💰 BharatPe की Pre-IPO Funding Talks तेज़,

BharatPe

भारत के फिनटेक सेक्टर में हलचल बढ़ गई है! दिल्ली स्थित यूनिकॉर्न BharatPe अपने IPO से पहले एक बड़े प्री-IPO फंडिंग राउंड की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, यह राउंड $80-$100 मिलियन (₹670-₹835 करोड़) का हो सकता है और इसकी अगुवाई Coatue Management कर रही है।

यह फंडिंग राउंड खास है क्योंकि BharatPe पिछले चार साल में पहली बार इक्विटी फंडिंग जुटाने जा रही है, और यह उसके IPO रोडमैप का अहम हिस्सा है।


📈 क्यों हो रही है यह फंडिंग?

इस राउंड का मुख्य मकसद कंपनी की वित्तीय स्थिति को और मजबूत करना और पब्लिक लिस्टिंग की तैयारी करना है।

  • इसमें कुछ नए निवेशक और मौजूदा निवेशक दोनों शामिल होंगे।
  • Coatue के नए पार्टनर अमित मुखर्जी इस डील का नेतृत्व कर रहे हैं और वे कंपनी के मैनेजमेंट व बोर्ड के साथ मिलकर IPO की तैयारी में जुटे हैं।
  • यह पूंजी BharatPe को ऑपरेशन्स स्केल करने और मार्केट पोजीशन मजबूत करने में मदद करेगी।

⏳ IPO इस साल नहीं, पहले मुनाफ़े पर फोकस

BharatPe के CEO नलिन नेगी ने हाल ही में कहा था कि कंपनी प्री-IPO राउंड ज़रूर करेगी, लेकिन इस वित्त वर्ष (FY26) में IPO लाने का कोई प्लान नहीं है।

  • कंपनी चाहती है कि सतत लाभप्रदता (consistent profitability) बनाए रखने के बाद ही SEBI में ड्राफ्ट पेपर फाइल किए जाएं।
  • इसका मतलब है कि BharatPe अगले कुछ तिमाहियों में अपने रेवेन्यू मॉडल और मार्जिन्स को और मजबूत करेगा।

🦄 BharatPe की यूनिकॉर्न जर्नी

  • अगस्त 2021 में BharatPe ने आखिरी बार इक्विटी फंडिंग जुटाई थी और उसी समय यूनिकॉर्न क्लब में एंट्री की थी।
  • अब तक कंपनी ने Tiger Global, Dragoneer Investment Group, Steadfast Capital, Coatue Management, Ribbit Capital समेत कई बड़े निवेशकों से $650 मिलियन से अधिक की इक्विटी और डेट फंडिंग जुटाई है।
  • फिनटेक सेक्टर में इसकी पहचान एक मजबूत B2B डिजिटल पेमेंट्स और लेंडिंग प्लेयर के रूप में है।

📊 FY25 में प्रॉफिट का बड़ा दावा

BharatPe ने हाल ही में दावा किया है कि FY25 में उसने प्रॉफिटबिलिटी हासिल कर ली है:

  • प्रॉफिट बिफोर टैक्स ₹6 करोड़ (ESOP कॉस्ट को छोड़कर)
  • रेवेन्यू ₹1,800 करोड़
  • पहले नौ महीनों में EBITDA लेवल पर ब्रेक-ईवन (ESOP एडजस्ट करने के बाद)
  • इसी अवधि में नेट लॉस घटकर ₹148.8 करोड़ रह गया, जो पिछले सालों की तुलना में काफी कम है।

यह बदलाव दिखाता है कि कंपनी ने कॉस्ट कंट्रोल और बिज़नेस ऑप्टिमाइजेशन पर गहरी मेहनत की है।


🏦 लाइसेंस और रेगुलेटरी बढ़त

अप्रैल 2025 में BharatPe की सहायक कंपनी Resilient को RBI से पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस मिल गया। इससे BharatPe के पास अब ये तीन बड़ी रेगुलेटरी ताकतें हैं:

  1. NBFC लाइसेंस (Trillion Loans के ज़रिए)
  2. Unity Small Finance Bank में हिस्सेदारी
  3. पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस

यह कॉम्बिनेशन BharatPe को क्रेडिट, बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट्स के पूरे इकोसिस्टम में मजबूत पोजीशन देता है।


🔍 मार्केट एनालिसिस: क्यों अहम है यह कदम?

  1. IPO रोडमैप को गति – यह फंडिंग IPO से पहले की तैयारी को तेज करेगी।
  2. इन्वेस्टर कॉन्फिडेंस – Coatue जैसे बड़े निवेशक की भागीदारी मार्केट में भरोसा बढ़ाती है।
  3. कंपटीशन में बढ़त – Paytm, PhonePe और Razorpay जैसे बड़े प्लेयर्स के बीच अपनी पोजीशन को मजबूत करना।
  4. ऑपरेशनल स्केल – नई पूंजी से टेक्नोलॉजी, टीम और मार्केटिंग पर निवेश बढ़ेगा।

🚀 आगे की रणनीति

  • BharatPe का लक्ष्य 2026 के बाद IPO लाना है।
  • कंपनी SME लेंडिंग, डिजिटल पेमेंट्स और फाइनेंशियल सर्विसेज में प्रोडक्ट एक्सपैंशन करेगी।
  • रेगुलेटरी कंप्लायंस और सतत मुनाफ़ा बनाए रखना टॉप प्राथमिकता होगी।
  • ब्रांड बिल्डिंग और कस्टमर अधिग्रहण (acquisition) पर भी ज़ोर रहेगा।

📌 निष्कर्ष

BharatPe का यह प्री-IPO राउंड भारतीय फिनटेक सेक्टर के लिए एक बड़ा सिग्नल है। यह दिखाता है कि कंपनी स्टार्टअप से पब्लिक लिस्टेड कंपनी बनने की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ा रही है।
$80-$100 मिलियन की यह फंडिंग न केवल वित्तीय स्थिरता लाएगी बल्कि मार्केट में इन्वेस्टर्स का भरोसा भी मजबूत करेगी। आने वाले महीनों में BharatPe के कदमों पर पूरी इंडस्ट्री की नज़र होगी।

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📉 Eternal चीन की Antfin ने Zomato में ₹4,097 करोड़ के शेयर बेचे,

Eternal

📰 न्यूज़ हाइलाइट्स:

  • Antfin Singapore ने Zomato की पैरेंट कंपनी Eternal Ltd. में से ₹4,097 करोड़ के शेयर बेचे
  • 14.13 करोड़ शेयरों का ट्रांजैक्शन ₹289.91 प्रति शेयर की कीमत पर
  • कंपनी की हिस्सेदारी घटकर 0.52% से भी कम होने की संभावना
  • पिछले साल से अब तक Eternal से ₹11,696 करोड़ से अधिक की हिस्सेदारी बेच चुका है Ant Group
  • Zomato की रेवेन्यू ग्रोथ 70% पर लेकिन मुनाफा 90% गिरा FY26 की पहली तिमाही में

📦 क्या है डील का पूरा मामला?

Alibaba Group की सहयोगी कंपनी Antfin Singapore Holding Pte. ने भारतीय फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Zomato की पेरेंट कंपनी Eternal Ltd. में से ₹4,097 करोड़ (लगभग $482 मिलियन) के शेयर bulk deal के ज़रिए बेचे हैं।

स्टॉक एक्सचेंज डेटा के अनुसार, यह डील गुरुवार को हुई जिसमें कुल 14.13 करोड़ शेयर ₹289.91 प्रति शेयर की कीमत पर ट्रांसफर किए गए।

खरीदार कौन हैं? फिलहाल यह साफ नहीं है कि ये शेयर किसने खरीदे, लेकिन यह Antfin द्वारा Eternal में की गई सबसे बड़ी बिकवाली में से एक है।


📉 कितनी हिस्सेदारी अब बची है Antfin के पास?

जून 2025 तक Antfin की Eternal Ltd. में 18.84 करोड़ शेयर, यानी लगभग 2.08% हिस्सेदारी थी। इस डील के बाद उनकी हिस्सेदारी 0.52% से भी कम होने की संभावना है — या संभव है कि यह पूर्णतः Exit भी हो।

यह Ant Group द्वारा Eternal में की गई पहली बिकवाली नहीं है।

  • अगस्त 2024 में Antfin ने 18.54 करोड़ शेयर, ₹257.4 की कीमत पर बेचे थे जिससे उसे ₹4,772 करोड़ ($561 मिलियन) प्राप्त हुए थे।
  • मार्च 2024 में भी Antfin ने ₹160.4 प्रति शेयर की कीमत पर 17.63 करोड़ शेयर बेचकर ₹2,827 करोड़ जुटाए थे।

📊 Antfin और Zomato: पीछे की कहानी

जब Eternal ने अपना DRHP फाइल किया था (IPO से पहले), उस समय Antfin इसके चौथे सबसे बड़े शेयरधारक थे। उनके पास 55 करोड़ शेयर थे जो कंपनी में 8.19% हिस्सेदारी के बराबर थे।

Eternal में Antfin के अलावा अन्य प्रमुख निवेशक रहे हैं:

  • Info Edge
  • Uber B.V.
  • Alipay (जो अब पूरी तरह बाहर निकल चुका है)

Alipay, जो कि Ant Group की ही एक और सहयोगी कंपनी है, नवंबर 2023 में Zomato से पूरी तरह बाहर हो चुका है। उस समय खरीदारों में शामिल थे:

  • Goldman Sachs
  • Fidelity
  • Morgan Stanley
  • Vanguard
  • ADIA
  • ICICI Prudential

💰 और सिर्फ Zomato ही नहीं, Paytm से भी निकला Antfin

इस सप्ताह की शुरुआत में ही, Antfin (Netherlands) Holding B.V. ने One97 Communications (Paytm) से भी 5.84% हिस्सेदारी बेचकर लगभग ₹3,800 करोड़ का सौदा किया।

इस तरह, चीनी निवेशक Ant Group भारत के इंटरनेट सेक्टर से धीरे-धीरे बाहर निकलता दिख रहा है।


📈 Eternal/Zomato के वित्तीय नतीजे: FY26 Q1 में क्या रहा प्रदर्शन?

Zomato की पेरेंट कंपनी Eternal Ltd. ने Q1 FY26 (अप्रैल-जून 2025) में शानदार रेवेन्यू ग्रोथ दिखाई, लेकिन प्रॉफिट में बड़ी गिरावट देखी गई:

  • रेवेन्यू: ₹7,167 करोड़ (पिछले साल की तुलना में 70% की बढ़त)
  • प्रॉफिट: ₹25 करोड़ (FY25 Q1 में ₹253 करोड़ था, यानी 90% गिरावट)

कंपनी का स्टॉक प्राइस फिलहाल ₹300.7 (सुबह 11:15 बजे तक) पर ट्रेड कर रहा है, और मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹2,90,234 करोड़ ($34 बिलियन) है।


🤔 इसका मतलब क्या है भारतीय निवेशकों के लिए?

Ant Group की यह धीरे-धीरे हो रही एग्ज़िट स्ट्रैटेजी भारत के डिजिटल इकॉनॉमी में विदेशी निवेश की धारणा पर असर डाल सकती है। साथ ही, यह भारतीय कंपनियों के लिए एक अवसर भी हो सकता है कि वे स्थानीय निवेशकों को ज्यादा जगह दें।

Zomato के बढ़ते रेवेन्यू और घटते मुनाफे को देखना दिलचस्प रहेगा कि कंपनी लॉन्ग टर्म में मुनाफा बनाए रखने के लिए क्या रणनीति अपनाती है।


📌 निष्कर्ष:

Antfin की इस बिकवाली के बाद Eternal में विदेशी निवेश की हिस्सेदारी और घट गई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि Zomato में आगे कौन नया स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टर आता है, और कंपनी अपने प्रॉफिटेबिलिटी को कैसे संभालती है।

📍 क्या Zomato एक बार फिर निवेशकों को आकर्षित कर पाएगा? इसका जवाब समय देगा।


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🩺💊 Zepto ने लॉन्च की 10 मिनट में दवाइयों की डिलीवरी सेवा

Zepto

मुंबई, बेंगलुरु, दिल्ली एनसीआर और हैदराबाद जैसे प्रमुख शहरों में अब सिर्फ 10 मिनट में दवाइयाँ आपके दरवाज़े पर होंगी। जी हाँ, Quick Commerce में धूम मचाने वाली कंपनी Zepto ने अब हेल्थकेयर सेगमेंट में कदम रखते हुए ‘Zepto Pharmacy’ लॉन्च कर दी है।

यह सेवा ओवर-द-काउंटर दवाइयों के साथ-साथ प्रिस्क्रिप्शन दवाइयों की डिलीवरी भी सुनिश्चित करेगी, जो एक बड़ा लॉजिस्टिक और रेगुलेटरी चैलेंज माना जाता है। Zepto ने इस पहल को बेहद सोच-समझकर और एक साल की टेस्टिंग के बाद शुरू किया है।


🔍 एक साल की तैयारी के बाद लॉन्च

Zepto ने जानकारी दी है कि उसने पिछले 12 महीनों से इस सर्विस को छोटे स्केल पर पायलट मोड में चलाया, ताकि कस्टमर एक्सपीरियंस, सप्लाई चेन और रेगुलेटरी अनुपालन को बारीकी से परखा जा सके।

Zepto के सीईओ और सह-संस्थापक आदित पलीचा ने कहा:

“हमारा उद्देश्य इस कैटेगरी में बहुत ही उच्च स्तर के ऑपरेशनल स्टैंडर्ड बनाए रखना है। यह क्षेत्र जटिल है, इसलिए हम अत्यधिक गति से विस्तार नहीं करना चाहते।”


💼 दवा डिलीवरी में Zepto का कदम क्यों अहम?

Zepto का Pharmacy कैटेगरी में प्रवेश न केवल एक नया बिजनेस वर्टिकल खोलता है, बल्कि यह दर्शाता है कि भारत में हेल्थकेयर डिलीवरी मॉडल अब क्विक कॉमर्स के ज़रिए और तेज़ हो रहा है।

जहाँ पहले क्विक डिलीवरी केवल किराने और घरेलू जरूरतों तक सीमित थी, अब यह धीरे-धीरे मेडिसिन डिलीवरी जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भी प्रवेश कर रहा है।


🏁 प्रतिस्पर्धा भी तेज़ – Blinkit और Swiggy भी दौड़ में

Zepto अकेला नहीं है जिसने दवा डिलीवरी के क्षेत्र में कदम रखा है। इससे पहले:

  • Blinkit ने पिछले महीने बेंगलुरु के कुछ पिन कोड में प्रिस्क्रिप्शन मेडिसिन डिलीवरी की शुरुआत की। इसमें हृदय, नेत्र, तंत्रिका तंत्र, श्वसन आदि से जुड़ी दवाएं शामिल थीं।
  • Blinkit ने उन ग्राहकों के लिए फ्री डॉक्टर कंसल्टेशन की सुविधा भी दी जो प्रिस्क्रिप्शन अपलोड नहीं कर पाते।
  • सभी ऑर्डर लाइसेंसशुदा फार्मेसियों से भेजे जाते हैं और उन्हें tamper-proof पैकेजिंग में ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है।

वहीं दूसरी ओर, Swiggy ने PharmEasy के साथ साझेदारी करते हुए Shop-in-Shop मॉडल लॉन्च किया, जिसके तहत उनके डार्क स्टोर्स और ऐप के ज़रिए दवाइयों की बिक्री होती है।


⚖️ रेगुलेशन और कंप्लायंस की बड़ी चुनौती

दवाइयों की डिलीवरी के क्षेत्र में उतरना जितना आकर्षक दिखता है, उतना ही जटिल और रेगुलेटेड भी है। खासकर:

  • प्रिस्क्रिप्शन दवाइयाँ केवल डॉक्टर के लिखे हुए नुस्खे पर दी जा सकती हैं।
  • कंपनियों को लाइसेंस प्राप्त फार्मेसियों के साथ मिलकर काम करना होता है।
  • तमाम राज्यों के ड्रग कंट्रोल रेगुलेशन को भी ध्यान में रखना होता है।

Zepto की यह तैयारी और सतर्कता इस बात को दर्शाती है कि कंपनी इस क्षेत्र में लंबी रेस की खिलाड़ी बनना चाहती है।


🧠 बिजनेस रणनीति: मेडिसिन डिलीवरी के बहाने ब्रांड विस्तार

Zepto की Pharmacy डिलीवरी न केवल एक नई सेवा है, बल्कि यह उनके ब्रांड को एक भरोसेमंद और ज़िम्मेदार कंपनी के रूप में स्थापित करने की कोशिश भी है। हेल्थकेयर एक ऐसा सेगमेंट है, जहाँ भरोसे का बहुत महत्व है।

यदि Zepto इस सेक्टर में सफल होती है, तो यह न केवल उसकी एवरेज ऑर्डर वैल्यू (AOV) को बढ़ाएगा, बल्कि ग्राहकों की फ्रीक्वेंसी और लॉयल्टी को भी मज़बूत करेगा।


🏥 क्या बदलने जा रहा है उपभोक्ताओं के लिए?

  1. दवाइयों की तत्काल उपलब्धता: ज़रूरत पड़ने पर अब दवाइयाँ 10 मिनट में मिलेंगी।
  2. असली और सुरक्षित दवाइयाँ: Zepto जैसी कंपनियाँ सिर्फ लाइसेंस प्राप्त फार्मेसियों से दवाइयाँ भेज रही हैं।
  3. फ्री डॉक्टर कंसल्टेशन जैसी सुविधाएँ संभावित रूप से जल्द Zepto में भी दिख सकती हैं।

📈 आगे क्या?

Zepto ने अभी यह सेवा सिर्फ चार शहरों में शुरू की है। लेकिन यदि यह मॉडल सफल होता है, तो अगले 6-12 महीनों में यह देश के अन्य हिस्सों में भी पहुंच सकता है।

भारत में हेल्थकेयर डिलीवरी को डिजिटल और क्विक बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। Zepto जैसे स्टार्टअप्स के लिए यह एक नया बाजार और रेवन्यू स्ट्रीम खोल सकता है।


🧾 निष्कर्ष

Zepto का Pharmacy डिलीवरी की दुनिया में उतरना न केवल बिजनेस के लिहाज से रणनीतिक है, बल्कि यह उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी सुविधा भी साबित हो सकता है। जहाँ Blinkit और Swiggy पहले ही इस रेस में शामिल हो चुके हैं, वहीं Zepto अपनी धीमी लेकिन ठोस रणनीति से बाज़ी मार सकता है।

👉 अब देखना यह होगा कि कौन सी कंपनी हेल्थकेयर डिलीवरी के इस उभरते क्षेत्र में लीडरशिप हासिल करती है – लेकिन एक बात तय है, ग्राहकों को इसका भरपूर लाभ मिलने वाला है।


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🔄 Infibeam Avenues ने ₹800 करोड़ में Rediff को बेचा

Infibeam Avenues

डिजिटल पेमेंट और AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान केंद्रित करने के लिए, Infibeam Avenues ने अपने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म इंफ्रास्ट्रक्चर बिज़नेस को Rediff.com India Ltd को ₹800.39 करोड़ में बेचने का निर्णय लिया है। यह ट्रांजैक्शन कैश और इक्विटी के मिश्रण में किया गया है, जिससे दोनों कंपनियों को ऑपरेशनल फोकस और ग्रोथ के नए अवसर मिलेंगे।


💼 डील का स्ट्रक्चर: ₹400 करोड़ कैश और बाकी इक्विटी

यह डील “स्लंप सेल” के रूप में की गई है जिसमें:

  • ₹400 करोड़ कैश के रूप में दिए जाएंगे
  • ₹400.39 करोड़ इक्विटी के रूप में, जिससे Rediff में Infibeam की हिस्सेदारी बढ़कर 82% हो जाएगी (पहले 54% थी)

इस ट्रांजैक्शन के बाद, Infibeam और Rediff दोनों को अपने-अपने फोकस एरिया में तेज़ी से विस्तार करने की आज़ादी मिलेगी।


📊 ई-कॉमर्स यूनिट का प्रदर्शन FY25 में

Infibeam का यह ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में:

  • ₹180 करोड़ का रेवेन्यू जनरेट किया
  • ₹137 करोड़ का EBITDA दर्ज किया
  • यह कंपनी की टॉपलाइन का 4.8% और नेटवर्थ का 18.6% रहा

हालांकि यह बिजनेस कंपनी के टोटल रेवेन्यू में छोटा था, लेकिन मुनाफे में इसका योगदान महत्वपूर्ण था।


🚀 Rediff के लिए ग्रोथ का नया मौका

Rediff इस अधिग्रहित ई-कॉमर्स यूनिट को दो तरह से उपयोग करेगा:

  1. स्टैंडअलोन प्रोडक्ट के रूप में
  2. RediffOne सुइट के हिस्से के रूप में

इसके ज़रिए Rediff अब SMEs और मिड-मार्केट सेगमेंट में अपनी पकड़ और मज़बूत करेगा, खासकर Rediffmail, RediffPay और कंटेंट प्लेटफॉर्म के इंटीग्रेशन से।


🧠 Infibeam का नया फोकस: डिजिटल पेमेंट और AI इंफ्रास्ट्रक्चर

इस डील के बाद Infibeam अब दो प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगा:

  • CCAvenue के माध्यम से डिजिटल पेमेंट सॉल्यूशंस
  • Phronetic.ai के तहत AI इंफ्रास्ट्रक्चर और एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर

Infibeam की रणनीति स्पष्ट है—कम-कोर बिज़नेस से बाहर निकलकर हाई-ग्रोथ क्षेत्रों में आक्रामक विस्तार।


📈 Rediff के IPO की तैयारी शुरू!

स्टॉक एक्सचेंज को दी गई सूचना के अनुसार, Rediff आने वाले महीनों में अपनी ग्रोथ को फंड करने के लिए:

  • फंडरेज़िंग के विकल्पों की तलाश कर रही है
  • IPO लाने की संभावना पर भी विचार कर रही है
  • इसका लक्ष्य है SME SaaS और डिजिटल कॉमर्स मार्केट में अपनी मौजूदगी को और मज़बूत बनाना

💬 लीडरशिप की टिप्पणी

Infibeam Avenues के CMD विशाल मेहता ने इस रणनीतिक डील को लेकर कहा:

“यह डील Infibeam और Rediff दोनों के लिए ग्रोथ का नया रनवे तैयार करती है। हमारे लिए यह फोकस और एगिलिटी को बढ़ाने का अवसर है जिससे लॉन्ग टर्म वैल्यू अनलॉक हो सके।”


🧩 RediffOne Suite: SaaS + Payments + Content का कॉम्बो

Rediff इस ई-कॉमर्स इंफ्रास्ट्रक्चर को RediffOne सुइट में इंटीग्रेट कर रहा है, जिससे यह एक कम्पलीट SaaS प्लेटफॉर्म बन सके जो प्रदान करता है:

  • वेबसाइट बिल्डिंग और होस्टिंग
  • ई-कॉमर्स सेटअप
  • इनबिल्ट पेमेंट सॉल्यूशंस (RediffPay के साथ)
  • Rediffmail पर बेस्ड कम्युनिकेशन टूल्स
  • कंटेंट पब्लिशिंग और न्यूज़ प्लेटफॉर्म

इस सुइट का लक्ष्य है छोटे और मध्यम व्यापारों को एक वन-स्टॉप डिजिटल समाधान देना।


🔍 डील के पीछे रणनीति क्या है?

Infibeam ने पिछले साल ही Rediff.com में मेजोरिटी हिस्सेदारी खरीदी थी। अब इस लेन-देन के ज़रिए:

  • Infibeam अपनी मूल क्षमताओं—पेमेंट्स और AI पर ध्यान देगा
  • Rediff डिजिटल SaaS और ई-कॉमर्स के क्षेत्र में अपना विस्तार करेगा
  • दोनों कंपनियों का यूनिक वैल्यू प्रपोजिशन और मजबूत होगा

🧾 निष्कर्ष: Win-Win डील!

यह डील भारतीय SaaS और डिजिटल कॉमर्स इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। Infibeam जहां हाई-मार्जिन और स्केलेबल बिज़नेस की ओर बढ़ रहा है, वहीं Rediff अब एक ऑल-इन-वन SME सॉल्यूशन प्लेयर बनने की ओर अग्रसर है।

डील का असर आने वाले क्वार्टर्स में रेवेन्यू और मार्केट कैप के आंकड़ों में साफ़ दिखाई देगा। दोनों कंपनियां अब अपने-अपने क्षेत्रों में ज्यादा स्पष्टता और गति के साथ आगे बढ़ने को तैयार हैं।

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🚀 डिजिटल पेमेंट कंपनी Infibeam Avenues धमाका Q1 FY26 में 72% रेवेन्यू ग्रोथ,

Infibeam Avenues

📊 राजस्व में जबरदस्त बढ़ोतरी, लेकिन मुनाफे में गिअहमदाबाद स्थित डिजिटल पेमेंट और ई-कॉमर्स कंपनी Infibeam Avenues ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में शानदार रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी की ऑपरेटिंग इनकम ₹1,280 करोड़ तक पहुंच गई है, लेकिन बढ़ती लागतों के चलते नेट प्रॉफिट में 16% की गिरावट आई है।


💰 रेवेन्यू में 72% की जबरदस्त छलांग

Infibeam ने Q1 FY26 (अप्रैल-जून 2025) के लिए ₹1,280 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की समान तिमाही (Q1 FY25) के ₹745 करोड़ से 72% अधिक है। कंपनी की कुल इनकम ₹1,306.5 करोड़ रही, जिसमें ₹26.3 करोड़ की अन्य आय शामिल है।

कंपनी का पेमेंट बिजनेस कुल रेवेन्यू का 96% हिस्सा रहा, जो ₹1,226.4 करोड़ तक पहुंच गया। वहीं, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म बिजनेस से ₹53.7 करोड़ की कमाई हुई, जो कि साल-दर-साल आधार पर 38.5% अधिक है।


📉 मुनाफे में गिरावट, कुल खर्चों में भारी उछाल

हालांकि रेवेन्यू में शानदार वृद्धि हुई, लेकिन कंपनी की कुल लागतें भी तेज़ी से बढ़ीं। Q1 FY25 में कुल खर्च ₹693.7 करोड़ थे, जो इस तिमाही में बढ़कर ₹1,229.3 करोड़ हो गए – यानी 77% की वृद्धि।

  • पेमेंट प्रोसेसिंग की लागत ₹1,128 करोड़ रही, जो 79.5% की सालाना वृद्धि है।
  • कर्मचारियों को मिलने वाले लाभों की लागत 14% बढ़कर ₹39 करोड़ हुई।
  • डिप्रिसिएशन खर्च ₹17.67 करोड़ रहा, जो 8% अधिक है।

लागतों में तेज़ उछाल के कारण कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹69.4 करोड़ से घटकर ₹58.4 करोड़ हो गया – यानी 16% की गिरावट।


🔁 बड़ी रणनीतिक पहलें: Rediff.com को मिला नया बिजनेस

Infibeam ने एक बड़ी कॉर्पोरेट कार्रवाई के तहत ₹800 करोड़ के मूल्य पर अपनी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म इंफ्रास्ट्रक्चर यूनिट को Rediff.com को ट्रांसफर करने की मंज़ूरी दी है। यह ट्रांसफर एक स्लंप सेल के रूप में किया गया है।

यह कदम कंपनी के ऑपरेशनल मॉडल को मजबूत करने और नई डिजिटल रणनीतियों पर फोकस बढ़ाने के लिए उठाया गया है।


🤖 AI और डिजिटल इनोवेशन में बड़ा दांव

Q1 FY26 में Infibeam Avenues ने कई महत्वपूर्ण इनिशिएटिव्स का ऐलान किया:

  • मुंबई में Agentic AI Marketplace लॉन्च करने की योजना।
  • देश के छोटे शहरों में 12 AI डेटा सेंटर स्थापित करने का रोडमैप।
  • ₹700 करोड़ का राइट्स इश्यू पास किया गया ताकि AI और बिजनेस विस्तार को फंड किया जा सके।
  • कंपनी अब UPI एप्लिकेशन स्पेस में RediffPay के माध्यम से एंट्री की तैयारी में है।
  • Rediff TV नाम से AI आधारित मीडिया प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया गया है।
  • Phronetic.ai के तहत Fintech-केंद्रित AI सॉल्यूशन विकसित किए जा रहे हैं।

📊 शेयर बाजार प्रदर्शन और वैल्यूएशन

7 अगस्त 2025 को कारोबारी दिन के अंत में Infibeam का शेयर ₹15.19 प्रति शेयर पर बंद हुआ। कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन ₹4,247.78 करोड़ ($500 मिलियन) पर पहुंच गया।


📌 निष्कर्ष: ग्रोथ और इनोवेशन का संगम

हालांकि कंपनी को इस तिमाही में मुनाफे में गिरावट का सामना करना पड़ा, लेकिन रेवेन्यू ग्रोथ, मार्केट इनिशिएटिव्स और रणनीतिक विस्तार से यह स्पष्ट है कि Infibeam एक मजबूत डिजिटल पेमेंट और AI-इनोवेशन कंपनी के रूप में उभर रही है।

RediffPay, Rediff TV, और AI डेटा सेंटर्स जैसे नए प्रोजेक्ट्स भारत के डिजिटल इकोसिस्टम में Infibeam की भूमिका को और मज़बूत करेंगे।

Read more : MapMyIndia FY26 की पहली तिमाही में 21% की शानदार ग्रोथ,

🗺️ MapMyIndia FY26 की पहली तिमाही में 21% की शानदार ग्रोथ,

MapMyIndia

लोकेशन इंटेलिजेंस और डिजिटल मैपिंग में अग्रणी कंपनी CE Info Systems, जिसे हम सब MapMyIndia के नाम से जानते हैं, ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) की पहली तिमाही (Q1) के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने इस तिमाही में शानदार प्रदर्शन करते हुए 21% की सालाना वृद्धि दर्ज की है, जो इसके डिजिटल मैपिंग और IoT से जुड़े व्यवसाय की बढ़ती मांग को दर्शाती है।


📈 ₹122 करोड़ की आय, मुनाफा ₹46 करोड़ तक पहुँचा

MapMyIndia की कुल ऑपरेशनल आय ₹122 करोड़ रही, जो कि पिछले वर्ष की समान तिमाही (Q1 FY25) में ₹101 करोड़ थी। यानी कंपनी की आय में साल-दर-साल 21% की बढ़ोतरी हुई है।

हालांकि, अगर पिछली तिमाही (Q4 FY25) से तुलना की जाए तो आय में लगभग 15% की गिरावट देखी गई है, क्योंकि Q4 FY25 में कंपनी की आय ₹144 करोड़ रही थी।


💡 राजस्व का बड़ा हिस्सा डिजिटल सेवाओं से

कंपनी की कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा—लगभग 93%—डिजिटल मैप डेटा, जीपीएस नेविगेशन, लोकेशन-बेस्ड सर्विसेज़ और IoT सेवाओं से आया है। FY26 की पहली तिमाही में इन सेवाओं से ₹114 करोड़ की आय हुई, जो पिछले साल की तुलना में 23% ज़्यादा है।

वहीं, IoT आधारित डिवाइसेज़ की बिक्री से ₹8 करोड़ की आमदनी हुई है।


💸 लागत और खर्च

  • IoT डिवाइसों की लागत, कर्मचारियों के लाभ और तकनीकी सेवाओं की आउटसोर्सिंग कंपनी की प्रमुख लागत रही।
  • FY26 की Q1 में कुल खर्च बढ़कर ₹73 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल की पहली तिमाही में यह ₹64 करोड़ था।

🏆 मुनाफ़ा और EBITDA में जबरदस्त उछाल

  • कंपनी ने FY26 की पहली तिमाही में ₹46 करोड़ का शुद्ध मुनाफ़ा दर्ज किया, जो कि पिछले साल की तुलना में 28% अधिक है (FY25 Q1 में ₹36 करोड़)।
  • कंपनी का EBITDA ₹68 करोड़ रहा, जो ऑपरेशनल कुशलता को दर्शाता है।

🤝 रणनीतिक निवेश: Gtropy और Zepto में दांव

MapMyIndia ने इस तिमाही में दो महत्वपूर्ण निवेश किए हैं:

  1. Gtropy Systems (IoT सब्सिडियरी) में ₹25 करोड़ निवेश करके हिस्सेदारी 75.98% से बढ़ाकर 96% कर दी गई है। यह कदम कंपनी की फ्लीट मैनेजमेंट और टेलीमैटिक्स क्षमताओं को मज़बूत करेगा।
  2. Zepto (क्विक कॉमर्स स्टार्टअप) में ₹25 करोड़ निवेश करके 0.049% हिस्सेदारी खरीदी गई। इस कदम से MapMyIndia तेजी से बढ़ते क्विक डिलीवरी बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।

📊 शेयर बाज़ार में प्रदर्शन और मार्केट कैप

7 अगस्त 2025 को NSE पर कंपनी का शेयर ₹1,759.9 पर बंद हुआ, जिससे इसकी बाज़ार पूंजी ₹10,040 करोड़ (लगभग $1.09 बिलियन) तक पहुँच गई है। यह दर्शाता है कि निवेशक MapMyIndia के विकास पथ और रणनीतिक निर्णयों में भरोसा कर रहे हैं।


🌐 भारत में डिजिटल मैपिंग और लोकेशन टेक का भविष्य

MapMyIndia का यह प्रदर्शन इस बात की ओर इशारा करता है कि भारत में डिजिटल लोकेशन टेक्नोलॉजी का बाज़ार न सिर्फ़ विकसित हो रहा है, बल्कि तेजी से मुनाफ़ा भी दे रहा है। ऑटोमोबाइल, ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक्स और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स जैसी कई इंडस्ट्रीज़ अब MapMyIndia के डेटा और IoT समाधानों पर निर्भर हो रही हैं।


📝 निष्कर्ष

MapMyIndia ने FY26 की पहली तिमाही में मजबूत ग्रोथ, बेहतर लाभप्रदता और रणनीतिक निवेशों के दम पर खुद को लोकेशन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में और मज़बूत किया है। आने वाले समय में कंपनी से और तेज़ी की उम्मीद की जा सकती है, खासकर जब डिजिटल इंडिया और स्मार्ट मोबिलिटी की दिशा में देश आगे बढ़ रहा है।

📌 निवेशकों और टेक वर्ल्ड को अब MapMyIndia के अगले कदम का बेसब्री से इंतज़ार रहेगा—क्या अगली तिमाही में यह ग्रोथ का सिलसिला जारी रहेगा?


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🎮 SuperGaming ने Web3 और Global Expansion पर किया बड़ा दांव!

SuperGaming

भारत की प्रमुख गेमिंग कंपनी SuperGaming ने अपने Series B फंडिंग राउंड में $15 मिलियन (लगभग ₹125 करोड़) जुटाए हैं। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Skycatcher और Steadview Capital ने किया, जो इसके मौजूदा निवेशक भी हैं। इस राउंड में a16z’s Speedrun, Bandai Namco के 021 Fund, Polygon Ventures, Neowiz, GFR Fund, IVC Japan, Loud.GG जैसे नामचीन निवेशकों और Polygon के सह-संस्थापक संदीप नेलवाल जैसे एंजल इन्वेस्टर्स ने भी भाग लिया।


🌍 इंडस गेम का इंटरनेशनल लॉन्च, सबसे पहले लैटिन अमेरिका में

SuperGaming अपने प्रमुख बैटल रॉयल गेम “Indus” का अंतरराष्ट्रीय लॉन्च करने की तैयारी में है। इसकी शुरुआत लैटिन अमेरिका से होगी, जहां कंपनी ने ब्राज़ील की ई-स्पोर्ट्स कंपनी Loud.GG के साथ साझेदारी की है। कंपनी ने प्रेस रिलीज़ में बताया कि इस फंड का उपयोग इंटरनेशनल मार्केट में विस्तार और गेम डेवेलपमेंट एवं पब्लिशिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए किया जाएगा।


📈 वैल्यूएशन $100 मिलियन के पार

2017 में नवनीत वरैच, संकते नाधानी, अविनाश पांडे, श्रीजीत जयनथन और रोबी जॉन द्वारा स्थापित Pune-based SuperGaming इससे पहले 2021 में Series A राउंड में $5.5 मिलियन जुटा चुकी है। इस नए निवेश के बाद, कंपनी ने दावा किया है कि उसका वैल्यूएशन $100 मिलियन (₹835 करोड़ से अधिक) को पार कर गया है।


🎯 लोकप्रिय गेम्स और SuperPlatform

SuperGaming के पोर्टफोलियो में कई हिट मोबाइल गेम्स शामिल हैं, जैसे:

  • MaskGun
  • Tower Conquest
  • Silly Royale

इन सभी को मिलाकर अब तक 200 मिलियन से ज्यादा इंस्टॉल हो चुके हैं। कंपनी का अपना रियल-टाइम मल्टीप्लेयर प्लेटफॉर्म भी है जिसे SuperPlatform कहा जाता है, जो Web2 और Web3 दोनों यूज़र्स को सपोर्ट करता है।


🔗 Web3 की दुनिया में SuperGaming की एंट्री

Web3 गेमिंग को ध्यान में रखते हुए, SuperGaming ने B3 GameChain के साथ साझेदारी की है। B3 एक Layer-3 ब्लॉकचेन है जो Base (Coinbase द्वारा इनक्यूबेटेड Ethereum Layer-2 नेटवर्क) पर बनाया गया है। इस साझेदारी से SuperGaming अब Web2 और Web3 दोनों तरह के खिलाड़ियों के लिए अनुभव को बेहतर बनाने पर काम कर रही है।

👉 गेमर्स के लिए इसका मतलब है:

  • Asset continuity (गेम एसेट्स एक से दूसरे गेम में ले जाना)
  • Interoperable progression (एक ही अकाउंट से कई गेम्स में प्रगति)
  • Digital ownership (डिजिटल आइटम्स पर मालिकाना हक)

SuperGaming का लोकप्रिय गेम Silly Royale अब B3 पर लाइव है और Web3 की इन सभी खूबियों को सपोर्ट करता है।


📊 वित्तीय प्रदर्शन: FY24 में ₹43.4 करोड़ की कमाई

मार्च 2024 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष (FY24) में SuperGaming ने:

  • ₹43.4 करोड़ की राजस्व कमाई
  • और ₹3.9 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया

यह मुनाफा Web3 में निवेश और नए बाजारों में प्रवेश के बावजूद आया है, जो कंपनी की सस्टेनेबल ग्रोथ रणनीति को दर्शाता है।


🕹️ भारत में गेमिंग इंडस्ट्री का भविष्य उज्ज्वल

एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का गेमिंग मार्केट FY29 तक $9.2 बिलियन (₹76,000 करोड़ से अधिक) तक पहुंच सकता है। SuperGaming जैसी कंपनियां इस ग्रोथ की अगुआई कर रही हैं, जो इनोवेशन, तकनीक और गेमर्स की जरूरतों को समझकर गेमिंग का भविष्य गढ़ रही हैं।


🔮 आगे का रास्ता: भारत से ग्लोबल तक

SuperGaming की रणनीति अब केवल भारत तक सीमित नहीं रही। अब यह कंपनी:

  • लैटिन अमेरिका, MENA और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे इंटरनेशनल मार्केट्स को टारगेट कर रही है।
  • Web3 के ज़रिए गेमिंग में ट्रांसपेरेंसी और डिजिटल ओनरशिप को बढ़ावा देने की योजना बना रही है।
  • इंटरनेशनल पार्टनरशिप्स और इनोवेटिव टेक्नोलॉजी के ज़रिए गेमिंग इंडस्ट्री को एक नई दिशा देने की कोशिश कर रही है।

🧠 निष्कर्ष

SuperGaming ने Series B फंडिंग के साथ न केवल अपना वेल्यूएशन $100 मिलियन से ऊपर पहुंचाया है, बल्कि एक स्पष्ट मैसेज दिया है कि भारत में बनी कंपनियां भी वैश्विक स्तर पर गेमिंग का भविष्य तय कर सकती हैं। Web3 में एंट्री, इंडस का इंटरनेशनल लॉन्च और मजबूत वित्तीय परफॉर्मेंस इस बात का प्रमाण हैं कि SuperGaming अब गेम चेंजर बन चुकी है।

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Read more : Bluestone का IPO छोटा हुआ, घाटा 56% बढ़ा

💍 Bluestone का IPO छोटा हुआ, घाटा 56% बढ़ा

Bluestone

प्रमुख आभूषण ब्रांड Bluestone ने अपने आरंभिक सार्वजनिक प्रस्ताव (IPO) का आकार घटा दिया है। कंपनी के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) के अनुसार, यह कटौती प्राइमरी और सेकेंडरी दोनों हिस्सों में की गई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में Bluestone का घाटा 56% बढ़ गया, जो कंपनी की कमाई में हुई 40% की वृद्धि से कहीं अधिक है।


💰 राजस्व में 40% की वृद्धि, लेकिन घाटा और तेज़

Bluestone की ऑपरेटिंग इनकम FY25 में ₹1,770 करोड़ रही, जो पिछले वित्त वर्ष FY24 के ₹1,266 करोड़ के मुकाबले 40% अधिक है। कंपनी के लिए आय का एकमात्र स्रोत रहा — हीरे, सोने, प्लेटिनम, मणि और मोती के आभूषणों की बिक्री। FY25 में औसत ऑर्डर वैल्यू (AOV) ₹47,671 रही।

यह ग्रोथ स्टोर मैच्योरिटी और विस्तारित प्रोडक्ट पोर्टफोलियो के कारण आई है। मार्च 2025 तक Bluestone के देशभर में 275 स्टोर थे जो 117 शहरों और 26 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में फैले हुए हैं।


🌐 ऑनलाइन बिक्री का योगदान केवल 6.66%

ऑनलाइन बिक्री का कंपनी की कुल बिक्री में सिर्फ 6.66% योगदान रहा, बाकी की कमाई स्टोर्स और अन्य चैनलों से हुई।


📈 खर्चों में भारी उछाल

  • Bluestone के मटेरियल कॉस्ट में 46% की वृद्धि हुई, जो ₹1,098 करोड़ तक पहुंच गई। यह कंपनी के कुल खर्चों का 54% है।
  • कर्मचारी लाभ खर्च ₹203 करोड़ रहा, जिसमें 47% की वृद्धि दर्ज की गई।
  • विज्ञापन और प्रचार खर्च ₹159 करोड़ रहा, जो FY24 से 28% अधिक है।
  • अन्य ऑपरेशनल और वित्तीय खर्चों ने ₹643 करोड़ जोड़े।

कुल मिलाकर, Bluestone के कुल खर्च FY25 में 42% बढ़कर ₹2,050 करोड़ हो गए, जो FY24 में ₹1,446 करोड़ थे।


📉 नेट घाटा 56% बढ़कर ₹222 करोड़ हुआ

खर्चों की तेजी से वृद्धि के चलते Bluestone का नेट लॉस FY25 में ₹222 करोड़ तक पहुंच गया, जो FY24 में ₹142 करोड़ था। हालांकि, कंपनी ने ₹133 करोड़ का पॉजिटिव EBITDA दर्ज किया और EBITDA मार्जिन 7.27% रहा।

हर ₹1 की ऑपरेटिंग इनकम के लिए कंपनी ने ₹1.16 खर्च किए, जो दर्शाता है कि कंपनी अभी भी आर्थिक रूप से कुशलता पाने की प्रक्रिया में है।


💵 ब्लूस्टोन के पास हैं मजबूत संपत्तियाँ

मार्च 2025 तक Bluestone के पास ₹2,130 करोड़ की करेंट एसेट्स थीं, जिनमें से ₹187 करोड़ कैश और बैंक बैलेंस में थे। यह कंपनी की लिक्विडिटी स्थिति को दर्शाता है।


🤝 FY25 में दो रणनीतिक निवेश

  1. Bluestone ने Ethereal House Private Limited (EHPL) में ₹17 करोड़ में कंट्रोलिंग हिस्सेदारी खरीदी।
  2. साथ ही Redefine Fashion Private Limited में ₹11 करोड़ के शेयर खरीदे।

हालांकि, EHPL के पास कोई ऑपरेशनल बिजनेस या महत्वपूर्ण एसेट्स नहीं थे। इसलिए इस अधिग्रहण को कॉर्पोरेट कंट्रोल ट्रांजैक्शन माना गया, और इसमें गुडविल या एसेट रिवैल्यूएशन शामिल नहीं था।

इस कारण, FY25 के आंकड़े कंसॉलिडेटेड हैं जबकि FY24 के आंकड़े स्टैंडअलोन बैलेंस शीट को दर्शाते हैं।


📉 IPO घटाने का कारण क्या?

Bluestone ने अभी अपने IPO के कटौती का कारण सार्वजनिक रूप से नहीं बताया है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ते घाटे, ऑनलाइन बिक्री की सीमित हिस्सेदारी, और IPO के प्रति निवेशकों की सतर्कता इसके पीछे के प्रमुख कारण हो सकते हैं।


📊 निष्कर्ष

हालांकि Bluestone ने FY25 में राजस्व के स्तर पर अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन तेजी से बढ़ता हुआ घाटा निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। कंपनी ने एक सकारात्मक संकेत के रूप में EBITDA लाभ और संपत्ति स्थिरता दिखाई है, लेकिन ऑपरेशनल दक्षता और प्रॉफिटेबिलिटी को लेकर अभी और सुधार की ज़रूरत है।

IPO में की गई कटौती से यह संकेत मिलता है कि कंपनी खुद भी अपने मूल्यांकन को लेकर सतर्क है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि Bluestone कैसे डिजिटल बिक्री को मजबूत, खर्च नियंत्रण और लाभप्रदता के रास्ते पर आगे बढ़ती है।


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🏥 IPO से पहले Practo की ऐतिहासिक वापसी

Practo

✍️ विशेष रिपोर्ट | www.FundingRaised.in

भारत की प्रमुख डिजिटल हेल्थटेक कंपनी Practo ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में पहली बार पूरे वर्ष का ऑपरेटिंग EBITDA प्रॉफिट दर्ज किया है, जो उसके आने वाले IPO से पहले एक मजबूत संकेत माना जा रहा है। कंपनी ने अमेरिका में पायलट लॉन्च कर दिया है, जहां 50 से अधिक ग्राहक पहले ही जुड़ चुके हैं।

📊 घाटे से मुनाफे की ओर Practo की उड़ान

Bengaluru स्थित Practo ने FY25 में ₹15 करोड़ का ऑपरेटिंग प्रॉफिट दर्ज किया, जबकि पिछले वर्ष FY24 में उसे ₹17 करोड़ का घाटा हुआ था। इसका मतलब है कि Practo ने एक साल के अंदर ही खुद को लाभ की स्थिति में पहुंचा दिया।

  • FY25 में कंपनी की ऑपरेशनल रेवेन्यू ₹234 करोड़ रही।
  • कुल GMV (Gross Merchandise Value) ₹3,500 करोड़ पर स्थिर रही।
  • कंपनी ने सकारात्मक कैश फ्लो भी दर्शाया — यह संकेत है कि कंपनी अब पूंजी के प्रबंधन में सक्षम हो चुकी है।

🧠 टेक्नोलॉजी-ड्रिवन हेल्थकेयर: AI से स्मार्ट ट्रीटमेंट

Practo की सफलता के पीछे एक बड़ा कारण है उसका टेक्नोलॉजी पर फोकस। कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को इंटीग्रेट किया है जिससे:

  • मरीजों को जल्दी और सटीक इलाज तक पहुंच मिले,
  • डॉक्टरों को बेहतर डेटा और स्मार्ट वर्कफ्लो उपलब्ध हो।

Practo के अनुसार, कंपनी के पास 4 करोड़ से ज्यादा स्ट्रक्चर्ड डेटा पॉइंट्स हैं जिनके ज़रिए वह AI आधारित हेल्थ इनसाइट्स दे पा रही है।

📈 तीन सालों में 109% सुधार

FY22 में Practo को ₹162 करोड़ का घाटा हुआ था। तीन साल बाद FY25 में उसने ₹15 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया। यानी 109% का सुधार — यह भारतीय स्टार्टअप्स के लिए एक प्रेरणा है।

वर्षEBITDAराजस्वGMVलाभ/घाटा
FY22₹162 करोड़ घाटा
FY24₹-17 करोड़₹—₹—घाटा
FY25₹15 करोड़ मुनाफा₹234 करोड़₹3,500 करोड़लाभ

🏥 Care Navigation मॉडल बना सफलता की कुंजी

Practo की कोर स्ट्रैटेजी है ‘Care Navigation’ — इसमें मरीजों को सही डॉक्टर, सही इलाज और सही समय पर कनेक्ट किया जाता है।

  • ग्रॉस मार्जिन FY25 में 30% CAGR से बढ़ा।
  • Contribution Margin FY24 में 40% से बढ़कर FY25 में 46% हो गया।

📢 Patient Outcome रिपोर्ट: भारत में पहली बार

Practo ने भारत की पहली डिजिटल हेल्थ फर्म बनकर Patient Reported Outcome Metrics (PROMs) जारी किए हैं:

  • 78% टेलीमेडिसिन यूज़र ने 3 हफ्ते में रिकवरी की सूचना दी।
  • 80% फिजिकल कंसल्टेशन यूज़र ने भी रिकवरी की पुष्टि की।

यह आंकड़े दर्शाते हैं कि Practo की सेवाएं सिर्फ डिजिटल नहीं, बल्कि प्रभावी और नतीजादायक भी हैं।

🌍 UAE और USA में बढ़ता Practo

मई 2025 में Practo ने अपना कंज़्यूमर प्लेटफॉर्म UAE में लॉन्च किया:

  • कुछ ही हफ्तों में 50,000 एक्टिव यूज़र्स जुड़ गए।
  • ₹100 करोड़ का GMV रन रेट भी पार कर लिया।

अब Practo ने अमेरिका में पायलट लॉन्च भी कर दिया है। शुरुआती फेज़ में ही 50-60 पेड कस्टमर साइन अप कर चुके हैं। ये आंकड़े कंपनी की ग्लोबल स्ट्रैटेजी की मजबूती को दर्शाते हैं।

🌐 अंतरराष्ट्रीय विस्तार का लक्ष्य

Practo का उद्देश्य है कि:

  • अगले कुछ वर्षों में इंटरनेशनल रेवेन्यू को दोगुना किया जाए,
  • साथ ही प्रॉफिटेबिलिटी और स्केलेबिलिटी बनाए रखी जाए।

🔚 निष्कर्ष: Practo IPO के लिए तैयार?

Practo का मुनाफा, AI इंटीग्रेशन, मरीजों के सकारात्मक अनुभव और इंटरनेशनल विस्तार ये सभी संकेत देते हैं कि कंपनी अब IPO के लिए पूरी तरह तैयार है। यदि Practo इसी गति से आगे बढ़ता रहा, तो वह भारत की सबसे बड़ी ग्लोबल हेल्थटेक कंपनियों में शुमार हो सकता है।


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✍️ रिपोर्ट: FundingRaised Hindi Team | July 2025

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🚀 IPO से पहले फाउंडर्स का बड़ा दांव

IPO

भारतीय स्टार्टअप फाउंडर्स इस साल संभावित IPO से पहले अपनी कंपनियों में हिस्सेदारी बढ़ाने में जुटे हुए हैं। यह चलन इस समय कई लेट-स्टेज स्टार्टअप्स में देखा जा रहा है, जहां फाउंडर्स बढ़ा हुआ आत्मविश्वास और कंट्रोल की इच्छा दिखा रहे हैं।

SEBI के नए रेगुलेशंस के बाद यह ट्रेंड और भी तेजी से उभर रहा है, जिससे अब फाउंडर्स को पब्लिक लिस्टिंग से पहले ESOP का उपयोग करना और हिस्सेदारी बढ़ाना आसान हो गया है।


🟡 Lenskart: IPO से पहले Peyush Bansal की बड़ी वापसी

सबसे चर्चित उदाहरण Lenskart का है, जहां को-फाउंडर Peyush Bansal ने Rs 222 करोड़ में 2.5% हिस्सेदारी वापस खरीदी है। यह हिस्सेदारी उन्होंने SoftBank और Chiratae जैसे निवेशकों से खरीदी है।

  • 📉 सबसे खास बात: यह डील $1 बिलियन वैल्यूएशन पर हुई, जबकि कंपनी की पिछली प्राइवेट मार्केट वैल्यूएशन $10 बिलियन थी।
  • 🎯 यह कदम Lenskart के संभावित IPO फाइलिंग से ठीक पहले आया है, जिससे यह भारत के सबसे बड़े फाउंडर-बायबैक ट्रांजेक्शनों में से एक बन गया है।

🏗️ Zetwerk: फाउंडर्स ने लिया कर्ज और बढ़ाई हिस्सेदारी

Zetwerk के को-फाउंडर्स Amrit Acharya और Srinath Ramakkrushnan ने ₹600 करोड़ का व्यक्तिगत कर्ज लेकर कंपनी में निवेश किया है। इस कदम से उनकी सम्मिलित हिस्सेदारी में करीब 2% की बढ़ोतरी हुई है।

📌 यह दर्शाता है कि फाउंडर्स IPO से पहले अपने भरोसे को दर्शाने के लिए वित्तीय जोखिम उठाने को तैयार हैं।


📺 Amagi और 📱 InMobi: DRHP से पहले फाउंडर सपोर्ट

Amagi में भी फाउंडर्स ने ₹9 करोड़ मूल्य के शेयर्स खरीदे हैं। वहीं InMobi ने ₹32 करोड़ जुटाए हैं जो फाउंडर्स Naveen Tewari, Abhay Singhal, Piyush Shah और Mohit Saxena द्वारा लगाए गए हैं। इसमें Singapore आधारित निवेशक Vatera Pte Ltd भी शामिल हैं।

दोनों कंपनियां IPO की तैयारी कर रही हैं और जल्द ही DRHP दाखिल करने की योजना में हैं


📦 Meesho: ESOP से बढ़ाया फाउंडर होल्डिंग

Meesho के फाउंडर्स Vidit Aatrey और Sanjeev Barnwal ने ESOP के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी में इज़ाफा किया है।

  • 📈 Aatrey को 20.65 लाख शेयर
  • 📈 Barnwal को 6.59 लाख शेयर

SEBI के जून में आए बदलावों के बाद यह allotment और आसान हुआ, जिससे फाउंडर्स के लिए हिस्सेदारी बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ।


📜 पुराना ट्रेंड, नया जोश: Zomato, Delhivery और Swiggy का उदाहरण

फाउंडर्स के शेयरहोल्डिंग बढ़ाने का यह ट्रेंड नया नहीं है:

  • 🥗 Zomato (2021): Deepinder Goyal को IPO से पहले 368 मिलियन स्टॉक ऑप्शंस दिए गए।
  • 📦 Delhivery (2021): Sahil Barua और Kapil Bharati को ₹25 करोड़ के शेयर्स अलॉट किए गए।
  • 💻 PB Fintech: Yashish Dahiya और Alok Bansal को 1.02 करोड़ शेयर्स दिए गए।
  • 🍔 Swiggy (2023): $271 मिलियन का ESOP प्लान, जिसमें $200 मिलियन सिर्फ फाउंडर Sriharsha Majety के लिए था।

Swiggy ने अपना IPO नवंबर 2024 में लॉन्च किया था।


💹 क्यों फाउंडर्स कर रहे हैं निवेश?

  • 🎯 मार्केट को सिग्नल देना: जब फाउंडर्स खुद निवेश करते हैं, तो यह निवेशकों को भरोसा देता है कि कंपनी IPO के बाद भी परफॉर्म करेगी।
  • 🔁 कंट्रोल बनाए रखना: IPO के बाद फाउंडर हिस्सेदारी कम हो जाती है। इससे पहले उन्हें हिस्सेदारी बढ़ाने का मौका मिलता है।
  • 💰 पहले से हो चुकी लिक्विडिटी: कई फाउंडर्स ने पहले ही बड़े अमाउंट में लिक्विडिटी पा ली थी, जिससे उनके पास दोबारा निवेश करने के लिए पर्याप्त पूंजी है।

🤔 लेकिन ये चाल हर बार काम नहीं करती

IPO के बाद स्टॉक की वैल्यू गिरने पर फाउंडर निवेश आमतौर पर ज्यादा असर नहीं डालता। साथ ही, जो फाउंडर्स IPO के बाद ऊंची कीमत पर निवेश करते हैं, वो अब भी बहुत कम उदाहरण हैं।

कंपनी के ग्रोथ फेज के आखिरी पायदान पर यह निवेश बाजार को मजबूत सिग्नल देता है — खासकर Lenskart जैसे यूनिकॉर्न IPOs के लिए।


📌 निष्कर्ष: IPO की तैयारी में फाउंडर्स का आत्मविश्वास झलक रहा

इन सभी उदाहरणों से साफ है कि भारतीय स्टार्टअप फाउंडर्स IPO से पहले अपनी पकड़ मजबूत करने के मूड में हैं। वे न सिर्फ अपने निवेश से भरोसा दिखा रहे हैं, बल्कि मार्केट को यह संकेत दे रहे हैं कि वे अपने विज़न और कंपनी की दिशा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

📊 फाउंडर रिइनवेस्टमेंट का यह दौर हमें बताता है:

  • IPO सिर्फ पैसे जुटाने का नहीं, बाज़ार में फाउंडर विश्वास का भी इम्तिहान है।
  • निवेशकों के लिए यह संकेत है कि फाउंडर्स अब भी “स्किन इन द गेम” रखते हैं।
  • आने वाले महीनों में और स्टार्टअप्स इस राह पर चल सकते हैं।

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