विदेश में पढ़ाई का सपना देखने वाले हजारों भारतीय छात्रों के लिए एक बड़ा नाम बन चुकी Leverage Edu ने वित्त वर्ष 2025 (FY25) में जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की है। लेकिन इस तेज़ विस्तार की कीमत कंपनी को बढ़ते घाटे के रूप में चुकानी पड़ी है। दिल्ली बेस्ड इस एडटेक स्टार्टअप की ऑपरेटिंग इनकम में 90% से ज्यादा की उछाल आई, वहीं घाटा 56% बढ़कर 100 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया।
कंपनी के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) में दाखिल कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स के मुताबिक, FY25 में कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 91% बढ़कर 173 करोड़ रुपये हो गया, जो FY24 में 90.6 करोड़ रुपये था।
🚀 क्या करती है Leverage Edu?
साल 2017 में अक्षय चतुर्वेदी द्वारा शुरू की गई Leverage Edu, भारतीय और इंटरनेशनल छात्रों को UK, US, जर्मनी, कनाडा और दुबई जैसे देशों की यूनिवर्सिटीज़ में एडमिशन दिलाने में मदद करती है। कंपनी काउंसलिंग, एडमिशन प्रोसेस और एजुकेशन लोन जैसी फाइनेंशियल सर्विस भी देती है।
💼 रेवेन्यू में बड़ा बदलाव: प्लेसमेंट से Fly बिज़नेस तक
FY25 में कंपनी की कुल ऑपरेटिंग इनकम का 70% हिस्सा स्टूडेंट प्लेसमेंट सर्विस से आया, जो FY24 में 90% से ज्यादा था। प्लेसमेंट सर्विस से आय 65% बढ़कर 120.6 करोड़ रुपये हो गई।
लेकिन इस साल एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला – कंपनी के “Fly” बिज़नेस ने जबरदस्त ग्रोथ दिखाई। यह बिज़नेस 2022 के अंत में शुरू हुआ था और इसके जरिए कंपनी एजुकेशन लोन, फॉरेन एक्सचेंज और स्टूडेंट एकॉमोडेशन जैसी सेवाएं देती है। FY25 में इस सेगमेंट से 29.7 करोड़ रुपये की कमाई हुई, जो पिछले साल के मुकाबले दोगुनी से ज्यादा है।
इसके अलावा, कंपनी ने 21.2 करोड़ रुपये प्रोडक्ट सेल से और 4.9 करोड़ रुपये अन्य स्रोतों से कमाए। इस तरह कुल आय 177 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
🌍 भारत से बढ़ी हिस्सेदारी, इंटरनेशनल से कम
FY25 में कुल रेवेन्यू का 76% हिस्सा भारत से आया, जबकि इंटरनेशनल मार्केट्स से 24%। दिलचस्प बात यह है कि FY24 में इंटरनेशनल मार्केट्स का योगदान 78.5% था। यानी अब कंपनी का फोकस और मजबूती भारत पर ज्यादा दिख रही है।
💸 खर्चों में तेज़ उछाल ने बिगाड़ा मुनाफा
जहां एक तरफ रेवेन्यू तेजी से बढ़ा, वहीं खर्चों में उससे भी ज्यादा बढ़ोतरी हुई। FY25 में कंपनी का कुल खर्च 73% बढ़कर 280 करोड़ रुपये हो गया, जो FY24 में 162 करोड़ रुपये था।
📌 प्रमुख खर्च:
- एम्प्लॉयी बेनिफिट्स: 64 करोड़ रुपये (कुल खर्च का 23%)
- एडवर्टाइजिंग और प्रमोशन: 59.8 करोड़ रुपये (2.2X बढ़ोतरी)
- सेलिंग एजेंट्स को कमीशन: 51.2 करोड़ रुपये (2.6X उछाल)
इसके अलावा IT, लीगल, रेंट, डिप्रिसिएशन और अन्य ओवरहेड खर्चों में भी भारी बढ़ोतरी हुई।
स्पष्ट है कि कंपनी ने आक्रामक मार्केटिंग और एक्सपेंशन स्ट्रेटेजी अपनाई, जिससे खर्च तेजी से बढ़ा।
📉 घाटा 100 करोड़ के पार
बढ़ते खर्चों का असर सीधे कंपनी की बॉटम लाइन पर पड़ा। FY25 में कंपनी का घाटा 55% बढ़कर 106 करोड़ रुपये हो गया, जो FY24 में 68 करोड़ रुपये था।
कंपनी का EBITDA लॉस 83 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
- EBITDA मार्जिन: -47.4%
- ROCE: -204.35%
यानी कंपनी को 1 रुपये कमाने के लिए 1.62 रुपये खर्च करने पड़े।
💰 कैश पोजीशन और फंडिंग
मार्च 2025 तक कंपनी के पास 126 करोड़ रुपये के करंट एसेट्स थे, जिसमें 34 करोड़ रुपये कैश और बैंक बैलेंस शामिल है।
Leverage Edu अब तक करीब 70 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटा चुकी है। जुलाई 2023 में कंपनी ने 40 मिलियन डॉलर की Series C राउंड उठाई थी, जिसमें Blume Ventures और DSG Consumer Partners जैसे निवेशकों ने हिस्सा लिया। आखिरी वैल्यूएशन करीब 140 मिलियन डॉलर रही।
🔍 आगे का रास्ता: ग्रोथ बनाम प्रॉफिटेबिलिटी
Leverage Edu की कहानी फिलहाल “ग्रोथ पहले, मुनाफा बाद में” वाली स्ट्रेटेजी दिखाती है। कंपनी ने अपने बिज़नेस मॉडल को प्लेसमेंट सर्विस से आगे बढ़ाकर फाइनेंशियल सर्विसेज़ तक फैलाया है। Fly जैसे नए सेगमेंट से आने वाली कमाई यह संकेत देती है कि कंपनी लॉन्ग टर्म में मल्टी-सोर्स रेवेन्यू मॉडल बनाना चाहती है।
हालांकि, लगातार बढ़ता घाटा निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन सकता है। आने वाले सालों में कंपनी को अपनी मार्केटिंग और कमीशन कॉस्ट को कंट्रोल करते हुए सस्टेनेबल प्रॉफिट की दिशा में कदम बढ़ाने होंगे।
📊 निष्कर्ष
FY25 Leverage Edu के लिए हाई ग्रोथ लेकिन हाई लॉस वाला साल रहा। जहां रेवेन्यू में 91% की छलांग कंपनी की डिमांड और मार्केट पोजिशन को दिखाती है, वहीं 106 करोड़ रुपये का घाटा यह बताता है कि स्केल-अप की कीमत भारी रही।
अब देखना होगा कि क्या Leverage Edu आने वाले वर्षों में इस तेज़ ग्रोथ को मुनाफे में बदल पाती है या नहीं। फिलहाल कंपनी का फोकस मार्केट शेयर और एक्सपेंशन पर साफ नजर आ रहा है। 🚀
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