💼 Bluecopa ने जुटाए $7.5 Million,

Bluecopa

Hyderabad-based finance automation startup Bluecopa ने अपने Series A funding round में $7.5 million (करीब Rs 62 करोड़) जुटाए हैं। इस funding round का नेतृत्व Singapore-headquartered Analog Partners ने किया है, जबकि मौजूदा निवेशकों Blume Ventures और Dallas Venture Capital ने भी इसमें हिस्सा लिया है।

इस नए निवेश के साथ Bluecopa की अब तक की total funding $11.6 million तक पहुंच गई है। नवंबर 2024 में इस funding round को लेकर Entrackr ने एक्सक्लूसिव तौर पर रिपोर्ट किया था।

यह निवेश ऐसे समय में आया है जब enterprises तेजी से AI-driven finance automation की ओर बढ़ रहे हैं और manual व batch-based accounting processes को replace करने की मांग बढ़ रही है।


🚀 Funding का इस्तेमाल कहां होगा?

Bluecopa ने बताया कि Series A round से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल मुख्य रूप से तीन बड़े क्षेत्रों में किया जाएगा:

  • Autonomous finance capabilities को और मजबूत बनाने के लिए
  • APAC, North America और Middle East जैसे international markets में expansion
  • Large transaction volumes संभालने वाली finance teams के लिए specialised AI models तैयार करने में निवेश

कंपनी का मानना है कि आने वाले वर्षों में finance teams का रोल सिर्फ reporting तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि real-time decision-making में भी अहम होगा—और Bluecopa उसी बदलाव को enable करना चाहता है।


🤖 Bluecopa क्या करता है?

2021 में स्थापित Bluecopa एक AI-native finance automation platform बनाता है, जो enterprises के core finance workflows को automate करता है।

इस platform के जरिए कंपनियां automate कर सकती हैं:

  • 🔄 Reconciliations
  • 💰 Receivables और Payables
  • 📊 Financial reporting
  • 📑 Month-end और year-end financial close

Bluecopa का दावा है कि उसका system traditional batch-based और manual finance processes को पूरी तरह replace करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसका लक्ष्य है continuous, real-time और audit-ready finance operations उपलब्ध कराना।


📉 Manual Processes से छुटकारा

आज भी कई बड़ी कंपनियों में finance teams को:

  • Manual reconciliations
  • Spreadsheet-based tracking
  • Delayed reporting
  • Month-end close में कई-कई दिन या हफ्ते

जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

Bluecopa का platform इन समस्याओं को हल करने के लिए AI और automation का इस्तेमाल करता है। यह system transactions को continuously monitor करता है, mismatches को automatically identify करता है और काफी हद तक human intervention की जरूरत खत्म कर देता है।


📈 Growth के मजबूत संकेत

Bluecopa के अनुसार, पिछले एक साल में कंपनी ने:

  • 5x से ज्यादा revenue growth दर्ज किया
  • Customers की संख्या में 3x बढ़ोतरी की

यह growth इस बात का संकेत है कि enterprises तेजी से finance automation solutions को adopt कर रहे हैं, खासकर तब जब transaction volumes बढ़ते जा रहे हैं।


🏢 Enterprise Customers का मजबूत पोर्टफोलियो

Bluecopa का कहना है कि उसके enterprise customers में शामिल हैं:

  • Large listed companies
  • Private enterprises

और ये कंपनियां कई sectors से आती हैं, जैसे:

  • 🛒 Ecommerce
  • 🏬 Retail
  • 🚚 Logistics
  • ✈️ Travel
  • 🏦 Financial services

High-volume transaction वाले इन sectors में finance accuracy और speed बेहद अहम होती है, जहां Bluecopa की automation capabilities काम आती हैं।


⏱️ Customers को क्या फायदे मिले?

Bluecopa के platform का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों ने कई tangible benefits देखे हैं:

  • Shorter close cycles – यानी month-end और year-end closing में कम समय
  • Higher process efficiency – finance teams का productivity level बढ़ा
  • Manual errors में sharp reduction
  • Near real-time financial reporting

कंपनी का दावा है कि उसका platform reconciliations का बड़ा हिस्सा खुद-ब-खुद automate कर देता है, जिससे finance teams strategic कामों पर ज्यादा फोकस कर पाती हैं।


🌍 Global Expansion की तैयारी

Series A funding के बाद Bluecopa का अगला बड़ा फोकस होगा international expansion

  • APAC region में India के अलावा Southeast Asia और Australia जैसे markets
  • North America, जहां enterprise SaaS adoption काफी mature है
  • Middle East, जहां तेजी से digital transformation हो रहा है

इन markets में Bluecopa finance teams के लिए localized और regulation-ready solutions पेश करने की योजना बना रहा है।


🧠 Finance के लिए Specialised AI Models

Bluecopa इस funding का एक बड़ा हिस्सा specialised AI models बनाने में लगाएगा। ये models खासतौर पर उन finance teams के लिए होंगे:

  • जो रोजाना लाखों transactions handle करती हैं
  • जिन्हें accuracy और compliance की सख्त जरूरत होती है
  • जिनके लिए real-time visibility critical है

कंपनी का मानना है कि generic AI tools की बजाय finance-specific AI ही enterprises के लिए long-term value create कर सकता है।


🔮 आगे का रास्ता

Bluecopa का यह Series A funding round यह दिखाता है कि:

  • AI-driven finance automation एक fast-growing category बन चुकी है
  • Enterprises अब finance में भी autonomous systems अपनाने को तैयार हैं
  • Indian SaaS startups global markets में serious presence बना रहे हैं

अगर Bluecopa अपनी technology और global expansion strategy को सही तरीके से execute करता है, तो आने वाले वर्षों में यह enterprise finance automation space का एक बड़ा नाम बन सकता है 💼🚀

Read more :🏗️ Infra.Market का FY25 प्रदर्शन Revenue में 27% की मजबूत Growth

🏗️ Infra.Market का FY25 प्रदर्शन Revenue में 27% की मजबूत Growth

Infra.Market

Building materials sector की unicorn कंपनी Infra.Market, जिसने हाल ही में Rs 5,000 करोड़ के IPO के लिए confidential route से अपने papers फाइल किए हैं, ने FY25 में एक बार फिर strong top-line growth दर्ज की है। कंपनी का gross revenue साल-दर-साल 27% बढ़ा, हालांकि इस दौरान बढ़ते खर्चों और non-operating income में गिरावट के चलते net profit में 42% की गिरावट देखने को मिली।

Registrar of Companies (RoC) के पास दाखिल consolidated financial statements के अनुसार, Infra.Market का gross revenue FY25 में बढ़कर Rs 18,472 करोड़ हो गया, जो FY24 में Rs 14,530 करोड़ था। डॉलर टर्म्स में यह करीब $2.1 billion के बराबर है।


🧱 Infra.Market का Business Model

Infra.Market एक technology-enabled building materials platform है, जो construction और infrastructure ecosystem को end-to-end solutions प्रदान करता है। कंपनी तीन मुख्य verticals में काम करती है:

  1. Structural Products
  2. Finishing Products
  3. Lifestyle Products

इसके अलावा, product sales से जुड़े कई allied services भी कंपनी की revenue का हिस्सा हैं।


📊 Structural Products बने सबसे बड़े Revenue Driver

FY25 में भी structural products Infra.Market के लिए सबसे बड़ा revenue contributor बने रहे।

  • Structural products में शामिल हैं:
    • Concrete
    • अन्य construction materials
  • इस vertical से FY25 में
    • Rs 11,176 करोड़ का revenue आया
    • जो कुल revenue का 60% से ज्यादा है

यह दर्शाता है कि core construction materials अभी भी कंपनी की growth की backbone हैं।


🚿 Finishing Products और Lifestyle Segment की भूमिका

🔹 Finishing Products

Finishing products vertical में शामिल हैं:

  • Plumbing solutions
  • Walling और roofing products
  • Plywood और laminates

FY25 में इस segment से:

  • Rs 1,924 करोड़ का revenue दर्ज किया गया

🔹 Lifestyle Products

Lifestyle products segment में शामिल हैं:

  • Modular kitchens
  • Consumer appliances
  • Paints और related offerings

FY25 में lifestyle segment से:

  • Rs 2,487 करोड़ की कमाई हुई

यह segment relatively high-margin माना जाता है और future growth के लिए strategic रूप से अहम है।


🚧 Allied Services से भी मजबूत योगदान

Product sales के अलावा Infra.Market कई allied services भी प्रदान करती है, जैसे:

  • Infrastructure projects के लिए construction services
  • Equipment rental
  • Exterior painting services

इसके साथ ही:

  • Construction equipment
  • Spare parts
  • Chemicals

इन सभी से FY25 में:

  • Rs 2,884 करोड़ का अतिरिक्त revenue आया

इसके अलावा, कंपनी ने Rs 84 करोड़ की non-operating income भी बुक की, जिससे:

  • Total income FY25 में Rs 18,556 करोड़ तक पहुंच गई

FY24 में non-operating income Rs 213 करोड़ थी, यानी इसमें करीब 60% की गिरावट आई।


💸 Expenses में तेज बढ़ोतरी

FY25 में Infra.Market की revenue growth के साथ-साथ expenses भी लगभग उसी रफ्तार से बढ़े, जिसने profitability पर दबाव डाला।

🔧 Procurement Cost

  • Construction material और equipment की खरीद
  • Total expenses का 75% हिस्सा
  • FY25 में Rs 13,751 करोड़

👨‍💼 Employee Cost

  • Employee benefit expenses में 41% की बढ़ोतरी
  • FY25 में Rs 564 करोड़
  • इसमें Rs 40 करोड़ का ESOP cost शामिल है

💳 Finance और Logistics Cost

  • Finance cost:
    • 45% बढ़कर Rs 805 करोड़
  • Freight और forwarding expenses:
    • 47% बढ़कर Rs 631 करोड़

📑 Other Overheads

  • Power & fuel
  • Legal और professional fees
  • Traveling expenses
  • Financial assets पर impairment loss

इन सबको मिलाकर:

  • Total expenses FY25 में Rs 18,250 करोड़
  • FY24 में यह Rs 14,272 करोड़ था

📉 Profit में 42% की गिरावट

हालांकि FY25 में revenue और overall expenses दोनों में समान गति से बढ़ोतरी हुई, लेकिन कुछ factors ने bottom line को प्रभावित किया:

  • Non-operating income में 60% की गिरावट
  • Finance cost और depreciation जैसे overheads में तेज बढ़ोतरी

इन कारणों से:

  • FY25 net profit घटकर Rs 220 करोड़ रह गया
  • FY24 में यह Rs 378 करोड़ था
  • यानी करीब 42% की गिरावट

📈 Margins और Key Ratios

Profitability पर दबाव के बावजूद, Infra.Market के कुछ operational metrics मजबूत रहे:

  • EBITDA margin:
    • FY25 में बढ़कर 7.97%
  • ROCE (Return on Capital Employed):
    • 12.11%
  • Expense-to-operating-revenue ratio (Unit Economics):
    • Rs 0.99, जो पिछले साल के बराबर रहा

यह दिखाता है कि company की core unit economics stable बनी हुई है।


⚔️ Competition में Infra.Market की Position

Infra.Market एक highly competitive space में काम करती है, जहां इसके प्रमुख competitors हैं:

  • OfBusiness
  • Zetwerk
  • Moglix

FY25 के comparison में:

  • Zetwerk: Rs 12,798 करोड़ revenue
  • OfBusiness (FY24): Rs 19,296 करोड़
  • Moglix (FY24): Rs 4,964 करोड़

अन्य कंपनियों के FY25 numbers अभी सामने नहीं आए हैं।


🚀 IPO से पहले क्या संकेत मिलते हैं?

Infra.Market के FY25 results बताते हैं कि:

  • Company growth mode में है
  • Revenue scale तेजी से बढ़ रहा है
  • लेकिन rising costs और financing expenses profitability पर दबाव डाल रहे हैं

IPO से पहले निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी:

  • Costs को कैसे control करती है
  • Margins को कैसे बेहतर बनाती है

अगर Infra.Market operational efficiency सुधारने में सफल रहती है, तो इसका Rs 5,000 करोड़ का IPO Indian construction-tech space का एक बड़ा event बन सकता है 🏗️📈

Read more :🏭 Zetwerk का FY25 Performance Revenue में 11% की गिरावट

🏭 Zetwerk का FY25 Performance Revenue में 11% की गिरावट

Zetwerk

भारत की leading B2B e-commerce unicorn Zetwerk, जो कथित तौर पर IPO की तैयारी में है, ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में mixed financial performance दर्ज की है। जहां एक ओर कंपनी के revenue में गिरावट देखने को मिली, वहीं दूसरी ओर Zetwerk ने अपने losses को काफी हद तक कम करने में सफलता हासिल की है

Registrar of Companies (RoC) से प्राप्त consolidated financial statements के अनुसार, Zetwerk का gross revenue FY25 में 11% घटकर Rs 12,798 करोड़ रह गया, जो FY24 में Rs 14,443 करोड़ था।

हालांकि top line पर दबाव रहा, लेकिन बेहतर cost control और operational efficiency के चलते कंपनी की bottom line में सुधार देखने को मिला।


🧱 Zetwerk क्या करता है?

Zetwerk एक B2B manufacturing और construction marketplace है, जो enterprises को manufacturing, procurement और project execution से जुड़ी सेवाएं देता है।

कंपनी की revenue streams मुख्य रूप से तीन हिस्सों में बंटी हैं:

  • Trading activities
  • Manufacturing services
  • Construction और project contracts

Zetwerk भारत के साथ-साथ international markets में भी heavy engineering, renewables, infrastructure और capital goods sectors में काम करता है।


📉 Trading Revenue में तेज गिरावट

FY25 में Zetwerk की revenue mix में सबसे बड़ा झटका trading activities को लगा।

  • Trading revenue, जो कुल income का 58% हिस्सा था,
  • 20% गिरकर Rs 7,706 करोड़ रह गया
  • FY24 में यह आंकड़ा कहीं ज्यादा मजबूत था

Experts का मानना है कि global demand slowdown और कुछ large project deferments के चलते trading volumes पर असर पड़ा।


🏗 Manufacturing Services बनी Growth Driver

जहां trading segment दबाव में रहा, वहीं manufacturing services Zetwerk के लिए एक bright spot बनकर उभरा।

  • Manufacturing services से revenue
  • 33.5% की strong growth के साथ Rs 2,682 करोड़ तक पहुंच गया

यह संकेत देता है कि Zetwerk धीरे-धीरे higher-margin और value-added services की ओर शिफ्ट कर रहा है, जो long-term profitability के लिए अहम मानी जाती हैं।


🚧 Construction Projects और Other Income

  • Construction और project contracts से income
    • 19% घटकर Rs 2,242 करोड़ रही
  • FY25 में other income रहा
    • Rs 535 करोड़

Non-operating income को जोड़ने के बाद:

  • Zetwerk की total income FY25 में Rs 12,981 करोड़ रही
  • FY24 में यह Rs 14,612 करोड़ थी

💸 Expenses में 12% की कटौती

FY25 में Zetwerk का सबसे बड़ा positive factor रहा expenses में तेज गिरावट

🔧 Material Cost

  • Total expense का 85% से ज्यादा हिस्सा
  • FY25 में 17% घटकर Rs 11,232 करोड़
  • FY24 में यह Rs 13,467 करोड़ था

👨‍💼 Employee और Subcontracting Cost

  • Employee benefit expenses
    • 12% बढ़कर Rs 517 करोड़
  • Subcontracting expenses
    • 16% बढ़कर Rs 250 करोड़

💳 Finance और Other Costs

  • Finance cost लगभग stable रहा
    • Rs 450 करोड़
  • Other expenses
    • Rs 670 करोड़

➡️ कुल मिलाकर, Zetwerk का total expense FY25 में 12% घटकर Rs 13,196 करोड़ हो गया, जो FY24 में Rs 15,001 करोड़ था।


📊 Losses में 60% की भारी गिरावट

GMV में गिरावट के चलते procurement costs कम हुए और exceptional items में sharp decline देखने को मिला। इसका सीधा असर कंपनी के losses पर पड़ा।

  • FY24 net loss: Rs 918 करोड़
  • FY25 net loss: Rs 371 करोड़
  • यानी करीब 60% की loss reduction

इतना ही नहीं, Zetwerk ने FY25 में:

  • Positive EBITDA of Rs 145 करोड़ दर्ज किया

Key profitability metrics में भी सुधार हुआ:

  • ROCE: -0.68%
  • EBITDA margin: 1.13%

यह पहली बार है जब Zetwerk EBITDA level पर profitability के करीब पहुंचती दिखी।


💰 Balance Sheet मजबूत, Cash Position बेहतर

FY25 में Zetwerk की balance sheet और मजबूत हुई:

  • Cash और bank balance:
    • FY25: Rs 1,908 करोड़
    • FY24: Rs 1,150 करोड़
  • Current assets:
    • FY25 में Rs 7,840 करोड़

Strong cash reserves Zetwerk को IPO से पहले strategic flexibility देती हैं।


💼 Funding और Investors

TheKredible के अनुसार, Zetwerk अब तक:

  • $889 million (करीब Rs 7,400 करोड़) की funding जुटा चुका है

इसके प्रमुख investors में शामिल हैं:

  • Greenoaks
  • Peak XV Partners
  • Lightspeed Venture Partners
  • Accel

ये सभी global institutional investors Zetwerk की long-term manufacturing vision पर भरोसा दिखा चुके हैं।


🚀 IPO की तैयारी तेज

April 2024 में Zetwerk ने संकेत दिया था कि वह 12–24 महीने के भीतर public listing की तैयारी कर रहा है।

Reports के मुताबिक:

  • Zetwerk इस साल
  • Confidential route के जरिए DRHP फाइल कर सकता है
  • Target IPO size: $750 million

अगर यह IPO होता है, तो यह India-based manufacturing company का सबसे बड़े public market debuts में से एक हो सकता है।


🔮 आगे क्या?

FY25 के numbers दिखाते हैं कि:

  • Zetwerk growth के बजाय efficiency और profitability पर focus कर रहा है
  • Manufacturing services जैसे high-margin segments भविष्य की growth strategy का core बन सकते हैं

IPO से पहले revenue volatility चिंता का विषय हो सकता है, लेकिन losses में तेज गिरावट और मजबूत cash position निवेशकों के लिए positive संकेत हैं।

Read more :📈 Kissht की IPO को SEBI की मंजूरी

📈 Kissht की IPO को SEBI की मंजूरी

Kissht

भारत के capital markets regulator SEBI (Securities and Exchange Board of India) ने OnEMI Technology Solutions के IPO plans को मंजूरी दे दी है। OnEMI, तेजी से बढ़ते digital lending platform Kissht की parent company है। Regulatory filings के अनुसार, यह approval उस समय आया है जब fintech sector में public listing को लेकर sentiment दोबारा मजबूत होता दिख रहा है।

Kissht ने अपना Draft Red Herring Prospectus (DRHP) पिछले साल SEBI के पास दाखिल किया था। अब SEBI की हरी झंडी मिलने के बाद कंपनी भारतीय शेयर बाजार में entry के एक कदम और करीब पहुंच गई है।


💰 IPO का पूरा Structure: Fresh Issue + OFS

DRHP के अनुसार, Kissht का प्रस्तावित IPO दो हिस्सों में होगा:

🆕 Fresh Issue

  • Rs 1,000 करोड़ तक का fresh issue
  • इस पैसे का इस्तेमाल कंपनी अपने business expansion और capital needs के लिए करेगी

🔄 Offer for Sale (OFS)

  • मौजूदा shareholders करीब 88 लाख (8.8 million) shares बेचेंगे
  • इससे early investors को partial exit का मौका मिलेगा

इसके अलावा, कंपनी pre-IPO placement पर भी विचार कर सकती है। अगर pre-IPO funding होती है, तो fresh issue का size उसी अनुपात में कम किया जा सकता है।


🧑‍💼 कौन-कौन Investors बेचेंगे Shares?

IPO के OFS हिस्से में कई प्रमुख निवेशक अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेचेंगे:

  • Ammar Sdn Bhd:
    • करीब 20.89 लाख shares बेचने की योजना
  • Vertex Ventures:
    • लगभग 39.4 लाख shares का OFS
  • अन्य selling shareholders में शामिल हैं:
    • Ventureast Proactive Fund
    • Endiya Seed Co-creation Fund
    • AION Advisory

इनमें से कई investors पिछले 9–10 सालों से Kissht के साथ जुड़े हुए हैं, और IPO के जरिए partial exit लेना चाहते हैं।


🏦 Fresh Issue का पैसा कहां इस्तेमाल होगा?

DRHP में साफ किया गया है कि fresh issue से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल मुख्य रूप से इन कामों में होगा:

  • NBFC arm – Si Creva Capital Services की capital base मजबूत करने के लिए
  • Kissht के lending business का विस्तार
  • Technology, risk management और data analytics में निवेश
  • General corporate purposes, जैसे operations और compliance

NBFC arm को मजबूत करना Kissht के लिए बेहद अहम है, क्योंकि digital lending business में regulatory capital एक बड़ा factor होता है।


🚀 Kissht का Business Model क्या है?

2015 में Ranvir Singh और Krishnan Vishwanathan द्वारा स्थापित Kissht एक digital lending platform है, जो मुख्य रूप से small-ticket consumer loans देता है।

कंपनी ने aggressive scale-up किया है, खासकर merchant partnerships के जरिए। Kissht आज कई sectors में मौजूद merchants के साथ काम करता है, जैसे:

  • 📱 Electronics
  • 👗 Fashion
  • ✈️ Travel
  • 🛍️ Lifestyle और अन्य consumer categories

इन partnerships के जरिए Kissht customers को instant credit और flexible repayment options देता है।


👥 User Base और Growth Metrics

March 2025 तक Kissht के scale से जुड़ी अहम जानकारियां:

  • Registered users: 5.32 करोड़ (53.2 million)
  • Total customers served: 90 लाख से ज्यादा
  • Active borrowers: करीब 19 लाख (1.9 million)

यह आंकड़े दिखाते हैं कि Kissht भारत के leading consumer lending platforms में से एक बन चुका है, खासकर Tier-2 और Tier-3 cities में।


📊 Financial Performance: Revenue में गिरावट, लेकिन Profit बरकरार

Financials की बात करें तो Kissht के FY25 के numbers mixed picture दिखाते हैं:

  • FY25 operating revenue: Rs 1,337 करोड़
  • FY24 operating revenue: Rs 1,674 करोड़

यानी revenue में साल-दर-साल गिरावट देखने को मिली। हालांकि इसके बावजूद:

  • FY25 net profit: Rs 160 करोड़

Experts का मानना है कि कंपनी ने growth से ज्यादा profitability और risk control पर focus किया, जिसका असर revenue पर दिखा लेकिन bottom line positive रही।


🏦 IPO Managers और Registrar

Kissht के IPO को manage करने के लिए कई बड़े investment banks को चुना गया है:

📌 Book Running Lead Managers (BRLMs)

  • JM Financial
  • HSBC Securities
  • Nuvama Wealth
  • SBI Capital Markets
  • Centrum Capital

🗂 Registrar

  • KFin Technologies

इन नामों से साफ है कि IPO को strong institutional backing मिल रही है।


📉 Fintech IPOs की वापसी?

Kissht का IPO ऐसे समय आ रहा है जब Indian fintech ecosystem में public listings को लेकर sentiment धीरे-धीरे बेहतर हो रहा है। पिछले कुछ वर्षों में volatility और regulatory tightening के चलते fintech IPOs ठंडे पड़े थे।

Market experts मानते हैं कि:

  • Profit-making fintechs
  • Strong underwriting और NBFC backing वाली कंपनियां
  • और sustainable unit economics वाले models

अब दोबारा IPO window explore कर रहे हैं।


🔮 आगे क्या?

SEBI से approval मिलने के बाद अब Kissht का अगला कदम होगा:

  • IPO timeline final करना
  • Market conditions के हिसाब से pricing तय करना

अगर market sentiment supportive रहता है, तो Kissht का IPO 2025 के बड़े fintech listings में से एक बन सकता है।

Digital lending space में बढ़ती competition के बीच, public markets Kissht के लिए growth capital और credibility दोनों लेकर आ सकते हैं 🚀

Read more :💻 BrowserStack का बड़ा ESOP Buyback

💻 BrowserStack का बड़ा ESOP Buyback

BrowserStack

मुंबई मुख्यालय वाली software testing platform BrowserStack ने अपने employees और शुरुआती investors को liquidity देने के लिए $125 million (करीब Rs 1,000 करोड़) का share buyback programme लॉन्च करने की घोषणा की है। यह कदम ऐसे समय पर आया है, जब global tech ecosystem में ESOP buyback activity काफी धीमी देखी जा रही है।

इस buyback programme के तहत BrowserStack के stakeholders, जिनमें करीब 500 कर्मचारी (employees) शामिल हैं, अपनी shares कंपनी को वापस बेच सकेंगे। इससे employees को cash liquidity मिलेगी और शुरुआती निवेशकों को partial exit का मौका मिलेगा।


🧑‍💼 Employees को मिलेगा बड़ा फायदा

Economic Times की एक रिपोर्ट के अनुसार, total $125 million buyback amount का लगभग 50% हिस्सा employees के लिए reserved रखा गया है। इसका मतलब है कि BrowserStack अपने team members को इस liquidity event का सबसे बड़ा beneficiary बनाना चाहता है।

बाकी का हिस्सा कंपनी के early investors, जैसे कि Accel, को जाएगा। Accel BrowserStack के शुरुआती और प्रमुख निवेशकों में से एक रहा है।

कंपनी का कहना है कि इस नए buyback के साथ मिलाकर, अब तक तीन buyback cycles में shareholders को लौटाई गई कुल capital करीब $275 million तक पहुंच जाएगी। यह भारतीय SaaS ecosystem में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।


📈 BrowserStack का ESOP Buyback History

BrowserStack इससे पहले भी ESOP buyback programmes चला चुका है:

  • February 2021: पहला ESOP buyback programme
  • September 2021: दूसरा ESOP buyback, जिसकी value थी $50 million

इन buybacks ने BrowserStack को employee-friendly startup के रूप में मजबूत पहचान दिलाई। खास बात यह रही कि इन liquidity events ने employees को बिना IPO के भी wealth creation का मौका दिया।


🦄 Unicorn बनने की कहानी

BrowserStack ने June 2021 में unicorn status हासिल किया था। उस समय कंपनी ने Series B funding round में $200 million जुटाए थे, और इसकी valuation $4 billion तक पहुंच गई थी।

यह funding round SaaS और developer tools segment में भारत की सबसे बड़ी deals में से एक मानी गई थी। इसके बाद BrowserStack ने international expansion और product innovation पर काफी जोर दिया।


🏗️ Company Profile: BrowserStack क्या करता है?

2011 में स्थापित BrowserStack एक cloud-based software testing platform है, जो developers और QA teams को websites और mobile applications को test करने की सुविधा देता है।

BrowserStack की मदद से कंपनियां:

  • अलग-अलग devices
  • विभिन्न operating systems
  • और multiple browsers

पर अपने apps और websites को test कर सकती हैं—वह भी बिना physical devices खरीदे।

आज BrowserStack दुनिया भर में:

  • रोजाना 20 लाख से ज्यादा tests run करता है
  • 17 global data centres के जरिए services देता है

🌍 Global Presence और Customers

BrowserStack की services का इस्तेमाल दुनियाभर की बड़ी और छोटी tech कंपनियां करती हैं। कंपनी के offices:

  • Mumbai
  • San Francisco
  • New York
  • Dublin

में मौजूद हैं। Mumbai के अलावा, Dublin और New York इसके प्रमुख international hubs माने जाते हैं।

BrowserStack का दावा है कि वह दुनिया के leading software testing platforms में से एक है, और developers के लिए mission-critical tools प्रदान करता है।


🔧 Strategic Acquisitions से Product मजबूत

BrowserStack ने पिछले कुछ सालों में अपनी capabilities बढ़ाने के लिए कई acquisitions भी किए हैं:

📌 Requestly Acquisition

  • May 2024 में BrowserStack ने
  • Requestly को acquire किया
  • यह tool HTTP interception, API mocking और debugging के लिए इस्तेमाल होता है
  • Deal amount undisclosed रहा

🐞 Bird Eats Bug Acquisition

  • 2024 में ही BrowserStack ने
  • Berlin-based Bird Eats Bug को $20 million में acquire किया
  • यह platform bug detection और reporting पर focus करता है

इन acquisitions से BrowserStack का product suite और ज्यादा comprehensive बन गया है।


📉 2025 में ESOP Buybacks रहे सुस्त

हालांकि BrowserStack का buyback announcement positive है, लेकिन overall ecosystem में 2025 के दौरान ESOP buyback activity काफी muted रही है।

  • 2025: ESOP buybacks सिर्फ $75 million से थोड़ा ज्यादा
  • 2024: करीब $190 million
  • 2023: रिकॉर्ड $802 million
  • 2022: करीब $200 million
  • 2021: लगभग $440 million

Experts का मानना है कि global funding slowdown और IPO market की अनिश्चितता के चलते startups cautious approach अपना रहे हैं।


🔮 आगे क्या?

BrowserStack का यह $125 million buyback यह दिखाता है कि कंपनी:

  • financially strong है
  • long-term profitability पर confident है
  • और employees को wealth creation का real benefit देना चाहती है

IPO के बिना भी लगातार ESOP liquidity events देना BrowserStack को भारतीय SaaS ecosystem में एक benchmark company बनाता है।

आने वाले समय में, अगर global tech spending और enterprise demand में सुधार होता है, तो BrowserStack जैसे mature SaaS startups के लिए IPO या बड़े strategic moves की संभावनाएं भी बन सकती हैं 🚀

Read more :⚡ Ampere Vehicles की वापसी के संकेत,

⚡ Ampere Vehicles की वापसी के संकेत,

Ampere

भारत की electric vehicle (EV) इंडस्ट्री में काम करने वाली Ampere Vehicles ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में recovery के साफ संकेत दिए हैं। FY24 में जहां कंपनी का revenue करीब 46% तक गिर गया था, वहीं FY25 में कंपनी ने single-digit growth दर्ज की है और साथ ही अपने losses को भी काफी हद तक कम किया है

Ampere, जो कि Greaves Electric Mobility के अंतर्गत आने वाला एक प्रमुख EV brand है, मुख्य रूप से electric scooters और electric three-wheelers का निर्माण करती है। FY25 के financial results से यह साफ है कि कंपनी ने operational efficiency सुधारने और खर्चों को control करने की दिशा में कदम उठाए हैं।


📊 FY25 में Revenue में सुधार

Registrar of Companies (RoC) से प्राप्त financial statements के अनुसार, Ampere की operating revenue FY25 में 8% बढ़कर Rs 659 crore पहुंच गई, जो FY24 में Rs 612 crore थी।

कंपनी की पूरी कमाई उसके EV products की बिक्री से ही आती है। अगर इसमें Rs 16 crore की other income को जोड़ दिया जाए, तो Ampere की total income FY25 में Rs 675 crore रही, जबकि FY24 में यह Rs 641 crore थी।

हालांकि growth बहुत तेज नहीं रही, लेकिन पिछले साल की भारी गिरावट के बाद यह आंकड़ा कंपनी के लिए एक positive turnaround signal माना जा रहा है।


🏭 Ampere का Business Model

Ampere Vehicles, Greaves Electric Mobility की एक प्रमुख subsidiary है और यह mass-market electric mobility पर फोकस करती है। कंपनी के electric scooters खासतौर पर affordable pricing, urban commuting और last-mile connectivity को ध्यान में रखकर डिजाइन किए जाते हैं।

इसके अलावा Ampere electric three-wheelers भी बनाती है, जो commercial और logistics use cases में इस्तेमाल किए जाते हैं।


💸 Expenses में क्या बदला?

FY25 में Ampere के खर्चों (expenses) में हल्की बढ़ोतरी देखने को मिली, लेकिन cost structure में कुछ अहम बदलाव भी हुए।

🔧 Raw Material Cost

  • कुल expenses का 64% हिस्सा material cost का रहा
  • यह खर्च FY25 में 12% बढ़कर Rs 589 crore हो गया
  • FY24 में यह आंकड़ा Rs 527 crore था

👨‍💼 Employee Cost

  • Employee benefit expenses में 22% की गिरावट
  • FY25 में यह घटकर Rs 79 crore रह गया

📢 Marketing और Advertising

  • Advertising और promotional expenses में 30% की बढ़ोतरी
  • FY25 में यह खर्च Rs 43 crore रहा

🏗 Depreciation और Other Costs

  • Depreciation cost में 41% की तेज बढ़ोतरी, जो Rs 45 crore तक पहुंच गई
  • Warranty claims, finance cost और अन्य overheads मिलाकर Rs 205 crore का अतिरिक्त खर्च हुआ

➡️ कुल मिलाकर, Ampere का total expense FY25 में 7% बढ़कर Rs 918 crore हो गया, जो FY24 में Rs 857 crore था।


📉 Losses में 65% की बड़ी कटौती

FY25 की सबसे बड़ी positive highlight रही losses में भारी गिरावट

  • FY24 में Ampere का net loss था Rs 691.5 crore
  • FY25 में यह घटकर Rs 240 crore रह गया
  • यानी करीब 65% की loss reduction

इसके साथ ही कंपनी के key profitability indicators में भी सुधार देखने को मिला:

  • ROCE सुधरकर -85.27% हुआ
  • EBITDA margin बेहतर होकर -30.50% पर पहुंचा

हालांकि कंपनी अभी भी loss में है, लेकिन margins का सुधरना future profitability की ओर इशारा करता है।


💰 Unit Economics और Cash Position

FY25 में Ampere ने हर Rs 1 की revenue कमाने के लिए Rs 1.39 खर्च किए, जो FY24 में Rs 1.40 था। यह छोटा लेकिन महत्वपूर्ण improvement है।

  • मार्च 2025 तक कंपनी के पास
    • Cash और bank balance: Rs 25 crore
    • Current assets: Rs 263 crore

यह दर्शाता है कि कंपनी की liquidity position stable बनी हुई है।


🛵 EV Sales और Market Position

Electric two-wheeler (E2W) segment में दिसंबर महीने के आंकड़ों के अनुसार:

  • Greaves Electric Mobility (Ampere brand) ने
    • 4,335 units की बिक्री की
    • Market share: 4.66%
    • Position: 6th

वहीं segment leader TVS Motor ने:

  • 24,317 units बेची
  • Market share: 26.14%

इससे साफ है कि competition काफी tough है, लेकिन Ampere अभी भी top players की list में बनी हुई है।


🚀 IPO की तैयारी में Greaves Electric Mobility

दिसंबर 2024 में Ampere की parent company Greaves Electric Mobility ने SEBI के पास अपना Draft Red Herring Prospectus (DRHP) फाइल किया था।

IPO की मुख्य बातें:

  • Fresh issue: Rs 1,000 crore तक
  • Offer for Sale (OFS): 18.94 crore equity shares
  • कुल IPO size करीब $119 million

हाल ही में कंपनी को इस IPO के लिए SEBI से final approval भी मिल चुका है, जिससे आने वाले समय में EV सेक्टर में निवेशकों की रुचि और बढ़ सकती है।


🔮 आगे का रास्ता

FY25 के numbers बताते हैं कि Ampere Vehicles धीरे-धीरे recovery mode में आ रही है। Revenue growth, losses में sharp reduction और IPO की तैयारी यह संकेत देती है कि कंपनी आने वाले वर्षों में अपनी market position मजबूत करने की कोशिश करेगी।

अगर EV adoption और government support इसी तरह बना रहता है, तो Ampere के लिए FY26 और आगे के साल ज्यादा stable और growth-oriented हो सकते हैं ⚡

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🇮🇳 भारत के Top Startups 2026 वह कंपनियाँ जिनपर नजर रखनी चाहिए

Top Startups

भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम लगातार तेजी से बदल रहा है। 2025 के अंत तक देखा गया कि कुछ कंपनियाँ भारी फंडिंग और बड़े ग्रोथ ट्रैक पर हैं, जबकि कुछ ने अपने वर्टिकल में नया नियम बनाया है। Failory.com की “Top 100 India Startups to Watch in 2026” सूची से पता चलता है कि भारत में स्टार्टअप क्रांति अभी भी आगे बढ़ रही है, जिसमें कई कंपनियाँ टेक्नोलॉजी, ई-कॉमर्स, फिनटेक और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टरों में नेतृत्व कर रही हैं।

आज हम इसी सूची के सबसे महत्वपूर्ण और हाई-पोटेंशियल भारतीय स्टार्टअप्स का एक आसान, विस्तृत परिचय पेश करेंगे। आइए जानते हैं कौन-कौन हैं 2026 में ध्यान देने योग्य भारतीय स्टार्टअप और क्यों वे महत्वपूर्ण हैं।


🔟 2026 के टॉप स्टार्टअप्स — एक नजर

1) Zepto

Zepto एक क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है जो किराना और रोज़ाना उपयोग की चीज़ों को कुछ ही मिनटों में घर तक पहुंचाता है। इसकी तेज़ डिलीवरी सेवा ने युवा उपभोक्ताओं में इसे बेहद लोकप्रिय बनाया है। Zepto ने अपने बिजनेस मॉडल और फास्ट इन्वेंटरी नेटवर्क से निवेशकों का ध्यान खींचा है।


2) Polygon

Polygon एक ब्लॉकचेन इंफ्रास्ट्रक्चर स्टार्टअप है। यह Ethereum नेटवर्क की scalability (तेज़ और सस्ते ट्रांज़ैक्शन) में मदद करता है और डेवलपर्स को Web3 एप्लिकेशन बनाने के लिए प्लेटफॉर्म देता है। यह Web3 / ब्लॉकचेन के बढ़ते ट्रेंड में एक महत्वपूर्ण नाम है।


3) blinkit

Blinkit भी एक क्विक-डिलीवरी प्लेटफॉर्म है जिस पर लोग घर बैठे कुछ ही देर में groceries और essentials ऑर्डर कर सकते हैं। यह ई-कॉमर्स और शहरी लॉजिस्टिक्स के लिए एक नया मानक स्थापित कर रहा है।


4) Jupiter

Jupiter एक डिजिटल बैंकिंग और फिनटेक प्लेटफॉर्म है। यह उपयोगकर्ताओं को खाते, बचत, निवेश और पर्सनल फ़ाइनेंस ट्रैकिंग के लिए स्मार्ट टूल देता है। वित्तीय प्रबंधन को आसान और transparent बनाने की दिशा में इसका योगदान महत्वपूर्ण है।


5) Myntra

Myntra भारत का सबसे बड़ा फैशन और ए-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है जो लाखों उपयोगकर्ताओं को फैशन, लाइफस्टाइल और ब्यूटी प्रोडक्ट्स ऑफ़र करता है। यह भारतीय ई-कॉमर्स के सबसे बड़े नामों में गिना जाता है।


6) Rocket

Rocket एक AI-based software platform है, जो developers को prompt-to-app solutions प्रदान करता है। यह टेक्नोलॉजी में automation का एक बड़ा उदाहरण है और AI startups के बीच तेजी से उभर रहा है।


7) Rapido

Rapido एक माइक्रो-ट्रांसपोर्ट प्लेटफॉर्म है, जो बाइक टैक्सी के माध्यम से शहरी यात्राओं को आसान और सस्ता बनाता है। यह भारत के शहरी ट्रांसपोर्ट समस्याओं का स्मार्ट समाधान प्रदान करता है।


8) Weaver Services

Weaver Services वित्तीय सेवाएँ और टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म है, खासकर हाउसिंग फ़ाइनेंस जैसे क्षेत्रों में टेक्नोलॉजी को लागू करता है। इससे घर खरीदने या गिरवी रखने के लिए प्रक्रिया और अधिक सुलभ बनती है।


9) Akasa Air

Akasa Air एक भारतीय एयरलाइन है जो उड़ान सेवाओं को बढ़ावा देता है और यात्रियों को बेहतर सेवा अनुभव देता है। यह traditional उद्योग में डिज़िटल और ग्राहक-अनुकूल प्रदर्शन की मिसाल है।


10) MarketsandMarkets

MarketsandMarkets एक बिजनेस रिसर्च और डेटा एनालिटिक्स कंपनी है, जो व्यवसायों को रणनीतिक insights और मार्केट ट्रेंड डेटा देती है। यह व्यापार रणनीतिक निर्णयों में मददगार है।


📊 क्यों इन स्टार्टअप्स पर नजर रखनी चाहिए?

ये स्टार्टअप्स अलग-अलग क्षेत्रों से आते हैं — फिनटेक, ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक्स, ब्लॉकचेन, AI, एयरलाइनिंग और मार्केट रिसर्च — पर उनकी Growth story में कुछ कॉमन कारण हैं:
✔ ग्राहक-केंद्रित समाधान
✔ डिजिटल first बिज़नेस मॉडल
✔ मजबूत फंडिंग और निवेश समर्थन
✔ टेक्नोलॉजी-ड्रिवन विज़न

इन कंपनियों ने 2023-2025 के बीच तेज़ ग्रोथ और निवेश आकर्षित किया है, इसलिए 2026 में इनका प्रदर्शन और मार्केट-डिफ़ाइन्ड होना तय है।


🚀 भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम का हाल

भारत में स्टार्टअप संस्कृति पिछले दशक में महत्वपूर्ण रूप से विकसित हुई है। DPIIT के Startup India कार्यक्रम के तहत लगभग 1.8 लाख से अधिक स्टार्टअप्स को मान्यता मिली है, और हर साल 20,000 से अधिक नई कंपनियाँ जुड़ती हैं।

हालाँकि अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ स्टार्टअप्स बंद भी हो रहे हैं, जैसे 2025 में करीब 730 कंपनियों ने अपनी सेवाएँ बंद कर दीं, लेकिन यह संख्या पहले के मुकाबले कम है, जो इस उद्योग की मजबूत स्थिरता को दर्शाती है।


📌 विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

विश्लेषकों का मानना है कि भारत में टेक-ड्रिवन स्टार्टअप्स — विशेष रूप से AI, ब्लॉकचेन, फिनटेक और e-commerce — भविष्य में निवेश के आकर्षण के मुख्य केंद्र होंगे। टेक्नोलॉजी के ज़रिये ग्राहकों को सरल, तेज़ और सुरक्षित सेवाएँ देने वाले स्टार्टअप्स 2026 में बेहतर प्रदर्शन करेंगे।


🎯 निष्कर्ष

2026 भारत के लिए एक ल‌क्ष्य-पूर्ण साल बनने जा रहा है। Failory की सूची से यह स्पष्ट होता है कि कई पहले से मजबूत स्टार्टअप्स हैं—जो बड़े पैमाने पर ग्राहक और निवेश दोनों को आकर्षित कर रहे हैं। Zepto, Polygon, blinkit, Jupiter, Rapido जैसे प्लेटफॉर्म्स ने पहले से ही अपनी पहचान बनाई है, जबकि अन्य नव-प्रवर्तनकारी कंपनियाँ भी तेजी से उभर रही हैं।

📈 अगर आप भी स्टार्टअप वातावरण, निवेश या तकनीकी उपयोग में रुचि रखते हैं, तो यह सूची आपको 2026-2027 की startup trends समझने में मदद करेगी।

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🇮🇳 भारत के स्टार्टअप IPOs 2026 में एक महत्वपूर्ण परीक्षा से गुजरेंगे

IPOs

2026 भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक निर्णायक साल होने जा रहा है। इस वर्ष की IPOs (Initial Public Offering) गतिविधि सिर्फ संख्या में नहीं, बल्कि गुणवत्ता और निष्पादन (execution) की क्षमता के संदर्भ में भी एक बड़े टेस्ट की तरह सामने आएगी।

पिछले कुछ सालों में भारत के स्टार्टअप बाजार ने तेजी से वृद्धि दर्ज की है। 2025 में 18 कंपनियों ने सफलतापूर्वक IPO लॉन्च किए और करोडों रुपये जुटाए। लेकिन 2026 में स्थिति थोड़ी अलग और अधिक परिपक्व होगी — जहाँ निवेशक सिर्फ बड़े सपनों और “हाइप” को नहीं, बल्कि कंपनियों की वास्तविक व्यावसायिक प्रदर्शन और निष्पादन क्षमता को भी ध्यान से देखेंगे।


📈 IPO बाजार अब “हाइप” से आगे बढ़ रहा है

भारत के IPO मार्केट में अब सिर्फ अच्छे कहानी, भविष्य की संभावनाएँ और बड़े valuation भर से चीजें तय नहीं होंगी। पब्लिक मार्केट अब यह देखेगी कि कंपनी की मौजूदा आय, प्रॉफिटेबिलिटी, संचालन क्षमता और बाजार में टिकने की क्षमता कितनी मजबूत है।

2026 के इस टेस्ट के सबसे स्पष्ट उदाहरण Ather Energy और Ola Electric की हाल की प्रदर्शन भिन्नताओं से देखने को मिलते हैं। दोनों ही कंपनियाँ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (EV) सेक्टर से हैं, और उन्हें समान उद्योग tailwinds और investor interest मिला। बावजूद इसके, Ather Energy ने अपनी लिस्टिंग कीमत से 100% से अधिक का रिटर्न दिया, जबकि Ola Electric ने 60% से ज्यादा अपनी वैल्यू खो दी। इसका कारण सिर्फ उद्योग की ताकत नहीं, बल्कि Ather की बेहतर execution और निरंतर काम के परिणाम हैं।


📊 VC वैल्युएशन बनाम सार्वजनिक बाजार की वास्तविकता

पिछले कुछ वर्षों में भारत में Venture Capital (VC) फंडिंग ने स्टार्टअप्स को असाधारण सपोर्ट दिया है। VC प्रमोटर्स अक्सर भविष्य की संभावनाओं, उच्च ग्रोथ प्रोजेक्शन्स और कागज़ पर शानदार दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हैं। परंतु पब्लिक मार्केट (IPO) में निवेशक और विश्लेषक वर्तमान प्रदर्शन और रिटर्न पर ज़्यादा फोकस करते हैं।

डेवलपमेंटल यूनिट्स को लेकर भरोसा और long-term growth की उम्मीद VC का ट्रेडमार्क रही है, लेकिन IPO बाजार अब कंपनियों से पूछता है:
✔ क्या यह कंपनी आज लाभ कमा रही है?
✔ क्या इसे भविष्य में नकद प्रवाह (cash flows) बनाते रहने की क्षमता है?
✔ क्या इसका बिजनेस मॉडल वास्तव में टिकाऊ है?

वास्तविक निष्पादन ही 2026 के IPO साल में सफलता की बड़ी कसौटी होगी।


📅 2025 से सीख — 2026 का वातावरण

जैसा कि 2025 में देखा गया, भारतीय स्टार्टअप IPO परिदृश्य ने रिकॉर्ड बनाये — 18 कंपनियों ने कुल लगभग ₹33,000 करोड़ के IPOs किए, जिससे निवेशकों और VC को आकर्षक रिटर्न मिले। कई firms ने इस IPO लहर से बेहतरीन तरक्की और liquidity हासिल की — खासकर fintech, digital प्लेटफॉर्म और tech focused ventures ने।

2026 में भी IPO pipeline और भी बड़ी है — अनुमान है कि 50,000 करोड़ रुपये से अधिक बाजार पूंजी जुटाई जा सकती है। इसमें PhonePe, Zepto, OYO, Infra.Market, Shadowfax जैसे बड़े नाम शामिल हैं, साथ ही और भी कई विविध सेक्टर की कंपनियाँ सार्वजनिक बाजार का रुख कर सकती हैं।

ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि 2026 भारत के IPO इतिहास में सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण IPO सालों में से एक बन सकता है।


🎯 IPO में सफलता अब सिर्फ सपनों से नहीं तय होगी

IPO करने वाली कंपनियों को अब उम्मीदों पर चलने वाले narrative से कहीं आगे बढ़कर दिखाई देना होगा। केवल “बेहतरीन growth prospects” या “VC backed valuation” नहीं काफी होंगे। पब्लिक मार्केट अब चाहती है कि कंपनियाँ:
✔ Consistent और Sustainable revenue दिखाएँ
✔ Strong execution capabilities हो
✔ Profitability और operational discipline बढाएँ

स्टार्टअप जो इन क्षेत्रों में कमजोर हैं, उन्हें बाज़ार की सख्त मांग का सामना करना पड़ेगा। वहीं जो कंपनियाँ fundamentals पर काम कर रही हैं, उनका प्रदर्शन आम निवेशकों और विश्लेषकों के लिए आकर्षक साबित होगा।


📉 IPO की चुनौतियाँ और जोखिम

कई analysts मानते हैं कि IPO प्रक्रिया में valuation और execution के बीच बड़ा disconnect है। VC often बड़ी संभावनाओं के आधार पर valuations तय करते हैं, लेकिन public market उन valuations को तब स्वीकार नहीं करते जब तक कंपनी का नकद प्रवाह, वास्तविक growth और profit दिखे।

अतः 2026 IPO साल में कुछ कंपनियों को valuation pressure, pricing challenges, और execution risks का सामना करना पड़ सकता है — विशेष रूप से ऐसे startups जिन्हें अभी तक sustainable revenue नहीं मिला है।


📊 IPOs के अवसर — कौन से सेक्टर्स आगे?

विश्लेषकों का कहना है कि 2026 में कुछ सेक्टर्स IPO के लिए खास तौर पर एक्टिव रहेंगे: ✔ Fintech और payments
✔ E-commerce और quick commerce
✔ Enterprise SaaS और deeptech
✔ Logistics और supply chain
✔ EV/green technologies

इन क्षेत्रों में कंपनियों ने 2025 के दौरान मजबूत traction, revenue growth और investor interest देखा है, और इसलिए यह संभावना प्रबल है कि इन सेक्टर के IPO 2026 में बड़े पैमाने पर आएँगे।


🧑‍💼 विशेषज्ञों की राय

वहीं परामर्शदाता और निवेश विश्लेषक मानते हैं कि IPO success केवल hype पर नहीं, बल्कि execution पर आधारित होना चाहिए। Ather Energy ने इस बात को साबित किया कि अगर कंपनी execution में अच्छा प्रदर्शन देती है, तो ग्रोथ investors के लिए सचमुच rewarding हो सकती है। वहीं Ola Electric जैसे cases यह दिखाते हैं कि केवल अच्छी story ही काफी नहीं है।


🧠 निष्कर्ष

2026 भारतीय स्टार्टअप IPO वर्ष एक बड़ा और निर्णायक साल बनने वाला है। यह वह समय है जब public markets कंपनियों की real execution, profitability और performance का परीक्षण करेंगे, न कि केवल उनके valuation और भविष्यवाणियों का।

स्टार्टअप्स, निवेशकों और विश्लेषकों के लिए यह एक अवसर और चुनौती दोनों है —
एक अवसर क्योंकि IPO pipeline बहुत मजबूत दिख रही है,
और चुनौती इसलिए क्योंकि पब्लिक मार्केट अब हाइप के बजाय execution को प्राथमिकता दे रही है।

इसलिए 2026 में IPO करने वाली कंपनियों को न केवल बड़ी entry चाहिए, बल्कि बाजार की लगातार अपेक्षाओं पर खरा उतरना भी जरूरी होगा — यही नया paradigma है।

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📊 भारत के टॉप ब्रोकर्स 2025 में कौन हैं निवेशकों के पसंदीदा प्लेटफ़ॉर्म?

Founder article

भारतीय शेयर बाजार में निवेश तेजी से बढ़ रहा है। 2025 के शुरुआती महीनों में भी निवेशक अपनी पसंदीदा ब्रोकिंग सेवाओं के लिए सक्रिय रहे हैं। आज हम जानेंगे उन प्रमुख ब्रोकरों के बारे में, जिनका उपयोग भारतीय निवेशक सबसे अधिक करते हैं और जिन्होंने अपने प्लेटफॉर्म के ज़रिए निवेशकों को बेहतर सुविधा दी है।

नीचे दी गई सूची में वे ब्रोकर्स शामिल हैं जो सबसे अधिक market share या लोकप्रियता के आधार पर रैंक किए गए हैं।


🔝 भारत के शीर्ष शेयर ब्रोकर 2025

2025 के आंकड़ों के अनुसार, निवेशकों की प्राथमिकता वाली सूची इस प्रकार है:

  1. Zerodha – ~18.1%
  2. Groww – ~13.58%
  3. Upstox – ~12.05%
  4. Angel One – ~11.5%
  5. ICICI Direct – ~7.93%
  6. 5paisa – ~3.66%
  7. HDFC Securities – ~3.17%
  8. Kotak Securities – ~3.05%
  9. IIFL Securities – ~2.51%
  10. Motilal Oswal – ~2.47%
  11. Sharekhan – ~2.1%
  12. SBI Cap Securities – ~1.74%
  13. Others – ~18.14%

📈 कौन सा ब्रोकिंग प्लेटफ़ॉर्म क्यों लोकप्रिय है?

🥇 Zerodha – सबसे आगे

Zerodha भारतीय शेयर बाजार में सबसे ज़्यादा उपयोग होने वाला ब्रोकिंग प्लेटफ़ॉर्म है। 18.1% के करीब market share के साथ यह उन निवेशकों की पहली पसंद बन चुका है जिनको कम brokerage fees, तेज execution और स्मार्ट tools चाहिए। Zerodha का Kite app और Varsity learning platform युवा निवेशकों में विशेष रूप से लोकप्रिय है।


📊 Groww – निवेशकों की नई पसंद

Groww ने भी तेजी से popularity हासिल की है, लगभग 13.58% market share के साथ। Groww शुरू में mutual funds के लिए जाना जाता था, लेकिन उसने धीरे-धीरे equity और derivatives trading भी उपलब्ध कराई है। सरल UI और शुरुआती निवेशकों के अनुकूल सुविधाओं की वजह से Groww का इस्तेमाल बहुत बढ़ा है।


💹 Upstox – कम लागत और तेज़ execution

Upstox करीब 12.05% market share के साथ तीसरे स्थान पर है। इसकी brokerage structure कम है और execution बहुत तेज़ है। तकनीकी चार्टिंग और advanced chart tools के कारण तकनीकी निवेशक Upstox को पसंद करते हैं।


🧑‍💼 Angel One और ICICI Direct – संतुलित विकल्प

Angel One और ICICI Direct क्रमशः चौथे और पाँचवें स्थान पर हैं। Angel One का प्लेटफॉर्म beginners और seasoned दोनों निवेशकों के लिए सहज लगता है, वहीं ICICI Direct एक पारंपरिक बैंक-attached ब्रोकिंग सर्विस के रूप में भरोसेमंद है।


💡 और अन्य प्रमुख ब्रोकर्स

बाकी ब्रोकर्स जैसे 5paisa, HDFC Securities, Kotak Securities, IIFL Securities, Motilal Oswal, Sharekhan, SBI Cap Securities भी लोकप्रियता में शामिल हैं। ये सभी ब्रोकर्स अलग-अलग निवेशकों के लिए विभिन्न तरह की सुविधाएँ, research tools और advisory सेवाएँ प्रदान करते हैं। साथ ही, कुल ‘Others’ की category में लगभग 18.14% हिस्सा आता है, जिनमें छोटे या niche brokers शामिल हैं।


📉 Broking Industry में निवेशकों की पसंद क्यों बदल रही है?

आज के निवेशक पहले से ज़्यादा तकनीकी-सक्षम और सजग हैं। वे उन प्लेटफ़ॉर्म को चुनते हैं जो कम लागत में बेहतर execution, सुगम UI/UX और मजबूत customer support प्रदान करते हैं। खास तौर पर युवा निवेशक जो mobile first approach अपनाते हैं, वे app-based brokers की तरफ तेजी से जा रहे हैं।


📱 App-based vs Traditional Brokers

App-based brokers (Zerodha, Groww, Upstox आदि):

तेज account opening

सरल UI

कम brokerage

मोबाइल-फ्रेंडली
⇒ इनका लोकप्रियता बढ़ा हुआ है।

Traditional brokers (ICICI Direct, HDFC Securities, Kotak, Sharekhan आदि):

मजबूत research

customer support

बैंक/बड़े financial networks
⇒ पुराने निवेशकों के बीच भरोसेमंद।


📊 नए निवेशकों के लिए सुझाव

🔹 नये निवेशकों को चाहिए कि वे ब्रोकर चुनते समय cost, tools, research support और user experience का मिश्रण देखें।
🔹 FREE educational resources, market news और practice accounts उन्हे पहले सीखने में मदद करते हैं।
🔹 तय करें कि आपके लिए कम brokerage ज़्यादा महत्वपूर्ण है या research support।


🌟 निष्कर्ष

2025 में भारतीय शेयर बाजार में Zerodha, Groww और Upstox जैसे brokers ने महत्वपूर्ण बढ़त बनाई है। इनका market share दर्शाता है कि निवेशक आज कम लागत, तेज execution और स्मार्ट tools की तलाश में हैं। वहीं traditional brokers अभी भी अपने मजबूत अनुभव और भरोसे के कारण अपनी जगह बनाए हुए हैं।

यदि आप निवेश करने जा रहे हैं, तो इन सभी platform का careful comparison आपके फायदे में रहेगा।

Read more :📊 Startup Weekly Funding Report इस हफ्ते 24 भारतीय स्टार्टअप्स ने जुटाए $75.36 मिलियन

📊 Startup Weekly Funding Report इस हफ्ते 24 भारतीय स्टार्टअप्स ने जुटाए $75.36 मिलियन

Funding report

भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में 10 जनवरी को खत्म हुए हफ्ते के दौरान फंडिंग गतिविधियों में हल्की तेजी देखने को मिली। इस सप्ताह 24 भारतीय स्टार्टअप्स ने कुल $75.36 मिलियन (करीब ₹625 करोड़) की फंडिंग जुटाई। दिलचस्प बात यह रही कि सारी डील्स early-stage में हुईं, जबकि 4 स्टार्टअप्स ने अपनी फंडिंग राशि का खुलासा नहीं किया

इसके मुकाबले, पिछले हफ्ते केवल 3 स्टार्टअप्स ने मिलकर $110.22 मिलियन जुटाए थे। यानी डील काउंट में तेज़ी रही, लेकिन टिकट साइज छोटा रहा।


🚀 Early-stage Funding Deals का दबदबा

इस सप्ताह कोई भी growth या late-stage डील सामने नहीं आई। पूरा फोकस शुरुआती स्टेज की कंपनियों पर रहा।

🔹 प्रमुख फंडिंग डील्स

  • Even Healthcare (Bengaluru) ने $20 मिलियन की फंडिंग जुटाई। इस राउंड का नेतृत्व Lachy Groom और Alpha Wave ने किया, जिसमें Sharrp Ventures भी शामिल रहा।
  • FutureCure Health ने ₹104 करोड़ ($11.5 मिलियन) जुटाए। इस राउंड को Carnelian Asset Management LLP ने लीड किया।
  • Spector.ai, जो एक industrial AI स्टार्टअप है, उसने ₹58 करोड़ ($6.7 मिलियन) की फंडिंग हासिल की। इस डील का नेतृत्व IvyCap Ventures ने किया।
  • Binny Bansal की 3State Ventures ने अपने पोर्टफोलियो स्टार्टअप Oppdoor Pte. Ltd. में अतिरिक्त $6.4 मिलियन का निवेश किया।

इसके अलावा AI स्टार्टअप्स Nitro Commerce और Aivar, और beauty brand Antinorm ने भी इस हफ्ते नई पूंजी जुटाई।

👉 पूरे funding breakup के लिए TheKredible देखें।


🏙️ City-wise Funding: Bengaluru फिर आगे

शहरों के हिसाब से देखें तो:

  • Bengaluru ने सबसे ज्यादा 11 deals के साथ लीड किया
  • Delhi-NCR से 4 deals
  • Mumbai से 3 deals
  • इसके अलावा Kanpur, Udaipur, Indore जैसे उभरते शहरों से भी स्टार्टअप्स ने फंडिंग हासिल की

यह दिखाता है कि स्टार्टअप फंडिंग अब केवल बड़े मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं रह गई है।


🤖 Segment-wise Deals: AI बना सबसे बड़ा विजेता

सेगमेंट के हिसाब से इस हफ्ते का ट्रेंड कुछ ऐसा रहा:

  • AI स्टार्टअप्स – 6 deals
  • Healthtech – 4 deals
  • E-commerce – 4 deals
  • इसके अलावा Aerospace, Proptech, Deeptech, EV और Fintech से भी डील्स देखने को मिलीं

AI का दबदबा यह दिखाता है कि निवेशक अब practical और enterprise-use AI पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं।


📈 Series-wise Funding Breakdown

इस हफ्ते फंडिंग राउंड्स का बंटवारा इस तरह रहा:

  • Seed rounds – 8 deals
  • Series A – 6 deals
  • Pre-Series A और Pre-seed – कुछ डील्स

👉 Series-wise और amount breakup के लिए TheKredible पर विज़िट करें।


📉 Week-on-Week Funding Trend

साप्ताहिक आधार पर देखें तो:

  • इस हफ्ते फंडिंग $75.36 मिलियन रही
  • पिछले हफ्ते यह आंकड़ा $110.22 मिलियन था

यानी amount के लिहाज़ से गिरावट रही, लेकिन डील काउंट मजबूत रहा।
पिछले 8 हफ्तों का औसत फंडिंग लगभग $199.82 मिलियन और 22 deals प्रति हफ्ता रहा है।


👔 Key Hirings और Leadership Updates

इस हफ्ते कई बड़ी नियुक्तियां और इस्तीफे भी देखने को मिले:

  • Meesho ने Milan Partani को General Manager, Commerce Platform नियुक्त किया, जबकि Megha Agarwal ने इस्तीफा दिया
  • Awfis Space Solutions के CFO Ravi Dugar ने इस्तीफा दिया, उनकी जगह Sumit Rochlani नए CFO बने
  • QuiD Cash ने Paytm के पूर्व President & COO Bhavesh Gupta को Strategic Advisor बनाया
  • Freshworks ने Kady Srinivasan को नया CMO नियुक्त किया
  • Ather Energy ने Surabhi Loshali को CHRO नियुक्त किया

🔄 Mergers & Acquisitions

  • CARS24 ने CarInfo का अधिग्रहण किया
  • Urban Harvest ने gourmet food brand Cocosutra को खरीदा
  • MS Dhoni ने अपनी padel venture 7Padel को PadelPark India के साथ मर्ज किया

🆕 New Launches & Partnerships

  • CLIRNET ने DentalNet लॉन्च किया
  • Practo ने UAE के बाद अब US में एंट्री, $75 Mn GMV रन-रेट के साथ

📑 Financial Results Highlights

  • Sid’s Farm – FY25 में ₹168 Cr revenue, लेकिन losses 2.6x बढ़ीं
  • Ecozen – FY25 में profit लगभग ₹100 Cr
  • BellaVita – revenue 2.5x बढ़कर ₹456 Cr, कंपनी profitable
  • Proost Beer – ₹100 Cr revenue, EBITDA breakeven

📰 News Flash

  • Razorpay IPO की तैयारी, ₹4,500 Cr fresh issue की योजना
  • upGrad–Unacademy deal रद्द, valuation disagreement
  • SoftBank ने Ola Electric में 2.15% stake बेचा
  • Amagi IPO से Premji Invest को 14x रिटर्न

🧾 Weekly Summary

इस हफ्ते भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में early-stage funding मजबूत रही, खासकर AI और Healthtech में।
हालांकि बड़े टिकट साइज की कमी दिखी, लेकिन डील एक्टिविटी स्वस्थ बनी रही।
IPO, M&A और सेकेंडरी सेल्स के चलते बाजार में cautious optimism बना हुआ है।

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