🚀 इस भारतीय स्टार्टअप्स फंडिंग में 52% गिरावट, केवल $173.48M जुटे

भारतीय स्टार्टअप्स

भारतीय स्टार्टअप्स इकोसिस्टम में इस हफ्ते (लीड 27 सितंबर) कुल 33 स्टार्टअप्स ने $173.48 मिलियन (करीब ₹1,445 करोड़) की फंडिंग जुटाई। इनमें 4 ग्रोथ-स्टेज और 25 अर्ली-स्टेज डील्स शामिल रहीं, जबकि 3 स्टार्टअप्स ने अपनी फंडिंग डिटेल्स पब्लिक नहीं कीं।

पिछले हफ्ते के मुकाबले यह फंडिंग 52% कम रही। उस समय 21 स्टार्टअप्स ने लगभग $361.5 मिलियन की पूंजी जुटाई थी।


📉 ग्रोथ-स्टेज डील्स: $60M तक सीमित

ग्रोथ और लेट-स्टेज फंडिंग इस हफ्ते गिरकर $60 मिलियन पर आ गई, जबकि पिछले हफ्ते यह $320 मिलियन थी।

  • 🌱 Chakr Innovation (Cleantech) ने सबसे बड़ी $23 मिलियन Series C फंडिंग Iron Pillar के नेतृत्व में जुटाई।
  • 🍴 Curefoods ने ₹160 करोड़ ($18 मिलियन) प्री-IPO राउंड 3State Ventures से उठाया।
  • 🎓 Vedantu ने $11 मिलियन का राउंड क्लोज़ किया।
  • 🚜 KisanKonnect ने $8 मिलियन जुटाए।

🌟 अर्ली-स्टेज डील्स: निवेशकों का फोकस यहीं

इस हफ्ते अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स ने सबसे ज्यादा पैसा आकर्षित किया। 25 कंपनियों ने मिलकर $113.31 मिलियन जुटाए।

  • 🤖 Emergent (AI-पावर्ड ऐप बिल्डिंग प्लेटफॉर्म) ने $23 मिलियन Series A फंडिंग Lightspeed से हासिल की।
  • 🚀 Rocket (ऐप-बिल्डिंग प्लेटफॉर्म) ने $15 मिलियन जुटाए।
  • 🌾 Handpickd (Agritech), ⚡ Simple Energy (EV), 🧬 Distil (Biotech), 🪙 Gullak (Gold savings app) और 💳 Oolka (Fintech) ने भी फंडिंग हासिल की।

इसके अलावा Wow! Momo, Yuyiii, Hammer और Carbon Masters जैसे स्टार्टअप्स ने भी निवेश जुटाया, लेकिन राशि पब्लिक नहीं हुई।


🏙️ भारतीय स्टार्टअप्स सिटी-वाइज डील्स: बेंगलुरु सबसे आगे

  • बेंगलुरु: 14 डील्स
  • दिल्ली-NCR: 4 डील्स
  • अन्य शहर: मुंबई, सूरत, कोलकाता और हैदराबाद

📊 सेगमेंट-वाइज, ई-कॉमर्स स्टार्टअप्स 5 डील्स के साथ टॉप पर रहे। इनके अलावा AI, फूडटेक, एग्रीटेक, डीपटेक और फिनटेक सेक्टर्स ने भी मजबूत पकड़ बनाई।


💰 सीरीज-वाइज डील्स

  • Seed funding: 11 डील्स
  • Pre-seed: 8 डील्स
  • Series A, Pre-Series A, Series C: कुछ डील्स

📊 वीक-ऑन-वीक ट्रेंड

  • इस हफ्ते: $173.48M (33 डील्स)
  • पिछले हफ्ते: $361.5M (21 डील्स)
    👉 औसतन पिछले आठ हफ्तों में हर हफ्ते $271.15M फंडिंग और 26 डील्स हुईं।

👥 बड़े हायरिंग्स

  • Dhan ने Ketan Shah को CEO (Omni Channel Business) नियुक्त किया।
  • Allen Career Institute ने Rakesh Ranjan को CEO (Allen Online) बनाया।
  • Unacademy ने Sumit Jain को Test Prep बिज़नेस का हेड बनाया।
  • OneAssist Consumer Solutions ने Abhishek Maheshwari को नया CEO बनाया।

🏦 नए फंड लॉन्च

  • Frontier Tech Capital: $150M फंड (Growth-stage, SEA)
  • Chiratae Ventures: फंड V का दूसरा क्लोज़ $150M पर
  • Duro Capital: ₹200 Cr से ज्यादा कमिटमेंट्स
  • Good Capital: $30M (₹260 Cr) सेकंड फंड का फाइनल क्लोज़

🆕 नए लॉन्च और पार्टनरशिप्स

  • SeedlingLabs ने AI PDaaS प्लेटफॉर्म लॉन्च किया।
  • Unicommerce ने GST Guidance Tool लॉन्च किया।
  • PhysicsWallah ने LexGlobal (लीगल एजुकेशन) शुरू किया।

📑 वित्तीय नतीजे

  • DeHaat: FY25 में घाटा 15% घटकर ₹207 Cr
  • BharatPe: FY25 में EBITDA प्रॉफिटेबल, रेवेन्यू ₹1,667 Cr
  • WROGN: घाटे में बढ़ोतरी
  • Auxilo: ₹528 Cr रेवेन्यू, ₹112 Cr प्रॉफिट
  • Akumentis Healthcare: ₹66 Cr प्रॉफिट, 9% रेवेन्यू ग्रोथ
  • Purple Style Labs: फ्लैट रेवेन्यू, घाटा 36% बढ़ा
  • PhonePe: ₹7,115 Cr रेवेन्यू, ₹630 Cr प्रॉफिट
  • Ultrahuman: ₹565 Cr रेवेन्यू, ₹73 Cr प्रॉफिट

📰 इस हफ्ते की बड़ी खबरें

  • RBI ने डिजिटल पेमेंट्स के लिए नए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन नियम जारी किए (अप्रैल 2026 से लागू)।
  • Swiggy ने Rapido से एग्जिट कर 2.3X रिटर्न हासिल किया।
  • Founders Dilution: कई अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स ने Series A में 40%+ इक्विटी छोड़ी।
  • Purple Style Labs ने IPO के लिए DRHP फाइल किया (₹660 Cr)।
  • Finance Buddha को NSE Emerge से SME IPO की मंजूरी मिली।

🏁 निष्कर्ष

इस हफ्ते भारत के स्टार्टअप फंडिंग लैंडस्केप में तेज़ गिरावट देखने को मिली। हालांकि अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। वहीं, RBI के नए डिजिटल पेमेंट नियम और IPO पाइपलाइन आने वाले महीनों में इकोसिस्टम की दिशा तय करेंगे।

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🚀 PhysicsWallah का IPO फाइल: 3,820 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी

PhysicsWallah

भारत का चर्चित edtech unicorn PhysicsWallah (PW) अब स्टॉक मार्केट में एंट्री की तैयारी कर रहा है। कंपनी ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के साथ ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किया है, जिसके जरिए वह 3,820 करोड़ रुपये का फंड जुटाने जा रही है।

यह कदम ऐसे समय में आया है जब कंपनी ने बीते वित्त वर्ष में अपने राजस्व (Revenue) को तेज़ी से बढ़ाया और घाटे को बड़ी हद तक कम किया है।


📈 राजस्व में 49% की जबरदस्त वृद्धि

फाइनेंशियल रिपोर्ट के अनुसार, FY25 में PW का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 49% बढ़कर 2,887 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि FY24 में यह 1,941 करोड़ रुपये था।

  • ऑनलाइन कोचिंग: 965 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,404 करोड़ रुपये (45.5% ग्रोथ)
  • ऑफलाइन कोचिंग: 928 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,352 करोड़ रुपये (45.7% ग्रोथ)
  • हाइब्रिड और ऑफलाइन चैनल: अब कंपनी की कुल आय में 47% का योगदान कर रहे हैं।

इसके अलावा, होस्टल फीस से 88 करोड़ रुपये, और प्रोडक्ट सेल से 259 करोड़ रुपये (74% ग्रोथ) आए।


🌍 भारत ही रहा PW का मजबूत बाजार

भले ही PW ने दुबई और अमेरिका में ऑपरेशंस शुरू किए हों, लेकिन अभी भी इसकी 98.75% आय भारत से आती है।

  • भारत: 2,851 करोड़ रुपये
  • दुबई और USA मिलाकर: 36 करोड़ रुपये

👩‍🏫 टीचर्स और टीम में बड़ा विस्तार

FY25 में कंपनी के फैकल्टी सदस्यों की संख्या 5,096 हो गई, जो FY24 में 3,654 थी।

  • स्थायी शिक्षक: 4,207
  • कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर शिक्षक: 889

यह दिखाता है कि PW न केवल ऑनलाइन बल्कि ऑफलाइन और हाइब्रिड मोड में भी अपनी पकड़ मज़बूत कर रहा है।


💰 खर्चे और लागत प्रबंधन

  • सैलरी: 28% बढ़कर 1,426 करोड़ रुपये (कुल खर्च का 44%)
  • मार्केटिंग: 448 करोड़ रुपये
  • डिप्रिसिएशन: 366 करोड़ रुपये
  • मैटेरियल कॉस्ट: 123 करोड़ रुपये

फिर भी, कंपनी ने FY25 में अपने कुल खर्च को लगभग फ्लैट रखा – 3,265 करोड़ रुपये (FY24 में 3,279 करोड़ रुपये)।


📉 घाटे में बड़ी कमी, EBITDA हुआ पॉजिटिव

PW ने अपने घाटे (Loss) को भारी तौर पर घटा लिया है।

  • घाटा: FY24 में 1,131 करोड़ रुपये → FY25 में घटकर 243 करोड़ रुपये (78.5% कमी)
  • EBITDA: FY25 में 192.5 करोड़ रुपये का पॉजिटिव EBITDA, EBITDA मार्जिन 6.33%
  • यूनिट इकॉनॉमिक्स: हर 1 रुपये कमाने के लिए खर्च 1.13 रुपये (FY24 में 1.69 रुपये था)

📊 बैलेंस शीट और एसेट्स

  • करेंट एसेट्स: 2,237 करोड़ रुपये
  • कैश और बैंक बैलेंस: 175 करोड़ रुपये

यह आंकड़े दिखाते हैं कि कंपनी अपनी वित्तीय स्थिति को मज़बूत करने में सफल रही है।


🏛️ राजनीतिक फंडिंग का खुलासा

कंपनी ने DRHP में यह भी बताया कि उसने FY25 में 37 लाख रुपये राजनीतिक योगदान दिया।

  • CPI को: 28.7 लाख रुपये
  • BJP को: 5 लाख रुपये

🤝 ओनरशिप स्ट्रक्चर और निवेशक

  • अलख पांडेय और प्रतीक बूंद: 40.35% हिस्सेदारी (प्रत्येक)
  • WestBridge Capital: 7.8%
  • Hornbill Capital: 4.42%
  • GSV Ventures: 2.85%
  • Lightspeed: 1.79%

🎯 स्ट्रैटेजिक मूव्स और अधिग्रहण

PW ने हाल ही में UPSC कोचिंग इंस्टीट्यूट Sarrthi IAS में 40% हिस्सेदारी खरीदी है। यह अधिग्रहण कंपनी की रणनीति का हिस्सा है जिससे वह कोचिंग इंडस्ट्री के हर सेगमेंट में अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहती है।


📌 नतीजा: IPO से पहले PhysicsWallah की मज़बूत तैयारी

कंपनी ने दिखा दिया है कि सिर्फ कुछ सालों में उसने ऑनलाइन से ऑफलाइन और हाइब्रिड मोड तक तेजी से विस्तार किया है। घाटे को कम करना और पॉजिटिव EBITDA हासिल करना निवेशकों के लिए एक बड़ा सकारात्मक संकेत है।

3,820 करोड़ रुपये का यह IPO भारतीय edtech सेक्टर के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।


👉 यह IPO केवल PW के लिए नहीं बल्कि पूरे भारतीय edtech उद्योग के लिए एक बेंचमार्क साबित हो सकता है। अगर यह सफल होता है, तो आने वाले समय में और भी स्टार्टअप्स पब्लिक मार्केट में एंट्री कर सकते हैं।

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⚡ Enlog ने जीता ENTICE 2.0, JVVNL संग मिलेगा पायलट प्रोजेक्ट का मौका

Enlog

भारत में ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार तेजी से बढ़ रहा है, और इसी कड़ी में Enlog ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी को ENTICE 2.0 का विजेता घोषित किया गया है। इस जीत के साथ Enlog को $500K (लगभग ₹4.1 करोड़) के पूल से तकनीकी सहायता अनुदान और साथ ही जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JVVNL) के साथ पायलट प्रोजेक्ट का मौका मिला है।


🏆 प्रतियोगिता और चयन प्रक्रिया

ENTICE 2.0 भारत की सबसे महत्वपूर्ण एनर्जी इनोवेशन चुनौतियों में से एक है।

  • इस बार कुल 160 से अधिक कंपनियों ने आवेदन किया।
  • Enlog को चुनकर 12 फाइनलिस्ट में जगह दी गई।
  • बूटकैंप और दो राउंड्स की पिचिंग के बाद, Enlog को पायलट प्रोजेक्ट के लिए सिलेक्ट किया गया।

👉 यह उपलब्धि दिखाती है कि Enlog की टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को उद्योग के दिग्गजों ने मान्यता दी है।


🔌 भारत के DISCOMs की जरूरत

भारत के बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) के सामने सबसे बड़ी चुनौती है:

  • लाखों घरेलू और औद्योगिक उपकरणों (BTM – Behind-the-Meter appliances) का डिजिटल ट्विन तैयार करना।
  • इसके लिए कोई अतिरिक्त हार्डवेयर इंस्टॉल करना संभव नहीं।

Enlog का समाधान इस समस्या को हल करता है।

  • यह स्मार्ट मीटर डेटा को ट्रांसमिट करने का नया तरीका अपनाता है।
  • इससे रियल-टाइम इंटेलिजेंस मिलती है और बिजली लोड को सही तरीके से मैनेज किया जा सकता है।

💡 Enlog का इनोवेशन

Enlog ने IoT (Internet of Things) और AI (Artificial Intelligence) का ऐसा कॉम्बिनेशन बनाया है, जो स्केलेबल और प्रभावी है।

  • पेटेंटेड Edge IoT टेक्नोलॉजी
  • बिलियन्स डेटा पॉइंट्स पर ट्रेन किया गया AI
  • स्केलेबल आर्किटेक्चर

👉 इन सबके जरिए Enlog का प्लेटफॉर्म बिजनेस को ऑटोमैटेड एनर्जी सेविंग उपलब्ध कराता है।


🛠️ पायलट प्रोजेक्ट क्यों अहम है?

JVVNL के साथ यह पायलट Enlog को एक बड़ा अवसर देगा:

  • लाइव डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क पर अपनी टेक्नोलॉजी को टेस्ट करना।
  • स्केल पर अपनी इनोवेशन की क्षमता को साबित करना।
  • भारत के ऊर्जा सेक्टर के लिए एक डिजिटल रीढ़ (India Energy Stack) बनाने में योगदान देना।

🌍 India Energy Stack का विजन

भारत सरकार और एनर्जी स्टेकहोल्डर्स का लक्ष्य है एक डिजिटल बैकबोन तैयार करना, जो पूरे पावर सेक्टर में डेटा, इंटेलिजेंस और एक्शन को यूनिफाई करे।

  • Enlog का यह पायलट इसी विजन से मेल खाता है।
  • इससे सस्टेनेबल और स्मार्ट एनर्जी मैनेजमेंट की दिशा में बड़ा कदम बढ़ेगा।

👩‍💻 संस्थापक और सफर

Enlog की स्थापना 2019 में की गई थी।

  • संस्थापक: भरत रांकावत और झरना साहा
  • उद्देश्य: AI और IoT के जरिए बिजली के इस्तेमाल को स्मार्ट और सस्टेनेबल बनाना।

आज Enlog भारत भर में एंटरप्राइजेज के लिए ऐसे सॉल्यूशंस तैयार कर रही है, जो:

  • बिजली की खपत को ऑप्टिमाइज करते हैं।
  • कार्बन फुटप्रिंट को कम करते हैं।
  • लंबे समय तक लागत बचाते हैं।

📊 क्यों खास है Enlog का मॉडल?

  1. हार्डवेयर-फ्री सॉल्यूशन:
    • कोई नया डिवाइस इंस्टॉल करने की जरूरत नहीं।
    • स्मार्ट मीटर डेटा से ही एनालिसिस।
  2. स्केलेबिलिटी:
    • लाखों उपकरणों को ट्रैक और मैनेज किया जा सकता है।
  3. सस्टेनेबल अप्रोच:
    • बिजली की बर्बादी कम, एनर्जी एफिशिएंसी ज्यादा।

📈 भविष्य की राह

ENTICE 2.0 जीतने और JVVNL पायलट प्रोजेक्ट से Enlog को कई मौके मिलेंगे:

  • अपनी तकनीक को नेशनल लेवल तक पहुंचाने का अवसर।
  • भारत के स्मार्ट एनर्जी ट्रांजिशन में अहम योगदान।
  • बड़े एंटरप्राइज और डिस्कॉम्स के साथ नई साझेदारियां।

📝 निष्कर्ष

Enlog का ENTICE 2.0 जीतना सिर्फ एक पुरस्कार नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा क्रांति में एक नया अध्याय है।

  • यह पायलट प्रोजेक्ट दिखाएगा कि कैसे AI और IoT की मदद से बिजली वितरण नेटवर्क और ज्यादा स्मार्ट, सस्टेनेबल और कुशल बनाए जा सकते हैं।
  • आने वाले सालों में Enlog जैसी कंपनियां भारत को ग्रीन और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन एनर्जी इकोसिस्टम की ओर ले जाएंगी।

👉 कुल मिलाकर, Enlog की यह जीत स्टार्टअप इकोसिस्टम और भारत के ऊर्जा क्षेत्र, दोनों के लिए बड़ी खबर है।

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🚀 अगस्त में स्टार्टअप फंडिंग का उछाल: फिनटेक ने मारी बाजी, गेमिंग सेक्टर संकट में

monthly funding

भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम ने जुलाई की सुस्ती के बाद अगस्त 2025 में एक बार फिर रफ्तार पकड़ी है। हालांकि कुल फंडिंग अभी भी $1 बिलियन के नीचे रही, लेकिन लेट-स्टेज और ग्रोथ-स्टेज डील्स ने बाजार को नई जान दी। खास बात यह रही कि फिनटेक सेक्टर सबसे बड़ा विजेता बनकर उभरा, जबकि ई-कॉमर्स और हेल्थटेक ने भी मजबूत प्रदर्शन किया। दूसरी तरफ, एग्रीटेक और एडटेक जैसे सेक्टर लगभग निष्क्रिय दिखाई दिए। वहीं, सरकार की गेमिंग कंपनियों पर सख्ती ने कई स्टार्टअप्स को या तो बंद होने या बिजनेस मॉडल बदलने पर मजबूर कर दिया।


💰 अगस्त में कितनी फंडिंग आई?

TheKredible के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2025 में भारतीय स्टार्टअप्स ने कुल $961 मिलियन जुटाए

  • ग्रोथ और लेट-स्टेज डील्स: $733 मिलियन (24 डील्स)
  • अर्ली-स्टेज डील्स: $228 मिलियन (68 डील्स)
  • अनडिस्क्लोज्ड राउंड्स: 8

📊 सालाना तुलना में देखें तो अगस्त 2025 पिछले 5 सालों में दूसरा सबसे मजबूत अगस्त रहा। वहीं, 2023 का अगस्त सबसे कमजोर था जब सिर्फ $459 मिलियन जुटाए गए थे।


🌟 टॉप 10 ग्रोथ-स्टेज डील्स

अगस्त में टॉप 10 लेट-स्टेज डील्स ने कुल $558 मिलियन जुटाए।

  • Weaver Services – $170M (हाउसिंग फाइनेंस)
  • Truemeds – $85M (ई-फार्मेसी और टेलीहेल्थ)
  • The Sleep Company – $56M
  • Amnex Technologies – $52M
  • Zepto – $46M
  • Darwinbox – $40M
  • RENÉE Cosmetics – $30M
  • R for Rabbit – $27M
  • Fibe – $26.5M
  • TransBnk – $25M

🌱 टॉप 10 अर्ली-स्टेज डील्स

अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स ने अगस्त में करीब $101 मिलियन जुटाए।

  • Arintra – $21M (मेडिकल कोडिंग)
  • Dashverse – $13M (एंटरटेनमेंट)
  • Jeh Aerospace & Pronto – $11M प्रत्येक
  • Graas AI – $9M
  • WizCommerce – $8M
  • Vutto, DPDzero, Brandworks – $7M प्रत्येक
  • Refold AI – $6.5M

🤝 M&A गतिविधियाँ

अगस्त में कुछ अहम अधिग्रहण हुए:

  • StampMyVisa ने Teleport को खरीदा (ट्रैवल टेक)
  • Niyo ने Kanji Forex का अधिग्रहण किया (फिनटेक)
  • Credgenics ने Arrise को जोड़ा (डेट रिकवरी)
  • MakeO ने Apple Dental को अधिग्रहित किया (हेल्थटेक)
  • Uniphore ने US-आधारित Orby AI Inc. को खरीदा (ऑटोमेशन)

🏙️ शहरवार और सेक्टरवार डील्स

  • मुंबई – $410.6M (15 डील्स, 43% हिस्सा)
  • बेंगलुरु – $178.1M (35 डील्स)
  • दिल्ली-NCR – $74.6M (21 डील्स)
  • पुणे और हैदराबाद – ~$142M मिलकर

👉 सेक्टर के हिसाब से:

  • फिनटेक – $314.4M (33%)
  • ई-कॉमर्स – $195.6M (20%)
  • हेल्थटेक – $106M (11%)
  • AI स्टार्टअप्स – $96.5M
  • डीपटेक व फूडटेक – $14M से भी कम

📊 सीरीज-वाइज डील्स

  • Series A – $202.1M (22 डील्स, 21%)
  • Series B – $157.6M (10 डील्स)
  • Seed & Pre-Seed – $60.9M
  • Pre-Series A – $19M

⚠️ छंटनी और शटडाउन

सरकार द्वारा Online Gaming Act लागू होने के बाद कई RMG (Real Money Gaming) कंपनियाँ बंद हो गईं या बिजनेस बदलने पर मजबूर हुईं।

  • आधिकारिक रूप से सिर्फ 1 छंटनी रिपोर्ट हुई, लेकिन अनऑफिशियल तौर पर गेमिंग सेक्टर में भारी जॉब लॉस दर्ज हुआ।
  • अनुमान है कि करीब 400 RMG स्टार्टअप्स भारत में सक्रिय थे, जो सालाना $2.3 बिलियन टैक्स और 2 लाख नौकरियों में योगदान करते थे।

🔥 ट्रेंड्स पर नज़र

  • Micro-drama apps: 1–2 मिनट की शॉर्ट स्टोरी ऐप्स (WinZO का ZO TV, Flick TV, Kuku TV आदि) तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं।
  • TikTok की वापसी की अटकलें: ByteDance ने गुरुग्राम ऑफिस के लिए भर्तियाँ शुरू कीं, लेकिन सरकार ने साफ किया कि बैन बरकरार है।
  • Uber vs Rapido: Uber CEO ने माना कि भारत में Rapido अब Ola से बड़ा खतरा है।
  • PhysicsWallah IPO: कंपनी ने SEBI से मंजूरी पाई, करीब ₹4,500 करोड़ जुटाने की तैयारी। वैल्यूएशन ₹35,000–40,000 करोड़ तक जा सकती है।

📌 नतीजा: आगे क्या?

अगस्त का प्रदर्शन जरूर बेहतर रहा, लेकिन सितंबर में सुस्ती लौटने की आशंका है।

  • अमेरिकी सेकेंडरी टैरिफ और RMG बैन निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।
  • चीन से निवेश नियमों में ढील एक पॉजिटिव संकेत हो सकता है, लेकिन इसमें समय लगेगा।

कुल मिलाकर, अगस्त ने थोड़ी राहत दी है लेकिन आने वाले महीनों में स्टार्टअप इकोसिस्टम को अनिश्चितताओं और पॉलिसी बदलावों का सामना करना पड़ सकता है।

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🏠 Square Yards ने Q1 FY26 में रेवेन्यू में 45% की बढ़त,

Square Yards

गुरुग्राम स्थित Square Yards, जो एक इंटीग्रेटेड रियल एस्टेट और मॉर्टगेज प्लेटफॉर्म है, ने वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही (Q1 FY26) के नतीजे घोषित करते हुए बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। कंपनी ने न केवल 45% साल-दर-साल (YoY) रेवेन्यू ग्रोथ हासिल की, बल्कि पहली बार EBITDA स्तर पर लाभ (Profitability) भी दर्ज किया।


📊 रेवेन्यू और मुनाफे में ऐतिहासिक बढ़त

कंपनी की प्रेस रिलीज़ के अनुसार, Square Yards का रेवेन्यू Q1 FY26 में ₹378 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल की समान तिमाही (Q1 FY25) में यह ₹260 करोड़ था। यानी कंपनी ने एक साल में ही लगभग ₹118 करोड़ की अतिरिक्त कमाई की।

सबसे अहम बात यह रही कि कंपनी ने पहली बार EBITDA स्तर पर मुनाफा दर्ज किया।

  • ग्रॉस प्रॉफिट ₹70 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹24 करोड़ था।
  • मार्जिन 9% से बढ़कर 18% हो गया।
  • सेगमेंटल EBITDA ₹38.2 करोड़ रहा, जिसमें 10% का मार्जिन है।
  • कुल EBITDA ₹4.4 करोड़ पॉजिटिव रहा, जबकि पिछले साल कंपनी को ₹33.7 करोड़ का घाटा हुआ था।

🌍 Square Yards का बिजनेस मॉडल

Square Yards एक प्रॉपटेक (PropTech) प्लेटफॉर्म है जो रियल एस्टेट से जुड़ी एंड-टू-एंड सर्विसेज प्रदान करता है। इसमें शामिल हैं:

  • प्रॉपर्टी डिस्कवरी (Property Discovery)
  • खरीद-फरोख्त (Buying & Selling)
  • मॉर्टगेज असिस्टेंस (Mortgage Assistance)
  • होम फर्निशिंग और रेनोवेशन
  • रेंटल्स और प्रॉपर्टी मैनेजमेंट

कंपनी आज भारत ही नहीं बल्कि 9 देशों के 100 से अधिक शहरों में अपनी सेवाएं देती है।


📈 सेगमेंटवार परफॉर्मेंस

कंपनी के तीन प्रमुख सेगमेंट्स में रेवेन्यू में खासा उछाल देखने को मिला:

  • फाइनेंशियल सर्विसेज – 60% सालाना बढ़त
  • रियल एस्टेट – 36% ग्रोथ
  • होम रेनोवेशन – 21% ग्रोथ
  • डिजिटल प्रोडक्ट्स – हल्की गिरावट दर्ज की गई

Q1 FY26 में कंपनी ने कुल 55,771 ट्रांजैक्शंस को पूरा किया। इनका ग्रॉस ट्रांजैक्शन वैल्यू (GTV) ₹18,480 करोड़ तक पहुंचा।

भारत से होने वाला रेवेन्यू ₹340 करोड़ रहा, जो पिछले साल की तुलना में 57% ज्यादा है।


💬 फाउंडर और CEO का बयान

Square Yards के फाउंडर और CEO तनुज शोरी ने कहा:
“हम अपने अब तक के सबसे मजबूत Q1 प्रदर्शन को दर्ज करने पर बेहद उत्साहित हैं। 45% सालाना रेवेन्यू ग्रोथ और ग्रॉस प्रॉफिट का तीन गुना होना हमारे ऑपरेटिंग मॉडल की मजबूती को दिखाता है। यह तिमाही कंपनी के लिए ऐतिहासिक मील का पत्थर है।”


📌 IPO की तैयारी

सूत्रों के अनुसार, Square Yards अब ₹2,000 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। कंपनी जल्द ही अपना IPO लाने की योजना बना रही है। इसके लिए वह इस वित्त वर्ष के भीतर ही Draft Red Herring Prospectus (DRHP) दाखिल कर सकती है।

  • संभावित वैल्यूएशन $1.5–2 बिलियन के बीच हो सकता है।
  • यदि यह IPO सफल होता है तो Square Yards भारत के प्रमुख प्रॉपटेक लिस्टेड खिलाड़ियों में शामिल हो जाएगा।

📌 फंडिंग और ग्रोथ स्ट्रैटेजी

Square Yards की रणनीति सिर्फ रियल एस्टेट तक सीमित नहीं है, बल्कि कंपनी तेजी से फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स और होम सॉल्यूशंस पर भी फोकस कर रही है। इसके चलते कंपनी का रेवेन्यू बेस मजबूत हुआ है।

IPO से जुटाई जाने वाली राशि का इस्तेमाल कंपनी निम्न क्षेत्रों में कर सकती है:

  • नए शहरों और देशों में विस्तार
  • टेक्नोलॉजी और AI-आधारित डिजिटल प्रोडक्ट्स का विकास
  • होम रेनोवेशन और प्रॉपर्टी मैनेजमेंट बिजनेस को स्केल करना

🏆 Square Yards की उपलब्धियां

  • 100+ शहरों और 9 देशों में ऑपरेशन
  • 55,000 से अधिक डील्स एक तिमाही में
  • ₹18,480 करोड़ का GTV
  • पहली बार EBITDA स्तर पर मुनाफा

📢 निष्कर्ष

Square Yards का Q1 FY26 प्रदर्शन न सिर्फ कंपनी के लिए बल्कि पूरे PropTech सेक्टर के लिए प्रेरणादायक है। 45% रेवेन्यू ग्रोथ, तीन गुना ग्रॉस प्रॉफिट और पहली बार मुनाफा दर्ज करना दर्शाता है कि कंपनी का बिजनेस मॉडल अब मजबूत आधार पर खड़ा है।

IPO की तैयारी के साथ Square Yards भारतीय प्रॉपटेक इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। आने वाले समय में निवेशकों और ग्राहकों दोनों के लिए यह कंपनी अहम भूमिका निभाने जा रही है।

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💼 Info Edge ने Q1 FY26 में 17% रेवेन्यू ग्रोथ और 32% मुनाफे

Info Edge

📊 नतीजे मजबूत, नौकरी और 99एकर्स बने ग्रोथ के इंजन

नोएडा स्थित जॉब और प्रॉपर्टी पोर्टल चलाने वाली दिग्गज कंपनी इंफो एज Info Edge ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1 FY26) के दमदार नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी ने 17% साल-दर-साल रेवेन्यू ग्रोथ और 32% मुनाफे में उछाल दर्ज किया है, जो इसके डिजिटल बिज़नेस मॉडल की मजबूती को दर्शाता है।

कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू Q1 FY26 में बढ़कर ₹791 करोड़ हो गया, जो Q1 FY25 में ₹677 करोड़ था। यह जानकारी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) से प्राप्त दस्तावेज़ों के आधार पर सामने आई है।


🔍 Q1 FY26 में प्रमुख वित्तीय आंकड़े:

  • 📈 ऑपरेटिंग रेवेन्यू (YoY): ₹791 करोड़ (17% वृद्धि)
  • 📈 ऑपरेटिंग रेवेन्यू (QoQ): ₹791 करोड़ बनाम ₹750 करोड़ (5.5% वृद्धि)
  • 💰 कुल रेवेन्यू (ब्याज सहित): ₹1,004 करोड़
  • 🧾 कुल खर्च: ₹564 करोड़ (YoY 16% वृद्धि)
  • 💵 मुनाफा (Net Profit): ₹343 करोड़ (YoY 32% वृद्धि)
  • 💹 EBITDA: ₹468 करोड़

🔧 रेवेन्यू में कौन से प्लेटफॉर्म्स रहे आगे?

Info Edge की कमाई का बड़ा हिस्सा इसके प्रमुख प्लेटफॉर्म Naukri.com से आता है। इस पोर्टल ने Q1 FY26 में ₹562 करोड़ का रेवेन्यू जनरेट किया, जो Q1 FY25 की तुलना में 15% अधिक है।

📌 अन्य प्लेटफॉर्म्स का योगदान:

  • 🏠 99acres: ₹111 करोड़
  • 💍 Jeevansathi: ₹34 करोड़
  • 🎓 Shiksha: ₹50 करोड़

इन चारों ब्रांड्स ने मिलकर इंफो एज की उपस्थिति को नौकरियों, रियल एस्टेट, मैट्रिमोनी और एजुकेशन सर्च सेगमेंट में मज़बूत किया है।


💰 ब्याज और निवेश से अतिरिक्त कमाई

कंपनी ने ब्याज और निवेश से ₹213 करोड़ की अतिरिक्त आय अर्जित की। इससे Q1 FY26 में कंपनी की कुल आय ₹1,004 करोड़ तक पहुँच गई, जो ऑपरेटिंग रेवेन्यू से कहीं अधिक है।


💸 खर्च का बड़ा हिस्सा कर्मचारी और विज्ञापन पर

इंफो एज ने Q1 FY26 में कुल खर्च का 58% हिस्सा कर्मचारियों के वेतन और लाभ पर खर्च किया।

🧾 मुख्य खर्च इस प्रकार रहे:

  • 👨‍💼 Employee Benefits: ₹327 करोड़ (YoY 12% वृद्धि)
  • 📢 Advertising खर्च: ₹127 करोड़
  • 🌐 Internet खर्च: ₹22 करोड़

इस प्रकार, कुल खर्च में 16% की सालाना वृद्धि देखी गई, जो ₹485 करोड़ से बढ़कर ₹564 करोड़ हो गया।


📈 शेयर बाज़ार में स्थिति

8 अगस्त 2025 को दोपहर 2:22 बजे, Info Edge का शेयर ₹1,333.5 पर ट्रेड कर रहा था, जो आज के ओपनिंग प्राइस से 2% कम है।

📊 कंपनी की मार्केट कैपिटलाइज़ेशन इस समय ₹86,277 करोड़ (~$9.8 बिलियन) है।


🧠 क्या कहती है यह परफॉर्मेंस?

Info Edge ने डिजिटल इकोसिस्टम के चार प्रमुख स्तंभों – नौकरी, प्रॉपर्टी, मैट्रिमोनी और एजुकेशन – में अपना दबदबा बनाए रखते हुए शानदार वित्तीय प्रदर्शन किया है। कंपनी का फोकस हाई मार्जिन सेगमेंट पर है और ब्याज व निवेश से आय भी इसे वित्तीय रूप से मजबूत बनाती है।


🔮 आगे की रणनीति क्या हो सकती है?

  • कंपनी अब AI और डेटा-ड्रिवन हायरिंग सॉल्यूशंस की दिशा में निवेश बढ़ा रही है।
  • रियल एस्टेट और एजुकेशन पोर्टल्स पर पर्सनलाइज्ड एक्सपीरियंस और SaaS इंटीग्रेशन की संभावना भी जताई जा रही है।
  • Jeevansathi और Shiksha जैसे सेगमेंट्स में ग्रोथ को बढ़ाने के लिए नई मार्केटिंग रणनीतियों पर काम हो सकता है।

📌 निष्कर्ष

Info Edge का Q1 FY26 प्रदर्शन न केवल इसके बिजनेस मॉडल की ताकत को दिखाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की ग्रोथ और प्रोफिटेबिलिटी दोनों मुमकिन हैं।
Naukri.com जैसा मजबूत ब्रांड, 99acres जैसी स्थायी डिमांड और विविध प्लेटफॉर्म्स के जरिए Info Edge भारतीय डिजिटल अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बनता जा रहा है।

📊 अगर कंपनी इसी रफ्तार से बढ़ती रही, तो आने वाले क्वार्टर्स में इसके मार्केट कैप और मुनाफे दोनों में और तेज़ी देखी जा सकती है।


✍️ लेख: FundingRaised टीम द्वारा
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🛒 SuperK, ₹100 करोड़ जुटाए

SuperK

भारत के छोटे शहरों में संगठित रिटेल को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही ब्रांडेड फ्रैंचाइज़ रिटेल चेन SuperK ने अपने Series B फंडिंग राउंड में ₹100 करोड़ (लगभग $11.7 मिलियन) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व Binny Bansal की 3STATE Ventures और CaratLane के पूर्व सीईओ Mithun Sancheti ने किया। खास बात यह रही कि भारतीय क्रिकेट टीम के बल्लेबाज़ और मौजूदा टेस्ट कप्तान Shubman Gill ने भी इस राउंड में निवेश किया।

साथ ही, SuperK के मौजूदा निवेशकों Blume Ventures और Xeed Ventures ने भी इस राउंड में भाग लिया। इससे पहले, कंपनी ने मार्च 2023 में ₹50 करोड़ ($6 मिलियन) जुटाए थे, जिसे Blume Ventures ने लीड किया था।


📈 कहां होगा निवेश का इस्तेमाल?

SuperK के सह-संस्थापक अनिल थोंतेपू और नीरज मेंता ने बताया कि इस नई फंडिंग से कंपनी अपने संचालन को मजबूत करने के लिए टैलेंट हायरिंग पर ज़ोर देगी। खासतौर पर मार्केटिंग, स्टोर ऑपरेशंस, कैटेगरी मैनेजमेंट और ग्रोथ से जुड़े विभागों में नई भर्तियाँ की जाएंगी।

इसके अलावा, कंपनी का फोकस नए कस्बों में विस्तार और ग्रोसरी के अलावा ई-कॉमर्स उत्पादों जैसे मिक्सर, कूलर, कुकर और पंखों की बिक्री पर रहेगा।


🏙 छोटे शहरों में बड़ा मौका

भारत में ग्रोसरी रिटेल एक ₹50 लाख करोड़ ($600 बिलियन) का मार्केट है, जिसमें से 80% से अधिक खर्च Tier-II और उससे छोटे शहरों से आता है। लेकिन इसमें से महज 5% मार्केट ही संगठित रिटेल द्वारा कवर किया गया है।

SuperK इस बड़े अंतर को भरना चाहता है। कंपनी छोटे शहरों में Costco की तरह एक भरोसेमंद और टेक-इनेबल्ड सुपरमार्केट ब्रांड बनना चाहती है। इसके लिए कंपनी स्थानीय फ्रेंचाइज़ पार्टनर्स, अपनी खुद की टेक्नोलॉजी और ग्राहक डेटा का इस्तेमाल कर रही है।


🛍 130 से अधिक स्टोर्स, 80 से ज्यादा कस्बों में मौजूदगी

SuperK फिलहाल आंध्र प्रदेश के 80 से अधिक छोटे शहरों में 130 स्टोर्स चला रहा है, जो सभी फ्रेंचाइज़ी मॉडल पर आधारित हैं। कंपनी ने अपने लिए खुद की POS मशीन, इन-हाउस रिटेल ऑपरेटिंग सिस्टम, कस्टमर और पार्टनर ऐप्स डेवलप किए हैं जिससे दैनिक संचालन को आसान बनाया जा सके।

SuperK का कहना है कि वह भारत की एकमात्र ऑफलाइन रिटेल कंपनी है जिसके पास ग्राहकों की खरीदारी पर 100% डेटा विजिबिलिटी है। इस डेटा की मदद से कंपनी कस्टमर्स को पर्सनलाइज ऑफर भेजती है और फ्रेंचाइज़ पार्टनर्स को टारगेट्स पूरा करने पर इनाम देती है।


🌟 गोल्ड मेंबरशिप से बढ़ी लॉयल्टी

SuperK का Gold मेंबरशिप प्रोग्राम भी काफी सफल रहा है। कंपनी का दावा है कि इस प्रोग्राम से कस्टमर लॉयल्टी और रिटेंशन में इज़ाफा हुआ है। अब कंपनी की कुल बिक्री का एक बड़ा हिस्सा इसी मेंबरशिप से आता है।


💻 टेक्नोलॉजी + ग्रोसरी = SuperK

SuperK केवल ग्रोसरी तक सीमित नहीं रहना चाहता। कंपनी ने हाल ही में अपने टेक और सप्लाई चेन इन्फ्रास्ट्रक्चर के ऊपर एक ई-कॉमर्स वर्टिकल शुरू किया है, जहां वह किफायती घरेलू उपकरण छोटे शहरों में पहुंचा रही है।

इस मॉडल के ज़रिए SuperK छोटे शहरों की प्राइस सेंसिटिव जनता को भरोसेमंद और सस्ते प्रोडक्ट्स उपलब्ध करा रही है, जो उसे अन्य ऑफलाइन रिटेल चेन से अलग बनाता है।


📊 वित्तीय प्रदर्शन: FY24 में 41% ग्रोथ, घाटा भी बढ़ा

SuperK ने अब तक FY25 के लिए अपनी वित्तीय रिपोर्ट दाखिल नहीं की है, लेकिन FY24 में कंपनी का राजस्व ₹84.5 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 41% की बढ़ोतरी है।

हालांकि, इस दौरान कंपनी का घाटा ₹30.67 करोड़ रहा, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 30% अधिक है। इससे साफ है कि कंपनी अब भी निवेश मोड में है और प्रॉफिटेबिलिटी तक पहुंचने में समय लगेगा।


🏁 निष्कर्ष

SuperK भारत के छोटे शहरों के लिए एक संगठित और आधुनिक रिटेल अनुभव देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ₹100 करोड़ की इस नई फंडिंग से कंपनी को अपने ऑपरेशंस, टैलेंट, और टेक्नोलॉजी विस्तार के लिए जरूरी बूस्ट मिलेगा।

भारत के छोटे शहरों की बड़ी ग्रोसरी डिमांड, टेक्नोलॉजी एडॉप्शन और भरोसेमंद फ्रैंचाइज़ मॉडल के साथ SuperK के पास एक मज़बूत ग्रोथ रोडमैप है। अब देखना ये है कि कंपनी इस मौक़े को कैसे भुनाती है और आने वाले वर्षों में Costco जैसा ब्रांड बनने के अपने लक्ष्य तक कितनी तेजी से पहुंचती है।

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💃 फैशन-टेक ब्रांड ANNY ने जुटाए ₹10 करोड़,

ANNY

नई दिल्ली स्थित फैशन-टेक स्टार्टअप ANNY ने ₹10 करोड़ की प्री-सीरीज़ A फंडिंग जुटाई है। यह निवेश राउंड प्रमुख रूप से Atomic Capital के नेतृत्व में हुआ। कंपनी इस फंडिंग का उपयोग प्रोडक्ट कैटेगरी को विस्तार देने, टेक्नोलॉजी इनोवेशन, प्रमुख नेतृत्व की भर्ती, और डिस्ट्रीब्यूशन चैनल को मजबूत करने में करेगी।


🛍️ क्या है ANNY?

ANNY, जिसे 2023 में Japjot Singh, Aveen Kaur और Rahul Tanwar ने मिलकर शुरू किया था, एक multi-category accessible luxury fashion brand है। इसका उद्देश्य है कि वह भारतीय महिलाओं के फैशन अनुभव को पूरी तरह से बदल दे।

यह ब्रांड inventory-light और real-time मॉडल पर आधारित है, यानी कम स्टॉक में काम करके ट्रेंड के अनुसार तेजी से प्रोडक्ट लॉन्च करता है। इसके ज़रिए उच्च गुणवत्ता वाला, ग्लोबल ट्रेंड से प्रेरित फैशन सस्ती कीमतों पर उपलब्ध कराया जाता है।


🚀 कहां होगी फंडिंग का उपयोग?

ANNY ने अपने प्रेस रिलीज़ में बताया कि यह फंडिंग निम्नलिखित पहलुओं पर खर्च की जाएगी:

  • 📦 नई प्रोडक्ट कैटेगरी में विस्तार
  • 💡 इनोवेशन और रिसर्च को बढ़ावा
  • 🧠 प्रोप्राइटरी टेक्नोलॉजी को और बेहतर बनाना
  • 👩‍💼 लीडरशिप टैलेंट की भर्ती
  • 🛒 डिस्ट्रीब्यूशन चैनल को मजबूत करना

इससे कंपनी का उद्देश्य है कि वह ग्राहकों को तेज, स्मार्ट और स्टाइलिश फैशन अनुभव प्रदान कर सके।


🧵 कंपनी की रणनीति और खासियत

ANNY एक vertically integrated supply chain पर काम करती है, जिससे हर चरण – डिज़ाइन से लेकर डिलीवरी तक – पर कंपनी का पूरा नियंत्रण होता है।

इसके साथ ही कंपनी का proprietary tech stack उसे रियल-टाइम ट्रेंड के अनुसार प्रोडक्ट डिज़ाइन और लॉन्च करने में सक्षम बनाता है। इससे स्टॉक का रिस्क कम होता है और ग्राहकों को हमेशा लेटेस्ट ट्रेंड के कपड़े मिलते हैं।

Japjot Singh, जो कि कंपनी के CEO और को-फाउंडर हैं, कहते हैं:

“हमारा vertically integrated मॉडल और real-time ट्रेंड रिस्पॉन्सिबिलिटी हमें कम इन्वेंटरी रिस्क और ज्यादा कंज़्यूमर डिलाइट देने में मदद करता है। Atomic Capital का समर्थन हमारे लिए सिर्फ स्केल बढ़ाने का जरिया नहीं है, बल्कि स्मार्ट स्केलिंग का रास्ता है। इस इन्वेस्टमेंट से हमें ₹100 करोड़ ARR ब्रांड बनने की दिशा में प्रेरणा मिल रही है।”


📊 8 गुना ग्रोथ और आगे का प्लान

ANNY ने दावा किया है कि कंपनी ने एक साल में 8X ग्रोथ हासिल की है। यह सफलता उनके:

  • ट्रेंड-बेस्ड डिज़ाइन,
  • कस्टमर इनसाइट्स,
  • और इंटीग्रेटेड सप्लाई मॉडल

की वजह से संभव हो पाई है।

अब कंपनी का उद्देश्य है कि वह नई कैटेगरीज़ में प्रवेश करे और भारतीय महिलाओं के फैशन शॉपिंग के तरीके को दोबारा परिभाषित करे।


👗 किस तरह का फैशन देती है ANNY?

ANNY मुख्य रूप से modern Indian women को ध्यान में रखते हुए ऐसे प्रोडक्ट्स डिज़ाइन करती है, जो:

  • ट्रेंडी हो
  • क्वालिटी में बेहतरीन हो
  • कीमत में किफायती हो
  • और हर मौके के लिए उपयुक्त हों

इन सबका उद्देश्य है कि महिलाएं आसान, स्टाइलिश और स्मार्ट फैशन को जी सकें।


🔮 ANNY का भविष्य

इस फंडिंग के साथ, ANNY ने अगले वर्ष तक ₹100 करोड़ के सालाना रेवेन्यू (ARR) तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है। यह महत्वाकांक्षा दर्शाती है कि ब्रांड न सिर्फ ग्रोथ पर ध्यान दे रहा है, बल्कि भारत के फैशन-टेक इकोसिस्टम में एक क्रांति लाने की तैयारी में भी है।


📌 निष्कर्ष

  • ANNY ने ₹10 करोड़ की फंडिंग जुटाई है, जिसका नेतृत्व Atomic Capital ने किया।
  • कंपनी टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, भर्ती और चैनल डेवेलपमेंट में निवेश करेगी।
  • एक साल में 8 गुना बढ़त और अब ₹100 करोड़ ARR का लक्ष्य रखा है।
  • ट्रेंड-बेस्ड, किफायती और हाई-क्वालिटी फैशन के जरिए भारतीय महिलाओं के फैशन अनुभव को नया रूप दे रही है।

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🐟 Captain Fresh ने जुटाए ₹45 करोड़: IPO से पहले निवेशकों का भरोसा

Captain Fresh

B2B सीफ़ूड सप्लाई चेन कंपनी Captain Fresh ने अपने आने वाले IPO से पहले ₹45 करोड़ (लगभग $5.3 मिलियन) की डेब्ट फंडिंग जुटाई है। यह निवेश Lighthouse Canton और Stride Ventures से मिला है। बेंगलुरु स्थित यह स्टार्टअप हाल ही में पब्लिक लिमिटेड कंपनी में तब्दील हुआ है, जो इसकी IPO योजना की दिशा में एक बड़ा कदम है।


📌 कंपनी का परिचय: क्या है Captain Fresh?

Captain Fresh की शुरुआत वर्ष 2019 में उथम गौड़ा द्वारा की गई थी। यह कंपनी सीफ़ूड सप्लाई चेन को टेक्नोलॉजी की मदद से कुशल बनाने का काम करती है। इसका प्लेटफॉर्म मल्टी-स्पीशीज़ सीफ़ूड जैसे कि मछली, झींगे, केकड़े, और लॉबस्टर की सोर्सिंग और डिलीवरी की सुविधा देता है।


💸 डील डिटेल्स: कैसे जुटाई गई फंडिंग?

Registrar of Companies (RoC) में दाखिल दस्तावेजों के अनुसार, Captain Fresh के बोर्ड ने 4,500 नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) को मंजूरी दी है, जिनकी फेस वैल्यू ₹1,00,000 प्रति यूनिट है। इससे कंपनी को ₹45 करोड़ जुटाने में मदद मिली है।

Lighthouse Canton से ₹30 करोड़ पहले ही प्राप्त हो चुके हैं, जबकि बाकी रकम जल्द ही आनी तय है।


🎯 IPO की रणनीति: अगस्त में दाखिल होंगे पेपर्स

Captain Fresh अगस्त 2025 में अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल करने की योजना बना रही है। कंपनी $400 मिलियन (लगभग ₹3,300 करोड़) के आईपीओ की तैयारी कर रही है और इसके पहले एक $50–75 मिलियन की प्री-IPO फंडिंग जुटाने की योजना भी है।

इस बड़े इश्यू के लिए Axis Capital और Bank of America (BofA) को मुख्य निवेश बैंकर के रूप में जोड़ा गया है।


👨‍💼 कौन हैं संस्थापक और क्या है बिज़नेस मॉडल?

Captain Fresh के संस्थापक उथम गौड़ा ने सप्लाई चेन में मौजूद असंगठितता और ताजगी की कमी को दूर करने के उद्देश्य से यह कंपनी शुरू की थी। कंपनी B2B मॉडल पर काम करती है, जहाँ यह किसानों/फिशरों से सीधे सीफ़ूड लेकर होटल, रिटेलर्स और रेस्तरां तक पहुँचाती है।


📈 अब तक कितनी फंडिंग मिली है?

Startup data platform TheKredible के अनुसार, Captain Fresh अब तक $200 मिलियन से अधिक की फंडिंग जुटा चुकी है। इनमें से $30 मिलियन की फंडिंग जनवरी 2025 में Prosus, Accel, Tiger Global, और अन्य निवेशकों से प्री-IPO राउंड में मिली थी।


🧾 FY24 में कैसा रहा फाइनेंशियल परफॉर्मेंस?

Captain Fresh ने FY24 में जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की है:

  • Gross Revenue (GMV): ₹817 करोड़ से बढ़कर ₹1,395 करोड़ — यानी 71% की वृद्धि
  • Net Loss: ₹294 करोड़ से घटकर ₹229 करोड़ — यानी 22% की कमी

इससे कंपनी की ग्रोथ क्षमता और ऑपरेशनल एफिशिएंसी का अंदाजा लगाया जा सकता है।


🧱 कंपनी की अगली चाल: SeaFood से आगे प्रोटीन मार्केट

Captain Fresh अब केवल सीफ़ूड तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी का फोकस अब एनिमल प्रोटीन कैटेगरी को और व्यापक बनाने पर है, जिसमें पोल्ट्री, मीट, और अन्य हाई प्रोटीन सोर्स भी शामिल किए जाएंगे।


🏦 किन-किन निवेशकों ने अब तक पैसा लगाया?

Captain Fresh को अब तक जिन प्रमुख निवेशकों का साथ मिला है, उनमें शामिल हैं:

  • Tiger Global
  • Accel
  • Prosus
  • Matrix Partners
  • Ankur Capital
  • Stride Ventures
  • Lighthouse Canton

इन सभी ने कंपनी की ग्रोथ और बिज़नेस मॉडल में गहरी रुचि दिखाई है।


⚔️ मार्केट में मुकाबला: किन कंपनियों से है चुनौती?

Captain Fresh को बाजार में FreshToHome, Licious, और Meatigo जैसे बड़े खिलाड़ियों से मुकाबला करना पड़ता है। हालांकि, B2B फोकस और मजबूत सप्लाई चेन नेटवर्क इसे विशिष्ट बनाता है।


📅 आगे क्या? IPO और विस्तार की योजना

Captain Fresh का लक्ष्य है कि अगले 6-8 महीनों में वह IPO के जरिए पब्लिक इन्वेस्टर्स को साथ जोड़े। साथ ही कंपनी अपने अंतरराष्ट्रीय विस्तार और नई प्रोडक्ट कैटेगरी में कदम रखने की योजना पर भी काम कर रही है।


🔚 निष्कर्ष: IPO से पहले Captain Fresh की मजबूती

Captain Fresh ने IPO से पहले अपनी नींव मजबूत कर ली है। तेजी से बढ़ती GMV, घटता हुआ घाटा और मजबूत निवेशक विश्वास इसके उज्ज्वल भविष्य की ओर इशारा करते हैं। अगर सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो यह कंपनी जल्द ही भारत की अगली सफल B2B स्टार्टअप लिस्टिंग बन सकती है।

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📢 IPO के लिए तैयार IndiQube ₹700 करोड़ जुटाने की योजना, FY25 में घाटा 58% घटा

IndiQube

🔷 परिचय:
बेंगलुरु स्थित IndiQube, जो एक प्रमुख मैनेज्ड वर्कस्पेस सॉल्यूशंस प्रोवाइडर है, ने हाल ही में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास अपना रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल किया है। कंपनी ने आगामी ₹700 करोड़ के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए यह कदम उठाया है।

कंपनी की वित्तीय रिपोर्ट के मुताबिक, FY25 में उसका नेट लॉस 58% घटकर ₹141 करोड़ रह गया, जो कि FY24 में ₹341 करोड़ था। इस गिरावट का प्रमुख कारण रहा राजस्व में वृद्धि और लागत पर नियंत्रण।


📈 FY25 में दमदार वित्तीय प्रदर्शन:
IndiQube की ऑपरेशन से होने वाली आय FY25 में ₹1,059 करोड़ तक पहुँच गई, जो कि FY24 के ₹830 करोड़ के मुकाबले 28% अधिक है।

  • ₹870 करोड़, यानी 82% से अधिक आय रेंटल सेवाओं से हुई।
  • अन्य स्रोतों में शामिल हैं:
    • गुड्स की बिक्री: ₹66 करोड़
    • मेंटेनेन्स चार्जेस: ₹51 करोड़
    • बिजली चार्जेस: ₹33 करोड़
    • अन्य सेवाएं: ₹39 करोड़

इसके अतिरिक्त, ₹44 करोड़ की आय गैर-ऑपरेशनल स्रोतों से हुई, जिससे कुल राजस्व FY25 में बढ़कर ₹1,103 करोड़ तक पहुँच गया।


💸 खर्च का विश्लेषण:
IndiQube की FY25 में कुल लागत ₹1,260 करोड़ रही, जो पिछले वर्ष के ₹1,252 करोड़ के लगभग बराबर रही।
सबसे बड़ी लागतें रहीं:

  • लीज पर डिप्रिसिएशन (घटती मूल्य): ₹487 करोड़ (कुल खर्च का 39%)
  • फाइनेंस कॉस्ट्स (वित्तीय लागतें): ₹330 करोड़
  • एम्प्लॉयी बेनिफिट्स: ₹76 करोड़
  • मैटेरियल कॉस्ट: ₹52 करोड़

👉 हालांकि खर्च लगभग स्थिर रहे, परन्तु राजस्व में बढ़ोतरी के चलते IndiQube ने घाटे में उल्लेखनीय कटौती की।


📊 वित्तीय मजबूती और प्रभावी नियंत्रण:

  • FY25 में कंपनी ने प्रत्येक ₹1 की ऑपरेटिंग आय के लिए ₹1.2 का खर्च किया, जो इंगित करता है कि कंपनी अब ब्रेक-ईवन के करीब पहुँच रही है।
  • कंपनी के वर्तमान एसेट्स की वैल्यू ₹210 करोड़ थी, जिसमें से ₹61 करोड़ कैश और बैंक बैलेंस में था।

इसका मतलब है कि कंपनी अब अपने आर्थिक मॉडल को अधिक कुशल बनाने में सफल रही है।


🏢 कंपनी प्रोफाइल: IndiQube क्या करता है?
IndiQube एक मैनेज्ड वर्कस्पेस प्लेटफॉर्म है, जो स्टार्टअप्स, SMEs और बड़े एंटरप्राइजेज के लिए फ्लेक्सिबल ऑफिस स्पेस प्रदान करता है।
यह कंपनियों को:

  • रेडी-टू-मूव ऑफिस
  • मैनेज्ड सर्विसेस
  • टेक इंटीग्रेशन
  • कस्टमाइज़ेबल इंफ्रास्ट्रक्चर
    उपलब्ध कराता है, जिससे वे अपनी कोर बिजनेस एक्टिविटीज पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

📅 IPO की Timeline और लिस्टिंग डिटेल्स:

  • IPO सब्सक्रिप्शन ओपन डेट: 23 जुलाई 2025
  • IPO क्लोज डेट: 25 जुलाई 2025
  • Anchor Investors के लिए बुक ओपन: 22 जुलाई 2025
  • कंपनी के शेयर NSE और BSE दोनों पर लिस्ट होंगे।

यह पहली बार है जब IndiQube जैसे वर्कस्पेस मैनेजमेंट सेक्टर का स्टार्टअप पब्लिक मार्केट में उतर रहा है।


🔍 बाजार में IndiQube की स्थिति:
IndiQube ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी मजबूत उपस्थिति बनाई है:

  • कई प्रमुख शहरों में ऑफिस स्पेस उपलब्ध
  • वर्क फ्रॉम होम के बाद ऑफिस रिटर्न ट्रेंड से फायदा
  • स्टार्टअप्स और फ्रीलांसर से लेकर बड़े कॉरपोरेट्स तक इसके ग्राहक

कंपनी ने टेक्नोलॉजी का भरपूर उपयोग करते हुए ऑपरेशंस को स्केलेबल बनाया है।


🌟 क्या कहता है यह IPO निवेशकों के लिए?

  • घाटा कम होना और राजस्व का मजबूत ग्रोथ निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत हैं
  • कंपनी की ऑपरेटिंग एफिशिएंसी बेहतर हुई है
  • ₹700 करोड़ जुटाकर कंपनी अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर और सेवाओं को और मजबूत कर सकती है
  • वर्तमान ट्रेंड्स और प्रॉफिटेबिलिटी की दिशा को देखते हुए, यह IPO निवेश के लिहाज़ से आकर्षक हो सकता है

📌 निष्कर्ष:
IndiQube का IPO भारतीय शेयर बाजार में वर्कस्पेस इनोवेशन और मैनेज्ड सर्विसेस को एक नई पहचान देने जा रहा है।
राजस्व में निरंतर वृद्धि, खर्चों पर नियंत्रण और मजबूत वित्तीय संकेतकों के साथ, कंपनी ने यह दिखा दिया है कि वह अब पब्लिक इन्वेस्टमेंट के लिए तैयार है।

बाजार में निवेशकों और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स की नजर इस IPO पर टिकी है, जो एक उभरते हुए सेक्टर को सार्वजनिक निवेश के लिए खोलने जा रहा है।


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IndiQube की ताज़ा फाइनेंशियल रिपोर्ट्स और IPO अपडेट पर।

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