🌱 UKHI ने जुटाए ₹10.5 करोड़,

UKHI

भारत में सस्टेनेबल और पर्यावरण-अनुकूल सामग्री विकसित करने वाली IP-आधारित बायोपॉलिमर कंपनी UKHI ने सीड फंडिंग राउंड में ₹10.5 करोड़ जुटाए हैं। इस निवेश राउंड का नेतृत्व Venture Catalysts ने किया, जबकि इसमें 100 Unicorns, 888 VC और कंपनी के रणनीतिक औद्योगिक साझेदार DCG Pack ने भी भागीदारी की।

कंपनी ने प्रेस रिलीज में बताया कि जुटाई गई पूंजी का उपयोग उसके प्रमुख उत्पाद EcoGran के उत्पादन को बढ़ाने, फॉर्मुलेशन और प्रोसेस से जुड़ी बौद्धिक संपदा (IP) को मजबूत करने और पैकेजिंग वैल्यू चेन में साझेदारियों को गहरा करने के लिए किया जाएगा।


🏭 2019 में हुई स्थापना, लक्ष्य—सर्कुलर इकोनॉमी

UKHI की स्थापना 2019 में विशाल विवेक, प्रियंका चौहान और संदीप कुमार त्यागी ने मिलकर की थी। यह एक बायोमैटेरियल स्टार्टअप है, जो पारंपरिक प्लास्टिक के स्थान पर सस्टेनेबल और कम्पोस्टेबल विकल्प विकसित करने पर काम कर रही है।

कंपनी का उद्देश्य एक सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy) की दिशा में बदलाव को तेज करना है। इसके लिए UKHI कृषि अवशेष (Agricultural Residues) और लिग्नोसेलुलोसिक बायोमास (Lignocellulosic Biomass) का उपयोग कर उच्च-प्रदर्शन वाले बायो-आधारित पैकेजिंग मैटेरियल तैयार करती है।


🧪 पेटेंट-पेंडिंग टेक्नोलॉजी

UKHI का दावा है कि उसकी तकनीक पेटेंट-पेंडिंग है और इसे बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए डिजाइन किया गया है।

इस टेक्नोलॉजी की खासियतें हैं:

  • स्केलेबल (बड़े स्तर पर उत्पादन योग्य)
  • लागत-प्रभावी
  • पर्यावरण के अनुकूल
  • पारंपरिक प्लास्टिक जितनी मजबूत और कार्यक्षम

कंपनी का कहना है कि उसकी बायोपॉलिमर सामग्री ब्रांड्स को पेट्रोलियम-आधारित प्लास्टिक पर निर्भरता कम करने में मदद करती है, बिना गुणवत्ता या मजबूती से समझौता किए।


🚀 छह महीनों में व्यावसायिक सफलता

UKHI के अनुसार, पिछले छह महीनों में उसने:

  • एक व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य (Commercially Viable) बायोपॉलिमर प्लेटफॉर्म तैयार किया
  • अपनी खुद की मटेरियल इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी विकसित की
  • भारत के पैकेजिंग इकोसिस्टम में बाजार अपनापन (Market Adoption) शुरू किया

कंपनी ऐसे बायोडिग्रेडेबल और कम्पोस्टेबल मैटेरियल पर काम कर रही है, जो पारंपरिक प्लास्टिक का विकल्प बन सके और मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ भी संगत रहे।

यह महत्वपूर्ण है क्योंकि नई तकनीक अपनाने में अक्सर कंपनियों को मशीनरी बदलनी पड़ती है, जिससे लागत बढ़ जाती है। UKHI का समाधान इस चुनौती को कम करने की दिशा में काम करता है।


📦 EcoGran: कंपनी का प्रमुख उत्पाद

UKHI का फ्लैगशिप प्रोडक्ट लाइन EcoGran है।

EcoGran एक उच्च-प्रदर्शन बायोपॉलिमर है, जिसे पैकेजिंग उद्योग में पारंपरिक प्लास्टिक के स्थान पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

जुटाए गए ₹10.5 करोड़ में से बड़ी राशि EcoGran के उत्पादन को स्केल करने में खर्च की जाएगी, ताकि बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।


📊 शुरुआती ग्राहकों से मजबूत प्रतिक्रिया

कंपनी ने दावा किया है कि उसने कुछ ही महीनों में व्यावसायिक राजस्व हासिल कर लिया है।

  • शुरुआती एंकर क्लाइंट्स के साथ काम शुरू किया
  • अब तक दो लाख किलोग्राम से अधिक बायोपॉलिमर सामग्री बेची
  • ग्राहक पायलट प्रोजेक्ट्स में 90% से अधिक ट्रायल-टू-कमर्शियल कन्वर्जन दर्ज किया

यह आंकड़े बताते हैं कि कंपनी का उत्पाद बाजार की जरूरतों के अनुरूप है और ग्राहकों के बीच इसकी स्वीकार्यता बढ़ रही है।


🌍 अगले 12 महीनों की योजना

UKHI का लक्ष्य अगले 12 महीनों में:

  • 24 लाख किलोग्राम सिंगल-यूज प्लास्टिक को रिप्लेस करना
  • उत्पादन क्षमता का विस्तार करना
  • पैकेजिंग वैल्यू चेन में मजबूत साझेदारियां बनाना

अगर कंपनी अपने इस लक्ष्य को हासिल कर लेती है, तो यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।


♻️ क्यों महत्वपूर्ण है बायोपॉलिमर?

भारत समेत पूरी दुनिया में सिंगल-यूज प्लास्टिक एक बड़ी पर्यावरणीय समस्या बन चुका है।

  • प्लास्टिक कचरा समुद्रों और भूमि को प्रदूषित कर रहा है
  • रिसाइक्लिंग की सीमाएं हैं
  • पारंपरिक प्लास्टिक को नष्ट होने में सैकड़ों साल लगते हैं

ऐसे में बायोपॉलिमर और कम्पोस्टेबल मैटेरियल भविष्य का समाधान माने जा रहे हैं।

सरकारें भी प्लास्टिक पर प्रतिबंध और सस्टेनेबल विकल्पों को बढ़ावा दे रही हैं, जिससे इस क्षेत्र में स्टार्टअप्स के लिए अवसर बढ़ रहे हैं।


💰 निवेशकों का भरोसा

Venture Catalysts, 100 Unicorns, 888 VC और DCG Pack जैसे निवेशकों की भागीदारी यह दिखाती है कि बाजार को UKHI की तकनीक और विजन पर भरोसा है।

DCG Pack का रणनीतिक औद्योगिक साझेदार के रूप में जुड़ना कंपनी के लिए अतिरिक्त मजबूती प्रदान करता है, क्योंकि इससे इंडस्ट्रियल स्केल और सप्लाई चेन सपोर्ट मिल सकता है।


🔮 आगे की संभावनाएं

अगर UKHI अपनी तकनीक को बड़े पैमाने पर लागू करने में सफल होती है, तो वह भारत के पैकेजिंग उद्योग में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।

  • FMCG कंपनियां
  • ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म
  • फूड डिलीवरी कंपनियां

सभी सस्टेनेबल पैकेजिंग की तलाश में हैं। UKHI के समाधान इस मांग को पूरा कर सकते हैं।


📌 निष्कर्ष

UKHI का ₹10.5 करोड़ का सीड फंडिंग राउंड न सिर्फ एक स्टार्टअप की फंडिंग खबर है, बल्कि यह भारत में सस्टेनेबल इनोवेशन की बढ़ती दिशा का संकेत भी है।

EcoGran जैसे उत्पाद और पेटेंट-पेंडिंग टेक्नोलॉजी के साथ UKHI प्लास्टिक के पर्यावरण-अनुकूल विकल्प प्रदान करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

अगर कंपनी अपने उत्पादन और बाजार विस्तार की योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करती है, तो आने वाले वर्षों में यह भारत के बायोमैटेरियल सेक्टर में एक प्रमुख नाम बन सकती है।

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Wellbeing Nutrition

भारतीय फार्मास्यूटिकल कंपनी USV ने भारत के तेजी से बढ़ते डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) न्यूट्रास्यूटिकल और वेलनेस बाजार में प्रवेश करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने Nutritionalab Private Limited, जो कि Wellbeing Nutrition की पैरेंट कंपनी है, में 79% हिस्सेदारी खरीदने के लिए एक निर्णायक समझौते (Definitive Agreement) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस सौदे में Wellbeing Nutrition का कुल मूल्यांकन लगभग ₹1,583 करोड़ आंका गया है। यह अधिग्रहण भारतीय हेल्थ और वेलनेस सेक्टर में तेजी से हो रहे कंसोलिडेशन का एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।


🌿 क्या है Wellbeing Nutrition?

साल 2019 में स्थापित Wellbeing Nutrition एक न्यूट्रास्यूटिकल ब्रांड है, जो स्वास्थ्य सप्लीमेंट्स और वेलनेस प्रोडक्ट्स बनाती और बेचती है।

कंपनी के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में शामिल हैं:

  • विटामिन और मिनरल्स
  • प्रोटीन सप्लीमेंट
  • कोलेजन
  • ओमेगा सप्लीमेंट
  • अन्य हेल्थ और वेलनेस उत्पाद

ब्रांड अपने उत्पादों की बिक्री:

  • अपनी खुद की डिजिटल वेबसाइट के माध्यम से
  • ऑनलाइन मार्केटप्लेस (जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म)
  • ऑफलाइन रिटेल चैनल

के जरिए करता है।

कंपनी की मौजूदगी भारत के अलावा अमेरिका (US), यूनाइटेड किंगडम (UK) और UAE जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी है।


📊 वित्तीय प्रदर्शन और ग्रोथ प्लान

FY25 में Wellbeing Nutrition ने लगभग ₹170 करोड़ का राजस्व दर्ज किया। हालांकि, इसी अवधि में कंपनी को लगभग ₹30 करोड़ का घाटा हुआ।

कंपनी का दावा है कि पिछले दो वर्षों में उसने 120% की ग्रोथ दर्ज की है।

अब उसका लक्ष्य है कि FY27 तक वह ₹450 करोड़ से अधिक का राजस्व हासिल करे।

यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य दर्शाता है कि ब्रांड आने वाले वर्षों में आक्रामक विस्तार की योजना बना रहा है।


💰 निवेशकों को बड़ा रिटर्न

स्टार्टअप डेटा प्लेटफॉर्म TheKredible के अनुसार, Wellbeing Nutrition ने अब तक करीब $14 मिलियन (लगभग ₹115 करोड़) की फंडिंग जुटाई है।

दिसंबर 2022 में कंपनी ने $10 मिलियन की Series B फंडिंग हासिल की थी, जिसका नेतृत्व Fireside Ventures और Hindustan Unilever (HUL) ने किया था।

इस अधिग्रहण के तहत मौजूदा निवेशक आंशिक या पूर्ण रूप से बाहर निकलेंगे।

  • HUL अपनी पूरी 19.8% हिस्सेदारी USV को लगभग ₹307 करोड़ में बेचेगा।
  • HUL ने Wellbeing Nutrition में करीब ₹70 करोड़ निवेश किया था।
  • इस एग्जिट से HUL को अपने निवेश पर चार गुना से अधिक रिटर्न मिला है।

Fireside Ventures और अन्य शुरुआती निवेशक भी अपनी हिस्सेदारी घटाएंगे।


🏥 USV की रणनीति: प्रिस्क्रिप्शन से प्रिवेंटिव हेल्थ की ओर

USV भारतीय फार्मा बाजार में पिछले 60 वर्षों से सक्रिय है। कंपनी ओरल एंटी-डायबिटिक और कार्डियोवैस्कुलर थेरेपी में अग्रणी है।

इसके प्रमुख ब्रांड्स में शामिल हैं:

  • Glycomet GP
  • Ecosprin
  • Roseday

इसके अलावा USV भारत में Sebamed की एक्सक्लूसिव पार्टनर भी है।

अब Wellbeing Nutrition में निवेश के जरिए USV अपने पोर्टफोलियो को प्रिस्क्रिप्शन दवाओं से आगे बढ़ाकर प्रिवेंटिव हेल्थ और लाइफस्टाइल वेलनेस सेगमेंट में ले जा रही है।

आज के दौर में लोग बीमार होने के बाद इलाज से ज्यादा बीमारी से बचाव (Preventive Healthcare) पर ध्यान दे रहे हैं। इसी ट्रेंड को देखते हुए USV ने यह रणनीतिक कदम उठाया है।


📈 D2C सेक्टर में तेजी से बढ़ता कंसोलिडेशन

2026 में भारत के D2C स्पेस में यह दूसरा बड़ा अधिग्रहण है।

पिछले हफ्ते:

  • मुंबई स्थित FMCG कंपनी Marico ने प्लांट-बेस्ड प्रोटीन स्टार्टअप Cosmix में 60% हिस्सेदारी खरीदी।
  • इस सौदे में Cosmix का इक्विटी वैल्यूएशन ₹375 करोड़ था।

इसके अलावा, पिछले साल Hindustan Unilever Limited (HUL) ने स्किनकेयर ब्रांड Minimalist का अधिग्रहण किया था, जिसका प्री-मनी वैल्यूएशन ₹2,955 करोड़ था।

यह ट्रेंड दिखाता है कि बड़ी FMCG और फार्मा कंपनियां तेजी से बढ़ते D2C और हेल्थ ब्रांड्स को अपने पोर्टफोलियो में शामिल कर रही हैं।


🔍 क्यों आकर्षक है न्यूट्रास्यूटिकल बाजार?

भारत में न्यूट्रास्यूटिकल और वेलनेस बाजार तेजी से बढ़ रहा है, जिसके पीछे कई कारण हैं:

  • हेल्थ अवेयरनेस में वृद्धि
  • फिटनेस और न्यूट्रिशन पर बढ़ता फोकस
  • ई-कॉमर्स और D2C ब्रांड्स का विस्तार
  • युवा आबादी की बढ़ती क्रय शक्ति

इस बाजार में ग्रोथ की बड़ी संभावनाएं हैं, खासकर प्रीमियम और साइंस-बेस्ड सप्लीमेंट सेगमेंट में।


🚀 आगे क्या?

USV के लिए यह अधिग्रहण सिर्फ एक निवेश नहीं, बल्कि एक रणनीतिक बदलाव है।

Wellbeing Nutrition के जरिए कंपनी:

  • डिजिटल-फर्स्ट कंज्यूमर बेस तक पहुंचेगी
  • प्रिवेंटिव हेल्थ सेगमेंट में अपनी उपस्थिति मजबूत करेगी
  • अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी विस्तार का लाभ उठा सकेगी

अगर कंपनी Wellbeing Nutrition की ग्रोथ को स्केल करने में सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में यह ब्रांड भारतीय वेलनेस सेक्टर में एक मजबूत खिलाड़ी बन सकता है।


📌 निष्कर्ष

USV द्वारा Wellbeing Nutrition में 79% हिस्सेदारी का अधिग्रहण भारतीय हेल्थ और वेलनेस उद्योग में एक महत्वपूर्ण कदम है।

₹1,583 करोड़ के इस सौदे ने न सिर्फ निवेशकों को आकर्षक रिटर्न दिया, बल्कि यह भी संकेत दिया कि भारत में D2C न्यूट्रास्यूटिकल ब्रांड्स का भविष्य उज्ज्वल है।

बड़ी कंपनियों का इस क्षेत्र में बढ़ता निवेश यह दर्शाता है कि आने वाले समय में हेल्थ, न्यूट्रिशन और वेलनेस सेगमेंट भारतीय उपभोक्ता बाजार का एक अहम हिस्सा बनने जा रहा है।

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TBO

बिज़नेस-फोकस्ड ट्रैवल डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म Travel Boutique Online (TBO) Tek ने आज अपने Q3 FY26 के नतीजे घोषित किए। गुरुग्राम स्थित इस कंपनी ने तीसरी तिमाही में शानदार टॉपलाइन ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 86% बढ़ा, लेकिन मुनाफे की रफ्तार लगभग स्थिर रही।

NSE से प्राप्त अनऑडिटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट के अनुसार, TBO का ऑपरेटिंग रेवेन्यू Q3 FY26 में बढ़कर ₹784 करोड़ हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि (Q3 FY25) में ₹422 करोड़ था।

📊 होटल और पैकेज बुकिंग बनी ग्रोथ की सबसे बड़ी वजह

TBO का बिज़नेस मॉडल मुख्य रूप से B2B ट्रैवल एजेंट्स और कॉर्पोरेट ग्राहकों को होटल, एयर टिकट और ट्रैवल पैकेज की बुकिंग सुविधा देने पर आधारित है।

इस तिमाही में कंपनी की कुल आय का सबसे बड़ा हिस्सा होटल और पैकेज बुकिंग से आया। यह सेगमेंट कुल रेवेन्यू का लगभग 84% रहा।

  • होटल और पैकेज से आय Q3 FY26 में बढ़कर ₹661 करोड़ हो गई, जो पिछले साल इसी तिमाही में ₹337 करोड़ थी।
  • यानी इस सेगमेंट में 96% की सालाना वृद्धि दर्ज की गई।

इसके अलावा:

  • एयर टिकटिंग और अन्य सेवाओं से ₹82 करोड़ की आय हुई।
  • अन्य स्रोतों से ₹41 करोड़ का योगदान मिला।

स्पष्ट है कि होटल और पैकेज बुकिंग में आई तेज़ वृद्धि ने कंपनी की कुल ग्रोथ को आगे बढ़ाया है।

💰 खर्चों में भी तेज़ उछाल, मार्जिन पर दबाव

हालांकि रेवेन्यू में तेज़ वृद्धि हुई, लेकिन खर्च भी लगभग उसी रफ्तार से बढ़े।

होटल और पैकेज बुकिंग सबसे बड़ा रेवेन्यू स्रोत होने के कारण, इससे जुड़े सर्विस फीस भी सबसे बड़ा खर्च केंद्र बन गए।

  • सर्विस फीस Q3 FY26 में ₹301 करोड़ रही, जो कुल खर्च का लगभग 42% है।
  • कर्मचारी लाभ (Employee Benefits) खर्च ₹165 करोड़ रहा।

कुल मिलाकर कंपनी का कुल खर्च Q3 FY26 में बढ़कर ₹725 करोड़ हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹385 करोड़ था।
यानी खर्च में 88% की सालाना वृद्धि दर्ज की गई।

यह लगभग रेवेन्यू ग्रोथ के बराबर है, जिससे कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव पड़ा।

📈 मुनाफे में मामूली बढ़त

खर्चों में तेज़ बढ़ोतरी के कारण कंपनी के मुनाफे में बड़ी छलांग नहीं दिखी।

  • Q3 FY26 में TBO Tek का मुनाफा बढ़कर ₹54 करोड़ रहा।
  • Q3 FY25 में यह ₹50 करोड़ था।

इस तरह सालाना आधार पर मुनाफे में सिर्फ 8% की वृद्धि हुई।

नौ महीनों (9M FY26) की बात करें तो:

  • कंपनी का कुल मुनाफा ₹184 करोड़ रहा।
  • यह भी पिछले साल की तुलना में लगभग 8% अधिक है।

इससे साफ है कि कंपनी की टॉपलाइन मजबूत है, लेकिन प्रॉफिट ग्रोथ सीमित रही।

📉 स्टॉक पर क्या रहा असर?

आज के ट्रेडिंग सेशन के अंत में TBO Tek का शेयर ₹1,539 पर बंद हुआ।

इस कीमत पर कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹16,711 करोड़ (लगभग $1.8 बिलियन) है।

मार्केट ने कंपनी की मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ को सकारात्मक संकेत के रूप में देखा है, लेकिन सीमित प्रॉफिट ग्रोथ निवेशकों के लिए आगे की रणनीति को लेकर सवाल भी खड़े करती है।

🌍 B2B ट्रैवल सेगमेंट में मजबूत पकड़

TBO Tek का फोकस B2B ट्रैवल डिस्ट्रीब्यूशन पर है, जहां यह ट्रैवल एजेंट्स, कॉर्पोरेट ट्रैवल मैनेजर्स और अन्य बिज़नेस क्लाइंट्स को होटल, फ्लाइट और पैकेज बुकिंग की सुविधा देता है।

पोस्ट-पैंडेमिक दौर में ट्रैवल इंडस्ट्री में तेज़ रिकवरी देखी गई है। खासकर इंटरनेशनल ट्रैवल और कॉर्पोरेट ट्रैवल में बढ़ोतरी से TBO को फायदा मिला है।

होटल और पैकेज बुकिंग में 96% की वृद्धि यह दर्शाती है कि कंपनी ने इस सेगमेंट में मजबूत नेटवर्क और सप्लाई बेस तैयार किया है।

⚖️ आगे की चुनौती: मार्जिन मैनेजमेंट

हालांकि ग्रोथ प्रभावशाली है, लेकिन असली चुनौती मार्जिन मैनेजमेंट की है।

  • सर्विस फीस और ऑपरेटिंग खर्चों में तेज़ वृद्धि
  • कर्मचारी लागत में बढ़ोतरी
  • टेक्नोलॉजी और नेटवर्क विस्तार पर निवेश

इन सभी कारणों से प्रॉफिट ग्रोथ सीमित रही है।

आने वाली तिमाहियों में कंपनी को यह सुनिश्चित करना होगा कि:

  • खर्चों को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जाए
  • ऑपरेटिंग एफिशिएंसी बढ़ाई जाए
  • हाई-मार्जिन सेगमेंट पर फोकस बढ़े

यदि कंपनी ऐसा करने में सफल रहती है, तो रेवेन्यू ग्रोथ के साथ मुनाफे में भी तेज़ उछाल देखने को मिल सकता है।

🔎 निष्कर्ष

Q3 FY26 में TBO Tek ने यह साबित किया है कि वह ट्रैवल डिस्ट्रीब्यूशन स्पेस में तेजी से स्केल कर रही है।

  • रेवेन्यू में 86% की वृद्धि
  • होटल और पैकेज सेगमेंट में 96% की छलांग
  • लेकिन मुनाफे में सिर्फ 8% की बढ़त

यह तिमाही कंपनी के लिए “ग्रोथ बनाम मार्जिन” का संकेत देती है।

अगर कंपनी आने वाले क्वार्टर में खर्चों को नियंत्रित कर पाती है और सर्विस फीस स्ट्रक्चर को ऑप्टिमाइज़ करती है, तो यह अपने मजबूत रेवेन्यू बेस को बेहतर प्रॉफिटेबिलिटी में बदल सकती है।

फिलहाल, TBO Tek तेज़ी से बढ़ रही है, लेकिन असली टेस्ट अब मार्जिन सुधार और सस्टेनेबल प्रॉफिट ग्रोथ का होगा।

Read more :👓 Lenskart Q3 FY26 Results रेवेन्यू 36% बढ़ा,

👓 Lenskart Q3 FY26 Results रेवेन्यू 36% बढ़ा,

Lenskart

आईवियर ब्रांड Lenskart ने गुरुवार को FY26 की तीसरी तिमाही (Q3) के अपने वित्तीय नतीजे घोषित किए। कंपनी ने इस तिमाही में शानदार प्रदर्शन करते हुए न सिर्फ रेवेन्यू में 36% की वृद्धि दर्ज की, बल्कि मुनाफे में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिला।

Q3 FY26 में कंपनी का शुद्ध लाभ 71 गुना (71X) बढ़कर ₹132.7 करोड़ पहुंच गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में महज ₹1.85 करोड़ था।


📈 रेवेन्यू ₹2,308 करोड़ पहुंचा

NSE से प्राप्त वित्तीय विवरण के अनुसार, Lenskart का ऑपरेशंस से रेवेन्यू Q3 FY26 में बढ़कर ₹2,308 करोड़ हो गया, जो Q3 FY25 में ₹1,669 करोड़ था।

यानी साल-दर-साल आधार पर कंपनी ने 36% की मजबूत ग्रोथ दर्ज की है।


🇮🇳 भारत से 60% कमाई, 40% अंतरराष्ट्रीय बाजार से

कंपनी के रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा भारतीय बाजार से आता है।

  • भारतीय बाजार से ₹1,385 करोड़ (60%)
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार से ₹936 करोड़ (40%)

इसके अलावा ₹14 करोड़ को इंटर-सेगमेंट रेवेन्यू के रूप में एडजस्ट किया गया।

यह आंकड़े दिखाते हैं कि Lenskart अब सिर्फ भारतीय ब्रांड नहीं रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मजबूत मौजूदगी बना चुका है।


💰 कुल आय ₹2,348 करोड़

ऑपरेटिंग रेवेन्यू के अलावा कंपनी को ₹40 करोड़ की अन्य आय (Other Income) भी हुई।

इससे Q3 FY26 में कंपनी की कुल आय बढ़कर ₹2,348 करोड़ हो गई।


📊 नौ महीनों में ₹6,298 करोड़ का रेवेन्यू

दिसंबर 2025 तक समाप्त नौ महीने की अवधि (9M FY26) में Lenskart का कुल रेवेन्यू ₹6,298 करोड़ रहा।

यह पिछले साल की समान अवधि के ₹4,925 करोड़ के मुकाबले 28% अधिक है।

यह संकेत देता है कि कंपनी लगातार ग्रोथ ट्रैक पर बनी हुई है।


💸 खर्चों में भी बढ़ोतरी

तेजी से विस्तार के साथ कंपनी के खर्चों में भी वृद्धि हुई है।

🏭 कच्चे माल की लागत (Cost of Material)

यह कंपनी का सबसे बड़ा खर्च रहा, जो कुल खर्च का 33% है।

  • Q3 FY26 में यह खर्च बढ़कर ₹717 करोड़ हो गया
  • Q3 FY25 में यह ₹548 करोड़ था
  • यानी 31% की वृद्धि

👩‍💼 कर्मचारी लाभ खर्च

Employee benefit expense में सबसे तेज वृद्धि देखने को मिली।

  • यह 62.5% बढ़कर ₹528 करोड़ हो गया
  • पिछले साल यह ₹325 करोड़ था

यह बढ़ोतरी नए स्टोर्स, टेक टीम विस्तार और अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशंस के कारण मानी जा रही है।

💳 अन्य खर्च

फाइनेंस कॉस्ट और डिप्रिसिएशन जैसे ओवरहेड्स ने भी कुल खर्च में इजाफा किया।

कुल मिलाकर Q3 FY26 में कंपनी का कुल खर्च बढ़कर ₹2,163 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही से 28% अधिक है।


🚀 मुनाफे में ऐतिहासिक उछाल

Lenskart की सबसे बड़ी उपलब्धि उसका मुनाफा रहा।

  • Q3 FY26 में शुद्ध लाभ ₹132.7 करोड़
  • Q3 FY25 में यह केवल ₹1.85 करोड़ था

यानी कंपनी का लाभ 71 गुना बढ़ गया।

तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) आधार पर भी कंपनी का मुनाफा बढ़ा है।

  • Q2 FY26 में लाभ ₹103 करोड़ था
  • Q3 FY26 में यह बढ़कर ₹132.7 करोड़ हो गया
  • यानी 29% की वृद्धि

यह दर्शाता है कि कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी और मार्जिन में सुधार हुआ है।


📈 शेयर प्राइस और मार्केट कैप

आज के ट्रेडिंग सेशन के बाद Lenskart का शेयर प्राइस ₹473 प्रति शेयर पर बंद हुआ।

इस कीमत पर कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹82,059 करोड़ (करीब $9 बिलियन) आंका गया।

यह वैल्यूएशन Lenskart को भारत की सबसे मूल्यवान कंज्यूमर टेक कंपनियों में शामिल करता है।


🌍 ऑनलाइन से ओमनी-चैनल मॉडल तक

Lenskart ने शुरुआत एक ऑनलाइन आईवियर प्लेटफॉर्म के रूप में की थी, लेकिन अब यह एक मजबूत ओमनी-चैनल ब्रांड बन चुका है।

कंपनी:

  • देशभर में सैकड़ों फिजिकल स्टोर्स चला रही है
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मजबूत पकड़ बनाए हुए है
  • अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेजी से विस्तार कर रही है

इस रणनीति ने उसे स्केल और प्रॉफिटेबिलिटी दोनों दिलाने में मदद की है।


🔮 आगे की राह

मजबूत तिमाही प्रदर्शन के बाद Lenskart का फोकस अब:

  • अंतरराष्ट्रीय विस्तार
  • प्राइवेट लेबल और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाना
  • टेक्नोलॉजी और AI आधारित विजन टेस्टिंग
  • स्टोर नेटवर्क विस्तार

पर रहेगा।

अगर कंपनी इसी रफ्तार से आगे बढ़ती रही, तो आने वाले समय में यह IPO या और बड़े वैश्विक विस्तार की दिशा में कदम बढ़ा सकती है।


📌 निष्कर्ष

Q3 FY26 में Lenskart ने शानदार प्रदर्शन किया है।

  • 36% रेवेन्यू ग्रोथ
  • 71 गुना मुनाफे में वृद्धि
  • भारतीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में संतुलित योगदान
  • मजबूत मार्केट कैप

ये सभी संकेत देते हैं कि कंपनी ग्रोथ के साथ-साथ मुनाफे पर भी फोकस कर रही है।

Lenskart का यह प्रदर्शन भारतीय कंज्यूमर ब्रांड्स के लिए एक सकारात्मक संकेत है, जो दिखाता है कि सही रणनीति और मजबूत ब्रांडिंग के साथ ग्लोबल स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है।

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👗 Fashion Supply Chain स्टार्टअप Showroom B2B ने जुटाए ₹150 करोड़,

Showroom

फैशन और अपैरल सेक्टर में काम करने वाली सप्लाई चेन प्लेटफॉर्म Showroom B2B ने अपने Series A फंडिंग राउंड में ₹150 करोड़ (करीब $17 मिलियन) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व Cactus Partners ने किया, जिसमें इक्विटी और डेट दोनों का मिश्रण शामिल है।

इस राउंड में नए निवेशक Zephyr Peacock ने भी भाग लिया, जबकि मौजूदा निवेशक Jungle Ventures, Accion Venture Lab और NBD Ventures ने भी कंपनी में दोबारा निवेश किया।


📈 पहले भी जुटा चुकी है $6.5 मिलियन

Showroom B2B ने इससे पहले अक्टूबर 2023 में $6.5 मिलियन का प्री-Series A राउंड जुटाया था। उस दौर का नेतृत्व Jungle Ventures ने किया था, जिसमें Accion Venture Lab समेत अन्य निवेशकों ने हिस्सा लिया था।

नए फंडिंग राउंड के साथ कंपनी ने यह साबित कर दिया है कि उसका बिज़नेस मॉडल निवेशकों के बीच भरोसेमंद बनता जा रहा है।


💡 फंड का उपयोग कहां होगा?

कंपनी के अनुसार, ताज़ा जुटाई गई पूंजी का उपयोग कई प्रमुख क्षेत्रों में किया जाएगा:

  • टेक्नोलॉजी-आधारित सप्लाई चेन को और मजबूत करना
  • बड़े एंटरप्राइज क्लाइंट्स के साथ साझेदारी बढ़ाना
  • मैन्युफैक्चरिंग और सोर्सिंग क्षमताओं का देशभर में विस्तार
  • प्लेटफॉर्म को अपग्रेड करना ताकि जटिल सोर्सिंग आवश्यकताओं को मैनेज किया जा सके

विशेष रूप से, यह निवेश बड़े रिटेल चेन और इंस्टीट्यूशनल ग्राहकों की जटिल मांगों को पूरा करने में मदद करेगा।


🏭 टेक-एनेबल्ड डिजाइन-टू-डिलीवरी मॉडल

गुरुग्राम स्थित Showroom B2B की स्थापना अभिषेक दुआ और शुभम गुप्ता ने की थी। यह एक टेक-एनेबल्ड अपैरल सोर्सिंग और मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म है, जो “डिजाइन से डिलीवरी” तक का एकीकृत समाधान प्रदान करता है।

कंपनी संगठित रिटेलर्स, अपैरल ब्रांड्स और बाइंग हाउसेज को सेवाएं देती है — भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी।


👖 कई कैटेगरी में काम

Showroom B2B का प्लेटफॉर्म कई अपैरल कैटेगरी में काम करता है, जिनमें शामिल हैं:

  • डेनिम
  • निट्स
  • वूवन अपैरल
  • किड्सवियर

कंपनी अपनी खुद की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के साथ-साथ ऑडिटेड पार्टनर फैक्ट्री नेटवर्क का उपयोग करती है। इससे गुणवत्ता नियंत्रण और समय पर डिलीवरी सुनिश्चित होती है।


🔗 फैशन सप्लाई चेन में टेक्नोलॉजी का रोल

भारत का फैशन और अपैरल बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसकी सप्लाई चेन अभी भी काफी हद तक पारंपरिक और बिखरी हुई है।

Showroom B2B टेक्नोलॉजी की मदद से इस सेक्टर में पारदर्शिता, ट्रैकिंग और एफिशिएंसी लाने का प्रयास कर रहा है।

कंपनी का लक्ष्य है:

  • ब्रांड्स को विश्वसनीय मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर उपलब्ध कराना
  • सोर्सिंग प्रक्रिया को डिजिटल बनाना
  • समय और लागत दोनों में बचत करना

💰 Cactus Partners का 12वां निवेश

यह निवेश Cactus Partners के पहले फंड का 12वां निवेश है।

फरवरी 2024 में Cactus Partners ने अपने पहले फंड का फाइनल क्लोज घोषित किया था। इस फंड का कुल कोष (Corpus) ₹630 करोड़ से अधिक है।

Showroom B2B में निवेश के जरिए Cactus Partners ने फैशन सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत की है।


🌍 ग्लोबल और घरेलू बाजार पर नजर

Showroom B2B का मॉडल भारत के संगठित रिटेल और एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड ब्रांड्स दोनों के लिए उपयोगी है।

भारत दुनिया के बड़े टेक्सटाइल और गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग हब्स में से एक है। ऐसे में टेक-एनेबल्ड प्लेटफॉर्म की मांग तेजी से बढ़ रही है, जो ब्रांड्स को विश्वसनीय और स्केलेबल सप्लाई चेन प्रदान कर सके।


🚀 आगे की रणनीति

नई फंडिंग के बाद कंपनी की रणनीति स्पष्ट है:

  • टेक्नोलॉजी में निवेश बढ़ाना
  • बड़े रिटेल चेन के साथ गहरे संबंध बनाना
  • उत्पादन क्षमता बढ़ाना
  • जटिल और बड़े ऑर्डर संभालने की क्षमता विकसित करना

अगर कंपनी अपनी योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करती है, तो वह भारतीय फैशन सप्लाई चेन इकोसिस्टम में एक प्रमुख खिलाड़ी बन सकती है।


📌 निष्कर्ष

Showroom B2B का ₹150 करोड़ का Series A राउंड यह दर्शाता है कि निवेशक भारतीय फैशन सप्लाई चेन सेक्टर में बड़े अवसर देख रहे हैं।

टेक्नोलॉजी-ड्रिवन मॉडल, मजबूत निवेशक समर्थन और तेजी से बढ़ते फैशन बाजार के साथ, कंपनी के पास आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर हैं।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि Showroom B2B किस तरह अपने प्लेटफॉर्म को स्केल करता है और भारतीय व वैश्विक अपैरल ब्रांड्स के लिए एक विश्वसनीय सोर्सिंग पार्टनर के रूप में खुद को स्थापित करता है।

फैशन और टेक्नोलॉजी के इस संगम में Showroom B2B का यह नया निवेश एक अहम मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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Freshworks

NASDAQ में लिस्टेड SaaS कंपनी Freshworks ने कैलेंडर वर्ष 2025 (CY25) की चौथी तिमाही (Q4) के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी ने इस तिमाही में साल-दर-साल (YoY) आधार पर 15% की रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है।

Q4 CY25 में Freshworks का रेवेन्यू बढ़कर $223 मिलियन पहुंच गया, जो पिछले साल की समान तिमाही (Q4 CY24) में $195 मिलियन था।


📈 तिमाही आधार पर 4% की वृद्धि

NASDAQ में दाखिल नियामकीय फाइलिंग के अनुसार, तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) आधार पर भी कंपनी ने हल्की वृद्धि दर्ज की है।

Q3 CY25 में जहां रेवेन्यू $215 मिलियन था, वहीं Q4 में यह बढ़कर $223 मिलियन हो गया — यानी करीब 4% की वृद्धि

यह संकेत देता है कि वैश्विक SaaS बाजार में प्रतिस्पर्धा के बावजूद Freshworks स्थिर और निरंतर ग्रोथ बनाए हुए है।


💰 ऑपरेटिंग स्तर पर मुनाफा

Freshworks के लिए Q4 CY25 की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि कंपनी ऑपरेटिंग स्तर पर मुनाफे में आ गई।

  • Q4 CY25 में कंपनी ने GAAP ऑपरेटिंग इनकम $40 मिलियन दर्ज की
  • जबकि Q4 CY24 में कंपनी को $24 मिलियन का ऑपरेटिंग घाटा हुआ था

यानी एक साल में कंपनी ने घाटे से मुनाफे की ओर महत्वपूर्ण बदलाव किया है।

यह बदलाव खर्च नियंत्रण, बेहतर मार्जिन और प्रोडक्ट एफिशिएंसी का परिणाम माना जा रहा है।


📊 पूरे साल 2025 का प्रदर्शन

पूरे कैलेंडर वर्ष 2025 (CY25) के आंकड़ों पर नजर डालें तो Freshworks का प्रदर्शन और भी मजबूत रहा।

  • FY25 (CY25) में कुल रेवेन्यू $839 मिलियन रहा
  • 2024 में यह $720 मिलियन था
  • यानी साल-दर-साल 16% की वृद्धि

सबसे अहम बात यह है कि कंपनी ने पूरे साल में $13.2 मिलियन का GAAP ऑपरेटिंग प्रॉफिट दर्ज किया, जबकि 2024 में कंपनी को $138.6 मिलियन का घाटा हुआ था।

यह संकेत देता है कि Freshworks अब ग्रोथ के साथ-साथ प्रॉफिटेबिलिटी पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है।


👥 ग्राहक आधार में विस्तार

Freshworks के ग्राहक आधार में भी लगातार वृद्धि हो रही है।

कंपनी के अनुसार:

  • ऐसे ग्राहकों की संख्या, जो सालाना $5,000 से अधिक का recurring revenue देते हैं,
    10% बढ़कर 24,762 हो गई है।

इसके अलावा, कंपनी का Net Dollar Retention Rate (NDR) भी सुधरा है।

  • Q4 CY25 में NDR 108% रहा
  • Q4 CY24 में यह 103% था

108% का NDR दर्शाता है कि मौजूदा ग्राहक न केवल बने हुए हैं, बल्कि वे अपने खर्च में भी वृद्धि कर रहे हैं।


🤖 AI और अधिग्रहण पर फोकस

Q4 के दौरान Freshworks ने अपनी IT सर्विस मैनेजमेंट क्षमताओं को मजबूत करने के लिए FireHydrant का अधिग्रहण किया।

FireHydrant एक incident management प्लेटफॉर्म है, जिससे Freshworks अपने ITSM पोर्टफोलियो को और मजबूत करना चाहती है।

इसके अलावा, कंपनी ने अपने प्रमुख प्लेटफॉर्म:

  • Freshservice
  • Freshdesk

पर नई AI-आधारित फीचर्स लॉन्च किए हैं।

AI इंटीग्रेशन के जरिए कंपनी ग्राहकों को ऑटोमेशन, तेज रिस्पॉन्स टाइम और बेहतर कस्टमर एक्सपीरियंस देने का लक्ष्य रखती है।


👩‍💼 नई CMO की नियुक्ति

कंपनी ने इस तिमाही में Kady Srinivasan को अपना नया Chief Marketing Officer (CMO) नियुक्त किया है।

यह कदम कंपनी की ब्रांड पोजिशनिंग और ग्लोबल मार्केट में विस्तार रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।


🔮 2026 के लिए गाइडेंस

Freshworks ने आने वाली तिमाहियों के लिए सकारात्मक अनुमान जारी किया है।

  • मार्च 2026 तिमाही में रेवेन्यू $222–225 मिलियन रहने का अनुमान
  • पूरे वर्ष 2026 के लिए रेवेन्यू $952–960 मिलियन रहने की उम्मीद

यदि यह अनुमान सटीक साबित होते हैं, तो कंपनी पहली बार $1 बिलियन रेवेन्यू के करीब पहुंच सकती है।


🌍 SaaS सेक्टर में मजबूत स्थिति

Freshworks भारत में स्थापित एक ग्लोबल SaaS कंपनी है, जो कस्टमर सपोर्ट, IT सर्विस मैनेजमेंट और CRM सॉल्यूशंस प्रदान करती है।

कंपनी की प्रतिस्पर्धा Salesforce, Zendesk और ServiceNow जैसे बड़े खिलाड़ियों से है। इसके बावजूद Freshworks का फोकस मिड-मार्केट और SMB सेगमेंट पर रहा है, जिससे उसे अलग पहचान मिली है।


📌 निष्कर्ष

Q4 CY25 के नतीजे दिखाते हैं कि Freshworks अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुकी है — जहां ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी दोनों साथ चल रहे हैं।

  • रेवेन्यू में 15% वृद्धि
  • ऑपरेटिंग स्तर पर $40 मिलियन का मुनाफा
  • ग्राहक आधार और रिटेंशन में सुधार
  • AI और अधिग्रहण के जरिए प्रोडक्ट विस्तार

इन सभी संकेतकों से साफ है कि कंपनी अपनी रणनीति को सफलतापूर्वक लागू कर रही है।

अगर 2026 में कंपनी अपने गाइडेंस के अनुसार प्रदर्शन करती है, तो Freshworks जल्द ही $1 बिलियन रेवेन्यू क्लब के करीब पहुंच सकती है — जो भारतीय मूल की SaaS कंपनियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।

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BigHaat

भारतीय एग्रीटेक कंपनी BigHaat ने अपने लेटेस्ट फंडिंग राउंड में $10 मिलियन (करीब 83 करोड़ रुपये) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व Bidra Innovation Ventures ने किया, जो कि अमेरिका स्थित OCP Group की वेंचर कैपिटल शाखा है। OCP Group वैश्विक स्तर पर प्लांट न्यूट्रिशन सॉल्यूशंस में अग्रणी कंपनी मानी जाती है।

कंपनी की प्रेस रिलीज के अनुसार, इस फंडिंग राउंड में मौजूदा निवेशक JM Financial और प्रसिद्ध निवेशक आशीष कचोलिया ने भी भाग लिया।


🤝 OCP Group के साथ रणनीतिक साझेदारी

BigHaat के CEO सतीश नुकाला ने कहा:

“OCP Group के साथ यह साझेदारी हमें भारतीय किसानों तक एडवांस एग्रीकल्चर सॉल्यूशंस पहुंचाने में मदद करेगी और फार्मिंग इकोसिस्टम में हमारी भूमिका को और मजबूत बनाएगी।”

यह निवेश सिर्फ पूंजी जुटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे एक रणनीतिक सहयोग (Strategic Partnership) के रूप में देखा जा रहा है। OCP Group की वैश्विक विशेषज्ञता और BigHaat का स्थानीय किसान नेटवर्क मिलकर भारतीय कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।


📲 डिजिटल फार्मर इकोसिस्टम पर फोकस

कंपनी के अनुसार, यह नई पूंजी BigHaat की उस योजना को समर्थन देगी, जिसके तहत वह अपने डिजिटल किसान-केंद्रित इकोसिस्टम का विस्तार करना चाहती है।

BigHaat का लक्ष्य है:

  • किसानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बेहतर इनपुट्स उपलब्ध कराना
  • खेती से जुड़े डेटा को ट्रैसेबल बनाना
  • वैश्विक मानकों के अनुरूप (globally compliant) फूड वैल्यू चेन तैयार करना

इसका मतलब है कि खेत से लेकर बाजार तक की पूरी सप्लाई चेन को पारदर्शी और ट्रैकेबल बनाया जाएगा।


🌶️ मसाला वैल्यू चेन में मजबूत पकड़

पिछले कुछ वर्षों में BigHaat ने भारतीय मसाला (Spices) वैल्यू चेन में तेजी से विस्तार किया है।

कंपनी का दावा है कि उसने देश का सबसे बड़ा डायरेक्ट-टू-फार्मर नेटवर्क तैयार किया है। इसके जरिए वह सीधे किसानों के साथ जुड़कर उन्हें बेहतर कृषि इनपुट, तकनीकी सलाह और बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराती है।


🌱 ESG और सस्टेनेबिलिटी पर जोर

BigHaat की खासियत यह है कि वह ESG (Environmental, Social, Governance) आधारित खेती और सोर्सिंग प्रैक्टिस अपनाती है।

कंपनी का फोकस है:

  • कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emissions) कम करना
  • ट्रैसेबिलिटी सुनिश्चित करना
  • IPM (Integrated Pest Management) आधारित फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स का पालन करना

इससे न केवल किसानों की आय में सुधार होता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय कृषि उत्पादों की स्वीकार्यता भी बढ़ती है।


🌍 Bidra Innovation Ventures का नजरिया

Bidra Innovation Ventures के CEO यासीन चेरकाउई ने इस साझेदारी को लेकर कहा:

“हमारा मानना है कि कृषि उत्पादकता में स्थायी सुधार स्थानीय स्तर पर विकसित समाधानों से ही संभव है। ऐसे समाधान जो किसानों की आय बढ़ाएं और साथ ही वैश्विक गुणवत्ता, फूड सेफ्टी और पर्यावरण मानकों को पूरा करें।”

इस बयान से साफ है कि यह निवेश दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ किया गया है।


💰 अब तक ₹300 करोड़ की फंडिंग

स्टार्टअप डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म TheKredible के अनुसार, इस राउंड के बाद BigHaat ने अब तक कुल मिलाकर लगभग ₹300 करोड़ की फंडिंग जुटा ली है।

यह फंडिंग कंपनी को टेक्नोलॉजी, सप्लाई चेन और इंटरनेशनल मार्केट एक्सपेंशन में मदद करेगी।


📊 FY25 में ₹1,100 करोड़ का रेवेन्यू पार

वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो BigHaat ने FY25 में मजबूत ग्रोथ दर्ज की है।

कंपनी ने:

  • ₹1,100 करोड़ से अधिक का रेवेन्यू हासिल किया
  • साथ ही अपनी प्रॉफिटेबिलिटी मैट्रिक्स में सुधार किया

हालांकि विस्तृत मुनाफे के आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन कंपनी का दावा है कि उसकी लाभप्रदता (profitability) में सुधार हुआ है।


🚜 भारतीय कृषि में डिजिटल बदलाव

भारत में एग्रीटेक सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, डेटा एनालिटिक्स और सस्टेनेबल फार्मिंग प्रैक्टिस के जरिए किसान अब बेहतर निर्णय ले पा रहे हैं।

BigHaat का मॉडल इस बदलाव का एक अहम हिस्सा है, जहां:

  • किसान सीधे टेक्नोलॉजी से जुड़ते हैं
  • उन्हें बेहतर क्वालिटी इनपुट्स मिलते हैं
  • और उनकी उपज वैश्विक बाजार तक पहुंच सकती है

🔮 आगे की राह

OCP Group जैसी वैश्विक कंपनी के साथ साझेदारी BigHaat को न केवल वित्तीय मजबूती देगी, बल्कि इंटरनेशनल नेटवर्क और टेक्निकल विशेषज्ञता भी उपलब्ध कराएगी।

आने वाले समय में कंपनी:

  • डिजिटल प्लेटफॉर्म को और मजबूत करेगी
  • ट्रैसेबल फूड वैल्यू चेन बनाएगी
  • और सस्टेनेबल एग्रीकल्चर को बढ़ावा देगी

अगर कंपनी अपनी रणनीति को सफलतापूर्वक लागू करती है, तो BigHaat भारतीय एग्रीटेक सेक्टर में एक ग्लोबल प्लेयर के रूप में उभर सकती है।


📌 निष्कर्ष

BigHaat का यह $10 मिलियन फंडिंग राउंड सिर्फ पूंजी जुटाने का मामला नहीं है, बल्कि यह भारतीय कृषि को अधिक टेक्नोलॉजी-ड्रिवन और सस्टेनेबल बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

₹1,100 करोड़ से अधिक के रेवेन्यू और ₹300 करोड़ की कुल फंडिंग के साथ BigHaat अब एक मजबूत स्थिति में है। OCP Group के सहयोग से कंपनी भारतीय किसानों की आय बढ़ाने और वैश्विक मानकों पर खरा उतरने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकती है।

भारतीय एग्रीटेक सेक्टर के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है, जो दिखाता है कि वैश्विक निवेशक अब भारतीय कृषि में बड़े अवसर देख रहे हैं।

Read more :💄 HUL के अधिग्रहण के बाद भी Minimalist की रफ्तार बरकरार,

💄 HUL के अधिग्रहण के बाद भी Minimalist की रफ्तार बरकरार,

Minimalist

हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) के स्वामित्व वाली D2C स्किनकेयर ब्रांड Minimalist ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में मजबूत ग्रोथ दर्ज की है। जयपुर स्थित इस कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू साल-दर-साल 48% बढ़कर ₹514.8 करोड़ तक पहुंच गया। हालांकि, 46 करोड़ रुपये के एकमुश्त (exceptional) खर्च के कारण कंपनी को शुद्ध घाटा दर्ज करना पड़ा।

Registrar of Companies (RoC) से प्राप्त समेकित वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, FY24 में 347.4 करोड़ रुपये रहे रेवेन्यू के मुकाबले FY25 में यह आंकड़ा 514.8 करोड़ रुपये हो गया।


🌿 2020 में हुई शुरुआत, D2C मॉडल पर फोकस

Minimalist की स्थापना वर्ष 2020 में मोहित यादव और राहुल यादव ने की थी। यह ब्रांड स्किन और हेयर केयर प्रोडक्ट्स जैसे serums, toners, moisturizers आदि पेश करता है।

कंपनी अपने उत्पादों की बिक्री:

  • अपनी आधिकारिक वेबसाइट
  • Amazon
  • Nykaa
  • Flipkart

जैसे प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के जरिए करती है।

FY25 में कंपनी की पूरी आय केवल प्रोडक्ट सेल्स से आई, जो इसके मजबूत D2C (Direct-to-Consumer) मॉडल को दर्शाती है।


📊 कुल आय ₹517.6 करोड़

ऑपरेशंस से 514.8 करोड़ रुपये के अलावा कंपनी को ₹2.84 करोड़ नॉन-ऑपरेटिंग इनकम भी हुई। इस तरह FY25 में कंपनी की कुल आय बढ़कर ₹517.6 करोड़ तक पहुंच गई।

यह ग्रोथ दर्शाती है कि Minimalist ने भारतीय ब्यूटी और पर्सनल केयर मार्केट में अपनी मजबूत पहचान बना ली है।


📢 विज्ञापन पर भारी खर्च

Minimalist ने FY25 में अपनी ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर जमकर खर्च किया।

  • विज्ञापन और प्रमोशन पर ₹154 करोड़ खर्च किए गए
  • यह कंपनी के कुल खर्च का 30% से अधिक है
  • FY24 के मुकाबले इसमें 28% की वृद्धि हुई

D2C ब्रांड्स के लिए डिजिटल मार्केटिंग और सोशल मीडिया प्रमोशन बेहद अहम होता है, और Minimalist ने इसी रणनीति पर जोर बनाए रखा।


🏭 मटेरियल और डिस्ट्रीब्यूशन खर्च भी बढ़े

रेवेन्यू में बढ़ोतरी के साथ-साथ लागत भी बढ़ी।

  • मटेरियल कॉस्ट 57% बढ़कर ₹146.7 करोड़ हो गई (FY24: ₹93.7 करोड़)
  • डिस्ट्रीब्यूशन खर्च, जिसमें मार्केटप्लेस कमीशन शामिल है, ₹84.3 करोड़ रहा
  • कर्मचारी लाभ खर्च 29% बढ़कर ₹36.8 करोड़ हो गया

इसके अलावा, किराया, ट्रांसपोर्टेशन, वेयरहाउसिंग, लीगल और प्रोफेशनल फीस जैसे अन्य ओवरहेड्स पर ₹82 करोड़ खर्च हुए।

इन सभी को मिलाकर FY25 में कंपनी का कुल खर्च बढ़कर ₹504 करोड़ हो गया, जो FY24 में 333.2 करोड़ रुपये था। यानी खर्चों में 51% की वृद्धि दर्ज की गई।


📉 EBITDA पॉजिटिव, लेकिन शुद्ध घाटा

दिलचस्प बात यह है कि कंपनी का EBITDA ₹18 करोड़ पॉजिटिव रहा। यानी ऑपरेशनल स्तर पर कंपनी लाभ में रही।

हालांकि, 46 करोड़ रुपये के एकमुश्त (exceptional) खर्च के कारण Minimalist को FY25 में ₹31.5 करोड़ का शुद्ध घाटा उठाना पड़ा।

इन exceptional items का विवरण वित्तीय दस्तावेजों में स्पष्ट नहीं किया गया है।


📈 मार्जिन और वित्तीय स्थिति

  • ROCE (Return on Capital Employed): 10.55%
  • EBITDA मार्जिन: 3.45%

FY25 में कंपनी ने हर 1 रुपये की ऑपरेटिंग आय कमाने के लिए ₹0.98 खर्च किए

मार्च 2025 तक कंपनी के पास ₹229 करोड़ के करंट एसेट्स थे, जिनमें से ₹48 करोड़ कैश और बैंक बैलेंस शामिल हैं।


🤝 HUL ने खरीदी 90.5% हिस्सेदारी

जनवरी 2025 में FMCG दिग्गज Hindustan Unilever Limited (HUL) ने Minimalist में 90.5% हिस्सेदारी खरीदी।

यह सौदा ₹2,955 करोड़ (लगभग $350 मिलियन) के प्री-मनी वैल्यूएशन पर हुआ, जो हाल के वर्षों में D2C सेक्टर के सबसे बड़े अधिग्रहणों में से एक है।

यह ट्रांजैक्शन FY26 की पहली तिमाही (Q1 FY26) में पूरा होने की उम्मीद है।


💰 निवेशकों की हिस्सेदारी

अधिग्रहण से पहले Minimalist ने कुल $17 मिलियन फंडिंग जुटाई थी।

  • Peak XV ने $15 मिलियन की Series A राउंड लीड की थी
  • Peak XV के पास 27.9% हिस्सेदारी है
  • को-फाउंडर्स मोहित और राहुल यादव के पास 62% हिस्सेदारी थी

🔮 HUL का प्रभाव अभी सीमित

अब तक Minimalist के वित्तीय नतीजों में HUL के अधिग्रहण का कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आया है। यह कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत हो सकता है, क्योंकि ब्रांड को स्वतंत्र रूप से काम करने और अपनी रणनीति लागू करने का समय मिल रहा है।

HUL ने इस ब्रांड के लिए प्रीमियम वैल्यूएशन चुकाया है, जिससे साफ है कि कंपनी Minimalist की ग्रोथ क्षमता पर भरोसा जता रही है।


📌 निष्कर्ष

Minimalist ने FY25 में शानदार रेवेन्यू ग्रोथ दिखाई और ₹500 करोड़ का आंकड़ा पार किया। हालांकि, बढ़ते खर्च और exceptional items के कारण शुद्ध घाटा दर्ज हुआ, लेकिन ऑपरेशनल स्तर पर कंपनी लाभ में बनी रही।

HUL के अधिग्रहण के बाद Minimalist के पास मजबूत वित्तीय बैकअप और वितरण नेटवर्क का फायदा होगा। आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या Minimalist अपनी ग्रोथ को स्थायी मुनाफे में बदल पाती है या नहीं।

भारतीय D2C ब्यूटी मार्केट में Minimalist की यह यात्रा फिलहाल तेजी से आगे बढ़ती नजर आ रही है।

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🏢 IndiQube Q3 FY26 Results रेवेन्यू में 45% की तेजी,

IndiQube

मैनेज्ड वर्कस्पेस सॉल्यूशंस प्रोवाइडर IndiQube ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) की तीसरी तिमाही (Q3) के अपने वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने इस दौरान ऑपरेशनल स्तर पर मजबूत ग्रोथ दर्ज की, लेकिन बढ़ती लागत और फाइनेंस खर्च के कारण उसका घाटा साल-दर-साल (YoY) बढ़ गया।

Ind AS के अनुसार, Q3 FY26 में कंपनी का ऑपरेटिंग स्केल 45.5% बढ़ा, जबकि घाटे में 21% की वृद्धि दर्ज की गई।


📈 रेवेन्यू 390 करोड़ रुपये पहुंचा

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर उपलब्ध वित्तीय विवरण के मुताबिक, IndiQube का ऑपरेशंस से रेवेन्यू Q3 FY26 में बढ़कर 390 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही (Q3 FY25) में 268 करोड़ रुपये था।

इस तरह कंपनी ने साल-दर-साल आधार पर लगभग 45% की वृद्धि दर्ज की।

इसके अलावा, कंपनी को नॉन-ऑपरेटिंग सोर्सेस से 21 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हुई, जिससे कुल आय Q3 FY26 में बढ़कर 411 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।


📊 नौ महीनों में 38% की वृद्धि

अगर पूरे नौ महीने (अप्रैल से दिसंबर अवधि) की बात करें तो बेंगलुरु स्थित IndiQube ने FY26 के पहले नौ महीनों में 1,049 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया।

यह पिछले साल की समान अवधि (FY25) में दर्ज 762 करोड़ रुपये के मुकाबले 38% की वृद्धि दर्शाता है।

यह आंकड़े बताते हैं कि कंपनी अपने मैनेज्ड ऑफिस और फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस मॉडल के जरिए लगातार विस्तार कर रही है।


💼 खर्चों में भी तेज बढ़ोतरी

जहां एक तरफ कंपनी का रेवेन्यू तेजी से बढ़ा, वहीं दूसरी तरफ खर्चों में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।

👩‍💼 कर्मचारी लाभ खर्च

Q3 FY26 में कर्मचारी लाभ से जुड़े खर्च 34% बढ़कर 23.5 करोड़ रुपये हो गए। यह बढ़ोतरी कंपनी के विस्तार और नए सेंटर्स जोड़ने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

💳 फाइनेंस कॉस्ट

कंपनी का सबसे बड़ा खर्च फाइनेंस कॉस्ट रहा, जो कुल खर्च का करीब 26% हिस्सा है।

यह खर्च Q3 FY26 में बढ़कर 112 करोड़ रुपये हो गया, जो Q3 FY25 में 86 करोड़ रुपये था। यानी इसमें 30% की वृद्धि दर्ज की गई।

🏗️ डिप्रिसिएशन और अमोर्टाइजेशन

इसी तरह, डिप्रिसिएशन और अमोर्टाइजेशन खर्च भी बढ़कर 144 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह आमतौर पर नई प्रॉपर्टीज, इंफ्रास्ट्रक्चर और एसेट्स में निवेश के कारण बढ़ता है।


📉 कुल खर्च 434 करोड़ रुपये

इन सभी कारकों को मिलाकर Q3 FY26 में कंपनी का कुल खर्च बढ़कर 434 करोड़ रुपये हो गया, जो Q3 FY25 में 313 करोड़ रुपये था।

इस तरह कुल खर्च में साल-दर-साल आधार पर 39% की वृद्धि हुई।


🔻 घाटा 17 करोड़ रुपये

बढ़ते खर्चों के चलते IndiQube का घाटा भी बढ़ा।

Q3 FY26 में कंपनी का शुद्ध घाटा 17 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही में 14 करोड़ रुपये था। यानी घाटे में 21% की वृद्धि हुई।

हालांकि, एक सकारात्मक संकेत यह है कि तिमाही आधार (QoQ) पर कंपनी के घाटे में कमी आई है।

Q2 FY26 में जहां कंपनी का घाटा 30 करोड़ रुपये था, वहीं Q3 में यह घटकर 17 करोड़ रुपये रह गया। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी अपने खर्चों को धीरे-धीरे संतुलित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।


📌 शेयर प्राइस और मार्केट कैप

आज के ट्रेडिंग सेशन के अंत में IndiQube का शेयर प्राइस 177 रुपये पर बंद हुआ।

इस कीमत पर कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 3,751 करोड़ रुपये (करीब $414 मिलियन) रहा।


🏙️ विस्तार की रणनीति पर फोकस

IndiQube देशभर में मैनेज्ड ऑफिस स्पेस और फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस उपलब्ध कराती है। हाइब्रिड वर्क कल्चर और स्टार्टअप इकोसिस्टम के विस्तार के चलते इस सेक्टर में मांग लगातार बढ़ रही है।

कंपनी अपने नेटवर्क को बड़े शहरों के साथ-साथ उभरते बिजनेस हब्स तक विस्तार देने पर ध्यान दे रही है। हालांकि, इस विस्तार के साथ फाइनेंस कॉस्ट और डिप्रिसिएशन जैसे खर्च भी बढ़ रहे हैं, जो फिलहाल मुनाफे पर दबाव बना रहे हैं।


🔮 निष्कर्ष

कुल मिलाकर Q3 FY26 में IndiQube ने मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ दिखाई है। कंपनी का ऑपरेटिंग स्केल 45% से अधिक बढ़ा है और नौ महीने की अवधि में भी शानदार वृद्धि दर्ज की गई है।

हालांकि, बढ़ते फाइनेंस कॉस्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के कारण घाटा साल-दर-साल बढ़ा है। फिर भी, तिमाही आधार पर घाटे में कमी आना एक सकारात्मक संकेत है।

आने वाले समय में अगर कंपनी अपने खर्चों को बेहतर तरीके से मैनेज कर पाती है और फाइनेंस कॉस्ट को नियंत्रित करती है, तो यह ग्रोथ को मुनाफे में बदलने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।

IndiQube फिलहाल ग्रोथ और स्केल पर फोकस कर रही है, और निवेशक इसकी लागत प्रबंधन रणनीति पर नजर बनाए हुए हैं।

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⚡️ AI से बदलेगा एनर्जी सेक्टर लंदन की tem ने जुटाए $75 मिलियन,

tem

एनर्जी सेक्टर लंबे समय से जटिल कॉन्ट्रैक्ट्स, छुपे हुए चार्जेस और पुराने सिस्टम्स से जूझ रहा है। बिजली खरीदना और बेचना आज भी कई बिज़नेस के लिए एक confusing और महंगा प्रोसेस बना हुआ है, जहां जोखिम और inefficiency साफ नजर नहीं आते। लेकिन अब इस सेक्टर में AI आधारित टेक्नोलॉजी के जरिए बड़ा बदलाव आने वाला है।

लंदन स्थित एनर्जी टेक स्टार्टअप tem इसी समस्या को हल करने के मिशन पर काम कर रहा है। कंपनी ने हाल ही में अपने Series B फंडिंग राउंड में $75 मिलियन जुटाए हैं, जो कि oversubscribed रहा यानी निवेशकों की मांग उम्मीद से ज्यादा थी।


💰 Series B में Lightspeed की अगुवाई, कुल फंडिंग $94 मिलियन

tem के इस Series B राउंड का नेतृत्व Lightspeed Venture Partners ने किया है। इस राउंड के साथ Lightspeed के पार्टनर Paul Murphy कंपनी के बोर्ड में भी शामिल होंगे।

अन्य प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:

  • Hitachi Ventures
  • Voyager Ventures
  • Schroders Capital
  • AlbionVC
  • Atomico
  • Allianz

इस नए निवेश के बाद tem की कुल फंडिंग $94 मिलियन तक पहुंच गई है।


📈 2030 तक 165% बढ़ेगी एनर्जी डिमांड

डेटा सेंटर्स, AI, और बड़े पैमाने पर electrification की वजह से 2030 तक एनर्जी डिमांड में करीब 165% की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। ऐसे में मौजूदा एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर इस बढ़ते दबाव को संभालने में सक्षम नहीं दिखता।

tem इसी gap को भरने के लिए AI-driven transaction infrastructure तैयार कर रहा है, जो एनर्जी खरीद-फरोख्त को उतना ही आसान और पारदर्शी बनाना चाहता है, जितना fintech ने बैंकिंग को बनाया।


🤖 Rosso AI और RED: tem का टेक्नोलॉजी मॉडल

tem का प्लेटफॉर्म दो मुख्य हिस्सों में काम करता है:

🔹 Rosso AI Engine

  • एनर्जी कॉन्ट्रैक्ट्स को automate करता है
  • अनावश्यक fees को खत्म करता है
  • data-driven pricing के जरिए 30% तक लागत कम करता है

🔹 RED Neo-Utility Platform

  • बिज़नेस और ब्रोकर्स के लिए user-friendly इंटरफेस
  • बिजली खरीदने, बेचने और मैनेज करने की सुविधा
  • कोई hidden cost नहीं, पूरी transparency

कंपनी के मुताबिक, Rosso और RED मिलकर हर साल 2 TWh (टेरावॉट ऑवर) एनर्जी ट्रांजैक्शन मैनेज कर रहे हैं।


🏢 2,600 से ज्यादा UK ग्राहक, $300 मिलियन का GTV

2025 में tem ने:

  • $300 मिलियन का annual gross transaction value (GTV)
  • 2,600+ UK बिज़नेस कस्टमर

कंपनी के प्रमुख ग्राहकों में शामिल हैं:

  • Boohoo
  • Fever-Tree
  • Silverstone
  • Newcastle United FC

यह आंकड़े दिखाते हैं कि tem का मॉडल सिर्फ आइडिया नहीं, बल्कि commercially proven भी है।


🧠 फाउंडर्स का विज़न: “एनर्जी के लिए वही करेंगे जो Fintech ने बैंकिंग के लिए किया”

tem की स्थापना 2021 में Joe McDonald (CEO) ने अपने co-founders Jason Stocks, Bartlomiej Szostek और Ross Mackay के साथ मिलकर की थी। इन सभी ने पहले utility और energy trading सिस्टम्स की खामियों को करीब से देखा था।

tem के फाउंडर्स के अनुसार:

“हम एनर्जी इंडस्ट्री के transaction infrastructure को दोबारा बना रहे हैं। हमारा लक्ष्य है कि एनर्जी मार्केट भी transparent, efficient और scalable बने – ठीक वैसे ही जैसे fintech ने बैंकिंग को बदला।”


⚔️ प्रतिस्पर्धा: Enel X और Octopus Energy से मुकाबला

tem का मुकाबला:

  • Enel X से है, जो global energy management पर काम करता है
  • Octopus Energy से है, जो UK retail energy market में मजबूत है

हालांकि tem खुद को अलग इसलिए मानता है क्योंकि उसने शुरू से ही core infrastructure को नए सिरे से rebuild किया है, न कि पुराने सिस्टम पर नया लेयर जोड़ा है।


🌍 आगे क्या? UK से Texas और Australia तक विस्तार

इस $75 मिलियन की फंडिंग का इस्तेमाल tem:

  • UK में अपने operations को और मजबूत करने
  • Texas (USA) और Australia जैसे markets में entry
  • Rosso AI को ज्यादा कंपनियों के लिए available बनाने
  • Pricing accuracy बढ़ाने के लिए data pool expand करने

में करेगा।

फाउंडर्स का मानना है कि अगले 3–5 सालों में tem का infrastructure दुनिया भर की energy कंपनियां, neo-utilities और नए ब्रांड्स अपनाएंगे।


🔮 निष्कर्ष

AI, data और automation के दौर में tem एनर्जी सेक्टर को fair, clear और efficient बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। जिस तरह fintech ने बैंकिंग को आसान बनाया, उसी तरह tem आने वाले समय में एनर्जी इंडस्ट्री की तस्वीर बदल सकता है।

जैसे-जैसे एनर्जी डिमांड बढ़ेगी, tem जैसे प्लेटफॉर्म्स की भूमिका और भी अहम होती जाएगी।

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