🚜⚡ Moonrider ने उठाए $6M की Series A फंडिंग

Moonrider

बेंगलुरु-स्थित इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर स्टार्टअप Moonrider ने अपनी Series A फंडिंग राउंड में $6 मिलियन जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व डीप-टेक निवेशक pi Ventures ने किया, जबकि Singularity AMC समेत मौजूदा निवेशक Advantedge Founders और Micelio Fund भी इसमें शामिल रहे।
यह निवेश Moonrider के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कंपनी अब अपने पायलट फेज़ से आगे बढ़कर कमर्शियल लॉन्च की तैयारी कर रही है।


🌱 Moonrider: भारतीय किसानों के लिए नई-पीढ़ी का इलेक्ट्रिक समाधान

Moonrider की शुरुआत 2023 में Anoop Srikantaswamy द्वारा की गई थी। कंपनी का फोकस भारत में पारंपरिक डीज़ल ट्रैक्टरों के विकल्प के रूप में हैवी-ड्यूटी इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर उपलब्ध करवाना है।

भारत हर साल लगभग 10 लाख (1 मिलियन) डीज़ल ट्रैक्टर बेचता है, जिससे देश का कृषि ट्रैक्टर बाजार दुनिया में सबसे बड़ा माना जाता है। लेकिन बढ़ती ईंधन कीमतों, रखरखाव खर्च और पर्यावरण संबंधी चुनौतियों के बीच इलेक्ट्रिक विकल्प की मांग तेजी से बढ़ रही है।
Moonrider इसी स्पेस में नई टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के साथ प्रवेश कर रहा है।


⚡ इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर जो 80% तक खेती का खर्च घटाएं

कंपनी का दावा है कि उसके इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर न सिर्फ पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि किसानों को 80% तक खेती में लागत बचत भी देते हैं।

यह लागत बचत तीन प्रमुख कारणों से होती है:

  • डीज़ल खर्च का ज़ीरो होना
  • इलेक्ट्रिक मॉडल में कम मेंटेनेंस, कम पार्ट रिप्लेसमेंट
  • ऊर्जा दक्ष ड्राइवट्रेन, जिसे कंपनी खुद डिजाइन करती है

Moonrider अपने ट्रैक्टरों को पूरी तरह से वर्टिकल-इंटीग्रेटेड मॉडल पर बनाता है—
यानी ड्राइवट्रेन, बैटरी सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक्स सभी इन-हाउस विकसित किए जाते हैं। इससे कंपनी को प्रोडक्ट क्वालिटी, परफॉर्मेंस और लागत पर बेहतर नियंत्रण मिलता है।


💰 पहले भी जुटा चुका है सीड फंडिंग

इससे पहले जनवरी में Moonrider ने $2.2 मिलियन (लगभग ₹19 करोड़) की सीड फंडिंग जुटाई थी।
उस राउंड का नेतृत्व AdvantEdge Founders और Micelio Technology Fund ने किया था, साथ ही कई एंजल निवेशक भी जुड़े थे।

Series A राउंड के साथ Moonrider की कुल फंडिंग अब $8.2 मिलियन के करीब पहुंच गई है।


🚀 फंडिंग का उपयोग: पायलट से आगे बढ़कर बड़े स्तर पर विस्तार

नई फंडिंग का मुख्य उद्देश्य है–

✔ 1. कमर्शियल लॉन्च

कंपनी अब तक अपने ट्रैक्टरों का पायलट उपयोग किसानों और कृषि उद्यमों के साथ टेस्ट कर रही थी।
फंडिंग मिलने के बाद Moonrider अब बड़े पैमाने पर अपने इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों को बाजार में उतारने जा रही है।

✔ 2. प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाना

डिमांड बढ़ने के चलते कंपनी को अपनी प्रोडक्शन क्षमता बढ़ानी होगी।
इसके लिए कंपनी नए मैन्युफैक्चरिंग सेटअप, सप्लाई चेन स्ट्रेटजी और टेक्निकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश करेगी।

✔ 3. टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट

Moonrider आने वाले समय में ट्रैक्टरों के लिए और भी एडवांस्ड इलेक्ट्रिक ड्राइवट्रेन और बैटरी सिस्टम लाने की तैयारी कर रही है।


🇮🇳 भारत में EV ट्रैक्टर मार्केट की बढ़ती संभावनाएँ

  • कृषि भारत की अर्थव्यवस्था का आधार है
  • डीज़ल की लगातार बढ़ती कीमतें किसानों पर सीधा बोझ बढ़ाती हैं
  • इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर लंबे समय में काफी सस्ते पड़ते हैं
  • सरकार भी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को लेकर प्रोत्साहन दे रही है

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 5–7 वर्षों में भारत में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर मार्केट तेजी से उभरेगा और Moonrider जैसी कंपनियाँ इसमें बड़ा रोल निभाएँगी।


🏭 हाल ही में Tractor Junction ने भी जुटाया फंड

कृषि तकनीक और ट्रैक्टर-सॉल्यूशन स्पेस में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ती जा रही है।
कुछ समय पहले Tractor Junction ने $22 मिलियन की फंडिंग जुटाई थी, जिसका नेतृत्व Astanor Ventures ने किया था, और Info Edge व Omnivore भी इसमें शामिल रहे थे।

यह संकेत देता है कि कृषि टेक्नोलॉजी और EV-आधारित खेती समाधान निवेशकों के लिए एक आकर्षक सेगमेंट बन चुके हैं।


🌾 Moonrider का लक्ष्य: किसानों को स्मार्ट, किफायती और टिकाऊ समाधान देना

भारत में छोटे और मध्यम किसानों के लिए खेती का खर्च लगातार बढ़ रहा है।
ऐसे में Moonrider खुद को किफायती, शक्तिशाली और टिकाऊ इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों के रूप में पेश कर रहा है, जो—

  • खेत की जुताई
  • लैंड प्रिपरेशन
  • ट्रांसपोर्टेशन
  • बागवानी
  • और भारी कृषि कार्य

जैसे कामों को आसानी से संभाल सके।

कंपनी आगे जाकर मल्टी-अटैचमेंट सपोर्ट और स्मार्ट-फार्मिंग सॉल्यूशंस भी पेश करने की योजना बना रही है।


📌 निष्कर्ष

Moonrider की नई फंडिंग न केवल कंपनी के कमर्शियल विस्तार को बढ़ावा देगी, बल्कि भारत में इलेक्ट्रिक कृषि उपकरणों के भविष्य को भी मजबूत करेगी।
जैसे-जैसे किसान ईंधन खर्च और मेंटेनेंस खर्च से बचने के लिए विकल्प तलाश रहे हैं, इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों की मांग तेजी से बढ़ेगी।

Moonrider अपनी तकनीक, इनोवेशन और सस्ते ऑपरेटिंग मॉडल के जरिए इस क्रांतिकारी बदलाव का नेतृत्व करने की ओर बढ़ रहा है।

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🧪 Healthians की FY25 रिपोर्ट: धीमी Revenue Growth लेकिन 89% Loss कटौती —

Healthians

भारत की लोकप्रिय डायग्नोस्टिक्स और वेलनेस टेस्टिंग प्लेटफॉर्म Healthians ने FY25 में भले ही बहुत तेज़ ग्रोथ नहीं दर्ज की, लेकिन कम्पनी ने अपने नुकसान को 89% तक कम कर दिया, और अब लगभग break-even की स्थिति में पहुँच गई है।
WestBridge-backed इस हेल्थटेक कंपनी ने लागत में भारी कटौती कर अपने वित्तीय स्वास्थ्य को बेहतर किया है।


📊 Revenue में मामूली बढ़त — FY25 में 8% Growth

Healthians की operating revenue FY25 में 8% बढ़कर ₹263 करोड़ रही, जो FY24 में ₹243 करोड़ थी।
कुल आय में, non-operating income (₹7 करोड़) जोड़कर यह आंकड़ा ₹270 करोड़ तक पहुँच गया।

कंपनी की वृद्धि भले धीमी रही हो, लेकिन आर्थिक रूप से यह वर्ष Healthians के लिए स्थिरता लेकर आया।


🏥 250+ शहरों में सेवाएँ, 10 करोड़ से अधिक टेस्ट पूरे

Healthians भारत की सबसे तेज़ी से बढ़ती diagnostic chains में से एक है। कंपनी:

  • ✔️ 250+ शहरों में at-home diagnostic services प्रदान करती है
  • ✔️ 10 करोड़ से अधिक टेस्ट कर चुकी है
  • ✔️ आधुनिक लैब्स व high-accuracy टेस्टिंग पर फोकस करती है

💰 खर्चों में भारी कटौती — Recovery की असली कहानी यहीं है

FY25 कंपनी के लिए cost-optimization का साल रहा। कुल खर्च 8% घटकर ₹275 करोड़ रहा, जबकि FY24 में यह ₹298 करोड़ था।

📌 कौन-कौन से खर्च घटे?

👨‍💼 Employees Cost — 13% कम

  • FY24: ₹120 करोड़
  • FY25: ₹104 करोड़
    यह कंपनी की सबसे बड़ी cost category है, और यहीं कटौती से बड़े परिणाम दिखे।

🧪 Material Cost — 7% कम

  • FY25 में घटकर ₹54 करोड़

📣 Advertising Cost — 10% बढ़ा

  • ब्रांड awareness के लिए खर्च बढ़कर ₹43 करोड़ हुआ।
    (कम्पनी ने marketing में कटौती नहीं की, जो ग्रोथ रणनीति को मजबूत संकेत देता है)

🏢 अन्य खर्च

  • Depreciation: ₹29 करोड़
  • Finance Cost: ₹15 करोड़
    (दोनों लगभग स्थिर)

📉 Losses में 89% की गिरावट — बड़ा Turnaround

FY24 में ₹45 करोड़ का नुकसान झेल चुकी कंपनी ने FY25 में अपने नुकसान को घटाकर सिर्फ ₹5 करोड़ कर दिया।
ये गिरावट Healthians के लिए सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है।


📈 EBITDA Positive — 12.17% Margin

FY25 Healthians का operationally profitable साल रहा।

  • EBITDA: ₹32 करोड़
  • EBITDA Margin: 12.17%
  • ROCE: 2.73%

इन आंकड़ों से साफ है कि खर्च कम करने और प्राइसिंग स्ट्रैटेजी सुधारने का असर कंपनी के नतीजों पर स्पष्ट दिखता है।


🧮 Unit Economics बेहतर — ₹1 कमाने के लिए खर्च ₹1.05

FY25 में Healthians ने:

  • ₹1 कमाने के लिए सिर्फ ₹1.05 खर्च किया
  • यह पिछले साल की तुलना में काफी बेहतर ऑपरेटिंग एफिशिएंसी का संकेत है

Cost-control + consistent demand ने unit economics को मजबूत किया।


💼 Assets और Cash Position

FY25 के अंत में Healthians की financial position:

  • Current Assets: ₹170 करोड़
  • Cash & Bank Balance: ₹49 करोड़

यह कंपनी की liquidity को मजबूत दिखाता है और अगले साल के लिए सुरक्षित कुशन प्रदान करता है।


💸 Funding & Investors — अब तक $75M जुटाए

TheKredible के अनुसार Healthians ने अब तक $75 million (लगभग ₹600 करोड़) फंडिंग जुटाई है।

मुख्य निवेशक

  • WestBridge
  • BEENEXT
  • DG Ventures
  • YouWeCan Ventures

Founders’ Holding

  • Founder & CEO Deepak Sahni के पास कंपनी की 6.5% हिस्सेदारी है।

🔍 Conclusion — Slow Growth लेकिन Strong Comeback

FY25 Healthians के लिए “slow but strong” रिकवरी का साल रहा:

  • ✔️ Revenue में 8% ग्रोथ
  • ✔️ Expenses 8% कम
  • ✔️ Losses में 89% की गिरावट
  • ✔️ EBITDA positive
  • ✔️ Better unit economics
  • ✔️ Healthy cash reserves

ये सब दिखाते हैं कि Healthians अब अधिक lean, efficient और scalable तरीके से काम कर रही है। FY26 में कंपनी तेज़ ग्रोथ की तरफ बढ़ने के लिए मज़बूत बिंदु पर खड़ी है।

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🎮 JetSynthesys ने FY25 में किया मुनाफे का चौका! लेकिन ऑपरेशनल घाटा अब भी बरकरार ⚡

JetSynthesys

भारत की तेज़ी से बढ़ती ई-स्पोर्ट्स और गेमिंग इंडस्ट्री में एक बड़ा नाम — JetSynthesys — ने वित्त वर्ष 2025 (FY25) में आखिरकार मुनाफे का स्वाद चखा है। 📈 हालांकि यह मुनाफा इसके मुख्य बिजनेस से नहीं, बल्कि निवेश की बिक्री से हुआ है।

कंपनी ने ₹165 करोड़ मूल्य के अपने मौजूदा निवेश को बेचने के बाद ₹14.4 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जबकि पिछले वित्त वर्ष (FY24) में इसे ₹97.5 करोड़ का घाटा हुआ था।


🎯 राजस्व में 10% की वृद्धि, पर ऑपरेशनल घाटा जारी 💸

Pune-आधारित JetSynthesys ने वित्त वर्ष 2025 में अपनी ऑपरेटिंग रेवेन्यू में 10% की वृद्धि दर्ज की — जो ₹188.9 करोड़ (FY24) से बढ़कर ₹207.6 करोड़ (FY25) पर पहुंच गई।

हालांकि कंपनी का ऑपरेशनल लॉस ₹107.8 करोड़ रहा, यानी कंपनी अभी भी अपने मुख्य कारोबार से मुनाफा नहीं कमा पा रही है।


💰 निवेश की बिक्री से हुआ मुनाफा 📊

JetSynthesys की बड़ी कमाई इस साल “Other Income” के रूप में आई। कंपनी ने FY25 में कुल ₹175.2 करोड़ की अन्य आय दर्ज की, जिसमें से ₹164.8 करोड़ का लाभ निवेश की बिक्री से आया।

यह सौदा संभवतः कंपनी की Nautilus Mobile में हिस्सेदारी को KRAFTON (PUBG की पैरेंट कंपनी) को बेचने से जुड़ा हुआ है। हालांकि कंपनी ने इस डील के सटीक विवरण साझा नहीं किए हैं।


🎮 JetSynthesys का बिजनेस मॉडल: गेमिंग से लेकर डिजिटल कंटेंट तक 🌐

JetSynthesys एक डाइवर्स डिजिटल एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म है, जो कई सेगमेंट्स में काम करता है —

  • ई-स्पोर्ट्स और मोबाइल गेमिंग 🕹️
  • डिजिटल कंटेंट और म्यूज़िक OTT 🎵
  • इंटरस्ट-बेस्ड ऑनलाइन कम्युनिटीज 👥
  • और वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स 📺

कंपनी ने सेगमेंट-वार रेवेन्यू डिटेल्स नहीं साझा की हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि JetSynthesys अपने गेमिंग और कंटेंट बिजनेस से ही ज्यादातर कमाई करता है।


💼 खर्चों में कटौती से हुआ सुधार 📉

कंपनी ने FY25 में अपने खर्चों पर सख्त नियंत्रण रखा, जिससे कुल व्यय ₹345.7 करोड़ (FY24) से घटकर ₹329.5 करोड़ (FY25) रह गया।

  • 👨‍💻 Employee Benefits (कर्मचारी लाभ) – कंपनी का सबसे बड़ा खर्चा रहा, जो कुल खर्च का 31% था, यानी ₹102.4 करोड़। यह पिछले साल से 13% कम हुआ।
  • 🎬 Content Licensing पर खर्च – ₹75 करोड़।
  • 🎪 Event Management और Subcontracting Costs में क्रमशः 28% और 31% की वृद्धि दर्ज हुई, जो ₹38.3 करोड़ और ₹22.8 करोड़ रही।
  • 📢 Advertisement Burn में कंपनी ने 33% की कटौती की।

इन सुधारों ने JetSynthesys की EBITDA मार्जिन (-51.94%) और ROCE (-37.8%) में मामूली सुधार दिखाया।


📊 ऑपरेशनल चुनौतियाँ बरकरार 🔻

भले ही JetSynthesys ने इस साल मुनाफा दिखाया हो, लेकिन यह एक वन-टाइम गेन (one-time gain) के कारण है। असल में कंपनी अभी भी अपने ऑपरेटिंग बिजनेस से घाटे में है।

कंपनी का यूनिट इकॉनॉमिक्स बताता है कि FY25 में JetSynthesys ने हर ₹1 की कमाई के लिए ₹1.59 खर्च किए।
मार्च 2025 तक कंपनी की कुल चालू संपत्ति ₹361.3 करोड़ रही, जिसमें ₹11.5 करोड़ नकद और बैंक बैलेंस शामिल है।


🏏 सचिन तेंदुलकर का सपोर्ट और बड़े निवेशक 💎

JetSynthesys का नाम क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर से भी जुड़ा है, जो कंपनी के ब्रांड एंबेसडर और निवेशक हैं।
कंपनी ने अब तक $90 मिलियन (लगभग ₹750 करोड़) से अधिक फंडिंग जुटाई है।

इसके प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं —

  • 💉 Adar Poonawalla की Serum Institute of India Pvt. Ltd
  • 💼 Pratithi Investment Trust

इन मजबूत बैकर्स ने JetSynthesys को भारत के गेमिंग और डिजिटल मीडिया सेक्टर में एक बड़ा नाम बनाया है।


⚙️ JetSynthesys का विज़न: भारत से ग्लोबल गेमिंग लीडर बनना 🌍

JetSynthesys का फोकस अब अपने ई-स्पोर्ट्स, मोबाइल गेमिंग, और म्यूज़िक OTT प्लेटफॉर्म्स को और बड़ा करने पर है।
कंपनी भारत ही नहीं, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया और ग्लोबल मार्केट्स में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही है।

इसके कई लोकप्रिय मोबाइल गेम्स और ई-स्पोर्ट्स टूर्नामेंट्स युवाओं के बीच बड़ी फैन फॉलोइंग हासिल कर चुके हैं।


📈 आगे का रास्ता: प्रॉफिटेबिलिटी से सस्टेनेबिलिटी तक 💪

JetSynthesys ने FY25 में जो मुनाफा दिखाया, वह एक सकारात्मक संकेत है — लेकिन असली चुनौती है ऑपरेशनल प्रॉफिट हासिल करना

अगर कंपनी अपने खर्चों को और बेहतर तरीके से मैनेज करे और गेमिंग व डिजिटल कंटेंट बिजनेस से रेवेन्यू बढ़ाए, तो यह भारतीय गेमिंग सेक्टर में एक लंबे समय का खिलाड़ी बन सकती है।


🔮 निष्कर्ष: JetSynthesys ने गेमिंग में दिखाई “जेट स्पीड” लेकिन मंज़िल अभी दूर 🚀

FY25 JetSynthesys के लिए एक टर्निंग पॉइंट रहा —

  • ✅ मुनाफा (₹14.4 करोड़)
  • ✅ खर्चों में सुधार
  • ✅ निवेशकों का भरोसा कायम
  • ❌ लेकिन ऑपरेशनल घाटा जारी

सचिन तेंदुलकर की इस समर्थित कंपनी ने दिखा दिया है कि भारत का गेमिंग सेक्टर अब सिर्फ खेल नहीं, बल्कि गंभीर बिजनेस है।
अगर JetSynthesys अपने ग्रोथ ट्रैक पर ऐसे ही आगे बढ़ता रहा, तो आने वाले सालों में यह भारत का “गेमिंग यूनिकॉर्न” बनने की राह पर होगा। 🎮🔥

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🚀🇮🇳 इस हफ्ते भारतीय स्टार्टअप्स ने जुटाए $242.88 मिलियन

भारतीय स्टार्टअप्स

भारतीय स्टार्टअप्स इकोसिस्टम में इस हफ्ते फंडिंग का स्तर धीमा रहा।
कुल 24 स्टार्टअप्स ने $242.88 मिलियन जुटाए, जिसमें
5 ग्रोथ-स्टेज डील्स
17 अर्ली-स्टेज डील्स शामिल रहीं।

इसके मुकाबले पिछले हफ्ते 34 स्टार्टअप्स ने $334.88 मिलियन जुटाए थे—यानि इस हफ्ते 27.6% गिरावट दर्ज हुई।


🏗️ [1] ग्रोथ-स्टेज फंडिंग: $154.7 मिलियन जुटाए गए

इस हफ्ते ग्रोथ और लेट-स्टेज स्टार्टअप्स ने कुल $154.7 मिलियन हासिल किए।
सबसे बड़ा राउंड रहा —

MoEngage का $100M Series F राउंड

लीड: Goldman Sachs & A91 Partners

अन्य प्रमुख ग्रोथ राउंड:

  • Spacewood Furnishers → ₹300 करोड़ (≈ $36M), A91 Partners
  • Miko Robotics → $10.5M, iHeartMedia
  • Agnikul Cosmos → ₹60 करोड़ (≈ $6.7M), Advenza Global & Atharva Green Ecotech
  • The Policy Exchange → भी इस सप्ताह फंडिंग सूची में शामिल

इन राउंड्स ने दिखाया कि SaaS, स्पेस-टेक और रोबोटिक्स सेक्टर में निवेशकों की मजबूत दिलचस्पी जारी है।


🌱 [2] अर्ली-स्टेज डील्स: 17 स्टार्टअप्स ने जुटाए $88.2 मिलियन

अर्ली-स्टेज मोर्चे पर 17 स्टार्टअप्स ने लगभग $88.2 मिलियन जुटाए।

✅ सबसे बड़ा राउंड:

Giga ने $61M Series A जुटाया
लीड: Redpoint Ventures, Y Combinator, Nexus Venture Partners

अन्य प्रमुख डील्स:

  • Zynk → $5M seed, Hivemind Capital
  • Stackbox → $4M, Enrission India Capital
  • TABP (Snacks & Beverages)
  • BabyOrgano (Ayurvedic D2C Wellness)
  • MeshDefend (AI Security)
  • Ulook (Space Tech)

एक स्टार्टअप Sistema.bio ने अपनी फंडिंग राशि डिसक्लोज नहीं की।

साथ ही, Bajaj Financial Securities ने Lemnisk में हिस्सेदारी खरीदी, जिससे growX Ventures समेत शुरुआती निवेशकों को आंशिक एग्ज़िट मिला।


🏙️ [3] शहर व सेक्टरवार डील्स: Bengaluru फिर सबसे आगे

📍 शहरवार डील्स

  • Bengaluru → 9 डील्स
  • Delhi-NCR → 6 डील्स
    अन्य शहर: Mumbai, Ahmedabad, Nagpur, Chennai, Coimbatore, Indore

🧭 सेक्टरवार

  • E-commerce → 5 डील्स (टॉप सेगमेंट)
  • AI → 4 डील्स
    इसके अलावा: Space-tech, AdTech, Robotics, Fintech

भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में ई-कॉमर्स और AI का दबदबा बरकरार है।


📊 [4] सीरीज़-वार ट्रेंड्स

इस हफ्ते फंडिंग ट्रेंड इस प्रकार रहा:

  • Seed राउंड्स → 8 डील्स (लीडर)
  • Pre-Series A → 3 डील्स
  • Series A → 2 डील्स
  • Series F, D, C आदि में भी कुछ भागीदारी रही

लगातार आठ हफ्तों का औसत फंडिंग स्तर:
👉 $345.2 मिलियन / सप्ताह


👥 [5] प्रमुख हायरिंग और डिपार्चर्स

इस हफ्ते कई कंपनियों में नेतृत्व परिवर्तन देखने को मिले:

  • EaseMyTrip → Sankalp Kaul, नए CTO
  • GoKwik → Abhinav Midha, CBO पद पर प्रोमोट
  • BharatPe → Shilpi Kapoor, Head of Marketing
  • Delhivery → CFO Amit Agarwal का इस्तीफा; Vivek Pabari नए CFO 1 Jan 2026 से
  • Roombr → Fayyaz Hussain नए CGO
  • Aakash Institute → CFO Vipan Joshi ने दिया इस्तीफा
  • Zepto → मांस व्यापार CEO Chandan Rungta ने छोड़ा पद

💰 [6] फंड लॉन्चेस

  • ChrysCapital → $2.2B का Fund X (India का सबसे बड़ा PE फंड)
  • Lighthouse Canton → $40M उठाया, Peak XV की भागीदारी
  • Novastar Partners: नया निवेश फर्म लॉन्च

🔄 [7] M&A गतिविधियाँ

  • Zupee → Nucanon (Australia AI startup) का अधिग्रहण
  • Spinny → GoMechanic खरीदने की तैयारी
  • PB Fintech → Fitterfly अधिग्रहण, हेल्थटेक क्षमता मजबूत
  • Black Gold Recycling → Reteck Envirotech में बहुमत हिस्सेदारी अधिग्रहण

⚠️ [8] Layoffs

👉 Porter ने 300–350 कर्मचारियों की छंटनी की, IPO तैयारी के चलते लागत अनुकूलन का हिस्सा।


🆕 [9] New Launches & Partnerships

  • Zomato & Blinkit: सरकारी कल्याण योजनाएँ उपलब्ध कराने की पहल
  • Lokal: Sahi Jobs और AgriLoka लॉन्च
  • EpikDoc: AI Pro Platform और Patient LLM
  • Paytm: Groq के साथ AI इंफ्रा पार्टनरशिप
  • VilCart: Rural B2B2C मार्केटप्लेस
  • Delhivery: Fintech सेक्टर में नई सब्सिडियरी

📉 [10] इस हफ्ते की बड़ी वित्तीय रिपोर्ट्स

कुछ प्रमुख अपडेट:

  • XpressBees: ₹370 Cr का घाटा
  • Smartworks: Q2 में घाटा 81% कम
  • Euler Motors: FY25 में ₹191 Cr राजस्व
  • Ola Electric: Q2 राजस्व 46% गिरा
  • Delhivery: Q2 में नुकसान
  • MoneyView: FY25 में ₹240 Cr लाभ
  • Paytm: ₹2,061 Cr राजस्व, ₹21 Cr लाभ
  • ZingHR: FY25 में प्रॉफिटेबल
  • TBO: Q2 में ₹567 Cr राजस्व
  • और अन्य कई रिपोर्ट्स…

📰 [11] न्यूज़ फ्लैश: IPO का हफ्ता!

  • TVS ने Rapido स्टेक बेचकर ₹288 Cr एग्ज़िट किया
  • PhysicsWallah → ₹3,480 Cr IPO, 11 Nov से
  • Lenskart → IPO 30X सब्सक्राइब
  • Groww → ₹2,984 Cr एंकर राउंड
  • Shiprocket → SEBI की मंज़ूरी
  • Pine Labs → $2.7B वैल्यूएशन, बड़े रिटर्न्स

सारांश

इस हफ्ते कुल $242.43 मिलियन जुटे—पिछले हफ्ते की तुलना में 27.6% कम
मगर IPO मार्केट में भारी हलचल रही — PW, Lenskart, Pine Labs, Shiprocket, Groww, सभी सुर्खियों में रहे।

भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम भले फंडिंग में हल्की गिरावट देख रहा हो, पर IPO वेव और M&A गतिविधियाँ आने वाले महीनों को और रोमांचक बनाती हैं।

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🧪 Sterling Accuris Diagnostics की चमक! FY25 में 22% ग्रोथ और EBITDA में पहली बार मुनाफा

Accuris Diagnostics

भारत की प्रमुख डायग्नोस्टिक और पैथोलॉजी सर्विस चेन Sterling Accuris Diagnostics ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में शानदार प्रदर्शन किया है। अहमदाबाद स्थित इस कंपनी ने न केवल 22% साल-दर-साल (YoY) ग्रोथ दर्ज की, बल्कि पहली बार EBITDA पॉजिटिव होकर मुनाफे की दिशा में कदम भी बढ़ाया है।


📈 FY25 में ₹198 करोड़ का राजस्व, खर्चों पर काबू

कंपनी की वित्तीय रिपोर्ट (Registrar of Companies – RoC से प्राप्त) के अनुसार, Sterling Accuris Diagnostics का राजस्व FY25 में ₹198 करोड़ तक पहुंच गया, जो FY24 के ₹162 करोड़ से 22% अधिक है।
कंपनी ने ₹4 करोड़ की अतिरिक्त आय गैर-ऑपरेटिंग सोर्स से भी अर्जित की, जिससे इसकी कुल इनकम ₹202 करोड़ हो गई — जबकि पिछले वर्ष यह ₹169 करोड़ थी।


🧬 150 लैब्स और 2,000 से अधिक टेस्ट्स की सर्विस

2014 में स्थापित, Sterling Accuris Diagnostics आज भारत के पश्चिमी और मध्य राज्यों में तेजी से विस्तार कर रही है।
कंपनी वर्तमान में लगभग 150 लैब्स और कलेक्शन सेंटर्स के ज़रिए 2,000 से अधिक मेडिकल टेस्ट्स की सुविधा प्रदान करती है।
इसकी कमाई का मुख्य स्रोत — केवल डायग्नोस्टिक टेस्टिंग सर्विसेज — रही है।


💰 खर्चों पर नजर: कर्मचारियों और डॉक्टर फीस में बढ़ोतरी

वित्त वर्ष 2025 में कंपनी का कुल खर्च ₹221 करोड़ रहा, जो FY24 के ₹194 करोड़ की तुलना में 14% अधिक है।
सबसे ज्यादा खर्च कर्मचारियों के वेतन व अन्य बेनेफिट्स पर हुआ, जो FY24 के ₹44 करोड़ से बढ़कर ₹52 करोड़ तक पहुंच गया — यानी 18% की बढ़ोतरी।

इसके बाद मटीरियल कॉस्ट ₹45 करोड़, और डॉक्टर व पैथोलॉजिस्ट फीस ₹40 करोड़ रही।
साथ ही, डिप्रिसिएशन ₹19 करोड़ और फाइनेंस कॉस्ट ₹6 करोड़ दर्ज की गई।


📉 घाटा घटा, EBITDA हुआ पॉजिटिव

हालांकि कुल खर्चों में इज़ाफा हुआ, लेकिन राजस्व की तेजी ने नुकसान को कम कर दिया।
Sterling Accuris Diagnostics ने FY25 में अपना घाटा ₹27 करोड़ से घटाकर ₹23 करोड़ तक सीमित कर लिया — यानी 15% की कमी

सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि कंपनी ने पहली बार ₹5.5 करोड़ का EBITDA प्रॉफिट दर्ज किया।
इससे इसका EBITDA मार्जिन -0.59% से सुधरकर 2.72% पर पहुंच गया, जो एक मजबूत ऑपरेशनल सुधार का संकेत है।

कंपनी का ROCE (Return on Capital Employed) -7.07% रहा, जो पिछले वर्षों की तुलना में सुधार की दिशा में एक कदम है।


💹 बेहतर एफिशिएंसी: हर ₹1 कमाने में खर्च हुआ ₹1.12

कंपनी ने अपनी कॉस्ट एफिशिएंसी में भी सुधार किया है।
FY25 में Sterling Accuris ने हर ₹1 की कमाई के लिए ₹1.12 खर्च किया — जबकि FY24 में यह आंकड़ा ₹1.20 था।

यह सुधार दर्शाता है कि कंपनी ने अपने ऑपरेशनल खर्चों को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया है और अब स्केलेबल बिजनेस मॉडल की ओर बढ़ रही है।


🏦 ₹52 करोड़ के एसेट्स, मजबूत बैलेंस शीट

मार्च 2025 तक कंपनी के कुल चालू एसेट्स ₹52 करोड़ दर्ज किए गए, जिनमें से ₹22 करोड़ कैश और बैंक बैलेंस के रूप में मौजूद थे।
यह बताता है कि कंपनी की नकदी स्थिति और फाइनेंशियल स्थिरता मजबूत बनी हुई है।


💵 अब तक ₹275 करोड़ ($33 मिलियन) की फंडिंग

TheKredible के अनुसार, Sterling Accuris Diagnostics ने अब तक $33 मिलियन (लगभग ₹275 करोड़) की फंडिंग जुटाई है।
इसके प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:

  • Morgan Stanley — 35.64% हिस्सेदारी
  • Udhay Vi Realty — 17% हिस्सेदारी

इन रणनीतिक निवेशों ने कंपनी को अपने नेटवर्क विस्तार और टेक्नोलॉजी अपग्रेड में मदद की है।


🧭 भविष्य की राह: टेक्नोलॉजी और ग्रोथ पर फोकस

कंपनी की लगातार बढ़ती ग्रोथ, घटता घाटा, और EBITDA पॉजिटिव होना — इस बात के संकेत हैं कि Sterling Accuris Diagnostics अब स्थायी लाभ की दिशा में बढ़ रही है।
भारत में हेल्थकेयर और डायग्नोस्टिक्स सेक्टर तेजी से डिजिटल और ऑर्गनाइज़्ड हो रहा है, और Sterling Accuris इस बदलाव का लाभ उठाने की पूरी तैयारी में है।

कंपनी अब ऑटोमेशन, टेस्ट क्वालिटी इंप्रूवमेंट, और लास्ट-माइल कलेक्शन नेटवर्क को और सशक्त करने की योजना बना रही है, ताकि छोटे शहरों में भी विश्वसनीय टेस्टिंग सर्विस पहुंचाई जा सके।


🧩 निष्कर्ष

Sterling Accuris Diagnostics ने FY25 में न केवल अपनी ग्रोथ बरकरार रखी, बल्कि मुनाफे की दिशा में ठोस कदम भी बढ़ाया है।
राजस्व में बढ़ोतरी, घाटे में कमी, और EBITDA में सुधार — ये तीनों संकेत कंपनी के सस्टेनेबल फाइनेंशियल हेल्थ की ओर इशारा करते हैं।

अगर यह ट्रेंड जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में Sterling Accuris Diagnostics भारत की टॉप रीजनल डायग्नोस्टिक चेन के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकती है।

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📱 ShareChat ने दिखाया कमाल! FY25 में घाटा 72% घटा,

ShareChat

भारत की अपनी देसी सोशल मीडिया कंपनी ShareChat ने वित्त वर्ष 2025 (FY25) में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने घाटे में बड़ी कटौती और ऑपरेशनल एफिशिएंसी में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। कंपनी ने बताया कि उसकी राजस्व वृद्धि भले मामूली रही हो, लेकिन मुनाफ़े की दिशा में बड़ा सुधार देखने को मिला है।


💹 राजस्व ₹723 करोड़, EBITDA घाटा 72% घटकर ₹219 करोड़

कंपनी के प्रेस रिलीज़ के अनुसार, ShareChat की रेवेन्यू FY25 में ₹723 करोड़ रही, जो पिछले साल (FY24) के ₹718 करोड़ की तुलना में हल्की बढ़त दिखाती है।
हालांकि, इसका Adjusted EBITDA घाटा 72% घटकर ₹219 करोड़ रह गया — जो कंपनी के अब तक के सबसे बड़े ऑपरेशनल सुधारों में से एक है। 📉✨


🔁 Core Business बना Cashflow Positive — बड़ा टर्नअराउंड मोमेंट!

कंपनी के मुताबिक, FY25 के दौरान ShareChat का कोर बिजनेस अब Cashflow Positive हो गया है — यानी कंपनी ने कई सालों के रीस्ट्रक्चरिंग और कॉस्ट-कटिंग के बाद आखिरकार नकदी प्रवाह में स्थिरता हासिल कर ली है। 💵

इस सुधार का श्रेय कंपनी की तीन बड़ी रणनीतियों को जाता है —

  1. मजबूत Ad Monetization (विज्ञापन से कमाई)
  2. Lean Operations (कम खर्च वाला मॉडल)
  3. High-Yield Content पर फोकस

इन रणनीतियों ने ShareChat को फिर से मजबूत बिजनेस ट्रैक पर ला दिया है।


🗣️ CEO अंकुश सचदेवा बोले — “अब अगला Growth Chapter शुरू”

कंपनी के सह-संस्थापक और CEO अंकुश सचदेवा ने कहा —

“हमारे disciplined cost optimization और strategic diversification के प्रयास अब नतीजे दे रहे हैं। हमने एक मजबूत कोर बिजनेस बनाया है, जिसके पास बड़ी और स्थायी यूज़र बेस है। अब हम अगले ग्रोथ फेज़ में आत्मविश्वास से निवेश कर सकते हैं।”

इस बयान से साफ है कि ShareChat अब सिर्फ Survival नहीं, बल्कि Sustainable Growth की ओर बढ़ रही है। 🌱📊


💥 FY26 में 30% की Revenue Growth का लक्ष्य

कंपनी ने खुलासा किया कि FY26 के पहले छमाही (H1 FY26) के अंत तक उसने ₹1,000 करोड़ से अधिक का Annual Recurring Revenue (ARR) पार कर लिया है।
इसका मतलब है कि ShareChat अब लगातार रेवेन्यू जनरेट कर रही है और अगले वित्त वर्ष में लगभग 30% टॉपलाइन ग्रोथ का अनुमान लगा रही है। 📈💪


🎬 QuickTV से Entry Micro-Drama की दुनिया में

ShareChat अब सोशल मीडिया से आगे बढ़कर नए डिजिटल कंटेंट सेगमेंट्स में भी उतर चुकी है।
कंपनी ने हाल ही में QuickTV नामक एक नया प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है जो micro-drama और short video entertainment पर केंद्रित है।
लॉन्च के सिर्फ चार महीने में ही QuickTV ने 1.5 करोड़ (15 million) डाउनलोड्स का आंकड़ा पार कर लिया — जो ShareChat के लिए एक बड़ा माइलस्टोन है। 🎥🔥

इससे साफ है कि कंपनी अब वीडियो कंटेंट और इंटरटेनमेंट क्रिएटर्स के लिए भी नया इकोसिस्टम बना रही है, जो आने वाले वर्षों में बड़ा बिजनेस सेगमेंट बन सकता है।


👥 200 मिलियन+ यूज़र्स और लगातार बढ़ती पहुंच

ShareChat के पास अब 200 मिलियन से अधिक (20 करोड़+) मॉनेटाइजेबल यूज़र्स हैं।
इसका मतलब है कि इतने बड़े यूज़र बेस से कंपनी को न सिर्फ विज्ञापनों से बल्कि सब्सक्रिप्शन और ब्रांड पार्टनरशिप से भी रेगुलर इनकम मिल रही है।

FY26 में कंपनी का लक्ष्य है —

  • अपने कोर बिजनेस की Profitability को बनाए रखना
  • और नए Revenue Streams को स्केल करना

इस रणनीति से ShareChat आने वाले सालों में भारत की सबसे मजबूत सोशल मीडिया कंपनियों में से एक बन सकती है। 🇮🇳📲


💰 फंडिंग और निवेश: अब तक जुटाए $1.3 Billion

पिछले साल ShareChat ने $65 मिलियन की डेट फंडिंग दो ट्रांज़ में जुटाई थी।
कुल मिलाकर अब तक कंपनी ने $1.3 बिलियन (लगभग ₹10,800 करोड़) से अधिक का निवेश जुटाया है।

इसमें कई बड़े ग्लोबल निवेशक शामिल हैं —

  • 🐦 Twitter (अब X)
  • 💼 Alkeon Capital
  • 🌍 Moore Strategic Ventures
  • 🧧 Tencent
  • और अन्य प्रमुख वेंचर कैपिटल फंड्स।

इन निवेशों ने ShareChat को भारत का सबसे फंडेड सोशल मीडिया स्टार्टअप बना दिया है।


🌏 देसी सोशल मीडिया की कहानी — Made in India, for Bharat

ShareChat की खासियत यह है कि यह भारत के स्थानीय भाषाई दर्शकों (Hindi, Tamil, Telugu, Marathi आदि) के लिए बनी है।
यह प्लेटफॉर्म न केवल लोगों को मनोरंजन देता है, बल्कि लाखों कंटेंट क्रिएटर्स को कमाई का अवसर भी प्रदान करता है।

कंपनी का कहना है कि उसका ध्यान अब “Bharat-first digital ecosystem” बनाने पर है — जहाँ भारत के हर कोने के यूज़र अपनी भाषा में कंटेंट बना और कमा सकें। 🇮🇳💬


🧩 निष्कर्ष: ShareChat की वापसी की कहानी

FY25 के नतीजे यह साबित करते हैं कि ShareChat ने कठिन समय के बाद कंट्रोल्ड खर्च और इनोवेटिव ग्रोथ स्ट्रेटेजी के जरिए खुद को फिर से पटरी पर ला दिया है।
अब जब कंपनी का कोर बिजनेस कैशफ्लो पॉज़िटिव हो चुका है, और नए प्रोडक्ट्स जैसे QuickTV तेज़ी से बढ़ रहे हैं — तो आने वाले वर्षों में ShareChat भारत की डिजिटल एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में एक बड़ी ताकत बन सकती है। ⚡📱

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🚀 monthly funding 2025 भारतीय स्टार्टअप्स की फंडिंग $3B से नीचे, Gaming Ban ने बढ़ाई मुश्किले

monthly funding

भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए सितंबर तिमाही (Q3 2025) उतार-चढ़ाव भरी रही। लगातार दो क्वार्टर्स $3 बिलियन से ऊपर फंडिंग जुटाने के बाद इस बार फंडिंग $2.78 बिलियन तक सीमित रही। यह 2024 की monthly funding के बाद पहली बार है जब फंडिंग $3B के नीचे गई।

लेकिन कहानी सिर्फ यहीं तक नहीं रुकती। इस तिमाही में जहां बड़े डेट राउंड्स और प्री-IPO डील्स ने निवेशकों का भरोसा बनाए रखा, वहीं रियल-मनी गेमिंग पर बैन ने करीब 2,000 नौकरियों को लील लिया।


💰 कुल फंडिंग का हाल

TheKredible के आंकड़ों के अनुसार, Q3 2025 में स्टार्टअप्स ने:

  • 67 ग्रोथ/लेट-स्टेज डील्स से $2.02B
  • 225 अर्ली-स्टेज डील्स से $765M
  • 33 अनडिस्क्लोज़्ड डील्स

कुल मिलाकर $2.78B जुटाए। पिछली तिमाही से यह लगभग 10% कम रहा।


📊 मंथली ट्रेंड: सितंबर बना चमकता सितारा

  • सितंबर 2025 में अकेले $1.22B की फंडिंग हुई।
  • यह 2025 का दूसरा सबसे बड़ा फंडेड महीना रहा (जनवरी $1.76B के बाद)।
    👉 यानी, तिमाही भले ही धीमी रही, लेकिन सितंबर ने उम्मीदें जगा दीं।

🏢 टॉप 15 ग्रोथ-स्टेज डील्स

कंपनियों की टॉप डील्स ने बाज़ार का मूड बनाए रखा।

  1. PharmEasy – $193M (डेट)
  2. Weaver Services – $170M
  3. Eruditus – $150M (डेट)
  4. Urban Company – $97M (प्री-IPO)
  5. Truemeds – $85M
  6. Safe Security – $70M
  7. Gupshup – $60M
  8. Kapiva – $60M
  9. The Sleep Company – $56M
  10. Amnex Technologies – $52M
  11. Recur Club – $50M
  12. CityMall – $47M
  13. Zepto – $46M
  14. IndiQube – $44M (प्री-IPO)
  15. Darwinbox – $40M

🌱 monthly funding अर्ली-स्टेज डील्स: AI और Healthtech में जोश

अर्ली-स्टेज निवेशकों का भरोसा नए टेक्नोलॉजी सेक्टर्स पर टिका रहा।

  • QpiAI – $32M (क्वांटम + AI)
  • Composio – $25M (एजेंटिक AI)
  • TERN Group – $24M
  • FirstClub – $23M
  • Emergent – $23M
  • Arintra – $21M (हेल्थटेक – मेडिकल कोडिंग)

🤝 M&A: अधिग्रहणों की हलचल

इस तिमाही में कुछ बड़े अधिग्रहण हुए:

  • Zoho → Asimov Robotics
  • Udaan → ShopKirana
  • Uniphore → Orby AI
  • Flipkart → Pinkvilla (majority stake)

फिनटेक में भी Niyo और PayU जैसे खिलाड़ियों ने कदम बढ़ाए।


📍 शहर और सेगमेंट-वाइज डील्स

🏙️ शहरवार डील्स

  • बेंगलुरु – 128 डील्स, $1.06B (37.9%)
  • मुंबई – 41 डील्स, $753.7M (27.1%)
  • दिल्ली-NCR – 74 डील्स, $530.4M (19%)
  • अहमदाबाद – $162.3M
  • हैदराबाद – $85.7M

🏷️ सेक्टरवार डील्स

  • Fintech – 34 डील्स, $556.3M (19.9%)
  • E-commerce – 53 डील्स, $436.1M (15.6%)
  • Healthtech – 18 डील्स, $342.2M (12.2%)
  • AI – 37 डील्स, $277.1M (9.9%)
  • Deeptech – 20 डील्स, $63.8M

📑 सीरीज़-वाइज फंडिंग

  • Pre-seed – $48.3M (41 डील्स)
  • Seed – $179.2M (102 डील्स)
  • Pre-Series A – $86.6M (39 डील्स)
  • Series A – $536.1M (56 डील्स)
  • Series B – $304.8M (19 डील्स)

👥 लेऑफ्स और शटडाउन

  • 2,000 नौकरियाँ गईं – ज्यादातर गेमिंग सेक्टर में।
  • कई कंपनियों ने रियल-मनी गेमिंग वर्टिकल्स बंद कर दिए।
  • 13 टॉप लेवल एग्ज़िट्स (CEO, CFO, को-फाउंडर्स आदि)।
  • वहीं, 79 नई हायरिंग्स भी हुईं।

🌾 फार्म-टू-फोर्क सेक्टर

हालांकि कई फूड स्टार्टअप्स बंद हुए, लेकिन कुछ ने फंडिंग पाई:

  • Handpickd – $15M
  • Kisan Konnect – $8M

💸 डेट फंडिंग की बढ़ती रफ्तार

Q3 में डेट फंडिंग पर खासा जोर दिखा।

  • PharmEasy – $193M
  • Eruditus – $150M
  • Fibe, Navi, Varthana – भी डेट के रास्ते चले।

👉 कुल फंडिंग का 16% हिस्सा डेट फंडिंग से आया।


📝 निष्कर्ष

Q3 2025 ने दिखाया कि भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम अभी भी चुनौतियों और अवसरों दोनों से भरा हुआ है।

  • फंडिंग $3B से नीचे जरूर गई, लेकिन सितंबर ने उम्मीदें जगाईं
  • गेमिंग सेक्टर को झटका, लेकिन Healthtech और AI सेक्टर्स ने दम दिखाया।
  • डेट फंडिंग बढ़ना निवेशकों की सतर्कता का संकेत है।
  • IPO और प्री-IPO डील्स ने बाज़ार को सपोर्ट दिया।

👉 साफ है कि आने वाले समय में फाउंडर्स को और ज्यादा इन्वेंटिव और डिसिप्लिन्ड रहना होगा।

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🚀 इस भारतीय स्टार्टअप्स फंडिंग में 52% गिरावट, केवल $173.48M जुटे

भारतीय स्टार्टअप्स

भारतीय स्टार्टअप्स इकोसिस्टम में इस हफ्ते (लीड 27 सितंबर) कुल 33 स्टार्टअप्स ने $173.48 मिलियन (करीब ₹1,445 करोड़) की फंडिंग जुटाई। इनमें 4 ग्रोथ-स्टेज और 25 अर्ली-स्टेज डील्स शामिल रहीं, जबकि 3 स्टार्टअप्स ने अपनी फंडिंग डिटेल्स पब्लिक नहीं कीं।

पिछले हफ्ते के मुकाबले यह फंडिंग 52% कम रही। उस समय 21 स्टार्टअप्स ने लगभग $361.5 मिलियन की पूंजी जुटाई थी।


📉 ग्रोथ-स्टेज डील्स: $60M तक सीमित

ग्रोथ और लेट-स्टेज फंडिंग इस हफ्ते गिरकर $60 मिलियन पर आ गई, जबकि पिछले हफ्ते यह $320 मिलियन थी।

  • 🌱 Chakr Innovation (Cleantech) ने सबसे बड़ी $23 मिलियन Series C फंडिंग Iron Pillar के नेतृत्व में जुटाई।
  • 🍴 Curefoods ने ₹160 करोड़ ($18 मिलियन) प्री-IPO राउंड 3State Ventures से उठाया।
  • 🎓 Vedantu ने $11 मिलियन का राउंड क्लोज़ किया।
  • 🚜 KisanKonnect ने $8 मिलियन जुटाए।

🌟 अर्ली-स्टेज डील्स: निवेशकों का फोकस यहीं

इस हफ्ते अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स ने सबसे ज्यादा पैसा आकर्षित किया। 25 कंपनियों ने मिलकर $113.31 मिलियन जुटाए।

  • 🤖 Emergent (AI-पावर्ड ऐप बिल्डिंग प्लेटफॉर्म) ने $23 मिलियन Series A फंडिंग Lightspeed से हासिल की।
  • 🚀 Rocket (ऐप-बिल्डिंग प्लेटफॉर्म) ने $15 मिलियन जुटाए।
  • 🌾 Handpickd (Agritech), ⚡ Simple Energy (EV), 🧬 Distil (Biotech), 🪙 Gullak (Gold savings app) और 💳 Oolka (Fintech) ने भी फंडिंग हासिल की।

इसके अलावा Wow! Momo, Yuyiii, Hammer और Carbon Masters जैसे स्टार्टअप्स ने भी निवेश जुटाया, लेकिन राशि पब्लिक नहीं हुई।


🏙️ भारतीय स्टार्टअप्स सिटी-वाइज डील्स: बेंगलुरु सबसे आगे

  • बेंगलुरु: 14 डील्स
  • दिल्ली-NCR: 4 डील्स
  • अन्य शहर: मुंबई, सूरत, कोलकाता और हैदराबाद

📊 सेगमेंट-वाइज, ई-कॉमर्स स्टार्टअप्स 5 डील्स के साथ टॉप पर रहे। इनके अलावा AI, फूडटेक, एग्रीटेक, डीपटेक और फिनटेक सेक्टर्स ने भी मजबूत पकड़ बनाई।


💰 सीरीज-वाइज डील्स

  • Seed funding: 11 डील्स
  • Pre-seed: 8 डील्स
  • Series A, Pre-Series A, Series C: कुछ डील्स

📊 वीक-ऑन-वीक ट्रेंड

  • इस हफ्ते: $173.48M (33 डील्स)
  • पिछले हफ्ते: $361.5M (21 डील्स)
    👉 औसतन पिछले आठ हफ्तों में हर हफ्ते $271.15M फंडिंग और 26 डील्स हुईं।

👥 बड़े हायरिंग्स

  • Dhan ने Ketan Shah को CEO (Omni Channel Business) नियुक्त किया।
  • Allen Career Institute ने Rakesh Ranjan को CEO (Allen Online) बनाया।
  • Unacademy ने Sumit Jain को Test Prep बिज़नेस का हेड बनाया।
  • OneAssist Consumer Solutions ने Abhishek Maheshwari को नया CEO बनाया।

🏦 नए फंड लॉन्च

  • Frontier Tech Capital: $150M फंड (Growth-stage, SEA)
  • Chiratae Ventures: फंड V का दूसरा क्लोज़ $150M पर
  • Duro Capital: ₹200 Cr से ज्यादा कमिटमेंट्स
  • Good Capital: $30M (₹260 Cr) सेकंड फंड का फाइनल क्लोज़

🆕 नए लॉन्च और पार्टनरशिप्स

  • SeedlingLabs ने AI PDaaS प्लेटफॉर्म लॉन्च किया।
  • Unicommerce ने GST Guidance Tool लॉन्च किया।
  • PhysicsWallah ने LexGlobal (लीगल एजुकेशन) शुरू किया।

📑 वित्तीय नतीजे

  • DeHaat: FY25 में घाटा 15% घटकर ₹207 Cr
  • BharatPe: FY25 में EBITDA प्रॉफिटेबल, रेवेन्यू ₹1,667 Cr
  • WROGN: घाटे में बढ़ोतरी
  • Auxilo: ₹528 Cr रेवेन्यू, ₹112 Cr प्रॉफिट
  • Akumentis Healthcare: ₹66 Cr प्रॉफिट, 9% रेवेन्यू ग्रोथ
  • Purple Style Labs: फ्लैट रेवेन्यू, घाटा 36% बढ़ा
  • PhonePe: ₹7,115 Cr रेवेन्यू, ₹630 Cr प्रॉफिट
  • Ultrahuman: ₹565 Cr रेवेन्यू, ₹73 Cr प्रॉफिट

📰 इस हफ्ते की बड़ी खबरें

  • RBI ने डिजिटल पेमेंट्स के लिए नए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन नियम जारी किए (अप्रैल 2026 से लागू)।
  • Swiggy ने Rapido से एग्जिट कर 2.3X रिटर्न हासिल किया।
  • Founders Dilution: कई अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स ने Series A में 40%+ इक्विटी छोड़ी।
  • Purple Style Labs ने IPO के लिए DRHP फाइल किया (₹660 Cr)।
  • Finance Buddha को NSE Emerge से SME IPO की मंजूरी मिली।

🏁 निष्कर्ष

इस हफ्ते भारत के स्टार्टअप फंडिंग लैंडस्केप में तेज़ गिरावट देखने को मिली। हालांकि अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। वहीं, RBI के नए डिजिटल पेमेंट नियम और IPO पाइपलाइन आने वाले महीनों में इकोसिस्टम की दिशा तय करेंगे।

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🚀 PhysicsWallah का IPO फाइल: 3,820 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी

PhysicsWallah

भारत का चर्चित edtech unicorn PhysicsWallah (PW) अब स्टॉक मार्केट में एंट्री की तैयारी कर रहा है। कंपनी ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के साथ ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किया है, जिसके जरिए वह 3,820 करोड़ रुपये का फंड जुटाने जा रही है।

यह कदम ऐसे समय में आया है जब कंपनी ने बीते वित्त वर्ष में अपने राजस्व (Revenue) को तेज़ी से बढ़ाया और घाटे को बड़ी हद तक कम किया है।


📈 राजस्व में 49% की जबरदस्त वृद्धि

फाइनेंशियल रिपोर्ट के अनुसार, FY25 में PW का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 49% बढ़कर 2,887 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि FY24 में यह 1,941 करोड़ रुपये था।

  • ऑनलाइन कोचिंग: 965 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,404 करोड़ रुपये (45.5% ग्रोथ)
  • ऑफलाइन कोचिंग: 928 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,352 करोड़ रुपये (45.7% ग्रोथ)
  • हाइब्रिड और ऑफलाइन चैनल: अब कंपनी की कुल आय में 47% का योगदान कर रहे हैं।

इसके अलावा, होस्टल फीस से 88 करोड़ रुपये, और प्रोडक्ट सेल से 259 करोड़ रुपये (74% ग्रोथ) आए।


🌍 भारत ही रहा PW का मजबूत बाजार

भले ही PW ने दुबई और अमेरिका में ऑपरेशंस शुरू किए हों, लेकिन अभी भी इसकी 98.75% आय भारत से आती है।

  • भारत: 2,851 करोड़ रुपये
  • दुबई और USA मिलाकर: 36 करोड़ रुपये

👩‍🏫 टीचर्स और टीम में बड़ा विस्तार

FY25 में कंपनी के फैकल्टी सदस्यों की संख्या 5,096 हो गई, जो FY24 में 3,654 थी।

  • स्थायी शिक्षक: 4,207
  • कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर शिक्षक: 889

यह दिखाता है कि PW न केवल ऑनलाइन बल्कि ऑफलाइन और हाइब्रिड मोड में भी अपनी पकड़ मज़बूत कर रहा है।


💰 खर्चे और लागत प्रबंधन

  • सैलरी: 28% बढ़कर 1,426 करोड़ रुपये (कुल खर्च का 44%)
  • मार्केटिंग: 448 करोड़ रुपये
  • डिप्रिसिएशन: 366 करोड़ रुपये
  • मैटेरियल कॉस्ट: 123 करोड़ रुपये

फिर भी, कंपनी ने FY25 में अपने कुल खर्च को लगभग फ्लैट रखा – 3,265 करोड़ रुपये (FY24 में 3,279 करोड़ रुपये)।


📉 घाटे में बड़ी कमी, EBITDA हुआ पॉजिटिव

PW ने अपने घाटे (Loss) को भारी तौर पर घटा लिया है।

  • घाटा: FY24 में 1,131 करोड़ रुपये → FY25 में घटकर 243 करोड़ रुपये (78.5% कमी)
  • EBITDA: FY25 में 192.5 करोड़ रुपये का पॉजिटिव EBITDA, EBITDA मार्जिन 6.33%
  • यूनिट इकॉनॉमिक्स: हर 1 रुपये कमाने के लिए खर्च 1.13 रुपये (FY24 में 1.69 रुपये था)

📊 बैलेंस शीट और एसेट्स

  • करेंट एसेट्स: 2,237 करोड़ रुपये
  • कैश और बैंक बैलेंस: 175 करोड़ रुपये

यह आंकड़े दिखाते हैं कि कंपनी अपनी वित्तीय स्थिति को मज़बूत करने में सफल रही है।


🏛️ राजनीतिक फंडिंग का खुलासा

कंपनी ने DRHP में यह भी बताया कि उसने FY25 में 37 लाख रुपये राजनीतिक योगदान दिया।

  • CPI को: 28.7 लाख रुपये
  • BJP को: 5 लाख रुपये

🤝 ओनरशिप स्ट्रक्चर और निवेशक

  • अलख पांडेय और प्रतीक बूंद: 40.35% हिस्सेदारी (प्रत्येक)
  • WestBridge Capital: 7.8%
  • Hornbill Capital: 4.42%
  • GSV Ventures: 2.85%
  • Lightspeed: 1.79%

🎯 स्ट्रैटेजिक मूव्स और अधिग्रहण

PW ने हाल ही में UPSC कोचिंग इंस्टीट्यूट Sarrthi IAS में 40% हिस्सेदारी खरीदी है। यह अधिग्रहण कंपनी की रणनीति का हिस्सा है जिससे वह कोचिंग इंडस्ट्री के हर सेगमेंट में अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहती है।


📌 नतीजा: IPO से पहले PhysicsWallah की मज़बूत तैयारी

कंपनी ने दिखा दिया है कि सिर्फ कुछ सालों में उसने ऑनलाइन से ऑफलाइन और हाइब्रिड मोड तक तेजी से विस्तार किया है। घाटे को कम करना और पॉजिटिव EBITDA हासिल करना निवेशकों के लिए एक बड़ा सकारात्मक संकेत है।

3,820 करोड़ रुपये का यह IPO भारतीय edtech सेक्टर के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।


👉 यह IPO केवल PW के लिए नहीं बल्कि पूरे भारतीय edtech उद्योग के लिए एक बेंचमार्क साबित हो सकता है। अगर यह सफल होता है, तो आने वाले समय में और भी स्टार्टअप्स पब्लिक मार्केट में एंट्री कर सकते हैं।

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⚡ Enlog ने जीता ENTICE 2.0, JVVNL संग मिलेगा पायलट प्रोजेक्ट का मौका

Enlog

भारत में ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार तेजी से बढ़ रहा है, और इसी कड़ी में Enlog ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी को ENTICE 2.0 का विजेता घोषित किया गया है। इस जीत के साथ Enlog को $500K (लगभग ₹4.1 करोड़) के पूल से तकनीकी सहायता अनुदान और साथ ही जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JVVNL) के साथ पायलट प्रोजेक्ट का मौका मिला है।


🏆 प्रतियोगिता और चयन प्रक्रिया

ENTICE 2.0 भारत की सबसे महत्वपूर्ण एनर्जी इनोवेशन चुनौतियों में से एक है।

  • इस बार कुल 160 से अधिक कंपनियों ने आवेदन किया।
  • Enlog को चुनकर 12 फाइनलिस्ट में जगह दी गई।
  • बूटकैंप और दो राउंड्स की पिचिंग के बाद, Enlog को पायलट प्रोजेक्ट के लिए सिलेक्ट किया गया।

👉 यह उपलब्धि दिखाती है कि Enlog की टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को उद्योग के दिग्गजों ने मान्यता दी है।


🔌 भारत के DISCOMs की जरूरत

भारत के बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) के सामने सबसे बड़ी चुनौती है:

  • लाखों घरेलू और औद्योगिक उपकरणों (BTM – Behind-the-Meter appliances) का डिजिटल ट्विन तैयार करना।
  • इसके लिए कोई अतिरिक्त हार्डवेयर इंस्टॉल करना संभव नहीं।

Enlog का समाधान इस समस्या को हल करता है।

  • यह स्मार्ट मीटर डेटा को ट्रांसमिट करने का नया तरीका अपनाता है।
  • इससे रियल-टाइम इंटेलिजेंस मिलती है और बिजली लोड को सही तरीके से मैनेज किया जा सकता है।

💡 Enlog का इनोवेशन

Enlog ने IoT (Internet of Things) और AI (Artificial Intelligence) का ऐसा कॉम्बिनेशन बनाया है, जो स्केलेबल और प्रभावी है।

  • पेटेंटेड Edge IoT टेक्नोलॉजी
  • बिलियन्स डेटा पॉइंट्स पर ट्रेन किया गया AI
  • स्केलेबल आर्किटेक्चर

👉 इन सबके जरिए Enlog का प्लेटफॉर्म बिजनेस को ऑटोमैटेड एनर्जी सेविंग उपलब्ध कराता है।


🛠️ पायलट प्रोजेक्ट क्यों अहम है?

JVVNL के साथ यह पायलट Enlog को एक बड़ा अवसर देगा:

  • लाइव डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क पर अपनी टेक्नोलॉजी को टेस्ट करना।
  • स्केल पर अपनी इनोवेशन की क्षमता को साबित करना।
  • भारत के ऊर्जा सेक्टर के लिए एक डिजिटल रीढ़ (India Energy Stack) बनाने में योगदान देना।

🌍 India Energy Stack का विजन

भारत सरकार और एनर्जी स्टेकहोल्डर्स का लक्ष्य है एक डिजिटल बैकबोन तैयार करना, जो पूरे पावर सेक्टर में डेटा, इंटेलिजेंस और एक्शन को यूनिफाई करे।

  • Enlog का यह पायलट इसी विजन से मेल खाता है।
  • इससे सस्टेनेबल और स्मार्ट एनर्जी मैनेजमेंट की दिशा में बड़ा कदम बढ़ेगा।

👩‍💻 संस्थापक और सफर

Enlog की स्थापना 2019 में की गई थी।

  • संस्थापक: भरत रांकावत और झरना साहा
  • उद्देश्य: AI और IoT के जरिए बिजली के इस्तेमाल को स्मार्ट और सस्टेनेबल बनाना।

आज Enlog भारत भर में एंटरप्राइजेज के लिए ऐसे सॉल्यूशंस तैयार कर रही है, जो:

  • बिजली की खपत को ऑप्टिमाइज करते हैं।
  • कार्बन फुटप्रिंट को कम करते हैं।
  • लंबे समय तक लागत बचाते हैं।

📊 क्यों खास है Enlog का मॉडल?

  1. हार्डवेयर-फ्री सॉल्यूशन:
    • कोई नया डिवाइस इंस्टॉल करने की जरूरत नहीं।
    • स्मार्ट मीटर डेटा से ही एनालिसिस।
  2. स्केलेबिलिटी:
    • लाखों उपकरणों को ट्रैक और मैनेज किया जा सकता है।
  3. सस्टेनेबल अप्रोच:
    • बिजली की बर्बादी कम, एनर्जी एफिशिएंसी ज्यादा।

📈 भविष्य की राह

ENTICE 2.0 जीतने और JVVNL पायलट प्रोजेक्ट से Enlog को कई मौके मिलेंगे:

  • अपनी तकनीक को नेशनल लेवल तक पहुंचाने का अवसर।
  • भारत के स्मार्ट एनर्जी ट्रांजिशन में अहम योगदान।
  • बड़े एंटरप्राइज और डिस्कॉम्स के साथ नई साझेदारियां।

📝 निष्कर्ष

Enlog का ENTICE 2.0 जीतना सिर्फ एक पुरस्कार नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा क्रांति में एक नया अध्याय है।

  • यह पायलट प्रोजेक्ट दिखाएगा कि कैसे AI और IoT की मदद से बिजली वितरण नेटवर्क और ज्यादा स्मार्ट, सस्टेनेबल और कुशल बनाए जा सकते हैं।
  • आने वाले सालों में Enlog जैसी कंपनियां भारत को ग्रीन और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन एनर्जी इकोसिस्टम की ओर ले जाएंगी।

👉 कुल मिलाकर, Enlog की यह जीत स्टार्टअप इकोसिस्टम और भारत के ऊर्जा क्षेत्र, दोनों के लिए बड़ी खबर है।

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