क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े भारत के सबसे बड़े घोटालों में से एक GainBitcoin scam में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है। मुंबई की एक विशेष PMLA कोर्ट ने ED द्वारा दाखिल की गई supplementary chargesheet का संज्ञान लेते हुए कारोबारी राज कुंद्रा को समन जारी किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोर्ट ने कुंद्रा को 19 जनवरी 2026 को पेश होने के लिए कहा है।
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है, जब ED देशभर में crypto-based financial crimes पर सख्ती बढ़ा रही है। GainBitcoin मामला लंबे समय से जांच एजेंसियों के रडार पर रहा है और इसे भारत का सबसे बड़ा कथित Bitcoin Ponzi scheme माना जाता है।
🪙 क्या है GainBitcoin Scam?
GainBitcoin एक Bitcoin आधारित निवेश स्कीम थी, जिसे कथित तौर पर अमित भारद्वाज और उनके भाई विवेक भारद्वाज चला रहे थे। इस स्कीम में निवेशकों को Bitcoin mining और high returns का लालच दिया गया था।
हालांकि, बाद में यह स्कीम एक बड़े Ponzi operation के रूप में सामने आई, जिसमें नए निवेशकों के पैसे से पुराने निवेशकों को भुगतान किया जा रहा था। अनुमान है कि इस घोटाले में हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
अमित भारद्वाज का जनवरी 2022 में निधन हो चुका है, लेकिन ED की जांच अभी भी जारी है और इससे जुड़े कई लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
👤 राज कुंद्रा पर ED का क्या आरोप है?
ED के मुताबिक, राज कुंद्रा इस घोटाले से उत्पन्न पैसों के beneficiary रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि:
- 2017 में मुख्य आरोपी की ओर से कुंद्रा को 285 Bitcoins मिले थे
- ये Bitcoins कथित तौर पर यूक्रेन में Bitcoin mining operation स्थापित करने के लिए दिए गए थे
हालांकि, जांच एजेंसी का कहना है कि यह mining project कभी शुरू ही नहीं हुआ।
📂 डॉक्यूमेंट्स और Wallet Details पर सवाल
ED का आरोप है कि राज कुंद्रा:
- संबंधित crypto wallet addresses उपलब्ध नहीं करा पाए
- और यह साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज नहीं दे सके कि वे केवल एक facilitator थे
कुंद्रा की ओर से यह दलील दी गई है कि उनकी भूमिका सिर्फ एक मध्यस्थ की थी और उन्हें इस स्कीम की धोखाधड़ी के बारे में जानकारी नहीं थी। लेकिन ED का कहना है कि उपलब्ध सबूत कुछ और ही कहानी बताते हैं।
⚖️ “Beneficial Owner” क्यों मान रही है ED?
प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी जांच में यह निष्कर्ष निकाला है कि राज कुंद्रा का उन Bitcoins पर नियंत्रण (control) था। इसी आधार पर ED ने उन्हें Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत “beneficial owner” माना है।
आज के मौजूदा बाजार भाव के हिसाब से, इन 285 Bitcoins की कीमत 150 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है, जो इस मामले को और गंभीर बनाती है।
🏠 पहले भी हो चुकी है संपत्ति जब्ती
यह पहला मौका नहीं है जब ED ने इस मामले में राज कुंद्रा के खिलाफ कार्रवाई की हो। इससे पहले एजेंसी:
- 97 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त कर चुकी है
- इनमें मुंबई का एक रिहायशी प्रॉपर्टी और crypto assets शामिल हैं
ये सभी जब्तियां GainBitcoin scam से जुड़े पैसों के कथित उपयोग के आधार पर की गई थीं।
🗣️ राज कुंद्रा की सफाई
राज कुंद्रा ने लगातार इन आरोपों से इनकार किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनका कहना है कि:
- उन्हें GainBitcoin स्कीम की fraudulent nature की जानकारी नहीं थी
- वे किसी भी तरह के money laundering में शामिल नहीं रहे
हालांकि, ED का दावा है कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और डिजिटल सबूतों के आधार पर कुंद्रा की भूमिका केवल एक passive participant की नहीं लगती।
🚨 Crypto Crimes पर ED की सख्ती
राज कुंद्रा को जारी किया गया कोर्ट समन यह दिखाता है कि ED अब crypto-related financial crimes को लेकर और अधिक आक्रामक रुख अपना रही है।
GainBitcoin केस उन चुनिंदा मामलों में से है, जिसमें:
- कई राज्यों में जांच चली
- कई आरोपियों पर चार्जशीट दाखिल हुई
- और बड़े पैमाने पर assets attach किए गए
यह केस भारत में crypto regulation और enforcement की दिशा में भी एक अहम उदाहरण माना जा रहा है।
🔮 आगे क्या?
अब सभी की नजरें 19 जनवरी 2026 पर टिकी हैं, जब राज कुंद्रा को PMLA कोर्ट में पेश होना है। कोर्ट में उनकी पेशी के बाद:
- जांच की दिशा और स्पष्ट हो सकती है
- और ED आगे की कानूनी कार्रवाई तय कर सकती है
GainBitcoin scam अभी भी पूरी तरह बंद मामला नहीं है और आने वाले समय में इससे जुड़े और नाम सामने आ सकते हैं।
🧠 निष्कर्ष
GainBitcoin क्रिप्टो घोटाला भारत के डिजिटल फाइनेंस इतिहास का सबसे बड़ा विवादित अध्याय बन चुका है। राज कुंद्रा को कोर्ट से जारी समन इस बात का संकेत है कि जांच एजेंसियां अब किसी भी हाई-प्रोफाइल नाम को लेकर नरमी बरतने के मूड में नहीं हैं।
यह मामला न सिर्फ crypto investors के लिए एक चेतावनी है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारत में money laundering और crypto fraud पर कानूनी शिकंजा लगातार कसता जा रहा है।
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