💪 फिटनेस स्टार्टअप ApClub ने जुटाए ₹2 करोड़,

ApClub

बेंगलुरु स्थित फिटनेस स्टार्टअप ApClub ने अपने पहले प्री-सीड फंडिंग राउंड में ₹2 करोड़ जुटाए हैं। इस फंडिंग का नेतृत्व Curefit Healthcare ने किया, जबकि PedalStart और कुछ चुनिंदा एंजेल इन्वेस्टर्स ने भी इसमें भाग लिया।

इस फंडिंग से कंपनी अपने ऑपरेशंस को स्केल करने, टीम का विस्तार करने और डोरस्टेप फिटनेस सर्विसेज में विविधता लाने की योजना बना रही है।


🏋️‍♀️ घर बैठे फिटनेस: ApClub का नया नजरिया

ApClub एक ऐसा स्टार्टअप है जो लोगों को उनके घर या अपार्टमेंट परिसर के भीतर ही फिटनेस और वेलनेस की सुविधाएं देता है। इसमें शामिल हैं:

  • स्ट्रेंथ ट्रेनिंग
  • योगा
  • वेट लॉस प्रोग्राम
  • पिलेट्स
  • और अन्य पर्सनल वेलनेस सेवाएं

अक्टूबर 2023 में स्थापित इस स्टार्टअप का उद्देश्य है कि लोग बिना कहीं गए ही फिट रह सकें और उनके जीवन में वेलनेस एक आसान विकल्प बन जाए।


🏘️ अभी कहां-कहां काम कर रहा है ApClub?

ApClub फिलहाल बेंगलुरु के 40 से अधिक अपार्टमेंट कम्युनिटीज़ में अपनी सेवाएं दे रहा है और अब तक करीब 500 ग्राहकों को फिटनेस सेवाएं प्रदान कर चुका है।

यह पूरी तरह से वेब-प्लेटफॉर्म आधारित मॉडल पर काम करता है, और कंपनी 2025 के दूसरे हिस्से में अपना मोबाइल ऐप लॉन्च करने की योजना बना रही है, जिससे बुकिंग और एक्सेस और भी आसान हो जाएगा।


📈 फंड का उपयोग कहां किया जाएगा?

ApClub ने बताया है कि इस फंडिंग से वे निम्नलिखित कार्यों पर फोकस करेंगे:

  1. ऑपरेशन्स को स्केल करना – और ज़्यादा अपार्टमेंट कम्युनिटीज़ और ग्राहकों तक पहुंच बनाना।
  2. टीम का विस्तार – फिटनेस कोच, योगा ट्रेनर, स्पोर्ट्स एक्सपर्ट्स आदि की भर्ती।
  3. नई सर्विसेज का विस्तार – अब यह कंपनी ग्रुप क्लासेस और बच्चों और बड़ों के लिए स्पोर्ट्स कोचिंग जैसी वेलनेस फॉर्मेट्स भी शुरू करेगी।
  4. लॉन्ग-टर्म प्रोजेक्ट्स – जैसे अपार्टमेंट क्लबहाउस और जिम्स को मैनेज करना।

📊 कंपनी का लक्ष्य और ग्रोथ प्लान

ApClub का टारगेट है कि वह:

  • 2026 तक $1 मिलियन का वार्षिक रेवेन्यू (ARR) हासिल करे।
  • बेंगलुरु से बाहर अन्य मेट्रो और टियर-1 शहरों में अपने कदम बढ़ाए।

कंपनी उन यूज़र्स को टारगेट कर रही है जो शहरों में रहते हैं और फिटनेस के लिए समय निकालना उनके लिए मुश्किल होता है।


🧘‍♀️ वेलनेस इंडस्ट्री में बढ़ती मांग

शहरों में आज की लाइफस्टाइल इतनी तेज़ है कि लोग जिम जाने या क्लास अटेंड करने के लिए समय नहीं निकाल पाते। ऐसे में ApClub जैसा मॉडल जो कस्टमाइज्ड, ऑन-डोर और पर्सनलाइज्ड फिटनेस पर केंद्रित हो, तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

कंपनी का फोकस सिर्फ फिटनेस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों को एक संपूर्ण वेलनेस अनुभव देना चाहती है जिसमें मानसिक, शारीरिक और सामाजिक स्वास्थ्य को बढ़ावा दिया जा सके।


🔍 मार्केट में किससे है मुकाबला?

ApClub का मुकाबला बेंगलुरु और अन्य मेट्रो शहरों में मौजूद Urban Company, Curefit, और लोकल फिटनेस सॉल्यूशन्स से है। लेकिन ApClub की खासियत है:

  • 100% ऑन-लोकेशन सर्विस
  • हाउसिंग सोसाइटी फोकस
  • पर्सनल ट्रेनर्स और कोचिंग
  • फैमिली-ओरिएंटेड मॉडल (बच्चों के लिए कोचिंग)

🏡 नया ट्रेंड: अपार्टमेंट में फिटनेस इकोसिस्टम

ApClub की लॉन्ग टर्म योजना में वह हाउसिंग सोसाइटी के क्लबहाउस और जिम्स को मैनेज करने की योजना पर काम कर रही है। यह एक बड़ा ट्रेंड बनता जा रहा है जहां डेवलपर्स अपने प्रोजेक्ट्स में फिटनेस और वेलनेस को इंटीग्रेट कर रहे हैं।

ApClub इसे प्रोफेशनल तरीके से मैनेज कर डेवलपर्स और सोसाइटीज को एक पूरी फिटनेस सॉल्यूशन देना चाहता है।


🔚 निष्कर्ष

ApClub जैसे स्टार्टअप यह दिखा रहे हैं कि अब फिटनेस सिर्फ जिम या ऐप्स तक सीमित नहीं रही। लोग चाहते हैं कि फिटनेस उनके दरवाज़े पर आए, और वह भी कस्टमाइज़्ड और क्वालिटी सर्विस के साथ।

इस ₹2 करोड़ की फंडिंग के साथ ApClub एक नया अध्याय शुरू कर रहा है जहां वह अपनी सर्विसेज को और बेहतर बना कर, अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ेगा।


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Read more : IPO की तैयारी में Milky Mist 2,035 करोड़ रुपये जुटाने की योजना,

🥛 IPO की तैयारी में Milky Mist 2,035 करोड़ रुपये जुटाने की योजना,

Milky Mist

दक्षिण भारत की प्रमुख डेयरी कंपनी Milky Mist Dairy ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास अपना Draft Red Herring Prospectus (DRHP) दाखिल कर दिया है। कंपनी का लक्ष्य है कि वह 2,035 करोड़ रुपये तक का फंड Initial Public Offering (IPO) के जरिए जुटा सके।

इस फंडिंग में से 1,785 करोड़ रुपये का हिस्सा फ्रेश इश्यू होगा और बाकी के 250 करोड़ रुपये का हिस्सा Offer for Sale (OFS) के तहत प्रमोटर्स द्वारा बेचे जाएंगे।


👨‍👩‍👦 प्रमोटर्स बेचेंगे हिस्सेदारी

Milky Mist के DRHP के अनुसार:

  • प्रमोटर सतीशकुमार टी (T. Sathishkumar) लगभग 150 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी बेचेंगे।
  • वहीं, अनिता एस (Anitha S) 100 करोड़ रुपये के शेयर OFS में बेचेंगी।

अनिता एस वर्तमान में कंपनी की सबसे बड़ी शेयरधारक हैं जिनके पास 51.45% हिस्सेदारी है। सतीशकुमार टी के पास 40.94% हिस्सेदारी है। इसके अलावा Aquarius Family Private Trust और Taurus Family Private Trust के पास कंपनी में 2.5% हिस्सेदारी है।


🏦 बुक रनिंग लीड मैनेजर्स

इस IPO को हैंडल करने वाले प्रमुख मर्चेंट बैंकर्स हैं:

  • JM Financial
  • Axis Capital
  • IIFL Securities

🧀 Milky Mist: एक ब्रांड, जिसने दक्षिण भारत में जमाई पकड़

Milky Mist की स्थापना 1997 में हुई थी। यह कंपनी आज दक्षिण भारत में Paneer, Cheese, Curd, Yogurt, Ghee जैसे डेयरी उत्पादों की सबसे भरोसेमंद कंपनियों में गिनी जाती है।

  • कंपनी की प्रोसेसिंग क्षमता: प्रतिदिन 12.5 लाख लीटर दूध
  • सालाना 26,280 मीट्रिक टन पनीर का उत्पादन करती है।
  • 67,000 से अधिक किसानों से सीधे दूध की खरीद करती है।

💰 IPO से जुटाए गए फंड का इस्तेमाल कहां होगा?

DRHP के अनुसार, IPO से प्राप्त फंड का उपयोग निम्नलिखित कार्यों में किया जाएगा:

  1. 750 करोड़ रुपये: पुराने कर्ज को चुकाने या प्रीपेमेंट के लिए।
  2. 414 करोड़ रुपये: तमिलनाडु के Perundurai में कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का विस्तार और अपग्रेडेशन।
  3. 129 करोड़ रुपये: फ्रीज़र और कूलर जैसे रेफ्रिजरेशन इक्विपमेंट खरीदने में।
  4. शेष राशि: सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों में।

📊 वित्तीय प्रदर्शन: FY23 से FY25 तक जबरदस्त ग्रोथ

Milky Mist ने पिछले कुछ वर्षों में जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की है:

वित्तीय वर्षराजस्व (Revenue)शुद्ध लाभ (Net Profit)
FY23₹1,394 करोड़₹19.4 करोड़
FY24₹1,822 करोड़
FY25₹2,349 करोड़₹46 करोड़

62% राजस्व पनीर, दही और चीज़ जैसे मुख्य उत्पादों से आता है, और 71% बिक्री दक्षिण भारत से होती है।


🧊 टेक्नोलॉजी और रिटेल नेटवर्क पर फोकस

Milky Mist तेजी से अपने कोल्ड चेन नेटवर्क और रिटेल चैनल्स को मजबूत कर रही है। कंपनी अपने उत्पादों को FMCG मॉडल के तहत, छोटे-छोटे कस्बों और शहरी इलाकों में वितरित करती है।

इसके लिए कंपनी ने बड़े पैमाने पर फ्रीज़र इक्विपमेंट, लॉजिस्टिक्स सिस्टम और डिजिटल इन्वेंटरी ट्रैकिंग तकनीकों में निवेश किया है।


🇮🇳 डेयरी इंडस्ट्री में IPO की नई लहर?

Milky Mist का IPO भारतीय डेयरी इंडस्ट्री में एक महत्वपूर्ण माइलस्टोन माना जा रहा है। यह संकेत है कि डेयरी सेक्टर अब FMCG ग्रोथ की तर्ज पर आगे बढ़ रहा है, जहां ब्रांडिंग, सप्लाई चेन और टेक्नोलॉजी का बड़ा रोल है।


🔚 निष्कर्ष

Milky Mist का यह IPO न केवल कंपनी के लिए एक मील का पत्थर होगा बल्कि निवेशकों के लिए भी एक बड़ा अवसर हो सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो डेयरी और कंज्यूमर ब्रांड्स में लंबी अवधि के रिटर्न की तलाश कर रहे हैं।

जैसे-जैसे कंपनी का विस्तार होता जा रहा है और उसकी ब्रांड वैल्यू मजबूत हो रही है, वैसा ही विश्वास मार्केट में भी दिख रहा है। अब देखना यह है कि IPO लॉन्च के बाद निवेशकों की प्रतिक्रिया कैसी रहती है और कंपनी किस तेजी से ऑल इंडिया लेवल पर विस्तार कर पाती है।


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Read more : Zomato बनी Eternal Ltd Zomato बनी Eternal Ltd

📈 Zomato बनी Eternal Ltd

Eternal

🧾 परिचय: Eternal Ltd (पूर्व में Zomato) का पहला तिमाही नतीजा FY26 में शानदार रहा

Eternal Ltd, जो पहले Zomato के नाम से जानी जाती थी, ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (Q1 FY26) में 7,167 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड रेवेन्यू दर्ज की है, जो पिछले साल की समान अवधि से 70% अधिक है। हालांकि, कंपनी की मूल फूड डिलीवरी सेवा की ग्रोथ अब सीमित होती दिख रही है, और नए वर्टिकल्स जैसे Blinkit और Hyperpure अब कंपनी की ग्रोथ का मुख्य स्रोत बन गए हैं।


🍔 फूड डिलीवरी: ग्रोथ की स्पीड हो रही धीमी

Zomato की पहचान बनी फूड डिलीवरी सर्विस अब धीरे-धीरे मैच्योर हो रही है। इस सेगमेंट से रेवेन्यू में केवल 16% की सालाना वृद्धि हुई है, जो Q1 FY26 में 2,261 करोड़ रुपये रही। वहीं Net Order Value (NOV) में 13% की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले क्वार्टर (14%) से थोड़ा कम है।

Eternal के CEO दीपिंदर गोयल ने भी इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, “20%+ ग्रोथ अब संभव नहीं दिख रही,” जिससे ये संकेत मिलता है कि कोविड के बाद आई तेजी अब धीमी हो रही है।


⚡ Blinkit: अब फास्टेस्ट ग्रोथ ड्राइवर

Quick commerce वर्टिकल Blinkit ने इस तिमाही में पहली बार फूड डिलीवरी को पीछे छोड़ दिया। Blinkit की Net Order Value में 127% और रेवेन्यू में 154% की जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की गई, जो अब ₹2,400 करोड़ पहुंच गई है। Blinkit के पास अब कुल 1,544 डार्क स्टोर्स हैं, जिनमें से 243 Q1 में ही जोड़े गए हैं। कंपनी का लक्ष्य दिसंबर तक 2,000 स्टोर्स तक पहुंचने का है।


🏙️ मेट्रो से टियर-2 शहरों तक: Blinkit की पकड़ मज़बूत

Blinkit अब केवल मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं है। छोटे शहरों में भी यह तेजी से पैर जमा रहा है। Blinkit के CEO अलबिंदर धिन्डसा के अनुसार, “अब कई शहरों में प्रॉफिटबिलिटी हासिल हो चुकी है। लॉन्ग टर्म में 5–6% मार्जिन का स्पष्ट रोडमैप है।”


🍱 10 मिनट में खाना: Bistro के ज़रिए नया प्रयोग

Eternal अब अपने “10 मिनट में डिलीवरी” वादे को खाना पहुंचाने तक भी बढ़ा रहा है। इसके तहत कंपनी ने Bistro नाम की नई सर्विस शुरू की है, जो दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु में 38 क्लाउड किचन से ऑपरेट करती है। इसका मकसद कम कीमत में क्विक मील्स और स्नैक्स मुहैया कराना है—जो पारंपरिक फूड डिलीवरी में अभी तक पूरी तरह एड्रेस नहीं हुए हैं।


🏭 Hyperpure: B2B सेगमेंट में जबरदस्त उछाल

Eternal का B2B सप्लाई वर्टिकल Hyperpure ने भी तगड़ी ग्रोथ दिखाई है। इस सेगमेंट का रेवेन्यू 89% YoY बढ़कर नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है। हालांकि Blinkit के इन्वेंटरी मॉडल में जाने से Hyperpure को नॉन-रेस्टोरेंट क्लाइंट्स से रेवेन्यू में थोड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।


👨‍💼 नेतृत्व में बदलाव: Tech को प्राथमिकता

Eternal ने अपनी लीडरशिप स्ट्रक्चर में बदलाव करते हुए प्रोडक्ट लीडर आदित्य मंगला को फूड डिलीवरी CEO नियुक्त किया है। दीपिंदर गोयल के अनुसार, यह “रोटेशनल लीडरशिप” मॉडल का हिस्सा है, जिससे निर्णय-निर्माण ताज़ा बना रहे और टॉप मैनेजमेंट में स्टैग्नेशन न हो।

उनका कहना है: “हम ऐसे बिज़नेस बनाना चाहते हैं जो व्यक्तियों से नहीं, सिद्धांतों से संचालित हों।”


📊 ग्रोथ और चुनौतियां: निवेशकों की परीक्षा

जहां Eternal का फोकस अब फूड डिलीवरी से हटकर ग्रोसरी और क्विक सर्विस में शिफ्ट हो रहा है, वहीं निवेशकों के लिए ये समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कंपनी का वैल्यूएशन आज भी बहुत ऊंचा है, लेकिन अगर आने वाले समय में डिलीवरी या ग्रोसरी बिज़नेस से स्थिर प्रॉफिट नहीं आता या कोई नया वर्टिकल ब्रेकआउट नहीं करता, तो धैर्य की परीक्षा हो सकती है।


🔮 निष्कर्ष: Eternal अब सिर्फ खाने तक सीमित नहीं

Zomato से Eternal बनने की इस यात्रा में कंपनी ने अपने बिजनेस मॉडल को पूरी तरह री-इन्वेंट किया है। Blinkit, Hyperpure और Bistro जैसे इनिशिएटिव्स इस बात का संकेत हैं कि कंपनी अब वहां ग्रोथ खोज रही है जहां यूज़र्स की मांग सबसे तेज़ है।

हालांकि Food Delivery की चमक अब पहले जैसी नहीं रही, लेकिन Eternal की रणनीति साफ है—अगली ग्रोथ स्टोरी Blinkit और अन्य नए इनोवेशन से ही लिखी जाएगी।


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Read more : Sports-Tech स्टार्टअप Hudle ने जुटाए $2.5 मिलियन,

🏏 Sports-Tech स्टार्टअप Hudle ने जुटाए $2.5 मिलियन,

Hudle

स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी की दुनिया में तेजी से उभर रही कंपनी Hudle ने अपनी सीरीज A फंडिंग राउंड में $2.5 मिलियन (लगभग ₹21 करोड़) जुटाए हैं। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Sky Impact Capital ने किया, जबकि Physis Capital, Atrium Venture और कई प्रमुख एंजेल इन्वेस्टर्स जैसे महेश भूपति, गौरव कपूर, और Blue Tokai व Nitro Commerce के फाउंडर्स ने भी इसमें भाग लिया।


💰 पिछली फंडिंग भी रही थी दमदार

इससे पहले अप्रैल 2023 में Hudle ने ₹7 करोड़ की प्री-सीरीज A फंडिंग जुटाई थी, जिसका नेतृत्व Inflection Point Ventures ने किया था।

अब इस ताज़ा निवेश के साथ, कंपनी अपने विस्तार और इनोवेशन को और तेज़ी से आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।


🎯 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

Hudle इस नई फंडिंग का उपयोग तीन मुख्य क्षेत्रों में करेगा:

  1. 🏟️ वेन्‍यू नेटवर्क का विस्तार – देशभर में और ज्यादा खेल केंद्र जोड़ने के लिए
  2. 📲 प्रोडक्ट फीचर्स को बेहतर बनाना – यूजर अनुभव को और भी इंटरैक्टिव और उपयोगी बनाना
  3. 📊 नया रेटिंग सिस्टम ‘GRIP’ लॉन्च करना – जिससे खेलों में भागीदारी और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा

🏸 Hudle क्या है?

Hudle एक स्पोर्ट्स टेक प्लेटफॉर्म है, जो भारत के खिलाड़ियों को 2,000 से अधिक स्पोर्ट्स वेन्यू से जोड़ता है।
यह 60 से ज़्यादा भारतीय शहरों में सक्रिय है और खासकर रिक्रिएशनल स्पोर्ट्स जैसे:

  • 🏸 बैडमिंटन
  • 🏓 पिकलबॉल
  • 🥎 पैडल

जैसे उभरते खेलों में रीयल-टाइम बुकिंग और खेलों में भागीदारी की सुविधा देता है।


📈 आंकड़े जो प्रभाव दिखाते हैं

  • 📍 60+ शहरों में उपस्थिति
  • 🏟️ 2,000+ वेन्‍यू नेटवर्क
  • 🎮 हर महीने 1.5 लाख से अधिक गेम्स
  • 🎯 लक्ष्य: इस वित्तीय वर्ष के अंत तक 3 मिलियन गेम्स पार करना
  • 💹 2.5 गुना रेवेन्यू ग्रोथ और 3.5 गुना ग्रॉस ट्रांजैक्शन वैल्यू ग्रोथ पिछले एक साल में

👥 संस्थापक कौन हैं?

Hudle की स्थापना Suhail Narain, Arjun Singh Verma और Sonam Taneja ने मिलकर की थी।
इनका उद्देश्य था – भारत में खेलों को सभी के लिए सुलभ बनाना, चाहे वो शुरुआती खिलाड़ी हो या गंभीर रिक्रिएशनल स्पोर्ट्स लवर।


⚙️ टेक्नोलॉजी-ड्रिवन अनुभव

Hudle का तकनीकी ढांचा उपयोगकर्ताओं को:

  • 📍 आस-पास के वेन्यू खोजने
  • 📊 परफॉर्मेंस ट्रैक करने
  • 🤝 मैचिंग पार्टनर खोजने

जैसी सुविधाएं देता है। इससे खेलों में नियमित भागीदारी और स्किल ट्रैकिंग बेहद आसान हो जाती है।


🚀 क्या है GRIP (Game Rating Index for Players)?

Hudle अगस्त 2025 में अपना नया इनोवेशन GRIP लॉन्च करेगा, जो एक प्रकार का स्कोरिंग और रैंकिंग सिस्टम है खासकर रिक्रिएशनल स्पोर्ट्स के लिए।

इसकी शुरुआत इन खेलों से होगी:

  • 🏸 बैडमिंटन
  • 🏓 पिकलबॉल
  • 🥎 पैडल

GRIP खिलाड़ियों को उनके स्किल लेवल के अनुसार स्कोर और रैंकिंग देगा, जिससे वे न सिर्फ अपनी प्रगति देख सकेंगे, बल्कि उचित प्रतिद्वंद्वियों के साथ मैच भी खेल सकेंगे। इससे खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा और जुनून दोनों बढ़ेंगे।


🏆 खेलों को अपनाने की नई सोच

Hudle का मानना है कि भारत में खेल केवल प्रोफेशनल स्तर पर ही नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए भी एक नियमित एक्टिविटी बन सकता है।

जैसे-जैसे लोग फिटनेस के लिए विकल्प खोजते हैं, वैसे-वैसे बैडमिंटन, पिकलबॉल और पैडल जैसे खेल तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। Hudle इसी सेगमेंट को डिजिटल और डेटा-संचालित अनुभव के साथ सशक्त बना रहा है।


🤝 निवेशकों का बढ़ता भरोसा

इस ताज़ा फंडिंग से ये साफ हो गया है कि निवेशकों को Hudle के विज़न और बाजार में इसके स्केलेबिलिटी पर पूरा भरोसा है।
खास बात यह है कि महेश भूपति जैसे अनुभवी टेनिस खिलाड़ी और गौरव कपूर जैसे मीडिया चेहरों ने इसमें निवेश कर स्पोर्ट्स-टेक के भविष्य पर विश्वास जताया है।


📌 निष्कर्ष

  • ✅ Hudle ने $2.5 मिलियन की Series A फंडिंग Sky Impact Capital और अन्य निवेशकों से जुटाई
  • ✅ इस फंड का इस्तेमाल वेन्यू विस्तार, प्रोडक्ट अपग्रेड और GRIP सिस्टम लॉन्च में होगा
  • ✅ प्लेटफॉर्म हर महीने 1.5 लाख से ज्यादा गेम्स को मैनेज करता है
  • ✅ अगस्त 2025 में GRIP लॉन्च कर रिक्रिएशनल स्पोर्ट्स को एक नई दिशा दी जाएगी
  • ✅ Hudle का उद्देश्य भारत में आम लोगों के लिए भी खेलों को तकनीक के साथ सहज और प्रतिस्पर्धी बनाना है

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Read more : एजुकेशन फाइनेंसिंग स्टार्टअप EduFund ने जुटाए ₹50 करोड़,

📚 एजुकेशन फाइनेंसिंग स्टार्टअप EduFund ने जुटाए ₹50 करोड़,

EduFund

भारत की एजुकेशन फाइनेंसिंग और प्लानिंग स्पेस में तेजी से उभर रही स्टार्टअप EduFund ने ₹50 करोड़ ($6 मिलियन) की सीरीज A फंडिंग जुटाई है। इस राउंड का नेतृत्व Cercano Management और MassMutual Ventures ने किया। इसके साथ ही कंपनी की कुल फंडिंग अब $12 मिलियन (लगभग ₹100 करोड़) हो चुकी है।


🎯 किस काम में लगेगा फंड?

EduFund ने फंडिंग का उपयोग तीन मुख्य क्षेत्रों में करने की योजना बनाई है:

  • 🤖 AI-पावर्ड पर्सनलाइज्ड प्लानिंग इंजन लॉन्च करना
  • 🎓 अंडरग्रैजुएट स्टूडेंट्स के लिए लोन एक्सेस को बढ़ाना
  • 🏘️ टियर-II और टियर-III शहरों में अपनी पहुंच मजबूत करना, जहां शिक्षा की लागत तेजी से बढ़ रही है जबकि आय धीमी है।

🧠 EduFund क्या करता है?

2020 में शुरू हुआ EduFund एक फुल-स्टैक एजुकेशन प्लानिंग और फाइनेंसिंग प्लेटफॉर्म है। यह भारतीय परिवारों को देश और विदेश में पढ़ाई के लिए एक पूरी योजना प्रदान करता है जिसमें शामिल हैं:

  • 📈 एजुकेशन इन्वेस्टमेंट प्लान्स
  • 💰 एजुकेशन लोन
  • ✈️ वीज़ा और फॉरेक्स सेवाएं
  • 🎓 ऑन-डिमांड एक्सपर्ट काउंसलिंग

यह प्लेटफॉर्म भारत के 250,000 से अधिक परिवारों को सपोर्ट करता है और 40 से ज़्यादा एसेट मैनेजमेंट कंपनियों और 15 से अधिक लेंडिंग पार्टनर्स (जैसे बैंक, NBFCs और अंतरराष्ट्रीय कर्जदाता) के साथ जुड़ा हुआ है।


🤝 किन-किन ब्रांड्स के साथ साझेदारी?

EduFund की रणनीति में B2B और B2C दोनों तरह की साझेदारियां शामिल हैं। कुछ प्रमुख सहयोगी ब्रांड्स हैं:

  • 🧸 Hamleys – बच्चों के उत्पादों का प्रीमियम ब्रांड
  • 🏫 Prisms – स्कूल ERP सॉल्यूशन
  • 📦 DTDC – एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स सर्विस प्रोवाइडर

इन साझेदारियों के जरिए EduFund शिक्षा प्लानिंग को रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जोड़कर एक 360-डिग्री समाधान पेश करता है।


🏙️ टियर-2 और टियर-3 शहरों पर ध्यान क्यों?

भारत में छोटे और मझोले शहरों में:

  • 📚 शिक्षा की मांग तेजी से बढ़ रही है
  • 🏫 कॉलेज और प्राइवेट इंस्टीट्यूट्स की फीस बढ़ रही है
  • 💵 लेकिन आमदनी इतनी तेज़ी से नहीं बढ़ रही

EduFund का उद्देश्य ऐसे परिवारों तक पहुंचना है, जो अपने बच्चों की हायर एजुकेशन के लिए सपने तो देखते हैं, लेकिन उन्हें वित्तीय योजना की आवश्यकता है। कंपनी का मानना है कि यहां सबसे ज्यादा प्रभाव डाला जा सकता है।


📊 एजुकेशन फाइनेंसिंग मार्केट में तेजी

Entrackr की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 से अब तक एजटेक स्टार्टअप्स ने $1.2 बिलियन (लगभग ₹10,000 करोड़) से ज्यादा की फंडिंग जुटाई है।

👉 इसमें 35% यानी $424 मिलियन से ज्यादा सिर्फ उन स्टार्टअप्स में गए हैं, जो एजुकेशन लोन से जुड़े हुए हैं।

यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारत में एजुकेशन फाइनेंसिंग अब एक बड़ा और तेजी से बढ़ता हुआ सेगमेंट बनता जा रहा है।


🧑‍💼 क्या कहते हैं संस्थापक?

EduFund की टीम का मानना है कि भारत के माता-पिता को समय पर और सही तरीके से वित्तीय प्लानिंग करने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि उनके बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन मिल सके – चाहे वह देश में हो या विदेश में।

AI-पावर्ड पर्सनलाइज्ड इंजन इसी दिशा में एक कदम है, जो हर परिवार की जरूरतों के हिसाब से प्लान तैयार करेगा।


🛠️ फुल-स्टैक प्लेटफॉर्म कैसे मदद करता है?

EduFund का प्लेटफॉर्म कुछ प्रमुख सेवाएं एक ही छत के नीचे प्रदान करता है:

सेवाविवरण
📊 इन्वेस्टमेंट प्लानिंगSIP, म्युचुअल फंड आदि के ज़रिए भविष्य की शिक्षा की बचत
💵 एजुकेशन लोनविभिन्न पब्लिक-प्राइवेट बैंकों और NBFCs से
🛂 वीजा सेवाएंविदेश में पढ़ाई के लिए
🔄 फॉरेक्ससस्ता और तेज़ विदेशी मुद्रा एक्सचेंज
🧑‍🏫 काउंसलिंगविशेषज्ञों से शिक्षा और करियर संबंधी सलाह

🌏 भविष्य की योजना

EduFund न सिर्फ भारत में, बल्कि एशिया और अफ्रीका जैसे अन्य उभरते बाजारों में भी अपनी सेवाएं विस्तार देने की योजना बना रहा है।

इसका उद्देश्य है –
📌 एजुकेशन फाइनेंसिंग को अधिक सुलभ, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाना।


📌 निष्कर्ष

  • EduFund ने ₹50 करोड़ की फंडिंग Cercano और MassMutual से जुटाई
  • AI इंजन, स्टूडेंट लोन और छोटे शहरों पर फोकस रहेगा
  • 250,000+ फैमिली, 40+ फंड पार्टनर, 15+ लेंडर्स के साथ नेटवर्क
  • एजुकेशन लोन से जुड़े स्टार्टअप्स को तेजी से मिल रही फंडिंग
  • EduFund भविष्य में एजुकेशन प्लानिंग का भरोसेमंद नाम बनना चाहता है

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Read More : फैशन-टेक ब्रांड ANNY ने जुटाए ₹10 करोड़,

💃 फैशन-टेक ब्रांड ANNY ने जुटाए ₹10 करोड़,

ANNY

नई दिल्ली स्थित फैशन-टेक स्टार्टअप ANNY ने ₹10 करोड़ की प्री-सीरीज़ A फंडिंग जुटाई है। यह निवेश राउंड प्रमुख रूप से Atomic Capital के नेतृत्व में हुआ। कंपनी इस फंडिंग का उपयोग प्रोडक्ट कैटेगरी को विस्तार देने, टेक्नोलॉजी इनोवेशन, प्रमुख नेतृत्व की भर्ती, और डिस्ट्रीब्यूशन चैनल को मजबूत करने में करेगी।


🛍️ क्या है ANNY?

ANNY, जिसे 2023 में Japjot Singh, Aveen Kaur और Rahul Tanwar ने मिलकर शुरू किया था, एक multi-category accessible luxury fashion brand है। इसका उद्देश्य है कि वह भारतीय महिलाओं के फैशन अनुभव को पूरी तरह से बदल दे।

यह ब्रांड inventory-light और real-time मॉडल पर आधारित है, यानी कम स्टॉक में काम करके ट्रेंड के अनुसार तेजी से प्रोडक्ट लॉन्च करता है। इसके ज़रिए उच्च गुणवत्ता वाला, ग्लोबल ट्रेंड से प्रेरित फैशन सस्ती कीमतों पर उपलब्ध कराया जाता है।


🚀 कहां होगी फंडिंग का उपयोग?

ANNY ने अपने प्रेस रिलीज़ में बताया कि यह फंडिंग निम्नलिखित पहलुओं पर खर्च की जाएगी:

  • 📦 नई प्रोडक्ट कैटेगरी में विस्तार
  • 💡 इनोवेशन और रिसर्च को बढ़ावा
  • 🧠 प्रोप्राइटरी टेक्नोलॉजी को और बेहतर बनाना
  • 👩‍💼 लीडरशिप टैलेंट की भर्ती
  • 🛒 डिस्ट्रीब्यूशन चैनल को मजबूत करना

इससे कंपनी का उद्देश्य है कि वह ग्राहकों को तेज, स्मार्ट और स्टाइलिश फैशन अनुभव प्रदान कर सके।


🧵 कंपनी की रणनीति और खासियत

ANNY एक vertically integrated supply chain पर काम करती है, जिससे हर चरण – डिज़ाइन से लेकर डिलीवरी तक – पर कंपनी का पूरा नियंत्रण होता है।

इसके साथ ही कंपनी का proprietary tech stack उसे रियल-टाइम ट्रेंड के अनुसार प्रोडक्ट डिज़ाइन और लॉन्च करने में सक्षम बनाता है। इससे स्टॉक का रिस्क कम होता है और ग्राहकों को हमेशा लेटेस्ट ट्रेंड के कपड़े मिलते हैं।

Japjot Singh, जो कि कंपनी के CEO और को-फाउंडर हैं, कहते हैं:

“हमारा vertically integrated मॉडल और real-time ट्रेंड रिस्पॉन्सिबिलिटी हमें कम इन्वेंटरी रिस्क और ज्यादा कंज़्यूमर डिलाइट देने में मदद करता है। Atomic Capital का समर्थन हमारे लिए सिर्फ स्केल बढ़ाने का जरिया नहीं है, बल्कि स्मार्ट स्केलिंग का रास्ता है। इस इन्वेस्टमेंट से हमें ₹100 करोड़ ARR ब्रांड बनने की दिशा में प्रेरणा मिल रही है।”


📊 8 गुना ग्रोथ और आगे का प्लान

ANNY ने दावा किया है कि कंपनी ने एक साल में 8X ग्रोथ हासिल की है। यह सफलता उनके:

  • ट्रेंड-बेस्ड डिज़ाइन,
  • कस्टमर इनसाइट्स,
  • और इंटीग्रेटेड सप्लाई मॉडल

की वजह से संभव हो पाई है।

अब कंपनी का उद्देश्य है कि वह नई कैटेगरीज़ में प्रवेश करे और भारतीय महिलाओं के फैशन शॉपिंग के तरीके को दोबारा परिभाषित करे।


👗 किस तरह का फैशन देती है ANNY?

ANNY मुख्य रूप से modern Indian women को ध्यान में रखते हुए ऐसे प्रोडक्ट्स डिज़ाइन करती है, जो:

  • ट्रेंडी हो
  • क्वालिटी में बेहतरीन हो
  • कीमत में किफायती हो
  • और हर मौके के लिए उपयुक्त हों

इन सबका उद्देश्य है कि महिलाएं आसान, स्टाइलिश और स्मार्ट फैशन को जी सकें।


🔮 ANNY का भविष्य

इस फंडिंग के साथ, ANNY ने अगले वर्ष तक ₹100 करोड़ के सालाना रेवेन्यू (ARR) तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है। यह महत्वाकांक्षा दर्शाती है कि ब्रांड न सिर्फ ग्रोथ पर ध्यान दे रहा है, बल्कि भारत के फैशन-टेक इकोसिस्टम में एक क्रांति लाने की तैयारी में भी है।


📌 निष्कर्ष

  • ANNY ने ₹10 करोड़ की फंडिंग जुटाई है, जिसका नेतृत्व Atomic Capital ने किया।
  • कंपनी टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, भर्ती और चैनल डेवेलपमेंट में निवेश करेगी।
  • एक साल में 8 गुना बढ़त और अब ₹100 करोड़ ARR का लक्ष्य रखा है।
  • ट्रेंड-बेस्ड, किफायती और हाई-क्वालिटी फैशन के जरिए भारतीय महिलाओं के फैशन अनुभव को नया रूप दे रही है।

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Read more : Eternal (Zomato) को FY26 की पहली तिमाही में हुआ 90% मुनाफे का गिरावट,

📉 Eternal (Zomato) को FY26 की पहली तिमाही में हुआ 90% मुनाफे का गिरावट,

Eternal

गुरुग्राम स्थित फूडटेक और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म Eternal (पहले Zomato) ने FY26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2025) के वित्तीय नतीजे जारी किए हैं। कंपनी ने जहां रेवेन्यू में 70% की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की है, वहीं मुनाफा 90% गिरकर केवल ₹25 करोड़ रह गया, जो Q1 FY25 में ₹253 करोड़ था।


📈 रेवेन्यू में बड़ा उछाल Eternal

Eternal के ऑपरेशनल रेवेन्यू में Q1 FY26 में 70% की बढ़त हुई है। यह बढ़कर ₹7,167 करोड़ हो गया है, जबकि Q1 FY25 में यह ₹4,206 करोड़ था। यदि कंपनी की अन्य आय को भी जोड़ दिया जाए तो कुल रेवेन्यू ₹7,521 करोड़ रहा।

Eternal के अलग-अलग बिजनेस यूनिट्स ने इस तरह योगदान दिया:

  • फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म (Zomato marketplace): ₹2,261 करोड़ (31% कुल रेवेन्यू का)
  • Hyperpure (B2B सप्लाई): ₹2,295 करोड़ (89% ग्रोथ)
  • Blinkit (Quick Commerce): ₹2,400 करोड़ (155% ग्रोथ)

इन आंकड़ों से साफ है कि Blinkit और Hyperpure अब कंपनी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।


💰 खर्चों में तेज़ी

रेवेन्यू भले ही बढ़ा हो, लेकिन खर्चों में भारी उछाल Eternal के मुनाफे पर भारी पड़ा। कंपनी का कुल खर्च Q1 FY26 में 77% बढ़कर ₹7,433 करोड़ हो गया, जो Q1 FY25 में ₹4,203 करोड़ था।

मुख्य खर्चों का ब्योरा:

  • डिलीवरी और उससे संबंधित खर्च: ₹1,869 करोड़ (25% कुल खर्च का हिस्सा)
  • कर्मचारी लाभ खर्च (Employee benefit cost): ₹830 करोड़ (57% की वृद्धि)
  • मार्केटिंग और विज्ञापन खर्च: ₹671 करोड़ (69% की वृद्धि)

खासतौर पर विज्ञापन और मार्केटिंग खर्च में आए 70% उछाल ने कंपनी के मुनाफे को तगड़ा झटका दिया है।


📉 मुनाफा गिरा 90%

हालांकि Eternal ने ₹7,521 करोड़ की आय की, लेकिन नेट प्रॉफिट मात्र ₹25 करोड़ रहा, जो पिछले साल की पहली तिमाही के ₹253 करोड़ से 90% कम है।

प्रति यूनिट खर्च के हिसाब से देखें तो कंपनी ने ₹1 कमाने के लिए ₹1.04 खर्च किए। यानी लागत की तुलना में रिटर्न घटा है, जो संकेत करता है कि कंपनी को अपनी लागत नियंत्रण रणनीतियों पर फिर से विचार करने की जरूरत है।


📊 शेयर मार्केट पर असर

21 जुलाई (सोमवार) को 15:37 बजे Eternal के शेयर ₹274 प्रति शेयर की दर से ट्रेड कर रहे थे। इससे कंपनी का कुल बाजार पूंजीकरण ₹2,64,564 करोड़ (लगभग $31.2 बिलियन) पहुंच गया।

इसका मतलब है कि भले ही मुनाफा गिरा हो, लेकिन मार्केट में Eternal की वैल्यू अभी भी मजबूत बनी हुई है।


🔍 क्या कहता है यह प्रदर्शन?

Eternal का रेवेन्यू ग्रोथ दर्शाता है कि कंपनी का बिजनेस मॉडल – खासकर Blinkit और Hyperpure – तेज़ी से पॉपुलर हो रहा है। हालांकि, मुनाफे में आई गिरावट यह स्पष्ट करती है कि बिजनेस का स्केल बढ़ाना ही काफी नहीं, बल्कि लागत नियंत्रण और ऑपरेशनल एफिशिएंसी भी जरूरी है।

Eternal की स्थिति फिलहाल दोराहे पर है: एक ओर से ग्रोथ शानदार है, वहीं दूसरी ओर मुनाफे की घटती रफ्तार चिंताजनक हो सकती है, खासकर इन्वेस्टर्स और शेयरहोल्डर्स के लिए।


🧾 निष्कर्ष

  • Eternal ने FY26 की Q1 में ₹7,521 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो 70% ग्रोथ है।
  • लेकिन मुनाफा ₹253 करोड़ से गिरकर ₹25 करोड़ रह गया – 90% की गिरावट।
  • Blinkit और Hyperpure के बढ़ते योगदान ने रेवेन्यू बढ़ाया लेकिन खर्च भी काफी बढ़ा।
  • कंपनी ₹1 कमाने के लिए ₹1.04 खर्च कर रही है – ये संकेत है कि लागत नियंत्रण की जरूरत है।

👉 आने वाली तिमाहियों में देखना दिलचस्प होगा कि क्या Eternal अपने ग्रोथ को मुनाफे में बदलने में सफल होती है, या फिर मार्केट विस्तार की यह आक्रामक रणनीति और भी नुकसान बढ़ाएगी।

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Read more : Plenome Technologies ने जुटाए ₹6.5 करोड़

🔗 Plenome Technologies ने जुटाए ₹6.5 करोड़

Plenome Technologies

IIT मद्रास द्वारा इनक्यूबेट की गई स्टार्टअप Plenome Technologies ने हाल ही में ₹6.5 करोड़ की सीड फंडिंग जुटाई है। इस निवेश दौर में भारतीय और विदेशी निवेशकों ने भाग लिया, जिसमें प्रमुख निवेशक Ovington Capital Partners (लक्समबर्ग), UAE आधारित AADI, और एंजेल निवेशक मनीष गांधी शामिल हैं।

इस फंडिंग का उपयोग Plenome की Blockchain-AI टेक्नोलॉजी को ग्लोबल लेवल पर ले जाने के लिए किया जाएगा, खासकर हेल्थकेयर, अंग दान (organ donation), और रिमोट वोटिंग जैसे संवेदनशील सेक्टर्स में।


🧠 कौन हैं संस्थापक और क्या है कंपनी का उद्देश्य?

Plenome की स्थापना की है:

  • प्रो. प्रभु राजगोपाल (Shanti Swarup Bhatnagar पुरस्कार विजेता),
  • विजयराजा रथिनासामी, और
  • अनिरुद्ध वर्णा ने मिलकर।

इनका उद्देश्य है एक ऐसा सुरक्षित, स्केलेबल और इंटरऑपरेबल डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाना जो अत्यधिक संवेदनशील डेटा का संचालन कुशलतापूर्वक कर सके।


🔒 ब्लॉकचेन + AI: Plenome का यूनिक टेक्नोलॉजी स्टैक

Plenome का प्लेटफॉर्म दो प्रमुख टेक्नोलॉजी पर आधारित है:

  1. DLT-बेस्ड (Distributed Ledger Technology) Backend
  2. AI-ड्रिवन Frontend

इस तकनीकी संयोजन के जरिए कंपनी डेटा को सुरक्षित, केंद्रीकृत, और यूज़र-नियंत्रण वाला बनाने का लक्ष्य रखती है — जिससे डेटा प्राइवेसी और इंटरऑपरेबिलिटी सुनिश्चित हो सके।


🧬 ‘BlockTrack OrganEase’: अंग दान के लिए नया डिजिटल समाधान

Plenome की सबसे चर्चित पेशकश है ‘BlockTrack OrganEase’, जो कि organ donation से जुड़ा एक डिजिटल समाधान है। यह प्लेटफॉर्म अभी एक राज्य सरकार की ट्रांसप्लांट अथॉरिटी के साथ ट्रायल रन में है।

इसका उद्देश्य है अंग दान की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, सुरक्षित और वास्तविक समय में ट्रैक करने योग्य बनाना।


🗳️ ‘BlockVote’: अब रिमोट वोटिंग होगी डिजिटल और सुरक्षित

Plenome ने अपने रिमोट वोटिंग प्लेटफॉर्म ‘BlockVote’ को पहले से ही IIT Madras में सफलतापूर्वक लागू कर दिया है। अब यह समाधान एंटरप्राइज लेवल इलेक्शन्स के लिए भी प्रस्तावित किया जा रहा है।

यह सिस्टम:

  • फ्रॉड-रहित चुनाव सुनिश्चित करता है
  • डेटा ट्रैकिंग और वेरिफिकेशन में मदद करता है
  • और अन्य संस्थाओं द्वारा उपयोग योग्य बनाया जा रहा है

🏥 ‘Ashwin’: AI-आधारित हेल्थटेक प्लेटफॉर्म

Plenome की AI आधारित हेल्थटेक सुइट ‘Ashwin’ को डेंटल क्लिनिक्स में मल्टीलिंगुअल डेटा कैप्चर के लिए टेस्ट किया जा रहा है। इसके तहत मरीजों की जानकारी को संरचित रूप में रिकॉर्ड किया जाता है, जिससे डॉक्टरों को निदान और ट्रीटमेंट में मदद मिलती है।

जल्द ही ये एक्सपैंशन भी होंगे:

  • आंखों की देखभाल (Eye care)
  • कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट्स
  • फर्टिलिटी क्लीनिक्स

🌍 ग्लोबल एक्सपैंशन की तैयारी

Plenome की योजना है कि अपने पेटेंटेड Blockchain-AI स्टैक को भारत से बाहर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ले जाया जाए। कंपनी पहले ही UAE जैसे बाजारों में अपने पार्टनर्स के साथ एंगेजमेंट शुरू कर चुकी है।

इस फंडिंग से कंपनी को:

  • इंटरनेशनल सर्टिफिकेशन हासिल करने,
  • नए देशों में पायलट प्रोजेक्ट चलाने,
  • और उपयोगकर्ता इंटरफेस को भाषाई रूप से और सुलभ बनाने में मदद मिलेगी।

💡 निवेशकों को क्यों है भरोसा?

Ovington Capital, AADI और मनीष गांधी जैसे निवेशकों को Plenome के यूनिक टेक्नोलॉजी स्टैक और सोशल इम्पैक्ट फोकस पर पूरा भरोसा है। ये निवेशक ट्रस्टेबल डिजिटल समाधानों की वैश्विक जरूरत को समझते हैं, खासकर जहां नागरिक डेटा की सुरक्षा की बात हो।


📊 भारत में Web3 और Blockchain का बढ़ता रोल

Plenome की यह फंडिंग भारत में Web3 और Blockchain स्टार्टअप्स के बढ़ते महत्व को दर्शाती है। खासकर हेल्थकेयर, चुनाव और सरकारी सेवाओं में सुरक्षित टेक्नोलॉजी की मांग तेजी से बढ़ रही है।

Plenome जैसे स्टार्टअप Web3 के भरोसे को व्यावहारिक उपयोग में बदलने का काम कर रहे हैं।


📌 निष्कर्ष: तकनीक और ट्रस्ट का मिलन

Plenome Technologies न सिर्फ एक स्टार्टअप है, बल्कि यह सार्वजनिक हित से जुड़ी समस्याओं के लिए तकनीकी समाधान प्रदान कर रही है। हेल्थ, वोटिंग और डाटा प्राइवेसी जैसे क्षेत्रों में कंपनी का ब्लॉकचेन+AI अप्रोच भारत को टेक्नोलॉजिकल सॉवरेनिटी की दिशा में अग्रसर कर सकता है।


✅ लेख सारांश:

बिंदुविवरण
स्टार्टअपPlenome Technologies
मुख्य तकनीकBlockchain-AI स्टैक
उपयोग क्षेत्रहेल्थकेयर, Organ Donation, Remote Voting
फंडिंग राशि₹6.5 करोड़ (Seed Round)
प्रमुख निवेशकOvington Capital (Lux), AADI (UAE), Manish Gandhi
संस्थापकप्रो. प्रभु राजगोपाल, विजयराजा रथिनासामी, अनिरुद्ध वर्णा
भविष्य योजनाइंटरनेशनल विस्तार, हेल्थटेक प्रोडक्ट्स, वोटिंग सिस्टम

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💰 Lo! Foods ने $3.5 मिलियन सीरीज़ B फंडिंग जुटाई,

Lo! Foods

📍 परिचय:
Lo! Foods, बेंगलुरु आधारित एक फंक्शनल फूड स्टार्टअप, ने हाल ही में $3.5 मिलियन (लगभग ₹29 करोड़) की Series B फंडिंग जुटाई है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व किया है Rainmatter Health (जो Zerodha की हेल्थ इनिशिएटिव है) और Singapore स्थित Capital Code ने। इसके अलावा Mount Judy Ventures, Ice.VC, KPB Ventures, और कुछ मौजूदा निवेशकों ने भी इस राउंड में भाग लिया।


🚀 फंडिंग का उद्देश्य:
कंपनी इस फंड का उपयोग मुख्य रूप से निम्नलिखित गतिविधियों में करेगी:

  • वेयरहाउसिंग (गोदाम) का विस्तार
  • बैकेंड टेक्नोलॉजी को मजबूत करना
  • बेंगलुरु में ऑफलाइन पायलट्स लॉन्च करना
  • ब्रांड निर्माण पर निवेश करना, विशेष रूप से अपने प्रमुख सब-ब्रांड Protein Chef के लिए

कंपनी के अनुसार, Protein Chef उनके लिए सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बन चुका है और यह उन्हें ₹100 करोड़ सालाना रेकरिंग रेवेन्यू के लक्ष्य के करीब पहुंचा रहा है।


📦 Lo! Foods क्या करता है?
Lo! Foods एक हेल्दी फूड फोकस्ड स्टार्टअप है जो चार प्रमुख वर्टिकल्स में काम करता है:

  1. Protein Chef – प्रोटीन एनरिचमेंट वाले उत्पाद
  2. Keto Smart – वजन घटाने के लिए कीटो-आधारित फूड
  3. DiabeSmart – डायबिटीज मैनेजमेंट के लिए फूड
  4. GlutenSmart – ग्लूटन इंटोलरेंस से पीड़ितों के लिए भोजन विकल्प

इन सभी प्रोडक्ट लाइनों का उद्देश्य भारत में स्वस्थ जीवनशैली को आसान और सुलभ बनाना है, खासकर उन उपभोक्ताओं के लिए जो लाइफस्टाइल डिसऑर्डर्स से जूझ रहे हैं।


📈 ग्रोथ की रफ्तार:
Lo! Foods की तेजी से बढ़ती सफलता के पीछे एक बड़ा कारण है क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स जैसे:

  • Blinkit
  • Zepto
  • Swiggy Instamart

इन प्लेटफॉर्म्स से Lo! Foods की लगभग 65% बिक्री होती है। तेजी से डिलीवरी और हेल्दी प्रोडक्ट्स की डिमांड ने इसे एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया है।


🍴 Protein Chef: ब्रांड का स्टार परफॉर्मर:
Protein Chef, जो कि Lo! Foods का प्रोटीन फोकस्ड प्रोडक्ट ब्रांड है, अब तक का सबसे तेज़ी से बढ़ता वर्टिकल बन चुका है।
यह ब्रांड जिम जाने वाले, फिटनेस फोकस्ड, और हेल्दी स्नैकिंग को पसंद करने वाले ग्राहकों के बीच लोकप्रिय हो रहा है।
कंपनी की रणनीति है कि Protein Chef को न केवल ऑनलाइन बल्कि अब ऑफलाइन स्टोर्स में भी लॉन्च किया जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका फायदा उठा सकें।


📦 DiabeSmart होगा Rebrand — अब आएगा Sugar Smart:
Lo! Foods की डायबिटिक फ्रेंडली रेंज, DiabeSmart, को अब एक नए नाम “Sugar Smart” के तहत रीब्रांड करने की योजना है।
इस बदलाव का उद्देश्य है:

  • ज्यादा स्पष्ट ब्रांडिंग
  • मार्केट में बेहतर स्थिति बनाना
  • उपभोक्ताओं को उत्पाद के लाभ जल्दी समझ आ सकें

📊 निवेशकों की रुचि क्यों बढ़ी?
Lo! Foods की रणनीति निवेशकों को इसलिए आकर्षित कर रही है क्योंकि:

  • यह भारत की बढ़ती लाइफस्टाइल डिसऑर्डर समस्या (जैसे डायबिटीज, मोटापा) का समाधान दे रहा है
  • कंपनी का एसेट-लाइट, टेक-सपोर्टेड मॉडल स्केलेबल है
  • फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) सेक्टर में यह इनोवेशन और हेल्थ दोनों का मेल पेश कर रहा है
  • ब्रांड की रिकरिंग रेवेन्यू बढ़ रही है और वह ₹100 करोड़ सालाना के टारगेट के नजदीक है

🧑‍🍳 भविष्य की योजनाएं:
Lo! Foods आने वाले समय में:

  • नई प्रोडक्ट लाइन्स लॉन्च करेगा
  • अधिक शहरों में ऑफलाइन पायलट प्रोग्राम्स करेगा
  • ब्रांड एंबेसडर या इनफ्लुएंसर पार्टनरशिप्स के जरिए ब्रांड अवेयरनेस बढ़ाएगा
  • वेलनेस और न्यूट्रिशन सेक्टर में और मजबूत उपस्थिति बनाएगा

🧩 निष्कर्ष:
Lo! Foods का $3.5 मिलियन Series B फंडिंग राउंड ये दिखाता है कि भारत में हेल्दी, फंक्शनल फूड्स की मांग तेज़ी से बढ़ रही है।
Protein Chef जैसे ब्रांड से लेकर Sugar Smart जैसे रीब्रांड तक, कंपनी की रणनीति बहुत ही फोकस्ड और उपयोगकर्ता-केंद्रित है।
Zerodha-backed Rainmatter Health और अन्य बड़े निवेशकों का समर्थन इस बात का संकेत है कि स्टार्टअप न केवल अपने बिजनेस मॉडल बल्कि मिशन — भारत को हेल्दी बनाना — में भी निवेशकों का भरोसा जीत रहा है।


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Read more : PhysicsWallah ने सतीश शर्मा को नया CMO नियुक्त किया,

📚 PhysicsWallah ने सतीश शर्मा को नया CMO नियुक्त किया,

PhysicsWallah

🔔 परिचय:
भारत की प्रमुख एडटेक यूनिकॉर्न PhysicsWallah (PW) ने अपने मार्केटिंग प्रयासों को मज़बूती देने के लिए सतीश शर्मा को नया मुख्य विपणन अधिकारी (Chief Marketing Officer – CMO) नियुक्त किया है। यह नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है जब कंपनी ऑनलाइन, ऑफलाइन और हाइब्रिड एजुकेशन मॉडल में तेज़ी से विस्तार कर रही है।


🧠 सतीश शर्मा का अनुभव:
सतीश शर्मा मार्केटिंग की दुनिया में एक जाना-पहचाना नाम हैं। उन्हें 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है और वे Unyscape के सह-संस्थापक भी रहे हैं, जो एक मार्केटिंग और एनालिटिक्स फर्म है और वैश्विक क्लाइंट्स को सेवा देती है।
Unyscape में उन्होंने दोहरी भूमिका निभाई —

  • COO (Chief Operating Officer)
  • CMO (Chief Marketing Officer)

उनकी विशेषज्ञता डिजिटल ब्रांड निर्माण, उपभोक्ता विश्लेषण, और स्केलेबल मार्केटिंग रणनीतियों में है, जो अब PW को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में मदद करेंगी।


🎯 PhysicsWallah की रणनीतिक दिशा:
PW इस समय टेस्ट प्रेप, स्किलिंग, हायर एजुकेशन और ओवरसीज एजुकेशन जैसे सेगमेंट में अपने विस्तार को लेकर आक्रामक रणनीति अपना रहा है।

  • ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मल्टी-लैंग्वेज सपोर्ट
  • ऑफलाइन और हाइब्रिड सेंटर भारतभर में
  • Tech-enabled learning को नई दिशा देना

अब PW का लक्ष्य है:
✅ एक मजबूत नेशनल ब्रांड बनाना
मापने योग्य रिजल्ट देना
✅ विभिन्न सेगमेंट्स में मार्केट लीडर बनना


📈 कंपनी की ग्रोथ:
PW की शुरुआत 2020 में एक YouTube चैनल के रूप में हुई थी। संस्थापक अलख पांडे की किफायती और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई देने की सोच ने PW को लाखों छात्रों का पसंदीदा बना दिया।

आज PW एक फुल-फ्लेज्ड एडटेक प्लेटफॉर्म बन चुका है जो कई भारतीय भाषाओं में क्लासेस देता है और निम्नलिखित क्षेत्रों में सक्रिय है:

  • जेईई, नीट, UPSC जैसे एग्जाम्स की तैयारी
  • स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम्स
  • हायर एजुकेशन कोर्सेज
  • विदेश शिक्षा की तैयारी

🏢 ऑफलाइन और हाइब्रिड विस्तार:
PW ने हाल ही में कई ऑफलाइन सेंटर और हाइब्रिड क्लासरूम्स लॉन्च किए हैं जो टेक्नोलॉजी से लैस हैं।
इसका मकसद है:

  • छात्रों को डिजिटल और फिजिकल दोनों मोड्स में विकल्प देना
  • देश के छोटे शहरों तक शिक्षा पहुंचाना
  • छात्रों की परफॉर्मेंस ट्रैकिंग को और स्मार्ट बनाना

💸 निवेश और वैल्यूएशन:
PW को कई बड़े वेंचर कैपिटल फंड्स का समर्थन मिला है, जिनमें शामिल हैं:

  • Lightspeed
  • WestBridge
  • Hornbill Capital
  • GSV Ventures

FY24 में कंपनी ने रिकॉर्ड ₹1,940.4 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया और इसकी मौजूदा वैल्यूएशन $2.8 बिलियन आंकी गई है।


📊 IPO की तैयारी:
मार्च 2025 में मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, PW ने कन्फिडेंशियल रूप से IPO के लिए ड्राफ्ट पेपर्स फाइल किए हैं।

  • IPO साइज: लगभग ₹4,600 करोड़
  • अगर IPO सफल रहा, तो PW भारत का पहला लिस्टेड एडटेक यूनिकॉर्न बन सकता है।

यह कदम न सिर्फ कंपनी के विस्तार को गति देगा, बल्कि भारत के एडटेक सेक्टर में निवेशकों की रुचि भी और बढ़ा सकता है।


👨‍💼 सतीश शर्मा की भूमिका:
PW के CMO के रूप में सतीश शर्मा की ज़िम्मेदारियां होंगी:

  • ब्रांड स्ट्रैटेजी को मजबूत करना
  • मार्केटिंग कैम्पेन की अगुवाई करना
  • मल्टी-प्लेटफॉर्म पर ब्रांड की उपस्थिति को बढ़ाना
  • छात्रों और अभिभावकों के बीच भरोसे की भावना बनाना

शर्मा का अनुभव PW को डिजिटल मार्केटिंग से लेकर ग्राउंड लेवल एंगेजमेंट तक की व्यापक रणनीति तैयार करने में मदद करेगा।


📣 निष्कर्ष:
PW ने सतीश शर्मा की नियुक्ति से यह स्पष्ट कर दिया है कि कंपनी अब ब्रांड निर्माण और बाज़ार नेतृत्व की ओर ध्यान केंद्रित कर रही है।
एक YouTube चैनल से शुरू होकर अब PW देश की सबसे तेज़ी से बढ़ती एडटेक कंपनियों में से एक बन चुका है।
CMO के रूप में शर्मा की नियुक्ति, IPO की तैयारी और नए मार्केट्स में विस्तार — ये सभी कदम दर्शाते हैं कि PW अब केवल एजुकेशन प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि एक एजुकेशन ब्रांड बनने की राह पर है।


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