🚀 Snapdeal की पैरेंट कंपनी AceVector का घाटा 80% घटा

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ई-कॉमर्स सेक्टर में अपनी मजबूत मौजूदगी रखने वाली AceVector Group—जो भारत के लोकप्रिय मार्केटप्लेस Snapdeal, ई-कॉमर्स SaaS प्लेटफ़ॉर्म Unicommerce, और ब्रांड रोल-अप यूनिट Stellaro Brands का संचालन करती है—ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही (H1 FY26) में अपने वित्तीय प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। कंपनी का घाटा तेज़ी से कम हुआ है, जबकि राजस्व में दो अंकों की मजबूत बढ़त देखने को मिली है।


📉 घाटा 110 करोड़ से घटकर सिर्फ 22.5 करोड़

AceVector Group ने H1 FY26 के नतीजे जारी करते हुए बताया कि कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट लॉस 80% घटकर 22.5 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 110.3 करोड़ रुपये था।

यह सुधार लागत नियंत्रण, कुशल संचालन और बेहतर राजस्व प्रदर्शन की वजह से आया है।


📈 रेवेन्यू में 35% की वृद्धि

कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू H1 FY26 में 244.4 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के 181.1 करोड़ रुपये के मुकाबले 35% अधिक है।

इसके अलावा, कंपनी को अन्य आय के रूप में 7.5 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जिससे कुल आय बढ़कर 251.9 करोड़ रुपये हो गई।


📝 FY25 का प्रदर्शन: घाटा बढ़ा, राजस्व मामूली बढ़ा

FY25 के नतीजों पर नज़र डालें तो:

  • कंपनी का नेट लॉस 145% YoY बढ़कर 125.9 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था।
  • वहीँ ऑपरेटिंग रेवेन्यू मामूली 4% बढ़कर 395 करोड़ रुपये रहा (FY24: 379.8 करोड़ रुपये)।

यह डेटा दर्शाता है कि FY25 वित्तीय रूप से चुनौतीपूर्ण था, लेकिन FY26 की शुरुआत ने कंपनी के लिए टर्नअराउंड का संकेत दिया है।


📑 AceVector ने फिर ठोकी IPO की दस्तक

AceVector Group ने आज SEBI के साथ अपना Updated Draft Red Herring Prospectus (UDRHP) दाखिल किया है। यह कंपनी की दूसरी IPO कोशिश है।

💰 IPO संरचना:

इस बार का सार्वजनिक निर्गम दो भागों में होगा—

  • Fresh Issue: 300 करोड़ रुपये तक
  • Offer for Sale (OFS): 6.39 करोड़ शेयर, जो मौजूदा निवेशकों द्वारा बेचे जाएंगे

AceVector ने जुलाई 2025 में DRHP कॉन्फ़िडेंशियल आधार पर दाखिल किया था, और SEBI से मंज़ूरी पिछले महीने ही प्राप्त हुई है।


⏳ पहली IPO कोशिश असफल क्यों हुई थी?

AceVector ने 2021 में पहली बार IPO फाइल किया था, जिसमें कंपनी 1,250 करोड़ रुपये जुटाना चाहती थी।
लेकिन 2022 में बाजार में बढ़ी अस्थिरता और निवेशकों के बदलते व्यवहार के कारण यह योजना टाल दी गई

इस बार कंपनी बेहतर वित्तीय संकेतकों के साथ फिर बाज़ार में कदम रख रही है।


🛒 Snapdeal, Unicommerce और Stellaro: कैसे AceVector बना मल्टी-बिज़नेस ग्रुप?

AceVector Group केवल Snapdeal तक सीमित नहीं है। कंपनी की तीन मुख्य इकाइयाँ हैं—

1️⃣ Snapdeal (E-commerce Marketplace)

भारत के वैल्यू-ई-कॉमर्स सेगमेंट में Snapdeal का बड़ा आधार है, जो टियर-2 और टियर-3 शहरों में मजबूत पकड़ रखता है।

2️⃣ Unicommerce (E-commerce SaaS Firm)

कंपनी की यह यूनिट पहले ही IPO कर चुकी है और 2024 में सफलतापूर्वक लिस्ट हुई थी।
Unicommerce द्वारा किए गए IPO में AceVector ने 94.4 लाख शेयर बेचकर लगभग 102 करोड़ रुपये हासिल किए थे।

  • Acquisition Cost: ₹23.52 प्रति शेयर
  • Offer Price: ₹108 प्रति शेयर
  • Return: 4.59X

यह AceVector के लिए एक शानदार एग्ज़िट साबित हुआ।

3️⃣ Stellaro Brands (Brand Roll-Up Subsidiary)

कंपनी तेजी से बढ़ते D2C और मल्टी-ब्रांड ई-कॉमर्स सेगमेंट पर फोकस कर रही है।


💹 क्यों बेहतर हुआ AceVector का प्रदर्शन?

H1 FY26 में कंपनी के प्रदर्शन में सुधार कई कारणों से हुआ:

  • ✔️ खर्चों में अनुशासन
  • ✔️ उच्च-मार्जिन बिज़नेस यूनिट्स से बढ़ता योगदान
  • ✔️ Snapdeal पर वैल्यू-कॉमर्स की मांग में वृद्धि
  • ✔️ Unicommerce की मजबूत बाजार स्थिति
  • ✔️ ऑपरेशनल कार्यक्षमता में सुधार

🚀 आगे की राह: क्या AceVector का IPO सफल होगा?

AceVector के हालिया प्रदर्शन और बाजार की तेजी को देखते हुए, निवेशक इस बार कंपनी की दूसरी IPO कोशिश को अवसर के रूप में देख सकते हैं।

खासकर जब वैल्यू ई-कॉमर्स, SaaS और ब्रांड रोल-अप प्ले तेजी से निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं, AceVector की विविधित बिज़नेस संरचना उसे मजबूत पोज़िशन देती है।


📌 निष्कर्ष

  • AceVector ने H1 FY26 में घाटा 80% घटाया
  • रेवेन्यू में 35% की मजबूत उछाल
  • कंपनी दोबारा IPO लाने की तैयारी में
  • Unicommerce से 4.59X रिटर्न
  • Snapdeal, Unicommerce और Stellaro मिलकर एक मजबूत मल्टी-बिज़नेस एंटरप्राइज बना रहे हैं

AceVector के सुधारते वित्तीय परिणाम और IPO तैयारी यह संकेत देते हैं कि कंपनी नए विकास चरण में प्रवेश कर रही है।

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Snapdeal FY24 में लागत कटौती से घाटे में 88% की कमी, राजस्व में मामूली वृद्धि

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भारत की प्रमुख ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस Snapdeal ने वित्तीय वर्ष 2024 (FY24) में मजबूत प्रदर्शन किया। कंपनी की लागत कटौती पहल और रणनीतिक सुधारों ने उसके एडजस्टेड EBITDA घाटे को 88% तक घटा दिया। FY23 में यह घाटा 144 करोड़ रुपये था, जो FY24 में घटकर मात्र 16 करोड़ रुपये रह गया। इसके अलावा, कंपनी ने ऑपरेटिंग कैश फ्लो में भी सुधार किया।


Snapdeal राजस्व में मामूली वृद्धि

Snapdeal ने FY24 में ऑपरेटिंग राजस्व में 2.1% की वृद्धि दर्ज की। FY23 में 371.96 करोड़ रुपये के मुकाबले यह आंकड़ा FY24 में बढ़कर 379.76 करोड़ रुपये हो गया।

मुख्य राजस्व स्रोत

कंपनी का राजस्व मुख्य रूप से तीन स्रोतों से आता है:

  1. मार्केटिंग सेवाएँ
    • FY24 में, यह सबसे बड़ा राजस्व स्रोत बना, जिससे 252.55 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।
    • हालांकि, FY23 की तुलना में इसमें 9.6% की गिरावट दर्ज की गई।
  2. ई-कॉमर्स इनेबलमेंट सेवाएँ
    • प्लेटफॉर्म पर वैल्यू-फोकस्ड विक्रेताओं की बढ़ती संख्या के कारण यह राजस्व 14.8% बढ़कर 103.36 करोड़ रुपये हो गया।
  3. अन्य स्रोत
    • अन्य स्रोतों से आय में 8 गुना वृद्धि हुई, जो FY24 में 23.85 करोड़ रुपये रही।

कुल खर्च में 21.4% की कमी

स्नैपडील ने FY24 में कई क्षेत्रों में लागत-कटौती रणनीतियाँ अपनाईं, जिससे कुल खर्च में महत्वपूर्ण कमी आई। FY23 में कंपनी का कुल खर्च 687.93 करोड़ रुपये था, जो FY24 में 21.4% घटकर 540.76 करोड़ रुपये रह गया।

मुख्य क्षेत्रों में लागत में कटौती

  1. कर्मचारी लाभ खर्च
    • FY24 में कर्मचारी लाभ पर खर्च 48.5% घटकर 158.4 करोड़ रुपये हो गया, जो FY23 में 307.53 करोड़ रुपये था।
  2. विज्ञापन और प्रमोशनल खर्च
    • कंपनी ने FY24 में विज्ञापन और प्रचार पर खर्च में 23.5% की कमी की, जो FY23 के 91.99 करोड़ रुपये से घटकर 70.37 करोड़ रुपये रह गया।
  3. अन्य खर्च
    • स्नैपडील ने कई अन्य श्रेणियों में भी खर्च में कमी की, जिससे कंपनी को अपने घाटे को कम करने में मदद मिली।

EBITDA घाटे में 88% की कमी

स्नैपडील के एडजस्टेड EBITDA घाटे में बड़ी गिरावट देखी गई। FY23 में यह घाटा 144 करोड़ रुपये था, जबकि FY24 में यह केवल 16 करोड़ रुपये रह गया।

कैसे संभव हुआ यह सुधार?

  • लागत-कटौती पहल
  • राजस्व के विविध स्रोतों पर ध्यान केंद्रित
  • स्मार्ट ऑपरेटिंग मॉडल

स्नैपडील का रणनीतिक फोकस

स्नैपडील ने अपनी व्यापारिक रणनीतियों को मजबूत करने और लागत-प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए।

  1. वैल्यू-फोकस्ड विक्रेताओं पर जोर
    • ई-कॉमर्स इनेबलमेंट सेवाओं में वृद्धि इस बात का संकेत है कि स्नैपडील ने विक्रेताओं के साथ बेहतर तालमेल बनाया है।
  2. लागत में सुधार और प्रबंधन
    • लागत में कटौती के उपायों ने न केवल घाटे को कम किया, बल्कि कंपनी को अधिक स्थिर वित्तीय स्थिति में पहुँचाया।
  3. अन्य आय स्रोतों का विकास
    • अन्य स्रोतों से राजस्व में 8 गुना वृद्धि यह दर्शाती है कि कंपनी अपने राजस्व स्रोतों को विविध बना रही है।

ई-कॉमर्स सेक्टर में स्नैपडील की स्थिति

भारत का ई-कॉमर्स सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, और स्नैपडील ने अपनी वैल्यू-फोकस्ड रणनीति से खुद को इस प्रतिस्पर्धा में मजबूत बनाए रखा है।

चुनौतियाँ और अवसर

  • चुनौतियाँ: फ्लिपकार्ट और अमेज़न जैसे दिग्गजों से प्रतिस्पर्धा।
  • अवसर: छोटे और मध्यम विक्रेताओं के लिए प्लेटफॉर्म प्रदान करके बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करना।

भविष्य की योजनाएँ

  • स्नैपडील का फोकस भविष्य में लागत में और कमी लाने और ग्राहक अनुभव में सुधार करने पर रहेगा।
  • कंपनी वैल्यू-फोकस्ड उपभोक्ताओं और विक्रेताओं को अधिक सेवाएँ प्रदान करने की योजना बना रही है।

FY24 का वित्तीय प्रदर्शन: एक सारांश

श्रेणीFY23FY24परिवर्तन (%)
ऑपरेटिंग राजस्व₹371.96 करोड़₹379.76 करोड़+2.1%
मार्केटिंग सेवाएँ राजस्व₹279.41 करोड़₹252.55 करोड़-9.6%
इनेबलमेंट राजस्व₹90.02 करोड़₹103.36 करोड़+14.8%
अन्य स्रोतों का राजस्व₹2.85 करोड़₹23.85 करोड़+736%
कुल खर्च₹687.93 करोड़₹540.76 करोड़-21.4%
EBITDA घाटा₹144 करोड़₹16 करोड़-88%

निष्कर्ष

FY24 में स्नैपडील ने अपने वित्तीय प्रदर्शन में स्थिरता और सुधार दिखाया।

  • लागत-कटौती पहल ने कंपनी को घाटा कम करने में मदद की।
  • वैल्यू-फोकस्ड रणनीति और विकासशील राजस्व स्रोतों ने स्नैपडील को एक मजबूत स्थिति में पहुँचाया।

भविष्य में, स्नैपडील की योजनाएँ इसे भारतीय ई-कॉमर्स बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएंगी। कंपनी का उद्देश्य ग्राहकों और विक्रेताओं को बेहतर सेवाएँ प्रदान करते हुए वित्तीय स्थिरता बनाए रखना है।

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