🚀 Kairon Capital ने अपने पहले वेंचर फंड का पहला क्लोज पूरा किया

Kairon Capital

भारत के तेजी से बढ़ते कंज़्यूमर स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक नया नाम तेजी से चर्चा में है — Kairon Capital 🏦। कंज़्यूमर‑फोकस्ड वेंचर कैपिटल फर्म Kairon Capital, जिसकी स्थापना दीपांकुर मल्होत्रा ने की है, ने अपने पहले फंड (Inaugural Fund) का पहला क्लोज सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है

💰 फंड का साइज और लक्ष्य

Kairon Capital का यह फंड कुल ₹150 करोड़ के लक्ष्य के साथ लॉन्च किया गया है, जिसमें ₹50 करोड़ का ग्रीनशू ऑप्शन भी शामिल है। खास बात यह है कि पहले क्लोज में ही फर्म ने अपने टारगेट का 60% से ज्यादा फंड जुटा लिया है 💪।
यह शुरुआती सफलता दिखाती है कि निवेशकों का भरोसा Kairon Capital और इसके विज़न पर मजबूत है।

👥 कौन हैं निवेशक?

इस फंड में निवेश करने वालों की लिस्ट भी काफी दमदार है ✨। इसमें शामिल हैं:

  • 🧑‍💼 कंज़्यूमर स्टार्टअप्स के फाउंडर्स
  • 🏠 फैमिली ऑफिसेज
  • 🏢 स्ट्रैटेजिक कॉरपोरेट इन्वेस्टर्स

इसके अलावा, कई जाने‑माने ब्रांड्स के फाउंडर्स ने भी इसमें निवेश किया है, जैसे:

  • Innovist
  • Plix
  • Livspace
  • XYXX

साथ ही, Emami Limited जैसी बड़ी FMCG कंपनी का सपोर्ट भी इस फंड को मिला है, जो इसकी विश्वसनीयता को और मजबूत बनाता है 📈।

🎯 निवेश की रणनीति क्या होगी?

Kairon Capital एक केंद्रित पोर्टफोलियो रणनीति अपनाने जा रही है। फर्म लगभग 14–15 स्टार्टअप्स में निवेश करने की योजना बना रही है।

📌 निवेश का फोकस:

  • Seed से Early Series A स्टेज
  • 💵 ₹2 करोड़ से ₹14 करोड़ तक का चेक साइज
  • 🔄 फॉलो‑ऑन राउंड्स के लिए भी पूंजी रिज़र्व

कंपनी ऐसे स्टार्टअप्स को चुनना चाहती है जिन्होंने:

  • ✔️ Product‑Market Fit हासिल कर लिया हो
  • ✔️ मजबूत Unit Economics दिखाई हो
  • ✔️ अलग और डिफरेंशिएटेड प्रोडक्ट पेश किया हो

हालांकि फंड कंज़्यूमर कैटेगरी में कैटेगरी‑अग्नॉस्टिक रहेगा, लेकिन ब्रांड‑बिल्डिंग और टिकाऊ बिज़नेस मॉडल पर खास ध्यान दिया जाएगा 🛍️।

🧠 दीपांकुर मल्होत्रा का अनुभव

Kairon Capital के फाउंडर दीपांकुर मल्होत्रा के पास निवेश की दुनिया का लंबा अनुभव है 📚। उन्होंने:

  • Investment Banking
  • Private Equity
  • Venture Capital

जैसे क्षेत्रों में काम किया है।

उनके पिछले निवेशों में शामिल हैं:

  • Innovist
  • FreshToHome
  • XYXX
  • Nat Habit

इतना ही नहीं, दीपांकुर मल्होत्रा Amazon में रहते हुए भी कंज़्यूमर‑फोकस्ड इन्वेस्टमेंट्स पर काम कर चुके हैं, जिससे उन्हें इस सेक्टर की गहरी समझ है 🛒।

🚦 निवेश की शुरुआत हो चुकी है

Kairon Capital ने सिर्फ फंड रेज़ करने तक खुद को सीमित नहीं रखा है। फर्म ने पूंजी तैनात करना शुरू कर दिया है और इस समय कई कंज़्यूमर स्टार्टअप्स का मूल्यांकन कर रही है 🔍।

उम्मीद की जा रही है कि आने वाले कुछ महीनों में Kairon Capital अपने पहले निवेशों की आधिकारिक घोषणा करेगी 📢।

🌱 भारतीय कंज़्यूमर स्टार्टअप्स के लिए क्या मायने?

भारत में कंज़्यूमर ब्रांड्स तेजी से उभर रहे हैं — चाहे वह D2C हो, FMCG हो या लाइफस्टाइल 🧴👕। ऐसे में Kairon Capital जैसे फंड का आना:

  • शुरुआती स्टार्टअप्स को सही मार्गदर्शन देगा
  • लॉन्ग‑टर्म ग्रोथ में मदद करेगा
  • फाउंडर्स को स्मार्ट कैपिटल और इंडस्ट्री एक्सपीरियंस देगा

🔮 आगे की राह

Kairon Capital का लक्ष्य सिर्फ निवेश करना नहीं, बल्कि मजबूत और टिकाऊ कंज़्यूमर ब्रांड्स तैयार करना है। यदि फर्म अपनी रणनीति पर सही तरीके से अमल करती है, तो यह भारत के कंज़्यूमर स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक अहम खिलाड़ी बन सकती है ⭐।

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Sugar.fit

डिजिटल हेल्थ और डायबिटीज़ मैनेजमेंट स्टार्टअप Sugar.fit ने वित्त वर्ष 2024–25 (FY25) में ज़बरदस्त राजस्व वृद्धि दर्ज की है 🚀। हालांकि, बढ़ते खर्चों के चलते कंपनी को अब भी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। Registrar of Companies (RoC) से प्राप्त वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, Sugar.fit की ऑपरेटिंग रेवेन्यू में साल-दर-साल 77% की तेज़ बढ़ोतरी देखने को मिली है।

💰 रेवेन्यू में रिकॉर्ड उछाल

FY25 में Sugar.fit का ऑपरेशनल रेवेन्यू ₹66.5 करोड़ रहा, जो FY24 में ₹37.5 करोड़ था 📊। अन्य आय (₹8.5 करोड़) को मिलाकर कंपनी की कुल आय ₹75 करोड़ तक पहुँच गई, जबकि पिछले साल यह ₹42 करोड़ थी।
कंपनी की कमाई का पूरा आधार उसकी डायबिटीज़ केयर सर्विसेज़ रही, जिसमें टेक्नोलॉजी और पर्सनलाइज़्ड ह्यूमन सपोर्ट को मिलाकर एक संपूर्ण हेल्थ प्रोग्राम पेश किया जाता है 🧑‍⚕️📱।

📢 खर्चों का बढ़ता दबाव

जहाँ एक ओर आमदनी तेज़ी से बढ़ी, वहीं दूसरी ओर खर्चों ने भी कंपनी पर दबाव बनाया।

  • विज्ञापन खर्च FY25 में ₹34 करोड़ रहा, जो कुल खर्च का लगभग 29% है 📺📣
  • कर्मचारी लाभ खर्च 18% बढ़कर ₹33 करोड़ हो गया, जो कुल खर्च का 28% हिस्सा है 👩‍💼👨‍💼

सबसे बड़ा उछाल कच्चे माल की लागत में देखा गया, जो FY24 में मात्र ₹0.6 करोड़ थी, लेकिन FY25 में बढ़कर ₹21 करोड़ हो गई ⚙️📦। इसके अलावा, कानूनी, प्रोफेशनल और अन्य ओवरहेड खर्चों पर कंपनी ने ₹24 करोड़ से अधिक खर्च किए।

इन सभी कारणों से Sugar.fit का कुल खर्च 31.5% बढ़कर ₹117 करोड़ तक पहुँच गया, जो FY24 में ₹89 करोड़ था।

📉 नुकसान में मामूली सुधार

अच्छी खबर यह है कि Sugar.fit ने अपने नुकसान को कुछ हद तक कम किया है 👍। FY25 में कंपनी का घाटा ₹42 करोड़ रहा, जो FY24 में ₹47 करोड़ था—यानी करीब 11% की कमी
हालांकि, कंपनी के फाइनेंशियल इंडिकेटर्स अब भी दबाव में हैं:

  • EBITDA मार्जिन: -68.27%
  • ROCE: -53.66%

यूनिट इकॉनॉमिक्स में सुधार ज़रूर दिखता है। FY25 में कंपनी को ₹1 कमाने के लिए ₹1.76 खर्च करने पड़े, जबकि FY24 में यही आंकड़ा ₹2.37 था 📉➡️📈।

🏦 कैश पोज़िशन और बैलेंस शीट

Sugar.fit की कैश और बैंक बैलेंस FY25 के अंत में घटकर ₹1 करोड़ रह गई, जो एक साल पहले ₹5.6 करोड़ थी 💸।
हालाँकि, कंपनी के करंट एसेट्स ₹101 करोड़ के स्तर पर बने हुए हैं, जो उसके ऑपरेशन्स को कुछ हद तक सपोर्ट देते हैं।

🤝 फंडिंग और निवेशकों का भरोसा

TheKredible के अनुसार, Sugar.fit अब तक कुल $26 मिलियन की फंडिंग जुटा चुकी है 💵। इसके प्रमुख निवेशकों में MassMutual Ventures और Tanglin Venture शामिल हैं।
निवेशकों का भरोसा इस बात पर टिका है कि भारत में डायबिटीज़ का बाज़ार बेहद विशाल है 🌏🇮🇳।

🇮🇳 भारत: डायबिटीज़ का बड़ा बाज़ार

भारत को अक्सर “डायबिटीज़ कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड” कहा जाता है। करोड़ों लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं, और यही Sugar.fit के लिए सबसे बड़ा अवसर है 🩸📊।
कंपनी के पास जैसे‑जैसे यूज़र बेस बढ़ेगा, वैसे‑वैसे उसके पास हेल्थ डेटा, इनसाइट्स और लर्निंग्स का बड़ा खज़ाना तैयार होगा, जो भविष्य में वैल्यू क्रिएशन में मदद कर सकता है 🧠📈।

⚠️ चुनौतियाँ भी कम नहीं

हालांकि रास्ता आसान नहीं है। भारत में हेल्थ और फिटनेस सॉल्यूशंस की भरमार है, जो हर बजट के हिसाब से उपलब्ध हैं 💊📦। ऐसे में लोगों की पेइंग कैपेसिटी सीमित है और कड़ी प्रतिस्पर्धा बनी हुई है।
Sugar.fit के लिए मुनाफ़े तक पहुँचना एक लंबी और कठिन चढ़ाई साबित हो सकती है ⛰️।

🔮 आगे की राह

Sugar.fit एक ऐसा स्टार्टअप है जहाँ नंबर आज भले ही कमजोर लगें, लेकिन बाज़ार का आकार और लॉन्ग‑टर्म संभावनाएँ निवेशकों को आकर्षित करती हैं ⏳✨।
यह कंपनी उन निवेशकों के लिए उपयुक्त मानी जा सकती है जो लंबे समय का नजरिया रखते हैं और डिजिटल हेल्थ सेक्टर में धैर्य के साथ दांव लगाना चाहते हैं 🧩💡।

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AI grabs

रोबोटिक्स सेक्टर अब सिर्फ भविष्य की कल्पना नहीं रहा, बल्कि यह तेज़ी से हमारे रोज़मर्रा के जीवन का हिस्सा बनने की ओर बढ़ रहा है। इसी बदलाव की एक बड़ी मिसाल है Skild AI grabs जिसने हाल ही में $1.4 बिलियन (करीब ₹11,600 करोड़) की भारी-भरकम फंडिंग जुटाकर टेक और स्टार्टअप दुनिया में हलचल मचा दी है।

इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व SoftBank Group ने किया है, जबकि इसमें Jeff BezosNVIDIA की NVenturesMacquarie CapitalLightspeedSequoia CapitalCoatue, और Felicis जैसे दिग्गज निवेशकों ने भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। इस निवेश के बाद Skild AI का वैल्यूएशन $14 बिलियन से ज्यादा हो गया है।


🚀 रोबोटिक्स में “फाउंडेशनल शिफ्ट” की शुरुआत

इस फंडिंग को सिर्फ एक निवेश नहीं, बल्कि रोबोटिक्स इंडस्ट्री में एक बुनियादी बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। Skild AI का मानना है कि आने वाले वर्षों में रोबोट सिर्फ फैक्ट्रियों या गोदामों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि घरों, ऑफिसों और सार्वजनिक जगहों पर भी इंसानों के साथ काम करेंगे।

हालांकि कंपनी की शुरुआत एंटरप्राइज एप्लिकेशंस से होगी—जैसे मैन्युफैक्चरिंग, वेयरहाउस, सिक्योरिटी और कंस्ट्रक्शन—लेकिन लंबी अवधि में इसका लक्ष्य कंज़्यूमर होम्स तक रोबोटिक्स को पहुंचाना है।


🧠 Skild Brain: हर रोबोट के लिए एक यूनिवर्सल दिमाग

Skild AI की सबसे बड़ी ताकत है उसका Skild Brain—एक ऐसा omni-bodied foundation model जो अलग-अलग तरह के रोबोट्स को बिना दोबारा ट्रेनिंग के कंट्रोल कर सकता है।

चाहे वह:

  • चार पैरों वाला रोबोट (Quadruped) हो
  • ह्यूमनॉइड रोबोट
  • रोबोटिक आर्म
  • या मोबाइल मैनिपुलेटर

Skild Brain हर बॉडी टाइप और हर काम के अनुसार खुद को ढाल सकता है। किचन साफ़ करने से लेकर भारी सामान उठाने, अस्थिर ज़मीन पर चलने या इंडस्ट्रियल साइट्स पर काम करने तक—एक ही दिमाग, कई काम


📉 डेटा की कमी को कैसे किया दूर?

रोबोटिक्स की सबसे बड़ी चुनौती रही है डेटा की कमी। इंसानों के लिए इंटरनेट जैसा कोई “ओपन फिज़िकल डेटा” रोबोट्स के लिए मौजूद नहीं है। Skild AI ने इस समस्या का हल एक अनोखे तरीके से निकाला।

कंपनी अपने मॉडल को:

  • इंसानों के मूवमेंट वाले वीडियो डेटा
  • और फिज़िक्स-बेस्ड सिमुलेशन

पर ट्रेन करती है। इससे रोबोट मानव व्यवहार को समझना सीखते हैं और फिर सिमुलेटेड दुनिया में प्रैक्टिस करते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि Skild Brain में जनरल फिज़िकल इंटेलिजेंस विकसित हो जाती है।


🔧 बिना री-ट्रेनिंग के खुद को ढालने की क्षमता

Skild Brain की एक खास बात यह है कि अगर:

  • रोबोट का पहिया जाम हो जाए
  • कोई अंग काम करना बंद कर दे
  • या रोबोट की बॉडी पूरी तरह बदल जाए

तो भी मॉडल री-ट्रेनिंग के बिना खुद को एडजस्ट कर लेता है। यह क्षमता रोबोट्स को उन अनियंत्रित और जटिल वातावरणों में भी काम करने योग्य बनाती है, जहाँ आज के ज़्यादातर रोबोट फेल हो जाते हैं।


👨‍🔬 कौन हैं Skild AI के फाउंडर्स?

Skild AI की स्थापना 2023 में Deepak Pathak और Abhinav Gupta ने की थी। दोनों इससे पहले Carnegie Mellon University में प्रोफेसर थे और उन्होंने वर्षों की रिसर्च को कमर्शियल रूप देने के लिए अकादमिक दुनिया छोड़ी।

कंपनी की टीम में Meta, Tesla, Nvidia, Amazon, Google, Stanford और UC Berkeley जैसे संस्थानों से आए टैलेंट शामिल हैं, जो रिसर्च और प्रोडक्शन—दोनों में माहिर हैं।


📈 ज़ीरो से $30 मिलियन रेवेन्यू तक का सफर

Skild AI कोई दूर की रिसर्च लैब नहीं है। साल 2025 में कंपनी ने कुछ ही महीनों में ज़ीरो से लगभग $30 मिलियन का रेवेन्यू हासिल किया।

आज इसके सिस्टम्स का इस्तेमाल:

  • सिक्योरिटी पेट्रोलिंग
  • फैसेलिटी इंस्पेक्शन
  • वेयरहाउस और मैन्युफैक्चरिंग
  • डेटा सेंटर्स
  • और कंस्ट्रक्शन साइट्स

में किया जा रहा है।


🌍 इंसानों के साथ काम करने वाले रोबोट्स की ओर कदम

Skild AI का सपना है कि रोबोट्स सिर्फ ऑटोमेशन टूल नहीं, बल्कि इंसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने वाले सहयोगी बनें।

CEO Deepak Pathak के अनुसार,

“हम ऐसा यूनिवर्सल ब्रेन बना रहे हैं जो हर डिप्लॉयमेंट के साथ और बेहतर होता जाए—चाहे हार्डवेयर कोई भी हो या काम कुछ भी।”


🔮 भविष्य की झलक

अगर Skild AI अपनी योजना के अनुसार Skild Brain को स्केल कर पाती है, तो यह Physical AI की दुनिया में वही बदलाव ला सकती है, जो GPT जैसे मॉडल्स ने डिजिटल दुनिया में किया है।

रोबोटिक्स अब सवाल नहीं है कि होगी या नहीं, सवाल है—कितनी जल्दी और कितनी स्मार्ट होगी।
और Skild AI इस बदलाव की अगुवाई करता नज़र आ रहा है।

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RenewCred

जलवायु परिवर्तन 🌍 आज पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है। बढ़ते कार्बन उत्सर्जन को कम करने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए अब सिर्फ नीतियां ही नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी आधारित समाधान भी जरूरी हो गए हैं। इसी दिशा में काम कर रहा है बेंगलुरु स्थित Climate Tech Startup RenewCred, जिसने हाल ही में ₹4.25 करोड़ की सीड फंडिंग जुटाई है 💰।

यह फंडिंग राउंड इक्विटी और ग्रांट्स के मिश्रण से पूरा हुआ है, जिसका नेतृत्व Campus Angels Network ने किया है। इस राउंड में Kairos Early Opportunity Fundbuild3 Startup StudioVentureStudio Ahmedabad UniversityIdeashacks Investor NetworkACT Capital FoundationSocial Innovation Lab (Citi Bank–IIT Kanpur) और कई अनुभवी एंजेल इन्वेस्टर्स ने भी हिस्सा लिया है 🤝।


💡 फंडिंग का कैसे होगा इस्तेमाल?

RenewCred के अनुसार, इस ताजा निवेश का उपयोग कंपनी अपने कार्बन क्रेडिट मेथडोलॉजीज़ को और मजबूत करने, अपने Net Zero डिजिटल प्लेटफॉर्म को स्केल करने, और ऐसे कार्बन क्रेडिट्स डिलीवर करने में करेगी, जिन पर खरीदारों और रेगुलेटर्स दोनों को पूरा भरोसा हो सके ✅।

आज के समय में कार्बन क्रेडिट मार्केट में सबसे बड़ी समस्या ग्रीनवॉशिंग और भरोसे की कमी है। RenewCred का लक्ष्य इसी समस्या को टेक्नोलॉजी के जरिए खत्म करना है 🔍।


🚀 RenewCred क्या करता है?

RenewCred की स्थापना वर्ष 2024 में Abhimanyu Rathi ने की थी। यह बेंगलुरु आधारित स्टार्टअप हाई-इंटीग्रिटी कार्बन क्रेडिट्स के लिए टेक्नोलॉजी-ड्रिवन इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा है।

कंपनी Advanced MRV (Monitoring, Reporting & Verification) सिस्टम पर काम करती है, जिसे:

  • 🌐 IoT
  • 🤖 Machine Learning
  • 🔗 Blockchain

जैसी आधुनिक टेक्नोलॉजीज़ से सपोर्ट किया गया है। इसका उद्देश्य कार्बन मार्केट को ज्यादा पारदर्शी, कुशल और सभी के लिए सुलभ बनाना है, खासकर Global South के छोटे और टेक्नोलॉजी-आधारित प्रोजेक्ट डेवलपर्स के लिए।


🧠 Net Zero प्लेटफॉर्म की खास बातें

RenewCred का Net Zero डिजिटल प्लेटफॉर्म पारंपरिक, डॉक्यूमेंट-हैवी सिस्टम से बिल्कुल अलग है 📊। यह प्लेटफॉर्म:

  • हर एक कार्बन क्रेडिट की लगातार मॉनिटरिंग करता है
  • 📈 रियल-टाइम रिपोर्टिंग और वेरिफिकेशन देता है
  • 🔍 प्रत्येक क्रेडिट को इंडिविजुअल लेवल पर ट्रैक करता है

इस प्लेटफॉर्म को एक मजबूत डोमेन एक्सपर्ट नेटवर्क सपोर्ट करता है, जो अलग-अलग सेक्टर्स के लिए विशेष मेथडोलॉजीज़ तैयार करता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि हर कार्बन क्रेडिट मापने योग्य, सुरक्षित और वैश्विक जांच के योग्य हो 🌍।


⚙️ किन सेक्टर्स पर रहेगा फोकस?

RenewCred आने वाले समय में नॉन-नेचर बेस्ड कार्बन क्रेडिट्स पर खास ध्यान देगा। कंपनी का फोकस इन क्षेत्रों पर रहेगा 👇

  • 🌿 Biochar
  • 🚗 EV Fleets
  • ⚡ Renewable Energy
  • 🔥 Methane Reduction
  • ⛽ Clean Fuels
  • 🏭 Industrial Decarbonisation

इन सेक्टर्स में टेक्नोलॉजी आधारित कार्बन क्रेडिट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है, खासकर इंटरनेशनल मार्केट्स में 🌎।


🇮🇳 भारत को बनाएगा ग्लोबल कार्बन हब

RenewCred का बड़ा विज़न भारत को हाई-इंटीग्रिटी, टेक्नोलॉजी-वेरिफाइड कार्बन क्रेडिट्स का एक भरोसेमंद ग्लोबल सोर्स बनाना है 🌟। कंपनी का मानना है कि भारत में टेक्नोलॉजी-ड्रिवन क्लाइमेट सॉल्यूशंस के लिए अपार संभावनाएं हैं।

स्टार्टअप अपने डिजिटल MRV और रजिस्ट्री प्लेटफॉर्म को स्केल करते हुए अधिक से अधिक प्रोजेक्ट डेवलपर्स और कार्बन क्रेडिट खरीदारों को जोड़ना चाहता है।


⏳ इसी तिमाही में पहला कार्बन क्रेडिट

RenewCred ने जानकारी दी है कि वह इसी तिमाही में अपने पहले कार्बन क्रेडिट्स जारी करेगा 🧾। कंपनी का दावा है कि उसका प्लेटफॉर्म:

  • ⏱️ वेरिफिकेशन टाइमलाइन को 75% तक घटाता है
  • 💸 ट्रांजैक्शन कॉस्ट को 50% से ज्यादा कम करता है
  • 🔐 ट्रस्ट और ऑडिटेबिलिटी को काफी बेहतर बनाता है

यह सब लाइव डेटा स्ट्रीम्स, साइंटिफिक मॉडल्स और ऑटोमेटेड चेक्स की मदद से संभव होता है।


🎯 लंबी अवधि का लक्ष्य

RenewCred ने अगले 14 वर्षों में 2 गीगाटन ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन हटाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है 🌱। अगर यह लक्ष्य हासिल होता है, तो यह ग्लोबल क्लाइमेट एक्शन में भारत की भूमिका को और मजबूत करेगा।


🔍 निष्कर्ष

नई फंडिंग के साथ RenewCred भारत के Climate Tech Ecosystem में तेजी से उभरता हुआ नाम बन रहा है। टेक्नोलॉजी, पारदर्शिता और भरोसे पर आधारित इसका मॉडल आने वाले समय में इसे एक ग्लोबल क्लाइमेट टेक लीडर बना सकता है 🌍🚀।

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Truva

भारत के तेजी से बदलते रियल एस्टेट सेक्टर में टेक्नोलॉजी की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है 🚀। इसी कड़ी में Proptech Startup Truva ने बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए $9 मिलियन (करीब ₹78 करोड़) की फंडिंग जुटाई है 💰। यह फंडिंग राउंड Stellaris Venture Partners और Orios Venture Partners द्वारा को-लीड किया गया है।

इस राउंड में कुल निवेश का $7.3 मिलियन इक्विटी के रूप में आया है, जबकि $1.7 मिलियन वेंचर डेट के तौर पर Stride Ventures से जुटाया गया है। इसके साथ ही इस राउंड में कई चर्चित एंजेल इन्वेस्टर्स भी शामिल हुए हैं, जिनमें 🧑‍💼 Myntra के फाउंडर मुकेश बंसलRamakant SharmaAakrit Vaish और Miten Sampat जैसे नाम शामिल हैं।


📍 नए फंड का कहां होगा इस्तेमाल?

Truva ने बताया कि इस ताज़ा निवेश का इस्तेमाल कंपनी अपने बिजनेस को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए करेगी 🔥। सबसे पहले, कंपनी मुंबई में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करेगी 🏙️। इसके अलावा, Truva अब दिल्ली-NCR और बेंगलुरु जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते रियल एस्टेट बाजारों में एंट्री करने की तैयारी कर रही है।

साथ ही, कंपनी अपने रियल एस्टेट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म को और बेहतर बनाएगी 🤖📊। इसमें डेटा एनालिटिक्स, प्रॉपर्टी इनसाइट्स और खरीदारों के लिए फैसले लेना आसान बनाने वाले फीचर्स को और मजबूत किया जाएगा। Truva इस फंड का इस्तेमाल स्टेजिंग, लीगल चेक्स और ट्रांजैक्शन एग्जीक्यूशन को स्केल करने के लिए इन्वेंटरी-लिंक्ड वर्किंग कैपिटल सपोर्ट में भी करेगी।


🏡 क्या करती है Truva?

Truva की स्थापना साल 2023 में Puneet Arora, Monil Singhal और Ankit Gupta ने की थी 👨‍💻👨‍💻👨‍💻। यह स्टार्टअप रियल एस्टेट सेक्टर में सिर्फ प्रॉपर्टी लिस्टिंग नहीं, बल्कि एंड-टू-एंड होम बाइंग एक्सपीरियंस देने पर फोकस करता है।

Truva के प्लेटफॉर्म पर यूज़र्स को मिलती हैं कई एडवांस्ड सुविधाएं, जैसे👇
✨ नैचुरल लाइट स्कोर
🔊 नॉइज़ रेटिंग
🏠 3D वर्चुअल टूर
📸 हाई-क्वालिटी फोटो और वीडियो
📝 फाइनेंसिंग, डॉक्यूमेंटेशन और रजिस्ट्रेशन में सहायता

इन सभी फीचर्स का मकसद घर खरीदने की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी, भरोसेमंद और तनाव-मुक्त बनाना है 😊।


📊 मुंबई में मजबूत पकड़

Truva ने फिलहाल मुंबई के 7 माइक्रो मार्केट्स में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है 📍। कंपनी के अनुसार, उसने अब तक ₹500 करोड़ से अधिक मूल्य के घर खरीदे हैं और ₹300 करोड़ से ज्यादा की रीसेल इन्वेंट्री सफलतापूर्वक बेची है।

अब तक Truva ने 200 से ज्यादा खरीदारों और विक्रेताओं के साथ डील्स पूरी की हैं 🤝। कंपनी ने बीते एक साल में 6 गुना सालाना वृद्धि (YoY Growth) दर्ज की है 📈 और अगले एक साल में ₹1,000 करोड़ से अधिक के एनुअलाइज्ड GMV को पार करने का लक्ष्य रखा है 🎯।


🌐 Proptech सेक्टर में बढ़ता निवेश

Entrackr की Annual Report के मुताबिक, साल 2025 में भारत के प्रॉपटेक स्टार्टअप्स ने कुल $368 मिलियन की फंडिंग जुटाई 💵। यह निवेश 31 डील्स के ज़रिए आया और कुल स्टार्टअप फंडिंग का करीब 2.82% हिस्सा रहा।

यह आंकड़े साफ दिखाते हैं कि भले ही प्रॉपटेक सेक्टर अभी उभर रहा हो, लेकिन निवेशकों का भरोसा इस सेक्टर में तेजी से बढ़ रहा है 🚀। Truva जैसी कंपनियां इस बदलाव की अगुवाई कर रही हैं।


📉 शुरुआती चरण में भी मजबूत ग्रोथ

मार्च 2024 को समाप्त वित्त वर्ष में Truva ने ₹10.88 लाख का ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज किया, जबकि कंपनी को ₹10.30 लाख का घाटा हुआ 📑। यह दर्शाता है कि कंपनी अभी अर्ली-स्टेज और प्री-रेवेन्यू फेज में है।

हालांकि, कंपनी ने अभी तक FY25 के फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स फाइल नहीं किए हैं, लेकिन मजबूत निवेशक समर्थन और तेजी से बढ़ते ऑपरेशन्स इसके भविष्य को लेकर सकारात्मक संकेत देते हैं 👍।


🔮 आगे की राह

नई फंडिंग के साथ Truva अब भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में एक टेक-ड्रिवन, डेटा-बेस्ड और कस्टमर-सेंट्रिक प्लेटफॉर्म के रूप में खुद को स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है 🌟।

अगर कंपनी अपने विस्तार और टेक्नोलॉजी विज़न को सही तरीके से लागू कर पाती है, तो आने वाले समय में Truva भारत के टॉप Proptech Startups में शामिल हो सकती है 🏆।

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Aule

भारत का स्पेस स्टार्टअप इकोसिस्टम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और इसी कड़ी में डीप-टेक स्पेस स्टार्टअप Aule Space ने एक अहम उपलब्धि हासिल की है। बेंगलुरु स्थित इस स्टार्टअप ने प्री-सीड फंडिंग राउंड में $2 मिलियन (करीब ₹16–17 करोड़) जुटाए हैं। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व pi Ventures ने किया है, जबकि इसमें कई जाने-माने एंजेल इनवेस्टर्स जैसे ईश सुंदरम, अरविंद लक्ष्मीकुमार सहित अन्य निवेशकों ने भी भाग लिया है। 💰✨

🛰️ Aule Space क्या करता है?

Aule Space एक अत्याधुनिक स्पेस टेक्नोलॉजी स्टार्टअप है जो ऐसे स्मार्ट सैटेलाइट्स विकसित कर रहा है, जो अंतरिक्ष में मौजूद दूसरे सैटेलाइट्स के पास जाकर उनसे जुड़ (dock) सकते हैं। इस तकनीक की मदद से:

  • पुराने और महंगे सैटेलाइट्स की उम्र बढ़ाई जा सकती है ⏳
  • अंतरिक्ष में सैटेलाइट्स का करीब से निरीक्षण किया जा सकता है 🔍
  • खराब या बेकार हो चुके सैटेलाइट्स को सुरक्षित तरीके से रिटायर किया जा सकता है ♻️

यह तकनीक अंतरिक्ष को ज्यादा टिकाऊ (sustainable) और कम खर्चीला बनाने में मदद करेगी।

👨‍🚀 संस्थापकों की सोच और शुरुआत

Aule Space की स्थापना 2024 में जय पंचाल, नित्या गिरी और हृषित तांबी ने मिलकर की थी। तीनों संस्थापक अंतरिक्ष तकनीक और इंजीनियरिंग में गहरी समझ रखते हैं। स्टार्टअप को शुरुआती दौर में Entrepreneurs First accelerator प्रोग्राम और Transpose Platform का भी सहयोग मिला है, जिससे इसकी तकनीकी नींव और मज़बूत हुई है। 🧠🚀

🔧 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

Aule Space ने बताया कि इस नई फंडिंग का उपयोग कई अहम क्षेत्रों में किया जाएगा:

  • 👩‍💻 इंजीनियरिंग टीम का विस्तार
  • 🏗️ डॉकिंग टेस्ट के लिए ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना
  • 🛰️ पहले डेमो सैटेलाइट्स का विकास, जिन्हें अगले साल लॉन्च किया जाएगा

ये डेमो सैटेलाइट्स कंपनी की तकनीक को असल अंतरिक्ष परिस्थितियों में साबित करेंगे।

🧲 अनोखी तकनीक: ऑटोनॉमस “जेटपैक” सैटेलाइट

Aule Space की सबसे खास तकनीक इसका ऑटोनॉमस जेटपैक सैटेलाइट है। यह सैटेलाइट:

  • GEO (Geostationary Orbit) में मौजूद सैटेलाइट्स से जुड़ सकता है
  • उनसे अटैच होकर उनकी कक्षा (orbit) को बनाए रखता है
  • ईंधन की कमी से जूझ रहे सैटेलाइट्स की लाइफ 6 साल तक बढ़ा सकता है ⛽➡️⏳

यह समाधान सैटेलाइट फ्यूल की बड़ी समस्या को हल करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

🤖 RPOD तकनीक और AI का इस्तेमाल

Aule Space के आने वाले सैटेलाइट्स RPOD (Rendezvous, Proximity Operations and Docking) तकनीक को वैलिडेट करेंगे। यह तकनीक सैटेलाइट्स को सुरक्षित रूप से:

  • पास आने
  • एक-दूसरे के चारों ओर मूव करने
  • और फिजिकली जुड़ने में सक्षम बनाती है

इसके साथ ही स्टार्टअप AI आधारित Guidance, Navigation और Control (GNC) एल्गोरिद्म का उपयोग कर रहा है, जिससे ये सैटेलाइट्स हल्के, स्मार्ट और कम लागत वाले बनेंगे। 🧠🤖

🌍 भविष्य की योजना: स्पेस में रोबोटिक वर्कफोर्स

Aule Space का विज़न सिर्फ डेमो सैटेलाइट्स तक सीमित नहीं है। कंपनी भविष्य में:

  • कमर्शियल RPOD सैटेलाइट्स लॉन्च करना चाहती है
  • अंतरिक्ष के लिए एक रोबोटिक वर्कफोर्स तैयार करने का सपना देख रही है 🤖🌌

यह वर्कफोर्स सैटेलाइट मेंटेनेंस, रिपेयर और स्पेस डेब्रिस मैनेजमेंट जैसे कामों में इस्तेमाल हो सकती है।

🇮🇳 भारत और वैश्विक प्रतिस्पर्धा

भारत में इस क्षेत्र में काम करने वाली अन्य कंपनियों में:

  • Orbitaid – सैटेलाइट रीफ्यूलिंग इंटरफेस पर काम करती है
  • Inspecity – LEO (Low Earth Orbit) मार्केट पर फोकस
  • Cosmoserve – स्पेस डेब्रिस रिमूवल पर काम

वहीं वैश्विक स्तर पर Northrop Grumman जैसी कंपनी ने पहले ही एक पुराने सैटेलाइट की उम्र 5 साल तक बढ़ाने में सफलता हासिल की है, हालांकि इसकी लागत काफी ज़्यादा रही है। 💸

✨ निष्कर्ष

Aule Space की यह फंडिंग भारतीय स्पेस स्टार्टअप्स के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है। यह दिखाता है कि भारत न सिर्फ सैटेलाइट लॉन्चिंग बल्कि अंतरिक्ष में सर्विसिंग और सस्टेनेबिलिटी जैसे एडवांस्ड क्षेत्रों में भी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में Aule Space जैसे स्टार्टअप्स भारत को ग्लोबल स्पेस टेक्नोलॉजी लीडर बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। 🇮🇳🚀

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🏠Snabbit ने Pync की फाउंडिंग टीम के साथ मिलाया हाथ

Snabbit

भारत में तेजी से बढ़ते क्विक होम सर्विसेज मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए Snabbit ने बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने घोषणा की है कि वह स्टार्टअप Pync की फाउंडिंग टीम के साथ मिलकर काम करेगी। इस रणनीतिक acquihire के जरिए Snabbit न केवल अनुभवी टैलेंट को अपने साथ जोड़ रहा है, बल्कि अपने ऑपरेशंस और बिजनेस स्केल को भी तेज़ी से बढ़ाने की तैयारी में है।

👥 Pync की फाउंडिंग टीम Snabbit में शामिल

इस अधिग्रहण के तहत Pync के को-फाउंडर्स — हर्ष प्रतीक, मयंक एस और देव प्रियंम अब Snabbit का हिस्सा बनेंगे। ये तीनों Snabbit में ऑपरेशंस और बिजनेस से जुड़े सीनियर रोल्स संभालेंगे। कंपनी का मानना है कि Pync टीम की मजबूत ग्राउंड-लेवल समझ और lean execution मॉडल, Snabbit को तेजी से विस्तार करने में मदद करेगा।

🚗 कार क्लीनिंग से क्विक होम सर्विस तक का सफर

2023 में शुरू हुआ Pync शुरुआत में एक कार-क्लीनिंग सब्सक्रिप्शन स्टार्टअप था। बाद में कंपनी ने अपने बिजनेस मॉडल में बदलाव करते हुए क्विक होम सर्विसेज की ओर रुख किया। इस दौरान Pync ने Accel, Bharat Founders Fund और Betterindustries जैसे निवेशकों से करीब 20 लाख डॉलर (लगभग ₹16-17 करोड़) की सीड फंडिंग भी जुटाई।

हालांकि, ब्रांड को बंद करने से पहले Pync की सेवाएं सिर्फ बेंगलुरु तक सीमित थीं, लेकिन इसके बावजूद स्टार्टअप ने 25,000 से ज्यादा घरों को सेवा दी और 1,000 से अधिक सर्विस प्रोफेशनल्स के साथ काम किया। यह आंकड़े Pync की मजबूत ऑपरेशनल क्षमता को दर्शाते हैं।

🤝 समान सोच, समान लक्ष्य

Pync के को-फाउंडर हर्ष प्रतीक ने कहा कि Snabbit और Pync दोनों टीमों की सोच काफ़ी हद तक एक जैसी है — खासकर ऑपरेशंस और कस्टमर एक्सपीरियंस को लेकर। उनका मानना है कि Pync की फुर्तीली टीम और Snabbit के बड़े स्केल को मिलाकर एक मजबूत और तेज़ी से बढ़ने वाला प्लेटफॉर्म तैयार किया जा सकता है।

उनके अनुसार, यह साझेदारी Snabbit को नए शहरों में तेजी से विस्तार करने और बेहतर सर्विस डिलीवरी देने में मदद करेगी।

💰 Snabbit की बड़ी फंडिंग की तैयारी

यह डील ऐसे समय पर हुई है जब Snabbit लगभग 100 मिलियन डॉलर (₹830 करोड़ से ज्यादा) की बड़ी फंडिंग राउंड पर बातचीत कर रहा है। इस डेवलपमेंट की रिपोर्ट Entrackr ने पिछले साल अक्टूबर में एक्सक्लूसिव तौर पर की थी।

अब तक Snabbit ने Elevation Capital और Nexus Venture Partners जैसे बड़े निवेशकों से 25 मिलियन डॉलर से अधिक की फंडिंग जुटा ली है। आने वाली फंडिंग से कंपनी अपने टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म, लॉजिस्टिक्स और सर्विस नेटवर्क को और मजबूत करना चाहती है।

⚔️ Urban Company से सीधी टक्कर

Snabbit का यह कदम उसे अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंदी Urban Company के मुकाबले मजबूत स्थिति में लाने की दिशा में देखा जा रहा है। हाल ही में Urban Company भारतीय शेयर बाजार में लिस्ट हुआ है और वह इस सेक्टर का मार्केट लीडर माना जाता है।

इसके अलावा Snabbit को Pronto जैसी नई कंपनियों से भी चुनौती मिल रही है, जो सिर्फ 10 मिनट में होम हेल्प सर्विस देने का दावा करती हैं। Pronto ने हाल ही में 11 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई है, जिसमें General Catalyst और Glade Brook Capital जैसे निवेशक शामिल हैं।

🚀 आगे क्या?

Pync की अनुभवी टीम, संभावित बड़ी फंडिंग और बढ़ते बाजार को देखते हुए Snabbit आने वाले समय में क्विक होम सर्विसेज सेक्टर का बड़ा खिलाड़ी बन सकता है। भारत में शहरीकरण, ड्यूल-इनकम फैमिली और ऑन-डिमांड सेवाओं की बढ़ती मांग इस सेक्टर को लगातार आगे बढ़ा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह बाजार और ज्यादा प्रतिस्पर्धी होगा, जहां टेक्नोलॉजी, स्पीड और भरोसेमंद सर्विस सबसे बड़ा फर्क पैदा करेंगे।

📝 निष्कर्ष

Snabbit और Pync की यह साझेदारी सिर्फ एक acquihire नहीं, बल्कि रणनीतिक विस्तार का संकेत है। अनुभवी टैलेंट, मजबूत फंडिंग और स्पष्ट विज़न के साथ Snabbit भारत के क्विक होम सर्विसेज मार्केट में अपनी पहचान और मजबूत करने की ओर बढ़ रहा है।

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🚗 Cars24 का दमदार प्रदर्शन FY26 की पहली छमाही में रेवेन्यू 18% बढ़ा,

Cars24

डिजिटल ऑटोमोटिव मार्केटप्लेस Cars24 ने वित्त वर्ष 2025‑26 (FY26) की पहली छमाही में शानदार और संतुलित प्रदर्शन दर्ज किया है 📊। कंपनी के परफॉर्मेंस अपडेट के अनुसार, Cars24 का adjusted net revenue सालाना आधार पर 18% बढ़कर ₹651 करोड़ तक पहुंच गया है। यह ग्रोथ ऐसे समय में आई है जब कुल वाहन लेन‑देन का GMV लगभग स्थिर रहा।

यह साफ संकेत देता है कि Cars24 अब केवल तेज़ ग्रोथ नहीं, बल्कि लाभदायक और टिकाऊ बिज़नेस मॉडल पर फोकस कर रहा है 💡।


📉 घाटे में 36% की कमी, लागत नियंत्रण बना सबसे बड़ा कारण

Cars24 के लिए इस अवधि की सबसे बड़ी उपलब्धि रही adjusted EBITDA loss में 36% की गिरावट
H1 FY26 में कंपनी का घाटा घटकर ₹162 करोड़ रह गया।

कंपनी के अनुसार, इस सुधार के पीछे मुख्य कारण रहे👇
✅ सख्त cost control
✅ ऑटोमेशन और AI का बढ़ता इस्तेमाल 🤖
✅ ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार

खास बात यह रही कि रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद ऑपरेटिंग खर्च लगभग स्थिर रहकर ₹719 करोड़ पर बना रहा, जो मैनेजमेंट की मजबूत रणनीति को दिखाता है।


🔄 GMV में हल्की गिरावट, लेकिन रणनीति बदली

H1 FY26 में Cars24 का कुल vehicle transaction GMV 5% घटकर ₹3,731 करोड़ रहा। हालांकि, यह किसी कमजोरी की बजाय कंपनी की बदली हुई रणनीति का नतीजा है।

अब Cars24 wholesale की बजाय retail transactions पर ज्यादा फोकस कर रहा है 🏪➡️💰।
इसका असर साफ दिखा:

📈 Retail GMV 21% बढ़कर ₹2,009 करोड़
📊 कुल GMV में रिटेल की हिस्सेदारी 50% से ज्यादा
💹 रिटेल मार्जिन बढ़कर 19.3%

यह रणनीति Cars24 को मुनाफे के रास्ते पर तेज़ी से आगे बढ़ा रही है।


🌍 भारत सहित 3 देशों में 85,000 कार ट्रांजैक्शन

Cars24 ने H1 FY26 में भारत, UAE और ऑस्ट्रेलिया में मिलाकर करीब 85,000 कार ट्रांजैक्शन पूरे किए 🚘🌏।
कंपनी को उम्मीद है कि पूरे FY26 में यह आंकड़ा 1.8 लाख ट्रांजैक्शन को पार कर जाएगा।


💰 फाइनेंसिंग और सर्विसेज बिज़नेस में तेज़ उछाल

Cars24 का फाइनेंसिंग सेगमेंट भी तेजी से बढ़ा है 📈।

🔹 लोन और फाइनेंसिंग 38% बढ़कर ₹1,637 करोड़
🔹 व्हीकल ओनरशिप सर्विसेज (इंश्योरेंस, इंस्पेक्शन, बायबैक आदि) का GMV
👉 19 गुना बढ़कर ₹94 करोड़

यह दिखाता है कि Cars24 अब सिर्फ कार खरीद‑बिक्री नहीं, बल्कि complete automotive ecosystem बना रहा है 🔧🛡️।


🌐 इंटरनेशनल बिज़नेस से मिली मजबूती

Cars24 का UAE बिज़नेस अब मुनाफे में आ गया है 💰🇦🇪।
H1 FY26 में UAE यूनिट ने ₹9 करोड़ का adjusted EBITDA प्रॉफिट दर्ज किया और रिटेल मार्जिन करीब 24% रहा।

वहीं ऑस्ट्रेलिया बिज़नेस में भी:
📈 GMV में ~20% ग्रोथ
📊 Net revenue में 22% से ज्यादा बढ़ोतरी

देखने को मिली 🇦🇺।


🤖 टेक्नोलॉजी और GenAI पर बड़ा दांव

Cars24 ने H1 FY26 में ₹95 करोड़ का निवेश टेक्नोलॉजी में किया 💻।
अब GenAI का इस्तेमाल किया जा रहा है:

🧠 प्राइसिंग
📸 इंस्पेक्शन
📄 डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन
📞 कस्टमर कॉल्स

AI‑आधारित सिस्टम से इंस्पेक्शन टाइम 30% तक घटा और लागत पर भी कंट्रोल बना रहा।


🔮 आगे की योजना और भविष्य

Cars24 को उम्मीद है कि वह H2 FY26 में ₹750 करोड़ adjusted net revenue को पार कर लेगा 🚀, जो करीब 35% YoY ग्रोथ दर्शाता है।

कंपनी का फोकस अब साफ है👇
✔️ क्वालिटी अर्निंग
✔️ बेहतर मार्जिन
✔️ लॉन्ग‑टर्म प्रॉफिटेबिलिटी


🏁 निष्कर्ष

Cars24 का यह प्रदर्शन दिखाता है कि कंपनी अब स्मार्ट ग्रोथ + मुनाफे की सही दिशा में आगे बढ़ रही है 📈। रिटेल‑फर्स्ट रणनीति, AI‑ड्रिवन टेक्नोलॉजी और इंटरनेशनल मजबूती इसे आने वाले समय में एक मजबूत और टिकाऊ ऑटोमोटिव प्लेटफॉर्म बना सकती है 🚗✨।

Read more :🎓💼 Emversity ने Series A में जुटाए $30 मिलियन,

🎓💼 Emversity ने Series A में जुटाए $30 मिलियन,

Emversity

भारत में उच्च शिक्षा 🎓 और रोजगार 💼 के बीच की दूरी को खत्म करने की दिशा में काम कर रही स्टार्टअप Emversity ने अपने Series A फंडिंग राउंड में $30 मिलियन (करीब ₹271 करोड़) जुटाए हैं 💰।
इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Premji Invest ने किया है, जबकि इसमें Lightspeed और Z47 (पहले Matrix Partners India) ने भी भाग लिया है 🤝।

इस ताज़ा निवेश के बाद Emversity की कुल फंडिंग $46 मिलियन तक पहुँच गई है 🚀। कंपनी का उद्देश्य भारत के युवाओं को डिग्री के साथ‑साथ रोजगार के लिए तैयार करना है।


🏢 Beyond Odds Technologies के तहत संचालित Emversity

Emversity को Beyond Odds Technologies ऑपरेट करती है, जिसकी स्थापना अप्रैल 2024 में हुई थी 🗓️।
इस स्टार्टअप की शुरुआत Vivek Sinha ने की थी, जो इससे पहले Unacademy के COO रह चुके हैं 👨‍💼।

लॉन्च के समय ही कंपनी ने $11 मिलियन का seed funding जुटाया था, जिसका नेतृत्व Z47 और Lightspeed ने किया था 🌱।
इसके बाद Emversity ने $5 मिलियन का pre‑Series A राउंड भी पूरा किया, जिसमें Alteria Capital और InnoVen Capital ने निवेश किया था 📈।

लगातार निवेश मिलना इस बात का संकेत है कि निवेशकों को Emversity के मॉडल और विज़न पर पूरा भरोसा है ✅।


💰 नई फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

Series A में जुटाई गई राशि का इस्तेमाल Emversity कई अहम क्षेत्रों में करेगी:

🔹 200+ कॉलेज और यूनिवर्सिटी कैंपसों तक विस्तार
🔹 Healthcare 🏥 और Hospitality 🏨 स्किल्स को और मजबूत करना
🔹 EPC और Manufacturing 🏗️⚙️ जैसे नए सेक्टर में एंट्री
🔹 टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म को और बेहतर बनाना 💻
🔹 भारत में प्रशिक्षित टैलेंट के लिए global job opportunities 🌍 तलाशना

कंपनी का फोकस सिर्फ ट्रेनिंग नहीं, बल्कि career discovery से लेकर placement तक पूरा ecosystem बनाने पर है।


🎯 शिक्षा और इंडस्ट्री को जोड़ने का अनोखा मॉडल

Emversity का मॉडल पारंपरिक एजुकेशन से अलग है 📚❌।
यह प्लेटफॉर्म यूनिवर्सिटीज़ के साथ मिलकर डिग्री प्रोग्राम्स में इंडस्ट्री‑अलाइन ट्रेनिंग को शामिल करता है।

👉 मतलब, छात्र सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहते
👉 बल्कि real‑world skills सीखते हैं
👉 और सीधे नौकरी के लिए तैयार होते हैं

Emversity का मानना है कि भारत में बेरोज़गारी की एक बड़ी वजह education और job requirements के बीच mismatch है — और यही gap वह भरना चाहता है।


🏥🏨 हेल्थकेयर और हॉस्पिटैलिटी पर खास फोकस

फिलहाल Emversity का सबसे बड़ा फोकस Healthcare और Hospitality सेक्टर पर है, जहाँ skilled professionals की भारी कमी है 📉।

कंपनी NSDC (National Skill Development Corporation) से जुड़कर employer‑linked skill centres भी चला रही है 🏫।

इन स्किल सेंटर्स में छात्रों को:
✔ इंडस्ट्री‑specific ट्रेनिंग
✔ real workplace exposure
✔ job‑ready skills

दिए जाते हैं, जिससे उन्हें बड़े हॉस्पिटल चेन और होटल ग्रुप्स में नौकरी मिल रही है 👏।


🚀 दो साल से कम समय में शानदार ग्रोथ

Emversity ने बहुत कम समय में तेज़ रफ्तार से ग्रोथ दिखाई है ⏱️।
कंपनी के अनुसार:

📍 40 से ज्यादा कैंपसों में मौजूदगी
📍 4,500+ learners प्लेटफॉर्म से जुड़े
📍 Multiple cities में active programs

यह साफ दिखाता है कि industry‑embedded education की भारत में कितनी ज़्यादा मांग है 📊।


🤝 बड़े निवेशकों का भरोसा क्यों?

Premji Invest, Lightspeed और Z47 जैसे बड़े निवेशकों का साथ मिलना इस बात का सबूत है कि Emversity सिर्फ एक EdTech स्टार्टअप नहीं, बल्कि Employability‑focused platform है 🌟।

भारत में हर साल लाखों छात्र डिग्री तो लेते हैं, लेकिन नौकरी के लिए तैयार नहीं होते।
Emversity इस समस्या का practical और scalable solution पेश कर रहा है।


🔮 आगे की राह

Series A फंडिंग के बाद Emversity अब अपने अगले growth phase में प्रवेश कर चुकी है 🚀।
कंपनी का लक्ष्य साफ है:

🎯 शिक्षा को रोजगार से जोड़ना
🎯 इंडस्ट्री के हिसाब से स्किल्स तैयार करना
🎯 भारतीय युवाओं को global opportunities के लिए तैयार करना

अगर Emversity इसी रफ्तार से आगे बढ़ती रही, तो आने वाले समय में यह भारत के higher‑education और employability ecosystem का बड़ा नाम बन सकती है 🌟।

Read more :🧱 Construction-Tech Startup HandyPanda ने जुटाए ₹2 करोड़,

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HandyPanda

भारत में घर बनाना या renovate कराना आज भी कई लोगों के लिए एक stressful और confusing experience माना जाता है। सही material ढूंढना, genuine products की पहचान, price transparency की कमी और supply delays — ये सभी समस्याएं आम हैं। इन्हीं चुनौतियों को हल करने के उद्देश्य से construction-tech startup HandyPanda सामने आया है।

दिल्ली स्थित HandyPanda ने हाल ही में ₹2 करोड़ की pre-seed funding जुटाई है। इस राउंड का नेतृत्व early-stage venture capital firm AJVC ने किया है। इसके अलावा, इस फंडिंग राउंड में कई angel investors ने भी भाग लिया है, जिनमें Broadway के Co-Founder & CEO Sankalp Kathuria और building materials सेक्टर से जुड़े कुछ family offices शामिल हैं।


💰 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

HandyPanda के मुताबिक, इस pre-seed फंडिंग से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल मुख्य रूप से तीन अहम क्षेत्रों में किया जाएगा:

  • 🔹 Product team को मजबूत करने के लिए
  • 🔹 Operations और supply chain systems को scale करने के लिए
  • 🔹 Technology और backend processes को streamline करने के लिए

कंपनी का फोकस है कि construction materials की buying process को उतना ही आसान बनाया जाए जितना आज electronics या fashion की online shopping होती है।


🏗️ HandyPanda करती क्या है?

HandyPanda एक construction-tech platform है, जो घर बनाने और renovation के लिए जरूरी materials को एक ही जगह उपलब्ध कराने की कोशिश करता है।

कंपनी के platform पर निम्न categories के products listed हैं:

  • ⚡ Electricals
  • 🚿 Bathware & Plumbing
  • 🔩 Hardware
  • 🎨 Paints

ये सभी products direct manufacturers या authorised dealers से sourced किए जाते हैं, जिससे product authenticity और quality assurance सुनिश्चित की जा सके।


❗ Construction industry की बड़ी समस्याएं

भारत का construction और home renovation market बहुत बड़ा है, लेकिन आज भी यह काफी हद तक fragmented है। HandyPanda का मानना है कि इस industry में कुछ core problems हैं:

  • ❌ Supply chain fragmented होने की वजह से delays
  • ❌ Pricing में transparency की कमी
  • ❌ Fake या duplicate products का risk
  • ❌ Multiple vendors से deal करने की मजबूरी

HandyPanda इन्हीं pain points को solve करने के लिए एक organised, tech-driven marketplace बनाना चाहता है।


👨‍🎓 IIT Delhi के तीन दोस्तों की startup journey

HandyPanda की स्थापना IIT Delhi के batchmates — Abhishek Rao, Shaurya Goel और Shaurya Jindal ने की है। तीनों founders का मानना है कि भारत का home construction market एक inflection point पर खड़ा है।

  • Consumers अब better experience चाहते हैं
  • Digital adoption बढ़ रहा है
  • Suppliers भी धीरे-धीरे organised ecosystem का हिस्सा बन रहे हैं

इसी बदलाव को देखते हुए founders ने HandyPanda की शुरुआत की।


🚀 Business traction और early growth

HandyPanda ने September 2025 में अपने operations शुरू किए थे। बेहद कम समय में startup ने अच्छी traction दिखाई है।

कंपनी के अनुसार:

  • HandyPanda ₹1 करोड़ के करीब Annual Recurring Revenue (ARR) हासिल करने के बेहद करीब है
  • यह ARR GMV basis पर calculate किया गया है

Early-stage startup के लिए यह growth यह दिखाती है कि market में इस तरह के solution की real demand है।


🏦 AJVC कौन है और क्यों है यह निवेश अहम?

इस funding round का नेतृत्व करने वाला AJVC एक SEBI-registered pre-seed venture capital fund है। यह fund खासतौर पर early-stage startups में निवेश करता है।

AJVC का portfolio कई promising startups से भरा हुआ है, जिनमें शामिल हैं:

  • Multibagg AI
  • Nuyug
  • Mithila Foods
  • Jaagruk Bharat
  • TruFides AI
  • Chop Finance
  • Gaadi Mech
  • Iztri

AJVC की HandyPanda में investment यह संकेत देती है कि fund को construction-tech और building materials space में long-term potential नजर आ रहा है।


🧩 क्यों अहम है HandyPanda का model?

भारत में housing, renovation और infrastructure spending लगातार बढ़ रही है। लेकिन end-consumer experience आज भी पीछे है।

HandyPanda का model:

  • Consumers को one-stop solution देता है
  • Suppliers को structured demand प्रदान करता है
  • Industry में transparency और trust लाने की कोशिश करता है

अगर कंपनी execution सही रख पाती है, तो यह:

  • Local hardware stores
  • Unorganised dealers
  • Middlemen-driven supply chains

को challenge कर सकती है।


🔮 आगे का रास्ता

Pre-seed funding के बाद HandyPanda का अगला focus होगा:

  • Core cities में presence मजबूत करना
  • Supply partners का network बढ़ाना
  • Pricing और delivery timelines को predictable बनाना

Construction-tech अभी भारत में शुरुआती दौर में है, लेकिन जैसे-जैसे consumers experience-driven बन रहे हैं, HandyPanda जैसे startups के लिए बड़ा opportunity window खुलता दिख रहा है।


📝 निष्कर्ष

HandyPanda की ₹2 करोड़ की pre-seed funding यह साफ दिखाती है कि:

  • Construction और home renovation space में innovation की जरूरत है
  • Investors early-stage में ही इस sector पर दांव लगाने को तैयार हैं
  • Tech-driven, transparent models future में ज्यादा value create कर सकते हैं

अगर HandyPanda अपने execution और supply chain control पर फोकस बनाए रखता है, तो यह भारत के construction-tech ecosystem में एक strong emerging player बन सकता है।

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