⚡ Zepto को Elcid Investment से ₹7.5 करोड़ की फंडिंग,

Zepto

तेजी से बढ़ते क्विक कॉमर्स स्टार्टअप Zepto ने FY25 में ₹11,110 करोड़ का टर्नओवर दर्ज किया


📦 Elcid Investment से मिला नया निवेश

भारत के तेजी से उभरते क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म Zepto को ₹7.5 करोड़ की नई फंडिंग प्राप्त हुई है। यह निवेश Elcid Investment के जरिए किया गया है, जिसकी जानकारी Zepto ने अपनी स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के माध्यम से दी है।

इस डील के तहत, Elcid Investment ने 22,55,639 इक्विटी शेयर Zepto में खरीदे हैं, जिसकी प्रति शेयर कीमत ₹33.23 रखी गई है। यह निवेश कंपनी में 0.039% इक्विटी हिस्सेदारी को दर्शाता है।


💸 $500 मिलियन फंडिंग राउंड की तैयारी

इस छोटे निवेश के साथ ही, Zepto अब एक बड़े $500 मिलियन फंडिंग राउंड की तैयारी में भी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह राउंड General Catalyst, Avenir और अन्य मौजूदा निवेशकों की अगुवाई में किया जाएगा।

इस राउंड के बाद Zepto की संभावित वैल्यूएशन $7 बिलियन (लगभग ₹58,000 करोड़) तक पहुंच सकती है। हालांकि यह सब अभी शुरुआती बातचीत के चरण में है।


📉 वैल्यूएशन में 50% की गिरावट

हालिया निवेश के समय Zepto की वैल्यूएशन ₹19,231 करोड़ (लगभग $2.26 बिलियन) आंकी गई है। यह पिछले साल अगस्त 2023 में हुए $340 मिलियन फंडरेज़ के समय की $5 बिलियन वैल्यूएशन से लगभग 50% कम है।

इस गिरावट का कारण बदलते मार्केट ट्रेंड्स, घाटे में चल रही यूनिट इकॉनॉमिक्स और IPO की देरी को माना जा रहा है।


📈 FY25 में 2.5X रेवेन्यू ग्रोथ

बावजूद इसके, Zepto ने अपने टर्नओवर में जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की है।

वित्तीय वर्षटर्नओवर (₹ करोड़ में)
FY23₹2,024.4 करोड़
FY24₹4,454.5 करोड़
FY25₹11,110 करोड़

FY25 में Zepto का कुल कारोबार 2.5 गुना बढ़ा, जो FY24 के ₹4,454.5 करोड़ के मुकाबले एक बड़ी छलांग है। लगातार तीन वर्षों से कंपनी की आय लगभग दोगुनी होती जा रही है, जो इसके मजबूत ग्राहक आधार और वितरण नेटवर्क को दर्शाता है।


🏠 अब भारत में रजिस्टर, IPO टला FY26 तक

Zepto ने हाल ही में अपना डोमिसाइल (मुख्यालय) सिंगापुर से भारत शिफ्ट कर लिया है। यह कदम संभावित IPO (Initial Public Offering) की तैयारी के तहत उठाया गया था।

हालांकि, ताज़ा जानकारी के अनुसार अब कंपनी ने अपना IPO FY26 तक टाल दिया है। मार्केट कंडीशन और वैल्यूएशन में गिरावट इसके पीछे की वजह मानी जा रही है।


🆚 बढ़ती प्रतिस्पर्धा: Blinkit और Swiggy Instamart

Zepto को भारत के क्विक कॉमर्स मार्केट में दो बड़े प्रतिद्वंद्वियों से कड़ी चुनौती मिल रही है:

🔶 Blinkit

  • मालिक: Zomato की पेरेंट कंपनी Eternal
  • प्रदर्शन: FY26 की पहली तिमाही (Q1) में ₹2,400 करोड़ का रेवेन्यू
  • दिलचस्प बात: Blinkit का यह रेवेन्यू Eternal की फूड डिलीवरी सेगमेंट से भी ज्यादा था

🔷 Swiggy Instamart

  • अब तक अपने Q1 FY26 के वित्तीय परिणाम साझा नहीं किए हैं
  • लेकिन Zepto और Blinkit से सीधे टक्कर में है

Zepto, Blinkit और Swiggy के बीच चल रही इस रेस में, रेवेन्यू ग्रोथ तो Zepto के पक्ष में है, लेकिन मार्केट हिस्सेदारी और ब्रांड स्थायित्व में अभी काफी मेहनत बाकी है।


📦 क्या है Zepto का बिज़नेस मॉडल?

Zepto एक 10 मिनट डिलीवरी आधारित क्विक कॉमर्स स्टार्टअप है, जो ग्रॉसरी, डेली एसेंशियल्स, और FMCG प्रोडक्ट्स को यूज़र्स के दरवाजे तक तेजी से पहुंचाता है।

इसका संचालन भारत के कई बड़े शहरों में डार्क स्टोर मॉडल के जरिए होता है। इसका लक्ष्य तेजी से ग्रोथ करते कंज्यूमर ऑन-डिमांड सेगमेंट में लीडर बनना है।


🔮 आगे की राह

  • ₹11,000+ करोड़ के टर्नओवर के साथ Zepto ने मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत की है
  • IPO के टलने और वैल्यूएशन में गिरावट कंपनी के लिए शॉर्ट टर्म में चुनौती है
  • लेकिन $500 मिलियन की संभावित फंडिंग और मौजूदा ऑपरेशनल ग्रोथ भविष्य में नए अवसर खोल सकती है

📌 निष्कर्ष

Zepto का सफर निवेश, विकास और प्रतिस्पर्धा से भरा रहा है। जहां एक ओर इसका रेवेन्यू तीन वर्षों में लगातार दोगुना हो रहा है, वहीं दूसरी ओर वैल्यूएशन में गिरावट और IPO में देरी जैसे सवाल भी खड़े हो रहे हैं। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या Zepto अपने नए फंडिंग राउंड और ऑपरेशनल स्केलिंग के ज़रिए अपने मार्केट पोजीशन को और मजबूत कर पाता है।

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🚗 CarTrade ने Q1 FY26 में मुनाफा किया दोगुना,

CarTrade

ऑपरेशनल दक्षता और तीन सेगमेंट्स की मजबूती से कंपनी को मिला जबरदस्त फाइनेंशियल ग्रोथ


📊 तिमाही नतीजों में दमदार प्रदर्शन

ऑटोमोबाइल क्लासिफाइड्स प्लेटफॉर्म CarTrade Tech Ltd ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (Q1 FY26) के लिए अपने अनऑडिटेड वित्तीय परिणाम जारी कर दिए हैं। कंपनी ने इस तिमाही में 22% सालाना वृद्धि के साथ ₹173 करोड़ का ऑपरेशनल रेवेन्यू दर्ज किया है, जो कि Q1 FY25 में ₹142 करोड़ था।

वहीं कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹47 करोड़ रहा है, जो कि पिछले वर्ष की समान तिमाही (Q1 FY25) में ₹23 करोड़ था। यानी मुनाफे में सीधा 2 गुना उछाल देखा गया है।


💼 कुल आय और सेगमेंट वाइज प्रदर्शन

CarTrade की कुल आय (Total Income) Q1 FY26 में बढ़कर ₹199 करोड़ हो गई, जो Q1 FY25 में ₹157 करोड़ थी। कंपनी की कमाई तीन प्रमुख सेगमेंट्स से होती है:

1️⃣ कंज़्यूमर सेगमेंट

  • इस सेगमेंट से आय ₹66 करोड़ रही (Q1 FY25 में ₹51 करोड़)
  • कुल ऑपरेशनल रेवेन्यू में इस सेगमेंट की हिस्सेदारी 38% रही

2️⃣ रीमार्केटिंग सेगमेंट

  • इस सेगमेंट से कंपनी ने ₹59 करोड़ की आय अर्जित की

3️⃣ क्लासिफाइड सेगमेंट

  • इस सेगमेंट से रेवेन्यू ₹48 करोड़ रहा

तीनों सेगमेंट्स ने मिलकर कंपनी को मजबूत राजस्व देने में सहयोग किया है।


💰 खर्च पर नियंत्रण, मुनाफे में जबरदस्त बढ़ोतरी

👥 कर्मचारी खर्च

Q1 FY26 में कंपनी का कुल खर्च ₹142 करोड़ रहा, जिसमें से सबसे बड़ी हिस्सेदारी कर्मचारी लाभ खर्च (Employee Benefits Expense) की रही। यह ₹75 करोड़ रहा, जो कि कुल खर्च का 53% है। यह खर्च पिछले वर्ष की तुलना में केवल 6% की वृद्धि पर रहा, जो अच्छी लागत-प्रबंधन रणनीति को दर्शाता है।

🧾 अन्य खर्च

अन्य परिचालन खर्चों के साथ कंपनी का कुल व्यय Q1 FY25 के ₹131 करोड़ से बढ़कर Q1 FY26 में ₹142 करोड़ हो गया, यानी लगभग 8% की वृद्धि

💹 मुनाफा दोगुना

खर्चों पर नियंत्रण और रेवेन्यू ग्रोथ की वजह से कंपनी का शुद्ध लाभ ₹47 करोड़ रहा, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में दोगुना है।


📈 शेयर बाज़ार में प्रदर्शन

CarTrade का शेयर Q1 रिज़ल्ट के दिन ₹1,871 पर ट्रेड कर रहा था (10:56 AM तक)। कंपनी की बाज़ार पूंजी ₹8,886 करोड़ (लगभग $1.03 बिलियन) तक पहुंच गई है, जो निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।


🏢 CarTrade किस क्षेत्र में काम करती है?

CarTrade एक प्रमुख ऑनलाइन ऑटोमोबाइल प्लेटफॉर्म है जो नई और पुरानी गाड़ियों की खरीद-बिक्री, रिव्यू, ऑक्शन और फाइनेंसिंग जैसी सेवाएं देती है। इसका संचालन मुख्य रूप से तीन बिज़नेस यूनिट्स में होता है:

  • कंज़्यूमर प्लेटफॉर्म: जहां यूज़र्स गाड़ियाँ ब्राउज़ और खरीद सकते हैं
  • रीमार्केटिंग प्लेटफॉर्म: जहां डीलर्स और कंपनियां वाहनों की बोली और बिक्री करती हैं
  • क्लासिफाइड्स: ऑटो लिस्टिंग, बायर-सेलर कनेक्शन और डिजिटल विज्ञापन

📌 क्यों महत्वपूर्ण हैं ये नतीजे?

CarTrade ने IPO के बाद अपने प्रदर्शन में स्थिरता लाई है और Q1 FY26 के नतीजे दिखाते हैं कि कंपनी ऑपरेशनल रूप से मजबूत, खर्च नियंत्रण में सक्षम और मार्केट में कॉम्पिटिटिव बनी हुई है।

  • बढ़ता रेवेन्यू यह दर्शाता है कि उपभोक्ता वर्ग में कंपनी की पकड़ मजबूत हो रही है
  • मुनाफे में उछाल से निवेशकों का भरोसा और भी बढ़ेगा
  • स्थिर ग्रोथ, मार्केट कैप और कम खर्च इसे भारत के डिजिटल ऑटो क्लासिफाइड सेक्टर का लीडर बना रहे हैं

📅 आगे क्या?

CarTrade की अगली तिमाही पर नज़रें रहेंगी कि क्या यह प्रदर्शन बरकरार रहेगा। बढ़ती प्रतिस्पर्धा और EV सेक्टर की ग्रोथ को देखते हुए कंपनी का डिजिटल इनोवेशन और सेगमेंट डाइवर्सिफिकेशन इसकी सफलता की कुंजी बनेगा।


निष्कर्ष:
CarTrade का Q1 FY26 प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि कंपनी अपने व्यवसाय मॉडल को न सिर्फ स्थिर रखे हुए है, बल्कि निरंतर मुनाफे और ग्रोथ की ओर भी अग्रसर है। आने वाले समय में यह भारत की डिजिटल ऑटोमोबाइल इकोनॉमी में और बड़ी भूमिका निभा सकती है।

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📈 IPO की राह पर Lenskart ₹2,150 करोड़ जुटाने को मिली मंज़ूरी,

Lenskart

📌 कंपनी ने AGM में लिया बड़ा फैसला

भारत की प्रमुख आईवियर रिटेलर Lenskart ने अपने आगामी Initial Public Offering (IPO) की दिशा में एक और अहम कदम उठाया है। 26 जुलाई 2025 को आयोजित 17वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में कंपनी ने ₹2,150 करोड़ के फ्रेश इश्यू को मंज़ूरी दी है। यह प्रस्ताव कंपनी के शेयरधारकों द्वारा पास किया गया।


💼 मौजूदा निवेशकों के लिए भी OFS का विकल्प

कंपनी इस IPO के ज़रिए न सिर्फ फ्रेश फंड जुटाएगी, बल्कि Offer-for-Sale (OFS) के ज़रिए मौजूदा निवेशकों को भी हिस्सेदारी बेचने का मौका मिलेगा। हालांकि अभी OFS के आकार की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।


💰 IPO के ज़रिए $1 बिलियन जुटाने की योजना

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Lenskart इस IPO से लगभग $1 बिलियन (₹8,300 करोड़) जुटाने की योजना बना रही है। इसका लक्ष्य है लगभग ₹83,000 करोड़ ($10 बिलियन) की वैल्यूएशन हासिल करना, जो इसे भारत की सबसे मूल्यवान स्टार्टअप IPO में से एक बना सकता है।


🏢 प्राइवेट से पब्लिक बनी कंपनी

IPO से पहले, कंपनी ने खुद को प्राइवेट लिमिटेड से पब्लिक लिमिटेड कंपनी में बदल लिया है। इस रणनीतिक बदलाव की जानकारी सबसे पहले Entrackr ने रिपोर्ट की थी।


📈 पिछली वैल्यूएशन और निवेशक अपडेट

पिछले साल जून 2024 में Lenskart की वैल्यूएशन $5 बिलियन थी जब कंपनी ने $200 मिलियन का सेकेंडरी डील किया था। हाल ही में Fidelity ने इस वैल्यूएशन को बढ़ाकर $6.1 बिलियन कर दिया है।


🎯 ESOP 2025: कर्मचारियों के लिए नई योजना

कंपनी ने अपने कर्मचारियों को जोड़ने और प्रोत्साहित करने के लिए ESOP 2025 योजना शुरू की है। इसके तहत कुल 72.8 लाख स्टॉक ऑप्शन्स आवंटित किए गए हैं, जो कंपनी के 0.43% पूरी डायल्यूटेड इक्विटी के बराबर हैं।

👤 कौन होंगे लाभार्थी?

इसमें से 21.84 लाख ऑप्शन्स को जनरल मैनेजर और उससे ऊपर के स्तर के कर्मचारियों के लिए रिज़र्व किया गया है।


🧑‍💼 लीडरशिप की सैलरी भी उजागर

AGM में कंपनी के शीर्ष नेतृत्व की सालाना सैलरी भी सामने आई:

  • Peyush Bansal (CEO): ₹6 करोड़ प्रति वर्ष
  • Neha Bansal (डायरेक्टर): ₹3 करोड़ प्रति वर्ष
  • Amit Chaudhary (को-फाउंडर): ₹3 करोड़ प्रति वर्ष

👥 नए इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की नियुक्ति

IPO से पहले बोर्ड को और मजबूत करते हुए कंपनी ने दो नए इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स नियुक्त किए हैं:

  • Sayali Karanjkar (PaySense की को-फाउंडर)
  • Ashish Kashyap (IndWealth के फाउंडर और Goibibo के पूर्व सीईओ)

📊 FY25 का वित्तीय प्रदर्शन

Moneycontrol की रिपोर्ट के अनुसार, Lenskart ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में कुल ₹6,415 करोड़ का राजस्व दर्ज किया, जो पिछले वर्ष ₹5,427 करोड़ से 18% की वृद्धि है। इसके साथ ही कंपनी के पास $200 मिलियन से अधिक की नकद राशि मौजूद है।


🏦 बड़े निवेशकों का समर्थन

Lenskart को जिन प्रमुख निवेशकों का समर्थन प्राप्त है, उनमें शामिल हैं:

  • SoftBank
  • Fidelity
  • Temasek
  • Alpha Wave
  • Kedaara Capital

इन निवेशकों की मौजूदगी कंपनी के IPO को और अधिक आकर्षक बनाती है।


📌 निष्कर्ष: IPO की राह पर बड़ा कदम

Lenskart का आगामी IPO भारतीय स्टार्टअप जगत के लिए एक और बड़ा माइलस्टोन बनने जा रहा है। ₹2,150 करोड़ का फ्रेश इश्यू, ESOP योजना, अनुभवी बोर्ड, और मजबूत वित्तीय प्रदर्शन—ये सभी संकेत करते हैं कि कंपनी निवेशकों के भरोसे पर खरी उतर सकती है।

अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि Lenskart IPO की डेट क्या होगी और यह सार्वजनिक बाज़ार में किस तरह का रिस्पॉन्स हासिल करता है।ते हैं। इससे न सिर्फ इसके मौजूदा निवेशकों को फायदा होगा, बल्कि यह भारत के स्टार्टअप IPO स्पेस में एक नई ऊर्जा भी भर सकता है।


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🇮🇳 भारतीय स्टार्टअप्स फंडिंग अपडेट (22-26 जुलाई): दोगुना हुआ निवेश, $202.79 मिलियन की कुल फंडिंग 🚀

भारतीय स्टार्टअप्स

पिछले हफ्ते की तुलना में इस सप्ताह भारतीय स्टार्टअप्स इकोसिस्टम ने ज़बरदस्त उछाल दर्ज किया है। इस बार 24 स्टार्टअप्स ने मिलाकर कुल $202.79 मिलियन की फंडिंग जुटाई, जिसमें 4 ग्रोथ-स्टेज और 16 अर्ली-स्टेज डील्स शामिल रहीं। वहीं 4 स्टार्टअप्स ने अपने फंडिंग आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए।

📈 भारतीय स्टार्टअप्स ग्रोथ-स्टेज डील्स: Gupshup, IndiQube और SuperK छाए रहे

इस हफ्ते ग्रोथ और लेट-स्टेज फंडिंग का कुल आंकड़ा $119.7 मिलियन तक पहुँचा।

  • Gupshup ने $60 मिलियन से अधिक इक्विटी और डेब्ट फंडिंग जुटाई, जिसमें Globespan और EvolutionX प्रमुख निवेशक रहे।
  • IndiQube ने अपने ₹700 करोड़ के IPO से पहले ₹374 करोड़ एंकर निवेशकों से जुटाए।
  • SuperK, जो छोटे शहरों के लिए रिटेल चेन है, ने ₹100 करोड़ की सीरीज़ B फंडिंग हासिल की, जिसका नेतृत्व 3STATE Ventures ने किया।
  • Pristyn Care ने अपने हॉस्पिटल एक्सपेंशन के लिए $4 मिलियन जुटाए।

🌱 अर्ली-स्टेज डील्स: AI और सेमीकंडक्टर में जोश

16 अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स ने मिलकर $83.09 मिलियन की फंडिंग जुटाई।

  • Composio ने अपनी सीरीज़ A राउंड में $25 मिलियन जुटाए, जिसमें Lightspeed लीड इन्वेस्टर रहा।
  • Netrasemi, एक सेमीकंडक्टर स्टार्टअप, ने ₹107 करोड़ ($12.5 मिलियन) जुटाए, जिसमें Zoho Corporation और Unicorn India Ventures प्रमुख रहे।
  • इसके अलावा, Kluisz.ai (AI इंफ्रास्ट्रक्चर), Edufund (edtech), EVeez (electric mobility) और Enlite (infra-tech) जैसे स्टार्टअप्स ने भी फंडिंग जुटाई।
  • Magma, Coluxe (lab-grown diamonds) जैसे स्टार्टअप्स ने भी निवेश हासिल किया, लेकिन रकम सार्वजनिक नहीं की।

🏙️ शहर और सेगमेंट वाइज डील्स

  • शहर: बेंगलुरु सबसे आगे रहा, जहाँ 9 डील्स हुईं। इसके बाद दिल्ली-NCR में 5, मुंबई, अहमदाबाद और चेन्नई में भी डील्स हुईं।
  • सेगमेंट: इस हफ्ते AI स्टार्टअप्स ने सबसे ज्यादा 5 डील्स कीं। इसके बाद ई-कॉमर्स और हेल्थटेक में 3-3 डील्स रहीं।

🌀 सीरीज़ वाइज डील्स

  • Seed फंडिंग सबसे ज्यादा 9 डील्स के साथ टॉप पर रही।
  • इसके बाद Series A में 8 डील्स हुईं।
  • प्री-सीड, Series F और अन्य भी इस हफ्ते सक्रिय रहे।

📊 हफ्तावार निवेश ट्रेंड

इस हफ्ते फंडिंग में दोगुना उछाल आया — पिछले हफ्ते के $97.45 मिलियन के मुकाबले इस बार $202.79 मिलियन फंडिंग हुई।

  • पिछले 8 हफ्तों का औसत फंडिंग आंकड़ा $200 मिलियन/हफ्ता रहा, जिसमें हर हफ्ते औसतन 23 डील्स होती हैं।

🧑‍💼 प्रमुख नियुक्तियां

  • Raise Financial Services (Dhan) ने Amit Gupta को ग्रुप CFO नियुक्त किया।
  • Leap India ने IPO से पहले Harinarayanan Nair और Sanjiv Gupta को स्वतंत्र निदेशक बनाया।
  • Shadowfax ने IPO से पहले अपने बोर्ड में Bijou Kurien, Ruchira Shukla, Pirojshaw Sarkari और Dinkar Gupta को शामिल किया।

🤝 मर्जर और अधिग्रहण

  • मानसिक स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म LISSUN ने अमेरिका स्थित Being Cares Inc का अधिग्रहण किया, जिससे भारत में बच्चों के लिए AI-बेस्ड बिहेवियरल हेल्थकेयर मजबूत होगा।

💰 नया फंड लॉन्च

  • वेंचर कैपिटल फर्म Yali Capital ने ₹893 करोड़ ($103.2 मिलियन) का डीपटेक-केंद्रित फंड क्लोज किया है। यह फंड चिप डिज़ाइन, रोबोटिक्स, AI, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, जीनोमिक्स आदि क्षेत्रों में निवेश करेगा।

🛑 शटडाउन

  • EV फाइनेंसिंग स्टार्टअप Ohm Mobility ने 5 साल बाद अपने ऑपरेशंस बंद करने की घोषणा की।

🔮 संभावित डील्स

  • Captain Fresh ने IPO से पहले डेब्ट फंडिंग की तैयारी की है।
  • Bonito Designs जल्द ही Tomorrow Capital से $9.5 मिलियन जुटा सकता है।

🆕 लॉन्च व साझेदारी

  • Reliance ने फैशन क्विक कॉमर्स स्पेस में Ajio Rush के साथ एंट्री की।
  • Grip Invest ने नया ऑटो-कंपाउंडिंग इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट लॉन्च किया।
  • UKHI और DCGpac ने सस्टेनेबल पैकेजिंग के लिए साझेदारी की।
  • PhonePe और SBI Card ने मिलकर को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड लॉन्च किया।
  • Freshworks बना McLaren Formula 1 का IT पार्टनर।
  • Spyne ने ऑटो डीलरशिप के लिए पहला AI असिस्टेंट Vinnie लॉन्च किया।

📉 वित्तीय नतीजे

  • Tata 1mg का FY25 में रेवेन्यू ₹2,400 करोड़ के पास पहुंचा, घाटा घटा।
  • BigBasket की B2C यूनिट का घाटा बढ़ा, कुल रेवेन्यू घटा।
  • Ideaforge का Q1 FY26 रेवेन्यू 85% गिरा।
  • Paytm ने Q1 FY26 में ₹1,918 करोड़ रेवेन्यू और ₹123 करोड़ प्रॉफिट दर्ज किया।
  • Milky Mist का FY25 रेवेन्यू ₹2,349 करोड़, प्रॉफिट 2.4 गुना बढ़ा।
  • Zomato की पैरेंट Eternal का Q1 FY26 रेवेन्यू ₹7,167 करोड़, प्रॉफिट 90% घटा।
  • IndiQube ने FY25 में ₹1,000 करोड़ पार किया और घाटा 58% घटाया।

🗞️ बड़ी खबरें

  • PhysicsWallah को IPO के लिए SEBI की मंजूरी मिली।
  • Simpl पर ₹913 करोड़ के FDI उल्लंघन मामले में ED की नजर।
  • Good Glamm Group के ब्रांड्स अलग-अलग बेचे जा रहे हैं।
  • Myntra पर ₹1,654 करोड़ के विदेशी निवेश नियम उल्लंघन पर FEMA केस।
  • सरकार ने Ullu, ALTT समेत 25 OTT ऐप्स पर अश्लील कंटेंट को लेकर बैन लगाया।

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Read more : Amagi Media Labs: ₹1,020 करोड़ जुटाने की योजना,

📺 Amagi Media Labs: ₹1,020 करोड़ जुटाने की योजना,

Amagi

क्लाउड-आधारित SaaS प्लेटफॉर्म Amagi Media Labs ने अपना Draft Red Herring Prospectus (DRHP) भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास दाखिल कर दिया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि कंपनी जल्द ही IPO (Initial Public Offering) के माध्यम से सार्वजनिक बाजार में प्रवेश करने जा रही है।

इस IPO के तहत बेंगलुरु स्थित कंपनी ₹1,020 करोड़ की नई इक्विटी शेयरों के माध्यम से पूंजी जुटाएगी। इसके साथ ही कंपनी के मौजूदा निवेशक करीब 3.4 करोड़ शेयर Offer For Sale (OFS) के ज़रिए बेचेंगे।


🏦 कौन बेच रहा है हिस्सेदारी? – OFS में ये निवेशक होंगे शामिल

DRHP के अनुसार, Amagi के मौजूदा निवेशक जैसे कि:

  • Accel (Accel India VI और Accel Growth VI के माध्यम से) – 60 लाख से अधिक शेयर
  • Norwest Venture Partners – 79 लाख शेयर
  • PI Opportunities Fund – 99 लाख शेयर
  • Avataar Venture Partners (AVP I Fund) – लगभग 18 लाख शेयर

ये सभी इस OFS के तहत आंशिक हिस्सेदारी बेचेंगे। इसके अतिरिक्त, Trudy Holdings, Prem Gupta, Rahul Garg, Rajesh Ramaiah जैसे व्यक्तिगत शेयरधारक भी ऑफर फॉर सेल में भाग लेंगे।


🧠 Amagi क्या करती है?

2008 में स्थापित, Amagi एक cloud-native SaaS कंपनी है जो TV प्रसारण और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए समाधान प्रदान करती है। यह कंटेंट मालिकों को उनके live linear चैनल को लॉन्च, डिस्ट्रीब्यूट और मोनेटाइज़ करने में मदद करती है।

Amagi के ग्राहक दुनिया भर के media brands और FAST (Free Ad-Supported Streaming TV) प्लेटफॉर्म्स हैं। कंपनी की सबसे बड़ी बाजार अमेरिका है, जो उसके राजस्व में बड़ी हिस्सेदारी रखती है।


💰 फंड का इस्तेमाल कहां होगा?

IPO के तहत जो ₹1,020 करोड़ जुटाए जाएंगे, उनका उपयोग मुख्य रूप से:

  • तकनीकी और उत्पाद विकास में
  • बिजनेस विस्तार में
  • कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

कंपनी IPO से पहले ₹204 करोड़ तक का प्री-IPO प्लेसमेंट भी कर सकती है। यदि ऐसा होता है, तो नए शेयरों की संख्या उसी के अनुपात में घटा दी जाएगी।


📈 Amagi के वित्तीय प्रदर्शन पर नज़र

Amagi ने FY25 में ₹1,163 करोड़ का राजस्व दर्ज किया है, जो पिछले वित्त वर्ष FY24 में ₹879 करोड़ था – यानी 32% की सालाना वृद्धि

सिर्फ राजस्व ही नहीं, Amagi ने अपने घाटे को भी 72% तक कम कर लिया है:

  • FY24 में घाटा: ₹245 करोड़
  • FY25 में घाटा: ₹68.7 करोड़

यह सुधार दर्शाता है कि कंपनी अपने ऑपरेशन्स को बेहतर कर रही है और IPO के लिए सही स्थिति में पहुंच रही है।


🚀 अब तक कितनी फंडिंग मिली है?

TheKredible के अनुसार, Amagi ने अब तक $340 मिलियन (लगभग ₹2,800 करोड़) की फंडिंग जुटाई है। इसके प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:

  • Accel
  • Premji Invest
  • General Atlantic
  • Norwest Ventures
  • Avataar Ventures

🇮🇳 भारत के SaaS स्टार्टअप्स की IPO की होड़

Amagi का IPO ऐसे समय में आ रहा है जब भारतीय SaaS कंपनियाँ तेज़ी से सार्वजनिक बाजारों की ओर बढ़ रही हैं। उदाहरण के लिए:

  • Freshworks पहले ही Nasdaq पर लिस्ट होकर वैश्विक स्तर पर नाम कमा चुका है।
  • Unicommerce ने अगस्त 2024 में भारत में IPO लॉन्च किया।
  • Capillary Technologies ने भी अपना IPO दोबारा सक्रिय किया है।

Amagi का IPO इस चलन को और मजबूत करने वाला कदम साबित हो सकता है।


📑 IPO का मैनेजमेंट कौन कर रहा है?

Amagi के इस सार्वजनिक निर्गम का संचालन निम्नलिखित इन्वेस्टमेंट बैंकों के समूह द्वारा किया जा रहा है:

  • Kotak Mahindra Capital
  • Citigroup
  • Goldman Sachs
  • IIFL Capital
  • Avendus

🔍 निष्कर्ष

Amagi Media Labs का IPO भारतीय SaaS स्पेस में एक और बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है। मजबूत वित्तीय प्रदर्शन, वैश्विक क्लाइंट बेस और अनुभवी निवेशकों की भागीदारी इसे निवेशकों के लिए एक आकर्षक पेशकश बना सकती है।

जैसे ही कंपनी लिस्टिंग की ओर बढ़ेगी, यह देखना दिलचस्प होगा कि Amagi भारतीय और वैश्विक पूंजी बाजारों में कैसा प्रदर्शन करती है


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Read more : Ohm Mobility ने बंद किया संचालन

⚡ Ohm Mobility ने बंद किया संचालन

Ohm Mobility

भारत के EV (इलेक्ट्रिक वाहन) फिनटेक क्षेत्र में सक्रिय स्टार्टअप Ohm Mobility ने आधिकारिक रूप से अपनी संचालन बंद करने की घोषणा कर दी है। पांच साल तक विभिन्न बिजनेस मॉडल्स के साथ प्रयोग करने और स्केलेबल मॉडल तलाशने के प्रयासों के बाद, कंपनी अब अपने दरवाज़े बंद कर रही है।

Ohm Mobility के को-फाउंडर और CEO निखिल नायर ने लिंक्डइन पर इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने टीम के साथ मिलकर कई तरह के बिजनेस मॉडल्स आज़माए, लेकिन स्थायी ग्रोथ हासिल नहीं कर पाए।


🚗 शुरुआत एक मजबूत विज़न के साथ

Ohm Mobility की स्थापना 2020 में निखिल नायर द्वारा की गई थी। इस स्टार्टअप का उद्देश्य EV (Electric Vehicle) इकोसिस्टम में क्रांति लाना था, खासतौर पर उन फ्लीट ऑपरेटर्स, मैन्युफैक्चरर्स और बैटरी कंपनियों के लिए जो बैंकों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन्स से पूंजी जुटाना चाहते थे।

कंपनी ने IoT डेटा का उपयोग करके EV के प्रदर्शन और जोखिम का मूल्यांकन करना शुरू किया, ताकि फाइनेंसिंग विकल्पों को और बेहतर बनाया जा सके। इस तकनीकी दृष्टिकोण ने Ohm Mobility को एक अभिनव स्टार्टअप के रूप में पहचान दिलाई।


🤝 निवेश और साझेदारी

कंपनी ने अब तक लगभग ₹5 करोड़ का निवेश जुटाया था, जिसमें Antler India, Blume Ventures, Catalyst Fund और कुछ एंजेल निवेशकों का योगदान रहा।

2022 में, IT समाधान कंपनी Onfido के पूर्व कार्यकारी निखिल सैगल ने Ohm Mobility को जॉइन किया और वह को-फाउंडर और Chief Business Officer (CBO) बने।

Ohm Mobility की टीम ने EV और फिनटेक सेक्टर में कई प्रयोग किए, जिससे उन्हें इंडस्ट्री में एक विशेष स्थान मिला।


🔁 Ohm Daily के रूप में पिवट की कोशिश

2024 की शुरुआत में, Ohm Mobility ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए Ohm Daily के नाम से रीब्रांडिंग की। इस पिवट का उद्देश्य था:

  • गिग वर्कर्स (जैसे ऑटो ड्राइवर, कैब ऑपरेटर्स) के लिए फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराना
  • मोबाइल वर्कफोर्स के लिए बीमा, ऋण और सेविंग्स समाधान पेश करना

हालांकि, इस रणनीति के बावजूद स्टार्टअप को वह ट्रैक्शन नहीं मिला जिसकी उन्हें अपेक्षा थी। न तो उपयोगकर्ताओं की संख्या में उम्मीद के मुताबिक वृद्धि हुई, और न ही रेवेन्यू में।


😞 आखिरकार, बंद करने का फैसला

CEO निखिल नायर ने लिखा:

“हमने अनेक बिजनेस मॉडल्स पर काम किया और टीम ने लगातार नवाचार किया, लेकिन दुर्भाग्य से हम एक स्केलेबल और टिकाऊ बिजनेस मॉडल नहीं बना पाए। अब समय है इस अध्याय को बंद करने का।”

कंपनी ने अपने कर्मचारियों और निवेशकों का आभार जताया और अपने इस सफर को एक सीख के रूप में स्वीकार किया है।


📉 स्टार्टअप बंद होने का सिलसिला जारी

Ohm Mobility का बंद होना भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में हाल ही में हुए कई शटडाउन की एक कड़ी है। इसके पहले भी कई स्टार्टअप्स ने बाजार की कठिनाइयों या बिजनेस मॉडल की असफलता के चलते ऑपरेशंस बंद किए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • Altigreen
  • Blip
  • ANS Commerce
  • O’Be Cocktails
  • Subtl.ai

इनमें से कुछ स्टार्टअप्स को अच्छा फंडिंग बैकअप मिला था, लेकिन बाजार की बदलती मांग और ग्रोथ की चुनौतियों ने उन्हें भी प्रभावित किया।


🔍 क्या कहता है यह ट्रेंड?

भारत में स्टार्टअप्स के लिए शुरुआती निवेश जुटाना पहले के मुकाबले आसान हुआ है, लेकिन लंबी अवधि तक टिके रहना और मुनाफे की ओर बढ़ना अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। खासतौर पर EV और फिनटेक जैसे क्षेत्रों में जहां रेगुलेशन, टेक्नोलॉजी और कंज्यूमर बिहेवियर तेजी से बदल रहे हैं।

Ohm Mobility का केस यह दिखाता है कि:

  • सिर्फ इनोवेशन ही काफी नहीं है, बाजार अपनाने की क्षमता भी जरूरी है।
  • फंडिंग से अधिक महत्वपूर्ण है ग्राहक जरूरतों को गहराई से समझना और लंबे समय तक टिक सकने वाली स्ट्रेटजी बनाना।
  • हर पिवट सफल नहीं होता; कभी-कभी संघर्ष का ईमानदारी से अंत भी जरूरी होता है।

🛣️ आगे का रास्ता

Ohm Mobility की टीम के सदस्यों के पास अब अपने अनुभवों से सीखी गई बातों को नए उद्यमों में बदलने का अवसर है। भारत में EV और गिग इकॉनमी से जुड़े मुद्दों को हल करने वाले स्टार्टअप्स के लिए अभी भी बहुत अवसर हैं

ऐसे बंद होते स्टार्टअप्स भी इकोसिस्टम में जरूरी भूमिका निभाते हैं — वे दूसरों को यह दिखाते हैं कि कौन सी रणनीतियाँ काम नहीं करतीं और किन क्षेत्रों में अभी सुधार की आवश्यकता है।


📌 निष्कर्ष

Ohm Mobility की यात्रा एक नवाचारपूर्ण लेकिन चुनौतीपूर्ण सफर रही। पांच सालों में उन्होंने जो प्रयास किए, वो भारत के EV फिनटेक स्पेस को बेहतर समझने में मदद करते हैं। यह स्टार्टअप भले ही बंद हो गया हो, लेकिन इसके पीछे की कोशिशें और सीखें आगे आने वाले उद्यमियों को प्रेरित करती रहेंगी।

✍️ लेखक: FundingRaised.in संपादकीय टीम
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Read more : Yali Capital ने Deeptech स्टार्टअप्स के लिए ₹893 करोड़

💰 Yali Capital ने Deeptech स्टार्टअप्स के लिए ₹893 करोड़

Yali Capital

वेंचर कैपिटल फर्म Yali Capital ने अपने पहले Deeptech-focused फंड को ₹893 करोड़ (लगभग $103.2 मिलियन) पर बंद कर दिया है। यह फंड खासतौर पर भारत में Deeptech सेक्टर में शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स में निवेश के लिए बनाया गया है। कंपनी ने जुलाई 2024 में इस फंड को ₹810 करोड़ के लक्ष्य के साथ लॉन्च किया था, जिसे अब सफलता पूर्वक पार कर लिया गया है।


🚀 किसमें होगा निवेश?

Yali Capital के इस फंड का उद्देश्य Chip Design, Robotics, Genomics, Smart Manufacturing, Aerospace और AI (Artificial Intelligence) जैसे उभरते क्षेत्रों में स्टार्टअप्स को सपोर्ट करना है। फर्म का मानना है कि ये सेक्टर आने वाले वर्षों में भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

Yali Capital के सह-संस्थापक गणपति सुब्रमण्यम ने कहा:

“चीन Deeptech क्षेत्र में अमेरिका को पीछे छोड़ चुका है। भारत के पास गजब की क्षमता है — सर्विस सेक्टर से लेकर Deeptech तक, लेकिन हमें अभी बहुत लंबा सफर तय करना है।”


🤝 निवेशकों की मजबूत लाइनअप

Yali Capital के इस फंड को Infosys, Qualcomm Ventures, DPIIT के Fund of Funds for Startups, और Evolvence जैसे बड़े कॉर्पोरेट्स से समर्थन मिला है। इसके अलावा, कुछ जाने-माने व्यक्तिगत निवेशकों ने भी इसमें भाग लिया है:

  • Gopal Srinivasan (संस्थापक, TVS Capital)
  • Utpal Sheth (CEO, Rare Enterprises)
  • Vishal Kampani (MD, JM Financial)

ये सभी इनवेस्टर्स भारतीय Deeptech इकोसिस्टम की दीर्घकालिक संभावनाओं में विश्वास रखते हैं।


🧠 Yali Capital का फोकस और रणनीति

Yali Capital एक SEBI अनुमोदित Category II AIF है। फर्म को Ganapathy Subramaniam और Mathew Cyriac ने मिलकर लॉन्च किया है। फंड का प्रारंभिक लक्ष्य ₹500 करोड़ था, जिसे ₹310 करोड़ के अतिरिक्त greenshoe विकल्प के साथ बढ़ाया गया।

फर्म की रणनीति भारत में Deeptech कंपनियों के लिए पूंजी, मार्गदर्शन और स्केलिंग सपोर्ट प्रदान करने की है। Yali का मानना है कि Deeptech भारत की अगली तकनीकी क्रांति का आधार बनेगा।


📈 अब तक हुए निवेश

Yali Capital ने अभी तक पाँच स्टार्टअप्स में निवेश किया है, जो Deeptech क्षेत्र के विभिन्न उपक्षेत्रों में काम कर रहे हैं:

  1. 4baseCare – Genomics स्टार्टअप
  2. Perceptyne Robots – Robotics सॉल्यूशन स्टार्टअप
  3. C2i Semiconductors – Fabless chip design कंपनी
  4. [नाम सार्वजनिक नहीं किया गया]
  5. [नाम सार्वजनिक नहीं किया गया]

Yali का लक्ष्य साल के अंत तक कुल 8 Deeptech कंपनियों में निवेश करना है।


🌍 भारत में Deeptech का भविष्य

भारत में Deeptech स्टार्टअप्स की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है, लेकिन अभी इस क्षेत्र में funding और mentorship की भारी कमी है। ऐसे में Yali Capital का यह फंड इस अंतर को भरने में सहायक हो सकता है। भारत पहले से ही IT और SaaS क्षेत्रों में ग्लोबल लीडर बन चुका है, और अब Deeptech अगला बड़ा अवसर बनकर उभर रहा है।

Yali Capital जैसी वेंचर फर्में न केवल फंडिंग दे रही हैं, बल्कि भारत में तकनीकी नवाचारों के लिए एक मजबूत आधार भी तैयार कर रही हैं।


🧬 Deeptech क्या है और क्यों जरूरी है?

Deeptech स्टार्टअप्स वे होते हैं जो उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान और इंजीनियरिंग इनोवेशन पर आधारित होते हैं। ये स्टार्टअप्स लंबे समय में ज्यादा प्रभाव डालते हैं क्योंकि ये समस्याओं का मूल से हल निकालने पर केंद्रित होते हैं।

उदाहरण के तौर पर:

  • Genomics स्टार्टअप्स कैंसर जैसी बीमारियों का व्यक्तिगत स्तर पर इलाज विकसित कर सकते हैं।
  • Chip Design स्टार्टअप्स भारत को चिप निर्माण में आत्मनिर्भर बना सकते हैं।
  • Robotics और Smart Manufacturing से औद्योगिक दक्षता में भारी सुधार हो सकता है।

📊 निष्कर्ष

Yali Capital का ₹893 करोड़ का Deeptech फंड भारतीय तकनीकी स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है। इससे न केवल नई कंपनियों को जरूरी संसाधन मिलेंगे, बल्कि भारत के Deeptech क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने में भी मदद मिलेगी।

👉 आने वाले महीनों में Yali Capital की अगली निवेश घोषणाओं पर नजर रखना दिलचस्प होगा, क्योंकि यह भारत के Deeptech भविष्य को आकार दे रहा है।

✍️ लेखक: FundingRaised.in संपादकीय टीम

Read more : EatClub को ₹185 करोड़ की फंडिंग मिली

🍕 EatClub को ₹185 करोड़ की फंडिंग मिली

EatClub

क्लाउड किचन स्टार्टअप EatClub, जो Box8, Mojo Pizza जैसे पॉपुलर ब्रांड्स का संचालन करता है, ने Tiger Global की अगुवाई में ₹185 करोड़ (~$22 मिलियन) जुटाए हैं। इस फंडिंग राउंड में A91 Partners और 360 ONE Asset Management ने भी भाग लिया है।

EatClub के बोर्ड ने 11,830 प्रेफरेंस शेयर्स जारी करने का विशेष प्रस्ताव पारित किया है, ताकि यह फंड जुटाया जा सके। यह जानकारी कंपनी के RoC (Registrar of Companies) में दाखिल रेगुलेटरी फाइलिंग से सामने आई है।


🦁 Tiger Global की बड़ी वापसी

फाइलिंग के अनुसार:

  • Tiger Global इस राउंड में सबसे बड़ा निवेशक है, जो ₹126 करोड़ का योगदान देगा।
  • A91 Partners ₹37.5 करोड़ का निवेश करेगा।
  • वहीं 360 ONE Asset Management अपने Monopolistic and Opportunity Fund के ज़रिए ₹21.2 करोड़ निवेश करेगा।

कंपनी इस राउंड में आगे और पूंजी जुटा सकती है।


📈 मूल्यांकन में 80% की जबरदस्त बढ़ोतरी

इस फंडिंग के बाद EatClub का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन ₹4,585 करोड़ (~$540 मिलियन) हो जाएगा।

यह दिसंबर 2021 में हुई पिछली फंडिंग के $300 मिलियन वैल्यूएशन की तुलना में 80% की बढ़ोतरी दर्शाता है। उस समय कंपनी ने $40 मिलियन जुटाए थे।

मार्च 2022 में भी EatClub ने एक $30 मिलियन का सेकेंडरी ट्रांजैक्शन पूरा किया था, हालांकि उस समय का मूल्यांकन सार्वजनिक नहीं किया गया था।


🏗️eatclub किस काम आएगी फंडिंग?

कंपनी की फाइलिंग में बताया गया है कि यह फंडिंग EatClub के विस्तार और ग्रोथ में लगाई जाएगी। कंपनी की योजना है कि वह:

  • नई क्लाउड किचन लोकेशन्स खोले
  • टेक्नोलॉजी और लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाए
  • ब्रांड पोर्टफोलियो को मजबूत करे

🧑‍🍳 कई ब्रांड्स, एक ही प्लेटफॉर्म

EatClub की स्थापना Anshul Gupta और Amit Raj ने की थी। यह कंपनी मल्टी-ब्रांड क्लाउड किचन मॉडल पर काम करती है, जिसमें 16 ब्रांड्स शामिल हैं:

🍕 Mojo Pizza
🍱 Box8
🍗 Bhatti Chicken
🥣 NH1 Bowls
🍛 ZAZA Biryani
और भी कई।

यह मॉडल कंपनी को विविध स्वादों और जरूरतों को एक ही प्लेटफॉर्म से पूरा करने में मदद करता है।


💰 कमाई बढ़ी, घाटा घटा

वित्त वर्ष मार्च 2024 में EatClub ने ₹515.5 करोड़ का ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज किया। अच्छी बात ये रही कि कंपनी ने अपने घाटे को ₹69 करोड़ से घटाकर ₹15.77 करोड़ कर लिया, यानी 77% की कटौती

यह इंगित करता है कि EatClub अब लाभप्रदता के करीब पहुंच रहा है।

FY25 की एनुअल रिपोर्ट अभी दाखिल नहीं हुई है।


🏁 2025 में Tiger Global की गिनी-चुनी डील्स में शामिल

2025 में अब तक Tiger Global की सक्रियता बहुत सीमित रही है। इससे पहले Tiger ने जनवरी 2025 में Infra.Market में $125 मिलियन का निवेश किया था।

EatClub उन कुछ स्टार्टअप्स में शामिल है जिन्हें इस साल Tiger Global का भरोसा मिला है, जो इस बात का संकेत है कि कंपनी में दीर्घकालिक क्षमता देखी जा रही है।


⚔️ Rebel Foods से सीधी टक्कर

EatClub का सीधा मुकाबला Rebel Foods से है, जिसने पिछले साल $210 मिलियन की फंडिंग जुटाई थी और FY24 में ₹1,420 करोड़ का रेवेन्यू हासिल किया, हालांकि कंपनी को ₹378 करोड़ का घाटा हुआ।

अन्य प्रतियोगी:

🥗 FreshMenu
🥦 Curefoods का Eatfit
🍜 BBK (Biryani by Kilo)

इन सभी के साथ EatClub अब तेजी से प्रतिस्पर्धा कर रहा है।


🔍 FundingRaised विश्लेषण

EatClub की यह ताज़ा फंडिंग राउंड यह साबित करता है कि क्लाउड किचन स्पेस अभी भी निवेशकों की पसंद बना हुआ है, खासकर जब कंपनियाँ घाटा कम कर, रेवेन्यू बढ़ा रही हों।

Tiger Global जैसे ग्लोबल इनवेस्टर्स की वापसी इस बात का संकेत है कि भारतीय फूड डिलीवरी और क्लाउड किचन इंडस्ट्री में अब भी ग्रोथ की जबरदस्त संभावनाएं मौजूद हैं।


🧾 निष्कर्ष

EatClub ने ना सिर्फ निवेशकों का भरोसा जीता है, बल्कि मजबूत वित्तीय प्रदर्शन और क्लियर ग्रोथ विजन के जरिए अपने आप को एक स्थिर और स्केलेबल स्टार्टअप के रूप में स्थापित किया है।

Box8, Mojo Pizza जैसे ब्रांड्स अब केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि बिज़नेस में निवेश का भरोसेमंद नाम भी बनते जा रहे हैं।

Read more : Swiggy के बोर्ड में बड़ा बदलाव

🧑‍💼 Swiggy के बोर्ड में बड़ा बदलाव

Swiggy

📅 25 जुलाई को हुई बोर्ड बैठक में Swiggy ने बड़े बदलाव किए। SoftBank के Sumer Juneja और Accel के Anand Daniel ने Swiggy के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया है, जबकि Middle East की ई-कॉमर्स कंपनी Noon के CEO Faraz Khalid को नए स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया है।

यह बदलाव Swiggy के IPO (Initial Public Offering) के बाद के गवर्नेंस स्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने की रणनीति का हिस्सा हैं।


👥 निदेशक मंडल में नए चेहरे

Swiggy ने Faraz Khalid को बतौर Independent Director नियुक्त किया है। उनका कार्यकाल 5 वर्षों का होगा और यह नियुक्ति शेयरहोल्डर्स की मंजूरी के अधीन है।

💼 Faraz Khalid कौन हैं?

Faraz Khalid ने Middle East की नामी कंपनी Namshi की सह-स्थापना की थी और अब वह Noon के CEO हैं। Noon को उन्होंने Middle East और North Africa (MENA) क्षेत्र में अग्रणी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित किया।

उनका अनुभव ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स और फूड डिलीवरी में गहरा है, जो Swiggy के भविष्य के विस्तार और रणनीतियों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।


🔁 पुराने निदेशक का दोबारा कार्यकाल

Swiggy ने Shailesh Vishnubhai Haribhakti को भी एक बार फिर से पांच साल के लिए Non-Executive Independent Director के रूप में नियुक्त किया है। उनका दूसरा कार्यकाल 24 जनवरी, 2026 से प्रभावी होगा।

Haribhakti एक अनुभवी चार्टर्ड अकाउंटेंट और कॉस्ट अकाउंटेंट हैं, जिनके पास 50 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे Shailesh Haribhakti & Associates के चेयरमैन और GovEVA Consulting के वाइस चेयरमैन भी हैं।


📉 बोर्ड से हटे दो दिग्गज

Swiggy के बोर्ड से हटने वाले दो नामचीन निवेशक हैं:

  • Sumer Juneja (SoftBank)
  • Anand Daniel (Accel)

इन दोनों निवेशकों ने शुरुआती चरण में Swiggy में महत्वपूर्ण निवेश किया था और यह इस्तीफे इस बात का संकेत हैं कि कंपनी अब अपने पब्लिक मार्केट अवतार की ओर बढ़ रही है।


📊 Swiggy बनाम Zomato: तगड़ी टक्कर जारी

हालांकि Swiggy ने अब तक Q1 FY26 के परिणाम दाखिल नहीं किए हैं, लेकिन पिछली तिमाही में कंपनी ने 45% की साल-दर-साल ग्रोथ के साथ Rs 4,410 करोड़ का राजस्व दर्ज किया था। वहीं, कंपनी का घाटा बढ़कर Rs 1,081 करोड़ तक पहुँच गया।

दूसरी ओर, प्रतियोगी Zomato की पैरेंट कंपनी Eternal ने Q1 FY26 में Rs 7,167 करोड़ का राजस्व दर्ज किया है, जिससे साफ है कि प्रतिस्पर्धा बहुत मजबूत बनी हुई है।


📈 शेयर बाज़ार में Swiggy की स्थिति

बाजार बंद होने के समय Swiggy के शेयर का मूल्य Rs 408.3 रहा और कंपनी की मार्केट कैपिटलाइजेशन Rs 1,01,815.6 करोड़ (लगभग $11.9 बिलियन) तक पहुंच गई है।


🧠 विश्लेषण: क्या संकेत देता है यह बदलाव?

Swiggy के बोर्ड में यह बदलाव दिखाता है कि कंपनी कॉर्पोरेट गवर्नेंस, स्वतंत्र निर्णयों और दीर्घकालिक विज़न पर जोर दे रही है। IPO के बाद, भारतीय स्टार्टअप्स में अक्सर बोर्ड संरचना में ऐसे बदलाव देखने को मिलते हैं जिससे कि कंपनी का प्रोफेशनल और पारदर्शी संचालन सुनिश्चित हो सके।


🧾 निष्कर्ष

Swiggy का यह कदम इस बात की ओर इशारा करता है कि कंपनी अब पब्लिक इन्वेस्टर्स के लिए जवाबदेह, और व्यवस्थित कॉर्पोरेट गवर्नेंस मॉडल को अपनाने की दिशा में अग्रसर है। Faraz Khalid और Shailesh Haribhakti जैसे प्रोफेशनल्स की नियुक्ति, Swiggy को भारत के फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स स्पेस में लंबी रेस का घोड़ा बनाने की रणनीति का हिस्सा है।

अब देखना होगा कि Swiggy आने वाले महीनों में बिज़नेस प्रदर्शन, लाभप्रदता और शेयर बाज़ार में स्थिरता को कैसे संभालता है।

Read more : Tata 1mg FY25 में ₹2,392 करोड़ की कमाई और घाटा घटा 12%

🏥 Tata 1mg FY25 में ₹2,392 करोड़ की कमाई और घाटा घटा 12%

Tata 1mg

Tata Group के डिजिटल हेल्थकेयर प्लेटफॉर्म Tata 1mg ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में तेज़ी से अपनी ग्रोथ जारी रखते हुए अपने रेवेन्यू में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। वहीं, कंपनी ने घाटा भी पिछले वर्ष की तुलना में कम किया है। Tata Sons की FY25 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, Tata 1mg ने इस वर्ष ₹2,392 करोड़ की कंसोलिडेटेड रेवेन्यू अर्जित की, जो पिछले साल FY24 के ₹1,968 करोड़ की तुलना में 22% अधिक है।


🧾 दो संस्थाओं से हुआ रेवेन्यू जनरेट

Tata 1mg का रेवेन्यू दो प्रमुख संस्थाओं से आया:

  • Tata 1mg Technologies: ₹2,016.5 करोड़
  • Tata 1mg Healthcare Solutions: ₹375.5 करोड़

इस प्रकार, कंपनी की मजबूत तकनीकी और हेल्थकेयर संचालन दोनों ने FY25 में अच्छे नतीजे दिए हैं।


💊 क्या है Tata 1mg?

Tata 1mg एक डिजिटल हेल्थटेक स्टार्टअप है जो एलोपैथिक, आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाएं, विटामिन्स, न्यूट्रिशन सप्लिमेंट्स और अन्य हेल्थ प्रोडक्ट्स को ऑनलाइन ऑर्डर करने की सुविधा देता है। यह यूज़र्स को घर बैठे दवाओं की डिलीवरी, टेस्ट बुकिंग और डॉक्टर कंसल्टेशन जैसी सेवाएं प्रदान करता है।


📉 घाटे में गिरावट, लेकिन खर्च में बढ़ोतरी

FY25 में Tata 1mg का कुल खर्च ₹2,682 करोड़ रहा, जो FY24 के ₹2,303 करोड़ के मुकाबले 17% अधिक है। हालांकि खर्च का विस्तृत विवरण वार्षिक रिपोर्ट में साझा नहीं किया गया है।

कंपनी का कुल घाटा ₹276 करोड़ रहा, जो FY24 के ₹313 करोड़ से 12% कम है। यानी कंपनी ने घाटा कम करने की दिशा में अच्छी प्रगति की है।

कंपनी का PBT (Profit Before Tax) ₹290 करोड़ दर्ज किया गया है। यूनिट इकॉनॉमिक्स के अनुसार, कंपनी ने हर ₹1 के रेवेन्यू के लिए ₹1.12 खर्च किए।


📊 एसेट्स और लायबिलिटी की स्थिति

FY25 के अंत में Tata 1mg के पास कुल एसेट्स ₹2,025 करोड़ के थे, जबकि इसकी कुल लायबिलिटी ₹1,190 करोड़ रही। इससे यह साफ़ है कि कंपनी की बैलेंस शीट अभी भी मजबूत बनी हुई है।


⚔️ कड़ी प्रतिस्पर्धा: Netmeds, PharmEasy और Apollo 24/7 से मुकाबला

Tata 1mg का मुकाबला भारत के अन्य प्रमुख ई-हेल्थ स्टार्टअप्स से है:

  • Netmeds (Reliance समर्थित): जियो की विस्तृत नेटवर्क सपोर्ट से मजबूत स्थिति।
  • PharmEasy: वित्तीय चुनौतियों के बावजूद डायग्नोस्टिक्स, फार्मेसी और कंसल्टेशन को एकीकृत करने वाले प्लेटफॉर्म के रूप में मजबूती बनाए रखी।
  • Apollo 24/7: Apollo Hospitals के मजबूत ऑफलाइन नेटवर्क और ब्रांड वैल्यू से लाभ।

🏢 Tata Digital की हिस्सेदारी और निवेश रणनीति

Tata Digital ने जून 2021 में Tata 1mg में 55% हिस्सेदारी खरीदी थी। इसके बाद कंपनी ने अतिरिक्त 8.5% हिस्सेदारी और खरीदी। TheKredible के अनुसार, Tata Digital की वर्तमान हिस्सेदारी 63.5% है और Tata 1mg का वैल्यूएशन $1.25 बिलियन (लगभग ₹10,400 करोड़) है।


💸 Tata Digital का FY25 में घाटा और रणनीति

FY25 में Tata Digital ने खुद का स्टैंडअलोन रेवेन्यू ₹546.9 करोड़ दर्ज किया, जबकि उसका घाटा ₹827.5 करोड़ रहा। यह घाटा Tata 1mg के साथ-साथ BigBasket, Cult.fit और Tata Neu जैसे अन्य डिजिटल वेंचर्स में भारी निवेश का परिणाम है।

Tata Digital फिलहाल “investment mode” में है और इसका लक्ष्य एक ऐसा व्यापक डिजिटल इकोसिस्टम बनाना है जो कॉमर्स, हेल्थकेयर, फाइनेंस और वेलनेस को एक साथ जोड़े।


🧭 निष्कर्ष

Tata 1mg ने FY25 में अपने रेवेन्यू में जबरदस्त ग्रोथ दिखाते हुए एक मजबूत प्रदर्शन किया है। जहां एक ओर खर्च और घाटा अभी भी चुनौती बने हुए हैं, वहीं दूसरी ओर कंपनी की बाजार में पकड़ मजबूत हो रही है और यह अपने प्रतिस्पर्धियों के बीच मजबूती से खड़ी है।

Tata Digital की लांग-टर्म रणनीति और निरंतर निवेश यह दर्शाते हैं कि आने वाले वर्षों में Tata 1mg भारतीय डिजिटल हेल्थकेयर सेक्टर में और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने वाला है।


📰 यह लेख खास तौर पर FundingRaised हिंदी पाठकों के लिए तैयार किया गया है। भारत के स्टार्टअप और डिजिटल हेल्थकेयर की ताज़ा खबरों के लिए पढ़ते रहिए www.fundingraised.in 📲

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