मुंबई स्थित कंस्ट्रक्शन मैटेरियल्स प्लेटफॉर्म Infra.Market एक बार फिर बड़े फाइनेंशियल कदम को लेकर चर्चा में है। कंपनी ने IPO फाइल करने के कुछ ही महीनों बाद 1,250 करोड़ रुपये का डेब्ट (कर्ज) जुटाने का फैसला किया है। खास बात यह है कि यह फंडिंग कंपनी अपनी संपत्तियों और प्रमोटर्स की शेयरहोल्डिंग को गिरवी रखकर जुटा रही है।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब कंपनी पहले ही पब्लिक लिस्टिंग की तैयारी में जुटी हुई है।
📌 बोर्ड से मिली 1,25,000 NCDs जारी करने की मंजूरी
कंपनी के बोर्ड ने एक स्पेशल रेजोल्यूशन पास कर 1,25,000 नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) जारी करने को मंजूरी दी है। हर डिबेंचर की फेस वैल्यू 1 लाख रुपये होगी।
इन डिबेंचर्स को प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए जारी किया जाएगा और इससे अधिकतम 1,250 करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे।
NCDs कन्वर्टिबल नहीं होते, यानी इन्हें इक्विटी में नहीं बदला जा सकता। इससे कंपनी की हिस्सेदारी डाइल्यूट नहीं होगी, लेकिन उसे तय ब्याज चुकाना होगा।
💰 Ascertis Credit से जुटाए 700 करोड़ रुपये
कुल प्रस्तावित राशि में से 700 करोड़ रुपये पहले ही जुटाए जा चुके हैं। यह निवेश सिंगापुर आधारित प्राइवेट क्रेडिट प्लेटफॉर्म Ascertis Credit से आया है।
इसके लिए कंपनी ने 70,000 NCDs जारी किए हैं।
विदेशी प्राइवेट क्रेडिट फंड्स का इस तरह भारतीय ग्रोथ-स्टेज कंपनियों में डेब्ट के जरिए निवेश करना यह संकेत देता है कि ग्लोबल निवेशकों का भरोसा अभी भी मजबूत बना हुआ है।
🔒 प्रमोटर्स के शेयर और ग्रुप कंपनियों की हिस्सेदारी होगी गिरवी
इस डेब्ट को सुरक्षित करने के लिए कंपनी अपनी संपत्तियों के साथ-साथ प्रमोटर्स की हिस्सेदारी भी गिरवी रख रही है।
CEO Souvik Pulakesh Sengupta और COO Aaditya Gajendra Sharda की शेयरहोल्डिंग के अलावा अन्य प्रमोटर एंटिटीज की हिस्सेदारी भी प्लेज की जाएगी।
इसके साथ ही ग्रुप कंपनियों — RDC Concrete India Limited, Neptune Readymix Concrete Private Limited और Robo Quarries Private Limited — की हिस्सेदारी भी गिरवी रखी जाएगी।
यह दर्शाता है कि कंपनी इस फंडिंग को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और बड़े पैमाने पर सिक्योरिटी ऑफर कर रही है।
📊 IPO से पहले डेब्ट रेजिंग की क्या है रणनीति?
जनवरी 2026 में कंपनी को मार्केट रेगुलेटर Securities and Exchange Board of India (SEBI) से IPO आगे बढ़ाने की मंजूरी मिल चुकी है।
ऐसे में IPO से पहले इतना बड़ा कर्ज उठाने के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं:
- वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करना
- सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग को स्केल करना
- बैलेंस शीट को स्ट्रक्चर करना
- IPO से पहले ग्रोथ नंबर मजबूत दिखाना
डेब्ट के जरिए पूंजी जुटाने का फायदा यह है कि कंपनी की इक्विटी डाइल्यूशन नहीं होती। हालांकि, प्रमोटर शेयर गिरवी रखने से जोखिम भी जुड़ा होता है।
🚀 Series G में $83 मिलियन जुटा चुकी है कंपनी
सितंबर 2025 में Infra.Market ने अपना Series G राउंड पूरा किया था, जिसमें 83 मिलियन डॉलर जुटाए गए थे।
इस राउंड की अगुवाई Silverline Homes ने की थी।
राउंड में Tiger Global, Accel, Nexus Venture Partners, NK Squared और Evolvence India जैसे निवेशकों ने भाग लिया था।
इससे पहले भी कंपनी कई बड़े राउंड्स में पूंजी जुटा चुकी है और भारत के तेजी से बढ़ते कंस्ट्रक्शन टेक सेक्टर में अपनी मजबूत उपस्थिति बना चुकी है।
📈 FY25 में 27% बढ़ा GMV, लेकिन मुनाफा घटा
वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो FY25 में कंपनी का ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) 27% बढ़कर 18,472 करोड़ रुपये (लगभग 2.1 बिलियन डॉलर) हो गया।
यह कंपनी की मजबूत डिमांड और तेजी से बढ़ते ऑपरेशंस को दर्शाता है।
हालांकि, शुद्ध लाभ लगभग 42% घटकर 220 करोड़ रुपये रह गया।
⚖️ मुनाफे में गिरावट की वजह क्या रही?
विश्लेषकों के अनुसार संभावित कारण हो सकते हैं:
- विस्तार और नई यूनिट्स में निवेश
- सप्लाई चेन इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च
- लॉजिस्टिक्स लागत में बढ़ोतरी
- नए बाजारों में एंट्री
IPO से पहले कंपनी के लिए यह जरूरी होगा कि वह अपने मार्जिन और प्रॉफिटेबिलिटी को स्थिर करे, क्योंकि पब्लिक मार्केट निवेशक ग्रोथ के साथ लाभप्रदता पर भी ध्यान देते हैं।
🔎 आगे क्या रहेगा फोकस?
Infra.Market फिलहाल तीन प्रमुख मोर्चों पर काम करती नजर आ रही है:
1️⃣ कैपिटल स्ट्रक्चर मजबूत करना
2️⃣ बिजनेस स्केल को और बढ़ाना
3️⃣ IPO से पहले निवेशकों का भरोसा मजबूत करना
अगर कंपनी IPO के जरिए मजबूत वैल्यूएशन हासिल करती है, तो डेब्ट मैनेजमेंट आसान हो सकता है।
📝 निष्कर्ष
Infra.Market का 1,250 करोड़ रुपये का डेब्ट प्लान यह दिखाता है कि कंपनी IPO से पहले अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत करना चाहती है।
जहां एक ओर GMV में मजबूत ग्रोथ दिख रही है, वहीं मुनाफे में गिरावट चिंता का विषय है।
अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि IPO से पहले कंपनी अपने फाइनेंशियल मैट्रिक्स को किस हद तक बेहतर बना पाती है।
कुल मिलाकर, Infra.Market का यह कदम संकेत देता है कि कंपनी पब्लिक मार्केट में एंट्री से पहले अपनी तैयारी पूरी तरह मजबूत करना चाहती है। 🚀
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