🎓 Unacademy 10 साल पूरे होने पर बोले Gaurav Munjal

Unacademy

भारत की प्रमुख एडटेक कंपनी Unacademy ने अपने 10 साल पूरे होने पर बड़े संकेत दिए हैं। सह-संस्थापक गौरव मुंजाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबी पोस्ट लिखते हुए कहा कि कंपनी M&A (Merger & Acquisition) बातचीत में है, और अगर कोई ऐसा विकल्प मिलता है जो दोनों पक्षों के लिए फ़ायदेमंद हो, तो Unacademy आगे बढ़ेगी।

उनका यह बयान तब आया है जब मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि upGrad, जो कि एक उच्च शिक्षा और स्किलिंग प्लेटफॉर्म है, वह Unacademy को $300–$320 मिलियन के वैल्यूएशन पर अधिग्रहित करने की बातचीत में है। यह वैल्यूएशन Unacademy के $3.5 बिलियन (2021) के पीक वैल्यूएशन से लगभग 90% कम है।


🕰️ एक YouTube चैनल से भारत के बड़े एडटेक ब्रांड तक—Unacademy की पूरी कहानी

गौरव मुंजाल ने अपनी पोस्ट में Unacademy की यात्रा को विस्तार से बताया।
यह कहानी शुरू हुई 2010 में, जब मुंजाल कॉलेज में थे और अपने दोस्तों को कंप्यूटर साइंस समझाने के लिए एक YouTube चैनल शुरू किया।

  • 📌 2015: प्लेटफॉर्म को आधिकारिक रूप से लॉन्च किया गया
  • 📌 शुरुआत में ध्यान था फ्री कंटेंट और मजबूत educator community पर
  • 📌 टेक-फ़र्स्ट लैर्निंग मॉडल ने तेजी से ग्रोथ दी

Unacademy ने बेहद कम समय में देशभर के लाखों विद्यार्थियों को जोड़ने में सफलता पाई और एक मज़बूत डिजिटल लर्निंग ब्रांड बन गया।


📈 सब्सक्रिप्शन मॉडल ने दिलाई जबरदस्त उड़ान—कोरोना के दौरान रिकॉर्ड ग्रोथ

2019 से 2021 के बीच कंपनी की ग्रोथ अपने चरम पर रही।

  • 🚀 सब्सक्रिप्शन प्रोडक्ट लॉन्च हुआ
  • 🚀 Paid subscribers करीब 10 लाख तक पहुंचे
  • 🚀 कई बड़े निवेशक जुड़े
  • 🚀 कुल $700 मिलियन से अधिक फंडिंग जुटाई

इस दौरान Unacademy भारतीय एडटेक सेक्टर का पोस्टर-बॉय बन गया था।


📉 लेकिन फिर आई गिरावट—ऑफलाइन कोचिंग की वापसी और कैश बर्न ने धक्का दिया

गौरव मुंजाल की पोस्ट में स्पष्ट लिखा था कि Covid के बाद सीखने वालों का तेजी से वापस ऑफलाइन कोचिंग की ओर लौट जाना कंपनी के लिए बड़ा झटका था।

साथ ही:

  • 🔻 कंपनी का कैश बर्न आक्रामक रूप से बढ़ चुका था
  • 🔻 कम कीमत वाले नए प्रतिस्पर्धी मार्केट में तेजी से आ रहे थे
  • 🔻 छात्रों की भुगतान क्षमता बदल रही थी

इन सब कारणों से Unacademy का बिजनेस मॉडल दबाव में आ गया, और कंपनी की वैल्यूएशन भी नीचे आने लगी।


🏷️ $3.5 बिलियन से गिरकर $500 मिलियन से भी कम?—मुंजाल ने माना बड़ा झटका

मुंजाल ने खुले शब्दों में माना कि कंपनी आज $500 मिलियन से भी कम वैल्यूएशन पर हो सकती है।

उन्होंने कहा कि पहले की “valuation chase” यानी ऊँची वैल्यूएशन के पीछे भागने से कंपनी ने कुछ रणनीतिक गलतियाँ कीं, जिसका असर अब दिखाई दे रहा है।


✂️ तीन साल में बड़ा बदलाव—खर्चों में भारी कटौती

पिछले तीन वर्षों में Unacademy ने खुद को lean और sustainable बनाने के लिए बड़े कदम उठाए हैं।

🔧 कंपनी के प्रमुख बदलाव:

  • वार्षिक कैश बर्न ₹1,400 करोड़ (2022) से घटाकर
    ₹175 करोड़ (2025) कर दिया
  • प्राइसिंग में कटौती
  • प्रोडक्ट को फिर से कंटेंट और सब्सक्रिप्शन-फोकस्ड बनाया
  • टीम और ऑपरेशनल लागत कम की

ये कदम कंपनी को लंबे समय तक टिकने लायक बनाने के लिए उठाए गए हैं।


📊 FY25 का प्रदर्शन—नुकसान में कमी लेकिन अभी भी चुनौतियाँ

FY25 में Unacademy ने:

  • Revenue: ₹826 करोड़
  • Net Loss: ₹436 करोड़ (31% YoY कमी)

हालाँकि कंपनी अभी भी घाटे में है, लेकिन नुकसान तेजी से कम हो रहा है।
यह दर्शाता है कि कंपनी का restructuring सफल रही है और ऑपरेशंस अधिक Sustainable हो रहे हैं।


🔄 M&A की चर्चा—क्या upGrad से हो सकता है बड़ा डील?

हाल के मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि upGrad Unacademy को $300–$320 मिलियन के बीच वैल्यूएशन पर खरीदने की बातचीत कर रही है।

यह कदम भारतीय एडटेक सेक्टर के लिए एक बड़ा Consolidation साबित हो सकता है।
अगर ये डील होती है:

  • दो बड़े प्लेयर्स की ताकत एकजुट होगी
  • प्रोडक्ट ऑफरिंग काफी विस्तृत होगी
  • ऑपरेशनल लागत कम हो सकती है
  • मार्केट शेयर मजबूत हो सकता है

मुंजाल ने कहा कि कंपनी किसी भी ऐसे अवसर के लिए खुली है जो दोनों पक्षों को फायदा पहुँचाये।


🎯 अब Unacademy किस दिशा में जा रही है?—Sustainable Edtech का नया दौर

गौरव मुंजाल ने यह साफ किया कि कंपनी अब “valuation game” नहीं खेल रही।
अब फोकस है:

  • मजबूत यूनिट इकॉनॉमिक्स
  • Sustainable प्रोडक्ट्स
  • कंटेंट-फोकस्ड ग्रोथ
  • कम खर्च में बेहतर परिणाम
  • और लंबी अवधि की स्थिरता

यानी, Unacademy अब 2021 की तेजी वाली एडटेक कंपनी नहीं, बल्कि एक परिपक्व और स्थिर मॉडल की ओर बढ़ रही है।


📝 निष्कर्ष: 10 साल बाद Unacademy एक नए अध्याय की शुरुआत में

Unacademy की यात्रा उतार–चढ़ाव से भरी रही है—YouTube चैनल से unicorn बनने तक, और अब M&A चर्चाओं तक।

कंपनी आज भी लाखों छात्रों का भरोसेमंद नाम है, लेकिन बाजार की वास्तविकता ने इसे नए सिरे से खुद को पुनर्गठित करने पर मजबूर किया है।

क्या upGrad इसे अधिग्रहित करेगा?
यह आने वाले महीनों में साफ होगा।

लेकिन इतना निश्चित है कि Unacademy अब तेज ग्रोथ से ज्यादा स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है और यही इसकी अगले दशक की रणनीति होगी।

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🛏️ Wakefit IPO को मिला मिला-जुला रिस्पॉन्स

Wakefit

होम और स्लीप सॉल्यूशंस ब्रांड Wakefit का IPO निवेशकों के बीच मिला-जुला प्रदर्शन करता दिखा। कंपनी को कुल 2.52 गुना सब्सक्रिप्शन मिला, जिसमें रिटेल निवेशक (3.17x) और QIBs (3.04x) ने मजबूत रुचि दिखाई, जबकि NIIs ने केवल 1.05x बोली लगाई।

IPO 8 दिसंबर से 10 दिसंबर के बीच खुला था और इसकी प्राइस बैंड ₹185–₹195 प्रति शेयर तय की गई थी, जिसमें 76 शेयरों का एक लॉट और ₹14,175 की न्यूनतम निवेश राशि थी।


📊 किसने कितना सब्सक्राइब किया?—रिटेल निवेशकों ने दिखाया दम

एक्सचेंज डेटा के अनुसार:

  • 👥 Retail Investors: 3.17x
  • 🏦 QIBs (Qualified Institutional Buyers): 3.04x
  • 💼 NIIs (Non-Institutional Investors): 1.05x

इन आंकड़ों से साफ है कि IPO की मांग मुख्य रूप से रिटेल और संस्थागत निवेशकों से आई। वहीं, HNI श्रेणी ने उम्मीद से कम रुचि दिखाई।


📅 अलॉटमेंट और लिस्टिंग की तारीखें

Wakefit का शेयर अलॉटमेंट 11 दिसंबर को होने की उम्मीद है।
कंपनी 15 दिसंबर को BSE और NSE पर लिस्ट होगी।

IPO में प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर ₹195 पर भारी बोली दिखाई दी है, जिससे संकेत मिलता है कि बाजार कंपनी को एक प्रीमियम पर स्वीकार करने को तैयार है।


💰 IPO से कितना फंड जुटाना चाहती है Wakefit?

कंपनी के RHP (Red Herring Prospectus) के अनुसार:

  • Fresh Issue: ₹377.2 करोड़
  • Offer for Sale (OFS): 4.68 करोड़ शेयर
  • OFS Value: ₹911.7 करोड़
  • कुल अनुमानित वैल्यूएशन: ₹6,400 करोड़ ($719 मिलियन)

Wakefit अब घरेलू D2C (Direct-to-Consumer) ब्रांड्स में एक मजबूत खिलाड़ी बनकर उभर रही है, और यह IPO इसकी ग्रोथ स्टोरी का महत्वपूर्ण अध्याय माना जा रहा है।


📈 निवेशकों के लिए बड़ा रिटर्न — Peak XV को 10X फायदा

OFS में कई शुरुआती निवेशकों ने बड़ी कमाई की है।

प्रमुख निवेशकों का रिटर्न:

  • Peak XV Partners: लगभग ₹397 करोड़ की निकासी (10x रिटर्न)
  • Verlinvest: लगभग ₹199 करोड़
  • Paramark KB Fund: करीब ₹50 करोड़

Peak XV के 10x रिटर्न ने स्टार्टअप जगत में Wakefit की पकड़ और स्केलेबिलिटी की क्षमता को और मजबूती से स्थापित किया है।


🧲 Anchor Investors से ₹580 करोड़ जुटाए — बड़ी संस्थाओं की मजबूत मौजूदगी

IPO खुलने से पहले Wakefit ने 2.97 करोड़ शेयरों को एंकर निवेशकों को आवंटित करके ₹580 करोड़ जुटाए थे। यह बुक ₹195 के ऊपरी प्राइस बैंड पर पूरी तरह भरी गई।

Anchor Investors में कई बड़े नाम शामिल थे:

  • HDFC Mutual Fund
  • Axis MF
  • Mahindra MF
  • Edelweiss MF
  • Tata MF
  • अन्य प्रमुख फंड

इतनी बड़ी संस्थागत रुचि से IPO के प्रति निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ।


🏬 Wakefit फंड का उपयोग कहाँ करेगी?—स्पष्ट विस्तार योजना

Fresh Issue से जुटाई गई रकम का उपयोग कंपनी कई क्षेत्रों में करेगी।

🚩 कंपनी का फंड उपयोग:

  • नए स्टोर खोलने और COCO (Company-Owned Company-Operated) स्टोर स्थापित करने में
  • स्टोर से जुड़ी leasing लागतों में
  • मार्केटिंग और ब्रांड एडवर्टाइजिंग में
  • प्रोडक्शन के लिए उपकरण खरीदने में
  • और कुछ राशि General Corporate Purposes के लिए रखी जाएगी

इससे यह स्पष्ट है कि Wakefit अब सिर्फ ऑनलाइन D2C ब्रांड ही नहीं, बल्कि एक मजबूत ऑफलाइन-ऑनलाइन हाइब्रिड रिटेल मॉडल की ओर बढ़ रही है।


📉 FY26 और FY25 का वित्तीय प्रदर्शन—क्या है कंपनी की ग्रोथ स्टोरी?

Wakefit ने FY26 की पहली छमाही (H1 FY26) में:

  • Revenue: ₹724 करोड़
  • Net Profit: ₹35.57 करोड़

यह प्रदर्शन कंपनी के स्थिर और लगातार बढ़ते व्यवसाय को दर्शाता है।

FY25 में:

  • Revenue: ₹1,274 करोड़ (लगभग 30% YoY ग्रोथ)
  • FY24 Revenue था ₹986 करोड़
  • लेकिन FY25 में कंपनी को ₹35 करोड़ का नेट लॉस हुआ

यह दर्शाता है कि भले ही कंपनी का रेवेन्यू तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन मार्केटिंग, स्टोर विस्तार और लॉजिस्टिक्स पर भारी खर्च कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी को प्रभावित कर रहे हैं।


🛒 Wakefit की ग्रोथ का राज़: D2C + Offline stores का मजबूत मिश्रण

Wakefit ने एक छोटे ऑनलाइन मैट्रेस स्टार्टअप के रूप में शुरुआत की थी।
आज कंपनी:

  • Furniture
  • Home Décor
  • Sleep Solutions
  • Home Utility Products

जैसे कई कैटेगरी में तेजी से विस्तार कर चुकी है।
ऑनलाइन के साथ-साथ कंपनी अब बड़े शहरों में फिजिकल एक्सपीरियंस स्टोर भी खोल रही है ताकि ग्राहक प्रोडक्ट्स को टेस्ट कर सकें।


📝 निष्कर्ष: Wakefit IPO — स्टेबल लेकिन Overhyped नहीं

Wakefit का IPO:

  • न बहुत धमाकेदार
  • न बहुत कमजोर
  • बल्कि एक संतुलित और स्टेबल रिस्पॉन्स लेकर आया है

रिटेल और QIBs की मजबूत भागीदारी से IPO अच्छा दिख रहा है, लेकिन NIIs की ठंडी प्रतिक्रिया इशारा करती है कि वैल्यूएशन कुछ निवेशकों को ऊँचा लगा।

फिर भी, Wakefit की मजबूत ब्रांड वैल्यू, बढ़ता ऑफलाइन विस्तार, और एंकर फंडिंग की बड़ी लिस्ट कंपनी के भविष्य को सकारात्मक दिशा में ले जाती है।

लिस्टिंग डे (15 दिसंबर) पर बाजार से स्टॉक की चाल देखने लायक होगी।

Read more : GoDutch ने जुटाए €3.6 मिलियन Seed फंडिंग

💳 GoDutch ने जुटाए €3.6 मिलियन Seed फंडिंग

GoDutch

एम्स्टर्डम (नीदरलैंड्स) स्थित फिनटेक स्टार्टअप GoDutch ने अपने Seed फंडिंग राउंड में €3.6 मिलियन (लगभग ₹32 करोड़) जुटाए हैं। यह फंडिंग स्टार्टअप की यूरोप भर में तेजी से विस्तार करने की योजना को मजबूत करेगी।

फंडिंग राउंड का नेतृत्व Luxembourg Finance House ने किया, जबकि मौजूदा निवेशक QuantumLeap Capital ने भी इसमें हिस्सा लिया।

GoDutch छोटे और मध्यम व्यवसायों (SMEs) के लिए एक आधुनिक फाइनेंस ऑटोमेशन प्लेटफॉर्म है, जो अकाउंटिंग से लेकर पेमेंट तक पूरी प्रक्रिया को आसान बनाता है।


🚀 फंडिंग का उपयोग कहाँ होगा?

कंपनी ने बतााया है कि जुटाई गई राशि का उपयोग तीन प्रमुख लक्ष्यों में किया जाएगा:

🔹 1. प्रोडक्ट सूट का विस्तार

GoDutch अपने प्लेटफॉर्म पर कई नए फीचर्स जोड़ने की तैयारी कर रहा है। इसमें शामिल हैं:

  • Payroll सेवाएं
  • Lending solutions (Loan सुविधा)
  • Treasury मैनेजमेंट टूल्स

इन फीचर्स के आने से GoDutch SMEs के लिए एक ऑल-इन-वन फाइनेंस प्लेटफॉर्म बन जाएगा।

🔹 2. यूरोप में तेजी से विस्तार

स्टार्टअप का लक्ष्य है कि वह डच और यूरोपीय बाजारों में और तेजी से अपनी पकड़ बनाए।
कंपनी 1 दिसंबर से Belgian IBANs लॉन्च कर रही है, जिससे बेल्जियम मार्केट में एंट्री आसान होगी।
इसके बाद GoDutch कई और यूरोपीय देशों में विस्तार की तैयारी कर रहा है।

🔹 3. टेक्नोलॉजी को और अधिक स्मार्ट बनाना

कंपनी अपने AI और ऑटोमेशन टूल्स को और उन्नत करने पर जोर दे रही है, ताकि SMEs की मैनुअल वर्कलोड को और कम किया जा सके।


🧩 GoDutch क्या करता है? SMEs के लिए ऑल-इन-वन फाइनेंसिंग समाधान

जून 2024 में CEO थॉमस व्लेस (Thomas Vles) द्वारा लॉन्च किया गया GoDutch, छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए एक फाइनेंस मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म है।

यह सिर्फ एक डिजिटल बिजनेस अकाउंट नहीं है—यह एक ऐसा सिस्टम है जो बिजनेस की रोज़मर्रा की फाइनेंशियल जरूरतें खुद ही मैनेज कर सकता है।

✔️ GoDutch की प्रमुख सेवाएं:

  • बिजनेस बैंक अकाउंट
  • टीम कार्ड्स (कर्मचारियों के लिए)
  • Expense Management Tools
  • Automated Accounts Payable & Receivable
  • Smart AI Tools for Admin Reduction

यह सब मिलकर GoDutch को SMEs के लिए एक फाइनेंस ऑटोमेशन हब बनाते हैं।


🤖 AI और ऑटोमेशन से कम हुआ बिजनेस का झंझट

कई छोटे व्यवसाय अकाउंटिंग, पेमेंट, इनवॉइसिंग और खर्च मैनेजमेंट में काफी समय गंवाते हैं।
GoDutch इन सभी कामों को ऑटोमेट कर देता है।

AI कैसे मदद करता है?

  • इनवॉइस को खुद पढ़कर एंट्री कर देता है
  • पेमेंट रिमाइंडर अपने आप भेजता है
  • गलतियों की पहचान करता है
  • खर्चों का सही कैटेगरीकरण कर देता है
  • टीम की स्पेंडिंग पर रियल-टाइम कंट्रोल देता है

इस तरह GoDutch उन कामों में समय बचाता है जहाँ SMEs अक्सर सबसे ज्यादा समय खो देते हैं।


📈 तेजी से बढ़ रहा है GoDutch: 12,500 से ज्यादा बिजनेस यूजर्स

लॉन्च के सिर्फ कुछ महीनों में ही कंपनी की ग्रोथ काफी मजबूत रही है।

📊 GoDutch के वर्तमान आंकड़े:

  • 12,500+ एक्टिव बिजनेस यूजर्स
  • €1.5 बिलियन (₹13,500 करोड़) से ज्यादा का वार्षिक ट्रांजैक्शन वॉल्यूम
  • लगातार बढ़ती टीम और प्रोडक्ट डेवलपमेंट
  • यूरोप भर में बढ़ती ब्रांड पहचान

इस तरह कम समय में इतनी बड़ी यूजर बेस हासिल करना दिखाता है कि SME फिनटेक स्पेस में GoDutch की जरूरत कितनी ज्यादा है।


🌍 यूरोप में SME फिनटेक का बढ़ता बाजार

यूरोप में SMEs की संख्या करोड़ों में है और इनमें से 60% से अधिक अभी भी मैनुअल और पुराने सिस्टम पर चल रहे हैं।
GoDutch जैसे प्लेटफॉर्म इन व्यवसायों को:

  • तेज़ पेमेंट
  • बेहतर खर्च नियंत्रण
  • आसान अकाउंटिंग
  • और कम मैनुअल काम

देते हैं—जो उनकी प्रोडक्टिविटी को कई गुना बढ़ा देता है।

यही वजह है कि निवेशक यूरोप के SME फिनटेक सेक्टर में लगातार निवेश कर रहे हैं।


🧭 GoDutch का आगे का प्लान: बड़ा विस्तार + बेहतर सेवाएं

फंडिंग के साथ कंपनी के अगले लक्ष्य इस प्रकार हैं:

🔹 यूरोपभर में IBAN विस्तार

Belgian IBAN लॉन्च के बाद फ्रांस, जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों में भी विस्तार होगा।

🔹 SME Loans और Payroll services

GoDutch 2025 की शुरुआत में आसान बिजनेस लोन और पेरोल सेवाएं लॉन्च करेगा।

🔹 All-in-one Business Finance Hub

कंपनी का अंतिम लक्ष्य है एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाना जो:

  • बैंकिंग
  • पेमेंट
  • अकाउंटिंग
  • खर्च प्रबंधन
  • टीम कार्ड
  • इनवॉइसिंग

सब कुछ एक ही जगह पर दे सके।


📝 निष्कर्ष

GoDutch की €3.6 मिलियन Seed फंडिंग यूरोप के SME फिनटेक सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है।
तेजी से बढ़ते यूजर बेस, मजबूत प्रोडक्ट और स्पष्ट विज़न के साथ GoDutch आने वाले वर्षों में यूरोपियन SME मार्केट का बड़ा खिलाड़ी बन सकता है।

यह फंडिंग कंपनी को नए फीचर्स, नए देशों और नए ग्राहकों तक पहुँचने में बड़ी मदद करेगी।
SMEs के लिए यह एक ऐसा टूल है जो न सिर्फ समय बचाता है, बल्कि बेहतर फाइनेंशियल कंट्रोल भी देता है।

Read more : Kodiaq Technologies ने जुटाए £850k

🔋 Kodiaq Technologies ने जुटाए £850k

Kodiaq

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी (UK) के स्पिन-आउट स्टार्टअप Kodiaq Technologies ने हाल ही में अपनी नई फंडिंग राउंड को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। कंपनी ने £850k (लगभग ₹9 करोड़) की फंडिंग जुटाई है, जिसमें क्लाइमेट टेक और डीप-टेक समुदाय के 20 से अधिक निवेशकों ने हिस्सा लिया।
यह फंडिंग कंपनी को अपनी टेक्नोलॉजी को तेज़ी से आगे बढ़ाने में मदद करेगी ताकि आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर प्रोजेक्ट्स शुरू किए जा सकें।


🌍 क्यों है Kodiaq Technologies इतनी खास?

Kodiaq Technologies एक ऐसी टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है जो भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को बदल सकती है।
कंपनी ऑर्गेनिक इलेक्ट्रोलाइट्स बना रही है—जो लॉन्ग-ड्यूरेशन फ्लो बैटरियों में इस्तेमाल होते हैं।

इन बैटरियों की खासियत:

  • ये लंबे समय तक ऊर्जा स्टोर कर सकती हैं
  • सौर (Solar) और पवन (Wind) ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल की सुविधा देती हैं
  • एनर्जी डेंसिटी और कैपेसिटी बढ़ाती हैं
  • बड़े स्तर पर टिकाऊ ऊर्जा समाधान उपलब्ध कराती हैं

यानी, ये टेक्नोलॉजी भविष्य में ग्रीन एनर्जी को और ज्यादा प्रभावी और किफायती बना सकती है।


👨‍🔬 कौन हैं इसके पीछे? Cambridge के दिग्गज वैज्ञानिक

कंपनी की कोर टीम खुद में एक ताकत है।
Kodiaq Technologies की स्थापना तीन बड़े नामों ने मिलकर की है:

✔️ Professor Oren Scherman — CSO

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के मशहूर वैज्ञानिक और एडवांस्ड मैटेरियल्स के विशेषज्ञ।

✔️ Dr. Kamil Sokolowski — CTO

एनर्जी-स्टोरेज साइंस और नई ऊर्जा तकनीकों के इनोवेटर।

✔️ Dr. David Fyfe — Co-founder

Cambridge Display Technology के पूर्व चेयरमैन और CEO।
उन्होंने एक यूनिवर्सिटी स्पिन-आउट को NASDAQ-लिस्टेड कंपनी में बदला और बाद में उसे $285 मिलियन में बेच दिया था।

इन तीनों का अनुभव Kodiaq Technologies को एक मजबूत नेतृत्व देता है।


🚀 फंड का इस्तेमाल कहाँ होगा?

कंपनी ने साफ कहा है कि ये £850k फंडिंग उसके R&D और डेवलपमेंट को तेज़ करने में उपयोग होगी।

🔹 मुख्य लक्ष्य:

  • नेक्स्ट-जेन ऑर्गेनिक इलेक्ट्रोलाइट्स की डेवलपमेंट
  • लॉन्ग-ड्यूरेशन फ्लो बैटरियों के प्रोटोटाइप और टेस्टिंग
  • एनर्जी डेंसिटी बढ़ाने के लिए नए मटेरियल्स की खोज
  • इंटरनेशनल मार्केट्स के लिए स्केल-अप प्लान तैयार करना

कंपनी का फोकस आने वाले महीनों में अपनी टेक्नोलॉजी को ऐसी स्टेज तक ले जाना है जहाँ बड़े स्तर पर डेमो प्रोजेक्ट्स शुरू किए जा सकें।


🧭 2026 में बड़ी फंडिंग की तैयारी

Kodiaq Technologies का लक्ष्य है कि मिड-2026 तक एक और बड़ी फंडिंग राउंड उठाई जाए।

इस अगली फंडिंग का उपयोग होगा:

  • अलग-अलग देशों में बड़े पैमाने पर डेमो प्रोजेक्ट्स लगाने में
  • टेक्नोलॉजी को कमर्शियल लेवल पर लाने में
  • सौर और पवन ऊर्जा को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्टोरेज क्षमता बढ़ाने में

कंपनी का कहना है कि अगले दो वर्षों में वह अपने ऑर्गेनिक इलेक्ट्रोलाइट-आधारित बैटरी समाधान को ग्लोबल एनर्जी मार्केट में लॉन्च करने की तैयारी में है।


🌞 क्यों ज़रूरी है यह टेक्नोलॉजी?

आज दुनिया तेजी से ग्रीन एनर्जी की तरफ बढ़ रही है।
लेकिन सॉलिड, लॉन्ग-ड्यूरेशन स्टोरेज का ना होना अभी भी एक बड़ी समस्या है।

Kodiaq की तकनीक इस समस्या का समाधान दे सकती है:

  • सौर और पवन ऊर्जा अनिश्चित होती हैं
  • दिन-रात बराबर उत्पादन नहीं होता
  • बड़े शहरों और इंडस्ट्री को स्थिर पावर सप्लाई की जरूरत होती है

फ्लो बैटरियों में ऑर्गेनिक इलेक्ट्रोलाइट्स जोड़ने से ये बैटरियां:

  • ज्यादा ऊर्जा स्टोर कर सकेंगी
  • लंबे समय तक पावर दे सकेंगी
  • सिस्टम को ज्यादा सस्ता और ग्रीन बना सकेंगी

इस टेक्नोलॉजी से Solar + Storage और Wind + Storage मॉडल और ज्यादा profitable और scalable हो सकते हैं।


🧩 ग्लोबल मार्केट में बड़ा अवसर

एनर्जी स्टोरेज मार्केट दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहा है।
2030 तक ग्लोबल स्टोरेज मार्केट $400-500 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है।

इसमें लॉन्ग-ड्यूरेशन फ्लो बटरीज़ का बड़ा रोल होगा।
Kodiaq Technologies इसी बाजार को टारगेट कर रही है और अपने ऑर्गेनिक इलेक्ट्रोलाइट्स के जरिए एक नई दिशा देने की कोशिश कर रही है।


📝 निष्कर्ष

Kodiaq Technologies की £850k फंडिंग सिर्फ एक छोटी सी शुरुआत लग सकती है, लेकिन इसका असर आने वाले वर्षों में बहुत बड़ा होगा।

उनकी इनोवेटिव ऑर्गेनिक इलेक्ट्रोलाइट टेक्नोलॉजी दुनिया को:

  • ज़्यादा साफ ऊर्जा
  • ज़्यादा सस्ती स्टोरेज
  • और ज़्यादा भरोसेमंद ग्रीन पावर

देने में सक्षम हो सकती है।

2026 की बड़ी फंडिंग और ग्लोबल डेमो प्रोजेक्ट्स के बाद यह स्टार्टअप ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा नाम बन सकता है।

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🚀 Aneli Capital ने लॉन्च किया €35 Million VC Fund

Aneli Capital

Central और Eastern Europe (CEE) में टैलेंट, इनोवेशन और टेक्नोलॉजी की कोई कमी नहीं है।Aneli Capital यहां के फाउंडर्स बेहद ambitious हैं और deep-tech से लेकर robotics तक शानदार आइडियाज़ लेकर आते हैं। लेकिन समस्या एक ही है — कमी है capital की।

इस गैप को भरने के लिए Lithuania की राजधानी Vilnius से एक नया Venture Capital fund सामने आया है — Aneli Capital, जिसने €35 million (लगभग ₹315 करोड़) का फंड लॉन्च किया है। इसका लक्ष्य है CEE के startups को वो support देना जो Silicon Valley और Western Europe जैसी mature markets में मिलता है।


💡 20 Startups में निवेश का प्लान — अगले 5 साल की Strategy तय!

Aneli Capital अगले 5 सालों में 20 startups को फंड करने की योजना लेकर आया है। निवेश के sectors हैं:

  • ICT (Information & Communication Technology)
  • Robotics
  • Space Tech
  • Photonics
  • Smart Manufacturing
  • Energy Innovation

फंड को backing मिली है:

  • National Lithuanian Development Bank (ILTE)
  • Poland’s Magna Polonia

फंड का मॉडल simple है: Speed, Guidance और Long-term Partnership। यानी सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि पूरा सहयोग।


🗣 “हम hype पर नहीं, Real Products पर Invest करते हैं”

Aneli की पार्टनर और फंड मैनेजर Daiva Rakauskaitė, CFA बताती हैं:

“अधिकतर निवेशक किसी sector में hype आने पर कूद पड़ते हैं और जब craze खत्म हो जाता है, तो पीछे हट जाते हैं। हम ऐसा नहीं करते। हमारा ध्यान ऐसे startups पर होगा जो real products बनाते हैं, early-stage customers हासिल करते हैं और strong economics दिखाते हैं। हम शुरुआत से अंत तक साथ रहने वाले partners बनना चाहते हैं।”

यानी फंड का focus केवल shiny ideas पर नहीं, बल्कि deep value creation पर है।


🧭 अनुभव से भरी Core Team — Mentorship & Structure पर सबसे ज़्यादा जोर

Aneli Capital सिर्फ पैसा देने वाला फंड नहीं है। यह एक hands-on partner की तरह काम करेगा।

फंड की core team में शामिल हैं:

  • Daiva Rakauskaitė — Partner & Fund Manager
  • Nerijus Baliūnas — Strategy & Business Development
  • Jacek Blonski — Deep Tech & Cross-border Networking
  • Sabina Sinicienė — Investment Director

इस टीम ने Lithuania के startup ecosystem को बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

उन्होंने:

  • Lithuanian Venture Capital Association
  • Lithuanian Business Angel Network (LitBAN)

जैसी संस्थाओं की नींव रखी थी।
इनका अनुभव बताता है कि CEE founders को सिर्फ funding नहीं, बल्कि structure, mentorship और execution support की ज़रूरत है।


🔬 Deeptech पर Strong Focus — लेकिन AI में भी Smart Strategy

Aneli Capital की investment thesis बड़े साफ तौर पर deeptech पर आधारित है। focus sectors में शामिल हैं:

  • ICT
  • Robotics
  • Photonics
  • Smart Manufacturing
  • Energy Innovation

AI में भी fund investment करेगा, लेकिन सिर्फ उन्हीं startups में जो:

  • measurable growth दिखा रहे हों
  • early revenue या customer traction हो
  • economics strong हो

Rakauskaitė कहती हैं:

“किसी भी देश में हम उन्हीं founders को चुनेंगे जो real results deliver कर रहे हों। Funding growth को accelerate करने के लिए होती है, न कि growth से पहले मांगी जाने वाली चीज़।”


🤝 Speedinvest या Credo Ventures जैसे बड़े नामों से कैसे अलग है Aneli?

यूरोप में Speedinvest, Credo Ventures जैसे बड़े VC players सक्रिय हैं, लेकिन Aneli खुद को उनसे अलग position करता है।

🚀 Aneli का Uniqueness:

  • बहुत early-stage पर फोकस
  • Hands-on guidance from day one
  • Real partnerships, not just funding
  • Local angel networks और global VC के बीच bridge का काम

यानी startup को शुरुआती phase में सही दिशा मिलती है और बाद में बड़े VCs से fundraising भी आसान हो जाती है।


🌍 CEE Region में कौन से देश Target होंगे?

Aneli Capital का निवेश roadmap इस प्रकार है:

👉 2026 का लक्ष्य:

  • 8 startups में निवेश

👉 अगले 5 साल में:

  • कुल 20 startups का portfolio

👉 Geographical distribution:

  • 50% Investment Lithuania में
  • बाकी 50%:
    • Latvia
    • Estonia
    • Poland
    • और अन्य CEE markets

यानी ये fund CEE region में स्टार्टअप ecosystem को एक नया growth engine प्रदान करेगा।


🏁 निष्कर्ष: CEE Startup Ecosystem के लिए Aneli Capital एक Game-Changer

CEE में talent और tech solutions की कोई कमी नहीं, लेकिन funding और mentorship का बड़ा gap है। Aneli Capital का €35 million फंड उसी gap को भरने की कोशिश है।

यह VC fund सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि:

  • दिशा
  • Journey-long partnership
  • Deeptech expertise
  • और early-stage mentorship

देकर CEE startups को global stage तक ले जाने में मदद करेगा।

CEE के ambitious founders के लिए यह एक बड़ा अवसर है — और region के tech future के लिए एक महत्वपूर्ण कदम भी।

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🚀 London-Based Matta ने जुटाए $14M

Matta

लंदन स्थित Matta, जो University of Cambridge का एक deep-tech spin-out है, ने हाल ही में $14 मिलियन (लगभग ₹116 करोड़) की seed funding जुटाई है। यह फंडिंग कंपनी के उस मिशन को और मजबूत बनाती है जिसके तहत Matta दुनिया भर की फैक्ट्रियों में modern, intelligent और autonomous manufacturing systems तैयार करना चाहता है।

Funding राउंड का नेतृत्व Lakestar ने किया, जबकि Giant Ventures, RedSeed VC, InMotion Ventures, Peugeot Family का 1st Kind, Unruly Capital, Boost VC तथा Innovate UK और Royal Academy of Engineering की grants भी शामिल रहीं।

इस निवेश के साथ Matta अब यूरोप और अमेरिका में अपने rollout को तेज करेगा और अपनी core capabilities को और बेहतर बनाएगा। कंपनी का long-term vision है — पूरी तरह autonomous manufacturing को संभव बनाना।


🏭 क्या है Matta? और क्यों है यह इतना ज़रूरी?

साल 2022 में Douglas Brion और Sebastian Pattinson द्वारा स्थापित Matta ऐसे समय में सामने आया जब manufacturing सेक्टर कई चुनौतियों से जूझ रहा है:

  • बढ़ती energy costs
  • कमजोर होती supply chains
  • skilled workers की कमी
  • Reshoring की बढ़ती जरूरत
  • High-pressure production targets

यूरोप और अमेरिका जैसे क्षेत्रों में deindustrialisation के बाद अब factories वापस लौट रही हैं, लेकिन limited resources के साथ high efficiency की मांग और भी ज़्यादा हो गई है।

ऐसे माहौल में Matta एक practical, AI-powered समाधान लेकर आया है जो factories के traditional systems को बिना बाधित किए productivity बढ़ाता है।


🤖 Plug-and-Play System: Real Factory Floors के लिए तैयार!

Matta का system एक ऐसे smart layer की तरह काम करता है जो फैक्ट्रियों के production lines के physical rules को समझकर उसी के अनुसार काम करता है।

कंपनी का पहला product इस्तेमाल करता है:

✔ Unsupervised AI

✔ Self-supervised computer vision

इन तकनीकों की मदद से यह system:

  • Quality control को automate करता है
  • Defects और anomalies पकड़ता है
  • Micron-level पर measurements लेता है
  • Root-cause analysis करता है
  • Real-time corrective actions सुझाता है

सबसे बड़ी बात — यह system plug-and-play है, यानी existing production line में बिना किसी बड़े बदलाव के इसे तुरंत लगाया जा सकता है।

कई deployments में यह सिस्टम कुछ ही घंटों में fully operational हो जाता है और थोड़ी सीखने की अवधि के बाद automated inspection शुरू कर देता है।


📊 Central Monitoring Platform: हर कैमरा, हर लाइन की Visibility

Matta के solution का एक बड़ा फायदा इसका central platform है, जो:

  • हर कैमरे को मॉनिटर करता है
  • Inspection के real-time results देता है
  • Parts का पूरा trace देता है
  • Bottlenecks की तुरंत पहचान करता है

यानी एक ही स्क्रीन पर पूरी production line की health का डेटा दिखाई देता है।
यह system hardware + software + research expertise का complete package है, जिससे factories को अलग-अलग tools पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।


🏭 स्मार्ट, Self-Regulating Factories की तरफ बड़ा कदम

Matta की technology electronics, automotive, defence से लेकर apparel तक कई sectors में इस्तेमाल की जा रही है।
यह manual inspection stations, conveyor belts और robotic arms के साथ seamlessly integrate हो जाती है।

कंपनी अभी OEM partners के साथ मिलकर ऐसे features बना रही है जिनसे machines खुद अपनी settings को adjust कर सकें — यानी production line खुद को regulate कर सके।

यह autonomous manufacturing की दिशा में एक बड़ा कदम है।


⚙ जल्दी सीखता है, जल्दी सुधार करता है!

Matta की technology production line के patterns और behavior को कुछ ही दिनों में सीख लेती है
इससे factories को ये फायदे मिलते हैं:

  • Defects जल्दी पकड़ में आते हैं
  • Root causes साफ दिखाई देते हैं
  • Downtime कम होता है
  • कम workforce में भी high output
  • Operational resilience बढ़ता है

Economic और geopolitical uncertainties के बीच यह efficiency आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।


🗣 “Manufacturing अभी भी इंसानी अनुभव पर चलती है” — Matta के CEO

Matta के Co-founder एवं CEO Douglas Brion कहते हैं:

“आज भी manufacturing इंसानी अनुभव पर बहुत निर्भर है। कोई worker एक scratch को देखकर बता देता है कि यह ‘34 microns’ का है। हम AI के जरिए इसी tacit knowledge को capture कर उसे scale करना चाहते हैं। अब वक्त है ‘Manufacturing the Impossible’ का।”

यह vision सिर्फ automation नहीं बल्कि human intelligence को AI से scale करने की दिशा में एक futuristic कदम है।


🏁 निष्कर्ष: Manufacturing का भविष्य बदलने को तैयार Matta

$14M की ताज़ा funding के साथ Matta अब global manufacturing में एक बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखता है।
इसकी AI-based, plug-and-play तकनीक factories को smarter, faster और अधिक resilient बनाती है—
और आने वाले समय में autonomous factories की तरफ दुनिया को आगे बढ़ाने में Matta एक प्रमुख भूमिका निभा सकता है।

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🚀 Saviynt ने जुटाए $700M

Saviynt

Identity security स्पेस में काम करने वाली लॉस एंजेलिस-आधारित कंपनी Saviynt ने हाल ही में एक धमाकेदार उपलब्धि दर्ज की है। कंपनी ने $700 मिलियन (लगभग ₹5,800 करोड़) की Series B growth equity funding जुटाई है — जो इसे लगभग $3 बिलियन की वैल्यूएशन पर ले जाती है।

इस मेगा फंडिंग राउंड का नेतृत्व किया KKR ने, जिसमें Sixth Street Growth, TenEleven, और मौजूदा निवेशक Carrick Capital Partners भी शामिल रहे। Identity security segment में यह फंडिंग अब तक की सबसे बड़ी ग्रोथ राउंड्स में शामिल हो चुकी है।


💡 Identity Security इतना बड़ा मुद्दा क्यों?

डिजिटल दुनिया में तेजी से बढ़ते साइबर खतरों की वजह से कंपनियों के लिए identity-related सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
आज enterprise सिर्फ employees को access देने तक सीमित नहीं हैं —
अब उन्हें इन सबको सुरक्षित रखना होता है:

  • Human identities
  • Non-human identities (AI agents, bots, APIs)
  • Applications
  • Cloud resources
  • Privileged access users

Saviynt इसी critical समस्या को modern तरीके से हल करता है।


🧩 Saviynt क्या करता है?

Saviynt एक cloud-first unified identity platform है जो कंपनियों को इन सब में मदद करता है:

✔ Identity Governance

✔ Privileged Access Management

✔ Application Access Controls

✔ Posture Management

✔ Zero Trust Access

✔ AI agents और non-human identities का नियंत्रण

पहले ये capabilities अलग-अलग tools में बंटी होती थीं।
Saviynt ने इन सभी को एक single unified platform में जोड़कर कंपनियों की identity security और compliance को बेहद आसान बना दिया है।


🚀 Funding के बाद कंपनी क्या करेगी?

$700M की funding के बाद Saviynt की योजना अपने vision को और तेजी से आगे बढ़ाने की है। कंपनी कई बड़े अपडेट्स पर काम कर रही है:

🔹 1. Product roadmap में तेज़ी

नए AI-driven identity security tools लॉन्च किए जाएंगे।

🔹 2. Legacy systems से migration आसान बनाना

कंपनी ऐसे utilities तैयार कर रही है जिससे बड़े एंटरप्राइज़ पुरानी identity systems से आसानी से shift हो सकें।

🔹 3. Hyperscalers और SaaS providers के साथ नई integrations

जैसे:

  • AWS
  • Zscaler
  • CrowdStrike
  • Wiz
  • Cyera

इनसे ग्राहकों को एक unified security ecosystem मिलता है।

🔹 4. Global expansion

अमेरिका, यूरोप, मध्य-पूर्व और एशिया में ग्राहक आधार बढ़ाने की योजना है।


🌍 कंपनी की Growth Journey

Saviynt की स्थापना साल 2011 में California में हुई थी।
CEO Sachin Nayyar ने identity को enterprise security का core माना और उसी विज़न पर कंपनी की नींव रखी।

आज Saviynt के पास:

  • 600+ enterprise customers
  • Global deployments
  • मजबूत partner network

इसके ग्राहक Healthcare, Banking, Insurance, Energy और Government जैसे high-risk सेक्टर्स से आते हैं जहाँ identity security सबसे ज़्यादा critical होती है।


🔐 AI और Non-Human Identities पर बड़ा फोकस

2025 में identity security का सबसे बड़ा चैलेंज AI agents, machine identities और bots का नियंत्रण है।

Saviynt अब ऐसे नए tools बना रहा है जो:

  • AI agents की पहचान को secure रखें
  • Critical applications पर access misuse को रोकें
  • Cloud environments में visibility बढ़ाएँ
  • Privileged sessions की monitoring मजबूत करें

यानी ये आने वाले समय की identity जरूरतों के अनुसार खुद को अपडेट कर रहा है।


📈 Market क्यों इतना बड़ा हो रहा है?

Identity sprawl आज सबसे बड़ा खतरा बन चुका है—
हर कंपनी हजारों employees और हजारों AI-powered systems इस्तेमाल कर रही है।

इससे बढ़ रहे हैं:

  • Security breaches
  • Critical data leaks
  • Compliance challenges

Saviynt का unified platform इन सभी को एक जगह कंट्रोल करता है — इसी वजह से यह global enterprises में तेजी से अपनाया जा रहा है।


🏁 What’s Next?

$700M की फंडिंग ने Saviynt को identity security की दुनिया में एक superpower की तरह स्थापित कर दिया है।
कंपनी अब:

  • अधिक customers तक पहुंचेगी
  • अपने AI-driven products को और मजबूत बनाएगी
  • International presence को कई गुना बढ़ाएगी
  • Enterprise identity के हर हिस्से को आधुनिक और सुरक्षित बनाएगी

Identity security आने वाले 10 सालों का सबसे बड़ा tech sector बनने वाला है — और Saviynt अब इस रेस के सबसे आगे खड़ी कंपनियों में शामिल हो चुकी है।

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🎙️ SuperBryn ने जुटाए $1.2 Million

SuperBryn

बेंगलुरु-आधारित वॉयस AI स्टार्टअप SuperBryn ने अपने प्री-सीड राउंड में $1.2 मिलियन (लगभग ₹10 करोड़) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व Kalaari Capital की CXXO पहल ने किया।

यह फंडिंग SuperBryn के लिए सिर्फ कैपिटल इन्फ्यूज़न नहीं, बल्कि शुरुआती चरण से ही मजबूत VC सपोर्ट का संकेत है—जो भारत के AI स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए भी एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।


💰 कौन-कौन निवेशक जुड़े?

प्री-सीड राउंड में कई जाने-माने एंजेल निवेशकों ने भी भाग लिया, जिनमें शामिल हैं:

  • EaseMyTrip के को-फाउंडर Rikant Pitti
  • Docket AI के फाउंडर Arjun Pillai
  • Sanas AI के फाउंडर Sharath Narayanan
  • BMH Group के CEO Harish Manian
  • मलयालम इंडस्ट्री के लोकप्रिय अभिनेता Nivin Pauly

इन हाई-प्रोफाइल निवेशकों का जुड़ना SuperBryn के प्रोडक्ट और मार्केट पोटेंशियल को मजबूत वैलिडेशन देता है।


🚀 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

SuperBryn इस निवेश का उपयोग तीन मुख्य क्षेत्रों में करने की योजना बना रहा है:

✔️ 1. प्रोडक्ट डेवलपमेंट को मजबूत करना

कंपनी अपनी AI लेयर को और अधिक शक्तिशाली, सटीक और स्केलेबल बनाने पर काम करेगी।

✔️ 2. इंजीनियरिंग टीम का विस्तार

AI/ML, वॉयस प्रोसेसिंग और डेवलपर टूलिंग में नई हायरिंग की जाएगी।

✔️ 3. एंटरप्राइज डिप्लॉयमेंट्स को स्केल करना

यूएस और ग्लोबल मार्केट में अपने शुरुआती ग्राहकों तक तेज़ी से पहुंचने के लिए SuperBryn अपने GTM मोशन को मजबूत करेगा।


🧠 SuperBryn क्या बनाता है? – Enterprise Voice AI का ‘Brains Layer’

SuperBryn की स्थापना Nikkitha Shanker और Neethu Mariam Joy ने की है, जो दोनों गहरी टेक बैकग्राउंड और प्रोडक्ट अनुभव रखती हैं।

स्टार्टअप एक ऐसा evaluation, observability और self-learning प्लेटफॉर्म बना रहा है, जो voice AI को रियल-वर्ल्ड में ज़्यादा प्रभावी और विश्वसनीय बनाता है।

🎧 Voice AI में क्या समस्या है?

आज कई कंपनियाँ वॉइस बॉट्स और वर्चुअल एजेंट्स का इस्तेमाल करती हैं, पर अक्सर:

  • आवाज़ पहचान में त्रुटियाँ होती हैं
  • संदर्भ समझने में समस्या आती है
  • लाइव वातावरण में फेलियर रेट ज़्यादा होता है
  • ह्यूमन-लाइक रिस्पॉन्स नहीं मिलता

SuperBryn का प्लेटफॉर्म इन्हीं समस्याओं को हल करता है और एंटरप्राइज को पायलट से प्रोडक्शन तक तेजी से ले जाने में मदद करता है।


🏥 हाई-रिस्क सेक्टर्स पर फोकस: Healthcare, Finance, Insurance

SuperBryn खास तौर पर उन उद्योगों पर ध्यान दे रहा है, जहां एक छोटी गलती भी बड़ा असर डाल सकती है:

  • हेल्थकेयर: डॉक्टर/पेशेंट कॉल इंटरप्रिटेशन
  • फायनेंशियल सर्विसेज: KYC verification, ग्राहक सहायता
  • इंश्योरेंस: क्लेम प्रोसेसिंग, सपोर्ट कॉल्स

इन क्षेत्रों में विश्वसनीयता, सटीकता और जीरो-टॉलरेंस एरर महत्वपूर्ण है — और यही SuperBryn सॉल्व कर रहा है।


⚙️ कैसे काम करता है SuperBryn का प्लेटफॉर्म?

स्टार्टअप का सिस्टम एक तरह से voice AI का ‘रियल-टाइम परफॉर्मेंस कोच’ है।

यह:

  • voice agents की quality monitor करता है
  • गलतियों और failures का root cause analysis करता है
  • डेटा से सीखकर सिस्टम को self-improve होने देता है
  • enterprises को actionable insights देता है

इससे कंपनियों के voice bots ज्यादा मानवीय, विश्वसनीय और तेज़ बनते हैं।


🌎 US Market पर सीधा निशाना

SuperBryn अभी शुरुआती स्टेज में है लेकिन इसका प्राथमिक टारगेट ग्लोबल—खासकर अमेरिकी बाजार है।

📌 हाल के महत्वपूर्ण माइलस्टोन्स:

  • Nasscom InnoTrek USA 2025 के लिए चयन
  • Mphasis Sparkle Innovation Program में शामिल

इन दोनों प्रोग्राम्स से SuperBryn को Fortune 500 स्तर के संभावित ग्राहक और पार्टनरशिप अवसर प्राप्त होंगे।


🧩 भारत के Voice AI स्टार्टअप्स के लिए बड़ा क्षण

भारत में Voice AI तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन सुपर-स्पेशलाइज्ड enterprise-grade voice infra बनाने वाले स्टार्टअप अभी कम हैं।

SuperBryn इस कैटेगरी में एक tech-first deeptech player के रूप में उभर रहा है, जो:

  • हाई-इंटेलिजेंस लेयर बनाता है
  • Global market को टारगेट करता है
  • Pure enterprise AI पर फोकस करता है

Kalaari का CXXO-initiative समर्थन बताता है कि महिला-निर्देशित deep-tech स्टार्टअप्स को अब अधिक institutional backing मिल रही है।


🔮 आगे का रास्ता: क्या SuperBryn Voice AI का Global Standard बन सकता है?

फंडिंग के बाद, कंपनी के सामने कई अवसर और चुनौतियाँ हैं:

🔹 Global enterprise buyers तक पहुंच
🔹 Continuous model improvement
🔹 Live environment accuracy बढ़ाना
🔹 US healthcare & finance बाजार में शुरुआती सपोर्ट जीतना

अगर SuperBryn reliability और speed के मौजूदा अंतर को पाटने में सफल रहा, तो यह भारतीय deep-tech की दुनिया में अगला global-scale voice AI इंफ्रा स्टार्टअप बन सकता है।

Read more : FY25 में NAO Spirits की रफ़्तार धीमी

🍸 FY25 में NAO Spirits की रफ़्तार धीमी

NAO Spirits

भारत की प्रमुख क्राफ्ट जिन निर्माता कंपनी NAO Spirits — जो Greater Than और Hapusa जैसी प्रीमियम जिन ब्रांडों के लिए जानी जाती है — के लिए वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) कुछ खास अच्छा नहीं रहा। FY24 में तेज़ी से बढ़ने के बाद कंपनी की ग्रोथ FY25 में अचानक रुक गई।

कंपनी की रेवेन्यू में 25% से ज़्यादा गिरावट दर्ज हुई, जबकि लॉस दोगुने हो गए। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब प्रीमियम अल्कोहल मार्केट में प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है।


📉 FY25 में Revenue 25.6% गिरकर ₹60.46 करोड़ पर आया

NAO Spirits की RoC (Registrar of Companies) से प्राप्त वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार:

  • FY24 Revenue: ₹81.26 करोड़
  • FY25 Revenue: ₹60.46 करोड़
  • गिरावट: 25.6%

कंपनी की आय का पूरा स्रोत सिर्फ इसकी जिन ब्रांडों की बिक्री थी— Greater Than और Hapusa

🌍 Export भी मामूली रहे

भारत-बेस्ड कंपनी होने के बावजूद इसका एक्सपोर्ट रेवेन्यू सिर्फ ₹1.13 करोड़ रहा।


💸 Cost में भी कमी, पर EBITDA और Loss बढ़े

रेवेन्यू गिरने के साथ कंपनी ने कुछ बड़े कॉस्ट हेड्स में कटौती की। फिर भी कुल लाभ-हानि की तस्वीर खराब रही।

⚖️ Excise Duty में 22.6% कमी

  • FY24 Excise Duty: ₹42.9 करोड़
  • FY25 Excise Duty: ₹33 करोड़
  • यह अभी भी कंपनी की कुल लागत का 36% है।

🛒 Procurement Cost 13% घटी

  • FY24: ₹17.13 करोड़
  • FY25: ₹14.91 करोड़

🎯 Advertising & Promotion 24% घटी

  • FY24: ₹17.7 करोड़
  • FY25: ₹13.42 करोड़

👥 Employee Cost बढ़कर ₹10.73 करोड़

कर्मचारियों पर खर्च 30% बढ़ गया—यह संकेत देता है कि कंपनी टीम विस्तार पर फोकस कर रही है।

🧾 कुल खर्च लगभग स्थिर: ₹92 करोड़

अन्य खर्चों—जैसे लीगल, ट्रैवल, रेंट—में भी कमी नहीं हुई।


🔻 लॉस दोगुना: FY25 में ₹30.25 करोड़

रेवेन्यू गिरने के साथ कंपनी की वित्तीय स्थिति कमजोर पड़ी:

  • FY24 Loss: ₹14.6 करोड़
  • FY25 Loss: ₹30.25 करोड़ (दोगुना)

📉 EBITDA Margin भी कमजोर

  • EBITDA Margin: –38.07%
  • EBITDA Loss: ₹23 करोड़

खर्च से रेवेन्यू का Ratio (Expense-to-Revenue) भी 1.52 पर रहा—जो उच्च माना जाता है।

कंपनी के पास मार्च 2025 तक कुल करंट एसेट्स ₹23.7 करोड़ थे, जिनमें सिर्फ ₹1.13 करोड़ कैश शामिल है।


🤝 Diageo India ने जून 2025 में किया अधिग्रहण – ₹130 करोड़ में Deal

इस वित्तीय दबाव के बीच Diageo India (United Spirits Ltd) ने जून 2025 में NAO Spirits को ₹130 करोड़ (लगभग $15 मिलियन) में अधिग्रहित कर लिया।

इससे पहले NAO Spirits ने कुल ₹54 करोड़ पाँच फंडिंग राउंड्स में जुटाए थे।

🧩 अधिग्रहण के बाद क्या बदल रहा है?

ऐसी डील्स में आमतौर पर क्या होता है:

  • पुरानी बैलेंस शीट साफ की जाती है
  • Cost rationalisation किया जाता है
  • Parent company (Diageo) अपनी प्रोसेसेज़ लागू करती है

इस वजह से अक्सर कुछ महीनों तक कंपनी का topline गिरता है—जो यहाँ भी दिख रहा है।


🍸 भारतीय Gin Market की चुनौतियाँ

NAO Spirits की गिरावट सिर्फ Company Issue नहीं, बल्कि Indian Gin Market की Volatility भी बताती है।

🔍 मार्केट फैक्ट्स:

  • Gin Category: कुल इंडियन स्पिरिट मार्केट का सिर्फ 2%
  • Demand: ज्यादातर Urban metros में
  • Competition बढ़ रहा है: कई नए Indian craft gin brands आ रहे हैं
  • State excise policies लगातार बदल रही हैं
  • Consumer taste भी तेजी से transform हो रहा है

ऐसे माहौल में NAO Spirits को Diageo के बड़े पोर्टफोलियो में कहीं खोने का भी जोखिम है—क्योंकि Diageo का फोकस हमेशा उसके बड़े volume drivers पर रहता है।


🚀 क्या NAO Spirits फिर से Growth पकड़ पाएगी?

Diageo के पास बड़ी डिस्ट्रीब्यूशन क्षमता है, मजबूत सप्लाई चेन है और एक विशाल ऑन-ट्रेड (बार, होटल, एयरपोर्ट) नेटवर्क है। इससे NAO Spirits को फायदा मिलेगा।

लेकिन असली चुनौती होगी:

  • क्या कंपनी अपने ब्रांड को premium craft gin की पहचान के साथ आगे ले जा पाएगी?
  • क्या Greater Than और Hapusa urban consumer के बीच अपनी पकड़ बनाए रखेंगे?
  • क्या Diageo इस ब्रांड को अपनी प्राथमिकता सूची में ऊपर रखेगा?

वर्तमान प्रदर्शन देखकर लगता है कि रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ गई है, लेकिन अधिग्रहण के बाद कंपनी के लिए नए Growth Levers खुलेंगे।
आने वाले 1-2 साल ये तय करेंगे कि NAO Spirits अपने Stylish Gin Branding के साथ नए दौर में कैसे उभरता है।

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📉📊 Groww ने सबसे ज़्यादा यूज़र जोड़े

Groww

भारत की रिटेल ब्रोकिंग इंडस्ट्री नवंबर 2025 में लगभग ठहरी हुई नज़र आई। पूरे महीने में एक्टिव यूज़र बेस 4.5 करोड़ पर फ्लैट रहा। जहां ज्यादातर बड़े ब्रोकर्स के यूज़र घटे, वहीं Groww ही एक प्रमुख प्लेटफॉर्म रहा जिसने मामूली लेकिन पॉज़िटिव ग्रोथ दर्ज की

यह ट्रेंड यह दिखाता है कि निवेशकों का रुझान धीरे-धीरे बदल रहा है, और मार्केट की अनिश्चितता का सीधा असर ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म्स पर दिख रहा है।


🚀📈 Groww का दबदबा जारी — मार्केट शेयर 26.84% तक पहुंचा

नवंबर में, Groww ने लगभग 42,000 नए एक्टिव डिमैट अकाउंट्स जोड़कर अपनी तेजी बरकरार रखी।
NSE डेटा के अनुसार, Groww का कुल क्लाइंट बेस अब लगभग 1.2 करोड़ (12 मिलियन) हो चुका है।

💹 Groww की ग्रोथ क्यों टिकी हुई है?

  • आसान और साफ यूज़र इंटरफेस
  • एग्रेसिव कंटेंट और मार्केटिंग स्ट्रैटेजी
  • नए निवेशकों पर टार्गेट फोकस
  • दीर्घकालिक वेल्थ मैनेजमेंट फीचर्स

📌 Groww का शेयर प्राइस
आज दोपहर 12:13 बजे तक Groww का शेयर लगभग ₹143 पर ट्रेड हो रहा था, और कंपनी का मार्केट कैप लगभग ₹88,436 करोड़ (लगभग $10 बिलियन) के आसपास है।


📉🟥 Zerodha, Angel One और Upstox में बड़ी गिरावट

जहां Groww ने पॉज़िटिव नंबर दिए, वहीं बाकी टॉप ब्रोकर्स के लिए नवंबर चुनौतीभरा रहा।

🔻 Zerodha

  • यूज़र लॉस: लगभग 1 लाख
  • कुल यूज़र बेस: 69.24 लाख
  • मार्केट शेयर: 15.38%

🔻 Angel One

  • यूज़र लॉस: 55,000+
  • कुल यूज़र: 67.95 लाख
  • मार्केट शेयर: 15.09%

🔻 Upstox

  • यूज़र लॉस: 65,000+
  • कुल यूज़र: 21.52 लाख
  • मार्केट शेयर: 4.78%

📉 इन प्लेटफॉर्म्स के लिए यह लगातार दूसरा महीना है जब उनकी यूज़र ग्रोथ गिरावट में रही है।


🏦📈 पारंपरिक ब्रोकर्स का मिक्स्ड परफॉर्मेंस — SBI Caps और ICICI आगे

जहां टॉप डिस्काउंट ब्रोकर्स फिसले, वहीं कुछ पारंपरिक ब्रोकर्स ने उम्मीद से बेहतर परफॉर्म किया।

🟢 Gains

  • SBI Caps: +30,000 यूज़र
  • ICICI Securities: +19,000 यूज़र
  • Paytm: +22,000 यूज़र

🔴 Declines

  • HDFC Securities
  • Kotak Securities
    इन सब में नवंबर में गिरावट दर्ज की गई।

यह आंकड़े बताते हैं कि पुराने और भरोसेमंद बैंक-लिंक ब्रोकर्स अभी भी स्थिर ग्रोथ बनाए हुए हैं।


🔍📉 उभरते ब्रोकर्स: Dhan स्थिर, INDmoney और PhonePe Share.Market में गिरावट

🟢 Dhan (Unicorn स्टार्टअप)

  • कुल यूज़र: 9.8 लाख
  • मार्केट शेयर: 2.18%
  • ट्रेंड: स्थिर

🔴 INDmoney

  • माह-दर-माह गिरावट: 2.84%

🔴 PhonePe Share.Market

  • माह-दर-माह गिरावट: 4.28%

उभरते ब्रोकर्स अब भी ग्रोथ के लिए आक्रामक रणनीतियां अपना रहे हैं लेकिन मार्केट का दबाव साफ दिख रहा है।


📉🇮🇳 जनवरी से नवंबर तक कुल गिरावट — निवेशकों की भागीदारी में सुस्ती

2025 की शुरुआत में एक्टिव डिमैट अकाउंट्स की संख्या 4.96 करोड़ थी।
नवंबर तक यह घटकर 4.50 करोड़ रह गई — यानी करीब 46 लाख खातों की गिरावट

🧐 गिरावट के पीछे संभावित कारण:

  • मार्केट में उतार-चढ़ाव
  • IPO गतिविधियों में कमी
  • रिटेल इन्वेस्टर्स का अल्पकालिक रुचि खोना
  • ट्रेडिंग से निवेशकों का दूरी बनाना

यह ट्रेंड बताता है कि इंडियन रिटेल ट्रेडिंग कम्युनिटी फिलहाल वेट-एंड-वॉच मोड में है।


🔮📌 आगे की राह: क्या 2026 में आएगी रिटेल ट्रेडिंग की वापसी?

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले महीनों में यदि IPO मार्केट सक्रिय हुआ और मार्केट में स्थिरता आई, तो रिटेल इन्वेस्टर्स की वापसी संभव है।

इसके अलावा:

  • इंडिया की आर्थिक ग्रोथ
  • AI-based ट्रेडिंग टूल्स
  • कम फीस वाले नए प्लेयर्स
  • एग्रेसिव फिनटेक इनोवेशन

…ये सभी 2026 में ब्रोकिंग इंडस्ट्री को नई जान दे सकते हैं।


📝 निष्कर्ष

नवंबर 2025 रिटेल ब्रोकिंग सेक्टर के लिए मिश्रित महीने की तरह रहा।
Groww ने अपनी लीड मजबूत की, जबकि Zerodha, Angel One और Upstox जैसे दिग्गजों ने यूज़र लॉस झेला। पारंपरिक ब्रोकर्स ने स्थिरता दिखाई और उभरते ब्रोकर्स का प्रदर्शन मिला-जुला रहा।

मार्केट की सुस्ती जरूर है, लेकिन इंडियन्स की बढ़ती फाइनेंशियल अवेयरनेस और टेक-ड्रिवन इनोवेशन दर्शाते हैं कि ब्रोकिंग इंडस्ट्री आने वाले समय में फिर से रफ्तार पकड़ेगी।

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