गुरुग्राम बेस्ड ग्रोसरी-लेड ई-कॉमर्स स्टार्टअप CityMall ने वित्त वर्ष 2025 में 25% की सालाना वृद्धि दर्ज करते हुए अपना ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹500 करोड़ के पार पहुंचा दिया है। हालांकि स्केल में मजबूत बढ़ोतरी के बावजूद कंपनी का घाटा अभी भी बरकरार है।
Registrar of Companies (RoC) से प्राप्त स्टैंडअलोन वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, FY25 में कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹534 करोड़ रहा, जो FY24 में ₹427 करोड़ था।
📦 सोशल कॉमर्स से ग्रोसरी-लेड मॉडल की ओर शिफ्ट
साल 2019 में स्थापित CityMall ने शुरुआत में सोशल कॉमर्स मॉडल अपनाया था, जिसमें कम्युनिटी रिसेलर्स के जरिए टियर-2 और टियर-3 शहरों में प्रोडक्ट बेचे जाते थे। अब कंपनी ने अपनी रणनीति बदलते हुए ग्रोसरी-लेड मॉडल पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया है, साथ ही प्राइवेट लेबल प्रोडक्ट्स पर भी फोकस बढ़ाया है।
कंपनी लाइफस्टाइल, ग्रोसरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य आवश्यक उत्पादों की बिक्री करती है।
💰 96% कमाई प्रोडक्ट सेल्स से
CityMall की कुल ऑपरेटिंग इनकम में से लगभग 96% हिस्सा सीधे प्रोडक्ट सेल्स से आता है। FY25 में प्रोडक्ट सेल्स से रेवेन्यू 30% बढ़कर ₹512 करोड़ हो गया।
बाकी इनकम लॉजिस्टिक्स और मार्केटिंग सेवाओं से आई।
📊 कौन-से प्रोडक्ट सबसे ज्यादा बिके?
- आटा, चीनी, तेल और घी: ₹210 करोड़ (कुल प्रोडक्ट सेल्स का 39%)
- ब्रांडेड फूड और बेवरेज: ₹85 करोड़
- होम और पर्सनल केयर: ₹58 करोड़
- अन्य स्टेपल्स और मिक्स प्रोडक्ट्स: ₹159 करोड़
यह आंकड़े बताते हैं कि कंपनी का फोकस डेली-यूज ग्रोसरी पर ज्यादा है, जो छोटे शहरों में स्थिर मांग वाला सेगमेंट है।
📈 कुल आय ₹551 करोड़ तक पहुंची
कंपनी को डिपॉजिट और निवेश पर ब्याज से ₹17 करोड़ की अतिरिक्त आय भी हुई। इसके बाद FY25 में कुल आय ₹551 करोड़ रही, जो FY24 में ₹460 करोड़ थी।
📉 खर्च भी तेजी से बढ़े
हालांकि रेवेन्यू में बढ़ोतरी हुई, लेकिन खर्चों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
🧾 प्रमुख खर्च
- प्रोडक्ट खरीद लागत: ₹510 करोड़ (कुल खर्च का 72%) — 31% वृद्धि
- कर्मचारी लाभ खर्च: ₹82 करोड़ (10% की गिरावट)
- इसमें ₹16.5 करोड़ ESOP खर्च शामिल
- ट्रांसपोर्टेशन लागत: ₹56 करोड़ (स्थिर)
- अन्य खर्च (किराया, क्लाउड, होस्टिंग, इन्वेंट्री प्रावधान): ₹65 करोड़
कुल मिलाकर FY25 में कंपनी का कुल खर्च 15% बढ़कर ₹710 करोड़ हो गया।
🔴 घाटा जस का तस
Accel समर्थित Accel द्वारा निवेशित CityMall का घाटा लगभग स्थिर रहा।
- FY25 घाटा: ₹159 करोड़
- FY24 घाटा: ₹156 करोड़
हालांकि EBITDA मार्जिन में सुधार हुआ और यह -30.3% पर पहुंच गया, लेकिन ROCE गिरकर -57.46% हो गया।
यानी कंपनी अभी भी स्केल हासिल करने के बावजूद प्रॉफिटेबिलिटी की राह पर संघर्ष कर रही है।
📊 यूनिट इकॉनॉमिक्स और बैलेंस शीट
FY25 में कंपनी ने ₹1 कमाने के लिए ₹1.33 खर्च किए। यह दर्शाता है कि ऑपरेटिंग एफिशिएंसी में सुधार की अभी भी गुंजाइश है।
मार्च 2025 के अंत तक कंपनी के पास:
- कुल करंट एसेट्स: ₹368 करोड़
- कैश और बैंक बैलेंस: ₹57 करोड़
💵 अब तक $157 मिलियन से ज्यादा फंडिंग
CityMall ने अब तक $157 मिलियन से अधिक की फंडिंग जुटाई है। हाल ही में कंपनी ने $47 मिलियन की Series D फंडिंग जुटाई थी, जिसका नेतृत्व Accel ने किया।
इस राउंड में शामिल अन्य निवेशक थे:
- Waterbridge Ventures
- Elevation Capital
- Norwest Venture Partners
- General Catalyst
🔍 आगे की रणनीति क्या?
CityMall का फोकस अब स्पष्ट रूप से छोटे शहरों में मजबूत सप्लाई चेन और प्राइवेट लेबल ग्रोसरी ब्रांड बनाने पर है। सोशल कॉमर्स मॉडल की तुलना में ग्रोसरी-लेड अप्रोच ज्यादा स्थिर और दोहराने योग्य रेवेन्यू मॉडल प्रदान करता है।
हालांकि, कंपनी को प्रॉफिटेबिलिटी तक पहुंचने के लिए:
- प्रोक्योरमेंट कॉस्ट को कंट्रोल करना होगा
- लॉजिस्टिक्स एफिशिएंसी बढ़ानी होगी
- प्राइवेट लेबल मार्जिन सुधारने होंगे
📌 बड़ी तस्वीर
भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों में ई-कॉमर्स की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। लेकिन इस मार्केट में टिके रहने के लिए सिर्फ ग्रोथ नहीं, बल्कि मजबूत यूनिट इकॉनॉमिक्स भी जरूरी हैं।
CityMall ने स्केल तो हासिल कर लिया है, लेकिन अब असली परीक्षा प्रॉफिटेबिलिटी की है।
FY25 के आंकड़े यह दिखाते हैं कि कंपनी सही दिशा में कदम बढ़ा रही है, लेकिन घाटे को कम करना और स्थायी मुनाफा कमाना ही इसके अगले चरण की असली चुनौती होगी।
अगर कंपनी अपने खर्चों पर काबू पाती है और ग्रोसरी-लेड मॉडल को और मजबूत करती है, तो आने वाले वर्षों में यह छोटे शहरों की ई-कॉमर्स रेस में एक अहम खिलाड़ी बन सकती है। 🚀
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