🛡️ Insurtech Startup Turtlemint IPO की तैयारी में तेज़ी,

Turtlemint

भारतीय insurtech firm Turtlemint ने अपने Initial Public Offering (IPO) की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने बुधवार को Securities and Exchange Board of India (SEBI) के पास अपना updated Draft Red Herring Prospectus (DRHP) दाखिल कर दिया है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है, जब लगभग एक महीने पहले SEBI ने Turtlemint को IPO लाने के लिए regulatory approval दे दी थी। इसके साथ ही Turtlemint उन चुनिंदा Indian startups की लिस्ट में शामिल हो गया है, जो public markets में entry की तैयारी कर रहे हैं।


💰 IPO Structure: ₹660 करोड़ का Fresh Issue + OFS

Updated DRHP (UDRHP) के अनुसार, Turtlemint का IPO दो हिस्सों में होगा:

  • Fresh issue of equity shares:
    👉 ₹660 करोड़ (लगभग $73.3 million)
  • Offer for Sale (OFS):
    👉 कुल 2.86 करोड़ shares

इस IPO के जरिए कंपनी नए फंड जुटाने के साथ-साथ शुरुआती investors और promoters को partial exit का मौका देगी।


📊 OFS में कौन-कौन से Investors बेचेंगे Shares?

Turtlemint के IPO के Offer for Sale (OFS) हिस्से में कई बड़े venture capital funds और angel investors हिस्सा लेंगे।

🧑‍💼 Major OFS Participants:

  • Nexus Venture Partners
    👉 91.43 लाख shares
    👉 कुल OFS का लगभग 32%
  • Peak XV Partners (formerly Sequoia Capital India)
    👉 79.21 लाख shares
  • अन्य investors:
    • Jungle Ventures
    • Blume Ventures
    • GGV Ventures
    • Angel investor Kunal Shah

इसके अलावा, कंपनी के co-founders भी OFS में हिस्सा लेंगे।


👨‍💼 Founders भी करेंगे Partial Exit

Turtlemint के co-founders:

  • Anand Prabhudesai
    👉 21.12 लाख shares ऑफलोड करेंगे
  • Dhirendra Mahyavanshi
    👉 22.1 लाख shares बेचेंगे

हालांकि founders की हिस्सेदारी घटेगी, लेकिन IPO के बाद भी वे कंपनी के साथ leadership roles में बने रहेंगे।


🏢 Turtlemint क्या करता है?

2015 में स्थापित, Turtlemint की स्थापना Dhirendra Mahyavanshi और Anand Prabhudesai ने की थी।

🔗 Business Model:

Turtlemint एक digital insurance marketplace है, जो:

  • Insurance advisors को customers से जोड़ता है
  • Multiple insurance products ऑफर करता है

📄 Products Portfolio:

  • Motor insurance
  • Health insurance
  • Life insurance

इसके अलावा, प्लेटफॉर्म पर:

  • Mutual funds
  • Loans
    जैसे अन्य financial products भी उपलब्ध हैं।

🧠 Advisors के लिए Digital Tools

Turtlemint अपने advisors को:

  • CRM tools
  • Policy management systems
  • Digital sales & marketing tools
    प्रदान करता है, जिससे वे अपनी reach बढ़ा सकें और business scale कर सकें।

🎯 IPO Funds का इस्तेमाल कहां होगा?

Turtlemint ने DRHP में IPO से मिलने वाली राशि के उपयोग का स्पष्ट रोडमैप दिया है।

💼 Key Allocation:

  • ₹193 करोड़
    👉 Technology और product development teams के salary expenses के लिए
  • ₹129 करोड़
    👉 कंपनी की wholly owned subsidiary TIB में investment के लिए

⚙️ Other Uses:

  • Cloud और server infrastructure
  • Marketing और brand building
  • Existing office properties के lease payments
  • General corporate purposes

यह साफ है कि कंपनी IPO funds का बड़ा हिस्सा technology, talent और growth में लगाएगी।


🧾 Shareholding Pattern: IPO से पहले कौन कितना हिस्सेदार?

UDRHP के अनुसार, IPO से पहले Turtlemint का shareholding structure इस प्रकार है:

  • Nexus Venture Partners: 24.05%
  • Peak XV Partners: 20.84%
  • Anand Prabhudesai (Co-founder): 8.72%
  • Dhirendra Mahyavanshi (Co-founder): 8.33%
  • Jungle Ventures: 4.54%
  • Kunal Shah: 1.45%

IPO के बाद यह structure बदल जाएगा, लेकिन Nexus और Peak XV जैसे investors significant shareholders बने रहेंगे।


📈 Financial Performance: Revenue Growth के साथ Loss भी बढ़ा

Financials की बात करें तो Turtlemint ने ongoing fiscal year FY26 की पहली छमाही में तेज़ growth दिखाई है।

📊 H1FY26 Highlights:

  • Operating revenue:
    👉 ₹463.3 करोड़
    👉 साल-दर-साल आधार पर लगभग 2 गुना
  • Net loss:
    👉 ₹126 करोड़
    👉 पिछले साल की तुलना में 27% ज्यादा

यह दर्शाता है कि कंपनी aggressive growth strategy पर काम कर रही है, लेकिन profitability अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।


🧠 Bottom Line: IPO से Growth को मिलेगी रफ्तार

Turtlemint का IPO ऐसे समय में आ रहा है, जब:

  • Insurtech adoption तेजी से बढ़ रहा है
  • Digital insurance advisors की demand मजबूत बनी हुई है
  • Public markets में tech-led companies की वापसी देखी जा रही है

हालांकि losses और high operating costs investors के लिए एक risk factor हो सकते हैं, लेकिन strong revenue growth, well-known investors, और scalable business model Turtlemint को IPO market में एक मजबूत दावेदार बनाते हैं।

आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि Turtlemint का IPO investors से कैसी प्रतिक्रिया हासिल करता है और company profitability की दिशा में कितना आगे बढ़ पाती है।

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📚 Edtech Unicorn Vedantu FY25

Vedantu

भारतीय Edtech unicorn Vedantu ने FY25 (मार्च 2025 को समाप्त वित्त वर्ष) में revenue growth तो दर्ज की, लेकिन बढ़ते खर्चों (expenses) ने कंपनी की loss position को और गहरा कर दिया।
कंपनी का revenue 23% YoY बढ़ा, लेकिन pre-tax loss 25% बढ़कर ₹210 करोड़ तक पहुँच गया।

Vedantu के consolidated financial statements के अनुसार, FY25 में कंपनी का financial performance mixed रहा — growth के साथ-साथ losses भी बढ़े।


💰 Revenue Performance: 23% की सालाना बढ़त

Vedantu की revenue from operations FY25 में बढ़कर ₹227 करोड़ हो गई, जो FY24 में ₹185 करोड़ थी।
यानि साल-दर-साल आधार पर कंपनी ने 23% growth दर्ज की।

Vedantu का मुख्य business model अभी भी online tutoring पर टिका हुआ है, लेकिन company ने हाल के वर्षों में offline coaching centres और नए revenue streams भी जोड़े हैं।


🧑‍🏫 Core Business: Online Tutoring अब भी Backbone

Vedantu की कुल operating revenue का बड़ा हिस्सा अब भी online education से आता है:

  • Online tutoring income:
    FY25 में ₹197 करोड़, जो FY24 के ₹166 करोड़ से 19% ज्यादा है
    👉 कुल operating revenue का 87% हिस्सा
  • Book sales:
    FY25 में ₹22 करोड़, जो पिछले साल के मुकाबले दोगुना से भी ज्यादा है
  • इसके अलावा revenue का छोटा हिस्सा
    • Hostel fees
    • E-learning projects
      से आया

Vedantu कक्षा 1 से 12, JEE preparation, और competitive exams के लिए online classes और study material प्रदान करता है।


📉 Expenses बढ़े, Profitability पर दबाव

Revenue बढ़ने के बावजूद Vedantu के खर्चों में भी तेज़ उछाल देखने को मिला।

👩‍💼 Employee Cost बना सबसे बड़ा Expense

  • Employee benefit expenses:
    FY25 में ₹219 करोड़
    FY24 में ₹176 करोड़
    👉 24% की बढ़ोतरी

कुल खर्चों में employee cost का हिस्सा लगभग 49% रहा।

📢 Advertising और Other Costs

  • Advertising expenses:
    ₹27 करोड़ (17% increase)
  • Depreciation cost:
    ₹69 करोड़ (FY24 में ₹58 करोड़)

👉 कुल मिलाकर, Vedantu के total expenses FY25 में ₹444 करोड़ रहे, जो FY24 में ₹368 करोड़ थे — यानी 21% YoY increase


🔻 Losses: Pre-Tax Loss ₹210 करोड़

खर्चों में तेज़ बढ़ोतरी के चलते:

  • Loss before tax (PBT):
    FY25: ₹210 करोड़
    FY24: ₹168.5 करोड़
    👉 25% की बढ़ोतरी

हालांकि, एक exceptional item ने net loss को कुछ हद तक कम किया।


⚠️ Exceptional Income ने Loss को किया कम

FY25 में Vedantu ने ₹77 करोड़ का non-cash exceptional income बुक किया।

🧾 Exceptional Item क्या है?

यह income Ace Creative Learning Pvt Ltd (Deeksha) से जुड़ी है, जिसमें:

  • Vedantu के पास call option
  • Founders के पास put option है

FY25 में कंपनी ने deferred consideration की fair value reduce की, जिससे:

  • ₹93.1 करोड़ का non-cash income
  • Tax के बाद ₹77.4 करोड़
    बुक किया गया।

👉 अगर इस exceptional income को include किया जाए, तो:

  • Net loss FY25 में घटकर ₹123 करोड़ रह गया

📊 Financial Ratios: Pressure अब भी बना हुआ

Vedantu के key financial ratios FY25 में कमजोर रहे:

  • EBITDA margin: -61.23%
  • ROCE (Return on Capital Employed): -92.86%

💸 Unit Economics

FY25 में:

  • Vedantu को ₹1 कमाने के लिए ₹1.96 खर्च करने पड़े

यह संकेत देता है कि company अभी भी operational efficiency हासिल करने से दूर है।


🏦 Cash Position और Assets

मार्च 2025 तक Vedantu की financial स्थिति:

  • Cash & bank balance: ₹40 करोड़
  • Current assets: ₹101 करोड़

हालांकि cash मौजूद है, लेकिन लगातार losses कंपनी के लिए long-term sustainability को लेकर सवाल खड़े करते हैं।


🚀 Funding और Investors

Startup data intelligence platform TheKredible के अनुसार:

  • Vedantu ने अब तक कुल $348 million (लगभग ₹2,900+ करोड़) की funding जुटाई है

🧑‍💼 Key Investors:

  • Tiger Global
  • Coatue
  • Accel
  • Omidyar Network

🧠 Bottom Line: Growth है, लेकिन Profitability Challenge बनी हुई

Vedantu का FY25 performance यह दिखाता है कि:

  • Revenue growth अभी भी संभव है
  • लेकिन high employee cost, marketing spend, और depreciation profitability पर भारी पड़ रहे हैं

Edtech sector में slowdown और competition के बीच, Vedantu के लिए आने वाले वर्षों में cost control, offline-online balance, और unit economics सुधारना सबसे बड़ी चुनौती रहेगी।

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🤖 Agrani Labs ने Stealth से बाहर आकर जुटाए $8 मिलियन

Agrani Labs

भारत के सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इकोसिस्टम के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। बेंगलुरु स्थित AI सेमीकंडक्टर स्टार्टअप Agrani Labs ने stealth mode से बाहर आते हुए $8 मिलियन (करीब ₹66 करोड़) की Seed Funding जुटाई है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Peak XV Partners (पूर्व में Sequoia Capital India & SEA) ने किया, जबकि इसमें कई एंजेल इन्वेस्टर्स ने भी भाग लिया।

यह फंडिंग ऐसे समय पर आई है जब दुनिया भर में AI compute infrastructure की मांग तेज़ी से बढ़ रही है और भारत भी अब इस हाई-टेक रेस में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रहा है।


🚀 AI GPU बनाने का बड़ा सपना

Agrani Labs की स्थापना Intel और AMD जैसी दिग्गज चिप कंपनियों में काम कर चुके अनुभवी प्रोफेशनल्स ने की है। इस स्टार्टअप का लक्ष्य है — भारत से ग्लोबली कंपटीटिव AI GPU (Graphics Processing Unit) तैयार करना, जिसे बड़े-बड़े डेटा सेंटर्स में इस्तेमाल किया जा सके।

कंपनी ऐसे मार्केट में एंट्री कर रही है जहां:

  • AI और GenAI की वजह से डिमांड तेज़ी से बढ़ रही है
  • लेकिन कंट्रोल अभी भी कुछ गिने-चुने ग्लोबल प्लेयर्स के हाथ में है

Agrani Labs का मानना है कि आने वाले सालों में AI कंप्यूट की ज़रूरत इतनी बढ़ेगी कि नई, ज्यादा एफिशिएंट और किफायती GPU सॉल्यूशंस के लिए जगह जरूर बनेगी।


👨‍💻 कौन हैं Agrani Labs के फाउंडर्स?

Agrani Labs को चार अनुभवी टेक लीडर्स ने मिलकर शुरू किया है:

  • Dheemanth Nagaraj
  • Ashok Jagannathan
  • Srikanth Nimmagadda
  • Rajesh Vivekanandham

इन सभी को हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, चिप डिजाइन और AI सिस्टम्स का गहरा अनुभव है। Intel और AMD जैसी कंपनियों में काम करने की वजह से टीम को यह अच्छी तरह पता है कि ग्लोबल लेवल पर कंपटीशन कैसे होता है और एक सफल सेमीकंडक्टर प्रोडक्ट बनाने के लिए क्या-क्या चाहिए।


🧠 सिर्फ हार्डवेयर नहीं, पूरा Full-Stack AI Platform

Agrani Labs खुद को सिर्फ एक GPU डिजाइन स्टार्टअप तक सीमित नहीं रख रहा। कंपनी एक Full-Stack AI Compute Platform बना रही है, जिसमें शामिल हैं:

🔹 Hardware

  • High-performance AI GPU
  • Data centre workloads के लिए optimized architecture

🔹 Software Stack

  • Compilers
  • Libraries
  • System software
  • AI frameworks

👉 इसका मतलब यह है कि Agrani Labs सिर्फ चिप नहीं बेचना चाहता, बल्कि hardware + software का पूरा ecosystem खड़ा करना चाहता है, ताकि डेवलपर्स और एंटरप्राइजेज को end-to-end AI compute solution मिल सके।


💡 “Father of the Pentium” की एंट्री

Agrani Labs के लिए सबसे दिलचस्प और भरोसा बढ़ाने वाला पहलू है — Vinod Dham का जुड़ना।

Vinod Dham, जिन्हें दुनिया भर में “Father of the Pentium” के नाम से जाना जाता है, Agrani Labs के Founding Advisor बन गए हैं।

  • उन्होंने Intel में Pentium processor roadmap में अहम भूमिका निभाई
  • भारत के semiconductor ecosystem से उनका गहरा जुड़ाव रहा है

उनका जुड़ना न सिर्फ स्टार्टअप की credibility बढ़ाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि Agrani Labs की vision को इंडस्ट्री के दिग्गज भी गंभीरता से ले रहे हैं।


🏗️ प्रोडक्ट पर शुरुआती काम पूरा

कंपनी के मुताबिक Agrani Labs ने पहले ही:

  • अपने GPU architecture पर काम शुरू कर दिया है
  • Product definition का शुरुआती चरण पूरा कर लिया है
  • Hardware और software stack के early versions तैयार कर लिए हैं

इसके अलावा स्टार्टअप:

  • Academic institutions
  • Semiconductor partners
  • Government research bodies
  • Software ecosystems

के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि development process को तेज़ किया जा सके।


🇮🇳 भारत के लिए क्यों है यह अहम?

भारत लंबे समय से semiconductor imports पर निर्भर रहा है। ऐसे में Agrani Labs जैसे स्टार्टअप:

  • “Make in India” और “Design in India” विज़न को आगे बढ़ाते हैं
  • High-value deeptech innovation को बढ़ावा देते हैं
  • Global supply chain में भारत की भूमिका मजबूत कर सकते हैं

AI, cloud और data centres के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए, देश के भीतर AI compute capabilities बनाना रणनीतिक रूप से भी बेहद जरूरी हो गया है।


📈 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

$8 मिलियन की इस Seed Funding का इस्तेमाल Agrani Labs मुख्य रूप से:

  • Engineering team को scale करने
  • Product development को तेज़ करने
  • GPU और software stack को commercial readiness तक ले जाने

के लिए करेगा।

कंपनी का फोकस है कि वह भारत से एक ऐसा AI compute solution तैयार करे, जो performance, cost और efficiency — तीनों मोर्चों पर ग्लोबल प्लेयर्स को चुनौती दे सके।


🔮 आगे की राह

Agrani Labs के लिए आगे का सफर आसान नहीं होगा। AI GPU मार्केट में:

  • भारी capital की जरूरत
  • लंबा development cycle
  • और established global competitors

जैसी चुनौतियां मौजूद हैं।

लेकिन मजबूत founding team, Peak XV जैसे निवेशक और Vinod Dham जैसे advisor के साथ, Agrani Labs भारत के deeptech स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक बड़ा नाम बन सकता है

अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला, तो आने वाले वर्षों में “Made in India AI Chips” का सपना हकीकत बनता दिख सकता है।

Read more :🚚 Shadowfax का IPO डेब्यू फीका लिस्टिंग इश्यू प्राइस से 9% नीचे

🚚 Shadowfax का IPO डेब्यू फीका लिस्टिंग इश्यू प्राइस से 9% नीचे

Shadowfax

लॉजिस्टिक्स और लास्ट-माइल डिलीवरी कंपनी Shadowfax Technologies ने बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में एंट्री तो ली, लेकिन इसकी शुरुआत उम्मीदों के मुताबिक मजबूत नहीं रही। कंपनी के शेयर IPO इश्यू प्राइस से डिस्काउंट पर लिस्ट हुए, जिससे निवेशकों को पहले ही दिन हल्की निराशा का सामना करना पड़ा।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) दोनों पर Shadowfax के शेयर ₹112–113 के आसपास लिस्ट हुए। यह IPO के ऊपरी प्राइस बैंड ₹124 के मुकाबले लगभग 9% कम है।


📉 IPO से जुटाए ₹1,907 करोड़

Shadowfax ने अपने Initial Public Offering (IPO) के जरिए कुल ₹1,907 करोड़ जुटाए थे। यह इश्यू 20 जनवरी से 22 जनवरी के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला रहा।

IPO में:

  • ₹1,000 करोड़ का फ्रेश इश्यू
  • और करीब ₹907 करोड़ का Offer-For-Sale (OFS) शामिल था

हालांकि कंपनी का फंड रेज़िंग साइज बड़ा था, लेकिन बाजार में लिस्टिंग के दिन इसका उत्साह ठंडा नजर आया।


📊 सब्सक्रिप्शन रहा औसत

Shadowfax के IPO को मॉडरेट यानी औसत सब्सक्रिप्शन मिला। एक्सचेंज डेटा के मुताबिक:

  • Qualified Institutional Buyers (QIBs) ने सबसे ज्यादा रुचि दिखाई और इश्यू को 3.8 गुना सब्सक्राइब किया
  • Retail investors की हिस्सेदारी 2.3 गुना रही
  • Employee quota को करीब 2 गुना सब्सक्रिप्शन मिला
  • वहीं Non-Institutional Investors (NIIs) ने सिर्फ 0.84 गुना सब्सक्रिप्शन किया

👉 NIIs की कमजोर भागीदारी को बाजार विश्लेषक IPO के प्रति सीमित उत्साह का संकेत मान रहे हैं।


💼 OFS से पुराने निवेशकों को बड़ा फायदा

IPO के Offer-For-Sale (OFS) हिस्से के जरिए Shadowfax के शुरुआती निवेशकों को अच्छा एग्जिट मिला है।

  • Flipkart, जो Shadowfax का शुरुआती निवेशक रहा है,
    • OFS के जरिए करीब ₹237 करोड़ के शेयर बेच रहा है
    • जिससे उसे लगभग 3 गुना रिटर्न मिलने की उम्मीद है
  • Eight Roads Investments (Fidelity से जुड़ा फंड)
    • करीब ₹197 करोड़ के शेयर बेच रहा है
    • और इसे लगभग 10 गुना रिटर्न मिलने की संभावना है

इससे साफ है कि भले ही लिस्टिंग कमजोर रही हो, लेकिन लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए Shadowfax एक सफल दांव साबित हुआ है


🧾 एंकर इन्वेस्टर्स से पहले ही जुटाए ₹850 करोड़

IPO से पहले Shadowfax ने Anchor Investors से भी बड़ी रकम जुटाई थी।

  • कंपनी ने 6.9 करोड़ इक्विटी शेयर
  • ₹124 प्रति शेयर के भाव पर
  • एंकर इन्वेस्टर्स को अलॉट किए

इससे Shadowfax ने ₹850 करोड़ पहले ही जुटा लिए थे, जिससे IPO को लेकर कंपनी की तैयारी मजबूत दिखी।


🚛 Shadowfax का बिज़नेस मॉडल

Shadowfax भारत के last-mile और hyperlocal logistics सेगमेंट में काम करती है। कंपनी की सेवाएं मुख्य रूप से:

  • E-commerce marketplaces
  • D2C brands
  • Quick commerce players

के लिए होती हैं।

यह कंपनी तेज डिलीवरी, हाई-वॉल्यूम ऑर्डर प्रोसेसिंग और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन नेटवर्क के दम पर अपनी पहचान बना चुकी है।


⚔️ कड़ी प्रतिस्पर्धा वाला सेक्टर

Shadowfax जिस सेगमेंट में काम करती है, वहां प्रतिस्पर्धा बेहद तीव्र है। इसके प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों में शामिल हैं:

  • Delhivery
  • XpressBees
  • Ecom Express
  • Ekart (Flipkart की लॉजिस्टिक्स यूनिट)

यह सेक्टर:

  • कैपिटल-इंटेंसिव है
  • मार्जिन कम होते हैं
  • और लगातार नेटवर्क व टेक्नोलॉजी में निवेश की जरूरत होती है

इसी वजह से लॉजिस्टिक्स कंपनियों के शेयर अक्सर लिस्टिंग के समय दबाव में रहते हैं।


💰 अब तक $246 मिलियन की फंडिंग

स्टार्टअप डेटा प्लेटफॉर्म TheKredible के अनुसार:

  • Shadowfax अब तक करीब $246 मिलियन (लगभग ₹2,000 करोड़) की फंडिंग जुटा चुका है

इसके प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:

  • Eight Roads Ventures (सबसे बड़ा बाहरी शेयरहोल्डर)
  • Flipkart
  • NewQuest Asia
  • Nokia Growth Partners

📈 फाइनेंशियल परफॉर्मेंस में सुधार

हालांकि लिस्टिंग कमजोर रही, लेकिन कंपनी के फाइनेंशियल आंकड़े धीरे-धीरे मजबूत हो रहे हैं

  • FY25 में Shadowfax का रेवेन्यू
    • 32% सालाना बढ़कर ₹2,485 करोड़ पहुंचा
  • इसी साल कंपनी ने ₹6.4 करोड़ का नेट प्रॉफिट भी दर्ज किया

वहीं FY26 की पहली छमाही (H1 FY26) में:

  • रेवेन्यू रहा ₹1,806 करोड़
  • और मुनाफा बढ़कर ₹21 करोड़ हो गया

👉 यह दिखाता है कि कंपनी प्रॉफिटेबिलिटी की दिशा में आगे बढ़ रही है


🔮 आगे क्या?

Shadowfax की कमजोर लिस्टिंग यह संकेत देती है कि बाजार फिलहाल

  • लॉजिस्टिक्स सेक्टर
  • और कैपिटल-हेवी बिज़नेस मॉडल

को लेकर सतर्क है।

हालांकि,

  • लगातार बढ़ता रेवेन्यू
  • मुनाफे में सुधार
  • और ई-कॉमर्स व क्विक कॉमर्स की बढ़ती मांग

लॉन्ग टर्म में कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत हो सकते हैं।

अब असली चुनौती Shadowfax के लिए यह होगी कि वह

  • खर्चों को नियंत्रित करे
  • ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाए
  • और प्रतिस्पर्धी माहौल में सस्टेनेबल प्रॉफिट ग्रोथ दिखा सके।

Read more :🚗 CarTrade के Q3 FY26 नतीजे 19% रेवेन्यू ग्रोथ,

🚗 CarTrade के Q3 FY26 नतीजे 19% रेवेन्यू ग्रोथ,

CarTrade

ऑटोमोबाइल क्लासिफाइड्स प्लेटफॉर्म CarTrade ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के अपने वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने इस तिमाही में 19% सालाना (YoY) रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है, वहीं नेट प्रॉफिट ₹50 करोड़ के आंकड़े को पार कर गया है।

बुधवार को जारी किए गए इन नतीजों के अनुसार, CarTrade ने मजबूत बिज़नेस परफॉर्मेंस के साथ यह दिखाया है कि कंपनी नियंत्रित खर्च और स्थिर मांग के दम पर मुनाफे में लगातार सुधार कर रही है।


📊 रेवेन्यू में मजबूत बढ़त

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) से प्राप्त unaudited financial results के मुताबिक,

  • Q3 FY26 में CarTrade का ऑपरेशंस से रेवेन्यू बढ़कर ₹210 करोड़ हो गया
  • जबकि Q3 FY25 में यह ₹176 करोड़ था

इस तरह, कंपनी ने साल-दर-साल आधार पर 19% की बढ़त दर्ज की है।

वहीं, कुल आय (Total Income) की बात करें तो:

  • Q3 FY26 में यह बढ़कर ₹228 करोड़ रही
  • Q3 FY25 में कुल आय ₹193 करोड़ थी

यानी कुल आय में भी कंपनी ने लगभग 18% की सालाना ग्रोथ हासिल की।


🧩 तीन सेगमेंट में फैला CarTrade का बिज़नेस

मुंबई स्थित CarTrade अपना बिज़नेस तीन प्रमुख सेगमेंट्स में संचालित करता है:

1️⃣ Consumer Segment

Consumer सेगमेंट कंपनी का सबसे बड़ा रेवेन्यू ड्राइवर बना रहा।

  • इस सेगमेंट से आय ₹86 करोड़ रही
  • यह कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू का 41% हिस्सा है

यह सेगमेंट मुख्य रूप से व्यक्तिगत ग्राहकों के लिए कार खरीदने-बेचने से जुड़ी सेवाओं पर आधारित है।


2️⃣ Remarketing Segment

Remarketing सेगमेंट में मुख्य रूप से

  • इस्तेमाल की गई गाड़ियों (used vehicles)
  • फ्लीट और इंस्टीट्यूशनल सेल्स

शामिल होती हैं।

  • Q3 FY26 में इस सेगमेंट से ₹66 करोड़ की आय दर्ज की गई

3️⃣ Classifieds Segment

Classifieds सेगमेंट से कंपनी को

  • ₹59 करोड़ का रेवेन्यू मिला

यह सेगमेंट ऑनलाइन लिस्टिंग, विज्ञापन और डीलर नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।

👉 तीनों सेगमेंट्स ने मिलकर CarTrade को डायवर्सिफाइड और संतुलित रेवेन्यू प्रोफाइल देने में मदद की है।


💸 खर्चों पर कड़ा नियंत्रण

जहां रेवेन्यू में अच्छी बढ़त देखने को मिली, वहीं CarTrade ने खर्चों पर भी मजबूत नियंत्रण बनाए रखा।

  • Employee benefits expenses कुल खर्च का 53% रहे
  • कर्मचारी खर्च ₹76 करोड़ रहा, जो सिर्फ 4% की सालाना बढ़ोतरी दिखाता है

अन्य ऑपरेशनल खर्चों को जोड़ने के बाद:

  • कुल खर्च Q3 FY26 में ₹144 करोड़ रहा
  • Q3 FY25 में यह ₹139.5 करोड़ था

यानि कुल खर्चों में केवल 3% की बढ़ोतरी हुई, जो कंपनी की कॉस्ट डिसिप्लिन को दर्शाती है।


💰 मुनाफे में जबरदस्त उछाल

रेवेन्यू ग्रोथ और सीमित खर्चों का सीधा असर मुनाफे पर दिखा।

  • Q3 FY26 में CarTrade का नेट प्रॉफिट बढ़कर ₹61.5 करोड़ हो गया
  • जबकि Q3 FY25 में यह ₹45.5 करोड़ था

इस तरह, सालाना आधार पर कंपनी के मुनाफे में 35% से ज्यादा की बढ़त देखने को मिली।

हालांकि, अगर तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) तुलना करें तो:

  • Q2 FY26 में प्रॉफिट ₹64 करोड़ था
  • Q3 FY26 में इसमें 4% की मामूली गिरावट आई

इसके बावजूद, ₹50 करोड़ से ज्यादा का मुनाफा कंपनी की मजबूत फाइनेंशियल स्थिति को दिखाता है।


🤝 CarDekho के साथ मर्जर की चर्चा हुई, लेकिन डील नहीं बनी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, CarTrade भारत के ऑटोमोटिव क्लासिफाइड्स स्पेस में CarDekho के साथ संभावित मर्जर को लेकर शुरुआती बातचीत कर रही थी।

हालांकि,

  • दोनों कंपनियों ने आपसी सहमति से
  • इस प्रस्तावित कंसोलिडेशन को आगे न बढ़ाने का फैसला किया

इस फैसले के बाद CarTrade अब स्वतंत्र रूप से ग्रोथ पर फोकस बनाए रखे हुए है।


📈 शेयर प्राइस और मार्केट कैप

शेयर बाजार में भी CarTrade की स्थिति मजबूत बनी हुई है।

  • कंपनी का शेयर ₹2,333 पर ट्रेड कर रहा है (सुबह 11:36 बजे तक)
  • कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹11,163 करोड़ है
  • डॉलर में यह करीब $1.2 बिलियन के बराबर है

🔮 आगे की राह

CarTrade के Q3 FY26 के नतीजे यह संकेत देते हैं कि:

  • कंपनी का बिज़नेस मॉडल स्थिर है
  • अलग-अलग सेगमेंट्स से संतुलित आय आ रही है
  • और खर्चों पर नियंत्रण से मुनाफा लगातार बेहतर हो रहा है

ऑटोमोबाइल सेक्टर में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती भूमिका को देखते हुए, आने वाले क्वार्टरों में CarTrade से स्थिर ग्रोथ और बेहतर मार्जिन की उम्मीद की जा सकती है।

हालांकि,

  • प्रतिस्पर्धा
  • ऑटो सेक्टर की साइक्लिक डिमांड
  • और टेक्नोलॉजी इन्वेस्टमेंट

जैसी चुनौतियां बनी रहेंगी। फिर भी, मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि CarTrade भारत के ऑटो क्लासिफाइड्स मार्केट में एक मजबूत और प्रॉफिटेबल खिलाड़ी बना हुआ है

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ola electric

भारत का electric two-wheeler market बीते एक साल में तेजी से बदला है और इस बदलाव का सबसे बड़ा असर Bhavish Aggarwal के नेतृत्व वाली Ola Electric पर देखने को मिला है। एक समय EV सेगमेंट की undisputed leader रही Ola Electric, जिसकी 2024 के अंत तक बाजार में हिस्सेदारी 35% से ज्यादा थी, अब 6% से भी नीचे फिसल चुकी है।

यह गिरावट न सिर्फ कंपनी की बिक्री में दिख रही है, बल्कि इसका असर शेयर बाजार से लेकर ब्रांड इमेज तक साफ नजर आ रहा है।


📉 2024 बनाम 2025: Ola Electric का गिरता ग्राफ

अगर आंकड़ों की बात करें तो Ola Electric के लिए 2024 एक मजबूत साल रहा था। कंपनी ने उस साल:

  • 🚲 4.07 लाख यूनिट्स की रजिस्ट्रेशन दर्ज की
  • 📊 35.47% मार्केट शेयर हासिल किया

लेकिन जनवरी 2025 से तस्वीर तेजी से बदलने लगी।

जनवरी 2025 से अब तक Ola Electric की:

  • कुल बिक्री: 2.04 लाख यूनिट्स
  • ओवरऑल मार्केट शेयर: 14.9%

यानी सिर्फ एक साल में Ola की बिक्री और बाजार हिस्सेदारी लगभग आधी रह गई।


🗓️ जनवरी 2025: जब Ola अभी भी लीडर थी

Vahan data के मुताबिक, जनवरी 2025 में Ola Electric अभी भी EV two-wheeler सेगमेंट में नंबर वन थी:

  • Ola Electric: 24.8%
  • TVS Motor: 24.41%
  • Bajaj Auto: 21.81%
  • Ather Energy: 13.31%

इसके बाद Greaves Electric Mobility और Hero MotoCorp का नंबर आता है।

लेकिन यहीं से Ola Electric के लिए मुश्किलें शुरू हो गईं।


⚠️ शिकायतें, सेफ्टी इश्यू और सर्विस की कमजोरी

जनवरी 2025 के बाद Ola Electric लगातार विवादों में घिरती चली गई। ग्राहकों की ओर से:

  • ⚡ वाहन में technical defects
  • 🔥 safety concerns
  • 🛠️ कमजोर after-sales service
  • 📞 सर्विस सेंटर्स की कमी

जैसी शिकायतें लगातार सामने आने लगीं।

इसका सीधा असर फरवरी 2025 में दिखा, जब Ola का मार्केट शेयर गिरकर 11.31% रह गया।


🔄 बीच में आई हल्की रिकवरी, लेकिन टिक नहीं पाई

हालांकि 2025 के बीच के महीनों में Ola Electric ने थोड़ी वापसी की कोशिश जरूर की।

  • अप्रैल 2025 में मार्केट शेयर बढ़कर 21.42% पहुंचा
  • इसके बाद कुछ महीनों तक यह लगभग stable रहा

लेकिन यह रिकवरी ज्यादा समय तक टिक नहीं पाई।


📉 सितंबर 2025 के बाद फिर से गिरावट

सितंबर 2025 के बाद Ola Electric की स्थिति फिर कमजोर होने लगी।

  • नवंबर 2025: 7.16% मार्केट शेयर
  • जनवरी 2026: सिर्फ 5.87%

जनवरी 2026 में Ola Electric ने महज 5,488 यूनिट्स की रजिस्ट्रेशन दर्ज की, जो कभी मार्केट लीडर रही कंपनी के लिए बड़ा झटका है।


🚀 Ather Energy की जबरदस्त उड़ान

जहां Ola Electric संघर्ष कर रही है, वहीं Ather Energy ने शानदार प्रदर्शन किया है।

Ather की:

  • 2024 बिक्री: 1.26 लाख यूनिट्स
  • 2025 बिक्री: 2.18 लाख यूनिट्स
    ➡️ 72% की ग्रोथ

मार्केट शेयर भी:

  • जनवरी 2025: 13.31%
  • जनवरी 2026: 18.16%

इतना ही नहीं, Ather ने:

  • Ola Electric को market capitalization में पीछे छोड़ा
  • Q2 FY26 में ₹899 करोड़ revenue दर्ज किया

Ather की मौजूदा market cap:

  • 💰 ₹23,712 करोड़ (~$2.63 billion)

🏍️ Legacy players: TVS और Bajaj की मजबूत पकड़

EV मार्केट में TVS Motor और Bajaj Auto जैसी legacy कंपनियां पूरे साल स्थिर बनी रहीं।

जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच:

  • TVS Motor:
    • मार्केट शेयर: 23.75%
    • रजिस्ट्रेशन: 3.26 लाख यूनिट्स
  • Bajaj Auto:
    • मार्केट शेयर: 21.05%
    • रजिस्ट्रेशन: 2.89 लाख यूनिट्स

इन कंपनियों की मजबूत distribution, भरोसेमंद service नेटवर्क और brand trust ने इन्हें लगातार फायदा पहुंचाया।


📉 शेयर बाजार में भी Ola Electric की फिसलन

Ola Electric की गिरावट सिर्फ बिक्री तक सीमित नहीं रही। शेयर बाजार में भी कंपनी का प्रदर्शन कमजोर रहा है।

  • 📉 आज शेयर प्राइस: ₹30.79 (All-time low)
  • 📈 Listing price (Aug 2024): ₹75
  • 📊 कुछ हफ्तों में peak: ₹150

मौजूदा market capitalization:

  • ₹14,115 करोड़ (~$1.56 billion)

यानी निवेशकों का भरोसा भी अब Ola Electric पर डगमगाता नजर आ रहा है।


🔮 आगे Ola Electric के लिए क्या चुनौती?

Ola Electric के सामने अब कई बड़े सवाल खड़े हैं:

  • क्या कंपनी अपनी service quality सुधार पाएगी?
  • क्या customer trust दोबारा जीत पाएगी?
  • क्या नए product launches गिरावट को थाम पाएंगे?

EV मार्केट अब पहले से ज्यादा competitive हो चुका है, जहां सिर्फ aggressive pricing नहीं, बल्कि quality, reliability और service सबसे बड़ा differentiator बन चुके हैं।


✨ निष्कर्ष

एक समय EV revolution का चेहरा बनी Ola Electric आज सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है। वहीं Ather, TVS और Bajaj जैसी कंपनियां consistency और भरोसे के दम पर आगे निकल चुकी हैं। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि Ola Electric इस गिरावट से कैसे उबरती है — या फिर यह बाजार में अपनी पकड़ और खोती चली जाती है।

Read more :🧪 Healthians के फाउंडर Deepak Sahni ने 10 साल बाद लिया एग्जिट,

🧪 Healthians के फाउंडर Deepak Sahni ने 10 साल बाद लिया एग्जिट,

Healthians

भारत की जानी-मानी healthtech startup Healthians के फाउंडर Deepak Sahni ने करीब एक दशक तक कंपनी का नेतृत्व करने के बाद अब आधिकारिक तौर पर एग्जिट ले लिया है। Gurugram स्थित इस डायग्नोस्टिक स्टार्टअप के साथ अपने सफर को याद करते हुए Sahni ने LinkedIn पोस्ट के जरिए इस बड़े फैसले की जानकारी दी।

Deepak Sahni ने लिखा,

“Healthians में Founder और CEO के तौर पर 10 साल बिताने के बाद, नवंबर 2023 में मैंने Executive Chairman की भूमिका संभाली थी। पिछले एक साल में मैंने कंपनी की पहली truly professional management team को गाइड किया। मेरे लिए Healthians कभी सिर्फ एक कंपनी नहीं रही — यह एक मिशन था, एक ऐसी समस्या जिसे हल करना जरूरी था।”


🚀 ₹3,000 करोड़ वैल्यूएशन तक पहुंचाया Healthians

Deepak Sahni के नेतृत्व में Healthians ने भारतीय हेल्थ डायग्नोस्टिक सेक्टर में एक मजबूत पहचान बनाई। उन्होंने बताया कि कंपनी को:

  • 💰 ₹3,000 करोड़ से ज्यादा के valuation तक स्केल किया गया
  • 🌍 300 से ज्यादा शहरों में विस्तार हुआ
  • 🏥 22+ डायग्नोस्टिक लैब्स बनाई गईं
  • 📈 बिना external investment bankers के 7 funding rounds पूरे किए

Sahni के मुताबिक, Healthians ने यह साबित किया कि भारत में large-scale diagnostics business “soul” के साथ भी खड़ा किया जा सकता है।


💸 अब तक $75 मिलियन की फंडिंग जुटा चुकी है Healthians

Deepak Sahni के कार्यकाल में Healthians ने अब तक कुल $75 मिलियन (करीब ₹620 करोड़) की फंडिंग जुटाई है। कंपनी के प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:

  • WestBridge Capital
  • BEENEXT
  • DG Ventures
  • YouWeCan

कंपनी में Deepak Sahni की हिस्सेदारी 6.5% बनी हुई है। हालांकि उन्होंने सभी executive responsibilities छोड़ दी हैं, लेकिन वे आगे भी एक shareholder के तौर पर जुड़े रहेंगे।


🧭 अब आगे क्या करेंगे Deepak Sahni?

Healthians से एग्जिट के बाद Deepak Sahni अब नए फोकस के साथ आगे बढ़ने की तैयारी में हैं। उन्होंने बताया कि वे:

  • 💡 हेल्थकेयर से जुड़ी गहरी और जटिल समस्याओं पर काम करेंगे
  • 🚀 नए और promising founders को सपोर्ट करेंगे
  • 🤝 अपने ₹100 करोड़ के corpus commitment के जरिए अगली पीढ़ी के उद्यमियों में निवेश करेंगे

Sahni ने कहा कि वह अब ज्यादा clarity और courage के साथ नए ventures बनाने पर ध्यान देंगे।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि

“इस महीने से मैंने सभी formal executive responsibilities छोड़ दी हैं। अब management team और investors कंपनी को आगे ले जाएंगे, और मैं sidelines से cheer करूंगा।”


📊 Healthians की FY25 Financial Performance

Deepak Sahni के एग्जिट के साथ ही Healthians के ताजा फाइनेंशियल आंकड़े भी सामने आए हैं, जो कंपनी की improving health को दर्शाते हैं।

Registrar of Companies (RoC) में दाखिल consolidated financial statements के मुताबिक:

🔹 Revenue Performance

  • FY25 Operating Revenue: ₹263 करोड़
  • FY24 Operating Revenue: ₹243 करोड़
    ➡️ 8% YoY growth

Non-operating income ₹7 करोड़ को जोड़ने के बाद:

  • Total Income FY25: ₹270 करोड़
    ➡️ 7% की कुल ग्रोथ

📉 घाटे में बड़ी कटौती, EBITDA पॉजिटिव

Healthians के लिए FY25 एक अहम साल रहा, क्योंकि कंपनी ने अपने घाटे को काफी हद तक कम कर लिया।

  • FY24 Loss: ₹45 करोड़
  • FY25 Loss: ₹5 करोड़
    ➡️ 89% की गिरावट

इतना ही नहीं, कंपनी ने:

  • ₹32 करोड़ का Positive EBITDA दर्ज किया
  • 📊 EBITDA Margin: 12.17%

यह संकेत देता है कि Healthians अब operational efficiency और cost control के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ रही है।


🏠 250+ शहरों में At-Home Diagnostic Services

Healthians आज भारत के 250 से ज्यादा शहरों में at-home diagnostic services ऑफर करता है। कंपनी का दावा है कि वह अब तक:

  • 🧪 10 करोड़ से ज्यादा टेस्ट कर चुकी है

Covid के बाद बढ़ी preventive healthcare awareness और home-based testing की मांग ने Healthians जैसे प्लेटफॉर्म्स को मजबूती दी है।


🔮 आगे की तस्वीर: नया नेतृत्व, नई दिशा

Deepak Sahni के जाने के बाद Healthians अब पूरी तरह से professional management team के नेतृत्व में आगे बढ़ेगी। बेहतर financials, घाटे में कमी और EBITDA positivity यह संकेत देते हैं कि कंपनी अगले कुछ सालों में:

  • Profitability की ओर बढ़ सकती है
  • IPO या strategic investment जैसे विकल्पों पर काम कर सकती है

✨ निष्कर्ष

Healthians से Deepak Sahni का एग्जिट भारतीय startup ecosystem के लिए एक founder-to-mentor transition का मजबूत उदाहरण है। जहां एक तरफ कंपनी operational maturity की ओर बढ़ रही है, वहीं Sahni अब नए founders और healthcare innovation पर फोकस करेंगे।

Read more :🏢 WeWork India Q3 FY26 Results ₹17 करोड़ का मुनाफा,

🏢 WeWork India Q3 FY26 Results ₹17 करोड़ का मुनाफा,

WeWork India

Managed office space provider WeWork India ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के अपने फाइनेंशियल रिजल्ट्स घोषित कर दिए हैं। इस तिमाही में कंपनी ने ₹17 करोड़ का शुद्ध मुनाफा (Profit) दर्ज किया है, जो पिछले साल इसी तिमाही में हुए भारी नुकसान के मुकाबले एक बड़ा टर्नअराउंड माना जा रहा है।

NSE से प्राप्त वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, WeWork India का ऑपरेशंस से रेवेन्यू साल-दर-साल 29% बढ़कर ₹634 करोड़ पर पहुंच गया है, जबकि Q3 FY25 में यह ₹492 करोड़ था। यह ग्रोथ कंपनी के लिए खास है क्योंकि पिछले कुछ सालों में को-वर्किंग स्पेस सेक्टर ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं।


📈 रेवेन्यू और इनकम: मजबूत ऑपरेशनल परफॉर्मेंस

Q3 FY26 में WeWork India की कुल आय (Total Income) ₹644 करोड़ रही। इसमें ₹634 करोड़ का ऑपरेशनल रेवेन्यू और ₹10 करोड़ की Other Income शामिल है।

वहीं अगर नौ महीने (April–December 2025) की बात करें, तो कंपनी का रेवेन्यू 24% की ग्रोथ के साथ ₹1,744 करोड़ तक पहुंच गया है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा ₹1,410 करोड़ था।

यह दर्शाता है कि हाइब्रिड वर्क मॉडल और फ्लेक्सिबल ऑफिस स्पेस की बढ़ती मांग का WeWork India को सीधा फायदा मिल रहा है।


💸 खर्चों का हाल: Lease और Finance Cost सबसे बड़ा बोझ

हालांकि कंपनी का रेवेन्यू मजबूत रहा, लेकिन खर्चों का स्तर भी ऊंचा बना हुआ है।

Q3 FY26 में प्रमुख खर्च:

  • 🏗️ Depreciation (Lease-related): ₹246 करोड़
  • 👥 Employee Benefits Expense: ₹52 करोड़
  • 💳 Finance Cost: ₹152 करोड़

इन सभी खर्चों को मिलाकर कंपनी का कुल खर्च ₹624.5 करोड़ रहा।

इसके बावजूद WeWork India ने इस तिमाही में प्रॉफिट दर्ज किया, जो इसकी बेहतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी और ऑक्यूपेंसी लेवल्स में सुधार को दर्शाता है।


🔄 घाटे से मुनाफे तक का सफर

WeWork India की परफॉर्मेंस में सबसे बड़ा बदलाव नेट प्रॉफिट के मोर्चे पर देखने को मिला है।

  • Q3 FY25: ₹83 करोड़ का नुकसान
  • Q3 FY26: ₹17 करोड़ का मुनाफा

यानी साल-दर-साल आधार पर कंपनी ने लगभग ₹100 करोड़ से ज्यादा का पॉजिटिव टर्नअराउंड किया है।

वहीं नौ महीने की अवधि में कंपनी का कुल मुनाफा ₹9 करोड़ रहा है, जो यह दिखाता है कि WeWork India धीरे-धीरे स्थिरता की ओर बढ़ रही है।


📊 शेयर बाजार में प्रदर्शन: फ्लैट लिस्टिंग, बाद में गिरावट

WeWork India ने हाल ही में भारतीय शेयर बाजार में एंट्री की थी। हालांकि, इसका डेब्यू ज्यादा धमाकेदार नहीं रहा।

  • 📌 Issue Price: ₹648 प्रति शेयर
  • 📌 Listing Price: ₹650 (सिर्फ 0.3% प्रीमियम)
  • 📌 BSE पर ओपनिंग: ₹646.5

लिस्टिंग के बाद शेयर पर दबाव देखने को मिला।
11:12 AM तक शेयर ₹561.40 पर ट्रेड कर रहा था, जिससे कंपनी का कुल मार्केट कैप ₹7,508 करोड़ (लगभग $817 मिलियन) हो गया है।


🏙️ WeWork India का बिज़नेस मॉडल क्यों खास है?

WeWork India भारत में Managed और Flexible Office Spaces उपलब्ध कराता है, जो खासतौर पर:

  • Startups
  • MSMEs
  • Large Enterprises
  • Hybrid Work अपनाने वाली कंपनियों

के लिए डिजाइन किए गए हैं।

भारत में जैसे-जैसे कंपनियां long-term leases की जगह flexible workspaces को प्राथमिकता दे रही हैं, WeWork जैसे प्लेयर्स के लिए ग्रोथ के नए मौके बन रहे हैं।


🔍 आगे की राह: क्या WeWork India ग्रोथ बरकरार रख पाएगा?

WeWork India के लिए आने वाले क्वार्टर कई मायनों में अहम होंगे:

  • बढ़ते फाइनेंस कॉस्ट को कंट्रोल करना
  • ऑक्यूपेंसी रेट्स को और बेहतर बनाना
  • मुनाफे की निरंतरता बनाए रखना

अगर कंपनी अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी और रेवेन्यू ग्रोथ को इसी तरह बनाए रखती है, तो आने वाले समय में यह भारत के को-वर्किंग सेक्टर में एक मजबूत और प्रॉफिटेबल प्लेयर के रूप में उभर सकती है।


✨ निष्कर्ष

WeWork India का Q3 FY26 प्रदर्शन यह साफ संकेत देता है कि कंपनी घाटे के दौर से बाहर निकल रही है। हालांकि शेयर बाजार की प्रतिक्रिया फिलहाल ठंडी है, लेकिन फाइनेंशियल्स में आया सुधार लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर्स के लिए पॉजिटिव साइन माना जा सकता है।

Read more :🥗 Clean-Label Food Startup The Whole Truth की FY25 में ज़बरदस्त ग्रोथ,


🥗 Clean-Label Food Startup The Whole Truth की FY25 में ज़बरदस्त ग्रोथ,

The Whole Truth

Peak XV Partners द्वारा समर्थित clean-label food और nutrition startup The Whole Truth ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में शानदार ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी का रेवेन्यू जहां 3 गुना से ज्यादा बढ़ा, वहीं तेज़ विस्तार और बढ़ते operating व marketing खर्चों के चलते इसका नुकसान (loss) भी पिछले साल के मुकाबले बढ़ गया।

Registrar of Companies (RoC) से प्राप्त वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक, The Whole Truth का revenue from operations FY25 में 232% उछलकर ₹216 करोड़ पहुंच गया, जो FY24 में ₹65 करोड़ था। यह ग्रोथ भारतीय consumer food startup ecosystem में कंपनी की मजबूत पकड़ को दर्शाती है।


📊 कुल आय ₹220 करोड़ के पार

The Whole Truth अपने सभी प्रोडक्ट्स की बिक्री से ही रेवेन्यू कमाती है। इसमें शामिल हैं:

  • Protein bars
  • Peanut butter
  • Dark chocolates
  • Energy bars
  • Immunity balls
  • Muesli

FY25 में अन्य आय (other income) को जोड़कर कंपनी की कुल आय ₹220 करोड़ रही, जबकि FY24 में यह ₹71 करोड़ थी। यानी एक साल में कंपनी ने स्केल के मामले में बड़ी छलांग लगाई है।


💸 खर्च भी तेज़ी से बढ़े

तेज़ ग्रोथ के साथ खर्चों में भी तेज़ इजाफा हुआ। FY25 में कंपनी का total expense 2.6 गुना बढ़कर ₹248 करोड़ हो गया, जो FY24 में ₹96 करोड़ था।

सबसे बड़े खर्च कौन-से रहे?

🔹 Raw material / Cost of materials consumed

  • कुल खर्च का 53% हिस्सा
  • FY25 में ₹131 करोड़
  • FY24 में ₹38 करोड़
  • यानी 3.5 गुना बढ़ोतरी

🔹 Advertising और Marketing खर्च

  • FY25 में ₹41 करोड़
  • FY24 की तुलना में 2 गुना से ज्यादा
  • कुल खर्च का 16.5%

🔹 Employee benefit expenses

  • 114% की बढ़ोतरी
  • FY25 में ₹30 करोड़

🔹 Marketplace charges और Transportation खर्च

  • दोनों मिलाकर करीब ₹18 करोड़

इन आंकड़ों से साफ है कि कंपनी ने ब्रांड बिल्डिंग, टीम विस्तार और distribution पर जमकर निवेश किया है।


📉 नुकसान 17% बढ़ा, लेकिन यूनिट इकॉनॉमिक्स बेहतर

FY25 में The Whole Truth का loss ₹28 करोड़ रहा, जो FY24 में ₹24 करोड़ था। यानी नुकसान में करीब 17% की बढ़ोतरी हुई।

हालांकि, अच्छी बात यह है कि unit economics में सुधार देखने को मिला है:

  • FY24 में कंपनी ₹1 कमाने के लिए ₹1.48 खर्च कर रही थी
  • FY25 में यह घटकर ₹1.15 रह गया

यह दिखाता है कि स्केल बढ़ने के साथ कंपनी की operational efficiency बेहतर हो रही है।


📉 Profitability Metrics अभी निगेटिव

FY25 में कंपनी के प्रमुख profitability indicators अभी भी निगेटिव रहे:

  • ROCE: -14.85%
  • EBITDA Margin: -13.43%

हालांकि growth-stage consumer startups के लिए यह असामान्य नहीं है, खासकर तब जब फोकस market capture और brand trust पर हो।


💰 Cash Position मजबूत, ग्रोथ के लिए पूरी तैयारी

31 मार्च 2025 तक:

  • Cash और bank balance: ₹141 करोड़
  • FY24 में यह ₹72 करोड़ था
  • यानी लगभग 2 गुना बढ़ोतरी

कंपनी के current assets ₹270 करोड़ रहे, जो बताता है कि The Whole Truth फिलहाल फाइनेंशियल रूप से आरामदायक स्थिति में है और आगे ग्रोथ के लिए पूंजी की कमी नहीं है।


🧾 अब तक $38 मिलियन की फंडिंग, Series D की तैयारी

TheKredible के आंकड़ों के अनुसार, The Whole Truth अब तक कुल $38 मिलियन (करीब ₹315 करोड़) की फंडिंग जुटा चुकी है। इसके प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:

  • Peak XV Partners
  • Matrix Partners
  • Sauce

इसके अलावा, कंपनी Series D round में $34 मिलियन जुटाने की तैयारी कर रही है। इस डेवलपमेंट की एक्सक्लूसिव रिपोर्टिंग पहले Entrackr ने की थी।


🔮 आगे की राह: ₹500 करोड़ का टारगेट और बड़ी चुनौती

The Whole Truth फिलहाल ऐसी स्थिति में है जहां वह:

  • आराम से ग्रोथ कर सकती है
  • कुछ समय तक नुकसान सह सकती है
  • और brand purity के अपने वादे पर टिकी रह सकती है

कंपनी का clean-label और purity-first approach उसे premium consumer segment पर फोकस करने की आज़ादी देता है। इससे advertising cost भी लंबे समय में घट सकती है, क्योंकि भरोसेमंद ब्रांड खुद-ब-खुद repeat customers बनाता है।

लेकिन बड़ा सवाल यही है 👇

क्या The Whole Truth ₹500 करोड़ और उससे आगे की ग्रोथ हासिल कर पाएगी, बिना quality से समझौता किए?

जैसे-जैसे कंपनी profitable होने के करीब पहुंचेगी, competition भी तेज़ होगा। दूसरे ब्रांड उन high-margin segments में घुसने की कोशिश करेंगे, जिन्हें The Whole Truth ने identify किया है।


🧠 निष्कर्ष

The Whole Truth ने FY25 में यह साबित कर दिया है कि:

  • Strong brand + clean promise = तेज़ ग्रोथ
  • Costs पर कंट्रोल संभव है
  • लेकिन long-term success के लिए सिर्फ marketing काफी नहीं

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनी scale, purity और profitability के बीच संतुलन कैसे बनाती है। यही संतुलन तय करेगा कि The Whole Truth भारत का अगला बड़ा food-nutrition ब्रांड बनता है या नहीं 🚀

Read more :⚖️ Legal-Tech Startup SpotDraft को Qualcomm Ventures से $8 मिलियन की फंडिंग,

⚖️ Legal-Tech Startup SpotDraft को Qualcomm Ventures से $8 मिलियन की फंडिंग,

SpotDraft

भारतीय legal-tech startup SpotDraft ने अपनी Series B extension के तहत $8 मिलियन (करीब ₹66 करोड़) की नई फंडिंग जुटाई है। इस राउंड का नेतृत्व Qualcomm Ventures ने किया है। यह निवेश ऐसे समय आया है जब SpotDraft एंटरप्राइज ग्राहकों के लिए AI-powered contract management को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

यह फंडिंग कंपनी के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे पहले SpotDraft ने फरवरी 2025 में अपने Series B round में $54 मिलियन जुटाए थे। वहीं, मार्च 2023 में कंपनी ने $26 मिलियन का Series A राउंड पूरा किया था। यानी अब तक SpotDraft ने निवेशकों का मजबूत भरोसा लगातार बनाए रखा है।


💡 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

SpotDraft इस नई फंडिंग का इस्तेमाल मुख्य रूप से तीन बड़े क्षेत्रों में करेगा:

  • Product और AI capabilities को मजबूत करना
  • Enterprise ग्राहकों की संख्या बढ़ाना
  • Americas, EMEA और India जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार

कंपनी का फोकस ऐसे AI tools बनाने पर है जो privacy-first हों और बड़े एंटरप्राइज की जरूरतों के अनुसार काम करें।


🤖 Privacy-First AI: SpotDraft की सबसे बड़ी ताकत

SpotDraft को बाकी legal-tech startups से अलग बनाता है इसका on-device AI model। आमतौर पर AI-based legal platforms दस्तावेज़ों को cloud पर प्रोसेस करते हैं, जिससे डेटा सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होते हैं।

लेकिन SpotDraft का दावा है कि उसका AI:

  • Sensitive legal documents को cloud पर नहीं भेजता
  • On-device ही contract review और analysis करता है
  • Enterprise-grade data security प्रदान करता है

यही वजह है कि बड़े कॉर्पोरेट और global enterprises SpotDraft को तेजी से अपना रहे हैं।


🚀 Qualcomm Snapdragon Summit 2025 में दिखाई ताकत

SpotDraft ने हाल ही में Qualcomm Snapdragon Summit 2025 में अपनी तकनीक का लाइव डेमो दिया, जहां कंपनी ने दिखाया कि उसका AI मॉडल Snapdragon X Elite laptops पर बिना किसी cloud connectivity के काम कर सकता है।

यह डेमो Qualcomm Ventures के निवेश का एक बड़ा कारण माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह साबित हुआ कि SpotDraft का AI:

  • Lightweight है
  • Secure है
  • Enterprise-ready है

📈 तेज़ी से बढ़ता बिजनेस और यूज़र बेस

SpotDraft के ग्रोथ आंकड़े भी काफी मजबूत हैं:

  • Customers में 100% year-on-year growth
  • Contract volumes में 173% YoY increase
  • करीब 50,000 monthly active users
  • हर साल 10 लाख से ज्यादा contracts प्रोसेस

ये आंकड़े बताते हैं कि legal-tech सेक्टर में SpotDraft तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।


🏢 बड़े नामों को बना चुका है ग्राहक

SpotDraft के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कई जानी-मानी कंपनियां कर रही हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • Apollo.io
  • Panasonic
  • Zeplin
  • Whatfix

इन ग्राहकों की मौजूदगी यह दिखाती है कि SpotDraft सिर्फ स्टार्टअप्स ही नहीं, बल्कि बड़े enterprises के लिए भी एक भरोसेमंद समाधान बन चुका है।


💰 Financial Performance: Revenue तीन गुना

वित्तीय मोर्चे पर भी SpotDraft ने अच्छा प्रदर्शन किया है:

  • FY24 में ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹60 करोड़
  • FY23 में रेवेन्यू ₹20 करोड़ था
  • यानी तीन गुना ग्रोथ

हालांकि कंपनी का नुकसान ₹68 करोड़ पर लगभग स्थिर रहा। FY25 के नतीजे अभी सार्वजनिक रूप से सत्यापित नहीं हो सके हैं।


⚔️ Competitors से कड़ी टक्कर

भारत में legal-tech स्पेस तेजी से बढ़ रहा है और SpotDraft को कई खिलाड़ियों से मुकाबला करना पड़ रहा है, जैसे:

  • Legistify
  • Leegality
  • Sirion
  • Vakilsearch

हालांकि SpotDraft का AI-first और privacy-centric approach इसे इस भीड़ में अलग पहचान देता है।


🔮 आगे की राह

Experts का मानना है कि आने वाले वर्षों में:

  • Enterprises legal automation को तेजी से अपनाएंगे
  • AI-based contract management की मांग बढ़ेगी
  • Data privacy सबसे बड़ा differentiator बनेगा

ऐसे में SpotDraft की रणनीति और Qualcomm Ventures जैसी global investor की backing इसे भारत ही नहीं, बल्कि global legal-tech मार्केट में भी एक मजबूत खिलाड़ी बना सकती है।


कुल मिलाकर, SpotDraft की यह नई फंडिंग भारतीय legal-tech ecosystem के लिए एक सकारात्मक संकेत है। यह दिखाता है कि अगर टेक्नोलॉजी, AI और privacy को सही तरीके से जोड़ा जाए, तो भारतीय स्टार्टअप्स ग्लोबल लेवल पर भी बड़ा खेल खेल सकते हैं 🚀

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