”


🌍 भविष्य की योजना
Bharatsure आने वाले समय में:

  • और शहरों में बीमा नेटवर्क विस्तार करेगा
  • Embedded insurance integration को आसान बनाएगा
  • EV और gig economy जैसे उभरते क्षेत्रों में गहराई से पैठ बनाएगा
  • FY28 तक ₹100 करोड़ का रेवेन्यू टारगेट हासिल करेगा

🧠 निष्कर्ष
Bharatsure जैसे स्टार्टअप भारत में इंश्योरेंस टेक्नोलॉजी को एक नया आकार दे रहे हैं। IaaS मॉडल, समुदाय-केंद्रित समाधान, और प्रभावशाली ग्रोथ इसे एक अगली पीढ़ी की इंश्योरटेक कंपनी बना रहे हैं।

इसकी सफलता यह दिखाती है कि बीमा सिर्फ एक उत्पाद नहीं, बल्कि एक बुनियादी ज़रूरत है – और टेक्नोलॉजी के ज़रिए इसे हर भारतीय तक पहुंचाया जा सकता है।


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Read more : Netrasemi ने जुटाए ₹107 करोड़,

💡 Netrasemi ने जुटाए ₹107 करोड़,

Netrasemi

केरल स्थित सेमीकंडक्टर स्टार्टअप Netrasemi ने अपने Series A फंडिंग राउंड में ₹107 करोड़ (लगभग $12.5 मिलियन) की राशि जुटाई है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Zoho Corporation और Unicorn India Ventures ने मिलकर किया।

इस निवेश से कंपनी भारत में सेमीकंडक्टर डिज़ाइन, Edge-AI चिप डेवेलपमेंट, और IoT डिवाइसेज़ के लिए स्मार्ट चिप सॉल्यूशन्स को आगे बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है।


📈 अब तक की फंडिंग हिस्ट्री

इससे पहले Netrasemi ने:

  • ₹10 करोड़ की प्री-सीरीज़ A फंडिंग Unicorn India Ventures से हासिल की थी
  • और शुरुआती Seed राउंड्स में ₹8.3 करोड़ की राशि जुटाई थी

अब ₹107 करोड़ की Series A फंडिंग के साथ कंपनी की R&D क्षमताएं, मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और मार्केटिंग योजनाएं और भी मजबूत होंगी।


🧠 क्या करता है Netrasemi?

2020 में ज्योतिस इंद्रभाई, श्रीजित वर्मा, और दीपा गीता द्वारा स्थापित, Netrasemi एक टेक्नोलॉजी स्टार्टअप है जो System-on-Chips (SoCs) डिजाइन करता है। ये चिप्स खास तौर पर स्मार्ट IoT प्रोडक्ट्स के लिए बनाए जाते हैं जो:

  • वीडियो प्रोसेसिंग जैसे कॉम्प्लेक्स वर्कलोड्स को हैंडल कर सकें
  • डिवाइस-लेवल पर AI एनालिटिक्स कर सकें
  • और क्लाउड या सर्वर पर डेटा भेजे बिना रीयल-टाइम निर्णय लेने में सक्षम हों

कंपनी का फोकस खास तौर पर उन तकनीकों पर है जो भारत जैसे देश में लोकल कंप्यूटिंग (Edge AI) को सशक्त बना सकें।


🧠 इनोवेशन की ताकत: Energy-efficient AI Cores

Netrasemi के चिप्स में कंपनी की खुद की बनाई गई Deep Neural AI Acceleration Core (NPU) का उपयोग होता है, जिससे ये डिवाइस-लेवल पर ही:

  • वीडियो एनालिटिक्स
  • ऑब्जेक्ट डिटेक्शन
  • थ्रेट अलर्ट
    — जैसे टास्क बड़ी आसानी से और कम ऊर्जा में पूरे कर पाते हैं।

यह तकनीक खास तौर पर उन IoT और सुरक्षा उपकरणों के लिए उपयोगी है जो सीमित संसाधनों के बावजूद तेज और सटीक AI एनालिसिस चाहते हैं।


📹 भारतीय बाजार के लिए CCTV AI चिप्स

पिछले 12 महीनों में Netrasemi ने:

  • दो Edge-AI चिप्स का विकास पूरा किया है जिनमें एडवांस वीडियो प्रोसेसिंग क्षमताएं हैं
  • भारतीय बाजार के लिए AI CCTV कैमरा चिप की डेवेलपमेंट शुरू की है
  • Evaluation Boards और Development Platforms के लिए कई पार्टनरशिप्स की हैं
  • वैश्विक कंपनियों के साथ MoUs साइन किए हैं, जिससे रिसर्च और सैंपल रिलीज को गति मिली है

🔧 SoC Tapeout और अगला लक्ष्य

कंपनी ने दो SoC प्रोडक्ट्स का Tapeout पूरा कर लिया है जो कि TSMC की 12nm तकनीक पर आधारित हैं। यह तकनीक दुनिया की सबसे प्रमुख चिपमेकिंग टेक्नोलॉजी में से एक मानी जाती है।

आने वाले 12–18 महीनों में कंपनी का लक्ष्य:

  • सभी तीन SoC परिवारों का फुल मास्क प्रोडक्शन शुरू करना
  • और नेक्स्ट-जेनरेशन Ultra High-Performance SoC के लिए R&D को तेज करना
  • ये नए चिप्स खासकर Edge Servers और Smart NVRs (Network Video Recorders) के लिए होंगे

🔌 भारतीय OEMs के लिए गेमचेंजर

Netrasemi का उद्देश्य भारतीय Original Equipment Manufacturers (OEMs) को उनके कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए लोकल, किफायती और हाई-पर्फॉर्मेंस चिप्स देना है। इस निवेश से कंपनी अब:

  • अपना उत्पादन आधार (Manufacturing Base) बढ़ाएगी
  • मार्केटिंग एक्सपेंशन करेगी
  • और तकनीकी विकास को गति देगी

इससे भारत में “Make in India” अभियान को भी नई ऊर्जा मिलेगी, खासकर सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में।


🌏 भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का उभार

Netrasemi का यह फंडरेज़ भारतीय सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए भी एक पॉजिटिव संकेत है। जहां दुनिया की नज़र अब चिप मैन्युफैक्चरिंग और Edge Computing पर है, वहीं भारत के भीतर ऐसी कंपनियों का उभार दिखाता है कि देश अब सिर्फ उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता बनने की ओर अग्रसर है।


📝 निष्कर्ष: भारत से दुनिया तक — Netrasemi का बड़ा विजन

Netrasemi न सिर्फ तकनीकी इनोवेशन में अग्रणी है, बल्कि यह दिखाता है कि छोटे शहरों और स्टार्टअप हब्स (जैसे केरल) से भी वैश्विक स्तर की टेक्नोलॉजी निकल सकती है। ₹107 करोड़ की इस नई फंडिंग से कंपनी अपने चिप्स को तेजी से बाजार में लाने, नए प्रोडक्ट लॉन्च करने, और भारतीय टेक इकोसिस्टम को मजबूत करने के रास्ते पर है।


🛠️ क्या भारत अगला सेमीकंडक्टर हब बन सकता है? Netrasemi जैसे स्टार्टअप्स इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए पूरी तैयारी में हैं।

Read more : LISSUN ने अमेरिका की Being Cares Inc का अधिग्रहण किया,

🧠 LISSUN ने अमेरिका की Being Cares Inc का अधिग्रहण किया,

LISSUN

भारत की प्रमुख मेंटल हेल्थ प्लेटफॉर्म LISSUN ने अमेरिका स्थित Being Cares Inc का अधिग्रहण कर लिया है। यह रणनीतिक अधिग्रहण LISSUN की उस बड़ी योजना का हिस्सा है, जिसके अंतर्गत वह भारत में AI-संचालित, बच्चे-केंद्रित व्यवहारिक विकास ईकोसिस्टम बनाना चाहता है।

🤝 क्या है यह अधिग्रहण?

इस डील के तहत LISSUN ने Being Cares Inc की पूरी तकनीक (technology stack) और टीम को अपने अधीन कर लिया है। अब Being के संस्थापक वरुण गांधी (CEO) और अभिषेक शर्मा (CTO) भी LISSUN की टीम का हिस्सा बन चुके हैं — वरुण को Chief Product Officer और अभिषेक को Chief Technology Officer बनाया गया है।


🌎 कौन है Being Cares Inc?

Being Cares Inc एक अमेरिका आधारित mental wellbeing स्टार्टअप है जो AI-संचालित टूल्स के ज़रिए 40 से अधिक मानसिक एवं व्यवहारिक स्थितियों की पहचान और समाधान प्रदान करता है।
इनमें शामिल हैं:

  • ऑटिज़्म (Autism)
  • ADHD (अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर)
  • स्पीच डिले (Speech Delay)
  • लर्निंग डिसऑर्डर्स (Learning Challenges)
  • और कई अन्य भावनात्मक स्थितियां

Being ने अब तक वैश्विक स्तर पर 10 लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं को सेवा प्रदान की है।


🧒 बच्चों की मानसिक सेहत के लिए मजबूत मॉडल

LISSUN पहले से ही भारत में बच्चों की मानसिक सेहत को लेकर काम कर रहा है, और इस अधिग्रहण से उसका मॉडल और मजबूत हो गया है। अब वह:

  • थेरैपिस्ट-नेतृत्व वाली केयर
  • और AI-पावर्ड हाइपर-पर्सनलाइज़्ड गाइडेंस
    — दोनों को एकीकृत कर रहा है।

LISSUN और Being की इस साझेदारी से अब ऐसे प्लेटफॉर्म का निर्माण होगा जो 2,500 से अधिक रियल-लाइफ कारणों और प्रभावों का विश्लेषण करके माता-पिता और बच्चों को व्यक्तिगत मानसिक स्वास्थ्य समाधान देगा।


📍 Sunshine by LISSUN: डिजिटल से लेकर क्लीनिक तक

LISSUN पहले से ही अपने Sunshine by LISSUN सेंटर के ज़रिए बच्चों के विकास पर ध्यान दे रहा है। अब Being के साथ साझेदारी से यह प्लेटफॉर्म एक “फुल-स्पेक्ट्रम केयर प्रोवाइडर” बन चुका है — जो डिजिटल गाइडेंस के साथ-साथ इन-पर्सन थेरैपी भी ऑफर करता है।

🌟 LISSUN का फोकस अब 3 स्तरों पर होगा:

  1. घर (Home): पेरेंट्स को रियल-टाइम गाइडेंस और एक्टिविटी सुझाव
  2. स्कूल (School): टीचर्स और काउंसलर्स के साथ समन्वय
  3. क्लीनिक (Clinical): पेशेवर थेरेपी और इंटरवेंशन

🧑‍💻 Ray: AI-संचालित वर्चुअल असिस्टेंट

LISSUN ने अपना खुद का AI वर्चुअल असिस्टेंट – Ray भी तैयार किया है। यह व्हाट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म पर करोड़ों माता-पिता को रीयल-टाइम डेवलपमेंटल इनसाइट्स, थेरेपी एक्टिविटी सुझाव और माइलस्टोन ट्रैकिंग जैसी सेवाएं देगा।

इस तकनीक की मदद से अब भारत के छोटे शहरों और कस्बों में भी बच्चों की मानसिक सेहत की देखभाल डिजिटल माध्यम से की जा सकेगी।


🚀 विस्तार की योजना: 20 से 200 Sunshine सेंटर

फिलहाल LISSUN के पास 20 ‘Sunshine by LISSUN’ सेंटर हैं, लेकिन कंपनी की योजना है कि अगले 2–4 वर्षों में इसे बढ़ाकर 200 सेंटर किया जाए। इसके साथ-साथ:

  • AI-संचालित वर्चुअल सपोर्ट का विस्तार
  • स्कूली साझेदारियों में वृद्धि
  • भारत में Tier-2 और Tier-3 शहरों तक पहुंच

LISSUN भारत में मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र में सुलभता (accessibility) और गुणवत्ता (quality) को साथ लेकर चलने वाला एक अनोखा प्लेटफॉर्म बन रहा है।


🧩 क्या बदलाव लाएगा यह अधिग्रहण?

🔄 तकनीकी मजबूती:

Being की टेक्नोलॉजी को अपनाकर अब LISSUN भारत के बच्चों के लिए डेटा-संचालित और जमीनी हकीकत पर आधारित समाधान देने की क्षमता रखता है।

🎯 अधिक पर्सनलाइज़्ड केयर:

हर बच्चे की ज़रूरत, उसके व्यवहार, समस्याओं और विकास स्तर के आधार पर अब कस्टमाइज्ड थेरेपी और गाइडेंस दी जा सकेगी।

🌐 फिजिकल + डिजिटल = Phygital नेटवर्क:

इन-पर्सन सेंटर + ऑनलाइन सपोर्ट मिलकर “Phygital” नेटवर्क बनाएंगे, जिससे देशभर के परिवारों को एक जैसा सपोर्ट मिलेगा।


📢 निष्कर्ष: भारत में बाल मानसिक स्वास्थ्य की दिशा में बड़ी छलांग

LISSUN द्वारा Being Cares Inc का अधिग्रहण भारत के लिए एक क्रांतिकारी कदम है। यह न केवल बच्चों की मानसिक और भावनात्मक ज़रूरतों को समझेगा, बल्कि उन्हें व्यवस्थित, वैज्ञानिक और व्यक्तिगत तरीके से संबोधित भी करेगा।

बदलते दौर में जब ऑटिज़्म, ADHD, लर्निंग डिसऑर्डर जैसी स्थितियां आम होती जा रही हैं, LISSUN जैसे प्लेटफॉर्म समाज के लिए एक समाधान-संचालित भविष्य की नींव रख रहे हैं।


🧒🏻📲 अगर आप भी अपने बच्चे की मानसिक सेहत को लेकर सजग हैं, तो LISSUN से जुड़ें — डिजिटल गाइडेंस और पेशेवर थेरैपी का भरोसेमंद मेल।

Read more : EVeez को मिला $5.4 मिलियन का निवेश,

⚡ EVeez को मिला $5.4 मिलियन का निवेश,

EVeez

गुरुग्राम स्थित इलेक्ट्रिक मोबिलिटी स्टार्टअप EVeez ने अपनी सीरीज-A फंडिंग राउंड में $5.4 मिलियन (लगभग ₹45 करोड़) जुटाए हैं। यह फंडिंग राउंड Michael & Susan Dell Foundation की अगुआई में पूरी हुई, जिसमें Caret Capital, ThinKuvate, Ev2 Ventures, Barbershop With Shantanu, SailThru Ventures और Ah Ventures Fund ने भी भाग लिया।

यह निवेश भारत के तेजी से बढ़ते गिग इकॉनमी वर्कर्स के लिए सस्ती और भरोसेमंद इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सब्सक्रिप्शन सर्विस को और विस्तार देने में मदद करेगा।


🔋 EVeez क्या है?

EVeez एक Electric Mobility-as-a-Service (eMaaS) प्लेटफॉर्म है, जिसकी शुरुआत 2020 में अभिषेक द्विवेदी और गौरव राठौर ने की थी। इस स्टार्टअप का मिशन है – “कम आय वर्ग के युवाओं को आजीविका से जोड़ने के लिए स्वच्छ, सुलभ और सस्ती मोबिलिटी मुहैया कराना।”

EVeez का बिज़नेस मॉडल एक सिंपल सब्सक्रिप्शन पर आधारित है, जहां सिर्फ ₹1,100 प्रति सप्ताह में यूज़र्स को इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मिलता है — वो भी मेंटेनेंस, इंश्योरेंस और बैटरी स्वैप सुविधा के साथ!


💼 गिग वर्कर्स के लिए वरदान

भारत में फूड डिलीवरी, क्यू-कॉमर्स, ई-कॉमर्स और राइड-हेलिंग जैसे सेक्टर में गिग वर्कर्स की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। लेकिन इन युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती है – वाहन खरीदने की लागत।

EVeez इस चुनौती का समाधान बनकर उभरा है:

  • ₹1,100 प्रति सप्ताह से शुरुआत
  • नो डाउन पेमेंट, नो लोन, नो ईएमआई
  • बीमा, बैटरी, मेंटेनेंस, ट्रेनिंग सभी शामिल

इस मॉडल से यूज़र बिना किसी आर्थिक बोझ के गिग वर्क में शामिल हो सकते हैं और स्थिर आय अर्जित कर सकते हैं।


🌱 ग्रीन मोबिलिटी और आखिरी मील तक पहुंच

EVeez के COO और को-फाउंडर अभिषेक द्विवेदी के अनुसार:

“भारत में आने वाले वर्षों में 2 करोड़ से अधिक गिग वर्कर्स होंगे। EVeez का लक्ष्य है उन्हें स्वच्छ मोबिलिटी प्रदान कर आखिरी मील तक हरित बदलाव लाना।”

उनके अनुसार, इलेक्ट्रिक व्हीकल सिर्फ पर्यावरण की मदद नहीं करते बल्कि गिग वर्कर्स को पेट्रोल खर्च, रखरखाव और रिपेयरिंग की चिंता से भी मुक्त करते हैं।


📊 आंकड़ों में EVeez की ग्रोथ

EVeez ने अब तक:

  • 15 शहरों में अपनी मौजूदगी बनाई है
  • 7,000 इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का ऑपरेशन
  • FY27 तक 30 शहरों और 50,000 व्हीकल्स तक पहुंचने का लक्ष्य
  • 40,000 नए गिग वर्कर्स को जोड़ने की योजना

इसके वर्तमान उपयोगकर्ताओं में:

  • 55% पहली बार गिग वर्क शुरू कर रहे हैं
  • 45% पारंपरिक पेट्रोल-व्हीकल्स से EV में शिफ्ट हुए हैं

💰 पहले भी जुटा चुके हैं फंड

इस सीरीज-A राउंड से पहले, EVeez ने ah! Ventures सहित अन्य निवेशकों से लगभग $994,000 (₹8 करोड़) जुटाए थे। अब नई फंडिंग से कंपनी को तकनीक में सुधार, सर्विस विस्तार और उपयोगकर्ताओं को बेहतर अनुभव देने में मदद मिलेगी।


🔁 EVeez का सर्विस मॉडल: किराया नहीं, समाधान है

EVeez का मॉडल सिर्फ “EV किराए पर दो और चलाओ” वाला नहीं है, बल्कि यह एक पूर्ण समाधान है:

  • सब्सक्रिप्शन के साथ मिलता है 24×7 मेंटेनेंस सपोर्ट
  • इंश्योरेंस और बैटरी स्वैपिंग सुविधा
  • EV ट्रेनिंग जिससे नया यूज़र जल्दी अपनाए

यह सब मिलकर गिग वर्कर की कमाई पर फोकस को बढ़ावा देता है, न कि तकनीकी झंझटों पर।


🌏 आने वाले समय में EVeez का असर

भारत में गिग इकॉनमी तेजी से बढ़ रही है, और साथ ही क्लीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की मांग भी। EVeez दोनों जरूरतों को एक साथ पूरा कर रहा है – रोजगार भी और हरित भविष्य भी

इसके सब्सक्रिप्शन मॉडल से आने वाले वर्षों में लाखों युवाओं को कम खर्च में आजीविका के साधन मिल सकते हैं, साथ ही देश के कार्बन फुटप्रिंट में भी कमी आएगी।


✨ निष्कर्ष: EVeez बदल रहा है ‘काम’ तक पहुंचने का तरीका

EVeez जैसे स्टार्टअप्स भारत के शहरी और निम्न-आय वर्ग के युवाओं को नई दिशा दिखा रहे हैं। अब जब गिग इकॉनमी का भविष्य उज्जवल है, EVeez जैसे प्लेटफॉर्म उसे और ज्यादा समावेशी, टिकाऊ और सुलभ बना रहे हैं।

नया फंडिंग राउंड न सिर्फ कंपनी को स्केल करने में मदद करेगा, बल्कि यह भी दिखाता है कि निवेशकों को EVeez के impact-driven मॉडल में भरोसा है।


📢 क्या आप या आपके जानने वाले कोई गिग वर्क शुरू करना चाहते हैं? EVeez के साथ शुरू करें – कम लागत में बड़ा बदलाव! ⚡🛵

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🎮 KickCash गेम खेलो और असली पैसे कमाओ!

KickCash

Gurugram आधारित मोबाइल गेमिंग स्टार्टअप KickCash ने $1 मिलियन (लगभग ₹8.3 करोड़) का वार्षिक रेवेन्यू पार कर लिया है। यह उपलब्धि कंपनी ने अपने “performance-first” user acquisition मॉडल के जरिए हासिल की है, जो मोबाइल गेम्स और ऐप्स की दुनिया में नए बदलाव ला रहा है।

🤑 “खेलो और कमाओ” मॉडल: गेमिंग का नया फॉर्मूला

KickCash खुद को “frequent flyer program for mobile gamers” के रूप में पेश कर रहा है, जहां खिलाड़ी जितना ज़्यादा समय गेम खेलने में बिताते हैं, उतना ही ज़्यादा असल नकद इनाम कमाते हैं।

कंपनी का फोकस सिर्फ खेलने की मस्ती पर नहीं है – यहां हर मिनट कीमती है, क्योंकि प्ले-टाइम को वास्तविक पैसों में बदला जा सकता है।

📲 केवल Android पर उपलब्ध

वर्तमान में KickCash केवल Android यूज़र्स के लिए उपलब्ध है। खिलाड़ी KickCash ऐप के माध्यम से पार्टनर गेम स्टूडियोज़ द्वारा चलाए जा रहे इन-गेम इवेंट्स और प्रमोशन में हिस्सा लेकर सीधे अपने वॉलेट में कैश रिवॉर्ड प्राप्त कर सकते हैं, जिसे बाद में डायरेक्ट बैंक में ट्रांसफर किया जा सकता है।

🔁 तीन-पक्षीय Flywheel मॉडल: सभी के लिए फायदेमंद

KickCash का बिज़नेस मॉडल तीन पक्षों को साथ लाता है –

  1. प्लेयर (खिलाड़ी)
  2. गेम डेवलपर्स
  3. KickCash प्लेटफॉर्म

🧑‍💻 खिलाड़ी के लिए:

  • वही गेम खेलो जो उन्हें पसंद हैं
  • और बदले में वास्तविक नकद इनाम पाओ

🎯 डेवलपर्स के लिए:

  • उन्हें केवल तभी पेमेंट करनी होती है जब खिलाड़ी गेम में असली इंटरैक्शन और इंगेजमेंट दिखाते हैं
  • इससे डेवलपर्स को बेहतर ROI (Return on Investment) और लॉन्ग-टर्म रिटेंशन मिलता है

💼 KickCash के लिए:

  • रेवेन्यू केवल वेरिफाइड परफॉर्मेंस से आता है
  • superficial metrics नहीं, बल्कि client outcomes से कंपनी की ग्रोथ जुड़ी होती है

📊 प्रभावशाली परफॉर्मेंस मेट्रिक्स

KickCash के अनुसार:

  • उनके प्लेटफॉर्म पर रन की गई कैंपेन ने Day-30 ROAS (Return on Ad Spend) में 52% की बढ़त दिखाई है
  • वहीं Day-21 retention में भी 24% सुधार देखा गया है

यह आंकड़े दिखाते हैं कि KickCash का मॉडल केवल नए यूज़र्स को लाने में नहीं, बल्कि उन्हें बनाए रखने और अधिक इंगेज करने में भी कारगर है।

🛡️ धोखाधड़ी-रहित और प्राइवेसी-कॉम्प्लायंट इंजन

मोबाइल एडवर्टाइजिंग में जहां ad fraud और privacy नियम चुनौती बन चुके हैं, वहीं KickCash ने एक ऐसा fraud-proof और privacy-compliant इंजन तैयार किया है जो “post-cookie world” में भी प्रभावी है।

🌍 ग्लोबल गेमिंग स्टूडियो का समर्थन

KickCash को कई प्रमुख ग्लोबल गेमिंग स्टूडियोज़ का समर्थन प्राप्त है, जिनमें शामिल हैं:

  • Playtika
  • Potato Play
  • Felicity Games
  • TripleDot Studios

इनकी मदद से KickCash एक विश्वसनीय गेम प्रमोशन प्लेटफॉर्म बन चुका है।

🇮🇳 भारत में सफलता के बाद अब वैश्विक विस्तार की तैयारी

भारत जैसे हाई-कॉम्पिटेटिव मार्केट में अपने मल्टी-रिवॉर्ड इंजन को सफलता पूर्वक टेस्ट करने के बाद, KickCash अब वैश्विक बाजारों में लॉन्च करने की योजना बना रहा है।

ये वो बाजार हैं जहां अब तक “फ्रिक्शन-फ्री कैशआउट मॉडल” की कमी है। KickCash की डेटा-ड्रिवन रणनीति इस विस्तार को प्रभावशाली ROI और यूज़र एक्सपीरियंस दोनों में बढ़त दिलाने का माध्यम बनेगी।

🗣️ फाउंडर की बात: अब स्केल की बारी

कंपनी के को-फाउंडर प्रत्युष निशांतकर ने कहा:

“हमारे लिए $1 मिलियन का ARR पार करना एक टर्निंग पॉइंट है – यह अब हमें स्केल के अगले फेज़ के लिए तैयार करता है।”

इस बयान से स्पष्ट है कि KickCash अब सिर्फ एक गेमिंग स्टार्टअप नहीं, बल्कि एक ग्लोबल परफॉर्मेंस प्लेयर बनने की राह पर है।


🔚 निष्कर्ष: गेमिंग में नया युग – समय = पैसा

KickCash भारतीय मोबाइल गेमिंग इंडस्ट्री में एक नई लहर लेकर आया है। जहां एक ओर यूज़र्स को खेलने के बदले वास्तविक इनाम मिल रहा है, वहीं डेवलपर्स को भी अपने खर्च का बेहतर रिटर्न मिल रहा है।

अब जबकि कंपनी वैश्विक विस्तार की योजना बना रही है, यह देखना दिलचस्प होगा कि KickCash दुनिया भर के गेमर्स को “प्ले टू अर्न” के इस ट्रेंड में कैसे जोड़ पाता है।


📌 क्या आप भी गेम खेलकर कमाना चाहते हैं? KickCash आज ही ट्राई करें और हर पल को पैसा बनाएं! 🕹️💸

Read more : Shadowfax IPO ₹2,000 करोड़ जुटाने की तैयारी में

🚚 Shadowfax IPO ₹2,000 करोड़ जुटाने की तैयारी में

Shadowfax

भारतीय लॉजिस्टिक्स सेक्टर में तेजी से उभरती कंपनी Shadowfax जल्द ही ₹2,000 करोड़ (लगभग $235 मिलियन) का Initial Public Offering (IPO) लाने जा रही है। यह जानकारी कंपनी द्वारा रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़ (RoC) में दायर फाइलिंग से सामने आई है।

💸 IPO का स्ट्रक्चर: Fresh Issue + OFS

Shadowfax का यह IPO दो हिस्सों में बंटा होगा:

  • ₹1,000 करोड़ का फ्रेश इश्यू, जो कंपनी में नए इक्विटी शेयर जारी करेगा।
  • ₹1,000 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS), जिसमें मौजूदा निवेशक अपने शेयर बेच सकेंगे।

इस सार्वजनिक निर्गम में ICICI Securities, JM Financial और Morgan Stanley मुख्य सलाहकार (lead managers) की भूमिका निभा रहे हैं।

📝 SEBI में गोपनीय रूट से DRHP दाखिल

Shadowfax ने हाल ही में सेबी (SEBI) के पास गोपनीय रूट के जरिए Draft Red Herring Prospectus (DRHP) फाइल किया है। यह तरीका उन स्टार्टअप्स के लिए होता है जो कम प्रोफाइल में IPO की प्रक्रिया शुरू करना चाहते हैं।

🧑‍💼 बोर्ड स्ट्रेंथनिंग: स्वतंत्र निदेशक और सह-संस्थापकों की नियुक्ति

IPO की तैयारी के बीच Shadowfax ने अपने बोर्ड को भी मज़बूत किया है। सह-संस्थापक गौरव जैठलिया को Whole-time Director के रूप में नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, नियामक आवश्यकताओं के तहत चार नए स्वतंत्र निदेशकों (Independent Directors) की भी नियुक्ति की गई है:

  • बिजू कुरियन
  • रुचिरा शुक्ला
  • पिरोजशाह सरकार
  • दिनकर गुप्ता

इन नियुक्तियों से कंपनी को बेहतर गवर्नेंस और IPO के बाद की रणनीतियों में सहायता मिलने की उम्मीद है।

📊 वैल्यूएशन: ₹5,981 करोड़ से ₹8,500 करोड़ की छलांग!

Shadowfax की मौजूदा वैल्यूएशन लगभग ₹5,981 करोड़ ($712 मिलियन) है। यह वैल्यूएशन कंपनी को फरवरी 2025 में Mirae Asset और Nokia Growth Partners से मिले $16.8 मिलियन के सीरीज़ F फंडिंग के बाद मिली थी।

कंपनी का लक्ष्य IPO के बाद अपनी वैल्यूएशन को ₹8,500 करोड़ तक ले जाने का है।

🏢 कंपनी प्रोफाइल: Shadowfax क्या करता है?

2015 में अभिषेक बंसल, वैभव खंडेलवाल, प्रहर्ष चंद्रा और गौरव जैठलिया द्वारा स्थापित Shadowfax, एक Bengaluru-स्थित लॉजिस्टिक्स स्टार्टअप है। कंपनी खासतौर पर ई-कॉमर्स, हाइपरलोकल डिलीवरी, और लास्ट माइल लॉजिस्टिक्स पर फोकस करती है।

🔗 Shadowfax की खासियतें:

  • 1.25 लाख से अधिक मंथली एक्टिव डिलीवरी पार्टनर्स का नेटवर्क
  • ग्रोसरी, फूड डिलीवरी, और मेडिसिन डिलीवरी जैसे सेगमेंट में सेवाएं
  • बेंगलुरु से ऑपरेट होती है लेकिन पूरे भारत में सेवा उपलब्ध

📈 फंडिंग हिस्ट्री और मुख्य निवेशक

TheKredible के आंकड़ों के अनुसार, Shadowfax ने अब तक कुल $246 मिलियन की फंडिंग जुटाई है। इसके कुछ प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:

  • Eight Roads Ventures – सबसे बड़ा बाहरी शेयरधारक
  • Flipkart
  • NewQuest Asia
  • Nokia Growth Partners

इन निवेशकों के समर्थन ने Shadowfax को भारत के लॉजिस्टिक्स सेक्टर में एक मज़बूत ब्रांड बनने में मदद की है।

📉 वित्तीय प्रदर्शन: FY24 में मुनाफा नहीं, लेकिन घाटा हुआ कम

हालांकि कंपनी का FY25 का डेटा अब तक सामने नहीं आया है, लेकिन FY24 के आंकड़े काफी प्रोत्साहित करने वाले हैं:

  • कुल राजस्व ₹1,885 करोड़ – साल दर साल 33.2% की वृद्धि
  • घाटा सिर्फ ₹11.8 करोड़, जो FY23 के ₹142 करोड़ के नुकसान से 91% की गिरावट है

यह दर्शाता है कि Shadowfax न सिर्फ राजस्व बढ़ा रहा है, बल्कि धीरे-धीरे लाभप्रदता (profitability) की ओर भी बढ़ रहा है।

📦 लॉजिस्टिक्स सेक्टर में IPO की बाढ़?

भारत में लॉजिस्टिक्स सेक्टर तेजी से टेक्नोलॉजी-ड्रिवन बन रहा है। Shadowfax का IPO ऐसे समय में आ रहा है जब Delhivery, Ecom Express जैसी कंपनियां भी बाजार में मजबूत स्थिति बना चुकी हैं। इस IPO से Shadowfax को अपने नेटवर्क विस्तार और टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन में मदद मिलेगी।


🔚 निष्कर्ष: Shadowfax का IPO क्यों महत्वपूर्ण है?

Shadowfax का आगामी IPO भारत के लॉजिस्टिक्स और स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है। Flipkart जैसी बड़ी कंपनी का समर्थन, मजबूत वित्तीय ग्रोथ, और लागत में कटौती के प्रयास इसे निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बना सकते हैं।

जैसे-जैसे कंपनी शेयर बाजार में प्रवेश करेगी, इसकी सफलता आने वाले समय में भारत के अन्य लॉजिस्टिक्स स्टार्टअप्स को भी प्रेरित कर सकती है।


📢 क्या आप Shadowfax के IPO में निवेश करने की सोच रहे हैं? यह सही समय हो सकता है लॉजिस्टिक्स फ्यूचर का हिस्सा बनने का!

Read more: iTuring.ai ने जुटाए $5 मिलियन, BFSI सेक्टर में AI क्रांति लाने की तैयारी

💰 iTuring.ai ने जुटाए $5 मिलियन, BFSI सेक्टर में AI क्रांति लाने की तैयारी

iTuring.ai

🧠 BFSI सेक्टर के लिए बना AI प्लेटफॉर्म

iTuring.ai, एक एंटरप्राइज-ग्रेड AI/ML प्लेटफॉर्म, जो खासतौर पर बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (BFSI) सेक्टर के लिए डिज़ाइन किया गया है, ने Series A फंडिंग राउंड में $5 मिलियन (लगभग ₹42 करोड़) की पूंजी जुटाई है।

इस राउंड का नेतृत्व Dallas Venture Capital (DVC) और Mela Ventures ने किया। इससे पहले इसी राउंड में कंपनी ने $1.19 मिलियन जुटाए थे, जिसमें SenseAI, Pentathlon Ventures और Ghosal Ventures जैसे निवेशकों ने भाग लिया था।


🚀 Zero-Code प्लेटफॉर्म के विस्तार पर जोर

iTuring.ai इस फंडिंग का इस्तेमाल अपने zero-code प्लेटफॉर्म को तेजी से बाजार में उतारने के लिए करेगी। यह प्लेटफॉर्म बैंकों और बीमा कंपनियों को AI और ML मॉडल बनाने, तैनात करने और प्रबंधित करने की सुविधा देता है — वो भी बिना कोड लिखे

कंपनी के सह-संस्थापक और सीईओ सुमन सिंह ने बताया:

“हमारा विज़न शुरू से ही यह रहा है कि हम फाइनेंशियल संस्थानों को पारदर्शी, उत्तरदायी और ऑडिट-रेडी AI प्लेटफॉर्म दें, जो पूरे मॉडल लाइफसायकल को ऑटोमेट कर सके।”


🧩 iTuring.ai कैसे काम करता है?

2018 में सुमन सिंह, अमित कुमार, मोहम्मद नवाज और श्रीवलसन पोन्नचथ द्वारा स्थापित, iTuring.ai एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो AI मॉडल डेवलपमेंट के पूरे चक्र को ऑटोमेट करता है।

इसमें शामिल हैं:

  • ✅ डेटा तैयारी (Data Preparation)
  • ✅ फीचर इंजीनियरिंग
  • ✅ मॉडल बिल्डिंग
  • ✅ मॉडल तैनाती (Deployment)
  • ✅ निरंतर निगरानी (Monitoring & Governance)

सभी प्रक्रियाएं एक एकीकृत वातावरण (Unified Platform) में होती हैं, जो BFSI सेक्टर के रेगुलेटरी और ऑडिट मानकों को पूरा करती हैं।


🌎 भारत से अमेरिका तक iTuring.ai का विस्तार

iTuring.ai की सेवाएं भारत, दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका तक फैली हुई हैं। अमेरिका में कंपनी ने एक वैश्विक पेमेंट प्लेटफॉर्म के साथ साझेदारी की है, जिससे उस प्लेटफॉर्म को ग्राहक राजस्व बढ़ाने और लागत घटाने में मदद मिली है।


📈 असरदार परिणाम और तेज़ डिलीवरी

कंपनी का दावा है कि उसके ग्राहकों को निम्नलिखित प्रमुख लाभ हुए हैं:

  • 🔧 प्रोजेक्ट डिलीवरी की स्पीड में बढ़ोतरी
  • 🧑‍💻 मैन्युअल प्रयासों में भारी कटौती
  • 📊 AI मॉडल की भविष्यवाणी क्षमता में सुधार

BFSI सेक्टर में जहां डाटा सेंसिटिव होता है और रेगुलेशन सख्त, वहां इस तरह का प्लेटफॉर्म गेम-चेंजर साबित हो सकता है।


💸 निवेशकों का भरोसा

iTuring.ai को DVC, Mela Ventures, SenseAI, Pentathlon Ventures और Ghosal Ventures जैसे प्रमुख निवेशकों का समर्थन मिला है। इस निवेश से साफ है कि मार्केट को iTuring की तकनीक पर भरोसा है।

इन निवेशकों का कहना है कि iTuring BFSI सेक्टर की एक गंभीर समस्या का हल लेकर आया है, और इसकी टेक्नोलॉजी में स्केलेबिलिटी और स्थायित्व है।


🔍 क्या है कंपनी का अगला कदम?

फंडिंग मिलने के बाद, iTuring.ai अब निम्नलिखित दिशा में आगे बढ़ेगा:

  1. 🌐 प्लेटफॉर्म का ग्लोबल विस्तार
  2. ⚙️ Zero-Code टेक्नोलॉजी को और बेहतर बनाना
  3. 🛡️ AI गवर्नेंस और पारदर्शिता में नए मानक स्थापित करना

कंपनी का फोकस रहेगा अपने प्लेटफॉर्म को ऐसे टूल में बदलना जो पूरी इंडस्ट्री के लिए AI का लोकतंत्रीकरण कर सके।


🧾 निष्कर्ष: भारत से निकला AI समाधान, जो वैश्विक हो रहा है

iTuring.ai यह दिखाता है कि भारत से निकला स्टार्टअप न केवल इनोवेशन में आगे है, बल्कि वह BFSI जैसे जटिल सेक्टर के लिए ऑडिट-रेडी, स्केलेबल और AI-फर्स्ट समाधान भी प्रदान कर सकता है।

➡️ आने वाले समय में, जब AI की भूमिका और बढ़ेगी, तब iTuring जैसे प्लेटफॉर्म सबसे आगे रहेंगे।

📌 “जहां कोड की जरूरत नहीं, वहां iTuring है — BFSI सेक्टर के लिए AI का भरोसेमंद साथी।”


Read more : बातचीत को नया आयाम देने वाली स्टार्टअप Gupshup ने जुटाए $60 मिलियन,

💬 बातचीत को नया आयाम देने वाली स्टार्टअप Gupshup ने जुटाए $60 मिलियन,

Gupshup

📢 परिचय:
कन्वर्सेशनल AI प्लेटफॉर्म Gupshup ने अपने ताज़ा फंडिंग राउंड में $60 मिलियन (लगभग ₹500 करोड़) से अधिक की राशि इक्विटी और डेब्ट के रूप में जुटाई है। यह निवेश प्रमुख निवेशकों Globespan Capital Partners और EvolutionX Debt Capital द्वारा किया गया है।

यह फंडिंग Gupshup के लिए बीते चार वर्षों में पहला बड़ा निवेश है और यह ऐसे समय पर आया है जब कंपनी 18-24 महीनों में IPO (Initial Public Offering) लाने की योजना बना रही है। कंपनी इसके साथ ही अपने मुख्यालय को अमेरिका से भारत स्थानांतरित करने की संभावनाएं भी तलाश रही है।


🚀 फंडिंग से मिलेगा विस्तार को बल
Gupshup इस निवेश का उपयोग निम्नलिखित कार्यों के लिए करेगा:

  • अपने AI एजेंट्स को बेहतर बनाने और स्केल करने के लिए
  • भारत, मिडल ईस्ट, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका जैसे तेज़ी से बढ़ते बाजारों में उपस्थिति मज़बूत करने के लिए
  • अपने गो-टू-मार्केट रणनीति को तेज़ी से लागू करने के लिए

🤖 Gupshup क्या करता है?
Gupshup एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो कंपनियों को बातचीत आधारित मार्केटिंग, सेल्स और कस्टमर सपोर्ट देने में सक्षम बनाता है। इसके AI-पावर्ड टूल्स ब्रांड्स को ग्राहकों के साथ पर्सनलाइज्ड तरीके से जुड़ने में मदद करते हैं — वो भी मैसेजिंग ऐप्स और वॉइस इंटरफेस के ज़रिए।

प्रमुख फीचर्स:

  • AI Agents
  • Campaign Manager
  • Click-to-Chat Ads
  • AI CoPilot
  • Agent Assist

कंपनी के अनुसार, Gupshup हर साल 120 अरब से ज़्यादा मैसेज 130 देशों में 50,000 से अधिक क्लाइंट्स के लिए भेजता है।


🦄 यूनिकॉर्न बनने से IPO तक का सफर
Gupshup अप्रैल 2021 में तब यूनिकॉर्न बना जब उसे Tiger Global से $100 मिलियन का निवेश मिला। उसी साल कंपनी ने कुल $240 मिलियन जुटाए और इसके बाद Knowlarity, Active.Ai और Onedirect जैसी कंपनियों का अधिग्रहण भी किया।

हालाँकि, 2024 में कंपनी को अपने संचालन को सरल बनाने के लिए 300 कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ी। यह निर्णय तेज़ विकास के बाद लाभ कमाने की दिशा में उठाया गया कदम बताया गया।


📊 कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन
Gupshup ने FY23 (2022-23) में:

  • ₹1,619 करोड़ का राजस्व अर्जित किया
  • ₹49 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया

हालांकि FY24 और FY25 के आंकड़े सार्वजनिक नहीं हैं, लेकिन माना जा रहा है कि FY24 में कंपनी ने करीब $300 मिलियन (₹2,500 करोड़) की कमाई की है।


🏆 प्रतिस्पर्धा और बाजार स्थिति
Gupshup भारत में Freshworks का Freshchat, WATI और Zoho SalesIQ जैसे खिलाड़ियों से प्रतिस्पर्धा करता है। हालांकि, इसके पास AI एजेंट्स और मैसेजिंग आधारित समाधान के क्षेत्र में मजबूत पकड़ है, जिससे यह Conversational AI और CPaaS क्षेत्र में प्रमुख खिलाड़ी बन गया है।


📈 भविष्य की योजना और रणनीति
Gupshup के पास अब नई फंडिंग के जरिए:

  • तकनीकी नवाचार को और तेज़ करने का अवसर है
  • नए बाज़ारों में गहराई से प्रवेश करने की क्षमता है
  • और सबसे अहम, IPO के लिए तैयार होने का रास्ता भी साफ हो गया है

कंपनी के संभावित IPO से भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक नई उम्मीद और विश्वास का संचार होगा, खासतौर पर AI और क्लाउड कम्युनिकेशन से जुड़े क्षेत्रों में।


📝 निष्कर्ष:
Gupshup की यह ताज़ा फंडिंग भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक और सकारात्मक संकेत है कि घरेलू कंपनियां अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार हैं। AI, डिजिटल कम्युनिकेशन और इंटरफेस डिजाइन में Gupshup का सफर, आने वाले IPO के साथ एक नया मोड़ ले सकता है — जो भारतीय टेक इंडस्ट्री को और मजबूती देगा।

📌 “बातचीत अब सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं रही, यह अब एक कारोबार बन चुकी है — Gupshup इसका जीता-जागता उदाहरण है।”

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