🇮🇳 Distributed solar platform Aerem Solutions ने जुटाए 15 मिलियन डॉलर,

Aerem

भारत में स्वच्छ ऊर्जा और सस्टेनेबल डेवलपमेंट की दिशा में काम कर रही मुंबई स्थित डिस्ट्रीब्यूटेड सोलर प्लेटफॉर्म Aerem Solutions (एरम सॉल्यूशंस) ने अपने प्री-सीरीज़ बी फंडिंग राउंड में 15 मिलियन डॉलर (करीब 136 करोड़ रुपये) जुटाए हैं। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व SMBC Asia Rising Fund ने किया, जो जापान के प्रमुख बैंक Sumitomo Mitsui Banking Corporation (SMBC) की वेंचर कैपिटल इकाई है।

इस फंडिंग राउंड में कंपनी के मौजूदा निवेशकों—British International Investment (BII)UTECBlume VenturesAvaana CapitalRiverwalk Holdings और SE Ventures (Schneider Electric) ने भी भागीदारी की है। इस नए निवेश के साथ एरम सॉल्यूशंस का कुल फंडिंग आंकड़ा लगभग 34.5 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है।


💰 अब तक का फंडिंग सफर

एरम सॉल्यूशंस ने इससे पहले अप्रैल 2025 में UTEC के नेतृत्व में 100 करोड़ रुपये (लगभग 11.7 मिलियन डॉलर) जुटाए थे। वहीं, 2023 में कंपनी ने Avaana Capital के नेतृत्व में 5 मिलियन डॉलर की फंडिंग हासिल की थी। लगातार निवेश मिलने से यह साफ है कि निवेशकों को कंपनी के बिज़नेस मॉडल और भारत के सोलर मार्केट में इसकी संभावनाओं पर भरोसा है।


🚀 फंडिंग का उपयोग कहां होगा?

कंपनी के अनुसार, इस नई पूंजी का उपयोग कई रणनीतिक क्षेत्रों में किया जाएगा:

  • पैन-इंडिया विस्तार: देशभर में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करना
  • EPC और इंस्टॉलर पार्टनर नेटवर्क का विस्तार
  • MSME और रेज़िडेंशियल ग्राहकों के बीच सोलर अपनाने को बढ़ावा
  • सोलर सिस्टम की अफॉर्डेबिलिटी बढ़ाने पर निवेश
  • एक्ज़ीक्यूशन क्वालिटी और पोस्ट-इंस्टॉलेशन परफॉर्मेंस विज़िबिलिटी में सुधार

कंपनी का फोकस सिर्फ सोलर इंस्टॉलेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सोलर लाइफसाइकिल को डिजिटल और आसान बनाना है।


🌱 एरम सॉल्यूशंस क्या करता है?

2021 में स्थापित, एरम सॉल्यूशंस भारत में डिस्ट्रीब्यूटेड सोलर अडॉप्शन के लिए एक फुल-स्टैक प्लेटफॉर्म के रूप में काम करता है। कंपनी सोलर फाइनेंसिंग, इक्विपमेंट मार्केटप्लेस और टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म को एक साथ जोड़ती है।

एरम का प्लेटफॉर्म निम्न सेवाएं प्रदान करता है:

  • सोलर सिस्टम डिज़ाइन और इंजीनियरिंग
  • प्रोक्योरमेंट और इक्विपमेंट सप्लाई
  • सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए फाइनेंसिंग
  • एसेट मॉनिटरिंग और परफॉर्मेंस ट्रैकिंग

कंपनी मुख्य रूप से MSMEsघर मालिकोंEPC कंपनियों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस को सेवाएं देती है।


📊 प्रभाव और उपलब्धियां

अब तक एरम सॉल्यूशंस:

  • 1,200 मेगावॉट से अधिक सोलर क्षमता सक्षम कर चुका है
  • 2,000 से ज्यादा सोलर प्रोजेक्ट्स को फाइनेंस कर चुका है
  • भारत के 150 शहरों में
  • 3,200 से अधिक इंस्टॉलेशन पार्टनर्स के साथ काम कर रहा है

ये आंकड़े दर्शाते हैं कि कंपनी तेजी से भारत के डिस्ट्रीब्यूटेड सोलर इकोसिस्टम में एक मजबूत खिलाड़ी बन रही है।


🇮🇳 भारत में डिस्ट्रीब्यूटेड सोलर का भविष्य

भारत सरकार की नेट-ज़ीरो और रिन्यूएबल एनर्जी नीतियों के बीच, MSME और रेज़िडेंशियल सोलर एक बड़ा अवसर बनकर उभर रहा है। हालांकि, फाइनेंसिंग, भरोसेमंद इंस्टॉलर्स और सिस्टम परफॉर्मेंस जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। एरम सॉल्यूशंस इन सभी समस्याओं को एकीकृत टेक्नोलॉजी और फाइनेंस मॉडल के जरिए हल करने की कोशिश कर रहा है।


🔮 आगे की राह

नई फंडिंग के साथ एरम सॉल्यूशंस न केवल अपने नेटवर्क और टेक्नोलॉजी को मजबूत करेगा, बल्कि भारत में सोलर एनर्जी को ज्यादा सुलभ, किफायती और भरोसेमंद बनाने की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएगा। आने वाले वर्षों में कंपनी MSME सेक्टर और घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने की रफ्तार को तेज कर सकती है।

स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ते भारत में, एरम सॉल्यूशंस जैसे स्टार्टअप्स न केवल बिज़नेस ग्रोथ बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। ☀️🌍

Read more :🚀 वर्कफोर्स मैनेजमेंट स्टार्टअप Arthum ने जुटाए ₹10 करोड़,

🚀 वर्कफोर्स मैनेजमेंट स्टार्टअप Arthum ने जुटाए ₹10 करोड़,

Arthum

गुरुग्राम स्थित वर्कफोर्स मैनेजमेंट स्टार्टअप Arthum ने अपने सीड फंडिंग राउंड में ₹10 करोड़ (करीब $1.09 मिलियन) की राशि जुटाई है 💰। इस निवेश राउंड का नेतृत्व Caret Capital ने किया है, जबकि Keynote Financial Services Limited और JS Global ने भी इसमें भागीदारी की है 🤝। यह फंडिंग भारत के कॉन्ट्रैक्ट और ब्लू-कॉलर वर्कफोर्स सेक्टर में Arthum की बढ़ती पकड़ को दर्शाती है।


🛠️ टेक्नोलॉजी अपग्रेड और नए शहरों में विस्तार की योजना

कंपनी के अनुसार, इस फंडिंग से मिली पूंजी का इस्तेमाल अपने टेक्नोलॉजी स्टैक को और मजबूत करनेभौगोलिक विस्तार और वित्तीय सेवाओं को बढ़ाने में किया जाएगा 📈। Arthum उत्तर और पश्चिम भारत के प्रमुख औद्योगिक शहरों में अपने ऑपरेशंस फैलाने की तैयारी में है।

स्टार्टअप देहरादून, चंडीगढ़, लुधियाना, जयपुर और अहमदाबाद जैसे शहरों में विस्तार की योजना बना रहा है 🏙️। ये शहर बड़े औद्योगिक क्लस्टर्स के लिए जाने जाते हैं, जहां कॉन्ट्रैक्ट और ब्लू-कॉलर श्रमिकों की भारी मांग रहती है।


🏗️ 2023 में हुई शुरुआत, कॉन्ट्रैक्ट वर्कफोर्स पर खास फोकस

Arthum की स्थापना 2023 में दर्पण शर्मा और विशाल मिश्रा द्वारा की गई थी 👨‍💼👨‍💼। स्टार्टअप का मकसद कॉन्ट्रैक्ट और ब्लू-कॉलर वर्कफोर्स के लिए एक इंटीग्रेटेड डिजिटल ऑपरेटिंग सिस्टम तैयार करना है।

यह प्लेटफॉर्म एंटरप्राइजेज, लेबर कॉन्ट्रैक्टर्स और श्रमिकों को एक ही डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर जोड़ता है 🔗, जिससे वर्कफोर्स मैनेजमेंट से जुड़ी जटिल प्रक्रियाओं को आसान और पारदर्शी बनाया जा सके।


📊 एक ही प्लेटफॉर्म पर अटेंडेंस से लेकर पेरोल तक

Arthum अपने यूजर्स को ERP जैसे एडवांस टूल्स प्रदान करता है, जिनमें शामिल हैं:

  • 📍 जियो-टैग्ड अटेंडेंस
  • 💸 ऑटोमेटेड पेरोल
  • 📲 डिजिटल पेमेंट्स
  • 📑 स्टैच्यूटरी कंप्लायंस
  • 📝 कॉन्ट्रैक्ट मैनेजमेंट

ये सभी सुविधाएं खासतौर पर उन कंपनियों के लिए उपयोगी हैं जो बड़ी संख्या में कॉन्ट्रैक्ट श्रमिकों के साथ काम करती हैं और मैन्युअल प्रोसेस से छुटकारा पाना चाहती हैं।


👷‍♂️ लाखों श्रमिक और कॉन्ट्रैक्टर्स प्लेटफॉर्म से जुड़े

फिलहाल Arthum का प्लेटफॉर्म 3 लाख से ज्यादा लेबर कॉन्ट्रैक्टर्स के ऑपरेशंस को ऑटोमेट कर रहा है ⚙️ और अब तक 6 लाख से अधिक श्रमिकों को ऑनबोर्ड किया जा चुका है 👥। कंपनी का मुख्य फोकस अभी दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में है, लेकिन नई फंडिंग के साथ इसका विस्तार तेजी से अन्य राज्यों में भी होने वाला है।


🏦 नियो-बैंकिंग के जरिए वित्तीय समावेशन पर जोर

वर्कफोर्स मैनेजमेंट के साथ-साथ Arthum ने एक इंटीग्रेटेड नियो-बैंकिंग लेयर भी तैयार की है 🏦। इस लेयर के जरिए सत्यापित श्रमिक डेटा का उपयोग कर वर्कर्स और कॉन्ट्रैक्टर्स को:

  • 💳 बैंकिंग
  • 🛡️ बीमा
  • 💵 क्रेडिट
  • 📈 निवेश

जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। भारत में बड़ी संख्या में ब्लू-कॉलर वर्कर्स अब भी औपचारिक वित्तीय सेवाओं से दूर हैं, ऐसे में Arthum का यह मॉडल वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में अहम साबित हो सकता है।


🤝 बैंकों और NBFCs के साथ मजबूत साझेदारी

Arthum ने अपनी वित्तीय सेवाओं को मजबूत करने के लिए Yes Bank, ICICI Bank और IDFC Bank जैसे प्रमुख बैंकों के साथ साझेदारी की है 🏛️। इसके अलावा, कंपनी 15 से अधिक NBFCs के साथ मिलकर श्रमिकों और कॉन्ट्रैक्टर्स के लिए उनकी जरूरतों के अनुसार वित्तीय उत्पाद उपलब्ध करा रही है।

इन साझेदारियों की मदद से वर्कर्स को समय पर वेतन, आसान लोन और वित्तीय सुरक्षा मिल रही है ✅।


🇮🇳 असंगठित श्रम बाजार में डिजिटल समाधान की बढ़ती मांग

भारत में करोड़ों की संख्या में कॉन्ट्रैक्ट और ब्लू-कॉलर श्रमिक काम कर रहे हैं, लेकिन अब भी इस सेक्टर का बड़ा हिस्सा अनौपचारिक व्यवस्थाओं पर निर्भर है। सरकार की डिजिटल पहल, लेबर कंप्लायंस और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर पर बढ़ते फोकस के बीच Arthum जैसे प्लेटफॉर्म्स की मांग तेजी से बढ़ रही है 📲।


🌟 निवेशकों का भरोसा और भविष्य की दिशा

Caret Capital और अन्य निवेशकों की भागीदारी यह दिखाती है कि Arthum के बिजनेस मॉडल और विजन पर निवेशकों को भरोसा है 👍। आने वाले समय में कंपनी अपने प्लेटफॉर्म को और एडवांस बनाने, नए सेक्टर्स में कदम रखने और देशभर में अपनी मौजूदगी मजबूत करने पर फोकस करेगी।

कुल मिलाकर, Arthum की यह फंडिंग भारत के वर्कफोर्स मैनेजमेंट और ब्लू-कॉलर फिनटेक इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है 🚀।गुरुग्राम स्थित वर्कफोर्स मैनेजमेंट स्टार्टअप Arthum ने अपने सीड फंडिंग राउंड में ₹10 करोड़ (करीब $1.09 मिलियन) की राशि जुटाई है 💰। इस निवेश राउंड का नेतृत्व Caret Capital ने किया है, जबकि Keynote Financial Services Limited और JS Global ने भी इसमें भागीदारी की है 🤝। यह फंडिंग भारत के कॉन्ट्रैक्ट और ब्लू-कॉलर वर्कफोर्स सेक्टर में Arthum की बढ़ती पकड़ को दर्शाती है।


🛠️ टेक्नोलॉजी अपग्रेड और नए शहरों में विस्तार की योजना

कंपनी के अनुसार, इस फंडिंग से मिली पूंजी का इस्तेमाल अपने टेक्नोलॉजी स्टैक को और मजबूत करनेभौगोलिक विस्तार और वित्तीय सेवाओं को बढ़ाने में किया जाएगा 📈। Arthum उत्तर और पश्चिम भारत के प्रमुख औद्योगिक शहरों में अपने ऑपरेशंस फैलाने की तैयारी में है।

स्टार्टअप देहरादून, चंडीगढ़, लुधियाना, जयपुर और अहमदाबाद जैसे शहरों में विस्तार की योजना बना रहा है 🏙️। ये शहर बड़े औद्योगिक क्लस्टर्स के लिए जाने जाते हैं, जहां कॉन्ट्रैक्ट और ब्लू-कॉलर श्रमिकों की भारी मांग रहती है।


🏗️ 2023 में हुई शुरुआत, कॉन्ट्रैक्ट वर्कफोर्स पर खास फोकस

Arthum की स्थापना 2023 में दर्पण शर्मा और विशाल मिश्रा द्वारा की गई थी 👨‍💼👨‍💼। स्टार्टअप का मकसद कॉन्ट्रैक्ट और ब्लू-कॉलर वर्कफोर्स के लिए एक इंटीग्रेटेड डिजिटल ऑपरेटिंग सिस्टम तैयार करना है।

यह प्लेटफॉर्म एंटरप्राइजेज, लेबर कॉन्ट्रैक्टर्स और श्रमिकों को एक ही डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर जोड़ता है 🔗, जिससे वर्कफोर्स मैनेजमेंट से जुड़ी जटिल प्रक्रियाओं को आसान और पारदर्शी बनाया जा सके।


📊 एक ही प्लेटफॉर्म पर अटेंडेंस से लेकर पेरोल तक

Arthum अपने यूजर्स को ERP जैसे एडवांस टूल्स प्रदान करता है, जिनमें शामिल हैं:

  • 📍 जियो-टैग्ड अटेंडेंस
  • 💸 ऑटोमेटेड पेरोल
  • 📲 डिजिटल पेमेंट्स
  • 📑 स्टैच्यूटरी कंप्लायंस
  • 📝 कॉन्ट्रैक्ट मैनेजमेंट

ये सभी सुविधाएं खासतौर पर उन कंपनियों के लिए उपयोगी हैं जो बड़ी संख्या में कॉन्ट्रैक्ट श्रमिकों के साथ काम करती हैं और मैन्युअल प्रोसेस से छुटकारा पाना चाहती हैं।


👷‍♂️ लाखों श्रमिक और कॉन्ट्रैक्टर्स प्लेटफॉर्म से जुड़े

फिलहाल Arthum का प्लेटफॉर्म 3 लाख से ज्यादा लेबर कॉन्ट्रैक्टर्स के ऑपरेशंस को ऑटोमेट कर रहा है ⚙️ और अब तक 6 लाख से अधिक श्रमिकों को ऑनबोर्ड किया जा चुका है 👥। कंपनी का मुख्य फोकस अभी दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में है, लेकिन नई फंडिंग के साथ इसका विस्तार तेजी से अन्य राज्यों में भी होने वाला है।


🏦 नियो-बैंकिंग के जरिए वित्तीय समावेशन पर जोर

वर्कफोर्स मैनेजमेंट के साथ-साथ Arthum ने एक इंटीग्रेटेड नियो-बैंकिंग लेयर भी तैयार की है 🏦। इस लेयर के जरिए सत्यापित श्रमिक डेटा का उपयोग कर वर्कर्स और कॉन्ट्रैक्टर्स को:

  • 💳 बैंकिंग
  • 🛡️ बीमा
  • 💵 क्रेडिट
  • 📈 निवेश

जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। भारत में बड़ी संख्या में ब्लू-कॉलर वर्कर्स अब भी औपचारिक वित्तीय सेवाओं से दूर हैं, ऐसे में Arthum का यह मॉडल वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में अहम साबित हो सकता है।


🤝 बैंकों और NBFCs के साथ मजबूत साझेदारी

Arthum ने अपनी वित्तीय सेवाओं को मजबूत करने के लिए Yes Bank, ICICI Bank और IDFC Bank जैसे प्रमुख बैंकों के साथ साझेदारी की है 🏛️। इसके अलावा, कंपनी 15 से अधिक NBFCs के साथ मिलकर श्रमिकों और कॉन्ट्रैक्टर्स के लिए उनकी जरूरतों के अनुसार वित्तीय उत्पाद उपलब्ध करा रही है।

इन साझेदारियों की मदद से वर्कर्स को समय पर वेतन, आसान लोन और वित्तीय सुरक्षा मिल रही है ✅।


🇮🇳 असंगठित श्रम बाजार में डिजिटल समाधान की बढ़ती मांग

भारत में करोड़ों की संख्या में कॉन्ट्रैक्ट और ब्लू-कॉलर श्रमिक काम कर रहे हैं, लेकिन अब भी इस सेक्टर का बड़ा हिस्सा अनौपचारिक व्यवस्थाओं पर निर्भर है। सरकार की डिजिटल पहल, लेबर कंप्लायंस और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर पर बढ़ते फोकस के बीच Arthum जैसे प्लेटफॉर्म्स की मांग तेजी से बढ़ रही है 📲।


🌟 निवेशकों का भरोसा और भविष्य की दिशा

Caret Capital और अन्य निवेशकों की भागीदारी यह दिखाती है कि Arthum के बिजनेस मॉडल और विजन पर निवेशकों को भरोसा है 👍। आने वाले समय में कंपनी अपने प्लेटफॉर्म को और एडवांस बनाने, नए सेक्टर्स में कदम रखने और देशभर में अपनी मौजूदगी मजबूत करने पर फोकस करेगी।

कुल मिलाकर, Arthum की यह फंडिंग भारत के वर्कफोर्स मैनेजमेंट और ब्लू-कॉलर फिनटेक इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है 🚀।

Read more :⚽📊 स्पोर्ट्स‑टेक स्टार्टअप StepOut ने जुटाए 1.5 मिलियन डॉलर,

⚽📊 स्पोर्ट्स‑टेक स्टार्टअप StepOut ने जुटाए 1.5 मिलियन डॉलर,

StepOut

बेंगलुरु स्थित स्पोर्ट्स‑टेक स्टार्टअप StepOut ने अपने Pre‑Series A फंडिंग राउंड में 💰 1.5 मिलियन डॉलर (करीब ₹12.5 करोड़) जुटाए हैं। इस निवेश राउंड का नेतृत्व Zerodha के Rainmatter ने किया है 🤝। इसके अलावा SucSEED Innovation Fund और Misfits Capital ने भी इस राउंड में भाग लिया है। गौरतलब है कि Rainmatter ने इससे पहले 2024 के अंत में कंपनी के सीड राउंड में भी निवेश किया था।

यह फंडिंग ऐसे समय में आई है जब 📈 खेलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिटिक्स और कंप्यूटर विज़न का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, खासकर ⚽ फुटबॉल जैसे ग्लोबल खेल में।


💡 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा

StepOut ने बताया कि इस नई पूंजी का उपयोग कई अहम रणनीतिक योजनाओं में किया जाएगा।
🌍 सबसे पहले कंपनी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार करेगी।
🤖 इसके साथ‑साथ AI और कंप्यूटर विज़न टेक्नोलॉजी में निवेश बढ़ाया जाएगा, ताकि मैच एनालिसिस और प्लेयर ट्रैकिंग और ज्यादा सटीक हो सके।

फिलहाल StepOut का फोकस फुटबॉल पर है ⚽, लेकिन आगे चलकर कंपनी अमेच्योर स्पोर्ट्स और अन्य खेलों में भी एंट्री करने की योजना बना रही है 🏀🏏।


👥 कंपनी की शुरुआत और विज़न

StepOut की स्थापना Jeet Karmakar और Sayak Ghosh ने की थी। दोनों संस्थापकों का मानना है कि पारंपरिक कोचिंग और स्काउटिंग सिस्टम में 📋 डेटा और टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल नहीं हो पाता।

StepOut का उद्देश्य खेलों में डेटा‑ड्रिवन डिसीजन मेकिंग को बढ़ावा देना है। इसी सोच के साथ कंपनी ने एक AI‑पावर्ड फुटबॉल परफॉर्मेंस और इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जो खिलाड़ियों के विकास, मैच एनालिसिस और स्काउटिंग में मदद करता है 📊।


🚀 तेजी से बढ़ता StepOut प्लेटफॉर्म

पिछले फंडिंग राउंड के बाद से StepOut ने जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की है 📈। कंपनी के अनुसार:

✅ अब तक 25,000+ मैचों का विश्लेषण
✅ 1.5 लाख से अधिक खिलाड़ियों की ट्रैकिंग
✅ 3 गुना सालाना रेवेन्यू ग्रोथ
✅ 90% कस्टमर रिन्यूअल रेट

फिलहाल StepOut 🌐 23 देशों में 120 से ज्यादा क्लबों, अकादमियों और फेडरेशनों के साथ काम कर रहा है।


🧠 एडवांस टेक्नोलॉजी और फीचर्स

StepOut का प्लेटफॉर्म आधुनिक फुटबॉल एनालिटिक्स से लैस है। इसमें शामिल हैं:

⚙️ AI‑ड्रिवन मैच एनालिसिस
🎥 ऑटोमेटेड हाइलाइट्स
📊 परफॉर्मेंस डैशबोर्ड
⏱️ लाइव मैच एनालिटिक्स
📐 एडवांस मेट्रिक्स जैसे xG, xA, PPDA और Player Impact Score

इन फीचर्स की मदद से कोच और खिलाड़ी केवल अनुभव के आधार पर नहीं, बल्कि डेटा के आधार पर फैसले ले पाते हैं 🎯।


🏆 बड़े टूर्नामेंट और क्लबों के साथ काम

StepOut का प्लेटफॉर्म कई बड़े टूर्नामेंट्स में इस्तेमाल किया गया है, जिनमें Dream Sports Championship और अन्य घरेलू प्रतियोगिताएं शामिल हैं 🏟️।

कंपनी जिन प्रमुख क्लबों और संस्थाओं के साथ काम कर रही है, उनमें शामिल हैं:
🔹 AFC Ajax
🔹 Rayo Vallecano
🔹 Bengaluru FC
🔹 Hong Kong FC
🔹 All India Football Federation (AIFF)

इसके अलावा StepOut ⚡ Real Madrid, Chelsea, Fulham और Espanyol जैसे ग्लोबल क्लबों के साथ पायलट प्रोजेक्ट भी चला रहा है।


💼 निवेशकों का भरोसा

Rainmatter by Zerodha का दोबारा निवेश करना इस बात का संकेत है कि निवेशकों को StepOut के बिजनेस मॉडल और टीम पर पूरा भरोसा है 👍। स्पोर्ट्स‑टेक सेक्टर में AI और एनालिटिक्स की मांग तेजी से बढ़ रही है, और StepOut इसी ट्रेंड पर सवार है।


🔮 आगे की राह

भारत और दुनिया भर में फुटबॉल की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है 🌍⚽। ऐसे में टेक्नोलॉजी‑आधारित परफॉर्मेंस एनालिसिस की जरूरत भी बढ़ेगी।

StepOut का लक्ष्य है कि वह भारतीय स्पोर्ट्स‑टेक स्टार्टअप्स को ग्लोबल लेवल पर पहचान दिलाए और खेलों को ज्यादा स्मार्ट, डेटा‑ड्रिवन और प्रभावी बनाए 🚀।

कुल मिलाकर, StepOut की यह फंडिंग भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक मजबूत और सकारात्मक संकेत है 💪।

Read more :☁️📞 Exotel के लिए FY25 बना ऐतिहासिक साल,

📉 Amagi का शेयर बाजार में फीका डेब्यू,

Amagi

एडटेक यूनिकॉर्न Amagi Media Labs ने भारतीय शेयर बाजार में एंट्री तो ली, लेकिन शुरुआत उम्मीदों के मुताबिक नहीं रही 😕। मजबूत निवेशक रुचि और भारी सब्सक्रिप्शन के बावजूद कंपनी के शेयर आईपीओ प्राइस से नीचे लिस्ट हुए।

📊 बेंगलुरु स्थित Amagi के शेयर
🔹 BSE: ₹317
🔹 NSE: ₹318
पर लिस्ट हुए, जो कि ₹361 के इश्यू प्राइस से करीब 12% कम है।

हालांकि ⏳ लिस्टिंग के बाद शेयर में थोड़ी रिकवरी देखी गई और यह ₹349 के आसपास ट्रेड करता नजर आया।


🚀 IPO को मिला जबरदस्त रिस्पॉन्स

Amagi का IPO निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय रहा 👏
✔️ कुल सब्सक्रिप्शन: 30x+
✔️ QIB कैटेगरी: 30x से ज्यादा
✔️ HNI निवेशक: करीब 40x
✔️ Retail निवेशक: 9–10x

इसके बावजूद डिस्काउंट पर लिस्टिंग यह दिखाती है कि मौजूदा बाजार में निवेशक वैल्यूएशन को लेकर सतर्क हैं ⚠️।


💰 ₹1,789 करोड़ का IPO: पैसा कहां लगेगा?

Amagi का IPO दो हिस्सों में था 👇
🟢 Fresh Issue – टेक्नोलॉजी और डेटा प्लेटफॉर्म मजबूत करने के लिए
🟠 Offer For Sale (OFS) – मौजूदा निवेशकों को आंशिक एग्जिट

📌 कंपनी ने IPO से पहले ₹805 करोड़ एंकर निवेशकों से भी जुटाए थे।


🖥️ Amagi का बिजनेस क्या है?

2008 में शुरू हुई Amagi एक
🎯 Cloud‑managed advertising platform है
जो खासतौर पर
📺 Connected TV (CTV)
📡 Programmatic Advertising
पर फोकस करता है।

🌍 कंपनी की ज्यादातर कमाई अंतरराष्ट्रीय बाजारों, खासकर US से आती है।


📈 तेजी से बढ़ता कारोबार

Amagi की ग्रोथ कहानी काफी मजबूत रही है 💪
📅 FY25 Revenue: ₹1,162 करोड़
📅 H1 FY26 Revenue: ₹706 करोड़
💵 H1 FY26 Profit: ₹6.5 करोड़

ये आंकड़े दिखाते हैं कि कंपनी स्केल के साथ‑साथ मुनाफे की दिशा में भी बढ़ रही है 📊।


🏦 Market Cap और निवेशकों की नजर

📌 मौजूदा मार्केट कैप: ₹7,570 करोड़ (~$841M)
हालांकि शुरुआत धीमी रही, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि 📉 यह बाजार की अनिश्चितता का असर है, न कि कंपनी की कमजोरी।


🔮 आगे क्या?

CTV और डिजिटल एडवरटाइजिंग का बाजार तेजी से बढ़ रहा है 🚀।
अगर Amagi अपनी टेक्नोलॉजी, डेटा और ग्लोबल एक्सपेंशन पर फोकस बनाए रखती है, तो 📈 आने वाले समय में इसके शेयरों में मजबूती देखने को मिल सकती है।

👉 निष्कर्ष:
भले ही लिस्टिंग फीकी रही हो, लेकिन Amagi की ग्रोथ स्टोरी अभी खत्म नहीं हुई है ✨।

Read more :☁️📞 Exotel के लिए FY25 बना ऐतिहासिक साल,

☁️📞 Exotel के लिए FY25 बना ऐतिहासिक साल,

Exotel

क्लाउड कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म Exotel के लिए वित्त वर्ष FY25 एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ है 🎯। कंपनी ने न सिर्फ ₹500 करोड़ से ज्यादा का कुल राजस्व हासिल किया, बल्कि कई वर्षों के नुकसान के बाद मुनाफे में वापसी भी की 💰। यह उपलब्धि बेहतर खर्च नियंत्रण, स्थिर ऑपरेटिंग ग्रोथ और मजबूत यूनिट इकनॉमिक्स की वजह से संभव हो पाई।

Registrar of Companies (RoC) से मिले कंसॉलिडेटेड वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, Exotel का ऑपरेटिंग रेवेन्यू FY25 में 10% बढ़कर ₹490.5 करोड़ हो गया, जो FY24 में ₹444.5 करोड़ था 📈। अन्य आय को मिलाकर कंपनी की कुल आय ₹507 करोड़ रही, जबकि पिछले साल यह ₹460 करोड़ थी।


🧩 Exotel क्या करती है?

Exotel एक क्लाउड-बेस्ड कम्युनिकेशन कंपनी है, जो बिज़नेस को 📞 वॉइस कॉल, 💬 SMS और 🏢 कॉन्टैक्ट सेंटर सॉल्यूशंस उपलब्ध कराती है। इसके प्लेटफॉर्म की मदद से कंपनियां अपने ग्राहकों से बेहतर और तेज़ी से जुड़ पाती हैं।

डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के इस दौर में Exotel की सेवाएं स्टार्टअप्स से लेकर बड़े एंटरप्राइजेज तक के लिए बेहद अहम बन चुकी हैं 🚀।


🇮🇳🌍 घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार से मजबूत कमाई

FY25 में Exotel की कमाई का बड़ा हिस्सा भारत से आया 🇮🇳।

  • घरेलू सेवाओं से रेवेन्यू 9.5% बढ़कर ₹416 करोड़ पहुंच गया
  • वहीं एक्सपोर्ट सर्विसेज से आय 16% बढ़कर ₹74 करोड़ हो गई 🌍

यह साफ दिखाता है कि Exotel भारत में मजबूत स्थिति बनाए हुए है, साथ ही विदेशी बाजारों में भी धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत कर रही है।


💸 खर्चों पर नियंत्रण बना मुनाफे की कुंजी

Exotel के मुनाफे में आने की सबसे बड़ी वजह रही खर्चों पर सख्त नियंत्रण 🔍।

  • टेलीफोन और पोस्टेज खर्च सबसे बड़ा खर्च रहा, जो कुल लागत का करीब 44% है। यह FY25 में 9% बढ़कर ₹212 करोड़ हो गया 📞
  • वहीं कर्मचारी लाभ खर्च में बड़ी कटौती हुई, जो 21% घटकर ₹147 करोड़ रह गया 👥

अन्य खर्चों में शामिल हैं:

  • 📢 विज्ञापन खर्च: ₹12.5 करोड़
  • ⚖️ लीगल खर्च: ₹10 करोड़
  • 🧾 अन्य खर्च: ₹77.5 करोड़

कुल मिलाकर, कंपनी ने कुल खर्च 4% घटाकर ₹481 करोड़ कर लिए, जो FY24 में ₹499 करोड़ थे ⬇️।


📊 घाटे से मुनाफे तक का सफर

खर्चों में कटौती और स्थिर राजस्व वृद्धि का असर सीधा नतीजों पर पड़ा ✔️।

  • FY24 में Exotel को ₹37 करोड़ का नुकसान हुआ था ❌
  • FY25 में कंपनी ने ₹20 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया ✅

साथ ही,

  • ROCE बढ़कर 2.46%
  • EBITDA मार्जिन सुधरकर 6.83% हो गया

यूनिट इकनॉमिक्स भी बेहतर हुए। FY25 में Exotel ने ₹1 कमाने के लिए सिर्फ ₹0.98 खर्च किए, जबकि पिछले साल यह ₹1.12 था 💡।


💼 मजबूत बैलेंस शीट, लेकिन कुछ चुनौतियां भी

मार्च 2025 तक कंपनी के पास:

  • 💰 कैश और बैंक बैलेंस: ₹131 करोड़
  • 📦 करेंट एसेट्स: ₹290 करोड़

हालांकि, मुनाफे के बावजूद Exotel को लीडरशिप चर्न की चुनौती का सामना करना पड़ा है ⚠️। 2024 के अंत से कई सीनियर अधिकारियों ने कंपनी छोड़ी, जिनमें को-फाउंडर और COO ईश्वर श्रीधरन भी शामिल हैं।


🤝 निवेशकों का भरोसा बरकरार

स्टार्टअप डेटा प्लेटफॉर्म TheKredible के अनुसार, Exotel अब तक $100 मिलियन से अधिक की फंडिंग जुटा चुकी है 💵।
इसके प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:

  • A91 Partners (25.7% हिस्सेदारी)
  • Blume Ventures
  • Sistema Asia

🧠 निष्कर्ष

FY25, Exotel के लिए एक टर्नअराउंड ईयर साबित हुआ है 🔄। मुनाफे में वापसी, बेहतर खर्च नियंत्रण और स्थिर ग्रोथ से यह साफ है कि कंपनी का बिज़नेस मॉडल अब ज्यादा मजबूत हो चुका है। हालांकि, लीडरशिप बदलाव और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच आने वाले साल Exotel के लिए बेहद अहम होंगे 👀।

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💳 Cashfree Payments का बड़ा ESOP Buyback 400+ कर्मचारियों को मिलेगा लाभ

Cashfree Payments

बेंगलुरु‑आधारित फिनटेक कंपनी Cashfree Payments ने अपने कर्मचारियों के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए ESOP (Employee Stock Ownership Plan) Buyback प्रोग्राम की घोषणा की है। इस कार्यक्रम के तहत कंपनी ने 400 से अधिक कर्मचारियों को शामिल किया है, जिनमें 175 पूर्व कर्मचारी भी शामिल हैं। यह फैसला मौजूदा और पूर्व टीम सदस्यों को उनकी मेहनत का प्रत्यक्ष वित्तीय लाभ देने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।

👥 कर्मचारियों को मिली लिक्विडिटी

इस ESOP buyback का मुख्य उद्देश्य उन कर्मचारियों को लिक्विडिटी प्रदान करना है, जिनके पास पहले से वेस्टेड (vested) स्टॉक ऑप्शंस मौजूद हैं। यानी जिन कर्मचारियों ने कंपनी में काम करते हुए शेयर पाने का अधिकार अर्जित कर लिया था, वे अब उन शेयरों को बेचकर वास्तविक नकद लाभ हासिल कर सकेंगे।

हालांकि, Cashfree Payments ने इस buyback के कुल आकार (size) या किस वैल्यूएशन पर शेयर वापस खरीदे गए, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। इसके बावजूद, उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम कर्मचारियों के भरोसे और कंपनी की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

💰 फंडिंग के बाद आया बड़ा फैसला

Cashfree का यह ESOP buyback ऐसे समय में आया है, जब कंपनी ने पिछले साल $53 मिलियन (करीब ₹440 करोड़) की फंडिंग जुटाई थी। इस निवेश दौर का नेतृत्व Krafton ने किया था, जो पहले भी कई भारतीय टेक स्टार्टअप्स में निवेश कर चुका है।

अब तक Cashfree Payments ने कुल मिलाकर $95 मिलियन की फंडिंग जुटाई है। इसके प्रमुख निवेशकों में Y CombinatorSmilegate Investments और State Bank of India (SBI) जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इस मजबूत निवेश आधार ने कंपनी को कर्मचारियों के लिए ESOP buyback जैसे फैसले लेने में सक्षम बनाया है।

🏗️ कंपनी का परिचय और बिज़नेस मॉडल

2015 में स्थापित Cashfree Payments एक पेमेंट्स और पAYOUTS इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म के रूप में काम करती है। कंपनी का प्लेटफॉर्म स्टार्टअप्स से लेकर बड़ी इंटरनेट कंपनियों तक को भुगतान स्वीकार करने और भुगतान भेजने की सुविधाएं देता है।

Cashfree का दावा है कि वह सालाना $80 बिलियन से अधिक के भुगतान ट्रांजैक्शंस प्रोसेस करती है और इसके प्लेटफॉर्म पर 10 लाख से अधिक मर्चेंट्स जुड़े हुए हैं। इनमें ई‑कॉमर्स कंपनियां, फिनटेक स्टार्टअप्स और बड़े डिजिटल बिज़नेस शामिल हैं।

🌍 क्रॉस‑बॉर्डर पेमेंट्स पर फोकस

घरेलू बाजार के साथ‑साथ Cashfree Payments ने क्रॉस‑बॉर्डर पेमेंट्स बिज़नेस में भी तेजी से विस्तार किया है। फिलहाल यह सेगमेंट कंपनी के कुल रेवेन्यू में करीब 10% का योगदान देता है।

पिछले एक साल में अंतरराष्ट्रीय ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में मजबूत ग्रोथ देखने को मिली है, जिससे यह साफ है कि कंपनी भारत के बाहर भी अपने समाधान को स्केल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

📊 वित्तीय प्रदर्शन की तस्वीर

स्टार्टअप डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म TheKredible के अनुसार, Cashfree Payments का FY25 में ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹640 करोड़ रहा, जो FY24 के ₹643 करोड़ के लगभग बराबर है। यानी रेवेन्यू स्तर पर कंपनी की ग्रोथ फिलहाल स्थिर रही।

हालांकि, कंपनी का नेट लॉस बढ़कर ₹154 करोड़ हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष में ₹135 करोड़ था। इस तरह नुकसान में करीब 14% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ा हुआ नुकसान कंपनी के विस्तार, टेक्नोलॉजी निवेश और नए बिज़नेस सेगमेंट्स पर खर्च की वजह से हो सकता है।

🔄 2026 में ESOP Buyback की बढ़ती रफ्तार

Cashfree का यह ESOP buyback 2026 का तीसरा बड़ा ESOP लिक्विडिटी इवेंट है। इससे पहले:

  • 🏥 Innovaccer ने करीब $75 मिलियन का ESOP buyback पूरा किया
  • 💻 BrowserStack ने $125 मिलियन के ESOP लिक्विडिटी प्रोग्राम की घोषणा की

ये आंकड़े दिखाते हैं कि 2026 में स्टार्टअप्स दोबारा कर्मचारियों को शेयर‑आधारित रिवार्ड्स का वास्तविक लाभ देने की दिशा में सक्रिय हो रहे हैं।

📉 पिछले वर्षों से तुलना

अगर बीते वर्षों की बात करें तो:

  • 2025 में ESOP buybacks सिर्फ $75 मिलियन के आसपास रहे
  • 2024 में यह आंकड़ा करीब $190 मिलियन था
  • 2023 में ESOP payouts और buybacks $802 मिलियन के उच्च स्तर पर थे
  • 2022 में लगभग $200 मिलियन, और
  • 2021 में करीब $440 मिलियन का ESOP लिक्विडिटी देखने को मिला था

इस तुलना से साफ है कि 2026 में फिर से ESOP buyback गतिविधियों में तेजी लौट रही है।

🔮 आगे की राह

Cashfree Payments का ESOP buyback न सिर्फ कर्मचारियों के लिए एक सकारात्मक संकेत है, बल्कि यह भारतीय फिनटेक इकोसिस्टम की परिपक्वता को भी दर्शाता है। ऐसे कार्यक्रम स्टार्टअप्स को टैलेंट बनाए रखने, भरोसा मजबूत करने और दीर्घकालिक विकास के लिए अहम भूमिका निभाते हैं।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि Cashfree अपने रेवेन्यू ग्रोथ और मुनाफे के रास्ते को कैसे संतुलित करता है, और क्या वह आगे भी कर्मचारियों के लिए ऐसे और लिक्विडिटी इवेंट्स लेकर आती है।

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💳📊 Pine Labs Setu के ज़रिये Agya Technologies में 100%

Pine Labs

फिनटेक यूनिकॉर्न Pine Labs 🦄 ने अपने बिज़नेस विस्तार की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। कंपनी अब RBI‑लाइसेंस प्राप्त अकाउंट एग्रीगेटर Agya Technologies में पूरी यानी 100% हिस्सेदारी लेने की तैयारी कर रही है। यह अधिग्रहण Pine Labs की फिनटेक इंफ्रास्ट्रक्चर यूनिट Setu के माध्यम से किया जाएगा।

🏦 RBI से मिली मंज़ूरी

नियामकीय फाइलिंग के मुताबिक, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने Setu (BrokenTusk Technologies Pvt Ltd) को Agya Technologies में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 100% करने की मंज़ूरी दे दी है। अभी तक Agya, Setu की एक सहयोगी (associate) कंपनी के रूप में काम कर रही थी।

📈 मौजूदा हिस्सेदारी और आगे की योजना

वर्तमान में Pine Labs के पास Agya Technologies में करीब 25% हिस्सेदारी है। कंपनी अब शेष हिस्सेदारी भी खरीदने की योजना बना रही है। यह अधिग्रहण एक या एक से अधिक चरणों (tranches) में पूरा किया जा सकता है।

यह कदम Pine Labs की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह अपने डिजिटल पेमेंट और डेटा‑आधारित फिनटेक इकोसिस्टम को और मज़बूत करना चाहती है।

💡 तीन डिजिटल पेमेंट लाइसेंस के बाद बड़ा दांव

यह फैसला ऐसे समय आया है जब Pine Labs ने हाल ही में RBI से तीनों डिजिटल पेमेंट लाइसेंस हासिल किए हैं 👇

  • 🏪 ऑफलाइन पेमेंट
  • 🛒 ऑनलाइन मर्चेंट पेमेंट
  • 🌍 क्रॉस‑बॉर्डर ट्रांजैक्शन

इन लाइसेंसों के साथ Pine Labs अब व्यापारियों को एंड‑टू‑एंड डिजिटल पेमेंट सॉल्यूशंस देने में सक्षम हो गई है।

💰 वित्तीय प्रदर्शन में सुधार

वित्तीय मोर्चे पर भी Pine Labs ने मज़बूत प्रदर्शन किया है 📊

  • Q2 FY26 में रेवेन्यू: ₹650 करोड़
  • Q2 FY25 में रेवेन्यू: ₹551 करोड़

इतना ही नहीं, कंपनी ने ₹6 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में उसे ₹32 करोड़ का नुकसान हुआ था। यह लागत नियंत्रण और बेहतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी का संकेत है।

📉➡️📈 शेयर बाज़ार में सफल एंट्री

Pine Labs ने शेयर बाज़ार में भी दमदार शुरुआत की 🚀

  • IPO प्राइस: ₹221
  • लिस्टिंग प्राइस: ₹242 (लगभग 9.5% प्रीमियम)

फिलहाल कंपनी का शेयर ₹240.85 पर ट्रेड कर रहा है और इसका मार्केट कैप करीब ₹26,406 करोड़ (लगभग $2.9 बिलियन) है।

🔗 Agya Technologies क्यों है अहम?

Agya Technologies एक RBI‑लाइसेंस प्राप्त अकाउंट एग्रीगेटर है, जो ग्राहकों की वित्तीय जानकारी को सुरक्षित और सहमति‑आधारित तरीके से साझा करने में मदद करता है 🔐। इससे

  • लोन प्रोसेसिंग
  • क्रेडिट असेसमेंट
  • फाइनेंशियल प्रोडक्ट डिलीवरी

तेज़ और पारदर्शी बनती है।

🔮 आगे की राह

Agya Technologies में 100% हिस्सेदारी Pine Labs को डेटा‑ड्रिवन फिनटेक सॉल्यूशंस में और मज़बूत बनाएगी। डिजिटल पेमेंट लाइसेंस, बेहतर फाइनेंशियल्स और सफल IPO के साथ Pine Labs भारतीय फिनटेक सेक्टर में अपनी पकड़ और मजबूत कर रही है 🇮🇳✨

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🚀 Rapido की तेज़ रफ्तार ग्रोथ बढ़ती कमाई, 

Rapido

मोबिलिटी प्लेटफॉर्म Rapido  बीते एक साल से लगातार सुर्खियों में बना हुआ है 📰। शुरुआती निवेशकों जैसे TVS, Swiggy, Prosus और Accel को शानदार रिटर्न मिलने के बाद रैपिडो को उस वक्त और ज्यादा पहचान मिली, जब Uber के CEO दारा खोसरोशाही ने इसे सार्वजनिक रूप से एक बड़ा प्रतिद्वंद्वी बताया 👀।
वित्त वर्ष 2025 (FY25) में कंपनी ने तेज़ रेवेन्यू ग्रोथ के साथ‑साथ अपने घाटे को भी काफ़ी हद तक कम किया है 💪।

📊 Rapido 44% की रेवेन्यू ग्रोथ

Registrar of Companies (RoC) में दाखिल आंकड़ों के मुताबिक, FY25 में रैपिडो का ऑपरेशनल रेवेन्यू बढ़कर 934 करोड़ रुपये हो गया 💰, जो FY24 में 648 करोड़ रुपये था।
यानी कंपनी ने सालाना आधार पर 44% की मजबूत ग्रोथ दर्ज की 🚀। यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है, जब भारत का मोबिलिटी सेक्टर कड़ी प्रतिस्पर्धा और नियमों की अनिश्चितता से जूझ रहा है ⚠️।

🔄 रेवेन्यू के बदलते स्रोत

रैपिडो की कमाई का बड़ा हिस्सा उसके प्लेटफॉर्म पर पूरी होने वाली दो‑पहिया, तीन‑पहिया और चार‑पहिया राइड्स से आता है 🛵🚕।
हालांकि FY25 में प्लेटफॉर्म‑आधारित राइड रेवेन्यू 23.5% घटकर 277 करोड़ रुपये रह गया, जो कुल रेवेन्यू का केवल 29% था 📉।

इसके उलट, कंपनी का डिलीवरी बिज़नेस तेज़ी से आगे बढ़ा 📦🔥।
खाना और पार्सल डिलीवरी से कमाई 28.3% बढ़कर 340 करोड़ रुपये हो गई, जिससे यह FY25 में रैपिडो का सबसे बड़ा रेवेन्यू सेगमेंट बन गया 🥇। FY24 में जहां पैसेंजर राइड्स सबसे आगे थीं, वहीं FY25 में डिलीवरी बिज़नेस ने बाज़ी मार ली।

⭐ सब्सक्रिप्शन बना ग्रोथ का नया इंजन

FY25 में रैपिडो के लिए सबसे बड़ा गेम‑चेंजर उसका सब्सक्रिप्शन मॉडल रहा 💳।
कैप्टन्स और यूज़र्स से राइड पास व अन्य बेनिफिट्स के जरिए मिलने वाली इनकम लगभग 14 गुना बढ़कर 275 करोड़ रुपये पहुंच गई 🚀।

इसके अलावा:

  • 🚗 पैसेंजर ट्रांसपोर्ट सर्विस: 21 करोड़ रुपये
  • 📢 विज्ञापन इनकम: 16 करोड़ रुपये
  • 🅿️ अन्य ऑपरेशनल इनकम: 5 करोड़ रुपये

निवेश से मिलने वाले ब्याज के रूप में कंपनी ने 69 करोड़ रुपये भी कमाए 💹। इस तरह FY25 में रैपिडो की कुल आय 1,003 करोड़ रुपये रही, जो FY24 में 579 करोड़ रुपये थी।

💸 खर्च और लागत का दबाव

खर्चों की बात करें तो कैप्टन्स को दिए जाने वाले इंसेंटिव और डिलीवरी चार्जेज सबसे बड़ा खर्च बने रहे 💸।
FY25 में यह खर्च 8.7% बढ़कर 500 करोड़ रुपये हो गया, जो कुल लागत का करीब 40% है।

अन्य बड़े खर्च:

  • 👨‍💼 कर्मचारी खर्च: 207 करोड़ रुपये (+20%)
  • 📣 विज्ञापन व प्रमोशन: 252 करोड़ रुपये
  • 🔬 रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D): 108 करोड़ रुपये

इन सभी के चलते FY25 में कुल खर्च 1,261 करोड़ रुपये पहुंच गया।

📉 घाटा घटा, लेकिन मुनाफ़ा अभी दूर

मजबूत ग्रोथ के चलते रैपिडो ने अपना नेट लॉस 30.5% घटाकर 258 करोड़ रुपये कर लिया 😌, जो FY24 में 371 करोड़ रुपये था।
हालांकि, EBITDA (-19.59%) और ROCE (-13.58%) अभी भी नेगेटिव हैं, यानी मुनाफ़े की मंज़िल अभी बाकी है ⏳।
यूनिट इकॉनॉमिक्स के हिसाब से कंपनी ने 1 रुपये कमाने के लिए 1.35 रुपये खर्च किए।

💼 फंडिंग और आगे की राह

स्टार्टअप डेटा प्लेटफॉर्म TheKredible के अनुसार, रैपिडो अब तक 550 मिलियन डॉलर से ज्यादा की फंडिंग जुटा चुका है 💵। इसमें WestBridge के नेतृत्व में 200 मिलियन डॉलर का यूनिकॉर्न राउंड भी शामिल है 🦄।

रेवेन्यू ब्रेक‑अप साफ़ दिखाता है कि गुड्स डिलीवरी बिज़नेस में ज्यादा ग्रोथ और बेहतर मार्जिन की संभावना है 📦📈, जबकि पैसेंजर सेगमेंट अभी भी चुनौती बना हुआ है।
दो‑पहिया राइड्स ने एक नया बाज़ार तैयार किया है और नियमों में बदलाव के लिए दबाव भी डाला है, जिससे रैपिडो एक मज़बूत चैलेंजर से लीडर की ओर बढ़ता दिख रहा है 🔥।

अब बड़ा सवाल यही है 🤔—
क्या रैपिडो लास्ट‑माइल डिलीवरी पर ज्यादा फोकस करेगा या फिर पैसेंजर बिज़नेस में नई ताकत के साथ वापसी करेगा? इसका जवाब आने वाला वक्त ही देगा ⏰।

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🤖🎙️ एआई वॉइस स्टार्टअप ElevenLabs की बड़ी छलांग

ElevenLabs

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में तेजी से उभर रही कंपनी ElevenLabs 🌍 एक बार फिर चर्चा में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह लंदन-आधारित एआई वॉइस टेक्नोलॉजी स्टार्टअप एक नए फंडिंग राउंड को बंद करने की तैयारी में है, जिससे इसका वैल्यूएशन लगभग दोगुना होकर $11 बिलियन (करीब ₹91,000 करोड़) तक पहुंच सकता है 💰। अगर यह फंडिंग पूरी होती है, तो ElevenLabs ब्रिटेन की सबसे मूल्यवान एआई कंपनी बन जाएगी 🇬🇧।

यह बातचीत ऐसे समय पर हो रही है जब कंपनी ने सिर्फ चार महीने पहले ही एक सेकेंडरी शेयर सेल के जरिए $6.6 बिलियन के वैल्यूएशन पर पूंजी जुटाई थी 📈। इतने कम समय में वैल्यूएशन में संभावित उछाल यह दिखाता है कि निवेशकों का भरोसा कंपनी पर लगातार मजबूत हो रहा है 🤝।


🚀 2022 में शुरुआत, असाधारण ग्रोथ

ElevenLabs की स्थापना 2022 में लंदन में पोलैंड मूल के उद्यमियों माती स्टैनिशेव्स्की और पिओत्र डाबकोव्स्की ने की थी 👨‍💻👨‍💻। बहुत कम समय में कंपनी ने जिस रफ्तार से विकास किया है, वह यूरोप के एआई स्टार्टअप इकोसिस्टम में इसे खास बनाता है ⭐।

कंपनी को Sequoia Capital, Iconiq और Andreessen Horowitz जैसे वैश्विक स्तर के निवेशकों का समर्थन मिला है 🏦। अब ElevenLabs सैकड़ों मिलियन डॉलर की नई फंडिंग जुटाने की योजना बना रही है, जिससे रिसर्च, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और अंतरराष्ट्रीय विस्तार को और मजबूती मिलेगी 🌐।


🔊 वॉइस टेक्नोलॉजी से ग्लोबल रेवेन्यू इंजन तक

ElevenLabs की सबसे बड़ी ताकत इसकी AI-पावर्ड वॉइस जेनरेशन टेक्नोलॉजी है 🎧, जो बेहद वास्तविक और मानवीय आवाज़ें तैयार करती है। इस तकनीक का उपयोग कई क्षेत्रों में तेजी से बढ़ा है, जैसे:

  • 📞 कस्टमर सर्विस और कॉल सेंटर्स
  • 📝 टेक्स्ट-टू-स्पीच प्लेटफॉर्म
  • 🌍 मल्टी-लैंग्वेज डबिंग
  • 📚 ऑडियोबुक और डिजिटल कंटेंट

इस बढ़ती मांग का असर कंपनी की कमाई पर भी साफ दिखता है 💹। पिछले साल ElevenLabs ने $330 मिलियन की एनुअल रिकरिंग रेवेन्यू (ARR) दर्ज की, जो कुछ ही महीनों पहले बताए गए $200 मिलियन ARR से कहीं ज्यादा है 🚀।


🌎 वैश्विक मौजूदगी और अमेरिकी बाजार पर फोकस

हालांकि ElevenLabs की जड़ें लंदन में हैं 🇬🇧, लेकिन कंपनी का विज़न पूरी तरह ग्लोबल है 🌐। इसके मुख्यालय लंदन और न्यूयॉर्क में हैं, जबकि वारसॉ, बेंगलुरु और टोक्यो में भी इसके ऑफिस मौजूद हैं 🏢।

अमेरिका में कंपनी का इनकॉरपोरेशन उसे वहां के वेंचर कैपिटल नेटवर्क तक आसान पहुंच देता है 🇺🇸, जिससे यह दुनिया के सबसे प्रतिस्पर्धी एआई फंडिंग मार्केट में मजबूती से खड़ी है 💪।


💸 फंडिंग इतिहास और निवेशकों का भरोसा

ElevenLabs का फंडिंग सफर इसकी ग्रोथ स्टोरी को साफ दिखाता है 📊।

  • 🗓️ जनवरी 2025 में कंपनी ने $180 मिलियन जुटाए, तब वैल्यूएशन $3.3 बिलियन था।
  • 🗓️ सितंबर 2025 में वैल्यूएशन दोगुना हो गया और कर्मचारियों को $100 मिलियन के शेयर बेचने का मौका मिला 👏।

इसके अलावा NEA, Smash Capital और FT Ventures जैसे बड़े निवेशक भी कंपनी से जुड़े हुए हैं 🤝।


🌍 यूरोप बनाम अमेरिका: एआई की रेस

अगर ElevenLabs का वैल्यूएशन $11 बिलियन तक पहुंचता है, तो यह यूरोप की टॉप एआई कंपनियों में शामिल हो जाएगी 🏆। यह फ्रांस की Mistral (लगभग $12 बिलियन) के करीब होगी और यूके की Wayve और Nscale जैसी कंपनियों से आगे निकल जाएगी 📈।

हालांकि, अमेरिका अब भी इस दौड़ में काफी आगे है 🇺🇸। उदाहरण के लिए, OpenAI का वैल्यूएशन लगभग $500 बिलियन बताया जाता है और यह आगे चलकर $800 बिलियन तक जा सकता है 🤯। इससे साफ है कि यूरोप में टैलेंट होने के बावजूद कैपिटल स्केलिंग एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।


🌟 यूरोप के लिए उम्मीद की किरण

इन सबके बीच ElevenLabs एक उम्मीद की किरण बनकर उभरा है ✨। यह उन चुनिंदा यूरोपीय एआई कंपनियों में से है जो बेहतरीन तकनीक और मजबूत कमर्शियल मॉडल दोनों को सफलतापूर्वक जोड़ पा रही हैं 🔗।

ElevenLabs की नई फंडिंग बातचीत सिर्फ एक वैल्यूएशन स्टोरी नहीं है, बल्कि यह संकेत भी है कि यूरोप भी अब वैश्विक स्तर की एआई कंपनियां खड़ी कर सकता है 🌍। आने वाले समय में यह स्टार्टअप न सिर्फ यूके, बल्कि पूरी दुनिया के एआई इकोसिस्टम में अहम भूमिका निभा सकता है 🚀।

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🚀 Verdict Capital Niko Bonatsos की नई वेंचर पारी

Niko Bonatsos

स्टार्टअप और वेंचर कैपिटल की दुनिया में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। 🌍
General Catalyst के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर Niko Bonatsos अब अपने नए वेंचर कैपिटल फंड की तैयारी में हैं। 🤝

💼 नया फंड, नई पहचान

निको ने उद्यमी और निवेशक माइकल फर्टिक के साथ मिलकर Verdict Capital नाम से नया फंड शुरू करने की योजना बनाई है।
इस फंड के लिए $250–300 मिलियन (करीब ₹2,000–2,500 करोड़) जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। 💰

⭐ हाई-ग्रोथ स्टार्टअप्स का अनुभव

निको बोनाट्सोस को शुरुआती निवेशों के लिए जाना जाता है।
उन्होंने पहले Discord 📱 और Mercor जैसे स्टार्टअप्स में निवेश किया है, जो आगे चलकर बड़ी कंपनियां बनीं।
General Catalyst में उन्होंने शुरुआती चरण के निवेशों का नेतृत्व किया और कई उभरते स्टार्टअप्स को पहचान दिलाई। 📈

🤖 माइकल फर्टिक की अहम भूमिका

माइकल फर्टिक पहले Heroic Ventures चला चुके हैं और डेवलपर टूल स्टार्टअप Cursor (Anysphere) के शुरुआती समर्थक रहे हैं।
वह अब भी सक्रिय उद्यमी हैं और जनरेटिव टेक्नोलॉजी पर आधारित एक नई कंपनी पर काम कर रहे हैं। 🧠⚙️

🌐 किन स्टार्टअप्स पर होगा फोकस?

Verdict Capital का फोकस होगा:

  • 🏗️ शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स
  • 💡 एडवांस टेक्नोलॉजी और इनोवेशन
  • 📍 सैन फ्रांसिस्को, न्यूयॉर्क और इज़राइल जैसे स्टार्टअप हब्स

⚖️ बदलती वेंचर कैपिटल इंडस्ट्री

आज कई वरिष्ठ निवेशक बड़ी फर्म्स छोड़कर अपने खुद के फंड शुरू कर रहे हैं।
हालांकि नया फंड जुटाना चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि लगभग 75% निवेश स्थापित फर्म्स को ही मिलता है। 📊
फिर भी, Verdict Capital अपने अनुभव और नेटवर्क के दम पर मजबूत शुरुआत की उम्मीद कर रहा है। 🔑

🔮 आगे क्या?

निको और माइकल की यह साझेदारी दिखाती है कि बड़े निवेशक अब सिर्फ स्टार्टअप्स पर नहीं, बल्कि खुद पर भी भरोसा कर रहे हैं। 🚀
आने वाले समय में Verdict Capital किन स्टार्टअप्स को सपोर्ट करेगा, इस पर सबकी नजर रहेगी। 👀

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