भारतीय स्टार्टअप फाउंडर्स इस साल संभावित IPO से पहले अपनी कंपनियों में हिस्सेदारी बढ़ाने में जुटे हुए हैं। यह चलन इस समय कई लेट-स्टेज स्टार्टअप्स में देखा जा रहा है, जहां फाउंडर्स बढ़ा हुआ आत्मविश्वास और कंट्रोल की इच्छा दिखा रहे हैं।
SEBI के नए रेगुलेशंस के बाद यह ट्रेंड और भी तेजी से उभर रहा है, जिससे अब फाउंडर्स को पब्लिक लिस्टिंग से पहले ESOP का उपयोग करना और हिस्सेदारी बढ़ाना आसान हो गया है।
🟡 Lenskart: IPO से पहले Peyush Bansal की बड़ी वापसी
सबसे चर्चित उदाहरण Lenskart का है, जहां को-फाउंडर Peyush Bansal ने Rs 222 करोड़ में 2.5% हिस्सेदारी वापस खरीदी है। यह हिस्सेदारी उन्होंने SoftBank और Chiratae जैसे निवेशकों से खरीदी है।
- 📉 सबसे खास बात: यह डील $1 बिलियन वैल्यूएशन पर हुई, जबकि कंपनी की पिछली प्राइवेट मार्केट वैल्यूएशन $10 बिलियन थी।
- 🎯 यह कदम Lenskart के संभावित IPO फाइलिंग से ठीक पहले आया है, जिससे यह भारत के सबसे बड़े फाउंडर-बायबैक ट्रांजेक्शनों में से एक बन गया है।
🏗️ Zetwerk: फाउंडर्स ने लिया कर्ज और बढ़ाई हिस्सेदारी
Zetwerk के को-फाउंडर्स Amrit Acharya और Srinath Ramakkrushnan ने ₹600 करोड़ का व्यक्तिगत कर्ज लेकर कंपनी में निवेश किया है। इस कदम से उनकी सम्मिलित हिस्सेदारी में करीब 2% की बढ़ोतरी हुई है।
📌 यह दर्शाता है कि फाउंडर्स IPO से पहले अपने भरोसे को दर्शाने के लिए वित्तीय जोखिम उठाने को तैयार हैं।
📺 Amagi और 📱 InMobi: DRHP से पहले फाउंडर सपोर्ट
Amagi में भी फाउंडर्स ने ₹9 करोड़ मूल्य के शेयर्स खरीदे हैं। वहीं InMobi ने ₹32 करोड़ जुटाए हैं जो फाउंडर्स Naveen Tewari, Abhay Singhal, Piyush Shah और Mohit Saxena द्वारा लगाए गए हैं। इसमें Singapore आधारित निवेशक Vatera Pte Ltd भी शामिल हैं।
दोनों कंपनियां IPO की तैयारी कर रही हैं और जल्द ही DRHP दाखिल करने की योजना में हैं।
📦 Meesho: ESOP से बढ़ाया फाउंडर होल्डिंग
Meesho के फाउंडर्स Vidit Aatrey और Sanjeev Barnwal ने ESOP के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी में इज़ाफा किया है।
- 📈 Aatrey को 20.65 लाख शेयर
- 📈 Barnwal को 6.59 लाख शेयर
SEBI के जून में आए बदलावों के बाद यह allotment और आसान हुआ, जिससे फाउंडर्स के लिए हिस्सेदारी बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ।
📜 पुराना ट्रेंड, नया जोश: Zomato, Delhivery और Swiggy का उदाहरण
फाउंडर्स के शेयरहोल्डिंग बढ़ाने का यह ट्रेंड नया नहीं है:
- 🥗 Zomato (2021): Deepinder Goyal को IPO से पहले 368 मिलियन स्टॉक ऑप्शंस दिए गए।
- 📦 Delhivery (2021): Sahil Barua और Kapil Bharati को ₹25 करोड़ के शेयर्स अलॉट किए गए।
- 💻 PB Fintech: Yashish Dahiya और Alok Bansal को 1.02 करोड़ शेयर्स दिए गए।
- 🍔 Swiggy (2023): $271 मिलियन का ESOP प्लान, जिसमें $200 मिलियन सिर्फ फाउंडर Sriharsha Majety के लिए था।
Swiggy ने अपना IPO नवंबर 2024 में लॉन्च किया था।
💹 क्यों फाउंडर्स कर रहे हैं निवेश?
- 🎯 मार्केट को सिग्नल देना: जब फाउंडर्स खुद निवेश करते हैं, तो यह निवेशकों को भरोसा देता है कि कंपनी IPO के बाद भी परफॉर्म करेगी।
- 🔁 कंट्रोल बनाए रखना: IPO के बाद फाउंडर हिस्सेदारी कम हो जाती है। इससे पहले उन्हें हिस्सेदारी बढ़ाने का मौका मिलता है।
- 💰 पहले से हो चुकी लिक्विडिटी: कई फाउंडर्स ने पहले ही बड़े अमाउंट में लिक्विडिटी पा ली थी, जिससे उनके पास दोबारा निवेश करने के लिए पर्याप्त पूंजी है।
🤔 लेकिन ये चाल हर बार काम नहीं करती
IPO के बाद स्टॉक की वैल्यू गिरने पर फाउंडर निवेश आमतौर पर ज्यादा असर नहीं डालता। साथ ही, जो फाउंडर्स IPO के बाद ऊंची कीमत पर निवेश करते हैं, वो अब भी बहुत कम उदाहरण हैं।
कंपनी के ग्रोथ फेज के आखिरी पायदान पर यह निवेश बाजार को मजबूत सिग्नल देता है — खासकर Lenskart जैसे यूनिकॉर्न IPOs के लिए।
📌 निष्कर्ष: IPO की तैयारी में फाउंडर्स का आत्मविश्वास झलक रहा
इन सभी उदाहरणों से साफ है कि भारतीय स्टार्टअप फाउंडर्स IPO से पहले अपनी पकड़ मजबूत करने के मूड में हैं। वे न सिर्फ अपने निवेश से भरोसा दिखा रहे हैं, बल्कि मार्केट को यह संकेत दे रहे हैं कि वे अपने विज़न और कंपनी की दिशा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
📊 फाउंडर रिइनवेस्टमेंट का यह दौर हमें बताता है:
- IPO सिर्फ पैसे जुटाने का नहीं, बाज़ार में फाउंडर विश्वास का भी इम्तिहान है।
- निवेशकों के लिए यह संकेत है कि फाउंडर्स अब भी “स्किन इन द गेम” रखते हैं।
- आने वाले महीनों में और स्टार्टअप्स इस राह पर चल सकते हैं।
ऐसी ही इनसाइटफुल स्टार्टअप और IPO कवरेज के लिए जुड़िए FundingRaised.in के साथ। 🚀
Read more : TBO का Q1 FY26 रेवेन्यू में 22% की उछाल,



