भारत की प्रमुख क्राफ्ट जिन निर्माता कंपनी NAO Spirits — जो Greater Than और Hapusa जैसी प्रीमियम जिन ब्रांडों के लिए जानी जाती है — के लिए वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) कुछ खास अच्छा नहीं रहा। FY24 में तेज़ी से बढ़ने के बाद कंपनी की ग्रोथ FY25 में अचानक रुक गई।
कंपनी की रेवेन्यू में 25% से ज़्यादा गिरावट दर्ज हुई, जबकि लॉस दोगुने हो गए। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब प्रीमियम अल्कोहल मार्केट में प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है।
📉 FY25 में Revenue 25.6% गिरकर ₹60.46 करोड़ पर आया
NAO Spirits की RoC (Registrar of Companies) से प्राप्त वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार:
- FY24 Revenue: ₹81.26 करोड़
- FY25 Revenue: ₹60.46 करोड़
- गिरावट: 25.6%
कंपनी की आय का पूरा स्रोत सिर्फ इसकी जिन ब्रांडों की बिक्री थी— Greater Than और Hapusa।
🌍 Export भी मामूली रहे
भारत-बेस्ड कंपनी होने के बावजूद इसका एक्सपोर्ट रेवेन्यू सिर्फ ₹1.13 करोड़ रहा।
💸 Cost में भी कमी, पर EBITDA और Loss बढ़े
रेवेन्यू गिरने के साथ कंपनी ने कुछ बड़े कॉस्ट हेड्स में कटौती की। फिर भी कुल लाभ-हानि की तस्वीर खराब रही।
⚖️ Excise Duty में 22.6% कमी
- FY24 Excise Duty: ₹42.9 करोड़
- FY25 Excise Duty: ₹33 करोड़
- यह अभी भी कंपनी की कुल लागत का 36% है।
🛒 Procurement Cost 13% घटी
- FY24: ₹17.13 करोड़
- FY25: ₹14.91 करोड़
🎯 Advertising & Promotion 24% घटी
- FY24: ₹17.7 करोड़
- FY25: ₹13.42 करोड़
👥 Employee Cost बढ़कर ₹10.73 करोड़
कर्मचारियों पर खर्च 30% बढ़ गया—यह संकेत देता है कि कंपनी टीम विस्तार पर फोकस कर रही है।
🧾 कुल खर्च लगभग स्थिर: ₹92 करोड़
अन्य खर्चों—जैसे लीगल, ट्रैवल, रेंट—में भी कमी नहीं हुई।
🔻 लॉस दोगुना: FY25 में ₹30.25 करोड़
रेवेन्यू गिरने के साथ कंपनी की वित्तीय स्थिति कमजोर पड़ी:
- FY24 Loss: ₹14.6 करोड़
- FY25 Loss: ₹30.25 करोड़ (दोगुना)
📉 EBITDA Margin भी कमजोर
- EBITDA Margin: –38.07%
- EBITDA Loss: ₹23 करोड़
खर्च से रेवेन्यू का Ratio (Expense-to-Revenue) भी 1.52 पर रहा—जो उच्च माना जाता है।
कंपनी के पास मार्च 2025 तक कुल करंट एसेट्स ₹23.7 करोड़ थे, जिनमें सिर्फ ₹1.13 करोड़ कैश शामिल है।
🤝 Diageo India ने जून 2025 में किया अधिग्रहण – ₹130 करोड़ में Deal
इस वित्तीय दबाव के बीच Diageo India (United Spirits Ltd) ने जून 2025 में NAO Spirits को ₹130 करोड़ (लगभग $15 मिलियन) में अधिग्रहित कर लिया।
इससे पहले NAO Spirits ने कुल ₹54 करोड़ पाँच फंडिंग राउंड्स में जुटाए थे।
🧩 अधिग्रहण के बाद क्या बदल रहा है?
ऐसी डील्स में आमतौर पर क्या होता है:
- पुरानी बैलेंस शीट साफ की जाती है
- Cost rationalisation किया जाता है
- Parent company (Diageo) अपनी प्रोसेसेज़ लागू करती है
इस वजह से अक्सर कुछ महीनों तक कंपनी का topline गिरता है—जो यहाँ भी दिख रहा है।
🍸 भारतीय Gin Market की चुनौतियाँ
NAO Spirits की गिरावट सिर्फ Company Issue नहीं, बल्कि Indian Gin Market की Volatility भी बताती है।
🔍 मार्केट फैक्ट्स:
- Gin Category: कुल इंडियन स्पिरिट मार्केट का सिर्फ 2%
- Demand: ज्यादातर Urban metros में
- Competition बढ़ रहा है: कई नए Indian craft gin brands आ रहे हैं
- State excise policies लगातार बदल रही हैं
- Consumer taste भी तेजी से transform हो रहा है
ऐसे माहौल में NAO Spirits को Diageo के बड़े पोर्टफोलियो में कहीं खोने का भी जोखिम है—क्योंकि Diageo का फोकस हमेशा उसके बड़े volume drivers पर रहता है।
🚀 क्या NAO Spirits फिर से Growth पकड़ पाएगी?
Diageo के पास बड़ी डिस्ट्रीब्यूशन क्षमता है, मजबूत सप्लाई चेन है और एक विशाल ऑन-ट्रेड (बार, होटल, एयरपोर्ट) नेटवर्क है। इससे NAO Spirits को फायदा मिलेगा।
लेकिन असली चुनौती होगी:
- क्या कंपनी अपने ब्रांड को premium craft gin की पहचान के साथ आगे ले जा पाएगी?
- क्या Greater Than और Hapusa urban consumer के बीच अपनी पकड़ बनाए रखेंगे?
- क्या Diageo इस ब्रांड को अपनी प्राथमिकता सूची में ऊपर रखेगा?
वर्तमान प्रदर्शन देखकर लगता है कि रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ गई है, लेकिन अधिग्रहण के बाद कंपनी के लिए नए Growth Levers खुलेंगे।
आने वाले 1-2 साल ये तय करेंगे कि NAO Spirits अपने Stylish Gin Branding के साथ नए दौर में कैसे उभरता है।
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