🇮🇳 FY25 में Leverage Edu की तेज ग्रोथ,

Leverage Edu

विदेश में पढ़ाई का सपना देखने वाले हजारों भारतीय छात्रों के लिए एक बड़ा नाम बन चुकी Leverage Edu ने वित्त वर्ष 2025 (FY25) में जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की है। लेकिन इस तेज़ विस्तार की कीमत कंपनी को बढ़ते घाटे के रूप में चुकानी पड़ी है। दिल्ली बेस्ड इस एडटेक स्टार्टअप की ऑपरेटिंग इनकम में 90% से ज्यादा की उछाल आई, वहीं घाटा 56% बढ़कर 100 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया।

कंपनी के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) में दाखिल कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स के मुताबिक, FY25 में कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 91% बढ़कर 173 करोड़ रुपये हो गया, जो FY24 में 90.6 करोड़ रुपये था।


🚀 क्या करती है Leverage Edu?

साल 2017 में अक्षय चतुर्वेदी द्वारा शुरू की गई Leverage Edu, भारतीय और इंटरनेशनल छात्रों को UK, US, जर्मनी, कनाडा और दुबई जैसे देशों की यूनिवर्सिटीज़ में एडमिशन दिलाने में मदद करती है। कंपनी काउंसलिंग, एडमिशन प्रोसेस और एजुकेशन लोन जैसी फाइनेंशियल सर्विस भी देती है।


💼 रेवेन्यू में बड़ा बदलाव: प्लेसमेंट से Fly बिज़नेस तक

FY25 में कंपनी की कुल ऑपरेटिंग इनकम का 70% हिस्सा स्टूडेंट प्लेसमेंट सर्विस से आया, जो FY24 में 90% से ज्यादा था। प्लेसमेंट सर्विस से आय 65% बढ़कर 120.6 करोड़ रुपये हो गई।

लेकिन इस साल एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला – कंपनी के “Fly” बिज़नेस ने जबरदस्त ग्रोथ दिखाई। यह बिज़नेस 2022 के अंत में शुरू हुआ था और इसके जरिए कंपनी एजुकेशन लोन, फॉरेन एक्सचेंज और स्टूडेंट एकॉमोडेशन जैसी सेवाएं देती है। FY25 में इस सेगमेंट से 29.7 करोड़ रुपये की कमाई हुई, जो पिछले साल के मुकाबले दोगुनी से ज्यादा है।

इसके अलावा, कंपनी ने 21.2 करोड़ रुपये प्रोडक्ट सेल से और 4.9 करोड़ रुपये अन्य स्रोतों से कमाए। इस तरह कुल आय 177 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।


🌍 भारत से बढ़ी हिस्सेदारी, इंटरनेशनल से कम

FY25 में कुल रेवेन्यू का 76% हिस्सा भारत से आया, जबकि इंटरनेशनल मार्केट्स से 24%। दिलचस्प बात यह है कि FY24 में इंटरनेशनल मार्केट्स का योगदान 78.5% था। यानी अब कंपनी का फोकस और मजबूती भारत पर ज्यादा दिख रही है।


💸 खर्चों में तेज़ उछाल ने बिगाड़ा मुनाफा

जहां एक तरफ रेवेन्यू तेजी से बढ़ा, वहीं खर्चों में उससे भी ज्यादा बढ़ोतरी हुई। FY25 में कंपनी का कुल खर्च 73% बढ़कर 280 करोड़ रुपये हो गया, जो FY24 में 162 करोड़ रुपये था।

📌 प्रमुख खर्च:

  • एम्प्लॉयी बेनिफिट्स: 64 करोड़ रुपये (कुल खर्च का 23%)
  • एडवर्टाइजिंग और प्रमोशन: 59.8 करोड़ रुपये (2.2X बढ़ोतरी)
  • सेलिंग एजेंट्स को कमीशन: 51.2 करोड़ रुपये (2.6X उछाल)

इसके अलावा IT, लीगल, रेंट, डिप्रिसिएशन और अन्य ओवरहेड खर्चों में भी भारी बढ़ोतरी हुई।

स्पष्ट है कि कंपनी ने आक्रामक मार्केटिंग और एक्सपेंशन स्ट्रेटेजी अपनाई, जिससे खर्च तेजी से बढ़ा।


📉 घाटा 100 करोड़ के पार

बढ़ते खर्चों का असर सीधे कंपनी की बॉटम लाइन पर पड़ा। FY25 में कंपनी का घाटा 55% बढ़कर 106 करोड़ रुपये हो गया, जो FY24 में 68 करोड़ रुपये था।

कंपनी का EBITDA लॉस 83 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

  • EBITDA मार्जिन: -47.4%
  • ROCE: -204.35%

यानी कंपनी को 1 रुपये कमाने के लिए 1.62 रुपये खर्च करने पड़े।


💰 कैश पोजीशन और फंडिंग

मार्च 2025 तक कंपनी के पास 126 करोड़ रुपये के करंट एसेट्स थे, जिसमें 34 करोड़ रुपये कैश और बैंक बैलेंस शामिल है।

Leverage Edu अब तक करीब 70 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटा चुकी है। जुलाई 2023 में कंपनी ने 40 मिलियन डॉलर की Series C राउंड उठाई थी, जिसमें Blume Ventures और DSG Consumer Partners जैसे निवेशकों ने हिस्सा लिया। आखिरी वैल्यूएशन करीब 140 मिलियन डॉलर रही।


🔍 आगे का रास्ता: ग्रोथ बनाम प्रॉफिटेबिलिटी

Leverage Edu की कहानी फिलहाल “ग्रोथ पहले, मुनाफा बाद में” वाली स्ट्रेटेजी दिखाती है। कंपनी ने अपने बिज़नेस मॉडल को प्लेसमेंट सर्विस से आगे बढ़ाकर फाइनेंशियल सर्विसेज़ तक फैलाया है। Fly जैसे नए सेगमेंट से आने वाली कमाई यह संकेत देती है कि कंपनी लॉन्ग टर्म में मल्टी-सोर्स रेवेन्यू मॉडल बनाना चाहती है।

हालांकि, लगातार बढ़ता घाटा निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन सकता है। आने वाले सालों में कंपनी को अपनी मार्केटिंग और कमीशन कॉस्ट को कंट्रोल करते हुए सस्टेनेबल प्रॉफिट की दिशा में कदम बढ़ाने होंगे।


📊 निष्कर्ष

FY25 Leverage Edu के लिए हाई ग्रोथ लेकिन हाई लॉस वाला साल रहा। जहां रेवेन्यू में 91% की छलांग कंपनी की डिमांड और मार्केट पोजिशन को दिखाती है, वहीं 106 करोड़ रुपये का घाटा यह बताता है कि स्केल-अप की कीमत भारी रही।

अब देखना होगा कि क्या Leverage Edu आने वाले वर्षों में इस तेज़ ग्रोथ को मुनाफे में बदल पाती है या नहीं। फिलहाल कंपनी का फोकस मार्केट शेयर और एक्सपेंशन पर साफ नजर आ रहा है। 🚀

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⚡ Ola Electric की आय में 55% की गिरावट,

ola electric

इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेगमेंट में सक्रिय कंपनी Ola Electric के लिए वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) की तीसरी तिमाही (Q3) चुनौतीपूर्ण रही। कंपनी की आय में साल-दर-साल 55% की भारी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, सकारात्मक पहलू यह रहा कि कंपनी ने अपने घाटे में 14% की कमी करने में सफलता पाई।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में दाखिल समेकित वित्तीय विवरणों के अनुसार, Q3 FY26 में Ola Electric का ऑपरेशनल रेवेन्यू घटकर 470 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले वर्ष की समान तिमाही में यह 1,045 करोड़ रुपये था।


📉 कुल आय में तेज गिरावट

इलेक्ट्रिक स्कूटर की बिक्री अभी भी कंपनी की आय का मुख्य स्रोत बनी हुई है। बैटरी बिक्री का योगदान सीमित रहा।

बैटरी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी अन्य आय को जोड़ने के बाद कंपनी की कुल आय Q3 FY26 में 504 करोड़ रुपये रही, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में 1,172 करोड़ रुपये थी।

यह गिरावट दर्शाती है कि कंपनी को बिक्री और रजिस्ट्रेशन के मोर्चे पर दबाव का सामना करना पड़ रहा है।


💰 खर्चों में कटौती

राजस्व घटने के बावजूद कंपनी ने अपने खर्चों पर नियंत्रण रखने की कोशिश की।

  • प्रोक्योरमेंट लागत Q3 FY26 में 309 करोड़ रुपये रही, जो कुल खर्च का 31% हिस्सा है।
  • कर्मचारी लाभ खर्च 10% घटकर 92 करोड़ रुपये हो गया।
  • कुल खर्च 43% घटकर 991 करोड़ रुपये रह गया, जो Q3 FY25 में 1,736 करोड़ रुपये था।

खर्चों में इस कमी ने घाटा कम करने में अहम भूमिका निभाई।


📊 घाटा कम, लेकिन तिमाही आधार पर बढ़ोतरी

Ola Electric का शुद्ध घाटा Q3 FY26 में 487 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही के 564 करोड़ रुपये की तुलना में 14% कम है।

हालांकि, तिमाही-दर-तिमाही आधार पर देखें तो Q2 FY26 के 418 करोड़ रुपये के मुकाबले घाटा 17% बढ़ा है।

इससे संकेत मिलता है कि कंपनी को स्थिर लाभप्रदता हासिल करने के लिए अभी और प्रयास करने होंगे।


👔 नेतृत्व में बदलाव

हाल ही में कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) हरीश अभिचंदानी ने निजी कारणों से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद कंपनी के बोर्ड ने दीपक रस्तोगी को नया CFO और प्रमुख प्रबंधकीय कार्मिक नियुक्त किया है।

नेतृत्व में यह बदलाव ऐसे समय पर हुआ है जब कंपनी को रणनीतिक दिशा और वित्तीय अनुशासन की सख्त जरूरत है।


🛵 बाजार हिस्सेदारी में गिरावट

इलेक्ट्रिक दोपहिया बाजार में Ola Electric की स्थिति कमजोर होती दिख रही है।

जनवरी 2025 में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 24.8% थी, जो जनवरी 2026 तक घटकर 6% से नीचे आ गई।

यह गिरावट रजिस्ट्रेशन में कमी के कारण आई है।

इसके विपरीत, Ather Energy ने इस अवधि में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई। वहीं TVS Motor और Bajaj Auto ने अपने वॉल्यूम को स्थिर बनाए रखा।

यह बदलाव दर्शाता है कि EV बाजार में स्थापित और उभरते खिलाड़ियों के बीच हिस्सेदारी का पुनर्वितरण हो रहा है।


📈 शेयर बाजार की प्रतिक्रिया

तिमाही नतीजों के बाद Ola Electric का शेयर ट्रेडिंग सत्र के अंत में 31 रुपये प्रति शेयर पर कारोबार करता दिखा।

कंपनी का बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) 13,638 करोड़ रुपये (करीब 1.5 बिलियन डॉलर) रहा।

शेयर कीमत में कमजोरी इस बात का संकेत है कि निवेशक कंपनी के भविष्य को लेकर सतर्क रुख अपना रहे हैं।


🚨 क्या हैं प्रमुख चुनौतियां?

  1. घटती बाजार हिस्सेदारी – प्रतिस्पर्धा बढ़ने से Ola Electric की पकड़ कमजोर हुई है।
  2. बिक्री में गिरावट – स्कूटर बिक्री में कमी ने आय पर सीधा असर डाला।
  3. लागत नियंत्रण बनाम ग्रोथ – खर्च घटाने से घाटा कम हुआ, लेकिन छोटे पैमाने पर संचालन ग्रोथ को सीमित कर सकता है।
  4. प्रतिस्पर्धी दबाव – Ather, TVS और Bajaj जैसे मजबूत खिलाड़ी बाजार में अपनी स्थिति मजबूत कर रहे हैं।

🔋 EV बाजार की बदलती तस्वीर

भारत का इलेक्ट्रिक दोपहिया बाजार तेजी से विकसित हो रहा है। सरकारी प्रोत्साहन, बढ़ती ईंधन कीमतें और पर्यावरणीय जागरूकता इस सेगमेंट को आगे बढ़ा रही हैं।

लेकिन जैसे-जैसे बाजार परिपक्व हो रहा है, प्रतिस्पर्धा भी कड़ी होती जा रही है। गुणवत्ता, आफ्टर-सेल्स सर्विस और विश्वसनीयता जैसे कारक अब ग्राहकों के निर्णय में अहम भूमिका निभा रहे हैं।


🔍 आगे की राह

Ola Electric के लिए आने वाले कुछ तिमाही बेहद महत्वपूर्ण होंगे।

  • क्या कंपनी अपनी बाजार हिस्सेदारी वापस हासिल कर पाएगी?
  • क्या लागत नियंत्रण के साथ बिक्री बढ़ा सकेगी?
  • क्या नया नेतृत्व वित्तीय स्थिरता ला पाएगा?

इन सवालों के जवाब ही कंपनी के भविष्य की दिशा तय करेंगे।


✨ निष्कर्ष

Ola Electric की ताजा तिमाही रिपोर्ट मिश्रित संकेत देती है। एक ओर कंपनी ने खर्चों पर नियंत्रण रखकर घाटा कम किया है, लेकिन दूसरी ओर राजस्व और बाजार हिस्सेदारी में तेज गिरावट चिंता का विषय है।

EV बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और ग्राहकों के विकल्प भी बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में Ola Electric को अपनी रणनीति, उत्पाद गुणवत्ता और ग्राहक अनुभव पर विशेष ध्यान देना होगा।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनी गिरावट के इस दौर से उबरकर दोबारा मजबूती के साथ वापसी कर पाती है या नहीं। ⚡

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💎 GIVA की तेज रफ्तार ग्रोथ, लेकिन बढ़ा घाटा

Giva

नई पीढ़ी के ज्वेलरी ब्रांड्स में तेजी से उभर रही कंपनी GIVA ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में शानदार राजस्व वृद्धि दर्ज की है। कंपनी ने सालाना आधार पर 89% की बढ़त हासिल करते हुए 518 करोड़ रुपये का ऑपरेशनल रेवेन्यू दर्ज किया, जो FY24 में 274 करोड़ रुपये था।

हालांकि, स्केल हासिल करने की दौड़ में कंपनी का घाटा भी 22% बढ़ गया। FY25 में GIVA का शुद्ध घाटा 72 करोड़ रुपये रहा, जबकि FY24 में यह 59 करोड़ रुपये था।


📈 लगातार दो साल से मजबूत ग्रोथ

GIVA ने FY24 में भी 66% की वृद्धि दर्ज की थी और अब FY25 में 89% की छलांग लगाई है। यह दिखाता है कि कंपनी तेजी से बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है।

कंपनी अपनी डिजिटल और फिजिकल रिटेल नेटवर्क के जरिए ज्वेलरी बेचती है। शुरुआत में GIVA ने सिल्वर ज्वेलरी पर फोकस किया था, लेकिन अब उसने गोल्ड और लैब-ग्रोउन डायमंड सेगमेंट में भी विस्तार कर लिया है।


🏬 ऑनलाइन और ऑफलाइन का संतुलन

GIVA की खास बात यह है कि उसके राजस्व का लगभग 50% हिस्सा ऑनलाइन चैनल से आता है और 50% ऑफलाइन स्टोर्स से।

FY25 के दौरान कंपनी ने 200 स्टोर्स का आंकड़ा पार कर लिया और अब वह 300 आउटलेट्स के करीब पहुंच रही है।

इसके अलावा, कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कदम रखा है। श्रीलंका में खोले गए पहले स्टोर से FY25 में 10.7 करोड़ रुपये का राजस्व आया।

कुल मिलाकर कंपनी की कुल आय 523 करोड़ रुपये रही।


💰 खर्चों में भी तेज बढ़ोतरी

राजस्व के साथ-साथ खर्चों में भी तेजी से इजाफा हुआ।

  • कच्चे माल की लागत 97% बढ़कर 227 करोड़ रुपये हो गई, जो कुल खर्च का 38% हिस्सा है।
  • इन्वेंट्री 108% बढ़कर 100 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
  • कर्मचारी लाभ खर्च 82% बढ़कर 91 करोड़ रुपये हो गया।
  • मार्केटिंग खर्च 55% बढ़कर 135 करोड़ रुपये हो गया।
  • किराया खर्च 135% बढ़कर 47 करोड़ रुपये हो गया, जो ऑफलाइन विस्तार का परिणाम है।

कुल मिलाकर कंपनी के कुल खर्च 76% बढ़कर 596 करोड़ रुपये हो गए, जो FY24 में 338 करोड़ रुपये थे।


📊 यूनिट इकोनॉमिक्स में सुधार

हालांकि घाटा बढ़ा है, लेकिन कंपनी की यूनिट इकोनॉमिक्स में सुधार दिखा है।

FY25 में कंपनी ने 1 रुपये कमाने के लिए 1.15 रुपये खर्च किए, जबकि FY24 में यह आंकड़ा 1.23 रुपये था।

ROCE -21.52% और EBITDA मार्जिन -10.81% रहा, जो पहले से बेहतर स्थिति दर्शाता है।

मार्च 2025 तक कंपनी के पास 291 करोड़ रुपये की चालू परिसंपत्तियां थीं, जिनमें 37 करोड़ रुपये नकद और बैंक बैलेंस शामिल था। पिछले साल यह नकद राशि 83 करोड़ रुपये थी।


💵 अब तक 122 मिलियन डॉलर की फंडिंग

GIVA अब तक लगभग 122 मिलियन डॉलर जुटा चुकी है। इसके प्रमुख निवेशकों में IQ Capital शामिल है।

कंपनी ने 61.5 मिलियन डॉलर का सीरीज C राउंड भी जुटाया था, जिसका नेतृत्व ग्रोथ-स्टेज निवेशक Creaegis ने किया था।

संस्थापक ईशेंद्र अग्रवाल के अनुसार, कंपनी अगले दो से तीन वर्षों में 1,800–2,000 करोड़ रुपये की वार्षिक रन रेट हासिल करने के बाद IPO लाने की योजना बना रही है।


🏆 प्रतिस्पर्धा का परिदृश्य

नई पीढ़ी के ज्वेलरी बाजार में प्रतिस्पर्धा भी तेज है।

  • BlueStone ने अगस्त 2025 में लिस्टिंग की और FY25 में 40% की वृद्धि के साथ 1,770 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया। हालांकि उसका घाटा 56% बढ़कर 222 करोड़ रुपये हो गया।
  • CaratLane, जो Titan Company Limited के तहत संचालित होती है, ने FY25 में 3,583 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया और देशभर में 350 से अधिक स्टोर्स चलाती है।

इन आंकड़ों से साफ है कि ज्वेलरी सेक्टर में स्केल और ब्रांड पहचान बेहद महत्वपूर्ण है।


⚠️ आगे की चुनौतियां

GIVA ने 500 करोड़ रुपये के राजस्व का आंकड़ा पार कर लिया है और मार्जिन में सुधार भी दिखाया है। लेकिन कुछ चुनौतियां उसके नियंत्रण से बाहर हैं।

  • सिल्वर और गोल्ड की कीमतों में तेज बढ़ोतरी
  • उपभोक्ता मांग में संभावित कमी
  • लैब-ग्रोउन डायमंड की थोक कीमतों में गिरावट

लैब-ग्रोउन डायमंड से उच्च मार्जिन की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन लगातार गिरती कीमतों के कारण यह सेगमेंट दबाव में है।

इसके अलावा, मार्केटिंग खर्च अभी भी काफी ऊंचा है। ऑफलाइन नेटवर्क से प्रति स्टोर अधिक बिक्री निकालना कंपनी के लिए अहम होगा।


🌟 राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत मौजूदगी

GIVA की सबसे बड़ी ताकत उसकी पैन-इंडिया उपस्थिति है। कई प्रतिस्पर्धी ब्रांड क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत हैं, लेकिन GIVA ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।

अब देखना यह दिलचस्प होगा कि FY26 में सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और बदलती उपभोक्ता मांग के बीच GIVA और अन्य खिलाड़ी किस तरह खुद को ढालते हैं।


✨ निष्कर्ष

GIVA ने FY25 में शानदार ग्रोथ दिखाई है और 500 करोड़ रुपये के पार पहुंचकर खुद को नई पीढ़ी के ज्वेलरी ब्रांड्स में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया है।

हालांकि घाटा अभी भी चुनौती बना हुआ है, लेकिन बेहतर यूनिट इकोनॉमिक्स और बढ़ता स्टोर नेटवर्क कंपनी के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत देते हैं।

आने वाले वर्षों में IPO की तैयारी और बड़े स्केल के लक्ष्य के साथ GIVA भारतीय ज्वेलरी बाजार में एक प्रमुख नाम बन सकती है। 💎

Read more :🔐 IDfy ने जुटाए 476 करोड़ रुपये,

🔐 IDfy ने जुटाए 476 करोड़ रुपये,

IDfy

डिजिटल युग में पहचान सत्यापन (Identity Verification), धोखाधड़ी रोकथाम (Fraud Detection) और डेटा गोपनीयता (Privacy Compliance) की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी बढ़ती जरूरत के बीच ट्रस्ट और रेगटेक प्लेटफॉर्म IDfy ने सीरीज F फंडिंग राउंड में 476 करोड़ रुपये (करीब 53 मिलियन डॉलर) जुटाए हैं।

यह निवेश प्राइमरी और सेकेंडरी दोनों प्रकार के लेनदेन का मिश्रण है। इस राउंड का नेतृत्व Neo Asset Management ने अपने Neo Secondaries Fund के जरिए किया। इसके अलावा मौजूदा निवेशकों Blume Ventures, Analog Capital, Elev8, IndiaMART और Kae Capital ने भी भागीदारी की।


💰 फंडिंग का उपयोग कैसे होगा?

इस फंडिंग के प्राइमरी हिस्से का उपयोग कंपनी तीन मुख्य उद्देश्यों के लिए करेगी:

  1. रणनीतिक अधिग्रहण (Strategic Acquisitions)
  2. नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार
  3. उत्पाद पोर्टफोलियो का और विकास

वहीं, सेकेंडरी हिस्से के जरिए शुरुआती निवेशकों और कर्मचारियों को आंशिक एग्जिट और लिक्विडिटी मिलेगी।


🏢 2011 में हुई थी शुरुआत

IDfy की स्थापना 2011 में हुई थी। कंपनी ने डिजिटल भरोसे (Digital Trust) को मजबूत करने के उद्देश्य से एक इंटीग्रेटेड “TrustStack” प्लेटफॉर्म विकसित किया है।

इस प्लेटफॉर्म के तहत कंपनी निम्न सेवाएं प्रदान करती है:

  • डिजिटल ऑनबोर्डिंग
  • जोखिम प्रबंधन (Risk Mitigation)
  • धोखाधड़ी पहचान (Fraud Detection)
  • डेटा गोपनीयता गवर्नेंस (Privacy Governance)

आज IDfy 10 से अधिक सेक्टर्स में 500 से ज्यादा एंटरप्राइज क्लाइंट्स को सेवा दे रही है। कंपनी हर साल 500 मिलियन से अधिक वेरिफिकेशन चेक्स करती है।


🌍 सात देशों में मौजूदगी

IDfy का संचालन सात देशों में फैला हुआ है, जिनमें भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य-पूर्व के देश शामिल हैं।

डिजिटल ट्रांजैक्शन्स में तेजी, ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार और रेगुलेटरी नियमों में बदलाव के कारण वैश्विक स्तर पर रेगटेक समाधान की मांग बढ़ी है।


📜 भारत में रेगटेक सेक्टर को मिला बढ़ावा

भारत में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट के लागू होने और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बजट में बढ़ोतरी ने रेगटेक कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं।

डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर सरकार की सख्ती ने कंपनियों को मजबूत पहचान सत्यापन और अनुपालन समाधान अपनाने के लिए प्रेरित किया है।

ऐसे माहौल में IDfy जैसी कंपनियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।


📊 अब तक जुटा चुकी है 120 मिलियन डॉलर से ज्यादा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, IDfy अब तक कुल 120 मिलियन डॉलर से अधिक की फंडिंग जुटा चुकी है।

इससे पहले कंपनी ने 27 मिलियन डॉलर का एक राउंड भी जुटाया था, जिसमें Elev8, KB Investment और Tenacity जैसे निवेशकों ने भाग लिया था।

लगातार मिल रही फंडिंग यह दर्शाती है कि निवेशकों को कंपनी के बिजनेस मॉडल और विकास क्षमता पर भरोसा है।


📈 वित्तीय प्रदर्शन में सुधार

वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में IDfy का परिचालन राजस्व 186 करोड़ रुपये रहा, जो FY24 के 145 करोड़ रुपये से अधिक है।

सबसे अहम बात यह है कि कंपनी ने FY25 में 1.6 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में उसे घाटा हुआ था।

यह बदलाव दर्शाता है कि कंपनी न केवल राजस्व बढ़ा रही है, बल्कि लाभप्रदता की दिशा में भी कदम बढ़ा रही है।


🔍 क्यों बढ़ रही है पहचान सत्यापन की मांग?

डिजिटल बैंकिंग, फिनटेक, ई-कॉमर्स और ऑनलाइन सेवाओं में तेज वृद्धि ने पहचान सत्यापन को बेहद जरूरी बना दिया है।

  • फर्जी अकाउंट्स
  • ऑनलाइन धोखाधड़ी
  • डेटा लीक
  • मनी लॉन्ड्रिंग

जैसी समस्याओं से निपटने के लिए कंपनियां एडवांस्ड टेक्नोलॉजी आधारित समाधान अपना रही हैं।

AI और डेटा एनालिटिक्स के उपयोग से अब पहचान सत्यापन और जोखिम विश्लेषण पहले से अधिक सटीक और तेज हो गया है।


🚀 आगे की रणनीति

नई फंडिंग के साथ IDfy अपने प्लेटफॉर्म को और मजबूत बनाने की योजना बना रही है।

संभावित अधिग्रहणों के जरिए कंपनी नई टेक्नोलॉजी और विशेषज्ञता जोड़ सकती है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार से उसका वैश्विक ग्राहक आधार बढ़ेगा।

रेगुलेटरी जरूरतें लगातार बदल रही हैं, ऐसे में लचीले और स्केलेबल समाधान देने वाली कंपनियों को बड़ा अवसर मिल सकता है।


✨ निष्कर्ष

IDfy द्वारा 476 करोड़ रुपये की ताजा फंडिंग जुटाना इस बात का संकेत है कि डिजिटल ट्रस्ट और रेगटेक सेक्टर में जबरदस्त संभावनाएं मौजूद हैं।

डिजिटल ट्रांजैक्शन्स के बढ़ते दायरे और डेटा सुरक्षा कानूनों की सख्ती ने इस उद्योग को नई दिशा दी है।

मजबूत वित्तीय प्रदर्शन, वैश्विक विस्तार और तकनीकी नवाचार के साथ IDfy आने वाले वर्षों में भारत और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकती है।

डिजिटल दुनिया में भरोसा ही सबसे बड़ी पूंजी है — और IDfy उसी भरोसे को तकनीक के जरिए सुरक्षित बनाने की दिशा में काम कर रही है। 🔐📊

Read more :🍔Subway EverBrands ने जुटाए 15 मिलियन डॉलर,

🍔Subway EverBrands ने जुटाए 15 मिलियन डॉलर,

Subway

भारत में फूड और बेवरेज सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, खासकर शहरी इलाकों में। इसी कड़ी में Subway और Lavazza जैसे अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स का संचालन करने वाली कंपनी EverBrands ने 15 मिलियन डॉलर (लगभग 125 करोड़ रुपये) की नई फंडिंग जुटाई है। इस निवेश का नेतृत्व Playbook Partners ने किया है।

यह पूंजी EverBrands की मल्टी-ब्रांड फूड और बेवरेज रणनीति को मजबूत करने और पूरे भारत में विस्तार को गति देने के लिए इस्तेमाल की जाएगी।


📈 Subway India ने पार किया 1,000 स्टोर्स का आंकड़ा

फंडिंग ऐसे समय में आई है जब Subway India ने 1,000 स्टोर्स का अहम पड़ाव पार कर लिया है। पिछले तीन वर्षों में कंपनी ने औसतन हर सप्ताह लगभग दो नए आउटलेट खोले हैं।

यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारत में क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) सेगमेंट में Subway की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है। मेट्रो शहरों के साथ-साथ टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी इसकी मौजूदगी तेजी से बढ़ी है।

शहरी उपभोक्ताओं में हेल्दी और फास्ट फूड के बढ़ते रुझान ने Subway को बड़ा अवसर दिया है।


☕ Lavazza और अन्य ब्रांड्स का संचालन

EverBrands भारत में Subway का संचालन Culinary Brands India Private Limited के माध्यम से करती है।

इसके अलावा, कंपनी Fresh and Honest Café Private Limited के जरिए:

  • Lavazza कॉफी
  • F&H Coffee
  • Dilmah Tea (डिस्ट्रीब्यूशन)

का प्रबंधन करती है।

इस तरह EverBrands ने खुद को एक मल्टी-ब्रांड फूड और बेवरेज प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित किया है, जो क्विक सर्विस रेस्टोरेंट और कैफे दोनों फॉर्मेट में काम करता है।


🏙️ शहरी उपभोक्ताओं पर फोकस

EverBrands का मुख्य लक्ष्य शहरी उपभोक्ता हैं। आज के युवा और कामकाजी वर्ग के बीच कैफे कल्चर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

ऑफिस जाने वाले प्रोफेशनल्स, कॉलेज स्टूडेंट्स और मिलेनियल्स अब केवल खाने के लिए नहीं, बल्कि सोशलाइजिंग और मीटिंग्स के लिए भी कैफे और QSR आउटलेट्स को प्राथमिकता देते हैं।

ऐसे में मल्टी-ब्रांड रणनीति कंपनी को अलग-अलग ग्राहक वर्गों तक पहुंचने का अवसर देती है।


💼 Playbook Partners का निवेश

इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Playbook Partners ने किया है। यह निवेश फर्म टेक्नोलॉजी-सक्षम विकास (technology-enabled growth) का लाभ उठाने वाली मिड-मार्केट कंपनियों में निवेश करती है।

Playbook Partners की स्थापना पूर्व Reliance Jio कार्यकारी विकास चौधरी ने की थी।

फर्म ने 250 मिलियन डॉलर के अपने फंड के पहले क्लोज के बाद भारत में यह तीसरा निवेश किया है।

Playbook Partners का फोकस उन कंपनियों पर है जिनमें तेजी से विस्तार करने की क्षमता हो और जो स्केलेबल बिजनेस मॉडल के साथ काम करती हों। EverBrands इस रणनीति में पूरी तरह फिट बैठती है क्योंकि यह पहले से ही मजबूत ब्रांड्स के साथ काम कर रही है और विस्तार की स्पष्ट योजना रखती है।


🚀 फंडिंग का उपयोग कैसे होगा?

EverBrands इस नई पूंजी का उपयोग निम्नलिखित क्षेत्रों में करेगी:

  1. नए स्टोर्स खोलने के लिए
  2. सप्लाई चेन और ऑपरेशंस को मजबूत करने के लिए
  3. टेक्नोलॉजी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में निवेश के लिए
  4. ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाने के लिए

भारत में फूड डिलीवरी और ऑनलाइन ऑर्डरिंग का चलन तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन कंपनी की ग्रोथ को और तेज कर सकता है।


🍽️ भारत का बढ़ता QSR और कैफे बाजार

भारत में QSR और कैफे सेगमेंट लगातार विस्तार कर रहा है। बढ़ती आय, बदलती जीवनशैली और युवा आबादी इस वृद्धि के प्रमुख कारक हैं।

अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स भारत को एक बड़े विकास बाजार के रूप में देख रहे हैं। Subway और Lavazza जैसे ब्रांड्स की बढ़ती मौजूदगी इस बात का संकेत है कि भारत वैश्विक फूड चेन के लिए एक महत्वपूर्ण गंतव्य बन चुका है।


🔎 मल्टी-ब्रांड रणनीति क्यों महत्वपूर्ण?

एक ही ब्रांड पर निर्भर रहने के बजाय मल्टी-ब्रांड पोर्टफोलियो कंपनी को जोखिम कम करने में मदद करता है।

यदि किसी एक सेगमेंट में मांग कम होती है, तो दूसरा ब्रांड उस कमी को संतुलित कर सकता है।

उदाहरण के लिए:

  • Subway QSR सेगमेंट में मजबूत है।
  • Lavazza प्रीमियम कॉफी अनुभव प्रदान करता है।
  • Dilmah Tea पारंपरिक चाय बाजार में अपनी जगह रखता है।

इस विविधता से कंपनी को व्यापक ग्राहक आधार मिलता है।


📊 आगे की संभावनाएं

Subway के 1,000 स्टोर्स का आंकड़ा पार करने के बाद कंपनी अब और तेज विस्तार की योजना बना सकती है।

भारत में छोटे शहरों और उभरते बाजारों में अभी भी बड़े अवसर मौजूद हैं। साथ ही एयरपोर्ट, मॉल और कॉर्पोरेट पार्क जैसे हाई-फुटफॉल क्षेत्रों में भी विस्तार की संभावनाएं हैं।

Playbook Partners का निवेश EverBrands को पूंजी के साथ-साथ रणनीतिक मार्गदर्शन भी प्रदान करेगा।


✨ निष्कर्ष

EverBrands द्वारा 15 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाना इस बात का संकेत है कि भारत का फूड और बेवरेज सेक्टर निवेशकों के लिए आकर्षक बना हुआ है।

Subway के 1,000 स्टोर माइलस्टोन और Lavazza जैसे प्रीमियम ब्रांड्स की मौजूदगी कंपनी की मजबूत स्थिति को दर्शाती है।

आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि EverBrands अपनी मल्टी-ब्रांड रणनीति और टेक्नोलॉजी-आधारित विस्तार के जरिए भारतीय बाजार में कितनी तेजी से अपनी पकड़ मजबूत करती है। 🍕☕

Read more :🚕 Uber India Systems Pvt Ltd की आय में बड़ी गिरावट,

🚕 Uber India Systems Pvt Ltd की आय में बड़ी गिरावट,

Uber

भारत में राइड-हेलिंग सेवाएं देने वाली कंपनी Uber की भारतीय इकाई Uber India Systems Pvt Ltd के ताज़ा वित्तीय नतीजों ने चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है। वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में कंपनी की राइड-हेलिंग से होने वाली शुद्ध आय (नेट रेवेन्यू) में भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि कुल कमीशन आय (ग्रॉस रेवेन्यू) लगभग स्थिर रही।

कंपनी के 31 मार्च 2025 को समाप्त वित्त वर्ष के समेकित वित्तीय विवरणों के अनुसार, राइड-हेलिंग से शुद्ध राजस्व FY24 के 807 करोड़ रुपये से गिरकर FY25 में केवल 88 करोड़ रुपये रह गया। यानी 89% की बड़ी गिरावट 📊।


💰 ग्रॉस रेवेन्यू स्थिर, फिर भी नेट रेवेन्यू क्यों गिरा?

दिलचस्प बात यह है कि राइड्स से मिलने वाला कुल कमीशन (ग्रॉस रेवेन्यू) FY25 में 2,604 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष के लगभग बराबर है।

तो फिर सवाल उठता है — जब कुल कमीशन आय स्थिर रही, तो शुद्ध आय इतनी तेजी से क्यों गिर गई? 🤔

इसका मुख्य कारण है — ड्राइवर इंसेंटिव और भारी छूट (डिस्काउंट) 🎁

FY25 में Uber ने इंसेंटिव और डिस्काउंट पर अपना खर्च 33% बढ़ाकर 2,516 करोड़ रुपये कर दिया। कंपनी की लेखा नीति के अनुसार ड्राइवरों को दिए जाने वाले इंसेंटिव को कुल आय से घटा दिया जाता है।

यानी जितना ज्यादा इंसेंटिव, उतनी कम दिखने वाली शुद्ध आय। यही वजह है कि ग्रॉस रेवेन्यू स्थिर रहने के बावजूद नेट रेवेन्यू लगभग खत्म हो गया।


⚔️ प्रतिस्पर्धा का असर: Rapido की चुनौती

भारतीय राइड-हेलिंग बाजार में प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है। FY25 में Rapido ने जीरो-कमीशन और फ्लैट सब्सक्रिप्शन मॉडल अपनाया, जिससे बाजार में नया दबाव बना।

हालांकि दोनों कंपनियों के आंकड़ों की सीधी तुलना नहीं की जा सकती, फिर भी Rapido ने FY25 में अपना शुद्ध घाटा 30.5% घटाकर 258 करोड़ रुपये कर लिया 📉।

इसके विपरीत, Uber India को FY25 में 1,512 करोड़ रुपये का समेकित घाटा हुआ, जो FY24 के 89 करोड़ रुपये की तुलना में कई गुना अधिक है।

राइड-हेलिंग से जुड़े घाटे की बात करें तो यह FY24 के 330 करोड़ रुपये से बढ़कर FY25 में 1,407 करोड़ रुपये तक पहुंच गया — यानी चार गुना से ज्यादा वृद्धि 🚨।


📊 कुल परिचालन आय में हल्की बढ़त

राइड-हेलिंग से शुद्ध आय घटने के बावजूद Uber India की कुल परिचालन आय में 2.3% की मामूली बढ़ोतरी हुई।

FY25 में कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू 3,849 करोड़ रुपये रहा, जो FY24 में 3,762 करोड़ रुपये था।

इस बढ़त का मुख्य स्रोत राइड-हेलिंग नहीं, बल्कि सपोर्ट सर्विसेज रहा 🏢। कंपनी ने अपनी मूल कंपनी और समूह इकाइयों को दी जाने वाली सेवाओं से 3,664 करोड़ रुपये कमाए, जो पिछले वर्ष के 2,936 करोड़ रुपये से काफी अधिक है।

इसके अलावा, कंपनी ने शिफ्ट ट्रांसपोर्टेशन सेवाओं से 79 करोड़ रुपये की आय भी अर्जित की 🚐।


📉 बाजार की बदलती तस्वीर

पिछले दो वर्षों में भारतीय राइड-हेलिंग बाजार में बड़ा बदलाव आया है।

  • Rapido राइड्स की संख्या के आधार पर अग्रणी खिलाड़ी बनकर उभरा है।
  • Uber दूसरे स्थान पर है।
  • Ola तीसरे स्थान पर पहुंच गया है और उसकी बाजार हिस्सेदारी घट रही है।

डेटा एनालिटिक्स फर्म SensorTower के अनुसार मासिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं और डाउनलोड के मामले में Rapido की वृद्धि अधिक तेज रही है 📲।


🧾 लेखांकन नीति और असर

Uber की लेखा नीति के अनुसार ड्राइवरों को दिए गए इंसेंटिव को ऑपरेशनल रेवेन्यू से घटाया जाता है।

सरल शब्दों में कहें तो — कंपनी जितना अधिक इंसेंटिव और छूट देती है, उतनी ही कम उसकी टॉपलाइन दिखाई देती है।

इस नीति ने FY25 में मोबिलिटी बिजनेस की आय को काफी हद तक कम कर दिया।


🏛️ आगे की चुनौतियां

सरकार समर्थित ‘भारत टैक्सी’ जैसे संभावित प्लेटफॉर्म की चर्चा भी हो रही है। अगर यह ऐप सफल होता है, तो मौजूदा एग्रीगेटर्स के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि राइड-हेलिंग बिजनेस का मॉडल अब दबाव में है:

  • बढ़ती प्रतिस्पर्धा
  • इंसेंटिव पर निर्भरता
  • सब्सक्रिप्शन मॉडल की ओर झुकाव
  • कम मार्जिन और स्थिर लागत

इन सब कारणों से यह व्यवसाय बेहद संवेदनशील बन गया है ⚖️।


🔍 क्या आगे सुधार संभव है?

Uber का कहना है कि भारत उसके लिए प्रमुख विकास बाजार बना हुआ है और प्लेटफॉर्म पर राइडर मांग मजबूत है।

लेकिन लगातार बढ़ते घाटे और इंसेंटिव आधारित रणनीति को देखते हुए यह सवाल उठता है कि क्या यह मॉडल लंबे समय तक टिकाऊ रहेगा?

कई विश्लेषकों का मानना है कि ये कंपनियां डॉलर में खर्च करती हैं और रुपये में कमाई करती हैं 💵➡️💸 — और यही असंतुलन उनकी वित्तीय सेहत पर भारी पड़ रहा है।

अब देखना यह है कि आने वाले वर्षों में Uber भारत में अपने मॉडल को कैसे ढालती है और क्या वह घाटे से निकलकर मुनाफे की राह पकड़ पाती है या नहीं। 🚀

Read more :🌿 Honasa Consumer का Q3 FY26 में दमदार प्रदर्शन,

🌿 Honasa Consumer का Q3 FY26 में दमदार प्रदर्शन,

Honasa Consumer

पर्सनल केयर ब्रांड MamaEarth की पैरेंट कंपनी Honasa Consumer Limited ने गुरुवार को चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के नतीजे घोषित किए। गुरुग्राम स्थित इस कंपनी ने मजबूत वित्तीय प्रदर्शन करते हुए 16.2% सालाना वृद्धि (YoY Growth) दर्ज की, जबकि कंपनी का शुद्ध मुनाफा (PAT) लगभग दोगुना होकर 93% बढ़ गया।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) से प्राप्त वित्तीय विवरण के अनुसार, Q3 FY26 में कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू बढ़कर ₹602 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही (Q3 FY25) में ₹518 करोड़ था। यह वृद्धि दर्शाती है कि कंपनी ने प्रतिस्पर्धी ब्यूटी और पर्सनल केयर बाजार में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी है।


📊 नौ महीनों में 13% से अधिक की ग्रोथ

अगर अप्रैल से दिसंबर 2025 तक की नौ महीने की अवधि को देखें, तो Honasa Consumer का कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹1,735 करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹1,533 करोड़ था। यानी सालाना आधार पर 13.2% की वृद्धि दर्ज की गई।

हालांकि कंपनी ने पिछली तिमाही के लिए अलग-अलग ब्रांड्स या चैनलों का रेवेन्यू ब्रेकअप साझा नहीं किया, लेकिन कुल प्रदर्शन से स्पष्ट है कि डिजिटल और ऑफलाइन दोनों चैनलों में मांग मजबूत बनी हुई है।


💰 अन्य आय से कुल राजस्व ₹622 करोड़

ऑपरेशनल रेवेन्यू के अलावा कंपनी को ₹21 करोड़ की नॉन-ऑपरेटिंग इनकम भी प्राप्त हुई।

इससे Q3 FY26 में कंपनी की कुल आय बढ़कर ₹622 करोड़ हो गई।


💸 खर्चों में बढ़ोतरी, लेकिन नियंत्रण बना रहा

एक D2C (Direct-to-Consumer) ब्रांड होने के कारण Honasa के लिए प्रोडक्ट प्रोक्योरमेंट यानी उत्पाद खरीद लागत एक बड़ा खर्च है।

🏷️ प्रोक्योरमेंट कॉस्ट

  • कुल खर्च का 34% हिस्सा
  • Q3 FY26 में ₹189 करोड़
  • Q3 FY25 में ₹158 करोड़
  • यानी 19.6% की वृद्धि

कच्चे माल और मैन्युफैक्चरिंग लागत में बढ़ोतरी के बावजूद कंपनी ने मार्जिन संतुलित रखने की कोशिश की है।

👩‍💼 कर्मचारी खर्च

  • Q3 FY26 में ₹71 करोड़
  • Q3 FY25 में ₹60 करोड़
  • यानी 18% की वृद्धि

यह वृद्धि कंपनी के विस्तार, नए हायरिंग और ब्रांड स्केलिंग से जुड़ी मानी जा सकती है।

📢 मार्केटिंग और अन्य ओवरहेड

मार्केटिंग, कानूनी खर्च, किराया और अन्य ओवरहेड्स को मिलाकर कुल खर्च Q3 FY26 में बढ़कर ₹550 करोड़ हो गया, जो पिछले साल इसी तिमाही में ₹507 करोड़ था।

यानी कुल खर्च में 8.5% की वृद्धि दर्ज की गई।


📈 मुनाफा लगभग दोगुना

Honasa Consumer के लिए सबसे सकारात्मक संकेत उसका बढ़ता मुनाफा है।

  • Q3 FY26 में शुद्ध लाभ (PAT) ₹50 करोड़
  • Q3 FY25 में ₹26 करोड़
  • यानी लगभग 93% की वृद्धि

तिमाही-दर-तिमाही आधार पर भी कंपनी ने बेहतर प्रदर्शन किया:

  • Q2 FY25 में मुनाफा ₹39 करोड़
  • Q3 FY26 में बढ़कर ₹50 करोड़
  • यानी 28% की बढ़ोतरी

यह दिखाता है कि कंपनी न केवल रेवेन्यू बढ़ा रही है बल्कि लागत प्रबंधन और मार्जिन सुधार पर भी ध्यान दे रही है।


🧔 मेंस ग्रूमिंग मार्केट में एंट्री

Q3 FY26 के दौरान कंपनी ने एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम उठाया। Honasa ने South India-केंद्रित Reginald Men ब्रांड (जो BTM Ventures Pvt Ltd के स्वामित्व में है) में 95% हिस्सेदारी ₹195 करोड़ में अधिग्रहित की

यह अधिग्रहण सेकेंडरी ट्रांजैक्शन के जरिए किया गया।

इस कदम के साथ Honasa ने तेजी से बढ़ते मेंस ग्रूमिंग मार्केट में औपचारिक रूप से प्रवेश कर लिया है। भारत में पुरुषों के लिए ग्रूमिंग और पर्सनल केयर उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है, और कंपनी इस अवसर का लाभ उठाना चाहती है।


👨‍💼 प्रमोटर की हिस्सेदारी बढ़ी

तिमाही के दौरान कंपनी के को-फाउंडर और प्रमोटर वरुण आलघ ने भी कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई।

उन्होंने ₹50 करोड़ के ब्लॉक डील के जरिए अपनी इक्विटी हिस्सेदारी बढ़ाकर 32.45% कर ली।

यह कदम निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है, क्योंकि प्रमोटर का बढ़ता विश्वास कंपनी के भविष्य पर भरोसा दर्शाता है।


📉 शेयर बाजार में स्थिति

आज के ट्रेडिंग सत्र के अंत में Honasa Consumer (MamaEarth की पैरेंट कंपनी) का शेयर ₹298 पर ट्रेड कर रहा था।

इस कीमत पर कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹9,725 करोड़ (लगभग $1.1 बिलियन) है।


🌿 ब्रांड पोर्टफोलियो और रणनीति

Honasa Consumer केवल MamaEarth तक सीमित नहीं है। कंपनी के पोर्टफोलियो में कई डिजिटल-फर्स्ट ब्रांड शामिल हैं, जो स्किनकेयर, हेयरकेयर, बेबी केयर और अब मेंस ग्रूमिंग जैसे सेगमेंट्स में सक्रिय हैं।

कंपनी की रणनीति मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर आधारित है:

  • डिजिटल और ओम्नी-चैनल विस्तार
  • नए उत्पाद लॉन्च
  • अधिग्रहण के जरिए नए सेगमेंट में प्रवेश
  • ब्रांड बिल्डिंग और मार्केटिंग

⚖️ चुनौतियां और आगे की राह

हालांकि कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा है, लेकिन ब्यूटी और पर्सनल केयर इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा बेहद तीव्र है।

  • नए D2C ब्रांड्स का प्रवेश
  • बड़ी FMCG कंपनियों की मौजूदगी
  • बढ़ती मार्केटिंग लागत
  • कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव

इन सभी कारकों के बीच मार्जिन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।


🔮 निष्कर्ष

Q3 FY26 Honasa Consumer के लिए सकारात्मक तिमाही साबित हुई है।

  • 16% से अधिक रेवेन्यू ग्रोथ
  • 93% मुनाफे में वृद्धि
  • मेंस ग्रूमिंग सेगमेंट में एंट्री
  • प्रमोटर की बढ़ती हिस्सेदारी

ये सभी संकेत बताते हैं कि कंपनी विस्तार और प्रॉफिटेबिलिटी के संतुलन पर काम कर रही है।

आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी नए अधिग्रहणों को कितनी प्रभावी तरीके से एकीकृत करती है और क्या वह अपनी ग्रोथ रफ्तार को बरकरार रख पाती है या नहीं।

Read more :🚚 Shadowfax Q3 FY26 Results रेवेन्यू 65% बढ़ा,

🚚 Shadowfax Q3 FY26 Results रेवेन्यू 65% बढ़ा,

Shadowfax

लॉजिस्टिक्स और लास्ट-माइल डिलीवरी कंपनी Shadowfax Technologies ने भारतीय शेयर बाजारों में लिस्टिंग के बाद Q3 FY26 के अपने वित्तीय नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी ने तीसरी तिमाही में मजबूत प्रदर्शन करते हुए 65% सालाना रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की, जबकि मुनाफा बढ़कर ₹35 करोड़ रहा। यह तिमाही कंपनी के लिए खास इसलिए भी है क्योंकि पिछले क्वार्टर में ही उसने IPO के जरिए शेयर बाजार में कदम रखा था।

NSE से प्राप्त वित्तीय विवरण के अनुसार, Q3 FY26 में कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू बढ़कर ₹1,159 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही (Q3 FY25) में ₹701 करोड़ था। यह तेज़ वृद्धि दर्शाती है कि ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स सेगमेंट में डिलीवरी की मांग लगातार बढ़ रही है।


📦 किस क्षेत्र में काम करती है Shadowfax?

Shadowfax लास्ट-माइल और हाइपरलोकल लॉजिस्टिक्स सेगमेंट में काम करती है। कंपनी:

  • ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस
  • D2C (डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर) ब्रांड्स
  • क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म

को डिलीवरी सेवाएं प्रदान करती है।

इस क्षेत्र में कंपनी का मुकाबला Delhivery, XpressBees, Ecom Express और Ekart जैसे बड़े खिलाड़ियों से है। यह सेगमेंट कड़ी प्रतिस्पर्धा और कम मार्जिन के लिए जाना जाता है, जहां ऑपरेशनल दक्षता ही सफलता की कुंजी होती है।


💰 कुल आय ₹1,166 करोड़

ऑपरेटिंग रेवेन्यू के अलावा कंपनी को Q3 FY26 में ₹7 करोड़ की अन्य आय (Other Income) भी प्राप्त हुई।

इससे तिमाही की कुल आय बढ़कर ₹1,166 करोड़ हो गई।

अगर नौ महीनों (अप्रैल–दिसंबर 2025) की बात करें, तो कंपनी का कुल रेवेन्यू बढ़कर ₹2,965 करोड़ हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹1,772 करोड़ था। यानी 9 महीने की अवधि में 67% की वृद्धि दर्ज की गई।


💸 खर्चों में भी तेज़ बढ़ोतरी

हालांकि कंपनी ने विस्तृत खर्च का पूरा ब्योरा साझा नहीं किया, लेकिन कुछ प्रमुख आंकड़े सामने आए हैं।

  • कुल खर्च Q3 FY26 में बढ़कर ₹1,131 करोड़ हो गया
  • Q3 FY25 में यह ₹700 करोड़ था
  • यानी कुल खर्च में 62% की वृद्धि

📊 फाइनेंस कॉस्ट में उछाल

  • फाइनेंस कॉस्ट बढ़कर ₹109 करोड़ हो गई
  • पिछले साल यह ₹66 करोड़ थी
  • यानी 65% की वृद्धि

इसके अलावा:

  • डिप्रिसिएशन कॉस्ट ₹32 करोड़
  • अन्य संबंधित खर्च ₹6 करोड़

तेजी से विस्तार और IPO के बाद पूंजी संरचना में बदलाव के कारण फाइनेंस कॉस्ट में वृद्धि देखी जा रही है।


📈 मुनाफे में 5 गुना उछाल

Shadowfax का सबसे बड़ा आकर्षण उसका मुनाफा रहा।

  • Q3 FY26 में कंपनी का शुद्ध लाभ ₹35 करोड़ रहा
  • Q3 FY25 में यह सिर्फ ₹7 करोड़ था

यानी मुनाफा 5 गुना (5X) बढ़ गया।

तिमाही-दर-तिमाही आधार पर भी कंपनी ने मजबूत सुधार दिखाया:

  • Q2 FY26 में मुनाफा ₹13 करोड़ था
  • Q3 FY26 में बढ़कर ₹35 करोड़ हो गया
  • यानी लगभग 2.7 गुना वृद्धि

यह संकेत देता है कि कंपनी ने अपने ऑपरेशनल मार्जिन और लागत प्रबंधन में सुधार किया है।


🏦 IPO और शेयर बाजार प्रदर्शन

Shadowfax ने जनवरी 20–22 के बीच IPO लॉन्च किया था, जिसके जरिए कंपनी ने ₹1,907 करोड़ जुटाए।

हालांकि लिस्टिंग के दिन कंपनी के शेयर ₹112–113 पर खुले, जो IPO के ऊपरी प्राइस बैंड ₹124 से लगभग 9% कम थे।

लेकिन बाद में शेयर ने रिकवरी दिखाई।

आज के ट्रेडिंग सेशन के अंत में Shadowfax का शेयर ₹125 पर बंद हुआ।

इस कीमत पर कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹6,249 करोड़ (लगभग $796 मिलियन) है।


🌍 ई-कॉमर्स बूम का फायदा

भारत में ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स और D2C ब्रांड्स की तेजी से बढ़ती मांग ने लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए बड़े अवसर पैदा किए हैं।

  • 10–15 मिनट डिलीवरी मॉडल
  • छोटे शहरों में ई-कॉमर्स का विस्तार
  • डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन शॉपिंग की बढ़ती आदत

इन सभी ट्रेंड्स ने Shadowfax जैसी कंपनियों को तेजी से स्केल करने में मदद की है।


⚖️ चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि ग्रोथ मजबूत है, लेकिन लॉजिस्टिक्स सेक्टर में कई चुनौतियां हैं:

  • कम मार्जिन
  • बढ़ती फ्यूल लागत
  • उच्च प्रतिस्पर्धा
  • तेज़ डिलीवरी के दबाव

कंपनी के लिए आगे की राह में सबसे बड़ी चुनौती होगी:

  • लागत पर नियंत्रण
  • फाइनेंस कॉस्ट कम करना
  • टेक्नोलॉजी और नेटवर्क को कुशल बनाना

अगर कंपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी बनाए रखती है, तो वह मुनाफे में और सुधार कर सकती है।


🔮 आगे की संभावनाएं

IPO के बाद Shadowfax के पास विस्तार के लिए पूंजी उपलब्ध है। कंपनी:

  • नए शहरों में विस्तार
  • टेक्नोलॉजी अपग्रेड
  • वेयरहाउसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने

पर फोकस कर सकती है।

ई-कॉमर्स सेक्टर के लगातार बढ़ने से कंपनी के लिए दीर्घकालिक संभावनाएं सकारात्मक दिखाई देती हैं।


📌 निष्कर्ष

Q3 FY26 Shadowfax के लिए एक मजबूत तिमाही साबित हुई है।

  • 65% रेवेन्यू ग्रोथ
  • 5 गुना मुनाफा वृद्धि
  • IPO के बाद स्थिर बाजार प्रदर्शन

हालांकि खर्चों में वृद्धि और प्रतिस्पर्धा बड़ी चुनौती हैं, लेकिन कंपनी ने यह संकेत दिया है कि वह ग्रोथ के साथ प्रॉफिटेबिलिटी का संतुलन बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

आने वाली तिमाहियों में यह देखना दिलचस्प होगा कि Shadowfax किस तरह अपने मार्जिन को और मजबूत करती है और तेजी से बदलते लॉजिस्टिक्स बाजार में अपनी स्थिति को सुदृढ़ बनाती है।

Read more :🌱 UKHI ने जुटाए ₹10.5 करोड़,

🌱 UKHI ने जुटाए ₹10.5 करोड़,

UKHI

भारत में सस्टेनेबल और पर्यावरण-अनुकूल सामग्री विकसित करने वाली IP-आधारित बायोपॉलिमर कंपनी UKHI ने सीड फंडिंग राउंड में ₹10.5 करोड़ जुटाए हैं। इस निवेश राउंड का नेतृत्व Venture Catalysts ने किया, जबकि इसमें 100 Unicorns, 888 VC और कंपनी के रणनीतिक औद्योगिक साझेदार DCG Pack ने भी भागीदारी की।

कंपनी ने प्रेस रिलीज में बताया कि जुटाई गई पूंजी का उपयोग उसके प्रमुख उत्पाद EcoGran के उत्पादन को बढ़ाने, फॉर्मुलेशन और प्रोसेस से जुड़ी बौद्धिक संपदा (IP) को मजबूत करने और पैकेजिंग वैल्यू चेन में साझेदारियों को गहरा करने के लिए किया जाएगा।


🏭 2019 में हुई स्थापना, लक्ष्य—सर्कुलर इकोनॉमी

UKHI की स्थापना 2019 में विशाल विवेक, प्रियंका चौहान और संदीप कुमार त्यागी ने मिलकर की थी। यह एक बायोमैटेरियल स्टार्टअप है, जो पारंपरिक प्लास्टिक के स्थान पर सस्टेनेबल और कम्पोस्टेबल विकल्प विकसित करने पर काम कर रही है।

कंपनी का उद्देश्य एक सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy) की दिशा में बदलाव को तेज करना है। इसके लिए UKHI कृषि अवशेष (Agricultural Residues) और लिग्नोसेलुलोसिक बायोमास (Lignocellulosic Biomass) का उपयोग कर उच्च-प्रदर्शन वाले बायो-आधारित पैकेजिंग मैटेरियल तैयार करती है।


🧪 पेटेंट-पेंडिंग टेक्नोलॉजी

UKHI का दावा है कि उसकी तकनीक पेटेंट-पेंडिंग है और इसे बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए डिजाइन किया गया है।

इस टेक्नोलॉजी की खासियतें हैं:

  • स्केलेबल (बड़े स्तर पर उत्पादन योग्य)
  • लागत-प्रभावी
  • पर्यावरण के अनुकूल
  • पारंपरिक प्लास्टिक जितनी मजबूत और कार्यक्षम

कंपनी का कहना है कि उसकी बायोपॉलिमर सामग्री ब्रांड्स को पेट्रोलियम-आधारित प्लास्टिक पर निर्भरता कम करने में मदद करती है, बिना गुणवत्ता या मजबूती से समझौता किए।


🚀 छह महीनों में व्यावसायिक सफलता

UKHI के अनुसार, पिछले छह महीनों में उसने:

  • एक व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य (Commercially Viable) बायोपॉलिमर प्लेटफॉर्म तैयार किया
  • अपनी खुद की मटेरियल इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी विकसित की
  • भारत के पैकेजिंग इकोसिस्टम में बाजार अपनापन (Market Adoption) शुरू किया

कंपनी ऐसे बायोडिग्रेडेबल और कम्पोस्टेबल मैटेरियल पर काम कर रही है, जो पारंपरिक प्लास्टिक का विकल्प बन सके और मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ भी संगत रहे।

यह महत्वपूर्ण है क्योंकि नई तकनीक अपनाने में अक्सर कंपनियों को मशीनरी बदलनी पड़ती है, जिससे लागत बढ़ जाती है। UKHI का समाधान इस चुनौती को कम करने की दिशा में काम करता है।


📦 EcoGran: कंपनी का प्रमुख उत्पाद

UKHI का फ्लैगशिप प्रोडक्ट लाइन EcoGran है।

EcoGran एक उच्च-प्रदर्शन बायोपॉलिमर है, जिसे पैकेजिंग उद्योग में पारंपरिक प्लास्टिक के स्थान पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

जुटाए गए ₹10.5 करोड़ में से बड़ी राशि EcoGran के उत्पादन को स्केल करने में खर्च की जाएगी, ताकि बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।


📊 शुरुआती ग्राहकों से मजबूत प्रतिक्रिया

कंपनी ने दावा किया है कि उसने कुछ ही महीनों में व्यावसायिक राजस्व हासिल कर लिया है।

  • शुरुआती एंकर क्लाइंट्स के साथ काम शुरू किया
  • अब तक दो लाख किलोग्राम से अधिक बायोपॉलिमर सामग्री बेची
  • ग्राहक पायलट प्रोजेक्ट्स में 90% से अधिक ट्रायल-टू-कमर्शियल कन्वर्जन दर्ज किया

यह आंकड़े बताते हैं कि कंपनी का उत्पाद बाजार की जरूरतों के अनुरूप है और ग्राहकों के बीच इसकी स्वीकार्यता बढ़ रही है।


🌍 अगले 12 महीनों की योजना

UKHI का लक्ष्य अगले 12 महीनों में:

  • 24 लाख किलोग्राम सिंगल-यूज प्लास्टिक को रिप्लेस करना
  • उत्पादन क्षमता का विस्तार करना
  • पैकेजिंग वैल्यू चेन में मजबूत साझेदारियां बनाना

अगर कंपनी अपने इस लक्ष्य को हासिल कर लेती है, तो यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।


♻️ क्यों महत्वपूर्ण है बायोपॉलिमर?

भारत समेत पूरी दुनिया में सिंगल-यूज प्लास्टिक एक बड़ी पर्यावरणीय समस्या बन चुका है।

  • प्लास्टिक कचरा समुद्रों और भूमि को प्रदूषित कर रहा है
  • रिसाइक्लिंग की सीमाएं हैं
  • पारंपरिक प्लास्टिक को नष्ट होने में सैकड़ों साल लगते हैं

ऐसे में बायोपॉलिमर और कम्पोस्टेबल मैटेरियल भविष्य का समाधान माने जा रहे हैं।

सरकारें भी प्लास्टिक पर प्रतिबंध और सस्टेनेबल विकल्पों को बढ़ावा दे रही हैं, जिससे इस क्षेत्र में स्टार्टअप्स के लिए अवसर बढ़ रहे हैं।


💰 निवेशकों का भरोसा

Venture Catalysts, 100 Unicorns, 888 VC और DCG Pack जैसे निवेशकों की भागीदारी यह दिखाती है कि बाजार को UKHI की तकनीक और विजन पर भरोसा है।

DCG Pack का रणनीतिक औद्योगिक साझेदार के रूप में जुड़ना कंपनी के लिए अतिरिक्त मजबूती प्रदान करता है, क्योंकि इससे इंडस्ट्रियल स्केल और सप्लाई चेन सपोर्ट मिल सकता है।


🔮 आगे की संभावनाएं

अगर UKHI अपनी तकनीक को बड़े पैमाने पर लागू करने में सफल होती है, तो वह भारत के पैकेजिंग उद्योग में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।

  • FMCG कंपनियां
  • ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म
  • फूड डिलीवरी कंपनियां

सभी सस्टेनेबल पैकेजिंग की तलाश में हैं। UKHI के समाधान इस मांग को पूरा कर सकते हैं।


📌 निष्कर्ष

UKHI का ₹10.5 करोड़ का सीड फंडिंग राउंड न सिर्फ एक स्टार्टअप की फंडिंग खबर है, बल्कि यह भारत में सस्टेनेबल इनोवेशन की बढ़ती दिशा का संकेत भी है।

EcoGran जैसे उत्पाद और पेटेंट-पेंडिंग टेक्नोलॉजी के साथ UKHI प्लास्टिक के पर्यावरण-अनुकूल विकल्प प्रदान करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

अगर कंपनी अपने उत्पादन और बाजार विस्तार की योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करती है, तो आने वाले वर्षों में यह भारत के बायोमैटेरियल सेक्टर में एक प्रमुख नाम बन सकती है।

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💊 USV ने Wellbeing Nutrition में 79% हिस्सेदारी खरीदी,

Wellbeing Nutrition

भारतीय फार्मास्यूटिकल कंपनी USV ने भारत के तेजी से बढ़ते डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) न्यूट्रास्यूटिकल और वेलनेस बाजार में प्रवेश करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने Nutritionalab Private Limited, जो कि Wellbeing Nutrition की पैरेंट कंपनी है, में 79% हिस्सेदारी खरीदने के लिए एक निर्णायक समझौते (Definitive Agreement) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस सौदे में Wellbeing Nutrition का कुल मूल्यांकन लगभग ₹1,583 करोड़ आंका गया है। यह अधिग्रहण भारतीय हेल्थ और वेलनेस सेक्टर में तेजी से हो रहे कंसोलिडेशन का एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।


🌿 क्या है Wellbeing Nutrition?

साल 2019 में स्थापित Wellbeing Nutrition एक न्यूट्रास्यूटिकल ब्रांड है, जो स्वास्थ्य सप्लीमेंट्स और वेलनेस प्रोडक्ट्स बनाती और बेचती है।

कंपनी के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में शामिल हैं:

  • विटामिन और मिनरल्स
  • प्रोटीन सप्लीमेंट
  • कोलेजन
  • ओमेगा सप्लीमेंट
  • अन्य हेल्थ और वेलनेस उत्पाद

ब्रांड अपने उत्पादों की बिक्री:

  • अपनी खुद की डिजिटल वेबसाइट के माध्यम से
  • ऑनलाइन मार्केटप्लेस (जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म)
  • ऑफलाइन रिटेल चैनल

के जरिए करता है।

कंपनी की मौजूदगी भारत के अलावा अमेरिका (US), यूनाइटेड किंगडम (UK) और UAE जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी है।


📊 वित्तीय प्रदर्शन और ग्रोथ प्लान

FY25 में Wellbeing Nutrition ने लगभग ₹170 करोड़ का राजस्व दर्ज किया। हालांकि, इसी अवधि में कंपनी को लगभग ₹30 करोड़ का घाटा हुआ।

कंपनी का दावा है कि पिछले दो वर्षों में उसने 120% की ग्रोथ दर्ज की है।

अब उसका लक्ष्य है कि FY27 तक वह ₹450 करोड़ से अधिक का राजस्व हासिल करे।

यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य दर्शाता है कि ब्रांड आने वाले वर्षों में आक्रामक विस्तार की योजना बना रहा है।


💰 निवेशकों को बड़ा रिटर्न

स्टार्टअप डेटा प्लेटफॉर्म TheKredible के अनुसार, Wellbeing Nutrition ने अब तक करीब $14 मिलियन (लगभग ₹115 करोड़) की फंडिंग जुटाई है।

दिसंबर 2022 में कंपनी ने $10 मिलियन की Series B फंडिंग हासिल की थी, जिसका नेतृत्व Fireside Ventures और Hindustan Unilever (HUL) ने किया था।

इस अधिग्रहण के तहत मौजूदा निवेशक आंशिक या पूर्ण रूप से बाहर निकलेंगे।

  • HUL अपनी पूरी 19.8% हिस्सेदारी USV को लगभग ₹307 करोड़ में बेचेगा।
  • HUL ने Wellbeing Nutrition में करीब ₹70 करोड़ निवेश किया था।
  • इस एग्जिट से HUL को अपने निवेश पर चार गुना से अधिक रिटर्न मिला है।

Fireside Ventures और अन्य शुरुआती निवेशक भी अपनी हिस्सेदारी घटाएंगे।


🏥 USV की रणनीति: प्रिस्क्रिप्शन से प्रिवेंटिव हेल्थ की ओर

USV भारतीय फार्मा बाजार में पिछले 60 वर्षों से सक्रिय है। कंपनी ओरल एंटी-डायबिटिक और कार्डियोवैस्कुलर थेरेपी में अग्रणी है।

इसके प्रमुख ब्रांड्स में शामिल हैं:

  • Glycomet GP
  • Ecosprin
  • Roseday

इसके अलावा USV भारत में Sebamed की एक्सक्लूसिव पार्टनर भी है।

अब Wellbeing Nutrition में निवेश के जरिए USV अपने पोर्टफोलियो को प्रिस्क्रिप्शन दवाओं से आगे बढ़ाकर प्रिवेंटिव हेल्थ और लाइफस्टाइल वेलनेस सेगमेंट में ले जा रही है।

आज के दौर में लोग बीमार होने के बाद इलाज से ज्यादा बीमारी से बचाव (Preventive Healthcare) पर ध्यान दे रहे हैं। इसी ट्रेंड को देखते हुए USV ने यह रणनीतिक कदम उठाया है।


📈 D2C सेक्टर में तेजी से बढ़ता कंसोलिडेशन

2026 में भारत के D2C स्पेस में यह दूसरा बड़ा अधिग्रहण है।

पिछले हफ्ते:

  • मुंबई स्थित FMCG कंपनी Marico ने प्लांट-बेस्ड प्रोटीन स्टार्टअप Cosmix में 60% हिस्सेदारी खरीदी।
  • इस सौदे में Cosmix का इक्विटी वैल्यूएशन ₹375 करोड़ था।

इसके अलावा, पिछले साल Hindustan Unilever Limited (HUL) ने स्किनकेयर ब्रांड Minimalist का अधिग्रहण किया था, जिसका प्री-मनी वैल्यूएशन ₹2,955 करोड़ था।

यह ट्रेंड दिखाता है कि बड़ी FMCG और फार्मा कंपनियां तेजी से बढ़ते D2C और हेल्थ ब्रांड्स को अपने पोर्टफोलियो में शामिल कर रही हैं।


🔍 क्यों आकर्षक है न्यूट्रास्यूटिकल बाजार?

भारत में न्यूट्रास्यूटिकल और वेलनेस बाजार तेजी से बढ़ रहा है, जिसके पीछे कई कारण हैं:

  • हेल्थ अवेयरनेस में वृद्धि
  • फिटनेस और न्यूट्रिशन पर बढ़ता फोकस
  • ई-कॉमर्स और D2C ब्रांड्स का विस्तार
  • युवा आबादी की बढ़ती क्रय शक्ति

इस बाजार में ग्रोथ की बड़ी संभावनाएं हैं, खासकर प्रीमियम और साइंस-बेस्ड सप्लीमेंट सेगमेंट में।


🚀 आगे क्या?

USV के लिए यह अधिग्रहण सिर्फ एक निवेश नहीं, बल्कि एक रणनीतिक बदलाव है।

Wellbeing Nutrition के जरिए कंपनी:

  • डिजिटल-फर्स्ट कंज्यूमर बेस तक पहुंचेगी
  • प्रिवेंटिव हेल्थ सेगमेंट में अपनी उपस्थिति मजबूत करेगी
  • अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी विस्तार का लाभ उठा सकेगी

अगर कंपनी Wellbeing Nutrition की ग्रोथ को स्केल करने में सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में यह ब्रांड भारतीय वेलनेस सेक्टर में एक मजबूत खिलाड़ी बन सकता है।


📌 निष्कर्ष

USV द्वारा Wellbeing Nutrition में 79% हिस्सेदारी का अधिग्रहण भारतीय हेल्थ और वेलनेस उद्योग में एक महत्वपूर्ण कदम है।

₹1,583 करोड़ के इस सौदे ने न सिर्फ निवेशकों को आकर्षक रिटर्न दिया, बल्कि यह भी संकेत दिया कि भारत में D2C न्यूट्रास्यूटिकल ब्रांड्स का भविष्य उज्ज्वल है।

बड़ी कंपनियों का इस क्षेत्र में बढ़ता निवेश यह दर्शाता है कि आने वाले समय में हेल्थ, न्यूट्रिशन और वेलनेस सेगमेंट भारतीय उपभोक्ता बाजार का एक अहम हिस्सा बनने जा रहा है।

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