गुरुग्राम स्थित फूडटेक और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म Eternal (पहले Zomato) ने FY26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2025) के वित्तीय नतीजे जारी किए हैं। कंपनी ने जहां रेवेन्यू में 70% की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की है, वहीं मुनाफा 90% गिरकर केवल ₹25 करोड़ रह गया, जो Q1 FY25 में ₹253 करोड़ था।
📈 रेवेन्यू में बड़ा उछाल Eternal
Eternal के ऑपरेशनल रेवेन्यू में Q1 FY26 में 70% की बढ़त हुई है। यह बढ़कर ₹7,167 करोड़ हो गया है, जबकि Q1 FY25 में यह ₹4,206 करोड़ था। यदि कंपनी की अन्य आय को भी जोड़ दिया जाए तो कुल रेवेन्यू ₹7,521 करोड़ रहा।
Eternal के अलग-अलग बिजनेस यूनिट्स ने इस तरह योगदान दिया:
- फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म (Zomato marketplace): ₹2,261 करोड़ (31% कुल रेवेन्यू का)
- Hyperpure (B2B सप्लाई): ₹2,295 करोड़ (89% ग्रोथ)
- Blinkit (Quick Commerce): ₹2,400 करोड़ (155% ग्रोथ)
इन आंकड़ों से साफ है कि Blinkit और Hyperpure अब कंपनी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
💰 खर्चों में तेज़ी
रेवेन्यू भले ही बढ़ा हो, लेकिन खर्चों में भारी उछाल Eternal के मुनाफे पर भारी पड़ा। कंपनी का कुल खर्च Q1 FY26 में 77% बढ़कर ₹7,433 करोड़ हो गया, जो Q1 FY25 में ₹4,203 करोड़ था।
मुख्य खर्चों का ब्योरा:
- डिलीवरी और उससे संबंधित खर्च: ₹1,869 करोड़ (25% कुल खर्च का हिस्सा)
- कर्मचारी लाभ खर्च (Employee benefit cost): ₹830 करोड़ (57% की वृद्धि)
- मार्केटिंग और विज्ञापन खर्च: ₹671 करोड़ (69% की वृद्धि)
खासतौर पर विज्ञापन और मार्केटिंग खर्च में आए 70% उछाल ने कंपनी के मुनाफे को तगड़ा झटका दिया है।
📉 मुनाफा गिरा 90%
हालांकि Eternal ने ₹7,521 करोड़ की आय की, लेकिन नेट प्रॉफिट मात्र ₹25 करोड़ रहा, जो पिछले साल की पहली तिमाही के ₹253 करोड़ से 90% कम है।
प्रति यूनिट खर्च के हिसाब से देखें तो कंपनी ने ₹1 कमाने के लिए ₹1.04 खर्च किए। यानी लागत की तुलना में रिटर्न घटा है, जो संकेत करता है कि कंपनी को अपनी लागत नियंत्रण रणनीतियों पर फिर से विचार करने की जरूरत है।
📊 शेयर मार्केट पर असर
21 जुलाई (सोमवार) को 15:37 बजे Eternal के शेयर ₹274 प्रति शेयर की दर से ट्रेड कर रहे थे। इससे कंपनी का कुल बाजार पूंजीकरण ₹2,64,564 करोड़ (लगभग $31.2 बिलियन) पहुंच गया।
इसका मतलब है कि भले ही मुनाफा गिरा हो, लेकिन मार्केट में Eternal की वैल्यू अभी भी मजबूत बनी हुई है।
🔍 क्या कहता है यह प्रदर्शन?
Eternal का रेवेन्यू ग्रोथ दर्शाता है कि कंपनी का बिजनेस मॉडल – खासकर Blinkit और Hyperpure – तेज़ी से पॉपुलर हो रहा है। हालांकि, मुनाफे में आई गिरावट यह स्पष्ट करती है कि बिजनेस का स्केल बढ़ाना ही काफी नहीं, बल्कि लागत नियंत्रण और ऑपरेशनल एफिशिएंसी भी जरूरी है।
Eternal की स्थिति फिलहाल दोराहे पर है: एक ओर से ग्रोथ शानदार है, वहीं दूसरी ओर मुनाफे की घटती रफ्तार चिंताजनक हो सकती है, खासकर इन्वेस्टर्स और शेयरहोल्डर्स के लिए।
🧾 निष्कर्ष
- Eternal ने FY26 की Q1 में ₹7,521 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो 70% ग्रोथ है।
- लेकिन मुनाफा ₹253 करोड़ से गिरकर ₹25 करोड़ रह गया – 90% की गिरावट।
- Blinkit और Hyperpure के बढ़ते योगदान ने रेवेन्यू बढ़ाया लेकिन खर्च भी काफी बढ़ा।
- कंपनी ₹1 कमाने के लिए ₹1.04 खर्च कर रही है – ये संकेत है कि लागत नियंत्रण की जरूरत है।
👉 आने वाली तिमाहियों में देखना दिलचस्प होगा कि क्या Eternal अपने ग्रोथ को मुनाफे में बदलने में सफल होती है, या फिर मार्केट विस्तार की यह आक्रामक रणनीति और भी नुकसान बढ़ाएगी।
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