भारत के फूड डिलीवरी सेक्टर से एक अहम अपडेट सामने आई है। Bengaluru स्थित फूड डिलीवरी दिग्गज Swiggy ने अपने 10–15 मिनट फूड डिलीवरी ऐप Snacc को लॉन्च के एक साल से भी कम समय में बंद करने का फैसला किया है।
यह जानकारी कर्मचारियों को भेजे गए एक आंतरिक ईमेल के जरिए सामने आई, जिसकी समीक्षा मीडिया प्लेटफॉर्म Entrackr ने की है।
🚀 क्या था Snacc?
Snacc को जनवरी 2025 में एक standalone ऐप के रूप में लॉन्च किया गया था। इसका उद्देश्य 10–15 मिनट में snacks, beverages और ready-to-eat फूड आइटम्स की डिलीवरी करना था।
यह Swiggy के मुख्य ऐप से अलग एक प्रयोग था, जहां ultra-fast food delivery मॉडल को टेस्ट किया जा रहा था।
Snacc का संचालन centrally stocked hubs के जरिए किया जाता था। यानी सामान पहले से स्टॉक में रखा जाता और ऑर्डर मिलते ही तुरंत डिलीवरी के लिए भेज दिया जाता था।
यह मॉडल quick commerce की बढ़ती लोकप्रियता को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया था।
📈 मुख्य बिज़नेस में मजबूत ग्रोथ
हालांकि Snacc को बंद किया जा रहा है, लेकिन Swiggy के मुख्य फूड डिलीवरी बिज़नेस की ग्रोथ मजबूत बनी हुई है।
कंपनी के आंतरिक ईमेल के अनुसार, Swiggy के फूड डिलीवरी सेगमेंट ने सालाना आधार पर 20.5% की ग्रोथ दर्ज की है।
यह वृद्धि ऑर्डर वॉल्यूम में बढ़ोतरी और बेहतर Average Order Value (AOV) के कारण हुई है।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह disciplined capital allocation यानी पूंजी के समझदारी भरे उपयोग और scalable initiatives को प्राथमिकता दे रही है।
🌆 सीमित बाजारों तक ही रहा Snacc
Snacc को शुरुआत में Bengaluru के कुछ हिस्सों में रोलआउट किया गया था। बाद में इसे Gurugram और Noida तक विस्तार दिया गया।
हालांकि, यह सेवा कुछ ही बाजारों तक सीमित रही और देशभर में इसका व्यापक विस्तार नहीं हो सका।
कम समय में राष्ट्रीय स्तर पर स्केल न कर पाना इस प्रोजेक्ट के बंद होने का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।
🛑 Ultra-fast फूड डिलीवरी मॉडल की चुनौतियां
पिछले कुछ वर्षों में quick commerce और 10 मिनट डिलीवरी मॉडल ने काफी लोकप्रियता हासिल की है।
लेकिन ultra-fast फूड डिलीवरी मॉडल में कई ऑपरेशनल चुनौतियां भी हैं—
- उच्च लॉजिस्टिक्स लागत
- सीमित मार्जिन
- डिमांड का अनिश्चित पैटर्न
- इन्वेंट्री मैनेजमेंट की जटिलता
Snacc का बंद होना यह संकेत देता है कि हर quick commerce प्रयोग लंबी अवधि में सफल नहीं होता।
🏬 सेक्टर में अन्य उदाहरण
यह पहली बार नहीं है जब किसी कंपनी ने ultra-fast फूड मॉडल में पीछे कदम लिया हो।
पिछले साल Zepto की quick-service फूड वर्टिकल Zepto Café ने लगभग 600 में से 200 स्टोर्स बंद कर दिए थे। यह फैसला कमजोर डिमांड और आंतरिक पुनर्गठन के तहत लिया गया था।
वहीं, Ola ने अपने Ola Foods को दोबारा लॉन्च करने के बाद भी फिलहाल होल्ड पर रख दिया है।
इन उदाहरणों से साफ है कि फूड डिलीवरी और quick service मॉडल में प्रतिस्पर्धा तेज है और मार्जिन पर दबाव बना हुआ है।
🔍 Swiggy की रणनीति क्या संकेत देती है?
Snacc को बंद करना Swiggy की रणनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाता है।
कंपनी अब उन प्रोजेक्ट्स पर फोकस करना चाहती है जो बड़े पैमाने पर स्केल हो सकें और लंबे समय तक टिकाऊ (sustainable) साबित हों।
Swiggy का मुख्य फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म पहले से मजबूत है और 20.5% की सालाना वृद्धि यह दिखाती है कि कोर बिज़नेस में मांग बनी हुई है।
इसलिए कंपनी ने संभवतः तय किया कि संसाधनों को एक सीमित और जोखिम भरे प्रयोग के बजाय मुख्य बिज़नेस में लगाया जाए।
📊 बड़ा संकेत क्या है?
Snacc का बंद होना भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है।
2021–2022 के हाइपर-ग्रोथ दौर में कंपनियां तेजी से नए प्रयोग कर रही थीं। लेकिन अब निवेशकों और कंपनियों का फोकस profitability, capital efficiency और sustainable growth पर है।
Ultra-fast delivery मॉडल आकर्षक जरूर है, लेकिन हर कैटेगरी में यह आर्थिक रूप से व्यवहार्य हो, यह जरूरी नहीं।
📌 निष्कर्ष
Swiggy द्वारा Snacc को लॉन्च के एक साल के भीतर बंद करना यह दर्शाता है कि कंपनी अब अधिक disciplined growth रणनीति अपना रही है।
हालांकि मुख्य फूड डिलीवरी बिज़नेस मजबूत ग्रोथ दिखा रहा है, लेकिन ultra-fast standalone मॉडल उतना सफल नहीं हो सका।
यह फैसला बताता है कि भारतीय फूड डिलीवरी सेक्टर अब परिपक्वता की ओर बढ़ रहा है, जहां प्राथमिकता सिर्फ तेज विस्तार नहीं बल्कि स्थायी और लाभदायक वृद्धि है।
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