Union Budget 2026–27 में सरकार ने स्टार्टअप्स, MSMEs और SMEs को केंद्र में रखते हुए कई अहम घोषणाएँ की हैं। इस बजट का फोकस साफ तौर पर फंडिंग की उपलब्धता, क्रेडिट सपोर्ट, मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा, और रेगुलेटरी आसानियाँ देने पर रहा है। मौजूदा वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और प्रतिस्पर्धी माहौल को देखते हुए यह बजट भारत के उद्यमशील इकोसिस्टम को नई मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
🚀 स्टार्टअप्स के लिए ₹10,000 करोड़ का नया फंड
बजट 2026–27 की सबसे बड़ी घोषणाओं में से एक है Fund of Funds for Startups (FFS) के लिए ₹10,000 करोड़ का नया आवंटन। यह राशि SEBI-रजिस्टर्ड वेंचर कैपिटल और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) के जरिए स्टार्टअप्स में निवेश की जाएगी।
इस फंड का उद्देश्य खासतौर पर:
- अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स को शुरुआती पूंजी उपलब्ध कराना
- ग्रोथ-स्टेज कंपनियों को स्केल करने में मदद करना
- प्राइवेट कैपिटल को आकर्षित करना
सरकार की यह रणनीति स्टार्टअप्स में सीधे निवेश करने के बजाय प्रोफेशनल फंड मैनेजर्स के जरिए पूंजी पहुंचाने की है, जिससे निवेश ज्यादा प्रभावी और बाजार-उन्मुख बन सके।
🏭 MSMEs के लिए ग्रोथ और रेज़िलिएंस फंड
MSME सेक्टर को मजबूत करने के लिए बजट में ₹10,000 करोड़ का MSME Growth and Resilience Fund प्रस्तावित किया गया है। इस फंड का मकसद MSMEs को वैश्विक व्यापार दबाव, सप्लाई चेन डिसरप्शन, और आर्थिक झटकों से निपटने में मदद करना है।
खास तौर पर वे स्टार्टअप्स जो:
- MSME के तहत रजिस्टर्ड हैं
- मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में काम कर रहे हैं
- एक्सपोर्ट-लिंक्ड बिजनेस मॉडल पर आधारित हैं
उन्हें इस फंड से सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। यह पहल भारत को एक मजबूत मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब बनाने के विज़न के अनुरूप है।
🧬 बायोफार्मा सेक्टर के लिए ‘Biopharma Shakti’
सरकार ने Biopharma Shakti नाम से ₹10,000 करोड़ का एक विशेष प्रोग्राम लॉन्च करने का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य भारत में डोमेस्टिक बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है।
इस कार्यक्रम के तहत:
- रिसर्च और इनोवेशन को फंडिंग
- पायलट प्रोजेक्ट्स से लेकर कमर्शियल स्केल-अप तक सपोर्ट
- मैन्युफैक्चरिंग और प्रोडक्शन फैसिलिटीज की स्थापना
भारत पहले ही जेनेरिक दवाओं और वैक्सीन मैन्युफैक्चरिंग में वैश्विक पहचान बना चुका है। यह पहल भारत को हाई-वैल्यू बायोफार्मा और इनोवेटिव ड्रग डेवलपमेंट में भी आगे ले जाने की कोशिश है।
🔌 इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पर जोर
इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को मजबूत करने के लिए सरकार ने Electronic Component Manufacturing Scheme (ECMS) के तहत आवंटन को लगभग दोगुना करते हुए ₹40,000 करोड़ करने की घोषणा की है। पिछले साल इस योजना के लिए ₹22,919 करोड़ स्वीकृत किए गए थे।
इसके अलावा, वित्त मंत्री ने India Semiconductor Mission के दूसरे चरण की शुरुआत की भी घोषणा की। पहले चरण के तहत घोषित फंड्स अब लगभग समाप्त होने के करीब हैं, ऐसे में यह कदम भारत को सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
☁️ डेटा सेंटर और क्लाउड सेक्टर को टैक्स राहत
एक अहम और दूरगामी घोषणा के तहत सरकार ने भारत में डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करने वाले विदेशी क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स को 2047 तक टैक्स हॉलिडे देने का प्रस्ताव रखा है।
इस कदम से:
- भारत में डेटा सेंटर निवेश बढ़ेगा
- क्लाउड और AI स्टार्टअप्स को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा
- भारत डिजिटल इकोनॉमी का ग्लोबल हब बन सकता है
🎨 क्रिएटर इकोनॉमी और ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ पर फोकस
बजट में Indian Institute of Creative Technologies, मुंबई को सपोर्ट देने की घोषणा भी की गई है। इसके तहत:
- 15,000 स्कूलों और
- 500 कॉलेजों में AVGC (Animation, Visual Effects, Gaming, Comics) और कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित की जाएंगी
सरकार का लक्ष्य 2030 तक 20 लाख नौकरियाँ पैदा करने का है, जिससे ऑरेंज इकोनॉमी यानी क्रिएटिव और डिजिटल कंटेंट सेक्टर को बड़ा बूस्ट मिलेगा।
🔍 कुल मिलाकर बजट क्या संकेत देता है?
यूनियन बजट 2026–27 साफ संकेत देता है कि सरकार:
- स्टार्टअप्स को आर्थिक मजबूती देना चाहती है
- MSMEs को ग्लोबल प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रही है
- मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और क्रिएटिव सेक्टर को भविष्य का इंजन मान रही है
हालांकि, इन योजनाओं की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि फंड्स का क्रियान्वयन कितनी तेजी और पारदर्शिता से होता है। अगर सही तरीके से लागू किया गया, तो यह बजट भारत के स्टार्टअप और इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। 🇮🇳✨
Read more :🚚 Delhivery के Q3 FY26 नतीजे 18% रेवेन्यू ग्रोथ और 59% मुनाफे की छलांग 📈