🔬 AGNIT Semiconductors ने जुटाए 2.6 मिलियन डॉलर,

AGNIT

भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर से एक महत्वपूर्ण फंडिंग अपडेट सामने आया है। बेंगलुरु स्थित डीप-टेक स्टार्टअप AGNIT Semiconductors ने अपने सीड फंडिंग राउंड के एक्सटेंशन में 2.6 मिलियन डॉलर (करीब 24 करोड़ रुपये) जुटाए हैं।

इस निवेश राउंड का नेतृत्व Shastra VC ने किया, जबकि मौजूदा निवेशकों 3one4 Capital और Zephyr Peacock ने भी इसमें भाग लिया।

नई फंडिंग के साथ AGNIT Semiconductors अब तक कुल 7 मिलियन डॉलर से अधिक की पूंजी जुटा चुका है, जो भारत के उभरते सेमीकंडक्टर स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।


💰 पहले भी जुटा चुकी है 3.5 मिलियन डॉलर

AGNIT Semiconductors ने इससे पहले 2024 में अपने सीड फंडिंग राउंड में 3.5 मिलियन डॉलर जुटाए थे।

नए निवेश के साथ कंपनी के पास अब रिसर्च, प्रोडक्शन और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट को तेज करने के लिए अतिरिक्त पूंजी उपलब्ध होगी।

भारत में सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री को मजबूत बनाने के लिए सरकार भी लगातार प्रयास कर रही है, ऐसे में इस तरह के डीप-टेक स्टार्टअप्स को मिलने वाला निवेश भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


🏭 प्रोडक्शन बढ़ाने की योजना

AGNIT Semiconductors ने बताया कि इस फंडिंग का इस्तेमाल मुख्य रूप से प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाएगा।

कंपनी का लक्ष्य अगले दो वर्षों में 1 लाख Gallium Nitride (GaN) कंपोनेंट्स का उत्पादन करने का है।

इसके अलावा स्टार्टअप टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर और हाई-एफिशिएंसी पावर सेमीकंडक्टर डिवाइस जैसे क्षेत्रों में भी अपने प्रोडक्ट्स का विस्तार करेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले वर्षों में GaN टेक्नोलॉजी की मांग तेजी से बढ़ सकती है, खासकर 5G नेटवर्क, सैटेलाइट कम्युनिकेशन और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में।


⚡ क्या है Gallium Nitride (GaN) टेक्नोलॉजी?

AGNIT Semiconductors का मुख्य फोकस Gallium Nitride (GaN) आधारित सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी पर है।

GaN एक उन्नत सेमीकंडक्टर मैटेरियल है जो पारंपरिक सिलिकॉन चिप्स की तुलना में कई मामलों में बेहतर प्रदर्शन देता है।

इसके प्रमुख फायदे हैं:

  • अधिक ऊर्जा दक्षता (High Efficiency)
  • ज्यादा तेज स्पीड
  • बेहतर पावर हैंडलिंग क्षमता
  • कम हीट लॉस

इसी वजह से GaN टेक्नोलॉजी का उपयोग अब टेलीकॉम, डिफेंस, इलेक्ट्रिक पावर सिस्टम और सैटेलाइट कम्युनिकेशन जैसे उन्नत क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है।


🧠 2019 में हुई थी कंपनी की शुरुआत

AGNIT Semiconductors की स्थापना वर्ष 2019 में कई अनुभवी टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों ने मिलकर की थी।

कंपनी के संस्थापकों में शामिल हैं:

  • Hareesh Chandrasekar
  • Digbijoy Neelim Nath
  • Madhusudan Atre
  • Mayank Shrivastava
  • Muralidharan Rangarajan
  • Shankar Kumar Selvaraja
  • Srinivasan Raghavan

यह टीम मिलकर GaN आधारित सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी के विकास और मैन्युफैक्चरिंग पर काम कर रही है।


📡 RF एप्लिकेशन के लिए बनाती है प्रोडक्ट

AGNIT Semiconductors का बिजनेस मॉडल मुख्य रूप से Gallium Nitride आधारित मैटेरियल और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स डिजाइन और मैन्युफैक्चर करना है।

कंपनी विशेष रूप से Radio Frequency (RF) एप्लिकेशन के लिए सेमीकंडक्टर सॉल्यूशंस विकसित करती है।

RF टेक्नोलॉजी का उपयोग कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में होता है, जैसे:

  • टेलीकॉम नेटवर्क
  • 5G इंफ्रास्ट्रक्चर
  • रडार सिस्टम
  • सैटेलाइट कम्युनिकेशन

इस वजह से AGNIT की टेक्नोलॉजी भविष्य के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


🚗 EV सेक्टर की योजना फिलहाल रोकी

कंपनी ने पहले इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर के लिए भी कंपोनेंट्स बनाने की योजना बनाई थी।

हालांकि, AGNIT Semiconductors ने फिलहाल उस दिशा में अपने प्रयासों को रोक दिया है।

कंपनी का कहना है कि वह अभी उन सेक्टर्स पर ध्यान केंद्रित करना चाहती है जहां GaN टेक्नोलॉजी की मांग ज्यादा मजबूत और तेजी से बढ़ रही है

इस रणनीति का उद्देश्य कंपनी के संसाधनों और रिसर्च को उन क्षेत्रों में लगाना है जहां ग्रोथ की संभावना अधिक है।


📈 भारत में बढ़ रहा सेमीकंडक्टर स्टार्टअप इकोसिस्टम

पिछले कुछ वर्षों में भारत में सेमीकंडक्टर सेक्टर को लेकर काफी हलचल देखी जा रही है।

सरकार की नीतियों और बढ़ते निवेश के कारण कई डीप-टेक स्टार्टअप्स उभर रहे हैं।

AGNIT Semiconductors जैसे स्टार्टअप्स न केवल नई टेक्नोलॉजी विकसित कर रहे हैं, बल्कि भारत को ग्लोबल सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में मजबूत स्थान दिलाने में भी योगदान दे सकते हैं।


🚀 आगे की रणनीति

नई फंडिंग के साथ AGNIT Semiconductors अब अपने प्रोडक्शन स्केल-अप, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट और नए मार्केट सेगमेंट्स में विस्तार पर ध्यान देगा।

यदि कंपनी अपनी योजनाओं के अनुसार अगले दो वर्षों में बड़े पैमाने पर GaN कंपोनेंट्स का उत्पादन शुरू कर देती है, तो यह भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हो सकती है।


निष्कर्ष:
AGNIT Semiconductors द्वारा जुटाई गई नई फंडिंग भारत के डीप-टेक और सेमीकंडक्टर स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए सकारात्मक संकेत है। GaN टेक्नोलॉजी पर फोकस और प्रोडक्शन बढ़ाने की योजना के साथ यह स्टार्टअप आने वाले समय में टेलीकॉम और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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🏨 FabHotels को IPO के लिए SEBI से मंजूरी, 250 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी

FabHotels

भारत के हॉस्पिटैलिटी और ट्रैवल सेक्टर से एक बड़ी खबर सामने आई है। बजट हॉस्पिटैलिटी चेन FabHotels को अपना इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) लॉन्च करने के लिए भारत के बाजार नियामक Securities and Exchange Board of India से मंजूरी मिल गई है।

बेंगलुरु स्थित यह कंपनी अब उन स्टार्टअप्स की सूची में शामिल हो गई है जिन्हें हाल ही में IPO के लिए नियामकीय हरी झंडी मिली है। इस सूची में Leap India, Turtlemint, Molbio Diagnostics और Infra.Market जैसे नाम भी शामिल हैं।

SEBI की मंजूरी मिलने के बाद FabHotels अब अपने IPO को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है, जिससे कंपनी पूंजी बाजार से बड़ी रकम जुटाने की योजना बना रही है।


📑 Travelstack Tech को मिला ऑब्जर्वेशन लेटर

SEBI की ताजा अपडेट के अनुसार, FabHotels की पेरेंट कंपनी Travelstack Tech को नियामक की ओर से ऑब्जर्वेशन लेटर मिल गया है।

ऑब्जर्वेशन लेटर मिलना IPO प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण होता है। इसके बाद कंपनी को पब्लिक इश्यू लॉन्च करने की औपचारिक अनुमति मिल जाती है।

FabHotels को सपोर्ट करने वाली कंपनी Goldman Sachs भी इस स्टार्टअप की शुरुआती निवेशकों में शामिल है। कंपनी ने अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) पिछले साल दिसंबर में SEBI के पास दाखिल किया था।


💰 IPO का स्ट्रक्चर: फ्रेश इश्यू और OFS

DRHP के अनुसार, FabHotels का IPO दो हिस्सों में होगा:

1️⃣ फ्रेश इश्यू:
कंपनी करीब 250 करोड़ रुपये के नए इक्विटी शेयर जारी करेगी

2️⃣ ऑफर फॉर सेल (OFS):
इसके अलावा, मौजूदा शेयरधारक 2.68 करोड़ तक इक्विटी शेयर बेचेंगे

OFS के जरिए कंपनी के शुरुआती निवेशक और प्रमोटर अपने कुछ शेयर बाजार में बेचेंगे।


👨‍💼 बड़े निवेशक बेचेंगे हिस्सेदारी

इस IPO में कई शुरुआती निवेशक अपने कुछ शेयर बेच सकते हैं। इनमें शामिल हैं:

  • Accel
  • Goldman Sachs
  • Qualcomm

इसके अलावा, एंजेल निवेशक Anupam Mittal भी अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेच सकते हैं।

कंपनी के सह-संस्थापक Vaibhav Aggarwal और Adarsh Manpuria भी OFS के जरिए अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेचने की योजना बना रहे हैं।


📊 जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कहां होगा

FabHotels अपने IPO के जरिए जुटाई गई नई पूंजी का इस्तेमाल कई रणनीतिक उद्देश्यों के लिए करेगा।

कंपनी के अनुसार, इस रकम का उपयोग मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्यों में किया जाएगा:

  • वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करना
  • कुछ कर्जों का भुगतान करना
  • जनरल कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए निवेश करना

यह निवेश कंपनी को अपने ऑपरेशन को और मजबूत करने तथा विस्तार योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।


🏦 IPO के मैनेजर्स

FabHotels के IPO को कई प्रमुख इन्वेस्टमेंट बैंक मैनेज करेंगे। इनमें शामिल हैं:

  • Motilal Oswal Financial Services
  • IIFL Capital Services
  • Nuvama Wealth Management

वहीं, IPO के लिए रजिस्ट्रार की भूमिका MUFG Intime India निभाएगा।


📈 कंपनी में किसकी कितनी हिस्सेदारी

DRHP के मुताबिक, FabHotels में कई बड़े निवेशकों की हिस्सेदारी है।

  • Accel India कंपनी का सबसे बड़ा बाहरी निवेशक है, जिसकी हिस्सेदारी करीब 21.75% है।
  • इसके बाद Qualcomm Asia के पास लगभग 8% हिस्सेदारी है।

वहीं कंपनी के सह-संस्थापक Vaibhav Aggarwal के पास लगभग 19.20% हिस्सेदारी है।


🏨 FabHotels का बिजनेस मॉडल

FabHotels की स्थापना वर्ष 2014 में Vaibhav Aggarwal और Adarsh Manpuria ने की थी।

कंपनी का फोकस भारत में बजट और मिड-सेगमेंट होटल्स को एक संगठित प्लेटफॉर्म पर लाने पर है।

FabHotels होटल मालिकों के साथ पार्टनरशिप करके उनके प्रॉपर्टीज को स्टैंडर्डाइज्ड सर्विस, ब्रांडिंग और टेक्नोलॉजी सपोर्ट प्रदान करता है।


🌍 भारत के कई बड़े शहरों में मौजूदगी

FabHotels ने पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विस्तार किया है।

वर्तमान में कंपनी के पास 1,300 से अधिक प्रॉपर्टीज हैं जो भारत के 50 से ज्यादा बड़े शहरों में फैली हुई हैं।

इन शहरों में शामिल हैं:

  • मुंबई
  • दिल्ली NCR
  • बेंगलुरु
  • गोवा

यह नेटवर्क कंपनी को भारत के सबसे बड़े बजट हॉस्पिटैलिटी प्लेटफॉर्म्स में से एक बनाता है।


📊 वित्तीय प्रदर्शन

कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो FabHotels ने मौजूदा वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है।

DRHP के अनुसार:

  • H1 FY26 में ऑपरेटिंग रेवेन्यू: लगभग 400 करोड़ रुपये
  • सितंबर 2025 तक छह महीनों में नेट प्रॉफिट: लगभग 32 करोड़ रुपये

यह आंकड़े बताते हैं कि कंपनी अपने बिजनेस मॉडल को धीरे-धीरे लाभदायक दिशा में ले जा रही है।


📉 भारतीय स्टार्टअप्स में बढ़ रहा IPO ट्रेंड

पिछले कुछ समय से कई भारतीय स्टार्टअप्स पब्लिक मार्केट में लिस्ट होने की तैयारी कर रहे हैं।

FabHotels का IPO भी इसी ट्रेंड का हिस्सा माना जा रहा है। निवेशकों का मानना है कि अगर कंपनी सफलतापूर्वक पब्लिक मार्केट में प्रवेश करती है, तो यह भारत के हॉस्पिटैलिटी और ट्रैवल टेक सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।


निष्कर्ष:
SEBI से मंजूरी मिलने के बाद FabHotels का IPO अब अगले चरण में प्रवेश कर चुका है। अगर यह इश्यू सफल रहता है, तो कंपनी को अपने विस्तार और बिजनेस ग्रोथ को तेज करने के लिए महत्वपूर्ण पूंजी मिल सकती है। साथ ही, यह डील भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में बढ़ते IPO ट्रेंड को भी और मजबूती दे सकती है। 🚀

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🚀 upGrad करेगा Unacademy का अधिग्रहण,

upGrad

भारत के तेजी से बढ़ते EdTech सेक्टर में एक बड़ा कॉरपोरेट डेवलपमेंट सामने आया है। ऑनलाइन हायर एजुकेशन प्लेटफॉर्म upGrad ने लोकप्रिय एडटेक कंपनी Unacademy का अधिग्रहण करने के लिए एक टर्म शीट साइन कर ली है। यह डील ऑल-स्टॉक ट्रांजैक्शन के रूप में संरचित होगी, यानी इसमें नकद के बजाय शेयरों का आदान-प्रदान होगा।

दोनों कंपनियों ने फिलहाल इस डील की वैल्यूएशन सार्वजनिक नहीं की है। कंपनियों का कहना है कि डील के पूरी तरह बंद होने और औपचारिक फाइलिंग के बाद ही इसकी वैल्यू सामने आएगी। यह संभावित अधिग्रहण भारतीय एडटेक इंडस्ट्री में एक बड़ा कंसोलिडेशन साबित हो सकता है।


📑 पहले भी हुई थी बातचीत, लेकिन नहीं बनी थी बात

दिलचस्प बात यह है कि इन दोनों कंपनियों के बीच अधिग्रहण को लेकर पहले भी चर्चा हुई थी। लेकिन जनवरी में वैल्यूएशन को लेकर मतभेद के कारण बातचीत टूट गई थी।

अब एक बार फिर दोनों कंपनियों ने आगे बढ़ते हुए टर्म शीट साइन कर दी है, जिससे संकेत मिलता है कि वे इस डील को अंतिम रूप देने के लिए गंभीर हैं। अगर यह अधिग्रहण पूरा होता है तो यह भारतीय एडटेक सेक्टर की सबसे चर्चित डील्स में से एक हो सकता है।


🗣️ Ronnie Screwvala ने दी जानकारी

Ronnie Screwvala, जो upGrad के को-फाउंडर हैं, उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस डील की घोषणा की।

उन्होंने बताया कि यह ट्रांजैक्शन शेयर स्वैप मॉडल पर आधारित होगा। इसके अलावा, इस समझौते में ब्रेक फी क्लॉज भी शामिल किया गया है। इसका मतलब है कि यदि किसी कारण से डील पूरी नहीं हो पाती, तो एक तयशुदा फीस लागू हो सकती है।

Ronnie Screwvala ने कहा:

“हमने Unacademy को ऑल-स्टॉक डील के जरिए अधिग्रहित करने के लिए टर्म शीट साइन की है। कंपनी के फाउंडर और CEO Gaurav Munjal Unacademy का नेतृत्व जारी रखेंगे और ऑनलाइन शिक्षा उत्पादों के विकास पर ध्यान देंगे।”


👨‍💼 Gaurav Munjal बने रहेंगे CEO

इस संभावित अधिग्रहण का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि Gaurav Munjal, जो Unacademy के सह-संस्थापक और CEO हैं, कंपनी का नेतृत्व जारी रखेंगे।

इसका मतलब है कि Unacademy अपनी ऑपरेशनल पहचान और प्रोडक्ट डेवलपमेंट रणनीति को बरकरार रखेगा। Munjal का मुख्य फोकस आगे भी ऑनलाइन लर्निंग प्रोडक्ट्स को मजबूत बनाने पर रहेगा।

Ronnie Screwvala के अनुसार, इस डील के बाद दोनों कंपनियों की ताकतें एक-दूसरे को पूरक बन सकती हैं।


🌐 upGrad के लर्निंग इकोसिस्टम को मिलेगा फायदा

upGrad का मानना है कि इस अधिग्रहण से उसका लर्निंग इकोसिस्टम और मजबूत हो सकता है

कंपनी का प्लेटफॉर्म पहले से ही कई सेगमेंट्स को कवर करता है, जिनमें शामिल हैं:

  • K12 एजुकेशन
  • कॉलेज स्तर की पढ़ाई
  • प्रोफेशनल अपस्किलिंग
  • लाइफ-लॉन्ग लर्निंग

यदि Unacademy की प्रोडक्ट क्षमताएं और upGrad का बड़ा एजुकेशन नेटवर्क एक साथ आते हैं, तो इससे कंपनी की ग्रोथ को नया momentum मिल सकता है।


🔧 Unacademy ने पिछले साल किया बड़ा restructuring

Unacademy के CEO Gaurav Munjal ने भी इस संभावित डील की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि कंपनी ने पिछले एक साल में अपने बिजनेस मॉडल में कई बदलाव किए हैं।

उन्होंने कहा कि कंपनी ने अपने कंपनी-ऑपरेटेड सेंटर्स को फ्रेंचाइज़ पार्टनर्स के साथ कंसोलिडेट किया है, ताकि वह अपने मुख्य फोकस — यानी ऑनलाइन एजुकेशन प्रोडक्ट्स — पर ज्यादा ध्यान दे सके।

यह restructuring कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम माना जा रहा है।


💰 कर्मचारियों के लिए ESOP बायबैक

Munjal ने यह भी बताया कि कंपनी ने हाल ही में 50 करोड़ रुपये का ESOP बायबैक पूरा किया है।

इस बायबैक में लगभग 40% पूर्व कर्मचारियों ने भाग लिया। इससे कर्मचारियों को अपने शेयरों को नकद में बदलने का अवसर मिला।

इसके अलावा, Unacademy के पास फिलहाल 100 मिलियन डॉलर से अधिक का कैश रिजर्व भी मौजूद है, जो कंपनी की वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाता है।


📊 FY25 में घटा राजस्व लेकिन नुकसान कम हुआ

वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो Unacademy ने वित्त वर्ष FY25 में कुछ चुनौतियों का सामना किया।

  • FY25 में कंपनी का राजस्व 16% घटकर 826.3 करोड़ रुपये रह गया
  • FY24 में यह 988 करोड़ रुपये था

हालांकि, कंपनी ने लागत नियंत्रण पर ध्यान देकर अपने नुकसान में सुधार किया।

  • EBITDA लॉस 38% घटकर 305 करोड़ रुपये हो गया
  • नेट लॉस 31% घटकर 436 करोड़ रुपये रह गया

यह संकेत देता है कि कंपनी अपने ऑपरेशन को अधिक कुशल बनाने की दिशा में काम कर रही है।


📈 भारतीय EdTech सेक्टर में बढ़ेगा कंसोलिडेशन

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर upGrad और Unacademy के बीच यह अधिग्रहण पूरा हो जाता है, तो यह भारतीय EdTech इंडस्ट्री में कंसोलिडेशन का बड़ा उदाहरण बन सकता है।

पिछले कुछ वर्षों में EdTech सेक्टर में तेजी से ग्रोथ हुई, लेकिन हाल के समय में कई कंपनियों ने लागत नियंत्रण, restructuring और strategic partnerships पर जोर दिया है।

ऐसे माहौल में यह डील दोनों कंपनियों के लिए लंबी अवधि की ग्रोथ और स्थिरता का रास्ता खोल सकती है।


निष्कर्ष:
upGrad द्वारा Unacademy के संभावित अधिग्रहण की यह डील भारतीय EdTech सेक्टर में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। यदि यह ट्रांजैक्शन सफलतापूर्वक पूरा हो जाता है, तो दोनों कंपनियां अपनी तकनीकी क्षमता, प्रोडक्ट इनोवेशन और बड़े लर्निंग इकोसिस्टम के जरिए शिक्षा क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं। 🚀

Read more :🌱 क्लाइमेट फिनटेक NBFC Ecofy ने जुटाए ₹380 करोड़,

🌱 क्लाइमेट फिनटेक NBFC Ecofy ने जुटाए ₹380 करोड़,

Ecofy

भारत में क्लाइमेट फाइनेंसिंग और ग्रीन एनर्जी सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। इसी कड़ी में क्लाइमेट समाधान पर फोकस करने वाली नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी Ecofy ने अपने Series B फंडिंग राउंड में ₹380.5 करोड़ (करीब $42 मिलियन) जुटाए हैं।

इस फंडिंग राउंड को British International Investment और Finnfund ने को-लीड किया। वहीं कंपनी के मौजूदा निवेशकों Eversource Capital और FMO ने भी इस राउंड में भाग लिया।

नई पूंजी के साथ Ecofy भारत में ग्रीन फाइनेंसिंग को तेजी से बढ़ाने की योजना बना रही है, खासकर रूफटॉप सोलर, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और SME फाइनेंसिंग जैसे क्षेत्रों में।


💰 पहले भी जुटा चुकी है कई दौर की फंडिंग

यह पहली बार नहीं है जब Ecofy ने निवेश हासिल किया है।

कंपनी ने जनवरी 2024 में ₹90 करोड़ की इक्विटी फंडिंग जुटाई थी, जो FMO से प्राप्त हुई थी।

इसके बाद मार्च 2025 में कंपनी ने डेनमार्क के निवेश फंड Investment Fund for Developing Countries (IFU) से लगभग ₹110 करोड़ का लॉन्ग-टर्म लोन (डेट फाइनेंसिंग) भी हासिल किया।

इन निवेशों के बाद अब Series B फंडिंग के जरिए कंपनी की कुल पूंजी और मजबूत हो गई है।


⚡ ग्रीन सेक्टर में विस्तार की तैयारी

कंपनी के अनुसार, नई फंडिंग का उपयोग कई प्रमुख क्षेत्रों में विस्तार के लिए किया जाएगा।

इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट्स
  • इलेक्ट्रिक व्हीकल फाइनेंसिंग
  • छोटे और मध्यम उद्यमों (SME) को ग्रीन लोन

Ecofy का कहना है कि यह विस्तार कंपनी की मजबूत बैलेंस शीट, अनुभवी लीडरशिप, मजबूत गवर्नेंस सिस्टम और हाई-परफॉर्मेंस टीम के दम पर किया जाएगा।


👩‍💼 2022 में हुई थी कंपनी की शुरुआत

Ecofy की स्थापना साल 2022 में Rajashree Nambiar और Govind Sankaranarayanan ने की थी।

कंपनी का उद्देश्य ऐसे प्रोजेक्ट्स को फाइनेंस करना है जो पर्यावरण के लिए बेहतर और टिकाऊ हों।

Ecofy कई तरह की क्लाइमेट-फ्रेंडली पहलों को फाइनेंस करती है, जैसे:

  • इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV)
  • रूफटॉप सोलर सिस्टम
  • एनर्जी-एफिशिएंट मशीनरी
  • एनर्जी स्टोरेज सिस्टम
  • ई-मोबिलिटी
  • वेस्ट रीसाइक्लिंग
  • वाटर मैनेजमेंट

इन क्षेत्रों में फाइनेंसिंग के जरिए कंपनी सस्टेनेबल और लो-कार्बन इकॉनमी को बढ़ावा देना चाहती है।


🌍 नेट-जीरो कार्बन लक्ष्य की ओर

Ecofy का लक्ष्य केवल फाइनेंसिंग करना ही नहीं है, बल्कि नेट-जीरो कार्बन दुनिया की ओर बदलाव को तेज करना भी है।

कंपनी उन व्यक्तियों और छोटे व्यवसायों के साथ काम करती है जो:

  • अपनी कार्बन फुटप्रिंट कम करना चाहते हैं
  • पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों को अपनाना चाहते हैं।

इस तरह Ecofy खुद को एक ग्रीन फाइनेंसिंग कैटेलिस्ट के रूप में स्थापित करना चाहती है।


🤝 बैंकों के साथ साझेदारी पर फोकस

आने वाले समय में कंपनी अपनी ग्रोथ के अगले चरण में प्रवेश करने की योजना बना रही है।

इसके तहत Ecofy:

  • बैंकों के साथ साझेदारी करेगी
  • वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर ग्रीन रिटेल लेंडिंग को बढ़ाएगी।

इस मॉडल के जरिए कंपनी ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों तक ग्रीन फाइनेंसिंग पहुंचाना चाहती है।


📈 FY25 में रेवेन्यू में बड़ी छलांग

वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो Ecofy ने FY25 में शानदार रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है।

कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू:

  • FY24: ₹19.19 करोड़
  • FY25: ₹93.3 करोड़

इस तरह कंपनी की आय में लगभग 4.8 गुना वृद्धि हुई है।

यह वृद्धि दिखाती है कि भारत में ग्रीन फाइनेंसिंग और क्लाइमेट टेक प्रोजेक्ट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है।


📉 घाटे में भी बढ़ोतरी

हालांकि रेवेन्यू में तेज बढ़ोतरी हुई है, लेकिन कंपनी का घाटा भी थोड़ा बढ़ा है।

  • FY25 में घाटा: ₹42.28 करोड़
  • यह पिछले साल की तुलना में 15.6% अधिक है।

स्टार्टअप के शुरुआती चरण में विस्तार और नए प्रोजेक्ट्स में निवेश के कारण घाटे में वृद्धि आम मानी जाती है।


👥 1.2 लाख से ज्यादा ग्राहकों तक पहुंच

Ecofy का कहना है कि पिछले तीन वर्षों में उसने:

  • 1,20,000 से अधिक ग्राहकों को सेवा दी है।

इन ग्राहकों में शामिल हैं:

  • EV खरीदार
  • सोलर सिस्टम लगाने वाले घर और व्यवसाय
  • अन्य सस्टेनेबल एसेट उपयोगकर्ता।

💼 AUM ₹1,400 करोड़ के पार

कंपनी का Assets Under Management (AUM) भी तेजी से बढ़ा है।

मार्च 2025 तक Ecofy का AUM:

  • ₹1,400 करोड़ से अधिक हो चुका है।

इसके अलावा कंपनी की कुछ प्रमुख विशेषताएं हैं:

  • 100% रिटेल लोन बुक
  • 100 से अधिक OEMs के साथ साझेदारी
  • 23 से ज्यादा बैंक और वित्तीय संस्थानों के साथ टाई-अप

नई फंडिंग के बाद कंपनी का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो लगभग 50% तक पहुंच गया है, जो इसे वित्तीय रूप से और मजबूत बनाता है।


📊 निष्कर्ष

कुल मिलाकर Ecofy का यह नया Series B फंडिंग राउंड भारत में ग्रीन फाइनेंसिंग सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है।

₹380 करोड़ की नई पूंजी के साथ कंपनी अब इलेक्ट्रिक व्हीकल, रूफटॉप सोलर और सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी से जुड़े प्रोजेक्ट्स को तेजी से फाइनेंस करने की योजना बना रही है।

भारत सरकार के क्लाइमेट लक्ष्यों और नेट-जीरो मिशन को देखते हुए आने वाले वर्षों में ग्रीन फाइनेंसिंग की मांग और तेजी से बढ़ने की संभावना है।

ऐसे में Ecofy जैसे प्लेटफॉर्म देश में सस्टेनेबल फाइनेंस और क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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🚚 Logistics SaaS स्टार्टअप WheelsEye की FY25 रिपोर्ट

WheelsEye

भारत के लॉजिस्टिक्स टेक सेक्टर से जुड़ी कंपनी WheelsEye ने वित्त वर्ष FY25 के लिए अपने वित्तीय नतीजे जारी किए हैं। कंपनी ने इस दौरान रेवेन्यू में 17% की वृद्धि दर्ज की है, लेकिन इसके बावजूद कंपनी का घाटा लगभग स्थिर ही रहा।

कंपनी के वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, जो Registrar of Companies (RoC) से प्राप्त हुए हैं, WheelsEye का ऑपरेटिंग रेवेन्यू पिछले वित्त वर्ष में बढ़कर ₹243.4 करोड़ हो गया। इससे पहले FY24 में कंपनी का रेवेन्यू ₹208.8 करोड़ था।

हालांकि FY22 के बाद से कंपनी की ग्रोथ में थोड़ी धीमी गति देखने को मिल रही है।


📦 क्या करती है WheelsEye?

साल 2017 में स्थापित WheelsEye एक Logistics SaaS (Software-as-a-Service) कंपनी है, जो ट्रक ऑपरेटरों और फ्लीट मालिकों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराती है।

कंपनी का ऐप आधारित प्लेटफॉर्म ट्रक बुकिंग और फ्लीट मैनेजमेंट से जुड़ी कई सेवाएं प्रदान करता है, जिनमें शामिल हैं:

  • ट्रक बुकिंग प्लेटफॉर्म
  • फ्लीट मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर
  • GPS ट्रैकिंग डिवाइस
  • FASTag सॉल्यूशन

इन सेवाओं का उद्देश्य ट्रक मालिकों और लॉजिस्टिक्स कंपनियों को डिजिटल टूल्स के जरिए ऑपरेशन को आसान और अधिक प्रभावी बनाना है।


💻 सॉफ्टवेयर सब्सक्रिप्शन से सबसे ज्यादा कमाई

WheelsEye के रेवेन्यू का सबसे बड़ा हिस्सा इसके सॉफ्टवेयर सब्सक्रिप्शन सर्विसेज से आता है।

FY25 में इस सेगमेंट से कंपनी की आय:

  • ₹152.7 करोड़ रही
  • जो पिछले साल की तुलना में 20% अधिक है।

कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू में इस सेगमेंट की हिस्सेदारी लगभग 62% रही।

यह दिखाता है कि WheelsEye का बिजनेस मॉडल तेजी से सॉफ्टवेयर आधारित सेवाओं की ओर बढ़ रहा है।


📡 GPS डिवाइस और सॉल्यूशन से भी मजबूत ग्रोथ

कंपनी अपने ग्राहकों को GPS हार्डवेयर डिवाइस और लाइसेंस्ड सॉफ्टवेयर के साथ बंडल्ड सॉल्यूशन भी प्रदान करती है।

इस सेगमेंट में FY25 के दौरान:

  • कंपनी की आय बढ़कर ₹62 करोड़ हो गई
  • जो साल-दर-साल आधार पर 32% की वृद्धि दर्शाती है।

यह वृद्धि दिखाती है कि भारत में फ्लीट ऑपरेटर अब टेक्नोलॉजी आधारित ट्रैकिंग और नेविगेशन सिस्टम को तेजी से अपना रहे हैं।


💳 FASTag और अन्य स्रोतों से आय

WheelsEye की बाकी आय कई अन्य स्रोतों से भी आती है, जिनमें शामिल हैं:

  • FASTag बिक्री
  • कमीशन आय
  • अन्य ऑपरेटिंग सेवाएं

इसके अलावा कंपनी को फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज और सब-कॉन्ट्रैक्टिंग इनकम से भी अच्छी कमाई हुई।

FY25 में इन स्रोतों से कंपनी को लगभग ₹27.6 करोड़ की आय हुई, जिसके बाद कंपनी की कुल आय बढ़कर ₹271 करोड़ हो गई।


💰 खर्चों में भी बढ़ोतरी

रेवेन्यू बढ़ने के साथ-साथ कंपनी के खर्चों में भी इजाफा हुआ है।

कंपनी का सबसे बड़ा खर्च एम्प्लॉयी बेनिफिट एक्सपेंस है।

FY25 में:

  • कर्मचारी खर्च ₹141.8 करोड़ रहा
  • जो पिछले वर्ष के लगभग समान स्तर पर बना रहा।

📡 हार्डवेयर लागत में बड़ी बढ़ोतरी

GPS डिवाइस की लागत यानी मैटेरियल कॉस्ट में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई।

  • FY25 में यह खर्च बढ़कर ₹45.7 करोड़ हो गया
  • जो साल-दर-साल आधार पर 68% की वृद्धि है।

इसके अलावा:

  • IT खर्च: ₹12.4 करोड़ (7% की कमी)
  • सुपरवाइजर हायरिंग लागत: ₹17.3 करोड़

रही।


📊 अन्य खर्च और कुल खर्च

कंपनी ने FY25 में लगभग ₹57 करोड़ के अन्य विविध खर्च भी दर्ज किए।

इसके अलावा:

  • कमीशन
  • यात्रा खर्च
  • विज्ञापन
  • अन्य ऑपरेटिंग खर्च

भी शामिल हैं।

इन सभी को मिलाकर WheelsEye का कुल खर्च बढ़कर ₹317.8 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 10% अधिक है।


📉 घाटा लगभग स्थिर

रेवेन्यू में वृद्धि के बावजूद WheelsEye का कुल घाटा लगभग समान ही रहा।

FY25 में कंपनी का शुद्ध घाटा लगभग ₹47 करोड़ रहा।

हालांकि कंपनी की ऑपरेटिंग आय में बढ़ोतरी खर्चों से ज्यादा थी, लेकिन अन्य आय में गिरावट के कारण घाटा कम नहीं हो पाया।


📈 कुछ वित्तीय संकेतकों में सुधार

हालांकि घाटा स्थिर रहा, लेकिन कुछ प्रमुख वित्तीय संकेतकों में सुधार देखा गया।

  • EBITDA मार्जिन: -25.47% (सुधार)
  • ROCE: -84.31% (कमजोर स्थिति)

इसके अलावा कंपनी की कॉस्ट एफिशिएंसी भी बेहतर हुई है।

FY25 में WheelsEye को ₹1 कमाने के लिए ₹1.31 खर्च करने पड़े, जो पिछले वर्षों के मुकाबले थोड़ा बेहतर प्रदर्शन माना जा सकता है।


🏦 कंपनी की वित्तीय स्थिति

मार्च 2025 तक WheelsEye के पास:

  • ₹208.3 करोड़ के करंट एसेट्स थे
  • जिनमें से ₹10.7 करोड़ कैश और बैंक बैलेंस के रूप में मौजूद थे।

यह कंपनी को ऑपरेशन जारी रखने और विस्तार के लिए एक स्थिर वित्तीय आधार प्रदान करता है।


🌎 पैरेंट कंपनी का सपोर्ट

WheelsEye की मूल कंपनी WheelsEye Technology Inc. अमेरिका में स्थित है।

यह कंपनी भारत में संचालित WheelsEye इकाई में 99.9% हिस्सेदारी रखती है।

अंतरराष्ट्रीय सपोर्ट के कारण कंपनी को टेक्नोलॉजी और निवेश के मामले में अतिरिक्त मजबूती मिलती है।


🔎 निष्कर्ष

कुल मिलाकर WheelsEye ने FY25 में स्थिर लेकिन सकारात्मक ग्रोथ दर्ज की है।

कंपनी का रेवेन्यू बढ़ा है और सॉफ्टवेयर सब्सक्रिप्शन मॉडल मजबूत होता दिख रहा है। हालांकि खर्चों और अन्य आय में गिरावट के कारण घाटा अभी भी बना हुआ है।

अगर कंपनी आने वाले समय में अपने खर्चों को बेहतर तरीके से नियंत्रित करती है और सॉफ्टवेयर आधारित सेवाओं को और बढ़ाती है, तो लॉजिस्टिक्स टेक सेक्टर में इसकी स्थिति और मजबूत हो सकती है।

भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल लॉजिस्टिक्स और फ्लीट मैनेजमेंट मार्केट को देखते हुए WheelsEye के लिए आने वाले वर्षों में अच्छे अवसर मौजूद हैं।

Read more :🎓PhysicsWallah के को-फाउंडर Prateek Boob लगाएंगे ₹25 करोड़

🎓PhysicsWallah के को-फाउंडर Prateek Boob लगाएंगे ₹25 करोड़

PhysicsWallah

भारत के एडटेक सेक्टर से एक अहम खबर सामने आई है। टेक एजुकेशन प्लेटफॉर्म Newton School अपने Series B फंडिंग राउंड के एक्सटेंशन के तहत नया निवेश जुटाने जा रहा है। इस बार कंपनी में निवेश करने वाले प्रमुख नामों में Prateek Boob, जो एडटेक यूनिकॉर्न PhysicsWallah के को-फाउंडर हैं, शामिल हैं।

गुरुग्राम स्थित इस कंपनी के लिए यह निवेश काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि लगभग चार साल बाद Newton School को नया फंडिंग निवेश मिलने जा रहा है।


💰 ₹25 करोड़ जुटाने की तैयारी

नियामकीय फाइलिंग के अनुसार, Newton School के बोर्ड ने एक विशेष प्रस्ताव पारित किया है, जिसके तहत कंपनी 72,738 Series B1 प्रेफरेंस शेयर जारी करेगी।

इन शेयरों की इश्यू प्राइस ₹3,437 प्रति शेयर तय की गई है। इसके जरिए कंपनी लगभग ₹25 करोड़ की नई पूंजी जुटाएगी।

रिपोर्ट्स के अनुसार इस निवेश के बाद Prateek Boob की कंपनी में लगभग 2.37% हिस्सेदारी हो जाएगी।

हालांकि इस निवेश पर Newton School और Prateek Boob की ओर से अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


🏫 क्या करता है Newton School?

साल 2019 में स्थापित Newton School खुद को एक मॉडर्न “Neo-University” के रूप में पेश करता है।

यह प्लेटफॉर्म छात्रों को टेक्नोलॉजी आधारित शिक्षा प्रदान करता है, जिसमें मुख्य फोकस इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुसार स्किल्स सिखाने पर होता है।

Newton School के प्रमुख प्रोग्राम्स में शामिल हैं:

  • B.Tech in Computer Science
  • Artificial Intelligence (AI) आधारित टेक कोर्स
  • इंडस्ट्री-लेड टेक ट्रेनिंग प्रोग्राम

इन प्रोग्राम्स का उद्देश्य छात्रों को केवल थ्योरी नहीं बल्कि हैंड्स-ऑन प्रैक्टिकल स्किल्स देना है, ताकि वे पढ़ाई पूरी करने के बाद सीधे जॉब के लिए तैयार हो सकें।


📊 कंपनी का वैल्यूएशन

Entrackr के अनुमान के अनुसार इस नए निवेश के बाद Newton School का वैल्यूएशन लगभग ₹1,055 करोड़ (करीब $117 मिलियन) तक पहुंच सकता है।

यह वैल्यूएशन दिखाता है कि कंपनी अभी भी एडटेक सेक्टर में मजबूत संभावनाओं वाली कंपनियों में शामिल है।


💵 अब तक कितनी फंडिंग जुटाई?

अब तक Newton School कुल मिलाकर लगभग $32 मिलियन की फंडिंग जुटा चुका है।

इसमें शामिल हैं:

  • $25 मिलियन Series B राउंड – अप्रैल 2022
  • $5 मिलियन Series A फंडिंग
  • $1.1 मिलियन सीड फंडिंग

Series B राउंड का नेतृत्व Steadview Capital ने किया था। उस समय कंपनी का वैल्यूएशन तेजी से बढ़ा था और लगभग सात गुना उछाल देखा गया था।


📈 FY25 में रेवेन्यू में 61% की ग्रोथ

वित्त वर्ष 2025 (FY25) में Newton School ने अपने बिजनेस में अच्छी ग्रोथ दर्ज की।

कंपनी का रेवेन्यू:

  • FY24: ₹24 करोड़
  • FY25: ₹38.86 करोड़

यानी साल-दर-साल आधार पर लगभग 61% की वृद्धि दर्ज की गई।

यह ग्रोथ दिखाती है कि टेक्नोलॉजी और स्किल-बेस्ड एजुकेशन की मांग भारत में तेजी से बढ़ रही है।


📉 घाटे में भी आई कमी

रेवेन्यू बढ़ने के साथ-साथ कंपनी अपने घाटे को कम करने में भी सफल रही।

  • FY24 में घाटा: ₹49.7 करोड़ (लगभग)
  • FY25 में घाटा: ₹29.66 करोड़

इस तरह कंपनी ने अपने घाटे में लगभग 40% की कमी दर्ज की।

यह संकेत देता है कि कंपनी धीरे-धीरे बेहतर यूनिट इकॉनॉमिक्स की ओर बढ़ रही है।


🤝 PhysicsWallah के साथ बढ़ता कनेक्शन

हालांकि Prateek Boob का यह निवेश व्यक्तिगत क्षमता (personal capacity) में है, लेकिन इसका समय काफी दिलचस्प है।

दरअसल PhysicsWallah भी इस समय स्कूल एजुकेशन और ऑफलाइन एजुकेशन सेगमेंट में तेजी से विस्तार कर रहा है।

हाल ही में PhysicsWallah ने:

  • Tender Heart School के एसेट्स का अधिग्रहण किया
  • अपने Vidyapeeth School Program में लगभग $10 मिलियन का निवेश किया

यह प्रोग्राम फिलहाल 39 से ज्यादा स्कूलों में संचालित हो रहा है।

इससे साफ है कि भारत में एडटेक कंपनियां अब केवल ऑनलाइन कोर्स तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि हाइब्रिड एजुकेशन मॉडल की ओर बढ़ रही हैं।


🔎 एडटेक सेक्टर के लिए क्या संकेत?

पिछले कुछ वर्षों में एडटेक सेक्टर में निवेश की गति थोड़ी धीमी हुई थी। लेकिन Newton School में यह नया निवेश दिखाता है कि स्किल-बेस्ड और टेक एजुकेशन प्लेटफॉर्म्स में अभी भी निवेशकों की रुचि बनी हुई है।

विशेष रूप से ऐसे प्लेटफॉर्म जो:

  • इंडस्ट्री-रेडी स्किल्स सिखाते हैं
  • जॉब-ओरिएंटेड कोर्स प्रदान करते हैं
  • और ग्लोबल टेक एजुकेशन पर फोकस करते हैं

उनमें निवेश के अवसर अभी भी मजबूत माने जा रहे हैं।


🧾 निष्कर्ष

कुल मिलाकर Newton School के लिए यह नया निवेश एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

एक ओर जहां कंपनी का रेवेन्यू तेजी से बढ़ रहा है और घाटा कम हो रहा है, वहीं दूसरी ओर PhysicsWallah के को-फाउंडर Prateek Boob का निवेश कंपनी के लिए विश्वास का संकेत माना जा रहा है।

अगर Newton School अपने टेक-एजुकेशन मॉडल और इंडस्ट्री पार्टनरशिप्स को और मजबूत करता है, तो आने वाले वर्षों में यह भारत के प्रमुख टेक एजुकेशन प्लेटफॉर्म्स में से एक बन सकता है।

Read more :📱 फरवरी में UPI पर PhonePe का दबदबा कायम,

📱 फरवरी में UPI पर PhonePe का दबदबा कायम,

UPI

भारत में डिजिटल पेमेंट का सबसे बड़ा माध्यम बन चुके Unified Payments Interface (UPI) पर फरवरी महीने में भी प्रमुख थर्ड-पार्टी ऐप्स का दबदबा बना रहा। इस दौरान PhonePe ने एक बार फिर सबसे ज्यादा ट्रांजैक्शन प्रोसेस कर अपना नंबर-वन स्थान बरकरार रखा।

आंकड़ों के अनुसार Google Pay दूसरे स्थान पर रहा, जबकि Paytm तीसरे स्थान पर बना रहा। यह जानकारी National Payments Corporation of India द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों से सामने आई है।

डिजिटल पेमेंट के लगातार बढ़ते उपयोग के बीच UPI प्लेटफॉर्म पर हर महीने अरबों ट्रांजैक्शन दर्ज किए जा रहे हैं, जिससे भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट मार्केट्स में से एक बन चुका है।


🏆 PhonePe बना सबसे बड़ा UPI ऐप

फरवरी में PhonePe ने कुल 9.28 अरब (billion) ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए। इन ट्रांजैक्शनों का कुल मूल्य लगभग ₹13,10,392.95 करोड़ रहा।

इस प्रदर्शन के साथ PhonePe ने पूरे UPI इकोसिस्टम में:

  • 45.5% ट्रांजैक्शन वॉल्यूम शेयर
  • 48.8% ट्रांजैक्शन वैल्यू शेयर

हासिल किया।

PhonePe को वैश्विक रिटेल कंपनी Walmart का समर्थन प्राप्त है और यह भारत के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म्स में से एक बन चुका है।

किराना दुकानों से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग और बिल पेमेंट तक, PhonePe का इस्तेमाल देशभर में तेजी से बढ़ रहा है।


🥈 Google Pay दूसरे स्थान पर

UPI प्लेटफॉर्म पर दूसरा सबसे बड़ा ऐप Google Pay रहा।

फरवरी के दौरान Google Pay ने:

  • 6.76 अरब ट्रांजैक्शन
  • कुल ₹9,03,051.60 करोड़ का भुगतान

प्रोसेस किया।

इस तरह प्लेटफॉर्म ने:

  • 33.2% वॉल्यूम शेयर
  • 33.6% वैल्यू शेयर

हासिल किया।

Google Pay लंबे समय से भारत में PhonePe का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी रहा है। दोनों प्लेटफॉर्म्स के बीच UPI बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है।


🥉 Paytm तीसरे स्थान पर कायम

तीसरे स्थान पर Paytm रहा।

फरवरी में Paytm ने:

  • 1.59 अरब ट्रांजैक्शन
  • कुल ₹1,74,128.86 करोड़ का भुगतान

प्रोसेस किया।

इस प्रदर्शन के साथ Paytm का:

  • 7.8% ट्रांजैक्शन वॉल्यूम शेयर
  • 6.5% वैल्यू शेयर

रहा।

हालांकि PhonePe और Google Pay के मुकाबले Paytm का बाजार हिस्सा काफी कम है, लेकिन फिर भी यह भारत के प्रमुख डिजिटल पेमेंट ऐप्स में शामिल है।


📊 जनवरी के मुकाबले थोड़ा कम रहा ट्रांजैक्शन

फरवरी में ट्रांजैक्शन संख्या जनवरी के मुकाबले थोड़ी कम रही। इसकी मुख्य वजह फरवरी महीने में दिनों की संख्या कम होना है।

जनवरी में:

  • PhonePe ने 9.91 अरब ट्रांजैक्शन
  • Google Pay ने 7.23 अरब ट्रांजैक्शन
  • Paytm ने 1.66 अरब ट्रांजैक्शन

प्रोसेस किए थे।

जनवरी में पूरे UPI नेटवर्क पर कुल 21.7 अरब ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए थे।


📱 अन्य फिनटेक ऐप्स की स्थिति

UPI इकोसिस्टम में कई अन्य फिनटेक ऐप्स भी तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं।

चौथे स्थान पर Navi रहा, जिसने:

  • 650.28 मिलियन ट्रांजैक्शन
  • कुल ₹36,563 करोड़

प्रोसेस किए।

इसके बाद पांचवें स्थान पर super.money रहा, जिसने:

  • 289.32 मिलियन ट्रांजैक्शन
  • कुल ₹12,314.08 करोड़

का भुगतान प्रोसेस किया।


🇮🇳 सरकारी ऐप BHIM और अन्य प्लेटफॉर्म

सरकार समर्थित ऐप BHIM भी इस सूची में शामिल है।

फरवरी में BHIM ऐप ने:

  • 175.93 मिलियन ट्रांजैक्शन
  • कुल ₹21,263.92 करोड़

का भुगतान प्रोसेस किया।

इसके अलावा FamApp ने:

  • 149.06 मिलियन ट्रांजैक्शन
  • कुल ₹1,898.62 करोड़

का भुगतान प्रोसेस किया।


💳 CRED में बड़े टिकट साइज के ट्रांजैक्शन

सूची में आठवें स्थान पर CRED रहा।

इस प्लेटफॉर्म ने:

  • 145.98 मिलियन ट्रांजैक्शन

प्रोसेस किए, लेकिन इन ट्रांजैक्शनों की कुल वैल्यू ₹54,045.92 करोड़ रही।

यह दर्शाता है कि CRED पर औसत ट्रांजैक्शन साइज अन्य ऐप्स की तुलना में काफी बड़ा है, क्योंकि इसका उपयोग अक्सर क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान जैसे बड़े भुगतान के लिए किया जाता है।


🏦 बैंक ऐप्स और WhatsApp Pay

बैंक द्वारा संचालित प्लेटफॉर्म्स में Axis Bank के ऐप्स ने:

  • 132.11 मिलियन ट्रांजैक्शन
  • कुल ₹12,157.93 करोड़

का भुगतान प्रोसेस किया।

वहीं WhatsApp Pay ने टॉप-10 सूची में जगह बनाते हुए:

  • 112.89 मिलियन ट्रांजैक्शन
  • कुल ₹8,557.08 करोड़

का भुगतान प्रोसेस किया।


📈 पूरे UPI इकोसिस्टम का प्रदर्शन

फरवरी में पूरे UPI नेटवर्क पर कुल:

  • 20,394.18 मिलियन (लगभग 20.39 अरब) ट्रांजैक्शन
  • कुल ₹26,84,229.29 करोड़

मूल्य के भुगतान दर्ज किए गए।

हालांकि कुल ट्रांजैक्शन जनवरी के मुकाबले थोड़ा कम रहे, लेकिन औसत दैनिक ट्रांजैक्शन बढ़कर 728 मिलियन हो गए।

जनवरी में यह आंकड़ा लगभग 700 मिलियन था।


🔎 निष्कर्ष

UPI भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है और हर महीने नए रिकॉर्ड बना रहा है।

इस इकोसिस्टम में PhonePe और Google Pay का दबदबा फिलहाल साफ दिखाई देता है, जबकि Paytm तीसरे स्थान पर बना हुआ है।

इसके साथ ही Navi, CRED और WhatsApp Pay जैसे नए प्लेटफॉर्म भी तेजी से अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

डिजिटल पेमेंट के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए आने वाले वर्षों में UPI ट्रांजैक्शन की संख्या और भी तेजी से बढ़ने की संभावना है।

Read more :🐟 Captain Fresh को मिला ₹120 करोड़ का नया निवेश,

🐟 Captain Fresh को मिला ₹120 करोड़ का नया निवेश,

Captain Fresh

ग्लोबल पैकेज्ड सीफूड सप्लाई चेन प्लेटफॉर्म Captain Fresh एक बार फिर चर्चा में है। कंपनी ने हाल ही में अपने IPO (Initial Public Offering) से जुड़े ड्राफ्ट पेपर्स वापस लेने के बाद अब एक नया ₹120 करोड़ (लगभग $13.3 मिलियन) का इक्विटी फंडिंग राउंड जुटाने की तैयारी की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस निवेश राउंड का नेतृत्व खुद कंपनी के फाउंडर और सीईओ Utham Gowda कर रहे हैं। इस निवेश का मुख्य उद्देश्य कंपनी में प्रमोटर की हिस्सेदारी बढ़ाना है।


💰 फाउंडर खुद करेंगे सबसे बड़ा निवेश

सूत्रों के अनुसार इस नए फंडिंग राउंड में लगभग ₹100 करोड़ का निवेश Utham Gowda खुद करेंगे। यह निवेश उनकी निजी इकाई Tigerlily Properties के माध्यम से किया जाएगा।

फिलहाल Captain Fresh में Utham Gowda की हिस्सेदारी करीब 17% है। इस निवेश के बाद उनकी हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 19% तक पहुंच सकती है।

इस राउंड में बाकी पूंजी अन्य निवेशकों द्वारा दी जाएगी, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • Avanti Feeds
  • Veer Growth Fund
  • और कुछ अन्य निवेशक

हालांकि इन निवेशकों के निवेश की सटीक राशि सार्वजनिक नहीं की गई है।


🌍 हाल ही में मिला ₹290 करोड़ का सस्टेनेबिलिटी फाइनेंस

इस नए निवेश से पहले Captain Fresh ने हाल ही में एक और बड़ी फंडिंग हासिल की थी। कंपनी को ₹290 करोड़ का sustainability-linked financing मिला था।

यह निवेश वैश्विक इम्पैक्ट निवेशक Blue Earth Capital की ओर से किया गया था।

इस तरह पिछले कुछ समय में कंपनी ने कई बड़े निवेश हासिल किए हैं, जिससे उसके विस्तार की योजनाओं को मजबूती मिली है।


🏢 क्या करता है Captain Fresh?

साल 2020 में स्थापित Captain Fresh एक टेक-ड्रिवन B2B सप्लाई चेन प्लेटफॉर्म है, जो पैकेज्ड सीफूड के व्यापार को डिजिटल तरीके से संचालित करता है।

यह प्लेटफॉर्म मछली और अन्य सीफूड उत्पादों को:

  • फिशरीज
  • सप्लायर्स
  • प्रोसेसिंग यूनिट्स
  • और ग्लोबल खरीदारों

के बीच कनेक्ट करता है।

कंपनी का ऑपरेशन केवल भारत तक सीमित नहीं है। इसके नेटवर्क का विस्तार कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हो चुका है, जैसे:

  • अमेरिका
  • यूरोप
  • मिडिल ईस्ट
  • भारत

इस ग्लोबल नेटवर्क की वजह से कंपनी तेजी से अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है।


📈 IPO की तैयारी और DRHP वापसी

Captain Fresh पहले भारतीय शेयर बाजार में लिस्ट होने की तैयारी कर रहा था। कंपनी ने IPO के लिए ₹1,700 करोड़ जुटाने की योजना बनाई थी।

इसके लिए कंपनी ने Securities and Exchange Board of India (SEBI) के पास अपना Draft Red Herring Prospectus (DRHP) भी दाखिल किया था।

हालांकि हाल ही में कंपनी ने अपने IPO ड्राफ्ट पेपर्स वापस ले लिए।

कंपनी के अनुसार यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि वह फिलहाल एक नई कंपनी के अधिग्रहण (acquisition) को पूरा करने पर ध्यान दे रही है।

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसका IPO प्लान पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने के बाद कंपनी दोबारा IPO के लिए नए सिरे से आवेदन करेगी।


💵 IPO से पहले जुटाई थी प्री-IPO फंडिंग

IPO से पहले Captain Fresh ने ₹250 करोड़ की प्री-IPO फंडिंग भी जुटाई थी।

इस राउंड का नेतृत्व कई बड़े निवेशकों ने किया था, जिनमें शामिल हैं:

  • Prosus Ventures
  • Accel
  • Tiger Global

इन निवेशकों का समर्थन कंपनी की वैश्विक विस्तार रणनीति में अहम भूमिका निभा रहा है।


🌐 अधिग्रहण के जरिए बढ़ा ग्लोबल विस्तार

Captain Fresh ने हाल के वर्षों में कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का अधिग्रहण भी किया है।

इनमें प्रमुख हैं:

  • CenSea – अमेरिका की एक सीफूड इम्पोर्ट कंपनी
  • Senecrus – फ्रांस की सीफूड कंपनी
  • Koral – पोलैंड की सैल्मन कंपनी

इन अधिग्रहणों की मदद से Captain Fresh ने यूरोप और अमेरिका के बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत की है।


📊 FY25 में शानदार ग्रोथ

वित्त वर्ष 2025 (FY25) में Captain Fresh ने तेज ग्रोथ दर्ज की है।

कंपनी का Gross Merchandise Value (GMV) 145% बढ़कर ₹3,421 करोड़ तक पहुंच गया।

यह तेज वृद्धि मुख्य रूप से हाल के अधिग्रहणों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ती मांग के कारण हुई है।


🔎 आगे की रणनीति

नए निवेश और अधिग्रहण के साथ Captain Fresh की रणनीति स्पष्ट है — वैश्विक सीफूड सप्लाई चेन में एक प्रमुख टेक-प्लेटफॉर्म बनना

अगर कंपनी अपनी ग्रोथ और अधिग्रहण की रणनीति को इसी तरह जारी रखती है, तो आने वाले वर्षों में यह ग्लोबल सीफूड मार्केट में एक बड़ा खिलाड़ी बन सकती है।

IPO की योजना फिलहाल टली जरूर है, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब कंपनी दोबारा IPO के लिए आवेदन करेगी, तब निवेशकों की रुचि काफी अधिक हो सकती है।

क्योंकि टेक-ड्रिवन सप्लाई चेन प्लेटफॉर्म और ग्लोबल फूड ट्रेड सेक्टर में Captain Fresh की मजबूत मौजूदगी इसे निवेश के लिए एक आकर्षक कंपनी बनाती है।

Read more :📚 मैथ्स लर्निंग प्लेटफॉर्म Bhanzu की तेज ग्रोथ,

📚 मैथ्स लर्निंग प्लेटफॉर्म Bhanzu की तेज ग्रोथ,

Bhanzu

भारत के एडटेक सेक्टर में एक बार फिर मजबूत ग्रोथ देखने को मिली है। मैथ्स लर्निंग पर फोकस करने वाला एडटेक स्टार्टअप Bhanzu ने वित्त वर्ष 2025 (FY25) में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू लगभग चार गुना बढ़कर ₹109.5 करोड़ तक पहुंच गया है।

दिलचस्प बात यह है कि कंपनी ने अपने खर्चों को काफी हद तक नियंत्रित रखा, जिसके चलते उसकी घाटा (Loss) में भी 42% की कमी आई है।

हैदराबाद स्थित इस एडटेक स्टार्टअप के वित्तीय आंकड़े Registrar of Companies के पास दाखिल किए गए कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स से सामने आए हैं।


🚀 FY25 में जबरदस्त रेवेन्यू ग्रोथ

FY25 में Bhanzu का ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹109.5 करोड़ रहा, जबकि FY24 में यह ₹29.4 करोड़ था। यानी कंपनी ने साल-दर-साल आधार पर लगभग 3.7 गुना वृद्धि दर्ज की है।

यह तेज ग्रोथ इस बात का संकेत है कि ऑनलाइन एजुकेशन, खासकर स्किल-बेस्ड और एक्सपीरिएंशियल लर्निंग की मांग तेजी से बढ़ रही है।

कंपनी की पूरी ऑपरेटिंग आय उसके मैथ्स लर्निंग कोर्सेस की बिक्री से आती है।


🧠 बच्चों के लिए एक्सपीरिएंशियल मैथ्स लर्निंग

साल 2020 में स्थापित Bhanzu बच्चों को गणित सीखने का एक अलग तरीका प्रदान करता है। यह प्लेटफॉर्म 5 से 16 साल की उम्र के बच्चों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए कोर्स उपलब्ध कराता है।

कंपनी का लक्ष्य सिर्फ मैथ्स सिखाना नहीं बल्कि बच्चों की कॉग्निटिव और लॉजिकल सोच को बेहतर बनाना है।

Bhanzu के कोर्स इस तरह बनाए गए हैं कि बच्चे गणित को डर या दबाव के बजाय मज़ेदार और इंटरैक्टिव तरीके से सीख सकें

कंपनी के अनुसार अब तक 50,000 से ज्यादा छात्र इसके विभिन्न कोर्सेस के जरिए प्रशिक्षण ले चुके हैं।


🌍 अंतरराष्ट्रीय बाजार से सबसे ज्यादा कमाई

Bhanzu की ग्रोथ में अंतरराष्ट्रीय बाजार की बड़ी भूमिका रही है।

कंपनी अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और मिडिल ईस्ट जैसे देशों में भी अपनी सेवाएं प्रदान कर रही है।

FY25 में कंपनी की कुल आय का लगभग 69% हिस्सा अंतरराष्ट्रीय बाजारों से आया

  • अंतरराष्ट्रीय बाजार से रेवेन्यू: ₹75.7 करोड़
  • भारतीय बाजार से रेवेन्यू: ₹33.9 करोड़

अंतरराष्ट्रीय बाजार से आने वाला रेवेन्यू 4.3 गुना बढ़ा, जबकि भारत से आने वाला रेवेन्यू लगभग तीन गुना बढ़ा

यह दर्शाता है कि भारतीय एडटेक कंपनियां अब वैश्विक स्तर पर भी तेजी से अपनी पहचान बना रही हैं।


💼 खर्चों में स्थिरता, कर्मचारियों पर सबसे ज्यादा खर्च

Bhanzu के कुल खर्चों में सबसे बड़ा हिस्सा कर्मचारियों से जुड़े खर्च (Employee Benefits) का रहा।

FY25 में यह खर्च कुल खर्च का लगभग 50% रहा। हालांकि यह खर्च पिछले साल की तुलना में घट गया।

  • FY24: ₹115.4 करोड़
  • FY25: ₹96.3 करोड़

इस गिरावट का मुख्य कारण ESOP (Employee Stock Option Plan) से जुड़ा खर्च कम होना रहा।

FY24 में ESOP खर्च ₹25.8 करोड़ था, जो FY25 में घटकर ₹11.7 करोड़ रह गया।


📢 मार्केटिंग और ट्रेनिंग पर बढ़ा निवेश

कंपनी ने FY25 में सेल्स और मार्केटिंग पर भी काफी निवेश किया।

  • सेल्स और मार्केटिंग खर्च: ₹40.8 करोड़
  • साल-दर-साल वृद्धि: 46%

इसके अलावा कंपनी ने ट्रेनिंग और भर्ती (Training & Recruitment) पर भी अधिक खर्च किया।

  • ट्रेनिंग और भर्ती खर्च: ₹28.6 करोड़
  • वृद्धि: 2.4 गुना

यह दिखाता है कि कंपनी अपने बिजनेस को स्केल करने के लिए नई टीम और बेहतर ट्रेनिंग पर ध्यान दे रही है।


🖥 अन्य खर्च

कंपनी के अन्य ऑपरेशनल खर्चों में शामिल हैं:

  • आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर
  • लीगल और प्रोफेशनल फीस
  • किराया
  • अन्य प्रशासनिक खर्च

इन सभी खर्चों को मिलाकर FY25 में कुल ₹27.9 करोड़ का अतिरिक्त खर्च हुआ।

कुल मिलाकर कंपनी का कुल खर्च FY24 के ₹174.4 करोड़ से बढ़कर FY25 में ₹193.6 करोड़ हो गया, जो लगभग 11% की वृद्धि है।


📉 घाटे में 42% की कमी

रेवेन्यू में तेज बढ़ोतरी के कारण कंपनी अपने घाटे को कम करने में सफल रही।

FY25 में Bhanzu का कुल घाटा ₹79 करोड़ रहा, जबकि FY24 में यह ₹135.5 करोड़ था।

इस प्रकार कंपनी ने अपने घाटे में 42% की कमी दर्ज की।

इसके अलावा:

  • EBITDA लॉस: ₹83 करोड़
  • EBITDA मार्जिन: -75.8%

हालांकि कंपनी अभी भी घाटे में है, लेकिन घाटे में तेज कमी इस बात का संकेत है कि कंपनी धीरे-धीरे बेहतर यूनिट इकॉनॉमिक्स की ओर बढ़ रही है।


💰 मजबूत कैश पोजिशन

मार्च 2025 तक कंपनी की वित्तीय स्थिति भी मजबूत दिखाई देती है।

  • कुल करंट एसेट्स: ₹179.5 करोड़
  • कैश और बैंक बैलेंस: ₹167.5 करोड़

यह मजबूत कैश पोजिशन कंपनी द्वारा FY25 के दौरान जुटाई गई फंडिंग का परिणाम है।

Bhanzu को निवेश फर्म Epiq Capital के नेतृत्व में $16.5 मिलियन की Series B फंडिंग प्राप्त हुई थी।

इसके अलावा कंपनी में पहले से Lightspeed जैसे बड़े निवेशकों का भी समर्थन है।


🔎 निष्कर्ष

कुल मिलाकर FY25 Bhanzu के लिए ग्रोथ का साल साबित हुआ। कंपनी ने जहां एक ओर अपने रेवेन्यू को लगभग चार गुना बढ़ाया, वहीं दूसरी ओर खर्चों को नियंत्रित रखते हुए घाटे को भी काफी कम किया।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ती मांग, बच्चों के लिए एक्सपीरिएंशियल लर्निंग मॉडल और मजबूत फंडिंग सपोर्ट Bhanzu को आने वाले वर्षों में और आगे बढ़ने में मदद कर सकते हैं।

हालांकि कंपनी अभी पूरी तरह लाभदायक नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से इसका रेवेन्यू तेजी से बढ़ रहा है और घाटा घट रहा है, उससे यह संकेत मिलता है कि भविष्य में Bhanzu एडटेक सेक्टर के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल हो सकता है।

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Yes Madam होम सैलून सर्विस स्टार्टअप ने FY25 में दोगुना किया रेवेन्यू,

Yes Madam

भारत में ऑन-डिमांड होम सर्विसेस का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और इसी सेगमेंट में काम करने वाला स्टार्टअप Yes Madam लगातार मजबूत प्रदर्शन कर रहा है। वित्त वर्ष 2025 (FY25) में कंपनी ने शानदार ग्रोथ दर्ज करते हुए अपने ऑपरेटिंग रेवेन्यू को लगभग दोगुना कर लिया है। खास बात यह है कि तेज ग्रोथ के बावजूद कंपनी मुनाफे में बनी हुई है, जो इस सेक्टर में काफी दुर्लभ माना जाता है।

FY25 में दोगुना हुआ रेवेन्यू

नोएडा स्थित इस स्टार्टअप ने FY25 में ₹92.5 करोड़ का ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले वित्त वर्ष FY24 के ₹45.8 करोड़ की तुलना में लगभग दोगुना है। कंपनी के वित्तीय दस्तावेज़ों के अनुसार यह जानकारी Registrar of Companies के साथ दाखिल की गई फाइलिंग से सामने आई है।

इस तेज वृद्धि से साफ है कि भारत में घर पर मिलने वाली ब्यूटी और वेलनेस सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है और Yes Madam इस अवसर का अच्छी तरह लाभ उठा रही है।

क्या है Yes Madam का बिजनेस मॉडल?

साल 2016 में स्थापित Yes Madam एक एट-होम ब्यूटी और वेलनेस सर्विस प्लेटफॉर्म है। इसके जरिए ग्राहक अपने घर पर ही कई तरह की सेवाएं बुक कर सकते हैं, जैसे:

  • हेयरकट
  • फेशियल
  • वैक्सिंग
  • मसाज
  • स्किन केयर ट्रीटमेंट

ग्राहक इन सेवाओं को कंपनी के मोबाइल ऐप या वेबसाइट के माध्यम से बुक करते हैं। इसके बाद कंपनी प्रशिक्षित ब्यूटी प्रोफेशनल्स को ग्राहक के घर भेजती है।

कंपनी की कमाई मुख्य रूप से हर बुकिंग पर मिलने वाले कमीशन से होती है। इसके अलावा यह अपने प्लेटफॉर्म पर ब्यूटी और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स की बिक्री से भी आय अर्जित करती है।

प्रोडक्ट सेल्स से आई सबसे ज्यादा कमाई

FY25 में कंपनी की कुल ऑपरेटिंग आय का बड़ा हिस्सा प्रोडक्ट्स की बिक्री से आया।

  • प्रोडक्ट्स की बिक्री: ₹50 करोड़
  • सर्विसेस से आय: ₹42.5 करोड़

कुल मिलाकर कंपनी के ऑपरेटिंग रेवेन्यू का लगभग 54% हिस्सा प्रोडक्ट सेल्स से आया। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुना है।

वहीं सर्विस से आने वाली आय में कई स्रोत शामिल हैं, जैसे:

  • सर्विस बुकिंग पर कमीशन
  • सब्सक्रिप्शन इनकम
  • रॉयल्टी इनकम

इसके अलावा कंपनी ने नॉन-ऑपरेटिंग स्रोतों से भी लगभग ₹2 करोड़ की आय अर्जित की। इसमें मुख्य रूप से पेनल्टी चार्ज और फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज शामिल है।

इन सभी को मिलाकर FY25 में कंपनी की कुल आय ₹94.5 करोड़ तक पहुंच गई।

खर्चों में भी बढ़ोतरी

तेजी से बढ़ते बिजनेस के साथ कंपनी के खर्चों में भी वृद्धि हुई है। FY25 में Yes Madam का सबसे बड़ा खर्च प्रोडक्ट्स की खरीद (Procurement) रहा।

  • प्रोडक्ट खरीद खर्च: ₹31.4 करोड़
  • बिजनेस प्रमोशन खर्च: ₹27 करोड़
  • एम्प्लॉयी बेनिफिट्स खर्च: ₹18.14 करोड़

प्रोडक्ट खरीद पर खर्च कंपनी के कुल खर्च का लगभग 34% रहा और यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुना हो गया।

वहीं मार्केटिंग और प्रमोशन पर कंपनी का खर्च 3.7 गुना बढ़कर ₹27 करोड़ हो गया। इससे पता चलता है कि कंपनी अपने ब्रांड को तेजी से विस्तार देने पर ध्यान दे रही है।

कर्मचारियों से जुड़े खर्च भी बढ़े हैं। FY24 में जहां यह खर्च लगभग ₹12 करोड़ था, वहीं FY25 में यह बढ़कर ₹18.14 करोड़ हो गया।

इसके अलावा कंपनी के अन्य खर्चों में शामिल हैं:

  • आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर
  • कैशबैक और ऑफर
  • प्रोफेशनल और कंसल्टेंसी फीस
  • किराया और अन्य प्रशासनिक खर्च

इन सभी कारणों से कंपनी का कुल खर्च FY24 के ₹45.5 करोड़ से बढ़कर FY25 में ₹92.4 करोड़ हो गया।

मुनाफे में बनी रही कंपनी

तेजी से बढ़ते खर्चों के बावजूद Yes Madam FY25 में भी लाभ में रही।

कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 में ₹1.8 करोड़ का शुद्ध लाभ (Profit) दर्ज किया।

इसके अलावा कंपनी के प्रमुख वित्तीय संकेतक इस प्रकार रहे:

  • ROCE: 2.29%
  • EBITDA मार्जिन: 0.57%

हालांकि ये मार्जिन बहुत अधिक नहीं हैं, लेकिन इस सेक्टर में लाभ कमाना ही बड़ी उपलब्धि माना जाता है।

यूनिट इकॉनॉमिक्स और कैश पोजिशन

FY25 में कंपनी की यूनिट इकॉनॉमिक्स भी काफी संतुलित रही। रिपोर्ट के अनुसार कंपनी ने ₹1 कमाने के लिए लगभग ₹1 खर्च किया

वित्त वर्ष के अंत तक कंपनी के पास:

  • कैश और बैंक बैलेंस: ₹5.5 करोड़
  • करंट एसेट्स: ₹21.4 करोड़

यह दर्शाता है कि कंपनी की वित्तीय स्थिति फिलहाल स्थिर है।

प्रतिस्पर्धा और भविष्य की चुनौतियां

होम सर्विसेस का बाजार काफी प्रतिस्पर्धी है। इस क्षेत्र में कई बड़े प्लेटफॉर्म मौजूद हैं, जिनमें सबसे बड़ा नाम Urban Company है।

दिलचस्प बात यह है कि Yes Madam इस सेगमेंट में उन कुछ कंपनियों में से है जो बड़े स्तर पर काम करते हुए भी मुनाफा कमा रही हैं।

कंपनी के रेवेन्यू में प्रोडक्ट सेल्स का बड़ा योगदान भी इसकी सफलता का एक अहम कारण माना जा रहा है। यही रणनीति हाल के वर्षों में Urban Company ने भी अपनाई है ताकि वह लाभप्रदता हासिल कर सके।

हालांकि आगे का रास्ता आसान नहीं होगा। स्टार्टअप इकोसिस्टम में मौजूदा फंडिंग माहौल थोड़ा अनिश्चित है। ऐसे में अगर Yes Madam भविष्य में नया फंडिंग राउंड उठाना चाहती है तो उसे उचित वैल्यूएशन हासिल करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी आने वाले वर्षों में अपनी ग्रोथ को थोड़ा संतुलित रख सकती है और बाजार के स्थिर होने का इंतजार कर सकती है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर FY25 Yes Madam के लिए काफी सफल वर्ष रहा। कंपनी ने न केवल अपने रेवेन्यू को दोगुना किया बल्कि मुनाफे में भी बनी रही।

तेजी से बढ़ते डिजिटल प्लेटफॉर्म, घर पर मिलने वाली सेवाओं की बढ़ती मांग और प्रोडक्ट सेल्स पर फोकस ने इस स्टार्टअप को मजबूत स्थिति में ला दिया है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या Yes Madam आने वाले वर्षों में भी इसी तरह ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी का संतुलन बनाए रख पाती है या नहीं।

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