Skip to content
Flipkart

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने गूगल द्वारा वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Flipkart में $350 मिलियन (लगभग ₹2,900 करोड़) के निवेश को मंजूरी दे दी है। इस डील को मई 2024 से मंजूरी का इंतजार था।

गूगल का यह निवेश फ्लिपकार्ट के $1 बिलियन फंडिंग राउंड का हिस्सा है, जिसका नेतृत्व वॉलमार्ट ने किया है। इस निवेश के साथ, फ्लिपकार्ट का मूल्यांकन $36 बिलियन (लगभग ₹2.9 लाख करोड़) हो गया।


CCI से मंजूरी क्यों थी जरूरी?

CCI भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए बड़े निवेश और अधिग्रहण की जांच करता है।

  • Flipkart और गूगल दोनों ही भारतीय डिजिटल और ई-कॉमर्स स्पेस में बड़े खिलाड़ी हैं।
  • CCI ने यह सुनिश्चित किया कि यह निवेश प्रतिस्पर्धा को बाधित नहीं करेगा और भारतीय उपभोक्ताओं के हित में होगा।

Flipkart ने इस निवेश को लेकर कहा था कि इसे दोनों पक्षों की नियामक और अन्य मंजूरियों की आवश्यकता होगी।


फ्लिपकार्ट के लिए क्या मायने रखता है यह निवेश?

  1. डिजिटल इनोवेशन में मदद
    गूगल के साथ यह साझेदारी फ्लिपकार्ट को अपनी डिजिटल सेवाओं को और उन्नत बनाने में मदद करेगी।
    • AI और मशीन लर्निंग आधारित टूल्स को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म में शामिल किया जा सकता है।
    • उपभोक्ताओं के लिए अधिक व्यक्तिगत अनुभव प्रदान करने की क्षमता।
  2. वित्तीय मजबूती
    $1 बिलियन फंडिंग राउंड से मिली राशि फ्लिपकार्ट को अपने संचालन का विस्तार करने और प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने में मदद करेगी।
  3. छोटे शहरों में विस्तार
    फ्लिपकार्ट का ध्यान टियर II और टियर III शहरों में उपभोक्ताओं तक पहुंच बढ़ाने पर है।

गूगल का फ्लिपकार्ट में निवेश क्यों?

  1. भारतीय बाजार में बढ़ती मांग
    भारत का ई-कॉमर्स सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, और गूगल इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी को मजबूत करना चाहता है।
  2. डिजिटल पेमेंट का विस्तार
    गूगल पे जैसे प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट की सेवाओं से जुड़कर डिजिटल पेमेंट को और सरल बना सकते हैं।
  3. प्रभावी डेटा साझेदारी
    फ्लिपकार्ट के साथ साझेदारी से गूगल को भारतीय उपभोक्ताओं के व्यवहार और आवश्यकताओं को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी।

रेबल फूड्स को भी मिला निवेश का समर्थन

CCI ने रेबल फूड्स में जोंगसॉन्ग इन्वेस्टमेंट्स (सिंगापुर स्थित टेमासेक की सहायक कंपनी) द्वारा किए गए निवेश को भी मंजूरी दी है।

  • रेबल फूड्स, जिसे पहले फासोस के नाम से जाना जाता था, भारत और अन्य देशों में क्लाउड किचन चलाने वाली प्रमुख कंपनी है।
  • कंपनी ने हाल ही में $100-140 मिलियन जुटाने की योजना बनाई है।

रेबल फूड्स का प्रदर्शन और योजनाएं

वित्तीय प्रदर्शन

  • FY24 में रेबल फूड्स की ऑपरेशनल आय ₹1,420 करोड़ तक पहुंच गई।
  • इस अवधि में कंपनी का नुकसान 42% घटकर ₹378 करोड़ रह गया।
  • पिछले दो वर्षों में कंपनी ने ₹50 करोड़ का कर्ज उठाया था।

विस्तार की योजना

रेबल फूड्स ने अपने क्लाउड किचन नेटवर्क को मजबूत किया है:

  • 450+ क्लाउड किचन दुनिया भर में।
  • भारत के 75 शहरों के साथ-साथ MENA (मिडल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका), इंडोनेशिया, यूके में मौजूदगी।

कंपनी की योजना:

  1. नई निवेश रणनीति
    • ताजा इक्विटी फंडिंग का उपयोग नए ब्रांड्स और टेक्नोलॉजी में किया जाएगा।
  2. ग्राहक अनुभव में सुधार
    • फूड डिलीवरी को अधिक तेज और भरोसेमंद बनाने पर ध्यान।
  3. वैश्विक विस्तार
    • नए बाजारों में प्रवेश और विदेशी ग्राहकों तक पहुंच बढ़ाने की योजना।

CCI की मंजूरी का महत्व

भारतीय स्टार्टअप्स के लिए अच्छा संकेत

CCI द्वारा दी गई मंजूरी भारतीय स्टार्टअप्स और निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत है।

  • फ्लिपकार्ट और रेबल फूड्स जैसे कंपनियों को नए निवेश से अपने संचालन का विस्तार करने में मदद मिलेगी।

प्रतिस्पर्धा का संरक्षण

CCI ने यह सुनिश्चित किया है कि ये निवेश भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा को बाधित नहीं करेंगे।


निष्कर्ष

गूगल और रेबल फूड्स में निवेश से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय डिजिटल और ई-कॉमर्स सेक्टर में वैश्विक निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है।

  • फ्लिपकार्ट को मिला गूगल का समर्थन डिजिटल इनोवेशन को बढ़ावा देगा और छोटे शहरों में इसके विस्तार को गति देगा।
  • रेबल फूड्स का वैश्विक विस्तार और क्लाउड किचन मॉडल भारतीय फूडटेक उद्योग में नए आयाम जोड़ सकता है।

फ्यूचर विजन: इन दोनों कंपनियों के लिए FY25 में इन निवेशों का प्रभाव देखना दिलचस्प होगा, जो भारतीय डिजिटल और फूडटेक क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।

Read more : Cars24 ने FY24 में 25% वृद्धि दर्ज की, नुकसान ₹498.4 करोड़ पर स्थिर

Latest News

Read More

BillDesk

💳 BillDesk खरीदेगी Worldline का भारतीय पेमेंट बिजनेस $70.8 मिलियन की डील

भारतीय डिजिटल पेमेंट्स कंपनी BillDesk ने फ्रांस की ग्लोबल पेमेंट्स दिग्गज Worldline SA के भारतीय पेमेंट ऑपरेशंस को
PRISM

🏨 OYO की पैरेंट कंपनी PRISM ने पूर्व SEBI चेयरमैन अजय त्यागी को बनाया इंडिपेंडेंट डायरेक्टर,

OYO की पैरेंट कंपनी PRISM ने अपने बोर्ड में बड़ा बदलाव करते हुए पूर्व SEBI चेयरमैन Ajay Tyagi
Wint

📈 Wint Wealth की FY25 में 2.6X ग्रोथ,

बेंगलुरु आधारित डेब्ट इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म Wint Wealth ने वित्त वर्ष 2025 (FY25) में शानदार वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया