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Arthum

गुरुग्राम स्थित वर्कफोर्स मैनेजमेंट स्टार्टअप Arthum ने अपने सीड फंडिंग राउंड में ₹10 करोड़ (करीब $1.09 मिलियन) की राशि जुटाई है 💰। इस निवेश राउंड का नेतृत्व Caret Capital ने किया है, जबकि Keynote Financial Services Limited और JS Global ने भी इसमें भागीदारी की है 🤝। यह फंडिंग भारत के कॉन्ट्रैक्ट और ब्लू-कॉलर वर्कफोर्स सेक्टर में Arthum की बढ़ती पकड़ को दर्शाती है।


🛠️ टेक्नोलॉजी अपग्रेड और नए शहरों में विस्तार की योजना

कंपनी के अनुसार, इस फंडिंग से मिली पूंजी का इस्तेमाल अपने टेक्नोलॉजी स्टैक को और मजबूत करनेभौगोलिक विस्तार और वित्तीय सेवाओं को बढ़ाने में किया जाएगा 📈। Arthum उत्तर और पश्चिम भारत के प्रमुख औद्योगिक शहरों में अपने ऑपरेशंस फैलाने की तैयारी में है।

स्टार्टअप देहरादून, चंडीगढ़, लुधियाना, जयपुर और अहमदाबाद जैसे शहरों में विस्तार की योजना बना रहा है 🏙️। ये शहर बड़े औद्योगिक क्लस्टर्स के लिए जाने जाते हैं, जहां कॉन्ट्रैक्ट और ब्लू-कॉलर श्रमिकों की भारी मांग रहती है।


🏗️ 2023 में हुई शुरुआत, कॉन्ट्रैक्ट वर्कफोर्स पर खास फोकस

Arthum की स्थापना 2023 में दर्पण शर्मा और विशाल मिश्रा द्वारा की गई थी 👨‍💼👨‍💼। स्टार्टअप का मकसद कॉन्ट्रैक्ट और ब्लू-कॉलर वर्कफोर्स के लिए एक इंटीग्रेटेड डिजिटल ऑपरेटिंग सिस्टम तैयार करना है।

यह प्लेटफॉर्म एंटरप्राइजेज, लेबर कॉन्ट्रैक्टर्स और श्रमिकों को एक ही डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर जोड़ता है 🔗, जिससे वर्कफोर्स मैनेजमेंट से जुड़ी जटिल प्रक्रियाओं को आसान और पारदर्शी बनाया जा सके।


📊 एक ही प्लेटफॉर्म पर अटेंडेंस से लेकर पेरोल तक

Arthum अपने यूजर्स को ERP जैसे एडवांस टूल्स प्रदान करता है, जिनमें शामिल हैं:

  • 📍 जियो-टैग्ड अटेंडेंस
  • 💸 ऑटोमेटेड पेरोल
  • 📲 डिजिटल पेमेंट्स
  • 📑 स्टैच्यूटरी कंप्लायंस
  • 📝 कॉन्ट्रैक्ट मैनेजमेंट

ये सभी सुविधाएं खासतौर पर उन कंपनियों के लिए उपयोगी हैं जो बड़ी संख्या में कॉन्ट्रैक्ट श्रमिकों के साथ काम करती हैं और मैन्युअल प्रोसेस से छुटकारा पाना चाहती हैं।


👷‍♂️ लाखों श्रमिक और कॉन्ट्रैक्टर्स प्लेटफॉर्म से जुड़े

फिलहाल Arthum का प्लेटफॉर्म 3 लाख से ज्यादा लेबर कॉन्ट्रैक्टर्स के ऑपरेशंस को ऑटोमेट कर रहा है ⚙️ और अब तक 6 लाख से अधिक श्रमिकों को ऑनबोर्ड किया जा चुका है 👥। कंपनी का मुख्य फोकस अभी दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में है, लेकिन नई फंडिंग के साथ इसका विस्तार तेजी से अन्य राज्यों में भी होने वाला है।


🏦 नियो-बैंकिंग के जरिए वित्तीय समावेशन पर जोर

वर्कफोर्स मैनेजमेंट के साथ-साथ Arthum ने एक इंटीग्रेटेड नियो-बैंकिंग लेयर भी तैयार की है 🏦। इस लेयर के जरिए सत्यापित श्रमिक डेटा का उपयोग कर वर्कर्स और कॉन्ट्रैक्टर्स को:

  • 💳 बैंकिंग
  • 🛡️ बीमा
  • 💵 क्रेडिट
  • 📈 निवेश

जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। भारत में बड़ी संख्या में ब्लू-कॉलर वर्कर्स अब भी औपचारिक वित्तीय सेवाओं से दूर हैं, ऐसे में Arthum का यह मॉडल वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में अहम साबित हो सकता है।


🤝 बैंकों और NBFCs के साथ मजबूत साझेदारी

Arthum ने अपनी वित्तीय सेवाओं को मजबूत करने के लिए Yes Bank, ICICI Bank और IDFC Bank जैसे प्रमुख बैंकों के साथ साझेदारी की है 🏛️। इसके अलावा, कंपनी 15 से अधिक NBFCs के साथ मिलकर श्रमिकों और कॉन्ट्रैक्टर्स के लिए उनकी जरूरतों के अनुसार वित्तीय उत्पाद उपलब्ध करा रही है।

इन साझेदारियों की मदद से वर्कर्स को समय पर वेतन, आसान लोन और वित्तीय सुरक्षा मिल रही है ✅।


🇮🇳 असंगठित श्रम बाजार में डिजिटल समाधान की बढ़ती मांग

भारत में करोड़ों की संख्या में कॉन्ट्रैक्ट और ब्लू-कॉलर श्रमिक काम कर रहे हैं, लेकिन अब भी इस सेक्टर का बड़ा हिस्सा अनौपचारिक व्यवस्थाओं पर निर्भर है। सरकार की डिजिटल पहल, लेबर कंप्लायंस और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर पर बढ़ते फोकस के बीच Arthum जैसे प्लेटफॉर्म्स की मांग तेजी से बढ़ रही है 📲।


🌟 निवेशकों का भरोसा और भविष्य की दिशा

Caret Capital और अन्य निवेशकों की भागीदारी यह दिखाती है कि Arthum के बिजनेस मॉडल और विजन पर निवेशकों को भरोसा है 👍। आने वाले समय में कंपनी अपने प्लेटफॉर्म को और एडवांस बनाने, नए सेक्टर्स में कदम रखने और देशभर में अपनी मौजूदगी मजबूत करने पर फोकस करेगी।

कुल मिलाकर, Arthum की यह फंडिंग भारत के वर्कफोर्स मैनेजमेंट और ब्लू-कॉलर फिनटेक इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है 🚀।गुरुग्राम स्थित वर्कफोर्स मैनेजमेंट स्टार्टअप Arthum ने अपने सीड फंडिंग राउंड में ₹10 करोड़ (करीब $1.09 मिलियन) की राशि जुटाई है 💰। इस निवेश राउंड का नेतृत्व Caret Capital ने किया है, जबकि Keynote Financial Services Limited और JS Global ने भी इसमें भागीदारी की है 🤝। यह फंडिंग भारत के कॉन्ट्रैक्ट और ब्लू-कॉलर वर्कफोर्स सेक्टर में Arthum की बढ़ती पकड़ को दर्शाती है।


🛠️ टेक्नोलॉजी अपग्रेड और नए शहरों में विस्तार की योजना

कंपनी के अनुसार, इस फंडिंग से मिली पूंजी का इस्तेमाल अपने टेक्नोलॉजी स्टैक को और मजबूत करनेभौगोलिक विस्तार और वित्तीय सेवाओं को बढ़ाने में किया जाएगा 📈। Arthum उत्तर और पश्चिम भारत के प्रमुख औद्योगिक शहरों में अपने ऑपरेशंस फैलाने की तैयारी में है।

स्टार्टअप देहरादून, चंडीगढ़, लुधियाना, जयपुर और अहमदाबाद जैसे शहरों में विस्तार की योजना बना रहा है 🏙️। ये शहर बड़े औद्योगिक क्लस्टर्स के लिए जाने जाते हैं, जहां कॉन्ट्रैक्ट और ब्लू-कॉलर श्रमिकों की भारी मांग रहती है।


🏗️ 2023 में हुई शुरुआत, कॉन्ट्रैक्ट वर्कफोर्स पर खास फोकस

Arthum की स्थापना 2023 में दर्पण शर्मा और विशाल मिश्रा द्वारा की गई थी 👨‍💼👨‍💼। स्टार्टअप का मकसद कॉन्ट्रैक्ट और ब्लू-कॉलर वर्कफोर्स के लिए एक इंटीग्रेटेड डिजिटल ऑपरेटिंग सिस्टम तैयार करना है।

यह प्लेटफॉर्म एंटरप्राइजेज, लेबर कॉन्ट्रैक्टर्स और श्रमिकों को एक ही डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर जोड़ता है 🔗, जिससे वर्कफोर्स मैनेजमेंट से जुड़ी जटिल प्रक्रियाओं को आसान और पारदर्शी बनाया जा सके।


📊 एक ही प्लेटफॉर्म पर अटेंडेंस से लेकर पेरोल तक

Arthum अपने यूजर्स को ERP जैसे एडवांस टूल्स प्रदान करता है, जिनमें शामिल हैं:

  • 📍 जियो-टैग्ड अटेंडेंस
  • 💸 ऑटोमेटेड पेरोल
  • 📲 डिजिटल पेमेंट्स
  • 📑 स्टैच्यूटरी कंप्लायंस
  • 📝 कॉन्ट्रैक्ट मैनेजमेंट

ये सभी सुविधाएं खासतौर पर उन कंपनियों के लिए उपयोगी हैं जो बड़ी संख्या में कॉन्ट्रैक्ट श्रमिकों के साथ काम करती हैं और मैन्युअल प्रोसेस से छुटकारा पाना चाहती हैं।


👷‍♂️ लाखों श्रमिक और कॉन्ट्रैक्टर्स प्लेटफॉर्म से जुड़े

फिलहाल Arthum का प्लेटफॉर्म 3 लाख से ज्यादा लेबर कॉन्ट्रैक्टर्स के ऑपरेशंस को ऑटोमेट कर रहा है ⚙️ और अब तक 6 लाख से अधिक श्रमिकों को ऑनबोर्ड किया जा चुका है 👥। कंपनी का मुख्य फोकस अभी दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में है, लेकिन नई फंडिंग के साथ इसका विस्तार तेजी से अन्य राज्यों में भी होने वाला है।


🏦 नियो-बैंकिंग के जरिए वित्तीय समावेशन पर जोर

वर्कफोर्स मैनेजमेंट के साथ-साथ Arthum ने एक इंटीग्रेटेड नियो-बैंकिंग लेयर भी तैयार की है 🏦। इस लेयर के जरिए सत्यापित श्रमिक डेटा का उपयोग कर वर्कर्स और कॉन्ट्रैक्टर्स को:

  • 💳 बैंकिंग
  • 🛡️ बीमा
  • 💵 क्रेडिट
  • 📈 निवेश

जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। भारत में बड़ी संख्या में ब्लू-कॉलर वर्कर्स अब भी औपचारिक वित्तीय सेवाओं से दूर हैं, ऐसे में Arthum का यह मॉडल वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में अहम साबित हो सकता है।


🤝 बैंकों और NBFCs के साथ मजबूत साझेदारी

Arthum ने अपनी वित्तीय सेवाओं को मजबूत करने के लिए Yes Bank, ICICI Bank और IDFC Bank जैसे प्रमुख बैंकों के साथ साझेदारी की है 🏛️। इसके अलावा, कंपनी 15 से अधिक NBFCs के साथ मिलकर श्रमिकों और कॉन्ट्रैक्टर्स के लिए उनकी जरूरतों के अनुसार वित्तीय उत्पाद उपलब्ध करा रही है।

इन साझेदारियों की मदद से वर्कर्स को समय पर वेतन, आसान लोन और वित्तीय सुरक्षा मिल रही है ✅।


🇮🇳 असंगठित श्रम बाजार में डिजिटल समाधान की बढ़ती मांग

भारत में करोड़ों की संख्या में कॉन्ट्रैक्ट और ब्लू-कॉलर श्रमिक काम कर रहे हैं, लेकिन अब भी इस सेक्टर का बड़ा हिस्सा अनौपचारिक व्यवस्थाओं पर निर्भर है। सरकार की डिजिटल पहल, लेबर कंप्लायंस और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर पर बढ़ते फोकस के बीच Arthum जैसे प्लेटफॉर्म्स की मांग तेजी से बढ़ रही है 📲।


🌟 निवेशकों का भरोसा और भविष्य की दिशा

Caret Capital और अन्य निवेशकों की भागीदारी यह दिखाती है कि Arthum के बिजनेस मॉडल और विजन पर निवेशकों को भरोसा है 👍। आने वाले समय में कंपनी अपने प्लेटफॉर्म को और एडवांस बनाने, नए सेक्टर्स में कदम रखने और देशभर में अपनी मौजूदगी मजबूत करने पर फोकस करेगी।

कुल मिलाकर, Arthum की यह फंडिंग भारत के वर्कफोर्स मैनेजमेंट और ब्लू-कॉलर फिनटेक इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है 🚀।

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