भारत के तेजी से बढ़ते फिनटेक सेक्टर में एक और बड़ी फंडिंग डील सामने आई है। फिनटेक स्टार्टअप Kiwi ने अपने सीरीज़ B फंडिंग राउंड में $24 मिलियन (लगभग ₹208 करोड़) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व Vertex Ventures Southeast Asia & India ने किया, जबकि मौजूदा निवेशकों Nexus Venture Partners, Stellaris Venture Partners और Omidyar Network ने भी भागीदारी की।
💰 फंडिंग का इस्तेमाल कहाँ होगा?
कंपनी ने बताया कि इस निवेश से उसका ध्यान तीन प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा:
- प्रोडक्ट रोडमैप को तेज करना – नई सुविधाएँ और टेक्नोलॉजी अपग्रेड लॉन्च करना।
- यूनिट इकॉनॉमिक्स को मजबूत करना – लाभप्रदता और लागत नियंत्रण पर ध्यान।
- कस्टमर एक्विज़िशन बढ़ाना – अधिक से अधिक नए यूज़र्स को जोड़ना।
📱 Kiwi का बिज़नेस मॉडल
Kiwi की शुरुआत साल 2022 में सिद्धार्थ मेहता, मोहित बेदी और अनुप अग्रवाल ने की थी। यह प्लेटफ़ॉर्म यूज़र्स को RuPay क्रेडिट कार्ड को UPI से लिंक करने की सुविधा देता है।
- इसका मतलब है कि अब ग्राहक अपने क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल भी उसी तरह कर सकते हैं, जैसे डेबिट कार्ड से UPI पेमेंट्स करते हैं।
- इससे क्रेडिट कार्ड की स्वीकृति (acceptance) नेटवर्क काफी बड़ा हो जाता है, क्योंकि भारत में हर जगह UPI व्यापारी (merchants) मौजूद हैं।
📊 अब तक का प्रदर्शन
- Kiwi ने लॉन्च के बाद से अब तक 2 लाख से अधिक RuPay क्रेडिट कार्ड जारी किए हैं।
- वर्तमान में यह स्टार्टअप 600 शहरों में सक्रिय है।
- हर महीने 50 लाख से ज्यादा मर्चेंट ट्रांजैक्शन्स प्रोसेस करता है।
- Kiwi ने YES Bank और AU Small Finance Bank के साथ पार्टनरशिप की है और इस वित्त वर्ष में दो और बड़े बैंकों को जोड़ने की योजना बना रहा है।
🎯 आने वाला लक्ष्य
कंपनी ने बड़ा विज़न रखा है – साल 2027 तक 10 लाख RuPay क्रेडिट कार्ड जारी करने का लक्ष्य।
यह ऐसे समय में आ रहा है जब भारत में फिनटेक सेक्टर UPI आधारित क्रेडिट एक्सेस को तेजी से आगे बढ़ा रहा है।
📈 क्यों है Kiwi का मॉडल खास?
भारत में फिलहाल 350 मिलियन से ज्यादा यूनिक UPI यूज़र्स हैं, जो कि क्रेडिट कार्ड यूज़र्स की संख्या से 8–10 गुना अधिक है।
- पारंपरिक क्रेडिट कार्ड की तुलना में UPI पर क्रेडिट की acceptance network 35 गुना बड़ा है।
- इसीलिए Kiwi का मॉडल निवेशकों और ग्राहकों दोनों के लिए आकर्षक माना जा रहा है।
🧑🤝🧑 शेयरहोल्डिंग और निवेशकों की दिलचस्पी
स्टार्टअप डेटा प्लेटफ़ॉर्म TheKredible के मुताबिक:
- सीरीज़ A राउंड के बाद सिद्धार्थ मेहता, अनुप अग्रवाल और मोहित बेदी के पास लगभग 16.2% हिस्सेदारी थी।
- वहीं Nexus Venture Partners सबसे बड़ा बाहरी निवेशक है।
- सीरीज़ B राउंड के बाद संस्थापकों ने कितनी हिस्सेदारी डायल्यूट की है, यह देखना दिलचस्प होगा।
🌍 प्रतिस्पर्धा और उद्योग का माहौल
भारत में कई फिनटेक कंपनियाँ इस क्षेत्र में तेजी से काम कर रही हैं:
- LazyPay, OneCard, Uni और Slice जैसी कंपनियाँ भी UPI के जरिए क्रेडिट एक्सेस का विस्तार कर रही हैं।
- बढ़ते डिजिटल पेमेंट यूज़र्स के चलते इस मार्केट में आने वाले सालों में जबरदस्त ग्रोथ की उम्मीद है।
📌 नतीजा
Kiwi का फंडिंग राउंड यह दर्शाता है कि भारत का फिनटेक इकोसिस्टम अभी भी निवेशकों के लिए बेहद आकर्षक है।
- क्रेडिट कार्ड और UPI का मेल आने वाले समय में ग्राहकों की क्रेडिट उपयोग की आदतों को पूरी तरह बदल सकता है।
- अगर Kiwi अपने लक्ष्यों को हासिल कर लेता है, तो यह भारत के डिजिटल पेमेंट सेक्टर में Game Changer साबित हो सकता है। 🚀
👉 यह फंडिंग न सिर्फ Kiwi के लिए, बल्कि भारत के फिनटेक सेक्टर के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है। आने वाले वर्षों में क्रेडिट ऑन UPI का विस्तार भारतीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है।
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