📊 Startup Weekly Funding Report इस हफ्ते 24 भारतीय स्टार्टअप्स ने जुटाए $75.36 मिलियन

Funding report

भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में 10 जनवरी को खत्म हुए हफ्ते के दौरान फंडिंग गतिविधियों में हल्की तेजी देखने को मिली। इस सप्ताह 24 भारतीय स्टार्टअप्स ने कुल $75.36 मिलियन (करीब ₹625 करोड़) की फंडिंग जुटाई। दिलचस्प बात यह रही कि सारी डील्स early-stage में हुईं, जबकि 4 स्टार्टअप्स ने अपनी फंडिंग राशि का खुलासा नहीं किया

इसके मुकाबले, पिछले हफ्ते केवल 3 स्टार्टअप्स ने मिलकर $110.22 मिलियन जुटाए थे। यानी डील काउंट में तेज़ी रही, लेकिन टिकट साइज छोटा रहा।


🚀 Early-stage Funding Deals का दबदबा

इस सप्ताह कोई भी growth या late-stage डील सामने नहीं आई। पूरा फोकस शुरुआती स्टेज की कंपनियों पर रहा।

🔹 प्रमुख फंडिंग डील्स

  • Even Healthcare (Bengaluru) ने $20 मिलियन की फंडिंग जुटाई। इस राउंड का नेतृत्व Lachy Groom और Alpha Wave ने किया, जिसमें Sharrp Ventures भी शामिल रहा।
  • FutureCure Health ने ₹104 करोड़ ($11.5 मिलियन) जुटाए। इस राउंड को Carnelian Asset Management LLP ने लीड किया।
  • Spector.ai, जो एक industrial AI स्टार्टअप है, उसने ₹58 करोड़ ($6.7 मिलियन) की फंडिंग हासिल की। इस डील का नेतृत्व IvyCap Ventures ने किया।
  • Binny Bansal की 3State Ventures ने अपने पोर्टफोलियो स्टार्टअप Oppdoor Pte. Ltd. में अतिरिक्त $6.4 मिलियन का निवेश किया।

इसके अलावा AI स्टार्टअप्स Nitro Commerce और Aivar, और beauty brand Antinorm ने भी इस हफ्ते नई पूंजी जुटाई।

👉 पूरे funding breakup के लिए TheKredible देखें।


🏙️ City-wise Funding: Bengaluru फिर आगे

शहरों के हिसाब से देखें तो:

  • Bengaluru ने सबसे ज्यादा 11 deals के साथ लीड किया
  • Delhi-NCR से 4 deals
  • Mumbai से 3 deals
  • इसके अलावा Kanpur, Udaipur, Indore जैसे उभरते शहरों से भी स्टार्टअप्स ने फंडिंग हासिल की

यह दिखाता है कि स्टार्टअप फंडिंग अब केवल बड़े मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं रह गई है।


🤖 Segment-wise Deals: AI बना सबसे बड़ा विजेता

सेगमेंट के हिसाब से इस हफ्ते का ट्रेंड कुछ ऐसा रहा:

  • AI स्टार्टअप्स – 6 deals
  • Healthtech – 4 deals
  • E-commerce – 4 deals
  • इसके अलावा Aerospace, Proptech, Deeptech, EV और Fintech से भी डील्स देखने को मिलीं

AI का दबदबा यह दिखाता है कि निवेशक अब practical और enterprise-use AI पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं।


📈 Series-wise Funding Breakdown

इस हफ्ते फंडिंग राउंड्स का बंटवारा इस तरह रहा:

  • Seed rounds – 8 deals
  • Series A – 6 deals
  • Pre-Series A और Pre-seed – कुछ डील्स

👉 Series-wise और amount breakup के लिए TheKredible पर विज़िट करें।


📉 Week-on-Week Funding Trend

साप्ताहिक आधार पर देखें तो:

  • इस हफ्ते फंडिंग $75.36 मिलियन रही
  • पिछले हफ्ते यह आंकड़ा $110.22 मिलियन था

यानी amount के लिहाज़ से गिरावट रही, लेकिन डील काउंट मजबूत रहा।
पिछले 8 हफ्तों का औसत फंडिंग लगभग $199.82 मिलियन और 22 deals प्रति हफ्ता रहा है।


👔 Key Hirings और Leadership Updates

इस हफ्ते कई बड़ी नियुक्तियां और इस्तीफे भी देखने को मिले:

  • Meesho ने Milan Partani को General Manager, Commerce Platform नियुक्त किया, जबकि Megha Agarwal ने इस्तीफा दिया
  • Awfis Space Solutions के CFO Ravi Dugar ने इस्तीफा दिया, उनकी जगह Sumit Rochlani नए CFO बने
  • QuiD Cash ने Paytm के पूर्व President & COO Bhavesh Gupta को Strategic Advisor बनाया
  • Freshworks ने Kady Srinivasan को नया CMO नियुक्त किया
  • Ather Energy ने Surabhi Loshali को CHRO नियुक्त किया

🔄 Mergers & Acquisitions

  • CARS24 ने CarInfo का अधिग्रहण किया
  • Urban Harvest ने gourmet food brand Cocosutra को खरीदा
  • MS Dhoni ने अपनी padel venture 7Padel को PadelPark India के साथ मर्ज किया

🆕 New Launches & Partnerships

  • CLIRNET ने DentalNet लॉन्च किया
  • Practo ने UAE के बाद अब US में एंट्री, $75 Mn GMV रन-रेट के साथ

📑 Financial Results Highlights

  • Sid’s Farm – FY25 में ₹168 Cr revenue, लेकिन losses 2.6x बढ़ीं
  • Ecozen – FY25 में profit लगभग ₹100 Cr
  • BellaVita – revenue 2.5x बढ़कर ₹456 Cr, कंपनी profitable
  • Proost Beer – ₹100 Cr revenue, EBITDA breakeven

📰 News Flash

  • Razorpay IPO की तैयारी, ₹4,500 Cr fresh issue की योजना
  • upGrad–Unacademy deal रद्द, valuation disagreement
  • SoftBank ने Ola Electric में 2.15% stake बेचा
  • Amagi IPO से Premji Invest को 14x रिटर्न

🧾 Weekly Summary

इस हफ्ते भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में early-stage funding मजबूत रही, खासकर AI और Healthtech में।
हालांकि बड़े टिकट साइज की कमी दिखी, लेकिन डील एक्टिविटी स्वस्थ बनी रही।
IPO, M&A और सेकेंडरी सेल्स के चलते बाजार में cautious optimism बना हुआ है।

Read more :🧠 मेडिकल इमेजिंग स्टार्टअप Flywheel ने जुटाए $25 मिलियन

🧠 मेडिकल इमेजिंग स्टार्टअप Flywheel ने जुटाए $25 मिलियन

Flywheel

हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग के बीच मेडिकल इमेजिंग डेटा मैनेजमेंट स्टार्टअप Flywheel ने एक बड़ा फंडिंग राउंड पूरा किया है। अमेरिका के मिनियापोलिस (Minnesota) स्थित Flywheel ने $25 मिलियन (करीब ₹208 करोड़) की इक्विटी फंडिंग जुटाई है।

इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Novalis Lifesciences और 8VC ने किया है। यह निवेश ऐसे समय में आया है, जब मेडिकल रिसर्च, क्लिनिकल ट्रायल्स और AI मॉडल डेवलपमेंट में इमेजिंग डेटा की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है।


🚀 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

Flywheel ने बताया कि इस नई पूंजी का उपयोग मुख्य रूप से तीन अहम क्षेत्रों में किया जाएगा:

1️⃣ प्रोडक्ट इनोवेशन को तेज़ करना

कंपनी अपने मेडिकल इमेजिंग प्लेटफॉर्म को और एडवांस बनाएगी, ताकि बड़े पैमाने पर डेटा को तेज़ी और सटीकता के साथ मैनेज किया जा सके।

2️⃣ क्लिनिकल ट्रायल्स के लिए इमेज मैनेजमेंट

Flywheel खासतौर पर clinical trials में इस्तेमाल होने वाले imaging data के मैनेजमेंट और एनालिसिस पर फोकस बढ़ाएगी।

3️⃣ AI मॉडल डेवलपमेंट को सपोर्ट

मेडिकल AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए high-quality और structured imaging data बेहद जरूरी होता है। Flywheel इस दिशा में अपनी क्षमताओं को और मजबूत करेगा।


🏥 Flywheel क्या करता है?

Flywheel की अगुवाई CEO Hooman Hakami कर रहे हैं। यह कंपनी एक medical imaging data management और analysis platform प्रदान करती है, जो पूरे हेल्थकेयर इकोसिस्टम को सपोर्ट करता है।

आज के समय में अस्पतालों, रिसर्च सेंटर्स और फार्मा कंपनियों के पास भारी मात्रा में मेडिकल इमेजिंग डेटा होता है, जैसे:

  • MRI
  • CT Scan
  • PET Scan
  • X-Ray और अन्य diagnostic images

Flywheel का प्लेटफॉर्म इस डेटा को एक जगह व्यवस्थित करने, प्रोसेस करने और उपयोगी insights में बदलने का काम करता है।


🎯 Flywheel के तीन प्रमुख कस्टमर सेगमेंट

Flywheel का प्लेटफॉर्म तीन अलग-अलग तरह के ग्राहकों को सेवाएं देता है:

🧪 1. Biopharmaceutical कंपनियां

Biopharma कंपनियां दवाओं के रिसर्च और डेवलपमेंट के दौरान बड़ी संख्या में क्लिनिकल ट्रायल्स करती हैं। इन ट्रायल्स में imaging data बेहद अहम होता है। Flywheel उन्हें:

  • डेटा को सुरक्षित रखने
  • एनालिसिस करने
  • Regulatory compliance बनाए रखने

में मदद करता है।

🏭 2. Medical Device Manufacturers

मेडिकल डिवाइस कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स की टेस्टिंग और वैलिडेशन के लिए imaging data का इस्तेमाल करती हैं। Flywheel का प्लेटफॉर्म उन्हें बेहतर डेटा मैनेजमेंट और रिपोर्टिंग में मदद करता है।

🎓 3. Academic Medical Centers

विश्वविद्यालयों और मेडिकल रिसर्च सेंटर्स में imaging-based research आम बात है। Flywheel इनके लिए:

  • रिसर्च वर्कफ्लो ऑटोमेट करता है
  • डेटा शेयरिंग आसान बनाता है
  • Collaboration को बेहतर करता है

⚙️ Flywheel की टेक्नोलॉजी क्यों है खास?

Flywheel की सबसे बड़ी ताकत इसका end-to-end imaging data lifecycle management है।

इसका प्लेटफॉर्म:
✔ Imaging data को organize करता है
✔ Research workflows को automate करता है
✔ Data cleaning और standardization करता है
✔ AI-ready datasets तैयार करता है

इससे रिसर्चर्स और कंपनियों का समय बचता है और errors की संभावना कम होती है।


🤖 मेडिकल AI में Flywheel की भूमिका

आज हेल्थकेयर में AI का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन AI मॉडल तभी सही काम करते हैं जब उन्हें high-quality data मिले।

Flywheel का प्लेटफॉर्म:

  • Raw imaging data को structured format में बदलता है
  • AI model training के लिए datasets तैयार करता है
  • Data bias और inconsistency को कम करता है

यही वजह है कि Flywheel को AI-driven healthcare innovation का एक अहम खिलाड़ी माना जा रहा है।


📊 क्यों बढ़ रही है मेडिकल इमेजिंग डेटा की अहमियत?

दुनिया भर में हर साल अरबों मेडिकल इमेजिंग स्टडीज की जाती हैं।

  • Chronic diseases बढ़ रही हैं
  • Personalized medicine का चलन तेज़ है
  • Clinical trials पहले से ज्यादा data-driven हो चुके हैं

इन सभी वजहों से imaging data अब सिर्फ diagnostics तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह drug discovery, device development और AI research का आधार बन चुका है।


💡 निवेशकों को Flywheel में क्यों दिखी बड़ी संभावना?

Novalis Lifesciences और 8VC जैसे निवेशकों का मानना है कि:

  • Medical imaging डेटा का सही उपयोग अभी शुरुआती दौर में है
  • Flywheel एक scalable और regulatory-friendly समाधान देता है
  • AI और clinical research का भविष्य imaging data पर निर्भर करेगा

इन कारणों से Flywheel को long-term growth potential वाला स्टार्टअप माना जा रहा है।


🔮 आगे की राह

आने वाले समय में Flywheel:

  • और ज्यादा हेल्थकेयर संस्थानों के साथ काम कर सकता है
  • Global clinical trials को सपोर्ट कर सकता है
  • Advanced AI tools और analytics लॉन्च कर सकता है

कुल मिलाकर, यह फंडिंग दिखाती है कि medical imaging + AI + clinical research का कॉम्बिनेशन आने वाले वर्षों में हेल्थकेयर इंडस्ट्री को पूरी तरह बदल सकता है।

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🩺 Voice AI Startup Tucuvi ने जुटाए $20 मिलियन

Tucuvi

हेल्थटेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते सेक्टर में एक और बड़ा फंडिंग अपडेट सामने आया है। स्पेन की राजधानी मैड्रिड स्थित voice AI स्टार्टअप Tucuvi ने Series A राउंड में $20 मिलियन (करीब ₹165 करोड़) की फंडिंग जुटाई है।

इस फंडिंग राउंड को Cathay Innovation और Kibo Ventures ने co-lead किया है, जबकि कंपनी के मौजूदा निवेशकों Frontline Ventures, Seaya Ventures और Shilling ने भी इसमें भागीदारी की है।

यह निवेश ऐसे समय में आया है, जब दुनिया भर में हेल्थकेयर सिस्टम पर मरीजों का दबाव बढ़ता जा रहा है और AI-based automation को भविष्य का समाधान माना जा रहा है।


🌍 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

Tucuvi ने बताया कि इस नई पूंजी का इस्तेमाल मुख्य रूप से तीन बड़े उद्देश्यों के लिए किया जाएगा:

1️⃣ इंटरनेशनल एक्सपैंशन
कंपनी खासतौर पर United Kingdom (UK) और United States (US) जैसे बड़े हेल्थकेयर मार्केट्स में अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहती है।

2️⃣ AI टेक्नोलॉजी को और एडवांस बनाना
Tucuvi अपनी voice AI को और ज्यादा स्मार्ट बनाकर complex clinical use cases को संभालने की क्षमता बढ़ाएगी।

3️⃣ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स के साथ पार्टनरशिप
अस्पतालों, हेल्थ सिस्टम्स और पब्लिक हेल्थ एजेंसियों के साथ सहयोग बढ़ाया जाएगा।


🤖 Tucuvi क्या करता है?

Tucuvi की स्थापना CEO Maria Gonzalez Manso और CTO Marcos Valadares ने की थी। यह स्टार्टअप एक voice-based AI प्लेटफॉर्म विकसित करता है, जो क्लिनिकल केयर मैनेजमेंट को ऑटोमेट करता है।

कंपनी का मुख्य प्रोडक्ट है LOLA, जिसे एक virtual caregiver कहा जा सकता है।

💬 LOLA कैसे काम करता है?

LOLA मरीजों से फोन कॉल के जरिए clinical-grade बातचीत करता है, ठीक वैसे जैसे कोई नर्स या केयर टीम का सदस्य बात करता है।

यह सिस्टम:

  • Chronic diseases वाले मरीजों की निगरानी करता है
  • Hospital discharge के बाद recovery को track करता है
  • मरीजों के जवाबों को real-time में analyze करता है

LOLA में इस्तेमाल की गई Natural Language Processing (NLP) तकनीक मरीज की आवाज़, शब्दों और लक्षणों से health red flags पहचान लेती है।

अगर कोई गंभीर संकेत मिलता है, तो सिस्टम तुरंत medical teams को alert कर देता है, जिससे सही मरीज को सही समय पर इलाज मिल सके।


🚑 हेल्थकेयर सिस्टम के लिए क्यों जरूरी है Voice AI?

आज दुनिया भर में हेल्थकेयर सिस्टम कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं:

  • डॉक्टरों और नर्सों की कमी
  • मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी
  • Chronic बीमारियों का बढ़ता बोझ

ऐसे में हर मरीज को manually follow-up करना मुश्किल हो जाता है।

Tucuvi जैसे voice AI प्लेटफॉर्म:
✔ मेडिकल स्टाफ का समय बचाते हैं
✔ Low-risk और high-risk मरीजों को अलग-अलग पहचानते हैं
✔ हेल्थकेयर की cost को कम करने में मदद करते हैं

यही वजह है कि AI-driven clinical automation को भविष्य का हेल्थकेयर मॉडल माना जा रहा है।


📊 10 लाख से ज्यादा मरीजों की निगरानी

Tucuvi का दावा है कि वह अब तक यूरोप में 10 लाख (1 मिलियन) से ज्यादा मरीजों की निगरानी कर चुका है।

कंपनी ने कई बड़े हेल्थकेयर संगठनों के साथ साझेदारी की है, जिनमें शामिल हैं:

  • UK का National Health Service (NHS)
  • स्पेन के कई बड़े सरकारी और प्राइवेट अस्पताल

NHS जैसी संस्था के साथ काम करना किसी भी हेल्थटेक स्टार्टअप के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है, क्योंकि वहां डेटा सिक्योरिटी, clinical accuracy और patient safety के बेहद सख्त मानक होते हैं।


🌐 UK और US क्यों हैं Tucuvi के लिए अहम?

UK और US दुनिया के सबसे बड़े हेल्थकेयर मार्केट्स में गिने जाते हैं।

  • UK में NHS पहले से ही डिजिटल हेल्थ और AI समाधानों को अपनाने में आगे है
  • US में हेल्थकेयर खर्च बहुत ज्यादा है, और automation से cost control की बड़ी जरूरत है

अगर Tucuvi इन दोनों मार्केट्स में scale कर पाता है, तो यह कंपनी को एक global healthtech player बना सकता है।


📈 निवेशकों को क्यों दिखी Tucuvi में बड़ी संभावना?

Cathay Innovation और Kibo Ventures जैसे निवेशकों का मानना है कि:

  • Voice AI हेल्थकेयर का अगला बड़ा ट्रेंड है
  • Phone-based समाधान बुजुर्ग और non-tech मरीजों के लिए ज्यादा effective होते हैं
  • Tucuvi का real-world deployment और clinical validation इसे दूसरे AI startups से अलग बनाता है

आज जब कई AI स्टार्टअप सिर्फ pilot projects तक सीमित हैं, Tucuvi का large-scale patient usage इसे मजबूत बनाता है।


🔮 आगे क्या?

आने वाले समय में Tucuvi:

  • और ज्यादा बीमारियों के लिए voice-based monitoring शुरू कर सकता है
  • AI को multilingual बनाकर नए देशों में एंट्री कर सकता है
  • Insurance और pharma कंपनियों के साथ भी काम कर सकता है

कुल मिलाकर, यह फंडिंग दिखाती है कि AI + हेल्थकेयर का कॉम्बिनेशन अब सिर्फ प्रयोग नहीं, बल्कि एक जरूरी समाधान बन चुका है।

Read more :🌱 Carbon Accounting Startup Plan A का €55 मिलियन में अधिग्रहण, Diginex ने किया बड़ा दांव

🌱 Carbon Accounting Startup Plan A का €55 मिलियन में अधिग्रहण, Diginex ने किया बड़ा दांव

Diginex

सस्टेनेबिलिटी और ESG टेक्नोलॉजी सेक्टर में एक बड़ा कंसोलिडेशन देखने को मिला है। बर्लिन-आधारित carbon accounting startup Plan A का अधिग्रहण लंदन-स्थित sustainability regulation tech कंपनी Diginex ने €55 मिलियन (करीब ₹500 करोड़) में किया है।

यह डील दो ऐसी कंपनियों को एक साथ लाती है, जिनकी स्थापना एक ही साल में हुई थी, लेकिन दोनों सस्टेनेबिलिटी वैल्यू चेन के अलग-अलग सिरों पर काम कर रही थीं। Plan A जहां emissions data और carbon measurement पर फोकस करता है, वहीं Diginex की ताकत ESG और regulatory reporting में है।

यह अधिग्रहण ऐसे समय में हुआ है, जब ESG और climate-tech सेक्टर तेजी से बदलते दौर से गुजर रहा है।


📈 ESG बूम से बदलती हकीकत तक

Plan A की स्थापना 2017 में Lubomila Jordanova ने की थी, जिसका मकसद कंपनियों को यह समझने में मदद करना था कि उनका बिज़नेस पर्यावरण पर कितना और कैसे असर डालता है।

ESG बूम के दौर में Plan A का यह proposition काफी मजबूत साबित हुआ। उस समय:

  • निवेशकों का दबाव बढ़ रहा था
  • रेगुलेटर्स emissions reporting को सख्त बना रहे थे
  • कंपनियां carbon footprint track करने की होड़ में थीं

इसी माहौल में Plan A ने करीब $40 मिलियन की फंडिंग जुटाई, जिसमें financial institutions, venture capital firms और कई बड़े tech founders शामिल थे।

लेकिन अब वही मार्केट पहले जैसी नहीं रही।


⚠️ क्यों कठिन हुआ carbon accounting startups का रास्ता?

पिछले कुछ वर्षों में ESG से जुड़ी नीतियों में कई बदलाव आए हैं।

  • अलग-अलग देशों में reporting rules uneven हो गए हैं
  • कुछ क्षेत्रों में राजनीतिक विरोध (political pushback) देखने को मिला है
  • कई ESG mandates, जो कभी तय माने जा रहे थे, अब कमजोर पड़ते दिख रहे हैं

इसका सीधा असर carbon accounting startups पर पड़ा है। अब सिर्फ अच्छा product होना काफी नहीं है।
आज की तारीख में जरूरी है:

  • Scale
  • Distribution power
  • Regulatory alignment

छोटे और mid-size स्टार्टअप्स के लिए अकेले इन चुनौतियों से निपटना मुश्किल होता जा रहा है।


🤝 Diginex ने अभी यह डील क्यों की?

Diginex के लिए यह अधिग्रहण कोई opportunistic खरीद नहीं, बल्कि strategic consolidation है।

NASDAQ-listed Diginex पहले से ही ESG और sustainability reporting के क्षेत्र में सक्रिय है। Plan A के अधिग्रहण से कंपनी को:

  • एक मजबूत carbon accounting engine
  • emissions data की गहराई
  • और regulatory reporting के साथ end-to-end solution

मिल जाता है।

💶 डील स्ट्रक्चर पर एक नजर

इस अधिग्रहण में:

  • €3 मिलियन cash
  • €52 मिलियन shares
  • और €25 मिलियन तक का potential earn-out

शामिल है।

यह स्ट्रक्चर दिखाता है कि Diginex इस डील को long-term partnership के रूप में देख रहा है, न कि सिर्फ short-term buyout की तरह।


👩‍💼 Founder को CEO बनाए रखना क्यों अहम है?

इस डील का एक अहम पहलू यह है कि Plan A की founder Lubomila Jordanova कंपनी की CEO बनी रहेंगी

इससे साफ संकेत मिलता है कि Diginex:

  • Plan A की brand identity को खत्म नहीं करना चाहता
  • product को पूरी तरह merge करने के बजाय उसका विस्तार करना चाहता है

आज ESG और sustainability जैसे क्षेत्रों में credibility और trust सबसे बड़ी पूंजी होती है। ऐसे में established brand और founder leadership को बनाए रखना एक सोची-समझी रणनीति है।

यह ट्रेंड हाल के वर्षों में कई acquisitions में देखने को मिला है, जहां बड़े प्लेटफॉर्म trusted brands को absorb करने के बजाय उन्हें स्वतंत्र पहचान के साथ scale करते हैं।


🔮 Carbon accounting के भविष्य पर क्या असर पड़ेगा?

इंडस्ट्री लेवल पर देखें तो यह डील इस बात की पुष्टि करती है कि carbon accounting सेक्टर में consolidation शुरू हो चुका है

जब funding धीमी पड़ती है और regulatory clarity कम हो जाती है, तब:

  • छोटे खिलाड़ी अकेले scale नहीं कर पाते
  • बड़े प्लेटफॉर्म specialized tools को अपने साथ जोड़ने लगते हैं

इससे मार्केट में:

  • कंपनियों की संख्या कम
  • लेकिन solutions ज्यादा comprehensive

होते जाते हैं।

Accenture और OneTrust जैसे बड़े प्लेयर्स द्वारा पहले किए गए acquisitions भी इसी दिशा की ओर इशारा करते हैं।


🚀 क्या innovation खत्म हो रही है?

इसका जवाब है — नहीं
लेकिन innovation का फोकस बदल रहा है।

अब carbon accounting सिर्फ dashboards और reports तक सीमित नहीं रहेगा।
आने वाला दौर उन platforms का होगा जो:

  • emissions data को strategy से जोड़ें
  • compliance को business decisions से लिंक करें
  • और sustainability को financial outcomes में translate करें

यानी carbon accounting अब measurement से आगे बढ़कर infrastructure बनने की ओर जा रहा है।


📌 निष्कर्ष

Diginex–Plan A डील सिर्फ €55 मिलियन का अधिग्रहण नहीं है, बल्कि यह carbon accounting और ESG tech के भविष्य की दिशा दिखाने वाला संकेत है।

जैसे-जैसे नियम जटिल होंगे और निवेशक ज्यादा practical होंगे, वैसे-वैसे standalone tools की जगह integrated sustainability platforms ले लेंगे।

Plan A और Diginex का यह कदम बताता है कि आने वाले समय में ESG सिर्फ compliance नहीं, बल्कि core business strategy का हिस्सा बनने वाला है।

Read more :💰 Payhawk नई फंडिंग की तैयारी में $100 मिलियन से ज्यादा जुटाने की बातचीत,

💰 Payhawk नई फंडिंग की तैयारी में $100 मिलियन से ज्यादा जुटाने की बातचीत,

Payhawk

बुल्गारिया मुख्यालय वाली AI-powered spend management platform Payhawk एक बार फिर सुर्खियों में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Payhawk इस समय $100 मिलियन से अधिक की नई फंडिंग जुटाने के लिए निवेशकों के साथ बातचीत कर रही है। अगर यह डील पूरी होती है, तो कंपनी का valuation करीब $2 बिलियन तक दोगुना हो सकता है।

हालांकि, यह बातचीत अभी शुरुआती चरण में है और फंडिंग अमाउंट व वैल्यूएशन में आगे बदलाव संभव है। फिर भी, यह संकेत साफ है कि Payhawk यूरोप की सबसे तेजी से बढ़ती fintech कंपनियों में अपनी जगह और मजबूत करना चाहती है।


🦄 2022 में बनी थी बुल्गारिया की पहली Unicorn

Payhawk ने इससे पहले 2022 में $100 मिलियन की Series B funding जुटाई थी, जिसमें कंपनी का valuation $1 बिलियन पहुंच गया था। इसी के साथ Payhawk बुल्गारिया की पहली unicorn startup बन गई थी, जो देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी गई।

इस राउंड में कंपनी को Lightspeed Venture Partners और Greenoaks Capital जैसे बड़े ग्लोबल निवेशकों का समर्थन मिला था। इन निवेशकों ने Payhawk की उस क्षमता पर भरोसा जताया, जिसके तहत कंपनी अलग-अलग देशों के जटिल regulatory environment में भी अपने बिज़नेस को scale कर सकती है।


🌍 नई फंडिंग से क्या करेगी Payhawk?

अगर यह नया फंडिंग राउंड सफल रहता है, तो Payhawk इस पूंजी का इस्तेमाल मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों में करेगी:

  1. यूरोप में विस्तार (European Expansion)
  2. Product Development और AI capabilities को मजबूत करना
  3. Large enterprises के लिए deeper integrations बनाना

Payhawk पहले से ही कई यूरोपीय देशों में मौजूद है और multinational कंपनियों को services दे रही है। नई फंडिंग से कंपनी अपनी पकड़ और मजबूत कर सकती है।


🤖 AI से खर्चों का स्मार्ट मैनेजमेंट

Payhawk की स्थापना 2018 में Hristo Borisov और Boyko Karadzhov ने की थी, बाद में Konstantin Dzhengozov भी co-founder के रूप में जुड़े।

Payhawk एक ऐसा all-in-one financial platform है, जो:

  • Expense management
  • Corporate payments
  • Invoice processing

को एक ही सिस्टम में जोड़ता है।

यह प्लेटफॉर्म खासतौर पर उन mid-sized और large enterprises के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिनका बिज़नेस कई देशों में फैला हुआ है और जिन्हें अलग-अलग currencies, payment methods और regulations के साथ काम करना पड़ता है।


🧾 एक ही प्लेटफॉर्म पर सब कुछ

Payhawk का सिस्टम कंपनी cards, expense tracking, invoice management और supplier payments को एक जगह लाता है। इसे इस तरह बनाया गया है कि यह आसानी से ERP और accounting software के साथ sync हो जाए।

यही वजह है कि Payhawk छोटे स्टार्टअप्स के बजाय बड़े और established organizations पर ज्यादा फोकस करता है। इसका लक्ष्य flashy features दिखाना नहीं, बल्कि automation, compliance और spending visibility देना है।

कंपनी के कस्टमर बेस में Dott और Gaucho जैसी कंपनियां शामिल हैं, जिन्हें daily operations को slow किए बिना खर्चों पर सख्त कंट्रोल चाहिए।


⚙️ चार नए AI Agents से बढ़ी efficiency

Payhawk ने हाल ही में चार नए AI agents लॉन्च किए हैं, जो core finance operations को automate करते हैं।

कंपनी के मुताबिक:

  • Workflows की speed 60% तक बढ़ गई
  • Finance helpdesk queries में 40% की कमी आई

ये AI agents सिर्फ सवालों के जवाब नहीं देते, बल्कि खुद से tasks execute करते हैं, जैसे:

  • Travel booking
  • Payment processing
  • Procurement management

यह approach दिखाता है कि Payhawk सिर्फ tools नहीं, बल्कि finance teams के daily काम का हिस्सा बनना चाहता है। CFOs के लिए यह एक बड़ा advantage है, खासकर तब जब corporate spending बहुत ज्यादा और complex हो।


⚔️ यूरोप का spend management मार्केट हुआ बेहद competitive

Spend management आज यूरोप के सबसे competitive fintech segments में से एक बन चुका है।

यूरोप की homegrown unicorns जैसे:

  • Pleo
  • Spendesk

पहले ही साबित कर चुकी हैं कि इस सेक्टर में बड़ी demand है।

लेकिन अब मुकाबला सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं है। अमेरिका की बड़ी fintech कंपनी Brex, जिसके पास $1 बिलियन से ज्यादा की funding है और जिसने हाल ही में EU licence हासिल किया है, अब यूरोप में aggressively expand कर रही है।

इससे competition का level और ऊंचा हो गया है। ऐसे में किसी भी European player को लंबे समय तक टिके रहने के लिए:

  • Strong fundamentals
  • Deep product
  • और भारी capital backing

की जरूरत होगी — और Payhawk इसी दिशा में कदम बढ़ाता दिख रहा है।


📈 European fintech funding में अब भी जान

अगर Payhawk का यह फंडिंग राउंड पूरा होता है, तो यह दिखाएगा कि European fintech sector अब भी resilient बना हुआ है।

भले ही इस समय AI startups सबसे ज्यादा headlines बटोर रहे हों, लेकिन fintech कंपनियां — खासकर जो रोजमर्रा की financial समस्याओं को solve करती हैं — अब भी investors का भरोसा जीत रही हैं।

एक ऐसे माहौल में, जहां निवेशक cautious हो गए हैं, Payhawk की momentum यह संकेत देती है कि well-executed fintech platforms के लिए growth के रास्ते अब भी खुले हैं।


🔎 निष्कर्ष

Payhawk की संभावित $100+ मिलियन funding सिर्फ एक निवेश खबर नहीं है, बल्कि यह यूरोपीय fintech ecosystem की मजबूती और भविष्य की दिशा को भी दिखाती है। AI, automation और enterprise focus के दम पर Payhawk आने वाले समय में spend management स्पेस का बड़ा खिलाड़ी बन सकता है।

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📊 Amagi IPO FY26 की पहली छमाही में मुनाफे में लौटी SaaS कंपनी,

Amagi

बेंगलुरु स्थित SaaS कंपनी Amagi ने अपने आने वाले Initial Public Offering (IPO) के लिए हाल ही में Red Herring Prospectus (RHP) दाखिल कर दिया है। इस फाइलिंग में सामने आए फाइनेंशियल आंकड़े बताते हैं कि कंपनी ने FY26 की पहली छमाही (H1 FY26) में मुनाफा दर्ज किया है। तेज़ रेवेन्यू ग्रोथ और बेहतर cost efficiency की बदौलत Amagi घाटे से बाहर निकलने में सफल रही है।

🚀 H1 FY26 में Amagi की रेवेन्यू ग्रोथ

RHP में शामिल फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स के मुताबिक, Amagi का ऑपरेटिंग रेवेन्यू H1 FY26 में 34.5% बढ़कर ₹705 करोड़ पहुंच गया, जो H1 FY25 में ₹524 करोड़ था। यह ग्रोथ मुख्य रूप से कंपनी के core distribution और payout services बिज़नेस से आई है।

Amagi की कुल ऑपरेटिंग इनकम का करीब 98% हिस्सा distribution और payout services से आता है। इस सेगमेंट से रेवेन्यू 36% बढ़कर ₹690 करोड़ हो गया, जो कंपनी के बिज़नेस मॉडल की मजबूती को दिखाता है।

वहीं, कंपनी के AdPlus प्रोडक्ट से होने वाली इनकम लगभग स्थिर रही और H1 FY26 में ₹15 करोड़ के आसपास दर्ज की गई।

💰 Total Income में भी जबरदस्त उछाल

अगर अन्य आय (Other Income) को शामिल करें, तो तस्वीर और भी मजबूत दिखती है।

  • Other Income: ₹29 करोड़
  • Total Income (H1 FY26): ₹734 करोड़
  • H1 FY25 में Total Income: ₹551 करोड़

इस तरह, कुल आय में भी साल-दर-साल बड़ा उछाल देखने को मिला।


📉 खर्चों पर नियंत्रण बना मुनाफे की वजह

Amagi की मुनाफे में वापसी का सबसे बड़ा कारण रहा खर्चों की धीमी रफ्तार से बढ़ोतरी, जबकि रेवेन्यू तेज़ी से बढ़ा।

H1 FY26 में कंपनी के Total Expenses 18.2% बढ़कर ₹722 करोड़ रहे, जबकि H1 FY25 में यह ₹611 करोड़ थे।

🧑‍💼 Employee Cost सबसे बड़ा खर्च

  • Employee benefit expenses: ₹386 करोड़
  • सालाना बढ़ोतरी: 12.5%
  • कुल खर्चों में हिस्सा: 53% से अधिक

यह दिखाता है कि Amagi एक talent-heavy SaaS कंपनी है, जहाँ टेक और डेटा से जुड़े प्रोफेशनल्स पर बड़ा निवेश किया जाता है।

📡 Communication Cost में तेज़ उछाल

  • Communication expenses: ₹216 करोड़
  • ग्रोथ: 32.5%
  • कुल खर्चों में योगदान: लगभग 30%

इसके अलावा:

  • Legal और professional charges घटकर ₹27 करोड़
  • Travel और अन्य खर्च मिलाकर ₹71 करोड़

✅ घाटे से मुनाफे तक का सफर

रेवेन्यू की तेज़ ग्रोथ और खर्चों पर बेहतर नियंत्रण के चलते Amagi ने H1 FY26 में ₹6.5 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया।

तुलना करें तो,

  • H1 FY25 में कंपनी को ₹66 करोड़ का घाटा हुआ था

हालांकि, कंपनी के कुछ profitability metrics अभी भी निगेटिव ज़ोन में हैं:

  • ROCE: -1.51%
  • EBITDA Margin: -0.57%

फिर भी, घाटे से मुनाफे में आना निवेशकों के लिए एक बड़ा पॉजिटिव सिग्नल माना जा रहा है।


💵 Cash Position और Balance Sheet

सितंबर 2025 तक Amagi की बैलेंस शीट काफी मजबूत दिखती है:

  • Cash और Bank Balance: ₹397 करोड़
  • Current Assets: ₹1,177 करोड़

यह कंपनी को IPO के बाद ग्रोथ, इंटरनेशनल एक्सपेंशन और टेक इन्वेस्टमेंट के लिए मजबूत स्थिति में रखता है।


🧾 Amagi IPO: Price Band और डिटेल्स

Amagi ने अपने IPO के लिए ₹343–₹361 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है।

📌 IPO की मुख्य जानकारी

  • Issue Size: ₹1,788.62 करोड़
  • Subscription Open: 13 जनवरी
  • Subscription Close: 16 जनवरी
  • Anchor Book Open: 12 जनवरी
  • Lot Size: 41 शेयर
  • Minimum Retail Investment: लगभग ₹14,800 (upper price band पर)

🦄 निवेशकों को मिलेगा मल्टीबैगर रिटर्न

Amagi के शुरुआती और ग्रोथ-स्टेज निवेशकों के लिए यह IPO बेहद फायदेमंद साबित होने जा रहा है।

कंपनी में निवेश कर चुके बड़े नाम:

  • Premji Invest
  • Accel India
  • Norwest Venture Partners

इनमें से Premji Invest को लगभग 14x रिटर्न मिलने की उम्मीद है, जो इस IPO को निवेशकों की नजर में और आकर्षक बनाता है।


🔍 निष्कर्ष

Amagi का IPO ऐसे समय पर आ रहा है जब भारतीय SaaS कंपनियों की profitability पर खास नजर रखी जा रही है। FY26 की पहली छमाही में मुनाफा दर्ज कर Amagi ने यह साबित किया है कि उसका बिज़नेस मॉडल scalable और sustainable है।

अगर कंपनी आने वाले समय में margins को और बेहतर बना पाती है, तो Amagi भारतीय SaaS IPO स्पेस में एक मजबूत नाम बनकर उभर सकती है।

Read more :📉 Stockbroking Industry में Slowdown Active Users घटे, Groww ने बढ़त बरकरार रखी

📉 Stockbroking Industry में Slowdown Active Users घटे, Groww ने बढ़त बरकरार रखी

Groww

भारत की retail stockbroking industry इन दिनों Groww slowdown के दौर से गुजर रही है। NSE के ताज़ा डेटा के मुताबिक, December 2025 में total active demat users घटकर 4.48 करोड़ रह गए, जबकि जनवरी 2025 में यह आंकड़ा 4.96 करोड़ के peak पर था। यानी साल के भीतर ही करीब 48 लाख active investors बाजार से बाहर हो गए

हालांकि, इस broad decline के बीच Groww ने न सिर्फ अपनी growth बनाए रखी, बल्कि market share के मामले में भी खुद को industry leader के तौर पर मजबूत किया। वहीं Zerodha, Angel One, Upstox जैसे बड़े brokers को client loss का सामना करना पड़ा।


🌱 Groww की मजबूती: Market Share 27% के पार

Slowdown के बावजूद Groww ने December 2025 में करीब 39,500 नए active demat accounts जोड़े। इसके साथ ही Groww का total client base बढ़कर लगभग 1.21 करोड़ (12.13 million) हो गया।

  • Market share: 27.06%
  • भारत का सबसे बड़ा retail broker (active users के आधार पर)

यह साफ संकेत देता है कि नए investors अब भी simple UI, zero-brokerage investing और digital-first platforms को प्राथमिकता दे रहे हैं।


📊 Stock Market में Groww की स्थिति

Market performance की बात करें तो:

  • Groww share price (12:35 PM): ₹158.9
  • Market capitalization: ₹98,068 करोड़
  • यानी लगभग $11 billion valuation

हाल के महीनों में volatility के बावजूद Groww की market positioning मजबूत बनी हुई है, खासकर long-term retail investors के बीच।


📉 Zerodha को लगातार झटका

भारत के सबसे बड़े discount broker रहे Zerodha के लिए December 2025 एक और कमजोर महीना साबित हुआ।

  • November 2025: करीब 1 लाख users की गिरावट
  • December 2025: 72,000 clients और कम

अब Zerodha का:

  • Total client base: 68.5 लाख
  • Market share: 15.29%

लगातार client loss यह दिखाता है कि market maturity के साथ-साथ investors अब platform features, product diversification और ecosystem offerings को ज्यादा महत्व दे रहे हैं।


⚠️ Angel One और Upstox भी दबाव में

Angel One, जो लंबे समय से second-tier leadership के लिए Zerodha को टक्कर देता रहा है, उसे भी नुकसान उठाना पड़ा।

  • December में 36,500 से ज्यादा users घटे
  • Total clients: 67.6 लाख
  • Market share: 15.08%

वहीं Upstox की स्थिति और कमजोर रही:

  • 74,000 से ज्यादा accounts की गिरावट
  • Client base: 20.8 लाख
  • Market share: 4.64%

इन आंकड़ों से साफ है कि aggressive customer acquisition का दौर अब थम चुका है और retention सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।


🏦 Traditional Brokers को मिला सीमित फायदा

जहाँ new-age brokers struggle कर रहे हैं, वहीं कुछ traditional players ने marginal gains दर्ज किए।

  • ICICI Securities: +19,500 accounts
  • SBI Caps: +25,300 accounts
  • Paytm: +18,700 accounts

हालांकि यह growth बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन यह दिखाता है कि trusted brands और bank-backed platforms अब भी conservative investors को attract कर पा रहे हैं।


📉 HDFC, Kotak और Motilal Oswal भी फिसले

दूसरी ओर, कई बड़े नामों को भी नुकसान झेलना पड़ा:

  • HDFC Securities
  • Kotak Securities
  • Motilal Oswal

इन brokers ने December 2025 में net client decline report किया, जो broader industry slowdown को reflect करता है।


🚀 Emerging Brokers: Mixed Performance

नई उम्र के brokers के लिए December मिला-जुला रहा।

🦄 Dhan (Recent Unicorn)

  • Client base: 9.8 लाख
  • Market share: 2.2%
  • Net addition: सिर्फ 4,700 users

हालांकि growth सीमित रही, लेकिन stability अपने आप में एक positive संकेत है।

📱 INDmoney और Share.Market

  • INDmoney:
    • Month-on-month decline: 4.37%
  • PhonePe का Share.Market:
    • Decline: 6.16%

इन platforms के लिए competition और user engagement दोनों बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं।


🤔 Retail Investors क्यों हो रहे हैं कम?

Experts के मुताबिक, slowdown के पीछे कई वजहें हैं:

  • Stock market में high volatility
  • Short-term traders का exit
  • IPO और new listings में reduced excitement
  • Regulatory tightening
  • Rising interest in fixed-income और alternative assets

Retail investors अब ज्यादा selective और cautious हो गए हैं।


🔮 आगे क्या?

आने वाले महीनों में brokerages के लिए key focus areas होंगे:

  • Existing users को retain करना
  • Value-added products (MFs, bonds, advisory)
  • Simplified investing experience
  • Long-term wealth creation narrative

Groww जैसी companies ने दिखाया है कि consistent product improvement और trust-based branding से slowdown में भी growth संभव है।


📝 निष्कर्ष

December 2025 के आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि Indian stockbroking industry अब maturity phase में प्रवेश कर चुकी है। Easy growth का दौर खत्म हो चुका है और अब असली मुकाबला retention, engagement और platform differentiation पर होगा।

जहाँ एक तरफ कई बड़े brokers users खो रहे हैं, वहीं Groww ने यह साबित किया है कि सही strategy के साथ मंदी के दौर में भी आगे बढ़ा जा सकता है।

Read more :🥛 Sid’s Farm FY25 Revenue में 38% की बढ़त,

🥛 Sid’s Farm FY25 Revenue में 38% की बढ़त,

Sid’s Farm

हैदराबाद स्थित dairy brand Sid’s Farm ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में revenue growth के मोर्चे पर अच्छा प्रदर्शन किया है। हालांकि, तेज़ी से बढ़ती लागत (rising costs) के चलते कंपनी का loss काफी गहरा हो गया है।

Registrar of Companies (RoC) में दाखिल financial statements के अनुसार, Sid’s Farm का operating revenue FY25 में 38% बढ़कर ₹168 करोड़ हो गया, जो FY24 में ₹122 करोड़ था। इसके बावजूद, बढ़ते खर्चों ने कंपनी की profitability पर दबाव बना दिया।


🏭 Sid’s Farm का बिजनेस मॉडल

2016 में स्थापित, Sid’s Farm एक mass premium dairy brand है, जिसकी शुरुआत हैदराबाद से हुई थी। कंपनी खुद को अन्य dairy brands से अलग बताती है क्योंकि यह farm-to-home model पर काम करती है।

Sid’s Farm:

  • दूध और milk products सीधे किसानों से source करती है
  • पूरी value chain को खुद control करती है
  • Quality, traceability और freshness पर खास जोर देती है

कंपनी का दावा है कि वह किसानों को बेहतर कीमत देती है और consumers को pure व fresh dairy products उपलब्ध कराती है।

FY25 में:

  • Other income ₹2 करोड़ रहा
  • Total income बढ़कर ₹170 करोड़ हो गया

📈 Revenue बढ़ा, लेकिन खर्च उससे तेज़ बढ़े

जहाँ एक तरफ Sid’s Farm की topline में अच्छी growth देखने को मिली, वहीं दूसरी ओर expenses की growth उससे भी तेज़ रही।

FY25 में:

  • Total expenses 47% बढ़कर ₹196 करोड़ हो गए
  • FY24 में total expenses ₹133.5 करोड़ थे

यानी revenue के मुकाबले खर्चों की रफ्तार ज्यादा तेज़ रही, जिसने losses को और बढ़ा दिया।


💰 Cost Breakdown: कहाँ बढ़ा सबसे ज्यादा खर्च?

Sid’s Farm के खर्चों में सबसे बड़ा हिस्सा raw material और milk procurement का रहा।

प्रमुख खर्च:

  • Cost of material consumed
    • कुल खर्च का 64% से ज्यादा
    • FY25 में 41% बढ़कर ₹126 करोड़
  • Employee benefit expenses
    • 47% की बढ़त
    • FY25 में ₹25 करोड़
  • Advertisement & marketing costs
    • लगभग दोगुना
    • FY24 में ₹3.6 करोड़ → FY25 में ₹7 करोड़
  • Distribution expenses: ₹8 करोड़
  • Transportation costs: ₹5 करोड़
  • Other expenses: ₹25 करोड़

Advertising और logistics पर बढ़ते खर्च यह दिखाते हैं कि कंपनी aggressively expansion और brand building पर फोकस कर रही है।


📉 Losses में तेज़ उछाल

तेज़ी से बढ़ते खर्चों का सीधा असर कंपनी की bottom line पर पड़ा।

  • FY25 में net loss: ₹27 करोड़
  • FY24 में loss: ₹10.5 करोड़
  • यानी loss 2.6 गुना बढ़ा

Profitability ratios भी pressure में रहे:

  • ROCE: -45.24%
  • EBITDA margin: -14.58%

ये आंकड़े दिखाते हैं कि फिलहाल Sid’s Farm growth stage में है और profitability हासिल करने में समय लग सकता है।


📊 Unit Economics: हर ₹1 कमाने में ₹1.17 खर्च

Unit-level economics भी कमजोर हुई है।

  • FY25 में Sid’s Farm ने
    • ₹1 कमाने के लिए ₹1.17 खर्च किए
  • FY24 में यह आंकड़ा ₹1.09 था

इसका मतलब है कि operational efficiency में फिलहाल गिरावट आई है, जो long-term sustainability के लिए चिंता का विषय हो सकती है।


💳 Cash Position और Assets

Cash position की बात करें तो FY25 के अंत तक कंपनी के पास cash buffer सीमित रहा।

  • Cash और bank balance: ₹1 करोड़
  • Current assets: ₹45 करोड़
    • FY24 के मुकाबले improvement देखने को मिली

हालांकि current assets बढ़े हैं, लेकिन low cash balance यह संकेत देता है कि कंपनी को आगे funding या बेहतर cash management की जरूरत पड़ सकती है।


💸 Funding और Investors

Sid’s Farm ने अब तक करीब $12.2 million (लगभग ₹100 करोड़) की funding जुटाई है।

इसके प्रमुख investors में शामिल हैं:

  • Omnivore
  • Narotam Sekhsaria Family Office

सबसे बड़ा funding round:

  • $10 million, जिसे Omnivore और Narotam Sekhsaria Family Office ने co-lead किया था

Agritech और dairy-focused investors का सपोर्ट यह दिखाता है कि Sid’s Farm के model में long-term potential देखा जा रहा है।


🔮 आगे की राह

Sid’s Farm के लिए FY25 mixed रहा:

  • Positive: Strong revenue growth
  • Challenge: Rising costs और बढ़ता loss

आने वाले समय में कंपनी के लिए key focus areas होंगे:

  • Cost optimization
  • Supply chain efficiency
  • Marketing spends पर बेहतर ROI
  • Path to profitability

अगर Sid’s Farm खर्चों को control करने और unit economics सुधारने में सफल रहती है, तो यह premium dairy segment में एक मजबूत player बन सकती है।


📝 निष्कर्ष

Sid’s Farm का FY25 प्रदर्शन यह दिखाता है कि भारतीय dairy startups में growth की अच्छी संभावनाएं हैं, लेकिन profitability हासिल करना अब भी चुनौती बना हुआ है। Revenue growth के बावजूद rising costs ने losses को बढ़ा दिया है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कंपनी अगले कुछ वर्षों में growth और profitability के बीच संतुलन बना पाती है या नहीं।

Read more :💳 Razorpay IPO की तैयारी में, ₹4,500 करोड़ तक जुटाने की योजना

💳 Razorpay IPO की तैयारी में, ₹4,500 करोड़ तक जुटाने की योजना

Razorpay

भारत की प्रमुख digital payments यूनिकॉर्न कंपनी Razorpay अब stock market में एंट्री की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Razorpay ने अपने Initial Public Offering (IPO) को लेकर शुरुआती तैयारियाँ शुरू कर दी हैं और इस पब्लिक इश्यू के जरिए करीब ₹4,500 करोड़ (लगभग $505 million) की fresh capital जुटाने की योजना बना रही है।

Economic Times की एक रिपोर्ट के अनुसार, बेंगलुरु स्थित इस fintech कंपनी ने IPO mandate के लिए merchant bankers को pitch के लिए आमंत्रित किया है। इस रेस में Kotak Mahindra Capital और Axis Capital को प्रमुख दावेदार माना जा रहा है।

हालांकि IPO का exact size और timeline अभी final नहीं हुआ है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक Razorpay का IPO इस साल के अंत तक लॉन्च किया जा सकता है।


🏦 Pre-IPO Funding पर भी बातचीत

IPO की तैयारी के साथ-साथ Razorpay एक pre-IPO funding round पर भी चर्चा कर रही है। बताया जा रहा है कि यह funding round largely secondary हो सकता है, यानी इसमें existing investors अपने shares बेच सकते हैं, जबकि कंपनी के balance sheet में ज्यादा fresh capital न आए।

Razorpay को आखिरी बार 2021 में $7.5 billion valuation मिली थी, जब उसने funding cycle के peak पर $375 million जुटाए थे। इसके बाद global funding slowdown के चलते fintech sector में valuations पर दबाव देखने को मिला है।

इस पूरे घटनाक्रम पर Entrackr ने Razorpay से संपर्क किया है, लेकिन खबर लिखे जाने तक कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई थी।


🏢 Public Limited Company बनने की दिशा में कदम

IPO से पहले Razorpay ने जरूरी corporate restructuring भी पूरी कर ली है। कंपनी ने अप्रैल 2025 में खुद को public limited company में convert कर लिया था। इस डेवलपमेंट को सबसे पहले Entrackr ने exclusively रिपोर्ट किया था।

इसी साल Razorpay ने अपना reverse flip to India भी पूरा किया, यानी कंपनी ने अपनी holding structure को वापस भारत में shift कर लिया। इस प्रक्रिया के तहत Razorpay को करीब $150 million (लगभग ₹1,250 करोड़) का tax भुगतान करना पड़ा।

Startup ecosystem में reverse flip को एक बड़ा और सकारात्मक कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि कंपनियां अब Indian capital markets पर भरोसा जता रही हैं।


🌍 Strategic Moves: UPI और Cross-Border Payments

हाल के महीनों में Razorpay ने अपने business को मजबूत करने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं।

  • कंपनी ने POP UPI में majority stake करीब $30 million में acquire किया
  • इसके अलावा Razorpay को Reserve Bank of India (RBI) से cross-border payment aggregator licence भी मिल चुका है

इन दोनों developments से साफ है कि Razorpay सिर्फ domestic payments तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि international payments और UPI ecosystem में अपनी पकड़ और मजबूत कर रही है।


👨‍💼 Founders और Investors

Razorpay की स्थापना Harshil Mathur और Shashank Kumar ने की थी। दोनों founders ने Razorpay को एक simple payment gateway से एक full-stack fintech platform में बदल दिया है।

अब तक Razorpay:

  • $741 million से ज्यादा funding जुटा चुकी है
  • इसके प्रमुख investors में शामिल हैं:
    • GIC
    • Peak XV Partners (formerly Sequoia Capital India)
    • Z47 (पहले Matrix Partners India)
    • Tiger Global

IPO के जरिए Razorpay को early investors को partial exit का मौका मिलेगा, वहीं कंपनी को future growth के लिए capital भी मिलेगी।


📈 Financial Performance: Revenue में मजबूत उछाल

Financial front पर Razorpay का प्रदर्शन मजबूत रहा है। कंपनी ने FY25 में शानदार growth दर्ज की है।

FY25 Highlights:

  • Consolidated revenue: ₹3,783 करोड़
  • Year-on-year growth: 65%
  • Gross profit: ₹1,277 करोड़ (41% की बढ़त)

यह growth Razorpay के multiple business segments—जैसे payment gateway, banking solutions, POS, और international business—में strong execution के कारण आई है।


📉 Net Loss क्यों हुआ?

हालांकि revenue और gross profit में अच्छी बढ़त के बावजूद Razorpay ने FY25 में net loss report किया।

इसके मुख्य कारण थे:

  • ₹1,209 करोड़ का ESOP-related expense
  • Reverse flip और redomiciling से जुड़े one-time costs

कंपनी का कहना है कि ये expenses largely non-operational और one-time nature के हैं, और आने वाले वर्षों में profitability trajectory बेहतर हो सकती है।


🔮 IPO से क्या बदलेगा?

अगर Razorpay का IPO plan के मुताबिक आगे बढ़ता है, तो यह:

  • India के fintech ecosystem के लिए एक बड़ा milestone होगा
  • Global investors को Indian fintech story में दोबारा भरोसा दिला सकता है
  • अन्य unicorns को भी IPO pipeline में आने का confidence दे सकता है

हालांकि market conditions, valuation expectations और regulatory approvals जैसे factors IPO timeline को प्रभावित कर सकते हैं।


📝 निष्कर्ष

Razorpay का IPO plan यह दिखाता है कि despite funding winter और global uncertainty, मजबूत fundamentals वाली Indian startups public markets की ओर बढ़ रही हैं। Revenue growth, diversified product suite और regulatory clearances Razorpay को IPO-ready बनाते हैं।

अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि Razorpay किस valuation पर market में उतरती है और investors इस fintech giant को कितना support देते हैं।

Read more :⚡ SoftBank ने Ola Electric में घटाई हिस्सेदारी,

⚡ SoftBank ने Ola Electric में घटाई हिस्सेदारी,

ola electric

भारत की प्रमुख electric vehicle (EV) कंपनी Ola Electric Mobility Ltd में SoftBank ने एक बार फिर अपनी हिस्सेदारी कम की है। Regulatory filings के मुताबिक, SoftBank ने अपनी investment arm SVF II Ostrich (DE) LLC के जरिए Ola Electric में 2.15% stake open market transactions के माध्यम से बेच दी है।

यह stake sale 3 सितंबर 2025 से 5 जनवरी 2026 के बीच की गई कई transactions के जरिए पूरी हुई। कुल मिलाकर SoftBank ने करीब 9.5 करोड़ equity shares बाजार में बेचे हैं। चूंकि यह cumulative sale takeover norms के तहत तय 2% threshold से ज्यादा थी, इसलिए इसे stock exchanges को disclose करना अनिवार्य हो गया।


📉 Shareholding में कितनी आई गिरावट?

Stake sale से पहले SVF II Ostrich के पास Ola Electric के 69.16 करोड़ shares थे, जो कंपनी की कुल equity share capital का 15.68% हिस्सा था।

इस ताजा divestment के बाद:

  • SoftBank के पास बचे हैं: 59.7 करोड़ shares
  • Ola Electric में नई हिस्सेदारी: 13.53%

यानी इस एक tranche में SoftBank ने Ola Electric में अपनी हिस्सेदारी 2.15% घटा दी है।


🔁 इससे पहले भी हिस्सेदारी बेच चुका है SoftBank

यह पहली बार नहीं है जब SoftBank ने Ola Electric में stake sale किया हो। इससे पहले भी जुलाई से सितंबर 2025 के बीच SoftBank ने लगभग 9.5 करोड़ shares बेचे थे।

उस sale के बाद:

  • SoftBank की हिस्सेदारी 17.83% से घटकर 15.68% रह गई थी

अब ताजा transaction के साथ SoftBank की कुल हिस्सेदारी और कम होकर 13.53% पर आ गई है।

लगातार दो rounds में stake sale से market में यह चर्चा तेज हो गई है कि SoftBank Ola Electric में अपने exposure को धीरे-धीरे कम कर रहा है।


📊 Stock पर दबाव, Record Lows के करीब ट्रेड

SoftBank की stake sale ऐसे समय पर हुई है जब Ola Electric का शेयर पहले से ही दबाव में है। Stock market में Ola Electric के shares लगातार कमजोर sentiment के चलते record lows के आसपास ट्रेड कर रहे हैं।

इस दबाव की कई वजहें हैं:

  • Early investors द्वारा stake sale
  • Founder और CEO Bhavish Aggarwal द्वारा partial share sale
  • EV sector में बढ़ती competition
  • Near-term profitability को लेकर investor चिंताएं

इन सभी फैक्टर्स ने मिलकर Ola Electric के शेयर पर नकारात्मक असर डाला है और market confidence कमजोर किया है।


👤 Bhavish Aggarwal की Partial Sale से भी बढ़ी चिंता

SoftBank के अलावा Ola Electric के founder और CEO Bhavish Aggarwal द्वारा की गई partial share sale ने भी investor sentiment पर असर डाला है।

हालांकि कंपनी की ओर से यह साफ किया गया था कि यह sale personal financial planning के तहत की गई थी, लेकिन market आमतौर पर promoters की stake sale को cautious signal के तौर पर देखता है।

जब एक साथ promoter और बड़े institutional investors stake बेचते हैं, तो short-term में stock पर दबाव बढ़ना लगभग तय माना जाता है।


🚘 EV Sales में सीमित ग्रोथ

Operational performance की बात करें तो Ola Electric को sales front पर भी फिलहाल ज्यादा राहत मिलती नहीं दिख रही है।

December महीने में Ola Electric की EV sales:

  • Total units sold: 8,402
  • Month-on-month sales: लगभग flat
  • Market share: 9.03%, जो 2% की बढ़त दिखाता है

Market share में हल्की बढ़त के बावजूद Ola Electric का overall position पांचवें स्थान पर रहा।


🆚 Ather Energy से बढ़ता Competition

Ola Electric के लिए competition लगातार tough होता जा रहा है। December में इसके प्रमुख rival Ather Energy ने कहीं बेहतर प्रदर्शन किया।

Ather Energy – December EV Sales:

  • Units sold: 16,391
  • Market share: 17.62%

Ather की sales Ola Electric से लगभग दोगुनी रहीं, जिससे यह साफ है कि premium और mid-segment EV buyers में Ather की पकड़ मजबूत बनी हुई है।


🔍 SoftBank का नजरिया: Exit या Rebalancing?

हालांकि लगातार stake sales को देखकर कई लोग इसे SoftBank का exit मान रहे हैं, लेकिन broader context में इसे portfolio rebalancing भी कहा जा सकता है।

SoftBank पिछले कुछ वर्षों में:

  • India में कई startups से partial और full exits कर चुका है
  • IPOs और secondary sales के जरिए capital recycle कर रहा है
  • AI, cloud infrastructure और deep-tech जैसे नए क्षेत्रों पर फोकस बढ़ा रहा है

इस नजरिए से Ola Electric में stake sale को SoftBank की long-term capital discipline strategy का हिस्सा भी माना जा रहा है।


📌 आगे Ola Electric के लिए क्या?

आने वाले महीनों में Ola Electric के लिए कुछ अहम सवाल रहेंगे:

  • क्या कंपनी EV sales growth को तेज कर पाएगी?
  • क्या margins और profitability पर कोई clear visibility आएगी?
  • क्या लगातार stake sales का सिलसिला यहीं थमेगा?

जब तक इन सवालों के जवाब साफ नहीं होते, तब तक Ola Electric के stock में volatility बनी रह सकती है।


📝 निष्कर्ष

SoftBank द्वारा Ola Electric में 2.15% stake sale ने एक बार फिर investor sentiment को हिला दिया है। पहले से दबाव में चल रहे stock के लिए यह एक और चुनौती है। हालांकि market share में हल्की सुधार दिख रही है, लेकिन sales growth और competition के मोर्चे पर कंपनी को अभी लंबा रास्ता तय करना है।

EV sector में Ola Electric की brand पहचान मजबूत है, लेकिन आने वाला समय यह तय करेगा कि क्या कंपनी investor भरोसा दोबारा जीत पाएगी या नहीं।

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