🧠 LISSUN ने अमेरिका की Being Cares Inc का अधिग्रहण किया,

LISSUN

भारत की प्रमुख मेंटल हेल्थ प्लेटफॉर्म LISSUN ने अमेरिका स्थित Being Cares Inc का अधिग्रहण कर लिया है। यह रणनीतिक अधिग्रहण LISSUN की उस बड़ी योजना का हिस्सा है, जिसके अंतर्गत वह भारत में AI-संचालित, बच्चे-केंद्रित व्यवहारिक विकास ईकोसिस्टम बनाना चाहता है।

🤝 क्या है यह अधिग्रहण?

इस डील के तहत LISSUN ने Being Cares Inc की पूरी तकनीक (technology stack) और टीम को अपने अधीन कर लिया है। अब Being के संस्थापक वरुण गांधी (CEO) और अभिषेक शर्मा (CTO) भी LISSUN की टीम का हिस्सा बन चुके हैं — वरुण को Chief Product Officer और अभिषेक को Chief Technology Officer बनाया गया है।


🌎 कौन है Being Cares Inc?

Being Cares Inc एक अमेरिका आधारित mental wellbeing स्टार्टअप है जो AI-संचालित टूल्स के ज़रिए 40 से अधिक मानसिक एवं व्यवहारिक स्थितियों की पहचान और समाधान प्रदान करता है।
इनमें शामिल हैं:

  • ऑटिज़्म (Autism)
  • ADHD (अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर)
  • स्पीच डिले (Speech Delay)
  • लर्निंग डिसऑर्डर्स (Learning Challenges)
  • और कई अन्य भावनात्मक स्थितियां

Being ने अब तक वैश्विक स्तर पर 10 लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं को सेवा प्रदान की है।


🧒 बच्चों की मानसिक सेहत के लिए मजबूत मॉडल

LISSUN पहले से ही भारत में बच्चों की मानसिक सेहत को लेकर काम कर रहा है, और इस अधिग्रहण से उसका मॉडल और मजबूत हो गया है। अब वह:

  • थेरैपिस्ट-नेतृत्व वाली केयर
  • और AI-पावर्ड हाइपर-पर्सनलाइज़्ड गाइडेंस
    — दोनों को एकीकृत कर रहा है।

LISSUN और Being की इस साझेदारी से अब ऐसे प्लेटफॉर्म का निर्माण होगा जो 2,500 से अधिक रियल-लाइफ कारणों और प्रभावों का विश्लेषण करके माता-पिता और बच्चों को व्यक्तिगत मानसिक स्वास्थ्य समाधान देगा।


📍 Sunshine by LISSUN: डिजिटल से लेकर क्लीनिक तक

LISSUN पहले से ही अपने Sunshine by LISSUN सेंटर के ज़रिए बच्चों के विकास पर ध्यान दे रहा है। अब Being के साथ साझेदारी से यह प्लेटफॉर्म एक “फुल-स्पेक्ट्रम केयर प्रोवाइडर” बन चुका है — जो डिजिटल गाइडेंस के साथ-साथ इन-पर्सन थेरैपी भी ऑफर करता है।

🌟 LISSUN का फोकस अब 3 स्तरों पर होगा:

  1. घर (Home): पेरेंट्स को रियल-टाइम गाइडेंस और एक्टिविटी सुझाव
  2. स्कूल (School): टीचर्स और काउंसलर्स के साथ समन्वय
  3. क्लीनिक (Clinical): पेशेवर थेरेपी और इंटरवेंशन

🧑‍💻 Ray: AI-संचालित वर्चुअल असिस्टेंट

LISSUN ने अपना खुद का AI वर्चुअल असिस्टेंट – Ray भी तैयार किया है। यह व्हाट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म पर करोड़ों माता-पिता को रीयल-टाइम डेवलपमेंटल इनसाइट्स, थेरेपी एक्टिविटी सुझाव और माइलस्टोन ट्रैकिंग जैसी सेवाएं देगा।

इस तकनीक की मदद से अब भारत के छोटे शहरों और कस्बों में भी बच्चों की मानसिक सेहत की देखभाल डिजिटल माध्यम से की जा सकेगी।


🚀 विस्तार की योजना: 20 से 200 Sunshine सेंटर

फिलहाल LISSUN के पास 20 ‘Sunshine by LISSUN’ सेंटर हैं, लेकिन कंपनी की योजना है कि अगले 2–4 वर्षों में इसे बढ़ाकर 200 सेंटर किया जाए। इसके साथ-साथ:

  • AI-संचालित वर्चुअल सपोर्ट का विस्तार
  • स्कूली साझेदारियों में वृद्धि
  • भारत में Tier-2 और Tier-3 शहरों तक पहुंच

LISSUN भारत में मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र में सुलभता (accessibility) और गुणवत्ता (quality) को साथ लेकर चलने वाला एक अनोखा प्लेटफॉर्म बन रहा है।


🧩 क्या बदलाव लाएगा यह अधिग्रहण?

🔄 तकनीकी मजबूती:

Being की टेक्नोलॉजी को अपनाकर अब LISSUN भारत के बच्चों के लिए डेटा-संचालित और जमीनी हकीकत पर आधारित समाधान देने की क्षमता रखता है।

🎯 अधिक पर्सनलाइज़्ड केयर:

हर बच्चे की ज़रूरत, उसके व्यवहार, समस्याओं और विकास स्तर के आधार पर अब कस्टमाइज्ड थेरेपी और गाइडेंस दी जा सकेगी।

🌐 फिजिकल + डिजिटल = Phygital नेटवर्क:

इन-पर्सन सेंटर + ऑनलाइन सपोर्ट मिलकर “Phygital” नेटवर्क बनाएंगे, जिससे देशभर के परिवारों को एक जैसा सपोर्ट मिलेगा।


📢 निष्कर्ष: भारत में बाल मानसिक स्वास्थ्य की दिशा में बड़ी छलांग

LISSUN द्वारा Being Cares Inc का अधिग्रहण भारत के लिए एक क्रांतिकारी कदम है। यह न केवल बच्चों की मानसिक और भावनात्मक ज़रूरतों को समझेगा, बल्कि उन्हें व्यवस्थित, वैज्ञानिक और व्यक्तिगत तरीके से संबोधित भी करेगा।

बदलते दौर में जब ऑटिज़्म, ADHD, लर्निंग डिसऑर्डर जैसी स्थितियां आम होती जा रही हैं, LISSUN जैसे प्लेटफॉर्म समाज के लिए एक समाधान-संचालित भविष्य की नींव रख रहे हैं।


🧒🏻📲 अगर आप भी अपने बच्चे की मानसिक सेहत को लेकर सजग हैं, तो LISSUN से जुड़ें — डिजिटल गाइडेंस और पेशेवर थेरैपी का भरोसेमंद मेल।

Read more : EVeez को मिला $5.4 मिलियन का निवेश,

⚡ EVeez को मिला $5.4 मिलियन का निवेश,

EVeez

गुरुग्राम स्थित इलेक्ट्रिक मोबिलिटी स्टार्टअप EVeez ने अपनी सीरीज-A फंडिंग राउंड में $5.4 मिलियन (लगभग ₹45 करोड़) जुटाए हैं। यह फंडिंग राउंड Michael & Susan Dell Foundation की अगुआई में पूरी हुई, जिसमें Caret Capital, ThinKuvate, Ev2 Ventures, Barbershop With Shantanu, SailThru Ventures और Ah Ventures Fund ने भी भाग लिया।

यह निवेश भारत के तेजी से बढ़ते गिग इकॉनमी वर्कर्स के लिए सस्ती और भरोसेमंद इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सब्सक्रिप्शन सर्विस को और विस्तार देने में मदद करेगा।


🔋 EVeez क्या है?

EVeez एक Electric Mobility-as-a-Service (eMaaS) प्लेटफॉर्म है, जिसकी शुरुआत 2020 में अभिषेक द्विवेदी और गौरव राठौर ने की थी। इस स्टार्टअप का मिशन है – “कम आय वर्ग के युवाओं को आजीविका से जोड़ने के लिए स्वच्छ, सुलभ और सस्ती मोबिलिटी मुहैया कराना।”

EVeez का बिज़नेस मॉडल एक सिंपल सब्सक्रिप्शन पर आधारित है, जहां सिर्फ ₹1,100 प्रति सप्ताह में यूज़र्स को इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मिलता है — वो भी मेंटेनेंस, इंश्योरेंस और बैटरी स्वैप सुविधा के साथ!


💼 गिग वर्कर्स के लिए वरदान

भारत में फूड डिलीवरी, क्यू-कॉमर्स, ई-कॉमर्स और राइड-हेलिंग जैसे सेक्टर में गिग वर्कर्स की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। लेकिन इन युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती है – वाहन खरीदने की लागत।

EVeez इस चुनौती का समाधान बनकर उभरा है:

  • ₹1,100 प्रति सप्ताह से शुरुआत
  • नो डाउन पेमेंट, नो लोन, नो ईएमआई
  • बीमा, बैटरी, मेंटेनेंस, ट्रेनिंग सभी शामिल

इस मॉडल से यूज़र बिना किसी आर्थिक बोझ के गिग वर्क में शामिल हो सकते हैं और स्थिर आय अर्जित कर सकते हैं।


🌱 ग्रीन मोबिलिटी और आखिरी मील तक पहुंच

EVeez के COO और को-फाउंडर अभिषेक द्विवेदी के अनुसार:

“भारत में आने वाले वर्षों में 2 करोड़ से अधिक गिग वर्कर्स होंगे। EVeez का लक्ष्य है उन्हें स्वच्छ मोबिलिटी प्रदान कर आखिरी मील तक हरित बदलाव लाना।”

उनके अनुसार, इलेक्ट्रिक व्हीकल सिर्फ पर्यावरण की मदद नहीं करते बल्कि गिग वर्कर्स को पेट्रोल खर्च, रखरखाव और रिपेयरिंग की चिंता से भी मुक्त करते हैं।


📊 आंकड़ों में EVeez की ग्रोथ

EVeez ने अब तक:

  • 15 शहरों में अपनी मौजूदगी बनाई है
  • 7,000 इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का ऑपरेशन
  • FY27 तक 30 शहरों और 50,000 व्हीकल्स तक पहुंचने का लक्ष्य
  • 40,000 नए गिग वर्कर्स को जोड़ने की योजना

इसके वर्तमान उपयोगकर्ताओं में:

  • 55% पहली बार गिग वर्क शुरू कर रहे हैं
  • 45% पारंपरिक पेट्रोल-व्हीकल्स से EV में शिफ्ट हुए हैं

💰 पहले भी जुटा चुके हैं फंड

इस सीरीज-A राउंड से पहले, EVeez ने ah! Ventures सहित अन्य निवेशकों से लगभग $994,000 (₹8 करोड़) जुटाए थे। अब नई फंडिंग से कंपनी को तकनीक में सुधार, सर्विस विस्तार और उपयोगकर्ताओं को बेहतर अनुभव देने में मदद मिलेगी।


🔁 EVeez का सर्विस मॉडल: किराया नहीं, समाधान है

EVeez का मॉडल सिर्फ “EV किराए पर दो और चलाओ” वाला नहीं है, बल्कि यह एक पूर्ण समाधान है:

  • सब्सक्रिप्शन के साथ मिलता है 24×7 मेंटेनेंस सपोर्ट
  • इंश्योरेंस और बैटरी स्वैपिंग सुविधा
  • EV ट्रेनिंग जिससे नया यूज़र जल्दी अपनाए

यह सब मिलकर गिग वर्कर की कमाई पर फोकस को बढ़ावा देता है, न कि तकनीकी झंझटों पर।


🌏 आने वाले समय में EVeez का असर

भारत में गिग इकॉनमी तेजी से बढ़ रही है, और साथ ही क्लीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की मांग भी। EVeez दोनों जरूरतों को एक साथ पूरा कर रहा है – रोजगार भी और हरित भविष्य भी

इसके सब्सक्रिप्शन मॉडल से आने वाले वर्षों में लाखों युवाओं को कम खर्च में आजीविका के साधन मिल सकते हैं, साथ ही देश के कार्बन फुटप्रिंट में भी कमी आएगी।


✨ निष्कर्ष: EVeez बदल रहा है ‘काम’ तक पहुंचने का तरीका

EVeez जैसे स्टार्टअप्स भारत के शहरी और निम्न-आय वर्ग के युवाओं को नई दिशा दिखा रहे हैं। अब जब गिग इकॉनमी का भविष्य उज्जवल है, EVeez जैसे प्लेटफॉर्म उसे और ज्यादा समावेशी, टिकाऊ और सुलभ बना रहे हैं।

नया फंडिंग राउंड न सिर्फ कंपनी को स्केल करने में मदद करेगा, बल्कि यह भी दिखाता है कि निवेशकों को EVeez के impact-driven मॉडल में भरोसा है।


📢 क्या आप या आपके जानने वाले कोई गिग वर्क शुरू करना चाहते हैं? EVeez के साथ शुरू करें – कम लागत में बड़ा बदलाव! ⚡🛵

Read more : KickCash गेम खेलो और असली पैसे कमाओ!

🎮 KickCash गेम खेलो और असली पैसे कमाओ!

KickCash

Gurugram आधारित मोबाइल गेमिंग स्टार्टअप KickCash ने $1 मिलियन (लगभग ₹8.3 करोड़) का वार्षिक रेवेन्यू पार कर लिया है। यह उपलब्धि कंपनी ने अपने “performance-first” user acquisition मॉडल के जरिए हासिल की है, जो मोबाइल गेम्स और ऐप्स की दुनिया में नए बदलाव ला रहा है।

🤑 “खेलो और कमाओ” मॉडल: गेमिंग का नया फॉर्मूला

KickCash खुद को “frequent flyer program for mobile gamers” के रूप में पेश कर रहा है, जहां खिलाड़ी जितना ज़्यादा समय गेम खेलने में बिताते हैं, उतना ही ज़्यादा असल नकद इनाम कमाते हैं।

कंपनी का फोकस सिर्फ खेलने की मस्ती पर नहीं है – यहां हर मिनट कीमती है, क्योंकि प्ले-टाइम को वास्तविक पैसों में बदला जा सकता है।

📲 केवल Android पर उपलब्ध

वर्तमान में KickCash केवल Android यूज़र्स के लिए उपलब्ध है। खिलाड़ी KickCash ऐप के माध्यम से पार्टनर गेम स्टूडियोज़ द्वारा चलाए जा रहे इन-गेम इवेंट्स और प्रमोशन में हिस्सा लेकर सीधे अपने वॉलेट में कैश रिवॉर्ड प्राप्त कर सकते हैं, जिसे बाद में डायरेक्ट बैंक में ट्रांसफर किया जा सकता है।

🔁 तीन-पक्षीय Flywheel मॉडल: सभी के लिए फायदेमंद

KickCash का बिज़नेस मॉडल तीन पक्षों को साथ लाता है –

  1. प्लेयर (खिलाड़ी)
  2. गेम डेवलपर्स
  3. KickCash प्लेटफॉर्म

🧑‍💻 खिलाड़ी के लिए:

  • वही गेम खेलो जो उन्हें पसंद हैं
  • और बदले में वास्तविक नकद इनाम पाओ

🎯 डेवलपर्स के लिए:

  • उन्हें केवल तभी पेमेंट करनी होती है जब खिलाड़ी गेम में असली इंटरैक्शन और इंगेजमेंट दिखाते हैं
  • इससे डेवलपर्स को बेहतर ROI (Return on Investment) और लॉन्ग-टर्म रिटेंशन मिलता है

💼 KickCash के लिए:

  • रेवेन्यू केवल वेरिफाइड परफॉर्मेंस से आता है
  • superficial metrics नहीं, बल्कि client outcomes से कंपनी की ग्रोथ जुड़ी होती है

📊 प्रभावशाली परफॉर्मेंस मेट्रिक्स

KickCash के अनुसार:

  • उनके प्लेटफॉर्म पर रन की गई कैंपेन ने Day-30 ROAS (Return on Ad Spend) में 52% की बढ़त दिखाई है
  • वहीं Day-21 retention में भी 24% सुधार देखा गया है

यह आंकड़े दिखाते हैं कि KickCash का मॉडल केवल नए यूज़र्स को लाने में नहीं, बल्कि उन्हें बनाए रखने और अधिक इंगेज करने में भी कारगर है।

🛡️ धोखाधड़ी-रहित और प्राइवेसी-कॉम्प्लायंट इंजन

मोबाइल एडवर्टाइजिंग में जहां ad fraud और privacy नियम चुनौती बन चुके हैं, वहीं KickCash ने एक ऐसा fraud-proof और privacy-compliant इंजन तैयार किया है जो “post-cookie world” में भी प्रभावी है।

🌍 ग्लोबल गेमिंग स्टूडियो का समर्थन

KickCash को कई प्रमुख ग्लोबल गेमिंग स्टूडियोज़ का समर्थन प्राप्त है, जिनमें शामिल हैं:

  • Playtika
  • Potato Play
  • Felicity Games
  • TripleDot Studios

इनकी मदद से KickCash एक विश्वसनीय गेम प्रमोशन प्लेटफॉर्म बन चुका है।

🇮🇳 भारत में सफलता के बाद अब वैश्विक विस्तार की तैयारी

भारत जैसे हाई-कॉम्पिटेटिव मार्केट में अपने मल्टी-रिवॉर्ड इंजन को सफलता पूर्वक टेस्ट करने के बाद, KickCash अब वैश्विक बाजारों में लॉन्च करने की योजना बना रहा है।

ये वो बाजार हैं जहां अब तक “फ्रिक्शन-फ्री कैशआउट मॉडल” की कमी है। KickCash की डेटा-ड्रिवन रणनीति इस विस्तार को प्रभावशाली ROI और यूज़र एक्सपीरियंस दोनों में बढ़त दिलाने का माध्यम बनेगी।

🗣️ फाउंडर की बात: अब स्केल की बारी

कंपनी के को-फाउंडर प्रत्युष निशांतकर ने कहा:

“हमारे लिए $1 मिलियन का ARR पार करना एक टर्निंग पॉइंट है – यह अब हमें स्केल के अगले फेज़ के लिए तैयार करता है।”

इस बयान से स्पष्ट है कि KickCash अब सिर्फ एक गेमिंग स्टार्टअप नहीं, बल्कि एक ग्लोबल परफॉर्मेंस प्लेयर बनने की राह पर है।


🔚 निष्कर्ष: गेमिंग में नया युग – समय = पैसा

KickCash भारतीय मोबाइल गेमिंग इंडस्ट्री में एक नई लहर लेकर आया है। जहां एक ओर यूज़र्स को खेलने के बदले वास्तविक इनाम मिल रहा है, वहीं डेवलपर्स को भी अपने खर्च का बेहतर रिटर्न मिल रहा है।

अब जबकि कंपनी वैश्विक विस्तार की योजना बना रही है, यह देखना दिलचस्प होगा कि KickCash दुनिया भर के गेमर्स को “प्ले टू अर्न” के इस ट्रेंड में कैसे जोड़ पाता है।


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Read more : Shadowfax IPO ₹2,000 करोड़ जुटाने की तैयारी में

🚚 Shadowfax IPO ₹2,000 करोड़ जुटाने की तैयारी में

Shadowfax

भारतीय लॉजिस्टिक्स सेक्टर में तेजी से उभरती कंपनी Shadowfax जल्द ही ₹2,000 करोड़ (लगभग $235 मिलियन) का Initial Public Offering (IPO) लाने जा रही है। यह जानकारी कंपनी द्वारा रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़ (RoC) में दायर फाइलिंग से सामने आई है।

💸 IPO का स्ट्रक्चर: Fresh Issue + OFS

Shadowfax का यह IPO दो हिस्सों में बंटा होगा:

  • ₹1,000 करोड़ का फ्रेश इश्यू, जो कंपनी में नए इक्विटी शेयर जारी करेगा।
  • ₹1,000 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS), जिसमें मौजूदा निवेशक अपने शेयर बेच सकेंगे।

इस सार्वजनिक निर्गम में ICICI Securities, JM Financial और Morgan Stanley मुख्य सलाहकार (lead managers) की भूमिका निभा रहे हैं।

📝 SEBI में गोपनीय रूट से DRHP दाखिल

Shadowfax ने हाल ही में सेबी (SEBI) के पास गोपनीय रूट के जरिए Draft Red Herring Prospectus (DRHP) फाइल किया है। यह तरीका उन स्टार्टअप्स के लिए होता है जो कम प्रोफाइल में IPO की प्रक्रिया शुरू करना चाहते हैं।

🧑‍💼 बोर्ड स्ट्रेंथनिंग: स्वतंत्र निदेशक और सह-संस्थापकों की नियुक्ति

IPO की तैयारी के बीच Shadowfax ने अपने बोर्ड को भी मज़बूत किया है। सह-संस्थापक गौरव जैठलिया को Whole-time Director के रूप में नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, नियामक आवश्यकताओं के तहत चार नए स्वतंत्र निदेशकों (Independent Directors) की भी नियुक्ति की गई है:

  • बिजू कुरियन
  • रुचिरा शुक्ला
  • पिरोजशाह सरकार
  • दिनकर गुप्ता

इन नियुक्तियों से कंपनी को बेहतर गवर्नेंस और IPO के बाद की रणनीतियों में सहायता मिलने की उम्मीद है।

📊 वैल्यूएशन: ₹5,981 करोड़ से ₹8,500 करोड़ की छलांग!

Shadowfax की मौजूदा वैल्यूएशन लगभग ₹5,981 करोड़ ($712 मिलियन) है। यह वैल्यूएशन कंपनी को फरवरी 2025 में Mirae Asset और Nokia Growth Partners से मिले $16.8 मिलियन के सीरीज़ F फंडिंग के बाद मिली थी।

कंपनी का लक्ष्य IPO के बाद अपनी वैल्यूएशन को ₹8,500 करोड़ तक ले जाने का है।

🏢 कंपनी प्रोफाइल: Shadowfax क्या करता है?

2015 में अभिषेक बंसल, वैभव खंडेलवाल, प्रहर्ष चंद्रा और गौरव जैठलिया द्वारा स्थापित Shadowfax, एक Bengaluru-स्थित लॉजिस्टिक्स स्टार्टअप है। कंपनी खासतौर पर ई-कॉमर्स, हाइपरलोकल डिलीवरी, और लास्ट माइल लॉजिस्टिक्स पर फोकस करती है।

🔗 Shadowfax की खासियतें:

  • 1.25 लाख से अधिक मंथली एक्टिव डिलीवरी पार्टनर्स का नेटवर्क
  • ग्रोसरी, फूड डिलीवरी, और मेडिसिन डिलीवरी जैसे सेगमेंट में सेवाएं
  • बेंगलुरु से ऑपरेट होती है लेकिन पूरे भारत में सेवा उपलब्ध

📈 फंडिंग हिस्ट्री और मुख्य निवेशक

TheKredible के आंकड़ों के अनुसार, Shadowfax ने अब तक कुल $246 मिलियन की फंडिंग जुटाई है। इसके कुछ प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:

  • Eight Roads Ventures – सबसे बड़ा बाहरी शेयरधारक
  • Flipkart
  • NewQuest Asia
  • Nokia Growth Partners

इन निवेशकों के समर्थन ने Shadowfax को भारत के लॉजिस्टिक्स सेक्टर में एक मज़बूत ब्रांड बनने में मदद की है।

📉 वित्तीय प्रदर्शन: FY24 में मुनाफा नहीं, लेकिन घाटा हुआ कम

हालांकि कंपनी का FY25 का डेटा अब तक सामने नहीं आया है, लेकिन FY24 के आंकड़े काफी प्रोत्साहित करने वाले हैं:

  • कुल राजस्व ₹1,885 करोड़ – साल दर साल 33.2% की वृद्धि
  • घाटा सिर्फ ₹11.8 करोड़, जो FY23 के ₹142 करोड़ के नुकसान से 91% की गिरावट है

यह दर्शाता है कि Shadowfax न सिर्फ राजस्व बढ़ा रहा है, बल्कि धीरे-धीरे लाभप्रदता (profitability) की ओर भी बढ़ रहा है।

📦 लॉजिस्टिक्स सेक्टर में IPO की बाढ़?

भारत में लॉजिस्टिक्स सेक्टर तेजी से टेक्नोलॉजी-ड्रिवन बन रहा है। Shadowfax का IPO ऐसे समय में आ रहा है जब Delhivery, Ecom Express जैसी कंपनियां भी बाजार में मजबूत स्थिति बना चुकी हैं। इस IPO से Shadowfax को अपने नेटवर्क विस्तार और टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन में मदद मिलेगी।


🔚 निष्कर्ष: Shadowfax का IPO क्यों महत्वपूर्ण है?

Shadowfax का आगामी IPO भारत के लॉजिस्टिक्स और स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है। Flipkart जैसी बड़ी कंपनी का समर्थन, मजबूत वित्तीय ग्रोथ, और लागत में कटौती के प्रयास इसे निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बना सकते हैं।

जैसे-जैसे कंपनी शेयर बाजार में प्रवेश करेगी, इसकी सफलता आने वाले समय में भारत के अन्य लॉजिस्टिक्स स्टार्टअप्स को भी प्रेरित कर सकती है।


📢 क्या आप Shadowfax के IPO में निवेश करने की सोच रहे हैं? यह सही समय हो सकता है लॉजिस्टिक्स फ्यूचर का हिस्सा बनने का!

Read more: iTuring.ai ने जुटाए $5 मिलियन, BFSI सेक्टर में AI क्रांति लाने की तैयारी

💰 iTuring.ai ने जुटाए $5 मिलियन, BFSI सेक्टर में AI क्रांति लाने की तैयारी

iTuring.ai

🧠 BFSI सेक्टर के लिए बना AI प्लेटफॉर्म

iTuring.ai, एक एंटरप्राइज-ग्रेड AI/ML प्लेटफॉर्म, जो खासतौर पर बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (BFSI) सेक्टर के लिए डिज़ाइन किया गया है, ने Series A फंडिंग राउंड में $5 मिलियन (लगभग ₹42 करोड़) की पूंजी जुटाई है।

इस राउंड का नेतृत्व Dallas Venture Capital (DVC) और Mela Ventures ने किया। इससे पहले इसी राउंड में कंपनी ने $1.19 मिलियन जुटाए थे, जिसमें SenseAI, Pentathlon Ventures और Ghosal Ventures जैसे निवेशकों ने भाग लिया था।


🚀 Zero-Code प्लेटफॉर्म के विस्तार पर जोर

iTuring.ai इस फंडिंग का इस्तेमाल अपने zero-code प्लेटफॉर्म को तेजी से बाजार में उतारने के लिए करेगी। यह प्लेटफॉर्म बैंकों और बीमा कंपनियों को AI और ML मॉडल बनाने, तैनात करने और प्रबंधित करने की सुविधा देता है — वो भी बिना कोड लिखे

कंपनी के सह-संस्थापक और सीईओ सुमन सिंह ने बताया:

“हमारा विज़न शुरू से ही यह रहा है कि हम फाइनेंशियल संस्थानों को पारदर्शी, उत्तरदायी और ऑडिट-रेडी AI प्लेटफॉर्म दें, जो पूरे मॉडल लाइफसायकल को ऑटोमेट कर सके।”


🧩 iTuring.ai कैसे काम करता है?

2018 में सुमन सिंह, अमित कुमार, मोहम्मद नवाज और श्रीवलसन पोन्नचथ द्वारा स्थापित, iTuring.ai एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो AI मॉडल डेवलपमेंट के पूरे चक्र को ऑटोमेट करता है।

इसमें शामिल हैं:

  • ✅ डेटा तैयारी (Data Preparation)
  • ✅ फीचर इंजीनियरिंग
  • ✅ मॉडल बिल्डिंग
  • ✅ मॉडल तैनाती (Deployment)
  • ✅ निरंतर निगरानी (Monitoring & Governance)

सभी प्रक्रियाएं एक एकीकृत वातावरण (Unified Platform) में होती हैं, जो BFSI सेक्टर के रेगुलेटरी और ऑडिट मानकों को पूरा करती हैं।


🌎 भारत से अमेरिका तक iTuring.ai का विस्तार

iTuring.ai की सेवाएं भारत, दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका तक फैली हुई हैं। अमेरिका में कंपनी ने एक वैश्विक पेमेंट प्लेटफॉर्म के साथ साझेदारी की है, जिससे उस प्लेटफॉर्म को ग्राहक राजस्व बढ़ाने और लागत घटाने में मदद मिली है।


📈 असरदार परिणाम और तेज़ डिलीवरी

कंपनी का दावा है कि उसके ग्राहकों को निम्नलिखित प्रमुख लाभ हुए हैं:

  • 🔧 प्रोजेक्ट डिलीवरी की स्पीड में बढ़ोतरी
  • 🧑‍💻 मैन्युअल प्रयासों में भारी कटौती
  • 📊 AI मॉडल की भविष्यवाणी क्षमता में सुधार

BFSI सेक्टर में जहां डाटा सेंसिटिव होता है और रेगुलेशन सख्त, वहां इस तरह का प्लेटफॉर्म गेम-चेंजर साबित हो सकता है।


💸 निवेशकों का भरोसा

iTuring.ai को DVC, Mela Ventures, SenseAI, Pentathlon Ventures और Ghosal Ventures जैसे प्रमुख निवेशकों का समर्थन मिला है। इस निवेश से साफ है कि मार्केट को iTuring की तकनीक पर भरोसा है।

इन निवेशकों का कहना है कि iTuring BFSI सेक्टर की एक गंभीर समस्या का हल लेकर आया है, और इसकी टेक्नोलॉजी में स्केलेबिलिटी और स्थायित्व है।


🔍 क्या है कंपनी का अगला कदम?

फंडिंग मिलने के बाद, iTuring.ai अब निम्नलिखित दिशा में आगे बढ़ेगा:

  1. 🌐 प्लेटफॉर्म का ग्लोबल विस्तार
  2. ⚙️ Zero-Code टेक्नोलॉजी को और बेहतर बनाना
  3. 🛡️ AI गवर्नेंस और पारदर्शिता में नए मानक स्थापित करना

कंपनी का फोकस रहेगा अपने प्लेटफॉर्म को ऐसे टूल में बदलना जो पूरी इंडस्ट्री के लिए AI का लोकतंत्रीकरण कर सके।


🧾 निष्कर्ष: भारत से निकला AI समाधान, जो वैश्विक हो रहा है

iTuring.ai यह दिखाता है कि भारत से निकला स्टार्टअप न केवल इनोवेशन में आगे है, बल्कि वह BFSI जैसे जटिल सेक्टर के लिए ऑडिट-रेडी, स्केलेबल और AI-फर्स्ट समाधान भी प्रदान कर सकता है।

➡️ आने वाले समय में, जब AI की भूमिका और बढ़ेगी, तब iTuring जैसे प्लेटफॉर्म सबसे आगे रहेंगे।

📌 “जहां कोड की जरूरत नहीं, वहां iTuring है — BFSI सेक्टर के लिए AI का भरोसेमंद साथी।”


Read more : बातचीत को नया आयाम देने वाली स्टार्टअप Gupshup ने जुटाए $60 मिलियन,

💬 बातचीत को नया आयाम देने वाली स्टार्टअप Gupshup ने जुटाए $60 मिलियन,

Gupshup

📢 परिचय:
कन्वर्सेशनल AI प्लेटफॉर्म Gupshup ने अपने ताज़ा फंडिंग राउंड में $60 मिलियन (लगभग ₹500 करोड़) से अधिक की राशि इक्विटी और डेब्ट के रूप में जुटाई है। यह निवेश प्रमुख निवेशकों Globespan Capital Partners और EvolutionX Debt Capital द्वारा किया गया है।

यह फंडिंग Gupshup के लिए बीते चार वर्षों में पहला बड़ा निवेश है और यह ऐसे समय पर आया है जब कंपनी 18-24 महीनों में IPO (Initial Public Offering) लाने की योजना बना रही है। कंपनी इसके साथ ही अपने मुख्यालय को अमेरिका से भारत स्थानांतरित करने की संभावनाएं भी तलाश रही है।


🚀 फंडिंग से मिलेगा विस्तार को बल
Gupshup इस निवेश का उपयोग निम्नलिखित कार्यों के लिए करेगा:

  • अपने AI एजेंट्स को बेहतर बनाने और स्केल करने के लिए
  • भारत, मिडल ईस्ट, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका जैसे तेज़ी से बढ़ते बाजारों में उपस्थिति मज़बूत करने के लिए
  • अपने गो-टू-मार्केट रणनीति को तेज़ी से लागू करने के लिए

🤖 Gupshup क्या करता है?
Gupshup एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो कंपनियों को बातचीत आधारित मार्केटिंग, सेल्स और कस्टमर सपोर्ट देने में सक्षम बनाता है। इसके AI-पावर्ड टूल्स ब्रांड्स को ग्राहकों के साथ पर्सनलाइज्ड तरीके से जुड़ने में मदद करते हैं — वो भी मैसेजिंग ऐप्स और वॉइस इंटरफेस के ज़रिए।

प्रमुख फीचर्स:

  • AI Agents
  • Campaign Manager
  • Click-to-Chat Ads
  • AI CoPilot
  • Agent Assist

कंपनी के अनुसार, Gupshup हर साल 120 अरब से ज़्यादा मैसेज 130 देशों में 50,000 से अधिक क्लाइंट्स के लिए भेजता है।


🦄 यूनिकॉर्न बनने से IPO तक का सफर
Gupshup अप्रैल 2021 में तब यूनिकॉर्न बना जब उसे Tiger Global से $100 मिलियन का निवेश मिला। उसी साल कंपनी ने कुल $240 मिलियन जुटाए और इसके बाद Knowlarity, Active.Ai और Onedirect जैसी कंपनियों का अधिग्रहण भी किया।

हालाँकि, 2024 में कंपनी को अपने संचालन को सरल बनाने के लिए 300 कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ी। यह निर्णय तेज़ विकास के बाद लाभ कमाने की दिशा में उठाया गया कदम बताया गया।


📊 कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन
Gupshup ने FY23 (2022-23) में:

  • ₹1,619 करोड़ का राजस्व अर्जित किया
  • ₹49 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया

हालांकि FY24 और FY25 के आंकड़े सार्वजनिक नहीं हैं, लेकिन माना जा रहा है कि FY24 में कंपनी ने करीब $300 मिलियन (₹2,500 करोड़) की कमाई की है।


🏆 प्रतिस्पर्धा और बाजार स्थिति
Gupshup भारत में Freshworks का Freshchat, WATI और Zoho SalesIQ जैसे खिलाड़ियों से प्रतिस्पर्धा करता है। हालांकि, इसके पास AI एजेंट्स और मैसेजिंग आधारित समाधान के क्षेत्र में मजबूत पकड़ है, जिससे यह Conversational AI और CPaaS क्षेत्र में प्रमुख खिलाड़ी बन गया है।


📈 भविष्य की योजना और रणनीति
Gupshup के पास अब नई फंडिंग के जरिए:

  • तकनीकी नवाचार को और तेज़ करने का अवसर है
  • नए बाज़ारों में गहराई से प्रवेश करने की क्षमता है
  • और सबसे अहम, IPO के लिए तैयार होने का रास्ता भी साफ हो गया है

कंपनी के संभावित IPO से भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक नई उम्मीद और विश्वास का संचार होगा, खासतौर पर AI और क्लाउड कम्युनिकेशन से जुड़े क्षेत्रों में।


📝 निष्कर्ष:
Gupshup की यह ताज़ा फंडिंग भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक और सकारात्मक संकेत है कि घरेलू कंपनियां अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार हैं। AI, डिजिटल कम्युनिकेशन और इंटरफेस डिजाइन में Gupshup का सफर, आने वाले IPO के साथ एक नया मोड़ ले सकता है — जो भारतीय टेक इंडस्ट्री को और मजबूती देगा।

📌 “बातचीत अब सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं रही, यह अब एक कारोबार बन चुकी है — Gupshup इसका जीता-जागता उदाहरण है।”

Read more : Myntra पर ED की बड़ी कार्रवाई: ₹1,654 करोड़ के FDI नियम उल्लंघन का आरोप

🔍 Myntra पर ED की बड़ी कार्रवाई: ₹1,654 करोड़ के FDI नियम उल्लंघन का आरोप

Myntra

ई-कॉमर्स फैशन कंपनी Myntra Designs Pvt. Ltd. और उससे जुड़ी संस्थाओं पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने Foreign Exchange Management Act (FEMA), 1999 की धारा 16(3) के तहत शिकायत दर्ज की है। आरोप है कि कंपनी ने भारत की FDI नीति का उल्लंघन करते हुए ₹1,654 करोड़ से अधिक की विदेशी पूंजी निवेश (FDI) प्राप्त की और उसे गलत तरीके से उपयोग किया।

🔍 ED का आरोप क्या है?

ED के बेंगलुरु ज़ोनल ऑफिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, Myntra और उसकी सहयोगी कंपनियां “Cash & Carry” होलसेल बिज़नेस के नाम पर मल्टी-ब्रांड रिटेल ट्रेडिंग (MBRT) कर रही थीं, जो भारत की FDI पॉलिसी के अंतर्गत प्रतिबंधित है।

ED का दावा है कि Myntra को ₹1,654.35 करोड़ का विदेशी निवेश मिला, जिसमें उसने खुद को एक होलसेल कंपनी बताकर निवेश हासिल किया। लेकिन असल में Myntra ने अधिकांश सामान Vector E-Commerce Pvt. Ltd. को बेचा, जो एक रिलेटेड पार्टी है। इसके बाद Vector ने उन उत्पादों को आम ग्राहकों को रिटेल में बेचा।

📦 B2B की आड़ में B2C बिक्री?

ED के मुताबिक, Myntra ने अपने होलसेल बिज़नेस को रिटेल सेल्स में बदलने के लिए Vector E-Commerce का इस्तेमाल किया। इससे कंपनी का बिज़नेस मॉडल B2C (बिज़नेस टू कस्टमर) हो गया, जबकि निवेश B2B (बिज़नेस टू बिज़नेस) के लिए लिया गया था।

भारत की FDI पॉलिसी 2010 के अनुसार, कोई भी होलसेल कंपनी अपनी कुल बिक्री का केवल 25% ही अपनी ग्रुप कंपनियों को बेच सकती है। लेकिन Myntra ने अपनी पूरी बिक्री (100%) Vector को की, जो स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है।

📜 FEMA के अंतर्गत नियमों का उल्लंघन

ED ने कहा है कि यह कार्यवाही FEMA की धारा 6(3)(b) और भारत सरकार की Consolidated FDI Policy के कई नियमों के खिलाफ है। इस शिकायत को अब FEMA की Adjudicating Authority के पास भेजा गया है।

📢 Myntra का जवाब

“Myntra कानून का पूरी तरह पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है। एक भारतीय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के रूप में हम डिजिटल कॉमर्स के ज़रिए देश की टेक्सटाइल और एपरल इंडस्ट्री को सशक्त बनाने का काम कर रहे हैं। हमने पारंपरिक शिल्प को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। हम अब तक ED की शिकायत की प्रति प्राप्त नहीं कर पाए हैं, लेकिन हम जांच एजेंसी के साथ पूरी तरह सहयोग करेंगे।”

📊 क्या है नियम और इसका महत्व?

भारत की विदेशी निवेश नीति में यह स्पष्ट किया गया है कि होलसेल बिज़नेस में 100% FDI की अनुमति है, लेकिन इससे जुड़ी कंपनियां अपनी ग्रुप कंपनियों को केवल 25% तक ही सेल कर सकती हैं। इसका उद्देश्य है कि कोई भी कंपनी होलसेल लाइसेंस का दुरुपयोग कर रिटेल बिज़नेस न करे क्योंकि रिटेल में विदेशी निवेश की शर्तें अलग और अधिक सख्त हैं।

📌 क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

  • यह मामला ई-कॉमर्स इंडस्ट्री के लिए एक चेतावनी की तरह है कि FDI नियमों का उल्लंघन अब नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
  • इससे FDI निवेशकों और कंपनियों के बीच पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
  • ED अब यह जांच कर रही है कि अन्य ई-कॉमर्स और रिटेल कंपनियां भी इसी तरह के नियम उल्लंघन में लिप्त हैं या नहीं।

🧵 Myntra और Vector के बीच संबंध

Myntra और Vector E-Commerce को एक ही कॉरपोरेट ग्रुप का हिस्सा माना गया है। इस प्रकार के संबंधों में अगर बिक्री होती है तो उसे “रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन” के तहत देखा जाता है और इसमें नियम काफी सख्त होते हैं। ED का मानना है कि Vector का इस्तेमाल Myntra ने एक परदे के तौर पर किया ताकि होलसेल के नाम पर असल में रिटेल बिज़नेस चलाया जा सके।

📈 भविष्य की कार्रवाई और असर

  • अगर FEMA के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो Myntra पर भारी जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
  • इससे भारत में काम कर रही विदेशी कंपनियों और निवेशकों के लिए एक कड़ा संदेश जाएगा।
  • यह केस भारत की FDI निगरानी व्यवस्था की सख्ती को भी दर्शाता है।

📝 निष्कर्ष

Myntra पर ED की यह कार्रवाई भारत में FDI नीति के पालन को लेकर एक बड़ा उदाहरण बन सकती है। ई-कॉमर्स सेक्टर में तेज़ी से हो रहे बदलावों के बीच यह सुनिश्चित करना आवश्यक हो गया है कि सभी कंपनियां FDI नियमों का कड़ाई से पालन करें। Myntra जैसे बड़े ब्रांड पर हुई यह कार्रवाई भविष्य में अन्य कंपनियों के लिए भी मार्गदर्शन का काम करेगी।


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Read more : Pristyn Care ने 4 मिलियन डॉलर जुटाए,

🏥 Pristyn Care ने 4 मिलियन डॉलर जुटाए,

Pristyn Care

सर्जरी-केंद्रित हॉस्पिटल चेन Pristyn Care ने हाल ही में एक नई फंडिंग राउंड के तहत 4 मिलियन डॉलर (लगभग ₹33 करोड़) की पूंजी जुटाई है। इस फंडिंग का इस्तेमाल कंपनी अपने स्वामित्व वाले अस्पतालों के विस्तार के लिए करेगी।


💸 निवेश का ब्योरा: किसने कितना लगाया?

Pristyn Care ने इस फंडिंग के तहत 34,280 Series E1 CCPS (Compulsorily Convertible Preference Shares) को ₹10,038.16 प्रति शेयर की कीमत पर जारी किया है। यह शेयर कीमत पहले की फंडिंग राउंड जितनी ही है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कंपनी की वैल्यूएशन में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

इस राउंड में दो प्रमुख मौजूदा निवेशकों ने भाग लिया:

  • Peak XV Partners
  • Hummingbird Ventures

Entrackr की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी वर्तमान में नए और पुराने निवेशकों से मिलाकर $100 मिलियन (लगभग ₹830 करोड़) की बड़ी फंडिंग जुटाने की भी कोशिश कर रही है।


🏥 विस्तार की योजनाएं: अस्पतालों की संख्या दोगुनी होगी

पिछले 4 महीनों में, Pristyn Care ने 8 नए अस्पताल शुरू किए हैं। कंपनी फिलहाल 200,000 वर्ग फुट क्षेत्र में फैले हुए 450 बेड्स वाले अस्पतालों का संचालन कर रही है। लेकिन यही अंत नहीं है — कंपनी ने बताया है कि दिसंबर 2025 तक वह अपने नेटवर्क को दोगुना करना चाहती है। यानी अगले कुछ महीनों में 10 से अधिक नए अस्पतालों की शुरुआत की जाएगी।

इस विस्तार के पीछे कंपनी का उद्देश्य टियर-1 और टियर-2 शहरों में किफायती, कस्टमर-सेंट्रिक और आधुनिक सर्जरी सुविधाएं प्रदान करना है।


📊 कंपनी का प्रदर्शन: राजस्व में उछाल, घाटा स्थिर

TheKredible के अनुसार, Pristyn Care अब तक कुल $180 मिलियन (लगभग ₹1500 करोड़) की फंडिंग जुटा चुकी है। इस निवेश में Tiger Global, Epiq Capital, और Peak XV Partners जैसे बड़े निवेशकों का सहयोग रहा है।

वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) में कंपनी ने:

  • ₹600 करोड़ से अधिक का ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज किया (30% की सालाना वृद्धि)
  • लेकिन घाटा ₹381 करोड़ पर स्थिर रहा

यह आंकड़े बताते हैं कि कंपनी तेज़ी से विकास कर रही है, लेकिन अभी लाभप्रदता की दिशा में और काम करने की जरूरत है।


🏗️ फंडिंग का उपयोग कहां होगा?

कंपनी इस फंडिंग से:

  • नए अस्पतालों का निर्माण
  • मौजूदा सुविधाओं को अपग्रेड करना
  • मेडिकल इक्विपमेंट और स्टाफिंग में निवेश
  • और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करेगी।

इसके अलावा, कंपनी ने अपना authorised capital भी बढ़ाया है ताकि भविष्य में अधिक फंडिंग जुटाने में कोई अड़चन न आए।


🩺 Pristyn Care का बिज़नेस मॉडल क्या है?

Pristyn Care एक asset-light, doctor-led surgical platform है जो भारत में Elective Surgeries की सुविधा प्रदान करता है। ये Surgeries प्लास्टिक सर्जरी, प्रोक्टोलॉजी, यूरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक, और वेट लॉस जैसे क्षेत्रों में होती हैं।

कंपनी का मॉडल डॉक्टरों और क्लीनिकों को जोड़कर, पेशेंट को एंड-टू-एंड सर्जरी के अनुभव देने पर केंद्रित है — जिसमें कंसल्टेशन, डायग्नोसिस, सर्जरी, और पोस्ट-ऑप केयर शामिल है।


📍 कहां-कहां मौजूद है Pristyn Care?

Pristyn Care की उपस्थिति देश के लगभग सभी बड़े महानगरों में है, जैसे:

  • दिल्ली NCR
  • मुंबई
  • बैंगलोर
  • हैदराबाद
  • कोलकाता
  • चेन्नई

इसके अलावा कंपनी 100+ शहरों में अपनी सेवाएं देने की तैयारी कर रही है।


🔍 आने वाले समय में क्या?

कंपनी का लक्ष्य अब भारत में Elective Surgeries का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म बनना है। इसके लिए वह:

  • मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल नेटवर्क
  • AI आधारित ऑपरेशन और डिलीवरी मॉड्यूल
  • और किफायती हेल्थकेयर प्लान्स पर फोकस कर रही है।

Pristyn Care की यह नई फंडिंग उसे देश के हर कोने तक आधुनिक सर्जरी की सुविधा पहुंचाने में मदद करेगी।


📌 निष्कर्ष:
Pristyn Care का यह 4 मिलियन डॉलर का नया निवेश भारत के हेल्थटेक सेक्टर में बढ़ती संभावनाओं का प्रतीक है। जहां एक ओर कंपनी का रेवेन्यू तेजी से बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर घाटे पर नियंत्रण और लाभप्रदता हासिल करना इसकी अगली चुनौती होगी। लेकिन मौजूदा निवेशकों का भरोसा दिखाता है कि कंपनी की रणनीति दीर्घकालिक रूप से सही दिशा में जा रही है।

Read more : भारत में एंटरप्राइज AI स्टार्टअप Kluisz.ai ने जुटाए ₹80 करोड़ ($9.6 मिलियन)

🇮🇳 भारत में एंटरप्राइज AI स्टार्टअप Kluisz.ai ने जुटाए ₹80 करोड़ ($9.6 मिलियन)

Kluisz.ai

भारत के एंटरप्राइज AI इंफ्रास्ट्रक्चर स्टार्टअप Kluisz.ai ने अपनी सीड फंडिंग राउंड में $9.6 मिलियन (लगभग ₹80 करोड़) जुटाए हैं। इस निवेश का नेतृत्व RTP Global ने किया है। यह 2025 में भारत से निकले किसी भी AI-केंद्रित डीपटेक स्टार्टअप के लिए अब तक की सबसे बड़ी सीड फंडिंग में से एक मानी जा रही है।


💰 किन निवेशकों ने लगाया पैसा?

Kluisz.ai के इस फंडिंग राउंड में RTP Global के अलावा कई अन्य रणनीतिक निवेशकों ने भाग लिया, जिनमें शामिल हैं:

  • Unicorn India Ventures
  • Blume Founders Fund
  • Climber Capital

साथ ही, कुछ प्रमुख एंजेल इन्वेस्टर्स ने भी इसमें निवेश किया, जैसे:

  • रितेश अग्रवाल (Oyo)
  • रितेश मलिक (Innov8)
  • आदित्य वीर्वानी (Embassy Group)
  • और अन्य टॉप इंडस्ट्री लीडर्स

🧠 Kluisz.ai क्या करता है?

Kluisz.ai एक AI-नेटिव, डेवलपर-फर्स्ट प्राइवेट क्लाउड प्लेटफॉर्म बना रहा है, जो खासतौर पर एंटरप्राइज यूज़ केस के लिए डिजाइन किया गया है। इसका फोकस है:

  • AI वर्कलोड्स को ऑर्केस्ट्रेट करना – चाहे वो हाइब्रिड, ऑन-प्रिमाइज़, एज या सॉवरेन क्लाउड पर क्यों न हों।
  • सिक्योरिटी, ऑब्ज़रवेबिलिटी और ऑटोमेशन को प्लेटफॉर्म में इंबेड करना।
  • डेवलपर्स को यह सुविधा देना कि वे अपने परफॉर्मेंस, कंप्लायंस या कॉस्ट ऑब्जेक्टिव्स को सेट कर सकें, और बाकी काम प्लेटफॉर्म खुद कर ले।

यह तकनीक विशेष रूप से बीएफएसआई (BFSI), मैन्युफैक्चरिंग और अन्य रेगुलेटेड सेक्टर्स के लिए कारगर साबित हो सकती है, जहां डेटा सिक्योरिटी और लोकलाइज्ड प्रोसेसिंग की ज़रूरत होती है।


👥 फाउंडर्स कौन हैं?

Kluisz.ai की शुरुआत 2025 में तीन अनुभवी इंडस्ट्री लीडर्स ने मिलकर की:

  • अभिनव सिन्हा – पूर्व Oyo COO और CPO
  • वम्शिधर रेड्डी – पूर्व मैकिन्से पार्टनर
  • अभिजीत सिंह – पूर्व Jio क्लाउड एग्जिक्युटिव

इनकी पिछली भूमिकाएं और अनुभव इस बात को दर्शाते हैं कि टीम ने पहले भी लार्ज-स्केल AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को लीड किया है।


🏗️ फंडिंग का उपयोग कहां होगा?

Kluisz.ai ने कहा है कि इस ताज़ा फंडिंग से वे निम्नलिखित क्षेत्रों में निवेश करेंगे:

  1. बेंगलुरु स्थित इंजीनियरिंग टीम को स्केल करना
  2. प्रोडक्ट डेवलपमेंट को तेज़ करना
  3. शुरुआती डिज़ाइन पार्टनर्स को ऑनबोर्ड करना

कंपनी का फोकस ऐसे एंटरप्राइज ग्राहकों पर है जिन्हें AI वर्कलोड्स के लिए हाई-कस्टमाइज़ेशन, सिक्योरिटी और लो-लेटेंसी इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत होती है।


🗣️ निवेशकों की राय क्या है?

RTP Global के पार्टनर मधुर मक्कर ने इस निवेश को लेकर कहा:

“Kluisz.ai एक बेहद जटिल और वैश्विक समस्या को हल करने की दिशा में काम कर रहा है, और वह भी एक ऐसी टीम के साथ जो पहले भी बड़े स्तर पर यह कर चुकी है। हम भारत से निकलते AI इंफ्रास्ट्रक्चर स्टार्टअप्स में और गहराई से निवेश करना चाहते हैं।”


📈 भविष्य की योजनाएं

  • फिलहाल Kluisz.ai में 20 से कम कर्मचारी हैं, लेकिन कंपनी अगले 12–18 महीनों में तेज़ी से टीम विस्तार की योजना बना रही है।
  • कंपनी की दीर्घकालिक योजना है कि वह भारत और वैश्विक बाजारों में एंटरप्राइज AI ऑप्टिमाइज़ेशन और इन्फ्रास्ट्रक्चर ऑटोमेशन का केंद्र बने।

🔍 क्यों खास है Kluisz.ai?

  • यह एक डेवलपर-फर्स्ट और AI-नेटिव दृष्टिकोण अपनाता है, जो पारंपरिक क्लाउड और इंफ्रास्ट्रक्चर समाधानों से अलग है।
  • इस प्लेटफॉर्म पर डेवलपर्स अपने प्रायोरिटी ऑब्जेक्टिव्स सेट करते हैं, और सिस्टम खुद-ब-खुद संसाधनों का बेस्ट उपयोग करता है।
  • इसका मॉडल कॉस्ट एफिशियंसी, कंप्लायंस और हाई-परफॉर्मेंस को संतुलित करता है, जो आज के एंटरप्राइज वर्कलोड्स के लिए बेहद ज़रूरी है।

🧩 AI इंफ्रास्ट्रक्चर का नया अध्याय

भारत में AI स्टार्टअप्स तेजी से उभर रहे हैं, लेकिन Kluisz.ai का फोकस एक बैकएंड टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर पर है – जहां प्रतिस्पर्धा कम लेकिन टेक्निकल चुनौतियां बहुत गहरी हैं। इस क्षेत्र में निवेशकों की बढ़ती रुचि यह दिखाती है कि अब भारत भी सिर्फ AI ऐप्स का ही नहीं, बल्कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण का भी केंद्र बन रहा है।


📌 निष्कर्ष

Kluisz.ai की यह फंडिंग न केवल इस स्टार्टअप के लिए मील का पत्थर है, बल्कि यह भारत के AI तकनीकी इकोसिस्टम के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है। Deeptech और इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित स्टार्टअप्स अब केवल इनोवेशन नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा की ओर बढ़ रहे हैं।


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Read more : फिटनेस स्टार्टअप ApClub ने जुटाए ₹2 करोड़,

💪 फिटनेस स्टार्टअप ApClub ने जुटाए ₹2 करोड़,

ApClub

बेंगलुरु स्थित फिटनेस स्टार्टअप ApClub ने अपने पहले प्री-सीड फंडिंग राउंड में ₹2 करोड़ जुटाए हैं। इस फंडिंग का नेतृत्व Curefit Healthcare ने किया, जबकि PedalStart और कुछ चुनिंदा एंजेल इन्वेस्टर्स ने भी इसमें भाग लिया।

इस फंडिंग से कंपनी अपने ऑपरेशंस को स्केल करने, टीम का विस्तार करने और डोरस्टेप फिटनेस सर्विसेज में विविधता लाने की योजना बना रही है।


🏋️‍♀️ घर बैठे फिटनेस: ApClub का नया नजरिया

ApClub एक ऐसा स्टार्टअप है जो लोगों को उनके घर या अपार्टमेंट परिसर के भीतर ही फिटनेस और वेलनेस की सुविधाएं देता है। इसमें शामिल हैं:

  • स्ट्रेंथ ट्रेनिंग
  • योगा
  • वेट लॉस प्रोग्राम
  • पिलेट्स
  • और अन्य पर्सनल वेलनेस सेवाएं

अक्टूबर 2023 में स्थापित इस स्टार्टअप का उद्देश्य है कि लोग बिना कहीं गए ही फिट रह सकें और उनके जीवन में वेलनेस एक आसान विकल्प बन जाए।


🏘️ अभी कहां-कहां काम कर रहा है ApClub?

ApClub फिलहाल बेंगलुरु के 40 से अधिक अपार्टमेंट कम्युनिटीज़ में अपनी सेवाएं दे रहा है और अब तक करीब 500 ग्राहकों को फिटनेस सेवाएं प्रदान कर चुका है।

यह पूरी तरह से वेब-प्लेटफॉर्म आधारित मॉडल पर काम करता है, और कंपनी 2025 के दूसरे हिस्से में अपना मोबाइल ऐप लॉन्च करने की योजना बना रही है, जिससे बुकिंग और एक्सेस और भी आसान हो जाएगा।


📈 फंड का उपयोग कहां किया जाएगा?

ApClub ने बताया है कि इस फंडिंग से वे निम्नलिखित कार्यों पर फोकस करेंगे:

  1. ऑपरेशन्स को स्केल करना – और ज़्यादा अपार्टमेंट कम्युनिटीज़ और ग्राहकों तक पहुंच बनाना।
  2. टीम का विस्तार – फिटनेस कोच, योगा ट्रेनर, स्पोर्ट्स एक्सपर्ट्स आदि की भर्ती।
  3. नई सर्विसेज का विस्तार – अब यह कंपनी ग्रुप क्लासेस और बच्चों और बड़ों के लिए स्पोर्ट्स कोचिंग जैसी वेलनेस फॉर्मेट्स भी शुरू करेगी।
  4. लॉन्ग-टर्म प्रोजेक्ट्स – जैसे अपार्टमेंट क्लबहाउस और जिम्स को मैनेज करना।

📊 कंपनी का लक्ष्य और ग्रोथ प्लान

ApClub का टारगेट है कि वह:

  • 2026 तक $1 मिलियन का वार्षिक रेवेन्यू (ARR) हासिल करे।
  • बेंगलुरु से बाहर अन्य मेट्रो और टियर-1 शहरों में अपने कदम बढ़ाए।

कंपनी उन यूज़र्स को टारगेट कर रही है जो शहरों में रहते हैं और फिटनेस के लिए समय निकालना उनके लिए मुश्किल होता है।


🧘‍♀️ वेलनेस इंडस्ट्री में बढ़ती मांग

शहरों में आज की लाइफस्टाइल इतनी तेज़ है कि लोग जिम जाने या क्लास अटेंड करने के लिए समय नहीं निकाल पाते। ऐसे में ApClub जैसा मॉडल जो कस्टमाइज्ड, ऑन-डोर और पर्सनलाइज्ड फिटनेस पर केंद्रित हो, तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

कंपनी का फोकस सिर्फ फिटनेस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों को एक संपूर्ण वेलनेस अनुभव देना चाहती है जिसमें मानसिक, शारीरिक और सामाजिक स्वास्थ्य को बढ़ावा दिया जा सके।


🔍 मार्केट में किससे है मुकाबला?

ApClub का मुकाबला बेंगलुरु और अन्य मेट्रो शहरों में मौजूद Urban Company, Curefit, और लोकल फिटनेस सॉल्यूशन्स से है। लेकिन ApClub की खासियत है:

  • 100% ऑन-लोकेशन सर्विस
  • हाउसिंग सोसाइटी फोकस
  • पर्सनल ट्रेनर्स और कोचिंग
  • फैमिली-ओरिएंटेड मॉडल (बच्चों के लिए कोचिंग)

🏡 नया ट्रेंड: अपार्टमेंट में फिटनेस इकोसिस्टम

ApClub की लॉन्ग टर्म योजना में वह हाउसिंग सोसाइटी के क्लबहाउस और जिम्स को मैनेज करने की योजना पर काम कर रही है। यह एक बड़ा ट्रेंड बनता जा रहा है जहां डेवलपर्स अपने प्रोजेक्ट्स में फिटनेस और वेलनेस को इंटीग्रेट कर रहे हैं।

ApClub इसे प्रोफेशनल तरीके से मैनेज कर डेवलपर्स और सोसाइटीज को एक पूरी फिटनेस सॉल्यूशन देना चाहता है।


🔚 निष्कर्ष

ApClub जैसे स्टार्टअप यह दिखा रहे हैं कि अब फिटनेस सिर्फ जिम या ऐप्स तक सीमित नहीं रही। लोग चाहते हैं कि फिटनेस उनके दरवाज़े पर आए, और वह भी कस्टमाइज़्ड और क्वालिटी सर्विस के साथ।

इस ₹2 करोड़ की फंडिंग के साथ ApClub एक नया अध्याय शुरू कर रहा है जहां वह अपनी सर्विसेज को और बेहतर बना कर, अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ेगा।


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