🛒 Amazon ने भारत से पार किया $20 बिलियन एक्सपोर्ट का आंकड़ा — 2030 तक $80 बिलियन के लक्ष्य की ओर बढ़ाया कदम 🚀

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भारत के निर्यात क्षेत्र के लिए आज का दिन ऐतिहासिक रहा — Amazon ने घोषणा की है कि उसने अपने Global Selling Program के तहत भारत से $20 बिलियन (लगभग ₹1.67 लाख करोड़) के ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट्स पूरे कर लिए हैं। कंपनी ने यह लक्ष्य अपने तय समय से पहले ही हासिल कर लिया है और अब इसका अगला लक्ष्य है — 2030 तक $80 बिलियन का कुल निर्यात सक्षम करना।


🌏 Amazon Global Selling Program: भारत से दुनिया तक ‘Made in India’ की पहुंच

Amazon ने अपना Global Selling Program वर्ष 2015 में शुरू किया था। इस प्रोग्राम के तहत भारतीय MSMEs, मैन्युफैक्चरर्स और एक्सपोर्टर्स को मौका मिलता है कि वे अपने Made-in-India प्रोडक्ट्स को दुनिया के विभिन्न 18+ Amazon मार्केटप्लेस पर बेच सकें, जिनमें शामिल हैं —

🇺🇸 अमेरिका (US)
🇬🇧 यूनाइटेड किंगडम (UK)
🇦🇪 यूएई (UAE)
🇸🇦 सऊदी अरब (Saudi Arabia)
🇨🇦 कनाडा (Canada)
🇩🇪 जर्मनी (Germany)
…और कई अन्य प्रमुख ग्लोबल मार्केट्स।

पिछले एक साल में ही Amazon ने इस प्रोग्राम में 2 लाख से अधिक भारतीय एक्सपोर्टर्स को जोड़ा है, जो 33% की सालाना वृद्धि को दर्शाता है।

इन भारतीय विक्रेताओं ने अब तक दुनिया भर के ग्राहकों को 75 करोड़ से अधिक ‘Made in India’ प्रोडक्ट्स बेचे हैं — जो भारतीय MSME सेक्टर की वैश्विक सफलता की एक शानदार मिसाल है।


🏭 भारत के कौन से राज्य आगे हैं?

Amazon के मुताबिक, भारत के कई राज्यों ने इस निर्यात अभियान में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

📍 Delhi, Rajasthan, Gujarat, Uttar Pradesh, Tamil Nadu, Maharashtra, और Haryana — ये राज्य Amazon Global Selling प्रोग्राम में सबसे आगे रहे हैं।

इसके अलावा, छोटे शहरों और टियर-2 टियर-3 हब्स जैसे —
🏙️ Karur, Erode, Panipat, Junagadh, Anand, और Haridwar — ने भी 2024 में बेहतरीन प्रदर्शन किया है, जहां एक्सपोर्ट वैल्यू $22 मिलियन से $147 मिलियन तक दर्ज की गई।

इससे साफ है कि अब भारत के छोटे उद्योग और स्थानीय निर्माता भी ग्लोबल डिजिटल ट्रेड का हिस्सा बन रहे हैं।


📦 कौन से प्रोडक्ट्स की सबसे ज़्यादा मांग है?

Amazon ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में कुछ प्रोडक्ट कैटेगरीज़ ने शानदार Compound Annual Growth Rate (CAGR) दर्ज की है —

💊 Health & Personal Care: 45%
💅 Beauty Products: 45%
🧸 Toys: 44%
🏠 Home Products: 39%
👕 Apparel: 37%
🪑 Furniture: 36%

ये आंकड़े बताते हैं कि वैश्विक ग्राहक भारतीय क्वालिटी प्रोडक्ट्स को लेकर भरोसा जता रहे हैं और भारत की लाइफस्टाइल, वेलनेस और हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री तेजी से इंटरनेशनल स्तर पर लोकप्रिय हो रही है।


💬 Amazon India के हेड का बयान

Srinidhi Kalvapudi, जो Amazon Global Selling India के प्रमुख हैं, ने कहा —

“हमने भारत से $20 बिलियन एक्सपोर्ट का लक्ष्य समय से पहले हासिल कर लिया है। यह भारतीय MSMEs की मेहनत और Amazon की वैश्विक पहुंच का नतीजा है। अब हमारा फोकस तकनीक, क्षमता निर्माण और साझेदारियों के ज़रिए निर्यात को और आगे बढ़ाने पर रहेगा।”

उन्होंने आगे कहा कि Amazon भारत में छोटे और मध्यम कारोबारों को टेक्नोलॉजी, कंप्लायंस, लॉजिस्टिक्स, पेमेंट्स और क्रॉस-बॉर्डर ऑपरेशंस में आसानी दिलाने पर काम जारी रखेगा।


📘 Exports Digest 2025: भारत के ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट्स की झलक

Amazon ने यह भी घोषणा की है कि वह जल्द ही “Exports Digest 2025” जारी करेगा।
इस रिपोर्ट में भारत से ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट्स के डेटा, इनसाइट्स और ट्रेंड्स को विस्तार से साझा किया जाएगा, जिससे नीति निर्माताओं, स्टार्टअप्स और MSMEs को नई रणनीतियों की दिशा मिलेगी।


🌍 ‘Make in India’ का नया अध्याय — Amazon के साथ ग्लोबल सफर

Amazon का यह प्रोग्राम भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था और ‘Make in India’ मिशन को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहा है।
अब भारत के छोटे शहरों के हैंडलूम उत्पाद, ज्वेलरी, होम डेकोर, ऑर्गेनिक आइटम्स और फैशन प्रोडक्ट्स न सिर्फ भारत में बल्कि अमेरिका और यूरोप के ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं।

इसके ज़रिए —
🔹 भारत के कारीगरों और MSMEs को वैश्विक पहचान मिल रही है,
🔹 विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ रहा है,
🔹 और भारत की डिजिटल निर्यात क्षमता मजबूत हो रही है


🪙 2030 का लक्ष्य: $80 बिलियन का बड़ा सपना

अब जबकि Amazon ने $20 बिलियन का आंकड़ा हासिल कर लिया है, कंपनी का अगला मिशन और भी बड़ा है —
📈 2030 तक भारत से $80 बिलियन एक्सपोर्ट सक्षम करना।

इसके लिए Amazon का फोकस होगा —
💡 नई टेक्नोलॉजी में निवेश,
🚚 सप्लाई चेन को तेज़ और पारदर्शी बनाना,
🤝 सरकार और इंडस्ट्री बॉडीज़ के साथ साझेदारी,
और 🌐 भारतीय उत्पादों को ग्लोबल ब्रांड के रूप में प्रमोट करना।


🏁 निष्कर्ष: भारत से दुनिया तक — Amazon बना MSMEs का ग्लोबल साथी

Amazon Global Selling Program ने दिखा दिया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स भारत के छोटे व्यापारों को भी वैश्विक बाजार तक पहुंचा सकते हैं
$20 बिलियन एक्सपोर्ट्स सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि यह भारत के बढ़ते आत्मविश्वास और उद्यमशीलता की कहानी है।

अगर Amazon अपनी रफ्तार इसी तरह बनाए रखता है, तो 2030 तक $80 बिलियन एक्सपोर्ट का लक्ष्य केवल संभव ही नहीं, बल्कि निश्चित भी लगता है।

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Amazon Seller Services और Amazon Transport Services merger

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💡 भारतीय ई-कॉमर्स सेक्टर में Amazon का रणनीतिक कदम

ई-कॉमर्स दिग्गज Amazon अपने भारतीय बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। कंपनी ने Amazon Seller Services और Amazon Transport Services को मर्ज करने (विलय) का फैसला लिया है। इस फैसले से Amazon का संचालन पहले से अधिक प्रभावी और संगठित होने की उम्मीद है।

👉 Amazon इस विलय के तहत:
Amazon Seller Services “ट्रांसफरी” (Transferee) के रूप में कार्य करेगा
Amazon Transport Services “ट्रांसफरर” (Transferor) होगा
PwC (PricewaterhouseCoopers) को शेयर एक्सचेंज अनुपात निर्धारित करने के लिए नियुक्त किया गया है

🛍️ Amazon Seller Services: भारत में कंपनी का ई-कॉमर्स बाजार

Amazon Seller Services को 2013 में लॉन्च किया गया था, जब Amazon ने भारतीय ई-कॉमर्स बाजार में अपने विस्तार की योजना बनाई थी।

📌 Seller Services की मुख्य जिम्मेदारियां:
भारत में थर्ड-पार्टी सेलर्स को Amazon प्लेटफॉर्म पर अपने प्रोडक्ट्स लिस्ट और बेचने में सहायता करना
एक भरोसेमंद और मजबूत ऑनलाइन मार्केटप्लेस बनाना
लॉजिस्टिक्स और सेल्स सपोर्ट प्रदान करके व्यापार को आसान बनाना

🚚 Amazon Transport Services: डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स सिस्टम का केंद्र

Amazon Transport Services (ATS) की स्थापना 2015 में हुई थी। यह Amazon की लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी सर्विसेज का संचालन करता है।

📌 ATS की मुख्य जिम्मेदारियां:
Amazon ऑर्डर्स की तेज और सुचारू डिलीवरी सुनिश्चित करना
भारत में लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत बनाना
सप्लाई चेन को कुशल बनाकर ग्राहकों को बेहतर सेवा देना

अब तक, दोनों कंपनियां स्वतंत्र रूप से कार्य कर रही थीं। लेकिन इस मर्जर के बाद Amazon के भारतीय परिचालन को एकीकृत रूप से चलाने में मदद मिलेगी।


🔄 विलय का कारण और प्रभाव

💡 यह विलय क्यों हो रहा है?

📌 Amazon इस विलय के जरिए अपने भारतीय संचालन को अधिक प्रभावी बनाना चाहता है।

🔹 बेहतर तालमेल: Seller Services और Transport Services के एक साथ काम करने से संचालन सुचारू होगा।
🔹 ऑपरेशन लागत में कटौती: दो स्वतंत्र कंपनियों के बजाय एकीकृत प्रणाली बनाना अधिक किफायती होगा।
🔹 डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स में सुधार: ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाने के लिए सेवा में तेजी और पारदर्शिता लाई जाएगी।

📊 संभावित प्रभाव:

ऑर्डर डिलीवरी की स्पीड और गुणवत्ता में सुधार होगा
थर्ड-पार्टी सेलर्स को अधिक सुविधाजनक अनुभव मिलेगा
Amazon के ओवरऑल ऑपरेशंस में लागत की बचत होगी
ग्राहकों को अधिक तेज़ और बेहतर सेवा मिलने की संभावना है


📢 Amazon ने ‘Renewed’ प्लेटफॉर्म को बंद करने का फैसला किया

इस बीच, Amazon ने अपने ‘Renewed’ प्लेटफॉर्म को बंद करने का निर्णय लिया है।

👉 ‘Renewed’ प्लेटफॉर्म क्या था?
यह एक Refurbished (पुनर्निर्मित) प्रोडक्ट्स प्लेटफॉर्म था, जहां थर्ड-पार्टी सेलर्स पुरानी और रीफर्बिश्ड इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य प्रोडक्ट्स बेच सकते थे।

📌 Amazon का निर्णय:
‘Renewed’ प्लेटफॉर्म अब बाहरी सेलर्स (External Sellers) के लिए बंद कर दिया गया है
Amazon ने “बढ़ती चुनौतियों” का हवाला देते हुए इसे बंद किया
Entrackr ने सबसे पहले इस खबर को रिपोर्ट किया

🔹 क्या यह बदलाव Amazon के लॉन्ग-टर्म बिजनेस प्लान का हिस्सा हैं? यह देखने वाली बात होगी।


🤔 इस बदलाव से Amazon India को क्या फायदा होगा?

📌 Amazon की नई रणनीति:

Amazon का यह विलय कंपनी की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ और संचालन सुधारने के लिए किया जा रहा है।

📌 संभावित फायदे:
सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन अधिक संगठित और मजबूत होंगे
डिलीवरी टाइम और ग्राहक संतुष्टि में सुधार होगा
Amazon की ओवरऑल लागत में कमी आएगी और ऑपरेशन अधिक कुशल होगा

📢 Amazon ने अब तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी

Amazon को 11 मार्च को इस संबंध में प्रतिक्रिया देने के लिए संपर्क किया गया था, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है।

👉 क्या यह बदलाव भारतीय ई-कॉमर्स बाजार पर असर डालेगा? हमें आपके विचार कमेंट में बताएं! ⬇️

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Amazon इंडिया ने FY24 में 25,000 करोड़ का राजस्व हासिल किया, नुकसान में 28% की कमी

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Amazon इंडिया ने FY24 में अपने मार्केटप्लेस सेवाओं के माध्यम से 25,000 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है और इसके साथ ही इसका एडजस्टेड EBITDA 588.6 करोड़ रुपये रहा। हालांकि, फ्लिपकार्ट के मुकाबले इसकी टॉप-लाइन ग्रोथ (उपरी पंक्ति वृद्धि) अपेक्षाकृत धीमी रही, लेकिन राजस्व के मामले में इसने फ्लिपकार्ट को पीछे छोड़ दिया है।

ऑपरेशनल राजस्व में 14.5% की वृद्धि

Amazon India के ऑपरेशनल राजस्व में पिछले वर्ष के मुकाबले 14.5% की वृद्धि दर्ज की गई, जो FY23 में 22,198 करोड़ रुपये थी और FY24 में बढ़कर 25,406 करोड़ रुपये हो गई। इसका 82.4% राजस्व मार्केटप्लेस सेवाओं से आया, जबकि शेष राजस्व प्लेटफॉर्म सेवाओं, मार्केटिंग, और रॉयल्टी से प्राप्त हुआ। इसके अलावा, अमेज़न ने 186.8 करोड़ रुपये का गैर-ऑपरेशनल आय अर्जित किया, जिससे कुल राजस्व 25,592.8 करोड़ रुपये हो गया।

Amazon इंडिया की लागत और खर्च

Amazon इंडिया का मुख्य खर्च डिलीवरी चार्जेज रहा, जो कुल खर्च का 25.8% हिस्सा था। FY24 में यह खर्च 9.1% बढ़कर 7,487.9 करोड़ रुपये हो गया, जो FY23 में 6,863.1 करोड़ रुपये था। सेल्स प्रमोशन और कानूनी व पेशेवर शुल्क अन्य दो महत्वपूर्ण खर्च थे, जो कुल खर्च का लगभग 12% हिस्सा बनाते हैं। इन पर क्रमशः 3,586.1 करोड़ रुपये और 3,530.2 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

कंपनी ने कर्मचारियों के लाभों पर भी FY24 में 2,771.2 करोड़ रुपये खर्च किए, जिसमें से 682.7 करोड़ रुपये शेयर-आधारित भुगतान (ESOP) के थे। कुल मिलाकर, FY24 में अमेज़न इंडिया की कुल खर्च 6.5% बढ़कर 29,062.3 करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में यह 27,283.6 करोड़ रुपये थी।

अमेज़न के नुकसान में 28.5% की कमी

अमेज़न इंडिया ने FY24 में अपने नुकसान को 28.5% कम कर 3,469.5 करोड़ रुपये कर दिया, जो FY23 में 4,854.1 करोड़ रुपये था। इसके साथ ही, कंपनी का ऑपरेटिंग कैश फ्लो भी सकारात्मक हो गया, जो पिछले वित्तीय वर्ष में -1,542.1 करोड़ रुपये था, वहीं इस वित्तीय वर्ष में यह 724.1 करोड़ रुपये तक पहुँच गया।

फ्लिपकार्ट के मुकाबले टॉप-लाइन ग्रोथ में धीमापन

हालांकि अमेज़न इंडिया का राजस्व फ्लिपकार्ट से अधिक है, लेकिन टॉप-लाइन ग्रोथ में फ्लिपकार्ट ने इस वित्तीय वर्ष में बड़ी छलांग लगाई है। फ्लिपकार्ट का प्रमुख फोकस अपने मार्केटप्लेस और उपभोक्ता अनुभव को बेहतर बनाने पर रहा है, जिससे इसे अपने प्रतिस्पर्धी अमेज़न से अधिक विकास दर प्राप्त करने में मदद मिली।

अमेज़न इंडिया का भविष्य

हालांकि अमेज़न इंडिया के नुकसान में कमी आई है, लेकिन कंपनी को अभी भी भारतीय बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। फ्लिपकार्ट, जो कि Walmart के स्वामित्व में है, भी अपनी विस्तार योजनाओं में तेजी ला रहा है। भारतीय ई-कॉमर्स बाजार में अमेज़न की मुख्य प्राथमिकता अपनी सेवाओं का विस्तार और लागत को नियंत्रित रखना है, ताकि कंपनी मुनाफा कमा सके और बाजार में अपनी स्थिति को और मजबूत कर सके।

निष्कर्ष

अमेज़न इंडिया के लिए FY24 एक महत्वपूर्ण वर्ष रहा है, जिसमें कंपनी ने अपने खर्च को नियंत्रित करते हुए राजस्व में वृद्धि की है। हालांकि, उसे फ्लिपकार्ट जैसे प्रतिस्पर्धियों से चुनौती मिल रही है, लेकिन अपने ऑपरेशनल सुधारों और नए ग्राहक-अधिग्रहण रणनीतियों के जरिए कंपनी को उम्मीद है कि वह आने वाले वर्षों में अपने प्रदर्शन में और सुधार ला सकेगी।

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Amazon Transportation Services ने FY24 में मामूली राजस्व वृद्धि दर्ज की, नुकसान में 6% की कमी

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Amazon  की लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी शाखा Amazon Transportation Services (ATS) ने वित्तीय वर्ष 2024 में मामूली राजस्व वृद्धि हासिल की, साथ ही कंपनी ने इसी अवधि में अपने नुकसान में 6% से अधिक की कमी दर्ज की है।

ATS का ऑपरेशनल राजस्व FY24 में 7.6% बढ़कर ₹4,888.9 करोड़ हो गया, जो FY23 में ₹4,543.3 करोड़ था। कंपनी के वित्तीय दस्तावेज़ के अनुसार, ऑपरेशनल आय के अलावा अन्य आय में 66% की वृद्धि हुई और यह FY23 में ₹34.5 करोड़ से बढ़कर FY24 में ₹57.3 करोड़ हो गई। इस प्रकार FY24 में कंपनी की कुल आय ₹4,946.2 करोड़ तक पहुँच गई।

ATS का व्यवसाय और ऑपरेशनल ढांचा

Amazon  Transportation Services अपने ई-कॉमर्स ऑपरेशन के लिए लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी समाधान प्रदान करती है, जिसमें ऑर्डर पिकअप, सॉर्टिंग, और लास्ट-माइल डिलीवरी जैसी सेवाएँ शामिल हैं। कंपनी, Amazon India के लिए इन सेवाओं के माध्यम से राजस्व अर्जित करती है, जो कि देश भर में Amazon के संचालन का एक प्रमुख हिस्सा है।

बढ़ते खर्च और घटती क्षतिपूर्ति लागत

कंपनी का कुल खर्च FY24 में ₹4,690.8 करोड़ तक पहुँच गया, जो कि FY23 में ₹4,310.2 करोड़ था, यानी 8.8% की वृद्धि। वहीं, क्षतिपूर्ति खर्चों में 10.2% की गिरावट दर्ज की गई, जो FY24 में ₹313.7 करोड़ रहा, जबकि FY23 में यह ₹349.4 करोड़ था। इस प्रकार, खर्चों में वृद्धि के बावजूद ATS ने अपने परिचालन में सुधार के संकेत दिए हैं।

नुकसान में कमी और वित्तीय प्रदर्शन में सुधार

हालांकि, राजस्व में मामूली वृद्धि के बावजूद ATS ने FY24 में अपने नुकसान को 6.3% तक घटाकर ₹80.3 करोड़ कर दिया, जो FY23 में ₹85.7 करोड़ था। कंपनी के मौजूदा नुकसान FY24 के अंत तक ₹469.8 करोड़ तक पहुँच गए, जो वित्तीय वर्ष के दौरान खर्चों को नियंत्रित करने के प्रयासों को दर्शाते हैं। इसके अलावा, अन्य इक्विटी घटक जैसे कि शेयर-आधारित मुआवजा रिज़र्व, पिछले वित्तीय वर्ष में 26% बढ़कर ₹490.4 करोड़ हो गया।

Amazon Transportation Services के भविष्य की योजनाएँ

ATS अपने संचालन को और अधिक कुशल बनाने के लिए तकनीकी निवेश और ऑपरेशनल सुधारों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। कंपनी का लक्ष्य है कि वह Amazon के लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी सेवाओं को और बेहतर बनाए, ताकि ग्राहकों को तेज़ और विश्वसनीय सेवाएँ मिल सकें।

ATS द्वारा की गई यह वृद्धि Amazon के भारत में लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के विस्तार का भी प्रमाण है। कंपनी ने इस दौरान अपने लॉजिस्टिक्स सिस्टम को मजबूत किया है, जो Amazon के भारतीय बाजार में बढ़ती मांग को पूरा करने में सहायक होगा।

निष्कर्ष

Amazon Transportation Services ने FY24 में एक स्थिर वित्तीय प्रदर्शन दर्शाया है। कंपनी ने अपने नुकसान को नियंत्रित करने में सफलता हासिल की है और भविष्य के लिए लॉजिस्टिक्स को और अधिक कुशल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि कंपनी ने राजस्व में अपेक्षाकृत कम वृद्धि दर्ज की, लेकिन इसके प्रॉफिट मार्जिन और खर्चों में की गई कटौती ने इसके वित्तीय प्रदर्शन को संतुलित बनाए रखा।

Amazon Transportation Services का यह प्रदर्शन दर्शाता है कि Amazon अपनी भारतीय ई-कॉमर्स बाजार की बढ़ती माँगों को पूरा करने के लिए लॉजिस्टिक्स सेवाओं में अधिक निवेश और सुधार कर रहा है। इसके माध्यम से Amazon अपने ग्राहकों को एक बेहतर और तेज़ सेवा प्रदान करने के लक्ष्य को हासिल करने के प्रयास में है।

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Amazon to Enter India’s Quick Commerce Market in 2025

Amazon plans to enter India’s quick commerce market in early 2025, challenging leaders BlinkIt, Zepto, and Swiggy Instamart. Nishant Sardana will lead this new vertical. The move follows Amazon’s competitor Flipkart’s entry into the sector and Tata’s BigBasket pivoting to quick deliveries.