भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में अक्सर नई-नई इनोवेशन देखने को मिलती हैं, लेकिन हर प्रयोग सफलता तक नहीं पहुँच पाता। ऐसा ही हुआ MyPickup के साथ, जो कि एक सब्सक्रिप्शन-बेस्ड इलेक्ट्रिक मोबिलिटी स्टार्टअप था। Inflection Point Ventures (IPV) के सपोर्ट से शुरू हुआ यह स्टार्टअप अब तीन साल के सफर के बाद बंद हो गया है।
कंपनी ने साफ कहा कि उसका मॉडल प्रोडक्ट-मार्केट फिट (PMF) हासिल नहीं कर पाया और लंबे समय तक टिकने के लिए जिस तरह की पेशेंट कैपिटल की ज़रूरत थी, उसकी कमी रही।
🛺 MyPickup का आइडिया: सब्सक्रिप्शन पर ई-रिक्शा
फरवरी 2023 में अभिजीत जगताप द्वारा शुरू किया गया MyPickup एक अनोखा कॉन्सेप्ट लेकर आया था।
- ग्राहक साप्ताहिक या मासिक सब्सक्रिप्शन प्लान ले सकते थे।
- इसमें ज़ीरो कैंसलेशन और नो सर्ज प्राइसिंग का वादा किया गया था।
- उद्देश्य था कि रोज़मर्रा के यात्रियों को फिक्स्ड और भरोसेमंद किराए पर सुविधा मिले।
यह मॉडल पारंपरिक ऑटो-रिक्शा और कैब सेवाओं के मुकाबले किफ़ायती और भरोसेमंद विकल्प बनने का दावा करता था।
📉 क्यों नहीं चला मॉडल?
कंपनी ने अपने तीन साल के सफर में चार बार बिज़नेस मॉडल बदला, लेकिन फिर भी अपेक्षित नतीजे नहीं मिले।
- नॉन-पीक टाइम्स में स्केलिंग की समस्या
- ग्राहकों को वादा किया गया अनुभव पूरा न हो पाना
- सीमित संख्या में वाहन और सब्सक्राइबर
मई 2025 तक कंपनी के पास:
- सिर्फ़ 19 गाड़ियाँ
- हर महीने लगभग 4,000 राइड्स
- 100 से भी कम सब्सक्राइबर थे
हालांकि कंपनी का 80% रिटेंशन रेट काफी मज़बूत था, लेकिन यह आंकड़े बड़े निवेशकों को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे।
💸 फंडिंग और निवेश की चुनौतियाँ
MyPickup ने जुलाई 2024 में Inflection Point Ventures (IPV) से $179,000 (करीब ₹1.5 करोड़) की सीड फंडिंग जुटाई थी।
- इस राशि से कंपनी ने लगभग एक साल तक संचालन जारी रखा।
- लेकिन बड़े फंडिंग राउंड्स के लिए कंपनी को संस्थागत निवेशक (institutional investors) नहीं मिल पाए।
निवेशकों के मुताबिक, इस मॉडल में स्केलेबिलिटी और प्रॉफिटेबिलिटी की संभावनाएँ सीमित थीं। यही वजह रही कि आगे की फंडिंग नहीं हो सकी।
🌍 इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर की सच्चाई
भारत का ईवी (EV) सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। सरकार भी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी और नीतिगत सहायता दे रही है। फिर भी कई स्टार्टअप्स को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है:
- चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी
- हाई ऑपरेशनल कॉस्ट
- ग्राहकों की सीमित स्वीकार्यता
- लॉन्ग-टर्म कैपिटल की अनुपलब्धता
MyPickup जैसी कंपनियाँ इन चुनौतियों से पार नहीं पा सकीं और अंततः उन्हें बंद करना पड़ा।
📌 MyPickup से सीख
MyPickup की कहानी स्टार्टअप्स के लिए कई सीख छोड़ती है:
- सिर्फ़ आइडिया इनोवेटिव होना काफी नहीं है, बल्कि उसे बाज़ार में स्केल और टिकाऊ बनाना भी ज़रूरी है।
- शुरुआती सफलता के बाद भी दीर्घकालिक पूंजी के बिना सर्वाइवल मुश्किल हो जाता है।
- ग्राहक अनुभव (CX) को निरंतर बेहतर करना किसी भी सब्सक्रिप्शन मॉडल के लिए अहम है।
📈 भविष्य की राह
हालांकि MyPickup का सफर यहाँ थम गया, लेकिन इससे जुड़े अनुभव भविष्य के उद्यमियों के लिए मार्गदर्शक साबित हो सकते हैं।
- भारत में शेयरिंग और सब्सक्रिप्शन-बेस्ड मॉडल्स की मांग अभी भी बनी हुई है।
- अगर बेहतर टेक्नोलॉजी, चार्जिंग नेटवर्क और कैपिटल सपोर्ट मिले, तो यह मॉडल फिर से सफल हो सकता है।
📝 निष्कर्ष
MyPickup का बंद होना इस बात का संकेत है कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर में इनोवेशन जितना ज़रूरी है, उतना ही आवश्यक है टिकाऊ बिज़नेस मॉडल और पर्याप्त फंडिंग।
👉 तीन साल के छोटे सफर में MyPickup ने यह साबित किया कि यात्रियों को किफ़ायती और भरोसेमंद विकल्प चाहिए, लेकिन बिना सही स्केलिंग स्ट्रेटेजी और लंबे समय तक निवेशकों का भरोसा पाए यह सफर अधूरा रह जाता है।
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