🚀 Rapido की तेज़ रफ्तार ग्रोथ बढ़ती कमाई, 

Rapido

मोबिलिटी प्लेटफॉर्म Rapido  बीते एक साल से लगातार सुर्खियों में बना हुआ है 📰। शुरुआती निवेशकों जैसे TVS, Swiggy, Prosus और Accel को शानदार रिटर्न मिलने के बाद रैपिडो को उस वक्त और ज्यादा पहचान मिली, जब Uber के CEO दारा खोसरोशाही ने इसे सार्वजनिक रूप से एक बड़ा प्रतिद्वंद्वी बताया 👀।
वित्त वर्ष 2025 (FY25) में कंपनी ने तेज़ रेवेन्यू ग्रोथ के साथ‑साथ अपने घाटे को भी काफ़ी हद तक कम किया है 💪।

📊 Rapido 44% की रेवेन्यू ग्रोथ

Registrar of Companies (RoC) में दाखिल आंकड़ों के मुताबिक, FY25 में रैपिडो का ऑपरेशनल रेवेन्यू बढ़कर 934 करोड़ रुपये हो गया 💰, जो FY24 में 648 करोड़ रुपये था।
यानी कंपनी ने सालाना आधार पर 44% की मजबूत ग्रोथ दर्ज की 🚀। यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है, जब भारत का मोबिलिटी सेक्टर कड़ी प्रतिस्पर्धा और नियमों की अनिश्चितता से जूझ रहा है ⚠️।

🔄 रेवेन्यू के बदलते स्रोत

रैपिडो की कमाई का बड़ा हिस्सा उसके प्लेटफॉर्म पर पूरी होने वाली दो‑पहिया, तीन‑पहिया और चार‑पहिया राइड्स से आता है 🛵🚕।
हालांकि FY25 में प्लेटफॉर्म‑आधारित राइड रेवेन्यू 23.5% घटकर 277 करोड़ रुपये रह गया, जो कुल रेवेन्यू का केवल 29% था 📉।

इसके उलट, कंपनी का डिलीवरी बिज़नेस तेज़ी से आगे बढ़ा 📦🔥।
खाना और पार्सल डिलीवरी से कमाई 28.3% बढ़कर 340 करोड़ रुपये हो गई, जिससे यह FY25 में रैपिडो का सबसे बड़ा रेवेन्यू सेगमेंट बन गया 🥇। FY24 में जहां पैसेंजर राइड्स सबसे आगे थीं, वहीं FY25 में डिलीवरी बिज़नेस ने बाज़ी मार ली।

⭐ सब्सक्रिप्शन बना ग्रोथ का नया इंजन

FY25 में रैपिडो के लिए सबसे बड़ा गेम‑चेंजर उसका सब्सक्रिप्शन मॉडल रहा 💳।
कैप्टन्स और यूज़र्स से राइड पास व अन्य बेनिफिट्स के जरिए मिलने वाली इनकम लगभग 14 गुना बढ़कर 275 करोड़ रुपये पहुंच गई 🚀।

इसके अलावा:

  • 🚗 पैसेंजर ट्रांसपोर्ट सर्विस: 21 करोड़ रुपये
  • 📢 विज्ञापन इनकम: 16 करोड़ रुपये
  • 🅿️ अन्य ऑपरेशनल इनकम: 5 करोड़ रुपये

निवेश से मिलने वाले ब्याज के रूप में कंपनी ने 69 करोड़ रुपये भी कमाए 💹। इस तरह FY25 में रैपिडो की कुल आय 1,003 करोड़ रुपये रही, जो FY24 में 579 करोड़ रुपये थी।

💸 खर्च और लागत का दबाव

खर्चों की बात करें तो कैप्टन्स को दिए जाने वाले इंसेंटिव और डिलीवरी चार्जेज सबसे बड़ा खर्च बने रहे 💸।
FY25 में यह खर्च 8.7% बढ़कर 500 करोड़ रुपये हो गया, जो कुल लागत का करीब 40% है।

अन्य बड़े खर्च:

  • 👨‍💼 कर्मचारी खर्च: 207 करोड़ रुपये (+20%)
  • 📣 विज्ञापन व प्रमोशन: 252 करोड़ रुपये
  • 🔬 रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D): 108 करोड़ रुपये

इन सभी के चलते FY25 में कुल खर्च 1,261 करोड़ रुपये पहुंच गया।

📉 घाटा घटा, लेकिन मुनाफ़ा अभी दूर

मजबूत ग्रोथ के चलते रैपिडो ने अपना नेट लॉस 30.5% घटाकर 258 करोड़ रुपये कर लिया 😌, जो FY24 में 371 करोड़ रुपये था।
हालांकि, EBITDA (-19.59%) और ROCE (-13.58%) अभी भी नेगेटिव हैं, यानी मुनाफ़े की मंज़िल अभी बाकी है ⏳।
यूनिट इकॉनॉमिक्स के हिसाब से कंपनी ने 1 रुपये कमाने के लिए 1.35 रुपये खर्च किए।

💼 फंडिंग और आगे की राह

स्टार्टअप डेटा प्लेटफॉर्म TheKredible के अनुसार, रैपिडो अब तक 550 मिलियन डॉलर से ज्यादा की फंडिंग जुटा चुका है 💵। इसमें WestBridge के नेतृत्व में 200 मिलियन डॉलर का यूनिकॉर्न राउंड भी शामिल है 🦄।

रेवेन्यू ब्रेक‑अप साफ़ दिखाता है कि गुड्स डिलीवरी बिज़नेस में ज्यादा ग्रोथ और बेहतर मार्जिन की संभावना है 📦📈, जबकि पैसेंजर सेगमेंट अभी भी चुनौती बना हुआ है।
दो‑पहिया राइड्स ने एक नया बाज़ार तैयार किया है और नियमों में बदलाव के लिए दबाव भी डाला है, जिससे रैपिडो एक मज़बूत चैलेंजर से लीडर की ओर बढ़ता दिख रहा है 🔥।

अब बड़ा सवाल यही है 🤔—
क्या रैपिडो लास्ट‑माइल डिलीवरी पर ज्यादा फोकस करेगा या फिर पैसेंजर बिज़नेस में नई ताकत के साथ वापसी करेगा? इसका जवाब आने वाला वक्त ही देगा ⏰।

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📘 FY25 में Simplilearn की चुनौतियाँ राजस्व में गिरावट,

Simplilearn

अपस्किलिंग पर केंद्रित एडटेक प्लेटफॉर्म Simplilearn के लिए वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) चुनौतीपूर्ण रहा। जहां एक ओर कंपनी के परिचालन राजस्व (Operating Revenue) में भारी गिरावट दर्ज की गई, वहीं दूसरी ओर खर्चों में कटौती और बेहतर लागत प्रबंधन के चलते कंपनी अपने घाटे को काफी हद तक कम करने में सफल रही। यह जानकारी कंपनी के समेकित वित्तीय विवरणों से सामने आई है, जो रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़ (RoC) के पास दाखिल किए गए हैं।

📉 राजस्व में 26% की गिरावट

FY25 में Simplilearn का परिचालन राजस्व घटकर 556 करोड़ रुपये रह गया, जो FY24 में 750 करोड़ रुपये था। यानी साल-दर-साल आधार पर कंपनी के राजस्व में करीब 26% की गिरावट आई। इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण कंपनी के सेल्फ-लर्निंग (Self-learning) सेगमेंट में आई तेज गिरावट रही।

🎓 Simplilearn क्या करता है?

Simplilearn एक डिजिटल अपस्किलिंग प्लेटफॉर्म है, जो आईटी और प्रोफेशनल स्किल्स पर आधारित कोर्सेज प्रदान करता है। इसके प्रमुख कोर्स क्षेत्रों में शामिल हैं:

  • साइबर सिक्योरिटी
  • क्लाउड कंप्यूटिंग
  • डेटा साइंस
  • डिजिटल मार्केटिंग
  • प्रोजेक्ट मैनेजमेंट

कंपनी पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम, मास्टर प्रोग्राम और विभिन्न सर्टिफिकेशन कोर्सेज भी ऑफर करती है, जो खास तौर पर वर्किंग प्रोफेशनल्स को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं।

📉 सेल्फ-लर्निंग सेगमेंट में भारी गिरावट

FY25 में ऑनलाइन सेल्फ-लर्निंग कोर्सेज से होने वाली आय में 95% की भारी गिरावट दर्ज की गई। यह आय FY24 के 451 करोड़ रुपये से घटकर FY25 में सिर्फ 23 करोड़ रुपये रह गई। अब यह सेगमेंट कंपनी के कुल परिचालन राजस्व का केवल 4% हिस्सा रह गया है।

📈 लाइव लर्निंग बना सहारा

जहां सेल्फ-लर्निंग सेगमेंट कमजोर पड़ा, वहीं लाइव लर्निंग प्रोग्राम्स ने कंपनी को बड़ी राहत दी। FY25 में लाइव लर्निंग से होने वाली आय 65% बढ़कर 565 करोड़ रुपये हो गई, जो FY24 में 341.5 करोड़ रुपये थी।
अन्य आय (Other Income) के रूप में कंपनी ने 22 करोड़ रुपये कमाए, जिससे FY25 में कंपनी की कुल आय 578 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

💸 खर्चों में बड़ी कटौती

राजस्व में गिरावट के बावजूद Simplilearn ने अपने खर्चों पर सख्त नियंत्रण रखा, जिसका सीधा असर घाटे में कमी के रूप में देखने को मिला।

  • कर्मचारी लाभ खर्च (Employee Benefit Expense) में 42.5% की कटौती की गई और यह 325 करोड़ रुपये से घटकर 187 करोड़ रुपये रह गया।
  • विज्ञापन और मार्केटिंग खर्च 35% घटकर 134 करोड़ रुपये रह गया।
  • मटेरियल कॉस्ट में 11.5% की गिरावट आई और यह 162 करोड़ रुपये रहा।
  • डेप्रिसिएशन खर्च 10% बढ़कर 63 करोड़ रुपये हो गया।
  • सब्सक्रिप्शन फीस 50% बढ़कर 24 करोड़ रुपये हो गई।
  • फाइनेंस कॉस्ट FY25 में 6 करोड़ रुपये रहा।

कुल मिलाकर, कंपनी का कुल खर्च 29% घटकर 621 करोड़ रुपये रह गया, जो FY24 में 879 करोड़ रुपये था।

📉 घाटा 60% घटा

FY25 में Simplilearn का शुद्ध घाटा घटकर 43 करोड़ रुपये रह गया, जबकि FY24 में यह 107 करोड़ रुपये था। यानी कंपनी ने अपने घाटे में 60% की कमी की।

हालांकि, FY25 में कंपनी ने 141 करोड़ रुपये का एक्सेप्शनल खर्च भी दर्ज किया, जो मुख्य रूप से कंटेंट लाइब्रेरी के अमॉर्टाइजेशन से जुड़ा था। यह एक नॉन-कैश खर्च था। अगर इस खर्च को हटाकर देखा जाए, तो कंपनी की वास्तविक परिचालन स्थिति और बेहतर नजर आती है।

📊 यूनिट इकॉनॉमिक्स और वित्तीय स्थिति

FY25 में Simplilearn को 1 रुपये कमाने के लिए 1.12 रुपये खर्च करने पड़े, जबकि FY24 में यह आंकड़ा 1.17 रुपये था। इससे स्पष्ट है कि कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार हुआ है।

मार्च 2025 तक:

  • कैश और बैंक बैलेंस: 145 करोड़ रुपये (FY24 में 236 करोड़ रुपये)
  • करंट एसेट्स: 319 करोड़ रुपये (लगभग स्थिर)

💰 निवेश और फंडिंग

स्टार्टअप डेटा प्लेटफॉर्म TheKredible के अनुसार, Simplilearn अब तक 118 मिलियन डॉलर से अधिक की फंडिंग जुटा चुका है। कंपनी के प्रमुख निवेशकों में Blackstone और GSV Ventures शामिल हैं।

🔚 निष्कर्ष

FY25 Simplilearn के लिए बदलाव और पुनर्संतुलन का वर्ष रहा। जहां एक ओर कंपनी को राजस्व में गिरावट का सामना करना पड़ा, वहीं लाइव लर्निंग मॉडल पर फोकस और खर्चों में सख्त नियंत्रण के चलते कंपनी ने अपने घाटे को काफी हद तक कम कर लिया। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि Simplilearn किस तरह अपने बिजनेस मॉडल को और मजबूत करता है और ग्रोथ की राह पर लौटता है।

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33&Brew

भारत के तेजी से बढ़ते क्राफ्ट बीयर सेक्टर में एक अनोखी पहचान बना चुकी विनाइल‑थीम्ड माइक्रोब्रुअरी 33&Brew ने अपने सीरीज़‑A फंडिंग राउंड में 20 करोड़ रुपये (लगभग 2.2 मिलियन डॉलर) जुटाए हैं 💰। इस निवेश राउंड का नेतृत्व Optimistic Capital ने किया है, जो खास तौर पर माइक्रोब्रुअरी और क्राफ्ट बीयर उद्योग पर केंद्रित एक वेंचर कैपिटल फर्म है।

🍻 क्राफ्ट बीयर सेक्टर पर Optimistic Capital का फोकस
Optimistic Capital ने पहले ही 200 करोड़ रुपये का बीयर‑फोकस्ड फंड लॉन्च करने की घोषणा की थी। अब तक इस फंड से 30 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है, जबकि शेष 170 करोड़ रुपये अगले तीन वर्षों में निवेश किए जाएंगे 📈। यह पूंजी बोतलिंग, केगिंग और क्राफ्ट बीयर से जुड़े अन्य व्यवसायों को बढ़ावा देने में इस्तेमाल होगी।

🏗️ विस्तार और निर्माण पर खर्च होगी राशि
कंपनी के अनुसार, इस फंडिंग का उपयोग निर्माण कार्यों, आउटलेट विस्तार और नए प्रोजेक्ट्स के लिए किया जाएगा। 33&Brew का लक्ष्य केवल एक माइक्रोब्रुअरी न रहकर एक एक्सपीरियंस‑ड्रिवन ब्रांड बनना है।

🎵 संगीत और बीयर का अनोखा अनुभव
2024 में कार्तिक चंद्रशेखरन द्वारा स्थापित 33&Brew, अपने नाम की तरह ही 33⅓ RPM विनाइल रिकॉर्ड्स से प्रेरित है। यहां आने वाले ग्राहक 🎧 अपनी पसंद के विनाइल रिकॉर्ड चुनकर म्यूजिक चला सकते हैं और साथ ही क्राफ्ट बीयर का आनंद ले सकते हैं 🍺। डिजिटल दौर में एनालॉग म्यूजिक का यह अनुभव इसे बाकी माइक्रोब्रुअरी से अलग बनाता है।

🍽️ शेफ सब्यसाची गोराई के साथ खास मेन्यू
33&Brew का फूड कॉन्सेप्ट मशहूर शेफ सब्यसाची गोराई के सहयोग से तैयार किया गया है 👨‍🍳। यहां परोसा जाने वाला प्रोग्रेसिव इंडियन फूड, ग्लोबल फ्लेवर और सिग्नेचर कॉकटेल्स 🍹 के साथ एक यादगार अनुभव देता है।

🏙️ बेंगलुरु के माइक्रोब्रुअरी बाजार में अलग पहचान
भारत की माइक्रोब्रुअरी राजधानी कहे जाने वाले बेंगलुरु में 33&Brew, क्राफ्ट ब्रूइंग और एनालॉग म्यूजिक कल्चर के मेल से अपनी अलग पहचान बना रहा है 🎶🍻। युवा वर्ग और म्यूजिक लवर्स के बीच यह तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

📊 Optimistic Capital की आगे की योजना
Optimistic Capital आने वाले समय में केंद्रीय बेंगलुरु में दो और माइक्रोब्रुअरी में निवेश करने की योजना बना रहा है। फर्म का मानना है कि भारत में क्राफ्ट बीयर सेक्टर में आगे चलकर तेज़ ग्रोथ देखने को मिलेगी 🚀।

🔚 निष्कर्ष
33&Brew की यह फंडिंग दर्शाती है कि भारत में एक्सपीरियंस‑बेस्ड हॉस्पिटैलिटी और क्राफ्ट बीयर ब्रांड्स के लिए निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। संगीत, भोजन और बीयर के अनोखे संयोजन के साथ 33&Brew आने वाले समय में और भी बड़े स्तर पर विस्तार की तैयारी में है 🌟।

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🌾 Samunnati की FY25 में धीमी ग्रोथ,

Samunnati

चेन्नई स्थित एग्री-वैल्यू चेन प्लेटफॉर्म Samunnati ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में सीमित वृद्धि दर्ज की है 📊। कंपनी की समेकित वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार, उसका सकल राजस्व FY24 में ₹2,404 करोड़ से बढ़कर FY25 में ₹2,434 करोड़ हो गया 💰। हालांकि यह बढ़ोतरी मामूली रही, लेकिन कंपनी प्री-टैक्स स्तर पर लाभ में बनी रही।

🚜 कृषि इकोसिस्टम को मजबूत करने पर फोकस

2014 में स्थापित Samunnati एक विशेषीकृत एग्री इकोसिस्टम प्लेटफॉर्म है 🌱। यह कंपनी कृषि क्षेत्र में वित्तीय और गैर-वित्तीय दोनों तरह की सेवाएं प्रदान करती है। Samunnati मुख्य रूप से Farmer Producer Organisations (FPOs), एग्री-SMEs और एग्रीटेक स्टार्टअप्स के साथ काम करती है।

कंपनी का दावा है कि वह देशभर में 6,000 से अधिक किसान समूहों से जुड़ी हुई है 🤝 और इसके माध्यम से लाखों छोटे व सीमांत किसानों को लाभ पहुंचा रही है।

📦 ट्रेडिंग से आया सबसे ज्यादा राजस्व

FY25 में भी Samunnati की कुल आय का लगभग 90% हिस्सा ट्रेडिंग और उससे जुड़ी गतिविधियों से आया 🧾। इस सेगमेंट से कंपनी ने ₹2,205 करोड़ की कमाई की।
वहीं, फाइनेंसिंग और लेंडिंग बिजनेस से भी आय हुई, लेकिन इसका योगदान अभी सीमित है।

💸 खर्चों में तेज़ बढ़ोतरी

कंपनी के कुल खर्चों में प्रोक्योरमेंट (खरीद) खर्च सबसे बड़ा हिस्सा रहा, जो FY25 में बढ़कर ₹2,084 करोड़ हो गया 📈। यह कुल खर्च का करीब 85% है।

इसके अलावा, कर्मचारी लाभ खर्च भी 8% बढ़कर ₹76 करोड़ पहुंच गया 👨‍💼👩‍💼। लेंडिंग बिजनेस के विस्तार के कारण कंपनी का फाइनेंस कॉस्ट भी 42.9% बढ़कर ₹215.8 करोड़ हो गया।

⚖️ प्री-टैक्स मुनाफा, लेकिन टैक्स से नुकसान

बढ़ते खर्चों के बावजूद Samunnati ने FY25 में ₹5.3 करोड़ का प्री-टैक्स प्रॉफिट (EBT) दर्ज किया ✅।
हालांकि, ₹74 करोड़ के डिफर्ड टैक्स खर्च के चलते कंपनी को साल के अंत में ₹74 करोड़ का शुद्ध घाटा झेलना पड़ा ❌।

⚙️ लगभग ब्रेक-ईवन पर ऑपरेशन

FY25 में कंपनी ने लगभग 1 रुपये खर्च कर 1 रुपये की कमाई की, जिससे यह साफ होता है कि Samunnati का कारोबार लगभग ब्रेक-ईवन स्थिति में है ⚖️।

मार्च 2025 तक कंपनी की कुल चालू परिसंपत्तियां ₹2,103 करोड़ रहीं, जिनमें ₹308 करोड़ नकद और बैंक बैलेंस शामिल है 🏦।

💼 निवेशकों का भरोसा कायम

फंडिंग के मोर्चे पर Samunnati को लगातार समर्थन मिला है 🤝। कंपनी ने मई 2024 में $44 मिलियन की Series E फंडिंग जुटाई थी। इससे पहले वह कुल मिलाकर $135 मिलियन से अधिक की पूंजी उठा चुकी है 💵।

इसके निवेशकों में Tata Capital, Poonawalla Fincorp, Hinduja Leyland Finance, Wint Wealth, Alteria Capital जैसे बड़े नाम शामिल हैं ⭐।

🔮 आगे की राह

हालांकि FY25 में ग्रोथ धीमी रही और टैक्स के कारण घाटा हुआ, लेकिन Samunnati की मजबूत ऑपरेशनल पकड़कृषि क्षेत्र में गहरी समझ और निवेशकों का भरोसा इसे भविष्य के लिए मजबूत स्थिति में रखता है 🌟।

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💍 D2C एक्सेसरीज़ ब्रांड Salty ने जुटाए ₹30.1 करोड़,

Salty

भारत के तेजी से बढ़ते डायरेक्ट-टू-कंज़्यूमर (D2C) सेक्टर में एक और बड़ी फंडिंग डील सामने आई है 💼। किफायती फैशन एक्सेसरीज़ ब्रांड Salty ने अपने नए फंडिंग राउंड में ₹30.1 करोड़ जुटाए हैं 💰। इस राउंड का नेतृत्व MG Investment ने किया है, जबकि Anicut CapitalAll In CapitalJK Group और कई नए एंजेल निवेशकों ने भी इसमें भाग लिया है 🤝।

🛠️ फंड का इस्तेमाल कहां होगा?

कंपनी के अनुसार, इस पूंजी का उपयोग

  • 👥 कोर टीम को मजबूत करने
  • 🛒 ई‑कॉमर्स और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर विस्तार
  • 🚚 पूरे देश में डिलीवरी स्पीड बेहतर करने
    के लिए किया जाएगा।

Salty ने पिछले एक साल में 18,000 से अधिक पिनकोड्स में डिलीवरी की है 📦, जिससे साफ है कि ब्रांड की मांग अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही 🌍।

💎 ज्वेलरी से आगे, नई कैटेगरी में एंट्री

अब तक Salty की पहचान एक ट्रेंडी और किफायती ज्वेलरी ब्रांड के रूप में रही है ✨। लेकिन अब कंपनी

  • ⌚ घड़ियां
  • 🕶️ सनग्लासेस
  • 🧣 स्कार्फ
  • 👝 बेल्ट और बैग चार्म्स
    जैसी कैटेगरी में भी कदम बढ़ा चुकी है।

इसके अलावा, कंपनी जल्द ही “Salty Bags” 👜 लॉन्च करने की तैयारी में है, जिससे उसका प्रोडक्ट पोर्टफोलियो और मजबूत होगा।

🏬 पहला ऑफलाइन फ्लैगशिप स्टोर

डिजिटल‑फर्स्ट ब्रांड होने के बावजूद Salty अब ऑफलाइन रिटेल में भी प्रवेश करने जा रहा है 🏪। कंपनी अपने पहले फ्लैगशिप स्टोर को खोलने की योजना बना रही है, जिससे ग्राहकों को बेहतर और भरोसेमंद शॉपिंग अनुभव मिल सके।

📱 क्रिएटर और सेलेब्रिटी मार्केटिंग पर फोकस

Salty अपनी ब्रांड ग्रोथ के लिए

  • 🎥 क्रिएटर‑लेड कोलैबोरेशन
  • 🌟 सेलेब्रिटी‑बैक्ड प्रोडक्ट लॉन्च
  • 🤝 ब्रांड पार्टनरशिप्स
    पर भी खर्च बढ़ाने की योजना बना रहा है।

👩‍💼👨‍💼 संस्थापक और विज़न

Salty की स्थापना Kanishka GargSonaal Goel और Twisha Gupta ने की थी। संस्थापकों का मानना है कि भारत में युवा ग्राहकों के बीच किफायती लेकिन स्टाइलिश एक्सेसरीज़ की मांग तेजी से बढ़ रही है 🔥।

📈 निवेशकों का भरोसा

निवेशकों की भागीदारी यह दर्शाती है कि उन्हें Salty के बिज़नेस मॉडल और भविष्य की योजनाओं पर पूरा भरोसा है ✅। D2C सेक्टर में Salty जैसे ब्रांड्स तेजी से मजबूत पहचान बना रहे हैं।

🔚 निष्कर्ष

नई फंडिंग के साथ Salty अब

  • मल्टी‑कैटेगरी ब्रांड बनने
  • ऑफलाइन मौजूदगी बढ़ाने
  • और तेज़ डिलीवरी नेटवर्क तैयार करने
    की दिशा में आगे बढ़ रहा है 🚀।

Read more :💰 AssetPlus को ₹175 करोड़ की फंडिंग, 

💰 AssetPlus को ₹175 करोड़ की फंडिंग, 

AssetPlus

भारत के तेजी से बढ़ते वेल्थ‑टेक सेक्टर में एक और बड़ी खबर सामने आई है। चेन्नई स्थित वेल्थ‑टेक स्टार्टअप AssetPlus ने हाल ही में ₹175 करोड़ (लगभग 19.3 मिलियन डॉलर) की फंडिंग जुटाई है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Nexus Venture Partners ने किया, जबकि कंपनी के मौजूदा निवेशक Eight Roads Ventures और Rainmatter Fund ने भी इसमें भाग लिया। 🚀

इस नई पूंजी से AssetPlus अपनी तकनीक को और मजबूत करने, नए प्रोडक्ट लॉन्च करने और निवेशकों के लिए बेहतर डिजिटल अनुभव तैयार करने की योजना बना रहा है।


🏦 AssetPlus क्या करता है?

साल 2016 में विश्रांत सुरेश और अवनीश राज द्वारा स्थापित AssetPlus एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो Mutual Fund Distributors (MFDs) और निवेशकों को एक ही जगह पर जोड़ता है। 📊

यह प्लेटफॉर्म म्यूचुअल फंड निवेश की प्रक्रिया को आसान और टेक्नोलॉजी‑आधारित बनाता है, जिससे निवेशक और डिस्ट्रिब्यूटर दोनों को फायदा मिलता है। AssetPlus का मुख्य लक्ष्य है —
👉 फाइनेंस को आम लोगों के लिए सरल, पारदर्शी और सुलभ बनाना।


🤖 टेक्नोलॉजी और AI पर बड़ा फोकस

AssetPlus खुद को सिर्फ एक निवेश प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रखता। कंपनी AI‑based advisory solutionsONDC integration, और स्मार्ट डिजिटल टूल्स के जरिए निवेश को ज्यादा समझदारी और डेटा‑ड्रिवन बना रही है।

नई फंडिंग का एक बड़ा हिस्सा कंपनी अपने technology stack को मजबूत करने में लगाएगी, ताकि निवेशकों को बेहतर एनालिटिक्स, पर्सनलाइज्ड सलाह और तेज़ सर्विस मिल सके। ⚙️


🛡️ इंश्योरेंस और रिटायरमेंट प्रोडक्ट्स में विस्तार

म्यूचुअल फंड के अलावा AssetPlus ने अब अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को भी काफी हद तक बढ़ा लिया है। कंपनी अब:

  • Term Insurance
  • Health Insurance
  • Fixed Deposits
  • Retirement‑focused investment products

भी ऑफर कर रही है। 🧾

इसके अलावा, आने वाले 6 महीनों में कंपनी:
✔️ Portfolio Management Services (PMS)
✔️ Global Investment Options (GIFT City के जरिए)

लॉन्च करने की तैयारी में है, जिससे भारतीय निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच मिल सके।


👥 मजबूत MFD नेटवर्क और बढ़ता ग्राहक आधार

AssetPlus का दावा है कि वह इस समय भारत भर में 18,000 से ज्यादा Mutual Fund Distributors के साथ काम कर रहा है। इस मजबूत नेटवर्क के जरिए कंपनी:

  • ₹7,250 करोड़ से ज्यादा की Assets Under Management (AUM) संभाल रही है
  • ₹100 करोड़+ का मासिक SIP बुक मैनेज कर रही है
  • 1.5 लाख से ज्यादा ग्राहकों को सेवाएं दे रही है 📈

कंपनी के अनुसार, उसके ज्यादातर ग्राहक retail investors हैं, जिनका निवेश पोर्टफोलियो आमतौर पर ₹5 लाख से ₹2 करोड़ के बीच होता है।


💸 SIP निवेश में भी मजबूत पकड़

SIP (Systematic Investment Plan) AssetPlus की ग्रोथ का एक अहम हिस्सा है। कंपनी के प्लेटफॉर्म पर निवेशक औसतन:
👉 ₹10,000 से ₹12,000 प्रति माह SIP में निवेश करते हैं।

यह दिखाता है कि AssetPlus मिडिल‑क्लास और अपर‑मिडिल‑क्लास निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।


📉 फाइनेंशियल परफॉर्मेंस की स्थिति

वित्त वर्ष FY25 (मार्च 2025 तक) में AssetPlus ने:

  • ₹33.9 करोड़ का रेवेन्यू
  • ₹21 करोड़ का नेट लॉस

रिपोर्ट किया है। हालांकि, वेल्थ‑टेक स्टार्टअप्स के शुरुआती चरण में यह आम बात मानी जाती है, क्योंकि इस दौर में कंपनियां ज्यादा निवेश टेक्नोलॉजी और ग्रोथ पर करती हैं।


🇮🇳 भारतीय वेल्थ‑टेक सेक्टर का हाल

Entrackr के आंकड़ों के अनुसार, 2024 और 2025 के दौरान भारतीय वेल्थ‑टेक स्टार्टअप्स ने:

  • $634 मिलियन+ फंडिंग
  • 51 डील्स
  • 39 स्टार्टअप्स

के जरिए जुटाई है।

हालांकि, बड़े साइज की फंडिंग डील्स सीमित रहीं। $30 मिलियन से ज्यादा की सिर्फ 6 डील्स हुईं, जिनमें Smallcase, Dezerv, Neo और Syfe जैसे नाम शामिल हैं। हाल ही में Wint Wealth ने भी $28 मिलियन की Series‑B फंडिंग जुटाई है।


🔮 आगे का रास्ता

AssetPlus की यह फंडिंग दिखाती है कि निवेशकों को कंपनी के बिज़नेस मॉडल, टेक्नोलॉजी और लॉन्ग‑टर्म विज़न पर भरोसा है। अगर कंपनी अपनी योजनाओं को सही तरीके से लागू करती है, तो आने वाले समय में AssetPlus भारत के टॉप वेल्थ‑टेक प्लेटफॉर्म्स में अपनी जगह और मजबूत कर सकता है। 🌱

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🏦 जयपुर की NBFC Namdev Finvest ने जुटाए ₹324 करोड़,

Namdev Finvest

जयपुर स्थित गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) Namdev Finvest ने हाल ही में करीब 37 मिलियन डॉलर (लगभग ₹324 करोड़) की फंडिंग जुटाई है 💰। यह फंडिंग लिस्टेड नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) और एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग्स (ECB) के ज़रिए हासिल की गई है। इस निवेश राउंड में एफएमओIIXफ्रैंकलिन टेम्पलटन AIF इंडिया और सिम्बायोटिक्स जैसे बड़े निवेशकों ने हिस्सा लिया है 🤝।

🌍 अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का मजबूत समर्थन

इस फंडिंग में सबसे बड़ा योगदान एफएमओ (डच एंटरप्रेन्योरियल डेवलपमेंट बैंक) का रहा, जिसने 20 मिलियन डॉलर (करीब ₹180 करोड़) का निवेश किया है 🇳🇱। वहीं Impact Investment Exchange (IIX) की Women’s Livelihood Bond 7 के ज़रिए कंपनी को 8 मिलियन डॉलर (लगभग ₹71 करोड़) मिले हैं 👩‍💼।
इसके अलावा, फ्रैंकलिन टेम्पलटन AIF इंडिया से 2.3 मिलियन डॉलर और सिम्बायोटिक्स से 6.5 मिलियन डॉलर का निवेश प्राप्त हुआ है 📊।

🔁 पहले भी जुटा चुकी है फंडिंग

नामदेव फिनवेस्ट इससे पहले भी निवेशकों का भरोसा जीत चुकी है। जनवरी 2024 में कंपनी ने 15 मिलियन डॉलर की सीरीज़ बी फंडिंग जुटाई थी, जिसका नेतृत्व British International Investment (BII) और LC Nueva AIF ने किया था 📈।
इसके अलावा, कंपनी ने सितंबर 2021 में 4.7 मिलियन डॉलर और अक्टूबर 2022 में 7.5 मिलियन डॉलर की फंडिंग भी हासिल की थी।

🏭 एमएसएमई सेक्टर पर खास फोकस

कंपनी ने बताया कि इस नई पूंजी का इस्तेमाल ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत में एमएसएमई ऋण कारोबार को बढ़ाने के लिए किया जाएगा 🌾। एमएसएमई सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन आज भी इसे पर्याप्त वित्तीय सहायता नहीं मिल पाती। नामदेव फिनवेस्ट इसी कमी को पूरा करने पर काम कर रही है 💪।

🧑‍💼 2013 में हुई थी शुरुआत

नामदेव फिनवेस्ट की स्थापना 2013 में जितेंद्र तंवर ने की थी। कंपनी एमएसएमई उद्यमियों, वाहन मालिकों, महिला उद्यमियों 👩‍🔧, रूफटॉप सोलर ग्राहकों ☀️ और पर्यावरण अनुकूल परिवहन अपनाने वालों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

🏦 विविध फंडिंग स्रोतों की रणनीति

कंपनी सार्वजनिक और निजी बैंकों, स्मॉल फाइनेंस बैंकों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर काम करती है 🤝। इसका उद्देश्य फंडिंग के स्रोतों को विविध बनाना है, जिससे कारोबार को स्थिर और सुरक्षित रखा जा सके।

🏙️ टियर-3 और छोटे शहरों पर ध्यान

नामदेव फिनवेस्ट का मुख्य फोकस टियर-3 शहरों और छोटे कस्बों पर है 🏘️। कंपनी वर्तमान में भारत के 9 राज्यों में सक्रिय है और वहां के उद्यमियों को औपचारिक वित्तीय सेवाओं से जोड़ रही है।

🌱 वित्तीय समावेशन और हरित वित्त

कंपनी का लक्ष्य सिर्फ मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि वित्तीय समावेशनरोज़गार सृजन और ग्रीन फाइनेंस को बढ़ावा देना है 🌍। इलेक्ट्रिक वाहन 🚗⚡, सोलर एनर्जी और पर्यावरण-अनुकूल व्यवसायों को कंपनी प्राथमिकता देती है।

🔮 आगे की योजना

आने वाले समय में नामदेव फिनवेस्ट अपने संचालन का और विस्तार करने, अधिक राज्यों में पहुंच बनाने और तकनीक आधारित ऋण समाधान देने की योजना बना रही है 📲। कंपनी का मानना है कि मजबूत एमएसएमई सेक्टर ही भारत की आर्थिक मजबूती की कुंजी है 🔑।

👉 कुल मिलाकर, नामदेव फिनवेस्ट की यह फंडिंग न केवल कंपनी के विकास के लिए अहम है, बल्कि यह भारत के एमएसएमई सेक्टर, वित्तीय समावेशन और हरित अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है 🌟।

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🏥 Portea ने FY25 में घाटा आधा किया, कमाई में भी दिखी मजबूती 📈

Portea

बेंगलुरु स्थित होम हेल्थकेयर सर्विस प्रोवाइडर Portea के लिए वित्त वर्ष 2024–25 (FY25) काफी अहम रहा। इस दौरान कंपनी ने न सिर्फ अपनी कमाई में स्थिर बढ़ोतरी दर्ज की, बल्कि घाटे को लगभग आधा करने में भी सफलता हासिल की 💪। नियंत्रित खर्च और बेहतर ऑपरेशनल मैनेजमेंट इसका मुख्य कारण रहा।

📊 Registrar of Companies (RoC) से मिले आंकड़ों के अनुसार, Portea की ऑपरेशनल रेवेन्यू FY25 में 15% बढ़कर ₹160 करोड़ हो गई, जो FY24 में ₹139 करोड़ थी।


🏡 घर बैठे इलाज की बढ़ती मांग बनी ताकत

Portea भारत की उन कंपनियों में से है जो घर बैठे हेल्थकेयर सेवाएं उपलब्ध कराती हैं। इसकी सेवाओं में शामिल हैं:

  • 👩‍⚕️ नर्सिंग और अटेंडेंट केयर
  • 🧘‍♂️ फिजियोथेरेपी
  • 🧪 लैब टेस्ट और मेडिकल कंसल्टेशन
  • 🩺 मेडिकल इक्विपमेंट रेंटल (ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, BiPAP, नेबुलाइज़र आदि)
  • ❤️ स्पेशलाइज़्ड केयर सर्विसेज

इन सेवाओं की वजह से कंपनी को स्थिर और भरोसेमंद रेवेन्यू मिलता रहा।


💰 सर्विस से सबसे ज्यादा कमाई

FY25 में Portea की सेवा आधारित आय सबसे बड़ी कमाई का जरिया रही।

  • 🏥 सर्विस रेवेन्यू: ₹95 करोड़
    • 👉 कुल ऑपरेशनल आय का 59%
    • 👉 सालाना आधार पर 16% की बढ़ोतरी
  • 🛒 प्रोडक्ट सेल्स (मेडिकल इक्विपमेंट): ₹56 करोड़
    • 👉 सालाना 14% ग्रोथ

इससे साफ है कि Portea ने सिर्फ सेवाओं पर ही नहीं, बल्कि प्रोडक्ट बिजनेस पर भी फोकस बनाए रखा है।


📉 खर्चों पर कड़ी नजर, यहीं से बदली तस्वीर

जहां कई हेल्थटेक कंपनियां खर्चों की वजह से जूझ रही हैं, वहीं Portea ने FY25 में कॉस्ट कंट्रोल पर अच्छा काम किया 👌

🔍 खर्चों की स्थिति:

  • 👥 एम्प्लॉयी बेनिफिट कॉस्ट: ₹52.5 करोड़
    • 👉 4.5% की गिरावट
  • 🧑‍💼 कंसल्टेंसी खर्च: ₹44 करोड़
    • 👉 7% की बढ़ोतरी
  • 🧾 मैटीरियल कॉस्ट: ₹52 करोड़
    • 👉 21% की बढ़त
  • 📢 एडवर्टाइजिंग खर्च: ₹7.5 करोड़
    • 👉 25% की बढ़ोतरी
  • ⚖️ अन्य खर्च (लीगल, प्रोफेशनल, फाइनेंस): ₹30 करोड़+

👉 इसके बावजूद, कुल खर्च FY25 में ₹179 करोड़ पर लगभग स्थिर रहा, जो कंपनी के बेहतर मैनेजमेंट को दिखाता है।


🔻 घाटा हुआ लगभग आधा

कमाई बढ़ने और खर्च नियंत्रित रहने का सीधा असर कंपनी के घाटे पर पड़ा।

  • ❌ FY24 का घाटा: ₹37 करोड़
  • ✅ FY25 का घाटा: ₹19 करोड़
  • 📉 49% की गिरावट

📌 कंपनी के

  • ROCE: -40.54%
  • EBITDA मार्जिन: -6.88%

हालांकि आंकड़े अभी नेगेटिव हैं, लेकिन सुधार साफ दिखाई देता है।


🧮 यूनिट इकनॉमिक्स में सुधार

FY25 में Portea ने:

  • 💸 ₹1 कमाने के लिए ₹1.12 खर्च किए
  • (FY24 में यह ₹1.29 था)

👉 यह दिखाता है कि कंपनी अब ज्यादा एफिशिएंट हो रही है।


💵 कैश पोज़िशन और फंडिंग

  • 🏦 कैश और बैंक बैलेंस: ₹1 करोड़
  • 📦 करंट एसेट्स: ₹68 करोड़

📢 TheKredible के अनुसार, Portea अब तक लगभग $123 मिलियन (₹1,000+ करोड़) की फंडिंग जुटा चुकी है।
इसके प्रमुख निवेशकों में Accel और Ventureast शामिल हैं 🤝


📈 IPO की तैयारी, लेकिन अभी इंतजार

दिलचस्प बात यह है कि Portea को 2023 में SEBI से ₹1,000 करोड़ के IPO की मंजूरी मिल चुकी है 📝
हालांकि, अब तक कंपनी ने लिस्टिंग को लेकर कोई नया कदम नहीं उठाया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी पहले मुनाफे के और करीब पहुंचना चाहती है, ताकि IPO के समय बेहतर वैल्यू मिल सके 🚀


🔍 निष्कर्ष

Portea के FY25 के नतीजे यह दिखाते हैं कि:

✅ कमाई में स्थिर ग्रोथ
✅ खर्चों पर नियंत्रण
✅ घाटे में बड़ी कमी

अगर यही ट्रेंड जारी रहा, तो आने वाले सालों में Portea होम हेल्थकेयर सेक्टर की मजबूत खिलाड़ी बन सकती है 🏆

Read more :👟 देसी स्ट्रीट कल्चर से ग्लोबल सपने तक Gully Labs ने जुटाए ₹26.5 करोड़

👟 देसी स्ट्रीट कल्चर से ग्लोबल सपने तक Gully Labs ने जुटाए ₹26.5 करोड़

Gully Labs

भारतीय स्ट्रीट फैशन और स्नीकर्स की दुनिया में तेजी से उभर रहा ब्रांड Gully Labs अब निवेशकों की नज़र में भी आ गया है। कंपनी ने अपने सीरीज़ A फंडिंग राउंड में ₹26.5 करोड़ (करीब $3 मिलियन) जुटाए हैं। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व वेंचर कैपिटल फर्म Saama Capital ने किया है, जबकि कंपनी के शुरुआती निवेशक Zeropearl ने भी इसमें दोबारा निवेश किया है। इसके अलावा कई जाने-माने एंजेल निवेशकों ने भी इस राउंड में भाग लिया।

💰 फंडिंग डिटेल्स क्या हैं?

कंपनी की ओर से Registrar of Companies (RoC) में की गई फाइलिंग के मुताबिक, Gully Labs ने इस फंडिंग के तहत

  • 10 इक्विटी शेयर
  • और 31,925 सीरीज़ A CCPS (Compulsorily Convertible Preference Shares)

जारी किए हैं। इन शेयरों का इश्यू प्राइस ₹8,301 प्रति शेयर रखा गया, जिससे कुल मिलाकर ₹26.50 करोड़ जुटाने का लक्ष्य पूरा हुआ।

इस राउंड में:

  • Saama Capital ने सबसे बड़ा निवेश करते हुए ₹22.6 करोड़ लगाए
  • Zeropearl ने ₹3.5 करोड़ का निवेश किया

इसके अलावा कुछ प्रमुख व्यक्तिगत निवेशकों ने भी हिस्सा लिया, जिनमें:

  • Roman Saini (Unacademy के को-फाउंडर)
  • Radhika Gupta (Edelweiss Mutual Fund की MD & CEO)
  • Aditya Bhalla जैसे नाम शामिल हैं

📊 कंपनी की वैल्यूएशन इस फंडिंग के बाद Gully Labs की पोस्ट-मनी वैल्यूएशन करीब ₹147 करोड़ ($16.25 मिलियन) आंकी गई है।
नई हिस्सेदारी के बाद:

  • Saama Capital VI LP कंपनी का सबसे बड़ा शेयरहोल्डर बन गया है, जिसकी हिस्सेदारी 15.40% है
  • वहीं Zeropearl Fund के पास 10.21% हिस्सेदारी है

🧢 Gully Labs आखिर है क्या?

Gully Labs की शुरुआत साल 2023 में Arjun Singh और Animesh Mishra ने की थी। यह एक Direct-to-Consumer (D2C) फुटवियर ब्रांड है, जो खास तौर पर भारतीय स्ट्रीट कल्चर से प्रेरित स्नीकर्स बनाता है।

कंपनी की खास बात यह है कि:

  • डिज़ाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक सब कुछ इन-हाउस होता है
  • बिक्री का मुख्य जरिया कंपनी की अपनी वेबसाइट है
  • ब्रांड का फोकस युवाओं और स्ट्रीट फैशन पसंद करने वालों पर है

Gully Labs अपने स्नीकर्स में देसी स्टाइल, लोकल आर्ट और भारतीय संस्कृति की झलक दिखाने की कोशिश करता है, जो इसे बाकी इंटरनेशनल ब्रांड्स से अलग बनाता है।

🚀 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

कंपनी ने बताया है कि इस नई पूंजी का इस्तेमाल:

  • बिज़नेस एक्सपेंशन
  • नए प्रोडक्ट लॉन्च
  • ब्रांड बिल्डिंग और मार्केटिंग
  • और अन्य कॉर्पोरेट जरूरतों

के लिए किया जाएगा।
इससे साफ है कि Gully Labs आने वाले समय में अपने ऑपरेशन्स को और तेज़ी से बढ़ाने की तैयारी में है।

🥊 मार्केट में मुकाबला

भारतीय स्नीकर्स और फुटवियर मार्केट में मुकाबला अब काफी बढ़ गया है। Gully Labs को जिन ब्रांड्स से टक्कर मिल रही है, उनमें शामिल हैं:

  • Comet (जिसने 2024 में $5 मिलियन जुटाए थे)
  • Neemans, जो दोबारा फंडरेजिंग की तैयारी में है
  • SolethreadsZeesh जैसे अन्य देसी ब्रांड्स

हालांकि, Gully Labs की पहचान उसका इंडियन स्ट्रीट कल्चर फोकस है, जो इसे एक अलग जगह देता है।

📉 फाइनेंशियल स्थिति

फिलहाल कंपनी ने अपने FY25 के फाइनेंशियल रिजल्ट्स फाइल नहीं किए हैं। लेकिन लगातार निवेश और बढ़ती ब्रांड पहचान यह संकेत देती है कि कंपनी ग्रोथ मोड में है।

🇮🇳 क्यों अहम है यह डील?

भारत में स्नीकर्स और स्ट्रीट फैशन का बाजार तेजी से बढ़ रहा है, खासकर युवाओं के बीच। ऐसे में:

  • देसी ब्रांड्स का उभरना
  • भारतीय संस्कृति से जुड़ा डिजाइन
  • और D2C मॉडल

निवेशकों को लंबी अवधि में बड़ा मौका दिखा रहे हैं। Gully Labs की यह फंडिंग इसी ट्रेंड को मजबूत करती है।

🔮 आगे क्या?

अगर कंपनी अपनी ब्रांडिंग, प्रोडक्ट क्वालिटी और स्केलिंग पर सही तरीके से काम करती है, तो आने वाले सालों में Gully Labs न सिर्फ भारत बल्कि इंटरनेशनल मार्केट में भी अपनी पहचान बना सकता है।

कुल मिलाकर, Gully Labs की यह Series A फंडिंग भारतीय स्टार्टअप और फैशन इकोसिस्टम के लिए एक मजबूत संकेत है कि देसी ब्रांड्स अब ग्लोबल स्टेज के लिए तैयार हो रहे हैं।

Read more :🚀 भारतीय स्पेस स्टार्टअप EtherealX ने जुटाए $20.5 मिलियन,

🚀 भारतीय स्पेस स्टार्टअप EtherealX ने जुटाए $20.5 मिलियन,

EtherealX

भारत का स्पेस स्टार्टअप इकोसिस्टम तेज़ी से वैश्विक पहचान बना रहा है और इसी कड़ी में Ethereal Exploration Guild (EtherealX) ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। बेंगलुरु स्थित इस स्पेस टेक्नोलॉजी कंपनी ने हाल ही में Series A फंडिंग राउंड में $20.5 मिलियन (करीब ₹170 करोड़) जुटाए हैं। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व TDK Ventures और BIG Capital ने किया है, जबकि Accel, Prosus, YourNest Venture Capital, BlueHill Capital, Campus Fund और Riceberg Ventures जैसे नामी निवेशकों ने भी इसमें भाग लिया है।

🌌 पहले भी मिल चुका है निवेशकों का भरोसा

यह EtherealX का पहला बड़ा निवेश नहीं है। इससे पहले, अगस्त 2024 में कंपनी ने $5 मिलियन की सीड फंडिंग जुटाई थी, जिसका नेतृत्व YourNest ने किया था। उस राउंड में BIG Global Investments, BlueHill Capital, Campus Fund, Golden Sparrow Ventures और कई जाने-माने एंजेल इन्वेस्टर्स भी शामिल थे। लगातार मिल रही फंडिंग से साफ है कि निवेशकों को इस स्टार्टअप के विज़न और टेक्नोलॉजी पर पूरा भरोसा है।

🔥 Razor Crest Mk-1: पूरी तरह रीयूज़ेबल रॉकेट

EtherealX इस नई फंडिंग का इस्तेमाल अपने सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट Razor Crest Mk-1 को विकसित करने में करेगा। यह एक पूरी तरह से रीयूज़ेबल मीडियम-लिफ्ट लॉन्च व्हीकल होगा, जिसे खास तौर पर कम लागत और ज़्यादा क्षमता के साथ डिजाइन किया जा रहा है।

कंपनी के अनुसार, Razor Crest Mk-1

  • 🌍 Low Earth Orbit (LEO) में करीब 8 से 24.8 टन तक पेलोड ले जाने में सक्षम होगा
  • 🛰️ Geosynchronous Transfer Orbit (GTO) में 10.8 टन तक पेलोड पहुंचा सकेगा
  • 🌕 Trans-lunar मिशन यानी चंद्रमा की ओर जाने वाले पेलोड के लिए भी उपयुक्त होगा

यह रॉकेट SpaceX के Falcon सीरीज़ जैसे रॉकेट्स को सीधी टक्कर देने की क्षमता रखता है।

🧑‍🚀 कौन हैं EtherealX के फाउंडर्स?

EtherealX की स्थापना 2022 में तीन इंजीनियर्स —

  • मनु जे. नायर,
  • शुभायु सरदार,
  • प्रशांत शर्मा
    द्वारा की गई थी।

इन तीनों का लक्ष्य शुरू से ही स्पष्ट था — भारत से एक ऐसा स्पेस लॉन्च सिस्टम बनाना जो कम लागतज़्यादा री-यूज़ेबिलिटी और तेज़ डेवलपमेंट साइकिल के साथ काम करे।

⚙️ इन-हाउस इंजन और एडवांस टेक्नोलॉजी

EtherealX का दावा है कि उसने सिर्फ 3.5 साल में दो रॉकेट इंजन विकसित कर लिए हैं, जो इस मीडियम-लिफ्ट व्हीकल के दोनों स्टेज को पावर देंगे। कंपनी का अपर-स्टेज इंजन “Pegasus” (80kN) पूरी तरह रीयूज़ेबल है।

खास बात यह है कि कंपनी एक खुद की विकसित की गई इंजन टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है, जिसे
Full Flow Segregated Cooling Cycle (FFSCC) कहा जाता है। यह टेक्नोलॉजी रॉकेट की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ-साथ लागत कम करने में भी मदद करती है।

💰 लॉन्च कॉस्ट में क्रांति लाने का लक्ष्य

EtherealX का लक्ष्य है कि वह अंतरिक्ष में सामान पहुंचाने की लागत को घटाकर $500–$1,000 प्रति किलोग्राम तक ले आए। अगर यह लक्ष्य हासिल होता है, तो यह स्पेस इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है, खासकर छोटे सैटेलाइट ऑपरेटर्स और स्टार्टअप्स के लिए।

🤝 ISRO और IN-SPACe के साथ साझेदारी

कंपनी ने IN-SPACe, ISRO और अन्य राष्ट्रीय स्पेस एजेंसियों के साथ सहयोग समझौते किए हैं। इसके अलावा, EtherealX ने कई कमर्शियल सैटेलाइट ऑपरेटर्स, लॉन्च एग्रीगेटर्स और अंतरराष्ट्रीय लॉन्च पोर्ट्स के साथ भी पार्टनरशिप साइन की है।

🌍 तेजी से बढ़ती वैश्विक स्पेस इकॉनमी

मार्केट रिसर्च के मुताबिक, ग्लोबल स्पेस इकॉनमी 2035 तक $1.8 ट्रिलियन तक पहुंच सकती है। ऐसे में EtherealX जैसे भारतीय स्टार्टअप्स के लिए यह सही समय है कि वे दुनिया के बड़े खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करें।

🚀 भारत के लिए क्यों है यह बड़ी खबर?

EtherealX की सफलता यह दिखाती है कि भारत अब सिर्फ सैटेलाइट लॉन्च करने वाला देश नहीं, बल्कि री-यूज़ेबल लॉन्च टेक्नोलॉजी में भी अग्रणी बनने की ओर बढ़ रहा है। अगर Razor Crest Mk-1 सफल होता है, तो भारत वैश्विक स्पेस लॉन्च मार्केट में एक मज़बूत दावेदार बन सकता है।

🔚 निष्कर्ष:
EtherealX सिर्फ एक स्टार्टअप नहीं, बल्कि भारत के स्पेस सपनों की उड़ान है। सही निवेश, मजबूत टेक्नोलॉजी और स्पष्ट विज़न के साथ यह कंपनी आने वाले वर्षों में स्पेस इंडस्ट्री की तस्वीर बदल सकती है। 🚀✨

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