भारत के fintech सेक्टर से एक बड़ी खबर सामने आई है। Progcap ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने रेवेन्यू को लगभग दोगुना कर लिया है। इतना ही नहीं, कंपनी ने इसी अवधि में अपने घाटे को 87% तक कम करने में भी सफलता हासिल की है।
RoC (Registrar of Companies) से प्राप्त वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, Progcap का ऑपरेशनल रेवेन्यू FY25 में 93% की बढ़त के साथ 139 करोड़ रुपये से बढ़कर 268 करोड़ रुपये हो गया। यह ग्रोथ ऐसे समय में आई है जब fintech सेक्टर फंडिंग और रेगुलेटरी दबावों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
💼 क्या करती है Progcap?
Gurugram स्थित Progcap एक fintech प्लेटफॉर्म है, जो छोटे और मझोले व्यापारियों (MSMEs) को debt capital उपलब्ध कराता है। कंपनी विशेष रूप से उन micro और small retailers पर फोकस करती है, जिन्हें पारंपरिक बैंकों से लोन लेना मुश्किल होता है।
Progcap सप्लाई चेन को डिजिटाइज करके last-mile retailers को finance तक आसान पहुंच उपलब्ध कराती है। कंपनी की आय का प्रमुख स्रोत यही सर्विस रही है।
FY25 में कंपनी को डिपॉजिट पर मिलने वाले ब्याज और current investments से लगभग 10 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हुई, जिससे कुल आय बढ़कर 278 करोड़ रुपये हो गई, जो FY24 में 159 करोड़ रुपये थी।
📊 खर्चों में क्या रहा ट्रेंड?
जहां रेवेन्यू तेजी से बढ़ा, वहीं खर्चों में भी इजाफा हुआ, लेकिन नियंत्रित स्तर पर।
- कर्मचारी लाभ (Employee benefit expenses) कुल खर्च का 45% रहा। यह खर्च FY25 में 126 करोड़ रुपये रहा, जो FY24 के 124 करोड़ रुपये के लगभग बराबर है।
- फाइनेंस कॉस्ट में बड़ी छलांग देखने को मिली। यह 22.5 करोड़ रुपये से बढ़कर 91 करोड़ रुपये हो गया — यानी चार गुना से ज्यादा वृद्धि।
- Write-offs 15 करोड़ रुपये से बढ़कर 24.5 करोड़ रुपये हो गए।
- लीगल चार्जेज 6.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गए।
कुल मिलाकर, कंपनी का कुल खर्च 37% बढ़कर 203 करोड़ रुपये से 279 करोड़ रुपये हो गया।
📉 घाटे में भारी कमी, EBITDA पॉजिटिव
रेवेन्यू की तेज ग्रोथ के कारण Progcap ने घाटे को 46 करोड़ रुपये से घटाकर मात्र 6 करोड़ रुपये तक ला दिया। यानी 87% की कमी।
कंपनी ने FY25 में 75 करोड़ रुपये का पॉजिटिव EBITDA दर्ज किया, जिसमें EBITDA मार्जिन 27.99% रहा।
ROCE (Return on Capital Employed) 7.40% रहा, जो यह दिखाता है कि कंपनी अब पूंजी का बेहतर उपयोग कर रही है।
यूनिट इकॉनॉमिक्स भी बेहतर हुए हैं। FY25 में कंपनी ने 1 रुपये कमाने के लिए 1.04 रुपये खर्च किए, जबकि FY24 में यह आंकड़ा 1.46 रुपये था।
मार्च 2025 के अंत तक कंपनी के पास 207 करोड़ रुपये का कैश और बैंक बैलेंस था। वहीं, करंट एसेट्स बढ़कर 1,799 करोड़ रुपये तक पहुंच गए।
💰 निवेश और शेयरहोल्डिंग
Progcap ने अब तक लगभग 111 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई है। इसके प्रमुख निवेशकों में Tiger Global, Peak XV Partners, Creation Investments और GrowX Ventures शामिल हैं।
कंपनी की सह-संस्थापक Pallavi Shrivastava और Himanshu Chandra के पास संयुक्त रूप से 23.41% हिस्सेदारी है, जो संस्थापकों की मजबूत पकड़ को दर्शाता है।
🆚 प्रतियोगिता: FlexiLoans से तुलना
Progcap के प्रतिस्पर्धी FlexiLoans ने भी FY25 में अच्छा प्रदर्शन किया। FlexiLoans का रेवेन्यू 47% बढ़कर 385 करोड़ रुपये हो गया, जबकि मुनाफा 3 करोड़ रुपये से बढ़कर 4 करोड़ रुपये पहुंच गया।
हालांकि FlexiLoans मुनाफे में है, लेकिन Progcap की रेवेन्यू ग्रोथ और घाटे में तेज कमी इसे निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाती है।
🔄 बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव
Progcap ने 2022 तक एक capital-light marketplace मॉडल अपनाया था, जिसमें वह केवल बड़े लेंडर्स और रिटेलर्स के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाती थी। उस समय लोन का जोखिम बड़े फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस उठाते थे।
लेकिन अब कंपनी ने अपना खुद का NBFC (Non-Banking Financial Company) मॉडल अपनाया है, जिसके जरिए वह खुद भी लेंडिंग करती है।
इस बदलाव के कारण कंपनी की फंडिंग जरूरतें बढ़ी हैं, लेकिन इससे उसे ज्यादा कंट्रोल और बेहतर मार्जिन भी मिला है।
कंपनी ने “credit on tap” जैसे इनोवेटिव प्रोडक्ट लॉन्च किए हैं, जो छोटे शहरों और कस्बों के रिटेलर्स के लिए खास तौर पर डिजाइन किए गए हैं। यही इसकी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त (moat) बनती जा रही है।
📈 IPO की तैयारी?
बाजार में चर्चा है कि Progcap भविष्य में IPO की तैयारी कर सकती है। FY25 के मजबूत आंकड़े और FY26 में संभावित मुनाफे की उम्मीद इसे एक मजबूत IPO उम्मीदवार बना सकते हैं।
टियर-2 और टियर-3 शहरों के रिटेलर्स पर फोकस और टेक्नोलॉजी आधारित लेंडिंग मॉडल के चलते Progcap आने वाले वर्षों में fintech सेक्टर की प्रमुख कंपनियों में शामिल हो सकती है।
🔍 निष्कर्ष
Progcap ने FY25 में यह साबित कर दिया है कि सही रणनीति और disciplined execution के साथ fintech कंपनियां न सिर्फ तेजी से बढ़ सकती हैं, बल्कि घाटे को भी नियंत्रित कर सकती हैं।
लगभग दोगुना रेवेन्यू, 87% घटा घाटा और पॉजिटिव EBITDA — ये संकेत देते हैं कि कंपनी सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
अब नजर FY26 पर होगी — क्या Progcap पूरी तरह मुनाफे में आएगी और IPO की राह पकड़ेगी?
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