⚡ Ampere Vehicles की वापसी के संकेत,

Ampere

भारत की electric vehicle (EV) इंडस्ट्री में काम करने वाली Ampere Vehicles ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में recovery के साफ संकेत दिए हैं। FY24 में जहां कंपनी का revenue करीब 46% तक गिर गया था, वहीं FY25 में कंपनी ने single-digit growth दर्ज की है और साथ ही अपने losses को भी काफी हद तक कम किया है

Ampere, जो कि Greaves Electric Mobility के अंतर्गत आने वाला एक प्रमुख EV brand है, मुख्य रूप से electric scooters और electric three-wheelers का निर्माण करती है। FY25 के financial results से यह साफ है कि कंपनी ने operational efficiency सुधारने और खर्चों को control करने की दिशा में कदम उठाए हैं।


📊 FY25 में Revenue में सुधार

Registrar of Companies (RoC) से प्राप्त financial statements के अनुसार, Ampere की operating revenue FY25 में 8% बढ़कर Rs 659 crore पहुंच गई, जो FY24 में Rs 612 crore थी।

कंपनी की पूरी कमाई उसके EV products की बिक्री से ही आती है। अगर इसमें Rs 16 crore की other income को जोड़ दिया जाए, तो Ampere की total income FY25 में Rs 675 crore रही, जबकि FY24 में यह Rs 641 crore थी।

हालांकि growth बहुत तेज नहीं रही, लेकिन पिछले साल की भारी गिरावट के बाद यह आंकड़ा कंपनी के लिए एक positive turnaround signal माना जा रहा है।


🏭 Ampere का Business Model

Ampere Vehicles, Greaves Electric Mobility की एक प्रमुख subsidiary है और यह mass-market electric mobility पर फोकस करती है। कंपनी के electric scooters खासतौर पर affordable pricing, urban commuting और last-mile connectivity को ध्यान में रखकर डिजाइन किए जाते हैं।

इसके अलावा Ampere electric three-wheelers भी बनाती है, जो commercial और logistics use cases में इस्तेमाल किए जाते हैं।


💸 Expenses में क्या बदला?

FY25 में Ampere के खर्चों (expenses) में हल्की बढ़ोतरी देखने को मिली, लेकिन cost structure में कुछ अहम बदलाव भी हुए।

🔧 Raw Material Cost

  • कुल expenses का 64% हिस्सा material cost का रहा
  • यह खर्च FY25 में 12% बढ़कर Rs 589 crore हो गया
  • FY24 में यह आंकड़ा Rs 527 crore था

👨‍💼 Employee Cost

  • Employee benefit expenses में 22% की गिरावट
  • FY25 में यह घटकर Rs 79 crore रह गया

📢 Marketing और Advertising

  • Advertising और promotional expenses में 30% की बढ़ोतरी
  • FY25 में यह खर्च Rs 43 crore रहा

🏗 Depreciation और Other Costs

  • Depreciation cost में 41% की तेज बढ़ोतरी, जो Rs 45 crore तक पहुंच गई
  • Warranty claims, finance cost और अन्य overheads मिलाकर Rs 205 crore का अतिरिक्त खर्च हुआ

➡️ कुल मिलाकर, Ampere का total expense FY25 में 7% बढ़कर Rs 918 crore हो गया, जो FY24 में Rs 857 crore था।


📉 Losses में 65% की बड़ी कटौती

FY25 की सबसे बड़ी positive highlight रही losses में भारी गिरावट

  • FY24 में Ampere का net loss था Rs 691.5 crore
  • FY25 में यह घटकर Rs 240 crore रह गया
  • यानी करीब 65% की loss reduction

इसके साथ ही कंपनी के key profitability indicators में भी सुधार देखने को मिला:

  • ROCE सुधरकर -85.27% हुआ
  • EBITDA margin बेहतर होकर -30.50% पर पहुंचा

हालांकि कंपनी अभी भी loss में है, लेकिन margins का सुधरना future profitability की ओर इशारा करता है।


💰 Unit Economics और Cash Position

FY25 में Ampere ने हर Rs 1 की revenue कमाने के लिए Rs 1.39 खर्च किए, जो FY24 में Rs 1.40 था। यह छोटा लेकिन महत्वपूर्ण improvement है।

  • मार्च 2025 तक कंपनी के पास
    • Cash और bank balance: Rs 25 crore
    • Current assets: Rs 263 crore

यह दर्शाता है कि कंपनी की liquidity position stable बनी हुई है।


🛵 EV Sales और Market Position

Electric two-wheeler (E2W) segment में दिसंबर महीने के आंकड़ों के अनुसार:

  • Greaves Electric Mobility (Ampere brand) ने
    • 4,335 units की बिक्री की
    • Market share: 4.66%
    • Position: 6th

वहीं segment leader TVS Motor ने:

  • 24,317 units बेची
  • Market share: 26.14%

इससे साफ है कि competition काफी tough है, लेकिन Ampere अभी भी top players की list में बनी हुई है।


🚀 IPO की तैयारी में Greaves Electric Mobility

दिसंबर 2024 में Ampere की parent company Greaves Electric Mobility ने SEBI के पास अपना Draft Red Herring Prospectus (DRHP) फाइल किया था।

IPO की मुख्य बातें:

  • Fresh issue: Rs 1,000 crore तक
  • Offer for Sale (OFS): 18.94 crore equity shares
  • कुल IPO size करीब $119 million

हाल ही में कंपनी को इस IPO के लिए SEBI से final approval भी मिल चुका है, जिससे आने वाले समय में EV सेक्टर में निवेशकों की रुचि और बढ़ सकती है।


🔮 आगे का रास्ता

FY25 के numbers बताते हैं कि Ampere Vehicles धीरे-धीरे recovery mode में आ रही है। Revenue growth, losses में sharp reduction और IPO की तैयारी यह संकेत देती है कि कंपनी आने वाले वर्षों में अपनी market position मजबूत करने की कोशिश करेगी।

अगर EV adoption और government support इसी तरह बना रहता है, तो Ampere के लिए FY26 और आगे के साल ज्यादा stable और growth-oriented हो सकते हैं ⚡

Read more :🇮🇳 भारत के Top Startups 2026 वह कंपनियाँ जिनपर नजर रखनी चाहिए

🇮🇳 भारत के Top Startups 2026 वह कंपनियाँ जिनपर नजर रखनी चाहिए

Top Startups

भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम लगातार तेजी से बदल रहा है। 2025 के अंत तक देखा गया कि कुछ कंपनियाँ भारी फंडिंग और बड़े ग्रोथ ट्रैक पर हैं, जबकि कुछ ने अपने वर्टिकल में नया नियम बनाया है। Failory.com की “Top 100 India Startups to Watch in 2026” सूची से पता चलता है कि भारत में स्टार्टअप क्रांति अभी भी आगे बढ़ रही है, जिसमें कई कंपनियाँ टेक्नोलॉजी, ई-कॉमर्स, फिनटेक और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टरों में नेतृत्व कर रही हैं।

आज हम इसी सूची के सबसे महत्वपूर्ण और हाई-पोटेंशियल भारतीय स्टार्टअप्स का एक आसान, विस्तृत परिचय पेश करेंगे। आइए जानते हैं कौन-कौन हैं 2026 में ध्यान देने योग्य भारतीय स्टार्टअप और क्यों वे महत्वपूर्ण हैं।


🔟 2026 के टॉप स्टार्टअप्स — एक नजर

1) Zepto

Zepto एक क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है जो किराना और रोज़ाना उपयोग की चीज़ों को कुछ ही मिनटों में घर तक पहुंचाता है। इसकी तेज़ डिलीवरी सेवा ने युवा उपभोक्ताओं में इसे बेहद लोकप्रिय बनाया है। Zepto ने अपने बिजनेस मॉडल और फास्ट इन्वेंटरी नेटवर्क से निवेशकों का ध्यान खींचा है।


2) Polygon

Polygon एक ब्लॉकचेन इंफ्रास्ट्रक्चर स्टार्टअप है। यह Ethereum नेटवर्क की scalability (तेज़ और सस्ते ट्रांज़ैक्शन) में मदद करता है और डेवलपर्स को Web3 एप्लिकेशन बनाने के लिए प्लेटफॉर्म देता है। यह Web3 / ब्लॉकचेन के बढ़ते ट्रेंड में एक महत्वपूर्ण नाम है।


3) blinkit

Blinkit भी एक क्विक-डिलीवरी प्लेटफॉर्म है जिस पर लोग घर बैठे कुछ ही देर में groceries और essentials ऑर्डर कर सकते हैं। यह ई-कॉमर्स और शहरी लॉजिस्टिक्स के लिए एक नया मानक स्थापित कर रहा है।


4) Jupiter

Jupiter एक डिजिटल बैंकिंग और फिनटेक प्लेटफॉर्म है। यह उपयोगकर्ताओं को खाते, बचत, निवेश और पर्सनल फ़ाइनेंस ट्रैकिंग के लिए स्मार्ट टूल देता है। वित्तीय प्रबंधन को आसान और transparent बनाने की दिशा में इसका योगदान महत्वपूर्ण है।


5) Myntra

Myntra भारत का सबसे बड़ा फैशन और ए-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है जो लाखों उपयोगकर्ताओं को फैशन, लाइफस्टाइल और ब्यूटी प्रोडक्ट्स ऑफ़र करता है। यह भारतीय ई-कॉमर्स के सबसे बड़े नामों में गिना जाता है।


6) Rocket

Rocket एक AI-based software platform है, जो developers को prompt-to-app solutions प्रदान करता है। यह टेक्नोलॉजी में automation का एक बड़ा उदाहरण है और AI startups के बीच तेजी से उभर रहा है।


7) Rapido

Rapido एक माइक्रो-ट्रांसपोर्ट प्लेटफॉर्म है, जो बाइक टैक्सी के माध्यम से शहरी यात्राओं को आसान और सस्ता बनाता है। यह भारत के शहरी ट्रांसपोर्ट समस्याओं का स्मार्ट समाधान प्रदान करता है।


8) Weaver Services

Weaver Services वित्तीय सेवाएँ और टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म है, खासकर हाउसिंग फ़ाइनेंस जैसे क्षेत्रों में टेक्नोलॉजी को लागू करता है। इससे घर खरीदने या गिरवी रखने के लिए प्रक्रिया और अधिक सुलभ बनती है।


9) Akasa Air

Akasa Air एक भारतीय एयरलाइन है जो उड़ान सेवाओं को बढ़ावा देता है और यात्रियों को बेहतर सेवा अनुभव देता है। यह traditional उद्योग में डिज़िटल और ग्राहक-अनुकूल प्रदर्शन की मिसाल है।


10) MarketsandMarkets

MarketsandMarkets एक बिजनेस रिसर्च और डेटा एनालिटिक्स कंपनी है, जो व्यवसायों को रणनीतिक insights और मार्केट ट्रेंड डेटा देती है। यह व्यापार रणनीतिक निर्णयों में मददगार है।


📊 क्यों इन स्टार्टअप्स पर नजर रखनी चाहिए?

ये स्टार्टअप्स अलग-अलग क्षेत्रों से आते हैं — फिनटेक, ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक्स, ब्लॉकचेन, AI, एयरलाइनिंग और मार्केट रिसर्च — पर उनकी Growth story में कुछ कॉमन कारण हैं:
✔ ग्राहक-केंद्रित समाधान
✔ डिजिटल first बिज़नेस मॉडल
✔ मजबूत फंडिंग और निवेश समर्थन
✔ टेक्नोलॉजी-ड्रिवन विज़न

इन कंपनियों ने 2023-2025 के बीच तेज़ ग्रोथ और निवेश आकर्षित किया है, इसलिए 2026 में इनका प्रदर्शन और मार्केट-डिफ़ाइन्ड होना तय है।


🚀 भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम का हाल

भारत में स्टार्टअप संस्कृति पिछले दशक में महत्वपूर्ण रूप से विकसित हुई है। DPIIT के Startup India कार्यक्रम के तहत लगभग 1.8 लाख से अधिक स्टार्टअप्स को मान्यता मिली है, और हर साल 20,000 से अधिक नई कंपनियाँ जुड़ती हैं।

हालाँकि अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ स्टार्टअप्स बंद भी हो रहे हैं, जैसे 2025 में करीब 730 कंपनियों ने अपनी सेवाएँ बंद कर दीं, लेकिन यह संख्या पहले के मुकाबले कम है, जो इस उद्योग की मजबूत स्थिरता को दर्शाती है।


📌 विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

विश्लेषकों का मानना है कि भारत में टेक-ड्रिवन स्टार्टअप्स — विशेष रूप से AI, ब्लॉकचेन, फिनटेक और e-commerce — भविष्य में निवेश के आकर्षण के मुख्य केंद्र होंगे। टेक्नोलॉजी के ज़रिये ग्राहकों को सरल, तेज़ और सुरक्षित सेवाएँ देने वाले स्टार्टअप्स 2026 में बेहतर प्रदर्शन करेंगे।


🎯 निष्कर्ष

2026 भारत के लिए एक ल‌क्ष्य-पूर्ण साल बनने जा रहा है। Failory की सूची से यह स्पष्ट होता है कि कई पहले से मजबूत स्टार्टअप्स हैं—जो बड़े पैमाने पर ग्राहक और निवेश दोनों को आकर्षित कर रहे हैं। Zepto, Polygon, blinkit, Jupiter, Rapido जैसे प्लेटफॉर्म्स ने पहले से ही अपनी पहचान बनाई है, जबकि अन्य नव-प्रवर्तनकारी कंपनियाँ भी तेजी से उभर रही हैं।

📈 अगर आप भी स्टार्टअप वातावरण, निवेश या तकनीकी उपयोग में रुचि रखते हैं, तो यह सूची आपको 2026-2027 की startup trends समझने में मदद करेगी।

Read more :🇮🇳 भारत के स्टार्टअप IPOs 2026 में एक महत्वपूर्ण परीक्षा से गुजरेंगे

🇮🇳 भारत के स्टार्टअप IPOs 2026 में एक महत्वपूर्ण परीक्षा से गुजरेंगे

IPOs

2026 भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक निर्णायक साल होने जा रहा है। इस वर्ष की IPOs (Initial Public Offering) गतिविधि सिर्फ संख्या में नहीं, बल्कि गुणवत्ता और निष्पादन (execution) की क्षमता के संदर्भ में भी एक बड़े टेस्ट की तरह सामने आएगी।

पिछले कुछ सालों में भारत के स्टार्टअप बाजार ने तेजी से वृद्धि दर्ज की है। 2025 में 18 कंपनियों ने सफलतापूर्वक IPO लॉन्च किए और करोडों रुपये जुटाए। लेकिन 2026 में स्थिति थोड़ी अलग और अधिक परिपक्व होगी — जहाँ निवेशक सिर्फ बड़े सपनों और “हाइप” को नहीं, बल्कि कंपनियों की वास्तविक व्यावसायिक प्रदर्शन और निष्पादन क्षमता को भी ध्यान से देखेंगे।


📈 IPO बाजार अब “हाइप” से आगे बढ़ रहा है

भारत के IPO मार्केट में अब सिर्फ अच्छे कहानी, भविष्य की संभावनाएँ और बड़े valuation भर से चीजें तय नहीं होंगी। पब्लिक मार्केट अब यह देखेगी कि कंपनी की मौजूदा आय, प्रॉफिटेबिलिटी, संचालन क्षमता और बाजार में टिकने की क्षमता कितनी मजबूत है।

2026 के इस टेस्ट के सबसे स्पष्ट उदाहरण Ather Energy और Ola Electric की हाल की प्रदर्शन भिन्नताओं से देखने को मिलते हैं। दोनों ही कंपनियाँ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (EV) सेक्टर से हैं, और उन्हें समान उद्योग tailwinds और investor interest मिला। बावजूद इसके, Ather Energy ने अपनी लिस्टिंग कीमत से 100% से अधिक का रिटर्न दिया, जबकि Ola Electric ने 60% से ज्यादा अपनी वैल्यू खो दी। इसका कारण सिर्फ उद्योग की ताकत नहीं, बल्कि Ather की बेहतर execution और निरंतर काम के परिणाम हैं।


📊 VC वैल्युएशन बनाम सार्वजनिक बाजार की वास्तविकता

पिछले कुछ वर्षों में भारत में Venture Capital (VC) फंडिंग ने स्टार्टअप्स को असाधारण सपोर्ट दिया है। VC प्रमोटर्स अक्सर भविष्य की संभावनाओं, उच्च ग्रोथ प्रोजेक्शन्स और कागज़ पर शानदार दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हैं। परंतु पब्लिक मार्केट (IPO) में निवेशक और विश्लेषक वर्तमान प्रदर्शन और रिटर्न पर ज़्यादा फोकस करते हैं।

डेवलपमेंटल यूनिट्स को लेकर भरोसा और long-term growth की उम्मीद VC का ट्रेडमार्क रही है, लेकिन IPO बाजार अब कंपनियों से पूछता है:
✔ क्या यह कंपनी आज लाभ कमा रही है?
✔ क्या इसे भविष्य में नकद प्रवाह (cash flows) बनाते रहने की क्षमता है?
✔ क्या इसका बिजनेस मॉडल वास्तव में टिकाऊ है?

वास्तविक निष्पादन ही 2026 के IPO साल में सफलता की बड़ी कसौटी होगी।


📅 2025 से सीख — 2026 का वातावरण

जैसा कि 2025 में देखा गया, भारतीय स्टार्टअप IPO परिदृश्य ने रिकॉर्ड बनाये — 18 कंपनियों ने कुल लगभग ₹33,000 करोड़ के IPOs किए, जिससे निवेशकों और VC को आकर्षक रिटर्न मिले। कई firms ने इस IPO लहर से बेहतरीन तरक्की और liquidity हासिल की — खासकर fintech, digital प्लेटफॉर्म और tech focused ventures ने।

2026 में भी IPO pipeline और भी बड़ी है — अनुमान है कि 50,000 करोड़ रुपये से अधिक बाजार पूंजी जुटाई जा सकती है। इसमें PhonePe, Zepto, OYO, Infra.Market, Shadowfax जैसे बड़े नाम शामिल हैं, साथ ही और भी कई विविध सेक्टर की कंपनियाँ सार्वजनिक बाजार का रुख कर सकती हैं।

ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि 2026 भारत के IPO इतिहास में सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण IPO सालों में से एक बन सकता है।


🎯 IPO में सफलता अब सिर्फ सपनों से नहीं तय होगी

IPO करने वाली कंपनियों को अब उम्मीदों पर चलने वाले narrative से कहीं आगे बढ़कर दिखाई देना होगा। केवल “बेहतरीन growth prospects” या “VC backed valuation” नहीं काफी होंगे। पब्लिक मार्केट अब चाहती है कि कंपनियाँ:
✔ Consistent और Sustainable revenue दिखाएँ
✔ Strong execution capabilities हो
✔ Profitability और operational discipline बढाएँ

स्टार्टअप जो इन क्षेत्रों में कमजोर हैं, उन्हें बाज़ार की सख्त मांग का सामना करना पड़ेगा। वहीं जो कंपनियाँ fundamentals पर काम कर रही हैं, उनका प्रदर्शन आम निवेशकों और विश्लेषकों के लिए आकर्षक साबित होगा।


📉 IPO की चुनौतियाँ और जोखिम

कई analysts मानते हैं कि IPO प्रक्रिया में valuation और execution के बीच बड़ा disconnect है। VC often बड़ी संभावनाओं के आधार पर valuations तय करते हैं, लेकिन public market उन valuations को तब स्वीकार नहीं करते जब तक कंपनी का नकद प्रवाह, वास्तविक growth और profit दिखे।

अतः 2026 IPO साल में कुछ कंपनियों को valuation pressure, pricing challenges, और execution risks का सामना करना पड़ सकता है — विशेष रूप से ऐसे startups जिन्हें अभी तक sustainable revenue नहीं मिला है।


📊 IPOs के अवसर — कौन से सेक्टर्स आगे?

विश्लेषकों का कहना है कि 2026 में कुछ सेक्टर्स IPO के लिए खास तौर पर एक्टिव रहेंगे: ✔ Fintech और payments
✔ E-commerce और quick commerce
✔ Enterprise SaaS और deeptech
✔ Logistics और supply chain
✔ EV/green technologies

इन क्षेत्रों में कंपनियों ने 2025 के दौरान मजबूत traction, revenue growth और investor interest देखा है, और इसलिए यह संभावना प्रबल है कि इन सेक्टर के IPO 2026 में बड़े पैमाने पर आएँगे।


🧑‍💼 विशेषज्ञों की राय

वहीं परामर्शदाता और निवेश विश्लेषक मानते हैं कि IPO success केवल hype पर नहीं, बल्कि execution पर आधारित होना चाहिए। Ather Energy ने इस बात को साबित किया कि अगर कंपनी execution में अच्छा प्रदर्शन देती है, तो ग्रोथ investors के लिए सचमुच rewarding हो सकती है। वहीं Ola Electric जैसे cases यह दिखाते हैं कि केवल अच्छी story ही काफी नहीं है।


🧠 निष्कर्ष

2026 भारतीय स्टार्टअप IPO वर्ष एक बड़ा और निर्णायक साल बनने वाला है। यह वह समय है जब public markets कंपनियों की real execution, profitability और performance का परीक्षण करेंगे, न कि केवल उनके valuation और भविष्यवाणियों का।

स्टार्टअप्स, निवेशकों और विश्लेषकों के लिए यह एक अवसर और चुनौती दोनों है —
एक अवसर क्योंकि IPO pipeline बहुत मजबूत दिख रही है,
और चुनौती इसलिए क्योंकि पब्लिक मार्केट अब हाइप के बजाय execution को प्राथमिकता दे रही है।

इसलिए 2026 में IPO करने वाली कंपनियों को न केवल बड़ी entry चाहिए, बल्कि बाजार की लगातार अपेक्षाओं पर खरा उतरना भी जरूरी होगा — यही नया paradigma है।

Read more :📊 भारत के टॉप ब्रोकर्स 2025 में कौन हैं निवेशकों के पसंदीदा प्लेटफ़ॉर्म?

📊 भारत के टॉप ब्रोकर्स 2025 में कौन हैं निवेशकों के पसंदीदा प्लेटफ़ॉर्म?

Founder article

भारतीय शेयर बाजार में निवेश तेजी से बढ़ रहा है। 2025 के शुरुआती महीनों में भी निवेशक अपनी पसंदीदा ब्रोकिंग सेवाओं के लिए सक्रिय रहे हैं। आज हम जानेंगे उन प्रमुख ब्रोकरों के बारे में, जिनका उपयोग भारतीय निवेशक सबसे अधिक करते हैं और जिन्होंने अपने प्लेटफॉर्म के ज़रिए निवेशकों को बेहतर सुविधा दी है।

नीचे दी गई सूची में वे ब्रोकर्स शामिल हैं जो सबसे अधिक market share या लोकप्रियता के आधार पर रैंक किए गए हैं।


🔝 भारत के शीर्ष शेयर ब्रोकर 2025

2025 के आंकड़ों के अनुसार, निवेशकों की प्राथमिकता वाली सूची इस प्रकार है:

  1. Zerodha – ~18.1%
  2. Groww – ~13.58%
  3. Upstox – ~12.05%
  4. Angel One – ~11.5%
  5. ICICI Direct – ~7.93%
  6. 5paisa – ~3.66%
  7. HDFC Securities – ~3.17%
  8. Kotak Securities – ~3.05%
  9. IIFL Securities – ~2.51%
  10. Motilal Oswal – ~2.47%
  11. Sharekhan – ~2.1%
  12. SBI Cap Securities – ~1.74%
  13. Others – ~18.14%

📈 कौन सा ब्रोकिंग प्लेटफ़ॉर्म क्यों लोकप्रिय है?

🥇 Zerodha – सबसे आगे

Zerodha भारतीय शेयर बाजार में सबसे ज़्यादा उपयोग होने वाला ब्रोकिंग प्लेटफ़ॉर्म है। 18.1% के करीब market share के साथ यह उन निवेशकों की पहली पसंद बन चुका है जिनको कम brokerage fees, तेज execution और स्मार्ट tools चाहिए। Zerodha का Kite app और Varsity learning platform युवा निवेशकों में विशेष रूप से लोकप्रिय है।


📊 Groww – निवेशकों की नई पसंद

Groww ने भी तेजी से popularity हासिल की है, लगभग 13.58% market share के साथ। Groww शुरू में mutual funds के लिए जाना जाता था, लेकिन उसने धीरे-धीरे equity और derivatives trading भी उपलब्ध कराई है। सरल UI और शुरुआती निवेशकों के अनुकूल सुविधाओं की वजह से Groww का इस्तेमाल बहुत बढ़ा है।


💹 Upstox – कम लागत और तेज़ execution

Upstox करीब 12.05% market share के साथ तीसरे स्थान पर है। इसकी brokerage structure कम है और execution बहुत तेज़ है। तकनीकी चार्टिंग और advanced chart tools के कारण तकनीकी निवेशक Upstox को पसंद करते हैं।


🧑‍💼 Angel One और ICICI Direct – संतुलित विकल्प

Angel One और ICICI Direct क्रमशः चौथे और पाँचवें स्थान पर हैं। Angel One का प्लेटफॉर्म beginners और seasoned दोनों निवेशकों के लिए सहज लगता है, वहीं ICICI Direct एक पारंपरिक बैंक-attached ब्रोकिंग सर्विस के रूप में भरोसेमंद है।


💡 और अन्य प्रमुख ब्रोकर्स

बाकी ब्रोकर्स जैसे 5paisa, HDFC Securities, Kotak Securities, IIFL Securities, Motilal Oswal, Sharekhan, SBI Cap Securities भी लोकप्रियता में शामिल हैं। ये सभी ब्रोकर्स अलग-अलग निवेशकों के लिए विभिन्न तरह की सुविधाएँ, research tools और advisory सेवाएँ प्रदान करते हैं। साथ ही, कुल ‘Others’ की category में लगभग 18.14% हिस्सा आता है, जिनमें छोटे या niche brokers शामिल हैं।


📉 Broking Industry में निवेशकों की पसंद क्यों बदल रही है?

आज के निवेशक पहले से ज़्यादा तकनीकी-सक्षम और सजग हैं। वे उन प्लेटफ़ॉर्म को चुनते हैं जो कम लागत में बेहतर execution, सुगम UI/UX और मजबूत customer support प्रदान करते हैं। खास तौर पर युवा निवेशक जो mobile first approach अपनाते हैं, वे app-based brokers की तरफ तेजी से जा रहे हैं।


📱 App-based vs Traditional Brokers

App-based brokers (Zerodha, Groww, Upstox आदि):

तेज account opening

सरल UI

कम brokerage

मोबाइल-फ्रेंडली
⇒ इनका लोकप्रियता बढ़ा हुआ है।

Traditional brokers (ICICI Direct, HDFC Securities, Kotak, Sharekhan आदि):

मजबूत research

customer support

बैंक/बड़े financial networks
⇒ पुराने निवेशकों के बीच भरोसेमंद।


📊 नए निवेशकों के लिए सुझाव

🔹 नये निवेशकों को चाहिए कि वे ब्रोकर चुनते समय cost, tools, research support और user experience का मिश्रण देखें।
🔹 FREE educational resources, market news और practice accounts उन्हे पहले सीखने में मदद करते हैं।
🔹 तय करें कि आपके लिए कम brokerage ज़्यादा महत्वपूर्ण है या research support।


🌟 निष्कर्ष

2025 में भारतीय शेयर बाजार में Zerodha, Groww और Upstox जैसे brokers ने महत्वपूर्ण बढ़त बनाई है। इनका market share दर्शाता है कि निवेशक आज कम लागत, तेज execution और स्मार्ट tools की तलाश में हैं। वहीं traditional brokers अभी भी अपने मजबूत अनुभव और भरोसे के कारण अपनी जगह बनाए हुए हैं।

यदि आप निवेश करने जा रहे हैं, तो इन सभी platform का careful comparison आपके फायदे में रहेगा।

Read more :📊 Startup Weekly Funding Report इस हफ्ते 24 भारतीय स्टार्टअप्स ने जुटाए $75.36 मिलियन

📊 Startup Weekly Funding Report इस हफ्ते 24 भारतीय स्टार्टअप्स ने जुटाए $75.36 मिलियन

Funding report

भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में 10 जनवरी को खत्म हुए हफ्ते के दौरान फंडिंग गतिविधियों में हल्की तेजी देखने को मिली। इस सप्ताह 24 भारतीय स्टार्टअप्स ने कुल $75.36 मिलियन (करीब ₹625 करोड़) की फंडिंग जुटाई। दिलचस्प बात यह रही कि सारी डील्स early-stage में हुईं, जबकि 4 स्टार्टअप्स ने अपनी फंडिंग राशि का खुलासा नहीं किया

इसके मुकाबले, पिछले हफ्ते केवल 3 स्टार्टअप्स ने मिलकर $110.22 मिलियन जुटाए थे। यानी डील काउंट में तेज़ी रही, लेकिन टिकट साइज छोटा रहा।


🚀 Early-stage Funding Deals का दबदबा

इस सप्ताह कोई भी growth या late-stage डील सामने नहीं आई। पूरा फोकस शुरुआती स्टेज की कंपनियों पर रहा।

🔹 प्रमुख फंडिंग डील्स

  • Even Healthcare (Bengaluru) ने $20 मिलियन की फंडिंग जुटाई। इस राउंड का नेतृत्व Lachy Groom और Alpha Wave ने किया, जिसमें Sharrp Ventures भी शामिल रहा।
  • FutureCure Health ने ₹104 करोड़ ($11.5 मिलियन) जुटाए। इस राउंड को Carnelian Asset Management LLP ने लीड किया।
  • Spector.ai, जो एक industrial AI स्टार्टअप है, उसने ₹58 करोड़ ($6.7 मिलियन) की फंडिंग हासिल की। इस डील का नेतृत्व IvyCap Ventures ने किया।
  • Binny Bansal की 3State Ventures ने अपने पोर्टफोलियो स्टार्टअप Oppdoor Pte. Ltd. में अतिरिक्त $6.4 मिलियन का निवेश किया।

इसके अलावा AI स्टार्टअप्स Nitro Commerce और Aivar, और beauty brand Antinorm ने भी इस हफ्ते नई पूंजी जुटाई।

👉 पूरे funding breakup के लिए TheKredible देखें।


🏙️ City-wise Funding: Bengaluru फिर आगे

शहरों के हिसाब से देखें तो:

  • Bengaluru ने सबसे ज्यादा 11 deals के साथ लीड किया
  • Delhi-NCR से 4 deals
  • Mumbai से 3 deals
  • इसके अलावा Kanpur, Udaipur, Indore जैसे उभरते शहरों से भी स्टार्टअप्स ने फंडिंग हासिल की

यह दिखाता है कि स्टार्टअप फंडिंग अब केवल बड़े मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं रह गई है।


🤖 Segment-wise Deals: AI बना सबसे बड़ा विजेता

सेगमेंट के हिसाब से इस हफ्ते का ट्रेंड कुछ ऐसा रहा:

  • AI स्टार्टअप्स – 6 deals
  • Healthtech – 4 deals
  • E-commerce – 4 deals
  • इसके अलावा Aerospace, Proptech, Deeptech, EV और Fintech से भी डील्स देखने को मिलीं

AI का दबदबा यह दिखाता है कि निवेशक अब practical और enterprise-use AI पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं।


📈 Series-wise Funding Breakdown

इस हफ्ते फंडिंग राउंड्स का बंटवारा इस तरह रहा:

  • Seed rounds – 8 deals
  • Series A – 6 deals
  • Pre-Series A और Pre-seed – कुछ डील्स

👉 Series-wise और amount breakup के लिए TheKredible पर विज़िट करें।


📉 Week-on-Week Funding Trend

साप्ताहिक आधार पर देखें तो:

  • इस हफ्ते फंडिंग $75.36 मिलियन रही
  • पिछले हफ्ते यह आंकड़ा $110.22 मिलियन था

यानी amount के लिहाज़ से गिरावट रही, लेकिन डील काउंट मजबूत रहा।
पिछले 8 हफ्तों का औसत फंडिंग लगभग $199.82 मिलियन और 22 deals प्रति हफ्ता रहा है।


👔 Key Hirings और Leadership Updates

इस हफ्ते कई बड़ी नियुक्तियां और इस्तीफे भी देखने को मिले:

  • Meesho ने Milan Partani को General Manager, Commerce Platform नियुक्त किया, जबकि Megha Agarwal ने इस्तीफा दिया
  • Awfis Space Solutions के CFO Ravi Dugar ने इस्तीफा दिया, उनकी जगह Sumit Rochlani नए CFO बने
  • QuiD Cash ने Paytm के पूर्व President & COO Bhavesh Gupta को Strategic Advisor बनाया
  • Freshworks ने Kady Srinivasan को नया CMO नियुक्त किया
  • Ather Energy ने Surabhi Loshali को CHRO नियुक्त किया

🔄 Mergers & Acquisitions

  • CARS24 ने CarInfo का अधिग्रहण किया
  • Urban Harvest ने gourmet food brand Cocosutra को खरीदा
  • MS Dhoni ने अपनी padel venture 7Padel को PadelPark India के साथ मर्ज किया

🆕 New Launches & Partnerships

  • CLIRNET ने DentalNet लॉन्च किया
  • Practo ने UAE के बाद अब US में एंट्री, $75 Mn GMV रन-रेट के साथ

📑 Financial Results Highlights

  • Sid’s Farm – FY25 में ₹168 Cr revenue, लेकिन losses 2.6x बढ़ीं
  • Ecozen – FY25 में profit लगभग ₹100 Cr
  • BellaVita – revenue 2.5x बढ़कर ₹456 Cr, कंपनी profitable
  • Proost Beer – ₹100 Cr revenue, EBITDA breakeven

📰 News Flash

  • Razorpay IPO की तैयारी, ₹4,500 Cr fresh issue की योजना
  • upGrad–Unacademy deal रद्द, valuation disagreement
  • SoftBank ने Ola Electric में 2.15% stake बेचा
  • Amagi IPO से Premji Invest को 14x रिटर्न

🧾 Weekly Summary

इस हफ्ते भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में early-stage funding मजबूत रही, खासकर AI और Healthtech में।
हालांकि बड़े टिकट साइज की कमी दिखी, लेकिन डील एक्टिविटी स्वस्थ बनी रही।
IPO, M&A और सेकेंडरी सेल्स के चलते बाजार में cautious optimism बना हुआ है।

Read more :🧠 मेडिकल इमेजिंग स्टार्टअप Flywheel ने जुटाए $25 मिलियन

🧠 मेडिकल इमेजिंग स्टार्टअप Flywheel ने जुटाए $25 मिलियन

Flywheel

हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग के बीच मेडिकल इमेजिंग डेटा मैनेजमेंट स्टार्टअप Flywheel ने एक बड़ा फंडिंग राउंड पूरा किया है। अमेरिका के मिनियापोलिस (Minnesota) स्थित Flywheel ने $25 मिलियन (करीब ₹208 करोड़) की इक्विटी फंडिंग जुटाई है।

इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Novalis Lifesciences और 8VC ने किया है। यह निवेश ऐसे समय में आया है, जब मेडिकल रिसर्च, क्लिनिकल ट्रायल्स और AI मॉडल डेवलपमेंट में इमेजिंग डेटा की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है।


🚀 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

Flywheel ने बताया कि इस नई पूंजी का उपयोग मुख्य रूप से तीन अहम क्षेत्रों में किया जाएगा:

1️⃣ प्रोडक्ट इनोवेशन को तेज़ करना

कंपनी अपने मेडिकल इमेजिंग प्लेटफॉर्म को और एडवांस बनाएगी, ताकि बड़े पैमाने पर डेटा को तेज़ी और सटीकता के साथ मैनेज किया जा सके।

2️⃣ क्लिनिकल ट्रायल्स के लिए इमेज मैनेजमेंट

Flywheel खासतौर पर clinical trials में इस्तेमाल होने वाले imaging data के मैनेजमेंट और एनालिसिस पर फोकस बढ़ाएगी।

3️⃣ AI मॉडल डेवलपमेंट को सपोर्ट

मेडिकल AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए high-quality और structured imaging data बेहद जरूरी होता है। Flywheel इस दिशा में अपनी क्षमताओं को और मजबूत करेगा।


🏥 Flywheel क्या करता है?

Flywheel की अगुवाई CEO Hooman Hakami कर रहे हैं। यह कंपनी एक medical imaging data management और analysis platform प्रदान करती है, जो पूरे हेल्थकेयर इकोसिस्टम को सपोर्ट करता है।

आज के समय में अस्पतालों, रिसर्च सेंटर्स और फार्मा कंपनियों के पास भारी मात्रा में मेडिकल इमेजिंग डेटा होता है, जैसे:

  • MRI
  • CT Scan
  • PET Scan
  • X-Ray और अन्य diagnostic images

Flywheel का प्लेटफॉर्म इस डेटा को एक जगह व्यवस्थित करने, प्रोसेस करने और उपयोगी insights में बदलने का काम करता है।


🎯 Flywheel के तीन प्रमुख कस्टमर सेगमेंट

Flywheel का प्लेटफॉर्म तीन अलग-अलग तरह के ग्राहकों को सेवाएं देता है:

🧪 1. Biopharmaceutical कंपनियां

Biopharma कंपनियां दवाओं के रिसर्च और डेवलपमेंट के दौरान बड़ी संख्या में क्लिनिकल ट्रायल्स करती हैं। इन ट्रायल्स में imaging data बेहद अहम होता है। Flywheel उन्हें:

  • डेटा को सुरक्षित रखने
  • एनालिसिस करने
  • Regulatory compliance बनाए रखने

में मदद करता है।

🏭 2. Medical Device Manufacturers

मेडिकल डिवाइस कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स की टेस्टिंग और वैलिडेशन के लिए imaging data का इस्तेमाल करती हैं। Flywheel का प्लेटफॉर्म उन्हें बेहतर डेटा मैनेजमेंट और रिपोर्टिंग में मदद करता है।

🎓 3. Academic Medical Centers

विश्वविद्यालयों और मेडिकल रिसर्च सेंटर्स में imaging-based research आम बात है। Flywheel इनके लिए:

  • रिसर्च वर्कफ्लो ऑटोमेट करता है
  • डेटा शेयरिंग आसान बनाता है
  • Collaboration को बेहतर करता है

⚙️ Flywheel की टेक्नोलॉजी क्यों है खास?

Flywheel की सबसे बड़ी ताकत इसका end-to-end imaging data lifecycle management है।

इसका प्लेटफॉर्म:
✔ Imaging data को organize करता है
✔ Research workflows को automate करता है
✔ Data cleaning और standardization करता है
✔ AI-ready datasets तैयार करता है

इससे रिसर्चर्स और कंपनियों का समय बचता है और errors की संभावना कम होती है।


🤖 मेडिकल AI में Flywheel की भूमिका

आज हेल्थकेयर में AI का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन AI मॉडल तभी सही काम करते हैं जब उन्हें high-quality data मिले।

Flywheel का प्लेटफॉर्म:

  • Raw imaging data को structured format में बदलता है
  • AI model training के लिए datasets तैयार करता है
  • Data bias और inconsistency को कम करता है

यही वजह है कि Flywheel को AI-driven healthcare innovation का एक अहम खिलाड़ी माना जा रहा है।


📊 क्यों बढ़ रही है मेडिकल इमेजिंग डेटा की अहमियत?

दुनिया भर में हर साल अरबों मेडिकल इमेजिंग स्टडीज की जाती हैं।

  • Chronic diseases बढ़ रही हैं
  • Personalized medicine का चलन तेज़ है
  • Clinical trials पहले से ज्यादा data-driven हो चुके हैं

इन सभी वजहों से imaging data अब सिर्फ diagnostics तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह drug discovery, device development और AI research का आधार बन चुका है।


💡 निवेशकों को Flywheel में क्यों दिखी बड़ी संभावना?

Novalis Lifesciences और 8VC जैसे निवेशकों का मानना है कि:

  • Medical imaging डेटा का सही उपयोग अभी शुरुआती दौर में है
  • Flywheel एक scalable और regulatory-friendly समाधान देता है
  • AI और clinical research का भविष्य imaging data पर निर्भर करेगा

इन कारणों से Flywheel को long-term growth potential वाला स्टार्टअप माना जा रहा है।


🔮 आगे की राह

आने वाले समय में Flywheel:

  • और ज्यादा हेल्थकेयर संस्थानों के साथ काम कर सकता है
  • Global clinical trials को सपोर्ट कर सकता है
  • Advanced AI tools और analytics लॉन्च कर सकता है

कुल मिलाकर, यह फंडिंग दिखाती है कि medical imaging + AI + clinical research का कॉम्बिनेशन आने वाले वर्षों में हेल्थकेयर इंडस्ट्री को पूरी तरह बदल सकता है।

Read more :🩺 Voice AI Startup Tucuvi ने जुटाए $20 मिलियन

🩺 Voice AI Startup Tucuvi ने जुटाए $20 मिलियन

Tucuvi

हेल्थटेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते सेक्टर में एक और बड़ा फंडिंग अपडेट सामने आया है। स्पेन की राजधानी मैड्रिड स्थित voice AI स्टार्टअप Tucuvi ने Series A राउंड में $20 मिलियन (करीब ₹165 करोड़) की फंडिंग जुटाई है।

इस फंडिंग राउंड को Cathay Innovation और Kibo Ventures ने co-lead किया है, जबकि कंपनी के मौजूदा निवेशकों Frontline Ventures, Seaya Ventures और Shilling ने भी इसमें भागीदारी की है।

यह निवेश ऐसे समय में आया है, जब दुनिया भर में हेल्थकेयर सिस्टम पर मरीजों का दबाव बढ़ता जा रहा है और AI-based automation को भविष्य का समाधान माना जा रहा है।


🌍 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

Tucuvi ने बताया कि इस नई पूंजी का इस्तेमाल मुख्य रूप से तीन बड़े उद्देश्यों के लिए किया जाएगा:

1️⃣ इंटरनेशनल एक्सपैंशन
कंपनी खासतौर पर United Kingdom (UK) और United States (US) जैसे बड़े हेल्थकेयर मार्केट्स में अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहती है।

2️⃣ AI टेक्नोलॉजी को और एडवांस बनाना
Tucuvi अपनी voice AI को और ज्यादा स्मार्ट बनाकर complex clinical use cases को संभालने की क्षमता बढ़ाएगी।

3️⃣ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स के साथ पार्टनरशिप
अस्पतालों, हेल्थ सिस्टम्स और पब्लिक हेल्थ एजेंसियों के साथ सहयोग बढ़ाया जाएगा।


🤖 Tucuvi क्या करता है?

Tucuvi की स्थापना CEO Maria Gonzalez Manso और CTO Marcos Valadares ने की थी। यह स्टार्टअप एक voice-based AI प्लेटफॉर्म विकसित करता है, जो क्लिनिकल केयर मैनेजमेंट को ऑटोमेट करता है।

कंपनी का मुख्य प्रोडक्ट है LOLA, जिसे एक virtual caregiver कहा जा सकता है।

💬 LOLA कैसे काम करता है?

LOLA मरीजों से फोन कॉल के जरिए clinical-grade बातचीत करता है, ठीक वैसे जैसे कोई नर्स या केयर टीम का सदस्य बात करता है।

यह सिस्टम:

  • Chronic diseases वाले मरीजों की निगरानी करता है
  • Hospital discharge के बाद recovery को track करता है
  • मरीजों के जवाबों को real-time में analyze करता है

LOLA में इस्तेमाल की गई Natural Language Processing (NLP) तकनीक मरीज की आवाज़, शब्दों और लक्षणों से health red flags पहचान लेती है।

अगर कोई गंभीर संकेत मिलता है, तो सिस्टम तुरंत medical teams को alert कर देता है, जिससे सही मरीज को सही समय पर इलाज मिल सके।


🚑 हेल्थकेयर सिस्टम के लिए क्यों जरूरी है Voice AI?

आज दुनिया भर में हेल्थकेयर सिस्टम कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं:

  • डॉक्टरों और नर्सों की कमी
  • मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी
  • Chronic बीमारियों का बढ़ता बोझ

ऐसे में हर मरीज को manually follow-up करना मुश्किल हो जाता है।

Tucuvi जैसे voice AI प्लेटफॉर्म:
✔ मेडिकल स्टाफ का समय बचाते हैं
✔ Low-risk और high-risk मरीजों को अलग-अलग पहचानते हैं
✔ हेल्थकेयर की cost को कम करने में मदद करते हैं

यही वजह है कि AI-driven clinical automation को भविष्य का हेल्थकेयर मॉडल माना जा रहा है।


📊 10 लाख से ज्यादा मरीजों की निगरानी

Tucuvi का दावा है कि वह अब तक यूरोप में 10 लाख (1 मिलियन) से ज्यादा मरीजों की निगरानी कर चुका है।

कंपनी ने कई बड़े हेल्थकेयर संगठनों के साथ साझेदारी की है, जिनमें शामिल हैं:

  • UK का National Health Service (NHS)
  • स्पेन के कई बड़े सरकारी और प्राइवेट अस्पताल

NHS जैसी संस्था के साथ काम करना किसी भी हेल्थटेक स्टार्टअप के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है, क्योंकि वहां डेटा सिक्योरिटी, clinical accuracy और patient safety के बेहद सख्त मानक होते हैं।


🌐 UK और US क्यों हैं Tucuvi के लिए अहम?

UK और US दुनिया के सबसे बड़े हेल्थकेयर मार्केट्स में गिने जाते हैं।

  • UK में NHS पहले से ही डिजिटल हेल्थ और AI समाधानों को अपनाने में आगे है
  • US में हेल्थकेयर खर्च बहुत ज्यादा है, और automation से cost control की बड़ी जरूरत है

अगर Tucuvi इन दोनों मार्केट्स में scale कर पाता है, तो यह कंपनी को एक global healthtech player बना सकता है।


📈 निवेशकों को क्यों दिखी Tucuvi में बड़ी संभावना?

Cathay Innovation और Kibo Ventures जैसे निवेशकों का मानना है कि:

  • Voice AI हेल्थकेयर का अगला बड़ा ट्रेंड है
  • Phone-based समाधान बुजुर्ग और non-tech मरीजों के लिए ज्यादा effective होते हैं
  • Tucuvi का real-world deployment और clinical validation इसे दूसरे AI startups से अलग बनाता है

आज जब कई AI स्टार्टअप सिर्फ pilot projects तक सीमित हैं, Tucuvi का large-scale patient usage इसे मजबूत बनाता है।


🔮 आगे क्या?

आने वाले समय में Tucuvi:

  • और ज्यादा बीमारियों के लिए voice-based monitoring शुरू कर सकता है
  • AI को multilingual बनाकर नए देशों में एंट्री कर सकता है
  • Insurance और pharma कंपनियों के साथ भी काम कर सकता है

कुल मिलाकर, यह फंडिंग दिखाती है कि AI + हेल्थकेयर का कॉम्बिनेशन अब सिर्फ प्रयोग नहीं, बल्कि एक जरूरी समाधान बन चुका है।

Read more :🌱 Carbon Accounting Startup Plan A का €55 मिलियन में अधिग्रहण, Diginex ने किया बड़ा दांव

🌱 Carbon Accounting Startup Plan A का €55 मिलियन में अधिग्रहण, Diginex ने किया बड़ा दांव

Diginex

सस्टेनेबिलिटी और ESG टेक्नोलॉजी सेक्टर में एक बड़ा कंसोलिडेशन देखने को मिला है। बर्लिन-आधारित carbon accounting startup Plan A का अधिग्रहण लंदन-स्थित sustainability regulation tech कंपनी Diginex ने €55 मिलियन (करीब ₹500 करोड़) में किया है।

यह डील दो ऐसी कंपनियों को एक साथ लाती है, जिनकी स्थापना एक ही साल में हुई थी, लेकिन दोनों सस्टेनेबिलिटी वैल्यू चेन के अलग-अलग सिरों पर काम कर रही थीं। Plan A जहां emissions data और carbon measurement पर फोकस करता है, वहीं Diginex की ताकत ESG और regulatory reporting में है।

यह अधिग्रहण ऐसे समय में हुआ है, जब ESG और climate-tech सेक्टर तेजी से बदलते दौर से गुजर रहा है।


📈 ESG बूम से बदलती हकीकत तक

Plan A की स्थापना 2017 में Lubomila Jordanova ने की थी, जिसका मकसद कंपनियों को यह समझने में मदद करना था कि उनका बिज़नेस पर्यावरण पर कितना और कैसे असर डालता है।

ESG बूम के दौर में Plan A का यह proposition काफी मजबूत साबित हुआ। उस समय:

  • निवेशकों का दबाव बढ़ रहा था
  • रेगुलेटर्स emissions reporting को सख्त बना रहे थे
  • कंपनियां carbon footprint track करने की होड़ में थीं

इसी माहौल में Plan A ने करीब $40 मिलियन की फंडिंग जुटाई, जिसमें financial institutions, venture capital firms और कई बड़े tech founders शामिल थे।

लेकिन अब वही मार्केट पहले जैसी नहीं रही।


⚠️ क्यों कठिन हुआ carbon accounting startups का रास्ता?

पिछले कुछ वर्षों में ESG से जुड़ी नीतियों में कई बदलाव आए हैं।

  • अलग-अलग देशों में reporting rules uneven हो गए हैं
  • कुछ क्षेत्रों में राजनीतिक विरोध (political pushback) देखने को मिला है
  • कई ESG mandates, जो कभी तय माने जा रहे थे, अब कमजोर पड़ते दिख रहे हैं

इसका सीधा असर carbon accounting startups पर पड़ा है। अब सिर्फ अच्छा product होना काफी नहीं है।
आज की तारीख में जरूरी है:

  • Scale
  • Distribution power
  • Regulatory alignment

छोटे और mid-size स्टार्टअप्स के लिए अकेले इन चुनौतियों से निपटना मुश्किल होता जा रहा है।


🤝 Diginex ने अभी यह डील क्यों की?

Diginex के लिए यह अधिग्रहण कोई opportunistic खरीद नहीं, बल्कि strategic consolidation है।

NASDAQ-listed Diginex पहले से ही ESG और sustainability reporting के क्षेत्र में सक्रिय है। Plan A के अधिग्रहण से कंपनी को:

  • एक मजबूत carbon accounting engine
  • emissions data की गहराई
  • और regulatory reporting के साथ end-to-end solution

मिल जाता है।

💶 डील स्ट्रक्चर पर एक नजर

इस अधिग्रहण में:

  • €3 मिलियन cash
  • €52 मिलियन shares
  • और €25 मिलियन तक का potential earn-out

शामिल है।

यह स्ट्रक्चर दिखाता है कि Diginex इस डील को long-term partnership के रूप में देख रहा है, न कि सिर्फ short-term buyout की तरह।


👩‍💼 Founder को CEO बनाए रखना क्यों अहम है?

इस डील का एक अहम पहलू यह है कि Plan A की founder Lubomila Jordanova कंपनी की CEO बनी रहेंगी

इससे साफ संकेत मिलता है कि Diginex:

  • Plan A की brand identity को खत्म नहीं करना चाहता
  • product को पूरी तरह merge करने के बजाय उसका विस्तार करना चाहता है

आज ESG और sustainability जैसे क्षेत्रों में credibility और trust सबसे बड़ी पूंजी होती है। ऐसे में established brand और founder leadership को बनाए रखना एक सोची-समझी रणनीति है।

यह ट्रेंड हाल के वर्षों में कई acquisitions में देखने को मिला है, जहां बड़े प्लेटफॉर्म trusted brands को absorb करने के बजाय उन्हें स्वतंत्र पहचान के साथ scale करते हैं।


🔮 Carbon accounting के भविष्य पर क्या असर पड़ेगा?

इंडस्ट्री लेवल पर देखें तो यह डील इस बात की पुष्टि करती है कि carbon accounting सेक्टर में consolidation शुरू हो चुका है

जब funding धीमी पड़ती है और regulatory clarity कम हो जाती है, तब:

  • छोटे खिलाड़ी अकेले scale नहीं कर पाते
  • बड़े प्लेटफॉर्म specialized tools को अपने साथ जोड़ने लगते हैं

इससे मार्केट में:

  • कंपनियों की संख्या कम
  • लेकिन solutions ज्यादा comprehensive

होते जाते हैं।

Accenture और OneTrust जैसे बड़े प्लेयर्स द्वारा पहले किए गए acquisitions भी इसी दिशा की ओर इशारा करते हैं।


🚀 क्या innovation खत्म हो रही है?

इसका जवाब है — नहीं
लेकिन innovation का फोकस बदल रहा है।

अब carbon accounting सिर्फ dashboards और reports तक सीमित नहीं रहेगा।
आने वाला दौर उन platforms का होगा जो:

  • emissions data को strategy से जोड़ें
  • compliance को business decisions से लिंक करें
  • और sustainability को financial outcomes में translate करें

यानी carbon accounting अब measurement से आगे बढ़कर infrastructure बनने की ओर जा रहा है।


📌 निष्कर्ष

Diginex–Plan A डील सिर्फ €55 मिलियन का अधिग्रहण नहीं है, बल्कि यह carbon accounting और ESG tech के भविष्य की दिशा दिखाने वाला संकेत है।

जैसे-जैसे नियम जटिल होंगे और निवेशक ज्यादा practical होंगे, वैसे-वैसे standalone tools की जगह integrated sustainability platforms ले लेंगे।

Plan A और Diginex का यह कदम बताता है कि आने वाले समय में ESG सिर्फ compliance नहीं, बल्कि core business strategy का हिस्सा बनने वाला है।

Read more :💰 Payhawk नई फंडिंग की तैयारी में $100 मिलियन से ज्यादा जुटाने की बातचीत,

💰 Payhawk नई फंडिंग की तैयारी में $100 मिलियन से ज्यादा जुटाने की बातचीत,

Payhawk

बुल्गारिया मुख्यालय वाली AI-powered spend management platform Payhawk एक बार फिर सुर्खियों में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Payhawk इस समय $100 मिलियन से अधिक की नई फंडिंग जुटाने के लिए निवेशकों के साथ बातचीत कर रही है। अगर यह डील पूरी होती है, तो कंपनी का valuation करीब $2 बिलियन तक दोगुना हो सकता है।

हालांकि, यह बातचीत अभी शुरुआती चरण में है और फंडिंग अमाउंट व वैल्यूएशन में आगे बदलाव संभव है। फिर भी, यह संकेत साफ है कि Payhawk यूरोप की सबसे तेजी से बढ़ती fintech कंपनियों में अपनी जगह और मजबूत करना चाहती है।


🦄 2022 में बनी थी बुल्गारिया की पहली Unicorn

Payhawk ने इससे पहले 2022 में $100 मिलियन की Series B funding जुटाई थी, जिसमें कंपनी का valuation $1 बिलियन पहुंच गया था। इसी के साथ Payhawk बुल्गारिया की पहली unicorn startup बन गई थी, जो देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी गई।

इस राउंड में कंपनी को Lightspeed Venture Partners और Greenoaks Capital जैसे बड़े ग्लोबल निवेशकों का समर्थन मिला था। इन निवेशकों ने Payhawk की उस क्षमता पर भरोसा जताया, जिसके तहत कंपनी अलग-अलग देशों के जटिल regulatory environment में भी अपने बिज़नेस को scale कर सकती है।


🌍 नई फंडिंग से क्या करेगी Payhawk?

अगर यह नया फंडिंग राउंड सफल रहता है, तो Payhawk इस पूंजी का इस्तेमाल मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों में करेगी:

  1. यूरोप में विस्तार (European Expansion)
  2. Product Development और AI capabilities को मजबूत करना
  3. Large enterprises के लिए deeper integrations बनाना

Payhawk पहले से ही कई यूरोपीय देशों में मौजूद है और multinational कंपनियों को services दे रही है। नई फंडिंग से कंपनी अपनी पकड़ और मजबूत कर सकती है।


🤖 AI से खर्चों का स्मार्ट मैनेजमेंट

Payhawk की स्थापना 2018 में Hristo Borisov और Boyko Karadzhov ने की थी, बाद में Konstantin Dzhengozov भी co-founder के रूप में जुड़े।

Payhawk एक ऐसा all-in-one financial platform है, जो:

  • Expense management
  • Corporate payments
  • Invoice processing

को एक ही सिस्टम में जोड़ता है।

यह प्लेटफॉर्म खासतौर पर उन mid-sized और large enterprises के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिनका बिज़नेस कई देशों में फैला हुआ है और जिन्हें अलग-अलग currencies, payment methods और regulations के साथ काम करना पड़ता है।


🧾 एक ही प्लेटफॉर्म पर सब कुछ

Payhawk का सिस्टम कंपनी cards, expense tracking, invoice management और supplier payments को एक जगह लाता है। इसे इस तरह बनाया गया है कि यह आसानी से ERP और accounting software के साथ sync हो जाए।

यही वजह है कि Payhawk छोटे स्टार्टअप्स के बजाय बड़े और established organizations पर ज्यादा फोकस करता है। इसका लक्ष्य flashy features दिखाना नहीं, बल्कि automation, compliance और spending visibility देना है।

कंपनी के कस्टमर बेस में Dott और Gaucho जैसी कंपनियां शामिल हैं, जिन्हें daily operations को slow किए बिना खर्चों पर सख्त कंट्रोल चाहिए।


⚙️ चार नए AI Agents से बढ़ी efficiency

Payhawk ने हाल ही में चार नए AI agents लॉन्च किए हैं, जो core finance operations को automate करते हैं।

कंपनी के मुताबिक:

  • Workflows की speed 60% तक बढ़ गई
  • Finance helpdesk queries में 40% की कमी आई

ये AI agents सिर्फ सवालों के जवाब नहीं देते, बल्कि खुद से tasks execute करते हैं, जैसे:

  • Travel booking
  • Payment processing
  • Procurement management

यह approach दिखाता है कि Payhawk सिर्फ tools नहीं, बल्कि finance teams के daily काम का हिस्सा बनना चाहता है। CFOs के लिए यह एक बड़ा advantage है, खासकर तब जब corporate spending बहुत ज्यादा और complex हो।


⚔️ यूरोप का spend management मार्केट हुआ बेहद competitive

Spend management आज यूरोप के सबसे competitive fintech segments में से एक बन चुका है।

यूरोप की homegrown unicorns जैसे:

  • Pleo
  • Spendesk

पहले ही साबित कर चुकी हैं कि इस सेक्टर में बड़ी demand है।

लेकिन अब मुकाबला सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं है। अमेरिका की बड़ी fintech कंपनी Brex, जिसके पास $1 बिलियन से ज्यादा की funding है और जिसने हाल ही में EU licence हासिल किया है, अब यूरोप में aggressively expand कर रही है।

इससे competition का level और ऊंचा हो गया है। ऐसे में किसी भी European player को लंबे समय तक टिके रहने के लिए:

  • Strong fundamentals
  • Deep product
  • और भारी capital backing

की जरूरत होगी — और Payhawk इसी दिशा में कदम बढ़ाता दिख रहा है।


📈 European fintech funding में अब भी जान

अगर Payhawk का यह फंडिंग राउंड पूरा होता है, तो यह दिखाएगा कि European fintech sector अब भी resilient बना हुआ है।

भले ही इस समय AI startups सबसे ज्यादा headlines बटोर रहे हों, लेकिन fintech कंपनियां — खासकर जो रोजमर्रा की financial समस्याओं को solve करती हैं — अब भी investors का भरोसा जीत रही हैं।

एक ऐसे माहौल में, जहां निवेशक cautious हो गए हैं, Payhawk की momentum यह संकेत देती है कि well-executed fintech platforms के लिए growth के रास्ते अब भी खुले हैं।


🔎 निष्कर्ष

Payhawk की संभावित $100+ मिलियन funding सिर्फ एक निवेश खबर नहीं है, बल्कि यह यूरोपीय fintech ecosystem की मजबूती और भविष्य की दिशा को भी दिखाती है। AI, automation और enterprise focus के दम पर Payhawk आने वाले समय में spend management स्पेस का बड़ा खिलाड़ी बन सकता है।

Read more :📊 Amagi IPO FY26 की पहली छमाही में मुनाफे में लौटी SaaS कंपनी,

📊 Amagi IPO FY26 की पहली छमाही में मुनाफे में लौटी SaaS कंपनी,

Amagi

बेंगलुरु स्थित SaaS कंपनी Amagi ने अपने आने वाले Initial Public Offering (IPO) के लिए हाल ही में Red Herring Prospectus (RHP) दाखिल कर दिया है। इस फाइलिंग में सामने आए फाइनेंशियल आंकड़े बताते हैं कि कंपनी ने FY26 की पहली छमाही (H1 FY26) में मुनाफा दर्ज किया है। तेज़ रेवेन्यू ग्रोथ और बेहतर cost efficiency की बदौलत Amagi घाटे से बाहर निकलने में सफल रही है।

🚀 H1 FY26 में Amagi की रेवेन्यू ग्रोथ

RHP में शामिल फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स के मुताबिक, Amagi का ऑपरेटिंग रेवेन्यू H1 FY26 में 34.5% बढ़कर ₹705 करोड़ पहुंच गया, जो H1 FY25 में ₹524 करोड़ था। यह ग्रोथ मुख्य रूप से कंपनी के core distribution और payout services बिज़नेस से आई है।

Amagi की कुल ऑपरेटिंग इनकम का करीब 98% हिस्सा distribution और payout services से आता है। इस सेगमेंट से रेवेन्यू 36% बढ़कर ₹690 करोड़ हो गया, जो कंपनी के बिज़नेस मॉडल की मजबूती को दिखाता है।

वहीं, कंपनी के AdPlus प्रोडक्ट से होने वाली इनकम लगभग स्थिर रही और H1 FY26 में ₹15 करोड़ के आसपास दर्ज की गई।

💰 Total Income में भी जबरदस्त उछाल

अगर अन्य आय (Other Income) को शामिल करें, तो तस्वीर और भी मजबूत दिखती है।

  • Other Income: ₹29 करोड़
  • Total Income (H1 FY26): ₹734 करोड़
  • H1 FY25 में Total Income: ₹551 करोड़

इस तरह, कुल आय में भी साल-दर-साल बड़ा उछाल देखने को मिला।


📉 खर्चों पर नियंत्रण बना मुनाफे की वजह

Amagi की मुनाफे में वापसी का सबसे बड़ा कारण रहा खर्चों की धीमी रफ्तार से बढ़ोतरी, जबकि रेवेन्यू तेज़ी से बढ़ा।

H1 FY26 में कंपनी के Total Expenses 18.2% बढ़कर ₹722 करोड़ रहे, जबकि H1 FY25 में यह ₹611 करोड़ थे।

🧑‍💼 Employee Cost सबसे बड़ा खर्च

  • Employee benefit expenses: ₹386 करोड़
  • सालाना बढ़ोतरी: 12.5%
  • कुल खर्चों में हिस्सा: 53% से अधिक

यह दिखाता है कि Amagi एक talent-heavy SaaS कंपनी है, जहाँ टेक और डेटा से जुड़े प्रोफेशनल्स पर बड़ा निवेश किया जाता है।

📡 Communication Cost में तेज़ उछाल

  • Communication expenses: ₹216 करोड़
  • ग्रोथ: 32.5%
  • कुल खर्चों में योगदान: लगभग 30%

इसके अलावा:

  • Legal और professional charges घटकर ₹27 करोड़
  • Travel और अन्य खर्च मिलाकर ₹71 करोड़

✅ घाटे से मुनाफे तक का सफर

रेवेन्यू की तेज़ ग्रोथ और खर्चों पर बेहतर नियंत्रण के चलते Amagi ने H1 FY26 में ₹6.5 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया।

तुलना करें तो,

  • H1 FY25 में कंपनी को ₹66 करोड़ का घाटा हुआ था

हालांकि, कंपनी के कुछ profitability metrics अभी भी निगेटिव ज़ोन में हैं:

  • ROCE: -1.51%
  • EBITDA Margin: -0.57%

फिर भी, घाटे से मुनाफे में आना निवेशकों के लिए एक बड़ा पॉजिटिव सिग्नल माना जा रहा है।


💵 Cash Position और Balance Sheet

सितंबर 2025 तक Amagi की बैलेंस शीट काफी मजबूत दिखती है:

  • Cash और Bank Balance: ₹397 करोड़
  • Current Assets: ₹1,177 करोड़

यह कंपनी को IPO के बाद ग्रोथ, इंटरनेशनल एक्सपेंशन और टेक इन्वेस्टमेंट के लिए मजबूत स्थिति में रखता है।


🧾 Amagi IPO: Price Band और डिटेल्स

Amagi ने अपने IPO के लिए ₹343–₹361 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है।

📌 IPO की मुख्य जानकारी

  • Issue Size: ₹1,788.62 करोड़
  • Subscription Open: 13 जनवरी
  • Subscription Close: 16 जनवरी
  • Anchor Book Open: 12 जनवरी
  • Lot Size: 41 शेयर
  • Minimum Retail Investment: लगभग ₹14,800 (upper price band पर)

🦄 निवेशकों को मिलेगा मल्टीबैगर रिटर्न

Amagi के शुरुआती और ग्रोथ-स्टेज निवेशकों के लिए यह IPO बेहद फायदेमंद साबित होने जा रहा है।

कंपनी में निवेश कर चुके बड़े नाम:

  • Premji Invest
  • Accel India
  • Norwest Venture Partners

इनमें से Premji Invest को लगभग 14x रिटर्न मिलने की उम्मीद है, जो इस IPO को निवेशकों की नजर में और आकर्षक बनाता है।


🔍 निष्कर्ष

Amagi का IPO ऐसे समय पर आ रहा है जब भारतीय SaaS कंपनियों की profitability पर खास नजर रखी जा रही है। FY26 की पहली छमाही में मुनाफा दर्ज कर Amagi ने यह साबित किया है कि उसका बिज़नेस मॉडल scalable और sustainable है।

अगर कंपनी आने वाले समय में margins को और बेहतर बना पाती है, तो Amagi भारतीय SaaS IPO स्पेस में एक मजबूत नाम बनकर उभर सकती है।

Read more :📉 Stockbroking Industry में Slowdown Active Users घटे, Groww ने बढ़त बरकरार रखी