Dhan FY25 में Revenue 2.3X, Profit ₹400 करोड़ के पार

Dhan

भारत का stockbroking और online investment space बीते कुछ वर्षों में तेज़ी से आगे बढ़ा है। Zerodha, Groww, Upstox और Angel One जैसे प्लेटफॉर्म पहले ही sustained profitability दिखा चुके हैं। अब इसी लीग में शामिल हो गया है stockbroking और investment platform Dhan, जिसने FY25 में शानदार financial performance दर्ज की है।

FY25 में Dhan का revenue from operations 2.3 गुना से ज्यादा बढ़ा, वहीं कंपनी का profit 2.6X उछलकर ₹400 करोड़ के पार पहुंच गया। यह प्रदर्शन दिखाता है कि active traders और young investors पर फोकस करने वाली रणनीति Dhan के लिए काम कर रही है।


💰 Revenue Growth: ₹371 करोड़ से ₹877 करोड़ तक का सफर

Registrar of Companies (RoC) में दाखिल standalone financial statements के अनुसार,

  • FY24 में Dhan का revenue from operations ₹371 करोड़ था
  • FY25 में यह बढ़कर ₹877 करोड़ हो गया

यानी साल-दर-साल आधार पर 136% से ज्यादा की growth

यह growth ऐसे समय में आई है जब भारतीय stock markets में retail participation रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका था और derivatives (F&O) segment में activity काफी तेज़ थी।


🧠 Dhan क्या करता है?

2021 में Pravin Jadhav द्वारा स्थापित Dhan, एक stockbroking और investment platform है जो खासतौर पर:

  • Active traders
  • Young और tech-savvy investors

को target करता है।

प्लेटफॉर्म पर users को:

  • Equity
  • ETFs
  • Futures & Options
  • Commodities (MCX)

में ट्रेडिंग की सुविधा मिलती है।
इसके अलावा Dhan ने smallcase और TradingView जैसे tools के साथ integration भी किया है, जो advanced traders के लिए platform को और मजबूत बनाता है।


🧾 Brokerage बना कमाई का सबसे बड़ा जरिया

FY25 में Dhan की कमाई का बड़ा हिस्सा brokerage fees और commissions से आया।

  • Equity, derivatives और commodities trading से मिलने वाली brokerage income
  • कुल operating revenue का 88% हिस्सा

FY25 में brokerage और commission से होने वाली income 2.35X बढ़कर ₹769 करोड़ पहुंच गई।

इसके अलावा:

  • ₹108 करोड़ की income अन्य operating activities से आई
    हालांकि कंपनी ने इन activities का detailed breakup अपने filings में disclose नहीं किया।

➕ Non-operating Income भी बढ़ा

FY25 में Dhan ने:

  • Fixed deposits
  • Inter-corporate deposits
  • Current investments

से करीब ₹10 करोड़ की non-operating income भी कमाई।

इस तरह FY25 में कंपनी की total income ₹887 करोड़ रही।


👥 Active Clients: Growth तो है, लेकिन Top Players से दूरी

User base की बात करें तो:

  • December 2025 तक Dhan के 9.8 लाख active clients थे
  • Market share करीब 2.2% रहा

FY24 में कंपनी का active client base 4.69 लाख था, यानी एक साल में users की संख्या दोगुने से ज्यादा हो गई।

हालांकि, Dhan अभी भी market leaders से काफी पीछे है:

  • Groww: 1.21 करोड़ active users
  • Zerodha: 68.5 लाख active users

💸 Expenses: Growth के साथ खर्च भी बढ़ा

FY25 में Dhan के खर्चों में भी तेज़ बढ़ोतरी देखने को मिली।

🔹 सबसे बड़े cost heads:

  • Selling agents को commission: ₹82.6 करोड़
    • FY24 के मुकाबले लगभग दोगुना
    • Total expenses का करीब 24%
  • Advertising & Marketing: ₹73.6 करोड़
    • FY24 के मुकाबले 2.7X ज्यादा
  • Employee benefit expenses: ₹73 करोड़
    • साल-दर-साल 66% की बढ़ोतरी

इसके अलावा:

  • Software और technology charges: ₹39.7 करोड़ (85% से ज्यादा बढ़ोतरी)
  • Royalty, demat charges, legal & professional fees और अन्य overheads

इन सबके चलते:

  • FY25 में total expenses ₹341 करोड़ रहे
  • जबकि FY24 में यह ₹175 करोड़ थे

🚀 Profit और Margins: Dhan की असली ताकत

Strong revenue growth की वजह से:

  • FY25 में Dhan का profit ₹408 करोड़ पहुंच गया
  • FY24 में profit सिर्फ ₹159 करोड़ था

यानी 2.6X jump

Financial ratios भी मजबूत हुए:

  • ROCE: 91.9%
  • EBITDA margin: 63.25%

Unit economics की बात करें तो:

  • Dhan ने ₹1 कमाने के लिए ₹0.39 खर्च किया

Comparison के लिए:

  • Zerodha: ₹0.37
  • Groww: ₹0.41

यह दिखाता है कि Dhan efficiency के मामले में industry leaders के काफी करीब है।


🏦 Strong Balance Sheet

March 2025 तक:

  • Cash & bank balance: ₹1,498 करोड़
  • Current assets: ₹1,911 करोड़

यह मजबूत balance sheet आने वाले समय में expansion और competition से निपटने में मदद करेगी।


🦄 Unicorn Status और Big Exits

Dhan हाल ही में unicorn बन गई, जब:

  • October में कंपनी ने $120 मिलियन Series B funding जुटाई
  • Valuation पहुंची $1.2 बिलियन

इस round को Hornbill Capital ने lead किया।

इस funding से:

  • Cred के Kunal Shah
  • Miten Sampat
  • PhonePe founding network के members

जैसे early investors को लगभग 45X returns मिले, वो भी चार साल से कम समय में।


🔍 आगे की तस्वीर: Growth धीमी, लेकिन Story मजबूत

FY25 के ये शानदार नंबर largely 2024–25 के booming markets को दर्शाते हैं।
लेकिन FY26 में तस्वीर थोड़ी बदली है, खासकर:

  • Budget के बाद F&O segment में STT rates बढ़ने
  • Active users की growth slowing या negative होने

की वजह से।

हालांकि:

  • Long-term में stockbroking firms की story अभी भी मजबूत है
  • Growth भले moderate हो, लेकिन platforms की relevance बनी रहेगी
  • Competition margins पर दबाव बनाए रखेगा

अब देखना दिलचस्प होगा कि Dhan और इसके competitors अपने platforms को एक-दूसरे से कैसे differentiate करते हैं।


📌 हमारी राय

Dhan का FY25 performance दिखाता है कि कंपनी ने:

  • Right market timing
  • Strong product focus
  • Efficient execution

का फायदा उठाया है।
Investors के लिए अच्छी बात यह है कि आज उनके पास बेहतर, competitive और tech-driven platforms का विकल्प मौजूद है।

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📊 MobiKwik Q3 FY26 Results 7% Revenue Growth

MobiKwik

Digital payments और fintech सेक्टर की जानी-मानी कंपनी MobiKwik ने चालू वित्त वर्ष FY26 की तीसरी तिमाही (Q3) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी के लिए यह तिमाही खास रही क्योंकि जहां एक तरफ revenue में साल-दर-साल (YoY) 7% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, वहीं दूसरी तरफ MobiKwik ने profitability में वापसी भी कर ली है।

National Stock Exchange (NSE) से एक्सेस किए गए unaudited financial statements के मुताबिक, MobiKwik का प्रदर्शन खर्चों पर नियंत्रण और steady growth की वजह से बेहतर हुआ है।


💰 Revenue Performance: Q3 में ₹289 करोड़ की कमाई

Q3 FY26 में MobiKwik की revenue from operations ₹289 करोड़ रही, जो कि Q3 FY25 के ₹270 करोड़ के मुकाबले 7% ज्यादा है।
यह growth ऐसे समय में आई है जब fintech सेक्टर में margins पर दबाव बना हुआ है और competition लगातार बढ़ रहा है।

हालांकि, अगर पूरे नौ महीने (April–December) की बात करें, तो तस्वीर थोड़ी अलग नजर आती है।
FY26 के पहले नौ महीनों में कंपनी की revenue 8% घटकर ₹830.5 करोड़ रह गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹902 करोड़ थी।


🧾 Revenue Sources: कमाई कहां से आई?

Q3 FY26 में MobiKwik की कमाई मुख्य रूप से इन sources से हुई:

  • Mobile और DTH recharges पर commissions
  • Payment processing fees
  • Loans servicing से interest income
  • Payment gateway services
  • Platform fees

Payments और lending दोनों segments से आने वाली diversified income ने कंपनी को quarterly level पर stable growth हासिल करने में मदद की।


💸 Expenses Breakdown: सबसे बड़ा खर्च Payment Gateway

खर्चों की बात करें तो payment gateway costs MobiKwik के लिए सबसे बड़ा expense बना रहा।

  • Q3 FY26 में total cost: ₹129 करोड़
  • इसमें से 44% हिस्सा payment gateway costs का था

इसके अलावा:

  • Employee benefit expenses: ₹41 करोड़
  • Lending fees / commission: घटकर सिर्फ ₹1 करोड़ रह गई

यह दिखाता है कि कंपनी ने lending से जुड़े खर्चों पर काफी हद तक नियंत्रण किया है।


🔻 Burn में कमी: खर्च घटाकर ₹293 करोड़

MobiKwik ने इस तिमाही में अपने कुल खर्च (burn) को भी कम करने में सफलता हासिल की।

  • Q3 FY26 total burn: ₹293 करोड़
  • Q3 FY25 total burn: ₹328 करोड़

यानी साल-दर-साल आधार पर 11% की गिरावट

इस burn में शामिल हैं:

  • Financial guarantee expenses
  • Legal costs
  • Advertising और marketing खर्च
  • Finance और अन्य overheads

Controlled marketing spend और operational efficiency इस improvement की बड़ी वजह मानी जा रही है।


✅ Profitability की वापसी: ₹4 करोड़ का मुनाफा

खर्चों पर काबू और revenue में steady growth की वजह से MobiKwik ने Q3 FY26 में ₹4 करोड़ का net profit दर्ज किया।

यह पिछले साल की तुलना में बड़ा turnaround है, क्योंकि:

  • Q3 FY25 में कंपनी को ₹53 करोड़ का नुकसान हुआ था

लगातार losses के बाद profitability में वापसी MobiKwik के लिए एक positive signal माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब investors cash burn और path-to-profitability पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं।


📉 Nine-Month Trend: अभी चुनौतियां बाकी

हालांकि quarterly level पर performance मजबूत दिख रहा है, लेकिन nine-month revenue decline यह बताता है कि:

  • Payments business में margins पर दबाव बना हुआ है
  • Competition और regulatory changes का असर अभी खत्म नहीं हुआ है

आने वाली तिमाहियों में यह देखना अहम होगा कि क्या MobiKwik इस profitability को sustain कर पाती है या नहीं।


📈 Stock Market Performance

Stock market में MobiKwik का शेयर फिलहाल:

  • ₹230 प्रति शेयर (12:35 PM तक) पर ट्रेड कर रहा है
  • Total market capitalization: ₹1,811 करोड़
  • जो लगभग $200 मिलियन के बराबर है

हाल के financial results के बाद निवेशकों की नजर अब इस बात पर होगी कि कंपनी आने वाली तिमाहियों में growth और profit दोनों को कैसे balance करती है।


🔍 हमारी राय (Our Take)

MobiKwik का Q3 FY26 performance यह दिखाता है कि:

  • खर्चों पर सख्त नियंत्रण
  • focused growth strategy

कंपनी को profitability की राह पर वापस ला सकती है। हालांकि, nine-month revenue decline यह भी साफ करता है कि business अभी पूरी तरह safe zone में नहीं पहुंचा है।

अगर MobiKwik:

  • payment और lending दोनों segments में monetisation मजबूत करती है
  • और operational efficiency बनाए रखती है

तो आने वाले समय में यह fintech space में एक stable और sustainable player बन सकती है।

Read more :🤖🛑London की AI स्टार्टअप Refute ने जुटाए £5 मिलियन

🤖🛑London की AI स्टार्टअप Refute ने जुटाए £5 मिलियन

Refute

आज के डिजिटल दौर में disinformation यानी झूठी और भ्रामक जानकारी सिर्फ सोशल मीडिया की समस्या नहीं रह गई है। अब यह एक संगठित हथियार बन चुकी है, जिसका इस्तेमाल bot networks, paid influencers और advanced AI tools के जरिए सरकारों, कंपनियों और चुनावी प्रक्रियाओं को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है।

इसी बढ़ते खतरे से निपटने के लिए London-based startup Refute मैदान में उतरी है। यह स्टार्टअप advanced AI का इस्तेमाल करके disinformation campaigns को शुरुआती स्टेज में ही पहचानने और उन्हें रोकने के लिए practical solutions देने का दावा करती है।


🇷🇴 Romania चुनाव से मिला बड़ा सबूत

Refute की तकनीक हाल ही में Romania के चुनाव के दौरान चर्चा में आई, जहां कंपनी ने 32,500 से ज्यादा suspicious TikTok videos की पहचान की।
ये वीडियो खासतौर पर Romania के बाहर रहने वाले नागरिकों (expatriates) को target कर रहे थे और उनमें far-right political messages फैलाए जा रहे थे।

इस केस ने साफ दिखाया कि कैसे social platforms का इस्तेमाल कर बड़े स्तर पर narrative को manipulate किया जा सकता है और क्यों ऐसी तकनीक की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।


💰 £5 मिलियन Seed Funding, बड़े नामों का भरोसा

Refute ने हाल ही में £5 मिलियन की seed funding जुटाई है। इस राउंड को Amadeus Capital Partners ने लीड किया, जिसने इससे पहले pre-seed round में भी निवेश किया था।

अन्य निवेशकों में शामिल हैं:

  • Playfair
  • Episode 1
  • Osney Capital
  • UK का National Security Strategic Investment Fund (NSSIF)

खास बात यह है कि NSSIF ने Refute में निवेश इसके defence technology expertise को देखते हुए किया, जो इस स्टार्टअप की credibility को और मजबूत करता है।


🧠 Founders की मजबूत Background

Refute की स्थापना 2024 में Tom Garnett और Vlad Galuh ने की थी। दोनों के पास मिलकर 40 साल से ज्यादा का अनुभव है, खासतौर पर:

  • money laundering
  • online fraud
  • financial crime prevention

Tom Garnett बताते हैं:

“हमने अपना पूरा करियर ऑनलाइन क्राइम से लड़ते हुए बिताया है। लेकिन हाल के वर्षों में हमने देखा कि disinformation अब कंपनियों और सरकारों के लिए अगला बड़ा खतरा बन चुका है।”

यही समझ Refute के जन्म की वजह बनी।


⚡ Adversaries से तेज़ प्रतिक्रिया

Refute की AI-powered platform अलग-अलग public data streams को एक साथ analyze करती है और:

  • false narratives के फैलने को track करती है
  • early warning signals को flag करती है
  • tailored countermeasures सुझाती है

आज Refute के clients में सरकारी संस्थान और private कंपनियां दोनों शामिल हैं।
एक मामले में Refute ने पाया कि monitor की जा रही mining कंपनियों में से 40% fake smear campaigns का शिकार बन रही थीं।

Tom Garnett के मुताबिक:

“हमारा platform organisations को यह समझने में मदद करता है कि वास्तव में हो क्या रहा है और वे जल्दी, practical action ले सकें।”


🆚 Competitors से अलग क्यों है Refute?

Market में पहले से Graphika और NewsGuard जैसी कंपनियां मौजूद हैं, जो disinformation stories को map करती हैं।
लेकिन Refute का दावा है कि:

  • वह सिर्फ detection तक सीमित नहीं है
  • automatic और actionable response features भी देती है

Garnett कहते हैं:

“हमारी सबसे बड़ी ताकत speed और proactive response है। हम online दुनिया के अलग-अलग signals को एक clear, actionable view में बदल देते हैं, जिससे decision-makers guesswork नहीं, बल्कि confidence के साथ फैसला ले सकें।”

Refute पहले ही high-stakes environments में असर दिखा चुकी है, चाहे वह national elections हों या mining जैसे sectors, जहां reputation सबसे अहम होती है।


🌍 Diversity को लेकर Refute का नजरिया

Refute diversity को सिर्फ buzzword नहीं मानती, बल्कि business strength के तौर पर देखती है।
कंपनी ने शुरुआत से ही remote-first model अपनाया है और पूरे Europe में फैली टीम बनाई है।

Tom Garnett बताते हैं:

“आज hybrid threats पूरे Europe में फैल रहे हैं। इसलिए हमने UK तक सीमित रहने के बजाय अलग-अलग देशों, cultures और languages के लोगों को टीम में शामिल किया।”

इसका असर founders में भी दिखता है:

  • Vlad Galuh मूल रूप से Romania से हैं
  • Tom Garnett UK से

यह cultural और linguistic diversity Refute को ज्यादा complex और sophisticated disinformation campaigns से निपटने में मदद करती है।


🚀 आगे की योजना क्या है?

Refute इस नई funding का इस्तेमाल:

  • और ज्यादा engineers hire करने
  • detection algorithms को बेहतर बनाने
  • response kits को expand करने
  • और ज्यादा European markets में entry

के लिए करेगी।

Tom Garnett अंत में कहते हैं:

“हमारा लक्ष्य आने वाले वर्षों में तेजी से scale करना है। Disinformation की tactics लगातार बदल रही हैं, इसलिए detection के साथ-साथ fast और effective response हमारी सबसे बड़ी priority रहेगी।”


🔍 हमारी राय (Our Thoughts)

Disinformation आज सिर्फ political issue नहीं, बल्कि business risk और national security threat बन चुका है। Refute जिस तरह AI, speed और practical response को combine कर रही है, वह इसे इस तेजी से बढ़ते market में एक मजबूत खिलाड़ी बना सकता है।

अगर execution सही रहा, तो Refute आने वाले समय में Europe की leading disinformation defence platforms में शामिल हो सकती है।

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👴👵UK की स्टार्टअप Lateral ने जुटाए £2.5 मिलियन

Lateral

ब्रिटेन इस समय एक बड़े demographic shift यानी जनसंख्या बदलाव के दौर से गुजर रहा है। फिलहाल UK Lateral में 60 साल से ज्यादा उम्र के करीब 1.45 करोड़ लोग हैं और अनुमान है कि 2040 तक यह संख्या 1.7 करोड़ तक पहुंच जाएगी। उम्र बढ़ने के साथ हेल्थकेयर की जरूरतें भी तेजी से बदल रही हैं, लेकिन मौजूदा सिस्टम इन जरूरतों के मुताबिक खुद को ढाल नहीं पाया है।

आज की हकीकत यह है कि बड़ी उम्र के लाखों लोग NHS (National Health Service) के अलावा निजी हेल्थकेयर पर अपनी जेब से पैसा खर्च कर रहे हैं। इसी वजह से UK में करीब £1.6 बिलियन का self-pay healthcare market बन चुका है, लेकिन इसमें लोगों को सही guidance, transparency और structured solutions नहीं मिलते।

इसी gap को भरने के लिए मैदान में उतरी है London-based startup Lateral, जो 60+ उम्र के लोगों के लिए खास तौर पर health और wealth solutions बना रही है।


💰 Seed Funding: Lateral ने जुटाए £2.5 मिलियन

Lateral ने हाल ही में £2.5 मिलियन की seed funding जुटाई है। इस फंडिंग राउंड को Augmentum ने लीड किया, जबकि Triple Point और TinyVC ने भी इसमें भागीदारी की।

इस निवेश का इस्तेमाल कंपनी अपने पहले प्रोडक्ट “Lateral Health Plan” को लॉन्च और scale करने में करेगी। यह प्लान खास तौर पर उन लोगों के लिए है जो 60 की उम्र पार कर चुके हैं और अपनी हेल्थ को लेकर ज्यादा control, clarity और flexibility चाहते हैं।

Lateral ऐसे समय में बाजार में उतर रही है जब 60+ population न सिर्फ तेजी से बढ़ रही है, बल्कि यह वर्ग financially independent, aware और proactive भी है।


🧠 Insurance और Innovation का मजबूत कॉम्बिनेशन

Lateral की founding team इस स्टार्टअप की सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है।

👩‍💼 Laura Ashforth (Co-founder & CEO)

Laura Ashforth इससे पहले Zego में Managing Director रह चुकी हैं, जो UK का पहला insurtech unicorn है। वहां उन्होंने behaviour-based insurance products को लीड किया।
इसके अलावा Laura ने:

  • Atomico में high-growth tech startups में निवेश किया
  • Morgan Stanley में काम किया
  • Improbable में strategy और financial planning की जिम्मेदारी संभाली

👨‍💼 Steven Mendel (Co-founder & Executive Chair)

Steven Mendel, ManyPets के Co-founder और पूर्व CEO हैं। ManyPets की valuation 2021 में $2 बिलियन से ज्यादा पहुंच चुकी है।
Steven का अनुभव:

  • Close Brothers Wealth Management
  • Barclays Wealth
  • Christie’s
  • McKinsey & Company

Insurance, technology, wealth management और leadership का यह combination 60+ market के लिए बेहद rare है।


❓ आखिर 60+ मार्केट को नए सोच की जरूरत क्यों?

Lateral के founders का मानना है कि आज के 60+ लोग:

  • पहले से ज्यादा healthy और active हैं
  • financial independence को महत्व देते हैं
  • proactive healthcare चाहते हैं

लेकिन इसके बावजूद उन्हें:

  • complicated healthcare systems
  • unclear pricing
  • limited guidance

का सामना करना पड़ता है।

अक्सर लोगों को या तो पूरी तरह NHS पर निर्भर रहना पड़ता है या फिर expensive private healthcare में खुद रास्ता ढूंढना पड़ता है। Lateral इसी confusion को खत्म करना चाहती है।


🏥 Lateral Health Plan: NHS के साथ, NHS के खिलाफ नहीं

Lateral का पहला प्रोडक्ट Lateral Health Plan खास तौर पर 60s और 70s के लोगों के लिए डिजाइन किया गया है।

इस प्लान की खास बातें:

  • NHS को छोड़े बिना private healthcare का फायदा
  • care navigation + preventive wellbeing benefits
  • simple और transparent pricing

👩‍⚕️ Nurse-led Navigation Service

इस प्लान की सबसे बड़ी USP है इसकी nurse-led navigation service। इसमें trained case-management nurses शामिल हैं जो:

  • diagnosis समझने में मदद करते हैं
  • treatment options compare कराते हैं
  • NHS और private care को smart तरीके से combine करते हैं

यह सिस्टम existing care को replace नहीं करता, बल्कि उसे “wrap around” करता है।


💷 Pricing भी है Simple और Transparent

Traditional private medical insurance में जहां:

  • premiums हर साल unpredictable होते हैं
  • costs समझना मुश्किल होता है

वहीं Lateral:

  • year-on-year transparent pricing
  • NHS के साथ complement होने की वजह से lower premiums

एक 67 साल के व्यक्ति के लिए premium करीब £150 प्रति माह से शुरू होता है, जो private insurance के मुकाबले काफी किफायती माना जा रहा है।


🔍 हमारी राय (Our Thoughts)

Lateral ऐसे market में कदम रख रही है जिसे अब तक काफी हद तक ignore किया गया है, जबकि spending power और population size दोनों ही बड़े हैं।
Strong founders, clear problem-solution fit और NHS के साथ practical integration इसे एक long-term opportunity बनाते हैं।

अगर execution सही रहा, तो Lateral future में later-life health planning का बड़ा नाम बन सकती है।


🗣️ Founders क्या कहते हैं?

Laura Ashforth, Co-founder & CEO, Lateral ने कहा:

“हमारा mission 60+ लोगों को लंबे समय तक अच्छी जिंदगी जीने के लिए empower करना है। हेल्थ सिस्टम उम्र के साथ और ज्यादा complicated हो जाता है। Lateral members को उनके options समझने, सही फैसले लेने और preventive healthcare अपनाने में मदद करता है।”

वहीं Steven Mendel, Co-founder & Executive Chair ने कहा:

“लोग ज्यादा समय तक और ज्यादा active जिंदगी जी रहे हैं, लेकिन systems पुराने हैं। 60s और 70s के लोग आज पहले से ज्यादा fit और energetic हैं। उनके लिए retirement का मतलब कम नहीं, बल्कि ज्यादा करना है।”

Read more :🧳✨ Mokobara की तेज़ ग्रोथ FY25 में ₹230 करोड़ रेवेन्यू,

🧳✨ Mokobara की तेज़ ग्रोथ FY25 में ₹230 करोड़ रेवेन्यू,

Mokobara

भारत के D2C (डायरेक्ट-टू-कंज़्यूमर) ब्रांड इकोसिस्टम में बीते कुछ वर्षों में लगेज और ट्रैवल एक्सेसरीज़ सेगमेंट ने जबरदस्त वापसी की है 🚀। इसी कैटेगरी में Peak XV Partners समर्थित Mokobara ने खुद को एक प्रीमियम, डिज़ाइन-फोकस्ड ब्रांड के रूप में मजबूती से स्थापित किया है।

पिछले दो वित्तीय वर्षों में Mokobara ने अपने बिज़नेस को चार गुना से अधिक बढ़ाया है। जहां FY23 में कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹53 करोड़ था, वहीं FY25 में यह बढ़कर ₹230 करोड़ तक पहुंच गया 💰।


📈 FY25 में लगभग दोगुनी हुई कमाई

Registrar of Companies (RoC) से प्राप्त वित्तीय विवरणों के अनुसार, FY25 में Mokobara की ऑपरेटिंग रेवेन्यू 97% की सालाना वृद्धि के साथ ₹117 करोड़ से बढ़कर ₹230 करोड़ हो गई। यह ग्रोथ ऐसे समय में आई है, जब कई D2C ब्रांड्स लागत और मांग दोनों के दबाव से जूझ रहे हैं ⚖️।

कंपनी की पूरी कमाई लगेज, बैकपैक्स और ट्रैवल एक्सेसरीज़ की बिक्री से हुई है 🎒🧳। FY25 में यही Mokobara का एकमात्र ऑपरेटिंग रेवेन्यू सोर्स रहा, जो ब्रांड की मजबूत कस्टमर डिमांड को दर्शाता है।


💵 ब्याज आय से कुल इनकम ₹240 करोड़

ऑपरेटिंग रेवेन्यू के अलावा, Mokobara ने ₹10 करोड़ की ब्याज आय भी दर्ज की। इसके साथ FY25 में कंपनी की कुल आय ₹240 करोड़ हो गई, जो FY24 में ₹119 करोड़ थी 📊। यह संकेत देता है कि कंपनी के पास अच्छा-खासा कैश रिज़र्व मौजूद है।


📦📣 खर्चों में तेज़ बढ़ोतरी

तेज़ विस्तार के साथ Mokobara की लागत में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली:

  • 🔧 प्रोक्योरमेंट कॉस्ट 91% बढ़कर ₹109 करोड़ (कुल खर्च का 43%)
  • 📢 विज्ञापन और मार्केटिंग खर्च 88% बढ़कर ₹46 करोड़
  • 👥 एम्प्लॉयी बेनिफिट खर्च लगभग दोगुना होकर ₹25 करोड़
  • 🚚 लॉजिस्टिक्स खर्च ₹11 करोड़
  • 🏢 वेयरहाउसिंग खर्च ₹8 करोड़

कुल मिलाकर, कंपनी का कुल खर्च FY25 में ₹251 करोड़ रहा, जो FY24 के ₹123 करोड़ से दोगुना से भी ज़्यादा है।


🔻 घाटा बढ़ा, लेकिन नियंत्रण में

बढ़ती लागत के चलते Mokobara ने FY25 में ₹10 करोड़ का शुद्ध घाटा दर्ज किया, जबकि FY24 में यह घाटा ₹4 करोड़ था।

  • 📉 ROCE: -11.61%
  • 📉 EBITDA मार्जिन: -6.52%

यूनिट इकॉनॉमिक्स के लिहाज़ से, कंपनी ने ₹1 कमाने के लिए ₹1.09 खर्च किए। हालांकि, ब्रांड-बिल्डिंग और ऑफलाइन विस्तार के चरण में इसे संतुलित घाटा माना जा रहा है।


🏦 मजबूत बैलेंस शीट बनी सबसे बड़ी ताकत

घाटे के बावजूद Mokobara की फाइनेंशियल स्थिति मजबूत बनी हुई है 💪।

  • 💰 कैश और बैंक बैलेंस: ₹72.5 करोड़
  • 📄 करंट एसेट्स: ₹204 करोड़

यह Mokobara को अगले कुछ वर्षों तक बिना नई फंडिंग के भी विस्तार जारी रखने की क्षमता देता है।


🤝 निवेश और मुकाबला

अब तक Mokobara ने करीब $24 मिलियन की फंडिंग जुटाई है। इसके प्रमुख निवेशकों में Peak XV Partners, Sauce और Saama Capital शामिल हैं 🏦।

बाज़ार में Mokobara की टक्कर Nasher Miles, Zouk Bags और Acefour Accessories जैसे ब्रांड्स से है। हालांकि, प्रीमियम पोज़िशनिंग और डिज़ाइन-फोकस के चलते Mokobara ने अलग पहचान बनाई है ⭐।


🏬 ऑफलाइन विस्तार और आगे की राह

2020 के बाद लगेज और एक्सेसरीज़ सेगमेंट में नई जान आई है। Mokobara ने इस मौके का फायदा उठाते हुए ऑफलाइन स्टोर्स भी खोले हैं 🛍️। हालांकि, ऑफलाइन विस्तार के चलते लागत को स्थिर होने में थोड़ा समय लगेगा।


🎯 ₹500 करोड़ रेवेन्यू अगला लक्ष्य?

मौजूदा रफ्तार को देखते हुए Mokobara के लिए ₹500 करोड़ रेवेन्यू माइलस्टोन हासिल करना मुश्किल नहीं लगता। यह लक्ष्य FY26 या FY27 तक पूरा हो सकता है ⏳।

अब सवाल यह है कि Mokobara आगे स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ेगी या फिर किसी बड़े ब्रांड के लिए अधिग्रहण (Acquisition) का मौका बनेगी 🤔। फिलहाल, कंपनी की ग्रोथ कहानी सही दिशा में आगे बढ़ती दिख रही है।

Read more :⚡🚁 Dreamfly Innovations को SIDBI से ₹3 करोड़ की वेंचर डेट फंडिंग

⚡🚁 Dreamfly Innovations को SIDBI से ₹3 करोड़ की वेंचर डेट फंडिंग

Dreamfly Innovations

भारत में ड्रोन 🚁, एयरोस्पेस ✈️ और एडवांस्ड मोबिलिटी सेक्टर के तेज़ी से बढ़ते अवसरों के बीच बेंगलुरु स्थित एनर्जी-टेक स्टार्टअप Dreamfly Innovations ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने SIDBI (भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक) से ₹3 करोड़ की नॉन-डाइल्यूटिव वेंचर डेट जुटाई है 💰।

यह फंडिंग ऐसे समय पर आई है, जब देश में हाई-परफॉर्मेंस और सुरक्षित बैटरी सिस्टम्स 🔋 की मांग तेज़ी से बढ़ रही है।


💸 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

Dreamfly Innovations ने बताया कि इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से:

  • 🏭 मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी बढ़ाने
  • 📦 वर्किंग कैपिटल सपोर्ट
  • 📈 बढ़ते ऑर्डर्स के साथ ऑपरेशंस स्केल करने

के लिए किया जाएगा।
चूंकि यह नॉन-डाइल्यूटिव फंडिंग है, इसलिए इससे कंपनी की इक्विटी में कोई कमी नहीं आएगी ✅।


🔋 एडवांस्ड बैटरी टेक्नोलॉजी पर फोकस

Dreamfly Innovations ड्रोन, एविएशन और एयरोस्पेस सेक्टर के लिए स्मार्ट बैटरी सिस्टम्स डिज़ाइन और मैन्युफैक्चर करती है। कंपनी खास तौर पर:

  • ⚙️ लिथियम सॉलिड-स्टेट बैटरियों
  • 🧪 ग्राफीन-आधारित बैटरियों

पर काम कर रही है, जो:

  • 🔥 ज़्यादा एनर्जी डेंसिटी
  • 🛡️ बेहतर सेफ्टी
  • ❄️ मजबूत थर्मल परफॉर्मेंस

प्रदान करती हैं।


🧠 स्मार्ट आर्किटेक्चर और BMS

कंपनी की सबसे बड़ी ताकत है उसका प्रोप्रायटरी थर्मल-केस आर्किटेक्चर और इंटेलिजेंट बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) 🧠।
ये सिस्टम:

  • 🌡️ हाई टेम्परेचर
  • 🚀 हाई-स्ट्रेस ऑपरेटिंग कंडीशंस

में भी बैटरी की सेफ्टी और रिलायबिलिटी सुनिश्चित करते हैं।


🏭 B2B मैन्युफैक्चरिंग मॉडल

Dreamfly एक B2B मैन्युफैक्चरिंग-लेड स्टार्टअप है, जो:

  • 🏢 OEMs
  • 🤝 एंटरप्राइज़ क्लाइंट्स

को उनकी ज़रूरत के अनुसार कस्टम बैटरी पैक्स और पावर सॉल्यूशंस देता है।

कंपनी की सेवाएं मुख्य रूप से:

  • 🚁 Unmanned Aerial Systems
  • 🛡️ डिफेंस प्रोग्राम्स
  • ✈️ उभरते एयरोस्पेस यूज़-केसेस

से जुड़ी हैं।


📊 रेवन्यू मॉडल और ग्रोथ

Dreamfly की कमाई मुख्य रूप से आती है:

  • 📄 लॉन्ग-टर्म सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट्स
  • 🤝 को-डेवलपमेंट एग्रीमेंट्स
  • 🔁 रीपीट ऑर्डर्स

से, जो बिज़नेस को स्थिर और स्केलेबल बनाता है 📈।


🤝 Avaana Capital का समर्थन

इस स्टार्टअप को Avaana Capital का समर्थन प्राप्त है 🌱, जो क्लाइमेट और डीप-टेक स्टार्टअप्स में निवेश के लिए जाना जाता है। यह Dreamfly की टेक्नोलॉजी और भविष्य की संभावनाओं पर निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है ✅।


🇮🇳 भारत के लिए रणनीतिक महत्व

ड्रोन और एयरोस्पेस सेक्टर में Make in India 🇮🇳 को बढ़ावा देने के बीच Dreamfly Innovations खुद को:

  • 🔋 मिशन-क्रिटिकल बैटरी सिस्टम्स
  • 🏗️ एक घरेलू और भरोसेमंद सप्लायर

के रूप में स्थापित कर रही है।


🔮 निष्कर्ष

SIDBI से मिली ₹3 करोड़ की फंडिंग Dreamfly Innovations के लिए सिर्फ पूंजी नहीं, बल्कि संस्थागत भरोसे की मुहर है 🏦।
जैसे-जैसे ड्रोन, डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर आगे बढ़ेंगे, Dreamfly जैसी कंपनियां भारत के डीप-टेक इकोसिस्टम में अहम भूमिका निभा सकती हैं 🚀⚡।

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January 2026 में भारतीय स्टार्टअप फंडिंग धीमी रफ्तार के बावजूद भरोसेमंद शुरुआत 🚀

January 2026

वर्ष 2026 की शुरुआत भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक स्थिर और सकारात्मक संकेत लेकर आई है। January 2026 में भारतीय स्टार्टअप्स ने कुल 930 मिलियन डॉलर (लगभग ₹7,700 करोड़) की फंडिंग जुटाई, जो कि दिसंबर 2025 के $870 मिलियन के मुकाबले महीने-दर-महीने (MoM) आधार पर बेहतर रही। हालांकि, सालाना आधार (YoY) पर यह आंकड़ा जनवरी 2025 के $1.76 बिलियन से कम रहा, फिर भी डील गतिविधि और निवेशकों की भागीदारी ने बाजार में भरोसा बनाए रखा।

📈 डील्स की संख्या में मजबूती

जनवरी 2026 में कुल 122 फंडिंग डील्स पूरी हुईं, जो कि पिछले एक साल में किसी भी महीने की सबसे अधिक संख्या है। दिलचस्प बात यह रही कि इस महीने कोई भी $100 मिलियन से अधिक की मेगा डील नहीं हुई, इसके बावजूद निवेश गतिविधि स्वस्थ बनी रही। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि निवेशक बड़े चेक की बजाय संतुलित और विविध निवेश रणनीति अपना रहे हैं।

💼 ग्रोथ और अर्ली-स्टेज फंडिंग का संतुलन

TheKredible के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 में:

  • ग्रोथ और लेट-स्टेज स्टार्टअप्स ने 18 डील्स के जरिए $508.1 मिलियन जुटाए
  • वहीं अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स ने 92 डील्स में $422.29 मिलियन की फंडिंग हासिल की
  • इसके अलावा, 12 डील्स में निवेश राशि का खुलासा नहीं किया गया

यह दर्शाता है कि निवेशकों का भरोसा केवल स्थापित कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि वे नए और उभरते स्टार्टअप्स पर भी दांव लगा रहे हैं।

🔝 टॉप ग्रोथ-स्टेज डील्स

जनवरी में ग्रोथ-स्टेज फंडिंग का नेतृत्व किया:

  • Arya.ag – $80.3 मिलियन (Series D)
  • Emergent – $70 मिलियन (Series B)
  • Juspay – $50 मिलियन (Series D)
  • Namdev Finvest – $37 मिलियन (डेट के जरिए)

इसके अलावा Pee Safe, Sukino, Easy Home Finance, JJG Aero, Wint Wealth और Unbox Robotics जैसी कंपनियों ने $28–32 मिलियन के बीच फंडिंग जुटाई। इन डील्स में फिनटेक, हेल्थटेक, एग्रीटेक, एआई, एयरोस्पेस और रोबोटिक्स जैसे विविध सेक्टर शामिल रहे।

🌱 अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स की चमक

अर्ली-स्टेज में:

  • Emversity – $30 मिलियन
  • BillionE – $25 मिलियन
  • Knight Fintech – $23.6 मिलियन
  • EtherealX और The Guild – $20.5 मिलियन प्रत्येक

इनके अलावा Even Healthcare, Liquidnitro Games, Whizzo, Optimist और FutureCure जैसे स्टार्टअप्स ने भी $11.5–20 मिलियन की रेंज में फंडिंग हासिल की।

🏙️ शहरों और सेक्टर्स का प्रदर्शन

बेंगलुरु जनवरी में स्टार्टअप फंडिंग का केंद्र बना रहा:

  • 55 डील्स
  • $495.42 मिलियन (कुल फंडिंग का 53% से अधिक)

इसके बाद:

  • दिल्ली-एनसीआर – $175.72 मिलियन
  • मुंबई – $95.14 मिलियन
  • हैदराबाद और चेन्नई – सीमित लेकिन स्थिर गतिविधि

सेक्टर के हिसाब से:

  • फिनटेक – $201 मिलियन
  • AI – $134.39 मिलियन
  • हेल्थटेक – $125.56 मिलियन
  • ई-कॉमर्स और डीप-टेक – अपेक्षाकृत कम हिस्सेदारी

🔄 मर्जर, एक्विजिशन और ESOP ट्रेंड

जनवरी में कई रणनीतिक अधिग्रहण (M&A) भी देखने को मिले। Zappfresh, Urban Harvest और Cars24 ने अपने कारोबार का विस्तार किया। फिनटेक और ब्लॉकचेन सेक्टर में भी गतिविधियां तेज रहीं।

एक अहम ट्रेंड रहा ESOP बायबैक और लिक्विडिटी इवेंट्स:

  • Innovaccer – $75 मिलियन ESOP बायबैक
  • BrowserStack – $125 मिलियन लिक्विडिटी प्रोग्राम

यह संकेत देता है कि संस्थापक और कर्मचारी दोनों के लिए लिक्विडिटी और भरोसा लौट रहा है।

🔮 निष्कर्ष: आगे की राह

हालांकि FY26 में फंडिंग ग्रोथ बहुत तेज नहीं दिख रही, लेकिन जनवरी 2026 के आंकड़े यह बताते हैं कि स्टार्टअप इकोसिस्टम ने स्थिरता हासिल कर ली है। IPO की तैयारी कर रही कंपनियां जैसे PhonePe और Zepto, ESOP लिक्विडिटी इवेंट्स और अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स की मजबूत भागीदारी भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत हैं।

AI जैसी नई लहर अभी शुरुआती दौर में है और भारतीय फाउंडर्स के पास इसे भुनाने के बड़े अवसर हैं। कुल मिलाकर, भले ही FY26 का अंत धीमा लगे, लेकिन FY27 भारतीय स्टार्टअप्स के लिए एक नया खेल साबित हो सकता है। 🌟

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✈️ भारत के एयरोस्पेस सेक्टर को नई रफ्तार JJG Aero ने जुटाए $30 मिलियन 🚀

JJG Aero

भारत का एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अब तेज़ी से उड़ान भर रहा है। इसी दिशा में एक बड़ी खबर सामने आई है। बेंगलुरु‑आधारित एयरोस्पेस कंपोनेंट्स निर्माता JJG Aero ने हाल ही में $30 मिलियन (करीब ₹250 करोड़) की फंडिंग जुटाई है 💰। इस राउंड का नेतृत्व मशहूर वेंचर कैपिटल फर्म Norwest ने किया है।

खास बात यह है कि यह Norwest का भारत में एयरोस्पेस कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग में पहला निवेश है, जो इस सेक्टर में बढ़ते निवेशकों के भरोसे को साफ दिखाता है 📈।


📊 पहले भी निवेशकों का मिला भरोसा

JJG Aero इससे पहले भी अप्रैल 2024 में CX Partners से $12 मिलियन की Series‑A फंडिंग जुटा चुकी है। यानी कंपनी ने अब तक कुल $42 मिलियन की पूंजी हासिल कर ली है 💼। यह बताता है कि कंपनी का बिज़नेस मॉडल, टेक्नोलॉजी और ग्रोथ प्लान निवेशकों को आकर्षित कर रहा है।


🏭 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

कंपनी के अनुसार, इस नई फंडिंग का इस्तेमाल तीन बड़े क्षेत्रों में किया जाएगा 👇

🔹 नॉर्थ बेंगलुरु में 2 लाख वर्ग फुट की नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी
🔹 मौजूदा प्लांट्स की उत्पादन क्षमता बढ़ाने में
🔹 एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस और सब‑असेंबली टेक्नोलॉजी में निवेश

इस विस्तार के बाद JJG Aero की प्रोडक्शन क्षमता कई गुना बढ़ने की उम्मीद है ⚙️।


🧑‍💼 2008 से मजबूत नींव

JJG Aero की स्थापना 2008 में अनुज झुनझुनवाला द्वारा की गई थी। कंपनी हाई‑प्रिसीजन एयरोस्पेस, ऑटोमोटिव और इंडस्ट्रियल कंपोनेंट्स का निर्माण करती है।

कंपनी “Build‑to‑Print Machining” और स्पेशल प्रोसेसिंग सर्विसेज़ भी देती है, जो इसे ग्लोबल सप्लायर्स के लिए भरोसेमंद पार्टनर बनाती हैं 🌍।


🌐 ग्लोबल दिग्गज हैं ग्राहक

JJG Aero के ग्राहक दुनिया की बड़ी कंपनियां हैं, जिनमें शामिल हैं 👇
✈️ Collins Aerospace
✈️ Safran
✈️ GE (General Electric)

इन नामों के साथ काम करना कंपनी की क्वालिटी और इंजीनियरिंग क्षमता को दर्शाता है 🏆।


🔩 मजबूत और विविध प्रोडक्ट पोर्टफोलियो

JJG Aero का प्रोडक्ट पोर्टफोलियो काफ़ी व्यापक है, जिसमें शामिल हैं:

✔️ Precision machined parts
✔️ Bushes और washers
✔️ Brackets और manifolds
✔️ Landing system components
✔️ Actuators और fluid systems
✔️ Avionics से जुड़े कंपोनेंट्स

फिलहाल कंपनी 60,000 वर्ग फुट में फैली मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के साथ काम कर रही है और इसके पास 100+ मशीनें हैं 🏗️।


🇮🇳 भारत की हिस्सेदारी अभी भी कम

मार्केट रिसर्च के मुताबिक, भारत की हिस्सेदारी ग्लोबल एयरोस्पेस कंपोनेंट्स मार्केट में 2% से भी कम है 😮। लेकिन:

✅ Make in India
✅ Defence और Civil Aviation में बढ़ता निवेश
✅ Global supply chain diversification

इन सभी वजहों से भारत के लिए इस सेक्टर में बड़ी संभावनाएं बन रही हैं 🚀।


🤝 निवेशकों का बढ़ता भरोसा

Norwest जैसे बड़े निवेशक का इस सेक्टर में आना यह दिखाता है कि एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग अब भारत में नया ग्रोथ इंजन बन रहा है। कम लागत, मजबूत इंजीनियरिंग टैलेंट और स्केलेबल मैन्युफैक्चरिंग भारत की बड़ी ताकत है 💡।


⚔️ बढ़ती प्रतिस्पर्धा

JJG Aero अकेली नहीं है। इसी सेगमेंट में Jeh Aerospace ने अगस्त 2025 में $11 मिलियन की फंडिंग जुटाई थी, जिसमें Elevation Capital, General Catalyst और IndiGo Ventures जैसे निवेशक शामिल थे।

यह दिखाता है कि एयरोस्पेस स्टार्टअप्स अब निवेशकों की रडार पर हैं 👀।


🔮 आगे की राह

JJG Aero की यह फंडिंग सिर्फ एक कंपनी की सफलता नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि भारत का एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ग्लोबल लेवल पर तैयार हो रहा है 🌏।

अगर सही नीतियां, निवेश और टेक्नोलॉजी का सपोर्ट मिला, तो आने वाले वर्षों में भारत इस सेक्टर में बड़ी भूमिका निभा सकता है ✨।

Read more :🚀 तेज़ ग्रोथ, लेकिन बढ़ता घाटा FY25 में Dezerv की पूरी कहानी

🚀 तेज़ ग्रोथ, लेकिन बढ़ता घाटा FY25 में Dezerv की पूरी कहानी

Dezerv

भारत के तेज़ी से बढ़ते वेल्थटेक सेक्टर में Dezerv ने एक बार फिर मजबूत ग्रोथ दिखाई है 📈। FY24 में 2.5X की तेज़ बढ़त के बाद, FY25 में भी कंपनी ने लगभग इसी रफ्तार को बरकरार रखा।
हालांकि, इस आक्रामक विस्तार की कीमत कंपनी को बढ़ते घाटे के रूप में चुकानी पड़ी 💸।

Registrar of Companies (RoC) से मिले कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल डेटा के अनुसार, Dezerv का कुल घाटा FY25 में ₹100 करोड़ के पार चला गया।


💰 रेवेन्यू में ज़बरदस्त उछाल

FY25 में Dezerv की ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹26 करोड़ से बढ़कर ₹66 करोड़ हो गई, यानी करीब 2.5 गुना ग्रोथ 🚀।
यह साफ संकेत देता है कि हाई-इनकम प्रोफेशनल्स और अफ्लुएंट इन्वेस्टर्स के बीच कंपनी की पकड़ मजबूत हो रही है।


🧠 Dezerv क्या करता है?

Dezerv एक बेंगलुरु आधारित वेल्थटेक प्लेटफॉर्म है, जो खासतौर पर:

  • 👔 टॉप-टियर वर्किंग प्रोफेशनल्स
  • 💼 हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs)

को Portfolio Management Services (PMS) देता है।

इसके अलावा प्लेटफॉर्म पर मिलते हैं:

  • 📊 एक्सपर्ट इन्वेस्टमेंट एडवाइज़
  • 🧾 डायरेक्ट बॉन्ड्स
  • 🚀 स्टार्टअप्स में एंजेल इन्वेस्टमेंट के मौके

📊 रेवेन्यू का ब्रेकअप

FY25 में Dezerv की कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा आया:

  • 💼 फीस और कमीशन इनकम – कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू का 67%
  • यह इनकम करीब ₹44 करोड़ रही, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 4 गुना है 🔥

इसके अलावा:

  • 💵 इंटरेस्ट इनकम 4X से ज्यादा बढ़कर ₹16.8 करोड़ हो गई
  • ⚠️ लेकिन फेयर वैल्यू चेंज से नेट गेन 55% घटकर ₹4.8 करोड़ रह गया

📉 खर्चों में तेज़ बढ़ोतरी

जहां एक तरफ कमाई बढ़ी, वहीं दूसरी तरफ खर्चों में भी ज़बरदस्त उछाल देखने को मिला।

🧑‍💼 सबसे बड़ा खर्च: कर्मचारियों पर

  • Employee Benefit Expense कुल खर्च का 62% रहा
  • FY24 में ₹63 करोड़ से बढ़कर FY25 में ₹111 करोड़ ⬆️

📢 मार्केटिंग और टेक्नोलॉजी

  • 📣 Advertising & Marketing खर्च 67% बढ़कर ₹30 करोड़
  • 💻 Software खर्च 220% उछलकर ₹8 करोड़

अन्य खर्च:

  • 🏢 Depreciation: ₹6 करोड़
  • ⚖️ Legal & Professional Charges: ₹3 करोड़

👉 कुल मिलाकर, Dezerv का कुल खर्च FY25 में 76% बढ़कर ₹178 करोड़ हो गया।


❌ घाटा क्यों बढ़ा?

बढ़ते खर्चों का असर सीधे मुनाफे पर पड़ा:

  • 📉 कुल घाटा 49% बढ़कर ₹112 करोड़
  • 🔻 ROCE: -39.36%
  • 🔻 EBITDA Margin: -159.09%

⚖️ Unit Economics

FY25 में Dezerv ने:

  • 💸 ₹1 कमाने के लिए ₹2.70 खर्च किए

यह संकेत देता है कि कंपनी अभी profitability से दूर है।


🏦 कैश पोज़िशन अभी मजबूत

अच्छी बात यह है कि कंपनी के पास फिलहाल कैश की कमी नहीं है:

  • 💰 Cash & Bank Balance: ₹204 करोड़
  • 📦 Current Assets: ₹267 करोड़ (मार्च 2025 तक)

🤝 फंडिंग और मुकाबला

Startup data platform TheKredible के अनुसार:

  • 💵 Dezerv अब तक करीब $100 मिलियन की फंडिंग जुटा चुका है
  • हाल ही में $40 मिलियन का राउंड Accel और Premji Invest ने लीड किया

🥊 Competitors

Dezerv का मुकाबला है:

  • 🏆 Zerodha – FY25 में ₹8,847 करोड़ रेवेन्यू और ₹4,237 करोड़ मुनाफा
  • 📊 Upstox – FY25 में ₹3,902 करोड़ रेवेन्यू
  • 💼 Wealthdesk

🔮 आगे की राह

Dezerv की कहानी बताती है कि भारत में professional wealth management की मांग तेज़ी से बढ़ रही है 🌱।
लेकिन आने वाले समय में कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी:

  • ✂️ खर्चों पर कंट्रोल
  • 📈 sustainable profitability

मजबूत फंडिंग और कैश रिज़र्व के दम पर Dezerv के पास लंबी रेस की तैयारी है, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कंपनी growth और घाटे के बीच संतुलन बना पाती है या नहीं।

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📊 Union Budget 2026–27: स्टार्टअप,

Union Budget

Union Budget 2026–27 में सरकार ने स्टार्टअप्स, MSMEs और SMEs को केंद्र में रखते हुए कई अहम घोषणाएँ की हैं। इस बजट का फोकस साफ तौर पर फंडिंग की उपलब्धताक्रेडिट सपोर्टमैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा, और रेगुलेटरी आसानियाँ देने पर रहा है। मौजूदा वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और प्रतिस्पर्धी माहौल को देखते हुए यह बजट भारत के उद्यमशील इकोसिस्टम को नई मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

🚀 स्टार्टअप्स के लिए ₹10,000 करोड़ का नया फंड

बजट 2026–27 की सबसे बड़ी घोषणाओं में से एक है Fund of Funds for Startups (FFS) के लिए ₹10,000 करोड़ का नया आवंटन। यह राशि SEBI-रजिस्टर्ड वेंचर कैपिटल और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) के जरिए स्टार्टअप्स में निवेश की जाएगी।

इस फंड का उद्देश्य खासतौर पर:

  • अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स को शुरुआती पूंजी उपलब्ध कराना
  • ग्रोथ-स्टेज कंपनियों को स्केल करने में मदद करना
  • प्राइवेट कैपिटल को आकर्षित करना

सरकार की यह रणनीति स्टार्टअप्स में सीधे निवेश करने के बजाय प्रोफेशनल फंड मैनेजर्स के जरिए पूंजी पहुंचाने की है, जिससे निवेश ज्यादा प्रभावी और बाजार-उन्मुख बन सके।

🏭 MSMEs के लिए ग्रोथ और रेज़िलिएंस फंड

MSME सेक्टर को मजबूत करने के लिए बजट में ₹10,000 करोड़ का MSME Growth and Resilience Fund प्रस्तावित किया गया है। इस फंड का मकसद MSMEs को वैश्विक व्यापार दबावसप्लाई चेन डिसरप्शन, और आर्थिक झटकों से निपटने में मदद करना है।

खास तौर पर वे स्टार्टअप्स जो:

  • MSME के तहत रजिस्टर्ड हैं
  • मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में काम कर रहे हैं
  • एक्सपोर्ट-लिंक्ड बिजनेस मॉडल पर आधारित हैं

उन्हें इस फंड से सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। यह पहल भारत को एक मजबूत मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब बनाने के विज़न के अनुरूप है।

🧬 बायोफार्मा सेक्टर के लिए ‘Biopharma Shakti’

सरकार ने Biopharma Shakti नाम से ₹10,000 करोड़ का एक विशेष प्रोग्राम लॉन्च करने का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य भारत में डोमेस्टिक बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है।

इस कार्यक्रम के तहत:

  • रिसर्च और इनोवेशन को फंडिंग
  • पायलट प्रोजेक्ट्स से लेकर कमर्शियल स्केल-अप तक सपोर्ट
  • मैन्युफैक्चरिंग और प्रोडक्शन फैसिलिटीज की स्थापना

भारत पहले ही जेनेरिक दवाओं और वैक्सीन मैन्युफैक्चरिंग में वैश्विक पहचान बना चुका है। यह पहल भारत को हाई-वैल्यू बायोफार्मा और इनोवेटिव ड्रग डेवलपमेंट में भी आगे ले जाने की कोशिश है।

🔌 इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पर जोर

इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को मजबूत करने के लिए सरकार ने Electronic Component Manufacturing Scheme (ECMS) के तहत आवंटन को लगभग दोगुना करते हुए ₹40,000 करोड़ करने की घोषणा की है। पिछले साल इस योजना के लिए ₹22,919 करोड़ स्वीकृत किए गए थे।

इसके अलावा, वित्त मंत्री ने India Semiconductor Mission के दूसरे चरण की शुरुआत की भी घोषणा की। पहले चरण के तहत घोषित फंड्स अब लगभग समाप्त होने के करीब हैं, ऐसे में यह कदम भारत को सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

☁️ डेटा सेंटर और क्लाउड सेक्टर को टैक्स राहत

एक अहम और दूरगामी घोषणा के तहत सरकार ने भारत में डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करने वाले विदेशी क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स को 2047 तक टैक्स हॉलिडे देने का प्रस्ताव रखा है।

इस कदम से:

  • भारत में डेटा सेंटर निवेश बढ़ेगा
  • क्लाउड और AI स्टार्टअप्स को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा
  • भारत डिजिटल इकोनॉमी का ग्लोबल हब बन सकता है

🎨 क्रिएटर इकोनॉमी और ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ पर फोकस

बजट में Indian Institute of Creative Technologies, मुंबई को सपोर्ट देने की घोषणा भी की गई है। इसके तहत:

  • 15,000 स्कूलों और
  • 500 कॉलेजों में AVGC (Animation, Visual Effects, Gaming, Comics) और कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित की जाएंगी

सरकार का लक्ष्य 2030 तक 20 लाख नौकरियाँ पैदा करने का है, जिससे ऑरेंज इकोनॉमी यानी क्रिएटिव और डिजिटल कंटेंट सेक्टर को बड़ा बूस्ट मिलेगा।

🔍 कुल मिलाकर बजट क्या संकेत देता है?

यूनियन बजट 2026–27 साफ संकेत देता है कि सरकार:

  • स्टार्टअप्स को आर्थिक मजबूती देना चाहती है
  • MSMEs को ग्लोबल प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रही है
  • मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और क्रिएटिव सेक्टर को भविष्य का इंजन मान रही है

हालांकि, इन योजनाओं की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि फंड्स का क्रियान्वयन कितनी तेजी और पारदर्शिता से होता है। अगर सही तरीके से लागू किया गया, तो यह बजट भारत के स्टार्टअप और इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। 🇮🇳✨

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