💸 Frex ने जुटाए ₹9.5 करोड़

Frex

Peer-to-peer payments प्लेटफ़ॉर्म Frex ने अपनी pre-seed फंडिंग राउंड में ₹9.5 करोड़ जुटाए हैं। यह राउंड Zeropearl VC और White Venture Capital के को-लीड में हुआ, जिसमें कई बड़े strategic angels भी शामिल रहे—Urban Company के Abhiraj Singh Bhal, Varun Khaitan, Raghav Chandra, पूर्व Uber India हेड Pradeep Parameswaran, CRED के founder Kunal Shah और Rishabh Goel जैसे नाम इस राउंड में नजर आए।

यह शुरुआती फंडिंग Frex के उस बड़े विज़न को आगे बढ़ाने के लिए है, जिसके जरिए वह cross-border money transfers को तेज, आसान और बेहद कम-खर्च बनाना चाहता है—कुछ वैसा ही जैसा UPI ने भारत में domestic payments के साथ किया।


🚀 नया स्टार्टअप, बड़ा विज़न: Global Money Transfer को आसान बनाना

Frex की शुरुआत इसी साल Aditya Varma, Himanshu Arora और Nikhil Shanker ने की। कंपनी का मिशन साफ है—
👉 दुनिया भर में पैसे भेजने का अनुभव उतना ही आसान बनाना जितना भारत में UPI से ₹1 भेजना।

स्टार्टअप का प्लेटफ़ॉर्म
✔ instant transfers
✔ ultra-low cost
✔ पारदर्शी pricing
✔ better-than-mid-market forex rates
प्रदान करता है।

Cross-border transfers अक्सर 2–5 दिनों में क्लियर होते हैं, ऊपर से hidden charges और forex mark-ups भी शामिल होते हैं। Frex इन सारी परेशानियों को खत्म करना चाहता है और लोगों को “click → send → delivered instantly” वाला अनुभव देना चाहता है।


🌍 NRI और Migrant Workers पर फोकस

Frex का बड़ा target audience है—
🌐 North America और India के बीच पैसा भेजने वाले NRIs, immigrants और global workers

स्टार्टअप का कहना है कि भारत आने वाले remittances में बड़ी कमी slow processes, opaque charges और उंचे forex mark-ups के कारण रहती है। Frex इस गैप को modern tech की मदद से भरना चाहता है।

इसलिए जुटाए गए फंड का इस्तेमाल इन अहम क्षेत्रों में होगा:
💠 North America–India corridors में infra विस्तार
💠 Compliance और regulatory stack को मजबूत करना
💠 Engineering और ledger systems को स्केल करना
💠 NRI और migrant communities तक go-to-market reach बढ़ाना


🔗 Blockchain + Banking = तेज, सुरक्षित और सस्ता पैसा ट्रांसफर

Frex का tech-stack इसकी सबसे बड़ी USP है। कंपनी modern blockchain infra को local banking integrations के साथ जोड़कर near-instant settlements देती है।

इसका मतलब:
Transactions fast
Security high
Cost कम

Frex का कहना है कि उनके पास
better-than-mid-market rates
transparent fee structure
near-zero mark-ups
जैसी सुविधाएं हैं।

आज भी remittance market में कई traditional players high fee और slow settlement की वजह से प्रसिद्ध हैं। Frex खुद को इन पुराने तरीकों के modern affordable alternative के रूप में पेश कर रहा है।


📈 Launch के बाद से तेज़ Growth, जल्द ही $1M Monthly Transfers का लक्ष्य

Frex ने नवंबर में लॉन्च किया था और कंपनी के अनुसार कुछ ही हफ्तों में transaction volumes तेजी से बढ़े हैं।
स्टार्टअप उम्मीद कर रहा है कि अगले 2–3 महीनों में यह $1 million monthly transfer value को पार कर लेगा।

यह शुरुआती traction दिखाता है कि NRI और immigrant communities एक आसान, सस्ती और transparent cross-border payment service की तलाश में थीं—और Frex उसी जरूरत को पूरा कर रहा है।


⚔️ Competition: Wise, Remitly और Xoom जैसे बड़े खिलाड़ियों की रेस में Frex

Cross-border payment space पहले से ही hot और competitive है।
Sector में यह नाम काफी लोकप्रिय हैं—
• Wise
• Remitly
• Xoom (PayPal)

Frex इन दिग्गजों के साथ direct या indirect competition में रहेगा।
लेकिन Frex का दावा है कि उसकी
⚡ instant settlement
💲 low fees
🔍 transparent operations
उसे users के लिए अलग value proposition देती हैं।


🧭 भारत से दुनिया तक: क्या Frex “UPI for Global Transfers” बन पाएगा?

Cross-border payments एक बड़ा और बढ़ता हुआ बाजार है, और Frex जैसा स्टार्टअप इसे बदलने की क्षमता रखता है।
भारत में UPI ने payments को जिस level पर democratize किया—
क्या Frex global remittance space में वैसा कुछ कर पाएगा?

Startup का clear focus है:
✔ Speed
✔ Cost
✔ Transparency
✔ Trust

अगर Frex इस model को scale कर लेता है और जल्द ही $1M monthly transfers से आगे बढ़ जाता है, तो यह भारत और NRIs के लिए cross-border money movement को नए युग में ले जा सकता है।

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🎓💉 Healthcare Edtech Startup Virohan ने जुटाए ₹39.27 करोड़

Virohan

भारत के हेल्थकेयर एजुकेशन सेक्टर में तेजी से उभर रहा स्टार्टअप Virohan अब अपने Series B फंडिंग राउंड में ₹39.27 करोड़ (लगभग $4.5 मिलियन) जुटाने की तैयारी कर रहा है। इस राउंड का नेतृत्व जापान की प्रसिद्ध कंपनी Mynavi Corporation कर रही है।

इसके साथ ही इसके मौजूदा निवेशक Blume Ventures, Bharat Inclusive Technologies, और अन्य बैकर्स ने भी इसमें हिस्सा लिया है।

यह नई फंडिंग Virohan के लिए बेहद अहम है, क्योंकि हेल्थकेयर स्किलिंग सेक्टर में तेजी से बढ़ती मांग के बीच कंपनी अपनी उपस्थिति को और मज़बूत करना चाहती है।


💰 मई 2025 के बाद एक और फंडिंग—Growth Story हुई और तेज

इससे पहले Virohan ने मई 2025 में $3 मिलियन का प्री-सीरीज़ B राउंड उठाया था, जिसमें Blume Ventures, Bharat Inclusive Technologies और Rebright Partners लीड निवेशक रहे थे।

नए राउंड के साथ कंपनी ने अपने स्किलिंग मॉडल और ट्रेनिंग क्षमताओं को और विस्तार देने की तैयारी कर ली है।


🧾 बोर्ड ने पास किया Special Resolution – 2,726 CCPS होंगे जारी

कंपनी की RoC (Registrar of Companies) फाइलिंग्स के अनुसार, Virohan के बोर्ड ने एक विशेष प्रस्ताव पास किया है जिसके तहत:

  • कुल 2,726 Series B CCPS
  • प्रति शेयर कीमत ₹1,44,072
  • कुल राशि ₹39.27 करोड़

जुटाने की मंजूरी दी गई है।

यह राउंड खासकर इसलिए चर्चा में है क्योंकि Mynavi Corporation कंपनी में एक महत्वपूर्ण विदेशी निवेशक के रूप में प्रवेश कर रही है।


🇯🇵 Mynavi का बड़ा दांव — ₹22 करोड़ का Lead Investment

जापान-आधारित Mynavi Corporation इस राउंड की लीड इन्वेस्टर है और वह अकेले ही:

💴 ₹22 करोड़ (लगभग $2.5 मिलियन) निवेश करेगी।

अन्य निवेशकों का योगदान:

  • Blume Ventures – ₹12 करोड़
  • Bharat Inclusive Technologies – ₹1.8 करोड़
  • बाकी राशि
    👉 Rebright Partners
    👉 Bhilai Iron Foundry
    👉 Shantanu Jain
    👉 Deepa Bagla Financial Consultants
    से आएगी।

कंपनी को Blume Ventures और Deepa Bagla Financial Consultants से ₹12.75 करोड़ पहले ही मिल चुके हैं, जबकि बाकी निवेश जल्द आने की उम्मीद है।


📊 वैल्यूएशन रही Flat — ₹576 करोड़ Post-Money

Entrackr के अनुमानों के अनुसार, इस नए फंडिंग राउंड के बाद भी Virohan की वैल्यूएशन ₹576 करोड़ (लगभग $65.5 मिलियन) पर flat रहेगी।

ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है कि ग्रोथ स्टेज के स्टार्टअप्स में बिना वैल्यूएशन बढ़ाए भी निवेशक पैसा लगा रहे हों—इसका मतलब है कि निवेशकों को कंपनी के मॉडल और भविष्य पर पूरा विश्वास है।


🏫 Virohan क्या करता है? — Healthcare Sector के लिए स्किल-बेस्ड ट्रेनिंग

2018 में स्थापित Virohan भारत में तेजी से बढ़ते हेल्थकेयर जॉब्स सेक्टर को लक्ष्य बनाता है। इसका मॉडल बेहद अनोखा है:

🎓 Vocational Training Programs
💉 Healthcare Job Roles
📚 Hybrid Education (Online + Offline)
🏢 Campuses in 10+ cities

कंपनी दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पुणे, जयपुर, मुंबई, नागपुर सहित कई शहरों में अपनी ट्रेनिंग सुविधाएं देती है।

Virohan की कोशिश है लाखों युवाओं को हेल्थकेयर सेक्टर में employable बनाना, क्योंकि इस सेक्टर में स्किल्ड वर्कफोर्स की भारी कमी है।


💼 फंडिंग के बाद Ownership कैसे बदलेगी?

TheKredible के अनुसार, नई फंडिंग के बाद:

  • Mynavi Corporation – 3.83% स्टेक
  • Blume Ventures – 16.16% (सबसे बड़ा शेयरहोल्डर)
  • Founders –
    👉 नलिन सलूजा – 12.53%
    👉 कुणाल दुडेचा – 12.53%
    👉 आर्चित जयसाल (Oxys Impact LLP) – 12.53%

कुल मिलाकर संस्थापकों के पास मजबूत कंट्रोल बना रहेगा।

अब तक Virohan ने $18 मिलियन से ज्यादा फंडिंग जुटा ली है।


📈 कंपनी का परफॉर्मेंस – FY24 में Revenue दोगुना!

Virohan के FY25 के नंबर अभी आने बाकी हैं, लेकिन FY24 के आंकड़े काफी मजबूत रहे:

📊 FY23 Revenue: ₹10.65 करोड़
📈 FY24 Revenue: ₹21 करोड़ (लगभग 2X)

हालांकि, ग्रोथ के साथ कंपनी के लॉसेस भी बढ़े:

💸 FY24 Loss: ₹22 करोड़
🆙 18% YoY increase

कंपनी का कहना है कि लॉसेस expansion mode होने की वजह से हैं और आने वाले वर्षों में यूनिट-इकोनॉमिक्स मजबूत होने की उम्मीद है।


🚀 आगे की प्लानिंग — Healthcare Workforce को 10X बढ़ाने का Target

Virohan आने वाले वर्षों में:

  • अपने कोर्स पोर्टफोलियो बढ़ाने
  • नए शहरों और नए कैंपस खोलने
  • टेक्नोलॉजी-बेस्ड ट्रेनिंग मॉडल मजबूत करने
  • और employability rate बढ़ाने

पर ध्यान देगी।

भारत में हेल्थकेयर जॉब्स की मांग तेजी से बढ़ रही है—डॉक्टर्स, नर्सिंग, लैब टेक्नीशियंस और हॉस्पिटल मैनेजमेंट तक हर जगह स्किल्ड लोग चाहिए।

Virohan इसी गैप को भरने की दिशा में बड़े पैमाने पर काम कर रहा है।


📝 निष्कर्ष

₹39.27 करोड़ का नया Series B निवेश Virohan के लिए बड़ा मील का पत्थर है।
जापानी निवेशक Mynavi Corporation का शामिल होना कंपनी की अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता को भी बढ़ाएगा।

FY24 में मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ, बढ़ती ट्रेनिंग डिमांड और तेज़ी से फैलता हेल्थकेयर सेक्टर—इन सभी फैक्टर्स के साथ Virohan अगले कुछ वर्षों में भारत का अग्रणी हेल्थकेयर स्किलिंग स्टार्टअप बन सकता है।

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🌟 Conscious Chemist ने जुटाए ₹15 करोड़

Conscious Chemist

भारतीय स्किनकेयर ब्रांड Conscious Chemist ने अपने ताज़ा ब्रिज राउंड में ₹15 करोड़ (लगभग $1.8 मिलियन) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व Atomic Capital ने किया, जबकि First Port Capital और IPV International ने भी इसमें हिस्सा लिया।

ये फंडिंग ऐसे समय में आई है जब भारत का स्किनकेयर मार्केट तेज़ी से बढ़ रहा है और साइंस-बेस्ड स्किनकेयर ब्रांड्स की मांग नई ऊंचाइयों पर है। Conscious Chemist, जो पहले से ही एक्टिव-फर्स्ट स्किनकेयर सेगमेंट में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है, अब इस निवेश का उपयोग बड़े एक्सपैंशन प्लान के लिए करेगा।


💰 फंडिंग का इस्तेमाल कहाँ होगा?

कंपनी ने बताया कि जुटाई गई पूंजी का उपयोग मुख्य रूप से इन प्रमुख क्षेत्रों में किया जाएगा:

लीडरशिप टीम को मजबूत करना
इन्वेंट्री और सप्लाई चेन को स्केल करना
मार्केटिंग ऑपरेशंस को तेज करना
नए प्रोडक्ट इनोवेशन और R&D में निवेश
नए कैटेगरी एक्सपैंशन जैसे स्कैल्प और हेयर केयर

इसका मतलब है कि आने वाले महीनों में ब्रांड कई नए प्रोडक्ट लॉन्च करता दिख सकता है।


🧴 ब्रांड की कहानी: साइंस-बैक्ड स्किनकेयर पर फोकस

Conscious Chemist की शुरुआत 2021 में रॉबिन गुप्ता और प्रखर माथुर ने की थी। दोनों का लक्ष्य था—एक ऐसा स्किनकेयर ब्रांड बनाना जो साइंस-बेस्ड फॉर्म्युलेशन्स, सस्टेनेबल इंग्रीडिएंट्स और क्लीन ब्यूटी फिलॉसफी पर काम करे।

आज ब्रांड के पास:

  • 30+ प्रोडक्ट्स
  • Acne-care
  • Sunscreens
  • Cleansers
  • Serums
  • और Active-ingredients आधारित solutions हैं

ब्रांड के पॉपुलर इंग्रीडिएंट्स में शामिल हैं:
🧪 Salicylic Acid
🧪 Peptides
🧪 Ceramides
🧪 Retinol

ये वे ingredients हैं जो आज की जेनरेशन के स्किनकेयर यूज़र्स खूब ढूंढते हैं।


📺 Shark Tank India में आया था, लेकिन फंड नहीं मिला

दिलचस्प बात यह है कि Conscious Chemist Shark Tank India Season 3 में फीचर हो चुका है।

हालांकि उन्हें शो में किसी शार्क से फंडिंग नहीं मिली, लेकिन ब्रांड का प्रेज़ेंस और लोकप्रियता शो के बाद काफी बढ़ गई।

इससे यह साफ होता है कि कभी-कभी फंड न मिलने के बावजूद भी ब्रांड अपनी मजबूत ग्रोथ बना सकता है — और Conscious Chemist इसका शानदार उदाहरण है।


📈 पिछले 12 महीनों में धमाकेदार ग्रोथ

कंपनी के अनुसार, पिछले एक साल में उनका बिज़नेस 3X revenue growth तक पहुंच गया है।

साथ ही, ब्रांड का दावा है कि वह अब CM3 लेवल पर प्रॉफिटेबल हो चुका है — जो कि इस competitive स्किनकेयर मार्केट में काफी बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

कुछ और दिलचस्प आंकड़े:

  • 📊 75% Gross Margins
  • 👥 2.5 मिलियन+ कस्टमर्स
  • 🔁 रिटेंशन रेट इंडस्ट्री एवरेज से दोगुना
  • ⚡ Quick-commerce चैनल जैसे Blinkit, Instamart, Zepto से 3X सेल्स ग्रोथ

Quick-commerce प्लेटफॉर्म्स ने Conscious Chemist के प्रोडक्ट्स को एक नया ग्राहक बेस दिया है, खासकर युवा शहरी यूज़र्स का।


🚀 आगे का लक्ष्य: ARR ₹500 करोड़!

कंपनी अब आने वाले 24–36 महीनों में अपना ARR बढ़ाकर ₹500 करोड़ तक पहुंचाने का टारगेट रखती है।

इस दौरान Conscious Chemist अपनी ग्रोथ को प्रॉफिटेबल रखने पर भी फोकस करेगा — यानी सिर्फ रेवेन्यू नहीं, बल्कि स्थिर और सुधारता हुआ बिज़नेस मॉडल।

भारत में active-based skincare की मांग बढ़ रही है, और इसमें Conscious Chemist एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में तेजी से उभर चुका है। यह फंडिंग इसे अगले स्तर तक ले जाने में अहम साबित हो सकती है।


🧪 क्यों सफल हो रहा है Conscious Chemist?

कुछ कारण जो इसे बाकी ब्रांड्स से अलग बनाते हैं:

🌿 साइंस-बेस्ड फॉर्म्युलेशन
🧼 क्लीन और ट्रांसपेरेंट इंग्रीडिएंट्स
🎯 एक्ने, सनस्क्रीन जैसे core प्रॉब्लम-एरिया पर फोकस
⚡ Quick-commerce में मजबूत उपस्थिति
💬 ग्राहकों के साथ गहरा engagement
💡 कस्टमर-फर्स्ट प्रोडक्ट डेवलपमेंट

इन सब वजह से ब्रांड ने सिर्फ तीन साल में 2.5 मिलियन से ज्यादा भारतीय ग्राहकों का भरोसा जीता है।


📝 निष्कर्ष

₹15 करोड़ की यह ब्रिज फंडिंग Conscious Chemist के लिए बड़ा कदम है। नए कैटेगरी लॉन्च, R&D इन्वेस्टमेंट और मार्केट एक्सपैंशन के साथ ब्रांड आने वाले समय में भारतीय स्किनकेयर मार्केट में और बड़ा खिलाड़ी बन सकता है।

एक ऐसा ब्रांड जिसने Shark Tank से फंड न मिलने के बावजूद लगातार ग्रोथ की और आज निवेशकों का भरोसा जीत रहा है — Conscious Chemist की यह कहानी भारतीय startup ecosystem के लिए प्रेरणादायक है।

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📈 Valiant Capital से नई फंडिंग की तैयारी में StockGro

StockGro

भारत के तेजी से बढ़ते फिनटेक सेक्टर में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। सोशल इन्वेस्टमेंट और स्टॉक मार्केट एडवाइजरी प्लेटफॉर्म StockGro अपने मौजूदा फंडिंग राउंड में और कैपिटल जुटाने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, कंपनी की बातचीत फिलहाल Boston आधारित Valiant Capital Management के साथ अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। अगर यह डील फाइनल होती है, तो StockGro का Series B राउंड और अधिक मजबूत हो जाएगा।

🧩 Series B राउंड में नई तेजी

पिछले सप्ताह StockGro ने अपने Series B राउंड के तहत $17 मिलियन (करीब ₹142 करोड़) जुटाए थे। यह निवेश प्रमुख इन्वेस्टर Mukul Agarwal की Param Capital से आया था। इस डील की जानकारी सबसे पहले Entrackr ने जारी की थी। अब Valiant Capital से संभावित फंडिंग के बाद कंपनी इस राउंड को और बड़ा बना सकती है।

हालांकि StockGro ने इस डील पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। CEO अजय लखोटिया से भी प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है।

📌 StockGro क्या करता है?

2020 में स्थापित StockGro भारत का एक लोकप्रिय सोशल इन्वेस्टमेंट और मार्केट एडवाइजरी प्लेटफॉर्म है। इसका उद्देश्य भारतीय निवेशकों—खासकर युवाओं—को शेयर बाजार की समझ आसान और सुरक्षित तरीके से प्रदान करना है।

प्लेटफ़ॉर्म की खासियतें:

  • SEBI-registered advisors के माध्यम से निवेश मार्गदर्शन
  • पोर्टफोलियो मैनेजमेंट से लेकर रिस्क गाइडेंस तक
  • शुरुआती निवेशकों के लिए आसान और गेमिफाइड सीखने का अनुभव
  • मार्केट ट्रेंड्स, एनालिटिक्स और एक्सपर्ट की राय
  • इन्वेस्टमेंट सीखने के लिए सिम्युलेशन-आधारित टूल्स

क्लियर और सरल अनुभव के कारण StockGro भारत के युवाओं में काफी लोकप्रिय हुआ है और आज यह करोड़ों उपयोगकर्ताओं तक पहुँच चुका है।

💰 अब तक की फंडिंग और प्रमुख निवेशक

TheKredible के अनुसार, StockGro अब तक कुल $76 मिलियन (EC + debt) जुटा चुका है। इसके प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं—

  • Bitkraft Ventures
  • SBI Ventures
  • Root Ventures
  • General Catalyst
  • Param Capital
  • और अब संभावित रूप से Valiant Capital Management

सीरीज B राउंड के पूरा होने के बाद कंपनी के वैल्यूएशन में भी बड़ा उछाल आने की संभावना है।

📉 वित्तीय प्रदर्शन: FY24 में दबाव बढ़ा

हालांकि यूज़र बेस और ब्रांड की लोकप्रियता बढ़ रही है, लेकिन कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर पिछले दो साल चुनौतीपूर्ण रहे हैं।

FY24 Highlights:

  • ऑपरेटिंग रेवेन्यू गिरकर ₹131 करोड़ से ₹86.5 करोड़ रह गया — यानी 34% की गिरावट
  • वहीं Losses बढ़कर ₹55 करोड़ से ₹101 करोड़ हो गए — यानी 84% की बढ़त

StockGro ने FY25 के वित्तीय परिणाम अभी सार्वजनिक नहीं किए हैं। लेकिन नए निवेश जुटने से कंपनी अपने प्रोडक्ट, मार्केटिंग और टेक्नोलॉजी अपग्रेड पर तेजी से काम करने की तैयारी में है।

🧭 Valiant Capital क्यों दिलचस्पी दिखा रहा है?

Valiant Capital अमेरिका का एक बड़ा हेज फंड है जो दुनिया भर में हाई-ग्रोथ टेक और फिनटेक कंपनियों में निवेश करता आया है।

StockGro में निवेश की संभावित वजहें:

  • भारत में तेजी से बढ़ता रिटेल इन्वेस्टिंग मार्केट
  • युवाओं में ट्रेडिंग और निवेश की बढ़ती रुचि
  • StockGro का यूनिक सोशल-इन्वेस्टमेंट मॉडल
  • एडवाइजरी + एजुकेशन + पोर्टफोलियो मैनेजमेंट का कॉम्बो
  • उच्च उपयोगकर्ता एंगेजमेंट और मजबूत रिटेंशन

इस तरह Valiant का निवेश कंपनी को ग्लोबल स्तर पर भी विश्वसनीयता और मजबूती देगा।

🚀 नए फंड का इस्तेमाल कहाँ होगा?

भले ही डील की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि StockGro फंड का उपयोग मुख्य रूप से यहाँ कर सकता है:

  • AI आधारित निवेश सलाह और डेटा टूल्स
  • मजबूत रिस्क मैनेजमेंट इंजन
  • मार्केटिंग और यूज़र अधिग्रहण
  • नए इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स
  • कॉलेज और युवा निवेशकों को जोड़ने के लिए अभियान
  • ग्लोबल एक्सपैंशन की शुरुआती तैयारी

🌐 भारत में निवेश प्लेटफ़ॉर्म के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा

Groww, Zerodha, Upstox जैसी कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ चुकी है। ऐसे में StockGro अपने एडवाइजरी + सोशल इन्वेस्टमेंट मॉडल से अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है।

कंपनी का फोकस सिर्फ ट्रेडिंग नहीं बल्कि सीखने और समझकर निवेश करने पर है, जो इसे भीड़ में अलग करता है।

🔎 आगे का रास्ता

यदि Valiant Capital का निवेश फाइनल होता है, तो StockGro का Series B राउंड लगभग दोगुना हो सकता है। इससे प्लेटफॉर्म की ग्रोथ तेज होगी और कंपनी अगली फंडिंग के लिए भी बेहतर पोजिशन पर आ सकती है।

भारत में रिटेल निवेशकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, और ऐसे में StockGro जैसे प्लेटफॉर्म बड़े अवसरों के सामने खड़े हैं।

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🦴 Lumov ने जुटाए $1.2 Million

Lumov

भारत के हेल्थटेक सेक्टर में एक और मजबूत कदम बढ़ चुका है। Bengaluru-based orthopedic recovery startup Lumov ने $1.2 million (लगभग ₹10 करोड़) की seed funding हासिल कर ली है। यह राउंड Incubate Fund Asia के नेतृत्व में पूरा हुआ, जिसमें कई नामी निवेशकों और फैमिली ऑफिसेज ने भी हिस्सा लिया।

Lumov भारत में orthopedic recovery और rehabilitation उत्पादों को नए स्तर पर ले जाने का लक्ष्य रखता है। कंपनी ऐसे समय में तेजी से बढ़ रही है, जब देश में musculoskeletal care काफी fragmented है और quality recovery products की भारी कमी है।


💰 Funding Round: किन निवेशकों ने किया समर्थन?

इस seed funding राउंड में कई बड़े निवेशक शामिल रहे:

  • Incubate Fund Asia (Lead investor)
  • QRG Investments & Holdings – Havells Family Office
  • IIMA Ventures
  • SIDBI
  • Angel Investors जैसे:
    • Ashish Gupta
    • Saket Narang
    • Abhishek Goyal
    • Arjun Vaidya

यह निवेश Lumov के लिए न सिर्फ पूंजी जोड़ता है, बल्कि industry expertise, networking और strategic guidance भी लाता है।


🚀 फंड्स का इस्तेमाल कहाँ होगा?

Lumov ने स्पष्ट किया है कि इस पूंजी का उपयोग कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जाएगा:

1. Operations का विस्तार

स्टार्टअप अब अपने संचालन को Bangalore से आगे बढ़ाकर बड़े भारतीय शहरों में स्केल करेगा, जिनमें शामिल हैं:

  • Delhi NCR
  • Hyderabad
  • Mumbai

2. Surgeon Partnerships को मजबूत करना

Orthopedic surgeons के साथ गहरी partnerships Lumov का core मॉडल है। Funding से:

  • अधिक doctors को ऑनबोर्ड किया जाएगा
  • क्लीनिक और hospitals में presence बढ़ाई जाएगी
  • नए clinically validated solutions बनाए जाएंगे

3. New Product Development

Team अब R&D में तेज़ी लाएगी और ऐसे products बनाएगी जो:

  • पोस्ट-सर्जिकल recovery
  • pain management
  • long-term mobility care
    को आसान बनाएं।

4. Manufacturing & Sales Teams का विस्तार

Quality production के लिए manufacturing capacity बढ़ाई जाएगी और
nationwide distribution मजबूत किया जाएगा।


🏥 Lumov क्या करता है?

Lumov एक specialized healthcare startup है जो orthopedic recovery और rehabilitation को बेहतर बनाने पर काम करता है। इसके products निम्न उपयोगों के लिए डिजाइन किए जाते हैं:

  • Fracture recovery
  • Post-surgery care
  • Knee, spine और joint support
  • Pain management
  • Long-term mobility solutions

ये सभी products clinically validated तरीके से orthopedic doctors के साथ मिलकर बनाए जाते हैं, ताकि भारतीय मरीजों की जरूरतों के अनुसार solutions दिए जा सकें।


🏨 Top Hospitals के साथ साझेदारी

Lumov कई बड़े अस्पताल chains के doctors और medical teams के साथ काम करता है, जिनमें शामिल हैं:

  • Manipal Hospitals
  • Apollo Hospitals
  • Sakra
  • AIG Hospitals (Hyderabad)

इस collaboration-driven मॉडल की वजह से इसके products न सिर्फ medically safe हैं, बल्कि practically effective भी साबित हो रहे हैं।


👥 टीम और Hiring Plans

अभी Lumov की कोर टीम 15 मेंबर्स की है। Funding के बाद कंपनी बड़ी hiring करने की तैयारी में है:

  • Product development
  • Sales
  • Supply chain
  • Operations

स्टार्टअप की योजना है कि अगले कुछ महीनों में टीम size दोगुना किया जाए।


💡 Founders कौन हैं?

Lumov की स्थापना दो founders ने की:

🔹 Saumaric Dangwal

🔹 Ankit Gupta

दोनों founders की healthcare investment में मजबूत पृष्ठभूमि है।
इन्होंने पहले इन global investment firms के साथ काम किया है:

  • Bain Capital
  • Brookfield Private Equity
  • Steinberg Asset Management

इस अनुभव की वजह से ये भारत के healthcare बाजार, patient needs, और rehab solutions की कमी को बहुत अच्छे से समझते हैं।


🩺 भारत में Orthopedic Recovery का Market Gap

भारत दुनिया की सबसे बड़ी orthopedic surgery markets में गिना जाता है,
लेकिन:

  • rehab products अनियमित
  • fragmented
  • और low-quality होते हैं

Lumov इस gap को target कर रहा है, ताकि:

  • recovery fast
  • pain कम
  • और mobility बेहतर हो

इस vision की वजह से investors इसे high-potential deep healthcare play के रूप में देख रहे हैं।


🔮 आने वाले समय में Lumov की Growth

Funding के बाद startup अपने aggressive expansion के लिए तैयार है।
आने वाले महीनों में Lumov:

  • Tier-1 और Tier-2 शहरों में विस्तार करेगा
  • orthopedic doctors के साथ नई categories लॉन्च करेगा
  • digitally assisted recovery tools भी लाने की तैयारी करेगा
  • और product innovation pipeline को मजबूत करेगा

इससे कंपनी भारत के rapidly growing rehab & recovery market की एक प्रमुख खिलाड़ी बन सकती है।


📝 निष्कर्ष

Lumov की seed funding सिर्फ एक फंडिंग राउंड नहीं है, बल्कि India के orthopedic recovery space के लिए एक नया अध्याय है।
Clinically designed, surgeon-backed, India-specific recovery solutions की भारी जरूरत को देखते हुए, Lumov आने वाले सालों में बड़ा प्रभाव डाल सकता है।

नई capital, मजबूत partnerships और experienced founders के साथ, Lumov अब एक बड़े scale-up phase में प्रवेश कर रहा है — और भारत के healthcare innovation space में एक मजबूत नाम बनने के रास्ते पर है।

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🏦 Groww को SEBI से मिला OBPP लाइसेंस

Groww

भारत के तेजी से बढ़ते निवेश प्लेटफ़ॉर्म Groww ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने Groww को Online Bond Platform Provider (OBPP) के रूप में ऑपरेट करने की मंज़ूरी दे दी है। इस लाइसेंस के साथ Groww अब अपने ऐप और प्लेटफ़ॉर्म पर लिस्टेड कॉर्पोरेट बॉन्ड्स को सीधे लिस्ट, डिस्ट्रिब्यूट और ट्रांज़ैक्ट कर सकेगा।

यह कदम भारत में फिक्स्ड-इनकम निवेश को तेजी से आगे बढ़ा सकता है, खासकर खुदरा निवेशकों के बीच, जो मार्केट वोलैटिलिटी से बचते हुए स्थिर रिटर्न की तलाश में रहते हैं।


📌 क्या है Groww को मिला नया OBPP लाइसेंस?

SEBI का OBPP लाइसेंस किसी भी प्लेटफ़ॉर्म को यह अनुमति देता है कि वह—

  • सीधे लिस्टेड कॉर्पोरेट बॉन्ड्स प्रदर्शित करे,
  • उनका वितरण करे,
  • और निवेशकों के लिए ट्रांज़ैक्शन की सुविधा प्रदान करे।

Groww के लिए यह लाइसेंस बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके जरिए वह अपने मौजूदा प्रोडक्ट लाइनअप — equities, mutual funds, ETFs, sovereign gold bonds और अन्य मार्केट-लिंक्ड प्रोडक्ट्स — में अब corporate bonds भी जोड़ सकेगा।


🧩 क्यों महत्वपूर्ण है Groww का Bond Market में प्रवेश?

भारत में बॉन्ड मार्केट लंबे समय से संस्थागत निवेशकों और HNIs तक सीमित रहा है। कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में निवेश की प्रक्रिया

  • जटिल,
  • कम पारदर्शी,
  • और खुदरा निवेशकों के लिए कम सुलभ रही है।

Groww जैसे डिजिटल-फर्स्ट प्लेटफ़ॉर्म के प्रवेश के बाद—

  • बॉन्ड निवेश अब अधिक सरल,
  • पारदर्शी,
  • और युवा रिटेल निवेशकों के लिए आकर्षक हो सकता है।

Groww के पास पहले से ही 12 मिलियन से अधिक सक्रिय निवेशक हैं। ऐसे में बॉन्ड्स का जोड़ना निवेशकों को पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन के लिए एक नया अवसर देगा।


📈 groww का शेयर मार्केट डेब्यू भी रहा सफल

यह मंज़ूरी ऐसे समय में आई है जब Groww ने हाल ही में अपना स्टॉक मार्केट लिस्टिंग पूरा किया था, और कंपनी का शेयर अपने इश्यू प्राइस की तुलना में 14% प्रीमियम पर लिस्ट हुआ था।
इससे साफ है कि निवेशकों का भरोसा Groww पर लगातार बढ़ रहा है।


💹 कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन: मुनाफे में मजबूत बढ़त

Groww ने साल 2025 की दूसरी तिमाही में शानदार वित्तीय प्रदर्शन किया:

  • कुल आय: ₹1,071 करोड़
  • PAT (Profit After Tax): ₹471 करोड़
  • मार्केट शेयर: 26.62% (NSE के अनुसार भारत में सबसे बड़ा स्टॉकब्रोकर)

यह पहली बार है जब भारत का कोई डिजिटल-ब्रोकिंग प्लेटफ़ॉर्म इतना बड़ा मार्केट शेयर हासिल कर चुका है।


📊 ग्राहक अधिग्रहण लागत में बढ़ोतरी

हालाँकि Groww की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता के साथ एक चुनौती भी सामने आई।
कंपनी की कस्टमर एक्विज़िशन कॉस्ट (CAC) बढ़कर:

  • ₹796 (H1 FY25) से
  • ₹1,374 (H1 FY26) हो गई है,

यानी 72% की बढ़ोतरी

विस्तार और मार्केट लीडरशिप की दौड़ में CAC का बढ़ना सामान्य है, लेकिन यह Groww के लिए लागत प्रबंधन की नई चुनौती भी है।


🧾 Digital Bonds से Groww को क्या फायदा होगा?

OBPP लाइसेंस मिलने के बाद Groww के लिए कई नए अवसर खुलते हैं:

🔹 1. AUM (Assets Under Management) में तेजी से वृद्धि

फिक्स्ड-इनकम प्रोडक्ट्स जोड़ने से Groww के AUM में स्थिर और प्रिडिक्टेबल ग्रोथ आएगी।

🔹 2. नए निवेशक वर्ग को जोड़ने का मौका

कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में निवेश करने वाला सेगमेंट—

  • मिडिल-एज्ड प्रोफेशनल्स,
  • सीनियर सिटीज़न्स,
  • और लॉन्ग-टर्म स्टेबल रिटर्न चाहने वाले निवेशक—
    अब Groww प्लेटफ़ॉर्म को अपनाएंगे।

🔹 3. मजबूत प्रतिस्पर्धा में बढ़त

Zerodha, Upstox और Dhan जैसे प्लेटफ़ॉर्म पहले से बॉन्ड मार्केट में सक्रिय हैं।
Groww की एंट्री प्रतिस्पर्धा को और तीव्र करेगी।


👥 Retail निवेशकों के लिए क्या बदलेगा?

Groww का कॉर्पोरेट बॉन्ड्स के क्षेत्र में प्रवेश निवेशकों के लिए कई फायदे लेकर आएगा:

⭐ आसान एक्सेस

सिर्फ एक ऐप में equity, mutual funds और अब bonds भी।

⭐ पारदर्शिता

रियल-टाइम यील्ड, रेटिंग और मैच्योरिटी की स्पष्ट जानकारी।

⭐ कम जटिलता

पहले बॉन्ड निवेश ज्यादातर ब्रोकर या वितरकों के माध्यम से होता था। अब प्रक्रिया कहीं आसान होगी।

⭐ पोर्टफोलियो स्टेबिलिटी

बॉन्ड्स निवेशकों को मार्केट उतार-चढ़ाव से सुरक्षा प्रदान करते हैं।


🔮 Groww की आगे की रणनीति: क्या उम्मीद करें?

फाइनेंशियल मार्केट विश्लेषकों का मानना है कि:

  • Groww जल्द ही Gsec (Government Securities),
  • market-linked debentures,
  • और high-yield corporate bonds
    भी अपने प्लेटफ़ॉर्म में शामिल कर सकता है।

इसके अलावा, Groww के पास मजबूत तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर है, जिससे वह बॉन्ड्स का निवेश अनुभव स्टॉक्स जितना आसान बना सकता है।


📝 निष्कर्ष

Groww के लिए SEBI का OBPP लाइसेंस एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। इससे—

  • प्लेटफ़ॉर्म पर निवेश विकल्प बढ़ेंगे
  • बॉन्ड मार्केट में भागीदारी के नए अवसर खुलेंगे
  • और भारत में फिक्स्ड-इनकम निवेश का डिजिटलकरण तेजी से बढ़ेगा

Groww पहले से ही भारत का सबसे बड़ा स्टॉकब्रोकर बन चुका है, और अब कॉर्पोरेट बॉन्ड्स के क्षेत्र में एंट्री के साथ यह अपने लिए नया विकास अध्याय शुरू कर रहा है।

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🚀 Chiratae Ventures ने लॉन्च किया Sonic DeepTech Program

Chiratae Ventures

भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में डीपटेक (DeepTech) सेक्टर लगातार तेज़ी से बढ़ रहा है, और अब इस ग्रोथ को और तेज़ करने के लिए Venture Capital फर्म Chiratae Ventures ने एक नया तेज़-तर्रार फंडिंग प्रोग्राम लॉन्च किया है — Sonic DeepTech.

यह प्रोग्राम खास तौर पर उन शुरुआती स्टार्टअप्स के लिए बनाया गया है जो फ्रंटियर टेक्नोलॉजी, एप्लाइड AI, स्पेसटेक, रोबोटिक्स, क्वांटम, क्लाइमेट-टेक, और डिफेंस जैसे हाई-इम्पैक्ट सेक्टर्स में काम कर रहे हैं।


क्या है Sonic DeepTech? — 48 घंटे में फंडिंग का वादा

Sonic DeepTech भारत के डीपटेक स्टार्टअप्स के लिए एक फास्ट-ट्रैक फंडिंग प्लेटफॉर्म है।

इस प्रोग्राम की सबसे खास बात है कि Chiratae Ventures केवल 48 घंटों में निवेश का निर्णय लेगा — जो भारतीय स्टार्टअप स्पेस में शायद पहली बार है।

💰 कितना फंड मिलेगा?

  • स्टार्टअप्स को Seed से Series A तक फंडिंग मिलेगी
  • प्रति स्टार्टअप $2 मिलियन (करीब ₹17 करोड़) तक का निवेश
  • शुरुआत से ही डोमेन एक्सपर्ट्स, इंडस्ट्री लीडर्स और प्रोडक्ट-बिल्डिंग सपोर्ट भी मिलेगा

यह प्रोग्राम उन फाउंडर्स के लिए खास है जो लैब से निकलकर अपनी तकनीक को कमर्शियल लेयर तक ले जाना चाहते हैं।


🧪 किन सेक्टर्स पर रहेगा फोकस?

Sonic DeepTech का फोकस फ्रंटियर टेक्नोलॉजी पर है — यानी ऐसे सेक्टर जो आने वाले दशक में देश की अर्थव्यवस्था को बदल सकते हैं।

🔬 फोकस सेक्टर्स:

  • Energy & Climate Tech
  • 🧬 Bio & MedTech
  • 🤖 Robotics & Advanced Manufacturing
  • 🚀 Space Technologies
  • 🧠 Applied AI & Machine Learning
  • 🇮🇳 Defence & Strategic Tech
  • 🧮 Quantum Technologies
  • 🌐 Digital Economy Infrastructure

इनमें से कई सेक्टरों में भारत अभी शुरुआती चरण में है, इसलिए Sonic DeepTech जैसे प्रोग्राम से डीपटेक इनोवेशन को बड़ा बूस्ट मिलेगा।


🏆 Chiratae Ventures का DeepTech पोर्टफोलियो अब तक

Chiratae Ventures पहले ही डीपटेक सेक्टर में मजबूत उपस्थिति रखता है। फर्म दावा करती है कि अब तक उसने $200 मिलियन से ज्यादा की पूंजी 50 से अधिक DeepTech स्टार्टअप्स में लगाई है।

🌟 पोर्टफोलियो में शामिल प्रमुख नाम:

  • Pixis (AI मार्केटिंग)
  • Miko (रोबोटिक्स)
  • Agnikul Cosmos (स्पेसटेक)
  • Aether Biomedical (मेडटेक डिवाइसेज़)
  • Pando.ai (सप्लाई चेन)
  • Cavli Wireless (IoT)
  • Sigtuple (हेल्थटेक)
  • HealthifyMe (डिजिटल हेल्थ)
  • Metadome.ai (3D विज़ुअल इंजन)

इन कंपनियों में से कई स्टार्टअप्स ग्लोबल स्तर पर भी अपनी पहचान बना चुके हैं।


🧩 180+ पेटेंट एप्लिकेशन और 130+ ग्रांट्स

Chiratae के डीपटेक पोर्टफोलियो की एक खास ताकत है — इनोवेशन।

फर्म के डीपटेक स्टार्टअप्स ने अब तक:

  • 180+ पेटेंट फाइल किए
  • 130 से अधिक पेटेंट हासिल किए

यह दिखाता है कि Chiratae सिर्फ आइडियाज में नहीं, बल्कि हाई-टेक IP और ग्लोबल कंपटीशन वाले बिज़नेस में निवेश करता है।


💼 Chiratae Ventures का बड़ा कद: $1.3 बिलियन AUM

Chiratae Ventures भारत के टॉप वेंचर कैपिटल फंड्स में गिना जाता है। आज फर्म:

  • $1.3 बिलियन से अधिक एसेट्स मैनेज करती है
  • 130+ स्टार्टअप्स में निवेश कर चुकी है

इसके पोर्टफोलियो में Flipkart, Lenskart, Myntra, FirstCry, PolicyBazaar जैसे यूनिकॉर्न नाम भी शामिल हैं।

इसलिए Sonic DeepTech प्रोग्राम के लॉन्च को एक्सपर्ट्स भारत के डीपटेक इकोसिस्टम के लिए बड़ा कदम मान रहे हैं।


🚀 क्यों ज़रूरी है Sonic DeepTech?

भारत में DeepTech को हमेशा से दो बड़ी चुनौतियाँ रहीं:

  1. लंबा R&D टाइमलाइन
  2. कमर्शियलाइजेशन से पहले पूंजी की कमी

Sonic DeepTech इन दोनों चुनौतियों को सीधे एड्रेस करता है:

1. 48 घंटे में निवेश निर्णय

इससे फाउंडर्स महीनों तक मीटिंग्स और इवैल्यूएशन में समय खोने से बचेंगे।

🧪 2. लैब से मार्केट तक सपोर्ट

चिराटेय का एक्सपर्ट नेटवर्क रिसर्च को कमर्शियल प्रोडक्ट में बदलने में मदद करेगा।

🌍 3. ग्लोबल स्टैंडर्ड DeepTech इनोवेशन को बढ़ावा

भारत स्पेसटेक, AI, रक्षा और रोबोटिक्स में तेजी से ग्लोबल कंपटीशन में प्रवेश कर रहा है।


📌 क्या कहता है यह कदम भारत के स्टार्टअप भविष्य के बारे में?

Chiratae Ventures का Sonic DeepTech प्रोग्राम एक सिग्नल है कि:

  • भारत में DeepTech निवेश तेजी से बढ़ेगा
  • फाउंडर्स को तेज़ी से पूंजी और प्रोडक्ट सपोर्ट मिलेगा
  • AI, स्पेस, क्वांटम और रोबोटिक्स जैसे सेक्टर्स में भारतीय कंपनियाँ तेज़ी से आगे बढ़ेंगी
  • भारत की DeepTech क्षमता ग्लोबल स्तर पर और ज्यादा मजबूत होगी

🔍 निष्कर्ष

Sonic DeepTech सिर्फ एक फंडिंग प्रोग्राम नहीं बल्कि भारत की DeepTech इकोनॉमी के लिए एक तेज रफ्तार एक्सेलरेटर है।
48 घंटे में निवेश निर्णय, $2 मिलियन तक की फंडिंग, और DeepTech एक्सपर्ट्स का साथ — यह किसी भी शुरुआती स्टार्टअप के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

Chiratae Ventures ने साफ बता दिया है कि आने वाला दशक DeepTech इनोवेशन का होगा—और भारत इस रेस में पीछे नहीं रहने वाला।

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🚀 Snapdeal की पैरेंट कंपनी AceVector का घाटा 80% घटा

Snapdeal

ई-कॉमर्स सेक्टर में अपनी मजबूत मौजूदगी रखने वाली AceVector Group—जो भारत के लोकप्रिय मार्केटप्लेस Snapdeal, ई-कॉमर्स SaaS प्लेटफ़ॉर्म Unicommerce, और ब्रांड रोल-अप यूनिट Stellaro Brands का संचालन करती है—ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही (H1 FY26) में अपने वित्तीय प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। कंपनी का घाटा तेज़ी से कम हुआ है, जबकि राजस्व में दो अंकों की मजबूत बढ़त देखने को मिली है।


📉 घाटा 110 करोड़ से घटकर सिर्फ 22.5 करोड़

AceVector Group ने H1 FY26 के नतीजे जारी करते हुए बताया कि कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट लॉस 80% घटकर 22.5 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 110.3 करोड़ रुपये था।

यह सुधार लागत नियंत्रण, कुशल संचालन और बेहतर राजस्व प्रदर्शन की वजह से आया है।


📈 रेवेन्यू में 35% की वृद्धि

कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू H1 FY26 में 244.4 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के 181.1 करोड़ रुपये के मुकाबले 35% अधिक है।

इसके अलावा, कंपनी को अन्य आय के रूप में 7.5 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जिससे कुल आय बढ़कर 251.9 करोड़ रुपये हो गई।


📝 FY25 का प्रदर्शन: घाटा बढ़ा, राजस्व मामूली बढ़ा

FY25 के नतीजों पर नज़र डालें तो:

  • कंपनी का नेट लॉस 145% YoY बढ़कर 125.9 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था।
  • वहीँ ऑपरेटिंग रेवेन्यू मामूली 4% बढ़कर 395 करोड़ रुपये रहा (FY24: 379.8 करोड़ रुपये)।

यह डेटा दर्शाता है कि FY25 वित्तीय रूप से चुनौतीपूर्ण था, लेकिन FY26 की शुरुआत ने कंपनी के लिए टर्नअराउंड का संकेत दिया है।


📑 AceVector ने फिर ठोकी IPO की दस्तक

AceVector Group ने आज SEBI के साथ अपना Updated Draft Red Herring Prospectus (UDRHP) दाखिल किया है। यह कंपनी की दूसरी IPO कोशिश है।

💰 IPO संरचना:

इस बार का सार्वजनिक निर्गम दो भागों में होगा—

  • Fresh Issue: 300 करोड़ रुपये तक
  • Offer for Sale (OFS): 6.39 करोड़ शेयर, जो मौजूदा निवेशकों द्वारा बेचे जाएंगे

AceVector ने जुलाई 2025 में DRHP कॉन्फ़िडेंशियल आधार पर दाखिल किया था, और SEBI से मंज़ूरी पिछले महीने ही प्राप्त हुई है।


⏳ पहली IPO कोशिश असफल क्यों हुई थी?

AceVector ने 2021 में पहली बार IPO फाइल किया था, जिसमें कंपनी 1,250 करोड़ रुपये जुटाना चाहती थी।
लेकिन 2022 में बाजार में बढ़ी अस्थिरता और निवेशकों के बदलते व्यवहार के कारण यह योजना टाल दी गई

इस बार कंपनी बेहतर वित्तीय संकेतकों के साथ फिर बाज़ार में कदम रख रही है।


🛒 Snapdeal, Unicommerce और Stellaro: कैसे AceVector बना मल्टी-बिज़नेस ग्रुप?

AceVector Group केवल Snapdeal तक सीमित नहीं है। कंपनी की तीन मुख्य इकाइयाँ हैं—

1️⃣ Snapdeal (E-commerce Marketplace)

भारत के वैल्यू-ई-कॉमर्स सेगमेंट में Snapdeal का बड़ा आधार है, जो टियर-2 और टियर-3 शहरों में मजबूत पकड़ रखता है।

2️⃣ Unicommerce (E-commerce SaaS Firm)

कंपनी की यह यूनिट पहले ही IPO कर चुकी है और 2024 में सफलतापूर्वक लिस्ट हुई थी।
Unicommerce द्वारा किए गए IPO में AceVector ने 94.4 लाख शेयर बेचकर लगभग 102 करोड़ रुपये हासिल किए थे।

  • Acquisition Cost: ₹23.52 प्रति शेयर
  • Offer Price: ₹108 प्रति शेयर
  • Return: 4.59X

यह AceVector के लिए एक शानदार एग्ज़िट साबित हुआ।

3️⃣ Stellaro Brands (Brand Roll-Up Subsidiary)

कंपनी तेजी से बढ़ते D2C और मल्टी-ब्रांड ई-कॉमर्स सेगमेंट पर फोकस कर रही है।


💹 क्यों बेहतर हुआ AceVector का प्रदर्शन?

H1 FY26 में कंपनी के प्रदर्शन में सुधार कई कारणों से हुआ:

  • ✔️ खर्चों में अनुशासन
  • ✔️ उच्च-मार्जिन बिज़नेस यूनिट्स से बढ़ता योगदान
  • ✔️ Snapdeal पर वैल्यू-कॉमर्स की मांग में वृद्धि
  • ✔️ Unicommerce की मजबूत बाजार स्थिति
  • ✔️ ऑपरेशनल कार्यक्षमता में सुधार

🚀 आगे की राह: क्या AceVector का IPO सफल होगा?

AceVector के हालिया प्रदर्शन और बाजार की तेजी को देखते हुए, निवेशक इस बार कंपनी की दूसरी IPO कोशिश को अवसर के रूप में देख सकते हैं।

खासकर जब वैल्यू ई-कॉमर्स, SaaS और ब्रांड रोल-अप प्ले तेजी से निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं, AceVector की विविधित बिज़नेस संरचना उसे मजबूत पोज़िशन देती है।


📌 निष्कर्ष

  • AceVector ने H1 FY26 में घाटा 80% घटाया
  • रेवेन्यू में 35% की मजबूत उछाल
  • कंपनी दोबारा IPO लाने की तैयारी में
  • Unicommerce से 4.59X रिटर्न
  • Snapdeal, Unicommerce और Stellaro मिलकर एक मजबूत मल्टी-बिज़नेस एंटरप्राइज बना रहे हैं

AceVector के सुधारते वित्तीय परिणाम और IPO तैयारी यह संकेत देते हैं कि कंपनी नए विकास चरण में प्रवेश कर रही है।

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📉💰 नवंबर 2025 में डिजिटल गोल्ड UPI ट्रांजैक्शंस में गिरावट

UPI

नवंबर 2025 में डिजिटल गोल्ड की ऑनलाइन खरीदारी के रुझानों में दिलचस्प बदलाव देखने को मिला। जहां एक तरफ UPI के जरिए गोल्ड खरीदने वाले लोगों की संख्या बढ़ी, वहीं दूसरी तरफ कुल लेनदेन मूल्य (Value) लगभग आधा होकर गिर गया। यह दर्शाता है कि उपयोगकर्ताओं की भागीदारी बढ़ी है मगर वे पहले की तुलना में कम मूल्य का सोना खरीद रहे हैं।

NPCI द्वारा जारी ताज़ा डेटा से पता चलता है कि त्योहारों के बाद खरीदारी का औसत टिकट साइज़ काफी गिरा है।


📊 डिजिटल गोल्ड UPI ट्रांजैक्शंस: नवंबर का पूरा आंकड़ा

नवंबर 2025 में डिजिटल गोल्ड खरीदारी के आंकड़े कुछ इस प्रकार रहे:

  • कुल ट्रांजैक्शंस (Volume): 123.42 मिलियन
  • कुल मूल्य (Value): ₹1,215.36 करोड़

यह अक्टूबर की तुलना में:

  • 6.4% ज्यादा वॉल्यूम
  • 47% कम वैल्यू

अक्टूबर में 2,290.36 करोड़ रुपये का डिजिटल गोल्ड खरीदा गया था, जो नवंबर में लगभग आधा रह गया।


🎎 त्योहारों का असर खत्म, खरीदारी सामान्य स्तर पर

अक्टूबर 2025 का महीना दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों के बीच आता है, जब सोना खरीदने की परंपरा सबसे ज्यादा देखी जाती है।

इसी वजह से अक्टूबर में:

  • लेनदेन की संख्या भी ऊंची थी
  • और औसत टिकट साइज़ भी बड़ा था

नवंबर में त्योहारों का असर खत्म होते ही उपभोक्ताओं की खरीदारी छोटी रकम पर आ गई। यानि लोग सोना तो खरीद रहे हैं, पर कम मात्रा में।


📉 सितंबर की तुलना में दिलचस्प पैटर्न

सितंबर 2025 में:

  • 103.19 मिलियन ट्रांजैक्शंस
  • ₹1,410.18 करोड़ की वैल्यू

नवंबर की तुलना:

  • वॉल्यूम 20% ज्यादा
  • मगर वैल्यू कम

इससे साफ है कि लोग ज्यादा लेनदेन तो कर रहे हैं, लेकिन छोटी राशि में। यह बदलाव उपभोक्ता व्यवहार में स्पष्ट ट्रेंड की ओर इशारा करता है।


⚠️ SEBI की चेतावनी का भी पड़ा असर?

नवंबर में ट्रांजैक्शन वैल्यू में आई तेज गिरावट का एक कारण SEBI की हालिया चेतावनी भी हो सकती है।

SEBI ने कहा था:

  • डिजिटल गोल्ड अनियमित (Unregulated) उत्पाद है
  • यह SEBI के दायरे में नहीं आता
  • निवेशकों के लिए सुरक्षा तंत्र मौजूद नहीं है

इसके बाद SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने भी स्पष्ट किया कि डिजिटल गोल्ड के लिए कोई नियामक ढांचा बनाने की योजना नहीं है, क्योंकि यह SEBI के अधीन नहीं आता।

निवेशकों पर इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ा और वे बड़े निवेश करने से हिचकिचाए।


🛒 नवंबर में UPI पर क्या हुआ सबसे ज्यादा खर्च?

डिजिटल गोल्ड में गिरावट के बावजूद UPI की कुल गतिविधियां बेहद मजबूत रहीं। नवंबर में UPI ने कुल:

📌 20.47 बिलियन ट्रांजैक्शंस

📌 ₹26.32 लाख करोड़ का मूल्य दर्ज किया

सबसे ज्यादा ट्रांजैक्शंस वाली कैटेगरीज:

🛍️ 1. ग्रॉसरी और सुपरमार्केट

  • 3,222.99 मिलियन ट्रांजैक्शंस
  • ₹71,129.56 करोड़

🍔 2. फास्ट फूड रेस्टोरेंट

  • 1,406.70 मिलियन ट्रांजैक्शंस
  • ₹16,149.43 करोड़

🍽️ 3. रेस्टोरेंट और ईटिंग प्लेसेज़

  • 1,202.63 मिलियन ट्रांजैक्शंस
  • ₹19,547.09 करोड़

📱 4. टेलीकॉम सर्विसेज

  • 817.83 मिलियन ट्रांजैक्शंस
  • ₹21,399.70 करोड़

⛽ 5. सर्विस स्टेशन

  • 657.73 मिलियन ट्रांजैक्शंस
  • ₹40,320.95 करोड़

यह दिखाता है कि दैनिक उपभोग वाली कैटेगरीज़ UPI की रीढ़ बनी हुई हैं।


🧩 डिजिटल गोल्ड में गिरावट का क्या मतलब है?

नवंबर के डेटा से तीन बड़े संकेत मिलते हैं:

1️⃣ भागीदारी बढ़ रही है

UPI पर डिजिटल गोल्ड खरीदने वालों की संख्या बढ़ रही है।

2️⃣ खर्च कम हो रहा है

फेस्टिव सीज़न के बाद उपभोक्ता छोटी, बजट-फ्रेंडली खरीदारी कर रहे हैं।

3️⃣ नियमन (Regulation) की कमी चिंता बढ़ा रही है

SEBI की चेतावनी के बाद निवेशकों में सतर्कता बढ़ी है, जिससे बड़े टिकट साइज़ वाले निवेश रुके।


📌 निष्कर्ष: डिजिटल गोल्ड की लोकप्रियता बरकरार, पर औसत खर्च घटा

नवंबर 2025 के आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि डिजिटल गोल्ड एक लोकप्रिय उत्पाद बना हुआ है। वॉल्यूम में वृद्धि बताती है कि लोग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गोल्ड खरीदने की आदत बना रहे हैं।

लेकिन वैल्यू में तेज गिरावट यह दर्शाती है कि निवेशकों का भरोसा थोड़ा हिचकिचा रहा है, खासकर नियामक स्पष्टता की कमी और त्योहारों के बाद के प्राकृतिक मंदी के कारण।

आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या डिजिटल गोल्ड फिर से उच्च मूल्य वाली खरीदारी के स्तर पर वापसी करता है या छोटे-टिकट साइज़ ट्रांजैक्शंस ही नया नॉर्म बन जाते हैं।

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🚀 Phi Commerce ने FY25 में 28% की ग्रोथ दर्ज की,

Phi Commerce

Omnichannel भुगतान समाधान देने वाली फिनटेक कंपनी का शानदार वित्तीय प्रदर्शन

भारत की प्रमुख SaaS-आधारित ओमnichannel पेमेंट सॉल्यूशंस प्रोवाइडर Phi Commerce ने वित्त वर्ष 2025 (FY25) में बेहद मजबूत प्रदर्शन किया है। कंपनी ने न सिर्फ अपनी राजस्व वृद्धि को 28% तक बढ़ाया, बल्कि घाटा 45% तक कम करने में भी सफलता हासिल की है।

कंपनी के RoC में दाखिल कंसॉलिडेटेड वित्तीय दस्तावेज बताते हैं कि Phi Commerce की ऑपरेटिंग आय FY24 के ₹81.3 करोड़ से बढ़कर FY25 में ₹103.9 करोड़ पहुंच गई, जो कंपनी के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है।


💳 Phi Commerce क्या करती है?

Phi Commerce एक डिजिटल पेमेंट्स टेक्नोलॉजी कंपनी है जो ओमnichannel भुगतान समाधान उपलब्ध कराती है, जिसमें शामिल हैं:

  • ऑनलाइन पेमेंट्स
  • इन-स्टोर पेमेंट्स (POS)
  • ऑन-द-गो पेमेंट्स (QR, लिंक आधारित भुगतान)

कंपनी एक RBI-लाइसेंस प्राप्त पेमेंट एग्रीगेटर (PA) है, जो B2B और B2C दोनों तरह के ग्राहकों को एकीकृत पेमेंट और लेंडिंग सॉल्यूशन प्रदान करती है।

इसकी टेक्नोलॉजी विभिन्न पेमेंट प्रोवाइडर्स, बैंकों और बड़े उद्यमों को लचीला, सुरक्षित और स्केलेबल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराती है।


📈 FY25 में राजस्व की मजबूती: GMV से आया 87% हिस्सा

कंपनी की आय का सबसे बड़ा हिस्सा GMV सेटलमेंट्स से मिलने वाले कमीशन से आता है।

🔹 राजस्व का विभाजन (FY25):

  • GMV कमीशन: ₹90.82 करोड़ (87% हिस्सा)
  • टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज: ₹7.36 करोड़
  • वैल्यू-ऐडेड पेमेंट एग्रीगेशन सर्विसेज: ₹5.73 करोड़
  • इंटरेस्ट इनकम (FDs व निवेश): ₹3.9 करोड़

कुल मिलाकर, कंपनी का कुल राजस्व FY25 में ₹107.8 करोड़ पहुंच गया।


💼 खर्चों में नियंत्रण, घाटा 45% तक कम

Phi Commerce के कुल खर्च FY24 के ₹117 करोड़ की तुलना में FY25 में बढ़कर ₹133 करोड़ हुए। हालांकि खर्च बढ़ा, पर राजस्व में हुई वृद्धि ने घाटे को काफी कम किया।

🔹 मुख्य खर्चे (FY25):

  • पेमेंट प्रोसेसिंग चार्जेज: ₹76.37 करोड़ (कुल खर्च का 57%)
  • कर्मचारियों पर खर्च: ₹32.7 करोड़ (18% वृद्धि)
  • अन्य खर्च (प्लेटफॉर्म सपोर्ट, लीगल, कंसल्टिंग, आदि): ₹23.9 करोड़

🔹 घाटा 45% कम

FY24 में ₹29.24 करोड़ के घाटे के मुकाबले FY25 में Phi Commerce ने घाटा घटाकर ₹16.16 करोड़ कर लिया।

यह सुधार मुख्यतः बढ़ते कमीशन और फ्लैट प्रोसेसिंग चार्जेज की वजह से आया।


📊 यूनिट इकोनॉमिक्स में सुधार

FY25 में कंपनी ने ₹1 कमाने के लिए ₹1.28 खर्च किए।

हालांकि यह अभी भी सुधार की गुंजाइश दिखाता है, लेकिन पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर है।


📉 EBITDA और ROCE

FY25 में कंपनी की लाभप्रदता से जुड़े प्रमुख अनुपात पड़े रहे:

  • EBITDA मार्जिन: -24.9%
  • ROCE: -43.74%

हालांकि ये नकारात्मक स्तर पर हैं, लेकिन घाटे में आई भारी गिरावट संकेत देती है कि कंपनी आने वाले वर्षों में लाभप्रदता की दिशा में तेजी से बढ़ सकती है।


💰 कैश और एसेट्स की स्थिति

FY25 के अंत तक कंपनी के पास:

  • कुल करंट एसेट्स: ₹70.9 करोड़
  • कैश और बैंक बैलेंस: ₹26.3 करोड़

मजबूत बैलेंस शीट कंपनी की वित्तीय स्थिरता और विकास योजनाओं का समर्थन करती है।


🌍 फंडिंग और निवेशक

TheKredible के अनुसार, Pune-based Phi Commerce ने अब तक $25 मिलियन जुटाए हैं।

  • इसका हालिया Series B राउंड (दो ट्रांज के माध्यम से) BEENEXT के नेतृत्व में पूरा हुआ था।

कंपनी भारत और वैश्विक बाजार में अपनी पेमेंट टेक्नोलॉजी पहुंच को लगातार बढ़ा रही है।


🧭 आगे का रास्ता: मजबूत ग्रोथ और स्केलेबल मॉडल

FY25 के प्रदर्शन से साफ है कि Phi Commerce:

  • लगातार राजस्व बढ़ा रही है,
  • खर्चों पर नियंत्रण रख रही है,
  • और घाटे को तेजी से कम कर रही है।

भारत में ओमnichannel पेमेंट्स की तेजी से बढ़ती मांग को देखते हुए, इसका SaaS-आधारित मॉडल आने वाले वर्षों में और अधिक स्केल हासिल कर सकता है।


📝 निष्कर्ष

Phi Commerce का FY25 प्रदर्शन फिनटेक सेक्टर में एक प्रेरणादायक उदाहरण है।
राजस्व में 28% वृद्धि, 45% घाटा कमी, और GMV कमीशन में भारी उछाल इस बात का संकेत हैं कि कंपनी स्थिर और टिकाऊ विकास की राह पर तेजी से बढ़ रही है।

डिजिटल पेमेंट्स के तेजी से विस्तार होते भारतीय बाजार में Phi Commerce आने वाले वर्षों में और मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की क्षमता रखती है।

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