⚡ Ola Electric से Hyundai और Kia का बाहर निकलना

ola electric

भारतीय इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। दक्षिण कोरिया की दो प्रमुख ऑटो कंपनियां — Hyundai Motor और Kia Corporation — ने भारत की EV कंपनी Ola Electric से अपना पूरा निवेश निकाल लिया है। दोनों कंपनियों ने मंगलवार को ब्लॉक डील के ज़रिए कुल ₹690 करोड़ में अपनी हिस्सेदारी बेच दी, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि वे भारत में अपने EV निवेश को रणनीतिक रूप से कम कर रही हैं।


💸 कितनी हिस्सेदारी बेची गई और किसे?

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बुल्क डील डेटा के मुताबिक:

  • Hyundai ने अपनी 2.47% हिस्सेदारी ₹552 करोड़ में बेची।
  • Kia ने अपनी 0.62% हिस्सेदारी ₹137 करोड़ में बेची।

इस डील का सबसे बड़ा खरीदार रहा Citigroup Global Markets Mauritius, जिसने Ola Electric की 1.95% हिस्सेदारी (8.61 करोड़ शेयर) ₹435 करोड़ में खरीदी।

📌 दिलचस्प बात यह रही कि बाकी खरीदारों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे डील को लेकर बाज़ार में कुछ सवाल भी उठे हैं।


📉 Ola Electric की गिरती आर्थिक स्थिति

Hyundai और Kia का Ola Electric से बाहर निकलना ऐसे समय पर हुआ है जब कंपनी की वित्तीय स्थिति लगातार कमजोर हो रही है।

🔻 FY25 की चौथी तिमाही में Ola Electric को ₹862 करोड़ का घाटा हुआ, जो कि पिछले साल की समान तिमाही (Q4 FY24) के ₹418 करोड़ के घाटे से दोगुना है।

📉 कंपनी की ऑपरेटिंग इनकम में भी भारी गिरावट आई है – यह 50% तक घटकर ₹611 करोड़ रह गई।

🔴 पूरे FY25 में, कंपनी को कुल ₹2,276 करोड़ का घाटा हुआ, जबकि FY24 में यह ₹1,584 करोड़ था।

इस वित्तीय दबाव का सीधा असर कंपनी के शेयर पर भी पड़ा है। बुधवार को Ola Electric का शेयर 8% से ज्यादा गिरकर ₹49.61 पर बंद हुआ, जिससे कंपनी का मार्केट कैप ₹21,882 करोड़ ($2.57 बिलियन) तक सिमट गया।


🔄 2019 में हुआ था बड़ा निवेश

बात करें पीछे की, तो 2019 में Hyundai और Kia ने संयुक्त रूप से $300 मिलियन (करीब ₹2,400 करोड़) का निवेश Ola Electric में किया था। यह निवेश भारत में उनके EV विस्तार की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा था।

लेकिन 5 साल बाद अब दोनों कंपनियों ने एक साथ कंपनी से पूरी तरह से बाहर निकलने का निर्णय लिया है। इसे ऑटोमोबाइल सेक्टर के विशेषज्ञ एक रणनीतिक रिव्यू के रूप में देख रहे हैं।


❓ Ola Electric के लिए आगे का रास्ता

Hyundai और Kia जैसे बड़े रणनीतिक निवेशकों का बाहर निकलना Ola Electric के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। इससे:

  • कंपनी की रणनीतिक स्थिरता पर असर पड़ सकता है।
  • इनोवेशन और प्रोडक्ट डिवेलपमेंट के लिए सहयोग की संभावनाएं घट सकती हैं।

हालांकि, Citigroup जैसे वैश्विक निवेशक का आना यह दर्शाता है कि Ola Electric में अब भी निवेशकों की रुचि बनी हुई है, लेकिन यह देखना बाकी है कि कंपनी किस तरह से FY26 तक मुनाफे की ओर बढ़ेगी


🕵️‍♂️ खरीदारों की पहचान क्यों नहीं बताई गई?

Hyundai और Kia ने जो हिस्सेदारी बेची, उसमें से 63% से ज्यादा हिस्सेदारी उन निवेशकों ने खरीदी जिनकी पहचान सामने नहीं आई है।

इससे बाज़ार में कुछ आशंकाएं भी जताई जा रही हैं, जैसे:

  • क्या ये निवेशक लंबे समय तक कंपनी में टिकेंगे?
  • क्या Ola Electric को कोई प्राइवेट इक्विटी या रणनीतिक निवेशक धीरे-धीरे टेकओवर कर रहा है?

इन सवालों का जवाब आने वाले समय में Ola Electric की फाइनेंशियल रिपोर्ट्स और बोर्ड स्ट्रक्चर में हो सकने वाले बदलावों से मिल सकता है।


📈 Ola Electric: भारत का EV फ्लैगशिप या संघर्षरत स्टार्टअप?

Ola Electric ने भारत के इलेक्ट्रिक स्कूटर बाजार में तेज़ी से पकड़ बनाई थी और अपने IPO के ज़रिए एक यूनिकॉर्न की तरह उभरी। लेकिन पिछले कुछ समय से कंपनी को लगातार:

  • उत्पादन में चुनौतियां,
  • वित्तीय घाटा,
  • और प्रौद्योगिकी संबंधी सवालों का सामना करना पड़ रहा है।

इन सबके बीच Hyundai और Kia जैसे दिग्गजों का बाहर निकलना Ola Electric के भविष्य के लिए सावधानी की घंटी हो सकता है।


✍️ निष्कर्ष

भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का भविष्य उज्ज्वल है, लेकिन यह रास्ता आसान नहीं है। Ola Electric जैसे स्टार्टअप्स को:

  • वित्तीय अनुशासन,
  • रणनीतिक साझेदारों की स्थिरता,
  • और तकनीकी नवाचार के साथ बाज़ार में टिकना होगा।

Hyundai और Kia का बाहर निकलना एक सिग्नल है कि बड़ी कंपनियां भी अब अपने EV निवेशों की समीक्षा कर रही हैं, और Ola Electric को अब अपने दम पर टिकने की ज़रूरत है।

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Read more :🚨 CoinDCX में सीनियर लेवल पर भारी उथल-पुथल,

🚨 CoinDCX में सीनियर लेवल पर भारी उथल-पुथल,

CoinDCX

भारत की अग्रणी क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज CoinDCX इस समय एक और बड़ी आंतरिक चुनौती का सामना कर रही है। सूत्रों के अनुसार, कंपनी के कई शीर्ष अधिकारी – जैसे कि चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (CTO), हेड ऑफ फाइनेंस और हेड ऑफ लीगल – जल्द ही कंपनी से विदा लेने जा रहे हैं।

इससे पहले भी कंपनी ने लागत घटाने और संचालन को बेहतर करने के उद्देश्य से कई ढांचागत बदलाव किए थे, लेकिन अब यह टॉप-लेवल एग्जिट्स एक नए मोड़ की ओर इशारा कर रहे हैं।


🏢 CoinDCX में कौन-कौन छोड़ रहा है पद?

सूत्रों के अनुसार, CoinDCX के निम्न वरिष्ठ अधिकारी कंपनी छोड़ रहे हैं:

  • CTO (चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर)
  • हेड ऑफ फाइनेंस (वित्त प्रमुख)
  • हेड ऑफ लीगल (कानूनी प्रमुख)

इन पदों से हटना कंपनी के आंतरिक पुनर्गठन का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य संचालन को सरल बनाना और लागत में कटौती करना है।


🔁 फिर से छंटनी की शुरुआत

CoinDCX ने एक बार फिर लेऑफ (छंटनी) की प्रक्रिया शुरू कर दी है, हालांकि प्रभावित कर्मचारियों की संख्या स्पष्ट नहीं है।

📌 पिछली छंटनी – अगस्त 2023 में CoinDCX ने लगभग 12% कर्मचारियों को नौकरी से निकाला था, जो कि करीब 70 लोगों पर असर डालने वाला निर्णय था।


📉 कारोबार में गिरावट और नियमों की परेशानी

सूत्रों का कहना है कि यह बदलाव कंपनी के लिए चुनौतीपूर्ण समय में हो रहे हैं क्योंकि CoinDCX को ट्रेडिंग वॉल्यूम में गिरावट और बढ़ते नियामकीय दबाव (compliance headache) का सामना करना पड़ रहा है।

भारत में क्रिप्टो सेक्टर अभी भी स्पष्ट रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के इंतजार में है, और इससे जुड़े स्टार्टअप्स को लगातार वित्तीय और कानूनी जांच का सामना करना पड़ रहा है।


📣 CoinDCX ने दी प्रतिक्रिया

कंपनी के प्रवक्ता ने इन टॉप-लेवल एग्जिट्स की पुष्टि करते हुए कहा:

“हम अपनी टीमों को मजबूत बना रहे हैं और लीडरशिप बेंच को नए टैलेंट्स के साथ सशक्त कर रहे हैं। हमारे पास इस समय 100 से अधिक ओपन पोजीशन्स हैं, जिनमें CFO और जनरल काउंसल जैसी सीनियर भूमिकाएं शामिल हैं।”

उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी ने अपने अंतरराष्ट्रीय विस्तार से कारोबार में तेज़ी से ग्रोथ देखी है और यह ट्रेंड आगे भी जारी रहेगा।


🌍 MENA क्षेत्र में CoinDCX का विस्तार

CoinDCX ने हाल ही में बहरीन में अपनी सहायक कंपनी BitOasis के ज़रिए अपना परिचालन शुरू किया है। यह कदम MENA (Middle East & North Africa) क्षेत्र में कंपनी के विस्तार की रणनीति का हिस्सा है।

CEO सुमित गुप्ता के नेतृत्व में CoinDCX का लक्ष्य है कि भविष्य में कुल राजस्व का 30% इसी अंतरराष्ट्रीय बाजार से आए।


🦄 एक यूनिकॉर्न की कहानी

CoinDCX की यात्रा 2018 में शुरू हुई थी और अगस्त 2021 में यह कंपनी यूनिकॉर्न बनी, जब इसे $90 मिलियन की सीरीज़ C फंडिंग मिली थी।

इसके बाद अप्रैल 2022 में कंपनी ने $135 मिलियन जुटाए और इसका वैल्यूएशन $2 बिलियन से ऊपर पहुंच गया।

📉 हालांकि, पिछले तीन वर्षों में कंपनी ने कोई भी नई बाहरी फंडिंग नहीं जुटाई है, जो इंडस्ट्री की अनिश्चितता को दर्शाता है।


🔍 भारत में क्रिप्टो सेक्टर की चुनौतियां

भारत में क्रिप्टो कंपनियां एक लंबे समय से वित्तीय निगरानी एजेंसियों की जांच के दायरे में हैं।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने CoinDCX सहित कई कंपनियों को FEMA (Foreign Exchange Management Act) के संभावित उल्लंघनों की जांच के लिए समन भेजा है।

📄 रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार जून 2025 में एक डिस्कशन पेपर जारी करने की योजना बना रही है, जिसमें क्रिप्टो एसेट्स को लेकर संभावित नीतियों पर चर्चा होगी।

यह पेपर IMF (International Monetary Fund) और FSB (Financial Stability Board) की संयुक्त रिपोर्ट पर आधारित होगा।


🧠 CoinDCX के लिए आगे का रास्ता

CoinDCX के सामने इस समय कई मोर्चों पर चुनौतियां हैं:

  • बिज़नेस वॉल्यूम में गिरावट
  • रेगुलेटरी अनिश्चितता
  • अंदरूनी टीम में बड़े बदलाव

लेकिन कंपनी के प्रवक्ता और CEO का कहना है कि:

“हम लगातार अपने बिज़नेस मॉडल को मजबूत कर रहे हैं और इंटरनेशनल मार्केट्स में हमारी मौजूदगी तेज़ी से बढ़ रही है।”


✍️ निष्कर्ष

भारत में क्रिप्टो सेक्टर का भविष्य अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन CoinDCX जैसी कंपनियों का विकास और चुनौतियों से निपटने की रणनीति इस पूरे क्षेत्र के लिए एक टेस्ट केस की तरह है।

जहां एक ओर टॉप लेवल एग्जिट्स और छंटनी से कंपनी को आंतरिक रूप से झटका लगा है, वहीं दूसरी ओर इंटरनेशनल विस्तार और नेतृत्व पुनर्गठन से नई उम्मीदें भी जगी हैं।

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Probo ने नीति प्रमुख के रूप में Shimal Kapoor की नियुक्ति की,

Probo

भारत के तेजी से उभरते opinion trading प्लेटफॉर्म Probo ने नीति और विनियामक मामलों को मज़बूती देने के लिए Shimal Kapoor को अपना नया Head of Policy नियुक्त किया है। कंपनी का कहना है कि यह नियुक्ति भारत के स्किल-बेस्ड गेमिंग सेक्टर में नीतिगत संवाद को दिशा देने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।


🎯 नियामकों से संवाद में मिलेगी मज़बूती

Probo, जो वर्तमान में 3.4 करोड़ से अधिक यूज़र्स को सेवाएं दे रहा है, ने कहा कि यह रणनीतिक नियुक्ति कंपनी की उस योजना का हिस्सा है जिसके तहत वह देश में स्किल-बेस्ड गेमिंग के लिए मजबूत रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को सहयोग देना चाहता है।

🧩 Shimal Kapoor कौन हैं?

Shimal Kapoor कानून और पब्लिक पॉलिसी की दुनिया में एक अनुभवी चेहरा हैं। उन्होंने इससे पहले:

  • Meta (पूर्व में Facebook)
  • World Bank Group
  • और भारत की प्रमुख लॉ फर्म Shardul Amarchand Mangaldas & Co. में काम किया है।

अब वह Probo में नीति निर्माण, सरकारी निकायों से संवाद और रेगुलेटरी एडवोकेसी की जिम्मेदारी संभालेंगी।


📢 Shimal Kapoor का बयान

अपनी नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए Shimal ने कहा:

“भारत का स्किल-बेस्ड गेमिंग सेक्टर एक बड़े बदलाव के मोड़ पर है, जो डिजिटल इनोवेशन और आर्थिक प्रगति दोनों में योगदान दे रहा है। Probo ने बहुत कम समय में खुद को opinion trading में अग्रणी बना लिया है। मैं अपनी विशेषज्ञता से कंपनी को नीति-निर्माताओं और स्टेकहोल्डर्स से बेहतर जुड़ाव में सहयोग करने के लिए उत्साहित हूं।”


📱 क्या है Probo?

Probo एक opinion trading platform है, जहां यूज़र्स खेल, एंटरटेनमेंट और करंट अफेयर्स जैसे असली दुनिया के इवेंट्स पर अपनी राय देकर ट्रेडिंग कर सकते हैं।

इसके फीचर्स में शामिल हैं:

  • Yes/No type predictions
  • Real-time opinion market
  • Rewards based on market outcomes

Probo का दावा है कि वह भारत का सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय ओपिनियन ट्रेडिंग ऐप बन चुका है।


💹 जबरदस्त राजस्व वृद्धि

TheKredible के आंकड़ों के अनुसार, Probo ने वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) में ऑपरेशनल रेवेन्यू में जबरदस्त छलांग लगाई है:

वित्तीय वर्षऑपरेशनल रेवेन्यूनेट प्रॉफिट
FY23₹86 करोड़₹3.7 करोड़
FY24₹459 करोड़₹92 करोड़

यह कंपनी के स्केलेबिलिटी और प्रभावशाली ग्रोथ को दर्शाता है। बहुत कम भारतीय स्टार्टअप्स इतने कम समय में प्रॉफिटेबिलिटी हासिल कर पाते हैं।


💼 निवेशकों का भरोसा

Probo को देश-विदेश के प्रमुख वेंचर कैपिटल फर्म्स का समर्थन प्राप्त है, जिनमें शामिल हैं:

  • Peak XV Partners (पूर्व में Sequoia India)
  • Elevation Capital
  • Fundamentum Partnership

इन निवेशकों का उद्देश्य Probo को भारत में स्किल-बेस्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लीडर्स में लाना है।


🧠 क्यों ज़रूरी है नीति प्रमुख की नियुक्ति?

भारत में ऑनलाइन गेमिंग और स्किल-बेस्ड गेमिंग से जुड़े नियम अभी भी विकासशील अवस्था में हैं। केंद्र और राज्य सरकारें विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रही हैं, जैसे:

  • गेमिंग को लेकर टैक्सेशन नीति
  • कौन-से गेम skill-based हैं और कौन-से chance-based
  • यूज़र्स की सुरक्षा
  • विज्ञापन और प्रचार के नियम

ऐसे समय में किसी कंपनी का सरकार और नीति-निर्माताओं से संवाद में सक्रिय होना बहुत आवश्यक हो जाता है। Shimal Kapoor जैसे अनुभवी नीति विशेषज्ञ के जुड़ने से Probo को:

  • विनियामक परिवेश को समझने
  • सरकार के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने
  • और स्किल-बेस्ड गेमिंग को मान्यता दिलाने में सहायता मिलेगी।

📍 आगे का रास्ता

Probo की रणनीति स्पष्ट है — वह न केवल टेक्नोलॉजी और यूज़र एक्सपीरियंस में अग्रणी बनना चाहता है, बल्कि भारत में ओपिनियन ट्रेडिंग के लिए एक सशक्त और जिम्मेदार फ्रेमवर्क का हिस्सा भी बनना चाहता है।

Shimal Kapoor की नियुक्ति इसी दिशा में एक निर्णायक कदम है। आने वाले महीनों में हम देखेंगे कि Probo भारत के गेमिंग, टेक और नीति निर्माण के संगम पर कैसे अपनी पहचान और मजबूत करता है।


📢 निष्कर्ष

भारत में स्किल-बेस्ड गेमिंग इंडस्ट्री को एक स्पष्ट, पारदर्शी और यूज़र-फ्रेंडली रेगुलेटरी वातावरण की ज़रूरत है। Probo ने यह संकेत दिया है कि वह न सिर्फ इस सेक्टर को लीड करना चाहता है, बल्कि इसे नीति के स्तर पर भी सुरक्षित और स्थिर बनाना चाहता है।

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Read more:💰 Stable Money को मिला ₹173 करोड़ का निवेश,

💰 Stable Money को मिला ₹173 करोड़ का निवेश,

Stable Money

बेंगलुरु स्थित वेल्थटेक प्लेटफॉर्म Stable Money ने अपने नवीनतम फंडिंग राउंड में ₹173 करोड़ (लगभग $20 मिलियन) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व Fundamentum Partnership ने किया है, जबकि मौजूदा निवेशक Z47, RTP Global, और Lightspeed ने भी भागीदारी की है। इसके अलावा Aditya Birla Ventures भी इस निवेश राउंड में शामिल हुआ है।


📊 निवेश विवरण

यह फंडिंग Stable Money के लिए अब तक का सबसे बड़ा राउंड है। Entrackr ने इस डील की जानकारी पिछले महीने एक्सक्लूसिव रूप से दी थी।

इससे पहले कंपनी ने Series A और Seed राउंड्स में भी ₹173 करोड़ ($20 मिलियन) जुटाए थे, जिनमें निवेशकों में Z47, Lightspeed, RTP Global और कई जाने-माने एंजेल इन्वेस्टर्स जैसे Sriharsha Majety (Swiggy), Kunal Bahl, और Rohit Bansal (Snapdeal) शामिल थे।


🚀 निवेश का उपयोग कहां होगा?

Stable Money इस ताज़ा निवेश का उपयोग निम्नलिखित लक्ष्यों के लिए करेगा:

  • 🔹 अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को और विस्तारित करना
  • 🔹 नए बैंकिंग और NBFC पार्टनर्स को ऑनबोर्ड करना
  • 🔹 अपने डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क को स्केल करना

कंपनी का लक्ष्य है कि 2025 में कम से कम 8 नए बैंक और एनबीएफसी अपने प्लेटफॉर्म से जोड़ें।


🏦 Stable Money क्या करता है?

Stable Money एक WealthTech प्लेटफॉर्म है जिसे 2022 में सौरभ जैन और हरीश रेड्डी ने शुरू किया था। इसका उद्देश्य यूज़र्स को स्थिर और सुनिश्चित रिटर्न देने वाले फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में निवेश की सुविधा देना है।

🔐 यह प्लेटफॉर्म निम्नलिखित प्रोडक्ट्स ऑफर करता है:

  • फिक्स्ड डिपॉजिट (FD)
  • रिकरिंग डिपॉजिट (RD)
  • सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड
  • बांड्स

यह प्लेटफॉर्म विशेष रूप से उन निवेशकों को टार्गेट करता है जो बिना जोखिम के रिटर्न चाहते हैं और पारंपरिक निवेश के भरोसेमंद विकल्प की तलाश में रहते हैं।


🤝 कौन-कौन से बैंक जुड़े हैं?

Stable Money इस समय 8 बैंकों और 2 NBFCs के साथ पार्टनरशिप में काम कर रहा है। प्रमुख बैंकिंग पार्टनर्स में शामिल हैं:

  • IndusInd Bank
  • South Indian Bank
  • Slice Small Finance Bank
  • Ujjivan Small Finance Bank
  • Unity SFB
  • Suryoday SFB

कंपनी आने वाले महीनों में कई और संस्थानों के साथ जुड़ने की योजना बना रही है।


📈 यूज़र बेस और AUM

कंपनी का दावा है कि उनके प्लेटफॉर्म पर इस समय 1.5 लाख से ज्यादा यूज़र्स रजिस्टर्ड हैं और उनका Assets Under Management (AUM) ₹3,000 करोड़ से भी ज्यादा है।

यह आंकड़ा कंपनी के मजबूत वितरण नेटवर्क और बढ़ती यूज़र विश्वास को दर्शाता है।


🧾 वित्तीय प्रदर्शन

Stable Money ने अब तक वित्त वर्ष 2025 (FY25) के लिए अपनी फाइनेंशियल रिपोर्ट दाखिल नहीं की है। लेकिन वित्त वर्ष 2024 (मार्च में समाप्त) की रिपोर्ट के अनुसार:

  • कंपनी की ऑपरेटिंग इनकम ₹35.3 लाख रही।
  • वहीं नेट लॉस ₹12.29 करोड़ का रहा।
  • यानी, कंपनी अभी भी प्रि-रेवेन्यू स्टेज में है और रेवेन्यू जनरेशन के शुरुआती चरणों में काम कर रही है।

इसका मतलब है कि कंपनी का फोकस अभी रेवेन्यू से ज़्यादा यूज़र ग्रोथ, नेटवर्क विस्तार और प्रोडक्ट डेवलपमेंट पर है।


🧠 निवेशकों की सोच

Fundamentum Partnership के पार्टनर Ashish Kumar ने कहा,

“Stable Money एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो भारत में सुरक्षित निवेश को डिजिटल रूप में पेश करने का काम कर रहा है। मौजूदा समय में जब ज्यादातर निवेश हाई रिस्क की ओर झुके हुए हैं, Stable Money एक बैलेंस्ड और भरोसेमंद विकल्प देता है।”

Lightspeed और RTP Global जैसे मौजूदा निवेशकों की लगातार भागीदारी यह दिखाती है कि उन्हें कंपनी के बिज़नेस मॉडल और टीम पर पूरा विश्वास है।


📌 निष्कर्ष

Stable Money का फोकस है भारत के मिडल-क्लास और यंग इनवेस्टर्स को ऐसी सेवाएं देना जो पारंपरिक बैंकों से आगे बढ़कर टेक्नोलॉजी की मदद से आसान और तेज़ हो। निवेशकों का बढ़ता भरोसा, और यूज़र बेस में बढ़ोतरी, इसे भारत के टॉप वेल्थटेक स्टार्टअप्स की लिस्ट में ले जा रही है।

आने वाले महीनों में कंपनी क्या नई प्रोडक्ट्स और पार्टनरशिप्स लेकर आती है, उस पर सभी की नजरें रहेंगी।


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Read more :Plush को मिला ₹30.56 करोड़ का नया फंडिंग राउंड

Plush को मिला ₹30.56 करोड़ का नया फंडिंग राउंड

Plush

चेन्नई आधारित फेमिनिन केयर ब्रांड Plush ने अपने सीरीज़ B फंडिंग राउंड में ₹30.56 करोड़ (लगभग $3.6 मिलियन) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व एंजेल इन्वेस्टर अजय कुमार अग्रवाल ने किया, जिसमें Careernet Technologies, OTP Ventures, Blume Ventures और 11 अन्य निवेशकों ने भी भाग लिया।

📌 फंडिंग डिटेल्स
Plush के बोर्ड ने हाल ही में एक स्पेशल रिजोल्यूशन पास किया है जिसके तहत कंपनी ने 4,099 सीरीज़ B प्रेफरेंस शेयर्स ₹7,457 प्रति शेयर की दर से जारी करने की मंजूरी दी है। यह जानकारी कंपनी की ROC (रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़) में दर्ज फाइलिंग के जरिए सामने आई है।

इस फंडिंग में प्रमुख निवेशक Ajay Kumar Aggarwal ने ₹6 करोड़ का योगदान दिया है। वहीं मौजूदा निवेशकों में Careernet Technologies ने ₹5 करोड़, OTP Ventures ने ₹3 करोड़ और Blume Ventures ने ₹4 करोड़ का निवेश किया है। शेष राशि Rahul Garg, Sumit Jalan, Blue Ashva Varenya Fund, Rahul Kayan और सात अन्य एंजेल इन्वेस्टर्स ने मिलकर लगाई है।


📈 वैल्यूएशन में 3 गुना उछाल

Entrackr की रिपोर्ट के अनुसार, इस फंडिंग के बाद Plush की वैल्यूएशन लगभग ₹281 करोड़ (करीब $33 मिलियन) तक पहुंचने की संभावना है। यह कंपनी की पिछले प्री-सीरीज़ B राउंड की तुलना में लगभग तीन गुना बढ़ोतरी दर्शाता है।

फंडिंग के बाद शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर में बदलाव हुआ है:

  • Ajay Kumar Aggarwal की हिस्सेदारी 19.64% हो गई है।
  • Careernet Technologies के पास 16.37% हिस्सेदारी है।
  • Blume Ventures की हिस्सेदारी 13.08% तक पहुंच गई है।

👉 विस्तृत शेयरहोल्डिंग पैटर्न देखने के लिए TheKredible वेबसाइट पर विजिट करें।


🧼 Plush क्या करता है?

2019 में Sahiba Taneja द्वारा शुरू किया गया Plush महिलाओं की हाइजीन और वेलनेस की जरूरतों को पूरा करने वाला एक D2C (डायरेक्ट-टू-कंज़्यूमर) ब्रांड है। कंपनी मुख्य रूप से पीरियड केयर, हेयर रिमूवल, इंटिमेट वेलनेस और स्किनकेयर प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराती है।

Plush अपने प्रोडक्ट्स को अपनी वेबसाइट, ई-कॉमर्स चैनलों और ऑफलाइन रिटेल स्टोर्स के ज़रिए बेचता है। कंपनी का दावा है कि इसके प्रोडक्ट्स फिलहाल बेंगलुरु, चेन्नई, मुंबई, दिल्ली और हैदराबाद के 500 से ज्यादा स्टोर्स में उपलब्ध हैं।

🚀 कंपनी का लक्ष्य अगले 6 महीनों में 2,000 स्टोर्स तक अपनी ऑफलाइन मौजूदगी को विस्तार देना है।


📊 फाइनेंशियल परफॉर्मेंस

पिछले वित्त वर्ष (मार्च 2024 में समाप्त) में Plush ने ₹28.87 करोड़ का राजस्व अर्जित किया, जो साल-दर-साल आधार पर 84% की ग्रोथ है। हालांकि, इस दौरान कंपनी को ₹4.4 करोड़ का घाटा हुआ।

Plush का लक्ष्य है कि वह वित्त वर्ष 2025 (FY25) को ₹60 करोड़ के राजस्व के साथ बंद करे। इसका मतलब है कि कंपनी आने वाले महीनों में तेज़ी से अपने बिक्री चैनलों, कस्टमर बेस और प्रोडक्ट कैटेगरीज़ का विस्तार करेगी।


📦 क्या है कंपनी की अगली रणनीति?

Plush इस फंडिंग का इस्तेमाल निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए करने जा रही है:

  • 🔹 रिटेल विस्तार – अधिक शहरों और स्टोर्स तक पहुंच बढ़ाना
  • 🔹 नए प्रोडक्ट लॉन्च – स्किनकेयर, इंटिमेट वेलनेस आदि कैटेगरी में विस्तार
  • 🔹 ब्रांड मार्केटिंग – ज़्यादा कस्टमर्स तक पहुंचने के लिए डिजिटल और ऑफलाइन कैंपेन
  • 🔹 टीम ग्रोथ – इनोवेशन और सप्लाई चेन को बेहतर बनाने के लिए टीम विस्तार

🌸 फेमिनिन केयर मार्केट में मुकाबला

Plush का मुकाबला इस समय Nykaa, Sirona, Azah, और Carmesi जैसे अन्य फेमिनिन हाइजीन ब्रांड्स से है। हालांकि, Plush ने अपने ट्रेंडी और प्रीमियम प्रोडक्ट्स, किफायती कीमतों और मजबूत D2C स्ट्रेटेजी के चलते एक खास जगह बनाई है।


✨ निष्कर्ष

Plush की ये नई फंडिंग न केवल इसके फ्यूचर ग्रोथ के लिए अहम है बल्कि यह भी दिखाती है कि भारत में फेमिनिन केयर सेगमेंट में निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। कंपनी की आक्रामक रणनीति और ग्राहकों के प्रति समर्पण इसे भारत के टॉप ब्रांड्स में शामिल कर सकता है।

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Read more :🧼 Snabbit को मिला ₹162 करोड़ का Series B फंडिंग,

🧼 Snabbit को मिला ₹162 करोड़ का Series B फंडिंग,

Snabbit

घरों के लिए ऑन-डिमांड प्रोफेशनल सेवाएं उपलब्ध कराने वाला प्लेटफॉर्म Snabbit ने हाल ही में ₹162.35 करोड़ (लगभग $19 मिलियन) की Series B फंडिंग जुटाई है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व किया है Lightspeed Venture Partners ने, जबकि Nexus Venture Partners और Elevation Capital ने भी दोबारा निवेश किया है।

यह ताज़ा निवेश ऐसे समय में आया है जब भारत में घरेलू सेवाओं की मांग तेज़ी से बढ़ रही है, और Snabbit इस सेगमेंट में टेक्नोलॉजी और क्विक डिलीवरी के दम पर नया मुकाम हासिल कर रहा है।


💰 कौन-कितना निवेश कर रहा है?

Registrar of Companies (RoC) में दाखिल रेगुलेटरी फाइलिंग के अनुसार, Snabbit की बोर्ड मीटिंग में 65,165 Series B अनिवार्य रूप से कन्वर्ट होने वाले प्रेफरेंस शेयर्स (CCPS) को ₹24,914.93 प्रति शेयर की कीमत पर जारी करने की मंजूरी दी गई है। इससे कुल ₹162.35 करोड़ जुटाए जाएंगे।

इसमें:

  • Lightspeed: ₹94 करोड़ (लगभग $11 मिलियन)
  • Nexus Venture Partners: ₹34.18 करोड़ (लगभग $4 मिलियन)
  • Elevation Capital: ₹34.18 करोड़ (लगभग $4 मिलियन)

📊 वैल्यूएशन में 3.5 गुना उछाल

Entrackr की रिपोर्ट के मुताबिक, इस नए राउंड के बाद Snabbit की वैल्यूएशन ₹684 करोड़ (लगभग $80 मिलियन) हो जाएगी। यह पिछली Series A फंडिंग के मुकाबले 3.5 गुना ज्यादा है, जब कंपनी की वैल्यूएशन लगभग $23 मिलियन थी।

इससे साफ होता है कि निवेशक Snabbit की ग्रोथ, बिज़नेस मॉडल और संभावनाओं पर गहरा भरोसा जता रहे हैं।


🛠️ Snabbit क्या करता है?

2024 में Aayush Agarwal द्वारा स्थापित Snabbit, एक क्विक सर्विस प्लेटफॉर्म है जो भारत के शहरी इलाकों में रहने वाले घरों को साफ-सफाई, बर्तन धोने, कपड़े धोने जैसी घरेलू सेवाएं प्रोफेशनल्स के ज़रिए तुरंत उपलब्ध कराता है।

  • 🧽 सेवाएं: क्लीनिंग, डिशवॉशिंग, लॉन्ड्री आदि
  • ⏱️ बुकिंग: घंटे के हिसाब से एक्सपर्ट्स को बुक किया जा सकता है
  • 🚪 डिलीवरी टाइम: बुकिंग के 10 मिनट के अंदर प्रोफेशनल घर पहुँच जाते हैं
  • 👷 वर्कफोर्स: वर्तमान में 600+ प्रोफेशनल्स हैं, जो हर महीने दोगुने हो रहे हैं

📈 क्यों है Snabbit की मांग में उछाल?

Snabbit का यूएसपी है — “सिर्फ 10 मिनट में एक्सपर्ट घर पर”। यह आज की भाग-दौड़ भरी ज़िंदगी में उन उपभोक्ताओं के लिए बेहद उपयोगी है जिन्हें समय की कमी है, लेकिन भरोसेमंद और प्रशिक्षित घरेलू सहायकों की आवश्यकता है।

भारत में:

  • 👩‍👩‍👧‍👦 न्यूक्लियर फैमिली कल्चर बढ़ा है
  • 🏙️ शहरीकरण तेजी से हो रहा है
  • 📱 ऑनलाइन सेवाओं को लेकर विश्वास बढ़ा है
  • 💼 वर्किंग कपल्स की संख्या बढ़ी है

इन सभी कारणों से Snabbit जैसे मॉडल का स्केलेबिलिटी और डिमांड बहुत तेज़ है।


🧑‍💼 Aayush Agarwal का विज़न

Snabbit के फाउंडर और सीईओ आयुष अग्रवाल ने कहा:

“हम Snabbit को भारत का सबसे तेज़ और भरोसेमंद घरेलू सेवा प्लेटफॉर्म बनाना चाहते हैं। हर परिवार को हाई-क्वालिटी सर्विसेज केवल कुछ मिनटों में उपलब्ध हो — यही हमारा लक्ष्य है।”

उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी हर महीने नए शहरों में एंट्री कर रही है और उनकी टीम 600 से अधिक प्रोफेशनल्स को ऑनबोर्ड कर चुकी है। यह संख्या हर महीने दोगुनी हो रही है।


🏗️ आगे की योजना: विस्तार और तकनीकी मजबूती

फंडिंग से मिले पैसे का इस्तेमाल कंपनी निम्नलिखित कार्यों के लिए करेगी:

  1. 🌆 नई सिटी में विस्तार
  2. 📲 मोबाइल ऐप और बुकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना
  3. 👷‍♂️ वर्कफोर्स ट्रेनिंग और ऑनबोर्डिंग स्केल करना
  4. 🧠 AI और डेटा एनालिटिक्स के ज़रिए सर्विस ऑप्टिमाइजेशन
  5. 📣 मार्केटिंग और ब्रांड बिल्डिंग पर ध्यान देना

🛍️ प्रतियोगिता और बाजार में स्थिति

Snabbit की टक्कर भारत के अन्य ऑन-डिमांड घरेलू सेवा प्लेटफॉर्म्स से है जैसे:

  • Urban Company
  • Broomees
  • Helper4U

लेकिन Snabbit की “10 मिनट डिलीवरी” और “घंटे के हिसाब से बुकिंग” जैसी सुविधाएं इसे अलग बनाती हैं।


📌 निष्कर्ष: तेजी से बढ़ते घरेलू सेवा सेक्टर में एक मजबूत खिलाड़ी

Snabbit का बिज़नेस मॉडल उस वक्त सामने आया है जब “क्विक कॉमर्स” और “क्विक सर्विस” जैसे कॉन्सेप्ट भारत में ज़ोर पकड़ रहे हैं। ऐसे में एक ऐसा प्लेटफॉर्म जो समय की बचत, भरोसेमंद प्रोफेशनल्स और टेक्नोलॉजी से युक्त हो — वह मार्केट में लंबी पारी खेल सकता है।

₹162 करोड़ की फंडिंग से Snabbit को निश्चित रूप से अपने मिशन को और तेज़ी से आगे बढ़ाने का मौका मिलेगा, और यह भारत में घरेलू सेवाओं की परिभाषा बदल सकता है।


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🛋️ Pepperfry को मिला ₹43.3 करोड़ का नया फंड,

Pepperfry

भारत की प्रमुख ओमनीचैनल फर्नीचर ब्रांड Pepperfry ने एक बार फिर अपने मौजूदा निवेशकों से ₹43.3 करोड़ (लगभग $5.1 मिलियन) जुटाए हैं। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व General Electric Pension Fund ने किया है, जबकि Norwest Venture Partners, Goldman Sachs, और Panthera Growth Partners सहित अन्य निवेशकों ने भी भाग लिया।

इससे पहले सितंबर 2023 में भी Pepperfry ने इन्हीं निवेशकों से $23 मिलियन जुटाए थे।


📄 क्या कहती है नियामकीय फाइलिंग?

Registrar of Companies (RoC) से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, Pepperfry के बोर्ड ने 5,59,463 कम्पल्सरी कन्वर्टिबल प्रेफरेंस शेयर्स (CCPS) को ₹775 प्रति शेयर की कीमत पर जारी करने का प्रस्ताव पारित किया है। इस प्रस्ताव के जरिए कंपनी ने ₹43.3 करोड़ जुटाने की मंजूरी दी है।


💰 किसने कितना निवेश किया?

इस फंडिंग राउंड में अलग-अलग निवेशकों का योगदान इस प्रकार रहा:

  • 🏢 General Electric Pension Fund: ₹21.5 करोड़ (लगभग $2.5 मिलियन)
  • 🌱 Norwest Venture Partners: ₹8.52 करोड़
  • 🦁 Panthera Growth Partners: ₹6.45 करोड़
  • 🏦 Goldman Sachs, Erste WV Gutersloh GmbH, और Growth Equity Opportunity Fund Cayman Holdings Ltd ने शेष राशि का योगदान दिया है।

🚀 फंड का इस्तेमाल कहां होगा?

कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इस फंड का उपयोग मुख्यतः इन उद्देश्यों के लिए किया जाएगा:

  • 📈 बिजनेस ग्रोथ और स्केलिंग
  • 🏬 ऑफलाइन स्टूडियो और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का विस्तार
  • 💼 जनरल कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए वर्किंग कैपिटल

📊 फंडिंग के बाद वैल्यूएशन

Entrackr के अनुमान के अनुसार, इस लेटेस्ट फंडिंग राउंड के बाद Pepperfry की वैल्यूएशन ₹3,120 करोड़ (लगभग $367 मिलियन) हो गई है।


🏢 Pepperfry का बिजनेस मॉडल क्या है?

Pepperfry एक मार्केटप्लेस मॉडल पर काम करता है जो ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों चैनलों के ज़रिए ग्राहकों को फर्नीचर और होम डेकोर प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराता है।

  • 🛒 इसके कैटलॉग में 10,000 से अधिक प्रोडक्ट्स हैं।
  • 🤝 यह प्लेटफॉर्म Godrej, Springfit, और Spacewood जैसी प्रमुख ब्रांड्स से ग्राहकों को जोड़ता है।
  • 🏬 देशभर में इसके 200 से अधिक स्टूडियोज हैं जो 100+ शहरों में फैले हुए हैं।

📉 FY24 में राजस्व गिरा, लेकिन घाटे में कमी आई

मार्च 2024 को समाप्त वित्तीय वर्ष (FY24) में कंपनी ने:

  • 📉 ऑपरेटिंग रेवेन्यू में 30% की गिरावट, जो अब ₹189 करोड़ रह गया
  • 💸 लेकिन घाटे में 37% की कमी, जो अब ₹117.5 करोड़ हो गया

इसका मतलब है कि कंपनी ने खर्चों पर नियंत्रण करते हुए घाटे को काफी हद तक कम किया है, जो एक सकारात्मक संकेत है, खासकर मौजूदा बाजार की प्रतिस्पर्धा को देखते हुए।


💼 अब तक कितना निवेश मिला है?

Startup डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म TheKredible के अनुसार, मुंबई आधारित Pepperfry ने अब तक $270 मिलियन से अधिक की फंडिंग जुटाई है। इसके प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:

  • Norwest Venture Partners
  • General Electric
  • Broad Street Investment
  • Pidilite Industries
  • और अन्य कई संस्थागत निवेशक

🪑 प्रतियोगिता किससे है?

Pepperfry का मुकाबला भारत में कई मजबूत और फंडेड फर्नीचर ब्रांड्स से है, जिनमें प्रमुख हैं:

  • 🏠 Urban Ladder: जिसे Reliance Retail ने अधिग्रहित किया है। इसने $100 मिलियन से अधिक की फंडिंग जुटाई थी।
  • 🪵 Wooden Street: जिसने हाल ही में $77 मिलियन जुटाए हैं।

इन कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा में बने रहना Pepperfry के लिए आसान नहीं है, लेकिन इसका ऑमनीचैनल मॉडल, ब्रांडेड प्रोडक्ट्स, और रिटेल स्टूडियो नेटवर्क इसे बाज़ार में मज़बूत बनाए हुए हैं।


📝 निष्कर्ष: Pepperfry की राह में नई ऊर्जा

Pepperfry की यह ताज़ा फंडिंग कंपनी को आने वाले समय में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद कर सकती है। जहां एक ओर रेवेन्यू में गिरावट चिंता का विषय है, वहीं घाटे में आई कमी और मौजूदा निवेशकों का दोबारा भरोसा दिखाना कंपनी की लंबी दौड़ के संकेत हैं।

2025 में कंपनी के सामने कुछ प्रमुख चुनौतियां होंगी:

  • 🧾 मुनाफा कमाना
  • 🏙️ छोटे शहरों में विस्तार
  • 🧑‍💻 टेक्नोलॉजी और लॉजिस्टिक्स को और बेहतर बनाना

यदि Pepperfry इन क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन करता है, तो यह आने वाले वर्षों में भारत का सर्वश्रेष्ठ फर्नीचर ब्रांड बन सकता है।


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Udaan ने $114 मिलियन में सीरीज़ G राउंड किया पूरा,

Udaan

भारत के सबसे बड़े B2B ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स में से एक Udaan ने अपने सीरीज़ G फंडिंग राउंड को $114 मिलियन (लगभग ₹950 करोड़) के साथ सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस राउंड का नेतृत्व M&G Investments और Lightspeed ने किया, जबकि इसमें कुछ नए और मौजूदा निवेशकों ने भी भाग लिया।

यह डील Udaan के लिए ना सिर्फ वित्तीय मजबूती लाती है, बल्कि इसे IPO (Initial Public Offering) की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ने में मदद करेगी।


💰 फरवरी में मिला था $75 मिलियन, अब कुल सीरीज़ G पहुंची $114 मिलियन

बेंगलुरु-स्थित Udaan ने फरवरी 2025 में $75 मिलियन की पहली किश्त हासिल की थी, जो अब इस ताज़ा निवेश के साथ कुल $114 मिलियन हो गई है। यह फंडिंग फ्लैट वैल्यूएशन पर हुई, यानी पिछली वैल्यूएशन के आसपास ही कंपनी ने फंडिंग जुटाई है।

Entrackr के अनुसार, Udaan की पिछली फंडिंग राउंड के दौरान कंपनी का वैल्यूएशन लगभग $1.8 बिलियन (₹15,000 करोड़) था।


📦 ताज़ा फंडिंग का इस्तेमाल किन कामों में होगा?

Udaan ने प्रेस रिलीज़ में बताया कि यह ताज़ा पूंजी कई महत्वपूर्ण बिज़नेस पहलुओं को मजबूत करने में खर्च की जाएगी:

  • 🛍️ FMCG (Fast Moving Consumer Goods) कैटेगरी में विस्तार
  • 🍽️ HoReCa (Hotel, Restaurant, Catering) कस्टमर सेगमेंट पर फोकस
  • 🏷️ अपने प्राइवेट लेबल ब्रांड्स को मुख्य रूप से “स्टेपल्स” कैटेगरी में तेज़ी से बढ़ाना
  • 💹 बैलेंस शीट को और मजबूत बनाना ताकि भविष्य में IPO के लिए बेहतर वित्तीय स्थिति बनाई जा सके

🧾 कंपनी का कहना है: EBITDA पर फोकस, घाटा घटा 40%

Udaan के को-फाउंडर और CEO वैभव गुप्ता ने कहा:

“पिछले तीन वर्षों में हमने अपने बिज़नेस मॉडल को पूरी तरह से री-इंजीनियर किया है। हमने ‘कॉस्ट को कैपेबिलिटी’ और ‘कम्पिटिटिव एडवांटेज’ बना लिया है। पिछले तीन सालों में हमारा EBITDA बर्न हर साल 40% कम हुआ है और हम अगले 18 महीनों में पूरे ग्रुप के लिए EBITDA प्रोफिटेबिलिटी हासिल करने के ट्रैक पर हैं।”


📊 ग्रोथ और घाटा दोनों पर कंट्रोल

Udaan ने 2024 के कैलेंडर वर्ष में 60% सालाना ग्रोथ (YoY) दर्ज की है। साथ ही, कंपनी ने अपना कॉंट्रिब्यूशन मार्जिन 300 बेसिस पॉइंट्स तक सुधारा है।

2024 में:

  • 📉 फिक्स्ड कॉस्ट्स में 20% की कटौती
  • 💸 EBITDA बर्न में 40% की गिरावट
  • 📉 2025 की शुरुआत में अब तक EBITDA बर्न में और 20% की कमी

💹 फाइनेंशियल परफॉर्मेंस: FY24 में मामूली रेवेन्यू ग्रोथ, लेकिन घाटे में बड़ी कमी

Udaan ने अभी तक FY25 के आंकड़े साझा नहीं किए हैं, लेकिन FY24 (मार्च 2024 समाप्त वर्ष) के मुताबिक:

  • 📈 GMV (Gross Revenue): ₹5,706.6 करोड़ (FY23 में ₹5,609.3 करोड़) → सिर्फ 1.7% की ग्रोथ
  • 💸 Net Loss: ₹1,674.1 करोड़ → FY23 की तुलना में 19.4% की कमी

हालांकि रेवेन्यू में बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई, लेकिन खर्चों पर कंट्रोल कर कंपनी ने घाटे को काफी हद तक कम किया है।


🌐 क्या है Udaan का बिज़नेस मॉडल?

Udaan एक B2B प्लेटफॉर्म है जो:

  • 🛒 किराना दुकानों,
  • 🧼 FMCG रिटेलर्स,
  • 🍴 होटल और रेस्तरां बिज़नेस

को सीधे मैन्युफैक्चरर्स और ब्रांड्स से जोड़ता है। यह सप्लाई चेन को सरल बनाकर छोटे और मझौले व्यापारियों को सस्ता, तेज़ और भरोसेमंद सामान उपलब्ध कराता है।

Udaan का नेटवर्क भारत के 700 से ज़्यादा शहरों और कस्बों में फैला है, और कंपनी का दावा है कि इसके प्लेटफॉर्म पर लाखों SMBs (Small and Medium Businesses) सक्रिय हैं।


📈 IPO की तैयारी में जुटी है कंपनी

Udaan की रणनीति अब IPO की ओर स्पष्ट रूप से बढ़ रही है। EBITDA बर्न में कटौती, फिक्स्ड कॉस्ट में कमी और ऑपरेशनल मार्जिन में सुधार — यह सब संकेत हैं कि कंपनी अपनी बैलेंस शीट को IPO रेडी बनाने में जुटी हुई है।

यदि Udaan अगले 18 महीनों में EBITDA पॉज़िटिव हो जाती है, तो यह भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक बड़ी कामयाबी मानी जाएगी, खासतौर पर B2B ई-कॉमर्स जैसे चुनौतीपूर्ण सेगमेंट में।


📝 निष्कर्ष: Udaan की नई उड़ान, IPO की ओर बढ़ता आत्मविश्वास

Udaan का लेटेस्ट $114 मिलियन का फंडरेज़ यह दर्शाता है कि निवेशकों को कंपनी के विज़न और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर भरोसा है। जहां रेवेन्यू ग्रोथ धीमी रही, वहीं घाटा कम करने और मार्जिन सुधारने के कदमों ने कंपनी को फाइनेंशियल रूप से मजबूत बनाया है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि अगले एक से डेढ़ साल में Udaan पब्लिक मार्केट्स में एंट्री लेती है या नहीं।

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read more :👔 Snitch ने जुटाए $40 मिलियन!

👔 Snitch ने जुटाए $40 मिलियन!

Snitch

भारतीय D2C फैशन ब्रांड Snitch ने अपनी सीरीज़ B फंडिंग राउंड में $40 मिलियन (लगभग ₹333 करोड़) की बड़ी रकम जुटाई है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व 360 ONE Asset ने किया, जबकि मौजूदा निवेशक IvyCap Ventures और SWC Global ने भी भाग लिया। इसके अलावा Ravi Modi Family Office और कई अन्य एंजेल निवेशकों ने भी निवेश किया है।


💰 Snitch की दूसरी बड़ी फंडिंग, दिसंबर 2023 में हुई थी सीरीज़ A

बेंगलुरु स्थित Snitch के लिए यह दूसरी बड़ी फंडिंग है। इससे पहले कंपनी ने दिसंबर 2023 में $13 मिलियन (लगभग ₹108 करोड़) की सीरीज़ A फंडिंग हासिल की थी। अब यह नया निवेश ब्रांड को भारत और इंटरनेशनल लेवल पर तेज़ी से विस्तार का मौका देगा।


🏬 55 से 100 स्टोर्स तक: रिटेल में होगा बड़ा विस्तार

Snitch इस फंडिंग का उपयोग कई बड़े स्तर के लक्ष्यों के लिए करेगी:

  • 🔹 अपने ऑफलाइन स्टोर नेटवर्क को 55 से बढ़ाकर 100+ तक ले जाना
  • 🔹 Quick commerce कैटेगरी में एंट्री
  • 🔹 इंटरनेशनल मार्केट में संभावनाओं की जांच
  • 🔹 नई अपैरल और लाइफस्टाइल कैटेगरी में विस्तार

Snitch का लक्ष्य है कि वह 2025 के अंत तक भारत में अपने रिटेल फुटप्रिंट को दोगुना करे।


👕 क्या है Snitch की खासियत?

2020 में सिद्धार्थ डुंगरवाल द्वारा स्थापित Snitch एक D2C (Direct-to-Consumer) मेंसवियर ब्रांड है, जो स्टाइलिश, ट्रेंडी और किफायती कपड़े उपलब्ध कराता है। कंपनी अपने प्रोडक्ट्स को:

  • 🌐 अपनी वेबसाइट,
  • 📱 मोबाइल ऐप और
  • 🏬 तेजी से बढ़ते ऑफलाइन स्टोर्स नेटवर्क के ज़रिए बेचती है।

Snitch खासतौर पर मिलेनियल और Gen-Z ग्राहकों को टार्गेट करता है, जो किफायती दाम में फैशनेबल आउटफिट्स की तलाश में रहते हैं।


📈 120% ग्रोथ और 55+ स्टोर्स के साथ वैश्विक विस्तार की तैयारी

Snitch के फाउंडर और CEO सिद्धार्थ डुंगरवाल ने कहा:

“120% सालाना ग्रोथ, 55+ स्टोर्स और एक मजबूत लॉयल कस्टमर बेस के साथ हम अब अगली लीग में कदम रख रहे हैं। हमारा लक्ष्य है एक वर्ल्ड-क्लास ब्रांड बनाना, जिसकी जड़ें भारत में हों और जिसमें तेज़ी से फैसले लेने की क्षमता हो। अब हम ग्लोबल मार्केट की ओर बढ़ रहे हैं और पब्लिक मार्केट्स में प्रवेश की तैयारी कर रहे हैं।”

Snitch अब न केवल भारत में बल्कि इंटरनेशनल स्तर पर भी अपनी पहचान बनाने को तैयार है।


🦈 Shark Tank India से मिली थी पहली पहचान

Snitch को Shark Tank India सीज़न 2 में जबरदस्त पहचान मिली थी। कंपनी ने वहां ₹1.5 करोड़ की फंडिंग हासिल की थी वो भी महज़ 1.5% इक्विटी के बदले।

इस डील में शामिल थे:

  • Anupam Mittal (Shaadi.com)
  • Aman Gupta (boAt)
  • Namita Thapar (Emcure)
  • Vineeta Singh (Sugar Cosmetics)
  • Peyush Bansal (Lenskart)
  • Amit Jain (CarDekho)

इस डील पर कंपनी की वैल्यूएशन ₹100 करोड़ आंकी गई थी। यह उस समय के लिए एक बड़ा माइलस्टोन था, जिसने Snitch को देशभर में पॉपुलर बना दिया।


📊 वित्तीय प्रदर्शन: FY24 में ₹241 करोड़ की रेवेन्यू और ₹4.39 करोड़ मुनाफा

वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) में Snitch ने शानदार प्रदर्शन किया:

  • 🔹 रेवेन्यू: ₹241 करोड़
  • 🔹 सालाना वृद्धि: 100%
  • 🔹 मुनाफा (Net Profit): ₹4.39 करोड़

हालांकि FY25 के वार्षिक नतीजे अभी तक सार्वजनिक नहीं हुए हैं, लेकिन कंपनी की मौजूदा ग्रोथ और नए फंडिंग से संकेत मिलते हैं कि FY25 में भी कंपनी मजबूत प्रदर्शन करेगी।


🌍 इंटरनेशनल मार्केट और IPO की ओर कदम

Snitch अब केवल भारतीय बाजार तक सीमित नहीं रहना चाहता। कंपनी की योजना है:

  • 🌐 इंटरनेशनल मार्केट्स में प्रवेश करना (संभवतः मिडल ईस्ट, साउथ ईस्ट एशिया और यूरोप जैसे क्षेत्रों में)
  • 📈 IPO (Initial Public Offering) के ज़रिए पब्लिक मार्केट में लिस्ट होना

यह कदम Snitch को एक ग्लोबल मेंसवियर ब्रांड के रूप में स्थापित कर सकते हैं।


📌 निष्कर्ष: भारत के फैशन स्टार्टअप्स में Snitch की मजबूत मौजूदगी

Snitch ने सिर्फ 4 वर्षों में अपने ट्रेंडी प्रोडक्ट्स, D2C मॉडल और तेज़ ग्रोथ के चलते भारतीय फैशन स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक मजबूत पहचान बनाई है। इस नई फंडिंग के साथ Snitch न केवल अपने रिटेल विस्तार को बढ़ाएगा, बल्कि इंटरनेशनल स्टेज पर भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार है।


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Read more :⚡Ola Electric इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट में TVS का जलवा,

⚡Ola Electric इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट में TVS का जलवा,

ola electric

भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल क्रांति अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। मई 2025 मे Ola Electric इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (E2W) सेगमेंट ने शानदार प्रदर्शन किया, जहां कुल 1,00,266 यूनिट्स की रिटेल बिक्री दर्ज की गई। यह साल 2025 में अब तक का दूसरा सबसे बड़ा मासिक आंकड़ा है — मार्च 2025 के रिकॉर्ड 1,31,364 यूनिट्स के बाद।

यह आंकड़े Vahan पोर्टल द्वारा जारी किए गए हैं, जो देशभर में वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर आधारित होते हैं। बढ़ते ईवी अपनाने के साथ, यह डेटा भारत में EV मार्केट के लगातार विस्तार को दर्शाता है।


🏍️ TVS Motor बनी नंबर 1, 24% मार्केट शेयर के साथ टॉप पर

TVS Motor ने एक बार फिर बाज़ी मारी है। कंपनी ने मई 2025 में 24,560 यूनिट्स की बिक्री की, जो कि 107% सालाना ग्रोथ (YoY) को दर्शाता है। यह प्रदर्शन कंपनी के नए मॉडल्स, डीलर नेटवर्क विस्तार और आक्रामक मार्केटिंग रणनीति का नतीजा है।

TVS ने अब मई में 24% मार्केट शेयर हासिल कर लिया है, जिससे वह EV सेगमेंट में सबसे आगे है।


🏁 Bajaj Auto ने दिखाई रफ्तार, Ola को पीछे छोड़ा

Bajaj Auto ने मई में 21,770 यूनिट्स की बिक्री की, जिसमें 135% की YoY ग्रोथ दर्ज की गई। इसके साथ ही, Bajaj ने अब 22% का मार्केट शेयर अपने नाम किया है और यह TVS के बेहद करीब पहुंच गया है।

पिछले कुछ महीनों तक Bajaj और Ola Electric लगभग बराबरी पर चल रहे थे, लेकिन अब Bajaj ने तेज़ी दिखाई है और Ola को पीछे छोड़ दिया है।


📉 Ola Electric की बिक्री में गिरावट, मार्केट शेयर घटकर 18%

एक समय पर EV मार्केट की अगुवाई करने वाली Ola Electric को मई 2025 में झटका लगा। कंपनी की बिक्री 18,499 यूनिट्स पर आकर रुक गई, जो कि पिछले साल की तुलना में 51% कम है। इसके साथ ही Ola का मार्केट शेयर भी घटकर 18% रह गया है।

अप्रैल में Ola और Bajaj कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे थे, लेकिन Ola की बिक्री में गिरावट के चलते कंपनी अब तीसरे स्थान पर खिसक गई है।


⚙️ Ather Energy की तेज़ी बनी रही, पहली बार Ola को राजस्व में पछाड़ा

Ather Energy, जिसे हाल ही में स्टॉक मार्केट में लिस्ट किया गया है, ने 12,840 यूनिट्स की बिक्री की। यह आंकड़ा 109% YoY ग्रोथ को दर्शाता है। कंपनी ने मई में 13% का मार्केट शेयर प्राप्त किया।

Ather अब सिर्फ बिक्री में ही नहीं, बल्कि राजस्व (Revenue) के लिहाज से भी Ola से आगे निकल गया है। FY25 की चौथी तिमाही (Q4 FY25) में Ather का ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹676 करोड़ रहा, जबकि Ola Electric का रेवेन्यू 60% गिरकर ₹611 करोड़ रह गया।

यह उपलब्धि Tarun Mehta के नेतृत्व वाली Ather के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है, खासकर जब इसे Bhavish Aggarwal की Ola Electric से तुलना में देखा जाए।


🛵 Hero MotoCorp की वापसी, 191% की ग्रोथ

भारत की पारंपरिक ऑटो इंडस्ट्री की दिग्गज कंपनी Hero MotoCorp ने भी EV सेगमेंट में ज़ोरदार वापसी की है। कंपनी ने मई 2025 में 7,164 यूनिट्स की बिक्री की, जो कि पिछले साल की तुलना में 191% ज्यादा है।

Hero की वापसी से EV मार्केट में प्रतिस्पर्धा और तेज़ हुई है, और यह आने वाले महीनों में बाजार में बड़ा असर डाल सकती है।


🔟 टॉप 10 E2W कंपनियों की सूची

मई 2025 में भारत में सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बेचने वाली कंपनियों की सूची इस प्रकार है:

रैंककंपनीबिक्री (यूनिट्स)YoY ग्रोथमार्केट शेयर
1️⃣TVS Motor24,560107%24%
2️⃣Bajaj Auto21,770135%22%
3️⃣Ola Electric18,499-51%18%
4️⃣Ather Energy12,840109%13%
5️⃣Hero MotoCorp7,164191%7%
6️⃣Greaves Electricआंकड़े उपलब्ध नहीं
7️⃣Pur Energy (PURE EV)
8️⃣BGauss Auto
9️⃣Kinetic Green
🔟River Mobility

(कुछ कंपनियों के सटीक आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।)


🔋 EV सेक्टर की ग्रोथ के पीछे क्या हैं मुख्य वजहें?

  1. सरकार की सब्सिडी और FAME स्कीम्स – इनसे ग्राहकों को आर्थिक लाभ मिलता है।
  2. 🌱 ईंधन की बढ़ती कीमतें – लोग पेट्रोल के विकल्प तलाश रहे हैं।
  3. बैटरी तकनीक में सुधार – रेंज और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर हुआ है।
  4. 🏭 मेड इन इंडिया निर्माण – लोकल प्रोडक्शन से लागत में कमी आई है।

🚀 EV मार्केट का भविष्य

मई 2025 के आंकड़े यह दिखाते हैं कि भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट अब स्थिर नहीं रहा, बल्कि यह अगली ऑटो क्रांति बनता जा रहा है। TVS और Bajaj जैसी पारंपरिक कंपनियां अब Ola और Ather जैसे स्टार्टअप्स को टक्कर दे रही हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा और नवाचार दोनों को बढ़ावा मिल रहा है।

EV सेक्टर में आगे भी नए मॉडल, बेहतर बैटरियां और चार्जिंग समाधान आने की उम्मीद है। इस रफ्तार से EV बाजार जल्द ही आईसीई (Internal Combustion Engine) वाहनों को पीछे छोड़ सकता है।


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