मोबिलिटी प्लेटफॉर्म Rapido बीते एक साल से लगातार सुर्खियों में बना हुआ है 📰। शुरुआती निवेशकों जैसे TVS, Swiggy, Prosus और Accel को शानदार रिटर्न मिलने के बाद रैपिडो को उस वक्त और ज्यादा पहचान मिली, जब Uber के CEO दारा खोसरोशाही ने इसे सार्वजनिक रूप से एक बड़ा प्रतिद्वंद्वी बताया 👀।
वित्त वर्ष 2025 (FY25) में कंपनी ने तेज़ रेवेन्यू ग्रोथ के साथ‑साथ अपने घाटे को भी काफ़ी हद तक कम किया है 💪।
📊 Rapido 44% की रेवेन्यू ग्रोथ
Registrar of Companies (RoC) में दाखिल आंकड़ों के मुताबिक, FY25 में रैपिडो का ऑपरेशनल रेवेन्यू बढ़कर 934 करोड़ रुपये हो गया 💰, जो FY24 में 648 करोड़ रुपये था।
यानी कंपनी ने सालाना आधार पर 44% की मजबूत ग्रोथ दर्ज की 🚀। यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है, जब भारत का मोबिलिटी सेक्टर कड़ी प्रतिस्पर्धा और नियमों की अनिश्चितता से जूझ रहा है ⚠️।
🔄 रेवेन्यू के बदलते स्रोत
रैपिडो की कमाई का बड़ा हिस्सा उसके प्लेटफॉर्म पर पूरी होने वाली दो‑पहिया, तीन‑पहिया और चार‑पहिया राइड्स से आता है 🛵🚕।
हालांकि FY25 में प्लेटफॉर्म‑आधारित राइड रेवेन्यू 23.5% घटकर 277 करोड़ रुपये रह गया, जो कुल रेवेन्यू का केवल 29% था 📉।
इसके उलट, कंपनी का डिलीवरी बिज़नेस तेज़ी से आगे बढ़ा 📦🔥।
खाना और पार्सल डिलीवरी से कमाई 28.3% बढ़कर 340 करोड़ रुपये हो गई, जिससे यह FY25 में रैपिडो का सबसे बड़ा रेवेन्यू सेगमेंट बन गया 🥇। FY24 में जहां पैसेंजर राइड्स सबसे आगे थीं, वहीं FY25 में डिलीवरी बिज़नेस ने बाज़ी मार ली।
⭐ सब्सक्रिप्शन बना ग्रोथ का नया इंजन
FY25 में रैपिडो के लिए सबसे बड़ा गेम‑चेंजर उसका सब्सक्रिप्शन मॉडल रहा 💳।
कैप्टन्स और यूज़र्स से राइड पास व अन्य बेनिफिट्स के जरिए मिलने वाली इनकम लगभग 14 गुना बढ़कर 275 करोड़ रुपये पहुंच गई 🚀।
इसके अलावा:
- 🚗 पैसेंजर ट्रांसपोर्ट सर्विस: 21 करोड़ रुपये
- 📢 विज्ञापन इनकम: 16 करोड़ रुपये
- 🅿️ अन्य ऑपरेशनल इनकम: 5 करोड़ रुपये
निवेश से मिलने वाले ब्याज के रूप में कंपनी ने 69 करोड़ रुपये भी कमाए 💹। इस तरह FY25 में रैपिडो की कुल आय 1,003 करोड़ रुपये रही, जो FY24 में 579 करोड़ रुपये थी।
💸 खर्च और लागत का दबाव
खर्चों की बात करें तो कैप्टन्स को दिए जाने वाले इंसेंटिव और डिलीवरी चार्जेज सबसे बड़ा खर्च बने रहे 💸।
FY25 में यह खर्च 8.7% बढ़कर 500 करोड़ रुपये हो गया, जो कुल लागत का करीब 40% है।
अन्य बड़े खर्च:
- 👨💼 कर्मचारी खर्च: 207 करोड़ रुपये (+20%)
- 📣 विज्ञापन व प्रमोशन: 252 करोड़ रुपये
- 🔬 रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D): 108 करोड़ रुपये
इन सभी के चलते FY25 में कुल खर्च 1,261 करोड़ रुपये पहुंच गया।
📉 घाटा घटा, लेकिन मुनाफ़ा अभी दूर
मजबूत ग्रोथ के चलते रैपिडो ने अपना नेट लॉस 30.5% घटाकर 258 करोड़ रुपये कर लिया 😌, जो FY24 में 371 करोड़ रुपये था।
हालांकि, EBITDA (-19.59%) और ROCE (-13.58%) अभी भी नेगेटिव हैं, यानी मुनाफ़े की मंज़िल अभी बाकी है ⏳।
यूनिट इकॉनॉमिक्स के हिसाब से कंपनी ने 1 रुपये कमाने के लिए 1.35 रुपये खर्च किए।
💼 फंडिंग और आगे की राह
स्टार्टअप डेटा प्लेटफॉर्म TheKredible के अनुसार, रैपिडो अब तक 550 मिलियन डॉलर से ज्यादा की फंडिंग जुटा चुका है 💵। इसमें WestBridge के नेतृत्व में 200 मिलियन डॉलर का यूनिकॉर्न राउंड भी शामिल है 🦄।
रेवेन्यू ब्रेक‑अप साफ़ दिखाता है कि गुड्स डिलीवरी बिज़नेस में ज्यादा ग्रोथ और बेहतर मार्जिन की संभावना है 📦📈, जबकि पैसेंजर सेगमेंट अभी भी चुनौती बना हुआ है।
दो‑पहिया राइड्स ने एक नया बाज़ार तैयार किया है और नियमों में बदलाव के लिए दबाव भी डाला है, जिससे रैपिडो एक मज़बूत चैलेंजर से लीडर की ओर बढ़ता दिख रहा है 🔥।
अब बड़ा सवाल यही है 🤔—
क्या रैपिडो लास्ट‑माइल डिलीवरी पर ज्यादा फोकस करेगा या फिर पैसेंजर बिज़नेस में नई ताकत के साथ वापसी करेगा? इसका जवाब आने वाला वक्त ही देगा ⏰।











