Udaan ने $114 मिलियन में सीरीज़ G राउंड किया पूरा,

Udaan

भारत के सबसे बड़े B2B ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स में से एक Udaan ने अपने सीरीज़ G फंडिंग राउंड को $114 मिलियन (लगभग ₹950 करोड़) के साथ सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस राउंड का नेतृत्व M&G Investments और Lightspeed ने किया, जबकि इसमें कुछ नए और मौजूदा निवेशकों ने भी भाग लिया।

यह डील Udaan के लिए ना सिर्फ वित्तीय मजबूती लाती है, बल्कि इसे IPO (Initial Public Offering) की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ने में मदद करेगी।


💰 फरवरी में मिला था $75 मिलियन, अब कुल सीरीज़ G पहुंची $114 मिलियन

बेंगलुरु-स्थित Udaan ने फरवरी 2025 में $75 मिलियन की पहली किश्त हासिल की थी, जो अब इस ताज़ा निवेश के साथ कुल $114 मिलियन हो गई है। यह फंडिंग फ्लैट वैल्यूएशन पर हुई, यानी पिछली वैल्यूएशन के आसपास ही कंपनी ने फंडिंग जुटाई है।

Entrackr के अनुसार, Udaan की पिछली फंडिंग राउंड के दौरान कंपनी का वैल्यूएशन लगभग $1.8 बिलियन (₹15,000 करोड़) था।


📦 ताज़ा फंडिंग का इस्तेमाल किन कामों में होगा?

Udaan ने प्रेस रिलीज़ में बताया कि यह ताज़ा पूंजी कई महत्वपूर्ण बिज़नेस पहलुओं को मजबूत करने में खर्च की जाएगी:

  • 🛍️ FMCG (Fast Moving Consumer Goods) कैटेगरी में विस्तार
  • 🍽️ HoReCa (Hotel, Restaurant, Catering) कस्टमर सेगमेंट पर फोकस
  • 🏷️ अपने प्राइवेट लेबल ब्रांड्स को मुख्य रूप से “स्टेपल्स” कैटेगरी में तेज़ी से बढ़ाना
  • 💹 बैलेंस शीट को और मजबूत बनाना ताकि भविष्य में IPO के लिए बेहतर वित्तीय स्थिति बनाई जा सके

🧾 कंपनी का कहना है: EBITDA पर फोकस, घाटा घटा 40%

Udaan के को-फाउंडर और CEO वैभव गुप्ता ने कहा:

“पिछले तीन वर्षों में हमने अपने बिज़नेस मॉडल को पूरी तरह से री-इंजीनियर किया है। हमने ‘कॉस्ट को कैपेबिलिटी’ और ‘कम्पिटिटिव एडवांटेज’ बना लिया है। पिछले तीन सालों में हमारा EBITDA बर्न हर साल 40% कम हुआ है और हम अगले 18 महीनों में पूरे ग्रुप के लिए EBITDA प्रोफिटेबिलिटी हासिल करने के ट्रैक पर हैं।”


📊 ग्रोथ और घाटा दोनों पर कंट्रोल

Udaan ने 2024 के कैलेंडर वर्ष में 60% सालाना ग्रोथ (YoY) दर्ज की है। साथ ही, कंपनी ने अपना कॉंट्रिब्यूशन मार्जिन 300 बेसिस पॉइंट्स तक सुधारा है।

2024 में:

  • 📉 फिक्स्ड कॉस्ट्स में 20% की कटौती
  • 💸 EBITDA बर्न में 40% की गिरावट
  • 📉 2025 की शुरुआत में अब तक EBITDA बर्न में और 20% की कमी

💹 फाइनेंशियल परफॉर्मेंस: FY24 में मामूली रेवेन्यू ग्रोथ, लेकिन घाटे में बड़ी कमी

Udaan ने अभी तक FY25 के आंकड़े साझा नहीं किए हैं, लेकिन FY24 (मार्च 2024 समाप्त वर्ष) के मुताबिक:

  • 📈 GMV (Gross Revenue): ₹5,706.6 करोड़ (FY23 में ₹5,609.3 करोड़) → सिर्फ 1.7% की ग्रोथ
  • 💸 Net Loss: ₹1,674.1 करोड़ → FY23 की तुलना में 19.4% की कमी

हालांकि रेवेन्यू में बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई, लेकिन खर्चों पर कंट्रोल कर कंपनी ने घाटे को काफी हद तक कम किया है।


🌐 क्या है Udaan का बिज़नेस मॉडल?

Udaan एक B2B प्लेटफॉर्म है जो:

  • 🛒 किराना दुकानों,
  • 🧼 FMCG रिटेलर्स,
  • 🍴 होटल और रेस्तरां बिज़नेस

को सीधे मैन्युफैक्चरर्स और ब्रांड्स से जोड़ता है। यह सप्लाई चेन को सरल बनाकर छोटे और मझौले व्यापारियों को सस्ता, तेज़ और भरोसेमंद सामान उपलब्ध कराता है।

Udaan का नेटवर्क भारत के 700 से ज़्यादा शहरों और कस्बों में फैला है, और कंपनी का दावा है कि इसके प्लेटफॉर्म पर लाखों SMBs (Small and Medium Businesses) सक्रिय हैं।


📈 IPO की तैयारी में जुटी है कंपनी

Udaan की रणनीति अब IPO की ओर स्पष्ट रूप से बढ़ रही है। EBITDA बर्न में कटौती, फिक्स्ड कॉस्ट में कमी और ऑपरेशनल मार्जिन में सुधार — यह सब संकेत हैं कि कंपनी अपनी बैलेंस शीट को IPO रेडी बनाने में जुटी हुई है।

यदि Udaan अगले 18 महीनों में EBITDA पॉज़िटिव हो जाती है, तो यह भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक बड़ी कामयाबी मानी जाएगी, खासतौर पर B2B ई-कॉमर्स जैसे चुनौतीपूर्ण सेगमेंट में।


📝 निष्कर्ष: Udaan की नई उड़ान, IPO की ओर बढ़ता आत्मविश्वास

Udaan का लेटेस्ट $114 मिलियन का फंडरेज़ यह दर्शाता है कि निवेशकों को कंपनी के विज़न और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर भरोसा है। जहां रेवेन्यू ग्रोथ धीमी रही, वहीं घाटा कम करने और मार्जिन सुधारने के कदमों ने कंपनी को फाइनेंशियल रूप से मजबूत बनाया है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि अगले एक से डेढ़ साल में Udaan पब्लिक मार्केट्स में एंट्री लेती है या नहीं।

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👔 Snitch ने जुटाए $40 मिलियन!

Snitch

भारतीय D2C फैशन ब्रांड Snitch ने अपनी सीरीज़ B फंडिंग राउंड में $40 मिलियन (लगभग ₹333 करोड़) की बड़ी रकम जुटाई है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व 360 ONE Asset ने किया, जबकि मौजूदा निवेशक IvyCap Ventures और SWC Global ने भी भाग लिया। इसके अलावा Ravi Modi Family Office और कई अन्य एंजेल निवेशकों ने भी निवेश किया है।


💰 Snitch की दूसरी बड़ी फंडिंग, दिसंबर 2023 में हुई थी सीरीज़ A

बेंगलुरु स्थित Snitch के लिए यह दूसरी बड़ी फंडिंग है। इससे पहले कंपनी ने दिसंबर 2023 में $13 मिलियन (लगभग ₹108 करोड़) की सीरीज़ A फंडिंग हासिल की थी। अब यह नया निवेश ब्रांड को भारत और इंटरनेशनल लेवल पर तेज़ी से विस्तार का मौका देगा।


🏬 55 से 100 स्टोर्स तक: रिटेल में होगा बड़ा विस्तार

Snitch इस फंडिंग का उपयोग कई बड़े स्तर के लक्ष्यों के लिए करेगी:

  • 🔹 अपने ऑफलाइन स्टोर नेटवर्क को 55 से बढ़ाकर 100+ तक ले जाना
  • 🔹 Quick commerce कैटेगरी में एंट्री
  • 🔹 इंटरनेशनल मार्केट में संभावनाओं की जांच
  • 🔹 नई अपैरल और लाइफस्टाइल कैटेगरी में विस्तार

Snitch का लक्ष्य है कि वह 2025 के अंत तक भारत में अपने रिटेल फुटप्रिंट को दोगुना करे।


👕 क्या है Snitch की खासियत?

2020 में सिद्धार्थ डुंगरवाल द्वारा स्थापित Snitch एक D2C (Direct-to-Consumer) मेंसवियर ब्रांड है, जो स्टाइलिश, ट्रेंडी और किफायती कपड़े उपलब्ध कराता है। कंपनी अपने प्रोडक्ट्स को:

  • 🌐 अपनी वेबसाइट,
  • 📱 मोबाइल ऐप और
  • 🏬 तेजी से बढ़ते ऑफलाइन स्टोर्स नेटवर्क के ज़रिए बेचती है।

Snitch खासतौर पर मिलेनियल और Gen-Z ग्राहकों को टार्गेट करता है, जो किफायती दाम में फैशनेबल आउटफिट्स की तलाश में रहते हैं।


📈 120% ग्रोथ और 55+ स्टोर्स के साथ वैश्विक विस्तार की तैयारी

Snitch के फाउंडर और CEO सिद्धार्थ डुंगरवाल ने कहा:

“120% सालाना ग्रोथ, 55+ स्टोर्स और एक मजबूत लॉयल कस्टमर बेस के साथ हम अब अगली लीग में कदम रख रहे हैं। हमारा लक्ष्य है एक वर्ल्ड-क्लास ब्रांड बनाना, जिसकी जड़ें भारत में हों और जिसमें तेज़ी से फैसले लेने की क्षमता हो। अब हम ग्लोबल मार्केट की ओर बढ़ रहे हैं और पब्लिक मार्केट्स में प्रवेश की तैयारी कर रहे हैं।”

Snitch अब न केवल भारत में बल्कि इंटरनेशनल स्तर पर भी अपनी पहचान बनाने को तैयार है।


🦈 Shark Tank India से मिली थी पहली पहचान

Snitch को Shark Tank India सीज़न 2 में जबरदस्त पहचान मिली थी। कंपनी ने वहां ₹1.5 करोड़ की फंडिंग हासिल की थी वो भी महज़ 1.5% इक्विटी के बदले।

इस डील में शामिल थे:

  • Anupam Mittal (Shaadi.com)
  • Aman Gupta (boAt)
  • Namita Thapar (Emcure)
  • Vineeta Singh (Sugar Cosmetics)
  • Peyush Bansal (Lenskart)
  • Amit Jain (CarDekho)

इस डील पर कंपनी की वैल्यूएशन ₹100 करोड़ आंकी गई थी। यह उस समय के लिए एक बड़ा माइलस्टोन था, जिसने Snitch को देशभर में पॉपुलर बना दिया।


📊 वित्तीय प्रदर्शन: FY24 में ₹241 करोड़ की रेवेन्यू और ₹4.39 करोड़ मुनाफा

वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) में Snitch ने शानदार प्रदर्शन किया:

  • 🔹 रेवेन्यू: ₹241 करोड़
  • 🔹 सालाना वृद्धि: 100%
  • 🔹 मुनाफा (Net Profit): ₹4.39 करोड़

हालांकि FY25 के वार्षिक नतीजे अभी तक सार्वजनिक नहीं हुए हैं, लेकिन कंपनी की मौजूदा ग्रोथ और नए फंडिंग से संकेत मिलते हैं कि FY25 में भी कंपनी मजबूत प्रदर्शन करेगी।


🌍 इंटरनेशनल मार्केट और IPO की ओर कदम

Snitch अब केवल भारतीय बाजार तक सीमित नहीं रहना चाहता। कंपनी की योजना है:

  • 🌐 इंटरनेशनल मार्केट्स में प्रवेश करना (संभवतः मिडल ईस्ट, साउथ ईस्ट एशिया और यूरोप जैसे क्षेत्रों में)
  • 📈 IPO (Initial Public Offering) के ज़रिए पब्लिक मार्केट में लिस्ट होना

यह कदम Snitch को एक ग्लोबल मेंसवियर ब्रांड के रूप में स्थापित कर सकते हैं।


📌 निष्कर्ष: भारत के फैशन स्टार्टअप्स में Snitch की मजबूत मौजूदगी

Snitch ने सिर्फ 4 वर्षों में अपने ट्रेंडी प्रोडक्ट्स, D2C मॉडल और तेज़ ग्रोथ के चलते भारतीय फैशन स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक मजबूत पहचान बनाई है। इस नई फंडिंग के साथ Snitch न केवल अपने रिटेल विस्तार को बढ़ाएगा, बल्कि इंटरनेशनल स्टेज पर भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार है।


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Read more :⚡Ola Electric इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट में TVS का जलवा,

⚡Ola Electric इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट में TVS का जलवा,

ola electric

भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल क्रांति अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। मई 2025 मे Ola Electric इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (E2W) सेगमेंट ने शानदार प्रदर्शन किया, जहां कुल 1,00,266 यूनिट्स की रिटेल बिक्री दर्ज की गई। यह साल 2025 में अब तक का दूसरा सबसे बड़ा मासिक आंकड़ा है — मार्च 2025 के रिकॉर्ड 1,31,364 यूनिट्स के बाद।

यह आंकड़े Vahan पोर्टल द्वारा जारी किए गए हैं, जो देशभर में वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर आधारित होते हैं। बढ़ते ईवी अपनाने के साथ, यह डेटा भारत में EV मार्केट के लगातार विस्तार को दर्शाता है।


🏍️ TVS Motor बनी नंबर 1, 24% मार्केट शेयर के साथ टॉप पर

TVS Motor ने एक बार फिर बाज़ी मारी है। कंपनी ने मई 2025 में 24,560 यूनिट्स की बिक्री की, जो कि 107% सालाना ग्रोथ (YoY) को दर्शाता है। यह प्रदर्शन कंपनी के नए मॉडल्स, डीलर नेटवर्क विस्तार और आक्रामक मार्केटिंग रणनीति का नतीजा है।

TVS ने अब मई में 24% मार्केट शेयर हासिल कर लिया है, जिससे वह EV सेगमेंट में सबसे आगे है।


🏁 Bajaj Auto ने दिखाई रफ्तार, Ola को पीछे छोड़ा

Bajaj Auto ने मई में 21,770 यूनिट्स की बिक्री की, जिसमें 135% की YoY ग्रोथ दर्ज की गई। इसके साथ ही, Bajaj ने अब 22% का मार्केट शेयर अपने नाम किया है और यह TVS के बेहद करीब पहुंच गया है।

पिछले कुछ महीनों तक Bajaj और Ola Electric लगभग बराबरी पर चल रहे थे, लेकिन अब Bajaj ने तेज़ी दिखाई है और Ola को पीछे छोड़ दिया है।


📉 Ola Electric की बिक्री में गिरावट, मार्केट शेयर घटकर 18%

एक समय पर EV मार्केट की अगुवाई करने वाली Ola Electric को मई 2025 में झटका लगा। कंपनी की बिक्री 18,499 यूनिट्स पर आकर रुक गई, जो कि पिछले साल की तुलना में 51% कम है। इसके साथ ही Ola का मार्केट शेयर भी घटकर 18% रह गया है।

अप्रैल में Ola और Bajaj कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे थे, लेकिन Ola की बिक्री में गिरावट के चलते कंपनी अब तीसरे स्थान पर खिसक गई है।


⚙️ Ather Energy की तेज़ी बनी रही, पहली बार Ola को राजस्व में पछाड़ा

Ather Energy, जिसे हाल ही में स्टॉक मार्केट में लिस्ट किया गया है, ने 12,840 यूनिट्स की बिक्री की। यह आंकड़ा 109% YoY ग्रोथ को दर्शाता है। कंपनी ने मई में 13% का मार्केट शेयर प्राप्त किया।

Ather अब सिर्फ बिक्री में ही नहीं, बल्कि राजस्व (Revenue) के लिहाज से भी Ola से आगे निकल गया है। FY25 की चौथी तिमाही (Q4 FY25) में Ather का ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹676 करोड़ रहा, जबकि Ola Electric का रेवेन्यू 60% गिरकर ₹611 करोड़ रह गया।

यह उपलब्धि Tarun Mehta के नेतृत्व वाली Ather के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है, खासकर जब इसे Bhavish Aggarwal की Ola Electric से तुलना में देखा जाए।


🛵 Hero MotoCorp की वापसी, 191% की ग्रोथ

भारत की पारंपरिक ऑटो इंडस्ट्री की दिग्गज कंपनी Hero MotoCorp ने भी EV सेगमेंट में ज़ोरदार वापसी की है। कंपनी ने मई 2025 में 7,164 यूनिट्स की बिक्री की, जो कि पिछले साल की तुलना में 191% ज्यादा है।

Hero की वापसी से EV मार्केट में प्रतिस्पर्धा और तेज़ हुई है, और यह आने वाले महीनों में बाजार में बड़ा असर डाल सकती है।


🔟 टॉप 10 E2W कंपनियों की सूची

मई 2025 में भारत में सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बेचने वाली कंपनियों की सूची इस प्रकार है:

रैंककंपनीबिक्री (यूनिट्स)YoY ग्रोथमार्केट शेयर
1️⃣TVS Motor24,560107%24%
2️⃣Bajaj Auto21,770135%22%
3️⃣Ola Electric18,499-51%18%
4️⃣Ather Energy12,840109%13%
5️⃣Hero MotoCorp7,164191%7%
6️⃣Greaves Electricआंकड़े उपलब्ध नहीं
7️⃣Pur Energy (PURE EV)
8️⃣BGauss Auto
9️⃣Kinetic Green
🔟River Mobility

(कुछ कंपनियों के सटीक आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।)


🔋 EV सेक्टर की ग्रोथ के पीछे क्या हैं मुख्य वजहें?

  1. सरकार की सब्सिडी और FAME स्कीम्स – इनसे ग्राहकों को आर्थिक लाभ मिलता है।
  2. 🌱 ईंधन की बढ़ती कीमतें – लोग पेट्रोल के विकल्प तलाश रहे हैं।
  3. बैटरी तकनीक में सुधार – रेंज और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर हुआ है।
  4. 🏭 मेड इन इंडिया निर्माण – लोकल प्रोडक्शन से लागत में कमी आई है।

🚀 EV मार्केट का भविष्य

मई 2025 के आंकड़े यह दिखाते हैं कि भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट अब स्थिर नहीं रहा, बल्कि यह अगली ऑटो क्रांति बनता जा रहा है। TVS और Bajaj जैसी पारंपरिक कंपनियां अब Ola और Ather जैसे स्टार्टअप्स को टक्कर दे रही हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा और नवाचार दोनों को बढ़ावा मिल रहा है।

EV सेक्टर में आगे भी नए मॉडल, बेहतर बैटरियां और चार्जिंग समाधान आने की उम्मीद है। इस रफ्तार से EV बाजार जल्द ही आईसीई (Internal Combustion Engine) वाहनों को पीछे छोड़ सकता है।


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Read more :📲 मई 2025 में UPI ने तोड़े सभी रिकॉर्ड: 18.68 बिलियन ट्रांजैक्शन

📲 मई 2025 में UPI ने तोड़े सभी रिकॉर्ड: 18.68 बिलियन ट्रांजैक्शन

UPI

भारत का डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर हर महीने नई ऊँचाइयाँ छू रहा है। Unified Payments Interface (UPI) ने मई 2025 में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 18.68 बिलियन (1.86 अरब) ट्रांजैक्शन दर्ज किए, जो अप्रैल 2025 के 17.89 बिलियन से 4.4% ज्यादा है।

इसके साथ ही, साल-दर-साल (YoY) आधार पर UPI ट्रांजैक्शन में 33% की शानदार बढ़ोतरी देखने को मिली है। यह ट्रेंड दर्शाता है कि UPI भारत में सिर्फ शहरी ही नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।


💰 ट्रांजैक्शन वैल्यू ₹25.14 लाख करोड़ पार

National Payments Corporation of India (NPCI) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मई 2025 में UPI के जरिए कुल ₹25.14 लाख करोड़ का लेन-देन हुआ, जो अप्रैल के ₹23.95 लाख करोड़ से लगभग 5% ज्यादा है।

सालाना तुलना करें तो मई 2024 के मुकाबले इस बार 23% की ग्रोथ दर्ज की गई है। यानी डिजिटल भुगतान में भारत एक नए मुकाम पर पहुंच रहा है।


📅 रोजाना का औसत लेन-देन भी बढ़ा

मई 2025 में UPI का रोजाना औसत ट्रांजैक्शन वॉल्यूम बढ़कर 602 मिलियन हो गया, जबकि अप्रैल में यह आंकड़ा 596 मिलियन था।

वहीं, रोजाना औसत ट्रांजैक्शन वैल्यू भी बढ़कर ₹81,106 करोड़ पर पहुंच गई, जो अप्रैल में ₹79,831 करोड़ थी। यह दर्शाता है कि लोग अब पहले से ज्यादा बार और ज्यादा रकम UPI के जरिए ट्रांसफर कर रहे हैं।


🔄 मार्च से भी बेहतर रहा मई का प्रदर्शन

यदि मार्च 2025 की बात करें, तब UPI ने 18.30 बिलियन ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए थे, जिनकी वैल्यू ₹24.77 लाख करोड़ थी। इस तुलना में देखा जाए तो मई 2025 ने वॉल्यूम और वैल्यू दोनों मामलों में मार्च और अप्रैल को पीछे छोड़ दिया है।

यह वृद्धि न केवल UPI की विश्वसनीयता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था अब वैश्विक मानकों को टक्कर दे रही है।


📱 कौन सा ऐप सबसे आगे?

UPI ऐप्स की रेस में हमेशा की तरह PhonePe सबसे आगे रहा है। अप्रैल 2025 के अनुसार:

  • 📲 PhonePe का मार्केट शेयर 46.73% रहा, जिसके तहत उसने 8.36 बिलियन ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए।
  • 🟢 दूसरे स्थान पर रहा Google Pay, जिसने 6.48 बिलियन ट्रांजैक्शन किए और 36% मार्केट शेयर अपने नाम किया।
  • 🟠 इनके बाद Paytm, Navi और Super.money जैसे ऐप्स भी सक्रिय रहे।

इनमें PhonePe और Google Pay मिलकर कुल UPI ट्रांजैक्शन का लगभग 83% हिस्सा कवर कर रहे हैं।


🪙 नई एंट्री: Jar ने शुरू किया UPI पेमेंट

अब Gold Saving ऐप Jar ने भी UPI पेमेंट स्पेस में कदम रख दिया है। उसने Unity Small Finance Bank के साथ पार्टनरशिप कर एक नया UPI ऐप लॉन्च किया है, जहां Unity Bank एक्ट करेगा Payment Service Provider (PSP) के रूप में।

यह जानकारी 29 मई को Entrackr की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में सामने आई थी। Jar की यह पहल दिखाती है कि अब निवेश आधारित ऐप्स भी पेमेंट स्पेस में अपनी जगह बना रहे हैं।


📊 UPI का बढ़ता वर्चस्व: एक नजर में

महीनेट्रांजैक्शन वॉल्यूमट्रांजैक्शन वैल्यू
मार्च 202518.30 बिलियन₹24.77 लाख करोड़
अप्रैल 202517.89 बिलियन₹23.95 लाख करोड़
मई 202518.68 बिलियन₹25.14 लाख करोड़

इस चार्ट से साफ है कि UPI हर महीने एक नया रिकॉर्ड बना रहा है।


🔍 UPI की सफलता के कारण

  1. सरलता और त्वरित सेवा – UPI का इंटरफेस बेहद आसान है और ट्रांजैक्शन रीयल-टाइम में होते हैं।
  2. 🆓 नो ट्रांजैक्शन फीस – अधिकतर UPI लेन-देन पर कोई चार्ज नहीं लगता, जिससे यह आम जनता के लिए सुलभ है।
  3. 📶 इंटरनेट पेनिट्रेशन – भारत में इंटरनेट की पहुंच तेजी से बढ़ रही है, जिससे UPI को बल मिल रहा है।
  4. 📱 स्मार्टफोन की उपलब्धता – हर हाथ में मोबाइल और हर मोबाइल में UPI!

🇮🇳 भारत के डिजिटल भविष्य की नींव

UPI न केवल भारत में, बल्कि अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी चर्चा का विषय बन चुका है। NPCI International के जरिए भारत अब UPI को अन्य देशों में भी लागू करने की कोशिश कर रहा है।

मई 2025 के आंकड़े यह साबित करते हैं कि UPI अब केवल एक पेमेंट सिस्टम नहीं, बल्कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है।


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✈️📉 Q4 FY25 में EaseMyTrip की कमाई और मुनाफ़े में गिरावट,

EaseMyTrip

ऑनलाइन ट्रैवल एग्रीगेटर (OTA) प्लेटफॉर्म EaseMyTrip ने वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही (Q4 FY25) में थोड़ी सुस्त परफॉर्मेंस दिखाई। कंपनी के रेवेन्यू और प्रॉफिट, दोनों में साल-दर-साल गिरावट दर्ज की गई है, जो इसके विकास में रुकावट की ओर इशारा करता है।


📉 Q4 FY25 में 15% की गिरावट, रेवेन्यू पहुंचा ₹139 करोड़

EaseMyTrip का रेवेन्यू Q4 FY25 में ₹139 करोड़ रहा, जो कि पिछले साल की इसी तिमाही (Q4 FY24) के ₹164 करोड़ के मुकाबले 15% कम है। यह जानकारी कंपनी द्वारा NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) में दाखिल की गई कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल रिपोर्ट से सामने आई है।


🧾 पूरे वित्त वर्ष में लगभग स्थिर रहा रेवेन्यू

जहाँ एक ओर चौथी तिमाही में गिरावट देखी गई, वहीं पूरे वित्त वर्ष (FY25) में कंपनी का रेवेन्यू लगभग स्थिर रहा। FY25 में EaseMyTrip का कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹587 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष (FY24) के ₹590 करोड़ से थोड़ा ही कम है।


✈️ एयर टिकटिंग में सबसे ज़्यादा असर, 28% की गिरावट

EaseMyTrip के कुल रेवेन्यू में एयर टिकटिंग का सबसे बड़ा योगदान रहा — लगभग 68%, लेकिन इसी सेगमेंट में सबसे बड़ी गिरावट भी देखी गई। Q4 FY25 में एयर टिकटिंग से रेवेन्यू घटकर ₹94 करोड़ रह गया, जबकि Q4 FY24 में यह ₹132 करोड़ था — यानी करीब 28% की गिरावट


🏨 होटल पैकेज से मिला 16.5% रेवेन्यू

EaseMyTrip के होटल और ट्रैवल पैकेज सेगमेंट का योगदान Q4 FY25 में ₹23 करोड़ रहा, जो कि कंपनी के कुल रेवेन्यू का 16.5% हिस्सा है। कंपनी इस सेगमेंट में विविधता लाने की कोशिश कर रही है, लेकिन एयर टिकटिंग अब भी उसकी रीढ़ बनी हुई है।


📈 खर्च बढ़े, 12% की उछाल

EaseMyTrip का कुल खर्च Q4 FY25 में ₹131 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही Q4 FY24 के ₹117 करोड़ की तुलना में 12% अधिक है। मुख्य खर्चों में शामिल थे:

  • 🧾 सर्विस कॉस्ट
  • 💳 पेमेंट गेटवे फीस
  • 👩‍💼 कर्मचारियों के लाभ
  • 📢 विज्ञापन और मार्केटिंग खर्च

वहीं पूरे वित्त वर्ष FY25 के दौरान कंपनी का कुल खर्च ₹460 करोड़ रहा, जो कि उसके स्थिर रेवेन्यू के मुकाबले चिंता का विषय बन सकता है।


💰 मुनाफे में मामूली सुधार: ₹12 करोड़ प्री-टैक्स प्रॉफिट

Q4 FY25 में कंपनी ने ₹12 करोड़ का प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) दर्ज किया, जो कि Q4 FY24 के ₹17 करोड़ के नुकसान से तुलना करें तो सुधार है। यानी EaseMyTrip ने घाटे से उबरते हुए मुनाफ़ा कमाना शुरू किया है।

पूरा साल देखें तो FY25 में कंपनी का PBT ₹143 करोड़ रहा, जो कि FY24 के ₹142 करोड़ से थोड़ा ही बेहतर है।


📊 शेयर प्राइस में हल्की बढ़त, मार्केट कैप ₹3,997 करोड़

EaseMyTrip के शेयर की कीमत आज के ट्रेडिंग सेशन के अंत में ₹11.28 रही, जो कि 0.71% की हल्की बढ़त दर्शाती है। कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹3,997 करोड़ पर पहुंच गया है।


🔍 विश्लेषण: क्या EaseMyTrip का ग्रोथ मॉडल ठहर गया है?

EaseMyTrip पिछले कुछ वर्षों से भारत के सबसे भरोसेमंद OTA प्लेटफॉर्म्स में गिना जाता रहा है। लेकिन हालिया आँकड़े यह दिखाते हैं कि कंपनी की ग्रॉथ में ठहराव आ गया है:

  • 📉 रेवेन्यू में गिरावट, खासकर एयर टिकटिंग सेगमेंट में
  • 💸 खर्च बढ़ रहे हैं, जबकि कमाई स्थिर है
  • 🧾 होटल और अन्य वैरिएंट से अब भी सीमित कमाई

इन आँकड़ों से यह साफ है कि EaseMyTrip को अब नए रेवेन्यू स्रोत खोजने होंगे और अपने खर्चों को नियंत्रित करना होगा।


🌐 प्रतियोगिता भी बनी चुनौती

EaseMyTrip को अब कई फ्रंट्स पर कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है:

  • 🛫 एयरलाइन कंपनियाँ अब सीधे टिकट बेचने के लिए आक्रामक रणनीति अपना रही हैं
  • 📱 MakeMyTrip, Yatra, Cleartrip जैसे बड़े ब्रांड्स लगातार मार्केटिंग और डिस्काउंट्स पर ज़ोर दे रहे हैं
  • 💼 बिज़नेस और इंटरनेशनल ट्रैवल सेगमेंट में कंपनी की मौजूदगी सीमित है

🔮 आगे की राह: क्या करना होगा EaseMyTrip को?

कंपनी को अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखने के लिए निम्नलिखित कदम उठाने की ज़रूरत है:

  1. 🏨 होटल, हॉलिडे पैकेज और इंटरनेशनल ट्रैवल में विविधता लाना
  2. 🤖 AI और डेटा एनालिटिक्स के ज़रिए कस्टमर पर्सनलाइजेशन बढ़ाना
  3. 🌍 Tier 2 और Tier 3 शहरों में आउटरीच बढ़ाना
  4. 💼 B2B और कॉर्पोरेट ट्रैवल मार्केट को टैप करना

✍️ निष्कर्ष: EaseMyTrip को अब स्थिरता से बाहर निकलने की ज़रूरत

EaseMyTrip की Q4 FY25 की रिपोर्ट बताती है कि कंपनी को अब नए ग्रोथ मॉडल की तलाश करनी होगी। एयर टिकटिंग पर अत्यधिक निर्भरता, खर्चों में बढ़ोतरी और सीमित सेगमेंट डाइवर्सिफिकेशन जैसे फैक्टर कंपनी के लिए भविष्य में चुनौती बन सकते हैं।

अब वक्त है जब EaseMyTrip को इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट डाइवर्सिफिकेशन पर फोकस करना होगा ताकि वह इस तेजी से बदलते ट्रैवल मार्केट में अपनी पकड़ बनाए रख सके।


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🤖📊 Uplinq को मिला $10 मिलियन का Series A फंडिंग

Uplinq

फीनिक्स, एरिज़ोना स्थित AI-पावर्ड बहीखाता और टैक्स सॉल्यूशन देने वाली स्टार्टअप Uplinq ने हाल ही में $10 मिलियन (लगभग ₹83 करोड़) की Series A फंडिंग हासिल की है। यह फंडिंग छोटे और मध्यम आकार के व्यवसायों (SMBs) को टेक्नोलॉजी के ज़रिए फाइनेंशियल मैनेजमेंट में मदद करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।


💸 किसने किया निवेश?

इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Next Coast Ventures ने किया है। इनके साथ AZ-VC, Live Oak Ventures और कंपनी के मौजूदा निवेशकों ने भी भाग लिया।


🚀 इस फंडिंग का उपयोग कहाँ होगा?

Uplinq इस फंडिंग का इस्तेमाल अपने बिजनेस के चार प्रमुख क्षेत्रों में करने वाली है:

  1. AI टेक्नोलॉजी को और उन्नत बनाना
  2. नई SMB कंपनियों को जोड़ने के लिए कस्टमर एक्विजिशन को स्केल करना
  3. कंपनी की बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को मजबूत बनाना
  4. ऑटोमेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट डिलीवरी को और तेज़ व प्रभावी बनाना

🏢 कंपनी का सफर और मिशन

2020 में शुरू हुई Uplinq को Alex Glenn ने स्थापित किया था। इस कंपनी का मिशन है – छोटे और मध्यम व्यवसायों को उनके अकाउंटिंग और टैक्स प्रोसेस से राहत देना, ताकि वे अपने असली फोकस यानी बिजनेस ग्रोथ और इनोवेशन पर ध्यान दे सकें।

Uplinq का मानना है कि “टैक्स और बहीखाते का काम SMBs के लिए सबसे थकाऊ और समय लेने वाला होता है।” इसलिए उन्होंने एक ऐसा AI-पावर्ड प्लेटफॉर्म तैयार किया है जो इन कामों को पूरी तरह से ऑटोमेट कर सकता है।


🤖 कैसे काम करता है Uplinq का AI प्लेटफॉर्म?

Uplinq का सॉल्यूशन एक इंटेलिजेंट AI एजेंट का इस्तेमाल करता है जो निम्न कार्यों को ऑटोमेट करता है:

  • 💰 लेन-देन की कैटेगराइज़ेशन (Transaction Categorization)
  • 🔄 रिकॉन्सिलिएशन यानी मिलान
  • 📊 भविष्यवाणी आधारित इनसाइट्स (Predictive Insights)
  • 🧾 टैक्स कंप्लायंस और ऑडिट-रेडी रिपोर्टिंग

इससे मैन्युअल हस्तक्षेप की आवश्यकता कम हो जाती है और कार्यप्रवाह (Workflows) तेज़ होते हैं।


📈 SMBs को क्या फायदा मिलता है?

Uplinq की टेक्नोलॉजी SMBs को निम्न लाभ देती है:

  • रीयल-टाइम इनसाइट्स: किसी भी समय अपने फाइनेंशियल स्टेटस को ट्रैक कर सकते हैं।
  • ऑपरेशनल एफिशिएंसी: मैनुअल कामों में लगने वाला समय और लागत कम होती है।
  • स्ट्रैटेजिक डिसीजन मेकिंग: डेटा के आधार पर स्मार्ट निर्णय लिए जा सकते हैं।
  • कंप्लायंस की टेंशन खत्म: टैक्स और ऑडिट से जुड़ी सभी जरूरतों को ऑटोमेट किया गया है।

🔗 एकीकृत सिस्टम (Integrated with Existing Tools)

Uplinq का प्लेटफॉर्म मौजूदा अकाउंटिंग टूल्स और फाइनेंशियल सॉफ्टवेयर्स के साथ आसानी से इंटीग्रेट किया जा सकता है। इसका मतलब यह हुआ कि SMBs को अपनी पूरी सिस्टम को बदलने की ज़रूरत नहीं होती — बस जोड़ें और चलें!


🇺🇸 पहले ही 1,000+ व्यवसायों को मिल रही मदद

Uplinq फिलहाल अमेरिका भर में लगभग 1,000 छोटे और मझौले व्यवसायों को अपनी सेवाएं दे रही है। ये ग्राहक विभिन्न सेक्टरों से हैं — जैसे रिटेल, हॉस्पिटैलिटी, हेल्थकेयर, ऑनलाइन स्टोर और यहां तक कि प्रोफेशनल सर्विसेज।


💬 CEO Alex Glenn का कहना है…

“हमारा मकसद है कि छोटे बिजनेस ओनर्स फाइनेंशियल सिस्टम के बोझ से मुक्त होकर अपने असली काम—बिजनेस बढ़ाना—पर ध्यान दें। यह फंडिंग हमारे लिए ग्रोथ का अगला पड़ाव साबित होगी।”


🌐 क्यों है यह मॉडल भारत जैसे देशों के लिए भी प्रासंगिक?

भारत में भी लाखों SMBs हैं जो रोज़ाना अकाउंटिंग, टैक्स और कंप्लायंस से जुड़ी दिक्कतों का सामना करते हैं। Uplinq जैसे प्लेटफॉर्म भारत के छोटे व्यापारियों को भी डिजिटल ट्रांजिशन और AI एडॉप्शन की राह दिखा सकते हैं।

भारत में GST, TDS, और सालाना रिटर्न जैसी कंप्लायंस ज़रूरतें बहुत जटिल हैं। यदि कोई लोकल AI-बेस्ड स्टार्टअप इस तरह का सॉल्यूशन विकसित करता है तो वह करोड़ों MSMEs के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है।


🔮 आगे की राह

Uplinq अब Series A फंडिंग के बाद निम्न क्षेत्रों में फोकस करेगी:

  • 📊 AI इनोवेशन और रिसर्च
  • 🧑‍💼 सेल्स और सपोर्ट टीम का विस्तार
  • 🌐 अमेरिका के बाहर इंटरनेशनल मार्केट्स में एंट्री
  • 🤝 साझेदारियों (Partnerships) के ज़रिए स्केलेबिलिटी

✍️ निष्कर्ष: ऑटोमेशन है छोटे बिज़नेस का भविष्य

Uplinq का यह Series A फंडिंग राउंड यह साफ दर्शाता है कि फाइनेंशियल ऑटोमेशन और AI तकनीक आने वाले वर्षों में छोटे व्यवसायों की रीढ़ बन सकते हैं। इससे न केवल ऑपरेशनल कुशलता बढ़ेगी, बल्कि बिजनेस मालिकों का आत्मविश्वास भी।


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💄📈 Nykaa का धमाकेदार प्रदर्शन FY25 की चौथी तिमाही में मुनाफा 90% बढ़ा,

Nykaa

भारत की अग्रणी ऑनलाइन ब्यूटी और फैशन प्लेटफॉर्म Nykaa ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) की चौथी तिमाही (Q4) में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 24% की साल-दर-साल (YoY) राजस्व वृद्धि और 90% की लाभ वृद्धि दर्ज की है।

यह वृद्धि Nykaa के स्थिर ऑपरेशनल स्केल, ब्यूटी कैटेगरी में गहरी पैठ और लागत नियंत्रण रणनीतियों का परिणाम है।


💰 आय में दमदार उछाल

NSE से प्राप्त कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स के अनुसार, Q4 FY25 में Nykaa की ऑपरेशनल इनकम ₹2,061 करोड़ रही, जो Q4 FY24 के ₹1,667 करोड़ की तुलना में 24% अधिक है।

पूरे वित्त वर्ष FY25 के लिए, कंपनी की कुल ऑपरेटिंग इनकम ₹7,950 करोड़ रही, जो FY24 में ₹6,386 करोड़ थी। यानी पूरे साल में भी 24% की बढ़ोतरी देखने को मिली।


💄 ब्यूटी का दबदबा, फैशन में धीमी चाल

Nykaa का फोकस आज भी ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर सबसे ज्यादा है। Q4 FY25 में:

  • ब्यूटी सेगमेंट से ₹1,894 करोड़ की कमाई हुई, जो कुल राजस्व का 92% है।
  • फैशन सेगमेंट से केवल 8% यानी लगभग ₹167 करोड़ की इनकम दर्ज की गई।

यह आंकड़े स्पष्ट दिखाते हैं कि Nykaa की ग्रोथ का मुख्य इंजन आज भी उसका ब्यूटी सेगमेंट है, जबकि फैशन सेगमेंट अब भी शुरुआती ग्रोथ स्टेज में है।


📊 खर्चों में बढ़ोतरी, लेकिन नियंत्रण में

कंपनी की टोटल कॉस्ट Q4 FY25 में ₹2,031 करोड़ रही, जिसमें से:

  • मैटेरियल कॉस्ट: ₹1,153 करोड़ (टोटल खर्च का 57%)
  • शेष खर्चों में एम्प्लॉई बेनिफिट्स, मार्केटिंग, फाइनेंस, टेक्नोलॉजी और अन्य ओवरहेड्स शामिल रहे।

पूरे वित्त वर्ष FY25 में Nykaa के कुल खर्च ₹7,850 करोड़ तक पहुंच गए, जो उनके स्केल और विस्तार रणनीतियों के अनुरूप है।


📈 मुनाफे में 90% की जोरदार ग्रोथ

सालाना और तिमाही आधार पर राजस्व की बढ़ोतरी के साथ-साथ Nykaa ने मुनाफे के मोर्चे पर भी जबरदस्त प्रदर्शन किया:

  • Q4 FY25 में नेट प्रॉफिट ₹19 करोड़ रहा, जो Q4 FY24 के ₹10 करोड़ से 90% अधिक है।
  • पूरे वित्त वर्ष FY25 में नेट प्रॉफिट ₹74 करोड़ दर्ज किया गया, जबकि FY24 में यह ₹44 करोड़ था।

इस ग्रोथ का श्रेय Nykaa के स्केलेबल मॉडल, प्रोडक्ट पोर्टफोलियो और यूज़र एक्सपीरियंस फोकस को दिया जा सकता है।


🧾 स्टॉक प्राइस और मार्केट कैप में मजबूती

मार्केट में भी Nykaa के इस मजबूत प्रदर्शन का असर देखने को मिला है।

  • आज के ट्रेडिंग सेशन के अंत में Nykaa का स्टॉक प्राइस ₹200.80 रहा।
  • कंपनी की कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन ₹57,406 करोड़ तक पहुंच गई है।

यह संकेत देता है कि निवेशकों का कंपनी पर भरोसा लगातार बना हुआ है।


🛍️ Nykaa का बिजनेस मॉडल: डिजिटल फर्स्ट, महिला-केंद्रित

Nykaa, जिसे 2012 में फाल्गुनी नायर ने शुरू किया था, आज भारत की सबसे बड़ी डिजिटल ब्यूटी रिटेलर बन चुकी है। इसकी खासियत है:

  • हाइपर-क्यूरेटेड ब्यूटी प्रोडक्ट्स
  • ऑनलाइन से लेकर फिजिकल स्टोर्स तक की मौजूदगी
  • महिलाओं को ध्यान में रखकर बनाई गई सशक्त और सुविधाजनक खरीदारी यात्रा

हाल के वर्षों में कंपनी ने फैशन, हेल्थ और वेलनेस कैटेगरी में भी विस्तार किया है, लेकिन इसकी कोर स्ट्रेंथ अब भी ब्यूटी सेगमेंट में ही बनी हुई है।


🧠 टेक्नोलॉजी और डेटा से मिला स्केलेबिलिटी को फायदा

Nykaa ने अपने प्लेटफॉर्म को स्केलेबल बनाने के लिए AI-ड्रिवन रेकमेंडेशन इंजन, परसनलाइज़्ड शॉपिंग, और हाइपरलोकल डिलीवरी मॉडल को अपनाया है।

इसका असर:

  • कस्टमर रिटेंशन रेट में सुधार
  • AOV (Average Order Value) में बढ़ोतरी
  • रिव्यू और रेटिंग सिस्टम के जरिए ट्रस्ट बिल्डिंग

📌 चुनौतियाँ भी कम नहीं

हालांकि Nykaa का प्रदर्शन मजबूत रहा है, लेकिन कुछ चुनौतियाँ भी बनी हुई हैं:

  • फैशन सेगमेंट में अपेक्षित ग्रोथ अभी नहीं दिख रही है।
  • लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन में बढ़ती लागत से मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है।
  • कड़ी प्रतिस्पर्धा: Meesho, Amazon, Flipkart और Myntra जैसे दिग्गजों से मुकाबला।

🔮 आगे की राह: क्या रहेगा फोकस?

Nykaa अब भविष्य की योजनाओं में निम्न बातों पर फोकस कर सकती है:

  1. फैशन और हेल्थ कैटेगरी में तेज ग्रोथ लाना
  2. नए शहरों और टियर-2/3 मार्केट्स में विस्तार
  3. फिजिकल स्टोर्स की संख्या बढ़ाना
  4. AI और डेटा एनालिटिक्स के जरिये परसनलाइजेशन को बेहतर करना

✍️ निष्कर्ष: भरोसेमंद ब्रांड, स्थिर ग्रोथ

Nykaa ने FY25 की चौथी तिमाही में शानदार प्रदर्शन करके साबित कर दिया है कि यह सिर्फ एक ब्यूटी प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि एक मजबूत और लाभदायक फुल-स्टैक कंज्यूमर ब्रांड है।

ब्यूटी सेगमेंट में इसकी मजबूत पकड़, मार्केट में सकारात्मक सेंटिमेंट, और डिजिटल लीडरशिप इसे आने वाले वर्षों में भी एक प्रमुख खिलाड़ी बनाए रखेंगे।


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read more :📈 Zerodha Capital का मुनाफा 73% बढ़ा,

📈 Zerodha Capital का मुनाफा 73% बढ़ा,

Zerodha

देश की अग्रणी स्टॉकब्रोकिंग कंपनी Zerodha की लेंडिंग शाखा Zerodha Capital ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए ₹12.5 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले वर्ष के ₹7.2 करोड़ से 73% अधिक है।

यह मुनाफा Zerodha Capital के तेजी से बढ़ते लोन बुक, मजबूत ग्राहक आधार और डिजिटल-फर्स्ट अप्रोच का नतीजा है।


💹 दोगुनी हुई आमदनी, 3 गुना बढ़ी लोन बुक

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, Zerodha Capital की कुल आमदनी FY25 में ₹36 करोड़ रही, जबकि FY24 में यह ₹17 करोड़ थी — यानी दोगुनी से अधिक

रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुसार, इस उछाल की प्रमुख वजह रही कंपनी की लोन बुक में 3.2X की ग्रोथ, जो FY25 की पहली नौ तिमाहियों (9M FY25) में ₹381 करोड़ तक पहुंच गई।


🧾 कैसे काम करता है Zerodha Capital का बिजनेस मॉडल?

Zerodha Capital का फोकस रिटेल इनवेस्टर्स को लोन देने पर है। यह लोन ग्राहकों के स्टॉक्स या म्यूचुअल फंड्स को गिरवी रखकर दिए जाते हैं। इस मॉडल में ग्राहक अपने पोर्टफोलियो के आधार पर आसानी से लोन प्राप्त कर सकते हैं।

  • ग्राहक अपने शेयर या म्यूचुअल फंड्स का 45% तक लोन ले सकते हैं।
  • Zerodha के 8.1 मिलियन एक्टिव क्लाइंट्स (जो NSE मार्केट का करीब 16% हैं) इसका बुनियादी आधार बनाते हैं।
  • पूरा प्रोसेस डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए होता है, जिससे त्वरित और पारदर्शी लोन मिलना संभव होता है।

🏦 फाइनेंशियल हेल्थ: नेटवर्थ और गियरिंग रेशियो

ICRA की रिपोर्ट के अनुसार, Zerodha Capital की नेटवर्थ दिसंबर 2024 तक ₹170 करोड़ थी। इसका गियरिंग रेशियो 1.4X रहा, यानी कंपनी के पास हर ₹1 की अपनी पूंजी पर ₹1.40 का कर्ज था — जो लेंडिंग फर्म के लिए संतुलित माना जाता है।

कंपनी की खास बात यह है कि इसके एनपीए (Non-Performing Assets) शून्य हैं — यानी अब तक किसी भी ग्राहक ने लोन चुकाने में डिफॉल्ट नहीं किया है। यह इसकी सावधानीपूर्वक लेंडिंग अप्रोच को दर्शाता है।


💸 ग्रोथ के लिए नया निवेश

Zerodha Capital की प्रमोटर ग्रुप ने कंपनी की भविष्य की ग्रोथ के लिए ₹125 करोड़ का निवेश करने की योजना बनाई है। यह निवेश compulsorily convertible preference shares (CCPS) के माध्यम से किया जाएगा।

यह राशि कंपनी की लोन बुक बढ़ाने, टेक्नोलॉजी अपग्रेड करने और नई लोन स्कीमें शुरू करने में मदद करेगी।


🏅 ICRA की रेटिंग बनी रही मजबूत

रेटिंग एजेंसी ICRA ने Zerodha Capital को AA- (Stable) / A1+ की रेटिंग दी है — जो एक मजबूत फाइनेंशियल स्टैंडिंग को दर्शाती है। इसके साथ ही कंपनी की ₹100 करोड़ की नई शॉर्ट-टर्म बॉरोइंग स्कीम को भी यही उच्च रेटिंग दी गई है।

हालांकि ICRA ने यह भी कहा कि:

  • Zerodha Capital का आकार अभी भी छोटा है
  • यह सीमित संख्या में लेंडर्स पर निर्भर है

लेकिन Zerodha ग्रुप का समर्थन और कंपनी की सावधानीपूर्वक कर्ज नीति इस भरोसे को बनाए रखती है।


🔍 सेक्योरिटीज इकोसिस्टम में गहराई लाने का लक्ष्य

2021 में स्थापित Zerodha Capital का उद्देश्य है कि यह सेक्योरिटीज-आधारित लेंडिंग इकोसिस्टम में गहराई लाए। यानी स्टॉक्स और म्यूचुअल फंड्स को कैश के रूप में उपयोग करने के लिए सुरक्षित और आसान रास्ता प्रदान किया जाए।

हालांकि कंपनी का भविष्य काफी हद तक बाजार की चाल (market sentiment) और रेगुलेटरी बदलावों पर निर्भर रहेगा — खासकर तब जब रिटेल F&O सेगमेंट पर सख्त नियम लागू हो रहे हैं, जो Zerodha ग्रुप की आमदनी का बड़ा हिस्सा है।


💰 Zerodha Broking की तगड़ी कमाई

Zerodha Capital की पैरेंट कंपनी Zerodha Broking Limited ने FY24 में ₹5,496 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, और इसका रिटर्न ऑन नेटवर्थ 56% रहा है — जो भारत के किसी भी फिनटेक ब्रोकरेज फर्म के लिए एक बेंचमार्क है।

इससे यह स्पष्ट होता है कि Zerodha Capital को न सिर्फ मजबूत तकनीकी और फाइनेंशियल सपोर्ट मिल रहा है, बल्कि वह ब्रोकिंग सेगमेंट से ट्रस्ट और क्लाइंट बेस भी हासिल कर रहा है।


📌 निष्कर्ष: बढ़ती ग्रोथ, सुरक्षित लेंडिंग

Zerodha Capital ने FY25 में शानदार प्रदर्शन किया है, खासकर अपने छोटे आकार और सीमित संसाधनों के बावजूद। डिजिटल प्लेटफॉर्म, पारदर्शिता, और गिरवी आधारित लोन मॉडल ने इसे रिटेल इनवेस्टर्स के बीच विश्वसनीय विकल्प बना दिया है।

ग्राहकों को सेफ्टी के साथ लिक्विडिटी देने वाला यह मॉडल आने वाले वर्षों में बड़ा आकार ले सकता है — खासकर तब, जब रेगुलेटरी सपोर्ट और टेक्नोलॉजिकल स्केलेबिलिटी दोनों साथ हों।


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🇮🇳 Razorpay ने पूरा किया ‘Reverse Flip’,

Razorpay

भारत की प्रमुख फिनटेक यूनिकॉर्न कंपनी Razorpay ने आधिकारिक रूप से अपना ‘रिवर्स फ्लिप’ पूरा कर लिया है, यानी अब कंपनी का लीगल डोमिसाइल भारत में स्थानांतरित हो चुका है। इस कदम के साथ Razorpay उन भारतीय स्टार्टअप्स की लिस्ट में शामिल हो गई है जो हाल के महीनों में अपने मुख्यालय को सिंगापुर या यूएस से भारत वापस ले आई हैं।


🔁 क्या है ‘Reverse Flip’?

‘रिवर्स फ्लिप’ एक कॉर्पोरेट प्रक्रिया है जिसमें कोई कंपनी जो पहले विदेशी स्थान पर रजिस्टर्ड थी (जैसे सिंगापुर या अमेरिका), वह अपने कानूनी और कॉर्पोरेट रजिस्ट्रेशन को भारत में स्थानांतरित करती है। यह कदम आमतौर पर IPO की तैयारी, टैक्स रेग्युलेशन, और भारत की तेज़ी से बढ़ती डिजिटल इकोनॉमी में भरोसे को दर्शाता है।


Razorpay ने किया आधिकारिक ऐलान

Razorpay के को-फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर शशांक कुमार ने इस विकास की पुष्टि करते हुए कहा:

“हां, हमने अपना रिवर्स फ्लिप आधिकारिक रूप से पूरा कर लिया है, और हम इससे ज़्यादा गर्वित नहीं हो सकते। यह सिर्फ एक कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर का बदलाव नहीं है, बल्कि भारत की आर्थिक क्षमता और इनोवेशन सिस्टम पर विश्वास का प्रतीक है।”

उन्होंने आगे कहा:

“हमने Razorpay की शुरुआत भारत के लिए कुछ बड़ा बनाने के सपने के साथ की थी, और आज हम उस सपने को और मज़बूती दे रहे हैं। अब भारत न सिर्फ हमारा सबसे बड़ा मार्केट है, बल्कि यही हमारा ग्लोबल हेडक्वार्टर भी है।”


📍 हैदराबाद से मिली मंज़ूरी, Razorpay Inc. का भारत में विलय

Razorpay ने कुछ महीने पहले पब्लिक लिमिटेड कंपनी में ट्रांज़िशन पूरा किया था। अब, हैदराबाद स्थित रीजनल डायरेक्टर ने Razorpay Inc. (विदेशी यूनिट) के Razorpay India के साथ विलय (amalgamation) को भी मंज़ूरी दे दी है।

इसका मतलब है कि कंपनी का लीगल और ऑपरेशनल बेस पूरी तरह भारत में शिफ्ट हो चुका है — IPO के रास्ते की एक अहम मंज़िल।


📊 IPO का टारगेट: 2026-27

Razorpay अब 2026-27 तक IPO लाने की योजना बना रही है। भारत में रिवर्स फ्लिप पूरा करके कंपनी अब सेबी (SEBI) के अंतर्गत आने वाले लोकल लिस्टिंग नियमों के अंतर्गत आ चुकी है, जिससे IPO की राह आसान हो जाएगी।


🚀 कौन-कौन से स्टार्टअप्स कर चुके हैं रिवर्स फ्लिप?

Razorpay से पहले कई और दिग्गज स्टार्टअप्स ने रिवर्स फ्लिप की प्रक्रिया पूरी की है:

  • PhonePe
  • Zepto
  • Dream11
  • Groww

जबकि कुछ अन्य कंपनियाँ जैसे:

  • Meesho
  • Pine Labs
  • Eruditus
  • Livspace
  • Mensa Brands
  • KreditBee

अभी भी अंतिम रेग्युलेटरी मंज़ूरी का इंतज़ार कर रही हैं। हाल ही में Flipkart ने भी सिंगापुर से भारत में लीगल डोमिसाइल शिफ्ट करने का ऐलान किया है।


💰 Razorpay की फंडिंग और वैल्यूएशन

अब तक Razorpay ने विभिन्न निवेश दौरों में $800 मिलियन (लगभग ₹6,600 करोड़) से अधिक जुटाए हैं। कंपनी की आखिरी घोषित वैल्यूएशन $7 बिलियन (₹58,000 करोड़) थी।

हालाँकि, रिवर्स फ्लिप करने से कंपनी को कैपिटल गेन टैक्स जैसे कुछ वित्तीय प्रभाव भी झेलने पड़ सकते हैं, खासकर अगर उसकी वैल्यूएशन बहुत अधिक हो।


📈 FY24 में Razorpay का प्रदर्शन

FY24 (वित्त वर्ष 2023-24) में Razorpay ने दर्ज किया:

  • राजस्व (Revenue): ₹2,068 करोड़
  • मुनाफा (Profit): ₹35 करोड़

इससे यह साफ है कि Razorpay तेज़ी से बढ़ने वाला, लाभदायक फिनटेक स्टार्टअप बन चुका है।


⚔️ प्रतियोगिता: Cashfree और PayU से मुकाबला

Razorpay की सीधी प्रतिस्पर्धा भारत में अन्य पेमेंट गेटवे कंपनियों से है:

कंपनीFY24 राजस्व
Razorpay₹2,068 करोड़
Cashfree₹642 करोड़
PayU India₹3,800 करोड़ (लगभग)

Razorpay, B2B पेमेंट सॉल्यूशंस, सब्सक्रिप्शन मैनेजमेंट, और UPI आधारित ट्रांजेक्शनों के क्षेत्र में लीडिंग प्लेयर बना हुआ है।


🌐 क्या है Razorpay का फोकस?

  • भारत में घरेलू लिस्टिंग की तैयारी
  • MSMEs और स्टार्टअप्स के लिए आसान पेमेंट सॉल्यूशन
  • फिनटेक इनोवेशन को भारत में ही बढ़ावा देना
  • भारत को “बिल्ड फॉर इंडिया, लीड फ्रॉम इंडिया” का हब बनाना

🔍 निष्कर्ष: Razorpay बना आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक

Razorpay का रिवर्स फ्लिप भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक मील का पत्थर है। इससे यह साबित होता है कि अब भारत न केवल स्टार्टअप्स के लिए एक निर्माणस्थल (building ground) है, बल्कि अब यह ग्लोबल हेडक्वार्टर बनने लायक मंच भी है।

क्या Razorpay भारत का अगला बड़ा IPO होगा? क्या निवेशक इससे फायदा उठा सकेंगे?

इन सभी सवालों का जवाब आने वाले महीनों में मिलेगा। लेकिन इतना तय है कि Razorpay की यह रणनीति भविष्य के लिए एक प्रेरणा बन सकती है।


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💰 Saarathi Finance ने पहले ही फंडिंग राउंड में जुटाए ₹475 करोड़,

Saarathi

नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) Saarathi Finance ने अपने पहले फंडिंग राउंड में ₹475 करोड़ जुटाए हैं। यह सीरीज A निवेश राउंड प्रमुख रूप से TVS Capital Funds, Lok Capital, Evolvence Equity Partners और Paragon Partners ने लीड किया, जिनके साथ कुछ एंजेल इन्वेस्टर्स ने मिलकर करीब ₹350 करोड़ निवेश किया। बाकी की रकम Vivek Bansal और Sunil Daga ने कंपनी में खुद निवेश की।

इस ताज़ा फंडिंग के बाद Saarathi Finance की वैल्यूएशन ₹900 करोड़ से अधिक आँकी जा रही है, जो इसे भारत के NBFC सेक्टर में एक उभरता हुआ यूनिकॉर्न बनाने की दिशा में ले जाती है।


📍 लक्ष्य: ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत में MSMEs को सशक्त बनाना

कंपनी के अनुसार, इस फंडिंग से Saarathi Finance को ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में MSME (Micro, Small and Medium Enterprises) को वित्तीय सहायता प्रदान करने के मिशन को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। Saarathi Finance फिलहाल तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में सक्रिय है।

इन राज्यों के छोटे उद्यमियों को पारंपरिक बैंकों और संस्थागत ऋणदाताओं से अक्सर ऋण नहीं मिल पाता। Saarathi Finance इन ‘क्रेडिट अंडरसर्व्ड’ उद्यमियों को टारगेट कर रही है जो विकास की क्षमता रखते हैं लेकिन पूंजी की कमी से पीछे रह जाते हैं।


🧠 टेक्नोलॉजी और लोकल अंडरस्टैंडिंग का कॉम्बिनेशन

Saarathi Finance का बिज़नेस मॉडल एक अनूठा मिश्रण है – तकनीक-आधारित समाधान और स्थानीय बाजारों की गहरी समझ। कंपनी:

  • सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड दोनों प्रकार के लोन उपलब्ध कराती है
  • लोन प्रोसेसिंग को तेजी से पूरा करती है
  • इनकम असेसमेंट को फ्लेक्सिबल रखती है, जिससे अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर के उद्यमियों को भी मौका मिलता है

यह मॉडल उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी है जो बैंकों की कठोर प्रक्रियाओं के कारण फाइनेंसिंग से वंचित रह जाते हैं।


💬 फाउंडर का विज़न: “सिर्फ लोन नहीं, पार्टनरशिप चाहिए भारत को”

Saarathi Finance के फाउंडर और सीईओ विवेक बंसल ने इस उपलब्धि पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा:

“हम भारत के उद्यमियों को सिर्फ क्रेडिट नहीं, बल्कि एक ऐसा सहयोग देना चाहते हैं जो उनके विकास की यात्रा में सच्चा भागीदार बने। यह फंडिंग हमारे मिशन को रफ्तार देगी। हम सभी निवेशकों, दोस्तों और परिवार का आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने इस सफर को मुमकिन बनाया। अब हम और ज़्यादा जोश के साथ आगे बढ़ेंगे।”

बंसल के इस विज़न से साफ है कि Saarathi Finance खुद को केवल एक NBFC नहीं, बल्कि “विकास का साथी” मानती है।


🚀 MSME सेक्टर में क्रेडिट गैप को भरने की कोशिश

भारत में MSME सेक्टर देश के GDP का 30% और रोज़गार का 40% हिस्सा योगदान करता है, लेकिन इनका सबसे बड़ा संकट है — क्रेडिट की कमी। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में MSMEs के लिए लगभग ₹25 लाख करोड़ का क्रेडिट गैप है।

Saarathi Finance जैसे NBFCs इस गैप को भरने के लिए आगे आ रहे हैं। कंपनी:

  • छोटे व्यापारियों को उनकी जरूरतों के हिसाब से कस्टम लोन प्रोडक्ट देती है
  • क्षेत्रीय भाषाओं और स्थानीय कर्मचारियों के ज़रिये ग्राहक से जुड़ाव बढ़ाती है
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आसान डॉक्यूमेंटेशन प्रोसेस मुहैया कराती है

📈 निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है

TVS Capital Funds, Lok Capital, Evolvence Equity Partners, और Paragon Partners जैसे संस्थानों का इस शुरुआती राउंड में निवेश करना यह दर्शाता है कि Saarathi Finance के मॉडल में दीर्घकालिक ग्रोथ की संभावना है।

NBFC सेक्टर, खासकर जो MSMEs को सर्विस करता है, अब निवेशकों की नई पसंद बनता जा रहा है। Saarathi Finance की रणनीति में:

  • जोखिम प्रबंधन (risk management) के स्मार्ट टूल्स
  • स्केलेबल टेक इन्फ्रास्ट्रक्चर
  • ग्राउंड लेवल कस्टमर कनेक्ट

जैसी खूबियां हैं जो निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं।


📊 आगे की राह: विस्तार, टेक अपग्रेड और प्रोफिटेबिलिटी

इस फंडिंग के साथ Saarathi Finance अब अपने विस्तार की योजना पर काम कर रही है। अगले 12-18 महीनों में कंपनी:

  • और राज्यों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगी
  • टेक्नोलॉजी में अपग्रेड करेगी — जैसे AI-ड्रिवन लोन असेसमेंट
  • और नए MSME प्रोडक्ट्स लॉन्च करेगी जो सेक्टर की बदलती जरूरतों को पूरा करें

कंपनी का लक्ष्य है कि वह 2026 तक प्रॉफिटेबिलिटी की दिशा में तेजी से बढ़े।


✅ निष्कर्ष: भारत के छोटे व्यापारियों को मिला एक नया साथी

Saarathi Finance की इस फंडिंग राउंड ने यह साबित किया है कि भारत के MSME फाइनेंस सेक्टर में अब भी अपार संभावनाएं हैं। जब बड़े बैंक अब भी क्रेडिट एक्सेस के मामले में सुस्त हैं, Saarathi जैसे NBFCs ‘भारत के उद्यमियों’ के असली साथी बनकर उभर रहे हैं।

अब देखना य>ह है कि कंपनी इस पूंजी का इस्तेमाल कितनी कुशलता से करती है, और क्या वह अपने वादे के अनुसार ‘सिर्फ लोन नहीं, पार्टनरशिप’ का विज़न पूरा कर पाती है।

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