🛒 CityMall ने जुटाए ₹334 करोड़ की नई फंडिंग,

CityMall

गुरुग्राम स्थित ग्रॉसरी-फोकस्ड सोशल ई-कॉमर्स स्टार्टअप सिटीमॉल (CityMall) ने अपने विकास और विस्तार को तेज़ करने के लिए Series D राउंड में ₹334 करोड़ (लगभग $38 मिलियन) जुटाने की घोषणा की है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Accel ने किया है, जिसमें उसके मौजूदा निवेशक — Waterbridge Ventures, Elevation Capital, Norwest Capital, Citius, और General Catalyst — ने भी हिस्सा लिया है।

यह कंपनी का 3.5 साल बाद पहला बड़ा फंडिंग राउंड है। इससे पहले मार्च 2022 में CityMall ने Series C राउंड में $75 मिलियन जुटाए थे।


💰 निवेश का ब्योरा

कंपनी के RoC (Registrar of Companies) में दाखिल दस्तावेज़ों के मुताबिक, बोर्ड ने 7,278 Series D CCPS और एक इक्विटी शेयर जारी करने को मंजूरी दी है, जिनकी कीमत ₹4,58,716 प्रति शेयर तय की गई है।

  • Accel: ₹173.2 करोड़ ($19.7 मिलियन)
  • Waterbridge Ventures: ₹52 करोड़ ($5.9 मिलियन)
  • Citius: ₹48.38 करोड़ ($5.5 मिलियन)
  • Norwest Capital: ₹25.96 करोड़ ($2.95 मिलियन)
  • Elevation Capital: ₹21.65 करोड़
  • General Catalyst: ₹8.67 करोड़
  • एंजल इन्वेस्टर रोहित अग्रवाल: ₹4 करोड़

कंपनी इस राशि का उपयोग कैपिटल एक्सपेंडिचर, मार्केटिंग और अन्य कॉर्पोरेट आवश्यकताओं के लिए करेगी।


📊 वैल्यूएशन और भविष्य की योजनाएँ

Entrackr की रिपोर्ट के अनुसार, इस राउंड के बाद भी कंपनी का वैल्यूएशन लगभग ₹2,780 करोड़ ($316 मिलियन) पर स्थिर रहा है। हालाँकि, उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले चरणों में CityMall और फंड जुटा सकती है, जिससे वैल्यूएशन बढ़ने की संभावना है।


🏬 CityMall का बिज़नेस मॉडल

2020 में स्थापित, CityMall एक सोशल ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है जो मुख्य रूप से ग्रॉसरी, FMCG और होम व किचन प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराता है। कंपनी का फोकस टियर-II और टियर-III शहरों पर है, जहाँ यह कम्युनिटी रिसेलर्स के नेटवर्क के माध्यम से उत्पाद बेचती है।

अब CityMall ब्यूटी और एक्सेसरीज़ जैसी नई कैटेगरी में भी विस्तार करने की तैयारी कर रही है, ताकि छोटे शहरों के उपभोक्ताओं को भी बड़े शहरों जैसी प्रोडक्ट चॉइस मिल सके।


📈 अब तक की फंडिंग और निवेश

TheKredible के आँकड़ों के अनुसार, CityMall अब तक $110 मिलियन से अधिक फंडिंग जुटा चुकी है। Accel जैसी ग्लोबल वीसी फर्म का लगातार समर्थन यह दर्शाता है कि निवेशकों को कंपनी के बिज़नेस मॉडल और उसके स्केल-अप पोटेंशियल पर भरोसा है।


💹 वित्तीय प्रदर्शन (FY24)

कंपनी ने अभी तक FY25 के वित्तीय आँकड़े दाखिल नहीं किए हैं, लेकिन FY24 की रिपोर्ट के अनुसार:

  • ग्रॉस रेवेन्यू (GMV): ₹427 करोड़ (FY23 में ₹346.4 करोड़ की तुलना में 23% वृद्धि)
  • नेट लॉस: ₹159 करोड़ (FY23 में ₹144 करोड़ से 10% अधिक)

यह दर्शाता है कि जहाँ कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ तेज़ है, वहीं लॉस भी बढ़ रहा है, जो विस्तार और मार्केटिंग खर्च की वजह से है।


🌐 छोटे शहरों पर बड़ा फोकस

CityMall का उद्देश्य सिर्फ ग्रॉसरी और FMCG तक सीमित नहीं है, बल्कि वह भारत के छोटे और मध्यम शहरों में ई-कॉमर्स की पहुँच बढ़ाने का है। भारत में Amazon और Flipkart जैसे बड़े प्लेटफॉर्म का दबदबा ज़्यादातर मेट्रो और बड़े शहरों में है। वहीं, CityMall का फोकस है कि छोटे कस्बों और शहरों के ग्राहकों को भी सस्ती और क्वालिटी प्रोडक्ट्स आसानी से उपलब्ध हों।

इस रणनीति ने इसे स्थानीय ग्राहकों के बीच लोकप्रिय बनाया है और कम्युनिटी-बेस्ड मॉडल ने विश्वास बनाने में मदद की है।


🚀 निष्कर्ष

CityMall का यह ₹334 करोड़ का नया फंडिंग राउंड यह दर्शाता है कि निवेशकों को कंपनी की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ स्टोरी पर भरोसा है। हालाँकि घाटे की चुनौती बनी हुई है, लेकिन टियर-II और टियर-III शहरों पर फोकस और नई कैटेगरी में एंट्री से कंपनी अपने राजस्व और ग्राहक आधार को मज़बूत करने की दिशा में बढ़ रही है।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि CityMall कितनी तेज़ी से अपने बिज़नेस को स्केल कर पाता है और क्या यह बड़े ई-कॉमर्स खिलाड़ियों को छोटे शहरों में कड़ी टक्कर दे पाएगा।

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🏦 Kiwi ने सीरीज़ B राउंड में जुटाए ₹208 करोड़,

Kiwi

भारत के तेजी से बढ़ते फिनटेक सेक्टर में एक और बड़ी फंडिंग डील सामने आई है। फिनटेक स्टार्टअप Kiwi ने अपने सीरीज़ B फंडिंग राउंड में $24 मिलियन (लगभग ₹208 करोड़) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व Vertex Ventures Southeast Asia & India ने किया, जबकि मौजूदा निवेशकों Nexus Venture Partners, Stellaris Venture Partners और Omidyar Network ने भी भागीदारी की।

💰 फंडिंग का इस्तेमाल कहाँ होगा?

कंपनी ने बताया कि इस निवेश से उसका ध्यान तीन प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा:

  1. प्रोडक्ट रोडमैप को तेज करना – नई सुविधाएँ और टेक्नोलॉजी अपग्रेड लॉन्च करना।
  2. यूनिट इकॉनॉमिक्स को मजबूत करना – लाभप्रदता और लागत नियंत्रण पर ध्यान।
  3. कस्टमर एक्विज़िशन बढ़ाना – अधिक से अधिक नए यूज़र्स को जोड़ना।

📱 Kiwi का बिज़नेस मॉडल

Kiwi की शुरुआत साल 2022 में सिद्धार्थ मेहता, मोहित बेदी और अनुप अग्रवाल ने की थी। यह प्लेटफ़ॉर्म यूज़र्स को RuPay क्रेडिट कार्ड को UPI से लिंक करने की सुविधा देता है।

  • इसका मतलब है कि अब ग्राहक अपने क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल भी उसी तरह कर सकते हैं, जैसे डेबिट कार्ड से UPI पेमेंट्स करते हैं।
  • इससे क्रेडिट कार्ड की स्वीकृति (acceptance) नेटवर्क काफी बड़ा हो जाता है, क्योंकि भारत में हर जगह UPI व्यापारी (merchants) मौजूद हैं।

📊 अब तक का प्रदर्शन

  • Kiwi ने लॉन्च के बाद से अब तक 2 लाख से अधिक RuPay क्रेडिट कार्ड जारी किए हैं।
  • वर्तमान में यह स्टार्टअप 600 शहरों में सक्रिय है।
  • हर महीने 50 लाख से ज्यादा मर्चेंट ट्रांजैक्शन्स प्रोसेस करता है।
  • Kiwi ने YES Bank और AU Small Finance Bank के साथ पार्टनरशिप की है और इस वित्त वर्ष में दो और बड़े बैंकों को जोड़ने की योजना बना रहा है।

🎯 आने वाला लक्ष्य

कंपनी ने बड़ा विज़न रखा है – साल 2027 तक 10 लाख RuPay क्रेडिट कार्ड जारी करने का लक्ष्य।
यह ऐसे समय में आ रहा है जब भारत में फिनटेक सेक्टर UPI आधारित क्रेडिट एक्सेस को तेजी से आगे बढ़ा रहा है।

📈 क्यों है Kiwi का मॉडल खास?

भारत में फिलहाल 350 मिलियन से ज्यादा यूनिक UPI यूज़र्स हैं, जो कि क्रेडिट कार्ड यूज़र्स की संख्या से 8–10 गुना अधिक है।

  • पारंपरिक क्रेडिट कार्ड की तुलना में UPI पर क्रेडिट की acceptance network 35 गुना बड़ा है।
  • इसीलिए Kiwi का मॉडल निवेशकों और ग्राहकों दोनों के लिए आकर्षक माना जा रहा है।

🧑‍🤝‍🧑 शेयरहोल्डिंग और निवेशकों की दिलचस्पी

स्टार्टअप डेटा प्लेटफ़ॉर्म TheKredible के मुताबिक:

  • सीरीज़ A राउंड के बाद सिद्धार्थ मेहता, अनुप अग्रवाल और मोहित बेदी के पास लगभग 16.2% हिस्सेदारी थी।
  • वहीं Nexus Venture Partners सबसे बड़ा बाहरी निवेशक है।
  • सीरीज़ B राउंड के बाद संस्थापकों ने कितनी हिस्सेदारी डायल्यूट की है, यह देखना दिलचस्प होगा।

🌍 प्रतिस्पर्धा और उद्योग का माहौल

भारत में कई फिनटेक कंपनियाँ इस क्षेत्र में तेजी से काम कर रही हैं:

  • LazyPay, OneCard, Uni और Slice जैसी कंपनियाँ भी UPI के जरिए क्रेडिट एक्सेस का विस्तार कर रही हैं।
  • बढ़ते डिजिटल पेमेंट यूज़र्स के चलते इस मार्केट में आने वाले सालों में जबरदस्त ग्रोथ की उम्मीद है।

📌 नतीजा

Kiwi का फंडिंग राउंड यह दर्शाता है कि भारत का फिनटेक इकोसिस्टम अभी भी निवेशकों के लिए बेहद आकर्षक है।

  • क्रेडिट कार्ड और UPI का मेल आने वाले समय में ग्राहकों की क्रेडिट उपयोग की आदतों को पूरी तरह बदल सकता है।
  • अगर Kiwi अपने लक्ष्यों को हासिल कर लेता है, तो यह भारत के डिजिटल पेमेंट सेक्टर में Game Changer साबित हो सकता है। 🚀

👉 यह फंडिंग न सिर्फ Kiwi के लिए, बल्कि भारत के फिनटेक सेक्टर के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है। आने वाले वर्षों में क्रेडिट ऑन UPI का विस्तार भारतीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है।

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🏠 Altum Credo Home Finance ने BII से जुटाए ₹170 करोड़,

Altum Credo

सस्ते हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर में काम करने वाली Altum Credo Home Finance ने अपने मौजूदा निवेशक British International Investment (BII) से ₹170 करोड़ (लगभग $19.5 मिलियन) की नई फंडिंग जुटाई है। यह निवेश कंपनी की बैलेंस शीट को और मजबूत करेगा और दक्षिण तथा पश्चिम भारत के बाजारों में इसके विस्तार को गति देगा।


💸 कंपनी की फंडिंग हिस्ट्री

Altum Credo की फंडिंग यात्रा काफी सक्रिय रही है। अप्रैल 2023 में कंपनी ने $40 मिलियन जुटाए थे, जिसमें Z3Partners और Oikocredit प्रमुख निवेशक रहे।

  • अब तक कंपनी ने लगभग $80 मिलियन (₹660 करोड़ से अधिक) फंडिंग जुटाई है।
  • इस ताज़ा निवेश से कंपनी की मार्केट पोज़िशन और मजबूत होगी, खासकर उन क्षेत्रों में जहां हाउसिंग फाइनेंस की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।

🏡 बिजनेस मॉडल – अनऑर्गनाइज़्ड सेक्टर को हाउसिंग सपोर्ट

Altum Credo की स्थापना 2016 में हुई थी। कंपनी का फोकस उन ग्राहकों पर है जिनकी आय अनौपचारिक (informal) या सेमी-फॉर्मल है और जिन्हें अक्सर बड़े बैंकों से होम लोन लेने में दिक्कत होती है।

  • कंपनी लॉन्ग-टेन्योर होम लोन देती है ताकि मिडिल और लोअर-मिडिल क्लास ग्राहकों को सस्ते घर खरीदने में मदद मिल सके।
  • इसका मॉडल टेक-इनेबल्ड ओरिजिनेशन और अंडरराइटिंग प्लेटफॉर्म पर आधारित है, जिसमें ज़मीन पर मौजूद टीम का सपोर्ट भी शामिल है।
  • इस स्ट्रक्चर से कंपनी ऑपरेशनल कॉस्ट कम रख पाती है और ग्राहकों तक आसानी से पहुंच बना लेती है।

📊 ग्राहक आधार और प्रदर्शन

  • Altum Credo अब तक 15,000 से अधिक ग्राहकों को होम लोन उपलब्ध करा चुकी है।
  • कंपनी की Assets Under Management (AUM) ₹1,000 करोड़ से ज़्यादा है।
  • यह छह राज्यों में सक्रिय है, जिसमें दक्षिण और पश्चिम भारत इसके मुख्य फोकस मार्केट हैं।

📈 वित्तीय प्रदर्शन

Altum Credo का वित्तीय ग्राफ लगातार बेहतर हो रहा है।

  • वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी की ऑपरेटिंग रेवेन्यू 67% बढ़कर ₹112.87 करोड़ हो गई।
  • इसी अवधि में कंपनी का मुनाफा दोगुना होकर ₹20 करोड़ पर पहुंच गया।
  • यह मजबूत ग्रोथ कंपनी के बिजनेस मॉडल और स्केलेबिलिटी की सफलता को दिखाती है।

🌏 इंडस्ट्री में बढ़ती हलचल

पिछले कुछ महीनों में हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर में कई बड़े सौदे हुए हैं।

  • Weaver Services ने हाल ही में $170 मिलियन जुटाए, जिसका नेतृत्व Lightspeed और Premji Invest ने किया।
  • Vastu Housing ने $100 मिलियन जुटाए, जिसमें Prosus प्रमुख निवेशक रहा।
  • Easy Home Finance ने $35 मिलियन की फंडिंग हासिल की, जिसमें Ranjan Pai Family Office सहित अन्य निवेशक शामिल थे।

Altum Credo का नया राउंड भी इसी ट्रेंड को मज़बूत करता है और यह दर्शाता है कि भारत का हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर तेज़ी से निवेशकों को आकर्षित कर रहा है।


🚀 altum credo भविष्य की रणनीति

Altum Credo अब नई फंडिंग के सहारे इन रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करेगी:

  1. मौजूदा मार्केट में गहराई से विस्तार – खासकर दक्षिण और पश्चिम भारत में।
  2. टेक्नोलॉजी को और अपग्रेड करना ताकि लोन प्रोसेसिंग और कस्टमर सर्विस आसान हो सके।
  3. नए ग्राहक सेगमेंट को टारगेट करना जो अभी तक पारंपरिक बैंकों से वंचित हैं।

🔎 निष्कर्ष

Altum Credo Home Finance का ₹170 करोड़ का यह नया निवेश भारतीय हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर के लिए एक बड़ा संकेत है। भारत जैसे देश में जहां हर साल लाखों लोगों को सस्ती हाउसिंग की ज़रूरत होती है, Altum Credo जैसे प्लेटफॉर्म्स एक अहम भूमिका निभा सकते हैं।

इस निवेश से कंपनी न केवल अपने बिजनेस को विस्तार दे पाएगी बल्कि उन परिवारों तक भी पहुंच सकेगी जिनके लिए घर का सपना अब तक अधूरा था।

➡️ साफ है कि आने वाले समय में Affordable Housing Finance सेक्टर निवेशकों और ग्राहकों दोनों के लिए एक बड़ा ग्रोथ इंजन साबित होगा।

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PokerBaazi पर Real-Money Gaming बंद किया

PokerBaazi

भारत के ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर में बड़ा झटका लगा है। Nazara Technologies की एसोसिएट कंपनी Moonshine Technologies, जो PokerBaazi प्लेटफ़ॉर्म ऑपरेट करती है, ने अपने Real-Money Gaming ऑपरेशन्स को सस्पेंड कर दिया है। यह कदम संसद द्वारा Promotion and Regulation of Online Gaming Bill, 2025 पारित किए जाने के बाद उठाया गया है।


⚖️ सरकार का नया कानून और असर

इस नए बिल के तहत ऑनलाइन गेमिंग में किसी भी तरह के पैसों की हिस्सेदारी (Real-Money Games) को पूरी तरह से प्रतिबंधित (Ban) कर दिया गया है।

  • जो कंपनियाँ इस नियम का उल्लंघन करेंगी, उन्हें 3 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है।
  • बिल पारित होते ही कई कंपनियों ने तुरंत अपने ऑपरेशन्स बंद करने शुरू कर दिए।

Moonshine ने अपने स्टेटमेंट में कहा कि उन्होंने यह कदम “abundant caution” के तौर पर और सरकार के आदेश का सम्मान करते हुए उठाया है।


💼 Nazara Technologies पर प्रभाव

Nazara Technologies के पास Moonshine में 46.07% हिस्सेदारी है। हालांकि, Nazara ने कई बार कहा है कि वह Moonshine की revenue numbers consolidate नहीं करती, लेकिन अगर यह बैन लंबे समय तक जारी रहा तो:

  • PokerBaazi में किया गया निवेश शून्य (Zero Valuation) हो सकता है।
  • ब्रोकरेज फर्म्स ने पहले ही चेतावनी दी है कि Moonshine की वैल्यू गिरकर 0 तक जा सकती है।
  • निवेशकों की चिंता बढ़ने से Nazara के शेयर पिछले हफ्ते में 20% से ज्यादा टूट चुके हैं

🎲 Real-Money Gaming कंपनियों पर संकट

Moonshine अकेली कंपनी नहीं है जिसने यह कदम उठाया है। बिल पास होने के बाद कई अन्य बड़ी कंपनियाँ भी प्रभावित हुई हैं:

  • MPL (Mobile Premier League)
  • Dream11
  • Zupee
  • My11Circle
  • Gameskraft
  • Probo

इन सभी ने या तो अपने Real-Money Games बंद कर दिए हैं या फिर ऑपरेशन्स सस्पेंड कर दिए हैं


📉 इंडस्ट्री पर असर

भारत की ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री पहले ही तेजी से बढ़ रही थी और इसमें 400 से ज्यादा कंपनियाँ काम कर रही थीं।

  • इस सेक्टर में लगभग 2 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला हुआ है।
  • अब इस बैन के चलते mass layoffs (छंटनी) की आशंका गहराई है।
  • एक्सपर्ट्स का कहना है कि यूज़र्स अब illegal offshore gaming platforms की ओर शिफ्ट हो सकते हैं, जिससे सरकार के लिए रेवेन्यू लॉस और कानून-व्यवस्था की चुनौती बढ़ सकती है।

🌍 कंपनियों की नई रणनीति

कई गेमिंग कंपनियाँ अब अपनी रणनीति बदल रही हैं:

  • Free-to-Play Games की ओर शिफ्ट हो रही हैं।
  • Esports और Gaming as Entertainment पर ज्यादा फोकस कर रही हैं।
  • कुछ कंपनियाँ अब विदेशी बाजारों (International Markets) की ओर बढ़ रही हैं ताकि अपने बिज़नेस को बचा सकें।

📊 निवेशकों की नजर

निवेशक इस समय काफी सतर्क हो गए हैं।

  • जो कंपनियाँ केवल Real-Money Gaming पर निर्भर थीं, उनकी वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट देखी जा रही है।
  • वहीं, जिन कंपनियों के पास विविधतापूर्ण बिज़नेस मॉडल हैं (जैसे Esports, Gaming Content, Tech Development), वे इस संकट से बेहतर तरीके से निकल सकती हैं।

🚨 निष्कर्ष

PokerBaazi का ऑपरेशन बंद होना भारत की Gaming Economy के लिए बड़ा झटका है। Nazara Technologies जैसे बड़े ब्रांड पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है।

  • एक तरफ सरकार User Protection और Responsible Gaming के लिए कानून बना रही है।
  • वहीं दूसरी ओर, रोजगार और निवेशकों का भरोसा इस बैन से प्रभावित हो रहा है।

अब नजर इस बात पर है कि कंपनियाँ नए कानून के हिसाब से अपने मॉडल को कैसे एडजस्ट करती हैं और सरकार क्या इंडस्ट्री के साथ मिलकर कोई संतुलित समाधान ढूँढ पाती है।


👉 यह मामला आने वाले समय में तय करेगा कि भारत का Gaming Sector एक Global Hub बन पाएगा या नियमन की वजह से पीछे रह जाएगा

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📢 Smartworks ने Cleanmax में अपनी हिस्सेदारी घटाई,

Smartworks

मैनेज्ड ऑफिस स्पेस प्रोवाइडर Smartworks ने अपनी एसोसिएट कंपनी Cleanmax (Cleanmax DOS Pvt Ltd) में हिस्सेदारी का एक बड़ा हिस्सा बेच दिया है। कंपनी ने अपनी हिस्सेदारी 24.82% से घटाकर 9.08% कर दी है। यह जानकारी Smartworks द्वारा स्टॉक एक्सचेंज में दी गई फाइलिंग से सामने आई है।

फाइलिंग के अनुसार, Smartworks ने Clean Max Enviro Energy Solutions Limited को यह हिस्सेदारी करीब ₹99 लाख में बेची है। यह डील एक हफ्ते के भीतर पूरी होने की संभावना है।


✅ डील की अहम बातें

  • Smartworks की हिस्सेदारी Cleanmax में 24.82% से घटकर 9.08% रह जाएगी।
  • खरीदार Clean Max Enviro Energy Solutions Limited है, जो Smartworks के प्रमोटर ग्रुप से संबंधित नहीं है।
  • इस कारण, यह डील Related Party Transaction की श्रेणी में नहीं आती।
  • हिस्सेदारी घटने के बाद Cleanmax अब Smartworks की Associate Company नहीं रहेगी।

📊 Smartworks का वित्तीय प्रदर्शन

Smartworks ने हाल ही में अपने Q1 FY26 के नतीजे घोषित किए थे।

  • कंपनी की Revenue सालाना आधार पर 21% बढ़कर ₹379 करोड़ पर पहुंच गई।
  • वहीं, कंपनी का घाटा 82% कम होकर ₹4.1 करोड़ रह गया।

ये आंकड़े दर्शाते हैं कि Smartworks अपने बिज़नेस को लगातार मज़बूत कर रही है और घाटे को कम करने की दिशा में सही कदम उठा रही है।


📈 स्टॉक मार्केट में हालिया प्रदर्शन

Smartworks ने पिछले महीने स्टॉक मार्केट में शानदार डेब्यू किया था।

  • IPO इश्यू प्राइस ₹407 के मुकाबले शेयरों की लिस्टिंग करीब 7% प्रीमियम पर हुई।
  • कंपनी ने IPO से कुल ₹445 करोड़ फ्रेश इश्यू और ₹137.5 करोड़ OFS (Offer for Sale) से जुटाए।
  • गुरुवार के सेशन में कंपनी का शेयर ₹476 पर बंद हुआ।
  • मौजूदा वैल्यूएशन के हिसाब से Smartworks का मार्केट कैप लगभग ₹5,432.65 करोड़ ($632 मिलियन) है।

🏢 Smartworks का बिज़नेस मॉडल

Smartworks देश की अग्रणी मैनेज्ड ऑफिस स्पेस प्रोवाइडर कंपनियों में से एक है। यह कॉर्पोरेट्स और स्टार्टअप्स को फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस सॉल्यूशंस उपलब्ध कराती है।

  • कंपनी का लक्ष्य है कि बदलते वर्ककल्चर और हाइब्रिड मॉडल की मांग को पूरा किया जाए।
  • Smartworks अपने क्लाइंट्स को हाई-टेक ऑफिस इंफ्रास्ट्रक्चर, को-वर्किंग सॉल्यूशंस और एंड-टू-एंड मैनेजमेंट सुविधाएं देती है।

🔎 डील का महत्व

Smartworks द्वारा Cleanmax में हिस्सेदारी कम करने के पीछे कई रणनीतिक कारण हो सकते हैं।

  • कंपनी अपनी कोर बिज़नेस एक्टिविटीज़ पर अधिक फोकस करना चाहती है।
  • Cleanmax से हिस्सेदारी घटाकर Smartworks वर्कस्पेस बिज़नेस में विस्तार और प्रॉफिटेबिलिटी बढ़ाने पर ध्यान दे सकती है।
  • वहीं, Clean Max Enviro Energy Solutions Limited द्वारा इस हिस्सेदारी की खरीद यह दिखाता है कि कंपनी क्लीन एनर्जी सेक्टर में आक्रामक विस्तार की ओर बढ़ रही है।

🌍 मार्केट एक्सपर्ट्स की राय

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि Smartworks का यह कदम रणनीतिक डाइवेस्टमेंट (Strategic Divestment) है।

  • कंपनी का फोकस अब अपने कोर ऑपरेशंस पर होगा।
  • IPO के बाद, Smartworks का मकसद निवेशकों का विश्वास बनाए रखना और राजस्व वृद्धि को स्थिर रखना है।
  • आने वाले समय में कंपनी के शेयर प्राइस में और मजबूती देखने को मिल सकती है।

📌 निष्कर्ष

Smartworks ने Cleanmax में हिस्सेदारी घटाकर यह साफ कर दिया है कि वह अपने मुख्य बिज़नेस यानी मैनेज्ड ऑफिस स्पेस पर ज्यादा ध्यान देना चाहती है।
कंपनी के लिए यह कदम निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत है क्योंकि इससे बिज़नेस स्ट्रक्चर और फोकस और भी मजबूत होगा।

💡 आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि Smartworks IPO के बाद अपने एक्सपैंशन और प्रॉफिटेबिलिटी को कैसे संतुलित करती है और निवेशकों को लंबी अवधि में क्या रिटर्न देती है।

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🚀 Edgehax ने जुटाया ₹1.39 करोड़ का Seed फंडिंग,

Edgehax

भारत में Edge AI टेक्नोलॉजी तेजी से बढ़ रही है और इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप Edgehax ने Seed राउंड में ₹1.39 करोड़ (लगभग $165K) जुटाए हैं। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Inflection Point Ventures (IPV) ने किया है। कंपनी इन पैसों का इस्तेमाल मैन्युफैक्चरिंग को स्केल करने, नए प्रोडक्ट डेवलपमेंट में तेजी लाने और भारत समेत अमेरिका, यूरोप और सिंगापुर जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एक्सपैंशन के लिए करेगी।


🌟 Edgehax की शुरुआत और विज़न

Edgehax की स्थापना 2025 में प्रभु स्तवरमठ और सवित्री पाटिल ने मिलकर की थी। यह स्टार्टअप एक फुल-स्टैक Edge AI हार्डवेयर प्लेटफॉर्म पर काम करता है जो कंप्यूटिंग, कनेक्टिविटी और स्टोरेज को एक ही मॉड्यूल पर उपलब्ध कराता है।

👉 इसका विज़न है कि Edge AI को सिर्फ बड़े उद्योगों तक सीमित न रखकर स्टूडेंट्स, स्टार्टअप्स और कंज्यूमर एप्लायंसेज तक भी पहुंचाया जाए।


🛠️ Edgehax के प्रोडक्ट्स और यूज़ केसेस

Edgehax के हार्डवेयर और डेवलपर किट्स का इस्तेमाल कई एडवांस टेक्नोलॉजी डोमेन में किया जा रहा है, जैसे:

  • Industrial Gateways
  • Humanoid Robots
  • Autonomous Vehicles
  • Drones
  • Defence Systems
  • NavIC-based Tracking Solutions

📦 अब तक कंपनी 5,000 से ज्यादा Edge Gateway Boards शिप कर चुकी है और 2025 के दिसंबर तक 10,000 Compute Modules कंज्यूमर अप्लायंसेज के लिए लॉन्च करने की तैयारी कर रही है।


🤝 पार्टनरशिप और इकोसिस्टम में योगदान

Edgehax पहले ही 150 से ज्यादा स्टार्टअप्स, OEMs और बड़ी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप कर चुका है। इसके अलावा, कंपनी ने अपने डेवलपर किट्स के जरिए 30 यूनिवर्सिटीज और IITs में 1 लाख स्टूडेंट्स और फैकल्टी को Edge AI टेक्नोलॉजी का एक्सेस दिया है।

यह दिखाता है कि स्टार्टअप सिर्फ हार्डवेयर बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे Edge AI इकोसिस्टम को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहा है।


🌍 Edgehax बनाम ग्लोबल प्लेयर्स

Edgehax जिस डोमेन में काम कर रहा है, वहां पहले से ही बड़े ग्लोबल प्लेयर्स मौजूद हैं जैसे:

  • Raspberry Pi
  • Nvidia Jetson
  • Google Coral
  • Qualcomm AI Boards

लेकिन Edgehax का फोकस भारत में लोकल इनोवेशन और अफोर्डेबल Edge AI हार्डवेयर देने पर है। इसका उद्देश्य है कि देशी कंपनियां और डेवलपर्स ग्लोबल लेवल पर कंपटीशन कर सकें।


💡 Inflection Point Ventures (IPV) का विश्वास

Inflection Point Ventures, जिसने इस राउंड का नेतृत्व किया है, भारत के प्रमुख एंजेल इन्वेस्टमेंट नेटवर्क्स में से एक है। IPV का कहना है कि Edge AI आने वाले समय में AI एप्लिकेशंस को रियल-टाइम और ऑफलाइन लेवल पर सक्षम बनाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा।

इसलिए, Edgehax जैसी कंपनियों में शुरुआती निवेश भविष्य की टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।


📊 फंडिंग का इस्तेमाल कहाँ होगा?

जुटाए गए ₹1.39 करोड़ का इस्तेमाल इन प्रमुख क्षेत्रों में होगा:

  1. मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाना
  2. नए Edge AI प्रोडक्ट्स डेवलप करना
  3. भारत और विदेशों में मार्केट एक्सपैंशन
  4. डेवलपर और यूनिवर्सिटी प्रोग्राम्स को स्केल करना

📈 भारतीय Edge AI मार्केट में संभावनाएँ

भारत में AI और IoT मार्केट पहले से ही तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2025 तक भारत का AI मार्केट $7 बिलियन से ऊपर पहुंच सकता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा Edge AI टेक्नोलॉजी का होगा।

Edgehax इस मौके को भुनाने के लिए तैयार है और इसका लोकल मैन्युफैक्चरिंग और यूनिवर्सिटी-फ्रेंडली मॉडल इसे भारतीय मार्केट में मजबूत पोजिशन दिला सकता है।


🔮 भविष्य की राह

Edgehax की टीम अब कंज्यूमर एप्लायंसेज, स्मार्ट डिवाइसेस और इंडस्ट्रियल IoT को टारगेट कर रही है। आने वाले समय में अगर यह कंपनी अपने प्रोडक्ट्स को बड़े पैमाने पर डिप्लॉय कर पाती है, तो यह भारत की पहली ग्लोबल लेवल की Edge AI हार्डवेयर कंपनी बन सकती है।


निष्कर्ष
Edgehax की Seed फंडिंग सिर्फ एक स्टार्टअप की ग्रोथ की कहानी नहीं है, बल्कि यह भारत की टेक इंडिपेंडेंस और AI इनोवेशन की दिशा में एक मजबूत कदम है। Inflection Point Ventures जैसे निवेशकों का सपोर्ट इस बात का सबूत है कि भारतीय Edge AI हार्डवेयर कंपनियां अब ग्लोबल कंपटीशन के लिए तैयार हो रही हैं।

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💳 Payments Council of India ने किया Vishwas Patel को दोबारा चेयरपर्सन नियुक्त

Payments Council of India

Payments Council of India (PCI), जो भारत में डिजिटल पेमेंट्स इंडस्ट्री की प्रमुख प्रतिनिधि संस्था है, ने 2025–27 कार्यकाल के लिए Vishwas Patel, Joint Managing Director, Infibeam Avenues Limited (CCAvenue) को सर्वसम्मति से दोबारा चेयरपर्सन चुना है।

इसके साथ ही PCI की Executive Council ने M. N. Srinivasu, Co-founder & Director, BillDesk, और Nalin Bansal, Chief of Corporate Fintech Relationships & Key Initiatives, NPCI को Co-Chairpersons नियुक्त किया है।


🙌 PCI की घोषणा और नेतृत्व का महत्व

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत की डिजिटल पेमेंट्स इंडस्ट्री लगातार तेज़ी से बढ़ रही है। UPI (Unified Payments Interface), Wallets, Cards, और Payment Gateways जैसे विकल्पों की वजह से देशभर में डिजिटल ट्रांज़ैक्शन का ग्राफ ऊपर जा रहा है।

Vishwas Patel के नेतृत्व में PCI को उम्मीद है कि आने वाले दो वर्षों में डिजिटल पेमेंट्स इंडस्ट्री को और मज़बूती मिलेगी।


🗣️ Vishwas Patel का बयान

अपने पुनर्निर्वाचन पर Vishwas Patel ने कहा:

“भारत की डिजिटल पेमेंट्स इंडस्ट्री एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है, जहाँ तेज़ी से अपनाने, बदलते रेगुलेशंस और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में प्रयास जारी हैं। PCI का मकसद है – इनोवेशन को बढ़ावा देना, कंज्यूमर ट्रस्ट बनाए रखना और रेगुलेटर्स के साथ मिलकर एक सस्टेनेबल पेमेंट्स इकोसिस्टम तैयार करना।”


🏦 Payments Council of India की भूमिका

PCI की स्थापना इस उद्देश्य से हुई थी कि भारत की डिजिटल पेमेंट्स इंडस्ट्री को एक यूनिफाइड प्लेटफॉर्म मिले और कंपनियाँ अपनी चुनौतियाँ और सुझाव सरकार व रेगुलेटर्स तक पहुँचा सकें।

PCI किन-किन को रिप्रेज़ेंट करता है?

  • Banks और Card Networks
  • UPI और Wallet Companies
  • Payment Gateways
  • Fintech Startups

PCI ने पिछले कुछ वर्षों में:

  • पॉलिसी डायलॉग को आगे बढ़ाया
  • इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स तय किए
  • सिक्योरिटी और कंज्यूमर ट्रस्ट पर ज़ोर दिया
  • भारत की Digital-First Economy की दिशा में योगदान किया

🌐 भारत की डिजिटल पेमेंट्स इंडस्ट्री की स्थिति

भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट्स मार्केट बन चुका है।

  • UPI ट्रांज़ैक्शन हर महीने बिलियन्स में हो रहे हैं।
  • छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े मॉल तक, हर जगह QR Code Payment आम हो चुका है।
  • 2024 में ही डिजिटल ट्रांज़ैक्शंस का वॉल्यूम कई पारंपरिक बैंकिंग ट्रांज़ैक्शंस से अधिक हो गया।

इसीलिए PCI की भूमिका और भी अहम हो जाती है, ताकि यह इंडस्ट्री सही दिशा में बढ़े और सभी स्टेकहोल्डर्स (बैंक्स, स्टार्टअप्स, कंज्यूमर्स और सरकार) के बीच तालमेल बना रहे।


👥 नए नेतृत्व से क्या उम्मीदें?

Vishwas Patel (Infibeam Avenues – CCAvenue)

  • पेमेंट गेटवे इंडस्ट्री में लंबे अनुभव के चलते वे नवाचार और रेगुलेशन बैलेंस बनाने पर ध्यान देंगे।

M. N. Srinivasu (BillDesk)

  • BillDesk भारत के सबसे पुराने और भरोसेमंद पेमेंट प्लेटफॉर्म्स में से एक है। Srinivasu का अनुभव PCI को स्थायित्व और स्केलेबिलिटी में मदद करेगा।

Nalin Bansal (NPCI)

  • NPCI, UPI और Rupay जैसे बड़े प्रोडक्ट्स का निर्माता है। उनके अनुभव से PCI को टेक्नोलॉजी-ड्रिवन इनोवेशन और ग्लोबल स्केलिंग में मदद मिलेगी।

🔑 आने वाले दो वर्षों के लिए प्रमुख फोकस एरिया

  1. Consumer Trust & Security – फ्रॉड रोकने और साइबर सिक्योरिटी पर ज़ोर
  2. Global Expansion – UPI जैसे मॉडल को दूसरे देशों में ले जाना
  3. Financial Inclusion – ग्रामीण और सेमी-Urban क्षेत्रों में डिजिटल पेमेंट्स को और आसान बनाना
  4. Policy Alignment – RBI और सरकार के साथ मिलकर नई गाइडलाइंस तैयार करना
  5. Technology Upgradation – AI, Blockchain और अन्य नई तकनीकों को पेमेंट्स सेक्टर में लागू करना

📌 निष्कर्ष

Payments Council of India में Vishwas Patel का पुनर्नियुक्त होना और BillDesk व NPCI जैसे बड़े नामों का शामिल होना इस बात का संकेत है कि आने वाले दो सालों में भारत की डिजिटल पेमेंट्स इंडस्ट्री नए मुकाम पर पहुँचने वाली है।

भारत का लक्ष्य है कि वह सिर्फ कैशलेस इकॉनमी न बने, बल्कि ग्लोबल डिजिटल पेमेंट्स लीडर भी बने। PCI का नया नेतृत्व इस दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।

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💰 Neo ने जुटाए ₹162 करोड़, वैल्यूएशन 2.7X बढ़कर पहुँचा $686 मिलियन

Neo

मुंबई आधारित Wealth & Asset Management फर्म Neo जल्द ही ₹162 करोड़ (लगभग $19 मिलियन) जुटाने जा रही है। यह फंडिंग राउंड VT Capital की अगुवाई में हो रहा है जिसमें कुल 18 निवेशक हिस्सा ले रहे हैं। कंपनी ने इसके लिए विशेष प्रस्ताव पास किया है और 1,887 इक्विटी शेयर ₹8,60,410 प्रति शेयर की दर से जारी किए जाएंगे।

🏦 कौन कर रहे हैं निवेश?

  • VT Capital → ₹50 करोड़
  • Ramesh Kunhikannan → ₹20 करोड़
  • Sattva Family Office, Biological E Ltd, Usha Reddy Chigarapalli और Akshat Greentech Pvt Ltd → ₹10-10 करोड़
  • बाकी निवेशक भी छोटे हिस्सों में योगदान करेंगे।

VT Capital, जो मुंबई स्थित एक proprietary trading platform है, पहले भी Purplle, Noble और Fractal Analytics जैसी कंपनियों में निवेश कर चुकी है।

📈 Neo की बढ़ती वैल्यूएशन

Entrackr की रिपोर्ट के अनुसार, इस फंडिंग के बाद Neo की वैल्यूएशन लगभग $686 मिलियन तक पहुँच जाएगी। यह पिछले राउंड की तुलना में 2.7X जंप है।

  • पिछली बार वैल्यूएशन → $250 मिलियन
  • अब अनुमानित वैल्यूएशन → $686 मिलियन

⏪ पिछली फंडिंग हिस्ट्री

Neo ने इससे पहले भी कई बड़े राउंड्स में पूंजी जुटाई थी:

  • अगस्त 2024 → $48 मिलियन
  • अक्टूबर 2023 (Series B) → $35 मिलियन
  • अब तक कुल फंडिंग → $120 मिलियन+

💼 Neo का बिज़नेस मॉडल

Neo मुख्य रूप से Wealthy Individuals और Family Offices को निवेश की सुविधा देता है। इसके दो बड़े फोकस एरिया हैं:

  1. Credit & Real Estate Investments
  2. Alternative Asset Management Funds

कंपनी का दावा है कि वह:

  • लगभग ₹35,000 करोड़ Wealth Management Assets मैनेज कर रही है।
  • और ₹6,000 करोड़ से अधिक Alternative Assets को भी संभाल रही है।

Neo न सिर्फ निवेशकों को stable returns देता है, बल्कि कंपनियों को growth capital भी मुहैया कराता है।

📊 ओनरशिप स्ट्रक्चर

फंडिंग से पहले Neo की शेयरहोल्डिंग इस तरह थी:

  • Peak XV Partners → 19.29% (सबसे बड़ा external stakeholder)
  • Crystal Investment Advisors LLP (Artha Group) → 6.74%
  • Co-founders:
    • Nitin Jain → 30.09%
    • Varun Bajpai → 15.04%
    • Hemant Daga → 4.51%

📌 नए फंड्स और SEBI रजिस्ट्रेशन

Neo Assets ने इस साल अपना दूसरा प्राइवेट क्रेडिट फंड लॉन्च किया था, जिसका पहला क्लोज ₹2,000 करोड़ पर हुआ। यह फंड SEBI-registered है और unlisted कंपनियों को credit solutions और secondary stake acquisitions की सुविधा देता है।

📊 वित्तीय प्रदर्शन (FY24)

  • Neo की Revenue → ₹149 करोड़ (YoY 2.4X ग्रोथ)
  • Losses → ₹13.7 करोड़ (पिछले साल से ज़्यादा)
    FY25 का रिजल्ट अभी फाइल नहीं हुआ है।

🚀 क्यों है यह फंडिंग अहम?

  • Neo की वैल्यूएशन ग्रोथ WealthTech सेक्टर में एक बड़ा संकेत है कि High Networth Individuals और Family Offices में investment demand लगातार बढ़ रही है।
  • यह फंडिंग Neo को product expansion, AUM (assets under management) growth और investor base बढ़ाने में मदद करेगी।
  • आने वाले समय में Neo का फोकस private credit और real estate-backed investments को और मज़बूत करना होगा।

👉 निष्कर्ष:
Neo का ₹162 करोड़ का नया फंडिंग राउंड WealthTech इंडस्ट्री में एक बड़ा मूव है। VT Capital और अन्य निवेशकों का विश्वास यह दर्शाता है कि भारत में alternative investments और family wealth management का बाजार तेज़ी से बढ़ रहा है।

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📢 BharatPe ने लीडरशिप टीम को किया मजबूत

BharatPe

भारत की प्रमुख फिनटेक कंपनी BharatPe ने अपने लीडरशिप स्ट्रक्चर को और मज़बूत करने के लिए दो बड़े रणनीतिक नियुक्तियों की घोषणा की है। कंपनी ने राजेश सी को हेड ऑफ फाइनेंस और हिमांशु नज़कानी को हेड ऑफ इन्वेस्टमेंट्स के पद पर नियुक्त किया है। ये दोनों नियुक्तियाँ ऐसे समय पर हुई हैं जब BharatPe अपने अगले विकास चरण और संभावित pre-IPO फंडिंग राउंड की तैयारी कर रही है।


👨‍💼 राजेश सी बने BharatPe के हेड ऑफ फाइनेंस

राजेश सी को फाइनेंस डिवीजन की कमान सौंपी गई है। वह कंपनी के फाइनेंस, ट्रेज़री और टैक्सेशन ऑपरेशंस को लीड करेंगे।

  • राजेश के पास 20 साल से अधिक का अनुभव है जिसमें फाइनेंशियल प्लानिंग, अकाउंटिंग और रेगुलेटरी रिपोर्टिंग शामिल है।
  • उन्होंने SBI Card, ABN Amro-RBS और GE Capital जैसी कंपनियों में नेतृत्वकारी भूमिकाएँ निभाई हैं।
  • वे SBI Card के IPO मैनेजमेंट टीम का हिस्सा भी रह चुके हैं।

उनकी नियुक्ति से कंपनी को वित्तीय अनुशासन और IPO की तैयारी में मजबूती मिलेगी।


📊 हिमांशु नज़कानी को मिला इन्वेस्टमेंट्स का जिम्मा

BharatPe ने हिमांशु नज़कानी को हेड ऑफ इन्वेस्टमेंट्स नियुक्त किया है। उनकी मुख्य जिम्मेदारी कंपनी के इन्वेस्टमेंट और इंश्योरेंस स्ट्रेटेजी को आगे बढ़ाना होगा।

  • वह म्यूचुअल फंड्स, डिजिटल गोल्ड, फिक्स्ड डिपॉज़िट्स और इंश्योरेंस जैसे प्रोडक्ट्स के लिए पार्टनरशिप्स विकसित करेंगे।
  • हिमांशु का करियर फिनटेक, वेल्थटेक और वेंचर कैपिटल सेक्टर में रहा है।
  • उन्होंने CarDekho Group, NYE Money, Kristal.ai, Elevar Equity और Religare Global Asset Management जैसी कंपनियों में काम किया है।

इस नियुक्ति के साथ BharatPe अपने यूज़र्स को वेल्थ मैनेजमेंट और इंश्योरेंस सॉल्यूशंस ऑफर करने की दिशा में और मजबूती से कदम बढ़ाएगा।


💹 BharatPe का मुनाफे की ओर कदम

इन नियुक्तियों का ऐलान ऐसे समय हुआ है जब BharatPe ने दावा किया है कि कंपनी ने FY25 में प्रॉफिटेबिलिटी हासिल की है।

  • कंपनी ने बताया कि उसने कर-पूर्व मुनाफा (PBT) ₹6 करोड़ का दर्ज किया है (ESOP कॉस्ट्स को छोड़कर)।
  • इस दौरान कंपनी का राजस्व ₹1,800 करोड़ रहा।
  • यह कंपनी के लिए एक बड़ा टर्नअराउंड है क्योंकि पिछले कई सालों से BharatPe घाटे में चल रही थी।

🏦 BharatPe की फंडिंग यात्रा

BharatPe की गिनती भारत के यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स में होती है।

  • कंपनी ने आखिरी बार अगस्त 2021 में इक्विटी राउंड उठाया था और इसी दौरान यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हुई थी।
  • अब तक BharatPe ने $650 मिलियन से अधिक इक्विटी और डेब्ट जुटाया है।
  • इसके निवेशकों में Tiger Global, Dragoneer Investment Group, Steadfast Capital, Coatue Management और Ribbit Capital जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

कंपनी अब pre-IPO फंडिंग राउंड की तैयारी कर रही है, जिससे उसकी वैल्यूएशन और मजबूत हो सकती है।


👥 हाल ही की अन्य नियुक्तियाँ

BharatPe ने पिछले कुछ महीनों में कई बड़े नेतृत्व परिवर्तन किए हैं।

  • जून 2025 में कंपनी ने सिद्धार्थ जैन को चीफ नेटवर्क ऑफिसर (CNO) नियुक्त किया।
  • अप्रैल 2025 में, BharatPe की NBFC यूनिट Trillionloans Fintech Private Limited (TFPL) ने संदीप सिंह को नया CEO बनाया।

ये बदलाव कंपनी की संगठनात्मक मजबूती और स्केलेबिलिटी को दर्शाते हैं।


🚀 BharatPe की भविष्य रणनीति

BharatPe का लक्ष्य सिर्फ पेमेंट्स बिज़नेस तक सीमित नहीं है। कंपनी अब तेजी से डिजिटल लेंडिंग, वेल्थ मैनेजमेंट और इंश्योरेंस जैसी सेवाओं की ओर बढ़ रही है।

  • नए नियुक्त नेताओं का अनुभव कंपनी की इन महत्वाकांक्षी योजनाओं को मजबूत दिशा देगा।
  • IPO से पहले BharatPe खुद को वित्तीय रूप से मज़बूत और ऑपरेशनल रूप से दक्ष साबित करना चाहती है।

📌 निष्कर्ष

BharatPe की दो नई नियुक्तियाँ उसके दीर्घकालिक विकास और IPO की तैयारी के लिहाज़ से बेहद अहम मानी जा रही हैं।

  • राजेश सी का अनुभव कंपनी की वित्तीय स्थिरता और निवेशकों के भरोसे को मजबूत करेगा।
  • वहीं, हिमांशु नज़कानी BharatPe को एक समग्र फिनटेक प्लेटफॉर्म बनाने में अहम योगदान देंगे।

इससे साफ है कि BharatPe अब केवल एक पेमेंट्स कंपनी नहीं रहना चाहती, बल्कि आने वाले समय में यह भारत की अग्रणी फिनटेक और वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी बनने की ओर बढ़ रही है।

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🚀 Boundless Ventures, 200 करोड़ रुपये का नया AI फंड

Boundless Ventures

भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई गति देने के लिए पूर्व Kae Capital पार्टनर नताशा मालपानी ने अपना नया वेंचर कैपिटल फंड Boundless Ventures लॉन्च किया है। यह शुरुआती चरण (early-stage) पर केंद्रित 200 करोड़ रुपये का फंड है, जिसका मुख्य फोकस AI-native स्टार्टअप्स को सपोर्ट करना होगा।


💡 Boundless Ventures का फोकस

Boundless Ventures मुख्य रूप से pre-seed और seed stage के स्टार्टअप्स में निवेश करेगा। इसका लक्ष्य उन कंपनियों को फंडिंग देना है जो—

  • Consumer AI applications बना रही हैं
  • AI infrastructure और agent tooling पर काम कर रही हैं
  • Vertical use cases जैसे हेल्थकेयर, लॉजिस्टिक्स आदि में AI लागू कर रही हैं
  • Make-in-India AI hardware विकसित कर रही हैं

💰 पहले से हो चुके 6 निवेश

Boundless Ventures ने अभी तक 6 स्टार्टअप्स में निवेश किया है। इनमें शामिल हैं:

  • SuperHealth (हेल्थकेयर स्टार्टअप)
  • Armatrix (रोबोटिक्स)
  • Piersight (स्पेसटेक वेंचर)
  • Knot (क्विक फैशन डिलीवरी)
  • दो स्टेल्थ मोड कंपनियां, जो AI इंफ्रास्ट्रक्चर और कंज्यूमर AI पर काम कर रही हैं।

🗣️ नताशा मालपानी का विज़न

Boundless Ventures लॉन्च करने के मौके पर नताशा मालपानी ने कहा:

“जो फाउंडर्स तकनीकी गहराई (technical depth) और सांस्कृतिक समझ (cultural fluency) को मिलाकर काम करेंगे, वही आने वाले समय की शर्तें तय करेंगे। Boundless ऐसे फाउंडर्स को सपोर्ट करने के लिए है—तेज़, भरोसेमंद और प्रभावशाली तरीके से।”


🌐 सिर्फ कैपिटल नहीं, पूरा सपोर्ट

Boundless Ventures का मकसद सिर्फ निवेश करना नहीं है, बल्कि फाउंडर्स को—

  • स्टोरीटेलिंग
  • मार्केट एक्सेस
  • नेटवर्क बिल्डिंग
    में भी मदद करना है।

इस तरह यह फंड शुरुआती चरण में मौजूद स्टार्टअप्स को तेजी से आगे बढ़ने में मदद करेगा।


👩‍💼 नताशा मालपानी का अनुभव

नताशा मालपानी इससे पहले Kae Capital की पार्टनर रह चुकी हैं।

  • उन्होंने Boundless Media की स्थापना की थी।
  • साथ ही Dice Media को सफलतापूर्वक स्केल किया है।

उनका यह अनुभव उन्हें फाउंडर्स के साथ न सिर्फ निवेशक बल्कि ऑपरेशनल और क्रिएटिव पार्टनर के रूप में भी मजबूत बनाता है।


📈 भारत में AI स्टार्टअप्स का बढ़ता बाजार

भारत में AI सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। हेल्थकेयर से लेकर लॉजिस्टिक्स, फिनटेक और मैन्युफैक्चरिंग तक, हर जगह AI का उपयोग बढ़ रहा है। ऐसे माहौल में Boundless Ventures जैसे फंड का लॉन्च होना शुरुआती स्टार्टअप्स के लिए बड़ा अवसर है।


🏁 निष्कर्ष

Boundless Ventures की शुरुआत भारत के AI स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई दिशा देने के लिए की गई है। नताशा मालपानी का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI-native स्टार्टअप्स भारत की तकनीकी क्रांति के केंद्र में होंगे। इस फंड के जरिए न सिर्फ कैपिटल बल्कि स्ट्रैटेजिक और क्रिएटिव सपोर्ट भी उपलब्ध होगा, जो स्टार्टअप्स की ग्रोथ को और तेज करेगा।

👉 देखा जाए तो यह कदम भारत को AI innovation hub बनाने की दिशा में एक अहम मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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