💰 Creator Commerce Startup Wishlink ने जुटाए $17.5 मिलियन,

Wishlink

भारत के तेजी से बढ़ते Creator Economy सेक्टर में एक और बड़ी फंडिंग डील सामने आई है। Creator-focused commerce प्लेटफॉर्म Wishlink ने अपने Series B फंडिंग राउंड में 17.5 मिलियन डॉलर (लगभग 145 करोड़ रुपये) जुटाए हैं। इस राउंड की अगुवाई Vertex Ventures Southeast Asia & India ने की, जबकि मौजूदा निवेशकों Fundamentum और Elevation Capital ने भी इसमें भागीदारी की।

यह फंडिंग ऐसे समय में आई है जब भारत में Influencer-led commerce और Social shopping का बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है। Wishlink का यह नया निवेश उसके विस्तार और टेक्नोलॉजी अपग्रेड की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।


📈 दो साल बाद नई फंडिंग, कुल निवेश हुआ मजबूत

Wishlink ने इससे पहले फरवरी 2024 में 7 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई थी, जिसमें Fundamentum Partnership Fund और Elevation Capital शामिल थे। उससे पहले अक्टूबर 2022 में कंपनी ने 3 मिलियन डॉलर का Seed राउंड भी पूरा किया था।

लगभग दो साल के अंतराल के बाद आई यह नई फंडिंग इस बात का संकेत है कि कंपनी ने पिछले समय में मजबूत ग्रोथ और बिजनेस मॉडल साबित किया है, जिससे निवेशकों का भरोसा और बढ़ा है।


🚀 फंड का इस्तेमाल कहाँ होगा?

कंपनी के अनुसार, इस ताजा पूंजी का उपयोग तीन प्रमुख क्षेत्रों में किया जाएगा:

  • Creator और Brand Partnerships का विस्तार
  • टेक्नोलॉजी स्टैक को मजबूत बनाना
  • Consumers, Creators और Brands के लिए बेहतर डिजिटल अनुभव तैयार करना

Wishlink अपने प्लेटफॉर्म को अधिक डेटा-ड्रिवन और स्केलेबल बनाना चाहती है, ताकि ब्रांड्स को बेहतर कन्वर्ज़न और क्रिएटर्स को अधिक कमाई के अवसर मिल सकें।


👩‍💻 2022 में हुई थी स्थापना

Wishlink की स्थापना 2022 में Shaurya Gupta, Divyansh Ameta और Chandan Yadav द्वारा की गई थी। कंपनी एक Creator Commerce प्लेटफॉर्म संचालित करती है, जो Influencers और Content Creators के माध्यम से Product Discovery को आसान बनाता है।

आज के डिजिटल दौर में उपभोक्ता पारंपरिक विज्ञापनों की बजाय सोशल मीडिया रिव्यू और Influencer Recommendations पर ज्यादा भरोसा करते हैं। Wishlink इसी ट्रेंड का फायदा उठाते हुए ब्रांड्स और क्रिएटर्स को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ता है।


📊 40,000 से ज्यादा एक्टिव क्रिएटर्स

Wishlink का नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा है। कंपनी के अनुसार:

  • 40,000 से अधिक Monthly Active Creators प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं
  • हर महीने 3 लाख से ज्यादा Content Pieces तैयार होते हैं
  • 60 लाख (6 मिलियन) से ज्यादा ऑर्डर प्लेटफॉर्म के जरिए प्रोसेस होते हैं
  • पार्टनर ब्रांड्स के लिए हर महीने 350 करोड़ रुपये से ज्यादा की सेल्स ड्राइव होती है

ये आंकड़े दिखाते हैं कि Wishlink अब सिर्फ एक स्टार्टअप नहीं, बल्कि एक मजबूत Creator-driven Commerce इंजन बन चुका है।


💡 कैसे काम करता है Wishlink?

Wishlink डेटा-ड्रिवन टूल्स का उपयोग करता है, जिससे ब्रांड्स को पूरे सेल्स फनल की परफॉर्मेंस ट्रैक करने में मदद मिलती है। यानी कि:

  • कितने लोगों ने कंटेंट देखा
  • कितनों ने क्लिक किया
  • कितनों ने खरीदारी की

इससे ब्रांड्स को ROI (Return on Investment) समझने में आसानी होती है।

वहीं दूसरी ओर, Creators अपने कंटेंट में Product Links जोड़कर हर बिक्री पर कमीशन कमा सकते हैं। इससे उनकी Monetisation आसान और पारदर्शी हो जाती है।


📉 राजस्व में 356% की जबरदस्त छलांग

Wishlink की वित्तीय स्थिति भी इसकी ग्रोथ कहानी को मजबूत करती है। कंपनी के वार्षिक वित्तीय आंकड़ों के अनुसार:

  • FY25 में ऑपरेशनल रेवेन्यू 356% बढ़कर 53.80 करोड़ रुपये हो गया
  • FY24 में यह 11.79 करोड़ रुपये था

यानी एक साल में कंपनी ने अपने राजस्व में चार गुना से ज्यादा वृद्धि दर्ज की है।

हालांकि, कंपनी अभी भी घाटे में है। FY25 में उसका नेट लॉस 18.79 करोड़ रुपये रहा, जो FY24 के 18.22 करोड़ रुपये के लगभग बराबर है।

इसका मतलब है कि कंपनी ने तेजी से रेवेन्यू बढ़ाया है, लेकिन अपने घाटे को नियंत्रित रखने में भी कामयाबी हासिल की है — जो किसी भी ग्रोथ-स्टेज स्टार्टअप के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है।


🌐 भारत में Creator Economy का बढ़ता बाजार

भारत में Creator Economy तेजी से विकसित हो रही है। लाखों Influencers Instagram, YouTube और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं। ब्रांड्स अब पारंपरिक मार्केटिंग की बजाय Creator-led campaigns पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं।

Wishlink जैसे प्लेटफॉर्म इस गैप को भर रहे हैं, जहां:

  • ब्रांड्स को measurable sales मिलती है
  • Creators को sustainable income source मिलता है
  • Consumers को authentic product recommendations मिलती हैं

🔮 आगे की राह

Series B फंडिंग के बाद Wishlink अब अपने नेटवर्क को और बड़े पैमाने पर विस्तार देने की योजना बना रही है। कंपनी टेक्नोलॉजी में निवेश बढ़ाकर AI और डेटा एनालिटिक्स के जरिए बेहतर Product Discovery और Shopping Experience तैयार करना चाहती है।

अगर कंपनी अपनी मौजूदा ग्रोथ रफ्तार को बनाए रखती है, तो आने वाले समय में Wishlink भारतीय Creator Commerce सेगमेंट में एक लीडिंग प्लेयर के रूप में उभर सकती है।

कुल मिलाकर, Wishlink की यह फंडिंग डील दिखाती है कि निवेशकों का भरोसा Creator Economy पर लगातार बढ़ रहा है — और भारत में Social Commerce का भविष्य काफी मजबूत नजर आ रहा है।

Read more :🚀 Hycosys को मिला 9 करोड़ का निवेश,

🚀 Hycosys को मिला 9 करोड़ का निवेश,

Hycosys

भारत में DeepTech और Clean Energy सेक्टर में एक और बड़ा कदम सामने आया है। बेंगलुरु आधारित डीप-टेक स्टार्टअप Hycosys ने सीड फंडिंग राउंड में 1 मिलियन डॉलर (करीब 9 करोड़ रुपये) से अधिक की राशि जुटाई है। इस राउंड का नेतृत्व MountTech Growth Fund – Kavachh ने किया है।

इससे पहले कंपनी दिसंबर 2024 में PointOne Capital से 88,400 डॉलर की प्री-सीड फंडिंग भी हासिल कर चुकी है। नई पूंजी के साथ Hycosys अब अपने प्रोडक्ट और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी में है।


🔬 क्या करती है Hycosys?

Hycosys की स्थापना 2024 में Tapish Agarwal और Ugandhar Reddy ने की थी। कंपनी fuel-flexible और low-emission माइक्रो गैस टरबाइन (MGT) सिस्टम विकसित कर रही है।

यह सिस्टम पारंपरिक डीजल जनरेटर का क्लीन और अधिक दक्ष विकल्प बनने की दिशा में काम कर रहा है। कंपनी का दावा है कि उसकी टरबाइन टेक्नोलॉजी मौजूदा सिस्टम की तुलना में 30% तक हल्की है और अधिक ऊर्जा दक्षता प्रदान करती है।


💡 फंड का इस्तेमाल कहां होगा?

जुटाई गई राशि का उपयोग इंजीनियरिंग टीम को मजबूत करने, एडवांस टेस्टिंग सुविधाओं तक पहुंच बनाने और माइक्रो गैस टरबाइन के डेवलपमेंट में किया जाएगा।

कंपनी का लक्ष्य है कि 2027 के मध्य तक डीजल आधारित पावर जनरेटर का एक क्लीन विकल्प तैयार कर उसका वर्किंग डेमो पेश किया जाए।

Hycosys की टेक्नोलॉजी में hydrogen-optimised combustor, 3D-printed heat recovery unit और advanced turbine design जैसे फीचर्स शामिल हैं। इनकी टेस्टिंग IIT-BHU में की जा रही है।


⚡ बड़ा बाजार, बड़ा मौका

भारत में 227 गीगावॉट से अधिक की इंस्टॉल्ड डीजल जनरेटर क्षमता मौजूद है, जो मुख्य रूप से इंडस्ट्रियल बैकअप पावर के लिए इस्तेमाल होती है। डीजल आधारित पावर महंगा और प्रदूषणकारी दोनों है।

Hycosys की माइक्रो गैस टरबाइन टेक्नोलॉजी को hydrogen-ready और clean fuel compatible बनाया जा रहा है, जिससे यह भविष्य में ग्रीन फ्यूल के साथ भी काम कर सके।

कंपनी की योजना माइक्रोग्रिड, हेवी कमर्शियल व्हीकल रेंज एक्सटेंडर और ड्रोन/एयरोस्पेस एप्लिकेशन में भी इस टेक्नोलॉजी को लागू करने की है।


🇮🇳 भारत के क्लीन एनर्जी लक्ष्य के साथ तालमेल

भारत ने 2030 तक अपनी 50% ऊर्जा जरूरतें गैर-फॉसिल स्रोतों से पूरी करने का लक्ष्य रखा है। Hycosys की स्वदेशी टरबाइन टेक्नोलॉजी इस लक्ष्य के अनुरूप है।

यदि कंपनी अपनी टेक्नोलॉजी को सफलतापूर्वक कमर्शियल स्तर पर ला पाती है, तो यह इंडस्ट्रियल पावर बैकअप सेक्टर में बड़ा बदलाव ला सकती है और “Make in India” विजन को भी मजबूती दे सकती है।

कुल मिलाकर, Hycosys की यह फंडिंग भारतीय DeepTech और Clean Energy इकोसिस्टम के लिए एक सकारात्मक संकेत है। 🚀

Read more :🥦 B2C फ्रेश प्रोड्यूस स्टार्टअप Pluckk जुटाएगा ₹100 करोड़

🥦 B2C फ्रेश प्रोड्यूस स्टार्टअप Pluckk जुटाएगा ₹100 करोड़

Pluckk

भारत के ऑनलाइन फ्रेश प्रोड्यूस मार्केट में एक और बड़ा फंडिंग अपडेट सामने आया है। बिज़नेस-टू-कंज़्यूमर (B2C) फ्रेश फूड प्लेटफॉर्म Pluckk अब अपने मौजूदा निवेशक Euro Gulf Investment से ₹100 करोड़ (लगभग 11 मिलियन डॉलर) जुटाने की तैयारी में है।

यह राउंड पिछले साल मार्च में मिले 10 मिलियन डॉलर के निवेश के बाद आ रहा है। हालांकि कंपनी ने अभी तक इस फंडिंग की सार्वजनिक घोषणा नहीं की है, लेकिन कंपनी के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) में दाखिल दस्तावेज़ों से इस डील की जानकारी सामने आई है।


📑 बोर्ड से मंजूरी, Series C में होगा निवेश

RoC फाइलिंग के अनुसार, Pluckk के बोर्ड ने एक विशेष प्रस्ताव पारित किया है जिसके तहत कंपनी 3,471 Series C CCPS (Compulsorily Convertible Preference Shares) जारी करेगी। प्रति शेयर इश्यू प्राइस ₹2,88,112 तय किया गया है, जिसके जरिए कुल ₹100 करोड़ जुटाए जाएंगे।

Entrackr की रिपोर्ट के मुताबिक, इस राउंड के बाद कंपनी की पोस्ट-मनी वैल्यूएशन लगभग 58 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है।

यह संकेत देता है कि निवेशक कंपनी की ग्रोथ स्ट्रेटेजी और बाजार में उसकी पोजिशनिंग को लेकर आश्वस्त हैं।


💰 फंड का उपयोग कहां होगा?

कंपनी द्वारा दाखिल दस्तावेजों के अनुसार, इस नए निवेश का उपयोग तीन प्रमुख उद्देश्यों के लिए किया जाएगा:

  • आक्रामक ग्रोथ (Aggressive Growth)
  • डिबेंचर्स पर ब्याज भुगतान
  • अन्य कॉर्पोरेट जरूरतें

इसका मतलब साफ है कि Pluckk आने वाले समय में अपने ऑपरेशन को और विस्तार देने की तैयारी में है, साथ ही बैलेंस शीट को भी मजबूत करना चाहती है।


🌱 Farm-to-Fork मॉडल पर फोकस

साल 2021 में Pratik Gupta द्वारा स्थापित Pluckk एक farm-to-fork प्लेटफॉर्म है। यह उपभोक्ताओं तक सीधे ताजा फल और सब्जियां पहुंचाने का काम करता है।

लेकिन Pluckk खुद को सिर्फ एक ग्रोसरी डिलीवरी प्लेटफॉर्म के रूप में पेश नहीं करता। कंपनी लाइफस्टाइल-केंद्रित फूड प्रोडक्ट्स भी उपलब्ध कराती है, जिनमें शामिल हैं:

  • Vegan प्रोडक्ट्स
  • Low-carb विकल्प
  • Gut health और immunity पर आधारित आइटम

यानी कंपनी हेल्थ-कॉन्शियस शहरी उपभोक्ताओं को टारगेट कर रही है, जो ट्रेंडिंग और न्यूट्रिशन-फोकस्ड फूड को प्राथमिकता देते हैं।


🛒 अधिग्रहण के जरिए विस्तार

Pluckk ने अपनी ग्रोथ को तेज करने के लिए अधिग्रहण (Acquisitions) का रास्ता भी अपनाया है।

  • कंपनी ने DIY मील किट प्लेटफॉर्म KOOK को 1.3 मिलियन डॉलर में खरीदा।
  • इसके बाद न्यूट्रिशन ब्रांड Upnourish का 1.4 मिलियन डॉलर में अधिग्रहण किया।

इन अधिग्रहणों के जरिए कंपनी ने अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को मजबूत किया और हेल्थ-केंद्रित ब्रांडिंग को और गहराई दी।


📊 राजस्व दोगुना, लेकिन घाटा भी बढ़ा

मार्च 2025 को समाप्त वित्त वर्ष (FY25) में मुंबई स्थित इस कंपनी का राजस्व दोगुना होकर ₹85 करोड़ तक पहुंच गया।

हालांकि, बढ़ते स्केल के साथ कंपनी का घाटा भी बढ़ा है। FY24 में जहां नुकसान ₹41 करोड़ था, वहीं FY25 में यह बढ़कर ₹55 करोड़ हो गया।

यह आंकड़े बताते हैं कि कंपनी आक्रामक विस्तार रणनीति अपना रही है, जिसमें ग्रोथ को प्राथमिकता दी जा रही है, भले ही शॉर्ट टर्म में घाटा बढ़ रहा हो।


⚔️ प्रतिस्पर्धा और चुनौतियां

ऑनलाइन फ्रेश प्रोड्यूस सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा काफी तीव्र है। Pluckk का मुकाबला Gourmet Garden और Kisankonnect जैसे खिलाड़ियों से है।

हालांकि, इस सेगमेंट में कई फंडेड स्टार्टअप्स को संघर्ष का सामना करना पड़ा है।

  • Otipy
  • Deep Rooted
  • Fraazo

इन कंपनियों ने भारी निवेश जुटाने के बावजूद अपने ऑपरेशन बंद कर दिए। इससे यह स्पष्ट होता है कि फ्रेश प्रोड्यूस कैटेगरी में स्केल बनाना और यूनिट इकॉनॉमिक्स को पॉजिटिव रखना आसान नहीं है।


📌 आगे का रास्ता

Pluckk का नया ₹100 करोड़ का फंडिंग राउंड यह संकेत देता है कि कंपनी अभी भी निवेशकों के भरोसे पर खरी उतर रही है।

Farm-to-fork मॉडल, हेल्थ-केंद्रित प्रोडक्ट्स और अधिग्रहण के जरिए विस्तार — ये तीनों रणनीतियां कंपनी को भीड़ से अलग खड़ा करती हैं।

हालांकि, लगातार बढ़ता घाटा एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या Pluckk अपने राजस्व को तेजी से बढ़ाते हुए नुकसान को नियंत्रित कर पाती है या नहीं।

अगर कंपनी यूनिट इकॉनॉमिक्स सुधारने में सफल रहती है, तो $58 मिलियन की संभावित वैल्यूएशन के बाद यह भारतीय फ्रेश फूड ई-कॉमर्स सेगमेंट में एक मजबूत दावेदार बन सकती है।

फिलहाल, निवेशकों का भरोसा बरकरार है — और बाजार की नजरें Pluckk की अगली चाल पर टिकी हुई हैं।

Read more :🏠 Urban Company की InstaHelp सेवा ने पकड़ी रफ्तार,

🏠 Urban Company की InstaHelp सेवा ने पकड़ी रफ्तार,

Urban Company

ऑन-डिमांड होम सर्विस प्लेटफॉर्म Urban Company की क्विक-सेवा हाउसकीपिंग वर्टिकल InstaHelp ने लॉन्च के एक साल से भी कम समय में बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। कंपनी के सह-संस्थापक और CEO Abhiraj Singh Bhal के अनुसार, InstaHelp ने रोज़ाना 50,000 से अधिक बुकिंग का आंकड़ा पार कर लिया है।

मार्च 2025 में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुई इस सेवा ने तेजी से विस्तार करते हुए अब बड़े शहरों में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है।


📊 50,000 डेली बुकिंग का माइलस्टोन

स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, 22 फरवरी 2026 को InstaHelp ने 51,520 दैनिक बुकिंग दर्ज कीं। यह आंकड़ा बताता है कि शहरी भारत में इंस्टेंट होम सर्विसेज की मांग तेज़ी से बढ़ रही है।

कंपनी का अनुमान है कि आने वाले महीनों में मासिक बुकिंग 15 लाख (1.5 मिलियन) का आंकड़ा पार कर सकती है। तुलना के लिए, दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही में Urban Company ने कुल 1.61 मिलियन ऑर्डर दर्ज किए थे।

यह स्पष्ट संकेत है कि InstaHelp अब कंपनी के लिए एक हाई-फ्रीक्वेंसी और स्केलेबल कैटेगरी बनती जा रही है।


🚀 मुंबई से शुरू, अब टॉप शहरों में विस्तार

InstaHelp को सबसे पहले मुंबई में पायलट के तौर पर लॉन्च किया गया था। इसके बाद इसे बेंगलुरु, दिल्ली-एनसीआर, हैदराबाद और पुणे जैसे बड़े शहरों के चुनिंदा माइक्रो-मार्केट्स में विस्तार दिया गया।

यह सेवा ऑन-डिमांड घरेलू कार्यों के लिए उपलब्ध है, जिनमें शामिल हैं:

  • घर की सफाई
  • बर्तन धोना
  • कपड़े धोना
  • भोजन तैयार करना

क्विक-कॉमर्स की तरह, InstaHelp भी तुरंत उपलब्धता और तेज़ सर्विस पर फोकस करता है।


💬 CEO का बयान: हाई-फ्रीक्वेंसी कैटेगरी पर फोकस

Abhiraj Singh Bhal ने कहा कि कंपनी इस वर्टिकल में लगातार निवेश कर रही है ताकि एक बड़ी और बार-बार इस्तेमाल होने वाली सेवा श्रेणी बनाई जा सके।

उनके अनुसार, इस निवेश के शुरुआती नतीजे दिखने लगे हैं — यूनिट इकॉनॉमिक्स में सुधार हो रहा है और दोबारा उपयोग (repeat usage) बढ़ रहा है।

यह बयान संकेत देता है कि कंपनी InstaHelp को केवल एक एक्सपेरिमेंट नहीं बल्कि भविष्य की ग्रोथ इंजन के रूप में देख रही है।


📉 Q3 FY26 में घाटा, लेकिन रेवेन्यू में उछाल

वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो Q3 FY26 में Urban Company ने 21 करोड़ रुपये का समेकित (consolidated) शुद्ध घाटा दर्ज किया। एडजस्टेड EBITDA घाटा 17 करोड़ रुपये रहा।

इस घाटे का बड़ा कारण InstaHelp वर्टिकल में किया गया भारी निवेश बताया गया है।

हालांकि, इसी अवधि में कंपनी का ऑपरेशन्स से रेवेन्यू 32% बढ़कर 383 करोड़ रुपये पहुंच गया।

InstaHelp ने अकेले Q3 FY26 में 28 करोड़ रुपये का NTV (Net Transaction Value) और 6.8 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया।

यह दर्शाता है कि सेवा तेजी से स्केल हो रही है, भले ही अभी लाभप्रदता (profitability) की राह लंबी हो।


⚔️ बढ़ती प्रतिस्पर्धा: Snabbit और Pronto

इंस्टेंट होम सर्विसेज का बाजार अब प्रतिस्पर्धी होता जा रहा है।

क्विक-कॉमर्स की तरह इस स्पेस में भी कई नए खिलाड़ी उतर चुके हैं। उदाहरण के लिए, Pronto ने हाल ही में दावा किया कि उसने 15,000 दैनिक बुकिंग का आंकड़ा पार कर लिया है।

इसी तरह Snabbit भी इस सेगमेंट में पूंजी जुटाकर तेजी से विस्तार कर रहा है।

इस प्रतिस्पर्धा के बीच Urban Company को अपनी ब्रांड वैल्यू, नेटवर्क और टेक्नोलॉजी एडवांटेज का लाभ मिल सकता है।


🔍 क्विक-कॉमर्स जैसा मॉडल, लेकिन घर के लिए

InstaHelp का मॉडल काफी हद तक क्विक-कॉमर्स जैसा है — कम समय में सेवा उपलब्ध कराना, हाई-फ्रीक्वेंसी ऑर्डर और बेहतर यूनिट इकॉनॉमिक्स।

अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो Urban Company अपने प्लेटफॉर्म एंगेजमेंट को गहरा कर सकती है और ग्राहकों को बार-बार वापस लाने में सफल हो सकती है।


📈 आगे की राह

50,000 से अधिक दैनिक बुकिंग का आंकड़ा यह दर्शाता है कि भारत में इंस्टेंट होम सर्विसेज का बाजार तेज़ी से विकसित हो रहा है।

हालांकि, निवेश और प्रतिस्पर्धा के चलते निकट भविष्य में लाभप्रदता चुनौती बनी रह सकती है।

फिर भी, अगर Urban Company यूनिट इकॉनॉमिक्स को संतुलित रखते हुए स्केल बढ़ाने में सफल रहती है, तो InstaHelp कंपनी के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

InstaHelp की तेज़ ग्रोथ इस बात का संकेत है कि भारत में उपभोक्ता अब केवल फूड या ग्रॉसरी ही नहीं, बल्कि घरेलू सेवाओं में भी इंस्टेंट समाधान चाहते हैं।

आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या Urban Company इस वर्टिकल को लाभप्रद बना पाती है और प्रतिस्पर्धा में अपनी बढ़त कायम रख पाती है। 🚀

read more :🚁The ePlane Company जुटाएगी $40–50 मिलियन की नई फंडिंग

🚁The ePlane Company जुटाएगी $40–50 मिलियन की नई फंडिंग

ePlane Company

भारत में अर्बन एयर मोबिलिटी (Urban Air Mobility) का सपना अब तेजी से हकीकत बनता दिख रहा है। चेन्नई स्थित इलेक्ट्रिक एयरक्राफ्ट स्टार्टअप The ePlane Company कथित तौर पर अपने Series C राउंड में 40 से 50 मिलियन डॉलर (करीब 330–415 करोड़ रुपये) जुटाने की तैयारी कर रही है।

इस घटनाक्रम की जानकारी सबसे पहले The Economic Times ने दी। रिपोर्ट के अनुसार, इस राउंड को Speciale Invest को-लीड करेगा और यह निवेश इक्विटी व कन्वर्टिबल इंस्ट्रूमेंट्स के मिश्रण के रूप में हो सकता है।

📈 अब तक कितना जुटाया फंड?

The ePlane Company अब तक Speciale Invest और अन्य निवेशकों से लगभग 20 मिलियन डॉलर जुटा चुकी है। कंपनी की अब तक की प्रगति और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट को देखते हुए यह नया फंडिंग राउंड उसके विस्तार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, नई पूंजी का उपयोग एयरक्राफ्ट डेवलपमेंट को तेज करने, इंजीनियरिंग टीम का विस्तार करने और सबसे अहम – एयरक्राफ्ट सर्टिफिकेशन प्रोसेस को आगे बढ़ाने में किया जाएगा।

एविएशन सेक्टर में किसी भी नई तकनीक को बाजार में उतारने से पहले कठोर रेगुलेटरी और सेफ्टी सर्टिफिकेशन से गुजरना पड़ता है। ऐसे में यह फंडिंग कंपनी के लिए कमर्शियल लॉन्च की दिशा में बड़ा कदम हो सकती है।


✈️ क्या बनाती है The ePlane Company?

2019 में सत्या चक्रवर्ती द्वारा स्थापित यह स्टार्टअप AI-आधारित इलेक्ट्रिक फ्लाइंग कार और एयर टैक्सी विकसित कर रहा है।

कंपनी का दावा है कि उसका एयरक्राफ्ट:

  • दो सीटों वाला होगा
  • वर्टिकल टेकऑफ और लैंडिंग (VTOL) सक्षम होगा
  • लगभग 200 किलोमीटर की रेंज देगा
  • यात्री और कार्गो – दोनों के लिए उपयोगी होगा

इस तकनीक का उद्देश्य शहरों में ट्रैफिक जाम की समस्या को कम करना और 10–15 मिनट में लंबी दूरी तय करना है।

अगर यह प्रोजेक्ट सफल होता है, तो भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो सकता है जहां इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी सेवा व्यावसायिक रूप से उपलब्ध होगी।


🏥 $1 बिलियन का एयर एम्बुलेंस डील

पिछले साल फरवरी में The ePlane Company ने 788 एयर एम्बुलेंस सप्लाई करने के लिए एक बड़ा समझौता किया था, जिसकी कुल वैल्यू 1 बिलियन डॉलर से अधिक बताई गई थी।

यह डील कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी और इससे यह संकेत मिला कि उसकी तकनीक पर भरोसा बढ़ रहा है।

एयर एम्बुलेंस सेगमेंट में इलेक्ट्रिक VTOL का उपयोग हेल्थकेयर सेक्टर में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है, खासकर आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में।


🇮🇳 भारत में एयर टैक्सी की बढ़ती होड़

भारत में इलेक्ट्रिक एयर मोबिलिटी को लेकर कई कंपनियां सक्रिय हैं। हाल ही में InterGlobe Enterprises और अमेरिका की Archer Aviation ने 2026 तक भारत में ऑल-इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी सेवा शुरू करने की योजना की घोषणा की थी।

InterGlobe Enterprises, जो कि IndiGo की पैरेंट कंपनी है, दिल्ली के कनॉट प्लेस से गुरुग्राम के बीच मात्र 7 मिनट की एयर टैक्सी सेवा शुरू करने की योजना पर काम कर रही है।

ऐसे में The ePlane Company का Series C राउंड भारत में इस उभरते सेक्टर में प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकता है।


🚀 आगे क्या?

The ePlane Company अब कमर्शियल डिप्लॉयमेंट की तैयारी कर रही है। अगर कंपनी सफलतापूर्वक सर्टिफिकेशन और टेक्नोलॉजी वैलिडेशन पूरा कर लेती है, तो आने वाले कुछ वर्षों में भारत में एयर टैक्सी सेवा की शुरुआत संभव हो सकती है।

हालांकि, इस सेक्टर में चुनौतियां भी कम नहीं हैं —

  • रेगुलेटरी अप्रूवल
  • हाई डेवलपमेंट कॉस्ट
  • इन्फ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता
  • सुरक्षा मानक

फिर भी, बढ़ती फंडिंग और बड़े खिलाड़ियों की एंट्री यह दर्शाती है कि अर्बन एयर मोबिलिटी भारत में अगला बड़ा टेक्नोलॉजी ट्रेंड बन सकता है।


📊 निष्कर्ष

The ePlane Company का संभावित 40–50 मिलियन डॉलर का Series C राउंड भारत के डीप-टेक और एविएशन स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए सकारात्मक संकेत है।

AI-आधारित इलेक्ट्रिक फ्लाइंग कार और एयर टैक्सी का सपना अब केवल साइंस फिक्शन नहीं रह गया है। आने वाले वर्षों में यह टेक्नोलॉजी शहरों की ट्रांसपोर्टेशन व्यवस्था को पूरी तरह बदल सकती है।

अगर सब कुछ योजना के अनुसार चलता है, तो बहुत जल्द भारत के आसमान में इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी उड़ती नजर आ सकती हैं — और यह बदलाव भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम की नई ऊंचाइयों का प्रतीक होगा। 🚁

Read more :🚚 लॉजिस्टिक्स टेक स्टार्टअप Mojro ने जुटाए 3 मिलियन डॉलर,

🚚 लॉजिस्टिक्स टेक स्टार्टअप Mojro ने जुटाए 3 मिलियन डॉलर,

Mojro

भारत के B2B SaaS इकोसिस्टम से एक और फंडिंग अपडेट सामने आया है। लॉजिस्टिक्स प्लानिंग और ऑप्टिमाइजेशन प्लेटफॉर्म Mojro ने 3 मिलियन डॉलर (लगभग 25 करोड़ रुपये) की नई फंडिंग जुटाई है। इस राउंड को IAN Alpha Fund ने लीड किया, जबकि 1Crowd और मौजूदा निवेशकों ने भी इसमें भाग लिया।

यह निवेश ऐसे समय में आया है जब लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन सेक्टर में टेक्नोलॉजी आधारित ऑप्टिमाइजेशन की मांग तेजी से बढ़ रही है, खासकर ग्लोबल मार्केट में।


💰 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

कंपनी के अनुसार, जुटाई गई पूंजी का इस्तेमाल तीन प्रमुख क्षेत्रों में किया जाएगा:

  • 🇺🇸 अमेरिका और साउथईस्ट एशिया में विस्तार
  • 🤖 AI-ड्रिवन ऑप्टिमाइजेशन प्लेटफॉर्म को और मजबूत बनाना
  • 👨‍💻 प्रोडक्ट, इंजीनियरिंग और सेल्स टीम का विस्तार

Mojro पहले से ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत उपस्थिति रखता है और अब वह अपने ग्लोबल फुटप्रिंट को और आक्रामक तरीके से बढ़ाने की तैयारी में है।


📦 क्या करती है Mojro?

साल 2016 में किशन अस्वथ, अमित कुलकर्णी और रंगनाथ सीतारामु द्वारा स्थापित Mojro एक B2B SaaS प्लेटफॉर्म है, जो मिड और बड़े एंटरप्राइजेज को लॉजिस्टिक्स प्लानिंग और डिलीवरी ऑप्टिमाइजेशन के लिए टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन प्रदान करता है।

यह प्लेटफॉर्म CPG (Consumer Packaged Goods), रिटेल, कूरियर, डेयरी और ई-कॉमर्स सेक्टर की कंपनियों को सेवा देता है।

Mojro का सॉल्यूशन कंपनियों को निम्नलिखित में मदद करता है:

  • डिलीवरी रूट्स को ऑप्टिमाइज करना
  • मल्टीपल डिलीवरी कंस्ट्रेंट्स को मैनेज करना
  • लॉजिस्टिक्स कॉस्ट को कम करना
  • रियल-टाइम में सप्लाई चेन मॉनिटर करना

आज के समय में, जहां ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स तेजी से बढ़ रहे हैं, लॉजिस्टिक्स एफिशिएंसी किसी भी कंपनी की ग्रोथ का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।


🌍 60% से ज्यादा रेवेन्यू विदेश से

Mojro का बिजनेस मॉडल usage-based SaaS पर आधारित है। यानी ग्राहक जितना उपयोग करते हैं, उसी हिसाब से भुगतान करते हैं।

कंपनी की खास बात यह है कि इसके कुल रेवेन्यू का 60% से अधिक हिस्सा इंटरनेशनल मार्केट्स से आता है। इसमें अमेरिका, मलेशिया, सिंगापुर और फिलीपींस जैसे देश शामिल हैं।

अमेरिका में कंपनी ने कंसल्टिंग और टेक्नोलॉजी फर्म्स के साथ पार्टनरशिप भी बनाई है, जिससे उसे नए ग्राहकों को जोड़ने में मदद मिल रही है। यह रणनीति उसे बिना भारी मार्केटिंग खर्च के तेजी से स्केल करने में सहायक साबित हो रही है।


🧠 AI आधारित प्रोडक्ट: PlanWyse और ExecuteWyse

Mojro के दो प्रमुख प्रोडक्ट हैं:

  • PlanWyse – जो लॉजिस्टिक्स और रूट प्लानिंग के लिए ऑप्टिमाइजेशन टूल प्रदान करता है
  • ExecuteWyse – जो रियल-टाइम सप्लाई चेन एक्जीक्यूशन और मॉनिटरिंग में मदद करता है

कंपनी का दावा है कि उसके प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल से ग्राहक अपनी लॉजिस्टिक्स लागत में 20% तक की बचत कर सकते हैं। इतना ही नहीं, डिप्लॉयमेंट के 90 दिनों के भीतर measurable परिणाम देखने को मिलते हैं।

यह दावा खास इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि B2B SaaS सेक्टर में ROI (Return on Investment) दिखाना ही ग्राहकों को बनाए रखने की कुंजी होता है।


📈 लॉजिस्टिक्स SaaS में बढ़ता अवसर

भारत और ग्लोबल मार्केट में सप्लाई चेन मैनेजमेंट तेजी से डिजिटल हो रहा है। कंपनियां अब केवल डिलीवरी नहीं, बल्कि डेटा-ड्रिवन डिसीजन मेकिंग, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और ऑटोमेशन की ओर बढ़ रही हैं।

Mojro का AI-ड्रिवन ऑप्टिमाइजेशन मॉडल उसे पारंपरिक लॉजिस्टिक्स सॉफ्टवेयर से अलग बनाता है। यह केवल प्लानिंग नहीं, बल्कि execution और monitoring को भी एक ही प्लेटफॉर्म पर लाता है।


🚀 आगे की राह

3 मिलियन डॉलर की यह फंडिंग भले ही बहुत बड़ी राशि न लगे, लेकिन Mojro के लिए यह एक रणनीतिक बूस्ट है। खासकर तब, जब कंपनी पहले से ही इंटरनेशनल मार्केट से मजबूत रेवेन्यू जनरेट कर रही है।

US और साउथईस्ट एशिया में विस्तार, AI टेक्नोलॉजी में निवेश और टीम को मजबूत करना – ये तीनों कदम संकेत देते हैं कि कंपनी आने वाले वर्षों में बड़े एंटरप्राइज SaaS प्लेयर के रूप में खुद को स्थापित करना चाहती है।

भारत से निकलकर ग्लोबल B2B SaaS कंपनियों का बढ़ता प्रभाव यह भी दिखाता है कि भारतीय स्टार्टअप केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन टेक्नोलॉजी में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।


📌 निष्कर्ष

Mojro की यह फंडिंग ऐसे समय में आई है जब लॉजिस्टिक्स सेक्टर में एफिशिएंसी और कॉस्ट ऑप्टिमाइजेशन की मांग चरम पर है। 60% से अधिक अंतरराष्ट्रीय रेवेन्यू, AI-आधारित प्रोडक्ट और स्पष्ट ROI मॉडल इसे एक मजबूत ग्रोथ स्टोरी बनाते हैं।

अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या Mojro अगले कुछ वर्षों में खुद को ग्लोबल लॉजिस्टिक्स SaaS लीडर के रूप में स्थापित कर पाता है या नहीं।

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Read more :🔧 इंडस्ट्रियल DeepTech स्टार्टअप DATOMS ने जुटाए 25 करोड़ रुपये,

🔧 इंडस्ट्रियल DeepTech स्टार्टअप DATOMS ने जुटाए 25 करोड़ रुपये,

DATOMS

भारतीय इंडस्ट्रियल डीपटेक IoT स्टार्टअप DATOMS ने अपने Series A फंडिंग राउंड में 25 करोड़ रुपये (लगभग 2.76 मिलियन डॉलर) जुटाए हैं। इस राउंड की अगुवाई Big Capital JSC ने की, जबकि IvyCap Ventures और मौजूदा निवेशक YourNest Venture Capital ने भी भागीदारी की।

यह फंडिंग ऐसे समय आई है जब भारत में इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन, AI और IoT आधारित समाधान तेजी से अपनाए जा रहे हैं। कंपनी इस पूंजी का उपयोग प्रोडक्ट और टेक्नोलॉजी को मजबूत करने, नए बाजारों में विस्तार करने और इंजीनियरिंग, डेटा साइंस तथा एंटरप्राइज सेल्स टीम में भर्ती बढ़ाने के लिए करेगी।


🚀 फंडिंग का उपयोग कहाँ होगा?

कंपनी के अनुसार, यह नया निवेश मुख्य रूप से तीन बड़े क्षेत्रों में लगाया जाएगा:

  • AI-ड्रिवन प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस को और बेहतर बनाना
  • एनर्जी मैनेजमेंट सॉल्यूशंस को मजबूत करना
  • ग्लोबल मार्केट में विस्तार

DATOMS अपनी तकनीक के जरिए मशीनों को सिर्फ “उपकरण” से “डेटा जनरेट करने वाली स्मार्ट एसेट” में बदलने का लक्ष्य रखती है। कंपनी का मानना है कि इंडस्ट्रियल सेक्टर में अनप्लान्ड डाउनटाइम और ऊर्जा की बर्बादी बड़ी समस्या है, जिसे AI और IoT से काफी हद तक कम किया जा सकता है।


🏭 क्या करता है DATOMS?

साल 2021 में Amiya Samantaray, Asish Sahoo, Nataraj Sahoo और Amrit Biswal द्वारा स्थापित DATOMS एक इंडस्ट्रियल IoT प्लेटफॉर्म बनाता है। यह प्लेटफॉर्म फिजिकल मशीनों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ता है और उन्हें उनके पूरे लाइफसाइकिल के दौरान ट्रैक करने योग्य एसेट में बदल देता है।

इसकी टेक्नोलॉजी एंटरप्राइज और OEM कंपनियों को निम्न सुविधाएँ देती है:

  • रियल-टाइम मशीन मॉनिटरिंग
  • फेल्योर का पूर्वानुमान (Predictive Maintenance)
  • ऊर्जा खपत का ऑप्टिमाइजेशन
  • सर्विस ऑपरेशंस मैनेजमेंट

सरल शब्दों में कहें तो DATOMS कंपनियों को यह जानने में मदद करता है कि उनकी मशीनें कब खराब हो सकती हैं, कितना बिजली खर्च कर रही हैं और उन्हें कब सर्विस की जरूरत होगी।


📊 25,000 से 1 लाख मशीनों का लक्ष्य

वर्तमान में DATOMS 25,000 से अधिक मशीनों की मॉनिटरिंग कर रहा है। ये मशीनें लॉजिस्टिक्स, हेल्थकेयर, मैन्युफैक्चरिंग, सीमेंट, स्टील और माइनिंग जैसे क्षेत्रों में उपयोग हो रही हैं।

कंपनी का लक्ष्य अगले एक साल में इस संख्या को बढ़ाकर 1 लाख मशीनों तक ले जाना है। यह विस्तार न केवल भारत में बल्कि वैश्विक बाजारों में भी होगा।

DATOMS के ऑपरेशन भुवनेश्वर और बेंगलुरु से संचालित होते हैं और कंपनी के 100 से अधिक वैश्विक ग्राहक हैं।


💰 वित्तीय प्रदर्शन: ग्रोथ के साथ बढ़ा घाटा

वित्तीय वर्ष 2025 (FY25) में DATOMS का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 5.57 करोड़ रुपये रहा, जो FY24 के 3.09 करोड़ रुपये से लगभग 80% अधिक है। यह दिखाता है कि कंपनी की सेवाओं की मांग बढ़ रही है।

हालांकि, ग्रोथ के साथ कंपनी का घाटा भी बढ़ा है। FY25 में कंपनी का नुकसान 5.82 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष के 4.38 करोड़ रुपये से अधिक है।

यह ट्रेंड शुरुआती स्टेज के टेक स्टार्टअप्स में आम है, जहाँ कंपनी तेजी से विस्तार और प्रोडक्ट डेवलपमेंट में निवेश करती है। निवेशकों का फोकस इस समय स्केल और टेक्नोलॉजी निर्माण पर है, न कि तत्काल मुनाफे पर।


🤖 इंडस्ट्रियल AI-IoT का बढ़ता बाजार

भारत में इंडस्ट्रियल सेक्टर तेजी से डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की ओर बढ़ रहा है। सरकार की “मेक इन इंडिया” और इंडस्ट्री 4.0 जैसी पहलों के चलते स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और ऑटोमेशन की मांग बढ़ी है।

IoT और AI आधारित सॉल्यूशंस कंपनियों को निम्न लाभ देते हैं:

  • डाउनटाइम में कमी
  • मेंटेनेंस कॉस्ट में बचत
  • ऊर्जा दक्षता में सुधार
  • डेटा-ड्रिवन निर्णय लेने की क्षमता

DATOMS जैसे स्टार्टअप्स इस बदलाव के केंद्र में हैं और इंडस्ट्रियल सेक्टर को डिजिटल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।


📈 आगे क्या?

नई फंडिंग के साथ DATOMS अपने AI-ड्रिवन प्रोडक्ट्स को और मजबूत करेगा। कंपनी का लक्ष्य है:

  • ज्यादा OEM पार्टनरशिप
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में विस्तार
  • एंटरप्राइज क्लाइंट बेस बढ़ाना
  • टेक टीम और डेटा साइंस क्षमताओं का विस्तार

अगर कंपनी अपने 1 लाख मशीन मॉनिटरिंग लक्ष्य को हासिल कर लेती है, तो यह इंडस्ट्रियल IoT स्पेस में एक मजबूत खिलाड़ी बन सकती है।


🔎 Funding Raised

अब तक DATOMS ने Series A सहित कुल 25 करोड़ रुपये का निवेश जुटाया है। इस राउंड में Big Capital JSC, IvyCap Ventures और YourNest Venture Capital जैसे निवेशकों की भागीदारी रही है।

इंडस्ट्रियल डीपटेक और AI-IoT के बढ़ते इकोसिस्टम में DATOMS की यह फंडिंग भारतीय स्टार्टअप परिदृश्य के लिए एक सकारात्मक संकेत है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनी अपनी टेक्नोलॉजी और स्केलिंग रणनीति के जरिए इंडस्ट्रियल डिजिटलाइजेशन में कितनी बड़ी भूमिका निभाती है। 🚀

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🇮🇳 startup weekly funding report (21 फरवरी): 29 स्टार्टअप्स ने जुटाए $1.3 बिलियन 🚀

Funding report

इस हफ्ते भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। Funding report कुल 29 स्टार्टअप्स ने मिलकर लगभग $1.3 बिलियन (करीब 10,800 करोड़ रुपये) की फंडिंग जुटाई। इनमें 3 ग्रोथ-स्टेज और 19 अर्ली-स्टेज डील शामिल रहीं, जबकि 7 स्टार्टअप्स ने अपनी फंडिंग राशि का खुलासा नहीं किया।

इसके मुकाबले पिछले हफ्ते 37 स्टार्टअप्स ने मिलकर केवल $236 मिलियन जुटाए थे। यानी हफ्ते-दर-हफ्ते फंडिंग में 5.6 गुना उछाल दर्ज किया गया।


📈 ग्रोथ-स्टेज डील्स: $1.24 बिलियन की बड़ी छलांग

इस हफ्ते ग्रोथ-स्टेज स्टार्टअप्स ने कुल $1.24 बिलियन जुटाए।

सबसे बड़ी डील AI एक्सेलेरेशन क्लाउड प्लेटफॉर्म Neysa की रही, जिसने $1.2 बिलियन की भारी-भरकम राशि इक्विटी और डेट के मिश्रण के जरिए जुटाई। इस राउंड की अगुवाई ग्लोबल इन्वेस्टमेंट फर्म Blackstone ने की। इसे भारत के AI इंफ्रास्ट्रक्चर स्पेस की सबसे बड़ी पूंजी जुटाने वाली डील्स में से एक माना जा रहा है।

वेल्थटेक स्टार्टअप Stable Money ने $175 मिलियन वैल्यूएशन पर $25 मिलियन का प्री-सीरीज C राउंड जुटाया, जिसकी अगुवाई Peak XV Partners ने की।

इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टार्टअप Statiq ने भी इक्विटी और डेट के मिश्रण से $18 मिलियन (करीब 163 करोड़ रुपये) जुटाए।


🌱 अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स: $86.47 मिलियन जुटाए

अर्ली-स्टेज सेगमेंट में कुल 19 डील्स के जरिए $86.47 मिलियन की फंडिंग हुई।

सेमीकंडक्टर स्टार्टअप C2i Semiconductors ने $15 मिलियन जुटाए, जिसकी अगुवाई Peak XV ने की।

AI एप्लिकेशन प्लेटफॉर्म Portkey ने Series A राउंड में $15 मिलियन जुटाए, जिसका नेतृत्व Elevation Capital ने किया।

फैब्लेस सेमीकंडक्टर कंपनी Vervesemi ने $10 मिलियन की Series A फंडिंग हासिल की।

इसके अलावा Navikenz, Zeroharm Sciences और LocalHost जैसे स्टार्टअप्स ने भी इस हफ्ते पूंजी जुटाई।

स्पोर्ट्स ट्रैकिंग ऐप SportSkill Ladder और कॉन्टैक्टलेस पेमेंट्स कंपनी ToneTag ने अनडिस्क्लोज्ड फंडिंग हासिल की।


🏙️ शहरों की बात: बेंगलुरु डील्स में आगे, मुंबई फंडिंग में नंबर 1

शहरवार आंकड़ों में बेंगलुरु 18 डील्स के साथ शीर्ष पर रहा। वहीं मुंबई ने सिर्फ 2 डील्स के जरिए $1.2 बिलियन जुटाकर फंडिंग वैल्यू में बाजी मारी।

दिल्ली-एनसीआर, पुणे, हजारीबाग और बोकारो में भी इस हफ्ते डील्स दर्ज की गईं।


🧠 सेगमेंट-वाइज ट्रेंड

AI स्टार्टअप्स ने 9 डील्स के साथ इस हफ्ते बढ़त बनाई। फिनटेक में 5 और EV सेक्टर में 3 डील्स हुईं। इसके अलावा सेमीकंडक्टर, हेल्थटेक, प्रॉपटेक और फूडटेक सेक्टर में भी निवेश देखने को मिला।

सीरीज के हिसाब से देखें तो Seed राउंड में 15 डील्स हुईं, जबकि Series A में 7 और Series B में 2 डील्स दर्ज की गईं।


👔 प्रमुख नियुक्तियां और बदलाव

फिनटेक कंपनी Slice ने अपने फाउंडर Rajan Bajaj को मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO नियुक्त किया।

NeoLiv ने Atul Nemani को CFO बनाया।

वहीं Livspace ने करीब 1,000 कर्मचारियों (लगभग 12%) की छंटनी की और को-फाउंडर Saurabh Jain ने 11 साल बाद पद छोड़ा।


💰 नए फंड लॉन्च और पूंजी जुटाना

Peak XV Partners ने $1.3 बिलियन का नया फंड क्लोज किया। यह फंडरेजिंग Sequoia Capital से अलग होने के बाद पहली बड़ी पहल है।

Motilal Oswal Alternates ने 8,500 करोड़ रुपये का पांचवां PE फंड बंद किया।

Qualcomm Ventures ने भारतीय AI और डीपटेक स्टार्टअप्स में $150 मिलियन तक निवेश की योजना बनाई है।


📰 हफ्ते की बड़ी खबरें

▪️ Klassroom ने SME IPO के लिए DRHP फाइल किया।
▪️ ED ने WinZO के 505 करोड़ रुपये फ्रीज किए।
▪️ Fractal Analytics ने शेयर बाजार में 3% डिस्काउंट पर लिस्टिंग की।
▪️ NODWIN Gaming ने EVO में अपनी हिस्सेदारी बेची।
▪️ FirstCry की पैरेंट कंपनी में ICICI Mutual Fund की हिस्सेदारी 5% पार।


🔄 नई लॉन्च और पार्टनरशिप

Tiger Global समर्थित Kutumb ने Polo नाम से गे डेटिंग ऐप लॉन्च किया।

Digit Insurance ने Anvayaa के साथ साझेदारी कर एल्डरकेयर सर्विसेज शुरू की।

Razorpay और National Payments Corporation of India ने Claude पर Agentic Payments फीचर पेश किया।


📊 निष्कर्ष

इस हफ्ते भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में फंडिंग ने जबरदस्त वापसी की है। $1.3 बिलियन की यह राशि न केवल AI और डीपटेक सेक्टर में बढ़ती रुचि को दिखाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि निवेशकों का भरोसा फिर मजबूत हो रहा है।

अगर यही रफ्तार बनी रही तो 2026 भारतीय स्टार्टअप्स के लिए रिकॉर्ड फंडिंग का साल बन सकता है। 🚀

Read more :🇮🇳 भारत में बड़ा दांव! General Catalyst लगाएगा $5 बिलियन का निवेश

🇮🇳 भारत में बड़ा दांव! General Catalyst लगाएगा $5 बिलियन का निवेश

General Catalyst

भारत का स्टार्टअप और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम एक बार फिर ग्लोबल निवेशकों का ध्यान खींच रहा है। इसी कड़ी में अमेरिका की दिग्गज वेंचर कैपिटल फर्म General Catalyst ने बड़ा ऐलान किया है। कंपनी ने अगले पांच वर्षों में भारत में $5 बिलियन (लगभग 40,000 करोड़ रुपये) निवेश करने की योजना का खुलासा किया है।

यह घोषणा India AI Impact Summit के दौरान नई दिल्ली में की गई, जहां टेक्नोलॉजी, AI और इनोवेशन से जुड़े कई बड़े नाम मौजूद थे।


🚀 किन सेक्टरों में होगा निवेश?

General Catalyst के CEO Hemant Taneja ने बताया कि यह $5 बिलियन का निवेश कई हाई-ग्रोथ सेक्टरों में फैलाया जाएगा। इनमें शामिल हैं:

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
  • हेल्थकेयर
  • फिनटेक
  • डिफेंस टेक
  • इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी

हेमंत तनेजा ने साफ कहा कि भारत सिर्फ एक बड़ा मार्केट नहीं है, बल्कि यहां टैलेंट, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और इनोवेशन की क्षमता विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी है।

उनके अनुसार, कंपनी सिर्फ निवेश ही नहीं करेगी बल्कि भारत में नई कंपनियों के निर्माण (company creation) में भी सक्रिय भूमिका निभाएगी।


📈 भारत में General Catalyst की बढ़ती मौजूदगी

General Catalyst का भारत में यह कमिटमेंट उसके पिछले निवेश की तुलना में काफी बड़ा है। कंपनी ने 2023 में भारतीय बाजार में एंट्री की थी, जब उसने शुरुआती चरण की वेंचर कैपिटल फर्म Venture Highway का अधिग्रहण किया था।

Venture Highway ने पहले कई भारतीय स्टार्टअप्स को सीड और अर्ली स्टेज पर सपोर्ट किया था। इस अधिग्रहण के बाद General Catalyst ने भारत में अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू की।


🏢 किन भारतीय स्टार्टअप्स में पहले से निवेश?

General Catalyst का भारतीय पोर्टफोलियो पहले से ही मजबूत माना जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी ने जिन स्टार्टअप्स में निवेश किया है, उनमें शामिल हैं:

  • Zepto
  • PB Health
  • Raphe mPhibr
  • Jeh Aerospace

इन निवेशों से साफ है कि कंपनी सिर्फ कंज्यूमर इंटरनेट ही नहीं, बल्कि डीप टेक, डिफेंस और हेल्थ सेक्टर में भी लंबी पारी खेलने की तैयारी में है।


💡 भारत क्यों बन रहा है निवेश का केंद्र?

Hemant Taneja ने कहा कि भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर — जैसे UPI, आधार, ओपन नेटवर्क — ने देश को टेक्नोलॉजी के मामले में अलग पहचान दी है।

भारत के पास युवा आबादी, मजबूत इंजीनियरिंग टैलेंट और तेजी से बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम है। यही कारण है कि वैश्विक निवेशक अब भारत को सिर्फ “उभरता बाजार” नहीं, बल्कि “इनोवेशन हब” के रूप में देख रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि AI, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और हेल्थ टेक जैसे सेक्टरों में भारत आने वाले वर्षों में बड़ा बदलाव ला सकता है।


🏗️ सिर्फ निवेश नहीं, कंपनी निर्माण पर भी फोकस

General Catalyst ने यह भी स्पष्ट किया कि वह केवल फंडिंग तक सीमित नहीं रहेगा। कंपनी भारत में नई कंपनियों के निर्माण में भी सहयोग करेगी।

इसका मतलब है कि फर्म भारतीय फाउंडर्स, संस्थानों और रिसर्च संगठनों के साथ मिलकर नई टेक्नोलॉजी आधारित कंपनियां खड़ी करने में मदद करेगी।

यह मॉडल पारंपरिक वेंचर कैपिटल से अलग है, जहां निवेशक सिर्फ पूंजी उपलब्ध कराते हैं। यहां General Catalyst ऑपरेशनल सपोर्ट और स्ट्रैटेजिक गाइडेंस भी देगा।


🌍 ग्लोबल निवेशकों की भारत पर नजर

General Catalyst का यह ऐलान ऐसे समय में आया है जब कई अंतरराष्ट्रीय निवेशक और घरेलू समूह भारत में टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बड़े निवेश की योजनाएं बना रहे हैं।

भारत की GDP ग्रोथ, डिजिटल एडॉप्शन और स्टार्टअप कल्चर ने इसे एशिया का प्रमुख निवेश केंद्र बना दिया है।

विशेषकर AI और डिफेंस टेक जैसे रणनीतिक सेक्टरों में सरकार की नीतियां भी निवेश को प्रोत्साहित कर रही हैं।


📊 क्या होगा भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम पर असर?

$5 बिलियन का यह कमिटमेंट भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए बड़ा बूस्ट साबित हो सकता है।

  • अर्ली और ग्रोथ स्टेज स्टार्टअप्स को नई फंडिंग के अवसर मिलेंगे
  • डीप टेक और AI कंपनियों को लंबी अवधि का सपोर्ट मिलेगा
  • भारत में ग्लोबल फंड्स की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी
  • नए यूनिकॉर्न बनने की संभावना मजबूत होगी

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बड़े कमिटमेंट से भारत में निवेशकों का विश्वास और बढ़ेगा।


🔎 निष्कर्ष

General Catalyst का $5 बिलियन निवेश प्लान भारत के लिए एक बड़ा संकेत है कि देश अब ग्लोबल इनोवेशन मैप पर मजबूती से उभर रहा है।

AI, हेल्थकेयर, फिनटेक और डिफेंस जैसे सेक्टरों में यह पूंजी नई कंपनियों को गति दे सकती है और भारत को टेक्नोलॉजी लीडर बनने की दिशा में आगे बढ़ा सकती है।

आने वाले पांच साल भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं — और General Catalyst का यह कदम उसी भविष्य की ओर इशारा करता है। 🚀

Read More :🛒 छोटे शहरों पर फोकस करने वाली CityMall का रेवेन्यू ₹500 करोड़ के पार,

🛒 छोटे शहरों पर फोकस करने वाली CityMall का रेवेन्यू ₹500 करोड़ के पार,

CityMall

गुरुग्राम बेस्ड ग्रोसरी-लेड ई-कॉमर्स स्टार्टअप CityMall ने वित्त वर्ष 2025 में 25% की सालाना वृद्धि दर्ज करते हुए अपना ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹500 करोड़ के पार पहुंचा दिया है। हालांकि स्केल में मजबूत बढ़ोतरी के बावजूद कंपनी का घाटा अभी भी बरकरार है।

Registrar of Companies (RoC) से प्राप्त स्टैंडअलोन वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, FY25 में कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹534 करोड़ रहा, जो FY24 में ₹427 करोड़ था।


📦 सोशल कॉमर्स से ग्रोसरी-लेड मॉडल की ओर शिफ्ट

साल 2019 में स्थापित CityMall ने शुरुआत में सोशल कॉमर्स मॉडल अपनाया था, जिसमें कम्युनिटी रिसेलर्स के जरिए टियर-2 और टियर-3 शहरों में प्रोडक्ट बेचे जाते थे। अब कंपनी ने अपनी रणनीति बदलते हुए ग्रोसरी-लेड मॉडल पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया है, साथ ही प्राइवेट लेबल प्रोडक्ट्स पर भी फोकस बढ़ाया है।

कंपनी लाइफस्टाइल, ग्रोसरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य आवश्यक उत्पादों की बिक्री करती है।


💰 96% कमाई प्रोडक्ट सेल्स से

CityMall की कुल ऑपरेटिंग इनकम में से लगभग 96% हिस्सा सीधे प्रोडक्ट सेल्स से आता है। FY25 में प्रोडक्ट सेल्स से रेवेन्यू 30% बढ़कर ₹512 करोड़ हो गया।

बाकी इनकम लॉजिस्टिक्स और मार्केटिंग सेवाओं से आई।

📊 कौन-से प्रोडक्ट सबसे ज्यादा बिके?

  • आटा, चीनी, तेल और घी: ₹210 करोड़ (कुल प्रोडक्ट सेल्स का 39%)
  • ब्रांडेड फूड और बेवरेज: ₹85 करोड़
  • होम और पर्सनल केयर: ₹58 करोड़
  • अन्य स्टेपल्स और मिक्स प्रोडक्ट्स: ₹159 करोड़

यह आंकड़े बताते हैं कि कंपनी का फोकस डेली-यूज ग्रोसरी पर ज्यादा है, जो छोटे शहरों में स्थिर मांग वाला सेगमेंट है।


📈 कुल आय ₹551 करोड़ तक पहुंची

कंपनी को डिपॉजिट और निवेश पर ब्याज से ₹17 करोड़ की अतिरिक्त आय भी हुई। इसके बाद FY25 में कुल आय ₹551 करोड़ रही, जो FY24 में ₹460 करोड़ थी।


📉 खर्च भी तेजी से बढ़े

हालांकि रेवेन्यू में बढ़ोतरी हुई, लेकिन खर्चों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

🧾 प्रमुख खर्च

  • प्रोडक्ट खरीद लागत: ₹510 करोड़ (कुल खर्च का 72%) — 31% वृद्धि
  • कर्मचारी लाभ खर्च: ₹82 करोड़ (10% की गिरावट)
    • इसमें ₹16.5 करोड़ ESOP खर्च शामिल
  • ट्रांसपोर्टेशन लागत: ₹56 करोड़ (स्थिर)
  • अन्य खर्च (किराया, क्लाउड, होस्टिंग, इन्वेंट्री प्रावधान): ₹65 करोड़

कुल मिलाकर FY25 में कंपनी का कुल खर्च 15% बढ़कर ₹710 करोड़ हो गया।


🔴 घाटा जस का तस

Accel समर्थित Accel द्वारा निवेशित CityMall का घाटा लगभग स्थिर रहा।

  • FY25 घाटा: ₹159 करोड़
  • FY24 घाटा: ₹156 करोड़

हालांकि EBITDA मार्जिन में सुधार हुआ और यह -30.3% पर पहुंच गया, लेकिन ROCE गिरकर -57.46% हो गया।

यानी कंपनी अभी भी स्केल हासिल करने के बावजूद प्रॉफिटेबिलिटी की राह पर संघर्ष कर रही है।


📊 यूनिट इकॉनॉमिक्स और बैलेंस शीट

FY25 में कंपनी ने ₹1 कमाने के लिए ₹1.33 खर्च किए। यह दर्शाता है कि ऑपरेटिंग एफिशिएंसी में सुधार की अभी भी गुंजाइश है।

मार्च 2025 के अंत तक कंपनी के पास:

  • कुल करंट एसेट्स: ₹368 करोड़
  • कैश और बैंक बैलेंस: ₹57 करोड़

💵 अब तक $157 मिलियन से ज्यादा फंडिंग

CityMall ने अब तक $157 मिलियन से अधिक की फंडिंग जुटाई है। हाल ही में कंपनी ने $47 मिलियन की Series D फंडिंग जुटाई थी, जिसका नेतृत्व Accel ने किया।

इस राउंड में शामिल अन्य निवेशक थे:

  • Waterbridge Ventures
  • Elevation Capital
  • Norwest Venture Partners
  • General Catalyst

🔍 आगे की रणनीति क्या?

CityMall का फोकस अब स्पष्ट रूप से छोटे शहरों में मजबूत सप्लाई चेन और प्राइवेट लेबल ग्रोसरी ब्रांड बनाने पर है। सोशल कॉमर्स मॉडल की तुलना में ग्रोसरी-लेड अप्रोच ज्यादा स्थिर और दोहराने योग्य रेवेन्यू मॉडल प्रदान करता है।

हालांकि, कंपनी को प्रॉफिटेबिलिटी तक पहुंचने के लिए:

  • प्रोक्योरमेंट कॉस्ट को कंट्रोल करना होगा
  • लॉजिस्टिक्स एफिशिएंसी बढ़ानी होगी
  • प्राइवेट लेबल मार्जिन सुधारने होंगे

📌 बड़ी तस्वीर

भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों में ई-कॉमर्स की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। लेकिन इस मार्केट में टिके रहने के लिए सिर्फ ग्रोथ नहीं, बल्कि मजबूत यूनिट इकॉनॉमिक्स भी जरूरी हैं।

CityMall ने स्केल तो हासिल कर लिया है, लेकिन अब असली परीक्षा प्रॉफिटेबिलिटी की है।

FY25 के आंकड़े यह दिखाते हैं कि कंपनी सही दिशा में कदम बढ़ा रही है, लेकिन घाटे को कम करना और स्थायी मुनाफा कमाना ही इसके अगले चरण की असली चुनौती होगी।

अगर कंपनी अपने खर्चों पर काबू पाती है और ग्रोसरी-लेड मॉडल को और मजबूत करती है, तो आने वाले वर्षों में यह छोटे शहरों की ई-कॉमर्स रेस में एक अहम खिलाड़ी बन सकती है। 🚀

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