💄✨ Purplle की जबरदस्त ग्रोथ IPO की ओर बढ़ता ब्यूटी ब्रांड

Purplle

पिछले पांच साल ओम्नीचैनल ब्यूटी प्लेटफॉर्म Purplle के लिए बेहद अहम रहे हैं 🚀। तेज़ विस्तार, ब्रांड अधिग्रहण, लगातार फंडिंग और मजबूत प्राइवेट लेबल स्ट्रैटेजी के दम पर कंपनी ने ब्यूटी और पर्सनल केयर सेगमेंट में अपनी अलग पहचान बनाई है 💅।

📊 रेवेन्यू ग्रोथ की कहानी
Purplle का सफर FY21 में ₹128 करोड़ से शुरू होकर FY25 में ₹1,367 करोड़ तक पहुंच गया है। खास बात यह रही कि FY25 में कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹680 करोड़ से दोगुना होकर ₹1,367 करोड़ हो गया 📈। यह आंकड़े Registrar of Companies (RoC) से लिए गए समेकित वित्तीय विवरणों पर आधारित हैं।

🏬 ड्यूल बिजनेस मॉडल बना ताकत

2012 में शुरू हुई Purplle दो प्रमुख मॉडल पर काम करती है 👇
🛍️ थर्ड‑पार्टी ब्यूटी ब्रांड्स का मार्केटप्लेस
🏷️ खुद के प्राइवेट लेबल ब्रांड्स

इसके स्वामित्व वाले ब्रांड्स में Faces Canada, Good Vibes, Alps Goodness, Carmesi और DermDoc शामिल हैं 🌸। आज Purplle के प्लेटफॉर्म पर 1 करोड़+ मंथली एक्टिव यूजर्स हैं और देशभर में 20,000 से ज्यादा ऑफलाइन टचपॉइंट्स मौजूद हैं 🇮🇳।

🔥 प्राइवेट लेबल से आई सबसे ज्यादा ग्रोथ

FY25 में Purplle की ग्रोथ का असली इंजन इसके owned‑brand products रहे 💪।
➡️ कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू का 82.5% योगदान
➡️ इस सेगमेंट से आय 4 गुना बढ़कर ₹1,129 करोड़

वहीं, थर्ड‑पार्टी ब्रांड्स को प्रमोशन से मिलने वाली मार्केटिंग इनकम 22% घटकर ₹225 करोड़ रह गई 📉।

💰 इसके अलावा, ब्याज से मिलने वाली आय को मिलाकर कंपनी की कुल आय ₹1,409 करोड़ तक पहुंच गई।

🧾 सब्सिडियरी कंपनियों की भूमिका

Purplle की ग्रोथ में इसकी सहायक कंपनियों का भी बड़ा योगदान रहा 👇
🏢 Manash E‑Commerce: ₹989 करोड़
💄 Faces Canada: ₹373 करोड़
🎥 Glamrs: ₹4 करोड़

💸 खर्च भी बढ़े, लेकिन स्केल के साथ

तेजी से बढ़ती बिक्री के चलते कंपनी के खर्च भी बढ़े 📦
🔹 प्रोक्योरमेंट कॉस्ट: ₹671 करोड़
🔹 एम्प्लॉयी बेनिफिट्स: ₹176 करोड़
🔹 विज्ञापन खर्च: ₹218 करोड़
🔹 ट्रांसपोर्टेशन: ₹100 करोड़

इन सबको मिलाकर FY25 में कुल खर्च ₹1,478 करोड़ पहुंच गया।

📉 मुनाफे की ओर कदम

FY25 में Purplle ने हर ₹1 कमाने के लिए ₹1.08 खर्च किया। हालांकि अभी कंपनी घाटे में है, लेकिन
📊 EBITDA और ROCE में सुधार
💰 मार्च 2025 तक ₹273 करोड़ कैश बैलेंस

यह दिखाता है कि कंपनी सही दिशा में आगे बढ़ रही है 🔄।

🤝 निवेशकों का भरोसा बरकरार

अब तक Purplle $500 मिलियन+ फंडिंग जुटा चुका है 💵।
इसमें $180 मिलियन की Series F फंडिंग शामिल है, जिसका नेतृत्व ADIA की इकाई ने किया, साथ ही Premji Invest और Blume Ventures जैसे बड़े निवेशक भी जुड़े रहे 🌍।

🚀 IPO की ओर बढ़ता सफर

Purplle की मौजूदा ग्रोथ उसे Nykaa के IPO‑पूर्व स्तर के करीब ले जा रही है 📍। अगर खर्चों पर कंट्रोल बना रहा और ग्रोथ जारी रही, तो FY26‑FY27 में IPO की संभावना मजबूत हो सकती है 🏦।

✨ कुल मिलाकर, Purplle ने यह साबित कर दिया है कि उसने ग्रोथ का सही फॉर्मूला पकड़ लिया है। अब अगला लक्ष्य — मुनाफा और पब्लिक मार्केट्स में एंट्री

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Chargeup

भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है 🚀। खासकर लास्ट‑माइल मोबिलिटी में इलेक्ट्रिक थ्री‑व्हीलर्स की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी सेगमेंट में काम कर रही दिल्ली‑आधारित EV‑फोकस्ड मोबिलिटी स्टार्टअप Chargeup ने ₹22 करोड़ (करीब $2.4 मिलियन) की नई फंडिंग जुटाई है 💰।

इस फंडिंग राउंड को IAN Group का समर्थन मिला है, जबकि Cap‑A और कंपनी के मौजूदा निवेशकों ने भी इसमें भाग लिया है। यह राउंड करीब चार साल के अंतराल के बाद आया है और Chargeup का यह तीसरा फंडिंग राउंड है।

📊 पहले भी जुटा चुकी है निवेश

Chargeup ने इससे पहले
🔹 नवंबर 2022 में Capital‑A और Anicut Capital के नेतृत्व में $7 मिलियन की प्री‑सीरीज़ A1 फंडिंग
🔹 उसी साल $2.3 मिलियन की प्री‑सीरीज़ A फंडिंग

हासिल की थी। नई पूंजी के साथ कंपनी एक बार फिर आक्रामक विस्तार की तैयारी में है।

🎯 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

Chargeup के मुताबिक, इस ताज़ा निवेश का इस्तेमाल 👇
⚡ हाई‑डिमांड EV मार्केट्स में विस्तार
🧠 ड्राइवर्स और लेंडर्स के लिए टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म को मजबूत करने
🌍 इलेक्ट्रिक थ्री‑व्हीलर अपनाने वाले क्षेत्रों में ऑपरेशंस स्केल करने

के लिए किया जाएगा।

👨‍🔧 ड्राइवर‑फर्स्ट प्लेटफॉर्म

2019 में वरुण गोयनका और सतीश मित्तल द्वारा स्थापित Chargeup खुद को एक driver‑first EV technology platform के रूप में पेश करता है। इसका फोकस खासतौर पर लास्ट‑माइल EV ड्राइवर्स पर है।

EV थ्री‑व्हीलर ड्राइवर्स को अक्सर
❌ ऊंची फाइनेंसिंग लागत
❌ बैटरी से जुड़ा डाउनटाइम
❌ गाड़ी खड़ी रहने से आय का नुकसान

जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। Chargeup इन चुनौतियों को टेक्नोलॉजी और डेटा के जरिए हल करने की कोशिश करता है।

🔗 ड्राइवर, OEM और लेंडर्स एक प्लेटफॉर्म पर

Chargeup का प्लेटफॉर्म IoT और डेटा‑ड्रिवन टूल्स का इस्तेमाल करता है, जिससे
🏦 NBFCs और लेंडर्स के लिए लेंडिंग रिस्क कम होता है
🚗 ड्राइवर्स की कमाई स्थिर होती है
📈 वाहन उपयोग और रीसेल वैल्यू बेहतर होती है

यह प्लेटफॉर्म ड्राइवर्स, OEMs, डीलर्स और लेंडर्स को एक ही सिस्टम से जोड़ता है।

👥 10,000+ ड्राइवर, आगे बड़ा लक्ष्य

Chargeup अब तक 10,000 से ज्यादा EV ड्राइवर्स को अपने प्लेटफॉर्म पर जोड़ चुका है। कंपनी का लक्ष्य है कि FY27 तक 20,000 और ड्राइवर्स को जोड़ा जाए 📅।

कंपनी जिस मार्केट में काम कर रही है, उसकी अनुमानित वैल्यू करीब $12 बिलियन है 💡, जो लॉजिस्टिक्स और पैसेंजर मोबिलिटी में इलेक्ट्रिक थ्री‑व्हीलर्स की बढ़ती मांग से प्रेरित है।

🌱 EV भविष्य में Chargeup की भूमिका

सरकारी EV नीतियों और बढ़ती ईंधन लागत के बीच Chargeup जैसे स्टार्टअप्स भारत की मोबिलिटी को ज्यादा
✅ सस्ती
✅ टिकाऊ
✅ ड्राइवर‑फ्रेंडली

बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। नई फंडिंग के साथ Chargeup का लक्ष्य सिर्फ विस्तार नहीं, बल्कि EV ड्राइवर्स के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद इकोसिस्टम बनाना है ⚡🚛।

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Meine Electric

भारत में रिन्यूएबल एनर्जी और एनर्जी स्टोरेज सेक्टर को मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए डीपटेक एनर्जी स्टोरेज स्टार्टअप Meine Electric ने हाल ही में अपने प्री‑सीड फंडिंग राउंड में $7.5 लाख (करीब 6.7 करोड़ रुपये) जुटाए हैं। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व AntlerRebalance और Venture Catalysts ने किया है, जबकि इसमें gradCapitalAIC‑AU Incubation Foundation और कई एंजेल निवेशकों ने भी भागीदारी की है।

कंपनी का कहना है कि इस पूंजी का उपयोग प्रयोगशाला स्तर पर विकसित किए गए प्रोटोटाइप्स को पायलट‑रेडी आयरन‑एयर बैटरी सिस्टम में बदलने, साथ ही अपने रिसर्च और इंजीनियरिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में किया जाएगा।


⚡ 16–24 घंटे की स्टोरेज क्षमता पर फोकस

2023 में स्थापित Meine Electric की स्थापना प्रियंश मोहन और स्तुति कक्कड़ ने की थी। यह स्टार्टअप Iron‑Air Long Duration Energy Storage (LDES) सिस्टम विकसित कर रहा है। कंपनी का दावा है कि वह APAC क्षेत्र की पहली और दुनिया की चुनिंदा कंपनियों में से एक है, जो इस तकनीक पर सक्रिय रूप से काम कर रही है।

Meine Electric की बैटरियां 16 से 24 घंटे तक की ऊर्जा भंडारण क्षमता के लिए डिज़ाइन की गई हैं, जो 24×7 रिन्यूएबल एनर्जी सप्लाई को संभव बनाने में मदद कर सकती हैं। यह तकनीक खासतौर पर उन ग्रिड्स के लिए उपयोगी है, जहां सोलर और विंड एनर्जी का बड़ा हिस्सा होता है।


🔧 आयरन‑एयर बैटरी कैसे काम करती है?

आयरन‑एयर बैटरियां लोहे (Iron), हवा (Air) और पानी (Water) जैसे प्रचुर मात्रा में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करती हैं। यह बैटरी एक रिवर्सिबल रस्टिंग प्रोसेस पर काम करती है, जिसमें चार्ज और डिस्चार्ज के दौरान लोहे का ऑक्सीकरण और डी‑ऑक्सीकरण होता है।

लिथियम‑आयन बैटरियों के मुकाबले, जो आमतौर पर शॉर्ट‑ड्यूरेशन स्टोरेज (2–4 घंटे) के लिए उपयुक्त होती हैं, आयरन‑एयर बैटरियां लॉन्ग‑ड्यूरेशन और डेली साइक्लिंग के लिए बेहतर मानी जाती हैं। यही कारण है कि इन्हें सोलर‑हैवी पावर ग्रिड्स के लिए एक प्रभावी समाधान माना जा रहा है।


💰 कम लागत और बेहतर परफॉर्मेंस का दावा

Meine Electric का दावा है कि उसकी तकनीक मौजूदा बैटरी समाधानों की तुलना में कम लागत पर स्टोरेज उपलब्ध करा सकती है। इसके अलावा, यह सिस्टम फास्ट चार्ज और डिस्चार्ज के लिए ऑप्टिमाइज़ किया गया है, ताकि यह सोलर एनर्जी जनरेशन साइकिल्स के साथ बेहतर तालमेल बैठा सके।

कंपनी का मानना है कि यह तकनीक भारत जैसे देशों में, जहां ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ रही है और पावर ग्रिड पर दबाव बना रहता है, वहां गेम‑चेंजर साबित हो सकती है।


🏭 चेन्नई में पायलट प्रोडक्शन की तैयारी

Meine Electric वर्तमान में चेन्नई स्थित 5,000 वर्ग फुट की सुविधा से ऑपरेट कर रही है, जिसे पायलट‑लेवल प्रोडक्शन के लिए तैयार किया जा रहा है। कंपनी ने अब तक अपनी तकनीक से जुड़े 4 पेटेंट प्राप्त किए हैं, जबकि 7 अंतरराष्ट्रीय पेटेंट फाइलिंग प्रक्रिया में हैं।

यह मजबूत पेटेंट पोर्टफोलियो कंपनी की तकनीकी क्षमता और भविष्य की संभावनाओं को दर्शाता है।


🚀 आगे की रणनीति और भविष्य की योजनाएं

आने वाले समय में Meine Electric का लक्ष्य ग्रिड‑कनेक्टेड प्रोटोटाइप्स तैयार करना और उसके बाद बड़े पैमाने पर पायलट डिप्लॉयमेंट्स करना है। स्टार्टअप की योजना 2027 तक कंटेनराइज़्ड आयरन‑एयर बैटरी सिस्टम लॉन्च करने की है।

इसके साथ ही कंपनी पावर प्रोड्यूसर्सकमर्शियल और इंडस्ट्रियल (C&I) कस्टमर्स के साथ पायलट प्रोजेक्ट्स को लेकर बातचीत कर रही है। इन साझेदारियों के जरिए कंपनी अपने सिस्टम की रियल‑वर्ल्ड परफॉर्मेंस को साबित करना चाहती है।


🌱 भारत के एनर्जी ट्रांजिशन में अहम भूमिका

भारत का लक्ष्य 2030 तक बड़े पैमाने पर रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता जोड़ने का है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी चुनौती एनर्जी स्टोरेज बनी हुई है। ऐसे में Meine Electric जैसी कंपनियां, जो लॉन्ग‑ड्यूरेशन और किफायती स्टोरेज समाधान विकसित कर रही हैं, देश के एनर्जी ट्रांजिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

निवेशकों का मानना है कि अगर यह तकनीक स्केल पर सफल होती है, तो यह न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर क्लीन एनर्जी इकोसिस्टम को नई दिशा दे सकती है।

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Ixigo

ऑनलाइन ट्रैवल एग्रीगेटर (OTA) Ixigo के लिए चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) काफी मजबूत रही है। गुरुग्राम‑आधारित इस कंपनी ने न सिर्फ अपने बिज़नेस स्केल में 31% की बढ़ोतरी दर्ज की, बल्कि मुनाफे में भी जबरदस्त उछाल दिखाया है। 📈

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) से प्राप्त अनऑडिटेड नतीजों के अनुसार, Ixigo का ऑपरेशनल रेवेन्यू Q3 FY26 में बढ़कर ₹317.5 करोड़ हो गया, जबकि Q3 FY25 में यह ₹242 करोड़ था। यानी साल‑दर‑साल आधार पर कंपनी ने मजबूत ग्रोथ दर्ज की है। 💰


🚆 ट्रेन टिकटिंग बनी सबसे बड़ी ताकत

Ixigo के कारोबार में ट्रेन टिकटिंग सेगमेंट सबसे बड़ा रेवेन्यू ड्राइवर बना रहा।

  • कुल ऑपरेशनल रेवेन्यू का 42% हिस्सा ट्रेन टिकटिंग से आया
  • Q3 FY26 में ट्रेन टिकटिंग से ₹134 करोड़ की कमाई
  • Q3 FY25 में यह आंकड़ा ₹120 करोड़ था

भारत में रेलवे यात्रियों की बड़ी संख्या और Ixigo के स्मार्ट फीचर्स जैसे लाइव ट्रेन स्टेटस, कन्फर्मेशन प्रेडिक्शन और फेयर अलर्ट 🚦 ने इस सेगमेंट को और मजबूत किया है।


🚌✈️ फ्लाइट और बस बुकिंग से भी बढ़ी कमाई

ट्रेन के अलावा, Ixigo ने अन्य ट्रैवल कैटेगरी में भी अच्छा प्रदर्शन किया:

  • फ्लाइट बुकिंग: 32% रेवेन्यू योगदान
  • बस बुकिंग: 24% रेवेन्यू योगदान

यह साफ दिखाता है कि Ixigo अब एक मल्टी‑मोडल ट्रैवल प्लेटफॉर्म बन चुका है, जहां यूज़र्स एक ही ऐप पर ट्रेन, फ्लाइट और बस की बुकिंग कर सकते हैं। 📱


💵 अन्य आय से कुल इनकम ₹334 करोड़

ऑपरेशनल रेवेन्यू के अलावा, कंपनी ने ब्याज और फाइनेंशियल एसेट्स से ₹16.5 करोड़ की अतिरिक्त आय भी अर्जित की।
➡️ इसके साथ ही Q3 FY26 में Ixigo की कुल आय ₹334 करोड़ तक पहुंच गई।


📉 खर्च बढ़े, लेकिन मुनाफा और तेज़ी से बढ़ा

हालांकि खर्चों में भी बढ़ोतरी हुई:

  • एम्प्लॉयी बेनिफिट खर्च: 15% YoY बढ़कर ₹45 करोड़
  • कुल खर्च: ₹296 करोड़ (Q3 FY25 में ₹224 करोड़)

लेकिन अच्छी बात यह रही कि रेवेन्यू ग्रोथ खर्चों से ज्यादा रही, जिससे कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार हुआ। ✅


🟢 मुनाफे में 55% की उछाल

Ixigo ने Q3 FY26 में ₹24 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया, जबकि Q3 FY25 में यह ₹15.5 करोड़ था।
📊 यानी मुनाफे में 55% की शानदार बढ़ोतरी

यह दिखाता है कि कंपनी अब ग्रोथ के साथ‑साथ सस्टेनेबल प्रॉफिट मॉडल पर भी फोकस कर रही है।


👨‍💼 ESOP से कर्मचारियों को मिला प्रोत्साहन

Ixigo ने अपने कर्मचारियों के लिए ESOP स्कीम के तहत

  • 98,944 स्टॉक ऑप्शंस को मंजूरी दी
  • कुल वैल्यू करीब ₹2.3 करोड़

यह कदम कर्मचारियों को कंपनी की लॉन्ग‑टर्म ग्रोथ से जोड़ने की रणनीति को दर्शाता है। 🤝


⚔️ MakeMyTrip से मुकाबला

Ixigo का सीधा मुकाबला MakeMyTrip जैसी बड़ी कंपनियों से है।

  • MakeMyTrip ने Q3 FY26 में $295 मिलियन रेवेन्यू दर्ज किया
  • घाटा घटकर $7 मिलियन रह गया

हालांकि स्केल अलग है, लेकिन Ixigo की बढ़ती प्रॉफिटेबिलिटी उसे निवेशकों के बीच खास बनाती है। ⭐


📉📈 शेयर प्राइस और मार्केट कैप

22 जनवरी को ट्रेडिंग सेशन के अंत में:

  • Ixigo शेयर प्राइस: ₹235
  • मार्केट कैपिटलाइजेशन: ₹10,320 करोड़ (~$1.1 बिलियन)

यह निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है। 💹


🔚 निष्कर्ष

Q3 FY26 में Ixigo ने यह साबित कर दिया है कि वह भारत के ऑनलाइन ट्रैवल सेक्टर में एक मजबूत और प्रॉफिटेबल खिलाड़ी बनता जा रहा है। ट्रेन टिकटिंग में पकड़, मल्टी‑सेगमेंट ग्रोथ और बेहतर फाइनेंशियल कंट्रोल कंपनी को आगे और ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं। 🚀

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✈️🧳 Escape Plan ने जुटाए 25 मिलियन डॉलर,

Escape Plan

भारत में ट्रैवल और मोबिलिटी सेक्टर के तेज़ी से बढ़ते दायरे के बीच ट्रैवल प्रोडक्ट्स प्लेटफॉर्म Escape Plan ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। बेंगलुरु स्थित इस स्टार्टअप ने सीरीज़ A फंडिंग राउंड में 25 मिलियन डॉलर (करीब ₹210 करोड़) जुटाए हैं 💰। इस राउंड का नेतृत्व Jungle Ventures ने किया, जबकि Fireside Ventures और IndiGo Ventures ✈️ ने भी इसमें भागीदारी की।

यह फंडिंग Escape Plan के लिए एक अहम मोड़ मानी जा रही है, क्योंकि कंपनी अब भारत के साथ-साथ चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय बाजारों 🌍 में भी अपने कदम बढ़ाने की तैयारी कर रही है।


🔙 पहले भी निवेशकों का भरोसा जीत चुकी है कंपनी

Escape Plan इससे पहले जुलाई 2025 में $5 मिलियन की फंडिंग जुटा चुकी है। यह निवेश Jungle Ventures के First Cheque@Jungle प्रोग्राम के तहत आया था 🤝। उस राउंड में भी Fireside Ventures और कई एंजेल इन्वेस्टर्स शामिल थे।
इस शुरुआती पूंजी के बाद कंपनी ने अपने प्रोडक्ट्स, ब्रांड और रिटेल नेटवर्क को तेज़ी से विस्तार दिया।


📈 फंड का इस्तेमाल कहां होगा?

कंपनी के मुताबिक, नई फंडिंग का इस्तेमाल मुख्य रूप से:

  • 🏷️ ब्रांड बिल्डिंग
  • 💸 प्राइसिंग स्ट्रैटेजी को मजबूत करने
  • 🛍️ डिस्ट्रीब्यूशन और रिटेल नेटवर्क बढ़ाने

में किया जाएगा।

Escape Plan अपनी ओम्नी-चैनल मौजूदगी को मेट्रो शहरों के साथ-साथ टियर‑I और टियर‑II शहरों तक फैलाने पर फोकस कर रहा है। कंपनी का लक्ष्य देशभर में 200+ फिजिकल स्टोर्स खोलने का है 🏬, खासकर एयरपोर्ट्स, ट्रैवल हब्स और प्रमुख ट्रैवल कॉरिडोर्स पर।


👥 आधुनिक भारतीय यात्रियों पर खास ध्यान

Escape Plan की स्थापना 2025 में अभिनव पाठक और अभिनव जुत्शी ने की थी। दोनों संस्थापकों का मानना है कि आज का भारतीय यात्री ज़्यादा स्मार्ट, एक्सपीरियंस‑ड्रिवन और क्वालिटी‑कॉन्शियस है 🧠✨।

इसी सोच के साथ कंपनी लगेज, ट्रैवल एक्सेसरीज़ और मोबिलिटी सॉल्यूशंस डिजाइन और क्यूरेट करती है, जो:

  • 🧳 बिज़नेस ट्रैवल
  • 🌴 फैमिली वेकेशन
  • 🌏 इंटरनेशनल ट्रिप्स

जैसी अलग‑अलग जरूरतों को पूरा करते हैं।


🛒 ऑनलाइन + ऑफलाइन दोनों में मजबूत पकड़

Escape Plan एक मजबूत ओम्नी‑चैनल बिज़नेस मॉडल पर काम करता है। कंपनी अपने प्रोडक्ट्स को:

  • 🖥️ ऑनलाइन मार्केटप्लेस
  • 📱 D2C प्लेटफॉर्म
  • 🏪 ऑफलाइन रिटेल स्टोर्स

के ज़रिए बेचती है।

कंपनी का दावा है कि वह फिलहाल ₹300 करोड़ से ज़्यादा के एनुअलाइज्ड रेवेन्यू रन रेट पर काम कर रही है 🚀, जो अलग‑अलग शहरों और चैनलों से आ रही मांग का नतीजा है।


🌍 अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एंट्री की योजना

भारत में मजबूत पकड़ के बाद Escape Plan अब उन अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एंट्री की योजना बना रहा है, जहां भारतीय यात्रियों की आउटबाउंड ट्रैवल गतिविधियां अधिक हैं ✈️🌎। इससे ब्रांड को ग्लोबल पहचान और नए रेवेन्यू अवसर मिलने की उम्मीद है।


💻 टेक्नोलॉजी और 🌱 सस्टेनेबिलिटी पर फोकस

कंपनी अपनी टेक्नोलॉजी क्षमताओं को भी मज़बूत कर रही है ताकि:

  • ⚡ तेज़ डिलीवरी
  • 📦 बेहतर इन्वेंट्री मैनेजमेंट
  • 🔄 सभी चैनलों पर कंसिस्टेंसी

सुनिश्चित की जा सके।

इसके साथ ही Escape Plan डिज़ाइन‑लेड इनोवेशन और सस्टेनेबल मटीरियल्स पर भी निवेश कर रहा है 🌿, जिससे पर्यावरण‑अनुकूल और स्टाइलिश प्रोडक्ट्स तैयार किए जा सकें।


⚔️ कड़ी प्रतिस्पर्धा, लेकिन मज़बूत रणनीति

भारत के ट्रैवल गियर मार्केट में Mokobara, Nasher Miles, Uppercase और Acefour Accessories जैसे ब्रांड्स पहले से मौजूद हैं। हालांकि, मजबूत ब्रांडिंग, ओम्नी‑चैनल रणनीति और निवेशकों के भरोसे के दम पर Escape Plan इस रेस में खुद को अलग पहचान दिलाने की कोशिश कर रहा है 💪।


✅ निष्कर्ष

कुल मिलाकर, Escape Plan की यह फंडिंग न सिर्फ कंपनी की ग्रोथ को नई रफ्तार देगी 🚀, बल्कि भारत के ट्रैवल प्रोडक्ट्स सेक्टर में इसे एक टेक‑ड्रिवन, कस्टमर‑फोकस्ड और ग्लोबल ब्रांड के रूप में स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

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Optimist

भारत में 🌡️ बढ़ती गर्मी और ⚡ ऊर्जा संकट के बीच टेक्नोलॉजी आधारित कूलिंग समाधान देने वाले स्टार्टअप Optimist ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने हाल ही में $12 मिलियन (करीब ₹100 करोड़) की फंडिंग जुटाई है। यह निवेश सीड और प्री-सीरीज़ A राउंड के तहत हुआ है, जिसका नेतृत्व Accel और Arkam Ventures ने किया। इस राउंड में कई जाने-माने 👥 एंजेल निवेशकों ने भी भाग लिया।

कंपनी के अनुसार, इस ताज़ा पूंजी का उपयोग 🏭 मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने, 🔬 रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) को मजबूत करने और 📈 गो-टू-मार्केट रणनीति को तेज़ करने में किया जाएगा। Optimist का लक्ष्य भारत की भीषण गर्मी और सीमित बिजली संसाधनों को ध्यान में रखते हुए भविष्य के लिए तैयार कूलिंग समाधान विकसित करना है।

🧠 Urban Ladder के पूर्व संस्थापकों की नई पहल

Optimist की शुरुआत 2024 में आशीष गोयल और प्रणव चोपड़ा ने की थी। आशीष गोयल इससे पहले 🛋️ फर्नीचर ब्रांड Urban Ladder के सह-संस्थापक और CEO रह चुके हैं। दोनों संस्थापक मानते हैं कि भारत में एयर कंडीशनिंग सिस्टम को अब नई सोच और टेक्नोलॉजी के साथ दोबारा डिजाइन करने की ज़रूरत है।

Optimist का मकसद सिर्फ AC बेचना नहीं, बल्कि 💡 टेक्नोलॉजी के ज़रिए लोगों की ज़िंदगी को बेहतर बनाना है। कंपनी ऐसे कूलिंग सिस्टम बना रही है जो भारतीय जीवनशैली और जलवायु के अनुरूप हों।

🇮🇳 भारतीय परिस्थितियों के हिसाब से डिजाइन

Optimist के एयर कंडीशनर खासतौर पर 🔥 अत्यधिक गर्मी, ⚡ वोल्टेज उतार-चढ़ाव और 🔌 बिजली की सीमाओं को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे हैं। कंपनी का दावा है कि उसके उत्पाद कठिन हालात में भी भरोसेमंद प्रदर्शन करेंगे।

पिछले एक साल में कंपनी ने 🧪 इननोवेशन और प्रोडक्ट टेस्टिंग पर बड़ा निवेश किया है। रियल वर्ल्ड कंडीशंस में कई टेस्टिंग साइकिल्स के ज़रिए प्रोडक्ट्स को तैयार किया गया है।

🏢 “Nalanda” – इन-हाउस इनोवेशन लैब

Optimist की R&D गतिविधियों का केंद्र गुरुग्राम स्थित 🧠 इन-हाउस इनोवेशन लैब “Nalanda” है। यहां लगातार रिसर्च और प्रोडक्ट सुधार का काम होता है। इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग और R&D की वजह से कंपनी तेजी से बेहतर उत्पाद तैयार कर पा रही है।

कंपनी का दावा है कि उसके एयर कंडीशनर ⚡ कम बिजली खपत में बेहतर कूलिंग देंगे, जिससे 💰 बिजली बिल घटेगा और ⚙️ पावर ग्रिड पर दबाव भी कम होगा

🌱 ऊर्जा दक्षता और ग्राहक केंद्रित सोच

Optimist खुद को एक ऐसे ब्रांड के रूप में स्थापित करना चाहता है जो 🔋 अल्ट्रा-एफिशिएंट और 🙋 कस्टमर-सेंट्रिक कूलिंग सिस्टम बनाए। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में ऊर्जा दक्षता अब एक ज़रूरत बन चुकी है।

कंपनी उन उपभोक्ताओं को टारगेट कर रही है जो 🌬️ बेहतर कूलिंग, 💸 कम खर्च और 🛠️ लंबी उम्र वाले प्रोडक्ट्स चाहते हैं।

🛒 फरवरी 2026 से बिक्री की शुरुआत

Optimist अपने उत्पादों की बिक्री 🏪 ब्रांड स्टोर्स और 📲 डायरेक्ट-टू-कंज़्यूमर चैनल्स के ज़रिए करेगा। शुरुआत में 🏠 रेजिडेंशियल और 🏢 छोटे कमर्शियल ग्राहकों पर फोकस रहेगा।

कंपनी के एयर कंडीशनर फरवरी 2026 से 📍 दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, तेलंगाना और बेंगलुरु में उपलब्ध होंगे। इसके बाद अन्य शहरों में विस्तार की योजना है।

🤝 निवेशकों का भरोसा

Accel और Arkam Ventures जैसे बड़े निवेशकों का समर्थन यह दिखाता है कि Optimist के विज़न और टीम पर निवेशकों को पूरा भरोसा है। भारत में कूलिंग मार्केट तेज़ी से बढ़ रहा है और ऐसे में ⚙️ टेक्नोलॉजी आधारित, ⚡ ऊर्जा-कुशल समाधान भविष्य की ज़रूरत बनते जा रहे हैं।

👉 कुल मिलाकर, Optimist भारत की कूलिंग इंडस्ट्री में ❄️ नई सोच और नया दृष्टिकोण लेकर आया है। अगर कंपनी अपने लक्ष्यों पर खरी उतरती है, तो यह न सिर्फ उपभोक्ताओं बल्कि 🇮🇳 भारत के ऊर्जा भविष्य के लिए भी एक बड़ा सकारात्मक कदम साबित हो सकता है।

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📊 Q3 FY26 में Eternal (पूर्व में Zomato) का दमदार प्रदर्शन, मुनाफे में 54% की छलांग 🚀

Eternal

फूडटेक और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म Eternal (पूर्व में Zomato) के लिए वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) बेहद खास रही है। 🍔🛒 गुरुग्राम स्थित इस कंपनी ने बुधवार को अपने तिमाही नतीजे जारी किए, जिनमें राजस्व और मुनाफे दोनों में मजबूत बढ़त देखने को मिली। कंपनी का मुनाफा सालाना आधार पर 54% बढ़ा, जो इसके बदले हुए बिजनेस मॉडल और क्विक कॉमर्स पर बढ़ते फोकस को दिखाता है।


💰 राजस्व में तीन गुना उछाल

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को दी गई जानकारी के अनुसार, Eternal का ऑपरेशंस से राजस्व Q3 FY26 में बढ़कर ₹16,315 करोड़ हो गया, जबकि Q3 FY25 में यह ₹5,405 करोड़ था।
📈 यानी कंपनी ने करीब 3 गुना ग्रोथ दर्ज की है।

वहीं तिमाही-दर-तिमाही आधार पर भी राजस्व में 20% की बढ़ोतरी हुई, जो Q2 FY26 के ₹13,590 करोड़ से बढ़कर मौजूदा स्तर पर पहुंचा।


⚡ Blinkit बना ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन

Eternal के शानदार प्रदर्शन के पीछे सबसे बड़ी वजह उसका इन्वेंट्री-आधारित क्विक कॉमर्स बिजनेस रहा है। कंपनी का क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म Blinkit इस तिमाही का सुपरस्टार ⭐ बनकर उभरा।

🛍️ Blinkit से होने वाला राजस्व Q3 FY26 में ₹12,256 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही के ₹1,399 करोड़ से 75% ज्यादा है।
यह दिखाता है कि भारत में फास्ट डिलीवरी और इंस्टेंट ग्रोसरी की मांग कितनी तेज़ी से बढ़ रही है।


🍕 फूड डिलीवरी और 🏭 Hyperpure का योगदान

Eternal का फूड डिलीवरी बिजनेस Zomato भी लगातार आगे बढ़ रहा है।
Q3 FY26 में फूड डिलीवरी से आय ₹2,676 करोड़ रही, जो Q3 FY25 के ₹2,072 करोड़ से 29% अधिक है।

हालांकि, अब यह सेगमेंट कुल राजस्व का लगभग 16% ही योगदान देता है, जिससे साफ है कि कंपनी अब मल्टी-बिजनेस मॉडल की ओर बढ़ चुकी है।

वहीं B2B सेगमेंट Hyperpure, जो रेस्टोरेंट्स को सप्लाई चेन सेवाएं देता है, ने भी स्थिर प्रदर्शन किया।
📦 Hyperpure का राजस्व ₹1,070 करोड़ रहा, जिसमें 7% की सालाना वृद्धि दर्ज हुई।


📈 कुल आय और FY26 का बड़ा लक्ष्य

‘Going-out’ सेगमेंट और अन्य आय को मिलाकर Eternal Group की कुल आय Q3 FY26 में ₹16,663 करोड़ रही।

🧮 चालू वित्त वर्ष के पहले 9 महीनों में कंपनी की कुल आय ₹38,126 करोड़ तक पहुंच चुकी है। मौजूदा रफ्तार को देखते हुए कंपनी FY26 में ₹50,000 करोड़ का आंकड़ा पार करने की ओर बढ़ रही है।


💸 खर्चों में भी तेज़ बढ़ोतरी

तेज़ ग्रोथ के साथ-साथ खर्च भी बढ़े हैं।
Q3 FY26 में कंपनी का कुल खर्च ₹16,493 करोड़ रहा, जबकि Q3 FY25 में यह ₹5,533 करोड़ था।

🔹 मटेरियल कॉस्ट कुल खर्च का 59% रही, जो बढ़कर ₹9,801 करोड़ पहुंच गई
🔹 डिलीवरी खर्च 64% बढ़कर ₹2,376 करोड़
🔹 कर्मचारी लाभ खर्च 33% बढ़कर ₹914 करोड़
🔹 विज्ञापन और मार्केटिंग खर्च लगभग दोगुना होकर ₹937 करोड़


✅ मुनाफे में 54% की शानदार बढ़त

खर्च बढ़ने के बावजूद Eternal की कमाई उससे तेज़ बढ़ी।
💵 Q3 FY26 में कंपनी का मुनाफा ₹102 करोड़ रहा, जबकि Q3 FY25 में यह ₹59 करोड़ था।

📊 यूनिट इकॉनॉमिक्स के हिसाब से, कंपनी ने हर ₹1 कमाने के लिए ₹1.01 खर्च किया, जो ऑपरेशनल सुधार की ओर इशारा करता है।


👤 नेतृत्व में बदलाव और बाजार स्थिति

कंपनी ने यह भी बताया कि संस्थापक दीपिंदर गोयल अब Group CEO की भूमिका से हटेंगे और बोर्ड में Vice Chairman बने रहेंगे।

📉 बुधवार के कारोबार के अंत में Eternal का शेयर ₹283 पर बंद हुआ।
🏦 इसके साथ कंपनी का मार्केट कैप ₹3,32,985 करोड़ (करीब $30 बिलियन) पहुंच गया।


📝 निष्कर्ष

कुल मिलाकर, Q3 FY26 Eternal के लिए एक मजबूत और निर्णायक तिमाही रही।
⚡ Blinkit की तेज़ ग्रोथ
📈 बढ़ता राजस्व
💰 सुधरता मुनाफा

यह सब दिखाता है कि Eternal भारत के क्विक कॉमर्स और फूडटेक स्पेस में अपनी पकड़ और मजबूत कर रहा है। आने वाले समय में कंपनी का यह आक्रामक विस्तार निवेशकों और बाजार के लिए बेहद अहम रहने वाला है। 🚀

Read more :🇮🇳 Distributed solar platform Aerem Solutions ने जुटाए 15 मिलियन डॉलर,

🇮🇳 Distributed solar platform Aerem Solutions ने जुटाए 15 मिलियन डॉलर,

Aerem

भारत में स्वच्छ ऊर्जा और सस्टेनेबल डेवलपमेंट की दिशा में काम कर रही मुंबई स्थित डिस्ट्रीब्यूटेड सोलर प्लेटफॉर्म Aerem Solutions (एरम सॉल्यूशंस) ने अपने प्री-सीरीज़ बी फंडिंग राउंड में 15 मिलियन डॉलर (करीब 136 करोड़ रुपये) जुटाए हैं। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व SMBC Asia Rising Fund ने किया, जो जापान के प्रमुख बैंक Sumitomo Mitsui Banking Corporation (SMBC) की वेंचर कैपिटल इकाई है।

इस फंडिंग राउंड में कंपनी के मौजूदा निवेशकों—British International Investment (BII)UTECBlume VenturesAvaana CapitalRiverwalk Holdings और SE Ventures (Schneider Electric) ने भी भागीदारी की है। इस नए निवेश के साथ एरम सॉल्यूशंस का कुल फंडिंग आंकड़ा लगभग 34.5 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है।


💰 अब तक का फंडिंग सफर

एरम सॉल्यूशंस ने इससे पहले अप्रैल 2025 में UTEC के नेतृत्व में 100 करोड़ रुपये (लगभग 11.7 मिलियन डॉलर) जुटाए थे। वहीं, 2023 में कंपनी ने Avaana Capital के नेतृत्व में 5 मिलियन डॉलर की फंडिंग हासिल की थी। लगातार निवेश मिलने से यह साफ है कि निवेशकों को कंपनी के बिज़नेस मॉडल और भारत के सोलर मार्केट में इसकी संभावनाओं पर भरोसा है।


🚀 फंडिंग का उपयोग कहां होगा?

कंपनी के अनुसार, इस नई पूंजी का उपयोग कई रणनीतिक क्षेत्रों में किया जाएगा:

  • पैन-इंडिया विस्तार: देशभर में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करना
  • EPC और इंस्टॉलर पार्टनर नेटवर्क का विस्तार
  • MSME और रेज़िडेंशियल ग्राहकों के बीच सोलर अपनाने को बढ़ावा
  • सोलर सिस्टम की अफॉर्डेबिलिटी बढ़ाने पर निवेश
  • एक्ज़ीक्यूशन क्वालिटी और पोस्ट-इंस्टॉलेशन परफॉर्मेंस विज़िबिलिटी में सुधार

कंपनी का फोकस सिर्फ सोलर इंस्टॉलेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सोलर लाइफसाइकिल को डिजिटल और आसान बनाना है।


🌱 एरम सॉल्यूशंस क्या करता है?

2021 में स्थापित, एरम सॉल्यूशंस भारत में डिस्ट्रीब्यूटेड सोलर अडॉप्शन के लिए एक फुल-स्टैक प्लेटफॉर्म के रूप में काम करता है। कंपनी सोलर फाइनेंसिंग, इक्विपमेंट मार्केटप्लेस और टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म को एक साथ जोड़ती है।

एरम का प्लेटफॉर्म निम्न सेवाएं प्रदान करता है:

  • सोलर सिस्टम डिज़ाइन और इंजीनियरिंग
  • प्रोक्योरमेंट और इक्विपमेंट सप्लाई
  • सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए फाइनेंसिंग
  • एसेट मॉनिटरिंग और परफॉर्मेंस ट्रैकिंग

कंपनी मुख्य रूप से MSMEsघर मालिकोंEPC कंपनियों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस को सेवाएं देती है।


📊 प्रभाव और उपलब्धियां

अब तक एरम सॉल्यूशंस:

  • 1,200 मेगावॉट से अधिक सोलर क्षमता सक्षम कर चुका है
  • 2,000 से ज्यादा सोलर प्रोजेक्ट्स को फाइनेंस कर चुका है
  • भारत के 150 शहरों में
  • 3,200 से अधिक इंस्टॉलेशन पार्टनर्स के साथ काम कर रहा है

ये आंकड़े दर्शाते हैं कि कंपनी तेजी से भारत के डिस्ट्रीब्यूटेड सोलर इकोसिस्टम में एक मजबूत खिलाड़ी बन रही है।


🇮🇳 भारत में डिस्ट्रीब्यूटेड सोलर का भविष्य

भारत सरकार की नेट-ज़ीरो और रिन्यूएबल एनर्जी नीतियों के बीच, MSME और रेज़िडेंशियल सोलर एक बड़ा अवसर बनकर उभर रहा है। हालांकि, फाइनेंसिंग, भरोसेमंद इंस्टॉलर्स और सिस्टम परफॉर्मेंस जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। एरम सॉल्यूशंस इन सभी समस्याओं को एकीकृत टेक्नोलॉजी और फाइनेंस मॉडल के जरिए हल करने की कोशिश कर रहा है।


🔮 आगे की राह

नई फंडिंग के साथ एरम सॉल्यूशंस न केवल अपने नेटवर्क और टेक्नोलॉजी को मजबूत करेगा, बल्कि भारत में सोलर एनर्जी को ज्यादा सुलभ, किफायती और भरोसेमंद बनाने की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएगा। आने वाले वर्षों में कंपनी MSME सेक्टर और घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने की रफ्तार को तेज कर सकती है।

स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ते भारत में, एरम सॉल्यूशंस जैसे स्टार्टअप्स न केवल बिज़नेस ग्रोथ बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। ☀️🌍

Read more :🚀 वर्कफोर्स मैनेजमेंट स्टार्टअप Arthum ने जुटाए ₹10 करोड़,

🚀 वर्कफोर्स मैनेजमेंट स्टार्टअप Arthum ने जुटाए ₹10 करोड़,

Arthum

गुरुग्राम स्थित वर्कफोर्स मैनेजमेंट स्टार्टअप Arthum ने अपने सीड फंडिंग राउंड में ₹10 करोड़ (करीब $1.09 मिलियन) की राशि जुटाई है 💰। इस निवेश राउंड का नेतृत्व Caret Capital ने किया है, जबकि Keynote Financial Services Limited और JS Global ने भी इसमें भागीदारी की है 🤝। यह फंडिंग भारत के कॉन्ट्रैक्ट और ब्लू-कॉलर वर्कफोर्स सेक्टर में Arthum की बढ़ती पकड़ को दर्शाती है।


🛠️ टेक्नोलॉजी अपग्रेड और नए शहरों में विस्तार की योजना

कंपनी के अनुसार, इस फंडिंग से मिली पूंजी का इस्तेमाल अपने टेक्नोलॉजी स्टैक को और मजबूत करनेभौगोलिक विस्तार और वित्तीय सेवाओं को बढ़ाने में किया जाएगा 📈। Arthum उत्तर और पश्चिम भारत के प्रमुख औद्योगिक शहरों में अपने ऑपरेशंस फैलाने की तैयारी में है।

स्टार्टअप देहरादून, चंडीगढ़, लुधियाना, जयपुर और अहमदाबाद जैसे शहरों में विस्तार की योजना बना रहा है 🏙️। ये शहर बड़े औद्योगिक क्लस्टर्स के लिए जाने जाते हैं, जहां कॉन्ट्रैक्ट और ब्लू-कॉलर श्रमिकों की भारी मांग रहती है।


🏗️ 2023 में हुई शुरुआत, कॉन्ट्रैक्ट वर्कफोर्स पर खास फोकस

Arthum की स्थापना 2023 में दर्पण शर्मा और विशाल मिश्रा द्वारा की गई थी 👨‍💼👨‍💼। स्टार्टअप का मकसद कॉन्ट्रैक्ट और ब्लू-कॉलर वर्कफोर्स के लिए एक इंटीग्रेटेड डिजिटल ऑपरेटिंग सिस्टम तैयार करना है।

यह प्लेटफॉर्म एंटरप्राइजेज, लेबर कॉन्ट्रैक्टर्स और श्रमिकों को एक ही डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर जोड़ता है 🔗, जिससे वर्कफोर्स मैनेजमेंट से जुड़ी जटिल प्रक्रियाओं को आसान और पारदर्शी बनाया जा सके।


📊 एक ही प्लेटफॉर्म पर अटेंडेंस से लेकर पेरोल तक

Arthum अपने यूजर्स को ERP जैसे एडवांस टूल्स प्रदान करता है, जिनमें शामिल हैं:

  • 📍 जियो-टैग्ड अटेंडेंस
  • 💸 ऑटोमेटेड पेरोल
  • 📲 डिजिटल पेमेंट्स
  • 📑 स्टैच्यूटरी कंप्लायंस
  • 📝 कॉन्ट्रैक्ट मैनेजमेंट

ये सभी सुविधाएं खासतौर पर उन कंपनियों के लिए उपयोगी हैं जो बड़ी संख्या में कॉन्ट्रैक्ट श्रमिकों के साथ काम करती हैं और मैन्युअल प्रोसेस से छुटकारा पाना चाहती हैं।


👷‍♂️ लाखों श्रमिक और कॉन्ट्रैक्टर्स प्लेटफॉर्म से जुड़े

फिलहाल Arthum का प्लेटफॉर्म 3 लाख से ज्यादा लेबर कॉन्ट्रैक्टर्स के ऑपरेशंस को ऑटोमेट कर रहा है ⚙️ और अब तक 6 लाख से अधिक श्रमिकों को ऑनबोर्ड किया जा चुका है 👥। कंपनी का मुख्य फोकस अभी दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में है, लेकिन नई फंडिंग के साथ इसका विस्तार तेजी से अन्य राज्यों में भी होने वाला है।


🏦 नियो-बैंकिंग के जरिए वित्तीय समावेशन पर जोर

वर्कफोर्स मैनेजमेंट के साथ-साथ Arthum ने एक इंटीग्रेटेड नियो-बैंकिंग लेयर भी तैयार की है 🏦। इस लेयर के जरिए सत्यापित श्रमिक डेटा का उपयोग कर वर्कर्स और कॉन्ट्रैक्टर्स को:

  • 💳 बैंकिंग
  • 🛡️ बीमा
  • 💵 क्रेडिट
  • 📈 निवेश

जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। भारत में बड़ी संख्या में ब्लू-कॉलर वर्कर्स अब भी औपचारिक वित्तीय सेवाओं से दूर हैं, ऐसे में Arthum का यह मॉडल वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में अहम साबित हो सकता है।


🤝 बैंकों और NBFCs के साथ मजबूत साझेदारी

Arthum ने अपनी वित्तीय सेवाओं को मजबूत करने के लिए Yes Bank, ICICI Bank और IDFC Bank जैसे प्रमुख बैंकों के साथ साझेदारी की है 🏛️। इसके अलावा, कंपनी 15 से अधिक NBFCs के साथ मिलकर श्रमिकों और कॉन्ट्रैक्टर्स के लिए उनकी जरूरतों के अनुसार वित्तीय उत्पाद उपलब्ध करा रही है।

इन साझेदारियों की मदद से वर्कर्स को समय पर वेतन, आसान लोन और वित्तीय सुरक्षा मिल रही है ✅।


🇮🇳 असंगठित श्रम बाजार में डिजिटल समाधान की बढ़ती मांग

भारत में करोड़ों की संख्या में कॉन्ट्रैक्ट और ब्लू-कॉलर श्रमिक काम कर रहे हैं, लेकिन अब भी इस सेक्टर का बड़ा हिस्सा अनौपचारिक व्यवस्थाओं पर निर्भर है। सरकार की डिजिटल पहल, लेबर कंप्लायंस और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर पर बढ़ते फोकस के बीच Arthum जैसे प्लेटफॉर्म्स की मांग तेजी से बढ़ रही है 📲।


🌟 निवेशकों का भरोसा और भविष्य की दिशा

Caret Capital और अन्य निवेशकों की भागीदारी यह दिखाती है कि Arthum के बिजनेस मॉडल और विजन पर निवेशकों को भरोसा है 👍। आने वाले समय में कंपनी अपने प्लेटफॉर्म को और एडवांस बनाने, नए सेक्टर्स में कदम रखने और देशभर में अपनी मौजूदगी मजबूत करने पर फोकस करेगी।

कुल मिलाकर, Arthum की यह फंडिंग भारत के वर्कफोर्स मैनेजमेंट और ब्लू-कॉलर फिनटेक इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है 🚀।गुरुग्राम स्थित वर्कफोर्स मैनेजमेंट स्टार्टअप Arthum ने अपने सीड फंडिंग राउंड में ₹10 करोड़ (करीब $1.09 मिलियन) की राशि जुटाई है 💰। इस निवेश राउंड का नेतृत्व Caret Capital ने किया है, जबकि Keynote Financial Services Limited और JS Global ने भी इसमें भागीदारी की है 🤝। यह फंडिंग भारत के कॉन्ट्रैक्ट और ब्लू-कॉलर वर्कफोर्स सेक्टर में Arthum की बढ़ती पकड़ को दर्शाती है।


🛠️ टेक्नोलॉजी अपग्रेड और नए शहरों में विस्तार की योजना

कंपनी के अनुसार, इस फंडिंग से मिली पूंजी का इस्तेमाल अपने टेक्नोलॉजी स्टैक को और मजबूत करनेभौगोलिक विस्तार और वित्तीय सेवाओं को बढ़ाने में किया जाएगा 📈। Arthum उत्तर और पश्चिम भारत के प्रमुख औद्योगिक शहरों में अपने ऑपरेशंस फैलाने की तैयारी में है।

स्टार्टअप देहरादून, चंडीगढ़, लुधियाना, जयपुर और अहमदाबाद जैसे शहरों में विस्तार की योजना बना रहा है 🏙️। ये शहर बड़े औद्योगिक क्लस्टर्स के लिए जाने जाते हैं, जहां कॉन्ट्रैक्ट और ब्लू-कॉलर श्रमिकों की भारी मांग रहती है।


🏗️ 2023 में हुई शुरुआत, कॉन्ट्रैक्ट वर्कफोर्स पर खास फोकस

Arthum की स्थापना 2023 में दर्पण शर्मा और विशाल मिश्रा द्वारा की गई थी 👨‍💼👨‍💼। स्टार्टअप का मकसद कॉन्ट्रैक्ट और ब्लू-कॉलर वर्कफोर्स के लिए एक इंटीग्रेटेड डिजिटल ऑपरेटिंग सिस्टम तैयार करना है।

यह प्लेटफॉर्म एंटरप्राइजेज, लेबर कॉन्ट्रैक्टर्स और श्रमिकों को एक ही डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर जोड़ता है 🔗, जिससे वर्कफोर्स मैनेजमेंट से जुड़ी जटिल प्रक्रियाओं को आसान और पारदर्शी बनाया जा सके।


📊 एक ही प्लेटफॉर्म पर अटेंडेंस से लेकर पेरोल तक

Arthum अपने यूजर्स को ERP जैसे एडवांस टूल्स प्रदान करता है, जिनमें शामिल हैं:

  • 📍 जियो-टैग्ड अटेंडेंस
  • 💸 ऑटोमेटेड पेरोल
  • 📲 डिजिटल पेमेंट्स
  • 📑 स्टैच्यूटरी कंप्लायंस
  • 📝 कॉन्ट्रैक्ट मैनेजमेंट

ये सभी सुविधाएं खासतौर पर उन कंपनियों के लिए उपयोगी हैं जो बड़ी संख्या में कॉन्ट्रैक्ट श्रमिकों के साथ काम करती हैं और मैन्युअल प्रोसेस से छुटकारा पाना चाहती हैं।


👷‍♂️ लाखों श्रमिक और कॉन्ट्रैक्टर्स प्लेटफॉर्म से जुड़े

फिलहाल Arthum का प्लेटफॉर्म 3 लाख से ज्यादा लेबर कॉन्ट्रैक्टर्स के ऑपरेशंस को ऑटोमेट कर रहा है ⚙️ और अब तक 6 लाख से अधिक श्रमिकों को ऑनबोर्ड किया जा चुका है 👥। कंपनी का मुख्य फोकस अभी दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में है, लेकिन नई फंडिंग के साथ इसका विस्तार तेजी से अन्य राज्यों में भी होने वाला है।


🏦 नियो-बैंकिंग के जरिए वित्तीय समावेशन पर जोर

वर्कफोर्स मैनेजमेंट के साथ-साथ Arthum ने एक इंटीग्रेटेड नियो-बैंकिंग लेयर भी तैयार की है 🏦। इस लेयर के जरिए सत्यापित श्रमिक डेटा का उपयोग कर वर्कर्स और कॉन्ट्रैक्टर्स को:

  • 💳 बैंकिंग
  • 🛡️ बीमा
  • 💵 क्रेडिट
  • 📈 निवेश

जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। भारत में बड़ी संख्या में ब्लू-कॉलर वर्कर्स अब भी औपचारिक वित्तीय सेवाओं से दूर हैं, ऐसे में Arthum का यह मॉडल वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में अहम साबित हो सकता है।


🤝 बैंकों और NBFCs के साथ मजबूत साझेदारी

Arthum ने अपनी वित्तीय सेवाओं को मजबूत करने के लिए Yes Bank, ICICI Bank और IDFC Bank जैसे प्रमुख बैंकों के साथ साझेदारी की है 🏛️। इसके अलावा, कंपनी 15 से अधिक NBFCs के साथ मिलकर श्रमिकों और कॉन्ट्रैक्टर्स के लिए उनकी जरूरतों के अनुसार वित्तीय उत्पाद उपलब्ध करा रही है।

इन साझेदारियों की मदद से वर्कर्स को समय पर वेतन, आसान लोन और वित्तीय सुरक्षा मिल रही है ✅।


🇮🇳 असंगठित श्रम बाजार में डिजिटल समाधान की बढ़ती मांग

भारत में करोड़ों की संख्या में कॉन्ट्रैक्ट और ब्लू-कॉलर श्रमिक काम कर रहे हैं, लेकिन अब भी इस सेक्टर का बड़ा हिस्सा अनौपचारिक व्यवस्थाओं पर निर्भर है। सरकार की डिजिटल पहल, लेबर कंप्लायंस और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर पर बढ़ते फोकस के बीच Arthum जैसे प्लेटफॉर्म्स की मांग तेजी से बढ़ रही है 📲।


🌟 निवेशकों का भरोसा और भविष्य की दिशा

Caret Capital और अन्य निवेशकों की भागीदारी यह दिखाती है कि Arthum के बिजनेस मॉडल और विजन पर निवेशकों को भरोसा है 👍। आने वाले समय में कंपनी अपने प्लेटफॉर्म को और एडवांस बनाने, नए सेक्टर्स में कदम रखने और देशभर में अपनी मौजूदगी मजबूत करने पर फोकस करेगी।

कुल मिलाकर, Arthum की यह फंडिंग भारत के वर्कफोर्स मैनेजमेंट और ब्लू-कॉलर फिनटेक इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है 🚀।

Read more :⚽📊 स्पोर्ट्स‑टेक स्टार्टअप StepOut ने जुटाए 1.5 मिलियन डॉलर,

⚽📊 स्पोर्ट्स‑टेक स्टार्टअप StepOut ने जुटाए 1.5 मिलियन डॉलर,

StepOut

बेंगलुरु स्थित स्पोर्ट्स‑टेक स्टार्टअप StepOut ने अपने Pre‑Series A फंडिंग राउंड में 💰 1.5 मिलियन डॉलर (करीब ₹12.5 करोड़) जुटाए हैं। इस निवेश राउंड का नेतृत्व Zerodha के Rainmatter ने किया है 🤝। इसके अलावा SucSEED Innovation Fund और Misfits Capital ने भी इस राउंड में भाग लिया है। गौरतलब है कि Rainmatter ने इससे पहले 2024 के अंत में कंपनी के सीड राउंड में भी निवेश किया था।

यह फंडिंग ऐसे समय में आई है जब 📈 खेलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिटिक्स और कंप्यूटर विज़न का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, खासकर ⚽ फुटबॉल जैसे ग्लोबल खेल में।


💡 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा

StepOut ने बताया कि इस नई पूंजी का उपयोग कई अहम रणनीतिक योजनाओं में किया जाएगा।
🌍 सबसे पहले कंपनी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार करेगी।
🤖 इसके साथ‑साथ AI और कंप्यूटर विज़न टेक्नोलॉजी में निवेश बढ़ाया जाएगा, ताकि मैच एनालिसिस और प्लेयर ट्रैकिंग और ज्यादा सटीक हो सके।

फिलहाल StepOut का फोकस फुटबॉल पर है ⚽, लेकिन आगे चलकर कंपनी अमेच्योर स्पोर्ट्स और अन्य खेलों में भी एंट्री करने की योजना बना रही है 🏀🏏।


👥 कंपनी की शुरुआत और विज़न

StepOut की स्थापना Jeet Karmakar और Sayak Ghosh ने की थी। दोनों संस्थापकों का मानना है कि पारंपरिक कोचिंग और स्काउटिंग सिस्टम में 📋 डेटा और टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल नहीं हो पाता।

StepOut का उद्देश्य खेलों में डेटा‑ड्रिवन डिसीजन मेकिंग को बढ़ावा देना है। इसी सोच के साथ कंपनी ने एक AI‑पावर्ड फुटबॉल परफॉर्मेंस और इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जो खिलाड़ियों के विकास, मैच एनालिसिस और स्काउटिंग में मदद करता है 📊।


🚀 तेजी से बढ़ता StepOut प्लेटफॉर्म

पिछले फंडिंग राउंड के बाद से StepOut ने जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की है 📈। कंपनी के अनुसार:

✅ अब तक 25,000+ मैचों का विश्लेषण
✅ 1.5 लाख से अधिक खिलाड़ियों की ट्रैकिंग
✅ 3 गुना सालाना रेवेन्यू ग्रोथ
✅ 90% कस्टमर रिन्यूअल रेट

फिलहाल StepOut 🌐 23 देशों में 120 से ज्यादा क्लबों, अकादमियों और फेडरेशनों के साथ काम कर रहा है।


🧠 एडवांस टेक्नोलॉजी और फीचर्स

StepOut का प्लेटफॉर्म आधुनिक फुटबॉल एनालिटिक्स से लैस है। इसमें शामिल हैं:

⚙️ AI‑ड्रिवन मैच एनालिसिस
🎥 ऑटोमेटेड हाइलाइट्स
📊 परफॉर्मेंस डैशबोर्ड
⏱️ लाइव मैच एनालिटिक्स
📐 एडवांस मेट्रिक्स जैसे xG, xA, PPDA और Player Impact Score

इन फीचर्स की मदद से कोच और खिलाड़ी केवल अनुभव के आधार पर नहीं, बल्कि डेटा के आधार पर फैसले ले पाते हैं 🎯।


🏆 बड़े टूर्नामेंट और क्लबों के साथ काम

StepOut का प्लेटफॉर्म कई बड़े टूर्नामेंट्स में इस्तेमाल किया गया है, जिनमें Dream Sports Championship और अन्य घरेलू प्रतियोगिताएं शामिल हैं 🏟️।

कंपनी जिन प्रमुख क्लबों और संस्थाओं के साथ काम कर रही है, उनमें शामिल हैं:
🔹 AFC Ajax
🔹 Rayo Vallecano
🔹 Bengaluru FC
🔹 Hong Kong FC
🔹 All India Football Federation (AIFF)

इसके अलावा StepOut ⚡ Real Madrid, Chelsea, Fulham और Espanyol जैसे ग्लोबल क्लबों के साथ पायलट प्रोजेक्ट भी चला रहा है।


💼 निवेशकों का भरोसा

Rainmatter by Zerodha का दोबारा निवेश करना इस बात का संकेत है कि निवेशकों को StepOut के बिजनेस मॉडल और टीम पर पूरा भरोसा है 👍। स्पोर्ट्स‑टेक सेक्टर में AI और एनालिटिक्स की मांग तेजी से बढ़ रही है, और StepOut इसी ट्रेंड पर सवार है।


🔮 आगे की राह

भारत और दुनिया भर में फुटबॉल की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है 🌍⚽। ऐसे में टेक्नोलॉजी‑आधारित परफॉर्मेंस एनालिसिस की जरूरत भी बढ़ेगी।

StepOut का लक्ष्य है कि वह भारतीय स्पोर्ट्स‑टेक स्टार्टअप्स को ग्लोबल लेवल पर पहचान दिलाए और खेलों को ज्यादा स्मार्ट, डेटा‑ड्रिवन और प्रभावी बनाए 🚀।

कुल मिलाकर, StepOut की यह फंडिंग भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक मजबूत और सकारात्मक संकेत है 💪।

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