🔍 Myntra पर ED की बड़ी कार्रवाई: ₹1,654 करोड़ के FDI नियम उल्लंघन का आरोप

Myntra

ई-कॉमर्स फैशन कंपनी Myntra Designs Pvt. Ltd. और उससे जुड़ी संस्थाओं पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने Foreign Exchange Management Act (FEMA), 1999 की धारा 16(3) के तहत शिकायत दर्ज की है। आरोप है कि कंपनी ने भारत की FDI नीति का उल्लंघन करते हुए ₹1,654 करोड़ से अधिक की विदेशी पूंजी निवेश (FDI) प्राप्त की और उसे गलत तरीके से उपयोग किया।

🔍 ED का आरोप क्या है?

ED के बेंगलुरु ज़ोनल ऑफिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, Myntra और उसकी सहयोगी कंपनियां “Cash & Carry” होलसेल बिज़नेस के नाम पर मल्टी-ब्रांड रिटेल ट्रेडिंग (MBRT) कर रही थीं, जो भारत की FDI पॉलिसी के अंतर्गत प्रतिबंधित है।

ED का दावा है कि Myntra को ₹1,654.35 करोड़ का विदेशी निवेश मिला, जिसमें उसने खुद को एक होलसेल कंपनी बताकर निवेश हासिल किया। लेकिन असल में Myntra ने अधिकांश सामान Vector E-Commerce Pvt. Ltd. को बेचा, जो एक रिलेटेड पार्टी है। इसके बाद Vector ने उन उत्पादों को आम ग्राहकों को रिटेल में बेचा।

📦 B2B की आड़ में B2C बिक्री?

ED के मुताबिक, Myntra ने अपने होलसेल बिज़नेस को रिटेल सेल्स में बदलने के लिए Vector E-Commerce का इस्तेमाल किया। इससे कंपनी का बिज़नेस मॉडल B2C (बिज़नेस टू कस्टमर) हो गया, जबकि निवेश B2B (बिज़नेस टू बिज़नेस) के लिए लिया गया था।

भारत की FDI पॉलिसी 2010 के अनुसार, कोई भी होलसेल कंपनी अपनी कुल बिक्री का केवल 25% ही अपनी ग्रुप कंपनियों को बेच सकती है। लेकिन Myntra ने अपनी पूरी बिक्री (100%) Vector को की, जो स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है।

📜 FEMA के अंतर्गत नियमों का उल्लंघन

ED ने कहा है कि यह कार्यवाही FEMA की धारा 6(3)(b) और भारत सरकार की Consolidated FDI Policy के कई नियमों के खिलाफ है। इस शिकायत को अब FEMA की Adjudicating Authority के पास भेजा गया है।

📢 Myntra का जवाब

“Myntra कानून का पूरी तरह पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है। एक भारतीय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के रूप में हम डिजिटल कॉमर्स के ज़रिए देश की टेक्सटाइल और एपरल इंडस्ट्री को सशक्त बनाने का काम कर रहे हैं। हमने पारंपरिक शिल्प को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। हम अब तक ED की शिकायत की प्रति प्राप्त नहीं कर पाए हैं, लेकिन हम जांच एजेंसी के साथ पूरी तरह सहयोग करेंगे।”

📊 क्या है नियम और इसका महत्व?

भारत की विदेशी निवेश नीति में यह स्पष्ट किया गया है कि होलसेल बिज़नेस में 100% FDI की अनुमति है, लेकिन इससे जुड़ी कंपनियां अपनी ग्रुप कंपनियों को केवल 25% तक ही सेल कर सकती हैं। इसका उद्देश्य है कि कोई भी कंपनी होलसेल लाइसेंस का दुरुपयोग कर रिटेल बिज़नेस न करे क्योंकि रिटेल में विदेशी निवेश की शर्तें अलग और अधिक सख्त हैं।

📌 क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

  • यह मामला ई-कॉमर्स इंडस्ट्री के लिए एक चेतावनी की तरह है कि FDI नियमों का उल्लंघन अब नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
  • इससे FDI निवेशकों और कंपनियों के बीच पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
  • ED अब यह जांच कर रही है कि अन्य ई-कॉमर्स और रिटेल कंपनियां भी इसी तरह के नियम उल्लंघन में लिप्त हैं या नहीं।

🧵 Myntra और Vector के बीच संबंध

Myntra और Vector E-Commerce को एक ही कॉरपोरेट ग्रुप का हिस्सा माना गया है। इस प्रकार के संबंधों में अगर बिक्री होती है तो उसे “रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन” के तहत देखा जाता है और इसमें नियम काफी सख्त होते हैं। ED का मानना है कि Vector का इस्तेमाल Myntra ने एक परदे के तौर पर किया ताकि होलसेल के नाम पर असल में रिटेल बिज़नेस चलाया जा सके।

📈 भविष्य की कार्रवाई और असर

  • अगर FEMA के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो Myntra पर भारी जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
  • इससे भारत में काम कर रही विदेशी कंपनियों और निवेशकों के लिए एक कड़ा संदेश जाएगा।
  • यह केस भारत की FDI निगरानी व्यवस्था की सख्ती को भी दर्शाता है।

📝 निष्कर्ष

Myntra पर ED की यह कार्रवाई भारत में FDI नीति के पालन को लेकर एक बड़ा उदाहरण बन सकती है। ई-कॉमर्स सेक्टर में तेज़ी से हो रहे बदलावों के बीच यह सुनिश्चित करना आवश्यक हो गया है कि सभी कंपनियां FDI नियमों का कड़ाई से पालन करें। Myntra जैसे बड़े ब्रांड पर हुई यह कार्रवाई भविष्य में अन्य कंपनियों के लिए भी मार्गदर्शन का काम करेगी।


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🏥 Pristyn Care ने 4 मिलियन डॉलर जुटाए,

Pristyn Care

सर्जरी-केंद्रित हॉस्पिटल चेन Pristyn Care ने हाल ही में एक नई फंडिंग राउंड के तहत 4 मिलियन डॉलर (लगभग ₹33 करोड़) की पूंजी जुटाई है। इस फंडिंग का इस्तेमाल कंपनी अपने स्वामित्व वाले अस्पतालों के विस्तार के लिए करेगी।


💸 निवेश का ब्योरा: किसने कितना लगाया?

Pristyn Care ने इस फंडिंग के तहत 34,280 Series E1 CCPS (Compulsorily Convertible Preference Shares) को ₹10,038.16 प्रति शेयर की कीमत पर जारी किया है। यह शेयर कीमत पहले की फंडिंग राउंड जितनी ही है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कंपनी की वैल्यूएशन में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

इस राउंड में दो प्रमुख मौजूदा निवेशकों ने भाग लिया:

  • Peak XV Partners
  • Hummingbird Ventures

Entrackr की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी वर्तमान में नए और पुराने निवेशकों से मिलाकर $100 मिलियन (लगभग ₹830 करोड़) की बड़ी फंडिंग जुटाने की भी कोशिश कर रही है।


🏥 विस्तार की योजनाएं: अस्पतालों की संख्या दोगुनी होगी

पिछले 4 महीनों में, Pristyn Care ने 8 नए अस्पताल शुरू किए हैं। कंपनी फिलहाल 200,000 वर्ग फुट क्षेत्र में फैले हुए 450 बेड्स वाले अस्पतालों का संचालन कर रही है। लेकिन यही अंत नहीं है — कंपनी ने बताया है कि दिसंबर 2025 तक वह अपने नेटवर्क को दोगुना करना चाहती है। यानी अगले कुछ महीनों में 10 से अधिक नए अस्पतालों की शुरुआत की जाएगी।

इस विस्तार के पीछे कंपनी का उद्देश्य टियर-1 और टियर-2 शहरों में किफायती, कस्टमर-सेंट्रिक और आधुनिक सर्जरी सुविधाएं प्रदान करना है।


📊 कंपनी का प्रदर्शन: राजस्व में उछाल, घाटा स्थिर

TheKredible के अनुसार, Pristyn Care अब तक कुल $180 मिलियन (लगभग ₹1500 करोड़) की फंडिंग जुटा चुकी है। इस निवेश में Tiger Global, Epiq Capital, और Peak XV Partners जैसे बड़े निवेशकों का सहयोग रहा है।

वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) में कंपनी ने:

  • ₹600 करोड़ से अधिक का ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज किया (30% की सालाना वृद्धि)
  • लेकिन घाटा ₹381 करोड़ पर स्थिर रहा

यह आंकड़े बताते हैं कि कंपनी तेज़ी से विकास कर रही है, लेकिन अभी लाभप्रदता की दिशा में और काम करने की जरूरत है।


🏗️ फंडिंग का उपयोग कहां होगा?

कंपनी इस फंडिंग से:

  • नए अस्पतालों का निर्माण
  • मौजूदा सुविधाओं को अपग्रेड करना
  • मेडिकल इक्विपमेंट और स्टाफिंग में निवेश
  • और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करेगी।

इसके अलावा, कंपनी ने अपना authorised capital भी बढ़ाया है ताकि भविष्य में अधिक फंडिंग जुटाने में कोई अड़चन न आए।


🩺 Pristyn Care का बिज़नेस मॉडल क्या है?

Pristyn Care एक asset-light, doctor-led surgical platform है जो भारत में Elective Surgeries की सुविधा प्रदान करता है। ये Surgeries प्लास्टिक सर्जरी, प्रोक्टोलॉजी, यूरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक, और वेट लॉस जैसे क्षेत्रों में होती हैं।

कंपनी का मॉडल डॉक्टरों और क्लीनिकों को जोड़कर, पेशेंट को एंड-टू-एंड सर्जरी के अनुभव देने पर केंद्रित है — जिसमें कंसल्टेशन, डायग्नोसिस, सर्जरी, और पोस्ट-ऑप केयर शामिल है।


📍 कहां-कहां मौजूद है Pristyn Care?

Pristyn Care की उपस्थिति देश के लगभग सभी बड़े महानगरों में है, जैसे:

  • दिल्ली NCR
  • मुंबई
  • बैंगलोर
  • हैदराबाद
  • कोलकाता
  • चेन्नई

इसके अलावा कंपनी 100+ शहरों में अपनी सेवाएं देने की तैयारी कर रही है।


🔍 आने वाले समय में क्या?

कंपनी का लक्ष्य अब भारत में Elective Surgeries का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म बनना है। इसके लिए वह:

  • मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल नेटवर्क
  • AI आधारित ऑपरेशन और डिलीवरी मॉड्यूल
  • और किफायती हेल्थकेयर प्लान्स पर फोकस कर रही है।

Pristyn Care की यह नई फंडिंग उसे देश के हर कोने तक आधुनिक सर्जरी की सुविधा पहुंचाने में मदद करेगी।


📌 निष्कर्ष:
Pristyn Care का यह 4 मिलियन डॉलर का नया निवेश भारत के हेल्थटेक सेक्टर में बढ़ती संभावनाओं का प्रतीक है। जहां एक ओर कंपनी का रेवेन्यू तेजी से बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर घाटे पर नियंत्रण और लाभप्रदता हासिल करना इसकी अगली चुनौती होगी। लेकिन मौजूदा निवेशकों का भरोसा दिखाता है कि कंपनी की रणनीति दीर्घकालिक रूप से सही दिशा में जा रही है।

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🇮🇳 भारत में एंटरप्राइज AI स्टार्टअप Kluisz.ai ने जुटाए ₹80 करोड़ ($9.6 मिलियन)

Kluisz.ai

भारत के एंटरप्राइज AI इंफ्रास्ट्रक्चर स्टार्टअप Kluisz.ai ने अपनी सीड फंडिंग राउंड में $9.6 मिलियन (लगभग ₹80 करोड़) जुटाए हैं। इस निवेश का नेतृत्व RTP Global ने किया है। यह 2025 में भारत से निकले किसी भी AI-केंद्रित डीपटेक स्टार्टअप के लिए अब तक की सबसे बड़ी सीड फंडिंग में से एक मानी जा रही है।


💰 किन निवेशकों ने लगाया पैसा?

Kluisz.ai के इस फंडिंग राउंड में RTP Global के अलावा कई अन्य रणनीतिक निवेशकों ने भाग लिया, जिनमें शामिल हैं:

  • Unicorn India Ventures
  • Blume Founders Fund
  • Climber Capital

साथ ही, कुछ प्रमुख एंजेल इन्वेस्टर्स ने भी इसमें निवेश किया, जैसे:

  • रितेश अग्रवाल (Oyo)
  • रितेश मलिक (Innov8)
  • आदित्य वीर्वानी (Embassy Group)
  • और अन्य टॉप इंडस्ट्री लीडर्स

🧠 Kluisz.ai क्या करता है?

Kluisz.ai एक AI-नेटिव, डेवलपर-फर्स्ट प्राइवेट क्लाउड प्लेटफॉर्म बना रहा है, जो खासतौर पर एंटरप्राइज यूज़ केस के लिए डिजाइन किया गया है। इसका फोकस है:

  • AI वर्कलोड्स को ऑर्केस्ट्रेट करना – चाहे वो हाइब्रिड, ऑन-प्रिमाइज़, एज या सॉवरेन क्लाउड पर क्यों न हों।
  • सिक्योरिटी, ऑब्ज़रवेबिलिटी और ऑटोमेशन को प्लेटफॉर्म में इंबेड करना।
  • डेवलपर्स को यह सुविधा देना कि वे अपने परफॉर्मेंस, कंप्लायंस या कॉस्ट ऑब्जेक्टिव्स को सेट कर सकें, और बाकी काम प्लेटफॉर्म खुद कर ले।

यह तकनीक विशेष रूप से बीएफएसआई (BFSI), मैन्युफैक्चरिंग और अन्य रेगुलेटेड सेक्टर्स के लिए कारगर साबित हो सकती है, जहां डेटा सिक्योरिटी और लोकलाइज्ड प्रोसेसिंग की ज़रूरत होती है।


👥 फाउंडर्स कौन हैं?

Kluisz.ai की शुरुआत 2025 में तीन अनुभवी इंडस्ट्री लीडर्स ने मिलकर की:

  • अभिनव सिन्हा – पूर्व Oyo COO और CPO
  • वम्शिधर रेड्डी – पूर्व मैकिन्से पार्टनर
  • अभिजीत सिंह – पूर्व Jio क्लाउड एग्जिक्युटिव

इनकी पिछली भूमिकाएं और अनुभव इस बात को दर्शाते हैं कि टीम ने पहले भी लार्ज-स्केल AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को लीड किया है।


🏗️ फंडिंग का उपयोग कहां होगा?

Kluisz.ai ने कहा है कि इस ताज़ा फंडिंग से वे निम्नलिखित क्षेत्रों में निवेश करेंगे:

  1. बेंगलुरु स्थित इंजीनियरिंग टीम को स्केल करना
  2. प्रोडक्ट डेवलपमेंट को तेज़ करना
  3. शुरुआती डिज़ाइन पार्टनर्स को ऑनबोर्ड करना

कंपनी का फोकस ऐसे एंटरप्राइज ग्राहकों पर है जिन्हें AI वर्कलोड्स के लिए हाई-कस्टमाइज़ेशन, सिक्योरिटी और लो-लेटेंसी इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत होती है।


🗣️ निवेशकों की राय क्या है?

RTP Global के पार्टनर मधुर मक्कर ने इस निवेश को लेकर कहा:

“Kluisz.ai एक बेहद जटिल और वैश्विक समस्या को हल करने की दिशा में काम कर रहा है, और वह भी एक ऐसी टीम के साथ जो पहले भी बड़े स्तर पर यह कर चुकी है। हम भारत से निकलते AI इंफ्रास्ट्रक्चर स्टार्टअप्स में और गहराई से निवेश करना चाहते हैं।”


📈 भविष्य की योजनाएं

  • फिलहाल Kluisz.ai में 20 से कम कर्मचारी हैं, लेकिन कंपनी अगले 12–18 महीनों में तेज़ी से टीम विस्तार की योजना बना रही है।
  • कंपनी की दीर्घकालिक योजना है कि वह भारत और वैश्विक बाजारों में एंटरप्राइज AI ऑप्टिमाइज़ेशन और इन्फ्रास्ट्रक्चर ऑटोमेशन का केंद्र बने।

🔍 क्यों खास है Kluisz.ai?

  • यह एक डेवलपर-फर्स्ट और AI-नेटिव दृष्टिकोण अपनाता है, जो पारंपरिक क्लाउड और इंफ्रास्ट्रक्चर समाधानों से अलग है।
  • इस प्लेटफॉर्म पर डेवलपर्स अपने प्रायोरिटी ऑब्जेक्टिव्स सेट करते हैं, और सिस्टम खुद-ब-खुद संसाधनों का बेस्ट उपयोग करता है।
  • इसका मॉडल कॉस्ट एफिशियंसी, कंप्लायंस और हाई-परफॉर्मेंस को संतुलित करता है, जो आज के एंटरप्राइज वर्कलोड्स के लिए बेहद ज़रूरी है।

🧩 AI इंफ्रास्ट्रक्चर का नया अध्याय

भारत में AI स्टार्टअप्स तेजी से उभर रहे हैं, लेकिन Kluisz.ai का फोकस एक बैकएंड टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर पर है – जहां प्रतिस्पर्धा कम लेकिन टेक्निकल चुनौतियां बहुत गहरी हैं। इस क्षेत्र में निवेशकों की बढ़ती रुचि यह दिखाती है कि अब भारत भी सिर्फ AI ऐप्स का ही नहीं, बल्कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण का भी केंद्र बन रहा है।


📌 निष्कर्ष

Kluisz.ai की यह फंडिंग न केवल इस स्टार्टअप के लिए मील का पत्थर है, बल्कि यह भारत के AI तकनीकी इकोसिस्टम के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है। Deeptech और इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित स्टार्टअप्स अब केवल इनोवेशन नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा की ओर बढ़ रहे हैं।


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💪 फिटनेस स्टार्टअप ApClub ने जुटाए ₹2 करोड़,

ApClub

बेंगलुरु स्थित फिटनेस स्टार्टअप ApClub ने अपने पहले प्री-सीड फंडिंग राउंड में ₹2 करोड़ जुटाए हैं। इस फंडिंग का नेतृत्व Curefit Healthcare ने किया, जबकि PedalStart और कुछ चुनिंदा एंजेल इन्वेस्टर्स ने भी इसमें भाग लिया।

इस फंडिंग से कंपनी अपने ऑपरेशंस को स्केल करने, टीम का विस्तार करने और डोरस्टेप फिटनेस सर्विसेज में विविधता लाने की योजना बना रही है।


🏋️‍♀️ घर बैठे फिटनेस: ApClub का नया नजरिया

ApClub एक ऐसा स्टार्टअप है जो लोगों को उनके घर या अपार्टमेंट परिसर के भीतर ही फिटनेस और वेलनेस की सुविधाएं देता है। इसमें शामिल हैं:

  • स्ट्रेंथ ट्रेनिंग
  • योगा
  • वेट लॉस प्रोग्राम
  • पिलेट्स
  • और अन्य पर्सनल वेलनेस सेवाएं

अक्टूबर 2023 में स्थापित इस स्टार्टअप का उद्देश्य है कि लोग बिना कहीं गए ही फिट रह सकें और उनके जीवन में वेलनेस एक आसान विकल्प बन जाए।


🏘️ अभी कहां-कहां काम कर रहा है ApClub?

ApClub फिलहाल बेंगलुरु के 40 से अधिक अपार्टमेंट कम्युनिटीज़ में अपनी सेवाएं दे रहा है और अब तक करीब 500 ग्राहकों को फिटनेस सेवाएं प्रदान कर चुका है।

यह पूरी तरह से वेब-प्लेटफॉर्म आधारित मॉडल पर काम करता है, और कंपनी 2025 के दूसरे हिस्से में अपना मोबाइल ऐप लॉन्च करने की योजना बना रही है, जिससे बुकिंग और एक्सेस और भी आसान हो जाएगा।


📈 फंड का उपयोग कहां किया जाएगा?

ApClub ने बताया है कि इस फंडिंग से वे निम्नलिखित कार्यों पर फोकस करेंगे:

  1. ऑपरेशन्स को स्केल करना – और ज़्यादा अपार्टमेंट कम्युनिटीज़ और ग्राहकों तक पहुंच बनाना।
  2. टीम का विस्तार – फिटनेस कोच, योगा ट्रेनर, स्पोर्ट्स एक्सपर्ट्स आदि की भर्ती।
  3. नई सर्विसेज का विस्तार – अब यह कंपनी ग्रुप क्लासेस और बच्चों और बड़ों के लिए स्पोर्ट्स कोचिंग जैसी वेलनेस फॉर्मेट्स भी शुरू करेगी।
  4. लॉन्ग-टर्म प्रोजेक्ट्स – जैसे अपार्टमेंट क्लबहाउस और जिम्स को मैनेज करना।

📊 कंपनी का लक्ष्य और ग्रोथ प्लान

ApClub का टारगेट है कि वह:

  • 2026 तक $1 मिलियन का वार्षिक रेवेन्यू (ARR) हासिल करे।
  • बेंगलुरु से बाहर अन्य मेट्रो और टियर-1 शहरों में अपने कदम बढ़ाए।

कंपनी उन यूज़र्स को टारगेट कर रही है जो शहरों में रहते हैं और फिटनेस के लिए समय निकालना उनके लिए मुश्किल होता है।


🧘‍♀️ वेलनेस इंडस्ट्री में बढ़ती मांग

शहरों में आज की लाइफस्टाइल इतनी तेज़ है कि लोग जिम जाने या क्लास अटेंड करने के लिए समय नहीं निकाल पाते। ऐसे में ApClub जैसा मॉडल जो कस्टमाइज्ड, ऑन-डोर और पर्सनलाइज्ड फिटनेस पर केंद्रित हो, तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

कंपनी का फोकस सिर्फ फिटनेस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों को एक संपूर्ण वेलनेस अनुभव देना चाहती है जिसमें मानसिक, शारीरिक और सामाजिक स्वास्थ्य को बढ़ावा दिया जा सके।


🔍 मार्केट में किससे है मुकाबला?

ApClub का मुकाबला बेंगलुरु और अन्य मेट्रो शहरों में मौजूद Urban Company, Curefit, और लोकल फिटनेस सॉल्यूशन्स से है। लेकिन ApClub की खासियत है:

  • 100% ऑन-लोकेशन सर्विस
  • हाउसिंग सोसाइटी फोकस
  • पर्सनल ट्रेनर्स और कोचिंग
  • फैमिली-ओरिएंटेड मॉडल (बच्चों के लिए कोचिंग)

🏡 नया ट्रेंड: अपार्टमेंट में फिटनेस इकोसिस्टम

ApClub की लॉन्ग टर्म योजना में वह हाउसिंग सोसाइटी के क्लबहाउस और जिम्स को मैनेज करने की योजना पर काम कर रही है। यह एक बड़ा ट्रेंड बनता जा रहा है जहां डेवलपर्स अपने प्रोजेक्ट्स में फिटनेस और वेलनेस को इंटीग्रेट कर रहे हैं।

ApClub इसे प्रोफेशनल तरीके से मैनेज कर डेवलपर्स और सोसाइटीज को एक पूरी फिटनेस सॉल्यूशन देना चाहता है।


🔚 निष्कर्ष

ApClub जैसे स्टार्टअप यह दिखा रहे हैं कि अब फिटनेस सिर्फ जिम या ऐप्स तक सीमित नहीं रही। लोग चाहते हैं कि फिटनेस उनके दरवाज़े पर आए, और वह भी कस्टमाइज़्ड और क्वालिटी सर्विस के साथ।

इस ₹2 करोड़ की फंडिंग के साथ ApClub एक नया अध्याय शुरू कर रहा है जहां वह अपनी सर्विसेज को और बेहतर बना कर, अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ेगा।


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Read more : IPO की तैयारी में Milky Mist 2,035 करोड़ रुपये जुटाने की योजना,

🥛 IPO की तैयारी में Milky Mist 2,035 करोड़ रुपये जुटाने की योजना,

Milky Mist

दक्षिण भारत की प्रमुख डेयरी कंपनी Milky Mist Dairy ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास अपना Draft Red Herring Prospectus (DRHP) दाखिल कर दिया है। कंपनी का लक्ष्य है कि वह 2,035 करोड़ रुपये तक का फंड Initial Public Offering (IPO) के जरिए जुटा सके।

इस फंडिंग में से 1,785 करोड़ रुपये का हिस्सा फ्रेश इश्यू होगा और बाकी के 250 करोड़ रुपये का हिस्सा Offer for Sale (OFS) के तहत प्रमोटर्स द्वारा बेचे जाएंगे।


👨‍👩‍👦 प्रमोटर्स बेचेंगे हिस्सेदारी

Milky Mist के DRHP के अनुसार:

  • प्रमोटर सतीशकुमार टी (T. Sathishkumar) लगभग 150 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी बेचेंगे।
  • वहीं, अनिता एस (Anitha S) 100 करोड़ रुपये के शेयर OFS में बेचेंगी।

अनिता एस वर्तमान में कंपनी की सबसे बड़ी शेयरधारक हैं जिनके पास 51.45% हिस्सेदारी है। सतीशकुमार टी के पास 40.94% हिस्सेदारी है। इसके अलावा Aquarius Family Private Trust और Taurus Family Private Trust के पास कंपनी में 2.5% हिस्सेदारी है।


🏦 बुक रनिंग लीड मैनेजर्स

इस IPO को हैंडल करने वाले प्रमुख मर्चेंट बैंकर्स हैं:

  • JM Financial
  • Axis Capital
  • IIFL Securities

🧀 Milky Mist: एक ब्रांड, जिसने दक्षिण भारत में जमाई पकड़

Milky Mist की स्थापना 1997 में हुई थी। यह कंपनी आज दक्षिण भारत में Paneer, Cheese, Curd, Yogurt, Ghee जैसे डेयरी उत्पादों की सबसे भरोसेमंद कंपनियों में गिनी जाती है।

  • कंपनी की प्रोसेसिंग क्षमता: प्रतिदिन 12.5 लाख लीटर दूध
  • सालाना 26,280 मीट्रिक टन पनीर का उत्पादन करती है।
  • 67,000 से अधिक किसानों से सीधे दूध की खरीद करती है।

💰 IPO से जुटाए गए फंड का इस्तेमाल कहां होगा?

DRHP के अनुसार, IPO से प्राप्त फंड का उपयोग निम्नलिखित कार्यों में किया जाएगा:

  1. 750 करोड़ रुपये: पुराने कर्ज को चुकाने या प्रीपेमेंट के लिए।
  2. 414 करोड़ रुपये: तमिलनाडु के Perundurai में कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का विस्तार और अपग्रेडेशन।
  3. 129 करोड़ रुपये: फ्रीज़र और कूलर जैसे रेफ्रिजरेशन इक्विपमेंट खरीदने में।
  4. शेष राशि: सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों में।

📊 वित्तीय प्रदर्शन: FY23 से FY25 तक जबरदस्त ग्रोथ

Milky Mist ने पिछले कुछ वर्षों में जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की है:

वित्तीय वर्षराजस्व (Revenue)शुद्ध लाभ (Net Profit)
FY23₹1,394 करोड़₹19.4 करोड़
FY24₹1,822 करोड़
FY25₹2,349 करोड़₹46 करोड़

62% राजस्व पनीर, दही और चीज़ जैसे मुख्य उत्पादों से आता है, और 71% बिक्री दक्षिण भारत से होती है।


🧊 टेक्नोलॉजी और रिटेल नेटवर्क पर फोकस

Milky Mist तेजी से अपने कोल्ड चेन नेटवर्क और रिटेल चैनल्स को मजबूत कर रही है। कंपनी अपने उत्पादों को FMCG मॉडल के तहत, छोटे-छोटे कस्बों और शहरी इलाकों में वितरित करती है।

इसके लिए कंपनी ने बड़े पैमाने पर फ्रीज़र इक्विपमेंट, लॉजिस्टिक्स सिस्टम और डिजिटल इन्वेंटरी ट्रैकिंग तकनीकों में निवेश किया है।


🇮🇳 डेयरी इंडस्ट्री में IPO की नई लहर?

Milky Mist का IPO भारतीय डेयरी इंडस्ट्री में एक महत्वपूर्ण माइलस्टोन माना जा रहा है। यह संकेत है कि डेयरी सेक्टर अब FMCG ग्रोथ की तर्ज पर आगे बढ़ रहा है, जहां ब्रांडिंग, सप्लाई चेन और टेक्नोलॉजी का बड़ा रोल है।


🔚 निष्कर्ष

Milky Mist का यह IPO न केवल कंपनी के लिए एक मील का पत्थर होगा बल्कि निवेशकों के लिए भी एक बड़ा अवसर हो सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो डेयरी और कंज्यूमर ब्रांड्स में लंबी अवधि के रिटर्न की तलाश कर रहे हैं।

जैसे-जैसे कंपनी का विस्तार होता जा रहा है और उसकी ब्रांड वैल्यू मजबूत हो रही है, वैसा ही विश्वास मार्केट में भी दिख रहा है। अब देखना यह है कि IPO लॉन्च के बाद निवेशकों की प्रतिक्रिया कैसी रहती है और कंपनी किस तेजी से ऑल इंडिया लेवल पर विस्तार कर पाती है।


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📈 Zomato बनी Eternal Ltd

Eternal

🧾 परिचय: Eternal Ltd (पूर्व में Zomato) का पहला तिमाही नतीजा FY26 में शानदार रहा

Eternal Ltd, जो पहले Zomato के नाम से जानी जाती थी, ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (Q1 FY26) में 7,167 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड रेवेन्यू दर्ज की है, जो पिछले साल की समान अवधि से 70% अधिक है। हालांकि, कंपनी की मूल फूड डिलीवरी सेवा की ग्रोथ अब सीमित होती दिख रही है, और नए वर्टिकल्स जैसे Blinkit और Hyperpure अब कंपनी की ग्रोथ का मुख्य स्रोत बन गए हैं।


🍔 फूड डिलीवरी: ग्रोथ की स्पीड हो रही धीमी

Zomato की पहचान बनी फूड डिलीवरी सर्विस अब धीरे-धीरे मैच्योर हो रही है। इस सेगमेंट से रेवेन्यू में केवल 16% की सालाना वृद्धि हुई है, जो Q1 FY26 में 2,261 करोड़ रुपये रही। वहीं Net Order Value (NOV) में 13% की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले क्वार्टर (14%) से थोड़ा कम है।

Eternal के CEO दीपिंदर गोयल ने भी इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, “20%+ ग्रोथ अब संभव नहीं दिख रही,” जिससे ये संकेत मिलता है कि कोविड के बाद आई तेजी अब धीमी हो रही है।


⚡ Blinkit: अब फास्टेस्ट ग्रोथ ड्राइवर

Quick commerce वर्टिकल Blinkit ने इस तिमाही में पहली बार फूड डिलीवरी को पीछे छोड़ दिया। Blinkit की Net Order Value में 127% और रेवेन्यू में 154% की जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की गई, जो अब ₹2,400 करोड़ पहुंच गई है। Blinkit के पास अब कुल 1,544 डार्क स्टोर्स हैं, जिनमें से 243 Q1 में ही जोड़े गए हैं। कंपनी का लक्ष्य दिसंबर तक 2,000 स्टोर्स तक पहुंचने का है।


🏙️ मेट्रो से टियर-2 शहरों तक: Blinkit की पकड़ मज़बूत

Blinkit अब केवल मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं है। छोटे शहरों में भी यह तेजी से पैर जमा रहा है। Blinkit के CEO अलबिंदर धिन्डसा के अनुसार, “अब कई शहरों में प्रॉफिटबिलिटी हासिल हो चुकी है। लॉन्ग टर्म में 5–6% मार्जिन का स्पष्ट रोडमैप है।”


🍱 10 मिनट में खाना: Bistro के ज़रिए नया प्रयोग

Eternal अब अपने “10 मिनट में डिलीवरी” वादे को खाना पहुंचाने तक भी बढ़ा रहा है। इसके तहत कंपनी ने Bistro नाम की नई सर्विस शुरू की है, जो दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु में 38 क्लाउड किचन से ऑपरेट करती है। इसका मकसद कम कीमत में क्विक मील्स और स्नैक्स मुहैया कराना है—जो पारंपरिक फूड डिलीवरी में अभी तक पूरी तरह एड्रेस नहीं हुए हैं।


🏭 Hyperpure: B2B सेगमेंट में जबरदस्त उछाल

Eternal का B2B सप्लाई वर्टिकल Hyperpure ने भी तगड़ी ग्रोथ दिखाई है। इस सेगमेंट का रेवेन्यू 89% YoY बढ़कर नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है। हालांकि Blinkit के इन्वेंटरी मॉडल में जाने से Hyperpure को नॉन-रेस्टोरेंट क्लाइंट्स से रेवेन्यू में थोड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।


👨‍💼 नेतृत्व में बदलाव: Tech को प्राथमिकता

Eternal ने अपनी लीडरशिप स्ट्रक्चर में बदलाव करते हुए प्रोडक्ट लीडर आदित्य मंगला को फूड डिलीवरी CEO नियुक्त किया है। दीपिंदर गोयल के अनुसार, यह “रोटेशनल लीडरशिप” मॉडल का हिस्सा है, जिससे निर्णय-निर्माण ताज़ा बना रहे और टॉप मैनेजमेंट में स्टैग्नेशन न हो।

उनका कहना है: “हम ऐसे बिज़नेस बनाना चाहते हैं जो व्यक्तियों से नहीं, सिद्धांतों से संचालित हों।”


📊 ग्रोथ और चुनौतियां: निवेशकों की परीक्षा

जहां Eternal का फोकस अब फूड डिलीवरी से हटकर ग्रोसरी और क्विक सर्विस में शिफ्ट हो रहा है, वहीं निवेशकों के लिए ये समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कंपनी का वैल्यूएशन आज भी बहुत ऊंचा है, लेकिन अगर आने वाले समय में डिलीवरी या ग्रोसरी बिज़नेस से स्थिर प्रॉफिट नहीं आता या कोई नया वर्टिकल ब्रेकआउट नहीं करता, तो धैर्य की परीक्षा हो सकती है।


🔮 निष्कर्ष: Eternal अब सिर्फ खाने तक सीमित नहीं

Zomato से Eternal बनने की इस यात्रा में कंपनी ने अपने बिजनेस मॉडल को पूरी तरह री-इन्वेंट किया है। Blinkit, Hyperpure और Bistro जैसे इनिशिएटिव्स इस बात का संकेत हैं कि कंपनी अब वहां ग्रोथ खोज रही है जहां यूज़र्स की मांग सबसे तेज़ है।

हालांकि Food Delivery की चमक अब पहले जैसी नहीं रही, लेकिन Eternal की रणनीति साफ है—अगली ग्रोथ स्टोरी Blinkit और अन्य नए इनोवेशन से ही लिखी जाएगी।


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Read more : Sports-Tech स्टार्टअप Hudle ने जुटाए $2.5 मिलियन,

🏏 Sports-Tech स्टार्टअप Hudle ने जुटाए $2.5 मिलियन,

Hudle

स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी की दुनिया में तेजी से उभर रही कंपनी Hudle ने अपनी सीरीज A फंडिंग राउंड में $2.5 मिलियन (लगभग ₹21 करोड़) जुटाए हैं। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Sky Impact Capital ने किया, जबकि Physis Capital, Atrium Venture और कई प्रमुख एंजेल इन्वेस्टर्स जैसे महेश भूपति, गौरव कपूर, और Blue Tokai व Nitro Commerce के फाउंडर्स ने भी इसमें भाग लिया।


💰 पिछली फंडिंग भी रही थी दमदार

इससे पहले अप्रैल 2023 में Hudle ने ₹7 करोड़ की प्री-सीरीज A फंडिंग जुटाई थी, जिसका नेतृत्व Inflection Point Ventures ने किया था।

अब इस ताज़ा निवेश के साथ, कंपनी अपने विस्तार और इनोवेशन को और तेज़ी से आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।


🎯 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

Hudle इस नई फंडिंग का उपयोग तीन मुख्य क्षेत्रों में करेगा:

  1. 🏟️ वेन्‍यू नेटवर्क का विस्तार – देशभर में और ज्यादा खेल केंद्र जोड़ने के लिए
  2. 📲 प्रोडक्ट फीचर्स को बेहतर बनाना – यूजर अनुभव को और भी इंटरैक्टिव और उपयोगी बनाना
  3. 📊 नया रेटिंग सिस्टम ‘GRIP’ लॉन्च करना – जिससे खेलों में भागीदारी और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा

🏸 Hudle क्या है?

Hudle एक स्पोर्ट्स टेक प्लेटफॉर्म है, जो भारत के खिलाड़ियों को 2,000 से अधिक स्पोर्ट्स वेन्यू से जोड़ता है।
यह 60 से ज़्यादा भारतीय शहरों में सक्रिय है और खासकर रिक्रिएशनल स्पोर्ट्स जैसे:

  • 🏸 बैडमिंटन
  • 🏓 पिकलबॉल
  • 🥎 पैडल

जैसे उभरते खेलों में रीयल-टाइम बुकिंग और खेलों में भागीदारी की सुविधा देता है।


📈 आंकड़े जो प्रभाव दिखाते हैं

  • 📍 60+ शहरों में उपस्थिति
  • 🏟️ 2,000+ वेन्‍यू नेटवर्क
  • 🎮 हर महीने 1.5 लाख से अधिक गेम्स
  • 🎯 लक्ष्य: इस वित्तीय वर्ष के अंत तक 3 मिलियन गेम्स पार करना
  • 💹 2.5 गुना रेवेन्यू ग्रोथ और 3.5 गुना ग्रॉस ट्रांजैक्शन वैल्यू ग्रोथ पिछले एक साल में

👥 संस्थापक कौन हैं?

Hudle की स्थापना Suhail Narain, Arjun Singh Verma और Sonam Taneja ने मिलकर की थी।
इनका उद्देश्य था – भारत में खेलों को सभी के लिए सुलभ बनाना, चाहे वो शुरुआती खिलाड़ी हो या गंभीर रिक्रिएशनल स्पोर्ट्स लवर।


⚙️ टेक्नोलॉजी-ड्रिवन अनुभव

Hudle का तकनीकी ढांचा उपयोगकर्ताओं को:

  • 📍 आस-पास के वेन्यू खोजने
  • 📊 परफॉर्मेंस ट्रैक करने
  • 🤝 मैचिंग पार्टनर खोजने

जैसी सुविधाएं देता है। इससे खेलों में नियमित भागीदारी और स्किल ट्रैकिंग बेहद आसान हो जाती है।


🚀 क्या है GRIP (Game Rating Index for Players)?

Hudle अगस्त 2025 में अपना नया इनोवेशन GRIP लॉन्च करेगा, जो एक प्रकार का स्कोरिंग और रैंकिंग सिस्टम है खासकर रिक्रिएशनल स्पोर्ट्स के लिए।

इसकी शुरुआत इन खेलों से होगी:

  • 🏸 बैडमिंटन
  • 🏓 पिकलबॉल
  • 🥎 पैडल

GRIP खिलाड़ियों को उनके स्किल लेवल के अनुसार स्कोर और रैंकिंग देगा, जिससे वे न सिर्फ अपनी प्रगति देख सकेंगे, बल्कि उचित प्रतिद्वंद्वियों के साथ मैच भी खेल सकेंगे। इससे खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा और जुनून दोनों बढ़ेंगे।


🏆 खेलों को अपनाने की नई सोच

Hudle का मानना है कि भारत में खेल केवल प्रोफेशनल स्तर पर ही नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए भी एक नियमित एक्टिविटी बन सकता है।

जैसे-जैसे लोग फिटनेस के लिए विकल्प खोजते हैं, वैसे-वैसे बैडमिंटन, पिकलबॉल और पैडल जैसे खेल तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। Hudle इसी सेगमेंट को डिजिटल और डेटा-संचालित अनुभव के साथ सशक्त बना रहा है।


🤝 निवेशकों का बढ़ता भरोसा

इस ताज़ा फंडिंग से ये साफ हो गया है कि निवेशकों को Hudle के विज़न और बाजार में इसके स्केलेबिलिटी पर पूरा भरोसा है।
खास बात यह है कि महेश भूपति जैसे अनुभवी टेनिस खिलाड़ी और गौरव कपूर जैसे मीडिया चेहरों ने इसमें निवेश कर स्पोर्ट्स-टेक के भविष्य पर विश्वास जताया है।


📌 निष्कर्ष

  • ✅ Hudle ने $2.5 मिलियन की Series A फंडिंग Sky Impact Capital और अन्य निवेशकों से जुटाई
  • ✅ इस फंड का इस्तेमाल वेन्यू विस्तार, प्रोडक्ट अपग्रेड और GRIP सिस्टम लॉन्च में होगा
  • ✅ प्लेटफॉर्म हर महीने 1.5 लाख से ज्यादा गेम्स को मैनेज करता है
  • ✅ अगस्त 2025 में GRIP लॉन्च कर रिक्रिएशनल स्पोर्ट्स को एक नई दिशा दी जाएगी
  • ✅ Hudle का उद्देश्य भारत में आम लोगों के लिए भी खेलों को तकनीक के साथ सहज और प्रतिस्पर्धी बनाना है

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Read more : एजुकेशन फाइनेंसिंग स्टार्टअप EduFund ने जुटाए ₹50 करोड़,

📚 एजुकेशन फाइनेंसिंग स्टार्टअप EduFund ने जुटाए ₹50 करोड़,

EduFund

भारत की एजुकेशन फाइनेंसिंग और प्लानिंग स्पेस में तेजी से उभर रही स्टार्टअप EduFund ने ₹50 करोड़ ($6 मिलियन) की सीरीज A फंडिंग जुटाई है। इस राउंड का नेतृत्व Cercano Management और MassMutual Ventures ने किया। इसके साथ ही कंपनी की कुल फंडिंग अब $12 मिलियन (लगभग ₹100 करोड़) हो चुकी है।


🎯 किस काम में लगेगा फंड?

EduFund ने फंडिंग का उपयोग तीन मुख्य क्षेत्रों में करने की योजना बनाई है:

  • 🤖 AI-पावर्ड पर्सनलाइज्ड प्लानिंग इंजन लॉन्च करना
  • 🎓 अंडरग्रैजुएट स्टूडेंट्स के लिए लोन एक्सेस को बढ़ाना
  • 🏘️ टियर-II और टियर-III शहरों में अपनी पहुंच मजबूत करना, जहां शिक्षा की लागत तेजी से बढ़ रही है जबकि आय धीमी है।

🧠 EduFund क्या करता है?

2020 में शुरू हुआ EduFund एक फुल-स्टैक एजुकेशन प्लानिंग और फाइनेंसिंग प्लेटफॉर्म है। यह भारतीय परिवारों को देश और विदेश में पढ़ाई के लिए एक पूरी योजना प्रदान करता है जिसमें शामिल हैं:

  • 📈 एजुकेशन इन्वेस्टमेंट प्लान्स
  • 💰 एजुकेशन लोन
  • ✈️ वीज़ा और फॉरेक्स सेवाएं
  • 🎓 ऑन-डिमांड एक्सपर्ट काउंसलिंग

यह प्लेटफॉर्म भारत के 250,000 से अधिक परिवारों को सपोर्ट करता है और 40 से ज़्यादा एसेट मैनेजमेंट कंपनियों और 15 से अधिक लेंडिंग पार्टनर्स (जैसे बैंक, NBFCs और अंतरराष्ट्रीय कर्जदाता) के साथ जुड़ा हुआ है।


🤝 किन-किन ब्रांड्स के साथ साझेदारी?

EduFund की रणनीति में B2B और B2C दोनों तरह की साझेदारियां शामिल हैं। कुछ प्रमुख सहयोगी ब्रांड्स हैं:

  • 🧸 Hamleys – बच्चों के उत्पादों का प्रीमियम ब्रांड
  • 🏫 Prisms – स्कूल ERP सॉल्यूशन
  • 📦 DTDC – एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स सर्विस प्रोवाइडर

इन साझेदारियों के जरिए EduFund शिक्षा प्लानिंग को रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जोड़कर एक 360-डिग्री समाधान पेश करता है।


🏙️ टियर-2 और टियर-3 शहरों पर ध्यान क्यों?

भारत में छोटे और मझोले शहरों में:

  • 📚 शिक्षा की मांग तेजी से बढ़ रही है
  • 🏫 कॉलेज और प्राइवेट इंस्टीट्यूट्स की फीस बढ़ रही है
  • 💵 लेकिन आमदनी इतनी तेज़ी से नहीं बढ़ रही

EduFund का उद्देश्य ऐसे परिवारों तक पहुंचना है, जो अपने बच्चों की हायर एजुकेशन के लिए सपने तो देखते हैं, लेकिन उन्हें वित्तीय योजना की आवश्यकता है। कंपनी का मानना है कि यहां सबसे ज्यादा प्रभाव डाला जा सकता है।


📊 एजुकेशन फाइनेंसिंग मार्केट में तेजी

Entrackr की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 से अब तक एजटेक स्टार्टअप्स ने $1.2 बिलियन (लगभग ₹10,000 करोड़) से ज्यादा की फंडिंग जुटाई है।

👉 इसमें 35% यानी $424 मिलियन से ज्यादा सिर्फ उन स्टार्टअप्स में गए हैं, जो एजुकेशन लोन से जुड़े हुए हैं।

यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारत में एजुकेशन फाइनेंसिंग अब एक बड़ा और तेजी से बढ़ता हुआ सेगमेंट बनता जा रहा है।


🧑‍💼 क्या कहते हैं संस्थापक?

EduFund की टीम का मानना है कि भारत के माता-पिता को समय पर और सही तरीके से वित्तीय प्लानिंग करने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि उनके बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन मिल सके – चाहे वह देश में हो या विदेश में।

AI-पावर्ड पर्सनलाइज्ड इंजन इसी दिशा में एक कदम है, जो हर परिवार की जरूरतों के हिसाब से प्लान तैयार करेगा।


🛠️ फुल-स्टैक प्लेटफॉर्म कैसे मदद करता है?

EduFund का प्लेटफॉर्म कुछ प्रमुख सेवाएं एक ही छत के नीचे प्रदान करता है:

सेवाविवरण
📊 इन्वेस्टमेंट प्लानिंगSIP, म्युचुअल फंड आदि के ज़रिए भविष्य की शिक्षा की बचत
💵 एजुकेशन लोनविभिन्न पब्लिक-प्राइवेट बैंकों और NBFCs से
🛂 वीजा सेवाएंविदेश में पढ़ाई के लिए
🔄 फॉरेक्ससस्ता और तेज़ विदेशी मुद्रा एक्सचेंज
🧑‍🏫 काउंसलिंगविशेषज्ञों से शिक्षा और करियर संबंधी सलाह

🌏 भविष्य की योजना

EduFund न सिर्फ भारत में, बल्कि एशिया और अफ्रीका जैसे अन्य उभरते बाजारों में भी अपनी सेवाएं विस्तार देने की योजना बना रहा है।

इसका उद्देश्य है –
📌 एजुकेशन फाइनेंसिंग को अधिक सुलभ, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाना।


📌 निष्कर्ष

  • EduFund ने ₹50 करोड़ की फंडिंग Cercano और MassMutual से जुटाई
  • AI इंजन, स्टूडेंट लोन और छोटे शहरों पर फोकस रहेगा
  • 250,000+ फैमिली, 40+ फंड पार्टनर, 15+ लेंडर्स के साथ नेटवर्क
  • एजुकेशन लोन से जुड़े स्टार्टअप्स को तेजी से मिल रही फंडिंग
  • EduFund भविष्य में एजुकेशन प्लानिंग का भरोसेमंद नाम बनना चाहता है

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Read More : फैशन-टेक ब्रांड ANNY ने जुटाए ₹10 करोड़,

💃 फैशन-टेक ब्रांड ANNY ने जुटाए ₹10 करोड़,

ANNY

नई दिल्ली स्थित फैशन-टेक स्टार्टअप ANNY ने ₹10 करोड़ की प्री-सीरीज़ A फंडिंग जुटाई है। यह निवेश राउंड प्रमुख रूप से Atomic Capital के नेतृत्व में हुआ। कंपनी इस फंडिंग का उपयोग प्रोडक्ट कैटेगरी को विस्तार देने, टेक्नोलॉजी इनोवेशन, प्रमुख नेतृत्व की भर्ती, और डिस्ट्रीब्यूशन चैनल को मजबूत करने में करेगी।


🛍️ क्या है ANNY?

ANNY, जिसे 2023 में Japjot Singh, Aveen Kaur और Rahul Tanwar ने मिलकर शुरू किया था, एक multi-category accessible luxury fashion brand है। इसका उद्देश्य है कि वह भारतीय महिलाओं के फैशन अनुभव को पूरी तरह से बदल दे।

यह ब्रांड inventory-light और real-time मॉडल पर आधारित है, यानी कम स्टॉक में काम करके ट्रेंड के अनुसार तेजी से प्रोडक्ट लॉन्च करता है। इसके ज़रिए उच्च गुणवत्ता वाला, ग्लोबल ट्रेंड से प्रेरित फैशन सस्ती कीमतों पर उपलब्ध कराया जाता है।


🚀 कहां होगी फंडिंग का उपयोग?

ANNY ने अपने प्रेस रिलीज़ में बताया कि यह फंडिंग निम्नलिखित पहलुओं पर खर्च की जाएगी:

  • 📦 नई प्रोडक्ट कैटेगरी में विस्तार
  • 💡 इनोवेशन और रिसर्च को बढ़ावा
  • 🧠 प्रोप्राइटरी टेक्नोलॉजी को और बेहतर बनाना
  • 👩‍💼 लीडरशिप टैलेंट की भर्ती
  • 🛒 डिस्ट्रीब्यूशन चैनल को मजबूत करना

इससे कंपनी का उद्देश्य है कि वह ग्राहकों को तेज, स्मार्ट और स्टाइलिश फैशन अनुभव प्रदान कर सके।


🧵 कंपनी की रणनीति और खासियत

ANNY एक vertically integrated supply chain पर काम करती है, जिससे हर चरण – डिज़ाइन से लेकर डिलीवरी तक – पर कंपनी का पूरा नियंत्रण होता है।

इसके साथ ही कंपनी का proprietary tech stack उसे रियल-टाइम ट्रेंड के अनुसार प्रोडक्ट डिज़ाइन और लॉन्च करने में सक्षम बनाता है। इससे स्टॉक का रिस्क कम होता है और ग्राहकों को हमेशा लेटेस्ट ट्रेंड के कपड़े मिलते हैं।

Japjot Singh, जो कि कंपनी के CEO और को-फाउंडर हैं, कहते हैं:

“हमारा vertically integrated मॉडल और real-time ट्रेंड रिस्पॉन्सिबिलिटी हमें कम इन्वेंटरी रिस्क और ज्यादा कंज़्यूमर डिलाइट देने में मदद करता है। Atomic Capital का समर्थन हमारे लिए सिर्फ स्केल बढ़ाने का जरिया नहीं है, बल्कि स्मार्ट स्केलिंग का रास्ता है। इस इन्वेस्टमेंट से हमें ₹100 करोड़ ARR ब्रांड बनने की दिशा में प्रेरणा मिल रही है।”


📊 8 गुना ग्रोथ और आगे का प्लान

ANNY ने दावा किया है कि कंपनी ने एक साल में 8X ग्रोथ हासिल की है। यह सफलता उनके:

  • ट्रेंड-बेस्ड डिज़ाइन,
  • कस्टमर इनसाइट्स,
  • और इंटीग्रेटेड सप्लाई मॉडल

की वजह से संभव हो पाई है।

अब कंपनी का उद्देश्य है कि वह नई कैटेगरीज़ में प्रवेश करे और भारतीय महिलाओं के फैशन शॉपिंग के तरीके को दोबारा परिभाषित करे।


👗 किस तरह का फैशन देती है ANNY?

ANNY मुख्य रूप से modern Indian women को ध्यान में रखते हुए ऐसे प्रोडक्ट्स डिज़ाइन करती है, जो:

  • ट्रेंडी हो
  • क्वालिटी में बेहतरीन हो
  • कीमत में किफायती हो
  • और हर मौके के लिए उपयुक्त हों

इन सबका उद्देश्य है कि महिलाएं आसान, स्टाइलिश और स्मार्ट फैशन को जी सकें।


🔮 ANNY का भविष्य

इस फंडिंग के साथ, ANNY ने अगले वर्ष तक ₹100 करोड़ के सालाना रेवेन्यू (ARR) तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है। यह महत्वाकांक्षा दर्शाती है कि ब्रांड न सिर्फ ग्रोथ पर ध्यान दे रहा है, बल्कि भारत के फैशन-टेक इकोसिस्टम में एक क्रांति लाने की तैयारी में भी है।


📌 निष्कर्ष

  • ANNY ने ₹10 करोड़ की फंडिंग जुटाई है, जिसका नेतृत्व Atomic Capital ने किया।
  • कंपनी टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, भर्ती और चैनल डेवेलपमेंट में निवेश करेगी।
  • एक साल में 8 गुना बढ़त और अब ₹100 करोड़ ARR का लक्ष्य रखा है।
  • ट्रेंड-बेस्ड, किफायती और हाई-क्वालिटी फैशन के जरिए भारतीय महिलाओं के फैशन अनुभव को नया रूप दे रही है।

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Read more : Eternal (Zomato) को FY26 की पहली तिमाही में हुआ 90% मुनाफे का गिरावट,

📉 Eternal (Zomato) को FY26 की पहली तिमाही में हुआ 90% मुनाफे का गिरावट,

Eternal

गुरुग्राम स्थित फूडटेक और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म Eternal (पहले Zomato) ने FY26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2025) के वित्तीय नतीजे जारी किए हैं। कंपनी ने जहां रेवेन्यू में 70% की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की है, वहीं मुनाफा 90% गिरकर केवल ₹25 करोड़ रह गया, जो Q1 FY25 में ₹253 करोड़ था।


📈 रेवेन्यू में बड़ा उछाल Eternal

Eternal के ऑपरेशनल रेवेन्यू में Q1 FY26 में 70% की बढ़त हुई है। यह बढ़कर ₹7,167 करोड़ हो गया है, जबकि Q1 FY25 में यह ₹4,206 करोड़ था। यदि कंपनी की अन्य आय को भी जोड़ दिया जाए तो कुल रेवेन्यू ₹7,521 करोड़ रहा।

Eternal के अलग-अलग बिजनेस यूनिट्स ने इस तरह योगदान दिया:

  • फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म (Zomato marketplace): ₹2,261 करोड़ (31% कुल रेवेन्यू का)
  • Hyperpure (B2B सप्लाई): ₹2,295 करोड़ (89% ग्रोथ)
  • Blinkit (Quick Commerce): ₹2,400 करोड़ (155% ग्रोथ)

इन आंकड़ों से साफ है कि Blinkit और Hyperpure अब कंपनी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।


💰 खर्चों में तेज़ी

रेवेन्यू भले ही बढ़ा हो, लेकिन खर्चों में भारी उछाल Eternal के मुनाफे पर भारी पड़ा। कंपनी का कुल खर्च Q1 FY26 में 77% बढ़कर ₹7,433 करोड़ हो गया, जो Q1 FY25 में ₹4,203 करोड़ था।

मुख्य खर्चों का ब्योरा:

  • डिलीवरी और उससे संबंधित खर्च: ₹1,869 करोड़ (25% कुल खर्च का हिस्सा)
  • कर्मचारी लाभ खर्च (Employee benefit cost): ₹830 करोड़ (57% की वृद्धि)
  • मार्केटिंग और विज्ञापन खर्च: ₹671 करोड़ (69% की वृद्धि)

खासतौर पर विज्ञापन और मार्केटिंग खर्च में आए 70% उछाल ने कंपनी के मुनाफे को तगड़ा झटका दिया है।


📉 मुनाफा गिरा 90%

हालांकि Eternal ने ₹7,521 करोड़ की आय की, लेकिन नेट प्रॉफिट मात्र ₹25 करोड़ रहा, जो पिछले साल की पहली तिमाही के ₹253 करोड़ से 90% कम है।

प्रति यूनिट खर्च के हिसाब से देखें तो कंपनी ने ₹1 कमाने के लिए ₹1.04 खर्च किए। यानी लागत की तुलना में रिटर्न घटा है, जो संकेत करता है कि कंपनी को अपनी लागत नियंत्रण रणनीतियों पर फिर से विचार करने की जरूरत है।


📊 शेयर मार्केट पर असर

21 जुलाई (सोमवार) को 15:37 बजे Eternal के शेयर ₹274 प्रति शेयर की दर से ट्रेड कर रहे थे। इससे कंपनी का कुल बाजार पूंजीकरण ₹2,64,564 करोड़ (लगभग $31.2 बिलियन) पहुंच गया।

इसका मतलब है कि भले ही मुनाफा गिरा हो, लेकिन मार्केट में Eternal की वैल्यू अभी भी मजबूत बनी हुई है।


🔍 क्या कहता है यह प्रदर्शन?

Eternal का रेवेन्यू ग्रोथ दर्शाता है कि कंपनी का बिजनेस मॉडल – खासकर Blinkit और Hyperpure – तेज़ी से पॉपुलर हो रहा है। हालांकि, मुनाफे में आई गिरावट यह स्पष्ट करती है कि बिजनेस का स्केल बढ़ाना ही काफी नहीं, बल्कि लागत नियंत्रण और ऑपरेशनल एफिशिएंसी भी जरूरी है।

Eternal की स्थिति फिलहाल दोराहे पर है: एक ओर से ग्रोथ शानदार है, वहीं दूसरी ओर मुनाफे की घटती रफ्तार चिंताजनक हो सकती है, खासकर इन्वेस्टर्स और शेयरहोल्डर्स के लिए।


🧾 निष्कर्ष

  • Eternal ने FY26 की Q1 में ₹7,521 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो 70% ग्रोथ है।
  • लेकिन मुनाफा ₹253 करोड़ से गिरकर ₹25 करोड़ रह गया – 90% की गिरावट।
  • Blinkit और Hyperpure के बढ़ते योगदान ने रेवेन्यू बढ़ाया लेकिन खर्च भी काफी बढ़ा।
  • कंपनी ₹1 कमाने के लिए ₹1.04 खर्च कर रही है – ये संकेत है कि लागत नियंत्रण की जरूरत है।

👉 आने वाली तिमाहियों में देखना दिलचस्प होगा कि क्या Eternal अपने ग्रोथ को मुनाफे में बदलने में सफल होती है, या फिर मार्केट विस्तार की यह आक्रामक रणनीति और भी नुकसान बढ़ाएगी।

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