🚁 Garuda Aerospace ने जुटाए ₹100 करोड़,

Garuda Aerospace

भारतीय ड्रोन टेक्नोलॉजी क्षेत्र में अग्रणी स्टार्टअप Garuda Aerospace ने अपने Series B फंडिंग राउंड में ₹100 करोड़ ($11.6 मिलियन) जुटाए हैं। यह फंडिंग राउंड Venture Catalysts (VCAT) के नेतृत्व में हुआ, जिससे कंपनी की पोस्ट-मनी वैल्यूएशन $250 मिलियन हो गई है।

यह फंडिंग भारतीय ड्रोन इकोसिस्टम के लिए न केवल एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि इस बात का संकेत भी है कि अब भारत रक्षा, कृषि और इंडस्ट्रियल अनुप्रयोगों में ड्रोन टेक्नोलॉजी को अपनाने में तेजी से आगे बढ़ रहा है।


📈 Garuda Aerospace पिछली फंडिंग और निवेशक

Garuda Aerospace ने फरवरी 2023 में Series A राउंड के तहत $22 मिलियन जुटाए थे। इस राउंड का नेतृत्व SphitiCap ने किया था। उस समय भी कंपनी ने उत्पादन क्षमताओं और रिसर्च एंड डेवलपमेंट को मजबूत करने की योजना बनाई थी।


🧠 फंडिंग का उपयोग कहाँ होगा?

कंपनी के अनुसार, Series B में प्राप्त नई पूंजी का उपयोग निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों में किया जाएगा:

  • ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग को स्केल अप करना
  • प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाना
  • डिफेंस ड्रोन टेक्नोलॉजी पर केंद्रित R&D और टेस्टिंग सेंटर को पूरा करना
  • नए ग्राहकों के लिए अनुकूल टेक्नोलॉजी डेवलप करना

Garuda अब खुद को सिर्फ एक ड्रोन निर्माता नहीं, बल्कि एक एंड-टू-एंड ड्रोन सॉल्यूशन प्रोवाइडर के रूप में स्थापित करने पर काम कर रहा है।


🏗️ Garuda Aerospace की स्थापना और विस्तार

Garuda Aerospace की स्थापना 2015 में Agnishwar Jayaprakash ने की थी। आज कंपनी के पास:

  • 200+ की टीम
  • 30 प्रकार के ड्रोन मॉडल्स
  • 50 से अधिक ड्रोन सेवाएं (Drone-as-a-Service)
  • 400 से अधिक ड्रोन का फ्लीट
  • 500 प्रशिक्षित पायलट
  • 84 शहरों में सक्रिय संचालन

📑 पेटेंट और इनोवेशन

Garuda के पास 20 से अधिक पेटेंट हैं, जो इसके तकनीकी नवाचार को दर्शाते हैं।


🏢 क्लाइंट पोर्टफोलियो और ग्लोबल साझेदारियाँ

Garuda Aerospace के ग्राहक सिर्फ भारतीय सरकारी एजेंसियां ही नहीं हैं, बल्कि इसमें कई दिग्गज प्राइवेट कंपनियाँ भी शामिल हैं:

  • TATA Group
  • Reliance Industries
  • Adani Group

इसके अलावा, Garuda ने अंतरराष्ट्रीय दिग्गजों से भी साझेदारी की है, जैसे:

  • Lockheed Martin
  • Elbit Systems

यह साझेदारियाँ कंपनी की ग्लोबल स्केलेबिलिटी और विश्वास को दर्शाती हैं।


💹 वित्तीय प्रदर्शन (FY24)

TheKredible के आंकड़ों के अनुसार:

  • FY24 में Garuda का ऑपरेशनल रेवेन्यू ₹110 करोड़ रहा, जो FY23 के ₹47 करोड़ से 2.3 गुना वृद्धि है।
  • FY24 में नेट प्रॉफिट ₹16 करोड़ रहा, जो FY23 के ₹6 करोड़ की तुलना में 2.7 गुना अधिक है।

यह प्रदर्शन दर्शाता है कि कंपनी न केवल टेक्नोलॉजी में अग्रणी है, बल्कि वित्तीय रूप से भी स्थिर और लाभदायक होती जा रही है।


🌾 कहां-कहां इस्तेमाल हो रहे Garuda के ड्रोन?

Garuda के ड्रोन का इस्तेमाल विभिन्न क्षेत्रों में हो रहा है, जिनमें शामिल हैं:

  • रक्षा क्षेत्र (Defence Applications)
  • कृषि (Agri Spraying, Soil Monitoring)
  • इंडस्ट्रियल निरीक्षण (Industrial Inspections)
  • कंस्ट्रक्शन मॉनिटरिंग
  • आपदा प्रबंधन और राहत कार्य (Disaster Relief & Rescue)

कंपनी का Drone-as-a-Service (DaaS) मॉडल ग्राहकों को बिना ड्रोन खरीदे सर्विस लेने की सुविधा देता है, जिससे बाजार और बड़ा हो गया है।


⚔️ प्रतिस्पर्धा और मार्केट पोजिशन

Garuda को भारत में कई अन्य ड्रोन स्टार्टअप्स से प्रतिस्पर्धा मिल रही है, जैसे:

  • ideaForge
  • Aarav Unmanned Systems
  • Throttle Aerospace Systems
  • General Aeronautics
  • Omnipresent Robot Tech

हालांकि, Garuda ने खुद को सर्विस ओरिएंटेड और डिफेंस-केंद्रित उत्पादों के माध्यम से एक मजबूत जगह बना ली है।


🗣️ फाउंडर का विज़न

संस्थापक Agnishwar Jayaprakash ने कहा:

“हमारा उद्देश्य सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में भारत निर्मित ड्रोन की उपस्थिति दर्ज कराना है। इस फंडिंग से हम अपने विज़न को साकार करने के एक कदम और करीब पहुंच गए हैं।”


📌 निष्कर्ष

Garuda Aerospace की यह ताज़ा फंडिंग और तेजी से बढ़ता व्यवसाय यह दर्शाता है कि भारतीय ड्रोन टेक्नोलॉजी सेक्टर वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो रहा है। नवाचार, उत्पाद विविधता और मजबूत साझेदारियों के दम पर Garuda भविष्य में भारत की सबसे बड़ी ड्रोन कंपनी बनने की ओर अग्रसर है।


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🤖 Kalaari समर्थित Peer Robotics ने बंद की अपनी सेवाएं,

Peer Robotics

भारत और अमेरिका में काम कर रही मोबाइल रोबोटिक्स कंपनी Peer Robotics ने आधिकारिक रूप से अपने सभी व्यवसायिक संचालन बंद कर दिए हैं। Kalaari Capital जैसे प्रतिष्ठित निवेशकों से फंडिंग प्राप्त करने और नवाचार की दिशा में मजबूत प्रयासों के बावजूद, यह स्टार्टअप अब संचालन में नहीं है।


🛑 Peer Robotics कंपनी ने क्यों बंद किया संचालन?

Peer Robotics के निदेशक मंडल ने शेयरहोल्डर्स की बैठक में एक विशेष प्रस्ताव पारित किया, जिसके तहत कंपनी के नाम को Registrar of Companies (RoC) के रिकॉर्ड से हटाने की मंजूरी दी गई।

📄 कंपनी के नियामकीय दस्तावेज़ में क्या लिखा था?

“कंपनी पिछले दो वर्षों से कोई भी व्यवसायिक गतिविधि नहीं कर रही है और बोर्ड का मानना है कि भविष्य में संचालन फिर से शुरू करना संभव नहीं है।”


🏭 Peer Robotics क्या करती थी?

Peer Robotics की स्थापना 2019 में Rishabh Agarwal और Tanya Raghuvanshi ने की थी। इसका उद्देश्य था मानव श्रमिकों के साथ सहयोग करके दोहराए जाने वाले कार्यों को ऑटोमेट करना।

इसके प्रमुख उपयोग क्षेत्र:

  • मैन्युफैक्चरिंग वर्कफ्लो
  • असेंबली लाइन संचालन
  • वेयरहाउसिंग प्रक्रियाएं

Peer Robotics के एडाप्टिव रोबोट्स कंपनियों को समय बचाने, उत्पादन कुशलता बढ़ाने और कार्यस्थल पर चोटों को कम करने में मदद करते थे।


💸 कितना फंड जुटाया था Peer Robotics ने?

2022 में Peer Robotics ने $2.3 मिलियन (लगभग ₹19 करोड़) का सीड फंड जुटाया था। यह फंडिंग राउंड Kalaari Capital के नेतृत्व में हुआ था, जिसमें Axilor Ventures, Connecticut Innovations और Innopact VC जैसे अन्य निवेशकों ने भाग लिया था।

🚀 अन्य मान्यताएं:

  • Peer Robotics को Stanley + Techstars Accelerator Programme में भी शामिल किया गया था, जो इसे वैश्विक पहचान और नेटवर्क प्रदान करता है।

📉 वित्तीय प्रदर्शन और गिरावट

Peer Robotics के वित्तीय आंकड़े भी उसके बंद होने की पुष्टि करते हैं। FY24 में:

  • कंपनी का रेवेन्यू शून्य रहा
  • कंपनी ने नाममात्र घाटा दर्ज किया

जबकि:

  • FY23 में रेवेन्यू ₹34 लाख था
  • FY22 में कंपनी ने ₹1.33 करोड़ का राजस्व अर्जित किया था

यह गिरावट दर्शाती है कि कंपनी का ग्राहक अधिग्रहण और व्यावसायिक विकास रुक गया था।


🧩 क्यों असफल हुई Peer Robotics?

हालांकि स्टार्टअप का विचार अद्भुत और नवाचारपूर्ण था, परंतु यह निम्न चुनौतियों के चलते टिक नहीं पाया:

  • कोविड महामारी के बाद मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की धीमी रिकवरी
  • बिक्री और विस्तार में निरंतरता की कमी
  • सीमित राजस्व और बढ़ते खर्च
  • अंतरराष्ट्रीय संचालन का जटिल प्रबंधन

🔚 2025: स्टार्टअप बंद होने का साल?

Peer Robotics अकेली ऐसी कंपनी नहीं है जिसने 2025 में अपने दरवाज़े बंद किए हों। इस वर्ष कई और हाई-प्रोफाइल स्टार्टअप्स भी असफल रहे, जिनमें शामिल हैं:

🚧 अन्य प्रमुख स्टार्टअप्स जो 2025 में बंद हुए:

  • Dunzo – $450 मिलियन की फंडिंग जुटाने के बावजूद संचालन बंद
  • Cushion (Fintech) – जनवरी 2025 में परिचालन बंद किया
  • Alza (Healthtech) – संचालन बंद
  • Level (Edtech) – उपयोगकर्ता प्लेटफॉर्म बंद
  • Pandion (Logistics) – सेवाएं पूरी तरह समाप्त

यह एक बार फिर से यह दिखाता है कि फंडिंग के बावजूद, स्थायी बिजनेस मॉडल और ऑपरेशनल स्केलेबिलिटी किसी भी स्टार्टअप की सफलता के लिए आवश्यक हैं।


🗣️ निवेशकों के लिए क्या सबक?

Kalaari Capital जैसे अनुभवी निवेशकों द्वारा समर्थित स्टार्टअप का असफल होना यह दिखाता है कि:

  • केवल पूंजी निवेश पर्याप्त नहीं है
  • स्टार्टअप्स को मार्केट फिट, राजस्व मॉडल, और सस्टेनेबल ग्रोथ प्लान की ज़रूरत होती है
  • तकनीक आधारित स्टार्टअप्स के लिए लंबी अवधि की रणनीति और बाजार के बदलते रुझानों के अनुसार अनुकूलन आवश्यक है

📌 निष्कर्ष

Peer Robotics का बंद होना भारत के उभरते रोबोटिक्स इकोसिस्टम के लिए एक बड़ा झटका है। यह स्टार्टअप भले ही बंद हो गया हो, लेकिन इसकी तकनीकी विरासत और नवाचार की सोच आने वाले उद्यमियों को प्रेरणा देती रहेगी।


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Read more :🚀 Q1 2025: भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में $3.1 बिलियन की फंडिंग, निवेशक फिर से सक्रिय — लेकिन क्या यह रफ्तार बरकरार रहेगी?

🚀 Q1 2025: भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में $3.1 बिलियन की फंडिंग, निवेशक फिर से सक्रिय — लेकिन क्या यह रफ्तार बरकरार रहेगी?

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FundingRaised.in विशेष रिपोर्ट

2024 के अंत में विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया था कि 2025 में भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम एक बार फिर नई ऊँचाइयों को छुएगा। लेकिन Inc42 की “Indian Tech Startup Funding Report Q1 2025” के अनुसार, भले ही फंडिंग में 41% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई हो, पर कुल डील्स और गतिविधि लगभग स्थिर बनी हुई है।


📊 पहली तिमाही में कुल फंडिंग और डील्स

  • Q1 2025 में कुल फंडिंग: $3.1 बिलियन
  • Q1 2024 की तुलना में: 41% ज्यादा
  • Q1 2025 में डील्स की संख्या: 232
  • Q1 2024 में डील्स: 226
  • Q2 और Q3 2024 में डील्स: 280 और 268
  • Q4 2024: सबसे कमजोर तिमाही — सिर्फ 219 डील्स

हालांकि फंडिंग राशि बढ़ी है, डील्स की संख्या में कोई खास इजाफा नहीं हुआ, जो इकोसिस्टम की गति को सीमित करता है।


💰 निवेशकों की भागीदारी में उछाल

Q1 2025 में 656 निवेशकों ने भारतीय स्टार्टअप्स में पैसा लगाया — जो पिछले वर्ष के 461 निवेशकों की तुलना में 42% अधिक है।

लेकिन अगर बाकी की तीन तिमाहियों को देखें तो निवेशक संख्या 550 से 650 के बीच स्थिर रही है।


🔝 किस सेक्टर में सबसे ज्यादा निवेश?

  • डील्स की संख्या के आधार पर:
    1. फिनटेक
    2. ईकॉमर्स
    3. एंटरप्राइज टेक
  • कुल निवेश राशि के आधार पर:
    1. ईकॉमर्स
    2. एंटरप्राइज टेक
    3. फिनटेक

🌟 Q1 2025 के सबसे सक्रिय निवेशक

1. 🏦 Stride Ventures – 27 निवेश

  • Wow! Momo, Glance, Park+ में निवेश
  • 2024 में 70 स्टार्टअप्स में निवेश
  • Fund IV लॉन्च ($300 Mn का लक्ष्य)
  • DPIIT के साथ साझेदारी से ग्लोबल एक्सपैंशन में मदद
  • पोर्टफोलियो में: Zepto, Ather, SUGAR, Bluestone आदि

2. 🏦 Alteria Capital – 26 निवेश

  • Apna Mart, Pratilipi, WayCool, GIVA जैसी कंपनियों में निवेश
  • अब तक 157 निवेश, 15 यूनिकॉर्न्स
  • पोर्टफोलियो: BharatPe, Dailyhunt, Jupiter, Cars24
  • AUM: $550 Mn

3. 🌱 Blume Ventures – 21 निवेश

  • Atomicwork, GoStops, Swish Club, TakeMe2Space
  • फोकस: Seed और Pre-Series A स्टेज
  • कुल 500+ निवेश
  • यूनिकॉर्न्स: Unacademy, Slice, Spinny
  • अन्य पोर्टफोलियो: Cashify, Leverage Edu, Printo

4. 💡 ah! Ventures – 20 निवेश

  • Zealopia, TechMonk, Agrilectric, Markytics
  • प्लेटफॉर्म आधारित निवेश (Seed, Angel, Pre-Series A)
  • अब तक ₹56 करोड़ से अधिक का निवेश
  • पोर्टफोलियो: Exotel, SuperBottoms, Settl

5. 💼 Rainmatter – 20 निवेश

  • Zerodha द्वारा समर्थित
  • निवेश: Boldcare, FluxGen, Sisters In Sweat
  • फोकस: Fintech, Wellness, Climate Tech, Storytelling
  • पोर्टफोलियो: CRED, smallcase, Ultrahuman

6. 💳 BlackSoil – 19 निवेश

  • Celcius Logistics, Epaylater
  • Debt और Alternate Credit सॉल्यूशंस
  • सप्लाई चेन फाइनेंसिंग प्लेटफॉर्म: SaralSCF
  • RBI से अप्रूवल मिलने के बाद Caspian Debt के साथ मर्जर की योजना

7. 👼 Indian Angel Network (IAN) – 18 निवेश

  • goSTOPS, FluxGen, PlaySuper, Svastek
  • नेटवर्क: 500+ एंजेल निवेशक
  • निवेश सीमा: ₹50 लाख से ₹50 करोड़
  • पोर्टफोलियो: Ola, Druva, Spinny, Uniphore

8. 🚀 All In Capital – 15 निवेश

  • Plazza, Krvvy, Prep, Med Mitra
  • निवेश सीमा: $250K – $600K
  • संस्थापक नेटवर्क: Meesho, ShareChat, MPL के फाउंडर्स
  • पोर्टफोलियो: Giva, Mixar, MeetRecord

9. 💸 Trifecta Capital – 14 निवेश

  • Farmart, Spintly, Magenta Mobility
  • Fund Size: ₹5,000 Cr (AUM $600 Mn)
  • नए फंड में 100 स्टार्टअप्स में निवेश की योजना
  • पोर्टफोलियो: ixigo, Livspace, Atomberg

10. 🌍 Antler – 12 निवेश

  • Just Breathe, Blink Money
  • फोकस: Idea स्टेज स्टार्टअप्स
  • निवेश सीमा: $500K तक
  • स्थापना: 2018 (ग्लोबल VC)

📌 निष्कर्ष: फंडिंग वापस आई, लेकिन पूरे रफ्तार में नहीं

Q1 2025 ने भले ही निवेशकों की वापसी और $3.1 बिलियन फंडिंग के साथ एक सकारात्मक संकेत दिया हो, लेकिन डील्स की संख्या और वॉल्यूम में स्थिरता यह दिखाती है कि इकोसिस्टम अभी पूरी तरह पुनर्जीवित नहीं हुआ है।

अब सबकी निगाहें Q2 2025 पर हैं — क्या यह स्टार्टअप इंडिया के लिए पुनरुद्धार की शुरुआत बनेगा या ग्रोथ को बनाए रखना चुनौती होगी?


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📚 CENTA को ₹20 करोड़ की फंडिंग जुटाई,

CENTA

भारत में शिक्षकों के कौशल विकास और प्रमाणन क्षेत्र में अग्रणी प्लेटफॉर्म CENTA (Centre for Teacher Accreditation) ने हाल ही में ₹20 करोड़ ($2.33 मिलियन) की फंडिंग जुटाई है। यह Series A1 राउंड था, जिसका नेतृत्व Colossa Ventures ने किया, साथ ही मौजूदा निवेशक Discovery Assets और कुछ प्रमुख एंजेल निवेशकों ने भी इसमें भाग लिया।

यह फंडिंग CENTA के लिए न केवल आर्थिक रूप से बल्कि इसकी वैश्विक योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए भी अहम साबित होगी।


🎯 CENTA क्या करता है?

CENTA की स्थापना राम्या वेंकटरमन और प्रियंका आर्य ने की थी। यह प्लेटफॉर्म मुख्य रूप से तीन प्रमुख सेवाएं प्रदान करता है:

  1. Teacher Certification – शिक्षकों को स्किल आधारित मान्यता प्रदान करता है।
  2. Upskilling Programs – शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण विधियों और तकनीकी कौशल में प्रशिक्षित करता है।
  3. Teacher-as-a-Service (TaaS) – शिक्षकों को फुल-टाइम और पार्ट-टाइम नौकरियों से जोड़ता है।

इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य शिक्षकों को एक प्रोफेशनल करियर के रूप में स्थापित करना है, न कि केवल एक सेवा प्रदाता के रूप में।


🌏 वैश्विक पहुंच: 1.7 मिलियन शिक्षक, 100+ देश

CENTA ने दावा किया है कि उनके प्लेटफॉर्म पर अब तक:

  • 1.7 मिलियन शिक्षक रजिस्टर्ड हैं
  • 100 से अधिक देशों और
  • 1 लाख से अधिक स्कूलों के साथ इसका जुड़ाव है

🌍 प्रमुख देश जहां CENTA की पहुंच है:

  • भारत (सबसे बड़ा मार्केट)
  • UAE
  • नाइजीरिया
  • फिलीपींस
  • बांग्लादेश
  • घाना
  • अब UK और US में भी साझेदारियाँ बन रही हैं

💡 फंडिंग का उपयोग कहाँ होगा?

CENTA ने कहा है कि यह फंडिंग मुख्यतः इन कार्यों के लिए उपयोग की जाएगी:

  • भारत और अन्य देशों में विस्तार
  • टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार
  • AI आधारित सीखने और मूल्यांकन तकनीकों का एकीकरण
  • प्लेसमेंट नेटवर्क को मज़बूत करना

इससे CENTA न केवल एक शिक्षण प्लेटफॉर्म बल्कि एक एजुकेशन-टेक लीडर बनना चाहता है।


🏆 पुरस्कार और मान्यता

CENTA को अब तक कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से पुरस्कार और मान्यता मिल चुकी है, जिनमें शामिल हैं:

  • Dun & Bradstreet
  • NITI Aayog
  • UNESCO
  • अन्य कई प्रतिष्ठित शिक्षा और नीति संस्थान

International Teaching Professional’s Olympiad जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के इवेंट्स इसके गुणवत्ता और नेटवर्क को और मज़बूत करते हैं।


🧑‍🏫 क्यों जरूरी है CENTA जैसा प्लेटफॉर्म?

भारत में शिक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पक्ष शिक्षकों का प्रशिक्षण और उनकी निरंतर स्किल अपग्रेडेशन है। परंपरागत व्यवस्था में इसका अभाव रहा है। ऐसे में CENTA जैसे प्लेटफॉर्म:

✅ शिक्षकों को एक प्रोफेशनल करियर के रूप में स्थापित करते हैं
✅ उन्हें ग्लोबल स्किल्स और मानकों से जोड़ते हैं
✅ नौकरी की खोज को आसान बनाते हैं
✅ ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों फॉर्मेट में अपस्किलिंग उपलब्ध कराते हैं


📈 बढ़ती डिमांड और भविष्य की संभावनाएँ

COVID-19 के बाद से शिक्षा क्षेत्र में Edtech और Teacher Enablement की मांग तेजी से बढ़ी है। CENTA इस बदलते परिवेश में शिक्षकों को:

  • नई शिक्षण तकनीकों में प्रशिक्षित करता है
  • ग्लोबल प्लेटफॉर्म्स पर जॉब अपॉर्च्युनिटी दिलाने में मदद करता है
  • निजी और सरकारी स्कूलों के बीच एक सेतु का काम करता है

🗣️ संस्थापक का विज़न

संस्थापक राम्या वेंकटरमन का कहना है:

“हम शिक्षकों को सिर्फ एक जॉब प्रोफाइल नहीं, बल्कि एक सम्मानजनक पेशा बनाना चाहते हैं। हमारी कोशिश है कि हर शिक्षक अपने स्किल और प्रमाणन के दम पर देश और दुनिया में अवसर पा सके।”


📌 निष्कर्ष

CENTA का यह नया फंडिंग राउंड इस बात का संकेत है कि अब भारत में शिक्षकों के लिए भी एक मजबूत और स्केलेबल डिजिटल इकोसिस्टम तैयार हो रहा है। भारत से लेकर यूके-अमेरिका तक, CENTA एक ऐसा ब्रांड बनता जा रहा है जो शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों की क्षमता को वैश्विक मंच पर ले जाने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।


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Read more :🎓 Collegedunia ने पार किया ₹200 करोड़ का राजस्व,

🎓 Collegedunia ने पार किया ₹200 करोड़ का राजस्व,

Collegedunia

भारत का प्रमुख कॉलेज सर्च प्लेटफॉर्म Collegedunia अब एक नए मुकाम पर पहुंच चुका है। 2024 में कंपनी ने ₹200 करोड़ से अधिक का रेवेन्यू हासिल कर लिया है। यह उपलब्धि न केवल इसके मजबूत संस्थागत सहयोग का प्रमाण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि छात्रों को सही समय पर सही जानकारी देना कितना प्रभावशाली हो सकता है।


🏢 किस तरह Collegedunia ने बनाई पकड़?

गुरुग्राम स्थित Collegedunia की शुरुआत 2014 में साहिल चलाना ने की थी। यह एक बूटस्ट्रैप्ड स्टार्टअप है, जिसने बिना बाहरी निवेश के इतनी बड़ी ग्रोथ हासिल की है।

कंपनी ने वर्षों में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे:

  • Lovely Professional University (LPU)
  • IILM University
  • Amity University
  • ICFAI
  • Parul University
  • Bennett University

के साथ साझेदारी की है। इसका उद्देश्य है छात्रों को कॉलेज सर्च, एडमिशन प्रोसेस और करियर गाइडेंस जैसी सुविधाएं डिजिटल रूप में देना।


📊 FY24 में राजस्व और लाभ दोनों में बढ़ोतरी

TheKredible के आंकड़ों के अनुसार, FY24 में Collegedunia का ऑपरेशनल रेवेन्यू ₹192.23 करोड़ रहा और कंपनी लाभदायक (Profitable) हो गई है।

इस सफल वर्ष के बाद कंपनी ने ₹200 करोड़ के आंकड़े को पार कर लिया है, जो भारतीय एजुकेशन-टेक स्पेस में एक बड़ी उपलब्धि है।


🚀 आगे का लक्ष्य: ₹600 करोड़ और IPO

Collegedunia अब अगले 5 वर्षों में अपने रेवेन्यू को ₹600 करोड़ तक ले जाने की योजना बना रही है। CEO साहिल चलाना के अनुसार:

“हम इस लक्ष्य तक पहुंचने के बाद IPO लॉन्च करने की योजना बना रहे हैं। हमारा फोकस अब तीन क्षेत्रों पर है — ऑपरेशंस का विस्तार, तकनीकी उन्नयन और नए बाजारों में प्रवेश।


🌐 Study Abroad वर्टिकल में जबरदस्त ग्रोथ

2021 में Collegedunia ने अपना Study Abroad वर्टिकल लॉन्च किया, जो अब हर साल 120% की दर से बढ़ रहा है।

यह वर्टिकल पहले USA, UK, और Canada पर केंद्रित था, लेकिन अब कंपनी ने यूरोपीय देशों की ओर भी विस्तार किया है। 2024-25 में, कंपनी ने:

  • हैदराबाद
  • दिल्ली
  • ठाणे
  • श्रीनगर
  • कोलकाता

जैसे शहरों में सेंटर खोले हैं। अगले चरण में और शहर जोड़े जाएंगे।


🏫 छोटे शहरों पर भी फोकस

अब तक Collegedunia का फोकस प्रमुख मेट्रो शहरों पर रहा है, लेकिन अब कंपनी टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी विस्तार कर रही है।

इन शहरों के छात्रों को भी सटीक करियर मार्गदर्शन और जानकारी की आवश्यकता है। इसके लिए कंपनी स्थानीय भाषा में कंटेंट, वेबिनार्स, और गाइडेंस प्रोग्राम तैयार कर रही है।


🧩 समूह की अन्य इकाइयाँ: 3.14, KickCash और Prepp

Collegedunia सिर्फ एक प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि इसके तहत कुछ और इनोवेटिव यूनिट्स भी हैं:

🔹 3.14 — एडटेक फोकस्ड परफॉर्मेंस-ड्रिवन एडटेक प्लेटफॉर्म

यह ब्रांड्स को डेटा आधारित मार्केटिंग रणनीतियों में मदद करता है। इसके ग्राहक हैं:

  • Amazon
  • Flipkart
  • PhonePe
  • GoJek
  • Walmart

🔹 Prepp — सरकारी नौकरी की तैयारी के लिए विशेष प्लेटफॉर्म

UPSC, SSC, बैंकिंग और राज्य स्तरीय परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए बेहद उपयोगी। पिछले एक वर्ष में इसमें शानदार ग्रोथ देखी गई है।

🔹 KickCash — गेमिंग के ज़रिए यूज़र एक्विजिशन

AI-बेस्ड इंजन के माध्यम से यह ऐप मोबाइल गेमर्स को सुझाव देता है और उन्हें खेलने पर रिवॉर्ड देता है। भारत में बढ़ते मोबाइल गेमिंग ट्रेंड के बीच KickCash एक तेजी से उभरता ब्रांड बन चुका है।


📱 तकनीकी नवाचार और स्केलेबिलिटी

Collegedunia का यूएसपी है — यूज़र फ्रेंडली इंटरफेस, विस्तृत कॉलेज डेटा, स्टडी गाइड्स, और करियर सलाह। अब कंपनी इन सेवाओं को और ज्यादा इंटरैक्टिव और AI-सपोर्टेड बना रही है, जिससे छात्रों को उनकी रुचि और योग्यता के अनुसार सुझाव मिलें।


🌍 ग्लोबल विज़न के साथ लोकल सेवा

Collegedunia अब केवल कॉलेज सर्च प्लेटफॉर्म नहीं रहा। यह अब एक पूर्ण छात्र सहायता मंच बन चुका है, जो:

✅ करियर सलाह
✅ स्किल बिल्डिंग
✅ इंटरनेशनल एडमिशन गाइडेंस
✅ सरकारी नौकरी की तैयारी
✅ गेमिंग-आधारित एंगेजमेंट

जैसी सेवाएं भी दे रहा है।


📌 निष्कर्ष

Collegedunia की सफलता इस बात का प्रमाण है कि भारत के छात्र जब तकनीक और जानकारी से सशक्त होते हैं, तो वे अपने भविष्य की दिशा बेहतर तरीके से तय कर सकते हैं। ₹200 करोड़ का आंकड़ा पार करने के बाद, अब कंपनी की नजर ₹600 करोड़ और IPO पर है।

💬 जैसा CEO चलाना कहते हैं:

“हम भारतीय युवाओं के लिए न सिर्फ कॉलेज सर्च, बल्कि करियर का संपूर्ण समाधान बनना चाहते हैं।”


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🎯 जहां हर ग्रोथ की कहानी बनती है हेडलाइन।

Read more :🛰️ Optimized Electrotech ने Series A राउंड में जुटाए $6 मिलियन,

🛰️ Optimized Electrotech ने Series A राउंड में जुटाए $6 मिलियन,

Optimized Electrotech

भारत की गहराई से तकनीक विकसित करने वाली कंपनियों में एक नाम तेजी से उभर रहा है — Optimized Electrotech। यह कंपनी, जो उन्नत इमेजिंग और निगरानी तकनीक (Surveillance Technology) पर काम करती है, ने Series A फंडिंग राउंड में $6 मिलियन (लगभग ₹50 करोड़) जुटाए हैं। इस निवेश का नेतृत्व Blume Ventures और Mela Ventures ने संयुक्त रूप से किया, जबकि 9Unicorns और मौजूदा निवेशक Rajiv Dadlani Group तथा Venture Catalysts ने भी भागीदारी की।


📈 Optimized Electrotech अब तक की कुल फंडिंग $10.5 मिलियन के पार

इससे पहले Optimized Electrotech अपने मौजूदा निवेशकों से $4.5 मिलियन जुटा चुकी है। इस ताजा फंडिंग के साथ कंपनी की कुल फंडिंग $10.5 मिलियन (₹87 करोड़) के करीब पहुंच चुकी है।


🧠 कंपनी क्या करती है?

2017 में स्थापित इस अहमदाबाद आधारित कंपनी का नेतृत्व संदीप शाह और धरिन शाह कर रहे हैं। Optimized Electrotech एक डीप-टेक डिफेंस और इमेजिंग सर्विलांस सॉल्यूशंस कंपनी है, जो AI-संचालित इलेक्ट्रो-ऑप्टिक सिस्टम्स विकसित करती है। ये सिस्टम्स:

  • सुरक्षा बलों को सीमाओं और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी में मदद करते हैं
  • स्पेस-बेस्ड हाइपरस्पीड सर्विलांस के लिए काम करते हैं
  • रीयल-टाइम इंटेलिजेंस प्रदान करते हैं
  • ड्रोन हमलों जैसी खतरनाक घटनाओं की पहचान और प्रतिक्रिया की क्षमता को बढ़ाते हैं

🎯 फंडिंग का उद्देश्य क्या है?

कंपनी ने प्रेस रिलीज में बताया कि इस फंडिंग का उपयोग निम्नलिखित कार्यों के लिए किया जाएगा:

  1. AI आधारित अगली पीढ़ी की इमेजिंग टेक्नोलॉजी का विकास
  2. हाई-स्पीड स्पेस सर्विलांस सॉल्यूशंस को डेवलप करना
  3. ग्लोबल मार्केट्स में प्रवेश और विस्तार
  4. देश की सामरिक और रणनीतिक क्षमताओं को मजबूत करना

🛡️ कहां होती है तकनीक का इस्तेमाल?

Optimized Electrotech की तकनीक मुख्यतः निम्न क्षेत्रों में इस्तेमाल होती है:

  • रक्षा सेवाएं (Defence Forces)
  • अंतरिक्ष निगरानी (Space Surveillance)
  • सीमा सुरक्षा (Border Security)
  • पैरामिलिट्री फोर्सेस
  • निगरानी और खनन कंपनियां (Mining & Infrastructure)
  • सिविक बॉडीज़ व एयरपोर्ट्स

इन क्षेत्रों में कंपनी की Electro-Optic Imaging टेक्नोलॉजी सुरक्षा और प्रतिक्रिया समय में जबरदस्त सुधार लाती है।


🔍 Indigenous Innovation और ‘Make in India’ का समर्थन

कंपनी पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा दे रही है। संदीप शाह, संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक, ने कहा:

“सरकार की मजबूत नीतियों और स्वदेशी तकनीक को प्रोत्साहन देने वाली योजनाओं ने हमारे लिए यह एक सुनहरा मौका बना दिया है। यह फंडिंग हमारे निवेशकों के विश्वास का प्रमाण है। अब हमारा लक्ष्य भारत की सामरिक क्षमताओं को और मजबूत करना है।”


🌍 ग्लोबल विस्तार की योजना

Optimized Electrotech अब न केवल भारत में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी तकनीक को ले जाना चाहती है। इस फंडिंग से कंपनी अपनी R&D क्षमताओं के साथ-साथ ग्लोबल डिफेंस टेक्नोलॉजी मार्केट में अपनी उपस्थिति मजबूत करेगी।


🏢 प्रमुख प्रतिस्पर्धी कौन हैं?

भारत में इस सेगमेंट में फिलहाल कुछ ही उल्लेखनीय खिलाड़ी हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • Tonbo Imaging
  • Tata Advanced Systems Limited (TASL)

हालांकि Optimized Electrotech ने अपने यूनिक टेक्नोलॉजी स्टैक और क्लियर विज़न के साथ खुद को इस प्रतिस्पर्धा में प्रमुख स्थान पर रखा है।


📊 रणनीतिक महत्व

आज जब भारत राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमाओं की निगरानी, और ड्रोन-अटैक्स से बचाव जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में Optimized Electrotech जैसे स्टार्टअप्स का योगदान बेहद अहम हो जाता है।

इनकी तकनीक:

  • स्थिति की तुरंत पहचान (Real-Time Situational Awareness)
  • खतरे का आकलन और त्वरित प्रतिक्रिया
  • डाटा एनालिटिक्स आधारित निर्णय
    प्रदान करती है, जो सामरिक निर्णयों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।

🔮 भविष्य की दिशा

इस फंडिंग के बाद Optimized Electrotech के प्रमुख लक्ष्य होंगे:

✅ अगली पीढ़ी के Electro-Optic Payloads बनाना
✅ स्वदेशी सैन्य तकनीकों का उत्पादन
✅ ग्लोबल B2G (Business to Government) बाजार में प्रवेश
✅ AI-ड्रिवन एनालिटिक्स को इंटीग्रेट करना
✅ हाई-ऑल्टीट्यूड, लो-लैटेंसी निगरानी समाधानों पर काम करना


📌 निष्कर्ष

Optimized Electrotech ने एक ऐसा क्षेत्र चुना है जो भारत की सुरक्षा, तकनीकी आत्मनिर्भरता और रक्षा रणनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। $6 मिलियन की यह फंडिंग न केवल इसके तकनीकी रोडमैप को आगे बढ़ाएगी, बल्कि भारत को एक सुरक्षित, स्मार्ट और स्वदेशी निगरानी प्रणाली की दिशा में एक मजबूत कदम भी सिद्ध होगी।


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Read more :🦷 Cura Care ने जुटाए ₹5 करोड़ की फंडिंग,

🦷 Cura Care ने जुटाए ₹5 करोड़ की फंडिंग,

Cura Care

भारत में घरेलू वेलनेस सेवाओं की बढ़ती मांग के बीच, एक नया नाम उभर कर सामने आया है — CURA CARE। यह ब्रांड अब भारतीय उपभोक्ताओं के लिए ओरल हाइजीन (दंत स्वच्छता) को घर तक पहुंचाने की दिशा में बड़ी छलांग लगा रहा है। Zeropearl VC के नेतृत्व में हुए प्री-सीड फंडिंग राउंड में Cura Care ने ₹5 करोड़ जुटाए हैं

इस राउंड में परिवार, दोस्तों और कई प्रमुख एंजेल निवेशकों — जिनमें श्रिपद नाडकर्णी और दिवंगत रोहन मिर्चंदानी शामिल हैं — ने भी भाग लिया।


🧬 CURA CARE क्या है?

जनवरी 2025 में शुरू हुई यह कंपनी अभिनव कुमार, चिन्मय मित्तल और पमिंदर सिंह द्वारा सह-स्थापित की गई है। CURA CARE एक ऐसा ब्रांड है जो भारत में ओरल वेलनेस को एक रोज़मर्रा की सेल्फ-केयर आदत में बदलने का सपना देखता है।

📌 कंपनी के प्रमुख उद्देश्य:

  • भारत में ओरल हेल्थ से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना
  • गुणवत्तापूर्ण दंत सेवाएं घर पर देना
  • डिजिटल बुकिंग और प्रीमियम अनुभव उपलब्ध कराना

🦷 भारत में ओरल हेल्थ की स्थिति

एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 120 करोड़ से अधिक लोग ओरल हेल्थ समस्याओं से प्रभावित हैं। फिर भी ओरल वेलनेस को आज भी स्वास्थ्य के अन्य पहलुओं की तुलना में कम प्राथमिकता दी जाती है।

Cura Care का उद्देश्य इस मानसिकता को बदलना है और लोगों को सशक्त बनाना है कि वे अपने घर बैठे सुरक्षित, स्वच्छ और वैज्ञानिक दंत सेवाएं प्राप्त कर सकें।


🛋️ Cura Care की सेवाएं: दांतों की देखभाल अब आपके घर पर

Cura Care ग्राहकों को DCI-सर्टिफाइड डेंटिस्ट्स के ज़रिए घर पर ही दांतों की सफाई, स्केलिंग, पॉलिशिंग और व्हाइटनिंग जैसी सेवाएं प्रदान करता है।

💼 ये सेवाएं कस्टमाइज़्ड पोर्टेबल डेंटल यूनिट्स के माध्यम से दी जाती हैं, जो पूरी तरह से हाइजीन और सुरक्षा मानकों का पालन करती हैं।

🔍 कंपनी का फोकस है:

  • उच्च गुणवत्ता
  • समय की बचत
  • सुविधाजनक अनुभव
  • वैज्ञानिक और विश्वसनीय सेवा

💸 फंडिंग का उपयोग कहाँ होगा?

कंपनी द्वारा जारी प्रेस रिलीज़ के अनुसार, इस फंडिंग का उपयोग निम्नलिखित क्षेत्रों में किया जाएगा:

  1. प्रोडक्ट-मार्केट फिट को वेरिफाई करना
  2. कस्टमर एक्सपीरियंस को और बेहतर बनाना
  3. ऑपरेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करना
  4. सेवा विस्तार के लिए मार्केट रिसर्च और टीम निर्माण

📊 बाजार का आकार: बड़ा अवसर

भारत का वेलनेस मार्केट इस समय $60 बिलियन से अधिक का है और तेजी से बढ़ रहा है। खासकर Post-COVID दौर में घरेलू हेल्थ और हाइजीन सेवाओं की मांग में भारी वृद्धि हुई है।

Cura Care इस तेजी से बढ़ते बाजार में ओरल वेलनेस को केंद्र में रखकर प्रवेश कर रहा है, जो अब तक इस सेगमेंट में एक अनछुआ क्षेत्र रहा है।


👥 अब तक की उपलब्धियां

🔸 कंपनी ने अब तक 1,000 से अधिक ग्राहकों को सेवा दी है, जिनमें घर पर विज़िट्स और ओरल वेलनेस कैंप्स शामिल हैं।

🔸 Cura Care का Net Promoter Score (NPS) 90% से अधिक है, जो ग्राहक संतुष्टि का स्पष्ट संकेत है।

🔸 कंपनी की औसत ग्राहक रेटिंग 4.87 स्टार है, जो इसके सेवा की गुणवत्ता और भरोसे को दर्शाता है।


📈 बिजनेस मॉडल की ताकत

Cura Care का मॉडल निम्न विशेषताओं पर आधारित है:

एसेट-लाइट: पोर्टेबल यूनिट्स और ऑन-डिमांड डेंटिस्ट नेटवर्क
डायरेक्ट-टू-कस्टमर (D2C) प्लेटफॉर्म
सब्सक्रिप्शन और ऑन-डिमांड बुकिंग की सुविधा
डिजिटल अपॉइंटमेंट और ट्रैकिंग सिस्टम

इस मॉडल के कारण कंपनी स्केलेबिलिटी और कस्टमर रिटेंशन दोनों में आगे है।


🧠 निवेशकों का दृष्टिकोण

Zeropearl VC और अन्य एंजेल निवेशकों का मानना है कि Cura Care एक ऐसे सेगमेंट को टार्गेट कर रहा है जो अब तक भारतीय बाजार में कम ध्यान में रहा है, लेकिन बेहद जरूरी है।

Cura Care की ग्राउंड लेवल टीम, डेंटल साइंस की समझ, और टेक-ड्रिवन अप्रोच निवेशकों के भरोसे की बड़ी वजह बनी।


🔮 आगे की रणनीति

Cura Care अब निम्नलिखित लक्ष्यों पर काम कर रही है:

📌 10 शहरों में विस्तार
📌 कॉर्पोरेट वेलनेस प्रोग्राम्स के ज़रिए बी2बी सेगमेंट में प्रवेश
📌 AI-बेस्ड डायग्नोस्टिक टूल्स और प्रीवेंटिव डेंटल प्रोग्राम्स का विकास
📌 स्टेप-अप प्रोडक्ट्स — जैसे ओरल केयर किट्स, प्रीमियम टूथब्रश, माउथवॉश आदि


📌 निष्कर्ष

Cura Care ने एक ऐसा क्षेत्र चुना है, जो भारतीय स्वास्थ्य सेवाओं में अक्सर नज़रअंदाज़ किया गया है — लेकिन बेहद अहम है। ₹5 करोड़ की ताज़ा फंडिंग, मजबूत फाउंडर टीम और प्रामाणिक विज़न के साथ यह स्टार्टअप भारत में ओरल वेलनेस को “घरेलू देखभाल” का हिस्सा बनाने की दिशा में एक साहसिक और स्वागतयोग्य कदम है।


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Read more :🏋️‍♂️ Rinku Singh ने BeastLife में ₹1.9 करोड़ का निवेश किया,

🏋️‍♂️ Rinku Singh ने BeastLife में ₹1.9 करोड़ का निवेश किया,

BeastLife

भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह ने हाल ही में फिटनेस और स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन ब्रांड Beastlife में ₹1.9 करोड़ का निवेश किया है। यह निवेश कंपनी की ₹120 करोड़ की वैल्यूएशन पर हुआ है। BeastLife ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि रिंकू अब न केवल एक निवेशक के रूप में, बल्कि एक एक्टिव ब्रांड एंबेसडर के रूप में ब्रांड की ग्रोथ में भी सहयोग देंगे।

यह निवेश इस ब्रांड के लिए न केवल पूंजी का संचार है, बल्कि एक मजबूत विश्वास का संकेत है जो अब खेल जगत के सितारों तक पहुंच चुका है।


🧬 Beastlife क्या है?

Beastlife एक भारतीय स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन और फिटनेस ब्रांड है, जिसकी शुरुआत 2024 में गौरव तनेजा और राज विक्रम गुप्ता ने की थी। यह एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जो जिम जाने वाले युवाओं, प्रोफेशनल एथलीट्स और फिटनेस के प्रति जागरूक लोगों के लिए सप्लिमेंट्स और न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स बेचता है।

💊 इसके प्रमुख उत्पादों में शामिल हैं:

  • Protein Supplements
  • BCAA (Branched Chain Amino Acids)
  • Creatine
  • Multivitamins
  • Roti Protein Mix — रोज़मर्रा के खाने में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने के लिए

💡 ब्रांड का विज़न: फिटनेस से आगे

BeastLife सिर्फ सप्लिमेंट्स बेचने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य है —

फिटनेस गोल्स को अचीव करने में लोगों को सक्षम बनाना और उनकी सीमाओं को पार करवाना।

यह ब्रांड साइंस-आधारित, प्रमाणिक और असरदार न्यूट्रिशन सप्लिमेंट्स बनाता है, जिससे यूज़र्स को रियल रिजल्ट्स मिल सकें। इसके कई प्रोडक्ट्स, जैसे Pro Concentrate Whey Protein with Ultrasorb Tech, मसल रिकवरी और परफॉर्मेंस को बेहतर करने के लिए डिजाइन किए गए हैं।


🏏 रिंकू सिंह का समर्थन: खेल और न्यूट्रिशन का संगम

रिंकू सिंह ने निवेश करते हुए कहा:

“BeastLife केवल सप्लिमेंट्स से बढ़कर है। यह एक ऐसा विज़न है जो भारत में विश्वस्तरीय न्यूट्रिशन को सुलभ बनाना चाहता है। मैंने खुद इस ब्रांड के प्रभाव को महसूस किया और मुझे गर्व है कि मैं इसका हिस्सा बन रहा हूं।”

रिंकू का समर्थन ब्रांड के लिए एक बड़ी वैलिडेशन है, खासकर उनके जैसे पेशेवर एथलीट से, जिनकी परफॉर्मेंस डायरेक्ट न्यूट्रिशन से जुड़ी होती है।


📈 अब तक का सफर: ₹50 करोड़ GMV और ₹80 करोड़ का ARR

BeastLife ने 1 साल से थोड़े अधिक समय में ₹50 करोड़ का GMV (Gross Merchandise Value) अचीव कर लिया है।

➡️ ब्रांड ने पॉजिटिव EBITDA के साथ यह प्रदर्शन किया है।
➡️ फिलहाल, यह ₹80 करोड़ के एनुअल रन रेट (ARR) को ट्रैक कर रहा है।
➡️ सबसे खास बात — इसका परफॉर्मेंस मार्केटिंग खर्च सिर्फ 15% के भीतर रहा है, जो डिजिटल ब्रांड्स के लिए एक बेहतरीन इकनॉमिक संकेत है।


📊 ओनरशिप स्ट्रक्चर

BeastLife में वर्तमान इक्विटी वितरण इस प्रकार है:

  • गौरव तनेजा – 40%
  • राज गुप्ता – 15%
  • वरुण अलाघ (Mamaearth के को-फाउंडर) – 30%
  • ESOP पूल – 15%

इस स्ट्रक्चर से यह स्पष्ट है कि कंपनी में अनुभवी और वेल-नेटवर्क्ड संस्थापक और निवेशक जुड़े हैं, जो इसके स्केलेबिलिटी को बढ़ावा देते हैं।


🏆 प्रतियोगिता में कहाँ खड़ा है BeastLife?

BeastLife का मुकाबला भारत के पहले से स्थापित फिटनेस ब्रांड्स से है, जिनमें शामिल हैं:

  • MuscleBlaze
  • Optimum Nutrition
  • GNC
  • The Whole Truth

हालांकि इन ब्रांड्स की मार्केट में पहले से पकड़ है, BeastLife ने इनोवेशन, क्वालिटी इंग्रीडिएंट्स, और एक स्टोरीटेलिंग-ड्रिवन ब्रांड अप्रोच के ज़रिए अपनी अलग पहचान बनानी शुरू कर दी है।


🔍 क्यों यह निवेश खास है?

  1. सेलिब्रिटी इन्वॉल्वमेंट – रिंकू सिंह जैसे क्रिकेटर का इन्वेस्टमेंट युवाओं में ट्रस्ट बढ़ाता है।
  2. तेजी से बढ़ता सेगमेंट – हेल्थ और फिटनेस सप्लिमेंट इंडस्ट्री भारत में साल दर साल दोगुनी गति से बढ़ रही है।
  3. साइंस-बेस्ड प्रोडक्ट डेवलपमेंट – Ultrasorb Tech जैसी इनोवेशन ब्रांड को प्रीमियम बनाती है।
  4. मार्केटिंग एफिशिएंसी – कम खर्च में उच्च GMV और ARR का मतलब है शानदार यूनिट इकनॉमिक्स।

🔮 आगे की रणनीति

BeastLife का अगला लक्ष्य होगा:

  • भारत के अलावा अंतरराष्ट्रीय मार्केट्स में एक्सप्लोर करना
  • नए प्रोडक्ट कैटेगरीज़ जैसे वुमन फिटनेस, बच्चों की न्यूट्रिशन में विस्तार
  • ब्रांड कम्युनिटी बनाना — फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स और जिम ट्रेनर्स के साथ साझेदारी
  • फिजिकल रिटेल प्रेजेंस या एक्सपीरियंस सेंटर की योजना

📌 निष्कर्ष

BeastLife का यह ताज़ा फंडरेज़ और क्रिकेटर रिंकू सिंह की साझेदारी इस बात का संकेत है कि अब भारत का न्यूट्रिशन मार्केट सेलिब्रिटी ब्रांडिंग से निकलकर क्वालिटी और ट्रस्ट पर शिफ्ट हो रहा है।

इसका तेजी से बढ़ता GMV और पॉजिटिव मार्जिन्स इस ब्रांड को D2C न्यूट्रिशन स्पेस का अगला पावरहाउस बना सकता है।


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Read more :⚡Okinawa Autotech की गिरती रफ्तार FY24 में 84% गिरावट, ₹50 करोड़ का घाटा

⚡Okinawa Autotech की गिरती रफ्तार FY24 में 84% गिरावट, ₹50 करोड़ का घाटा

Okinawa Autotech

Okinawa Autotech जो कभी भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट में अग्रणी ब्रांड माना जाता था, अब गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) में कंपनी का राजस्व 84% तक घट गया, और उसे ₹50 करोड़ का घाटा उठाना पड़ा। यह गिरावट भारत में ईवी सेक्टर की चुनौतियों और बदलती प्रतिस्पर्धा को दर्शाती है।


📉 Okinawa Autotech FY24 में बड़ा झटका: रेवेन्यू में 84% की गिरावट

कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू FY23 में ₹1,144 करोड़ था, जो FY24 में घटकर सिर्फ ₹182 करोड़ रह गया।

इस भारी गिरावट का प्रमुख कारण था — बिक्री में आई तेज़ गिरावट।

  • FY23 में कुल बिक्री: 95,931 यूनिट्स
  • FY24 में घटकर: 20,873 यूनिट्स

📉 मार्केट शेयर में भी बड़ी गिरावट

Okinawa Autotech का मार्केट शेयर भी FY23 के 13.17% से गिरकर FY24 में 2.20% पर आ गया।

वहीं FY25 की शुरुआत में (अब तक) कंपनी सिर्फ 3,548 यूनिट्स बेच पाई है, और उसका मार्केट शेयर 0.31% तक सिमट चुका है।


🛵 कौन हैं Okinawa के प्रमुख प्रोडक्ट्स?

Okinawa की पहचान उसके बजट-फ्रेंडली और शहर के उपयोग के लिए उपयुक्त इलेक्ट्रिक स्कूटर्स से रही है। इसके प्रमुख मॉडल्स में शामिल हैं:

  • PraisePro
  • iPraise+
  • Okhi-90
  • Ridge+
  • Lite
  • R3

हालांकि, बढ़ते कॉम्पिटिशन और क्वालिटी संबंधित मुद्दों ने ब्रांड की छवि को गहरा नुकसान पहुँचाया है।


💸 खर्चों में आई कटौती, फिर भी घाटा भारी

गिरते स्केल के चलते कंपनी ने खर्चों में भारी कटौती की:

  • प्रोक्योरमेंट कॉस्ट ₹859 करोड़ (FY23) से घटकर ₹171 करोड़ (FY24) – 80% की गिरावट
  • कर्मचारी खर्च 16% घटकर ₹26 करोड़
  • विज्ञापन खर्च 88% घटकर ₹4 करोड़
  • अन्य खर्चे (फ्रेट, वारंटी, किराया आदि) मिलाकर FY24 में कुल खर्च ₹251 करोड़ रहा (FY23 में ₹991 करोड़)

📉 बावजूद इसके, FY24 में कंपनी को ₹52 करोड़ का नुकसान झेलना पड़ा।


📊 फाइनेंशियल परफॉर्मेंस: निगेटिव मार्जिन्स

  • FY23 में EBITDA: ₹166 करोड़ (पॉजिटिव)
  • FY24 में EBITDA मार्जिन: -25.8%
  • ROCE (Return on Capital Employed): -102%
  • हर ₹1 की कमाई पर कंपनी ने ₹1.38 खर्च किया।

FY24 के अंत में Okinawa की कुल करंट एसेट्स ₹276 करोड़ थीं, जिसमें बैंक और नकद बैलेंस शामिल है।


⚔️ बाज़ार में बढ़ता कॉम्पिटिशन

Okinawa अब Ola Electric, Ather Energy, और Hero Electric जैसी कंपनियों के सामने कमजोर पड़ती नजर आ रही है।

  • Ola Electric ने FY25 की तीसरी तिमाही में ₹1,045 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया।
  • Ather IPO के जरिए ₹3,100 करोड़ जुटाने की तैयारी में है।
  • पारंपरिक टू-व्हीलर ब्रांड्स जैसे Bajaj, Hero, और TVS भी इलेक्ट्रिक सेगमेंट में आ चुके हैं।

🔥 गिरावट के पीछे की वजहें

  1. फायर सेफ्टी से जुड़े विवाद: Okinawa की कुछ स्कूटर्स में आग लगने की घटनाएं उपभोक्ताओं के भरोसे को तोड़ गईं।
  2. नियमों में सख्ती: सरकारी सब्सिडी और क्वालिटी स्टैंडर्ड्स में बदलाव से कंपनी को नुकसान हुआ।
  3. ग्राहक भरोसे में गिरावट: कंज्यूमर अब बेहतर फीचर्स और सुरक्षा वाले ब्रांड्स की ओर झुक रहे हैं।
  4. उन्नत प्रतियोगी: Ola, Ather जैसे ब्रांड बेहतर टेक्नोलॉजी और UX के साथ बाजार में मौजूद हैं।

🔮 भविष्य की राह: क्या Okinawa वापसी कर पाएगा?

Okinawa को अगर वापसी करनी है तो उसे निम्न बिंदुओं पर फोकस करना होगा:

प्रोडक्ट क्वालिटी और सेफ्टी सुधार
रिटेल और सर्विस नेटवर्क को मजबूत बनाना
टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन में निवेश
सरकार के साथ बेहतर अनुपालन (compliance)
ग्राहक विश्वास को दोबारा बनाना

वहीं EV सेक्टर की तेजी से बदलती पॉलिसी और टेक्नोलॉजी की दुनिया में कंसिस्टेंसी और नवाचार ही सफलता की कुंजी बनते जा रहे हैं।


📝 निष्कर्ष

Okinawa Autotech का FY24 प्रदर्शन दिखाता है कि EV बाजार अब परिपक्व हो रहा है, और अब इसमें टिके रहना उतना ही चुनौतीपूर्ण है जितना इसमें प्रवेश करना।

जहां एक ओर नए ब्रांड्स तकनीक, ग्राहक अनुभव और ब्रांडिंग पर ध्यान दे रहे हैं, वहीं पुरानी कंपनियों को अब खुद को फिर से परिभाषित करने की जरूरत है।

क्या Okinawa फिर से अपने सुनहरे दौर में लौट पाएगा?
ये आने वाले वर्षों में कंपनी की रणनीति और उपभोक्ताओं के भरोसे पर निर्भर करेगा।


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Read more :🐶 Just Dogs का FY24 प्रदर्शन: रेवेन्यू में 32% की ग्रोथ,

🐶 Just Dogs का FY24 प्रदर्शन: रेवेन्यू में 32% की ग्रोथ,

Just Dogs

 pet care रिटेल ब्रांड JUST DOGS ने वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) में अपने राजस्व में जोरदार बढ़त दर्ज की है, लेकिन मुनाफे के मोर्चे पर कंपनी को झटका लगा है। अहमदाबाद स्थित इस स्टार्टअप ने जहां एक ओर ₹94 करोड़ का कुल रेवेन्यू कमाया, वहीं इसका घाटा बढ़कर ₹11 करोड़ तक पहुंच गया।


📊 JUSTDOGS रेवेन्यू ग्रोथ रही दमदार, 32% की बढ़त

FY24 में JUSTDOGS ने ₹94 करोड़ का ऑपरेशनल रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले वर्ष (FY23) के ₹71 करोड़ के मुकाबले 32% अधिक है।

कंपनी की शुरुआत 2011 में हुई थी, और आज यह भारत में पेट फूड, सप्लीमेंट्स, एक्सेसरीज़ और ग्रूमिंग प्रोडक्ट्स का बड़ा ब्रांड बन चुका है। Just Dogs न केवल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सक्रिय है, बल्कि इसका ऑफलाइन स्टोर नेटवर्क भी तेजी से बढ़ रहा है।


🍖 पेट फूड बना रेवेन्यू का प्रमुख स्रोत

Just Dogs की कुल आमदनी में सबसे बड़ा योगदान डॉग फूड कैटेगरी का रहा, जिससे FY24 में ₹66 करोड़ की कमाई हुई — यह FY23 की तुलना में 47% की ग्रोथ है।

🔸 पेट ट्रीट्स से ₹10 करोड़
🔸 ग्रूमिंग प्रोडक्ट्स से ₹2 करोड़
🔸 वहीं, सर्विसेज से रेवेन्यू गिरकर ₹16 करोड़ रह गया, जो पिछले वर्ष ₹17.5 करोड़ था।


💸 खर्चों में तेज़ी से इजाफा

FY24 में Just Dogs के कुल खर्च ₹106 करोड़ तक पहुंच गए, जो FY23 के ₹72 करोड़ से 47% अधिक हैं।

🔻 मैटेरियल कॉस्ट (कच्चा माल) सबसे बड़ा खर्च रहा — ₹67 करोड़, जो कुल खर्च का लगभग दो-तिहाई है।
🔻 कर्मचारी लाभ खर्च ₹13 करोड़ — 62.5% की बढ़ोतरी
🔻 मार्केटिंग खर्च ₹6 करोड़ और
🔻 रेंट खर्च ₹10 करोड़ — दोनों दोगुने हो गए
🔻 अन्य ऑपरेशनल खर्च भी ₹10 करोड़ रहे

कंपनी ने ग्रोथ के लिए आक्रामक रणनीति अपनाई, लेकिन खर्च ने रेवेन्यू ग्रोथ से आगे निकलकर घाटा बढ़ा दिया।


📉 घाटे में बड़ा उछाल: ₹6 लाख से ₹11 करोड़

जहां FY23 में कंपनी का घाटा मात्र ₹6 लाख था, वहीं FY24 में यह आंकड़ा बढ़कर ₹11 करोड़ तक पहुंच गया।

📉 ROCE (Return on Capital Employed): -25.12%
📉 EBITDA मार्जिन: -10.21%

यूनिट लेवल पर, कंपनी ने हर ₹1 कमाई के लिए ₹1.13 खर्च किए, जो FY23 में ₹1.01 था।

यह संकेत देता है कि ऑपरेशनल कुशलता पर अभी भी काम करने की ज़रूरत है।


🏦 बैलेंस शीट की स्थिति

Just Dogs के पास FY24 के अंत तक कुल ₹43 करोड़ मूल्य की करंट एसेट्स थीं। इनमें से ₹8 करोड़ कैश और बैंक बैलेंस के रूप में हैं।

इससे यह साफ होता है कि कंपनी के पास अल्पकालिक फाइनेंशियल स्थिरता बनाए रखने के लिए पर्याप्त बैकअप है, लेकिन घाटे को कम करने की दिशा में ठोस रणनीति की जरूरत है।


🧠 क्या बना नुकसान का कारण?

  1. आक्रामक विस्तार नीति: नए स्टोर्स, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निवेश
  2. मार्केटिंग और किराए में भारी इजाफा
  3. सर्विस रेवेन्यू में गिरावट
  4. कर्मचारियों पर खर्च में भारी बढ़ोतरी

इन सब ने मिलकर कंपनी के खर्चों को रेवेन्यू ग्रोथ से आगे कर दिया।


🐾 ब्रांड की दिशा: ‘फुल स्टैक पेटकेयर एक्सपीरियंस’

Just Dogs केवल प्रोडक्ट्स बेचने तक सीमित नहीं है। कंपनी का उद्देश्य है कि वह पेट पैरंट्स को फुल स्टैक एक्सपीरियंस दे सके — जिसमें फूड, ग्रूमिंग, हेल्थ सपोर्ट, ट्रेनिंग और सर्विसेस सब शामिल हों।

इस उद्देश्य से कंपनी अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म को और इंटिग्रेटेड और सहज बना रही है।


🔮 आगे की राह

कंपनी को अब इन बिंदुओं पर ध्यान देना होगा:

  • सर्विस सेगमेंट को फिर से मजबूती देना
  • खर्चों में कटौती और कुशलता लाना
  • यूनिट इकनॉमिक्स में सुधार करना
  • मार्जिन बढ़ाने के लिए प्रीमियम प्रोडक्ट्स और सब्सक्रिप्शन मॉडल पर विचार

📌 निष्कर्ष

Just Dogs ने FY24 में रेवेन्यू के मोर्चे पर तो शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन भारी खर्चों ने मुनाफे की राह में ब्रेक लगा दिया।

अगर कंपनी अपने खर्चों को कंट्रोल कर, सर्विस सेगमेंट को पुनः सक्रिय करती है — तो वह आने वाले वर्षों में भारत का अग्रणी पेट केयर ब्रांड बन सकती है।


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