डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) मैट्रेस ब्रांड SleepyCat ने वित्त वर्ष 2025 (FY25) में मजबूत ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 44% बढ़कर 98 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो FY24 में 68 करोड़ रुपये था। खास बात यह रही कि तेजी से स्केलिंग के बावजूद कंपनी ने अपने घाटे को सिंगल डिजिट में बनाए रखा।
Registrar of Companies (RoC) से प्राप्त वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, कंपनी ने ग्रोथ और खर्च के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है।
📈 ऑपरेटिंग रेवेन्यू में 44% की उछाल
FY25 में SleepyCat का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 44% बढ़कर 98 करोड़ रुपये हो गया। यह ग्रोथ D2C मॉडल की मजबूती और ऑनलाइन सेल्स चैनल्स पर बढ़ती डिमांड को दर्शाती है।
कंपनी मुख्य रूप से अपनी वेबसाइट और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए मैट्रेस और स्लीप एक्सेसरीज बेचती है।
🛒 89% रेवेन्यू तैयार उत्पादों की बिक्री से
कंपनी की कुल आय का 89% हिस्सा तैयार उत्पादों (Finished Goods) की बिक्री से आया।
- तैयार उत्पादों से रेवेन्यू 39% बढ़कर 87 करोड़ रुपये हो गया।
- ट्रेडेड गुड्स (Reselling Products) से आय लगभग दोगुनी होकर 9.8 करोड़ रुपये पहुंच गई।
यह दर्शाता है कि कंपनी अपने कोर प्रोडक्ट पोर्टफोलियो के साथ-साथ अतिरिक्त प्रोडक्ट्स से भी ग्रोथ हासिल कर रही है।
💸 खर्चों में भी 44% की बढ़ोतरी
जहां रेवेन्यू बढ़ा, वहीं कंपनी के कुल खर्च भी 44% बढ़कर 108.5 करोड़ रुपये हो गए, जो FY24 में 75.5 करोड़ रुपये थे।
🔹 मटेरियल कॉस्ट
कंपनी की कुल लागत का लगभग आधा हिस्सा मटेरियल कॉस्ट से जुड़ा है।
यह खर्च 52% बढ़कर 54 करोड़ रुपये हो गया (FY24: 35.6 करोड़ रुपये)।
🔹 विज्ञापन खर्च
ब्रांड बिल्डिंग और ऑनलाइन मार्केटिंग पर कंपनी का फोकस जारी रहा।
एडवर्टाइजिंग खर्च 46% बढ़कर 14.6 करोड़ रुपये पहुंच गया।
🔹 कमीशन और लॉजिस्टिक्स
- कमीशन खर्च 41% बढ़कर 11 करोड़ रुपये
- डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स खर्च 56% बढ़कर 8.6 करोड़ रुपये
तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स ऑर्डर्स के कारण लॉजिस्टिक्स लागत में तेज उछाल देखा गया।
🔹 कर्मचारी लाभ खर्च
एम्प्लॉयी बेनिफिट खर्च 11% बढ़कर 10 करोड़ रुपये हो गया।
📉 घाटा बढ़ा, लेकिन कंट्रोल में
स्केल बढ़ने के साथ कंपनी का घाटा भी बढ़ा।
- FY25 में नेट लॉस 29% बढ़कर 9 करोड़ रुपये हो गया (FY24: 7 करोड़ रुपये)।
- EBITDA लॉस 9.6 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल 6.7 करोड़ रुपये था।
- EBITDA मार्जिन लगभग -9.80% पर स्थिर रहा।
ध्यान देने वाली बात यह है कि कंपनी का घाटा अभी भी सिंगल डिजिट में है, जो D2C सेक्टर के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।
📊 ₹1 कमाने के लिए ₹1.11 खर्च
यूनिट इकोनॉमिक्स के आधार पर, कंपनी ने FY25 में 1 रुपये कमाने के लिए 1.11 रुपये खर्च किए।
यह अनुपात FY24 के समान ही रहा, जिससे संकेत मिलता है कि ग्रोथ के बावजूद लागत संरचना में बड़ा सुधार नहीं हुआ है।
वित्त वर्ष के अंत में कंपनी के पास 3 करोड़ रुपये का कैश और बैंक बैलेंस था, जबकि करंट एसेट्स 18.6 करोड़ रुपये रहे।
💰 अब तक जुटाए 5 मिलियन डॉलर
SleepyCat अब तक लगभग 5 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटा चुकी है।
कंपनी के प्रमुख निवेशकों में DSG Consumer Partners शामिल है, जिसने इस ब्रांड की शुरुआती ग्रोथ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
D2C ब्रांड्स के लिए सीमित फंडिंग के बावजूद स्थिर ग्रोथ दिखाना कंपनी की रणनीति को दर्शाता है।
🏁 प्रतिस्पर्धा का दबाव
मैट्रेस और स्लीप सॉल्यूशन सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा तेज हो चुकी है।
🛏️ The Sleep Company
प्रतिद्वंदी The Sleep Company का रेवेन्यू FY25 में 60% बढ़कर 499 करोड़ रुपये हो गया (FY24: 312 करोड़ रुपये)।
कंपनी ने अपने EBITDA घाटे को घटाकर 39 करोड़ रुपये कर लिया।
🛌 Wakefit
सेक्टर की बड़ी कंपनी Wakefit ने हाल ही में स्टॉक एक्सचेंज पर एंट्री की, हालांकि उसकी लिस्टिंग अपेक्षाकृत कमजोर रही।
Wakefit ने Q3 FY26 में 421 करोड़ रुपये का ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज किया और 34 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सेक्टर में बड़े खिलाड़ियों का दबदबा है, लेकिन मिड-साइज़ ब्रांड्स भी अपनी जगह बना रहे हैं।
🔎 आगे की राह
SleepyCat के लिए आने वाला समय काफी महत्वपूर्ण रहेगा।
कंपनी को:
- यूनिट इकोनॉमिक्स सुधारने
- लॉजिस्टिक्स और मटेरियल कॉस्ट कंट्रोल करने
- ब्रांड डिफरेंशिएशन मजबूत करने
- ऑफलाइन चैनल्स में विस्तार करने
जैसे कदम उठाने होंगे।
D2C मैट्रेस मार्केट में ग्राहक अनुभव, प्रोडक्ट क्वालिटी और डिलीवरी स्पीड सबसे बड़ा फैक्टर बन चुके हैं।
📝 निष्कर्ष
SleepyCat ने FY25 में मजबूत 44% रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है और 100 करोड़ रुपये के करीब पहुंच गई है। हालांकि घाटा बढ़ा है, लेकिन वह अभी भी सिंगल डिजिट में है, जो कंपनी की लागत नियंत्रण रणनीति को दर्शाता है।
तेजी से बढ़ते प्रतिस्पर्धी माहौल में SleepyCat को अपनी ब्रांड पोजिशनिंग और प्रॉफिटेबिलिटी पर फोकस बढ़ाना होगा।
अगर कंपनी यूनिट इकोनॉमिक्स सुधारने में सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में यह D2C स्लीप सेगमेंट में एक मजबूत दावेदार बन सकती है। 🚀
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