⚡ Ohm Mobility ने बंद किया संचालन

Ohm Mobility

भारत के EV (इलेक्ट्रिक वाहन) फिनटेक क्षेत्र में सक्रिय स्टार्टअप Ohm Mobility ने आधिकारिक रूप से अपनी संचालन बंद करने की घोषणा कर दी है। पांच साल तक विभिन्न बिजनेस मॉडल्स के साथ प्रयोग करने और स्केलेबल मॉडल तलाशने के प्रयासों के बाद, कंपनी अब अपने दरवाज़े बंद कर रही है।

Ohm Mobility के को-फाउंडर और CEO निखिल नायर ने लिंक्डइन पर इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने टीम के साथ मिलकर कई तरह के बिजनेस मॉडल्स आज़माए, लेकिन स्थायी ग्रोथ हासिल नहीं कर पाए।


🚗 शुरुआत एक मजबूत विज़न के साथ

Ohm Mobility की स्थापना 2020 में निखिल नायर द्वारा की गई थी। इस स्टार्टअप का उद्देश्य EV (Electric Vehicle) इकोसिस्टम में क्रांति लाना था, खासतौर पर उन फ्लीट ऑपरेटर्स, मैन्युफैक्चरर्स और बैटरी कंपनियों के लिए जो बैंकों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन्स से पूंजी जुटाना चाहते थे।

कंपनी ने IoT डेटा का उपयोग करके EV के प्रदर्शन और जोखिम का मूल्यांकन करना शुरू किया, ताकि फाइनेंसिंग विकल्पों को और बेहतर बनाया जा सके। इस तकनीकी दृष्टिकोण ने Ohm Mobility को एक अभिनव स्टार्टअप के रूप में पहचान दिलाई।


🤝 निवेश और साझेदारी

कंपनी ने अब तक लगभग ₹5 करोड़ का निवेश जुटाया था, जिसमें Antler India, Blume Ventures, Catalyst Fund और कुछ एंजेल निवेशकों का योगदान रहा।

2022 में, IT समाधान कंपनी Onfido के पूर्व कार्यकारी निखिल सैगल ने Ohm Mobility को जॉइन किया और वह को-फाउंडर और Chief Business Officer (CBO) बने।

Ohm Mobility की टीम ने EV और फिनटेक सेक्टर में कई प्रयोग किए, जिससे उन्हें इंडस्ट्री में एक विशेष स्थान मिला।


🔁 Ohm Daily के रूप में पिवट की कोशिश

2024 की शुरुआत में, Ohm Mobility ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए Ohm Daily के नाम से रीब्रांडिंग की। इस पिवट का उद्देश्य था:

  • गिग वर्कर्स (जैसे ऑटो ड्राइवर, कैब ऑपरेटर्स) के लिए फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराना
  • मोबाइल वर्कफोर्स के लिए बीमा, ऋण और सेविंग्स समाधान पेश करना

हालांकि, इस रणनीति के बावजूद स्टार्टअप को वह ट्रैक्शन नहीं मिला जिसकी उन्हें अपेक्षा थी। न तो उपयोगकर्ताओं की संख्या में उम्मीद के मुताबिक वृद्धि हुई, और न ही रेवेन्यू में।


😞 आखिरकार, बंद करने का फैसला

CEO निखिल नायर ने लिखा:

“हमने अनेक बिजनेस मॉडल्स पर काम किया और टीम ने लगातार नवाचार किया, लेकिन दुर्भाग्य से हम एक स्केलेबल और टिकाऊ बिजनेस मॉडल नहीं बना पाए। अब समय है इस अध्याय को बंद करने का।”

कंपनी ने अपने कर्मचारियों और निवेशकों का आभार जताया और अपने इस सफर को एक सीख के रूप में स्वीकार किया है।


📉 स्टार्टअप बंद होने का सिलसिला जारी

Ohm Mobility का बंद होना भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में हाल ही में हुए कई शटडाउन की एक कड़ी है। इसके पहले भी कई स्टार्टअप्स ने बाजार की कठिनाइयों या बिजनेस मॉडल की असफलता के चलते ऑपरेशंस बंद किए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • Altigreen
  • Blip
  • ANS Commerce
  • O’Be Cocktails
  • Subtl.ai

इनमें से कुछ स्टार्टअप्स को अच्छा फंडिंग बैकअप मिला था, लेकिन बाजार की बदलती मांग और ग्रोथ की चुनौतियों ने उन्हें भी प्रभावित किया।


🔍 क्या कहता है यह ट्रेंड?

भारत में स्टार्टअप्स के लिए शुरुआती निवेश जुटाना पहले के मुकाबले आसान हुआ है, लेकिन लंबी अवधि तक टिके रहना और मुनाफे की ओर बढ़ना अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। खासतौर पर EV और फिनटेक जैसे क्षेत्रों में जहां रेगुलेशन, टेक्नोलॉजी और कंज्यूमर बिहेवियर तेजी से बदल रहे हैं।

Ohm Mobility का केस यह दिखाता है कि:

  • सिर्फ इनोवेशन ही काफी नहीं है, बाजार अपनाने की क्षमता भी जरूरी है।
  • फंडिंग से अधिक महत्वपूर्ण है ग्राहक जरूरतों को गहराई से समझना और लंबे समय तक टिक सकने वाली स्ट्रेटजी बनाना।
  • हर पिवट सफल नहीं होता; कभी-कभी संघर्ष का ईमानदारी से अंत भी जरूरी होता है।

🛣️ आगे का रास्ता

Ohm Mobility की टीम के सदस्यों के पास अब अपने अनुभवों से सीखी गई बातों को नए उद्यमों में बदलने का अवसर है। भारत में EV और गिग इकॉनमी से जुड़े मुद्दों को हल करने वाले स्टार्टअप्स के लिए अभी भी बहुत अवसर हैं

ऐसे बंद होते स्टार्टअप्स भी इकोसिस्टम में जरूरी भूमिका निभाते हैं — वे दूसरों को यह दिखाते हैं कि कौन सी रणनीतियाँ काम नहीं करतीं और किन क्षेत्रों में अभी सुधार की आवश्यकता है।


📌 निष्कर्ष

Ohm Mobility की यात्रा एक नवाचारपूर्ण लेकिन चुनौतीपूर्ण सफर रही। पांच सालों में उन्होंने जो प्रयास किए, वो भारत के EV फिनटेक स्पेस को बेहतर समझने में मदद करते हैं। यह स्टार्टअप भले ही बंद हो गया हो, लेकिन इसके पीछे की कोशिशें और सीखें आगे आने वाले उद्यमियों को प्रेरित करती रहेंगी।

✍️ लेखक: FundingRaised.in संपादकीय टीम
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Read more : Yali Capital ने Deeptech स्टार्टअप्स के लिए ₹893 करोड़

💰 Yali Capital ने Deeptech स्टार्टअप्स के लिए ₹893 करोड़

Yali Capital

वेंचर कैपिटल फर्म Yali Capital ने अपने पहले Deeptech-focused फंड को ₹893 करोड़ (लगभग $103.2 मिलियन) पर बंद कर दिया है। यह फंड खासतौर पर भारत में Deeptech सेक्टर में शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स में निवेश के लिए बनाया गया है। कंपनी ने जुलाई 2024 में इस फंड को ₹810 करोड़ के लक्ष्य के साथ लॉन्च किया था, जिसे अब सफलता पूर्वक पार कर लिया गया है।


🚀 किसमें होगा निवेश?

Yali Capital के इस फंड का उद्देश्य Chip Design, Robotics, Genomics, Smart Manufacturing, Aerospace और AI (Artificial Intelligence) जैसे उभरते क्षेत्रों में स्टार्टअप्स को सपोर्ट करना है। फर्म का मानना है कि ये सेक्टर आने वाले वर्षों में भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

Yali Capital के सह-संस्थापक गणपति सुब्रमण्यम ने कहा:

“चीन Deeptech क्षेत्र में अमेरिका को पीछे छोड़ चुका है। भारत के पास गजब की क्षमता है — सर्विस सेक्टर से लेकर Deeptech तक, लेकिन हमें अभी बहुत लंबा सफर तय करना है।”


🤝 निवेशकों की मजबूत लाइनअप

Yali Capital के इस फंड को Infosys, Qualcomm Ventures, DPIIT के Fund of Funds for Startups, और Evolvence जैसे बड़े कॉर्पोरेट्स से समर्थन मिला है। इसके अलावा, कुछ जाने-माने व्यक्तिगत निवेशकों ने भी इसमें भाग लिया है:

  • Gopal Srinivasan (संस्थापक, TVS Capital)
  • Utpal Sheth (CEO, Rare Enterprises)
  • Vishal Kampani (MD, JM Financial)

ये सभी इनवेस्टर्स भारतीय Deeptech इकोसिस्टम की दीर्घकालिक संभावनाओं में विश्वास रखते हैं।


🧠 Yali Capital का फोकस और रणनीति

Yali Capital एक SEBI अनुमोदित Category II AIF है। फर्म को Ganapathy Subramaniam और Mathew Cyriac ने मिलकर लॉन्च किया है। फंड का प्रारंभिक लक्ष्य ₹500 करोड़ था, जिसे ₹310 करोड़ के अतिरिक्त greenshoe विकल्प के साथ बढ़ाया गया।

फर्म की रणनीति भारत में Deeptech कंपनियों के लिए पूंजी, मार्गदर्शन और स्केलिंग सपोर्ट प्रदान करने की है। Yali का मानना है कि Deeptech भारत की अगली तकनीकी क्रांति का आधार बनेगा।


📈 अब तक हुए निवेश

Yali Capital ने अभी तक पाँच स्टार्टअप्स में निवेश किया है, जो Deeptech क्षेत्र के विभिन्न उपक्षेत्रों में काम कर रहे हैं:

  1. 4baseCare – Genomics स्टार्टअप
  2. Perceptyne Robots – Robotics सॉल्यूशन स्टार्टअप
  3. C2i Semiconductors – Fabless chip design कंपनी
  4. [नाम सार्वजनिक नहीं किया गया]
  5. [नाम सार्वजनिक नहीं किया गया]

Yali का लक्ष्य साल के अंत तक कुल 8 Deeptech कंपनियों में निवेश करना है।


🌍 भारत में Deeptech का भविष्य

भारत में Deeptech स्टार्टअप्स की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है, लेकिन अभी इस क्षेत्र में funding और mentorship की भारी कमी है। ऐसे में Yali Capital का यह फंड इस अंतर को भरने में सहायक हो सकता है। भारत पहले से ही IT और SaaS क्षेत्रों में ग्लोबल लीडर बन चुका है, और अब Deeptech अगला बड़ा अवसर बनकर उभर रहा है।

Yali Capital जैसी वेंचर फर्में न केवल फंडिंग दे रही हैं, बल्कि भारत में तकनीकी नवाचारों के लिए एक मजबूत आधार भी तैयार कर रही हैं।


🧬 Deeptech क्या है और क्यों जरूरी है?

Deeptech स्टार्टअप्स वे होते हैं जो उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान और इंजीनियरिंग इनोवेशन पर आधारित होते हैं। ये स्टार्टअप्स लंबे समय में ज्यादा प्रभाव डालते हैं क्योंकि ये समस्याओं का मूल से हल निकालने पर केंद्रित होते हैं।

उदाहरण के तौर पर:

  • Genomics स्टार्टअप्स कैंसर जैसी बीमारियों का व्यक्तिगत स्तर पर इलाज विकसित कर सकते हैं।
  • Chip Design स्टार्टअप्स भारत को चिप निर्माण में आत्मनिर्भर बना सकते हैं।
  • Robotics और Smart Manufacturing से औद्योगिक दक्षता में भारी सुधार हो सकता है।

📊 निष्कर्ष

Yali Capital का ₹893 करोड़ का Deeptech फंड भारतीय तकनीकी स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है। इससे न केवल नई कंपनियों को जरूरी संसाधन मिलेंगे, बल्कि भारत के Deeptech क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने में भी मदद मिलेगी।

👉 आने वाले महीनों में Yali Capital की अगली निवेश घोषणाओं पर नजर रखना दिलचस्प होगा, क्योंकि यह भारत के Deeptech भविष्य को आकार दे रहा है।

✍️ लेखक: FundingRaised.in संपादकीय टीम

Read more : EatClub को ₹185 करोड़ की फंडिंग मिली

🍕 EatClub को ₹185 करोड़ की फंडिंग मिली

EatClub

क्लाउड किचन स्टार्टअप EatClub, जो Box8, Mojo Pizza जैसे पॉपुलर ब्रांड्स का संचालन करता है, ने Tiger Global की अगुवाई में ₹185 करोड़ (~$22 मिलियन) जुटाए हैं। इस फंडिंग राउंड में A91 Partners और 360 ONE Asset Management ने भी भाग लिया है।

EatClub के बोर्ड ने 11,830 प्रेफरेंस शेयर्स जारी करने का विशेष प्रस्ताव पारित किया है, ताकि यह फंड जुटाया जा सके। यह जानकारी कंपनी के RoC (Registrar of Companies) में दाखिल रेगुलेटरी फाइलिंग से सामने आई है।


🦁 Tiger Global की बड़ी वापसी

फाइलिंग के अनुसार:

  • Tiger Global इस राउंड में सबसे बड़ा निवेशक है, जो ₹126 करोड़ का योगदान देगा।
  • A91 Partners ₹37.5 करोड़ का निवेश करेगा।
  • वहीं 360 ONE Asset Management अपने Monopolistic and Opportunity Fund के ज़रिए ₹21.2 करोड़ निवेश करेगा।

कंपनी इस राउंड में आगे और पूंजी जुटा सकती है।


📈 मूल्यांकन में 80% की जबरदस्त बढ़ोतरी

इस फंडिंग के बाद EatClub का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन ₹4,585 करोड़ (~$540 मिलियन) हो जाएगा।

यह दिसंबर 2021 में हुई पिछली फंडिंग के $300 मिलियन वैल्यूएशन की तुलना में 80% की बढ़ोतरी दर्शाता है। उस समय कंपनी ने $40 मिलियन जुटाए थे।

मार्च 2022 में भी EatClub ने एक $30 मिलियन का सेकेंडरी ट्रांजैक्शन पूरा किया था, हालांकि उस समय का मूल्यांकन सार्वजनिक नहीं किया गया था।


🏗️eatclub किस काम आएगी फंडिंग?

कंपनी की फाइलिंग में बताया गया है कि यह फंडिंग EatClub के विस्तार और ग्रोथ में लगाई जाएगी। कंपनी की योजना है कि वह:

  • नई क्लाउड किचन लोकेशन्स खोले
  • टेक्नोलॉजी और लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाए
  • ब्रांड पोर्टफोलियो को मजबूत करे

🧑‍🍳 कई ब्रांड्स, एक ही प्लेटफॉर्म

EatClub की स्थापना Anshul Gupta और Amit Raj ने की थी। यह कंपनी मल्टी-ब्रांड क्लाउड किचन मॉडल पर काम करती है, जिसमें 16 ब्रांड्स शामिल हैं:

🍕 Mojo Pizza
🍱 Box8
🍗 Bhatti Chicken
🥣 NH1 Bowls
🍛 ZAZA Biryani
और भी कई।

यह मॉडल कंपनी को विविध स्वादों और जरूरतों को एक ही प्लेटफॉर्म से पूरा करने में मदद करता है।


💰 कमाई बढ़ी, घाटा घटा

वित्त वर्ष मार्च 2024 में EatClub ने ₹515.5 करोड़ का ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज किया। अच्छी बात ये रही कि कंपनी ने अपने घाटे को ₹69 करोड़ से घटाकर ₹15.77 करोड़ कर लिया, यानी 77% की कटौती

यह इंगित करता है कि EatClub अब लाभप्रदता के करीब पहुंच रहा है।

FY25 की एनुअल रिपोर्ट अभी दाखिल नहीं हुई है।


🏁 2025 में Tiger Global की गिनी-चुनी डील्स में शामिल

2025 में अब तक Tiger Global की सक्रियता बहुत सीमित रही है। इससे पहले Tiger ने जनवरी 2025 में Infra.Market में $125 मिलियन का निवेश किया था।

EatClub उन कुछ स्टार्टअप्स में शामिल है जिन्हें इस साल Tiger Global का भरोसा मिला है, जो इस बात का संकेत है कि कंपनी में दीर्घकालिक क्षमता देखी जा रही है।


⚔️ Rebel Foods से सीधी टक्कर

EatClub का सीधा मुकाबला Rebel Foods से है, जिसने पिछले साल $210 मिलियन की फंडिंग जुटाई थी और FY24 में ₹1,420 करोड़ का रेवेन्यू हासिल किया, हालांकि कंपनी को ₹378 करोड़ का घाटा हुआ।

अन्य प्रतियोगी:

🥗 FreshMenu
🥦 Curefoods का Eatfit
🍜 BBK (Biryani by Kilo)

इन सभी के साथ EatClub अब तेजी से प्रतिस्पर्धा कर रहा है।


🔍 FundingRaised विश्लेषण

EatClub की यह ताज़ा फंडिंग राउंड यह साबित करता है कि क्लाउड किचन स्पेस अभी भी निवेशकों की पसंद बना हुआ है, खासकर जब कंपनियाँ घाटा कम कर, रेवेन्यू बढ़ा रही हों।

Tiger Global जैसे ग्लोबल इनवेस्टर्स की वापसी इस बात का संकेत है कि भारतीय फूड डिलीवरी और क्लाउड किचन इंडस्ट्री में अब भी ग्रोथ की जबरदस्त संभावनाएं मौजूद हैं।


🧾 निष्कर्ष

EatClub ने ना सिर्फ निवेशकों का भरोसा जीता है, बल्कि मजबूत वित्तीय प्रदर्शन और क्लियर ग्रोथ विजन के जरिए अपने आप को एक स्थिर और स्केलेबल स्टार्टअप के रूप में स्थापित किया है।

Box8, Mojo Pizza जैसे ब्रांड्स अब केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि बिज़नेस में निवेश का भरोसेमंद नाम भी बनते जा रहे हैं।

Read more : Swiggy के बोर्ड में बड़ा बदलाव

🧑‍💼 Swiggy के बोर्ड में बड़ा बदलाव

Swiggy

📅 25 जुलाई को हुई बोर्ड बैठक में Swiggy ने बड़े बदलाव किए। SoftBank के Sumer Juneja और Accel के Anand Daniel ने Swiggy के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया है, जबकि Middle East की ई-कॉमर्स कंपनी Noon के CEO Faraz Khalid को नए स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया है।

यह बदलाव Swiggy के IPO (Initial Public Offering) के बाद के गवर्नेंस स्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने की रणनीति का हिस्सा हैं।


👥 निदेशक मंडल में नए चेहरे

Swiggy ने Faraz Khalid को बतौर Independent Director नियुक्त किया है। उनका कार्यकाल 5 वर्षों का होगा और यह नियुक्ति शेयरहोल्डर्स की मंजूरी के अधीन है।

💼 Faraz Khalid कौन हैं?

Faraz Khalid ने Middle East की नामी कंपनी Namshi की सह-स्थापना की थी और अब वह Noon के CEO हैं। Noon को उन्होंने Middle East और North Africa (MENA) क्षेत्र में अग्रणी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित किया।

उनका अनुभव ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स और फूड डिलीवरी में गहरा है, जो Swiggy के भविष्य के विस्तार और रणनीतियों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।


🔁 पुराने निदेशक का दोबारा कार्यकाल

Swiggy ने Shailesh Vishnubhai Haribhakti को भी एक बार फिर से पांच साल के लिए Non-Executive Independent Director के रूप में नियुक्त किया है। उनका दूसरा कार्यकाल 24 जनवरी, 2026 से प्रभावी होगा।

Haribhakti एक अनुभवी चार्टर्ड अकाउंटेंट और कॉस्ट अकाउंटेंट हैं, जिनके पास 50 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे Shailesh Haribhakti & Associates के चेयरमैन और GovEVA Consulting के वाइस चेयरमैन भी हैं।


📉 बोर्ड से हटे दो दिग्गज

Swiggy के बोर्ड से हटने वाले दो नामचीन निवेशक हैं:

  • Sumer Juneja (SoftBank)
  • Anand Daniel (Accel)

इन दोनों निवेशकों ने शुरुआती चरण में Swiggy में महत्वपूर्ण निवेश किया था और यह इस्तीफे इस बात का संकेत हैं कि कंपनी अब अपने पब्लिक मार्केट अवतार की ओर बढ़ रही है।


📊 Swiggy बनाम Zomato: तगड़ी टक्कर जारी

हालांकि Swiggy ने अब तक Q1 FY26 के परिणाम दाखिल नहीं किए हैं, लेकिन पिछली तिमाही में कंपनी ने 45% की साल-दर-साल ग्रोथ के साथ Rs 4,410 करोड़ का राजस्व दर्ज किया था। वहीं, कंपनी का घाटा बढ़कर Rs 1,081 करोड़ तक पहुँच गया।

दूसरी ओर, प्रतियोगी Zomato की पैरेंट कंपनी Eternal ने Q1 FY26 में Rs 7,167 करोड़ का राजस्व दर्ज किया है, जिससे साफ है कि प्रतिस्पर्धा बहुत मजबूत बनी हुई है।


📈 शेयर बाज़ार में Swiggy की स्थिति

बाजार बंद होने के समय Swiggy के शेयर का मूल्य Rs 408.3 रहा और कंपनी की मार्केट कैपिटलाइजेशन Rs 1,01,815.6 करोड़ (लगभग $11.9 बिलियन) तक पहुंच गई है।


🧠 विश्लेषण: क्या संकेत देता है यह बदलाव?

Swiggy के बोर्ड में यह बदलाव दिखाता है कि कंपनी कॉर्पोरेट गवर्नेंस, स्वतंत्र निर्णयों और दीर्घकालिक विज़न पर जोर दे रही है। IPO के बाद, भारतीय स्टार्टअप्स में अक्सर बोर्ड संरचना में ऐसे बदलाव देखने को मिलते हैं जिससे कि कंपनी का प्रोफेशनल और पारदर्शी संचालन सुनिश्चित हो सके।


🧾 निष्कर्ष

Swiggy का यह कदम इस बात की ओर इशारा करता है कि कंपनी अब पब्लिक इन्वेस्टर्स के लिए जवाबदेह, और व्यवस्थित कॉर्पोरेट गवर्नेंस मॉडल को अपनाने की दिशा में अग्रसर है। Faraz Khalid और Shailesh Haribhakti जैसे प्रोफेशनल्स की नियुक्ति, Swiggy को भारत के फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स स्पेस में लंबी रेस का घोड़ा बनाने की रणनीति का हिस्सा है।

अब देखना होगा कि Swiggy आने वाले महीनों में बिज़नेस प्रदर्शन, लाभप्रदता और शेयर बाज़ार में स्थिरता को कैसे संभालता है।

Read more : Tata 1mg FY25 में ₹2,392 करोड़ की कमाई और घाटा घटा 12%

🏥 Tata 1mg FY25 में ₹2,392 करोड़ की कमाई और घाटा घटा 12%

Tata 1mg

Tata Group के डिजिटल हेल्थकेयर प्लेटफॉर्म Tata 1mg ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में तेज़ी से अपनी ग्रोथ जारी रखते हुए अपने रेवेन्यू में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। वहीं, कंपनी ने घाटा भी पिछले वर्ष की तुलना में कम किया है। Tata Sons की FY25 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, Tata 1mg ने इस वर्ष ₹2,392 करोड़ की कंसोलिडेटेड रेवेन्यू अर्जित की, जो पिछले साल FY24 के ₹1,968 करोड़ की तुलना में 22% अधिक है।


🧾 दो संस्थाओं से हुआ रेवेन्यू जनरेट

Tata 1mg का रेवेन्यू दो प्रमुख संस्थाओं से आया:

  • Tata 1mg Technologies: ₹2,016.5 करोड़
  • Tata 1mg Healthcare Solutions: ₹375.5 करोड़

इस प्रकार, कंपनी की मजबूत तकनीकी और हेल्थकेयर संचालन दोनों ने FY25 में अच्छे नतीजे दिए हैं।


💊 क्या है Tata 1mg?

Tata 1mg एक डिजिटल हेल्थटेक स्टार्टअप है जो एलोपैथिक, आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाएं, विटामिन्स, न्यूट्रिशन सप्लिमेंट्स और अन्य हेल्थ प्रोडक्ट्स को ऑनलाइन ऑर्डर करने की सुविधा देता है। यह यूज़र्स को घर बैठे दवाओं की डिलीवरी, टेस्ट बुकिंग और डॉक्टर कंसल्टेशन जैसी सेवाएं प्रदान करता है।


📉 घाटे में गिरावट, लेकिन खर्च में बढ़ोतरी

FY25 में Tata 1mg का कुल खर्च ₹2,682 करोड़ रहा, जो FY24 के ₹2,303 करोड़ के मुकाबले 17% अधिक है। हालांकि खर्च का विस्तृत विवरण वार्षिक रिपोर्ट में साझा नहीं किया गया है।

कंपनी का कुल घाटा ₹276 करोड़ रहा, जो FY24 के ₹313 करोड़ से 12% कम है। यानी कंपनी ने घाटा कम करने की दिशा में अच्छी प्रगति की है।

कंपनी का PBT (Profit Before Tax) ₹290 करोड़ दर्ज किया गया है। यूनिट इकॉनॉमिक्स के अनुसार, कंपनी ने हर ₹1 के रेवेन्यू के लिए ₹1.12 खर्च किए।


📊 एसेट्स और लायबिलिटी की स्थिति

FY25 के अंत में Tata 1mg के पास कुल एसेट्स ₹2,025 करोड़ के थे, जबकि इसकी कुल लायबिलिटी ₹1,190 करोड़ रही। इससे यह साफ़ है कि कंपनी की बैलेंस शीट अभी भी मजबूत बनी हुई है।


⚔️ कड़ी प्रतिस्पर्धा: Netmeds, PharmEasy और Apollo 24/7 से मुकाबला

Tata 1mg का मुकाबला भारत के अन्य प्रमुख ई-हेल्थ स्टार्टअप्स से है:

  • Netmeds (Reliance समर्थित): जियो की विस्तृत नेटवर्क सपोर्ट से मजबूत स्थिति।
  • PharmEasy: वित्तीय चुनौतियों के बावजूद डायग्नोस्टिक्स, फार्मेसी और कंसल्टेशन को एकीकृत करने वाले प्लेटफॉर्म के रूप में मजबूती बनाए रखी।
  • Apollo 24/7: Apollo Hospitals के मजबूत ऑफलाइन नेटवर्क और ब्रांड वैल्यू से लाभ।

🏢 Tata Digital की हिस्सेदारी और निवेश रणनीति

Tata Digital ने जून 2021 में Tata 1mg में 55% हिस्सेदारी खरीदी थी। इसके बाद कंपनी ने अतिरिक्त 8.5% हिस्सेदारी और खरीदी। TheKredible के अनुसार, Tata Digital की वर्तमान हिस्सेदारी 63.5% है और Tata 1mg का वैल्यूएशन $1.25 बिलियन (लगभग ₹10,400 करोड़) है।


💸 Tata Digital का FY25 में घाटा और रणनीति

FY25 में Tata Digital ने खुद का स्टैंडअलोन रेवेन्यू ₹546.9 करोड़ दर्ज किया, जबकि उसका घाटा ₹827.5 करोड़ रहा। यह घाटा Tata 1mg के साथ-साथ BigBasket, Cult.fit और Tata Neu जैसे अन्य डिजिटल वेंचर्स में भारी निवेश का परिणाम है।

Tata Digital फिलहाल “investment mode” में है और इसका लक्ष्य एक ऐसा व्यापक डिजिटल इकोसिस्टम बनाना है जो कॉमर्स, हेल्थकेयर, फाइनेंस और वेलनेस को एक साथ जोड़े।


🧭 निष्कर्ष

Tata 1mg ने FY25 में अपने रेवेन्यू में जबरदस्त ग्रोथ दिखाते हुए एक मजबूत प्रदर्शन किया है। जहां एक ओर खर्च और घाटा अभी भी चुनौती बने हुए हैं, वहीं दूसरी ओर कंपनी की बाजार में पकड़ मजबूत हो रही है और यह अपने प्रतिस्पर्धियों के बीच मजबूती से खड़ी है।

Tata Digital की लांग-टर्म रणनीति और निरंतर निवेश यह दर्शाते हैं कि आने वाले वर्षों में Tata 1mg भारतीय डिजिटल हेल्थकेयर सेक्टर में और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने वाला है।


📰 यह लेख खास तौर पर FundingRaised हिंदी पाठकों के लिए तैयार किया गया है। भारत के स्टार्टअप और डिजिटल हेल्थकेयर की ताज़ा खबरों के लिए पढ़ते रहिए www.fundingraised.in 📲

Read more :Ixigo में बेचा हिस्सा, ₹226 करोड़ से ज्यादा का मुनाफा,

Ixigo में बेचा हिस्सा, ₹226 करोड़ से ज्यादा का मुनाफा,

Ixigo

भारतीय ट्रैवलटेक स्टार्टअप Ixigo की पेरेंट कंपनी Le Travenues Technology में अपने हिस्सेदारी को आंशिक रूप से बेचते हुए, वेंचर कैपिटल फर्म Elevation Capital ने ₹226 करोड़ से ज्यादा की कमाई की है।

📊 1 करोड़ से अधिक शेयरों की बिक्री

Elevation Capital ने लगभग 1.01 करोड़ शेयर ₹226 प्रति शेयर की औसत कीमत पर बेचे। इस सौदे के साथ ही कंपनी को इस निवेश पर 31.6 गुना रिटर्न (31.6X Return) मिला है, जो भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।

डील से पहले, Elevation Capital के पास Ixigo की कुल 9.04% हिस्सेदारी थी। लेटेस्ट बिक्री में उन्होंने 2.59% हिस्सेदारी बेची है, जिसके बाद अब उनके पास कंपनी की 6.45% हिस्सेदारी बची है।

📈 पिछले 3 महीनों में तीसरी आंशिक बिक्री

यह Elevation Capital की बीते तीन महीनों में तीसरी आंशिक बिक्री है। इससे पहले मई 2025 में कंपनी ने 21.5 लाख शेयर ₹38.3 करोड़ में बेचे थे और जून में 53.9 लाख शेयर ₹97.4 करोड़ में बेचे थे। इस नवीनतम सौदे के साथ अब तक की कुल secondary sale की कमाई ₹361 करोड़ से अधिक हो गई है।

🏦 Schroder Investment बना बड़ा निवेशक

Entrackr द्वारा समीक्षा किए गए एक अन्य स्टॉक एक्सचेंज डिस्क्लोजर के अनुसार, Schroder Investment Management ने ओपन मार्केट से 16.6 लाख अतिरिक्त शेयर खरीदे हैं। इस खरीद के बाद Schroder की Ixigo में हिस्सेदारी बढ़कर 5.176% हो गई है, जिससे वह कंपनी के एक प्रमुख संस्थागत निवेशक के रूप में उभरे हैं।

गौरतलब है कि Schroder ने Elevation की पिछली दोनों exits में भी भाग लिया था और उसकी लगातार हो रही खरीदारी से यह संकेत मिलता है कि वह कंपनी की दीर्घकालिक संभावनाओं पर भरोसा रखता है।

🧭 Elevation Capital: Ixigo के शुरुआती निवेशक

Elevation Capital, जिसे पहले SAIF Partners के नाम से जाना जाता था, Ixigo के शुरुआती संस्थागत निवेशकों में से एक रहा है। इस फंड ने अपने शुरुआती निवेश से multi-bagger returns हासिल किए हैं, जो दर्शाता है कि भारत के ट्रैवलटेक सेक्टर में रणनीतिक निवेश किस तरह बड़ा मुनाफा दिला सकता है।

🚀 IPO के बाद भी मजबूत प्रदर्शन

Ixigo ने अपने IPO के बाद से लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है। Q1 FY26 में कंपनी का राजस्व साल-दर-साल 72.5% बढ़कर ₹314 करोड़ हो गया, जबकि इसी अवधि में नेट प्रॉफिट 26.7% बढ़कर ₹19 करोड़ तक पहुंच गया।

लेख लिखे जाने तक (12:50 PM IST), कंपनी का शेयर ₹216.95 पर ट्रेड कर रहा है और इसका मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹8,467 करोड़ (~$1 बिलियन) तक पहुंच गया है।

🛫 Ixigo: भारत की ट्रैवलटेक लीडर

Ixigo भारत में ट्रैवल टिकट बुकिंग, ट्रेन, बस और फ्लाइट बुकिंग सेवाएं देने वाली प्रमुख कंपनियों में से एक है। IPO के बाद इसका निरंतर प्रदर्शन और संस्थागत निवेशकों की भागीदारी यह साबित करती है कि कंपनी का बिजनेस मॉडल और ग्रोथ रणनीति निवेशकों के लिए भरोसेमंद है।


📌 निष्कर्ष

Elevation Capital की आंशिक एक्सिट और ₹361 करोड़ से अधिक की सेकेंडरी सेल यह दिखाती है कि भारत का ट्रैवलटेक सेक्टर निवेशकों के लिए लगातार आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। साथ ही, Schroder जैसे बड़े संस्थागत निवेशकों की भागीदारी से Ixigo की दीर्घकालिक स्थिरता और ग्रोथ को और बल मिला है।

इस डील के साथ, एक तरफ Elevation को शानदार रिटर्न मिला है, वहीं दूसरी तरफ Ixigo को नए दीर्घकालिक निवेशकों का समर्थन भी प्राप्त हो रहा है – जो कंपनी को आने वाले समय में और मजबूती देगा।


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💰 SIMPL पर ईडी का शिकंजा: ₹913.76 करोड़ के FDI उल्लंघन में मामला दर्ज

SIMPL

🚨 भूमिका
भारत में फिनटेक और BNPL (Buy Now, Pay Later) सेक्टर की तेज़ी से बढ़ती लोकप्रियता के बीच एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate – ED) ने One Sigma Technologies Pvt. Ltd. के खिलाफ FEMA (Foreign Exchange Management Act) के तहत शिकायत दर्ज की है। यह वही कंपनी है जो पॉपुलर BNPL ऐप SIMPL का संचालन करती है।

ED का आरोप है कि SIMPL ने ₹913.76 करोड़ के विदेशी निवेश में अनियमितताएं की हैं।


📍simpl जांच की शुरुआत कैसे हुई?
बेंगलुरु स्थित ईडी जोनल ऑफिस ने बताया कि उन्हें भरोसेमंद इनपुट मिला था कि SIMPL ने अमेरिका से भारी मात्रा में विदेशी निवेश हासिल किया है, और यह भारत की FDI (Foreign Direct Investment) नीति का उल्लंघन करता है।

जांच के दौरान पता चला कि कंपनी ने—

  • ₹648.87 करोड़ रुपये FDI के रूप में हासिल किए
  • ₹264.88 करोड़ रुपये convertible notes के जरिए जुटाए
  • और इन दोनों को 100% automatic route के तहत दर्ज किया

🖥️ IT सेक्टर बताकर FDI का फायदा?
SIMPL ने FDI नियमों के तहत अपने व्यवसाय को “Information Technology and computer service activities” के रूप में वर्गीकृत किया था ताकि उसे सरकार की मंजूरी के बिना विदेशी निवेश हासिल करने की छूट मिल सके।

लेकिन ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि SIMPL का वास्तविक संचालन वित्तीय सेवाओं (financial activities) से जुड़ा है – जो कि सरकारी मंजूरी वाले मार्ग (Government Approval Route) में आते हैं, न कि automatic route में।


⚠️ Convertible Notes पर भी नियमों का उल्लंघन
भारत के FDI नियमों के अनुसार, यदि कोई स्टार्टअप financial services ऑफर करता है और वह विदेशी निवेशकों से convertible notes जारी कर फंड जुटाना चाहता है, तो इसके लिए सरकार की पूर्व मंजूरी ज़रूरी होती है।

ईडी का आरोप है कि SIMPL ने ऐसा कोई अप्रूवल भारत सरकार से नहीं लिया और सीधे विदेशी निवेश हासिल कर लिया।

इस तरह, कंपनी ने—

🔹 FDI नियमों
🔹 Convertible note जारी करने के नियमों

— दोनों का उल्लंघन किया।


📄 FEMA के तहत शिकायत दर्ज
अब ईडी ने SIMPL और उसके डायरेक्टर नित्यनंद शर्मा (Nithya Nand Sharm) के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कर दी है। यह मामला FEMA की धारा 13 (Section 13 of FEMA) के तहत भेजा गया है, जहां adjudicating authority तय करेगी कि कंपनी और निदेशक पर क्या दंड लगाया जाए या अन्य कोई कानूनी कार्रवाई हो।


🔎 पिछली फंडिंग और इतिहास
SIMPL ने नवंबर 2021 में अपनी Series B फंडिंग राउंड में $40 मिलियन (लगभग ₹300 करोड़) जुटाए थे। उस समय कंपनी तेजी से भारतीय डिजिटल क्रेडिट और BNPL मार्केट में पांव जमा रही थी।

अब यह कार्रवाई उसके उसी फंडिंग पैटर्न पर सवाल खड़ा करती है।


📊 ED की दूसरी बड़ी कार्रवाई – Myntra पर भी शिकंजा
इस कार्रवाई से ठीक एक दिन पहले ईडी ने Myntra Designs Pvt Ltd पर भी ₹1,654 करोड़ के FDI उल्लंघन का मामला दर्ज किया था। आरोप है कि Myntra और उसके सहयोगी संस्थान multi-brand retail trading (MBRT) कर रहे थे, लेकिन इसे wholesale cash & carry बिज़नेस के रूप में दिखाया जा रहा था — जो कि भारत के FDI नियमों के तहत प्रतिबंधित है।


📌 BNPL और फिनटेक सेक्टर को चेतावनी
SIMPL के खिलाफ हुई इस कार्रवाई से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत सरकार अब फिनटेक और BNPL ऐप्स के कामकाज और फंडिंग स्ट्रक्चर पर कड़ी निगरानी रख रही है।

भारत का BNPL सेक्टर ऐसे ऐप्स से भरा है जो टेक्नोलॉजी की आड़ में वित्तीय सेवाएं दे रहे हैं – और इनमें से कई कंपनियां FDI के नियमों का सही तरीके से पालन नहीं करतीं।


📢 विशेषज्ञों की राय
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि:

“यह कार्रवाई एक संकेत है कि अगर कोई स्टार्टअप ‘टेक कंपनी’ होने का दावा करके वित्तीय सेवाएं देगा और FDI नियमों को दरकिनार करेगा, तो वह मुश्किल में आ सकता है। BNPL मॉडल, खासकर Simpl जैसे ऐप्स को अब पारदर्शिता और अनुपालन पर ज़्यादा ध्यान देना होगा।”


🧠 निष्कर्ष
SIMPL पर ईडी की कार्रवाई एक माइलस्टोन केस है, जो भारत के स्टार्टअप और फिनटेक इकोसिस्टम को यह संदेश देता है कि FDI नियमों का पालन अनिवार्य है, चाहे कंपनी कितनी भी टेक्नोलॉजिकल क्यों न हो।

फिनटेक कंपनियों को अब अपने बिज़नेस मॉडल और फंडिंग स्ट्रक्चर को कानूनी और नियामकीय दिशानिर्देशों के अनुसार संचालित करना होगा, वरना उन्हें भी इसी तरह की जांच का सामना करना पड़ सकता है।


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🔒 Bharatsure ने जुटाए ₹6 करोड़, इंश्योरेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को देगी रफ्तार

Bharatsure

📍 परिचय
भारतीय इंश्योरटेक स्टार्टअप Bharatsure ने हाल ही में ₹6 करोड़ की फंडिंग जुटाई है। यह फंडिंग Inflection Point Ventures (IPV) के नेतृत्व में हुई, जिसमें Capital A और Atrium Angels ने भी भाग लिया। इस फंडिंग का मकसद कंपनी के इंश्योरेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को स्केल करना और भारत में embeddedgroup insurance को विस्तार देना है।


🛠️ क्या करता है Bharatsure?

Bharatsure एक Infrastructure-as-a-Service (IaaS) प्लेटफॉर्म है, जिसकी स्थापना Anuj Parekh और Sanil Basutkar ने की थी। यह प्लेटफॉर्म कंपनियों, SMEs (छोटे-मध्यम उद्योगों), और पार्टनर-आधारित इकोसिस्टम को सक्षम बनाता है कि वे अपने प्रोडक्ट्स और सर्विसेज में सीधे मॉड्यूलर व ग्रुप इंश्योरेंस को एम्बेड कर सकें।

इसका फोकस है —

  • स्केलेबल इंश्योरेंस इंफ्रास्ट्रक्चर देना
  • एम्प्लॉयी बेनिफिट्स और वेलनेस सॉल्यूशंस को ऑफर करना
  • रेवेन्यू कमाना पॉलिसी डिस्ट्रीब्यूशन, प्रीमियम कमीशन, और इंश्योरेंस टेक्नोलॉजी सेवाओं के ज़रिए

📊 अब तक का प्रदर्शन

  • Bharatsure देशभर में 1,500 से ज़्यादा स्टेशनों और 70,000 ड्राइवर्स के नेटवर्क के साथ 50 शहरों में सक्रिय है।
  • कंपनी ने अब तक 2 लाख से ज़्यादा लोगों को बीमा सुरक्षा दी है।
  • अब तक 10,000 से ज़्यादा क्लेम प्रोसेस कर चुकी है।
  • Google पर कंपनी को 4.9/5 की शानदार रेटिंग मिली है।
  • FY25 में रेवेन्यू डबल किया और CM3 स्तर पर ब्रेक-ईवन भी किया।
  • लक्ष्य है कि FY28 तक ₹100 करोड़ का रेवेन्यू पार किया जाए।

🤝 नई साझेदारी: Battery Smart के साथ इनोवेशन
हाल ही में Bharatsure ने Battery Smart के साथ साझेदारी की है, जो EV (इलेक्ट्रिक व्हीकल) के लिए बैटरी-स्वैपिंग नेटवर्क है। इस पार्टनरशिप के तहत Bharatsure ने एक प्राकृतिक आपदा बीमा स्कीम लॉन्च की है, जो स्टेशन पार्टनर्स को आग, बाढ़, भूकंप और व्यक्तिगत दुर्घटनाओं से सुरक्षा देती है।

यह कदम बताता है कि Bharatsure सिर्फ तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं दे रहा, बल्कि सामाजिक और व्यावसायिक सुरक्षा की ज़रूरतों को भी समझकर उन्हें संबोधित कर रहा है।


🚀 टेक्नोलॉजी के साथ नया युग
Bharatsure का फोकस सिर्फ बीमा को डिजिटल बनाना नहीं है, बल्कि वह बीमा को accessibility और affordability के लिहाज़ से भी नया आकार दे रहा है।

  • कंपनी का modular insurance model संस्थानों को उनकी ज़रूरत के अनुसार बीमा उत्पाद चुनने की सुविधा देता है।
  • यह विशेष रूप से उन संस्थाओं के लिए फायदेमंद है जो gig workers, delivery staff, EV नेटवर्क, या लो-इनकम कर्मचारियों के साथ काम करती हैं।

📈 प्रतिस्पर्धा और बाज़ार की स्थिति
Bharatsure भारतीय इंश्योरटेक स्पेस में SecureNow, BimaKavach, और Pazcare जैसे खिलाड़ियों से प्रतिस्पर्धा करता है।

लेकिन Bharatsure का IaaS मॉडल, उसका स्टेशन-आधारित नेटवर्क, और real-time embedded insurance capabilities इसे एक अलग मुकाम पर रखते हैं।


📣 संस्थापकों का बयान
कंपनी के को-फाउंडर Anuj Parekh ने कहा:

“हम इंश्योरेंस को उन लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं जो अब तक इसके दायरे से बाहर थे। हमारा लक्ष्य है कि हम हर संस्थान को अपना खुद का बीमा नेटवर्क देने में सक्षम बनाएं – वो भी बिना किसी भारी निवेश के।”


🌍 भविष्य की योजना
Bharatsure आने वाले समय में:

  • और शहरों में बीमा नेटवर्क विस्तार करेगा
  • Embedded insurance integration को आसान बनाएगा
  • EV और gig economy जैसे उभरते क्षेत्रों में गहराई से पैठ बनाएगा
  • FY28 तक ₹100 करोड़ का रेवेन्यू टारगेट हासिल करेगा

🧠 निष्कर्ष
Bharatsure जैसे स्टार्टअप भारत में इंश्योरेंस टेक्नोलॉजी को एक नया आकार दे रहे हैं। IaaS मॉडल, समुदाय-केंद्रित समाधान, और प्रभावशाली ग्रोथ इसे एक अगली पीढ़ी की इंश्योरटेक कंपनी बना रहे हैं।

इसकी सफलता यह दिखाती है कि बीमा सिर्फ एक उत्पाद नहीं, बल्कि एक बुनियादी ज़रूरत है – और टेक्नोलॉजी के ज़रिए इसे हर भारतीय तक पहुंचाया जा सकता है।


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💡 Netrasemi ने जुटाए ₹107 करोड़,

Netrasemi

केरल स्थित सेमीकंडक्टर स्टार्टअप Netrasemi ने अपने Series A फंडिंग राउंड में ₹107 करोड़ (लगभग $12.5 मिलियन) की राशि जुटाई है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Zoho Corporation और Unicorn India Ventures ने मिलकर किया।

इस निवेश से कंपनी भारत में सेमीकंडक्टर डिज़ाइन, Edge-AI चिप डेवेलपमेंट, और IoT डिवाइसेज़ के लिए स्मार्ट चिप सॉल्यूशन्स को आगे बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है।


📈 अब तक की फंडिंग हिस्ट्री

इससे पहले Netrasemi ने:

  • ₹10 करोड़ की प्री-सीरीज़ A फंडिंग Unicorn India Ventures से हासिल की थी
  • और शुरुआती Seed राउंड्स में ₹8.3 करोड़ की राशि जुटाई थी

अब ₹107 करोड़ की Series A फंडिंग के साथ कंपनी की R&D क्षमताएं, मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और मार्केटिंग योजनाएं और भी मजबूत होंगी।


🧠 क्या करता है Netrasemi?

2020 में ज्योतिस इंद्रभाई, श्रीजित वर्मा, और दीपा गीता द्वारा स्थापित, Netrasemi एक टेक्नोलॉजी स्टार्टअप है जो System-on-Chips (SoCs) डिजाइन करता है। ये चिप्स खास तौर पर स्मार्ट IoT प्रोडक्ट्स के लिए बनाए जाते हैं जो:

  • वीडियो प्रोसेसिंग जैसे कॉम्प्लेक्स वर्कलोड्स को हैंडल कर सकें
  • डिवाइस-लेवल पर AI एनालिटिक्स कर सकें
  • और क्लाउड या सर्वर पर डेटा भेजे बिना रीयल-टाइम निर्णय लेने में सक्षम हों

कंपनी का फोकस खास तौर पर उन तकनीकों पर है जो भारत जैसे देश में लोकल कंप्यूटिंग (Edge AI) को सशक्त बना सकें।


🧠 इनोवेशन की ताकत: Energy-efficient AI Cores

Netrasemi के चिप्स में कंपनी की खुद की बनाई गई Deep Neural AI Acceleration Core (NPU) का उपयोग होता है, जिससे ये डिवाइस-लेवल पर ही:

  • वीडियो एनालिटिक्स
  • ऑब्जेक्ट डिटेक्शन
  • थ्रेट अलर्ट
    — जैसे टास्क बड़ी आसानी से और कम ऊर्जा में पूरे कर पाते हैं।

यह तकनीक खास तौर पर उन IoT और सुरक्षा उपकरणों के लिए उपयोगी है जो सीमित संसाधनों के बावजूद तेज और सटीक AI एनालिसिस चाहते हैं।


📹 भारतीय बाजार के लिए CCTV AI चिप्स

पिछले 12 महीनों में Netrasemi ने:

  • दो Edge-AI चिप्स का विकास पूरा किया है जिनमें एडवांस वीडियो प्रोसेसिंग क्षमताएं हैं
  • भारतीय बाजार के लिए AI CCTV कैमरा चिप की डेवेलपमेंट शुरू की है
  • Evaluation Boards और Development Platforms के लिए कई पार्टनरशिप्स की हैं
  • वैश्विक कंपनियों के साथ MoUs साइन किए हैं, जिससे रिसर्च और सैंपल रिलीज को गति मिली है

🔧 SoC Tapeout और अगला लक्ष्य

कंपनी ने दो SoC प्रोडक्ट्स का Tapeout पूरा कर लिया है जो कि TSMC की 12nm तकनीक पर आधारित हैं। यह तकनीक दुनिया की सबसे प्रमुख चिपमेकिंग टेक्नोलॉजी में से एक मानी जाती है।

आने वाले 12–18 महीनों में कंपनी का लक्ष्य:

  • सभी तीन SoC परिवारों का फुल मास्क प्रोडक्शन शुरू करना
  • और नेक्स्ट-जेनरेशन Ultra High-Performance SoC के लिए R&D को तेज करना
  • ये नए चिप्स खासकर Edge Servers और Smart NVRs (Network Video Recorders) के लिए होंगे

🔌 भारतीय OEMs के लिए गेमचेंजर

Netrasemi का उद्देश्य भारतीय Original Equipment Manufacturers (OEMs) को उनके कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए लोकल, किफायती और हाई-पर्फॉर्मेंस चिप्स देना है। इस निवेश से कंपनी अब:

  • अपना उत्पादन आधार (Manufacturing Base) बढ़ाएगी
  • मार्केटिंग एक्सपेंशन करेगी
  • और तकनीकी विकास को गति देगी

इससे भारत में “Make in India” अभियान को भी नई ऊर्जा मिलेगी, खासकर सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में।


🌏 भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का उभार

Netrasemi का यह फंडरेज़ भारतीय सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए भी एक पॉजिटिव संकेत है। जहां दुनिया की नज़र अब चिप मैन्युफैक्चरिंग और Edge Computing पर है, वहीं भारत के भीतर ऐसी कंपनियों का उभार दिखाता है कि देश अब सिर्फ उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता बनने की ओर अग्रसर है।


📝 निष्कर्ष: भारत से दुनिया तक — Netrasemi का बड़ा विजन

Netrasemi न सिर्फ तकनीकी इनोवेशन में अग्रणी है, बल्कि यह दिखाता है कि छोटे शहरों और स्टार्टअप हब्स (जैसे केरल) से भी वैश्विक स्तर की टेक्नोलॉजी निकल सकती है। ₹107 करोड़ की इस नई फंडिंग से कंपनी अपने चिप्स को तेजी से बाजार में लाने, नए प्रोडक्ट लॉन्च करने, और भारतीय टेक इकोसिस्टम को मजबूत करने के रास्ते पर है।


🛠️ क्या भारत अगला सेमीकंडक्टर हब बन सकता है? Netrasemi जैसे स्टार्टअप्स इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए पूरी तैयारी में हैं।

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🧠 LISSUN ने अमेरिका की Being Cares Inc का अधिग्रहण किया,

LISSUN

भारत की प्रमुख मेंटल हेल्थ प्लेटफॉर्म LISSUN ने अमेरिका स्थित Being Cares Inc का अधिग्रहण कर लिया है। यह रणनीतिक अधिग्रहण LISSUN की उस बड़ी योजना का हिस्सा है, जिसके अंतर्गत वह भारत में AI-संचालित, बच्चे-केंद्रित व्यवहारिक विकास ईकोसिस्टम बनाना चाहता है।

🤝 क्या है यह अधिग्रहण?

इस डील के तहत LISSUN ने Being Cares Inc की पूरी तकनीक (technology stack) और टीम को अपने अधीन कर लिया है। अब Being के संस्थापक वरुण गांधी (CEO) और अभिषेक शर्मा (CTO) भी LISSUN की टीम का हिस्सा बन चुके हैं — वरुण को Chief Product Officer और अभिषेक को Chief Technology Officer बनाया गया है।


🌎 कौन है Being Cares Inc?

Being Cares Inc एक अमेरिका आधारित mental wellbeing स्टार्टअप है जो AI-संचालित टूल्स के ज़रिए 40 से अधिक मानसिक एवं व्यवहारिक स्थितियों की पहचान और समाधान प्रदान करता है।
इनमें शामिल हैं:

  • ऑटिज़्म (Autism)
  • ADHD (अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर)
  • स्पीच डिले (Speech Delay)
  • लर्निंग डिसऑर्डर्स (Learning Challenges)
  • और कई अन्य भावनात्मक स्थितियां

Being ने अब तक वैश्विक स्तर पर 10 लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं को सेवा प्रदान की है।


🧒 बच्चों की मानसिक सेहत के लिए मजबूत मॉडल

LISSUN पहले से ही भारत में बच्चों की मानसिक सेहत को लेकर काम कर रहा है, और इस अधिग्रहण से उसका मॉडल और मजबूत हो गया है। अब वह:

  • थेरैपिस्ट-नेतृत्व वाली केयर
  • और AI-पावर्ड हाइपर-पर्सनलाइज़्ड गाइडेंस
    — दोनों को एकीकृत कर रहा है।

LISSUN और Being की इस साझेदारी से अब ऐसे प्लेटफॉर्म का निर्माण होगा जो 2,500 से अधिक रियल-लाइफ कारणों और प्रभावों का विश्लेषण करके माता-पिता और बच्चों को व्यक्तिगत मानसिक स्वास्थ्य समाधान देगा।


📍 Sunshine by LISSUN: डिजिटल से लेकर क्लीनिक तक

LISSUN पहले से ही अपने Sunshine by LISSUN सेंटर के ज़रिए बच्चों के विकास पर ध्यान दे रहा है। अब Being के साथ साझेदारी से यह प्लेटफॉर्म एक “फुल-स्पेक्ट्रम केयर प्रोवाइडर” बन चुका है — जो डिजिटल गाइडेंस के साथ-साथ इन-पर्सन थेरैपी भी ऑफर करता है।

🌟 LISSUN का फोकस अब 3 स्तरों पर होगा:

  1. घर (Home): पेरेंट्स को रियल-टाइम गाइडेंस और एक्टिविटी सुझाव
  2. स्कूल (School): टीचर्स और काउंसलर्स के साथ समन्वय
  3. क्लीनिक (Clinical): पेशेवर थेरेपी और इंटरवेंशन

🧑‍💻 Ray: AI-संचालित वर्चुअल असिस्टेंट

LISSUN ने अपना खुद का AI वर्चुअल असिस्टेंट – Ray भी तैयार किया है। यह व्हाट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म पर करोड़ों माता-पिता को रीयल-टाइम डेवलपमेंटल इनसाइट्स, थेरेपी एक्टिविटी सुझाव और माइलस्टोन ट्रैकिंग जैसी सेवाएं देगा।

इस तकनीक की मदद से अब भारत के छोटे शहरों और कस्बों में भी बच्चों की मानसिक सेहत की देखभाल डिजिटल माध्यम से की जा सकेगी।


🚀 विस्तार की योजना: 20 से 200 Sunshine सेंटर

फिलहाल LISSUN के पास 20 ‘Sunshine by LISSUN’ सेंटर हैं, लेकिन कंपनी की योजना है कि अगले 2–4 वर्षों में इसे बढ़ाकर 200 सेंटर किया जाए। इसके साथ-साथ:

  • AI-संचालित वर्चुअल सपोर्ट का विस्तार
  • स्कूली साझेदारियों में वृद्धि
  • भारत में Tier-2 और Tier-3 शहरों तक पहुंच

LISSUN भारत में मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र में सुलभता (accessibility) और गुणवत्ता (quality) को साथ लेकर चलने वाला एक अनोखा प्लेटफॉर्म बन रहा है।


🧩 क्या बदलाव लाएगा यह अधिग्रहण?

🔄 तकनीकी मजबूती:

Being की टेक्नोलॉजी को अपनाकर अब LISSUN भारत के बच्चों के लिए डेटा-संचालित और जमीनी हकीकत पर आधारित समाधान देने की क्षमता रखता है।

🎯 अधिक पर्सनलाइज़्ड केयर:

हर बच्चे की ज़रूरत, उसके व्यवहार, समस्याओं और विकास स्तर के आधार पर अब कस्टमाइज्ड थेरेपी और गाइडेंस दी जा सकेगी।

🌐 फिजिकल + डिजिटल = Phygital नेटवर्क:

इन-पर्सन सेंटर + ऑनलाइन सपोर्ट मिलकर “Phygital” नेटवर्क बनाएंगे, जिससे देशभर के परिवारों को एक जैसा सपोर्ट मिलेगा।


📢 निष्कर्ष: भारत में बाल मानसिक स्वास्थ्य की दिशा में बड़ी छलांग

LISSUN द्वारा Being Cares Inc का अधिग्रहण भारत के लिए एक क्रांतिकारी कदम है। यह न केवल बच्चों की मानसिक और भावनात्मक ज़रूरतों को समझेगा, बल्कि उन्हें व्यवस्थित, वैज्ञानिक और व्यक्तिगत तरीके से संबोधित भी करेगा।

बदलते दौर में जब ऑटिज़्म, ADHD, लर्निंग डिसऑर्डर जैसी स्थितियां आम होती जा रही हैं, LISSUN जैसे प्लेटफॉर्म समाज के लिए एक समाधान-संचालित भविष्य की नींव रख रहे हैं।


🧒🏻📲 अगर आप भी अपने बच्चे की मानसिक सेहत को लेकर सजग हैं, तो LISSUN से जुड़ें — डिजिटल गाइडेंस और पेशेवर थेरैपी का भरोसेमंद मेल।

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