🎓💉 Healthcare Edtech Startup Virohan ने जुटाए ₹39.27 करोड़

Virohan

भारत के हेल्थकेयर एजुकेशन सेक्टर में तेजी से उभर रहा स्टार्टअप Virohan अब अपने Series B फंडिंग राउंड में ₹39.27 करोड़ (लगभग $4.5 मिलियन) जुटाने की तैयारी कर रहा है। इस राउंड का नेतृत्व जापान की प्रसिद्ध कंपनी Mynavi Corporation कर रही है।

इसके साथ ही इसके मौजूदा निवेशक Blume Ventures, Bharat Inclusive Technologies, और अन्य बैकर्स ने भी इसमें हिस्सा लिया है।

यह नई फंडिंग Virohan के लिए बेहद अहम है, क्योंकि हेल्थकेयर स्किलिंग सेक्टर में तेजी से बढ़ती मांग के बीच कंपनी अपनी उपस्थिति को और मज़बूत करना चाहती है।


💰 मई 2025 के बाद एक और फंडिंग—Growth Story हुई और तेज

इससे पहले Virohan ने मई 2025 में $3 मिलियन का प्री-सीरीज़ B राउंड उठाया था, जिसमें Blume Ventures, Bharat Inclusive Technologies और Rebright Partners लीड निवेशक रहे थे।

नए राउंड के साथ कंपनी ने अपने स्किलिंग मॉडल और ट्रेनिंग क्षमताओं को और विस्तार देने की तैयारी कर ली है।


🧾 बोर्ड ने पास किया Special Resolution – 2,726 CCPS होंगे जारी

कंपनी की RoC (Registrar of Companies) फाइलिंग्स के अनुसार, Virohan के बोर्ड ने एक विशेष प्रस्ताव पास किया है जिसके तहत:

  • कुल 2,726 Series B CCPS
  • प्रति शेयर कीमत ₹1,44,072
  • कुल राशि ₹39.27 करोड़

जुटाने की मंजूरी दी गई है।

यह राउंड खासकर इसलिए चर्चा में है क्योंकि Mynavi Corporation कंपनी में एक महत्वपूर्ण विदेशी निवेशक के रूप में प्रवेश कर रही है।


🇯🇵 Mynavi का बड़ा दांव — ₹22 करोड़ का Lead Investment

जापान-आधारित Mynavi Corporation इस राउंड की लीड इन्वेस्टर है और वह अकेले ही:

💴 ₹22 करोड़ (लगभग $2.5 मिलियन) निवेश करेगी।

अन्य निवेशकों का योगदान:

  • Blume Ventures – ₹12 करोड़
  • Bharat Inclusive Technologies – ₹1.8 करोड़
  • बाकी राशि
    👉 Rebright Partners
    👉 Bhilai Iron Foundry
    👉 Shantanu Jain
    👉 Deepa Bagla Financial Consultants
    से आएगी।

कंपनी को Blume Ventures और Deepa Bagla Financial Consultants से ₹12.75 करोड़ पहले ही मिल चुके हैं, जबकि बाकी निवेश जल्द आने की उम्मीद है।


📊 वैल्यूएशन रही Flat — ₹576 करोड़ Post-Money

Entrackr के अनुमानों के अनुसार, इस नए फंडिंग राउंड के बाद भी Virohan की वैल्यूएशन ₹576 करोड़ (लगभग $65.5 मिलियन) पर flat रहेगी।

ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है कि ग्रोथ स्टेज के स्टार्टअप्स में बिना वैल्यूएशन बढ़ाए भी निवेशक पैसा लगा रहे हों—इसका मतलब है कि निवेशकों को कंपनी के मॉडल और भविष्य पर पूरा विश्वास है।


🏫 Virohan क्या करता है? — Healthcare Sector के लिए स्किल-बेस्ड ट्रेनिंग

2018 में स्थापित Virohan भारत में तेजी से बढ़ते हेल्थकेयर जॉब्स सेक्टर को लक्ष्य बनाता है। इसका मॉडल बेहद अनोखा है:

🎓 Vocational Training Programs
💉 Healthcare Job Roles
📚 Hybrid Education (Online + Offline)
🏢 Campuses in 10+ cities

कंपनी दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पुणे, जयपुर, मुंबई, नागपुर सहित कई शहरों में अपनी ट्रेनिंग सुविधाएं देती है।

Virohan की कोशिश है लाखों युवाओं को हेल्थकेयर सेक्टर में employable बनाना, क्योंकि इस सेक्टर में स्किल्ड वर्कफोर्स की भारी कमी है।


💼 फंडिंग के बाद Ownership कैसे बदलेगी?

TheKredible के अनुसार, नई फंडिंग के बाद:

  • Mynavi Corporation – 3.83% स्टेक
  • Blume Ventures – 16.16% (सबसे बड़ा शेयरहोल्डर)
  • Founders –
    👉 नलिन सलूजा – 12.53%
    👉 कुणाल दुडेचा – 12.53%
    👉 आर्चित जयसाल (Oxys Impact LLP) – 12.53%

कुल मिलाकर संस्थापकों के पास मजबूत कंट्रोल बना रहेगा।

अब तक Virohan ने $18 मिलियन से ज्यादा फंडिंग जुटा ली है।


📈 कंपनी का परफॉर्मेंस – FY24 में Revenue दोगुना!

Virohan के FY25 के नंबर अभी आने बाकी हैं, लेकिन FY24 के आंकड़े काफी मजबूत रहे:

📊 FY23 Revenue: ₹10.65 करोड़
📈 FY24 Revenue: ₹21 करोड़ (लगभग 2X)

हालांकि, ग्रोथ के साथ कंपनी के लॉसेस भी बढ़े:

💸 FY24 Loss: ₹22 करोड़
🆙 18% YoY increase

कंपनी का कहना है कि लॉसेस expansion mode होने की वजह से हैं और आने वाले वर्षों में यूनिट-इकोनॉमिक्स मजबूत होने की उम्मीद है।


🚀 आगे की प्लानिंग — Healthcare Workforce को 10X बढ़ाने का Target

Virohan आने वाले वर्षों में:

  • अपने कोर्स पोर्टफोलियो बढ़ाने
  • नए शहरों और नए कैंपस खोलने
  • टेक्नोलॉजी-बेस्ड ट्रेनिंग मॉडल मजबूत करने
  • और employability rate बढ़ाने

पर ध्यान देगी।

भारत में हेल्थकेयर जॉब्स की मांग तेजी से बढ़ रही है—डॉक्टर्स, नर्सिंग, लैब टेक्नीशियंस और हॉस्पिटल मैनेजमेंट तक हर जगह स्किल्ड लोग चाहिए।

Virohan इसी गैप को भरने की दिशा में बड़े पैमाने पर काम कर रहा है।


📝 निष्कर्ष

₹39.27 करोड़ का नया Series B निवेश Virohan के लिए बड़ा मील का पत्थर है।
जापानी निवेशक Mynavi Corporation का शामिल होना कंपनी की अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता को भी बढ़ाएगा।

FY24 में मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ, बढ़ती ट्रेनिंग डिमांड और तेज़ी से फैलता हेल्थकेयर सेक्टर—इन सभी फैक्टर्स के साथ Virohan अगले कुछ वर्षों में भारत का अग्रणी हेल्थकेयर स्किलिंग स्टार्टअप बन सकता है।

Read more :🌟 Conscious Chemist ने जुटाए ₹15 करोड़

🌟 Conscious Chemist ने जुटाए ₹15 करोड़

Conscious Chemist

भारतीय स्किनकेयर ब्रांड Conscious Chemist ने अपने ताज़ा ब्रिज राउंड में ₹15 करोड़ (लगभग $1.8 मिलियन) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व Atomic Capital ने किया, जबकि First Port Capital और IPV International ने भी इसमें हिस्सा लिया।

ये फंडिंग ऐसे समय में आई है जब भारत का स्किनकेयर मार्केट तेज़ी से बढ़ रहा है और साइंस-बेस्ड स्किनकेयर ब्रांड्स की मांग नई ऊंचाइयों पर है। Conscious Chemist, जो पहले से ही एक्टिव-फर्स्ट स्किनकेयर सेगमेंट में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है, अब इस निवेश का उपयोग बड़े एक्सपैंशन प्लान के लिए करेगा।


💰 फंडिंग का इस्तेमाल कहाँ होगा?

कंपनी ने बताया कि जुटाई गई पूंजी का उपयोग मुख्य रूप से इन प्रमुख क्षेत्रों में किया जाएगा:

लीडरशिप टीम को मजबूत करना
इन्वेंट्री और सप्लाई चेन को स्केल करना
मार्केटिंग ऑपरेशंस को तेज करना
नए प्रोडक्ट इनोवेशन और R&D में निवेश
नए कैटेगरी एक्सपैंशन जैसे स्कैल्प और हेयर केयर

इसका मतलब है कि आने वाले महीनों में ब्रांड कई नए प्रोडक्ट लॉन्च करता दिख सकता है।


🧴 ब्रांड की कहानी: साइंस-बैक्ड स्किनकेयर पर फोकस

Conscious Chemist की शुरुआत 2021 में रॉबिन गुप्ता और प्रखर माथुर ने की थी। दोनों का लक्ष्य था—एक ऐसा स्किनकेयर ब्रांड बनाना जो साइंस-बेस्ड फॉर्म्युलेशन्स, सस्टेनेबल इंग्रीडिएंट्स और क्लीन ब्यूटी फिलॉसफी पर काम करे।

आज ब्रांड के पास:

  • 30+ प्रोडक्ट्स
  • Acne-care
  • Sunscreens
  • Cleansers
  • Serums
  • और Active-ingredients आधारित solutions हैं

ब्रांड के पॉपुलर इंग्रीडिएंट्स में शामिल हैं:
🧪 Salicylic Acid
🧪 Peptides
🧪 Ceramides
🧪 Retinol

ये वे ingredients हैं जो आज की जेनरेशन के स्किनकेयर यूज़र्स खूब ढूंढते हैं।


📺 Shark Tank India में आया था, लेकिन फंड नहीं मिला

दिलचस्प बात यह है कि Conscious Chemist Shark Tank India Season 3 में फीचर हो चुका है।

हालांकि उन्हें शो में किसी शार्क से फंडिंग नहीं मिली, लेकिन ब्रांड का प्रेज़ेंस और लोकप्रियता शो के बाद काफी बढ़ गई।

इससे यह साफ होता है कि कभी-कभी फंड न मिलने के बावजूद भी ब्रांड अपनी मजबूत ग्रोथ बना सकता है — और Conscious Chemist इसका शानदार उदाहरण है।


📈 पिछले 12 महीनों में धमाकेदार ग्रोथ

कंपनी के अनुसार, पिछले एक साल में उनका बिज़नेस 3X revenue growth तक पहुंच गया है।

साथ ही, ब्रांड का दावा है कि वह अब CM3 लेवल पर प्रॉफिटेबल हो चुका है — जो कि इस competitive स्किनकेयर मार्केट में काफी बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

कुछ और दिलचस्प आंकड़े:

  • 📊 75% Gross Margins
  • 👥 2.5 मिलियन+ कस्टमर्स
  • 🔁 रिटेंशन रेट इंडस्ट्री एवरेज से दोगुना
  • ⚡ Quick-commerce चैनल जैसे Blinkit, Instamart, Zepto से 3X सेल्स ग्रोथ

Quick-commerce प्लेटफॉर्म्स ने Conscious Chemist के प्रोडक्ट्स को एक नया ग्राहक बेस दिया है, खासकर युवा शहरी यूज़र्स का।


🚀 आगे का लक्ष्य: ARR ₹500 करोड़!

कंपनी अब आने वाले 24–36 महीनों में अपना ARR बढ़ाकर ₹500 करोड़ तक पहुंचाने का टारगेट रखती है।

इस दौरान Conscious Chemist अपनी ग्रोथ को प्रॉफिटेबल रखने पर भी फोकस करेगा — यानी सिर्फ रेवेन्यू नहीं, बल्कि स्थिर और सुधारता हुआ बिज़नेस मॉडल।

भारत में active-based skincare की मांग बढ़ रही है, और इसमें Conscious Chemist एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में तेजी से उभर चुका है। यह फंडिंग इसे अगले स्तर तक ले जाने में अहम साबित हो सकती है।


🧪 क्यों सफल हो रहा है Conscious Chemist?

कुछ कारण जो इसे बाकी ब्रांड्स से अलग बनाते हैं:

🌿 साइंस-बेस्ड फॉर्म्युलेशन
🧼 क्लीन और ट्रांसपेरेंट इंग्रीडिएंट्स
🎯 एक्ने, सनस्क्रीन जैसे core प्रॉब्लम-एरिया पर फोकस
⚡ Quick-commerce में मजबूत उपस्थिति
💬 ग्राहकों के साथ गहरा engagement
💡 कस्टमर-फर्स्ट प्रोडक्ट डेवलपमेंट

इन सब वजह से ब्रांड ने सिर्फ तीन साल में 2.5 मिलियन से ज्यादा भारतीय ग्राहकों का भरोसा जीता है।


📝 निष्कर्ष

₹15 करोड़ की यह ब्रिज फंडिंग Conscious Chemist के लिए बड़ा कदम है। नए कैटेगरी लॉन्च, R&D इन्वेस्टमेंट और मार्केट एक्सपैंशन के साथ ब्रांड आने वाले समय में भारतीय स्किनकेयर मार्केट में और बड़ा खिलाड़ी बन सकता है।

एक ऐसा ब्रांड जिसने Shark Tank से फंड न मिलने के बावजूद लगातार ग्रोथ की और आज निवेशकों का भरोसा जीत रहा है — Conscious Chemist की यह कहानी भारतीय startup ecosystem के लिए प्रेरणादायक है।

Read more : Arclaim ने उठाए $5M! Staking Economy

🚀🔥 Arclaim ने उठाए $5M! Staking Economy

Arclaim

वेलिंगटन, न्यूज़ीलैंड की फिनटेक स्टार्टअप Arclaim ने अपने Series A राउंड में $5 मिलियन (लगभग ₹42 करोड़) जुटाकर Web3 दुनिया में एक नया शोर मचा दिया है।
💰 निवेशकों के नाम नहीं बताए गए, लेकिन कंपनी का कहना है कि यह पैसा उनकी टेक्नोलॉजी को अपग्रेड करने, ऑपरेशंस बढ़ाने और Global scaling के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

Web3 और staking की दुनिया तेजी से बढ़ रही है, लेकिन साथ ही इसमें कई तकनीकी दिक्कतें भी आती हैं — कम APY, लंबी unstake waiting, liquidity की कमी… और बहुत कुछ।

Arclaim कहता है — “इन सबका समाधान हम लेकर आए हैं!”
और सच कहें तो इनके तीन बड़े इनोवेशन सच में गेमचेंजर लगते हैं।

आइए एक-एक करके मजेदार तरीके से समझते हैं 👇


⚙️✨ 1) Dynamic Yield Architecture – अब APY रियल-टाइम में होगा MAX!

Staking में सबसे बड़ा सवाल होता है —
📌 “कौन सी chain पर stake करूं कि ज्यादा return मिले?”

Arclaim का Dynamic Yield Architecture यही समस्या हल करता है।

🔮 यह एक patent-pending algorithm है जो:

  • आपके staked assets को कई chains में रियल-टाइम में रीबैलेंस करता है
  • जहाँ APY ज्यादा मिलता है, वहाँ अपने आप फंड शिफ्ट कर देता है
  • validator saturation की समस्या को पहली बार स्मार्ट तरीके से रोकता है

मतलब आपको लगातार मार्केट देखने की जरूरत नहीं।
➡️ Arclaim खुद आपके लिए सबसे ज्यादा फायदा निकालता रहेगा।

Staking करने वालों के लिए ये फीचर सच में “OP” है 😎💥


⚡💨 2) Zero-Day Liquidity – Instant Unstake, No Waiting, No Tension!

Staking की दुनिया की सबसे बड़ी तकलीफ़ क्या है?

Unstaking का इंतजार!
कई chains में 7, 14 या 21 दिनों तक फंड फंसा रहता है।

लेकिन Arclaim का जवाब है:

🎉 Zero-Day Liquidity

मतलब:

  • अगर आपका unlocking period खत्म हो चुका है
  • तो आप तुरंत unstake कर सकते हैं
  • कोई slashing penalty नहीं
  • कोई waiting नहीं
  • कोई drama नहीं 😄

इसके साथ Arclaim leading DEXs के साथ integration कर रहा है, ताकि:

➡️ Stake → Earn → Swap
पूरा प्रोसेस झटपट, बिना किसी रुकावट के, एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर हो सके।

Crypto traders के लिए ये सुविधा सोने पे सुहागा है 💎✨


🏦🔐 3) Institutional-Grade Vaults (Q2 2026) – अब कंपनियाँ भी कर सकेंगी सुरक्षित staking!

अब बात करते हैं Arclaim के तीसरे सबसे बड़े फीचर की —
जो 2026 की दूसरी तिमाही में लॉन्च होगा।

यह है:

💼 Institutional-Grade Staking Vaults

यह बड़े संस्थानों और कंपनियों के लिए बनाया गया है, जिसमें होगा:

  • Insured Custody (एसेट्स बीमा के साथ सुरक्षित)
  • Compliance-Ready Products (रेगुलेशन्स के हिसाब से)
  • Customizable Risk/Reward Profiles
  • सबकुछ on-chain derivatives द्वारा मैनेज होगा

इसका मतलब है कि बड़ी कंपनियाँ भी staking में आकर
⚡ हाई रिटर्न
🛡 सुरक्षा
📈 पारदर्शिता
एक ही जगह पा सकेंगी।

इसे Web3 संस्थानों के लिए “future-ready staking infrastructure” कहा जा रहा है।


🌍💡 Arclaim का Vision — Staking Economy को बनाना Super Fast, Super Safe, Super Profitable

कंपनी का कहना है कि staking economy अभी अपने शुरुआती दौर में है,
और आने वाले सालों में यह दुनिया भर में तेजी से बढ़ेगी।

Arclaim का लक्ष्य है:

  • staking को आसान बनाना
  • returns को बेहतर बनाना
  • liquidity की दिक्कत खत्म करना
  • institutions को onboard करना
  • और Web3 को mass adoption की तरफ ले जाना

सिंपल शब्दों में:
“Staking को इतनी smooth बनाना कि हर कोई कर सके!” 😄🚀


💸 फंडिंग का इस्तेमाल कहाँ होगा?

कंपनी जुटाए गए $5M का उपयोग करेगी:

  • Global operations बढ़ाने
  • Top blockchain engineers hire करने
  • नए staking tools बनाने
  • R&D को ताकत देने
  • बड़े institutions को onboard करने

मतलब Arclaim अब स्पीड मोड में आगे बढ़ रहा है 🔥


📌 निष्कर्ष: Arclaim Web3 staking का future बदलने आया है 🚀

Dynamic APY optimization, instant liquidity और institutional vaults —
इन तीन फीचर्स के साथ Arclaim staking industry को एक नया रूप देने की क्षमता रखता है।

$5M की Series A फंडिंग के बाद कंपनी अब पूरी ताकत से expansion मोड में है।
Crypto & Web3 की दुनिया में staking तेजी से popular हो रही है, ऐसे में Arclaim जैसे समाधान आने वाले समय में बड़ा प्रभाव डालेंगे।

Read more : Valiant Capital से नई फंडिंग की तैयारी में StockGro

📈 Valiant Capital से नई फंडिंग की तैयारी में StockGro

StockGro

भारत के तेजी से बढ़ते फिनटेक सेक्टर में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। सोशल इन्वेस्टमेंट और स्टॉक मार्केट एडवाइजरी प्लेटफॉर्म StockGro अपने मौजूदा फंडिंग राउंड में और कैपिटल जुटाने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, कंपनी की बातचीत फिलहाल Boston आधारित Valiant Capital Management के साथ अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। अगर यह डील फाइनल होती है, तो StockGro का Series B राउंड और अधिक मजबूत हो जाएगा।

🧩 Series B राउंड में नई तेजी

पिछले सप्ताह StockGro ने अपने Series B राउंड के तहत $17 मिलियन (करीब ₹142 करोड़) जुटाए थे। यह निवेश प्रमुख इन्वेस्टर Mukul Agarwal की Param Capital से आया था। इस डील की जानकारी सबसे पहले Entrackr ने जारी की थी। अब Valiant Capital से संभावित फंडिंग के बाद कंपनी इस राउंड को और बड़ा बना सकती है।

हालांकि StockGro ने इस डील पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। CEO अजय लखोटिया से भी प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है।

📌 StockGro क्या करता है?

2020 में स्थापित StockGro भारत का एक लोकप्रिय सोशल इन्वेस्टमेंट और मार्केट एडवाइजरी प्लेटफॉर्म है। इसका उद्देश्य भारतीय निवेशकों—खासकर युवाओं—को शेयर बाजार की समझ आसान और सुरक्षित तरीके से प्रदान करना है।

प्लेटफ़ॉर्म की खासियतें:

  • SEBI-registered advisors के माध्यम से निवेश मार्गदर्शन
  • पोर्टफोलियो मैनेजमेंट से लेकर रिस्क गाइडेंस तक
  • शुरुआती निवेशकों के लिए आसान और गेमिफाइड सीखने का अनुभव
  • मार्केट ट्रेंड्स, एनालिटिक्स और एक्सपर्ट की राय
  • इन्वेस्टमेंट सीखने के लिए सिम्युलेशन-आधारित टूल्स

क्लियर और सरल अनुभव के कारण StockGro भारत के युवाओं में काफी लोकप्रिय हुआ है और आज यह करोड़ों उपयोगकर्ताओं तक पहुँच चुका है।

💰 अब तक की फंडिंग और प्रमुख निवेशक

TheKredible के अनुसार, StockGro अब तक कुल $76 मिलियन (EC + debt) जुटा चुका है। इसके प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं—

  • Bitkraft Ventures
  • SBI Ventures
  • Root Ventures
  • General Catalyst
  • Param Capital
  • और अब संभावित रूप से Valiant Capital Management

सीरीज B राउंड के पूरा होने के बाद कंपनी के वैल्यूएशन में भी बड़ा उछाल आने की संभावना है।

📉 वित्तीय प्रदर्शन: FY24 में दबाव बढ़ा

हालांकि यूज़र बेस और ब्रांड की लोकप्रियता बढ़ रही है, लेकिन कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर पिछले दो साल चुनौतीपूर्ण रहे हैं।

FY24 Highlights:

  • ऑपरेटिंग रेवेन्यू गिरकर ₹131 करोड़ से ₹86.5 करोड़ रह गया — यानी 34% की गिरावट
  • वहीं Losses बढ़कर ₹55 करोड़ से ₹101 करोड़ हो गए — यानी 84% की बढ़त

StockGro ने FY25 के वित्तीय परिणाम अभी सार्वजनिक नहीं किए हैं। लेकिन नए निवेश जुटने से कंपनी अपने प्रोडक्ट, मार्केटिंग और टेक्नोलॉजी अपग्रेड पर तेजी से काम करने की तैयारी में है।

🧭 Valiant Capital क्यों दिलचस्पी दिखा रहा है?

Valiant Capital अमेरिका का एक बड़ा हेज फंड है जो दुनिया भर में हाई-ग्रोथ टेक और फिनटेक कंपनियों में निवेश करता आया है।

StockGro में निवेश की संभावित वजहें:

  • भारत में तेजी से बढ़ता रिटेल इन्वेस्टिंग मार्केट
  • युवाओं में ट्रेडिंग और निवेश की बढ़ती रुचि
  • StockGro का यूनिक सोशल-इन्वेस्टमेंट मॉडल
  • एडवाइजरी + एजुकेशन + पोर्टफोलियो मैनेजमेंट का कॉम्बो
  • उच्च उपयोगकर्ता एंगेजमेंट और मजबूत रिटेंशन

इस तरह Valiant का निवेश कंपनी को ग्लोबल स्तर पर भी विश्वसनीयता और मजबूती देगा।

🚀 नए फंड का इस्तेमाल कहाँ होगा?

भले ही डील की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि StockGro फंड का उपयोग मुख्य रूप से यहाँ कर सकता है:

  • AI आधारित निवेश सलाह और डेटा टूल्स
  • मजबूत रिस्क मैनेजमेंट इंजन
  • मार्केटिंग और यूज़र अधिग्रहण
  • नए इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स
  • कॉलेज और युवा निवेशकों को जोड़ने के लिए अभियान
  • ग्लोबल एक्सपैंशन की शुरुआती तैयारी

🌐 भारत में निवेश प्लेटफ़ॉर्म के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा

Groww, Zerodha, Upstox जैसी कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ चुकी है। ऐसे में StockGro अपने एडवाइजरी + सोशल इन्वेस्टमेंट मॉडल से अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है।

कंपनी का फोकस सिर्फ ट्रेडिंग नहीं बल्कि सीखने और समझकर निवेश करने पर है, जो इसे भीड़ में अलग करता है।

🔎 आगे का रास्ता

यदि Valiant Capital का निवेश फाइनल होता है, तो StockGro का Series B राउंड लगभग दोगुना हो सकता है। इससे प्लेटफॉर्म की ग्रोथ तेज होगी और कंपनी अगली फंडिंग के लिए भी बेहतर पोजिशन पर आ सकती है।

भारत में रिटेल निवेशकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, और ऐसे में StockGro जैसे प्लेटफॉर्म बड़े अवसरों के सामने खड़े हैं।

Read more : Lumov ने जुटाए $1.2 Million

🦴 Lumov ने जुटाए $1.2 Million

Lumov

भारत के हेल्थटेक सेक्टर में एक और मजबूत कदम बढ़ चुका है। Bengaluru-based orthopedic recovery startup Lumov ने $1.2 million (लगभग ₹10 करोड़) की seed funding हासिल कर ली है। यह राउंड Incubate Fund Asia के नेतृत्व में पूरा हुआ, जिसमें कई नामी निवेशकों और फैमिली ऑफिसेज ने भी हिस्सा लिया।

Lumov भारत में orthopedic recovery और rehabilitation उत्पादों को नए स्तर पर ले जाने का लक्ष्य रखता है। कंपनी ऐसे समय में तेजी से बढ़ रही है, जब देश में musculoskeletal care काफी fragmented है और quality recovery products की भारी कमी है।


💰 Funding Round: किन निवेशकों ने किया समर्थन?

इस seed funding राउंड में कई बड़े निवेशक शामिल रहे:

  • Incubate Fund Asia (Lead investor)
  • QRG Investments & Holdings – Havells Family Office
  • IIMA Ventures
  • SIDBI
  • Angel Investors जैसे:
    • Ashish Gupta
    • Saket Narang
    • Abhishek Goyal
    • Arjun Vaidya

यह निवेश Lumov के लिए न सिर्फ पूंजी जोड़ता है, बल्कि industry expertise, networking और strategic guidance भी लाता है।


🚀 फंड्स का इस्तेमाल कहाँ होगा?

Lumov ने स्पष्ट किया है कि इस पूंजी का उपयोग कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जाएगा:

1. Operations का विस्तार

स्टार्टअप अब अपने संचालन को Bangalore से आगे बढ़ाकर बड़े भारतीय शहरों में स्केल करेगा, जिनमें शामिल हैं:

  • Delhi NCR
  • Hyderabad
  • Mumbai

2. Surgeon Partnerships को मजबूत करना

Orthopedic surgeons के साथ गहरी partnerships Lumov का core मॉडल है। Funding से:

  • अधिक doctors को ऑनबोर्ड किया जाएगा
  • क्लीनिक और hospitals में presence बढ़ाई जाएगी
  • नए clinically validated solutions बनाए जाएंगे

3. New Product Development

Team अब R&D में तेज़ी लाएगी और ऐसे products बनाएगी जो:

  • पोस्ट-सर्जिकल recovery
  • pain management
  • long-term mobility care
    को आसान बनाएं।

4. Manufacturing & Sales Teams का विस्तार

Quality production के लिए manufacturing capacity बढ़ाई जाएगी और
nationwide distribution मजबूत किया जाएगा।


🏥 Lumov क्या करता है?

Lumov एक specialized healthcare startup है जो orthopedic recovery और rehabilitation को बेहतर बनाने पर काम करता है। इसके products निम्न उपयोगों के लिए डिजाइन किए जाते हैं:

  • Fracture recovery
  • Post-surgery care
  • Knee, spine और joint support
  • Pain management
  • Long-term mobility solutions

ये सभी products clinically validated तरीके से orthopedic doctors के साथ मिलकर बनाए जाते हैं, ताकि भारतीय मरीजों की जरूरतों के अनुसार solutions दिए जा सकें।


🏨 Top Hospitals के साथ साझेदारी

Lumov कई बड़े अस्पताल chains के doctors और medical teams के साथ काम करता है, जिनमें शामिल हैं:

  • Manipal Hospitals
  • Apollo Hospitals
  • Sakra
  • AIG Hospitals (Hyderabad)

इस collaboration-driven मॉडल की वजह से इसके products न सिर्फ medically safe हैं, बल्कि practically effective भी साबित हो रहे हैं।


👥 टीम और Hiring Plans

अभी Lumov की कोर टीम 15 मेंबर्स की है। Funding के बाद कंपनी बड़ी hiring करने की तैयारी में है:

  • Product development
  • Sales
  • Supply chain
  • Operations

स्टार्टअप की योजना है कि अगले कुछ महीनों में टीम size दोगुना किया जाए।


💡 Founders कौन हैं?

Lumov की स्थापना दो founders ने की:

🔹 Saumaric Dangwal

🔹 Ankit Gupta

दोनों founders की healthcare investment में मजबूत पृष्ठभूमि है।
इन्होंने पहले इन global investment firms के साथ काम किया है:

  • Bain Capital
  • Brookfield Private Equity
  • Steinberg Asset Management

इस अनुभव की वजह से ये भारत के healthcare बाजार, patient needs, और rehab solutions की कमी को बहुत अच्छे से समझते हैं।


🩺 भारत में Orthopedic Recovery का Market Gap

भारत दुनिया की सबसे बड़ी orthopedic surgery markets में गिना जाता है,
लेकिन:

  • rehab products अनियमित
  • fragmented
  • और low-quality होते हैं

Lumov इस gap को target कर रहा है, ताकि:

  • recovery fast
  • pain कम
  • और mobility बेहतर हो

इस vision की वजह से investors इसे high-potential deep healthcare play के रूप में देख रहे हैं।


🔮 आने वाले समय में Lumov की Growth

Funding के बाद startup अपने aggressive expansion के लिए तैयार है।
आने वाले महीनों में Lumov:

  • Tier-1 और Tier-2 शहरों में विस्तार करेगा
  • orthopedic doctors के साथ नई categories लॉन्च करेगा
  • digitally assisted recovery tools भी लाने की तैयारी करेगा
  • और product innovation pipeline को मजबूत करेगा

इससे कंपनी भारत के rapidly growing rehab & recovery market की एक प्रमुख खिलाड़ी बन सकती है।


📝 निष्कर्ष

Lumov की seed funding सिर्फ एक फंडिंग राउंड नहीं है, बल्कि India के orthopedic recovery space के लिए एक नया अध्याय है।
Clinically designed, surgeon-backed, India-specific recovery solutions की भारी जरूरत को देखते हुए, Lumov आने वाले सालों में बड़ा प्रभाव डाल सकता है।

नई capital, मजबूत partnerships और experienced founders के साथ, Lumov अब एक बड़े scale-up phase में प्रवेश कर रहा है — और भारत के healthcare innovation space में एक मजबूत नाम बनने के रास्ते पर है।

Read more : Groww को SEBI से मिला OBPP लाइसेंस

🏦 Groww को SEBI से मिला OBPP लाइसेंस

Groww

भारत के तेजी से बढ़ते निवेश प्लेटफ़ॉर्म Groww ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने Groww को Online Bond Platform Provider (OBPP) के रूप में ऑपरेट करने की मंज़ूरी दे दी है। इस लाइसेंस के साथ Groww अब अपने ऐप और प्लेटफ़ॉर्म पर लिस्टेड कॉर्पोरेट बॉन्ड्स को सीधे लिस्ट, डिस्ट्रिब्यूट और ट्रांज़ैक्ट कर सकेगा।

यह कदम भारत में फिक्स्ड-इनकम निवेश को तेजी से आगे बढ़ा सकता है, खासकर खुदरा निवेशकों के बीच, जो मार्केट वोलैटिलिटी से बचते हुए स्थिर रिटर्न की तलाश में रहते हैं।


📌 क्या है Groww को मिला नया OBPP लाइसेंस?

SEBI का OBPP लाइसेंस किसी भी प्लेटफ़ॉर्म को यह अनुमति देता है कि वह—

  • सीधे लिस्टेड कॉर्पोरेट बॉन्ड्स प्रदर्शित करे,
  • उनका वितरण करे,
  • और निवेशकों के लिए ट्रांज़ैक्शन की सुविधा प्रदान करे।

Groww के लिए यह लाइसेंस बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके जरिए वह अपने मौजूदा प्रोडक्ट लाइनअप — equities, mutual funds, ETFs, sovereign gold bonds और अन्य मार्केट-लिंक्ड प्रोडक्ट्स — में अब corporate bonds भी जोड़ सकेगा।


🧩 क्यों महत्वपूर्ण है Groww का Bond Market में प्रवेश?

भारत में बॉन्ड मार्केट लंबे समय से संस्थागत निवेशकों और HNIs तक सीमित रहा है। कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में निवेश की प्रक्रिया

  • जटिल,
  • कम पारदर्शी,
  • और खुदरा निवेशकों के लिए कम सुलभ रही है।

Groww जैसे डिजिटल-फर्स्ट प्लेटफ़ॉर्म के प्रवेश के बाद—

  • बॉन्ड निवेश अब अधिक सरल,
  • पारदर्शी,
  • और युवा रिटेल निवेशकों के लिए आकर्षक हो सकता है।

Groww के पास पहले से ही 12 मिलियन से अधिक सक्रिय निवेशक हैं। ऐसे में बॉन्ड्स का जोड़ना निवेशकों को पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन के लिए एक नया अवसर देगा।


📈 groww का शेयर मार्केट डेब्यू भी रहा सफल

यह मंज़ूरी ऐसे समय में आई है जब Groww ने हाल ही में अपना स्टॉक मार्केट लिस्टिंग पूरा किया था, और कंपनी का शेयर अपने इश्यू प्राइस की तुलना में 14% प्रीमियम पर लिस्ट हुआ था।
इससे साफ है कि निवेशकों का भरोसा Groww पर लगातार बढ़ रहा है।


💹 कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन: मुनाफे में मजबूत बढ़त

Groww ने साल 2025 की दूसरी तिमाही में शानदार वित्तीय प्रदर्शन किया:

  • कुल आय: ₹1,071 करोड़
  • PAT (Profit After Tax): ₹471 करोड़
  • मार्केट शेयर: 26.62% (NSE के अनुसार भारत में सबसे बड़ा स्टॉकब्रोकर)

यह पहली बार है जब भारत का कोई डिजिटल-ब्रोकिंग प्लेटफ़ॉर्म इतना बड़ा मार्केट शेयर हासिल कर चुका है।


📊 ग्राहक अधिग्रहण लागत में बढ़ोतरी

हालाँकि Groww की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता के साथ एक चुनौती भी सामने आई।
कंपनी की कस्टमर एक्विज़िशन कॉस्ट (CAC) बढ़कर:

  • ₹796 (H1 FY25) से
  • ₹1,374 (H1 FY26) हो गई है,

यानी 72% की बढ़ोतरी

विस्तार और मार्केट लीडरशिप की दौड़ में CAC का बढ़ना सामान्य है, लेकिन यह Groww के लिए लागत प्रबंधन की नई चुनौती भी है।


🧾 Digital Bonds से Groww को क्या फायदा होगा?

OBPP लाइसेंस मिलने के बाद Groww के लिए कई नए अवसर खुलते हैं:

🔹 1. AUM (Assets Under Management) में तेजी से वृद्धि

फिक्स्ड-इनकम प्रोडक्ट्स जोड़ने से Groww के AUM में स्थिर और प्रिडिक्टेबल ग्रोथ आएगी।

🔹 2. नए निवेशक वर्ग को जोड़ने का मौका

कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में निवेश करने वाला सेगमेंट—

  • मिडिल-एज्ड प्रोफेशनल्स,
  • सीनियर सिटीज़न्स,
  • और लॉन्ग-टर्म स्टेबल रिटर्न चाहने वाले निवेशक—
    अब Groww प्लेटफ़ॉर्म को अपनाएंगे।

🔹 3. मजबूत प्रतिस्पर्धा में बढ़त

Zerodha, Upstox और Dhan जैसे प्लेटफ़ॉर्म पहले से बॉन्ड मार्केट में सक्रिय हैं।
Groww की एंट्री प्रतिस्पर्धा को और तीव्र करेगी।


👥 Retail निवेशकों के लिए क्या बदलेगा?

Groww का कॉर्पोरेट बॉन्ड्स के क्षेत्र में प्रवेश निवेशकों के लिए कई फायदे लेकर आएगा:

⭐ आसान एक्सेस

सिर्फ एक ऐप में equity, mutual funds और अब bonds भी।

⭐ पारदर्शिता

रियल-टाइम यील्ड, रेटिंग और मैच्योरिटी की स्पष्ट जानकारी।

⭐ कम जटिलता

पहले बॉन्ड निवेश ज्यादातर ब्रोकर या वितरकों के माध्यम से होता था। अब प्रक्रिया कहीं आसान होगी।

⭐ पोर्टफोलियो स्टेबिलिटी

बॉन्ड्स निवेशकों को मार्केट उतार-चढ़ाव से सुरक्षा प्रदान करते हैं।


🔮 Groww की आगे की रणनीति: क्या उम्मीद करें?

फाइनेंशियल मार्केट विश्लेषकों का मानना है कि:

  • Groww जल्द ही Gsec (Government Securities),
  • market-linked debentures,
  • और high-yield corporate bonds
    भी अपने प्लेटफ़ॉर्म में शामिल कर सकता है।

इसके अलावा, Groww के पास मजबूत तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर है, जिससे वह बॉन्ड्स का निवेश अनुभव स्टॉक्स जितना आसान बना सकता है।


📝 निष्कर्ष

Groww के लिए SEBI का OBPP लाइसेंस एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। इससे—

  • प्लेटफ़ॉर्म पर निवेश विकल्प बढ़ेंगे
  • बॉन्ड मार्केट में भागीदारी के नए अवसर खुलेंगे
  • और भारत में फिक्स्ड-इनकम निवेश का डिजिटलकरण तेजी से बढ़ेगा

Groww पहले से ही भारत का सबसे बड़ा स्टॉकब्रोकर बन चुका है, और अब कॉर्पोरेट बॉन्ड्स के क्षेत्र में एंट्री के साथ यह अपने लिए नया विकास अध्याय शुरू कर रहा है।

Read more : Chiratae Ventures ने लॉन्च किया Sonic DeepTech Program

🚀 Chiratae Ventures ने लॉन्च किया Sonic DeepTech Program

Chiratae Ventures

भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में डीपटेक (DeepTech) सेक्टर लगातार तेज़ी से बढ़ रहा है, और अब इस ग्रोथ को और तेज़ करने के लिए Venture Capital फर्म Chiratae Ventures ने एक नया तेज़-तर्रार फंडिंग प्रोग्राम लॉन्च किया है — Sonic DeepTech.

यह प्रोग्राम खास तौर पर उन शुरुआती स्टार्टअप्स के लिए बनाया गया है जो फ्रंटियर टेक्नोलॉजी, एप्लाइड AI, स्पेसटेक, रोबोटिक्स, क्वांटम, क्लाइमेट-टेक, और डिफेंस जैसे हाई-इम्पैक्ट सेक्टर्स में काम कर रहे हैं।


क्या है Sonic DeepTech? — 48 घंटे में फंडिंग का वादा

Sonic DeepTech भारत के डीपटेक स्टार्टअप्स के लिए एक फास्ट-ट्रैक फंडिंग प्लेटफॉर्म है।

इस प्रोग्राम की सबसे खास बात है कि Chiratae Ventures केवल 48 घंटों में निवेश का निर्णय लेगा — जो भारतीय स्टार्टअप स्पेस में शायद पहली बार है।

💰 कितना फंड मिलेगा?

  • स्टार्टअप्स को Seed से Series A तक फंडिंग मिलेगी
  • प्रति स्टार्टअप $2 मिलियन (करीब ₹17 करोड़) तक का निवेश
  • शुरुआत से ही डोमेन एक्सपर्ट्स, इंडस्ट्री लीडर्स और प्रोडक्ट-बिल्डिंग सपोर्ट भी मिलेगा

यह प्रोग्राम उन फाउंडर्स के लिए खास है जो लैब से निकलकर अपनी तकनीक को कमर्शियल लेयर तक ले जाना चाहते हैं।


🧪 किन सेक्टर्स पर रहेगा फोकस?

Sonic DeepTech का फोकस फ्रंटियर टेक्नोलॉजी पर है — यानी ऐसे सेक्टर जो आने वाले दशक में देश की अर्थव्यवस्था को बदल सकते हैं।

🔬 फोकस सेक्टर्स:

  • Energy & Climate Tech
  • 🧬 Bio & MedTech
  • 🤖 Robotics & Advanced Manufacturing
  • 🚀 Space Technologies
  • 🧠 Applied AI & Machine Learning
  • 🇮🇳 Defence & Strategic Tech
  • 🧮 Quantum Technologies
  • 🌐 Digital Economy Infrastructure

इनमें से कई सेक्टरों में भारत अभी शुरुआती चरण में है, इसलिए Sonic DeepTech जैसे प्रोग्राम से डीपटेक इनोवेशन को बड़ा बूस्ट मिलेगा।


🏆 Chiratae Ventures का DeepTech पोर्टफोलियो अब तक

Chiratae Ventures पहले ही डीपटेक सेक्टर में मजबूत उपस्थिति रखता है। फर्म दावा करती है कि अब तक उसने $200 मिलियन से ज्यादा की पूंजी 50 से अधिक DeepTech स्टार्टअप्स में लगाई है।

🌟 पोर्टफोलियो में शामिल प्रमुख नाम:

  • Pixis (AI मार्केटिंग)
  • Miko (रोबोटिक्स)
  • Agnikul Cosmos (स्पेसटेक)
  • Aether Biomedical (मेडटेक डिवाइसेज़)
  • Pando.ai (सप्लाई चेन)
  • Cavli Wireless (IoT)
  • Sigtuple (हेल्थटेक)
  • HealthifyMe (डिजिटल हेल्थ)
  • Metadome.ai (3D विज़ुअल इंजन)

इन कंपनियों में से कई स्टार्टअप्स ग्लोबल स्तर पर भी अपनी पहचान बना चुके हैं।


🧩 180+ पेटेंट एप्लिकेशन और 130+ ग्रांट्स

Chiratae के डीपटेक पोर्टफोलियो की एक खास ताकत है — इनोवेशन।

फर्म के डीपटेक स्टार्टअप्स ने अब तक:

  • 180+ पेटेंट फाइल किए
  • 130 से अधिक पेटेंट हासिल किए

यह दिखाता है कि Chiratae सिर्फ आइडियाज में नहीं, बल्कि हाई-टेक IP और ग्लोबल कंपटीशन वाले बिज़नेस में निवेश करता है।


💼 Chiratae Ventures का बड़ा कद: $1.3 बिलियन AUM

Chiratae Ventures भारत के टॉप वेंचर कैपिटल फंड्स में गिना जाता है। आज फर्म:

  • $1.3 बिलियन से अधिक एसेट्स मैनेज करती है
  • 130+ स्टार्टअप्स में निवेश कर चुकी है

इसके पोर्टफोलियो में Flipkart, Lenskart, Myntra, FirstCry, PolicyBazaar जैसे यूनिकॉर्न नाम भी शामिल हैं।

इसलिए Sonic DeepTech प्रोग्राम के लॉन्च को एक्सपर्ट्स भारत के डीपटेक इकोसिस्टम के लिए बड़ा कदम मान रहे हैं।


🚀 क्यों ज़रूरी है Sonic DeepTech?

भारत में DeepTech को हमेशा से दो बड़ी चुनौतियाँ रहीं:

  1. लंबा R&D टाइमलाइन
  2. कमर्शियलाइजेशन से पहले पूंजी की कमी

Sonic DeepTech इन दोनों चुनौतियों को सीधे एड्रेस करता है:

1. 48 घंटे में निवेश निर्णय

इससे फाउंडर्स महीनों तक मीटिंग्स और इवैल्यूएशन में समय खोने से बचेंगे।

🧪 2. लैब से मार्केट तक सपोर्ट

चिराटेय का एक्सपर्ट नेटवर्क रिसर्च को कमर्शियल प्रोडक्ट में बदलने में मदद करेगा।

🌍 3. ग्लोबल स्टैंडर्ड DeepTech इनोवेशन को बढ़ावा

भारत स्पेसटेक, AI, रक्षा और रोबोटिक्स में तेजी से ग्लोबल कंपटीशन में प्रवेश कर रहा है।


📌 क्या कहता है यह कदम भारत के स्टार्टअप भविष्य के बारे में?

Chiratae Ventures का Sonic DeepTech प्रोग्राम एक सिग्नल है कि:

  • भारत में DeepTech निवेश तेजी से बढ़ेगा
  • फाउंडर्स को तेज़ी से पूंजी और प्रोडक्ट सपोर्ट मिलेगा
  • AI, स्पेस, क्वांटम और रोबोटिक्स जैसे सेक्टर्स में भारतीय कंपनियाँ तेज़ी से आगे बढ़ेंगी
  • भारत की DeepTech क्षमता ग्लोबल स्तर पर और ज्यादा मजबूत होगी

🔍 निष्कर्ष

Sonic DeepTech सिर्फ एक फंडिंग प्रोग्राम नहीं बल्कि भारत की DeepTech इकोनॉमी के लिए एक तेज रफ्तार एक्सेलरेटर है।
48 घंटे में निवेश निर्णय, $2 मिलियन तक की फंडिंग, और DeepTech एक्सपर्ट्स का साथ — यह किसी भी शुरुआती स्टार्टअप के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

Chiratae Ventures ने साफ बता दिया है कि आने वाला दशक DeepTech इनोवेशन का होगा—और भारत इस रेस में पीछे नहीं रहने वाला।

Read more : Y Combinator Summer 2025 Batch: Enterprise AI का नया दौर शुरू!

🚀 Y Combinator Summer 2025 Batch: Enterprise AI का नया दौर शुरू!

Y Combinator

Y Combinator ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह केवल स्टार्टअप्स का लॉन्चपैड नहीं, बल्कि अगली बड़ी टेक क्रांति का रडार भी है। Summer 2025 batch की घोषणा के साथ, ये साफ झलकता है कि AI अब “experimental tools” से निकलकर enterprise-ready systems बन चुका है — यानी ऐसे सिस्टम, जिन पर बड़ी कंपनियाँ आने वाले वर्षों में पूरी तरह निर्भर होंगी।

Y Combinator, जिसने OpenAI, Stripe, Airbnb जैसे दिग्गजों को शुरुआती शुरुआत दी थी, इस बार भी 165+ स्टार्टअप्स में निवेश कर रहा है। CB Insights डेटा के आधार पर इन स्टार्टअप्स को 11 कैटेगरी में मैप किया गया है—और इन कैटेगरी से पता चलता है कि AI अब हर प्रकार के बिज़नेस ऑपरेशन में गहराई तक उतर चुका है।


🧠 1. Voice AI का विस्तार: Regulated Industries तक पहुँच

Voice AI अब केवल स्मार्ट असिस्टेंट नहीं रहा। इस batch में 16 voice AI startups आते हैं, लेकिन उनकी सबसे खास बात है—
वे financial services, compliance-heavy sectors और regulated workflows को भी संभालने लगे हैं।

इस कैटेगरी में आने वाले स्टार्टअप्स:

  • Altur, Veritus Agent, Qualify.bot, Wayline – financial compliance और कस्टमर इंटरैक्शन ऑटोमेशन
  • Liva AI, Panels – proprietary training data तैयार कर रहे हैं, जो किसी भी general-purpose LLM से replicate नहीं हो सकता

इसका मतलब है कि voice AI सिर्फ convenience नहीं देगा, बल्कि enterprise-grade accuracy और regulatory compliance को भी संभालेगा — जो इसे adoption-ready बनाता है।


👨‍💻 2. Software Development Tools में जबरदस्त वृद्धि

Summer 2025 batch में सबसे बड़ी कैटेगरी रही — Software Development AI, जिसमें 20 स्टार्टअप शामिल हैं। Coding agents पहले से ही traction में थे, लेकिन अब स्टार्टअप्स coding के आगे जाकर पूरा development lifecycle ऑटोमेट कर रहे हैं।

उल्लेखनीय स्टार्टअप्स:

  • Stagewise – frontend agents जो बड़े कोडबेस के लिए production-level code लिखते हैं
  • Interfere – automated debugging, हार्डवेयर testing तक का workflow हैंडल करता है

ये tools सिर्फ कोड लिखना नहीं, बल्कि build, test, deploy पूरी चेन को AI-driven बनाने की ओर बढ़ रहे हैं। इससे digital companies का पूरा engineering lifecycle बदल सकता है।


🤖 3. AI Agents अब Mainstream: YC का पूरा दांव Agent Stack पर

इस बार सबसे बड़ा संकेत यह है कि AI agents अब “फ्यूचर टेक” नहीं, बल्कि टेक कंपनियों के लिए बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर बन चुके हैं।

  • कुल batch का लगभग 50% हिस्सा AI agents से जुड़ा है
  • इनमें से 14 स्टार्टअप्स सीधा agent infrastructure बनाते हैं

Agent infrastructure पर काम करने वाले स्टार्टअप्स:

  • AgentHub – agent evaluation
  • Fulcrum Research – de-bugging support
  • Mohi – enterprise-grade monitoring
  • Nozomio Labs – context augmentation layers
  • Imprezia – AI-native advertisement networks

YC इस इशारे के साथ चल रहा है कि corporate दुनिया में AI agents now mandatory, और अगली लड़ाई इन्हें reliable, scalable और enterprise-secure बनाने की होगी।


4. AI Infrastructure का मूड बदल गया: Capability → Efficiency

पहले AI कंपनियाँ capabilities पर फोकस करती थीं—“model कितनी बड़ी है?”, “accuracy कितनी है?”
अब focus बदलकर efficiency, cost, speed और deployment-ready infrastructure पर आ गया है।

Efficiency-focused startups:

  • Stellon Labs – ultra-small frontier models for edge devices
  • Herdora – low-latency GPU inference for voice AI
  • DeepAware AI – data center energy optimization

इसका मतलब है कि enterprise adoption की असली बाधाएँ हैं:

  • latency
  • GPU cost
  • infra consumption
  • edge deployment

और यही YC के नए स्टार्टअप्स solve कर रहे हैं — यानी AI अब पॉवरफुल होने से ज़्यादा practical बनने की race में है।


🔍 5. Strategy Teams के लिए क्या संकेत है?

YC Summer 2025 batch से ये संकेत मिलता है कि आने वाले 2–3 सालों में enterprise AI की दुनिया कैसे बदलने वाली है:

✔ AI agents हर बिज़नेस फंक्शन में default बनेंगे

HR, finance, operations, compliance — सबकुछ AI-driven automation से चलने लगेगा।

✔ Proprietary data और domain-specific AI कंपनियों का moat बन जाएगा

Generic LLMs value खो बैठेंगी; specialised datasets और specialised models असली चाबी होंगे।

✔ DevOps, debugging, testing — सब AI-first हो जाएगा

Software engineering टीमों का structure बदल जाएगा।

✔ Efficiency-first AI infra अब सबसे बड़ी जरूरत

GPU optimization और edge deployment सबसे बड़े business enablers बनेंगे।


📌 Conclusion: Enterprise AI का सबसे बड़ा बदलाव Y Combinator से शुरू

Y Combinator Summer 2025 batch इस बात का साफ संकेत है कि AI अब केवल research playground नहीं — बल्कि enterprise backbone बन चुका है।
Voice AI, agent infrastructure, dev tools, और AI efficiency startups पूरी तरह से इस shift की दिशा तय कर रहे हैं।

जो कंपनियाँ आज इन technologies को अपनाने में तेज़ होंगी, वही आने वाले दशक की winners साबित होंगी।

Read more : Snapdeal की पैरेंट कंपनी AceVector का घाटा 80% घटा

🚀 Snapdeal की पैरेंट कंपनी AceVector का घाटा 80% घटा

Snapdeal

ई-कॉमर्स सेक्टर में अपनी मजबूत मौजूदगी रखने वाली AceVector Group—जो भारत के लोकप्रिय मार्केटप्लेस Snapdeal, ई-कॉमर्स SaaS प्लेटफ़ॉर्म Unicommerce, और ब्रांड रोल-अप यूनिट Stellaro Brands का संचालन करती है—ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही (H1 FY26) में अपने वित्तीय प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। कंपनी का घाटा तेज़ी से कम हुआ है, जबकि राजस्व में दो अंकों की मजबूत बढ़त देखने को मिली है।


📉 घाटा 110 करोड़ से घटकर सिर्फ 22.5 करोड़

AceVector Group ने H1 FY26 के नतीजे जारी करते हुए बताया कि कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट लॉस 80% घटकर 22.5 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 110.3 करोड़ रुपये था।

यह सुधार लागत नियंत्रण, कुशल संचालन और बेहतर राजस्व प्रदर्शन की वजह से आया है।


📈 रेवेन्यू में 35% की वृद्धि

कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू H1 FY26 में 244.4 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के 181.1 करोड़ रुपये के मुकाबले 35% अधिक है।

इसके अलावा, कंपनी को अन्य आय के रूप में 7.5 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जिससे कुल आय बढ़कर 251.9 करोड़ रुपये हो गई।


📝 FY25 का प्रदर्शन: घाटा बढ़ा, राजस्व मामूली बढ़ा

FY25 के नतीजों पर नज़र डालें तो:

  • कंपनी का नेट लॉस 145% YoY बढ़कर 125.9 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था।
  • वहीँ ऑपरेटिंग रेवेन्यू मामूली 4% बढ़कर 395 करोड़ रुपये रहा (FY24: 379.8 करोड़ रुपये)।

यह डेटा दर्शाता है कि FY25 वित्तीय रूप से चुनौतीपूर्ण था, लेकिन FY26 की शुरुआत ने कंपनी के लिए टर्नअराउंड का संकेत दिया है।


📑 AceVector ने फिर ठोकी IPO की दस्तक

AceVector Group ने आज SEBI के साथ अपना Updated Draft Red Herring Prospectus (UDRHP) दाखिल किया है। यह कंपनी की दूसरी IPO कोशिश है।

💰 IPO संरचना:

इस बार का सार्वजनिक निर्गम दो भागों में होगा—

  • Fresh Issue: 300 करोड़ रुपये तक
  • Offer for Sale (OFS): 6.39 करोड़ शेयर, जो मौजूदा निवेशकों द्वारा बेचे जाएंगे

AceVector ने जुलाई 2025 में DRHP कॉन्फ़िडेंशियल आधार पर दाखिल किया था, और SEBI से मंज़ूरी पिछले महीने ही प्राप्त हुई है।


⏳ पहली IPO कोशिश असफल क्यों हुई थी?

AceVector ने 2021 में पहली बार IPO फाइल किया था, जिसमें कंपनी 1,250 करोड़ रुपये जुटाना चाहती थी।
लेकिन 2022 में बाजार में बढ़ी अस्थिरता और निवेशकों के बदलते व्यवहार के कारण यह योजना टाल दी गई

इस बार कंपनी बेहतर वित्तीय संकेतकों के साथ फिर बाज़ार में कदम रख रही है।


🛒 Snapdeal, Unicommerce और Stellaro: कैसे AceVector बना मल्टी-बिज़नेस ग्रुप?

AceVector Group केवल Snapdeal तक सीमित नहीं है। कंपनी की तीन मुख्य इकाइयाँ हैं—

1️⃣ Snapdeal (E-commerce Marketplace)

भारत के वैल्यू-ई-कॉमर्स सेगमेंट में Snapdeal का बड़ा आधार है, जो टियर-2 और टियर-3 शहरों में मजबूत पकड़ रखता है।

2️⃣ Unicommerce (E-commerce SaaS Firm)

कंपनी की यह यूनिट पहले ही IPO कर चुकी है और 2024 में सफलतापूर्वक लिस्ट हुई थी।
Unicommerce द्वारा किए गए IPO में AceVector ने 94.4 लाख शेयर बेचकर लगभग 102 करोड़ रुपये हासिल किए थे।

  • Acquisition Cost: ₹23.52 प्रति शेयर
  • Offer Price: ₹108 प्रति शेयर
  • Return: 4.59X

यह AceVector के लिए एक शानदार एग्ज़िट साबित हुआ।

3️⃣ Stellaro Brands (Brand Roll-Up Subsidiary)

कंपनी तेजी से बढ़ते D2C और मल्टी-ब्रांड ई-कॉमर्स सेगमेंट पर फोकस कर रही है।


💹 क्यों बेहतर हुआ AceVector का प्रदर्शन?

H1 FY26 में कंपनी के प्रदर्शन में सुधार कई कारणों से हुआ:

  • ✔️ खर्चों में अनुशासन
  • ✔️ उच्च-मार्जिन बिज़नेस यूनिट्स से बढ़ता योगदान
  • ✔️ Snapdeal पर वैल्यू-कॉमर्स की मांग में वृद्धि
  • ✔️ Unicommerce की मजबूत बाजार स्थिति
  • ✔️ ऑपरेशनल कार्यक्षमता में सुधार

🚀 आगे की राह: क्या AceVector का IPO सफल होगा?

AceVector के हालिया प्रदर्शन और बाजार की तेजी को देखते हुए, निवेशक इस बार कंपनी की दूसरी IPO कोशिश को अवसर के रूप में देख सकते हैं।

खासकर जब वैल्यू ई-कॉमर्स, SaaS और ब्रांड रोल-अप प्ले तेजी से निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं, AceVector की विविधित बिज़नेस संरचना उसे मजबूत पोज़िशन देती है।


📌 निष्कर्ष

  • AceVector ने H1 FY26 में घाटा 80% घटाया
  • रेवेन्यू में 35% की मजबूत उछाल
  • कंपनी दोबारा IPO लाने की तैयारी में
  • Unicommerce से 4.59X रिटर्न
  • Snapdeal, Unicommerce और Stellaro मिलकर एक मजबूत मल्टी-बिज़नेस एंटरप्राइज बना रहे हैं

AceVector के सुधारते वित्तीय परिणाम और IPO तैयारी यह संकेत देते हैं कि कंपनी नए विकास चरण में प्रवेश कर रही है।

Read more : इस हफ्ते भारतीय स्टार्टअप्स ने जुटाए $272.67 मिलियन

🚀 इस हफ्ते भारतीय स्टार्टअप्स ने जुटाए $272.67 मिलियन

भारतीय स्टार्टअप्स

भारतीय स्टार्टअप्स इकोसिस्टम में कुल $272.67 मिलियन (लगभग ₹2,280 करोड़) की फंडिंग दर्ज की गई। कुल 18 स्टार्टअप्स ने निवेश हासिल किया, जिनमें 5 ग्रोथ-स्टेज और 11 अर्ली-स्टेज डील्स शामिल रहीं, जबकि एक स्टार्टअप ने अपनी फंडिंग राशि का खुलासा नहीं किया।

पिछले हफ्ते के मुकाबले फंडिंग में 22.8% की गिरावट देखने को मिली, जब 35 स्टार्टअप्स ने कुल $353.19 मिलियन जुटाए थे।


💼 ग्रोथ-स्टेज डील्स: 5 कंपनियों ने जुटाए $112.36 मिलियन

इस सप्ताह ग्रोथ और लेट-स्टेज कंपनियों ने कुल $112.36 मिलियन की फंडिंग हासिल की। सबसे बड़ी डील Ultraviolette की रही, जिसने अपने मौजूदा Series E राउंड में $45 मिलियन जुटाए।

🔹 प्रमुख ग्रोथ-स्टेज डील्स

  • Ultraviolette – $45 मिलियन (Zoho Corporation और Lingotto से)
  • Atomberg – ₹212 करोड़ ($24 मिलियन) (Jongsong Investments (Temasek) लीड)
  • StockGro – ₹150 करोड़ (Mukul Agarwal से)
  • Furlenco – $15 मिलियन
  • Planys Technologies – $11.1 मिलियन

🌱 अर्ली-स्टेज डील्स: 12 कंपनियों ने जुटाए $160.31 मिलियन

अर्ली-स्टेज सेक्टर ने इस सप्ताह सबसे बड़ी चमक दिखाई और कुल $160.31 मिलियन की फंडिंग प्राप्त की। सबसे बड़ी डील रही luxury jewellery ब्रांड QWEEN की, जिसने ₹1,000 करोड़ ($110 मिलियन) जुटाए।

🔹 प्रमुख अर्ली-स्टेज डील्स

  • QWEEN – ₹1,000 करोड़ ($110M) — Rosy Blue व Kashikey से
  • Finfactor (Finvu AA) – $15M – WestBridge Capital लीड
  • Ambak – होम लोन स्टार्टअप
  • Modulus Housing – Proptech
  • Moonrider – Electric tractor manufacturer
  • Superhealth – MS Dhoni Family Office व Panthera Peak Capital से निवेश

अधिक डिटेल्स के लिए TheKredible पर फंडिंग ब्रेकडाउन उपलब्ध है।


🏙️ किस शहर में सबसे ज्यादा डील्स?

इस सप्ताह भी बेंगलुरु स्टार्टअप कैपिटल बना रहा:

  • बेंगलुरु – 9 डील्स
  • पुणे, चेन्नई, दिल्ली-NCR – 2 डील्स प्रत्येक
  • मुंबई, भुवनेश्वर, चंडीगढ़ – 1-1 डील

🧩 कौन सा सेक्टर रहा सबसे आगे?

सेगमेंट-वार विश्लेषण के अनुसार:

  • Fintech – 4 डील्स
  • E-commerce – 2 डील्स
  • EV (Electric Vehicles) – 2 डील्स
  • Consumer Tech, Deeptech, Edtech, Proptech – बाकी डील्स

📊 कौन सी सीरीज में सबसे ज्यादा निवेश?

  • Series A – 4 डील्स
  • Seed Round – 3 डील्स
  • Series B & Pre-Series A – 2-2 डील्स
  • साथ ही Series C, D, E में भी निवेश देखने को मिला।

👔 इस हफ्ते की महत्वपूर्ण हायरिंग्स

इस सप्ताह कुछ प्रमुख स्टार्टअप्स ने नेतृत्व टीम को मजबूत किया:

  • Aspora (पूर्व में Vance) – Varun Sridhar बने Wealth & Lending बिजनेस के CEO
  • SpotDraft – Alon Waks बने CMO और Amit Sharma बने CFO
  • Catalyst Brands (CBBS) – Nihar Nidhi बने नए MD

💰 नए फंड लॉन्च

इस सप्ताह कई बड़े VC फंड भी लॉन्च हुए:

  • Fireside Ventures – चौथा फंड ₹2,265 करोड़
  • Nexus Venture Partners – $700 मिलियन फंड
  • DMI Alternatives – $120M Corporate Private Credit Fund
  • Activate (Aakrit Vaish & Pratyush Choudhury) – $75M AI-focused fund

🤝 M&A अपडेट

  • Zaggle ने Rivpe Technology का 100% अधिग्रहण करने के लिए एग्रीमेंट साइन किया।

🆕 लॉन्चेस और प्रमुख पार्टनरशिप्स

  • 🏥 MS Dhoni-backed Superhealth ने बेंगलुरु में अस्पताल खोला
  • 📱 PhonePe Indus Appstore ने Motorola के साथ पार्टनरशिप
  • 🚜 India’s First Electric Tractor Mela – Moonrider के ई-ट्रैक्टर लॉन्च
  • 🌿 RASA Group लॉन्च — Organic Harvest के पूर्व फाउंडर Rahul Agarwal
  • 🚀 PedalStart ने Founder-Investor Fusion 2.0 लॉन्च किया
  • 🧪 BQP, Classiq & NVIDIA – Quantum-Classical breakthrough

📉 इस हफ्ते के बड़े वित्तीय परिणाम

  • Captain Fresh – FY25 में मुनाफा
  • MathCo – 4.3X मुनाफा
  • Pine Labs – दो लगातार क्वार्टर में प्रॉफिट
  • Wonderchef – ₹421 Cr revenue, ₹4 Cr profit
  • Yulu – 98% revenue growth; ₹126 Cr losses
  • Wakefit – H1 FY26 में ₹724 Cr revenue

🔥 टॉप न्यूज फ्लैश

  • PhonePe ने Pincode B2C ऑपरेशंस बंद किए
  • Peak XV के स्टार्टअप बेट्स ने ₹30,000 Cr से ज्यादा वैल्यू बनाई
  • Wakefit ने IPO बैंड ₹185–₹195 सेट किया
  • UPI ने नवंबर में 20.47 बिलियन ट्रांज़ैक्शंस प्रोसेस किए
  • TVS Motor ने नवंबर E2W सेल्स में नंबर 1 स्थान हासिल किया

📝 सारांश (Summary)

इस सप्ताह भारतीय स्टार्टअप फंडिंग 22.8% गिरकर $272.67 मिलियन रही। इसके बावजूद अर्ली-स्टेज सेक्टर और EV-फोकस्ड स्टार्टअप्स ने मजबूत प्रदर्शन दिखाया।

UPI उपयोग 20.47 बिलियन ट्रांज़ैक्शंस पर स्थिर रहा, जबकि TVS Motor ने E2W मार्केट में शीर्ष स्थान पुनः हासिल किया।

कुल मिलाकर, यह सप्ताह फंडिंग, IPO अपडेट, नए लॉन्च, M&A और वित्तीय परिणामों के लिहाज से काफी गतिशील रहा।

Read more : नवंबर 2025 में डिजिटल गोल्ड UPI ट्रांजैक्शंस में गिरावट