🛏️ SleepyCat की FY25 में 44% ग्रोथ,

SleepyCat

डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) मैट्रेस ब्रांड SleepyCat ने वित्त वर्ष 2025 (FY25) में मजबूत ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 44% बढ़कर 98 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो FY24 में 68 करोड़ रुपये था। खास बात यह रही कि तेजी से स्केलिंग के बावजूद कंपनी ने अपने घाटे को सिंगल डिजिट में बनाए रखा।

Registrar of Companies (RoC) से प्राप्त वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, कंपनी ने ग्रोथ और खर्च के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है।


📈 ऑपरेटिंग रेवेन्यू में 44% की उछाल

FY25 में SleepyCat का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 44% बढ़कर 98 करोड़ रुपये हो गया। यह ग्रोथ D2C मॉडल की मजबूती और ऑनलाइन सेल्स चैनल्स पर बढ़ती डिमांड को दर्शाती है।

कंपनी मुख्य रूप से अपनी वेबसाइट और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए मैट्रेस और स्लीप एक्सेसरीज बेचती है।


🛒 89% रेवेन्यू तैयार उत्पादों की बिक्री से

कंपनी की कुल आय का 89% हिस्सा तैयार उत्पादों (Finished Goods) की बिक्री से आया।

  • तैयार उत्पादों से रेवेन्यू 39% बढ़कर 87 करोड़ रुपये हो गया।
  • ट्रेडेड गुड्स (Reselling Products) से आय लगभग दोगुनी होकर 9.8 करोड़ रुपये पहुंच गई।

यह दर्शाता है कि कंपनी अपने कोर प्रोडक्ट पोर्टफोलियो के साथ-साथ अतिरिक्त प्रोडक्ट्स से भी ग्रोथ हासिल कर रही है।


💸 खर्चों में भी 44% की बढ़ोतरी

जहां रेवेन्यू बढ़ा, वहीं कंपनी के कुल खर्च भी 44% बढ़कर 108.5 करोड़ रुपये हो गए, जो FY24 में 75.5 करोड़ रुपये थे।

🔹 मटेरियल कॉस्ट

कंपनी की कुल लागत का लगभग आधा हिस्सा मटेरियल कॉस्ट से जुड़ा है।
यह खर्च 52% बढ़कर 54 करोड़ रुपये हो गया (FY24: 35.6 करोड़ रुपये)।

🔹 विज्ञापन खर्च

ब्रांड बिल्डिंग और ऑनलाइन मार्केटिंग पर कंपनी का फोकस जारी रहा।
एडवर्टाइजिंग खर्च 46% बढ़कर 14.6 करोड़ रुपये पहुंच गया।

🔹 कमीशन और लॉजिस्टिक्स

  • कमीशन खर्च 41% बढ़कर 11 करोड़ रुपये
  • डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स खर्च 56% बढ़कर 8.6 करोड़ रुपये

तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स ऑर्डर्स के कारण लॉजिस्टिक्स लागत में तेज उछाल देखा गया।

🔹 कर्मचारी लाभ खर्च

एम्प्लॉयी बेनिफिट खर्च 11% बढ़कर 10 करोड़ रुपये हो गया।


📉 घाटा बढ़ा, लेकिन कंट्रोल में

स्केल बढ़ने के साथ कंपनी का घाटा भी बढ़ा।

  • FY25 में नेट लॉस 29% बढ़कर 9 करोड़ रुपये हो गया (FY24: 7 करोड़ रुपये)।
  • EBITDA लॉस 9.6 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल 6.7 करोड़ रुपये था।
  • EBITDA मार्जिन लगभग -9.80% पर स्थिर रहा।

ध्यान देने वाली बात यह है कि कंपनी का घाटा अभी भी सिंगल डिजिट में है, जो D2C सेक्टर के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।


📊 ₹1 कमाने के लिए ₹1.11 खर्च

यूनिट इकोनॉमिक्स के आधार पर, कंपनी ने FY25 में 1 रुपये कमाने के लिए 1.11 रुपये खर्च किए।

यह अनुपात FY24 के समान ही रहा, जिससे संकेत मिलता है कि ग्रोथ के बावजूद लागत संरचना में बड़ा सुधार नहीं हुआ है।

वित्त वर्ष के अंत में कंपनी के पास 3 करोड़ रुपये का कैश और बैंक बैलेंस था, जबकि करंट एसेट्स 18.6 करोड़ रुपये रहे।


💰 अब तक जुटाए 5 मिलियन डॉलर

SleepyCat अब तक लगभग 5 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटा चुकी है।

कंपनी के प्रमुख निवेशकों में DSG Consumer Partners शामिल है, जिसने इस ब्रांड की शुरुआती ग्रोथ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

D2C ब्रांड्स के लिए सीमित फंडिंग के बावजूद स्थिर ग्रोथ दिखाना कंपनी की रणनीति को दर्शाता है।


🏁 प्रतिस्पर्धा का दबाव

मैट्रेस और स्लीप सॉल्यूशन सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा तेज हो चुकी है।

🛏️ The Sleep Company

प्रतिद्वंदी The Sleep Company का रेवेन्यू FY25 में 60% बढ़कर 499 करोड़ रुपये हो गया (FY24: 312 करोड़ रुपये)।
कंपनी ने अपने EBITDA घाटे को घटाकर 39 करोड़ रुपये कर लिया।

🛌 Wakefit

सेक्टर की बड़ी कंपनी Wakefit ने हाल ही में स्टॉक एक्सचेंज पर एंट्री की, हालांकि उसकी लिस्टिंग अपेक्षाकृत कमजोर रही।

Wakefit ने Q3 FY26 में 421 करोड़ रुपये का ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज किया और 34 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सेक्टर में बड़े खिलाड़ियों का दबदबा है, लेकिन मिड-साइज़ ब्रांड्स भी अपनी जगह बना रहे हैं।


🔎 आगे की राह

SleepyCat के लिए आने वाला समय काफी महत्वपूर्ण रहेगा।

कंपनी को:

  • यूनिट इकोनॉमिक्स सुधारने
  • लॉजिस्टिक्स और मटेरियल कॉस्ट कंट्रोल करने
  • ब्रांड डिफरेंशिएशन मजबूत करने
  • ऑफलाइन चैनल्स में विस्तार करने

जैसे कदम उठाने होंगे।

D2C मैट्रेस मार्केट में ग्राहक अनुभव, प्रोडक्ट क्वालिटी और डिलीवरी स्पीड सबसे बड़ा फैक्टर बन चुके हैं।


📝 निष्कर्ष

SleepyCat ने FY25 में मजबूत 44% रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है और 100 करोड़ रुपये के करीब पहुंच गई है। हालांकि घाटा बढ़ा है, लेकिन वह अभी भी सिंगल डिजिट में है, जो कंपनी की लागत नियंत्रण रणनीति को दर्शाता है।

तेजी से बढ़ते प्रतिस्पर्धी माहौल में SleepyCat को अपनी ब्रांड पोजिशनिंग और प्रॉफिटेबिलिटी पर फोकस बढ़ाना होगा।

अगर कंपनी यूनिट इकोनॉमिक्स सुधारने में सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में यह D2C स्लीप सेगमेंट में एक मजबूत दावेदार बन सकती है। 🚀

Read more :🏗️ IPO से पहले Infra.Market जुटाएगी ₹1,250 करोड़ का कर्ज,

🏗️ IPO से पहले Infra.Market जुटाएगी ₹1,250 करोड़ का कर्ज,

Infra.Market

मुंबई स्थित कंस्ट्रक्शन मैटेरियल्स प्लेटफॉर्म Infra.Market एक बार फिर बड़े फाइनेंशियल कदम को लेकर चर्चा में है। कंपनी ने IPO फाइल करने के कुछ ही महीनों बाद 1,250 करोड़ रुपये का डेब्ट (कर्ज) जुटाने का फैसला किया है। खास बात यह है कि यह फंडिंग कंपनी अपनी संपत्तियों और प्रमोटर्स की शेयरहोल्डिंग को गिरवी रखकर जुटा रही है।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब कंपनी पहले ही पब्लिक लिस्टिंग की तैयारी में जुटी हुई है।


📌 बोर्ड से मिली 1,25,000 NCDs जारी करने की मंजूरी

कंपनी के बोर्ड ने एक स्पेशल रेजोल्यूशन पास कर 1,25,000 नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) जारी करने को मंजूरी दी है। हर डिबेंचर की फेस वैल्यू 1 लाख रुपये होगी।

इन डिबेंचर्स को प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए जारी किया जाएगा और इससे अधिकतम 1,250 करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे।

NCDs कन्वर्टिबल नहीं होते, यानी इन्हें इक्विटी में नहीं बदला जा सकता। इससे कंपनी की हिस्सेदारी डाइल्यूट नहीं होगी, लेकिन उसे तय ब्याज चुकाना होगा।


💰 Ascertis Credit से जुटाए 700 करोड़ रुपये

कुल प्रस्तावित राशि में से 700 करोड़ रुपये पहले ही जुटाए जा चुके हैं। यह निवेश सिंगापुर आधारित प्राइवेट क्रेडिट प्लेटफॉर्म Ascertis Credit से आया है।

इसके लिए कंपनी ने 70,000 NCDs जारी किए हैं।

विदेशी प्राइवेट क्रेडिट फंड्स का इस तरह भारतीय ग्रोथ-स्टेज कंपनियों में डेब्ट के जरिए निवेश करना यह संकेत देता है कि ग्लोबल निवेशकों का भरोसा अभी भी मजबूत बना हुआ है।


🔒 प्रमोटर्स के शेयर और ग्रुप कंपनियों की हिस्सेदारी होगी गिरवी

इस डेब्ट को सुरक्षित करने के लिए कंपनी अपनी संपत्तियों के साथ-साथ प्रमोटर्स की हिस्सेदारी भी गिरवी रख रही है।

CEO Souvik Pulakesh Sengupta और COO Aaditya Gajendra Sharda की शेयरहोल्डिंग के अलावा अन्य प्रमोटर एंटिटीज की हिस्सेदारी भी प्लेज की जाएगी।

इसके साथ ही ग्रुप कंपनियों — RDC Concrete India Limited, Neptune Readymix Concrete Private Limited और Robo Quarries Private Limited — की हिस्सेदारी भी गिरवी रखी जाएगी।

यह दर्शाता है कि कंपनी इस फंडिंग को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और बड़े पैमाने पर सिक्योरिटी ऑफर कर रही है।


📊 IPO से पहले डेब्ट रेजिंग की क्या है रणनीति?

जनवरी 2026 में कंपनी को मार्केट रेगुलेटर Securities and Exchange Board of India (SEBI) से IPO आगे बढ़ाने की मंजूरी मिल चुकी है।

ऐसे में IPO से पहले इतना बड़ा कर्ज उठाने के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं:

  • वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करना
  • सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग को स्केल करना
  • बैलेंस शीट को स्ट्रक्चर करना
  • IPO से पहले ग्रोथ नंबर मजबूत दिखाना

डेब्ट के जरिए पूंजी जुटाने का फायदा यह है कि कंपनी की इक्विटी डाइल्यूशन नहीं होती। हालांकि, प्रमोटर शेयर गिरवी रखने से जोखिम भी जुड़ा होता है।


🚀 Series G में $83 मिलियन जुटा चुकी है कंपनी

सितंबर 2025 में Infra.Market ने अपना Series G राउंड पूरा किया था, जिसमें 83 मिलियन डॉलर जुटाए गए थे।

इस राउंड की अगुवाई Silverline Homes ने की थी।

राउंड में Tiger Global, Accel, Nexus Venture Partners, NK Squared और Evolvence India जैसे निवेशकों ने भाग लिया था।

इससे पहले भी कंपनी कई बड़े राउंड्स में पूंजी जुटा चुकी है और भारत के तेजी से बढ़ते कंस्ट्रक्शन टेक सेक्टर में अपनी मजबूत उपस्थिति बना चुकी है।


📈 FY25 में 27% बढ़ा GMV, लेकिन मुनाफा घटा

वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो FY25 में कंपनी का ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) 27% बढ़कर 18,472 करोड़ रुपये (लगभग 2.1 बिलियन डॉलर) हो गया।

यह कंपनी की मजबूत डिमांड और तेजी से बढ़ते ऑपरेशंस को दर्शाता है।

हालांकि, शुद्ध लाभ लगभग 42% घटकर 220 करोड़ रुपये रह गया।


⚖️ मुनाफे में गिरावट की वजह क्या रही?

विश्लेषकों के अनुसार संभावित कारण हो सकते हैं:

  • विस्तार और नई यूनिट्स में निवेश
  • सप्लाई चेन इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च
  • लॉजिस्टिक्स लागत में बढ़ोतरी
  • नए बाजारों में एंट्री

IPO से पहले कंपनी के लिए यह जरूरी होगा कि वह अपने मार्जिन और प्रॉफिटेबिलिटी को स्थिर करे, क्योंकि पब्लिक मार्केट निवेशक ग्रोथ के साथ लाभप्रदता पर भी ध्यान देते हैं।


🔎 आगे क्या रहेगा फोकस?

Infra.Market फिलहाल तीन प्रमुख मोर्चों पर काम करती नजर आ रही है:

1️⃣ कैपिटल स्ट्रक्चर मजबूत करना
2️⃣ बिजनेस स्केल को और बढ़ाना
3️⃣ IPO से पहले निवेशकों का भरोसा मजबूत करना

अगर कंपनी IPO के जरिए मजबूत वैल्यूएशन हासिल करती है, तो डेब्ट मैनेजमेंट आसान हो सकता है।


📝 निष्कर्ष

Infra.Market का 1,250 करोड़ रुपये का डेब्ट प्लान यह दिखाता है कि कंपनी IPO से पहले अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत करना चाहती है।

जहां एक ओर GMV में मजबूत ग्रोथ दिख रही है, वहीं मुनाफे में गिरावट चिंता का विषय है।

अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि IPO से पहले कंपनी अपने फाइनेंशियल मैट्रिक्स को किस हद तक बेहतर बना पाती है।

कुल मिलाकर, Infra.Market का यह कदम संकेत देता है कि कंपनी पब्लिक मार्केट में एंट्री से पहले अपनी तैयारी पूरी तरह मजबूत करना चाहती है। 🚀

Read more :🌍 South Africa की Coronation ने Ixigo में बढ़ाई हिस्सेदारी,

🌍 South Africa की Coronation ने Ixigo में बढ़ाई हिस्सेदारी,

Ixigo

ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म Le Travenues Technology Limited (Ixigo) में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ती दिख रही है। ताजा रेगुलेटरी फाइलिंग के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका की एसेट मैनेजमेंट कंपनी Coronation Fund Managers Ltd ने Ixigo में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा दी है।

यह कदम ऐसे समय में आया है जब कंपनी मजबूत वित्तीय प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रही है।


📊 ओपन मार्केट से खरीदे 1.83 लाख शेयर

Johannesburg Stock Exchange में सूचीबद्ध Coronation Fund Managers ने ओपन मार्केट से 1,83,322 इक्विटी शेयर खरीदे।

इस खरीद के बाद कंपनी की हिस्सेदारी 5% की अहम सीमा को पार कर गई।

ट्रांजैक्शन से पहले Coronation के पास 2,18,52,552 शेयर थे, जो Ixigo की कुल इक्विटी का 4.99% था। शेयर खरीद के बाद इसकी होल्डिंग बढ़कर 2,20,35,874 शेयर हो गई, जो कुल हिस्सेदारी का 5.03% है।

किसी भी लिस्टेड कंपनी में 5% से अधिक हिस्सेदारी पार करना निवेशक के भरोसे और दीर्घकालिक रणनीति का संकेत माना जाता है।


🤝 Prosus ने भी बढ़ाई हिस्सेदारी

Coronation से पहले वैश्विक टेक निवेशक Prosus ने भी Ixigo में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई थी। Prosus ने ऑफ-मार्केट ट्रांजैक्शन के जरिए लगभग 15% स्टेक हासिल किया।

इस डील के तहत Prosus ने 3.16% हिस्सेदारी Peak XV से और 1.9% हिस्सेदारी Elevation Capital से खरीदी।

इस तरह बड़े वैश्विक निवेशकों की बढ़ती भागीदारी Ixigo के बिजनेस मॉडल और ग्रोथ पोटेंशियल पर मजबूत भरोसे को दर्शाती है।


🌍 स्पेन की Trenes में 60% हिस्सेदारी खरीदेगा Ixigo

विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी के बीच Ixigo ने हाल ही में एक अहम अधिग्रहण की घोषणा भी की है। कंपनी स्पेन स्थित ऑनलाइन ट्रेन टिकटिंग प्लेटफॉर्म Trenes में 60% बहुमत हिस्सेदारी लगभग 125 करोड़ रुपये में खरीदेगी।

साथ ही, कंपनी के पास भविष्य में शेष 40% हिस्सेदारी खरीदने का विकल्प भी रहेगा।

अधिग्रहण के बाद Trenes, Ixigo की स्टेप-डाउन सब्सिडियरी के रूप में काम करेगी। यह कदम Ixigo के अंतरराष्ट्रीय विस्तार की दिशा में बड़ा रणनीतिक कदम माना जा रहा है।


📈 Q3 FY26 में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन

Ixigo ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में शानदार वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है।

  • ऑपरेशनल रेवेन्यू Q3 FY26 में बढ़कर 317.6 करोड़ रुपये हो गया, जबकि Q3 FY25 में यह 242 करोड़ रुपये था।
  • कंपनी का मुनाफा 55% बढ़कर 24 करोड़ रुपये पहुंच गया।

यह ग्रोथ ऐसे समय में आई है जब ट्रैवल इंडस्ट्री कोविड के बाद पूरी तरह रिकवर हो चुकी है और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय यात्रा में तेजी देखी जा रही है।


💹 शेयर प्राइस और मार्केट कैप

आज सुबह 11:15 बजे के आंकड़ों के अनुसार Ixigo का शेयर 164.4 रुपये पर ट्रेड कर रहा था। इस कीमत पर कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 7,148 करोड़ रुपये (लगभग 786 मिलियन डॉलर) के आसपास है।

बढ़ते निवेश और मजबूत तिमाही नतीजों ने शेयर बाजार में कंपनी की स्थिति को मजबूती दी है।


🧳 Ixigo का बिजनेस मॉडल

Ixigo भारत का एक प्रमुख ऑनलाइन ट्रैवल एग्रीगेटर है, जो ट्रेन, फ्लाइट और बस टिकट बुकिंग की सुविधा देता है। कंपनी AI-आधारित सर्च और प्राइस ट्रैकिंग फीचर्स के जरिए यूजर्स को बेहतर डील्स और किफायती यात्रा विकल्प प्रदान करती है।

भारत में डिजिटल ट्रैवल बुकिंग तेजी से बढ़ रही है, और Ixigo इस सेगमेंट में MakeMyTrip और अन्य प्लेटफॉर्म्स के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा है।


🔎 निवेशकों का भरोसा क्यों बढ़ रहा है?

Coronation और Prosus जैसे बड़े वैश्विक निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ाना इस बात का संकेत है कि Ixigo का ग्रोथ ट्रैक रिकॉर्ड और विस्तार रणनीति उन्हें आकर्षित कर रही है।

  • लगातार रेवेन्यू और प्रॉफिट ग्रोथ
  • अंतरराष्ट्रीय विस्तार (Trenes अधिग्रहण)
  • मजबूत ब्रांड पहचान
  • डिजिटल ट्रैवल की बढ़ती मांग

ये सभी कारक निवेशकों के भरोसे को मजबूत करते हैं।


🔮 आगे की राह

Ixigo के सामने अब दोहरी चुनौती है — एक ओर घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा, और दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय विस्तार को सफल बनाना।

Trenes का अधिग्रहण कंपनी को यूरोपीय बाजार में प्रवेश का मौका देगा। वहीं, बड़े वैश्विक निवेशकों की हिस्सेदारी कंपनी को पूंजी और रणनीतिक समर्थन दोनों दे सकती है।

अगर कंपनी अपनी ग्रोथ रफ्तार बनाए रखती है और नए बाजारों में सफलतापूर्वक विस्तार करती है, तो आने वाले वर्षों में Ixigo भारतीय ऑनलाइन ट्रैवल इंडस्ट्री में और मजबूत स्थिति बना सकता है।

फिलहाल, Coronation का 5% से अधिक हिस्सेदारी तक पहुंचना और Prosus की बढ़ती भागीदारी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि Ixigo अब वैश्विक निवेशकों के रडार पर मजबूती से आ चुका है।

Read more :💰 B2B Cross-Border Payments स्टार्टअप Xflow ने जुटाए $16.6 मिलियन,

💰 B2B Cross-Border Payments स्टार्टअप Xflow ने जुटाए $16.6 मिलियन,

Xflow

भारत के फिनटेक सेक्टर में एक और बड़ी फंडिंग डील सामने आई है। B2B क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स स्टार्टअप Xflow ने अपने Series A राउंड में 16.6 मिलियन डॉलर (लगभग 138 करोड़ रुपये) जुटाए हैं। इस राउंड में कंपनी की वैल्यूएशन 85 मिलियन डॉलर आंकी गई है।

इस फंडिंग राउंड की अगुवाई वैश्विक निवेश फर्म General Catalyst ने की। वहीं मौजूदा निवेशकों Square Peg, Stripe, Lightspeed और Moore Capital ने भी भागीदारी की। इसके अलावा PayPal Ventures इस राउंड में नए निवेशक के रूप में शामिल हुआ है।


📜 PA-CB लाइसेंस से मिला बड़ा बूस्ट

फंडिंग के साथ-साथ Xflow को एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली है। कंपनी को एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट दोनों के लिए अंतिम PA-CB (Payment Aggregator – Cross Border) ऑथराइजेशन मिल गया है।

PA-CB Imports लाइसेंस के जरिए कंपनी अब विदेशी मर्चेंट्स और पेमेंट एग्रीगेटर्स को सर्विस दे सकेगी। वहीं PA-CB Exports लाइसेंस कंपनी की मौजूदा पेशकश को और मजबूत करेगा।

यह लाइसेंसिंग मंजूरी Xflow को रेगुलेटरी स्तर पर मजबूत स्थिति प्रदान करती है और अंतरराष्ट्रीय लेनदेन में विश्वसनीयता बढ़ाती है।


📊 अब तक जुटाए $32 मिलियन

बेंगलुरु स्थित इस स्टार्टअप ने अब तक कुल 32 मिलियन डॉलर जुटाए हैं। इससे पहले मई 2023 में कंपनी ने 10.2 मिलियन डॉलर का प्री-Series A राउंड पूरा किया था।

कंपनी के अनुसार, नई पूंजी का उपयोग ऑपरेशंस को स्केल करने और नए भौगोलिक बाजारों में विस्तार के लिए किया जाएगा।


👨‍💼 कौन हैं संस्थापक?

Xflow की स्थापना Anand Balaji, Ashwin Bhatnagar और Abhijit Chandrasekaran ने की थी। कंपनी SMEs (Small and Medium Enterprises), ITES कंपनियों और फंडेड स्टार्टअप्स के लिए क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सॉल्यूशंस प्रदान करती है।

Xflow का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय ट्रांजैक्शंस को अधिक तेज, किफायती और कंप्लायंट बनाना है। कंपनी फ्रीलांसर्स और स्टार्टअप्स से लेकर बड़े एंटरप्राइजेज तक को सर्विस देती है।


🌍 100 से ज्यादा देशों में पेमेंट कलेक्शन

2025 में Xflow ने भारतीय व्यवसायों को 100 से अधिक देशों से 25 से ज्यादा करेंसी में भुगतान एकत्र करने में सक्षम बनाया।

कंपनी का दावा है कि उसने सैकड़ों मिलियन डॉलर के ट्रांजैक्शंस प्रोसेस किए हैं। वर्तमान में Xflow 10,000 से अधिक व्यवसायों को सर्विस दे रही है, जबकि कुल यूजर बेस लगभग 15,000 तक पहुंच चुका है।

इनमें SaaS कंपनियां, GCCs (Global Capability Centres), IT सर्विस एक्सपोर्टर्स और गुड्स एक्सपोर्टर्स शामिल हैं।


🤝 फिनटेक कंपनियों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर

Xflow केवल सीधे व्यवसायों को ही नहीं, बल्कि अन्य फिनटेक कंपनियों को भी अंतरराष्ट्रीय पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदान करती है।

इसके प्रमुख ग्राहकों में Drip Capital और Easebuzz जैसी कंपनियां शामिल हैं।

यह मॉडल Xflow को B2B2B कैटेगरी में भी मजबूत बनाता है, जहां वह अन्य फिनटेक्स को बैकएंड पेमेंट समाधान देती है।


🤖 FX AI Analyst: डेटा-ड्रिवन ट्रेजरी मैनेजमेंट

विदेशी मुद्रा (FX) में उतार-चढ़ाव व्यवसायों के लिए बड़ा जोखिम होता है। Xflow का ‘FX AI Analyst’ टूल कंपनियों को डेटा-आधारित ट्रेजरी निर्णय लेने में मदद करता है।

यह टूल विदेशी मुद्रा दरों का विश्लेषण कर बेहतर हेजिंग और कन्वर्जन रणनीति सुझाता है, जिससे कंपनियां अपने फॉरेक्स आउटकम को सुधार सकें।

SMEs और स्टार्टअप्स के लिए यह फीचर खासतौर पर उपयोगी है, क्योंकि उनके पास बड़े ट्रेजरी डिपार्टमेंट नहीं होते।


📈 क्यों अहम है यह फंडिंग?

भारत में SaaS और IT सर्विस एक्सपोर्ट तेजी से बढ़ रहे हैं। हजारों स्टार्टअप्स और फ्रीलांसर्स ग्लोबल क्लाइंट्स से कमाई कर रहे हैं। ऐसे में तेज और सस्ती क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स की जरूरत बढ़ती जा रही है।

Xflow इसी जरूरत को पूरा कर रहा है।

Series A राउंड में General Catalyst और PayPal Ventures जैसे बड़े निवेशकों की एंट्री इस बात का संकेत है कि कंपनी का बिजनेस मॉडल और ग्रोथ पोटेंशियल निवेशकों को आकर्षित कर रहा है।


🔮 आगे की रणनीति

नई पूंजी के साथ Xflow अपनी तकनीकी क्षमता को और मजबूत करेगा और नए बाजारों में प्रवेश करेगा।

कंपनी का लक्ष्य है कि वह भारतीय SMEs के लिए अंतरराष्ट्रीय पेमेंट को उतना ही आसान बना दे, जितना घरेलू ट्रांजैक्शन करना।

PA-CB लाइसेंस के साथ रेगुलेटरी मजबूती और निवेशकों का भरोसा — दोनों Xflow को अगले ग्रोथ फेज के लिए तैयार कर रहे हैं।

कुल मिलाकर, Xflow की यह फंडिंग डील दिखाती है कि भारत का B2B फिनटेक इकोसिस्टम तेजी से परिपक्व हो रहा है। अगर कंपनी अपनी मौजूदा ग्रोथ रफ्तार को बनाए रखती है, तो आने वाले समय में यह भारतीय क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स सेगमेंट में एक प्रमुख खिलाड़ी बन सकती है।

Read more :💰 AI चिप स्टार्टअप optoML ने जुटाए $1.8 मिलियन,

💰 AI चिप स्टार्टअप optoML ने जुटाए $1.8 मिलियन,

optoML

भारत के सेमीकंडक्टर और डीप-टेक सेक्टर में एक और अहम फंडिंग डील सामने आई है। SOC (System-on-Chip) आधारित सेमीकंडक्टर स्टार्टअप optoML ने अपने प्री-Series A राउंड में 1.8 मिलियन डॉलर (लगभग 15 करोड़ रुपये) जुटाए हैं। इस राउंड की अगुवाई Bluehill.VC और A99 ने की।

यह निवेश ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और AI चिप डिजाइन को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर प्रोत्साहन दे रही है। optoML की यह फंडिंग भारतीय चिप डिजाइन इकोसिस्टम के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।


🚀 12nm Tapeout पूरा, अब अगली पीढ़ी की चिप पर काम

कंपनी ने हाल ही में 12 नैनोमीटर (12nm) तकनीक पर अपना Tapeout सफलतापूर्वक पूरा किया है, जो कि दुनिया की अग्रणी चिप निर्माता कंपनी TSMC के साथ किया गया। Tapeout का मतलब है कि चिप डिजाइन को फाइनल कर मैन्युफैक्चरिंग के लिए भेज दिया गया है।

इस नई पूंजी का उपयोग मुख्य रूप से दो क्षेत्रों में किया जाएगा:

  • टेक्निकल और इंजीनियरिंग टीम का विस्तार
  • अगली पीढ़ी की AI चिप्स के विकास की शुरुआत

कंपनी का लक्ष्य है कि वह अपनी इनोवेटिव AI SoC (System-on-Chip) तकनीक को और अधिक स्केलेबल और ऊर्जा-कुशल बनाए।


👨‍💻 कौन हैं संस्थापक?

optoML की स्थापना Saravana Maruthamuthu ने की है। कंपनी Analog-in-Memory Compute आर्किटेक्चर पर काम करती है, जिसमें Optical Interconnects का उपयोग किया जाता है। यह टेक्नोलॉजी विशेष रूप से AI वर्कलोड्स के लिए डिजाइन की गई है।

आज AI मॉडल्स को ट्रेन और रन करने के लिए भारी कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है, जिससे ऊर्जा खपत भी काफी बढ़ जाती है। optoML का दावा है कि उसकी पेटेंटेड In-Memory Compute डिजाइन पारंपरिक डिजिटल एक्सीलरेटर की तुलना में 50 गुना तक अधिक ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency) दे सकती है।


⚡ 50x अधिक ऊर्जा दक्षता का दावा

AI और डेटा सेंटर उद्योग में सबसे बड़ी चुनौती है — पावर कंजम्प्शन। बड़े AI मॉडल्स को रन करने के लिए भारी GPU और एक्सीलरेटर की जरूरत पड़ती है, जिससे बिजली की लागत और कार्बन फुटप्रिंट दोनों बढ़ते हैं।

optoML की टेक्नोलॉजी डेटा को मेमोरी के अंदर ही प्रोसेस करती है, जिससे डेटा मूवमेंट कम होता है और ऊर्जा की बचत होती है।

कंपनी के अनुसार, उसका डिजाइन इन उपयोग मामलों को टारगेट करता है:

  • Edge devices
  • Enterprise servers
  • Data centres

अगर कंपनी का 50x ऊर्जा दक्षता का दावा व्यावहारिक रूप से सफल साबित होता है, तो यह AI हार्डवेयर इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव ला सकता है।


🏭 Fabless मॉडल पर काम

optoML एक Fabless Semiconductor कंपनी के रूप में काम करती है। इसका मतलब है कि कंपनी खुद चिप मैन्युफैक्चरिंग प्लांट नहीं चलाती, बल्कि डिजाइन पर फोकस करती है और मैन्युफैक्चरिंग के लिए TSMC जैसे वैश्विक फाउंड्री पार्टनर पर निर्भर रहती है।

कंपनी FinFET नोड्स पर आधारित स्केलेबल AI SoC प्लेटफॉर्म विकसित कर रही है। FinFET तकनीक उन्नत चिप डिजाइन में इस्तेमाल होती है, जो बेहतर प्रदर्शन और कम पावर खपत सुनिश्चित करती है।


🤝 Kaynes Semiconductor के साथ साझेदारी

मैन्युफैक्चरिंग के बाद चिप्स की असेंबली और टेस्टिंग भी एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है। इस दिशा में optoML ने Kaynes Semiconductor के साथ एक MoU (समझौता ज्ञापन) साइन किया है।

जब TSMC से वेफर्स भारत पहुंचेंगे, तब Kaynes Semiconductor असेंबली और टेस्टिंग में सहयोग करेगी। इससे कंपनी को सप्लाई चेन को बेहतर ढंग से मैनेज करने और भारत में वैल्यू एडिशन बढ़ाने में मदद मिलेगी।


🎯 निवेशकों का फोकस Deep-Tech पर

इस राउंड का नेतृत्व करने वाली Bluehill.VC एक डीप-टेक फोकस्ड वेंचर कैपिटल फर्म है। यह सेमीकंडक्टर, डिफेंस, एनर्जी और इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में निवेश करती है।

A99 भी शुरुआती चरण के टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स में निवेश के लिए जानी जाती है।

इन निवेशकों का optoML में निवेश यह दर्शाता है कि भारतीय डीप-टेक और सेमीकंडक्टर स्टार्टअप्स अब वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो रहे हैं।


🌏 भारत का सेमीकंडक्टर अवसर

भारत लंबे समय से चिप डिजाइन में मजबूत रहा है, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग में पीछे रहा है। अब सरकार की PLI योजनाओं और वैश्विक सप्लाई चेन बदलाव के चलते भारत में सेमीकंडक्टर स्टार्टअप्स को नया मौका मिल रहा है।

AI की बढ़ती मांग के बीच ऊर्जा-कुशल चिप्स की जरूरत और भी बढ़ गई है। optoML जैसे स्टार्टअप्स इस गैप को भरने की कोशिश कर रहे हैं।


🔮 आगे की रणनीति

Pre-Series A फंडिंग के बाद optoML अब अपनी टीम को मजबूत कर अगली पीढ़ी की AI SoC चिप्स पर काम शुरू करेगी।

कंपनी का लक्ष्य है कि वह अपने प्रोडक्ट को Edge से लेकर बड़े डेटा सेंटर तक स्केल करे। अगर अगली चिप सफल रहती है, तो optoML भारतीय सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन सकती है।

कुल मिलाकर, optoML की यह फंडिंग भारतीय डीप-टेक सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत है। AI और ऊर्जा दक्षता के संगम पर काम कर रही यह कंपनी आने वाले वर्षों में भारत को ग्लोबल AI हार्डवेयर मैप पर मजबूती से स्थापित करने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकती है।

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📉 Aakash Educational Services को FY24 में 2,443 करोड़ रुपये का भारी घाटा,

Aakash

देश की प्रमुख कोचिंग कंपनी Aakash Educational Services Ltd (AESL) ने वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) में 2,443 करोड़ रुपये का बड़ा शुद्ध घाटा दर्ज किया है। यह नुकसान मुख्य रूप से इसकी पैरेंट कंपनी Think & Learn Private Limited (Byju’s) से जुड़े exceptional items के कारण हुआ है।

कंपनी के कंसोलिडेटेड वित्तीय दस्तावेज, जो रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) से प्राप्त हुए हैं, बताते हैं कि भारी वित्तीय लागत, लोन डिफॉल्ट, पुनर्भुगतान और संबंधित पक्ष को दिए गए ऋण की राइट-ऑफ इस घाटे की प्रमुख वजह रहे।


📊 रेवेन्यू लगभग स्थिर, लेकिन मुनाफा गायब

FY24 में Aakash का ऑपरेशनल रेवेन्यू लगभग स्थिर रहा।

  • FY24 में रेवेन्यू: 2,438 करोड़ रुपये
  • FY23 में रेवेन्यू: 2,399 करोड़ रुपये

यानी सालाना आधार पर मामूली बढ़त देखने को मिली।

Aakash मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं जैसे NEET, IIT-JEE, Olympiads और NTSE के लिए क्लासरूम और डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम चलाती है।

कंपनी की कुल आय का 96% हिस्सा छात्रों से मिलने वाली फीस से आता है, जो FY24 में 2% बढ़कर 2,341 करोड़ रुपये हो गया।

वहीं फ्रेंचाइज़ी मॉडल से होने वाली आय 8.5% घटकर 97 करोड़ रुपये रह गई।


💰 नॉन-ऑपरेशनल आय से सहारा

FY24 में कंपनी ने 433 करोड़ रुपये की नॉन-ऑपरेशनल आय भी दर्ज की। इसमें मुख्य रूप से ब्याज आय, मैनपावर सेवाएं और सिक्योरिटी डिपॉजिट पर डिस्काउंट के अनवाइंडिंग शामिल रहे।

इससे कंपनी की कुल आय 2,471 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

लेकिन बढ़ते खर्चों और एकमुश्त प्रावधानों ने पूरे वित्तीय संतुलन को बिगाड़ दिया।


📈 खर्चों में 14% की बढ़ोतरी

Aakash के लिए सबसे बड़ा खर्च कर्मचारी वेतन और फैकल्टी से जुड़ा रहा, जो कुल खर्च का 56% था।

  • कर्मचारी लाभ व्यय FY24 में 14% बढ़कर 1,411 करोड़ रुपये हो गया (FY23: 1,239 करोड़ रुपये)।
  • डिप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन खर्च 28% बढ़कर 259 करोड़ रुपये पहुंच गया।

इसके अलावा विज्ञापन, प्रमोशन, स्टडी मैटेरियल, लीगल और प्रोफेशनल फीस, IT खर्च और फ्रेंचाइज़ी फीस जैसी लागतों ने कुल खर्च को 14% बढ़ाकर 2,532 करोड़ रुपये कर दिया (FY23: 2,225 करोड़ रुपये)।


⚠️ 2,720 करोड़ रुपये के ‘Exceptional Items’ ने बिगाड़ी तस्वीर

सबसे बड़ा झटका 2,720 करोड़ रुपये के exceptional items से आया, जो मुख्य रूप से पैरेंट कंपनी Think & Learn (Byju’s) से जुड़े थे।

इनमें शामिल हैं:

  • 1,363 करोड़ रुपये ब्याज और लोन दायित्वों के लिए प्रावधान
  • 780 करोड़ रुपये के संबंधित पक्ष को दिए गए ऋण की राइट-ऑफ
  • 100 करोड़ रुपये का वन-टाइम टर्मिनेशन शुल्क (6 मई 2023 को Think & Learn के साथ सर्विस एग्रीमेंट खत्म होने के बाद)
  • 102 करोड़ रुपये की goodwill impairment
  • 300 करोड़ रुपये की intangible assets की write-down

इन भारी एकमुश्त खर्चों के कारण कंपनी को 2,443 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा उठाना पड़ा।

Entrackr द्वारा पूछे गए सवालों पर कंपनी ने इन exceptional items को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की।


📌 ऑपरेशनल स्तर पर फिर भी EBITDA पॉजिटिव

हालांकि शुद्ध घाटा भारी रहा, लेकिन ऑपरेशनल स्तर पर कंपनी EBITDA पॉजिटिव रही।

  • FY24 में EBITDA: 307 करोड़ रुपये
  • EBITDA मार्जिन घटकर 12.57% रह गया
  • ROCE गिरकर 6.76% पर आ गया

अगर exceptional items और डिफर्ड टैक्स को हटा दिया जाए, तो कंपनी का घाटा सिर्फ 61 करोड़ रुपये था, जबकि FY23 में 153 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था।

इससे साफ है कि मूल बिजनेस अभी भी पूरी तरह ढहा नहीं है, लेकिन पैरेंट कंपनी से जुड़ी वित्तीय उलझनों ने तस्वीर बिगाड़ दी।


📉 हर 1 रुपये कमाने में 1.04 रुपये खर्च

यूनिट इकॉनॉमिक्स की बात करें तो FY24 में कंपनी ने 1 रुपये कमाने के लिए 1.04 रुपये खर्च किए।

मार्च 2024 तक कंपनी के पास 315 करोड़ रुपये की करेंट एसेट्स थीं, जिनमें कैश और बैंक बैलेंस भी शामिल था।


⚖️ सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा विवाद

हाल ही में Think & Learn (Byju’s) ने Aakash के 240 करोड़ रुपये के राइट्स इश्यू को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उसने NCLAT द्वारा फंडरेज को मंजूरी देने के फैसले को चुनौती दी।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और Aakash को इश्यू जारी रखने की अनुमति दे दी। साथ ही Think & Learn को अपनी शेयरहोल्डिंग के अनुपात में सब्सक्राइब करने का अधिकार दिया गया।

यह कानूनी लड़ाई Aakash के भविष्य को प्रभावित कर सकती है।


🏫 मजबूत ब्रांड, लेकिन बढ़ती प्रतिस्पर्धा

Aakash की स्थापना JC Chaudhry और उनकी टीम ने की थी, जिन्होंने इसे देश के सबसे भरोसेमंद कोचिंग ब्रांड्स में से एक बनाया। बाद में Byju’s ने लगभग 1 बिलियन डॉलर के वैल्यूएशन पर इसे अधिग्रहित किया।

आज जबकि Byju’s खुद वित्तीय संकट में है, Aakash उसके सबसे मूल्यवान एसेट्स में से एक माना जाता है।

हालांकि FY24 तक कंपनी ने अपनी मार्केट हिस्सेदारी को काफी हद तक बनाए रखा, लेकिन अब उसे PhysicsWallah जैसे उभरते प्रतिस्पर्धियों से कड़ी टक्कर मिल रही है।

FY25 के नतीजे आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि Aakash ने बाजार में अपनी पकड़ कितनी बरकरार रखी है।


🔮 आगे की राह आसान नहीं

डिजिटल क्लासरूम बंद करने जैसे कठिन फैसले पहले ही लिए जा चुके हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कंपनी कानूनी और वित्तीय उलझनों से बाहर निकलकर एक साफ शुरुआत कर पाए।

मौजूदा बड़े निवेशक Ranjan Pai के सामने कंपनी को फिर से पटरी पर लाने की जिम्मेदारी है।

ब्रांड फिलहाल दबाव में जरूर है, लेकिन Aakash ने अब तक कई मुश्किल दौर देखे हैं। सही रणनीति और स्थिर नेतृत्व के साथ यह फिर से मजबूती से वापसी कर सकता है।

फिलहाल FY24 के आंकड़े बताते हैं कि ऑपरेशनल बिजनेस में दम है, लेकिन पैरेंट कंपनी की समस्याओं का असर भारी पड़ा है। आने वाले वित्तीय वर्ष Aakash के भविष्य की दिशा तय करेंगे।

Read more :💰 Creator Commerce Startup Wishlink ने जुटाए $17.5 मिलियन,

💰 Creator Commerce Startup Wishlink ने जुटाए $17.5 मिलियन,

Wishlink

भारत के तेजी से बढ़ते Creator Economy सेक्टर में एक और बड़ी फंडिंग डील सामने आई है। Creator-focused commerce प्लेटफॉर्म Wishlink ने अपने Series B फंडिंग राउंड में 17.5 मिलियन डॉलर (लगभग 145 करोड़ रुपये) जुटाए हैं। इस राउंड की अगुवाई Vertex Ventures Southeast Asia & India ने की, जबकि मौजूदा निवेशकों Fundamentum और Elevation Capital ने भी इसमें भागीदारी की।

यह फंडिंग ऐसे समय में आई है जब भारत में Influencer-led commerce और Social shopping का बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है। Wishlink का यह नया निवेश उसके विस्तार और टेक्नोलॉजी अपग्रेड की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।


📈 दो साल बाद नई फंडिंग, कुल निवेश हुआ मजबूत

Wishlink ने इससे पहले फरवरी 2024 में 7 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई थी, जिसमें Fundamentum Partnership Fund और Elevation Capital शामिल थे। उससे पहले अक्टूबर 2022 में कंपनी ने 3 मिलियन डॉलर का Seed राउंड भी पूरा किया था।

लगभग दो साल के अंतराल के बाद आई यह नई फंडिंग इस बात का संकेत है कि कंपनी ने पिछले समय में मजबूत ग्रोथ और बिजनेस मॉडल साबित किया है, जिससे निवेशकों का भरोसा और बढ़ा है।


🚀 फंड का इस्तेमाल कहाँ होगा?

कंपनी के अनुसार, इस ताजा पूंजी का उपयोग तीन प्रमुख क्षेत्रों में किया जाएगा:

  • Creator और Brand Partnerships का विस्तार
  • टेक्नोलॉजी स्टैक को मजबूत बनाना
  • Consumers, Creators और Brands के लिए बेहतर डिजिटल अनुभव तैयार करना

Wishlink अपने प्लेटफॉर्म को अधिक डेटा-ड्रिवन और स्केलेबल बनाना चाहती है, ताकि ब्रांड्स को बेहतर कन्वर्ज़न और क्रिएटर्स को अधिक कमाई के अवसर मिल सकें।


👩‍💻 2022 में हुई थी स्थापना

Wishlink की स्थापना 2022 में Shaurya Gupta, Divyansh Ameta और Chandan Yadav द्वारा की गई थी। कंपनी एक Creator Commerce प्लेटफॉर्म संचालित करती है, जो Influencers और Content Creators के माध्यम से Product Discovery को आसान बनाता है।

आज के डिजिटल दौर में उपभोक्ता पारंपरिक विज्ञापनों की बजाय सोशल मीडिया रिव्यू और Influencer Recommendations पर ज्यादा भरोसा करते हैं। Wishlink इसी ट्रेंड का फायदा उठाते हुए ब्रांड्स और क्रिएटर्स को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ता है।


📊 40,000 से ज्यादा एक्टिव क्रिएटर्स

Wishlink का नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा है। कंपनी के अनुसार:

  • 40,000 से अधिक Monthly Active Creators प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं
  • हर महीने 3 लाख से ज्यादा Content Pieces तैयार होते हैं
  • 60 लाख (6 मिलियन) से ज्यादा ऑर्डर प्लेटफॉर्म के जरिए प्रोसेस होते हैं
  • पार्टनर ब्रांड्स के लिए हर महीने 350 करोड़ रुपये से ज्यादा की सेल्स ड्राइव होती है

ये आंकड़े दिखाते हैं कि Wishlink अब सिर्फ एक स्टार्टअप नहीं, बल्कि एक मजबूत Creator-driven Commerce इंजन बन चुका है।


💡 कैसे काम करता है Wishlink?

Wishlink डेटा-ड्रिवन टूल्स का उपयोग करता है, जिससे ब्रांड्स को पूरे सेल्स फनल की परफॉर्मेंस ट्रैक करने में मदद मिलती है। यानी कि:

  • कितने लोगों ने कंटेंट देखा
  • कितनों ने क्लिक किया
  • कितनों ने खरीदारी की

इससे ब्रांड्स को ROI (Return on Investment) समझने में आसानी होती है।

वहीं दूसरी ओर, Creators अपने कंटेंट में Product Links जोड़कर हर बिक्री पर कमीशन कमा सकते हैं। इससे उनकी Monetisation आसान और पारदर्शी हो जाती है।


📉 राजस्व में 356% की जबरदस्त छलांग

Wishlink की वित्तीय स्थिति भी इसकी ग्रोथ कहानी को मजबूत करती है। कंपनी के वार्षिक वित्तीय आंकड़ों के अनुसार:

  • FY25 में ऑपरेशनल रेवेन्यू 356% बढ़कर 53.80 करोड़ रुपये हो गया
  • FY24 में यह 11.79 करोड़ रुपये था

यानी एक साल में कंपनी ने अपने राजस्व में चार गुना से ज्यादा वृद्धि दर्ज की है।

हालांकि, कंपनी अभी भी घाटे में है। FY25 में उसका नेट लॉस 18.79 करोड़ रुपये रहा, जो FY24 के 18.22 करोड़ रुपये के लगभग बराबर है।

इसका मतलब है कि कंपनी ने तेजी से रेवेन्यू बढ़ाया है, लेकिन अपने घाटे को नियंत्रित रखने में भी कामयाबी हासिल की है — जो किसी भी ग्रोथ-स्टेज स्टार्टअप के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है।


🌐 भारत में Creator Economy का बढ़ता बाजार

भारत में Creator Economy तेजी से विकसित हो रही है। लाखों Influencers Instagram, YouTube और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं। ब्रांड्स अब पारंपरिक मार्केटिंग की बजाय Creator-led campaigns पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं।

Wishlink जैसे प्लेटफॉर्म इस गैप को भर रहे हैं, जहां:

  • ब्रांड्स को measurable sales मिलती है
  • Creators को sustainable income source मिलता है
  • Consumers को authentic product recommendations मिलती हैं

🔮 आगे की राह

Series B फंडिंग के बाद Wishlink अब अपने नेटवर्क को और बड़े पैमाने पर विस्तार देने की योजना बना रही है। कंपनी टेक्नोलॉजी में निवेश बढ़ाकर AI और डेटा एनालिटिक्स के जरिए बेहतर Product Discovery और Shopping Experience तैयार करना चाहती है।

अगर कंपनी अपनी मौजूदा ग्रोथ रफ्तार को बनाए रखती है, तो आने वाले समय में Wishlink भारतीय Creator Commerce सेगमेंट में एक लीडिंग प्लेयर के रूप में उभर सकती है।

कुल मिलाकर, Wishlink की यह फंडिंग डील दिखाती है कि निवेशकों का भरोसा Creator Economy पर लगातार बढ़ रहा है — और भारत में Social Commerce का भविष्य काफी मजबूत नजर आ रहा है।

Read more :🚀 Hycosys को मिला 9 करोड़ का निवेश,

🚀 Hycosys को मिला 9 करोड़ का निवेश,

Hycosys

भारत में DeepTech और Clean Energy सेक्टर में एक और बड़ा कदम सामने आया है। बेंगलुरु आधारित डीप-टेक स्टार्टअप Hycosys ने सीड फंडिंग राउंड में 1 मिलियन डॉलर (करीब 9 करोड़ रुपये) से अधिक की राशि जुटाई है। इस राउंड का नेतृत्व MountTech Growth Fund – Kavachh ने किया है।

इससे पहले कंपनी दिसंबर 2024 में PointOne Capital से 88,400 डॉलर की प्री-सीड फंडिंग भी हासिल कर चुकी है। नई पूंजी के साथ Hycosys अब अपने प्रोडक्ट और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी में है।


🔬 क्या करती है Hycosys?

Hycosys की स्थापना 2024 में Tapish Agarwal और Ugandhar Reddy ने की थी। कंपनी fuel-flexible और low-emission माइक्रो गैस टरबाइन (MGT) सिस्टम विकसित कर रही है।

यह सिस्टम पारंपरिक डीजल जनरेटर का क्लीन और अधिक दक्ष विकल्प बनने की दिशा में काम कर रहा है। कंपनी का दावा है कि उसकी टरबाइन टेक्नोलॉजी मौजूदा सिस्टम की तुलना में 30% तक हल्की है और अधिक ऊर्जा दक्षता प्रदान करती है।


💡 फंड का इस्तेमाल कहां होगा?

जुटाई गई राशि का उपयोग इंजीनियरिंग टीम को मजबूत करने, एडवांस टेस्टिंग सुविधाओं तक पहुंच बनाने और माइक्रो गैस टरबाइन के डेवलपमेंट में किया जाएगा।

कंपनी का लक्ष्य है कि 2027 के मध्य तक डीजल आधारित पावर जनरेटर का एक क्लीन विकल्प तैयार कर उसका वर्किंग डेमो पेश किया जाए।

Hycosys की टेक्नोलॉजी में hydrogen-optimised combustor, 3D-printed heat recovery unit और advanced turbine design जैसे फीचर्स शामिल हैं। इनकी टेस्टिंग IIT-BHU में की जा रही है।


⚡ बड़ा बाजार, बड़ा मौका

भारत में 227 गीगावॉट से अधिक की इंस्टॉल्ड डीजल जनरेटर क्षमता मौजूद है, जो मुख्य रूप से इंडस्ट्रियल बैकअप पावर के लिए इस्तेमाल होती है। डीजल आधारित पावर महंगा और प्रदूषणकारी दोनों है।

Hycosys की माइक्रो गैस टरबाइन टेक्नोलॉजी को hydrogen-ready और clean fuel compatible बनाया जा रहा है, जिससे यह भविष्य में ग्रीन फ्यूल के साथ भी काम कर सके।

कंपनी की योजना माइक्रोग्रिड, हेवी कमर्शियल व्हीकल रेंज एक्सटेंडर और ड्रोन/एयरोस्पेस एप्लिकेशन में भी इस टेक्नोलॉजी को लागू करने की है।


🇮🇳 भारत के क्लीन एनर्जी लक्ष्य के साथ तालमेल

भारत ने 2030 तक अपनी 50% ऊर्जा जरूरतें गैर-फॉसिल स्रोतों से पूरी करने का लक्ष्य रखा है। Hycosys की स्वदेशी टरबाइन टेक्नोलॉजी इस लक्ष्य के अनुरूप है।

यदि कंपनी अपनी टेक्नोलॉजी को सफलतापूर्वक कमर्शियल स्तर पर ला पाती है, तो यह इंडस्ट्रियल पावर बैकअप सेक्टर में बड़ा बदलाव ला सकती है और “Make in India” विजन को भी मजबूती दे सकती है।

कुल मिलाकर, Hycosys की यह फंडिंग भारतीय DeepTech और Clean Energy इकोसिस्टम के लिए एक सकारात्मक संकेत है। 🚀

Read more :🥦 B2C फ्रेश प्रोड्यूस स्टार्टअप Pluckk जुटाएगा ₹100 करोड़

🥦 B2C फ्रेश प्रोड्यूस स्टार्टअप Pluckk जुटाएगा ₹100 करोड़

Pluckk

भारत के ऑनलाइन फ्रेश प्रोड्यूस मार्केट में एक और बड़ा फंडिंग अपडेट सामने आया है। बिज़नेस-टू-कंज़्यूमर (B2C) फ्रेश फूड प्लेटफॉर्म Pluckk अब अपने मौजूदा निवेशक Euro Gulf Investment से ₹100 करोड़ (लगभग 11 मिलियन डॉलर) जुटाने की तैयारी में है।

यह राउंड पिछले साल मार्च में मिले 10 मिलियन डॉलर के निवेश के बाद आ रहा है। हालांकि कंपनी ने अभी तक इस फंडिंग की सार्वजनिक घोषणा नहीं की है, लेकिन कंपनी के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) में दाखिल दस्तावेज़ों से इस डील की जानकारी सामने आई है।


📑 बोर्ड से मंजूरी, Series C में होगा निवेश

RoC फाइलिंग के अनुसार, Pluckk के बोर्ड ने एक विशेष प्रस्ताव पारित किया है जिसके तहत कंपनी 3,471 Series C CCPS (Compulsorily Convertible Preference Shares) जारी करेगी। प्रति शेयर इश्यू प्राइस ₹2,88,112 तय किया गया है, जिसके जरिए कुल ₹100 करोड़ जुटाए जाएंगे।

Entrackr की रिपोर्ट के मुताबिक, इस राउंड के बाद कंपनी की पोस्ट-मनी वैल्यूएशन लगभग 58 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है।

यह संकेत देता है कि निवेशक कंपनी की ग्रोथ स्ट्रेटेजी और बाजार में उसकी पोजिशनिंग को लेकर आश्वस्त हैं।


💰 फंड का उपयोग कहां होगा?

कंपनी द्वारा दाखिल दस्तावेजों के अनुसार, इस नए निवेश का उपयोग तीन प्रमुख उद्देश्यों के लिए किया जाएगा:

  • आक्रामक ग्रोथ (Aggressive Growth)
  • डिबेंचर्स पर ब्याज भुगतान
  • अन्य कॉर्पोरेट जरूरतें

इसका मतलब साफ है कि Pluckk आने वाले समय में अपने ऑपरेशन को और विस्तार देने की तैयारी में है, साथ ही बैलेंस शीट को भी मजबूत करना चाहती है।


🌱 Farm-to-Fork मॉडल पर फोकस

साल 2021 में Pratik Gupta द्वारा स्थापित Pluckk एक farm-to-fork प्लेटफॉर्म है। यह उपभोक्ताओं तक सीधे ताजा फल और सब्जियां पहुंचाने का काम करता है।

लेकिन Pluckk खुद को सिर्फ एक ग्रोसरी डिलीवरी प्लेटफॉर्म के रूप में पेश नहीं करता। कंपनी लाइफस्टाइल-केंद्रित फूड प्रोडक्ट्स भी उपलब्ध कराती है, जिनमें शामिल हैं:

  • Vegan प्रोडक्ट्स
  • Low-carb विकल्प
  • Gut health और immunity पर आधारित आइटम

यानी कंपनी हेल्थ-कॉन्शियस शहरी उपभोक्ताओं को टारगेट कर रही है, जो ट्रेंडिंग और न्यूट्रिशन-फोकस्ड फूड को प्राथमिकता देते हैं।


🛒 अधिग्रहण के जरिए विस्तार

Pluckk ने अपनी ग्रोथ को तेज करने के लिए अधिग्रहण (Acquisitions) का रास्ता भी अपनाया है।

  • कंपनी ने DIY मील किट प्लेटफॉर्म KOOK को 1.3 मिलियन डॉलर में खरीदा।
  • इसके बाद न्यूट्रिशन ब्रांड Upnourish का 1.4 मिलियन डॉलर में अधिग्रहण किया।

इन अधिग्रहणों के जरिए कंपनी ने अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को मजबूत किया और हेल्थ-केंद्रित ब्रांडिंग को और गहराई दी।


📊 राजस्व दोगुना, लेकिन घाटा भी बढ़ा

मार्च 2025 को समाप्त वित्त वर्ष (FY25) में मुंबई स्थित इस कंपनी का राजस्व दोगुना होकर ₹85 करोड़ तक पहुंच गया।

हालांकि, बढ़ते स्केल के साथ कंपनी का घाटा भी बढ़ा है। FY24 में जहां नुकसान ₹41 करोड़ था, वहीं FY25 में यह बढ़कर ₹55 करोड़ हो गया।

यह आंकड़े बताते हैं कि कंपनी आक्रामक विस्तार रणनीति अपना रही है, जिसमें ग्रोथ को प्राथमिकता दी जा रही है, भले ही शॉर्ट टर्म में घाटा बढ़ रहा हो।


⚔️ प्रतिस्पर्धा और चुनौतियां

ऑनलाइन फ्रेश प्रोड्यूस सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा काफी तीव्र है। Pluckk का मुकाबला Gourmet Garden और Kisankonnect जैसे खिलाड़ियों से है।

हालांकि, इस सेगमेंट में कई फंडेड स्टार्टअप्स को संघर्ष का सामना करना पड़ा है।

  • Otipy
  • Deep Rooted
  • Fraazo

इन कंपनियों ने भारी निवेश जुटाने के बावजूद अपने ऑपरेशन बंद कर दिए। इससे यह स्पष्ट होता है कि फ्रेश प्रोड्यूस कैटेगरी में स्केल बनाना और यूनिट इकॉनॉमिक्स को पॉजिटिव रखना आसान नहीं है।


📌 आगे का रास्ता

Pluckk का नया ₹100 करोड़ का फंडिंग राउंड यह संकेत देता है कि कंपनी अभी भी निवेशकों के भरोसे पर खरी उतर रही है।

Farm-to-fork मॉडल, हेल्थ-केंद्रित प्रोडक्ट्स और अधिग्रहण के जरिए विस्तार — ये तीनों रणनीतियां कंपनी को भीड़ से अलग खड़ा करती हैं।

हालांकि, लगातार बढ़ता घाटा एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या Pluckk अपने राजस्व को तेजी से बढ़ाते हुए नुकसान को नियंत्रित कर पाती है या नहीं।

अगर कंपनी यूनिट इकॉनॉमिक्स सुधारने में सफल रहती है, तो $58 मिलियन की संभावित वैल्यूएशन के बाद यह भारतीय फ्रेश फूड ई-कॉमर्स सेगमेंट में एक मजबूत दावेदार बन सकती है।

फिलहाल, निवेशकों का भरोसा बरकरार है — और बाजार की नजरें Pluckk की अगली चाल पर टिकी हुई हैं।

Read more :🏠 Urban Company की InstaHelp सेवा ने पकड़ी रफ्तार,

🏠 Urban Company की InstaHelp सेवा ने पकड़ी रफ्तार,

Urban Company

ऑन-डिमांड होम सर्विस प्लेटफॉर्म Urban Company की क्विक-सेवा हाउसकीपिंग वर्टिकल InstaHelp ने लॉन्च के एक साल से भी कम समय में बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। कंपनी के सह-संस्थापक और CEO Abhiraj Singh Bhal के अनुसार, InstaHelp ने रोज़ाना 50,000 से अधिक बुकिंग का आंकड़ा पार कर लिया है।

मार्च 2025 में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुई इस सेवा ने तेजी से विस्तार करते हुए अब बड़े शहरों में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है।


📊 50,000 डेली बुकिंग का माइलस्टोन

स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, 22 फरवरी 2026 को InstaHelp ने 51,520 दैनिक बुकिंग दर्ज कीं। यह आंकड़ा बताता है कि शहरी भारत में इंस्टेंट होम सर्विसेज की मांग तेज़ी से बढ़ रही है।

कंपनी का अनुमान है कि आने वाले महीनों में मासिक बुकिंग 15 लाख (1.5 मिलियन) का आंकड़ा पार कर सकती है। तुलना के लिए, दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही में Urban Company ने कुल 1.61 मिलियन ऑर्डर दर्ज किए थे।

यह स्पष्ट संकेत है कि InstaHelp अब कंपनी के लिए एक हाई-फ्रीक्वेंसी और स्केलेबल कैटेगरी बनती जा रही है।


🚀 मुंबई से शुरू, अब टॉप शहरों में विस्तार

InstaHelp को सबसे पहले मुंबई में पायलट के तौर पर लॉन्च किया गया था। इसके बाद इसे बेंगलुरु, दिल्ली-एनसीआर, हैदराबाद और पुणे जैसे बड़े शहरों के चुनिंदा माइक्रो-मार्केट्स में विस्तार दिया गया।

यह सेवा ऑन-डिमांड घरेलू कार्यों के लिए उपलब्ध है, जिनमें शामिल हैं:

  • घर की सफाई
  • बर्तन धोना
  • कपड़े धोना
  • भोजन तैयार करना

क्विक-कॉमर्स की तरह, InstaHelp भी तुरंत उपलब्धता और तेज़ सर्विस पर फोकस करता है।


💬 CEO का बयान: हाई-फ्रीक्वेंसी कैटेगरी पर फोकस

Abhiraj Singh Bhal ने कहा कि कंपनी इस वर्टिकल में लगातार निवेश कर रही है ताकि एक बड़ी और बार-बार इस्तेमाल होने वाली सेवा श्रेणी बनाई जा सके।

उनके अनुसार, इस निवेश के शुरुआती नतीजे दिखने लगे हैं — यूनिट इकॉनॉमिक्स में सुधार हो रहा है और दोबारा उपयोग (repeat usage) बढ़ रहा है।

यह बयान संकेत देता है कि कंपनी InstaHelp को केवल एक एक्सपेरिमेंट नहीं बल्कि भविष्य की ग्रोथ इंजन के रूप में देख रही है।


📉 Q3 FY26 में घाटा, लेकिन रेवेन्यू में उछाल

वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो Q3 FY26 में Urban Company ने 21 करोड़ रुपये का समेकित (consolidated) शुद्ध घाटा दर्ज किया। एडजस्टेड EBITDA घाटा 17 करोड़ रुपये रहा।

इस घाटे का बड़ा कारण InstaHelp वर्टिकल में किया गया भारी निवेश बताया गया है।

हालांकि, इसी अवधि में कंपनी का ऑपरेशन्स से रेवेन्यू 32% बढ़कर 383 करोड़ रुपये पहुंच गया।

InstaHelp ने अकेले Q3 FY26 में 28 करोड़ रुपये का NTV (Net Transaction Value) और 6.8 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया।

यह दर्शाता है कि सेवा तेजी से स्केल हो रही है, भले ही अभी लाभप्रदता (profitability) की राह लंबी हो।


⚔️ बढ़ती प्रतिस्पर्धा: Snabbit और Pronto

इंस्टेंट होम सर्विसेज का बाजार अब प्रतिस्पर्धी होता जा रहा है।

क्विक-कॉमर्स की तरह इस स्पेस में भी कई नए खिलाड़ी उतर चुके हैं। उदाहरण के लिए, Pronto ने हाल ही में दावा किया कि उसने 15,000 दैनिक बुकिंग का आंकड़ा पार कर लिया है।

इसी तरह Snabbit भी इस सेगमेंट में पूंजी जुटाकर तेजी से विस्तार कर रहा है।

इस प्रतिस्पर्धा के बीच Urban Company को अपनी ब्रांड वैल्यू, नेटवर्क और टेक्नोलॉजी एडवांटेज का लाभ मिल सकता है।


🔍 क्विक-कॉमर्स जैसा मॉडल, लेकिन घर के लिए

InstaHelp का मॉडल काफी हद तक क्विक-कॉमर्स जैसा है — कम समय में सेवा उपलब्ध कराना, हाई-फ्रीक्वेंसी ऑर्डर और बेहतर यूनिट इकॉनॉमिक्स।

अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो Urban Company अपने प्लेटफॉर्म एंगेजमेंट को गहरा कर सकती है और ग्राहकों को बार-बार वापस लाने में सफल हो सकती है।


📈 आगे की राह

50,000 से अधिक दैनिक बुकिंग का आंकड़ा यह दर्शाता है कि भारत में इंस्टेंट होम सर्विसेज का बाजार तेज़ी से विकसित हो रहा है।

हालांकि, निवेश और प्रतिस्पर्धा के चलते निकट भविष्य में लाभप्रदता चुनौती बनी रह सकती है।

फिर भी, अगर Urban Company यूनिट इकॉनॉमिक्स को संतुलित रखते हुए स्केल बढ़ाने में सफल रहती है, तो InstaHelp कंपनी के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

InstaHelp की तेज़ ग्रोथ इस बात का संकेत है कि भारत में उपभोक्ता अब केवल फूड या ग्रॉसरी ही नहीं, बल्कि घरेलू सेवाओं में भी इंस्टेंट समाधान चाहते हैं।

आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या Urban Company इस वर्टिकल को लाभप्रद बना पाती है और प्रतिस्पर्धा में अपनी बढ़त कायम रख पाती है। 🚀

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