📈 Zerodha Capital का मुनाफा 73% बढ़ा,

Zerodha

देश की अग्रणी स्टॉकब्रोकिंग कंपनी Zerodha की लेंडिंग शाखा Zerodha Capital ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए ₹12.5 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले वर्ष के ₹7.2 करोड़ से 73% अधिक है।

यह मुनाफा Zerodha Capital के तेजी से बढ़ते लोन बुक, मजबूत ग्राहक आधार और डिजिटल-फर्स्ट अप्रोच का नतीजा है।


💹 दोगुनी हुई आमदनी, 3 गुना बढ़ी लोन बुक

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, Zerodha Capital की कुल आमदनी FY25 में ₹36 करोड़ रही, जबकि FY24 में यह ₹17 करोड़ थी — यानी दोगुनी से अधिक

रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुसार, इस उछाल की प्रमुख वजह रही कंपनी की लोन बुक में 3.2X की ग्रोथ, जो FY25 की पहली नौ तिमाहियों (9M FY25) में ₹381 करोड़ तक पहुंच गई।


🧾 कैसे काम करता है Zerodha Capital का बिजनेस मॉडल?

Zerodha Capital का फोकस रिटेल इनवेस्टर्स को लोन देने पर है। यह लोन ग्राहकों के स्टॉक्स या म्यूचुअल फंड्स को गिरवी रखकर दिए जाते हैं। इस मॉडल में ग्राहक अपने पोर्टफोलियो के आधार पर आसानी से लोन प्राप्त कर सकते हैं।

  • ग्राहक अपने शेयर या म्यूचुअल फंड्स का 45% तक लोन ले सकते हैं।
  • Zerodha के 8.1 मिलियन एक्टिव क्लाइंट्स (जो NSE मार्केट का करीब 16% हैं) इसका बुनियादी आधार बनाते हैं।
  • पूरा प्रोसेस डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए होता है, जिससे त्वरित और पारदर्शी लोन मिलना संभव होता है।

🏦 फाइनेंशियल हेल्थ: नेटवर्थ और गियरिंग रेशियो

ICRA की रिपोर्ट के अनुसार, Zerodha Capital की नेटवर्थ दिसंबर 2024 तक ₹170 करोड़ थी। इसका गियरिंग रेशियो 1.4X रहा, यानी कंपनी के पास हर ₹1 की अपनी पूंजी पर ₹1.40 का कर्ज था — जो लेंडिंग फर्म के लिए संतुलित माना जाता है।

कंपनी की खास बात यह है कि इसके एनपीए (Non-Performing Assets) शून्य हैं — यानी अब तक किसी भी ग्राहक ने लोन चुकाने में डिफॉल्ट नहीं किया है। यह इसकी सावधानीपूर्वक लेंडिंग अप्रोच को दर्शाता है।


💸 ग्रोथ के लिए नया निवेश

Zerodha Capital की प्रमोटर ग्रुप ने कंपनी की भविष्य की ग्रोथ के लिए ₹125 करोड़ का निवेश करने की योजना बनाई है। यह निवेश compulsorily convertible preference shares (CCPS) के माध्यम से किया जाएगा।

यह राशि कंपनी की लोन बुक बढ़ाने, टेक्नोलॉजी अपग्रेड करने और नई लोन स्कीमें शुरू करने में मदद करेगी।


🏅 ICRA की रेटिंग बनी रही मजबूत

रेटिंग एजेंसी ICRA ने Zerodha Capital को AA- (Stable) / A1+ की रेटिंग दी है — जो एक मजबूत फाइनेंशियल स्टैंडिंग को दर्शाती है। इसके साथ ही कंपनी की ₹100 करोड़ की नई शॉर्ट-टर्म बॉरोइंग स्कीम को भी यही उच्च रेटिंग दी गई है।

हालांकि ICRA ने यह भी कहा कि:

  • Zerodha Capital का आकार अभी भी छोटा है
  • यह सीमित संख्या में लेंडर्स पर निर्भर है

लेकिन Zerodha ग्रुप का समर्थन और कंपनी की सावधानीपूर्वक कर्ज नीति इस भरोसे को बनाए रखती है।


🔍 सेक्योरिटीज इकोसिस्टम में गहराई लाने का लक्ष्य

2021 में स्थापित Zerodha Capital का उद्देश्य है कि यह सेक्योरिटीज-आधारित लेंडिंग इकोसिस्टम में गहराई लाए। यानी स्टॉक्स और म्यूचुअल फंड्स को कैश के रूप में उपयोग करने के लिए सुरक्षित और आसान रास्ता प्रदान किया जाए।

हालांकि कंपनी का भविष्य काफी हद तक बाजार की चाल (market sentiment) और रेगुलेटरी बदलावों पर निर्भर रहेगा — खासकर तब जब रिटेल F&O सेगमेंट पर सख्त नियम लागू हो रहे हैं, जो Zerodha ग्रुप की आमदनी का बड़ा हिस्सा है।


💰 Zerodha Broking की तगड़ी कमाई

Zerodha Capital की पैरेंट कंपनी Zerodha Broking Limited ने FY24 में ₹5,496 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, और इसका रिटर्न ऑन नेटवर्थ 56% रहा है — जो भारत के किसी भी फिनटेक ब्रोकरेज फर्म के लिए एक बेंचमार्क है।

इससे यह स्पष्ट होता है कि Zerodha Capital को न सिर्फ मजबूत तकनीकी और फाइनेंशियल सपोर्ट मिल रहा है, बल्कि वह ब्रोकिंग सेगमेंट से ट्रस्ट और क्लाइंट बेस भी हासिल कर रहा है।


📌 निष्कर्ष: बढ़ती ग्रोथ, सुरक्षित लेंडिंग

Zerodha Capital ने FY25 में शानदार प्रदर्शन किया है, खासकर अपने छोटे आकार और सीमित संसाधनों के बावजूद। डिजिटल प्लेटफॉर्म, पारदर्शिता, और गिरवी आधारित लोन मॉडल ने इसे रिटेल इनवेस्टर्स के बीच विश्वसनीय विकल्प बना दिया है।

ग्राहकों को सेफ्टी के साथ लिक्विडिटी देने वाला यह मॉडल आने वाले वर्षों में बड़ा आकार ले सकता है — खासकर तब, जब रेगुलेटरी सपोर्ट और टेक्नोलॉजिकल स्केलेबिलिटी दोनों साथ हों।


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🇮🇳 Razorpay ने पूरा किया ‘Reverse Flip’,

Razorpay

भारत की प्रमुख फिनटेक यूनिकॉर्न कंपनी Razorpay ने आधिकारिक रूप से अपना ‘रिवर्स फ्लिप’ पूरा कर लिया है, यानी अब कंपनी का लीगल डोमिसाइल भारत में स्थानांतरित हो चुका है। इस कदम के साथ Razorpay उन भारतीय स्टार्टअप्स की लिस्ट में शामिल हो गई है जो हाल के महीनों में अपने मुख्यालय को सिंगापुर या यूएस से भारत वापस ले आई हैं।


🔁 क्या है ‘Reverse Flip’?

‘रिवर्स फ्लिप’ एक कॉर्पोरेट प्रक्रिया है जिसमें कोई कंपनी जो पहले विदेशी स्थान पर रजिस्टर्ड थी (जैसे सिंगापुर या अमेरिका), वह अपने कानूनी और कॉर्पोरेट रजिस्ट्रेशन को भारत में स्थानांतरित करती है। यह कदम आमतौर पर IPO की तैयारी, टैक्स रेग्युलेशन, और भारत की तेज़ी से बढ़ती डिजिटल इकोनॉमी में भरोसे को दर्शाता है।


Razorpay ने किया आधिकारिक ऐलान

Razorpay के को-फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर शशांक कुमार ने इस विकास की पुष्टि करते हुए कहा:

“हां, हमने अपना रिवर्स फ्लिप आधिकारिक रूप से पूरा कर लिया है, और हम इससे ज़्यादा गर्वित नहीं हो सकते। यह सिर्फ एक कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर का बदलाव नहीं है, बल्कि भारत की आर्थिक क्षमता और इनोवेशन सिस्टम पर विश्वास का प्रतीक है।”

उन्होंने आगे कहा:

“हमने Razorpay की शुरुआत भारत के लिए कुछ बड़ा बनाने के सपने के साथ की थी, और आज हम उस सपने को और मज़बूती दे रहे हैं। अब भारत न सिर्फ हमारा सबसे बड़ा मार्केट है, बल्कि यही हमारा ग्लोबल हेडक्वार्टर भी है।”


📍 हैदराबाद से मिली मंज़ूरी, Razorpay Inc. का भारत में विलय

Razorpay ने कुछ महीने पहले पब्लिक लिमिटेड कंपनी में ट्रांज़िशन पूरा किया था। अब, हैदराबाद स्थित रीजनल डायरेक्टर ने Razorpay Inc. (विदेशी यूनिट) के Razorpay India के साथ विलय (amalgamation) को भी मंज़ूरी दे दी है।

इसका मतलब है कि कंपनी का लीगल और ऑपरेशनल बेस पूरी तरह भारत में शिफ्ट हो चुका है — IPO के रास्ते की एक अहम मंज़िल।


📊 IPO का टारगेट: 2026-27

Razorpay अब 2026-27 तक IPO लाने की योजना बना रही है। भारत में रिवर्स फ्लिप पूरा करके कंपनी अब सेबी (SEBI) के अंतर्गत आने वाले लोकल लिस्टिंग नियमों के अंतर्गत आ चुकी है, जिससे IPO की राह आसान हो जाएगी।


🚀 कौन-कौन से स्टार्टअप्स कर चुके हैं रिवर्स फ्लिप?

Razorpay से पहले कई और दिग्गज स्टार्टअप्स ने रिवर्स फ्लिप की प्रक्रिया पूरी की है:

  • PhonePe
  • Zepto
  • Dream11
  • Groww

जबकि कुछ अन्य कंपनियाँ जैसे:

  • Meesho
  • Pine Labs
  • Eruditus
  • Livspace
  • Mensa Brands
  • KreditBee

अभी भी अंतिम रेग्युलेटरी मंज़ूरी का इंतज़ार कर रही हैं। हाल ही में Flipkart ने भी सिंगापुर से भारत में लीगल डोमिसाइल शिफ्ट करने का ऐलान किया है।


💰 Razorpay की फंडिंग और वैल्यूएशन

अब तक Razorpay ने विभिन्न निवेश दौरों में $800 मिलियन (लगभग ₹6,600 करोड़) से अधिक जुटाए हैं। कंपनी की आखिरी घोषित वैल्यूएशन $7 बिलियन (₹58,000 करोड़) थी।

हालाँकि, रिवर्स फ्लिप करने से कंपनी को कैपिटल गेन टैक्स जैसे कुछ वित्तीय प्रभाव भी झेलने पड़ सकते हैं, खासकर अगर उसकी वैल्यूएशन बहुत अधिक हो।


📈 FY24 में Razorpay का प्रदर्शन

FY24 (वित्त वर्ष 2023-24) में Razorpay ने दर्ज किया:

  • राजस्व (Revenue): ₹2,068 करोड़
  • मुनाफा (Profit): ₹35 करोड़

इससे यह साफ है कि Razorpay तेज़ी से बढ़ने वाला, लाभदायक फिनटेक स्टार्टअप बन चुका है।


⚔️ प्रतियोगिता: Cashfree और PayU से मुकाबला

Razorpay की सीधी प्रतिस्पर्धा भारत में अन्य पेमेंट गेटवे कंपनियों से है:

कंपनीFY24 राजस्व
Razorpay₹2,068 करोड़
Cashfree₹642 करोड़
PayU India₹3,800 करोड़ (लगभग)

Razorpay, B2B पेमेंट सॉल्यूशंस, सब्सक्रिप्शन मैनेजमेंट, और UPI आधारित ट्रांजेक्शनों के क्षेत्र में लीडिंग प्लेयर बना हुआ है।


🌐 क्या है Razorpay का फोकस?

  • भारत में घरेलू लिस्टिंग की तैयारी
  • MSMEs और स्टार्टअप्स के लिए आसान पेमेंट सॉल्यूशन
  • फिनटेक इनोवेशन को भारत में ही बढ़ावा देना
  • भारत को “बिल्ड फॉर इंडिया, लीड फ्रॉम इंडिया” का हब बनाना

🔍 निष्कर्ष: Razorpay बना आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक

Razorpay का रिवर्स फ्लिप भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक मील का पत्थर है। इससे यह साबित होता है कि अब भारत न केवल स्टार्टअप्स के लिए एक निर्माणस्थल (building ground) है, बल्कि अब यह ग्लोबल हेडक्वार्टर बनने लायक मंच भी है।

क्या Razorpay भारत का अगला बड़ा IPO होगा? क्या निवेशक इससे फायदा उठा सकेंगे?

इन सभी सवालों का जवाब आने वाले महीनों में मिलेगा। लेकिन इतना तय है कि Razorpay की यह रणनीति भविष्य के लिए एक प्रेरणा बन सकती है।


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💰 Saarathi Finance ने पहले ही फंडिंग राउंड में जुटाए ₹475 करोड़,

Saarathi

नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) Saarathi Finance ने अपने पहले फंडिंग राउंड में ₹475 करोड़ जुटाए हैं। यह सीरीज A निवेश राउंड प्रमुख रूप से TVS Capital Funds, Lok Capital, Evolvence Equity Partners और Paragon Partners ने लीड किया, जिनके साथ कुछ एंजेल इन्वेस्टर्स ने मिलकर करीब ₹350 करोड़ निवेश किया। बाकी की रकम Vivek Bansal और Sunil Daga ने कंपनी में खुद निवेश की।

इस ताज़ा फंडिंग के बाद Saarathi Finance की वैल्यूएशन ₹900 करोड़ से अधिक आँकी जा रही है, जो इसे भारत के NBFC सेक्टर में एक उभरता हुआ यूनिकॉर्न बनाने की दिशा में ले जाती है।


📍 लक्ष्य: ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत में MSMEs को सशक्त बनाना

कंपनी के अनुसार, इस फंडिंग से Saarathi Finance को ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में MSME (Micro, Small and Medium Enterprises) को वित्तीय सहायता प्रदान करने के मिशन को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। Saarathi Finance फिलहाल तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में सक्रिय है।

इन राज्यों के छोटे उद्यमियों को पारंपरिक बैंकों और संस्थागत ऋणदाताओं से अक्सर ऋण नहीं मिल पाता। Saarathi Finance इन ‘क्रेडिट अंडरसर्व्ड’ उद्यमियों को टारगेट कर रही है जो विकास की क्षमता रखते हैं लेकिन पूंजी की कमी से पीछे रह जाते हैं।


🧠 टेक्नोलॉजी और लोकल अंडरस्टैंडिंग का कॉम्बिनेशन

Saarathi Finance का बिज़नेस मॉडल एक अनूठा मिश्रण है – तकनीक-आधारित समाधान और स्थानीय बाजारों की गहरी समझ। कंपनी:

  • सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड दोनों प्रकार के लोन उपलब्ध कराती है
  • लोन प्रोसेसिंग को तेजी से पूरा करती है
  • इनकम असेसमेंट को फ्लेक्सिबल रखती है, जिससे अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर के उद्यमियों को भी मौका मिलता है

यह मॉडल उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी है जो बैंकों की कठोर प्रक्रियाओं के कारण फाइनेंसिंग से वंचित रह जाते हैं।


💬 फाउंडर का विज़न: “सिर्फ लोन नहीं, पार्टनरशिप चाहिए भारत को”

Saarathi Finance के फाउंडर और सीईओ विवेक बंसल ने इस उपलब्धि पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा:

“हम भारत के उद्यमियों को सिर्फ क्रेडिट नहीं, बल्कि एक ऐसा सहयोग देना चाहते हैं जो उनके विकास की यात्रा में सच्चा भागीदार बने। यह फंडिंग हमारे मिशन को रफ्तार देगी। हम सभी निवेशकों, दोस्तों और परिवार का आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने इस सफर को मुमकिन बनाया। अब हम और ज़्यादा जोश के साथ आगे बढ़ेंगे।”

बंसल के इस विज़न से साफ है कि Saarathi Finance खुद को केवल एक NBFC नहीं, बल्कि “विकास का साथी” मानती है।


🚀 MSME सेक्टर में क्रेडिट गैप को भरने की कोशिश

भारत में MSME सेक्टर देश के GDP का 30% और रोज़गार का 40% हिस्सा योगदान करता है, लेकिन इनका सबसे बड़ा संकट है — क्रेडिट की कमी। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में MSMEs के लिए लगभग ₹25 लाख करोड़ का क्रेडिट गैप है।

Saarathi Finance जैसे NBFCs इस गैप को भरने के लिए आगे आ रहे हैं। कंपनी:

  • छोटे व्यापारियों को उनकी जरूरतों के हिसाब से कस्टम लोन प्रोडक्ट देती है
  • क्षेत्रीय भाषाओं और स्थानीय कर्मचारियों के ज़रिये ग्राहक से जुड़ाव बढ़ाती है
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आसान डॉक्यूमेंटेशन प्रोसेस मुहैया कराती है

📈 निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है

TVS Capital Funds, Lok Capital, Evolvence Equity Partners, और Paragon Partners जैसे संस्थानों का इस शुरुआती राउंड में निवेश करना यह दर्शाता है कि Saarathi Finance के मॉडल में दीर्घकालिक ग्रोथ की संभावना है।

NBFC सेक्टर, खासकर जो MSMEs को सर्विस करता है, अब निवेशकों की नई पसंद बनता जा रहा है। Saarathi Finance की रणनीति में:

  • जोखिम प्रबंधन (risk management) के स्मार्ट टूल्स
  • स्केलेबल टेक इन्फ्रास्ट्रक्चर
  • ग्राउंड लेवल कस्टमर कनेक्ट

जैसी खूबियां हैं जो निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं।


📊 आगे की राह: विस्तार, टेक अपग्रेड और प्रोफिटेबिलिटी

इस फंडिंग के साथ Saarathi Finance अब अपने विस्तार की योजना पर काम कर रही है। अगले 12-18 महीनों में कंपनी:

  • और राज्यों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगी
  • टेक्नोलॉजी में अपग्रेड करेगी — जैसे AI-ड्रिवन लोन असेसमेंट
  • और नए MSME प्रोडक्ट्स लॉन्च करेगी जो सेक्टर की बदलती जरूरतों को पूरा करें

कंपनी का लक्ष्य है कि वह 2026 तक प्रॉफिटेबिलिटी की दिशा में तेजी से बढ़े।


✅ निष्कर्ष: भारत के छोटे व्यापारियों को मिला एक नया साथी

Saarathi Finance की इस फंडिंग राउंड ने यह साबित किया है कि भारत के MSME फाइनेंस सेक्टर में अब भी अपार संभावनाएं हैं। जब बड़े बैंक अब भी क्रेडिट एक्सेस के मामले में सुस्त हैं, Saarathi जैसे NBFCs ‘भारत के उद्यमियों’ के असली साथी बनकर उभर रहे हैं।

अब देखना य>ह है कि कंपनी इस पूंजी का इस्तेमाल कितनी कुशलता से करती है, और क्या वह अपने वादे के अनुसार ‘सिर्फ लोन नहीं, पार्टनरशिप’ का विज़न पूरा कर पाती है।

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🏥 Medikabazaar ने FY24 में ऑपरेटिंग रेवेन्यू में की 50% की छलांग,

Medikabazaar

बी2बी मेडिकल सप्लाई चेन प्लेटफॉर्म Medikabazaar ने वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) में जोरदार रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी का ऑपरेटिंग ग्रॉस रेवेन्यू 50% बढ़कर ₹1,355.6 करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछली तिमाही FY23 में ₹908.5 करोड़ था। हालांकि, तेज़ी से बढ़ती लागतों और डिफॉल्ट रिस्क के कारण कंपनी का कुल घाटा 30% बढ़कर ₹394.8 करोड़ हो गया।


📊 मजबूत ग्रोथ के बावजूद घाटे की मार

Medikabazaar ने FY23 में अपने रेवेन्यू में 41% की गिरावट देखी थी, लेकिन FY24 में कंपनी ने उस झटके से वापसी करते हुए मजबूत प्रदर्शन किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी की कुल आमदनी ₹1,407 करोड़ रही, जिसमें ₹51.3 करोड़ की इनकम फिक्स्ड डिपॉजिट्स, बॉन्ड्स और अन्य निवेशों से हुई है।

लेकिन जैसे-जैसे कंपनी का स्केल बढ़ा, वैसे-वैसे खर्चे भी बढ़ते गए। FY24 में कुल खर्च ₹1,621 करोड़ रहा, जो FY23 के ₹1,126.5 करोड़ से 44% अधिक है।


🧪 कंपनी कैसे काम करती है?

Medikabazaar एक B2B प्लेटफॉर्म है जो अस्पतालों और क्लीनिक्स को मेडिकल इक्विपमेंट, डायग्नोस्टिक डिवाइस, कंज़्यूमेबल्स और डेंटल टूल्स जैसी वस्तुएं रियल-टाइम में ढूंढने, उनकी तुलना करने और ऑर्डर करने में मदद करता है।

FY24 में कंपनी की 98% आय यानी ₹1,328.6 करोड़ केवल इन प्रोडक्ट्स की बिक्री से हुई है। इसका मतलब है कि कंपनी का मॉडल अब भी पूरी तरह इन सप्लाई पर निर्भर है।


🛒 सबसे बड़ी लागत: मेडिकल सप्लाई की खरीद

Medikabazaar के खर्चों में सबसे बड़ा हिस्सा मेडिकल इक्विपमेंट और सप्लाई की खरीदारी का रहा, जो कि कुल खर्च का 79% था। यह लागत FY24 में ₹1,279 करोड़ तक पहुँच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 43% ज़्यादा है।

इसके अलावा कर्मचारी लाभ (Employee Benefit Expenses) FY24 में 40% बढ़कर ₹140 करोड़ तक पहुँच गए। कंपनी की टीम और इसके संचालन में हो रहे विस्तार के चलते यह खर्च भी तेज़ी से बढ़ा है।


⚠️ रिस्क फैक्टर: डाउटफुल डेब्ट्स और एडवांस

FY24 में Medikabazaar ने ₹66.5 करोड़ की नॉन-कैश बुकिंग ‘संभावित डाउटफुल डेब्ट्स और एडवांस’ के तहत की है। यह दर्शाता है कि क्रेडिट पर बेचे गए मेडिकल सप्लाई के भुगतान में देरी या डिफॉल्ट हो सकता है। यह हेल्थकेयर सप्लाई जैसे बी2बी बिजनेस में एक आम चुनौती है।


📣 मार्केटिंग, लॉजिस्टिक्स और अन्य खर्च

कंपनी ने FY24 में एडवर्टाइजिंग, लीगल सर्विस, ट्रैवल, ट्रांसपोर्टेशन और प्रोफेशनल फीस जैसे खर्चों पर भी बड़ा निवेश किया। ये सारे खर्च मिलाकर ऑपरेटिंग खर्चों को ₹1,621 करोड़ तक ले गए।

इन सबके चलते, कंपनी का घाटा FY23 के ₹303.4 करोड़ से बढ़कर FY24 में ₹394.5 करोड़ हो गया।


❗ एक्सेप्शनल खर्चों की मार

FY24 में कंपनी ने ₹178.65 करोड़ के एक्सेप्शनल खर्च भी दर्ज किए, जिनमें शामिल हैं:

  • डाउटफुल डेब्ट्स और एडवांस के लिए अलाउंस
  • इन्वेंट्री राइट-ऑफ्स
  • बैलेंस शीट की सफाई (write-offs)
  • ₹88.6 करोड़ के अनक्लासिफाइड खर्च

इन एकमुश्त खर्चों ने भी घाटे को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।


🧾 यूनिट इकॉनॉमिक्स: हर ₹1 कमाने के लिए ₹1.2 खर्च

FY24 में Medikabazaar ने हर ₹1 की ऑपरेटिंग इनकम के लिए ₹1.2 खर्च किए, यानी कंपनी की यूनिट इकॉनॉमिक्स अभी भी निगेटिव बनी हुई है। हालांकि, इस तरह की लागत उच्च-वॉल्यूम B2B कारोबारों में सामान्य मानी जाती है — खासकर जब कंपनी विस्तार मोड में हो।


💰 फाइनेंशियल हेल्थ: कैश रिजर्व और एसेट्स

FY24 के अंत तक, Medikabazaar के टोटल करंट एसेट्स ₹1,176.56 करोड़ तक पहुंच गए, जिनमें से ₹62.76 करोड़ कैश और बैंक बैलेंस के रूप में उपलब्ध हैं। यह दर्शाता है कि कंपनी के पास अब भी संचालन के लिए पर्याप्त पूंजी है, लेकिन घाटे की भरपाई के लिए उसे जल्द प्रॉफिटेबिलिटी की दिशा में कदम उठाने होंगे।


🧠 निष्कर्ष: ग्रोथ की रफ्तार बनी, लेकिन घाटा चिंता का विषय

Medikabazaar ने FY24 में रेवेन्यू ग्रोथ के मोर्चे पर शानदार वापसी की है, लेकिन लगातार बढ़ते खर्च और क्रेडिट रिस्क की वजह से घाटा अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। FY25 में कंपनी को अगर यूनिट इकॉनॉमिक्स सुधारने और घाटे को घटाने की दिशा में काम करना है, तो उसे:

  • क्रेडिट साइकिल को सुधारना होगा
  • ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ानी होगी
  • खर्चों को कम करने की रणनीति बनानी होगी

B2B हेल्थटेक सेक्टर में जब कॉम्पिटिशन और पेमेंट डिफॉल्ट की समस्याएं बढ़ रही हैं, तब Medikabazaar का यह वित्तीय प्रदर्शन उद्योग के लिए एक अहम केस स्टडी बन सकता है।

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📚 Unacademy के को-फाउंडर्स ने छोड़ी कंपनी,

Unacademy

भारत के अग्रणी एजटेक यूनिकॉर्न Unacademy के दो मूल संस्थापक — गौरव मुंजाल और रोमन सैनी — अब कंपनी से औपचारिक रूप से बाहर निकलने की तैयारी में हैं। दोनों अब अपना फोकस एक नई भाषा-शिक्षा ऐप AirLearn पर केंद्रित कर रहे हैं, जो अमेरिका में पहले ही अच्छा traction हासिल कर चुकी है।

यह एक दुर्लभ उदाहरण है जब किसी भारतीय एजटेक यूनिकॉर्न के मूल संस्थापक समूह ने कंपनी से पूरी तरह दूरी बना ली है। तीसरे को-फाउंडर हेमेश सिंह पहले ही जून 2024 में कंपनी छोड़ चुके हैं।


🚀 अब बागडोर संभालेंगे ग्राफ़ी के को-फाउंडर सुमित जैन

The Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार, Unacademy की सहायक कंपनी Graphy के को-फाउंडर सुमित जैन अब Unacademy के संचालन की कमान संभाल सकते हैं। सुमित 2020 में Unacademy से जुड़े थे, जब उनकी पिछली कंपनी Opentalk का अधिग्रहण हुआ था।

हालाँकि, कर्मचारियों को भेजे गए एक आंतरिक ईमेल में सुमित जैन ने इन खबरों को “अफवाह” बताया है और टीम से इन्हें नजरअंदाज़ करने को कहा है। Entrackr ने इस ईमेल की एक प्रति प्राप्त की है।


🌐 नई उड़ान: क्या है AirLearn?

गौरव मुंजाल और रोमन सैनी अब पूरी तरह से AirLearn पर ध्यान दे रहे हैं, जो एक AI-बेस्ड लैंग्वेज लर्निंग ऐप है। यह ऐप कुछ ही महीनों में $400,000 की सालाना recurring revenue (ARR) अमेरिका में हासिल कर चुकी है — जो कि किसी नए भारतीय स्टार्टअप के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है।

AirLearn का उद्देश्य दुनिया भर में भाषा शिक्षा को ज्यादा इंटरेक्टिव, तेज़ और किफायती बनाना है। यह ऐप फिलहाल अमेरिका में तेजी से लोकप्रिय हो रही है और अब भारत सहित अन्य देशों में विस्तार की तैयारी कर रही है।


📊 Unacademy: फाउंडर्स की हिस्सेदारी और मौजूदा हालात

Startup डेटा प्लेटफॉर्म TheKredible के मुताबिक, Unacademy के तीनों मूल को-फाउंडर्स की कंपनी में कुल मिलाकर 15% हिस्सेदारी है। Unacademy के बोर्ड में अभी भी बड़े नाम शामिल हैं:

  • SoftBank
  • General Atlantic
  • भाविन तुरकिया (Zeta)
  • सुजीत कुमार (Udaan)
  • गौरव मुंजाल और रोमन सैनी (अब तक)

अगर मुंजाल और सैनी कंपनी से बाहर निकलते हैं, तो यह बोर्ड संरचना में भी एक बड़ा बदलाव होगा।


💵 घाटा हुआ कम, बैलेंस शीट में स्थिरता

गौरव मुंजाल ने हाल ही में दावा किया था कि Unacademy ने अपने कोर एजुकेशन बिजनेस में कैश बर्न को ₹1,000 करोड़ सालाना से घटाकर ₹200 करोड़ तक कर लिया है। उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी के पास ₹1,200 करोड़ की नकद पूंजी उपलब्ध है और यह वित्तीय रूप से “स्थिर” स्थिति में है।

Unacademy की सहायक कंपनियाँ जैसे कि Graphy और PrepLadder हर महीने मुनाफा कमा रही हैं। यानी कंपनी का संचालन घाटे में नहीं बल्कि अब लाभ की दिशा में बढ़ रहा है।


🧭 नेतृत्व परिवर्तन का संकेत

संस्थापकों का बाहर निकलना और सुमित जैन का नेतृत्व संभालना, Unacademy के लिए एक नई दिशा और रणनीति की ओर इशारा कर रहा है। कंपनी अब मूल शिक्षा व्यवसाय से आगे बढ़कर नए वर्टिकल्स पर ध्यान दे रही है, जैसे:

  • प्रोफेशनल स्किल डेवलपमेंट
  • कंटेंट क्रिएशन (Graphy)
  • मेडिकल टेस्ट प्रेप (PrepLadder)

यह बदलाव Unacademy को एक व्यापक एडटेक प्लेटफॉर्म बनने की दिशा में ले जा रहा है, जो सिर्फ कोर्स बेचने तक सीमित नहीं रहना चाहता।


🇮🇳 भारत के एडटेक सेक्टर में बदलाव की लहर

Unacademy के संस्थापकों का यह कदम भारत के एडटेक सेक्टर में हो रहे व्यापक बदलावों को भी दर्शाता है। कोविड के दौरान एडटेक स्टार्टअप्स ने जितनी तेज़ी से ऊँचाई पाई थी, अब उतनी ही तीव्रता से उन्हें सस्टेनेबिलिटी, प्रॉफिटेबिलिटी और फोकस्ड बिजनेस मॉडल अपनाने की जरूरत महसूस हो रही है।

BYJU’S, Vedantu, upGrad, सभी इस समय घाटे से उबरने और नए नेतृत्व या बिजनेस मॉडल पर काम कर रहे हैं।


🔚 निष्कर्ष: एक अध्याय का अंत, नए सफर की शुरुआत

गौरव मुंजाल और रोमन सैनी का Unacademy से जाना एक युग के अंत जैसा है, खासकर उन छात्रों और युवाओं के लिए जिन्होंने इस प्लेटफॉर्म के ज़रिए UPSC, NEET, IIT-JEE जैसी परीक्षाओं की तैयारी की।

लेकिन साथ ही यह भारतीय उद्यमिता की सुंदरता भी दिखाता है — जहां एक उद्यमी एक सफल कंपनी खड़ी करने के बाद, नया सपना देखने की हिम्मत करता है। AirLearn उसी नई यात्रा की शुरुआत है, जो भारत की तकनीकी दुनिया में एक और सफल अध्याय जोड़ सकती है।

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💳 तीन साल बाद CRED ने फिर जुटाई फंडिंग, वैल्यूएशन में 45% की गिरावट

CRED

नई दिल्ली, 26 मई 2025: फिनटेक यूनिकॉर्न CRED ने लगभग तीन साल के अंतराल के बाद एक बार फिर से फंडिंग जुटाई है। कंपनी को अपने मौजूदा निवेशकों से $75 मिलियन (लगभग ₹625 करोड़) का निवेश मिला है। सूत्रों के अनुसार, इस इंटरनल राउंड में CRED के फाउंडर कुणाल शाह खुद भी लगभग $20 मिलियन का निवेश कर रहे हैं।


🏦 कौन-कौन निवेशक हैं इस राउंड में?

इस राउंड का नेतृत्व GIC (Government of Singapore Investment Corporation) कर रहा है, जो Lathe Investment के ज़रिए निवेश कर रही है। साथ ही, इस राउंड में RTP Global और Sofina जैसी पुरानी निवेशक कंपनियाँ भी भाग ले रही हैं।

“डील के सभी टर्म्स फाइनल हो चुके हैं और जल्द ही इसकी आधिकारिक घोषणा होने की संभावना है,” — एक सूत्र ने Entrackr को बताया।


📉 वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट

2022 में CRED ने GIC के नेतृत्व में $140 मिलियन जुटाए थे और उस समय कंपनी की वैल्यूएशन $6.4 बिलियन थी। लेकिन इस बार की फंडिंग डील के बाद CRED की वैल्यूएशन घटकर $3.5 बिलियन रह गई है — यानी करीब 45% की गिरावट


💰 अब तक कितना निवेश मिला है?

CRED ने अब तक 9 फंडिंग राउंड्स में लगभग $1 बिलियन की कुल पूंजी जुटाई है। TheKredible के आंकड़ों के मुताबिक:

  • PeakXV Partners कंपनी के सबसे बड़े बाहरी शेयरहोल्डर हैं — 10.4% हिस्सेदारी
  • इसके बाद Ribbit Capital, Tiger Global जैसे दिग्गज निवेशक शामिल हैं
  • संस्थापक कुणाल शाह की प्रत्यक्ष हिस्सेदारी 22.8% है, जो उनकी QED Innovation Labs के साथ मिलकर है

📈 कंपनी अब मुनाफे की ओर?

सूत्रों के मुताबिक, CRED ने FY26 की शुरुआती दो महीनों में मुनाफा कमाना शुरू कर दिया है। कंपनी अब पूरे वित्त वर्ष में पूर्ण लाभप्रदता (Full-year Profitability) का लक्ष्य लेकर चल रही है।

यह संकेत कंपनी की रणनीति में बड़ा बदलाव दिखाता है, खासतौर पर ऐसे समय में जब भारत में कई ग्रोथ-स्टेज और लेट-स्टेज स्टार्टअप्स फंडिंग संकट से जूझ रहे हैं।


🧾 CRED क्या सेवाएं देता है?

CRED एक फिनटेक ऐप है जो मुख्य रूप से क्रेडिट कार्ड उपयोगकर्ताओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसके प्रमुख फीचर्स में शामिल हैं:

  • क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट
  • क्रेडिट स्कोर ट्रैकिंग
  • छिपे हुए चार्ज की पहचान
  • बिल पेमेंट रिमाइंडर
  • कैशबैक और रिवॉर्ड्स
  • ऑनलाइन शॉपिंग और ट्रैवल पैकेज
  • व्हीकल इंश्योरेंस, FASTag मैनेजमेंट
  • पहले यह P2P लेंडिंग सेवा भी देता था, जिसे हाल ही में RBI के नए दिशा-निर्देशों के बाद बंद कर दिया गया है।

📊 FY24 में घाटा बढ़ा, लेकिन रेवेन्यू में जबरदस्त उछाल

FY24 (मार्च 2024 तक के वित्तीय वर्ष) में CRED ने:

  • ₹1,644 करोड़ का शुद्ध घाटा दर्ज किया, जो FY23 के मुकाबले 22% अधिक है
  • यह घाटा मुख्य रूप से ESOP और टैक्स से संबंधित खर्चों की वजह से बढ़ा
  • इसी दौरान कंपनी का राजस्व 66% बढ़कर ₹2,473 करोड़ हो गया, जो कंपनी की टॉपलाइन ग्रोथ को दर्शाता है

🌐 डाउन राउंड्स का दौर

CRED अकेली नहीं है जो डाउन राउंड (नीची वैल्यूएशन पर फंडिंग) का सामना कर रही है। मौजूदा फंडिंग माहौल में कई बड़े स्टार्टअप्स को इसी तरह के हालात से गुजरना पड़ रहा है:

  • Spinny ने हाल ही में $131 मिलियन जुटाए लेकिन उसी वैल्यूएशन पर
  • Euler Motors, Udaan ने भी फ्लैट वैल्यूएशन पर फंडिंग की
  • Pratilipi, Stanza Living, CityMall, The Good Glamm Group जैसे स्टार्टअप्स कम वैल्यूएशन पर निवेश की बातचीत कर रहे हैं

🧠 आगे का रास्ता

CRED अब अपने बिजनेस मॉडल को ऑप्टिमाइज़ कर रहा है और घाटे को कम करके प्लेटफॉर्म की कमाई और उपयोगकर्ता एंगेजमेंट पर ध्यान दे रहा है। कंपनी का “फिनटेक से सुपरऐप” बनने का सपना अब लाभप्रदता और टिकाऊ ग्रोथ के रास्ते से होकर गुजर रहा है।


🔚 निष्कर्ष

तीन साल के अंतराल के बाद CRED की वापसी यह दिखाती है कि फंडिंग भले ही मुश्किल हो, लेकिन मजबूत ब्रांड, उपयोगकर्ता आधार और विविध प्रोडक्ट पोर्टफोलियो के दम पर कंपनियाँ फिर से निवेशकों का भरोसा जीत सकती हैं।

हालांकि वैल्यूएशन में 45% की कटौती स्टार्टअप यूनिवर्स के लिए एक स्पष्ट संकेत है — अब सिर्फ ग्रोथ नहीं, सस्टेनेबिलिटी और प्रॉफिटेबिलिटी ही फंडिंग की असली कसौटी हैं।

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🚚 Fleetx को मिला ₹113 करोड़ का फंडिंग बूस्ट, IPO की तैयारी में जुटी कंपनी

Fleetx

गुरुग्राम, 26 मई 2025: भारत की तेजी से बढ़ती लॉजिस्टिक्स SaaS स्टार्टअप Fleetx ने अपने सीरीज C फंडिंग राउंड में ₹113 करोड़ (लगभग $13.2 मिलियन) जुटाए हैं। यह निवेश कंपनी के मौजूदा निवेशकों IndiaMART Intermesh और BEENEXT’s Accelerate Fund ने लीड किया है। इस राउंड में प्राइमरी और सेकेंडरी, दोनों तरह के ट्रांजैक्शन शामिल हैं।


💸 Fleetx को पहले भी मिल चुकी है बड़ी फंडिंग

Fleetx ने फरवरी 2022 में सीरीज B राउंड में $19.4 मिलियन जुटाए थे, जिसे IndiaMART ने लीड किया था। उस राउंड में IndiaQuotient और BEENEXT भी शामिल हुए थे। अब दो साल बाद, कंपनी ने एक और फंडिंग राउंड के साथ अपने विस्तार को नई दिशा दी है।


🚀 फंडिंग का उपयोग कहां होगा?

Fleetx ने प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि इस फंडिंग का उपयोग मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में किया जाएगा:

  • अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को मजबूत करने के लिए
  • मिड-मार्केट और एंटरप्राइज सेगमेंट में अपनी बाज़ार मौजूदगी को बढ़ाने के लिए
  • प्रॉफिटेबिलिटी और IPO-readiness को ध्यान में रखते हुए परिचालन ढांचे को मजबूत करने के लिए

🧠 AI और IoT के इंटीग्रेशन से बने स्मार्ट सॉल्यूशन

Fleetx की स्थापना 2017 में की गई थी। इसे विनीत शर्मा, अभय जीत गुप्ता, उद्भव राय, प्रवीन कटारिया और विशाल मिश्रा ने मिलकर शुरू किया था। कंपनी AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) को जोड़कर लॉजिस्टिक्स इंडस्ट्री को डिजिटल और स्मार्ट बना रही है।

Fleetx के प्रमुख उत्पादों में शामिल हैं:

  • Fleet Management
  • Fuel Analytics
  • Video Telematics
  • Transport ERP
  • TMS (Transport Management System)

📊 IPO की तैयारी और ARR डबल करने का लक्ष्य

Fleetx अब अगले दो वर्षों में IPO के लिए खुद को तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी का लक्ष्य है:

  • प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करना
  • वार्षिक रीकरींग रेवेन्यू (ARR) को डबल करना
  • मजबूत प्रोडक्ट स्टैक और टिकाऊ बिजनेस मॉडल तैयार करना

Fleetx के सीईओ विनीत शर्मा ने कहा:

“हमारे पास लॉजिस्टिक्स इंडस्ट्री का विशाल डेटा है, और हम AI की मदद से इस क्षेत्र की सबसे जटिल समस्याओं को हल करने की स्थिति में हैं। हमारा फोकस एक प्रभावशाली, टिकाऊ और ग्राहक-केन्द्रित व्यवसाय तैयार करने पर है।”


📈 4 गुना ग्रोथ और 2000+ ग्राहक

Fleetx का दावा है कि उसने 2022 के बाद से 4 गुना ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी ने हाल ही में ₹100 करोड़ से अधिक ARR पार कर लिया है और फिलहाल 2000 से अधिक ग्राहकों को सेवाएं दे रही है। इनमें से 100 से ज्यादा ग्राहक बड़े एंटरप्राइज अकाउंट्स हैं।


🏭 किन सेक्टर्स को कर रही है सर्विस?

Fleetx के ग्राहक कई इंडस्ट्रीज़ से आते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • सीमेंट (Cement)
  • FMCG
  • खनन (Mining)
  • ट्रांसपोर्टेशन
  • मैन्युफैक्चरिंग

🏢 प्रमुख ग्राहकों में शामिल हैं:

  • Ultratech Cement
  • Adani Group
  • Unilever
  • Godrej
  • Shree Cement
  • Maersk
  • Panasonic

📉 घाटे में बड़ी कटौती

Fleetx ने FY24 (मार्च 2024 समाप्त वित्तीय वर्ष) में:

  • ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹56.58 करोड़ दर्ज किया, जो FY23 में ₹41.63 करोड़ था। यानी 36% सालाना ग्रोथ
  • वहीं कंपनी ने घाटा 55% से अधिक घटाकर ₹24.21 करोड़ कर दिया है, जो FY23 में कहीं अधिक था।

FY25 की वार्षिक रिपोर्ट अब तक दाखिल नहीं की गई है।


🧭 Fleetx का भविष्य कैसा दिखता है?

Fleetx का टेक्नोलॉजी-फर्स्ट दृष्टिकोण और विविध इंडस्ट्री कस्टमर बेस इसे लॉजिस्टिक्स SaaS सेक्टर में तेजी से उभरते मार्केट लीडर के रूप में स्थापित कर रहा है।

फंडिंग, प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार, ARR ग्रोथ और IPO की योजना जैसे कारक कंपनी के भविष्य को और भी रोशन बना रहे हैं।


📌 निष्कर्ष

Fleetx ने अपनी नवीनतम सीरीज C फंडिंग से यह साबित कर दिया है कि वह केवल सर्वाइव नहीं कर रही, बल्कि स्केल और इनोवेशन दोनों पर फोकस करके इंडस्ट्री में लीड करना चाहती है

भारत के लॉजिस्टिक्स सेक्टर में जहां डिजिटल परिवर्तन की मांग तेजी से बढ़ रही है, वहीं Fleetx जैसी कंपनियाँ AI और डेटा ड्रिवन समाधानों के जरिए बदलाव की अगुवाई कर रही हैं।

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🏢 Awfis FY25 की चौथी तिमाही में 47% रेवेन्यू ग्रोथ और 8 गुना मुनाफा

Awfis

नई दिल्ली, 26 मई 2025: भारत की अग्रणी को-वर्किंग स्पेस प्रोवाइडर कंपनी Awfis ने वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही (Q4 FY25) के शानदार नतीजे जारी किए हैं। कंपनी ने 47% की सालाना रेवेन्यू ग्रोथ और 8 गुना मुनाफे के साथ एक मजबूत वित्तीय प्रदर्शन किया है।


📈 रेवेन्यू में ज़बरदस्त उछाल

National Stock Exchange (NSE) पर दायर अनऑडिटेड कंसोलिडेटेड वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, Awfis का ऑपरेटिंग रेवेन्यू Q4 FY25 में ₹340 करोड़ रहा, जो Q4 FY24 में ₹232 करोड़ था। यानी सालाना आधार पर 47% की बढ़ोतरी हुई है।

पूरे वित्तीय वर्ष (FY25) की बात करें तो कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹1,208 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 40% ज्यादा है।


💰 मुनाफे में 8 गुना उछाल

सिर्फ रेवेन्यू ही नहीं, कंपनी ने इस बार मुनाफे में भी जबरदस्त प्रदर्शन किया है। Q4 FY25 में कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹11.2 करोड़ रहा, जो Q4 FY24 में मात्र ₹1.4 करोड़ था — यानी 8 गुना से ज्यादा की बढ़त

पूरे साल के स्तर पर Awfis ने ₹68 करोड़ का प्रॉफिट दर्ज किया है, जो इसे पहली बार सालाना आधार पर लाभ में ले आया है।


🏬 को-वर्किंग से सबसे ज्यादा कमाई

Awfis की कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू का 79% हिस्सा को-वर्किंग स्पेस रेंटल्स और उससे जुड़े सर्विसेस से आया है। इस सेगमेंट की कमाई 60% सालाना वृद्धि के साथ Q4 FY25 में ₹269 करोड़ रही, जबकि Q4 FY24 में यह ₹168 करोड़ थी।

अन्य स्रोतों से कंपनी ने निर्माण कार्य (construction & fit-outs), फैसिलिटी मैनेजमेंट, और खाने-पीने की चीज़ों की बिक्री से भी आय अर्जित की।

कंपनी ने इस तिमाही में ₹19.7 करोड़ की अन्य आय भी अर्जित की, जिससे कुल रेवेन्यू Q4 FY25 में ₹359.4 करोड़ तक पहुंच गया।


🧾 खर्चों में भी इजाफा

जहाँ आय में भारी वृद्धि हुई है, वहीं खर्च भी बढ़े हैं। Awfis का कुल खर्च Q4 FY25 में ₹347.5 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹240 करोड़ था — यानी 45% की वृद्धि

  • डिप्रिशिएशन और अमॉर्टाइज़ेशन सबसे बड़ा खर्च रहा, जो कुल खर्च का 23% था और ₹82 करोड़ तक पहुंच गया।
  • सब-कॉन्ट्रैक्टिंग और ट्रेडेड गुड्स की खरीदारी में 27% की बढ़त के साथ यह खर्च ₹66 करोड़ रहा।
  • फाइनेंस कॉस्ट में 79% की वृद्धि हुई और यह ₹42.6 करोड़ रहा।
  • कर्मचारी लाभ खर्च में उल्टा 19% की गिरावट आई और यह ₹29.5 करोड़ रहा।

📊 मजबूत फाइनेंशियल स्थिति और शेयर प्रदर्शन

Awfis ने मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के साथ-साथ शेयर बाजार में भी स्थिर प्रदर्शन किया है। 26 मई 2025 को कंपनी का शेयर ₹648.10 पर बंद हुआ, जिससे उसकी कुल मार्केट कैप ₹4,599 करोड़ (लगभग $541 मिलियन) हो गई है।


👨‍💼 नया CEO नियुक्त

Q4 FY25 के नतीजों के साथ-साथ Awfis ने अपने नेतृत्व में एक बड़ा बदलाव भी किया है। कंपनी ने Sumit Lakhani को Chief Executive Officer (CEO) नियुक्त किया है।

Sumit इससे पहले कंपनी में Deputy CEO थे और उन्होंने 2015 में Chief Marketing Officer (CMO) के रूप में Awfis में जॉइन किया था।

Sumit की लीडरशिप में कंपनी ने ब्रांडिंग और ग्रोथ में कई मील के पत्थर हासिल किए हैं।


🧠 Awfis की रणनीति क्या है?

Awfis की स्थापना 2015 में की गई थी और तब से यह भारत के स्टार्टअप्स, SMEs और बड़े कॉर्पोरेशनों के लिए कस्टमाइज़्ड ऑफिस स्पेस और ancillary services (जैसे F&B, IT support, इंटरनेट, फर्नीचर आदि) प्रदान करती आ रही है।

कंपनी का उद्देश्य सिर्फ एक को-वर्किंग स्पेस प्रोवाइडर बनना नहीं है, बल्कि एक संपूर्ण ऑफिस सॉल्यूशन इकोसिस्टम बनाना है जो स्केलेबल हो, टेक-सक्षम हो, और क्लाइंट्स की विविध ज़रूरतों को पूरा कर सके।


🔮 आगे की दिशा

इस मजबूत वित्तीय प्रदर्शन से Awfis ने यह संकेत दे दिया है कि वह आने वाले समय में भी ग्रोथ की रफ्तार बनाए रखने में सक्षम है।

  • तेजी से बढ़ता को-वर्किंग कल्चर और हाइब्रिड वर्क मॉडल आने वाले वर्षों में कंपनी की ग्रोथ को और रफ्तार दे सकते हैं।
  • कंपनी को कॉस्ट मैनेजमेंट और मार्जिन सुधार पर ध्यान देना होगा ताकि यह लाभप्रदता बनाए रख सके।

📌 निष्कर्ष

Awfis ने FY25 में राजस्व और मुनाफे दोनों में शानदार छलांग लगाकर खुद को एक सस्टेनेबल और प्रॉफिटेबल बिज़नेस मॉडल के रूप में स्थापित किया है।

जहाँ दूसरी को-वर्किंग कंपनियाँ अभी भी घाटे से जूझ रही हैं, वहीं Awfis ने न सिर्फ लाभ कमाया है बल्कि खुद को मार्केट लीडरशिप की दिशा में आगे बढ़ते हुए दिखाया है।

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👶 FirstCry की पैरेंट कंपनी BrainBees का रिपोर्ट कार्ड जारी FY25 में रेवेन्यू बढ़ा,

FirstCry

नई दिल्ली, 26 मई 2025: बच्चों पर केंद्रित ओम्नीचैनल रिटेलर FirstCry की पैरेंट कंपनी BrainBees Solutions ने वित्तीय वर्ष 2024-25 (FY25) की चौथी तिमाही (Q4) की रिपोर्ट जारी कर दी है। रिपोर्ट से पता चलता है कि कंपनी ने मध्यम स्तर की ग्रोथ तो दर्ज की है, लेकिन साथ ही घाटा भी 74% बढ़कर ₹75 करोड़ पर पहुंच गया है।


📈 FirstCry रेवेन्यू में 16% की सालाना वृद्धि

National Stock Exchange (NSE) से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, FirstCry का ऑपरेटिंग रेवेन्यू Q4 FY25 में ₹1,930 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही Q4 FY24 के ₹1,667 करोड़ से करीब 16% अधिक है।

वहीं पूरे वित्तीय वर्ष की बात करें तो, BrainBees का कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹7,660 करोड़ रहा, जो FY24 के ₹6,481 करोड़ से 18% ज्यादा है।


🛒 कहां से आई कमाई?

FirstCry की आमदनी मुख्य रूप से ऑफलाइन स्टोर्स, वेबसाइट और इंटरनेशनल मार्केट में प्रोडक्ट्स की बिक्री से हुई, जो कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू का 69% हिस्सा है।

वहीं इसकी सब्सिडियरी कंपनी GlobalBees ने Q4 FY25 में ₹398 करोड़ की कमाई की। इसके अलावा, BrainBees को ₹48 करोड़ का ब्याज से प्राप्त हुआ, जिससे इसका कुल रेवेन्यू Q4 FY25 में ₹1,979 करोड़ रहा, जबकि Q4 FY24 में यह ₹1,685 करोड़ था।


💸 खर्च भी बढ़े, खासतौर पर रॉ मटेरियल्स और कर्मचारी सैलरी में

कंपनी का खर्च भी रेवेन्यू के साथ-साथ बढ़ा है। रॉ मटेरियल की खरीद पर सबसे ज्यादा खर्च हुआ, जो कुल खर्च का 58% था। यह खर्च Q4 FY24 में ₹1,055 करोड़ से बढ़कर Q4 FY25 में ₹1,206 करोड़ हो गया — यानी 14% की बढ़ोतरी

कर्मचारी लाभ (employee benefits) के तहत Q4 FY25 में ₹229 करोड़ खर्च हुए, जिसमें ₹82 करोड़ केवल ESOP (Employee Stock Ownership Plan) के रूप में शामिल हैं।


📊 कुल खर्च और घाटा

Q4 FY25 में कुल खर्च ₹2,060 करोड़ पहुंच गया, जो पिछले साल की समान तिमाही Q4 FY24 में ₹1,737 करोड़ था। पूरे FY25 में कंपनी का कुल खर्च ₹7,992 करोड़ रहा।

घाटे की बात करें तो, BrainBees का Q4 FY25 में घाटा ₹75 करोड़ रहा — यह पिछले साल की तुलना में 74% ज्यादा है।

हालांकि, पूरे वित्तीय वर्ष के स्तर पर FY25 में कंपनी का घाटा ₹215 करोड़ रहा, जो FY24 के ₹321 करोड़ से कम है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस आंकड़े में ₹37 करोड़ के exceptional items को शामिल नहीं किया गया है


📉 स्टॉक मार्केट पर असर

BrainBees ने स्टॉक एक्सचेंज पर ₹446 के इश्यू प्राइस पर लिस्टिंग की थी। लेकिन 26 मई 2025 को इसका शेयर ₹376.5 पर ट्रेड कर रहा है, जिससे कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹19,631 करोड़ पर आ गया है।

यह गिरावट निवेशकों के लिए थोड़ा निराशाजनक हो सकती है, खासकर तब जब घाटा बढ़ रहा हो और लाभप्रदता (profitability) की कोई स्पष्ट समयरेखा सामने न हो।


📌 क्या कहता है यह डेटा?

FirstCry का बिज़नेस मॉडल ओम्नीचैनल रिटेल पर आधारित है — यानी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों प्लेटफॉर्म से बिक्री करना। भारत जैसे विविधता वाले देश में यह मॉडल काफी सफल रहा है, खासकर बच्चों की जरूरतों पर केंद्रित ब्रांड के लिए।

हालांकि, बढ़ते खर्च और लाभ में कमी इस बात की ओर इशारा करते हैं कि लॉन्ग टर्म स्केलेबिलिटी के लिए कंपनी को खर्चों पर नियंत्रण और प्रॉफिटेबल ग्रोथ पर ध्यान देना होगा।


🤔 आगे की राह

BrainBees ने अभी तक FY26 के लिए कोई भविष्यवाणी नहीं की है, लेकिन मौजूदा ट्रेंड्स को देखते हुए यह स्पष्ट है कि:

  • कंपनी को ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर काम करना होगा।
  • मार्केटिंग और टेक्नोलॉजी खर्च को ऑप्टिमाइज़ करना ज़रूरी होगा।
  • GlobalBees जैसे सब्सिडियरी मॉडल्स से नए रेवेन्यू चैनल्स को और बेहतर बनाना होगा।

🧠 निष्कर्ष

FirstCry और उसकी पैरेंट कंपनी BrainBees ने बच्चों के रिटेल मार्केट में अपनी जगह पक्की की है, लेकिन अब अगला फोकस होना चाहिए — प्रॉफिटेबल ग्रोथ

एक तरफ रेवेन्यू लगातार बढ़ रहा है, दूसरी तरफ बढ़ते खर्च और घाटा कंपनी के सामने चुनौती के रूप में खड़े हैं।

क्या BrainBees आने वाले वर्षों में लाभ में बदलाव ला पाएगी? निवेशक और इंडस्ट्री दोनों की नजर इस पर टिकी है।

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💍 Shark Tank वाली Palmonas को जल्द मिलेगा ₹55 करोड़ का निवेश,

Palmonas

पुणे, मई 2025: डमी-फाइन ज्वेलरी ब्रांड Palmonas, जो हाल ही में Shark Tank India Season 4 में नज़र आया था, अब अपने पहले बड़े इंस्टीट्यूशनल फंडिंग राउंड को अंतिम रूप देने जा रहा है। इस साल यह स्टार्टअप का दूसरा फंडिंग राउंड होगा।

सूत्रों के अनुसार, Vertex Ventures इस ₹55 करोड़ के सीरीज़ A फंडिंग राउंड का नेतृत्व कर रहा है। इस निवेश के साथ Palmonas का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन ₹550 करोड़ (लगभग $65 मिलियन) तक पहुंच जाएगा।


💡 Palmonas: ज्वेलरी की दुनिया का नया नाम

Palmonas की स्थापना 2022 में अमोल पाटवारी और पल्लवी मोहाडिकर ने की थी। यह स्टार्टअप खासतौर पर डमी-फाइन ज्वेलरी (demi-fine jewellery) पर केंद्रित है। इनके प्रोडक्ट्स में स्टेनलेस स्टील से बनी और 18 कैरेट गोल्ड वर्मील कोटिंग वाली नेकलेस, रिंग्स, ब्रेसलेट्स, ईयररिंग्स और मंगलसूत्र शामिल हैं।

इस कैटेगरी का उद्देश्य है – सस्ती कीमतों पर खूबसूरत, टिकाऊ और स्किन-फ्रेंडली ज्वेलरी उपलब्ध कराना, खासतौर पर भारत की युवा, शहरी महिलाओं को टारगेट करते हुए।


🦈 Shark Tank से मिला था बड़ा बूस्ट

Palmonas को फरवरी 2025 में Shark Tank India Season 4 में बड़ा फाइनेंशियल और ब्रांडिंग बूस्ट मिला था, जब इसे ₹1.26 करोड़ का निवेश मिला था। यह निवेश मशहूर शार्क्स नमिता थापर और रितेश अग्रवाल (OYO) ने किया था, और उस समय कंपनी का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन ₹126 करोड़ था।

इससे पहले, Palmonas ने एक एंजल फंडिंग राउंड में ₹6 करोड़ जुटाए थे।


🎬 श्रद्धा कपूर बनीं को-फाउंडर

Palmonas ने मार्च 2024 में एक बड़ा ब्रांडिंग कदम उठाते हुए बॉलीवुड अभिनेत्री श्रद्धा कपूर को अपना को-फाउंडर बनाया। इससे न केवल Palmonas की ब्रांड वैल्यू बढ़ी, बल्कि सोशल मीडिया पर इसकी मौजूदगी और ग्राहक जुड़ाव में भी उल्लेखनीय इज़ाफा हुआ।

श्रद्धा के जुड़ने के बाद Palmonas ने “सस्टेनेबल, मिनिमलिस्ट और स्टाइलिश ज्वेलरी” को लेकर अपने ब्रांड मैसेज को और मजबूत किया।


📈 फाइनेंशियल प्रदर्शन: राजस्व में ग्रोथ, लेकिन घाटा बरकरार

Palmonas ने वित्तीय वर्ष FY24 (मार्च 2024 को समाप्त) में ₹5.38 करोड़ का ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल FY23 के ₹3.83 करोड़ के मुकाबले लगभग 40% की वृद्धि है।

हालांकि, कंपनी को अभी भी ₹1.24 करोड़ का घाटा हो रहा है। FY25 की वार्षिक रिपोर्ट फिलहाल दाखिल नहीं हुई है।


📊 Vertex Ventures का भरोसा

Vertex Ventures इस सीरीज़ A डील का नेतृत्व कर रहा है। यह वेंचर कैपिटल फर्म टेमासेक समर्थित है और 2023 में इसने $541 मिलियन का पांचवां फंड क्लोज किया था, जिसका उद्देश्य प्री-सीरीज़ A से लेकर सीरीज़ B स्टार्टअप्स में निवेश करना है।

Palmonas से पहले, Vertex Ventures ने SpotDraft (डॉक्यूमेंट लाइफसाइकल मैनेजमेंट), Spyne (AI बेस्ड फोटोग्राफी और एडिटिंग), और D2C इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांड Nuuk जैसे स्टार्टअप्स में भी निवेश किया है।


🤝 डील फाइनल, जल्द होगा ऐलान

सूत्रों के अनुसार, Palmonas और Vertex Ventures के बीच डील की सभी शर्तें तय हो चुकी हैं और कंपनी अगले कुछ हफ्तों में इस फंडिंग का आधिकारिक ऐलान कर सकती है

हालांकि, Palmonas और Vertex Ventures ने इस खबर पर अभी कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी है।


🛒 Palmonas का D2C मॉडल: डिजिटल इंडिया के अनुरूप

Palmonas पूरी तरह से डायरेक्ट-टू-कस्टमर (D2C) मॉडल पर काम करता है। कंपनी की वेबसाइट और सोशल मीडिया चैनलों पर इसका काफ़ी मजबूत प्रेजेंस है। Palmonas इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग और रील्स कैंपेन के जरिए अपनी ज्वेलरी को प्रमोट करता है।

अर्थव्यवस्था में बढ़ते डिजिटल ट्रेंड्स और युवा महिलाओं की फैशन के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते Palmonas जैसे ब्रांड्स को तेज़ी से अपनाया जा रहा है।


🔮 आगे की योजना: मेट्रो से लेकर Tier II शहरों तक विस्तार

नई फंडिंग Palmonas को अपने प्रोडक्ट रेंज बढ़ाने, स्टॉक मैनेजमेंट सुधारने और मेट्रो से लेकर Tier II शहरों में मार्केट विस्तार करने में मदद करेगी।

कंपनी अपनी ज्वेलरी लाइन में नई कैटेगरीज़ जैसे बच्चों के लिए मिनी ज्वेलरी, कस्टमाइज़्ड नाम वाली ज्वेलरी और शादी-पार्टी थीम कलेक्शन लॉन्च करने की भी योजना बना रही है।


🧠 निष्कर्ष

Palmonas ने बहुत ही कम समय में भारत के D2C ज्वेलरी सेक्टर में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। Shark Tank से मिली मान्यता, श्रद्धा कपूर की ब्रांड एंबेसडर और अब Vertex Ventures जैसे बड़े निवेशक का भरोसा — इन सभी फैक्टर्स ने इसे एक हाई-पोटेंशियल स्टार्टअप बना दिया है।

जहाँ पारंपरिक ज्वेलरी कंपनियां ऑफलाइन मोड में उलझी हुई हैं, Palmonas जैसे डिजिटल-फर्स्ट ब्रांड्स भारत में अगली जेनरेशन की कस्टमर्स को बेहतर विकल्प दे रहे हैं।

क्या Palmonas ₹1000 करोड़ वैल्यूएशन क्लब में पहुंच पाएगा? यह देखने वाली बात होगी।

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