🏦 जयपुर की NBFC Namdev Finvest ने जुटाए ₹324 करोड़,

Namdev Finvest

जयपुर स्थित गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) Namdev Finvest ने हाल ही में करीब 37 मिलियन डॉलर (लगभग ₹324 करोड़) की फंडिंग जुटाई है 💰। यह फंडिंग लिस्टेड नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) और एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग्स (ECB) के ज़रिए हासिल की गई है। इस निवेश राउंड में एफएमओIIXफ्रैंकलिन टेम्पलटन AIF इंडिया और सिम्बायोटिक्स जैसे बड़े निवेशकों ने हिस्सा लिया है 🤝।

🌍 अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का मजबूत समर्थन

इस फंडिंग में सबसे बड़ा योगदान एफएमओ (डच एंटरप्रेन्योरियल डेवलपमेंट बैंक) का रहा, जिसने 20 मिलियन डॉलर (करीब ₹180 करोड़) का निवेश किया है 🇳🇱। वहीं Impact Investment Exchange (IIX) की Women’s Livelihood Bond 7 के ज़रिए कंपनी को 8 मिलियन डॉलर (लगभग ₹71 करोड़) मिले हैं 👩‍💼।
इसके अलावा, फ्रैंकलिन टेम्पलटन AIF इंडिया से 2.3 मिलियन डॉलर और सिम्बायोटिक्स से 6.5 मिलियन डॉलर का निवेश प्राप्त हुआ है 📊।

🔁 पहले भी जुटा चुकी है फंडिंग

नामदेव फिनवेस्ट इससे पहले भी निवेशकों का भरोसा जीत चुकी है। जनवरी 2024 में कंपनी ने 15 मिलियन डॉलर की सीरीज़ बी फंडिंग जुटाई थी, जिसका नेतृत्व British International Investment (BII) और LC Nueva AIF ने किया था 📈।
इसके अलावा, कंपनी ने सितंबर 2021 में 4.7 मिलियन डॉलर और अक्टूबर 2022 में 7.5 मिलियन डॉलर की फंडिंग भी हासिल की थी।

🏭 एमएसएमई सेक्टर पर खास फोकस

कंपनी ने बताया कि इस नई पूंजी का इस्तेमाल ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत में एमएसएमई ऋण कारोबार को बढ़ाने के लिए किया जाएगा 🌾। एमएसएमई सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन आज भी इसे पर्याप्त वित्तीय सहायता नहीं मिल पाती। नामदेव फिनवेस्ट इसी कमी को पूरा करने पर काम कर रही है 💪।

🧑‍💼 2013 में हुई थी शुरुआत

नामदेव फिनवेस्ट की स्थापना 2013 में जितेंद्र तंवर ने की थी। कंपनी एमएसएमई उद्यमियों, वाहन मालिकों, महिला उद्यमियों 👩‍🔧, रूफटॉप सोलर ग्राहकों ☀️ और पर्यावरण अनुकूल परिवहन अपनाने वालों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

🏦 विविध फंडिंग स्रोतों की रणनीति

कंपनी सार्वजनिक और निजी बैंकों, स्मॉल फाइनेंस बैंकों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर काम करती है 🤝। इसका उद्देश्य फंडिंग के स्रोतों को विविध बनाना है, जिससे कारोबार को स्थिर और सुरक्षित रखा जा सके।

🏙️ टियर-3 और छोटे शहरों पर ध्यान

नामदेव फिनवेस्ट का मुख्य फोकस टियर-3 शहरों और छोटे कस्बों पर है 🏘️। कंपनी वर्तमान में भारत के 9 राज्यों में सक्रिय है और वहां के उद्यमियों को औपचारिक वित्तीय सेवाओं से जोड़ रही है।

🌱 वित्तीय समावेशन और हरित वित्त

कंपनी का लक्ष्य सिर्फ मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि वित्तीय समावेशनरोज़गार सृजन और ग्रीन फाइनेंस को बढ़ावा देना है 🌍। इलेक्ट्रिक वाहन 🚗⚡, सोलर एनर्जी और पर्यावरण-अनुकूल व्यवसायों को कंपनी प्राथमिकता देती है।

🔮 आगे की योजना

आने वाले समय में नामदेव फिनवेस्ट अपने संचालन का और विस्तार करने, अधिक राज्यों में पहुंच बनाने और तकनीक आधारित ऋण समाधान देने की योजना बना रही है 📲। कंपनी का मानना है कि मजबूत एमएसएमई सेक्टर ही भारत की आर्थिक मजबूती की कुंजी है 🔑।

👉 कुल मिलाकर, नामदेव फिनवेस्ट की यह फंडिंग न केवल कंपनी के विकास के लिए अहम है, बल्कि यह भारत के एमएसएमई सेक्टर, वित्तीय समावेशन और हरित अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है 🌟।

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🇮🇳 भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में इस हफ्ते जबरदस्त हलचल 🚀

भारतीय स्टार्टअप

एक हफ्ते में 28 स्टार्टअप्स ने जुटाए 254 मिलियन डॉलर

भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में इस सप्ताह जबरदस्त तेजी देखने को मिली। कुल 28 भारतीय स्टार्टअप्स ने करीब 254 मिलियन डॉलर (लगभग ₹2,100 करोड़) की फंडिंग जुटाई। इसमें 4 ग्रोथ‑स्टेज डील्स22 अर्ली‑स्टेज डील्स शामिल रहीं, जबकि 2 स्टार्टअप्स ने फंडिंग राशि का खुलासा नहीं किया।

यह आंकड़ा पिछले हफ्ते के मुकाबले काफी ज्यादा है, जब 24 स्टार्टअप्स ने कुल मिलाकर केवल 75.36 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई थी। यानी हफ्ते‑दर‑हफ्ते फंडिंग में 3.4 गुना की उछाल देखने को मिली 📈।


💰 ग्रोथ‑स्टेज डील्स में वापसी

पिछले सप्ताह जहां ग्रोथ‑स्टेज में कोई डील नहीं हुई थी, वहीं इस हफ्ते चार बड़ी डील्स में कुल 91 मिलियन डॉलर का निवेश हुआ।

  • 👩‍⚕️ Pee Safe (महिलाओं की स्वच्छता और वेलनेस ब्रांड) ने Series B में $32 मिलियन जुटाए
  • 🏥 हेल्थकेयर स्टार्टअप Sukino ने $31 मिलियन की Series B फंडिंग हासिल की
  • 💼 डेट इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म Wint Wealth ने $28 मिलियन जुटाए
  • 👟 फुटवियर ब्रांड Neeman’s को $4 मिलियन की फंडिंग मिली

इन डील्स से साफ है कि निवेशकों का भरोसा एक बार फिर ग्रोथ‑स्टेज कंपनियों पर लौट रहा है।


🌱 अर्ली‑स्टेज स्टार्टअप्स की धूम

इस हफ्ते 22 अर्ली‑स्टेज डील्स में कुल 75.5 मिलियन डॉलर का निवेश हुआ।

  • 🎓 Emversity (हायर एजुकेशन और एम्प्लॉयबिलिटी प्लेटफॉर्म) ने $30 मिलियन Series A फंडिंग जुटाई
  • 🚛 इलेक्ट्रिक ट्रक ट्रांसपोर्ट स्टार्टअप BillionE को $25 मिलियन (Pre‑Series A) मिला
  • 🚀 Ethereal Exploration Guild (स्पेसटेक)
  • 🎮 Liquidnitro Games
  • 🤖 RISA Labs (AI हेल्थटेक)
  • 🏘️ Truva (Proptech)
  • 💳 Bluecopa (फाइनेंस ऑटोमेशन)

इसके अलावा Carrum और LearnTube.ai ने भी फंडिंग जुटाई, हालांकि रकम सार्वजनिक नहीं की गई।


🏙️ शहरों के हिसाब से फंडिंग

स्टार्टअप फंडिंग में बेंगलुरु एक बार फिर सबसे आगे रहा।

  • 🥇 बेंगलुरु – 12 डील्स
  • 🥈 दिल्ली‑NCR – 6 डील्स
  • 🥉 मुंबई – 4 डील्स

इसके अलावा हैदराबाद, वडोदरा, कोयंबटूर और इंदौर के स्टार्टअप्स को भी निवेश मिला।


🧩 सेक्टर‑वाइज ट्रेंड

  • 🛒 ई‑कॉमर्स – 4 डील्स
  • 🧠 डीप‑टेक – 3 डील्स
  • ❤️ हेल्थटेक
  • 🎓 एडटेक
  • 💰 फिनटेक
  • ⚡ EV, प्रॉपटेक, मोबिलिटी

यह दर्शाता है कि निवेश अब केवल एक सेक्टर तक सीमित नहीं है।


📊 सीरीज़‑वाइज फंडिंग

  • 🌱 Seed राउंड – 8 डील्स
  • 🚀 Series A – 6 डील्स
  • ⚡ Pre‑Series A और Pre‑Seed – कई डील्स

👔 बड़ी नियुक्तियां और इस्तीफे

  • Jungle Ventures ने Arpit Beri और Rishab Malik को Managing Partner बनाया
  • Lighthouse Canton ने Gurjeet Sohi को भारत में MD नियुक्त किया
  • BlackBuck की Chief People Officer Shilpi Pandey ने पद छोड़ा

🔁 मर्जर, अधिग्रहण और बंद होते स्टार्टअप्स

  • 🏠 Snabbit ने Pync की फाउंडिंग टीम के साथ हाथ मिलाया
  • 🔗 Polygon Labs ने US‑आधारित Coinme और Sequence को खरीदा
  • ❌ AI स्टाइलिस्ट Alle और Pync ने ऑपरेशन बंद किए

💼 ESOP Buyback और फंड लॉन्च

  • 🧪 BrowserStack – $125 मिलियन ESOP Buyback
  • 🏥 Innovaccer – ₹600 करोड़ का ESOP Buyback
  • 💸 Kairon Capital और Dharana Capital ने नए फंड लॉन्च किए

🧠 निष्कर्ष (Summary)

इस हफ्ते भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम ने यह साबित कर दिया कि निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है। $254 मिलियन की फंडिंग, नए फंड लॉन्च, ESOP बायबैक और IPO की तैयारी — सब मिलकर भारत को एक बार फिर ग्लोबल स्टार्टअप मैप पर मजबूत स्थिति में खड़ा करते हैं 🇮🇳✨

आने वाले हफ्तों में यह रफ्तार और तेज होने की उम्मीद है 🚀

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🧠🤖 इंसान और मशीन का भविष्य Merge Labs ने जुटाए $252 मिलियन

Merge Labs

टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक बड़ा और चौंकाने वाला कदम सामने आया है 🚀। Merge Labs, जो इंसानी दिमाग को सीधे कंप्यूटर से जोड़ने वाली डिवाइस पर काम कर रही है, ने हाल ही में $252 मिलियन (करीब ₹2,000 करोड़) की फंडिंग जुटाई है 💰। इस राउंड की सबसे खास बात यह है कि इसमें OpenAI सबसे बड़ा निवेशक है, जिसके CEO खुद Sam Altman हैं — और वही Merge Labs के को-फाउंडर भी हैं 👨‍💼✨।

इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Bain Capital ने किया, जबकि इसमें कई नामी निवेशक भी शामिल हुए हैं, जैसे 🎮 Gabe Newell (Valve के फाउंडर), जो खुद भी ब्रेन‑टेक स्टार्टअप Starfish Neuroscience चला रहे हैं।


🌐 इंसान + AI = Blended Intelligence

Merge Labs का मानना है कि भविष्य में इंसान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अलग‑अलग नहीं रहेंगे, बल्कि एक‑दूसरे के साथ मिलकर काम करेंगे 🤝🤯। जैसे स्मार्टफोन ने हमारी डिजिटल दुनिया तक पहुंच आसान की, वैसे ही Merge इंसानी सोच और क्षमता को बढ़ाने वाले टूल्स बनाना चाहता है।

👉 कंपनी का लक्ष्य है:

  • इंसानों की सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाना
  • टेक्नोलॉजी को इंसान का सहायक बनाना, न कि उसकी जगह लेने वाला

Merge का विज़न साफ है — AI इंसान को रिप्लेस नहीं करेगा, बल्कि उसे और ताकतवर बनाएगा 💡💪।


🏥 शुरुआत हेल्थकेयर से

Merge Labs फिलहाल सबसे पहले हेल्थकेयर सेक्टर पर फोकस कर रही है 🩺❤️। ब्रेन‑कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) तकनीक पहले से ही मेडिकल फील्ड में इस्तेमाल हो रही है, जैसे:

  • लकवाग्रस्त (paralysis) मरीजों को कंप्यूटर कंट्रोल करने में मदद
  • बोलने में असमर्थ लोगों की सोच को आवाज़ में बदलना 🗣️

Merge का प्लान है कि पहले इन टेक्नोलॉजीज़ को सुरक्षित और प्रभावी साबित किया जाए, और उसके बाद धीरे‑धीरे आम लोगों के लिए इन्हें उपलब्ध कराया जाए 🌍।


⚔️ तेज़ी से बढ़ती ब्रेन‑टेक रेस

Merge Labs ऐसे समय में मैदान में उतरी है जब ब्रेन‑टेक्नोलॉजी में जबरदस्त प्रतिस्पर्धा है 🔥।
इस सेक्टर की शुरुआत को सबसे ज़्यादा चर्चा तब मिली जब Elon Musk ने 2016 में Neuralink लॉन्च किया 🧠⚡।

अब तक:

  • अमेरिका में ब्रेन‑टेक स्टार्टअप्स में $2 बिलियन से ज़्यादा निवेश हो चुका है
  • चीन भी इस टेक्नोलॉजी में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है 🇨🇳
  • Neuralink जैसे स्टार्टअप सर्जिकल इम्प्लांट्स पर काम कर रहे हैं

लेकिन Merge Labs खुद को इन सबसे अलग मानती है 👀।


🧪 बिना सर्जरी, बिना इम्प्लांट

Merge Labs के को‑फाउंडर Mikhail Shapiro, जो Caltech के प्रोफेसर हैं 🎓, साफ कह चुके हैं कि उनकी कंपनी:
❌ दिमाग के अंदर चिप या हार्डवेयर नहीं लगाएगी
✅ Non‑invasive (बिना सर्जरी) टेक्नोलॉजी पर काम करेगी

यह रास्ता बेहद मुश्किल है 😮‍💨, क्योंकि बिना दिमाग में डिवाइस डाले हाई‑स्पीड डेटा पढ़ना और भेजना बहुत बड़ी वैज्ञानिक चुनौती है। इसी वजह से Merge खुद को एक रिसर्च‑ड्रिवन लैब के तौर पर देखती है, न कि सिर्फ एक प्रोडक्ट कंपनी के रूप में 🔬📊।


🧑‍🔬 रिसर्च पहले, प्रोडक्ट बाद में

Merge Labs फिलहाल अपने फाइनल प्रोडक्ट को लेकर ज़्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं कर रही है 🤐। लेकिन इतना साफ है कि:

  • कंपनी लंबे समय तक रिसर्च और प्रयोग पर फोकस करेगी
  • टेक्नोलॉजी को सीधे बाज़ार में उतारने की जल्दी नहीं है
  • लक्ष्य है ब्रेकथ्रू इनोवेशन, न कि जल्दबाज़ी

इतनी बड़ी फंडिंग से Merge को दुनिया के बेहतरीन वैज्ञानिक, इंजीनियर और रिसर्चर्स को जोड़ने की ताकत मिल गई है 🌟👩‍💻👨‍💻।


🔮 भविष्य की तस्वीर

Merge Labs खुद को उस भविष्य के लिए तैयार कर रही है जहां:

  • इंसान और मशीन साथ‑साथ सोचेंगे
  • टेक्नोलॉजी इंसानी क्षमता को बढ़ाएगी, कम नहीं करेगी
  • इंटेलिजेंस “मानव बनाम मशीन” नहीं, बल्कि मानव + मशीन होगी 🤝

अगर Merge अपने विज़न में सफल होती है, तो आने वाले सालों में यह टेक्नोलॉजी हमारी ज़िंदगी, काम करने के तरीके और सोचने के ढंग को पूरी तरह बदल सकती है 🌍🚀।


📌 निष्कर्ष

$252 मिलियन की फंडिंग सिर्फ पैसे की कहानी नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि दुनिया अब ब्रेन‑कंप्यूटर इंटरफेस को अगली बड़ी टेक्नोलॉजी मानने लगी है। Merge Labs इस रेस में एक बेहद गंभीर और रिसर्च‑फोकस्ड खिलाड़ी बनकर उभरी है 🧠✨।

Read more :🏥 Portea ने FY25 में घाटा आधा किया, कमाई में भी दिखी मजबूती 📈

🏥 Portea ने FY25 में घाटा आधा किया, कमाई में भी दिखी मजबूती 📈

Portea

बेंगलुरु स्थित होम हेल्थकेयर सर्विस प्रोवाइडर Portea के लिए वित्त वर्ष 2024–25 (FY25) काफी अहम रहा। इस दौरान कंपनी ने न सिर्फ अपनी कमाई में स्थिर बढ़ोतरी दर्ज की, बल्कि घाटे को लगभग आधा करने में भी सफलता हासिल की 💪। नियंत्रित खर्च और बेहतर ऑपरेशनल मैनेजमेंट इसका मुख्य कारण रहा।

📊 Registrar of Companies (RoC) से मिले आंकड़ों के अनुसार, Portea की ऑपरेशनल रेवेन्यू FY25 में 15% बढ़कर ₹160 करोड़ हो गई, जो FY24 में ₹139 करोड़ थी।


🏡 घर बैठे इलाज की बढ़ती मांग बनी ताकत

Portea भारत की उन कंपनियों में से है जो घर बैठे हेल्थकेयर सेवाएं उपलब्ध कराती हैं। इसकी सेवाओं में शामिल हैं:

  • 👩‍⚕️ नर्सिंग और अटेंडेंट केयर
  • 🧘‍♂️ फिजियोथेरेपी
  • 🧪 लैब टेस्ट और मेडिकल कंसल्टेशन
  • 🩺 मेडिकल इक्विपमेंट रेंटल (ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, BiPAP, नेबुलाइज़र आदि)
  • ❤️ स्पेशलाइज़्ड केयर सर्विसेज

इन सेवाओं की वजह से कंपनी को स्थिर और भरोसेमंद रेवेन्यू मिलता रहा।


💰 सर्विस से सबसे ज्यादा कमाई

FY25 में Portea की सेवा आधारित आय सबसे बड़ी कमाई का जरिया रही।

  • 🏥 सर्विस रेवेन्यू: ₹95 करोड़
    • 👉 कुल ऑपरेशनल आय का 59%
    • 👉 सालाना आधार पर 16% की बढ़ोतरी
  • 🛒 प्रोडक्ट सेल्स (मेडिकल इक्विपमेंट): ₹56 करोड़
    • 👉 सालाना 14% ग्रोथ

इससे साफ है कि Portea ने सिर्फ सेवाओं पर ही नहीं, बल्कि प्रोडक्ट बिजनेस पर भी फोकस बनाए रखा है।


📉 खर्चों पर कड़ी नजर, यहीं से बदली तस्वीर

जहां कई हेल्थटेक कंपनियां खर्चों की वजह से जूझ रही हैं, वहीं Portea ने FY25 में कॉस्ट कंट्रोल पर अच्छा काम किया 👌

🔍 खर्चों की स्थिति:

  • 👥 एम्प्लॉयी बेनिफिट कॉस्ट: ₹52.5 करोड़
    • 👉 4.5% की गिरावट
  • 🧑‍💼 कंसल्टेंसी खर्च: ₹44 करोड़
    • 👉 7% की बढ़ोतरी
  • 🧾 मैटीरियल कॉस्ट: ₹52 करोड़
    • 👉 21% की बढ़त
  • 📢 एडवर्टाइजिंग खर्च: ₹7.5 करोड़
    • 👉 25% की बढ़ोतरी
  • ⚖️ अन्य खर्च (लीगल, प्रोफेशनल, फाइनेंस): ₹30 करोड़+

👉 इसके बावजूद, कुल खर्च FY25 में ₹179 करोड़ पर लगभग स्थिर रहा, जो कंपनी के बेहतर मैनेजमेंट को दिखाता है।


🔻 घाटा हुआ लगभग आधा

कमाई बढ़ने और खर्च नियंत्रित रहने का सीधा असर कंपनी के घाटे पर पड़ा।

  • ❌ FY24 का घाटा: ₹37 करोड़
  • ✅ FY25 का घाटा: ₹19 करोड़
  • 📉 49% की गिरावट

📌 कंपनी के

  • ROCE: -40.54%
  • EBITDA मार्जिन: -6.88%

हालांकि आंकड़े अभी नेगेटिव हैं, लेकिन सुधार साफ दिखाई देता है।


🧮 यूनिट इकनॉमिक्स में सुधार

FY25 में Portea ने:

  • 💸 ₹1 कमाने के लिए ₹1.12 खर्च किए
  • (FY24 में यह ₹1.29 था)

👉 यह दिखाता है कि कंपनी अब ज्यादा एफिशिएंट हो रही है।


💵 कैश पोज़िशन और फंडिंग

  • 🏦 कैश और बैंक बैलेंस: ₹1 करोड़
  • 📦 करंट एसेट्स: ₹68 करोड़

📢 TheKredible के अनुसार, Portea अब तक लगभग $123 मिलियन (₹1,000+ करोड़) की फंडिंग जुटा चुकी है।
इसके प्रमुख निवेशकों में Accel और Ventureast शामिल हैं 🤝


📈 IPO की तैयारी, लेकिन अभी इंतजार

दिलचस्प बात यह है कि Portea को 2023 में SEBI से ₹1,000 करोड़ के IPO की मंजूरी मिल चुकी है 📝
हालांकि, अब तक कंपनी ने लिस्टिंग को लेकर कोई नया कदम नहीं उठाया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी पहले मुनाफे के और करीब पहुंचना चाहती है, ताकि IPO के समय बेहतर वैल्यू मिल सके 🚀


🔍 निष्कर्ष

Portea के FY25 के नतीजे यह दिखाते हैं कि:

✅ कमाई में स्थिर ग्रोथ
✅ खर्चों पर नियंत्रण
✅ घाटे में बड़ी कमी

अगर यही ट्रेंड जारी रहा, तो आने वाले सालों में Portea होम हेल्थकेयर सेक्टर की मजबूत खिलाड़ी बन सकती है 🏆

Read more :👟 देसी स्ट्रीट कल्चर से ग्लोबल सपने तक Gully Labs ने जुटाए ₹26.5 करोड़

👟 देसी स्ट्रीट कल्चर से ग्लोबल सपने तक Gully Labs ने जुटाए ₹26.5 करोड़

Gully Labs

भारतीय स्ट्रीट फैशन और स्नीकर्स की दुनिया में तेजी से उभर रहा ब्रांड Gully Labs अब निवेशकों की नज़र में भी आ गया है। कंपनी ने अपने सीरीज़ A फंडिंग राउंड में ₹26.5 करोड़ (करीब $3 मिलियन) जुटाए हैं। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व वेंचर कैपिटल फर्म Saama Capital ने किया है, जबकि कंपनी के शुरुआती निवेशक Zeropearl ने भी इसमें दोबारा निवेश किया है। इसके अलावा कई जाने-माने एंजेल निवेशकों ने भी इस राउंड में भाग लिया।

💰 फंडिंग डिटेल्स क्या हैं?

कंपनी की ओर से Registrar of Companies (RoC) में की गई फाइलिंग के मुताबिक, Gully Labs ने इस फंडिंग के तहत

  • 10 इक्विटी शेयर
  • और 31,925 सीरीज़ A CCPS (Compulsorily Convertible Preference Shares)

जारी किए हैं। इन शेयरों का इश्यू प्राइस ₹8,301 प्रति शेयर रखा गया, जिससे कुल मिलाकर ₹26.50 करोड़ जुटाने का लक्ष्य पूरा हुआ।

इस राउंड में:

  • Saama Capital ने सबसे बड़ा निवेश करते हुए ₹22.6 करोड़ लगाए
  • Zeropearl ने ₹3.5 करोड़ का निवेश किया

इसके अलावा कुछ प्रमुख व्यक्तिगत निवेशकों ने भी हिस्सा लिया, जिनमें:

  • Roman Saini (Unacademy के को-फाउंडर)
  • Radhika Gupta (Edelweiss Mutual Fund की MD & CEO)
  • Aditya Bhalla जैसे नाम शामिल हैं

📊 कंपनी की वैल्यूएशन इस फंडिंग के बाद Gully Labs की पोस्ट-मनी वैल्यूएशन करीब ₹147 करोड़ ($16.25 मिलियन) आंकी गई है।
नई हिस्सेदारी के बाद:

  • Saama Capital VI LP कंपनी का सबसे बड़ा शेयरहोल्डर बन गया है, जिसकी हिस्सेदारी 15.40% है
  • वहीं Zeropearl Fund के पास 10.21% हिस्सेदारी है

🧢 Gully Labs आखिर है क्या?

Gully Labs की शुरुआत साल 2023 में Arjun Singh और Animesh Mishra ने की थी। यह एक Direct-to-Consumer (D2C) फुटवियर ब्रांड है, जो खास तौर पर भारतीय स्ट्रीट कल्चर से प्रेरित स्नीकर्स बनाता है।

कंपनी की खास बात यह है कि:

  • डिज़ाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक सब कुछ इन-हाउस होता है
  • बिक्री का मुख्य जरिया कंपनी की अपनी वेबसाइट है
  • ब्रांड का फोकस युवाओं और स्ट्रीट फैशन पसंद करने वालों पर है

Gully Labs अपने स्नीकर्स में देसी स्टाइल, लोकल आर्ट और भारतीय संस्कृति की झलक दिखाने की कोशिश करता है, जो इसे बाकी इंटरनेशनल ब्रांड्स से अलग बनाता है।

🚀 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

कंपनी ने बताया है कि इस नई पूंजी का इस्तेमाल:

  • बिज़नेस एक्सपेंशन
  • नए प्रोडक्ट लॉन्च
  • ब्रांड बिल्डिंग और मार्केटिंग
  • और अन्य कॉर्पोरेट जरूरतों

के लिए किया जाएगा।
इससे साफ है कि Gully Labs आने वाले समय में अपने ऑपरेशन्स को और तेज़ी से बढ़ाने की तैयारी में है।

🥊 मार्केट में मुकाबला

भारतीय स्नीकर्स और फुटवियर मार्केट में मुकाबला अब काफी बढ़ गया है। Gully Labs को जिन ब्रांड्स से टक्कर मिल रही है, उनमें शामिल हैं:

  • Comet (जिसने 2024 में $5 मिलियन जुटाए थे)
  • Neemans, जो दोबारा फंडरेजिंग की तैयारी में है
  • SolethreadsZeesh जैसे अन्य देसी ब्रांड्स

हालांकि, Gully Labs की पहचान उसका इंडियन स्ट्रीट कल्चर फोकस है, जो इसे एक अलग जगह देता है।

📉 फाइनेंशियल स्थिति

फिलहाल कंपनी ने अपने FY25 के फाइनेंशियल रिजल्ट्स फाइल नहीं किए हैं। लेकिन लगातार निवेश और बढ़ती ब्रांड पहचान यह संकेत देती है कि कंपनी ग्रोथ मोड में है।

🇮🇳 क्यों अहम है यह डील?

भारत में स्नीकर्स और स्ट्रीट फैशन का बाजार तेजी से बढ़ रहा है, खासकर युवाओं के बीच। ऐसे में:

  • देसी ब्रांड्स का उभरना
  • भारतीय संस्कृति से जुड़ा डिजाइन
  • और D2C मॉडल

निवेशकों को लंबी अवधि में बड़ा मौका दिखा रहे हैं। Gully Labs की यह फंडिंग इसी ट्रेंड को मजबूत करती है।

🔮 आगे क्या?

अगर कंपनी अपनी ब्रांडिंग, प्रोडक्ट क्वालिटी और स्केलिंग पर सही तरीके से काम करती है, तो आने वाले सालों में Gully Labs न सिर्फ भारत बल्कि इंटरनेशनल मार्केट में भी अपनी पहचान बना सकता है।

कुल मिलाकर, Gully Labs की यह Series A फंडिंग भारतीय स्टार्टअप और फैशन इकोसिस्टम के लिए एक मजबूत संकेत है कि देसी ब्रांड्स अब ग्लोबल स्टेज के लिए तैयार हो रहे हैं।

Read more :🚀 भारतीय स्पेस स्टार्टअप EtherealX ने जुटाए $20.5 मिलियन,

🚀 भारतीय स्पेस स्टार्टअप EtherealX ने जुटाए $20.5 मिलियन,

EtherealX

भारत का स्पेस स्टार्टअप इकोसिस्टम तेज़ी से वैश्विक पहचान बना रहा है और इसी कड़ी में Ethereal Exploration Guild (EtherealX) ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। बेंगलुरु स्थित इस स्पेस टेक्नोलॉजी कंपनी ने हाल ही में Series A फंडिंग राउंड में $20.5 मिलियन (करीब ₹170 करोड़) जुटाए हैं। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व TDK Ventures और BIG Capital ने किया है, जबकि Accel, Prosus, YourNest Venture Capital, BlueHill Capital, Campus Fund और Riceberg Ventures जैसे नामी निवेशकों ने भी इसमें भाग लिया है।

🌌 पहले भी मिल चुका है निवेशकों का भरोसा

यह EtherealX का पहला बड़ा निवेश नहीं है। इससे पहले, अगस्त 2024 में कंपनी ने $5 मिलियन की सीड फंडिंग जुटाई थी, जिसका नेतृत्व YourNest ने किया था। उस राउंड में BIG Global Investments, BlueHill Capital, Campus Fund, Golden Sparrow Ventures और कई जाने-माने एंजेल इन्वेस्टर्स भी शामिल थे। लगातार मिल रही फंडिंग से साफ है कि निवेशकों को इस स्टार्टअप के विज़न और टेक्नोलॉजी पर पूरा भरोसा है।

🔥 Razor Crest Mk-1: पूरी तरह रीयूज़ेबल रॉकेट

EtherealX इस नई फंडिंग का इस्तेमाल अपने सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट Razor Crest Mk-1 को विकसित करने में करेगा। यह एक पूरी तरह से रीयूज़ेबल मीडियम-लिफ्ट लॉन्च व्हीकल होगा, जिसे खास तौर पर कम लागत और ज़्यादा क्षमता के साथ डिजाइन किया जा रहा है।

कंपनी के अनुसार, Razor Crest Mk-1

  • 🌍 Low Earth Orbit (LEO) में करीब 8 से 24.8 टन तक पेलोड ले जाने में सक्षम होगा
  • 🛰️ Geosynchronous Transfer Orbit (GTO) में 10.8 टन तक पेलोड पहुंचा सकेगा
  • 🌕 Trans-lunar मिशन यानी चंद्रमा की ओर जाने वाले पेलोड के लिए भी उपयुक्त होगा

यह रॉकेट SpaceX के Falcon सीरीज़ जैसे रॉकेट्स को सीधी टक्कर देने की क्षमता रखता है।

🧑‍🚀 कौन हैं EtherealX के फाउंडर्स?

EtherealX की स्थापना 2022 में तीन इंजीनियर्स —

  • मनु जे. नायर,
  • शुभायु सरदार,
  • प्रशांत शर्मा
    द्वारा की गई थी।

इन तीनों का लक्ष्य शुरू से ही स्पष्ट था — भारत से एक ऐसा स्पेस लॉन्च सिस्टम बनाना जो कम लागतज़्यादा री-यूज़ेबिलिटी और तेज़ डेवलपमेंट साइकिल के साथ काम करे।

⚙️ इन-हाउस इंजन और एडवांस टेक्नोलॉजी

EtherealX का दावा है कि उसने सिर्फ 3.5 साल में दो रॉकेट इंजन विकसित कर लिए हैं, जो इस मीडियम-लिफ्ट व्हीकल के दोनों स्टेज को पावर देंगे। कंपनी का अपर-स्टेज इंजन “Pegasus” (80kN) पूरी तरह रीयूज़ेबल है।

खास बात यह है कि कंपनी एक खुद की विकसित की गई इंजन टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है, जिसे
Full Flow Segregated Cooling Cycle (FFSCC) कहा जाता है। यह टेक्नोलॉजी रॉकेट की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ-साथ लागत कम करने में भी मदद करती है।

💰 लॉन्च कॉस्ट में क्रांति लाने का लक्ष्य

EtherealX का लक्ष्य है कि वह अंतरिक्ष में सामान पहुंचाने की लागत को घटाकर $500–$1,000 प्रति किलोग्राम तक ले आए। अगर यह लक्ष्य हासिल होता है, तो यह स्पेस इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है, खासकर छोटे सैटेलाइट ऑपरेटर्स और स्टार्टअप्स के लिए।

🤝 ISRO और IN-SPACe के साथ साझेदारी

कंपनी ने IN-SPACe, ISRO और अन्य राष्ट्रीय स्पेस एजेंसियों के साथ सहयोग समझौते किए हैं। इसके अलावा, EtherealX ने कई कमर्शियल सैटेलाइट ऑपरेटर्स, लॉन्च एग्रीगेटर्स और अंतरराष्ट्रीय लॉन्च पोर्ट्स के साथ भी पार्टनरशिप साइन की है।

🌍 तेजी से बढ़ती वैश्विक स्पेस इकॉनमी

मार्केट रिसर्च के मुताबिक, ग्लोबल स्पेस इकॉनमी 2035 तक $1.8 ट्रिलियन तक पहुंच सकती है। ऐसे में EtherealX जैसे भारतीय स्टार्टअप्स के लिए यह सही समय है कि वे दुनिया के बड़े खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करें।

🚀 भारत के लिए क्यों है यह बड़ी खबर?

EtherealX की सफलता यह दिखाती है कि भारत अब सिर्फ सैटेलाइट लॉन्च करने वाला देश नहीं, बल्कि री-यूज़ेबल लॉन्च टेक्नोलॉजी में भी अग्रणी बनने की ओर बढ़ रहा है। अगर Razor Crest Mk-1 सफल होता है, तो भारत वैश्विक स्पेस लॉन्च मार्केट में एक मज़बूत दावेदार बन सकता है।

🔚 निष्कर्ष:
EtherealX सिर्फ एक स्टार्टअप नहीं, बल्कि भारत के स्पेस सपनों की उड़ान है। सही निवेश, मजबूत टेक्नोलॉजी और स्पष्ट विज़न के साथ यह कंपनी आने वाले वर्षों में स्पेस इंडस्ट्री की तस्वीर बदल सकती है। 🚀✨

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🚀 Kairon Capital ने अपने पहले वेंचर फंड का पहला क्लोज पूरा किया

Kairon Capital

भारत के तेजी से बढ़ते कंज़्यूमर स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक नया नाम तेजी से चर्चा में है — Kairon Capital 🏦। कंज़्यूमर‑फोकस्ड वेंचर कैपिटल फर्म Kairon Capital, जिसकी स्थापना दीपांकुर मल्होत्रा ने की है, ने अपने पहले फंड (Inaugural Fund) का पहला क्लोज सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है

💰 फंड का साइज और लक्ष्य

Kairon Capital का यह फंड कुल ₹150 करोड़ के लक्ष्य के साथ लॉन्च किया गया है, जिसमें ₹50 करोड़ का ग्रीनशू ऑप्शन भी शामिल है। खास बात यह है कि पहले क्लोज में ही फर्म ने अपने टारगेट का 60% से ज्यादा फंड जुटा लिया है 💪।
यह शुरुआती सफलता दिखाती है कि निवेशकों का भरोसा Kairon Capital और इसके विज़न पर मजबूत है।

👥 कौन हैं निवेशक?

इस फंड में निवेश करने वालों की लिस्ट भी काफी दमदार है ✨। इसमें शामिल हैं:

  • 🧑‍💼 कंज़्यूमर स्टार्टअप्स के फाउंडर्स
  • 🏠 फैमिली ऑफिसेज
  • 🏢 स्ट्रैटेजिक कॉरपोरेट इन्वेस्टर्स

इसके अलावा, कई जाने‑माने ब्रांड्स के फाउंडर्स ने भी इसमें निवेश किया है, जैसे:

  • Innovist
  • Plix
  • Livspace
  • XYXX

साथ ही, Emami Limited जैसी बड़ी FMCG कंपनी का सपोर्ट भी इस फंड को मिला है, जो इसकी विश्वसनीयता को और मजबूत बनाता है 📈।

🎯 निवेश की रणनीति क्या होगी?

Kairon Capital एक केंद्रित पोर्टफोलियो रणनीति अपनाने जा रही है। फर्म लगभग 14–15 स्टार्टअप्स में निवेश करने की योजना बना रही है।

📌 निवेश का फोकस:

  • Seed से Early Series A स्टेज
  • 💵 ₹2 करोड़ से ₹14 करोड़ तक का चेक साइज
  • 🔄 फॉलो‑ऑन राउंड्स के लिए भी पूंजी रिज़र्व

कंपनी ऐसे स्टार्टअप्स को चुनना चाहती है जिन्होंने:

  • ✔️ Product‑Market Fit हासिल कर लिया हो
  • ✔️ मजबूत Unit Economics दिखाई हो
  • ✔️ अलग और डिफरेंशिएटेड प्रोडक्ट पेश किया हो

हालांकि फंड कंज़्यूमर कैटेगरी में कैटेगरी‑अग्नॉस्टिक रहेगा, लेकिन ब्रांड‑बिल्डिंग और टिकाऊ बिज़नेस मॉडल पर खास ध्यान दिया जाएगा 🛍️।

🧠 दीपांकुर मल्होत्रा का अनुभव

Kairon Capital के फाउंडर दीपांकुर मल्होत्रा के पास निवेश की दुनिया का लंबा अनुभव है 📚। उन्होंने:

  • Investment Banking
  • Private Equity
  • Venture Capital

जैसे क्षेत्रों में काम किया है।

उनके पिछले निवेशों में शामिल हैं:

  • Innovist
  • FreshToHome
  • XYXX
  • Nat Habit

इतना ही नहीं, दीपांकुर मल्होत्रा Amazon में रहते हुए भी कंज़्यूमर‑फोकस्ड इन्वेस्टमेंट्स पर काम कर चुके हैं, जिससे उन्हें इस सेक्टर की गहरी समझ है 🛒।

🚦 निवेश की शुरुआत हो चुकी है

Kairon Capital ने सिर्फ फंड रेज़ करने तक खुद को सीमित नहीं रखा है। फर्म ने पूंजी तैनात करना शुरू कर दिया है और इस समय कई कंज़्यूमर स्टार्टअप्स का मूल्यांकन कर रही है 🔍।

उम्मीद की जा रही है कि आने वाले कुछ महीनों में Kairon Capital अपने पहले निवेशों की आधिकारिक घोषणा करेगी 📢।

🌱 भारतीय कंज़्यूमर स्टार्टअप्स के लिए क्या मायने?

भारत में कंज़्यूमर ब्रांड्स तेजी से उभर रहे हैं — चाहे वह D2C हो, FMCG हो या लाइफस्टाइल 🧴👕। ऐसे में Kairon Capital जैसे फंड का आना:

  • शुरुआती स्टार्टअप्स को सही मार्गदर्शन देगा
  • लॉन्ग‑टर्म ग्रोथ में मदद करेगा
  • फाउंडर्स को स्मार्ट कैपिटल और इंडस्ट्री एक्सपीरियंस देगा

🔮 आगे की राह

Kairon Capital का लक्ष्य सिर्फ निवेश करना नहीं, बल्कि मजबूत और टिकाऊ कंज़्यूमर ब्रांड्स तैयार करना है। यदि फर्म अपनी रणनीति पर सही तरीके से अमल करती है, तो यह भारत के कंज़्यूमर स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक अहम खिलाड़ी बन सकती है ⭐।

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Sugar.fit

डिजिटल हेल्थ और डायबिटीज़ मैनेजमेंट स्टार्टअप Sugar.fit ने वित्त वर्ष 2024–25 (FY25) में ज़बरदस्त राजस्व वृद्धि दर्ज की है 🚀। हालांकि, बढ़ते खर्चों के चलते कंपनी को अब भी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। Registrar of Companies (RoC) से प्राप्त वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, Sugar.fit की ऑपरेटिंग रेवेन्यू में साल-दर-साल 77% की तेज़ बढ़ोतरी देखने को मिली है।

💰 रेवेन्यू में रिकॉर्ड उछाल

FY25 में Sugar.fit का ऑपरेशनल रेवेन्यू ₹66.5 करोड़ रहा, जो FY24 में ₹37.5 करोड़ था 📊। अन्य आय (₹8.5 करोड़) को मिलाकर कंपनी की कुल आय ₹75 करोड़ तक पहुँच गई, जबकि पिछले साल यह ₹42 करोड़ थी।
कंपनी की कमाई का पूरा आधार उसकी डायबिटीज़ केयर सर्विसेज़ रही, जिसमें टेक्नोलॉजी और पर्सनलाइज़्ड ह्यूमन सपोर्ट को मिलाकर एक संपूर्ण हेल्थ प्रोग्राम पेश किया जाता है 🧑‍⚕️📱।

📢 खर्चों का बढ़ता दबाव

जहाँ एक ओर आमदनी तेज़ी से बढ़ी, वहीं दूसरी ओर खर्चों ने भी कंपनी पर दबाव बनाया।

  • विज्ञापन खर्च FY25 में ₹34 करोड़ रहा, जो कुल खर्च का लगभग 29% है 📺📣
  • कर्मचारी लाभ खर्च 18% बढ़कर ₹33 करोड़ हो गया, जो कुल खर्च का 28% हिस्सा है 👩‍💼👨‍💼

सबसे बड़ा उछाल कच्चे माल की लागत में देखा गया, जो FY24 में मात्र ₹0.6 करोड़ थी, लेकिन FY25 में बढ़कर ₹21 करोड़ हो गई ⚙️📦। इसके अलावा, कानूनी, प्रोफेशनल और अन्य ओवरहेड खर्चों पर कंपनी ने ₹24 करोड़ से अधिक खर्च किए।

इन सभी कारणों से Sugar.fit का कुल खर्च 31.5% बढ़कर ₹117 करोड़ तक पहुँच गया, जो FY24 में ₹89 करोड़ था।

📉 नुकसान में मामूली सुधार

अच्छी खबर यह है कि Sugar.fit ने अपने नुकसान को कुछ हद तक कम किया है 👍। FY25 में कंपनी का घाटा ₹42 करोड़ रहा, जो FY24 में ₹47 करोड़ था—यानी करीब 11% की कमी
हालांकि, कंपनी के फाइनेंशियल इंडिकेटर्स अब भी दबाव में हैं:

  • EBITDA मार्जिन: -68.27%
  • ROCE: -53.66%

यूनिट इकॉनॉमिक्स में सुधार ज़रूर दिखता है। FY25 में कंपनी को ₹1 कमाने के लिए ₹1.76 खर्च करने पड़े, जबकि FY24 में यही आंकड़ा ₹2.37 था 📉➡️📈।

🏦 कैश पोज़िशन और बैलेंस शीट

Sugar.fit की कैश और बैंक बैलेंस FY25 के अंत में घटकर ₹1 करोड़ रह गई, जो एक साल पहले ₹5.6 करोड़ थी 💸।
हालाँकि, कंपनी के करंट एसेट्स ₹101 करोड़ के स्तर पर बने हुए हैं, जो उसके ऑपरेशन्स को कुछ हद तक सपोर्ट देते हैं।

🤝 फंडिंग और निवेशकों का भरोसा

TheKredible के अनुसार, Sugar.fit अब तक कुल $26 मिलियन की फंडिंग जुटा चुकी है 💵। इसके प्रमुख निवेशकों में MassMutual Ventures और Tanglin Venture शामिल हैं।
निवेशकों का भरोसा इस बात पर टिका है कि भारत में डायबिटीज़ का बाज़ार बेहद विशाल है 🌏🇮🇳।

🇮🇳 भारत: डायबिटीज़ का बड़ा बाज़ार

भारत को अक्सर “डायबिटीज़ कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड” कहा जाता है। करोड़ों लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं, और यही Sugar.fit के लिए सबसे बड़ा अवसर है 🩸📊।
कंपनी के पास जैसे‑जैसे यूज़र बेस बढ़ेगा, वैसे‑वैसे उसके पास हेल्थ डेटा, इनसाइट्स और लर्निंग्स का बड़ा खज़ाना तैयार होगा, जो भविष्य में वैल्यू क्रिएशन में मदद कर सकता है 🧠📈।

⚠️ चुनौतियाँ भी कम नहीं

हालांकि रास्ता आसान नहीं है। भारत में हेल्थ और फिटनेस सॉल्यूशंस की भरमार है, जो हर बजट के हिसाब से उपलब्ध हैं 💊📦। ऐसे में लोगों की पेइंग कैपेसिटी सीमित है और कड़ी प्रतिस्पर्धा बनी हुई है।
Sugar.fit के लिए मुनाफ़े तक पहुँचना एक लंबी और कठिन चढ़ाई साबित हो सकती है ⛰️।

🔮 आगे की राह

Sugar.fit एक ऐसा स्टार्टअप है जहाँ नंबर आज भले ही कमजोर लगें, लेकिन बाज़ार का आकार और लॉन्ग‑टर्म संभावनाएँ निवेशकों को आकर्षित करती हैं ⏳✨।
यह कंपनी उन निवेशकों के लिए उपयुक्त मानी जा सकती है जो लंबे समय का नजरिया रखते हैं और डिजिटल हेल्थ सेक्टर में धैर्य के साथ दांव लगाना चाहते हैं 🧩💡।

Read more :🤖 रोबोटिक्स की दुनिया में बड़ा धमाका Skild AI grabs ने जुटाए $1.4 बिलियन,

🤖 रोबोटिक्स की दुनिया में बड़ा धमाका Skild AI grabs ने जुटाए $1.4 बिलियन,

AI grabs

रोबोटिक्स सेक्टर अब सिर्फ भविष्य की कल्पना नहीं रहा, बल्कि यह तेज़ी से हमारे रोज़मर्रा के जीवन का हिस्सा बनने की ओर बढ़ रहा है। इसी बदलाव की एक बड़ी मिसाल है Skild AI grabs जिसने हाल ही में $1.4 बिलियन (करीब ₹11,600 करोड़) की भारी-भरकम फंडिंग जुटाकर टेक और स्टार्टअप दुनिया में हलचल मचा दी है।

इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व SoftBank Group ने किया है, जबकि इसमें Jeff BezosNVIDIA की NVenturesMacquarie CapitalLightspeedSequoia CapitalCoatue, और Felicis जैसे दिग्गज निवेशकों ने भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। इस निवेश के बाद Skild AI का वैल्यूएशन $14 बिलियन से ज्यादा हो गया है।


🚀 रोबोटिक्स में “फाउंडेशनल शिफ्ट” की शुरुआत

इस फंडिंग को सिर्फ एक निवेश नहीं, बल्कि रोबोटिक्स इंडस्ट्री में एक बुनियादी बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। Skild AI का मानना है कि आने वाले वर्षों में रोबोट सिर्फ फैक्ट्रियों या गोदामों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि घरों, ऑफिसों और सार्वजनिक जगहों पर भी इंसानों के साथ काम करेंगे।

हालांकि कंपनी की शुरुआत एंटरप्राइज एप्लिकेशंस से होगी—जैसे मैन्युफैक्चरिंग, वेयरहाउस, सिक्योरिटी और कंस्ट्रक्शन—लेकिन लंबी अवधि में इसका लक्ष्य कंज़्यूमर होम्स तक रोबोटिक्स को पहुंचाना है।


🧠 Skild Brain: हर रोबोट के लिए एक यूनिवर्सल दिमाग

Skild AI की सबसे बड़ी ताकत है उसका Skild Brain—एक ऐसा omni-bodied foundation model जो अलग-अलग तरह के रोबोट्स को बिना दोबारा ट्रेनिंग के कंट्रोल कर सकता है।

चाहे वह:

  • चार पैरों वाला रोबोट (Quadruped) हो
  • ह्यूमनॉइड रोबोट
  • रोबोटिक आर्म
  • या मोबाइल मैनिपुलेटर

Skild Brain हर बॉडी टाइप और हर काम के अनुसार खुद को ढाल सकता है। किचन साफ़ करने से लेकर भारी सामान उठाने, अस्थिर ज़मीन पर चलने या इंडस्ट्रियल साइट्स पर काम करने तक—एक ही दिमाग, कई काम


📉 डेटा की कमी को कैसे किया दूर?

रोबोटिक्स की सबसे बड़ी चुनौती रही है डेटा की कमी। इंसानों के लिए इंटरनेट जैसा कोई “ओपन फिज़िकल डेटा” रोबोट्स के लिए मौजूद नहीं है। Skild AI ने इस समस्या का हल एक अनोखे तरीके से निकाला।

कंपनी अपने मॉडल को:

  • इंसानों के मूवमेंट वाले वीडियो डेटा
  • और फिज़िक्स-बेस्ड सिमुलेशन

पर ट्रेन करती है। इससे रोबोट मानव व्यवहार को समझना सीखते हैं और फिर सिमुलेटेड दुनिया में प्रैक्टिस करते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि Skild Brain में जनरल फिज़िकल इंटेलिजेंस विकसित हो जाती है।


🔧 बिना री-ट्रेनिंग के खुद को ढालने की क्षमता

Skild Brain की एक खास बात यह है कि अगर:

  • रोबोट का पहिया जाम हो जाए
  • कोई अंग काम करना बंद कर दे
  • या रोबोट की बॉडी पूरी तरह बदल जाए

तो भी मॉडल री-ट्रेनिंग के बिना खुद को एडजस्ट कर लेता है। यह क्षमता रोबोट्स को उन अनियंत्रित और जटिल वातावरणों में भी काम करने योग्य बनाती है, जहाँ आज के ज़्यादातर रोबोट फेल हो जाते हैं।


👨‍🔬 कौन हैं Skild AI के फाउंडर्स?

Skild AI की स्थापना 2023 में Deepak Pathak और Abhinav Gupta ने की थी। दोनों इससे पहले Carnegie Mellon University में प्रोफेसर थे और उन्होंने वर्षों की रिसर्च को कमर्शियल रूप देने के लिए अकादमिक दुनिया छोड़ी।

कंपनी की टीम में Meta, Tesla, Nvidia, Amazon, Google, Stanford और UC Berkeley जैसे संस्थानों से आए टैलेंट शामिल हैं, जो रिसर्च और प्रोडक्शन—दोनों में माहिर हैं।


📈 ज़ीरो से $30 मिलियन रेवेन्यू तक का सफर

Skild AI कोई दूर की रिसर्च लैब नहीं है। साल 2025 में कंपनी ने कुछ ही महीनों में ज़ीरो से लगभग $30 मिलियन का रेवेन्यू हासिल किया।

आज इसके सिस्टम्स का इस्तेमाल:

  • सिक्योरिटी पेट्रोलिंग
  • फैसेलिटी इंस्पेक्शन
  • वेयरहाउस और मैन्युफैक्चरिंग
  • डेटा सेंटर्स
  • और कंस्ट्रक्शन साइट्स

में किया जा रहा है।


🌍 इंसानों के साथ काम करने वाले रोबोट्स की ओर कदम

Skild AI का सपना है कि रोबोट्स सिर्फ ऑटोमेशन टूल नहीं, बल्कि इंसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने वाले सहयोगी बनें।

CEO Deepak Pathak के अनुसार,

“हम ऐसा यूनिवर्सल ब्रेन बना रहे हैं जो हर डिप्लॉयमेंट के साथ और बेहतर होता जाए—चाहे हार्डवेयर कोई भी हो या काम कुछ भी।”


🔮 भविष्य की झलक

अगर Skild AI अपनी योजना के अनुसार Skild Brain को स्केल कर पाती है, तो यह Physical AI की दुनिया में वही बदलाव ला सकती है, जो GPT जैसे मॉडल्स ने डिजिटल दुनिया में किया है।

रोबोटिक्स अब सवाल नहीं है कि होगी या नहीं, सवाल है—कितनी जल्दी और कितनी स्मार्ट होगी।
और Skild AI इस बदलाव की अगुवाई करता नज़र आ रहा है।

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RenewCred

जलवायु परिवर्तन 🌍 आज पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है। बढ़ते कार्बन उत्सर्जन को कम करने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए अब सिर्फ नीतियां ही नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी आधारित समाधान भी जरूरी हो गए हैं। इसी दिशा में काम कर रहा है बेंगलुरु स्थित Climate Tech Startup RenewCred, जिसने हाल ही में ₹4.25 करोड़ की सीड फंडिंग जुटाई है 💰।

यह फंडिंग राउंड इक्विटी और ग्रांट्स के मिश्रण से पूरा हुआ है, जिसका नेतृत्व Campus Angels Network ने किया है। इस राउंड में Kairos Early Opportunity Fundbuild3 Startup StudioVentureStudio Ahmedabad UniversityIdeashacks Investor NetworkACT Capital FoundationSocial Innovation Lab (Citi Bank–IIT Kanpur) और कई अनुभवी एंजेल इन्वेस्टर्स ने भी हिस्सा लिया है 🤝।


💡 फंडिंग का कैसे होगा इस्तेमाल?

RenewCred के अनुसार, इस ताजा निवेश का उपयोग कंपनी अपने कार्बन क्रेडिट मेथडोलॉजीज़ को और मजबूत करने, अपने Net Zero डिजिटल प्लेटफॉर्म को स्केल करने, और ऐसे कार्बन क्रेडिट्स डिलीवर करने में करेगी, जिन पर खरीदारों और रेगुलेटर्स दोनों को पूरा भरोसा हो सके ✅।

आज के समय में कार्बन क्रेडिट मार्केट में सबसे बड़ी समस्या ग्रीनवॉशिंग और भरोसे की कमी है। RenewCred का लक्ष्य इसी समस्या को टेक्नोलॉजी के जरिए खत्म करना है 🔍।


🚀 RenewCred क्या करता है?

RenewCred की स्थापना वर्ष 2024 में Abhimanyu Rathi ने की थी। यह बेंगलुरु आधारित स्टार्टअप हाई-इंटीग्रिटी कार्बन क्रेडिट्स के लिए टेक्नोलॉजी-ड्रिवन इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा है।

कंपनी Advanced MRV (Monitoring, Reporting & Verification) सिस्टम पर काम करती है, जिसे:

  • 🌐 IoT
  • 🤖 Machine Learning
  • 🔗 Blockchain

जैसी आधुनिक टेक्नोलॉजीज़ से सपोर्ट किया गया है। इसका उद्देश्य कार्बन मार्केट को ज्यादा पारदर्शी, कुशल और सभी के लिए सुलभ बनाना है, खासकर Global South के छोटे और टेक्नोलॉजी-आधारित प्रोजेक्ट डेवलपर्स के लिए।


🧠 Net Zero प्लेटफॉर्म की खास बातें

RenewCred का Net Zero डिजिटल प्लेटफॉर्म पारंपरिक, डॉक्यूमेंट-हैवी सिस्टम से बिल्कुल अलग है 📊। यह प्लेटफॉर्म:

  • हर एक कार्बन क्रेडिट की लगातार मॉनिटरिंग करता है
  • 📈 रियल-टाइम रिपोर्टिंग और वेरिफिकेशन देता है
  • 🔍 प्रत्येक क्रेडिट को इंडिविजुअल लेवल पर ट्रैक करता है

इस प्लेटफॉर्म को एक मजबूत डोमेन एक्सपर्ट नेटवर्क सपोर्ट करता है, जो अलग-अलग सेक्टर्स के लिए विशेष मेथडोलॉजीज़ तैयार करता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि हर कार्बन क्रेडिट मापने योग्य, सुरक्षित और वैश्विक जांच के योग्य हो 🌍।


⚙️ किन सेक्टर्स पर रहेगा फोकस?

RenewCred आने वाले समय में नॉन-नेचर बेस्ड कार्बन क्रेडिट्स पर खास ध्यान देगा। कंपनी का फोकस इन क्षेत्रों पर रहेगा 👇

  • 🌿 Biochar
  • 🚗 EV Fleets
  • ⚡ Renewable Energy
  • 🔥 Methane Reduction
  • ⛽ Clean Fuels
  • 🏭 Industrial Decarbonisation

इन सेक्टर्स में टेक्नोलॉजी आधारित कार्बन क्रेडिट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है, खासकर इंटरनेशनल मार्केट्स में 🌎।


🇮🇳 भारत को बनाएगा ग्लोबल कार्बन हब

RenewCred का बड़ा विज़न भारत को हाई-इंटीग्रिटी, टेक्नोलॉजी-वेरिफाइड कार्बन क्रेडिट्स का एक भरोसेमंद ग्लोबल सोर्स बनाना है 🌟। कंपनी का मानना है कि भारत में टेक्नोलॉजी-ड्रिवन क्लाइमेट सॉल्यूशंस के लिए अपार संभावनाएं हैं।

स्टार्टअप अपने डिजिटल MRV और रजिस्ट्री प्लेटफॉर्म को स्केल करते हुए अधिक से अधिक प्रोजेक्ट डेवलपर्स और कार्बन क्रेडिट खरीदारों को जोड़ना चाहता है।


⏳ इसी तिमाही में पहला कार्बन क्रेडिट

RenewCred ने जानकारी दी है कि वह इसी तिमाही में अपने पहले कार्बन क्रेडिट्स जारी करेगा 🧾। कंपनी का दावा है कि उसका प्लेटफॉर्म:

  • ⏱️ वेरिफिकेशन टाइमलाइन को 75% तक घटाता है
  • 💸 ट्रांजैक्शन कॉस्ट को 50% से ज्यादा कम करता है
  • 🔐 ट्रस्ट और ऑडिटेबिलिटी को काफी बेहतर बनाता है

यह सब लाइव डेटा स्ट्रीम्स, साइंटिफिक मॉडल्स और ऑटोमेटेड चेक्स की मदद से संभव होता है।


🎯 लंबी अवधि का लक्ष्य

RenewCred ने अगले 14 वर्षों में 2 गीगाटन ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन हटाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है 🌱। अगर यह लक्ष्य हासिल होता है, तो यह ग्लोबल क्लाइमेट एक्शन में भारत की भूमिका को और मजबूत करेगा।


🔍 निष्कर्ष

नई फंडिंग के साथ RenewCred भारत के Climate Tech Ecosystem में तेजी से उभरता हुआ नाम बन रहा है। टेक्नोलॉजी, पारदर्शिता और भरोसे पर आधारित इसका मॉडल आने वाले समय में इसे एक ग्लोबल क्लाइमेट टेक लीडर बना सकता है 🌍🚀।

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