🎓 Collegedunia ने पार किया ₹200 करोड़ का राजस्व,

Collegedunia

भारत का प्रमुख कॉलेज सर्च प्लेटफॉर्म Collegedunia अब एक नए मुकाम पर पहुंच चुका है। 2024 में कंपनी ने ₹200 करोड़ से अधिक का रेवेन्यू हासिल कर लिया है। यह उपलब्धि न केवल इसके मजबूत संस्थागत सहयोग का प्रमाण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि छात्रों को सही समय पर सही जानकारी देना कितना प्रभावशाली हो सकता है।


🏢 किस तरह Collegedunia ने बनाई पकड़?

गुरुग्राम स्थित Collegedunia की शुरुआत 2014 में साहिल चलाना ने की थी। यह एक बूटस्ट्रैप्ड स्टार्टअप है, जिसने बिना बाहरी निवेश के इतनी बड़ी ग्रोथ हासिल की है।

कंपनी ने वर्षों में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे:

  • Lovely Professional University (LPU)
  • IILM University
  • Amity University
  • ICFAI
  • Parul University
  • Bennett University

के साथ साझेदारी की है। इसका उद्देश्य है छात्रों को कॉलेज सर्च, एडमिशन प्रोसेस और करियर गाइडेंस जैसी सुविधाएं डिजिटल रूप में देना।


📊 FY24 में राजस्व और लाभ दोनों में बढ़ोतरी

TheKredible के आंकड़ों के अनुसार, FY24 में Collegedunia का ऑपरेशनल रेवेन्यू ₹192.23 करोड़ रहा और कंपनी लाभदायक (Profitable) हो गई है।

इस सफल वर्ष के बाद कंपनी ने ₹200 करोड़ के आंकड़े को पार कर लिया है, जो भारतीय एजुकेशन-टेक स्पेस में एक बड़ी उपलब्धि है।


🚀 आगे का लक्ष्य: ₹600 करोड़ और IPO

Collegedunia अब अगले 5 वर्षों में अपने रेवेन्यू को ₹600 करोड़ तक ले जाने की योजना बना रही है। CEO साहिल चलाना के अनुसार:

“हम इस लक्ष्य तक पहुंचने के बाद IPO लॉन्च करने की योजना बना रहे हैं। हमारा फोकस अब तीन क्षेत्रों पर है — ऑपरेशंस का विस्तार, तकनीकी उन्नयन और नए बाजारों में प्रवेश।


🌐 Study Abroad वर्टिकल में जबरदस्त ग्रोथ

2021 में Collegedunia ने अपना Study Abroad वर्टिकल लॉन्च किया, जो अब हर साल 120% की दर से बढ़ रहा है।

यह वर्टिकल पहले USA, UK, और Canada पर केंद्रित था, लेकिन अब कंपनी ने यूरोपीय देशों की ओर भी विस्तार किया है। 2024-25 में, कंपनी ने:

  • हैदराबाद
  • दिल्ली
  • ठाणे
  • श्रीनगर
  • कोलकाता

जैसे शहरों में सेंटर खोले हैं। अगले चरण में और शहर जोड़े जाएंगे।


🏫 छोटे शहरों पर भी फोकस

अब तक Collegedunia का फोकस प्रमुख मेट्रो शहरों पर रहा है, लेकिन अब कंपनी टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी विस्तार कर रही है।

इन शहरों के छात्रों को भी सटीक करियर मार्गदर्शन और जानकारी की आवश्यकता है। इसके लिए कंपनी स्थानीय भाषा में कंटेंट, वेबिनार्स, और गाइडेंस प्रोग्राम तैयार कर रही है।


🧩 समूह की अन्य इकाइयाँ: 3.14, KickCash और Prepp

Collegedunia सिर्फ एक प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि इसके तहत कुछ और इनोवेटिव यूनिट्स भी हैं:

🔹 3.14 — एडटेक फोकस्ड परफॉर्मेंस-ड्रिवन एडटेक प्लेटफॉर्म

यह ब्रांड्स को डेटा आधारित मार्केटिंग रणनीतियों में मदद करता है। इसके ग्राहक हैं:

  • Amazon
  • Flipkart
  • PhonePe
  • GoJek
  • Walmart

🔹 Prepp — सरकारी नौकरी की तैयारी के लिए विशेष प्लेटफॉर्म

UPSC, SSC, बैंकिंग और राज्य स्तरीय परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए बेहद उपयोगी। पिछले एक वर्ष में इसमें शानदार ग्रोथ देखी गई है।

🔹 KickCash — गेमिंग के ज़रिए यूज़र एक्विजिशन

AI-बेस्ड इंजन के माध्यम से यह ऐप मोबाइल गेमर्स को सुझाव देता है और उन्हें खेलने पर रिवॉर्ड देता है। भारत में बढ़ते मोबाइल गेमिंग ट्रेंड के बीच KickCash एक तेजी से उभरता ब्रांड बन चुका है।


📱 तकनीकी नवाचार और स्केलेबिलिटी

Collegedunia का यूएसपी है — यूज़र फ्रेंडली इंटरफेस, विस्तृत कॉलेज डेटा, स्टडी गाइड्स, और करियर सलाह। अब कंपनी इन सेवाओं को और ज्यादा इंटरैक्टिव और AI-सपोर्टेड बना रही है, जिससे छात्रों को उनकी रुचि और योग्यता के अनुसार सुझाव मिलें।


🌍 ग्लोबल विज़न के साथ लोकल सेवा

Collegedunia अब केवल कॉलेज सर्च प्लेटफॉर्म नहीं रहा। यह अब एक पूर्ण छात्र सहायता मंच बन चुका है, जो:

✅ करियर सलाह
✅ स्किल बिल्डिंग
✅ इंटरनेशनल एडमिशन गाइडेंस
✅ सरकारी नौकरी की तैयारी
✅ गेमिंग-आधारित एंगेजमेंट

जैसी सेवाएं भी दे रहा है।


📌 निष्कर्ष

Collegedunia की सफलता इस बात का प्रमाण है कि भारत के छात्र जब तकनीक और जानकारी से सशक्त होते हैं, तो वे अपने भविष्य की दिशा बेहतर तरीके से तय कर सकते हैं। ₹200 करोड़ का आंकड़ा पार करने के बाद, अब कंपनी की नजर ₹600 करोड़ और IPO पर है।

💬 जैसा CEO चलाना कहते हैं:

“हम भारतीय युवाओं के लिए न सिर्फ कॉलेज सर्च, बल्कि करियर का संपूर्ण समाधान बनना चाहते हैं।”


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Read more :🛰️ Optimized Electrotech ने Series A राउंड में जुटाए $6 मिलियन,

🛰️ Optimized Electrotech ने Series A राउंड में जुटाए $6 मिलियन,

Optimized Electrotech

भारत की गहराई से तकनीक विकसित करने वाली कंपनियों में एक नाम तेजी से उभर रहा है — Optimized Electrotech। यह कंपनी, जो उन्नत इमेजिंग और निगरानी तकनीक (Surveillance Technology) पर काम करती है, ने Series A फंडिंग राउंड में $6 मिलियन (लगभग ₹50 करोड़) जुटाए हैं। इस निवेश का नेतृत्व Blume Ventures और Mela Ventures ने संयुक्त रूप से किया, जबकि 9Unicorns और मौजूदा निवेशक Rajiv Dadlani Group तथा Venture Catalysts ने भी भागीदारी की।


📈 Optimized Electrotech अब तक की कुल फंडिंग $10.5 मिलियन के पार

इससे पहले Optimized Electrotech अपने मौजूदा निवेशकों से $4.5 मिलियन जुटा चुकी है। इस ताजा फंडिंग के साथ कंपनी की कुल फंडिंग $10.5 मिलियन (₹87 करोड़) के करीब पहुंच चुकी है।


🧠 कंपनी क्या करती है?

2017 में स्थापित इस अहमदाबाद आधारित कंपनी का नेतृत्व संदीप शाह और धरिन शाह कर रहे हैं। Optimized Electrotech एक डीप-टेक डिफेंस और इमेजिंग सर्विलांस सॉल्यूशंस कंपनी है, जो AI-संचालित इलेक्ट्रो-ऑप्टिक सिस्टम्स विकसित करती है। ये सिस्टम्स:

  • सुरक्षा बलों को सीमाओं और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी में मदद करते हैं
  • स्पेस-बेस्ड हाइपरस्पीड सर्विलांस के लिए काम करते हैं
  • रीयल-टाइम इंटेलिजेंस प्रदान करते हैं
  • ड्रोन हमलों जैसी खतरनाक घटनाओं की पहचान और प्रतिक्रिया की क्षमता को बढ़ाते हैं

🎯 फंडिंग का उद्देश्य क्या है?

कंपनी ने प्रेस रिलीज में बताया कि इस फंडिंग का उपयोग निम्नलिखित कार्यों के लिए किया जाएगा:

  1. AI आधारित अगली पीढ़ी की इमेजिंग टेक्नोलॉजी का विकास
  2. हाई-स्पीड स्पेस सर्विलांस सॉल्यूशंस को डेवलप करना
  3. ग्लोबल मार्केट्स में प्रवेश और विस्तार
  4. देश की सामरिक और रणनीतिक क्षमताओं को मजबूत करना

🛡️ कहां होती है तकनीक का इस्तेमाल?

Optimized Electrotech की तकनीक मुख्यतः निम्न क्षेत्रों में इस्तेमाल होती है:

  • रक्षा सेवाएं (Defence Forces)
  • अंतरिक्ष निगरानी (Space Surveillance)
  • सीमा सुरक्षा (Border Security)
  • पैरामिलिट्री फोर्सेस
  • निगरानी और खनन कंपनियां (Mining & Infrastructure)
  • सिविक बॉडीज़ व एयरपोर्ट्स

इन क्षेत्रों में कंपनी की Electro-Optic Imaging टेक्नोलॉजी सुरक्षा और प्रतिक्रिया समय में जबरदस्त सुधार लाती है।


🔍 Indigenous Innovation और ‘Make in India’ का समर्थन

कंपनी पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा दे रही है। संदीप शाह, संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक, ने कहा:

“सरकार की मजबूत नीतियों और स्वदेशी तकनीक को प्रोत्साहन देने वाली योजनाओं ने हमारे लिए यह एक सुनहरा मौका बना दिया है। यह फंडिंग हमारे निवेशकों के विश्वास का प्रमाण है। अब हमारा लक्ष्य भारत की सामरिक क्षमताओं को और मजबूत करना है।”


🌍 ग्लोबल विस्तार की योजना

Optimized Electrotech अब न केवल भारत में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी तकनीक को ले जाना चाहती है। इस फंडिंग से कंपनी अपनी R&D क्षमताओं के साथ-साथ ग्लोबल डिफेंस टेक्नोलॉजी मार्केट में अपनी उपस्थिति मजबूत करेगी।


🏢 प्रमुख प्रतिस्पर्धी कौन हैं?

भारत में इस सेगमेंट में फिलहाल कुछ ही उल्लेखनीय खिलाड़ी हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • Tonbo Imaging
  • Tata Advanced Systems Limited (TASL)

हालांकि Optimized Electrotech ने अपने यूनिक टेक्नोलॉजी स्टैक और क्लियर विज़न के साथ खुद को इस प्रतिस्पर्धा में प्रमुख स्थान पर रखा है।


📊 रणनीतिक महत्व

आज जब भारत राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमाओं की निगरानी, और ड्रोन-अटैक्स से बचाव जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में Optimized Electrotech जैसे स्टार्टअप्स का योगदान बेहद अहम हो जाता है।

इनकी तकनीक:

  • स्थिति की तुरंत पहचान (Real-Time Situational Awareness)
  • खतरे का आकलन और त्वरित प्रतिक्रिया
  • डाटा एनालिटिक्स आधारित निर्णय
    प्रदान करती है, जो सामरिक निर्णयों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।

🔮 भविष्य की दिशा

इस फंडिंग के बाद Optimized Electrotech के प्रमुख लक्ष्य होंगे:

✅ अगली पीढ़ी के Electro-Optic Payloads बनाना
✅ स्वदेशी सैन्य तकनीकों का उत्पादन
✅ ग्लोबल B2G (Business to Government) बाजार में प्रवेश
✅ AI-ड्रिवन एनालिटिक्स को इंटीग्रेट करना
✅ हाई-ऑल्टीट्यूड, लो-लैटेंसी निगरानी समाधानों पर काम करना


📌 निष्कर्ष

Optimized Electrotech ने एक ऐसा क्षेत्र चुना है जो भारत की सुरक्षा, तकनीकी आत्मनिर्भरता और रक्षा रणनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। $6 मिलियन की यह फंडिंग न केवल इसके तकनीकी रोडमैप को आगे बढ़ाएगी, बल्कि भारत को एक सुरक्षित, स्मार्ट और स्वदेशी निगरानी प्रणाली की दिशा में एक मजबूत कदम भी सिद्ध होगी।


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Read more :🦷 Cura Care ने जुटाए ₹5 करोड़ की फंडिंग,

🦷 Cura Care ने जुटाए ₹5 करोड़ की फंडिंग,

Cura Care

भारत में घरेलू वेलनेस सेवाओं की बढ़ती मांग के बीच, एक नया नाम उभर कर सामने आया है — CURA CARE। यह ब्रांड अब भारतीय उपभोक्ताओं के लिए ओरल हाइजीन (दंत स्वच्छता) को घर तक पहुंचाने की दिशा में बड़ी छलांग लगा रहा है। Zeropearl VC के नेतृत्व में हुए प्री-सीड फंडिंग राउंड में Cura Care ने ₹5 करोड़ जुटाए हैं

इस राउंड में परिवार, दोस्तों और कई प्रमुख एंजेल निवेशकों — जिनमें श्रिपद नाडकर्णी और दिवंगत रोहन मिर्चंदानी शामिल हैं — ने भी भाग लिया।


🧬 CURA CARE क्या है?

जनवरी 2025 में शुरू हुई यह कंपनी अभिनव कुमार, चिन्मय मित्तल और पमिंदर सिंह द्वारा सह-स्थापित की गई है। CURA CARE एक ऐसा ब्रांड है जो भारत में ओरल वेलनेस को एक रोज़मर्रा की सेल्फ-केयर आदत में बदलने का सपना देखता है।

📌 कंपनी के प्रमुख उद्देश्य:

  • भारत में ओरल हेल्थ से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना
  • गुणवत्तापूर्ण दंत सेवाएं घर पर देना
  • डिजिटल बुकिंग और प्रीमियम अनुभव उपलब्ध कराना

🦷 भारत में ओरल हेल्थ की स्थिति

एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 120 करोड़ से अधिक लोग ओरल हेल्थ समस्याओं से प्रभावित हैं। फिर भी ओरल वेलनेस को आज भी स्वास्थ्य के अन्य पहलुओं की तुलना में कम प्राथमिकता दी जाती है।

Cura Care का उद्देश्य इस मानसिकता को बदलना है और लोगों को सशक्त बनाना है कि वे अपने घर बैठे सुरक्षित, स्वच्छ और वैज्ञानिक दंत सेवाएं प्राप्त कर सकें।


🛋️ Cura Care की सेवाएं: दांतों की देखभाल अब आपके घर पर

Cura Care ग्राहकों को DCI-सर्टिफाइड डेंटिस्ट्स के ज़रिए घर पर ही दांतों की सफाई, स्केलिंग, पॉलिशिंग और व्हाइटनिंग जैसी सेवाएं प्रदान करता है।

💼 ये सेवाएं कस्टमाइज़्ड पोर्टेबल डेंटल यूनिट्स के माध्यम से दी जाती हैं, जो पूरी तरह से हाइजीन और सुरक्षा मानकों का पालन करती हैं।

🔍 कंपनी का फोकस है:

  • उच्च गुणवत्ता
  • समय की बचत
  • सुविधाजनक अनुभव
  • वैज्ञानिक और विश्वसनीय सेवा

💸 फंडिंग का उपयोग कहाँ होगा?

कंपनी द्वारा जारी प्रेस रिलीज़ के अनुसार, इस फंडिंग का उपयोग निम्नलिखित क्षेत्रों में किया जाएगा:

  1. प्रोडक्ट-मार्केट फिट को वेरिफाई करना
  2. कस्टमर एक्सपीरियंस को और बेहतर बनाना
  3. ऑपरेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करना
  4. सेवा विस्तार के लिए मार्केट रिसर्च और टीम निर्माण

📊 बाजार का आकार: बड़ा अवसर

भारत का वेलनेस मार्केट इस समय $60 बिलियन से अधिक का है और तेजी से बढ़ रहा है। खासकर Post-COVID दौर में घरेलू हेल्थ और हाइजीन सेवाओं की मांग में भारी वृद्धि हुई है।

Cura Care इस तेजी से बढ़ते बाजार में ओरल वेलनेस को केंद्र में रखकर प्रवेश कर रहा है, जो अब तक इस सेगमेंट में एक अनछुआ क्षेत्र रहा है।


👥 अब तक की उपलब्धियां

🔸 कंपनी ने अब तक 1,000 से अधिक ग्राहकों को सेवा दी है, जिनमें घर पर विज़िट्स और ओरल वेलनेस कैंप्स शामिल हैं।

🔸 Cura Care का Net Promoter Score (NPS) 90% से अधिक है, जो ग्राहक संतुष्टि का स्पष्ट संकेत है।

🔸 कंपनी की औसत ग्राहक रेटिंग 4.87 स्टार है, जो इसके सेवा की गुणवत्ता और भरोसे को दर्शाता है।


📈 बिजनेस मॉडल की ताकत

Cura Care का मॉडल निम्न विशेषताओं पर आधारित है:

एसेट-लाइट: पोर्टेबल यूनिट्स और ऑन-डिमांड डेंटिस्ट नेटवर्क
डायरेक्ट-टू-कस्टमर (D2C) प्लेटफॉर्म
सब्सक्रिप्शन और ऑन-डिमांड बुकिंग की सुविधा
डिजिटल अपॉइंटमेंट और ट्रैकिंग सिस्टम

इस मॉडल के कारण कंपनी स्केलेबिलिटी और कस्टमर रिटेंशन दोनों में आगे है।


🧠 निवेशकों का दृष्टिकोण

Zeropearl VC और अन्य एंजेल निवेशकों का मानना है कि Cura Care एक ऐसे सेगमेंट को टार्गेट कर रहा है जो अब तक भारतीय बाजार में कम ध्यान में रहा है, लेकिन बेहद जरूरी है।

Cura Care की ग्राउंड लेवल टीम, डेंटल साइंस की समझ, और टेक-ड्रिवन अप्रोच निवेशकों के भरोसे की बड़ी वजह बनी।


🔮 आगे की रणनीति

Cura Care अब निम्नलिखित लक्ष्यों पर काम कर रही है:

📌 10 शहरों में विस्तार
📌 कॉर्पोरेट वेलनेस प्रोग्राम्स के ज़रिए बी2बी सेगमेंट में प्रवेश
📌 AI-बेस्ड डायग्नोस्टिक टूल्स और प्रीवेंटिव डेंटल प्रोग्राम्स का विकास
📌 स्टेप-अप प्रोडक्ट्स — जैसे ओरल केयर किट्स, प्रीमियम टूथब्रश, माउथवॉश आदि


📌 निष्कर्ष

Cura Care ने एक ऐसा क्षेत्र चुना है, जो भारतीय स्वास्थ्य सेवाओं में अक्सर नज़रअंदाज़ किया गया है — लेकिन बेहद अहम है। ₹5 करोड़ की ताज़ा फंडिंग, मजबूत फाउंडर टीम और प्रामाणिक विज़न के साथ यह स्टार्टअप भारत में ओरल वेलनेस को “घरेलू देखभाल” का हिस्सा बनाने की दिशा में एक साहसिक और स्वागतयोग्य कदम है।


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Read more :🏋️‍♂️ Rinku Singh ने BeastLife में ₹1.9 करोड़ का निवेश किया,

🏋️‍♂️ Rinku Singh ने BeastLife में ₹1.9 करोड़ का निवेश किया,

BeastLife

भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह ने हाल ही में फिटनेस और स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन ब्रांड Beastlife में ₹1.9 करोड़ का निवेश किया है। यह निवेश कंपनी की ₹120 करोड़ की वैल्यूएशन पर हुआ है। BeastLife ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि रिंकू अब न केवल एक निवेशक के रूप में, बल्कि एक एक्टिव ब्रांड एंबेसडर के रूप में ब्रांड की ग्रोथ में भी सहयोग देंगे।

यह निवेश इस ब्रांड के लिए न केवल पूंजी का संचार है, बल्कि एक मजबूत विश्वास का संकेत है जो अब खेल जगत के सितारों तक पहुंच चुका है।


🧬 Beastlife क्या है?

Beastlife एक भारतीय स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन और फिटनेस ब्रांड है, जिसकी शुरुआत 2024 में गौरव तनेजा और राज विक्रम गुप्ता ने की थी। यह एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जो जिम जाने वाले युवाओं, प्रोफेशनल एथलीट्स और फिटनेस के प्रति जागरूक लोगों के लिए सप्लिमेंट्स और न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स बेचता है।

💊 इसके प्रमुख उत्पादों में शामिल हैं:

  • Protein Supplements
  • BCAA (Branched Chain Amino Acids)
  • Creatine
  • Multivitamins
  • Roti Protein Mix — रोज़मर्रा के खाने में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने के लिए

💡 ब्रांड का विज़न: फिटनेस से आगे

BeastLife सिर्फ सप्लिमेंट्स बेचने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य है —

फिटनेस गोल्स को अचीव करने में लोगों को सक्षम बनाना और उनकी सीमाओं को पार करवाना।

यह ब्रांड साइंस-आधारित, प्रमाणिक और असरदार न्यूट्रिशन सप्लिमेंट्स बनाता है, जिससे यूज़र्स को रियल रिजल्ट्स मिल सकें। इसके कई प्रोडक्ट्स, जैसे Pro Concentrate Whey Protein with Ultrasorb Tech, मसल रिकवरी और परफॉर्मेंस को बेहतर करने के लिए डिजाइन किए गए हैं।


🏏 रिंकू सिंह का समर्थन: खेल और न्यूट्रिशन का संगम

रिंकू सिंह ने निवेश करते हुए कहा:

“BeastLife केवल सप्लिमेंट्स से बढ़कर है। यह एक ऐसा विज़न है जो भारत में विश्वस्तरीय न्यूट्रिशन को सुलभ बनाना चाहता है। मैंने खुद इस ब्रांड के प्रभाव को महसूस किया और मुझे गर्व है कि मैं इसका हिस्सा बन रहा हूं।”

रिंकू का समर्थन ब्रांड के लिए एक बड़ी वैलिडेशन है, खासकर उनके जैसे पेशेवर एथलीट से, जिनकी परफॉर्मेंस डायरेक्ट न्यूट्रिशन से जुड़ी होती है।


📈 अब तक का सफर: ₹50 करोड़ GMV और ₹80 करोड़ का ARR

BeastLife ने 1 साल से थोड़े अधिक समय में ₹50 करोड़ का GMV (Gross Merchandise Value) अचीव कर लिया है।

➡️ ब्रांड ने पॉजिटिव EBITDA के साथ यह प्रदर्शन किया है।
➡️ फिलहाल, यह ₹80 करोड़ के एनुअल रन रेट (ARR) को ट्रैक कर रहा है।
➡️ सबसे खास बात — इसका परफॉर्मेंस मार्केटिंग खर्च सिर्फ 15% के भीतर रहा है, जो डिजिटल ब्रांड्स के लिए एक बेहतरीन इकनॉमिक संकेत है।


📊 ओनरशिप स्ट्रक्चर

BeastLife में वर्तमान इक्विटी वितरण इस प्रकार है:

  • गौरव तनेजा – 40%
  • राज गुप्ता – 15%
  • वरुण अलाघ (Mamaearth के को-फाउंडर) – 30%
  • ESOP पूल – 15%

इस स्ट्रक्चर से यह स्पष्ट है कि कंपनी में अनुभवी और वेल-नेटवर्क्ड संस्थापक और निवेशक जुड़े हैं, जो इसके स्केलेबिलिटी को बढ़ावा देते हैं।


🏆 प्रतियोगिता में कहाँ खड़ा है BeastLife?

BeastLife का मुकाबला भारत के पहले से स्थापित फिटनेस ब्रांड्स से है, जिनमें शामिल हैं:

  • MuscleBlaze
  • Optimum Nutrition
  • GNC
  • The Whole Truth

हालांकि इन ब्रांड्स की मार्केट में पहले से पकड़ है, BeastLife ने इनोवेशन, क्वालिटी इंग्रीडिएंट्स, और एक स्टोरीटेलिंग-ड्रिवन ब्रांड अप्रोच के ज़रिए अपनी अलग पहचान बनानी शुरू कर दी है।


🔍 क्यों यह निवेश खास है?

  1. सेलिब्रिटी इन्वॉल्वमेंट – रिंकू सिंह जैसे क्रिकेटर का इन्वेस्टमेंट युवाओं में ट्रस्ट बढ़ाता है।
  2. तेजी से बढ़ता सेगमेंट – हेल्थ और फिटनेस सप्लिमेंट इंडस्ट्री भारत में साल दर साल दोगुनी गति से बढ़ रही है।
  3. साइंस-बेस्ड प्रोडक्ट डेवलपमेंट – Ultrasorb Tech जैसी इनोवेशन ब्रांड को प्रीमियम बनाती है।
  4. मार्केटिंग एफिशिएंसी – कम खर्च में उच्च GMV और ARR का मतलब है शानदार यूनिट इकनॉमिक्स।

🔮 आगे की रणनीति

BeastLife का अगला लक्ष्य होगा:

  • भारत के अलावा अंतरराष्ट्रीय मार्केट्स में एक्सप्लोर करना
  • नए प्रोडक्ट कैटेगरीज़ जैसे वुमन फिटनेस, बच्चों की न्यूट्रिशन में विस्तार
  • ब्रांड कम्युनिटी बनाना — फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स और जिम ट्रेनर्स के साथ साझेदारी
  • फिजिकल रिटेल प्रेजेंस या एक्सपीरियंस सेंटर की योजना

📌 निष्कर्ष

BeastLife का यह ताज़ा फंडरेज़ और क्रिकेटर रिंकू सिंह की साझेदारी इस बात का संकेत है कि अब भारत का न्यूट्रिशन मार्केट सेलिब्रिटी ब्रांडिंग से निकलकर क्वालिटी और ट्रस्ट पर शिफ्ट हो रहा है।

इसका तेजी से बढ़ता GMV और पॉजिटिव मार्जिन्स इस ब्रांड को D2C न्यूट्रिशन स्पेस का अगला पावरहाउस बना सकता है।


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Read more :⚡Okinawa Autotech की गिरती रफ्तार FY24 में 84% गिरावट, ₹50 करोड़ का घाटा

⚡Okinawa Autotech की गिरती रफ्तार FY24 में 84% गिरावट, ₹50 करोड़ का घाटा

Okinawa Autotech

Okinawa Autotech जो कभी भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट में अग्रणी ब्रांड माना जाता था, अब गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) में कंपनी का राजस्व 84% तक घट गया, और उसे ₹50 करोड़ का घाटा उठाना पड़ा। यह गिरावट भारत में ईवी सेक्टर की चुनौतियों और बदलती प्रतिस्पर्धा को दर्शाती है।


📉 Okinawa Autotech FY24 में बड़ा झटका: रेवेन्यू में 84% की गिरावट

कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू FY23 में ₹1,144 करोड़ था, जो FY24 में घटकर सिर्फ ₹182 करोड़ रह गया।

इस भारी गिरावट का प्रमुख कारण था — बिक्री में आई तेज़ गिरावट।

  • FY23 में कुल बिक्री: 95,931 यूनिट्स
  • FY24 में घटकर: 20,873 यूनिट्स

📉 मार्केट शेयर में भी बड़ी गिरावट

Okinawa Autotech का मार्केट शेयर भी FY23 के 13.17% से गिरकर FY24 में 2.20% पर आ गया।

वहीं FY25 की शुरुआत में (अब तक) कंपनी सिर्फ 3,548 यूनिट्स बेच पाई है, और उसका मार्केट शेयर 0.31% तक सिमट चुका है।


🛵 कौन हैं Okinawa के प्रमुख प्रोडक्ट्स?

Okinawa की पहचान उसके बजट-फ्रेंडली और शहर के उपयोग के लिए उपयुक्त इलेक्ट्रिक स्कूटर्स से रही है। इसके प्रमुख मॉडल्स में शामिल हैं:

  • PraisePro
  • iPraise+
  • Okhi-90
  • Ridge+
  • Lite
  • R3

हालांकि, बढ़ते कॉम्पिटिशन और क्वालिटी संबंधित मुद्दों ने ब्रांड की छवि को गहरा नुकसान पहुँचाया है।


💸 खर्चों में आई कटौती, फिर भी घाटा भारी

गिरते स्केल के चलते कंपनी ने खर्चों में भारी कटौती की:

  • प्रोक्योरमेंट कॉस्ट ₹859 करोड़ (FY23) से घटकर ₹171 करोड़ (FY24) – 80% की गिरावट
  • कर्मचारी खर्च 16% घटकर ₹26 करोड़
  • विज्ञापन खर्च 88% घटकर ₹4 करोड़
  • अन्य खर्चे (फ्रेट, वारंटी, किराया आदि) मिलाकर FY24 में कुल खर्च ₹251 करोड़ रहा (FY23 में ₹991 करोड़)

📉 बावजूद इसके, FY24 में कंपनी को ₹52 करोड़ का नुकसान झेलना पड़ा।


📊 फाइनेंशियल परफॉर्मेंस: निगेटिव मार्जिन्स

  • FY23 में EBITDA: ₹166 करोड़ (पॉजिटिव)
  • FY24 में EBITDA मार्जिन: -25.8%
  • ROCE (Return on Capital Employed): -102%
  • हर ₹1 की कमाई पर कंपनी ने ₹1.38 खर्च किया।

FY24 के अंत में Okinawa की कुल करंट एसेट्स ₹276 करोड़ थीं, जिसमें बैंक और नकद बैलेंस शामिल है।


⚔️ बाज़ार में बढ़ता कॉम्पिटिशन

Okinawa अब Ola Electric, Ather Energy, और Hero Electric जैसी कंपनियों के सामने कमजोर पड़ती नजर आ रही है।

  • Ola Electric ने FY25 की तीसरी तिमाही में ₹1,045 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया।
  • Ather IPO के जरिए ₹3,100 करोड़ जुटाने की तैयारी में है।
  • पारंपरिक टू-व्हीलर ब्रांड्स जैसे Bajaj, Hero, और TVS भी इलेक्ट्रिक सेगमेंट में आ चुके हैं।

🔥 गिरावट के पीछे की वजहें

  1. फायर सेफ्टी से जुड़े विवाद: Okinawa की कुछ स्कूटर्स में आग लगने की घटनाएं उपभोक्ताओं के भरोसे को तोड़ गईं।
  2. नियमों में सख्ती: सरकारी सब्सिडी और क्वालिटी स्टैंडर्ड्स में बदलाव से कंपनी को नुकसान हुआ।
  3. ग्राहक भरोसे में गिरावट: कंज्यूमर अब बेहतर फीचर्स और सुरक्षा वाले ब्रांड्स की ओर झुक रहे हैं।
  4. उन्नत प्रतियोगी: Ola, Ather जैसे ब्रांड बेहतर टेक्नोलॉजी और UX के साथ बाजार में मौजूद हैं।

🔮 भविष्य की राह: क्या Okinawa वापसी कर पाएगा?

Okinawa को अगर वापसी करनी है तो उसे निम्न बिंदुओं पर फोकस करना होगा:

प्रोडक्ट क्वालिटी और सेफ्टी सुधार
रिटेल और सर्विस नेटवर्क को मजबूत बनाना
टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन में निवेश
सरकार के साथ बेहतर अनुपालन (compliance)
ग्राहक विश्वास को दोबारा बनाना

वहीं EV सेक्टर की तेजी से बदलती पॉलिसी और टेक्नोलॉजी की दुनिया में कंसिस्टेंसी और नवाचार ही सफलता की कुंजी बनते जा रहे हैं।


📝 निष्कर्ष

Okinawa Autotech का FY24 प्रदर्शन दिखाता है कि EV बाजार अब परिपक्व हो रहा है, और अब इसमें टिके रहना उतना ही चुनौतीपूर्ण है जितना इसमें प्रवेश करना।

जहां एक ओर नए ब्रांड्स तकनीक, ग्राहक अनुभव और ब्रांडिंग पर ध्यान दे रहे हैं, वहीं पुरानी कंपनियों को अब खुद को फिर से परिभाषित करने की जरूरत है।

क्या Okinawa फिर से अपने सुनहरे दौर में लौट पाएगा?
ये आने वाले वर्षों में कंपनी की रणनीति और उपभोक्ताओं के भरोसे पर निर्भर करेगा।


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Read more :🐶 Just Dogs का FY24 प्रदर्शन: रेवेन्यू में 32% की ग्रोथ,

🐶 Just Dogs का FY24 प्रदर्शन: रेवेन्यू में 32% की ग्रोथ,

Just Dogs

 pet care रिटेल ब्रांड JUST DOGS ने वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) में अपने राजस्व में जोरदार बढ़त दर्ज की है, लेकिन मुनाफे के मोर्चे पर कंपनी को झटका लगा है। अहमदाबाद स्थित इस स्टार्टअप ने जहां एक ओर ₹94 करोड़ का कुल रेवेन्यू कमाया, वहीं इसका घाटा बढ़कर ₹11 करोड़ तक पहुंच गया।


📊 JUSTDOGS रेवेन्यू ग्रोथ रही दमदार, 32% की बढ़त

FY24 में JUSTDOGS ने ₹94 करोड़ का ऑपरेशनल रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले वर्ष (FY23) के ₹71 करोड़ के मुकाबले 32% अधिक है।

कंपनी की शुरुआत 2011 में हुई थी, और आज यह भारत में पेट फूड, सप्लीमेंट्स, एक्सेसरीज़ और ग्रूमिंग प्रोडक्ट्स का बड़ा ब्रांड बन चुका है। Just Dogs न केवल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सक्रिय है, बल्कि इसका ऑफलाइन स्टोर नेटवर्क भी तेजी से बढ़ रहा है।


🍖 पेट फूड बना रेवेन्यू का प्रमुख स्रोत

Just Dogs की कुल आमदनी में सबसे बड़ा योगदान डॉग फूड कैटेगरी का रहा, जिससे FY24 में ₹66 करोड़ की कमाई हुई — यह FY23 की तुलना में 47% की ग्रोथ है।

🔸 पेट ट्रीट्स से ₹10 करोड़
🔸 ग्रूमिंग प्रोडक्ट्स से ₹2 करोड़
🔸 वहीं, सर्विसेज से रेवेन्यू गिरकर ₹16 करोड़ रह गया, जो पिछले वर्ष ₹17.5 करोड़ था।


💸 खर्चों में तेज़ी से इजाफा

FY24 में Just Dogs के कुल खर्च ₹106 करोड़ तक पहुंच गए, जो FY23 के ₹72 करोड़ से 47% अधिक हैं।

🔻 मैटेरियल कॉस्ट (कच्चा माल) सबसे बड़ा खर्च रहा — ₹67 करोड़, जो कुल खर्च का लगभग दो-तिहाई है।
🔻 कर्मचारी लाभ खर्च ₹13 करोड़ — 62.5% की बढ़ोतरी
🔻 मार्केटिंग खर्च ₹6 करोड़ और
🔻 रेंट खर्च ₹10 करोड़ — दोनों दोगुने हो गए
🔻 अन्य ऑपरेशनल खर्च भी ₹10 करोड़ रहे

कंपनी ने ग्रोथ के लिए आक्रामक रणनीति अपनाई, लेकिन खर्च ने रेवेन्यू ग्रोथ से आगे निकलकर घाटा बढ़ा दिया।


📉 घाटे में बड़ा उछाल: ₹6 लाख से ₹11 करोड़

जहां FY23 में कंपनी का घाटा मात्र ₹6 लाख था, वहीं FY24 में यह आंकड़ा बढ़कर ₹11 करोड़ तक पहुंच गया।

📉 ROCE (Return on Capital Employed): -25.12%
📉 EBITDA मार्जिन: -10.21%

यूनिट लेवल पर, कंपनी ने हर ₹1 कमाई के लिए ₹1.13 खर्च किए, जो FY23 में ₹1.01 था।

यह संकेत देता है कि ऑपरेशनल कुशलता पर अभी भी काम करने की ज़रूरत है।


🏦 बैलेंस शीट की स्थिति

Just Dogs के पास FY24 के अंत तक कुल ₹43 करोड़ मूल्य की करंट एसेट्स थीं। इनमें से ₹8 करोड़ कैश और बैंक बैलेंस के रूप में हैं।

इससे यह साफ होता है कि कंपनी के पास अल्पकालिक फाइनेंशियल स्थिरता बनाए रखने के लिए पर्याप्त बैकअप है, लेकिन घाटे को कम करने की दिशा में ठोस रणनीति की जरूरत है।


🧠 क्या बना नुकसान का कारण?

  1. आक्रामक विस्तार नीति: नए स्टोर्स, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निवेश
  2. मार्केटिंग और किराए में भारी इजाफा
  3. सर्विस रेवेन्यू में गिरावट
  4. कर्मचारियों पर खर्च में भारी बढ़ोतरी

इन सब ने मिलकर कंपनी के खर्चों को रेवेन्यू ग्रोथ से आगे कर दिया।


🐾 ब्रांड की दिशा: ‘फुल स्टैक पेटकेयर एक्सपीरियंस’

Just Dogs केवल प्रोडक्ट्स बेचने तक सीमित नहीं है। कंपनी का उद्देश्य है कि वह पेट पैरंट्स को फुल स्टैक एक्सपीरियंस दे सके — जिसमें फूड, ग्रूमिंग, हेल्थ सपोर्ट, ट्रेनिंग और सर्विसेस सब शामिल हों।

इस उद्देश्य से कंपनी अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म को और इंटिग्रेटेड और सहज बना रही है।


🔮 आगे की राह

कंपनी को अब इन बिंदुओं पर ध्यान देना होगा:

  • सर्विस सेगमेंट को फिर से मजबूती देना
  • खर्चों में कटौती और कुशलता लाना
  • यूनिट इकनॉमिक्स में सुधार करना
  • मार्जिन बढ़ाने के लिए प्रीमियम प्रोडक्ट्स और सब्सक्रिप्शन मॉडल पर विचार

📌 निष्कर्ष

Just Dogs ने FY24 में रेवेन्यू के मोर्चे पर तो शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन भारी खर्चों ने मुनाफे की राह में ब्रेक लगा दिया।

अगर कंपनी अपने खर्चों को कंट्रोल कर, सर्विस सेगमेंट को पुनः सक्रिय करती है — तो वह आने वाले वर्षों में भारत का अग्रणी पेट केयर ब्रांड बन सकती है।


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📊 Q1 2025 स्टार्टअप फंडिंग रिपोर्ट भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम बना रहा है गति Founder Article

Founder Article

https://fundingraised.in/ विशेष रिपोर्ट

भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम 2025 की पहली तिमाही (Q1) में एक बार फिर फंडिंग, इनोवेशन और निवेश गतिविधियों से भरा रहा। Inc42 द्वारा प्रकाशित “Indian Tech Startup Funding Report – Q1 2025”Founder Article से मिले आंकड़ों पर आधारित यह विश्लेषण बताता है कि भारत का स्टार्टअप लैंडस्केप कैसे नए मुकाम हासिल कर रहा है — चाहे वो यूनिकॉर्न्स हों, निवेश ट्रेंड्स हों, या M&A एक्टिविटीज़।


🇮🇳 भारत का डिजिटल भविष्य: इंटरनेट और स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच

  • भारत में 2030 तक 1.2 अरब से अधिक इंटरनेट यूजर्स होने की उम्मीद है।
  • इंटरनेट डेटा की औसत लागत सिर्फ ₹13/GB ($0.16) है, जो इसे विश्व में सबसे सस्ता बनाती है।
  • 2024 में भारत के पास पहले से ही 886 मिलियन+ इंटरनेट यूजर्स हैं — एक डिजिटल रेवोल्यूशन।

🚀 स्टार्टअप इकोनॉमी का आकार

  • अब तक भारत में कुल $161 बिलियन से अधिक की फंडिंग हो चुकी है (2014–2025)।
  • देश में 70,000+ टेक स्टार्टअप, 120 यूनिकॉर्न, और 122 सूनिकॉर्न्स सक्रिय हैं।
  • स्टार्टअप्स ने 1.6 मिलियन से अधिक डायरेक्ट जॉब्स बनाए हैं।

💸 Q1 2025 में फंडिंग का हाल

  • Q1 2025 में भारतीय स्टार्टअप्स ने $3.1 बिलियन+ की फंडिंग जुटाई — जो Q1 2024 की तुलना में 41% अधिक है।
  • कुल 232 डील्स हुईं, जिनमें मीडियन टिकट साइज $3 मिलियन रहा।
  • 6 मेगा डील्स ($100M+), और 1 नया यूनिकॉर्न सामने आया।

🏆 टॉप 10 फंडिंग राउंड्स (Q1 2025)

  • Innovaccer (Healthtech) – $275M
  • Meesho (Ecommerce) – $251M
  • Infra.Market (Real Estate Tech) – $140M
  • अन्य बड़े नाम: upGrad, KreditBee, Livspace, और Teachmint

📍 कौन से शहर बने फंडिंग के हब?

  1. बेंगलुरु – सबसे आगे, लगभग हर सेक्टर में अग्रणी
  2. Delhi NCR – मजबूत निवेश और यूनिकॉर्न इकोसिस्टम
  3. मुंबई, हैदराबाद, पुणे – खासकर फिनटेक और हेल्थटेक फोकस

📂 किस सेक्टर को सबसे ज्यादा फंडिंग मिली?

  • Fintech: ₹6,000+ करोड़ की फंडिंग के साथ सबसे आगे
  • Ecommerce, Enterprise Tech, और Healthtech भी टॉप फंडेड सेगमेंट्स में रहे
  • Seed स्टेज में Ecommerce, Growth स्टेज में Enterprise Tech, और Late स्टेज में Fintech को मिला सबसे अधिक निवेश

🤝 M&A गतिविधियां भी तेज़

Q1 2025 में 73% YoY ग्रोथ के साथ कुल 26+ M&A डील्स हुईं।

  • Wingify (Everstone Capital द्वारा अधिग्रहण)
  • Minimalist (HUL द्वारा अधिग्रहण)
  • Fintech सेगमेंट में सबसे अधिक अधिग्रहण

📉 मेगा डील्स में गिरावट

2019–2021 के मुकाबले अब $100 मिलियन से ऊपर की डील्स में गिरावट है। अब औसतन 6 मेगा डील्स प्रति तिमाही हो रही हैं, जबकि पहले ये संख्या 30+ थी।


💼 निवेशक कौन हैं सबसे एक्टिव?

  • इस तिमाही में 650+ निवेशकों ने हिस्सा लिया।
  • टॉप निवेशकों में शामिल हैं:
    • Alteria Capital, Blume Ventures, Accel, Matrix Partners, और Lightspeed
    • Angel Networks और Accelerators की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही

🔬 निवेशकों का मूड: AI बना टॉप थीम

FundingRaised के विश्लेषण के अनुसार, निवेशकों ने Q1 2025 में “AI Agents” को सबसे बड़ा निवेश अवसर माना।

  • 76% निवेशक मानते हैं कि भारत को अपना स्वदेशी AI इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करना चाहिए
  • अधिकांश निवेशक Exit Multiples 2x–5x पर टिके रहे
  • EV सेक्टर में सब्सिडी कटौती के चलते स्टार्टअप्स को नुकसान की आशंका

💼 फंड लॉन्च: नए निवेश को बढ़ावा

Q1 2025 में $3.2 बिलियन से अधिक के फंड लॉन्च हुए।

  • Accel India, Bessemer, Neo Asset, Expert Dojo, Kotak Alt, Venturi, और कई घरेलू फंड्स ने नया पूंजी संकल्प लिया
  • ज़्यादातर फंड AI, Fintech, SaaS, DeepTech, Consumer Tech सेगमेंट्स पर केंद्रित

📉 स्टॉक्स में गिरावट, लेकिन निवेशकों को उम्मीद

Q1 2025 में भारत के New Age Tech स्टॉक्स में गिरावट देखी गई — लगभग 20-40% की YTD गिरावट। फिर भी, निवेशकों को उम्मीद है कि सुधार जल्द देखने को मिलेगा, खासकर AI, GreenTech, और Consumer Tech सेगमेंट्स में।


🔚 निष्कर्ष

Q1 2025 भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए मिला-जुला रहा — फंडिंग में बढ़त, M&A में तेजी, लेकिन Late-stage डील्स और मेगा फंडिंग में गिरावट। निवेशकों की नजरें अब AI और भारत-केंद्रित रणनीतियों पर हैं।

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read more :🇮🇳 Indian Startups Weekly Funding Report: इस हफ्ते जुटाए गए $181.21 मिलियन, Juspay और Easebuzz के बड़े निवेश 🧾🚀

🇮🇳 Indian Startups Weekly Funding Report: इस हफ्ते जुटाए गए $181.21 मिलियन, Juspay और Easebuzz के बड़े निवेश 🧾🚀

Indian Startups weekly funding report

Weekly Funding Report इकोसिस्टम में कुल 24 स्टार्टअप्स ने लगभग $181.21 मिलियन (₹1,500+ करोड़) जुटाए। इनमें से 6 ग्रोथ-स्टेज और 13 अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स रहे, जबकि 5 स्टार्टअप्स ने अपने फंडिंग डिटेल्स का खुलासा नहीं किया। पिछले हफ्ते की तुलना में यह आंकड़ा लगभग 50% कम है, जब 30 स्टार्टअप्स ने कुल $357.29 मिलियन जुटाए थे।


📈 Growth-Stage Deals: Juspay और Easebuzz छाए

इस हफ्ते के प्रमुख ग्रोथ-स्टेज निवेश:

🔹 Juspay ने Kedaara Capital के नेतृत्व में अपने Series D राउंड में $60 मिलियन जुटाए।
🔹 Easebuzz, एक डिजिटल पेमेंट्स कंपनी, ने Bessemer Venture Partners के नेतृत्व में ₹240 करोड़ ($30 मिलियन) की फंडिंग पाई।
🔹 Noise, एक प्रमुख भारतीय वियरेबल ब्रांड, को ग्लोबल ऑडियो दिग्गज Bose से निवेश प्राप्त हुआ।
🔹 इसके अलावा Bare Anatomy की पैरेंट कंपनी Innovist, लाइव सोशल एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म Eloelo, और सोलर स्टार्टअप Sadhav Future Tech ने भी इस हफ्ते फंडिंग जुटाई।


🚀 Early-Stage Deals: Xindus सबसे आगे

13 अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स ने मिलकर $37.52 मिलियन की फंडिंग प्राप्त की। प्रमुख नाम:

🔹 Xindus, एक क्रॉस-बॉर्डर लॉजिस्टिक्स स्टार्टअप, ने $10 मिलियन की Series A फंडिंग पाई।
🔹 SigIQ.ai (edtech), Outzidr (genZ women fashion), Vimano (nanotech) और D2C स्नैक्स ब्रांड्स Let’s TryEat Better को भी निवेश मिला।

🔹 अन्य स्टार्टअप्स जैसे Drive FITT (स्पोर्ट्स क्लब), Grest (refurbished iPhones), और Data Safeguard ने फंडिंग तो पाई, लेकिन राशि साझा नहीं की गई।


📍 City-Wise Funding: Bengaluru सबसे आगे

🔸 बेंगलुरु 12 डील्स के साथ सबसे आगे रहा, इसके बाद Delhi-NCR, Pune, Jaipur, Hyderabad और Mumbai रहे।
🔸 सेगमेंट के हिसाब से e-commerce ने 4 डील्स के साथ टॉप स्थान पाया, इसके बाद fintech, edtech, foodtech, consumer electronics आदि ने भी अच्छा प्रदर्शन किया।


📊 Series-Wise Funding:

इस हफ्ते Seed funding सबसे ज्यादा रही (10 डील्स), इसके बाद Pre-Series A, Series A और Series B की डील्स रहीं।

🟠 औसतन, पिछले 8 हफ्तों में प्रति सप्ताह लगभग $246.87 मिलियन की फंडिंग देखी गई है।


🧑‍💼 Key Hirings & Departures:

🔹 Irwin Anand बने NimbusPost के नए CEO
🔹 Apoorva Ranjan Sharma, अप्रैल 2025 से दो वर्षों के लिए TiE Mumbai के अध्यक्ष
🔹 Ananth Iyer, बने Atlys के CFO
🔹 Sekhar Garisa, बने Claypond Capital के MD

🔻 Thampy Koshy (ONDC) और Raghu Krishnananda (Myntra CPTO) ने अपने पद छोड़े


🔄 Mergers & Acquisitions:

🔸 Arihant Academy ने ₹10 करोड़ में Carmel Classes का अधिग्रहण किया
🔸 Creativefuel ने MissMalini Entertainment को ₹6 करोड़ में खरीदा


💰 Fund Launches & Expansion:

🔹 Neo Asset Management का NSCOF II फंड ₹2,000 Cr पर पहली क्लोजिंग के साथ लॉन्च
🔹 Asha Ventures को UK सरकार की संस्था BII से $10 मिलियन मिले
🔹 Expert Dojo ने $100 मिलियन का तीसरा ग्लोबल फंड लॉन्च किया, जिसमें से $15 मिलियन भारत के लिए तय


📢 New Launches & Partnerships:

🔸 Kazam और Yuma ने बैटरी स्वैपिंग के लिए साझेदारी की
🔸 Grahm, एक रियल एस्टेट एडवाइजरी प्लेटफॉर्म, ने बेंगलुरु में लॉन्च किया


🔍 Potential Deals & Updates:

🔹 Mosaic Wellness ने $20 मिलियन की फंडिंग जुटाई ($400 मिलियन वैल्यूएशन पर)
🔹 Seekho $25 मिलियन जुटाने की तैयारी में
🔹 Agrostar ने नए फंड जुटाए
🔹 PhysicsWallah, Sarrthi IAS को खरीदने की अंतिम बातचीत में
🔹 Zolostays, ने ₹108 Cr में अपनी college accommodation यूनिट Good Host Spaces को बेचा


📉 Financial Results:

🔸 Eloelo: FY24 में ₹99 Cr घाटा और रेवेन्यू लगभग शून्य
🔸 Ecom Express: FY25 के पहले 9 महीनों में ₹1,912 Cr का राजस्व


📌 News Flash:

🔹 Urban Company ने IPO के लिए ₹528 Cr जुटाने की मंजूरी पाई
🔹 Bluestone और Aye Finance को IPO के लिए SEBI की स्वीकृति मिली
🔹 boAt ने DRHP कॉन्फिडेंशियल फाइलिंग के जरिए SEBI में दाखिल किया
🔹 Wakefit ने IPO के लिए Axis, IIFL और Nomura को नियुक्त किया
🔹 BharatPe को RBI से पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस मिला
🔹 Omnivore-Nucleate BioWave रिपोर्ट: 2020–24 में $1.9B इन्वेस्टमेंट, 465 डील्स


📊 UPI ट्रांजेक्शन अपडेट:

मार्च में UPI ट्रांजेक्शन वॉल्यूम 13.6% बढ़कर 18.3 बिलियन रहा।
🔹 PhonePe (8.64B ट्रांजेक्शन, 47.25%) और Google Pay (6.59B, 36.04%) ने मिलकर 83% मार्केट शेयर पर कब्जा जमाया
🔹 Paytm (6.67%), CRED (0.79%, 2.22% वैल्यू शेयर)
🔹 Axis Bank ने CRED को पछाड़ते हुए 7वें स्थान पर पहुंचाया

सरकार ने छोटे व्यापारियों के लिए ₹1,500 Cr की नई BHIM-UPI स्कीम को मंजूरी दी है।


🔚 निष्कर्ष:

Startup funding में इस हफ्ते गिरावट रही, लेकिन प्रमुख डील्स और IPO घोषणाओं ने बाजार में हलचल बनाए रखी। अगले सप्ताह और IPO गतिविधियों व अधिग्रहण अपडेट्स की उम्मीद की जा सकती है।

Read more :UPI ट्रांजैक्शन में मार्च 2025 में 13.6% की बढ़त, PhonePe और Google Pay का दबदबा बरकरार 📈💸

UPI ट्रांजैक्शन में मार्च 2025 में 13.6% की बढ़त, PhonePe और Google Pay का दबदबा बरकरार 📈💸

UPI

भारत की डिजिटल पेमेंट क्रांति में UPI (Unified Payments Interface) का वर्चस्व लगातार बढ़ता जा रहा है। मार्च 2025 में UPI ने एक नया रिकॉर्ड कायम किया, जब ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में 13.6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई और कुल 18.30 अरब लेन-देन पूरे हुए। यह आंकड़ा न केवल देश में डिजिटल लेन-देन के तेजी से बढ़ते रुझान को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि कैसे भारत अब नकद रहित अर्थव्यवस्था की ओर तेज़ी से अग्रसर हो रहा है।

📊 UPI शीर्ष ऐप्स की रैंकिंग में बड़ा बदलाव

मार्च 2025 में भी UPI सिस्टम में PhonePe और Google Pay का दबदबा बना रहा। PhonePe ने 47.25% मार्केट शेयर के साथ 8.64 अरब ट्रांजैक्शन किए, वहीं Google Pay ने 36.04% हिस्सेदारी के साथ 6.59 अरब ट्रांजैक्शन पूरे किए। इन दोनों ऐप्स ने मिलकर कुल UPI ट्रांजैक्शन वॉल्यूम का 83% हिस्सा अपने नाम किया, जो इनकी व्यापक उपयोगिता और यूज़र ट्रस्ट को दर्शाता है।

तीसरे स्थान पर रहा Paytm, जिसने 1.22 अरब ट्रांजैक्शन किए और कुल ट्रांजैक्शन वॉल्यूम का 6.67% हिस्सा लिया। हालांकि Paytm की हिस्सेदारी अन्य दो दिग्गजों की तुलना में काफी कम रही, फिर भी यह अपने मजबूत उपयोगकर्ता आधार के कारण टॉप-3 में बना रहा।

💡 Axis Bank ने CRED को पीछे छोड़ा

CRED जो पहले पांच बड़े UPI ऐप्स में शामिल था, अब सातवें स्थान पर खिसक गया है। उसे पीछे छोड़ते हुए Axis Bank ने 125 मिलियन B2C (Business to Customer) ट्रांजैक्शन के साथ छठवां स्थान हासिल किया। B2C ट्रांजैक्शन में कंपनियों द्वारा ग्राहकों को की जाने वाली पेमेंट्स जैसे रिफंड, कैशबैक या सैलरी आदि शामिल होती हैं।

Axis Bank का यह प्रदर्शन दर्शाता है कि बैंक अब डिजिटल पेमेंट्स में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं और अपने कस्टमर बेस को बेहतर सेवाएं दे रहे हैं।

💰 ट्रांजैक्शन वैल्यू में भी PhonePe आगे

अगर ट्रांजैक्शन वैल्यू की बात करें, तो PhonePe ने एक बार फिर बाज़ी मारी। इसने 50.76% हिस्सेदारी के साथ ₹12.57 लाख करोड़ से अधिक का ट्रांजैक्शन किया। वहीं Google Pay ने 34.99% मार्केट शेयर के साथ ₹8.66 लाख करोड़ का लेन-देन पूरा किया।

तीसरे नंबर पर CRED रहा, जिसने भले ही सिर्फ 0.79% वॉल्यूम शेयर लिया, लेकिन ट्रांजैक्शन वैल्यू के मामले में उसने ₹55,091 करोड़ का योगदान दिया, जो कुल वैल्यू का 2.22% है। यह CRED की हाई-वैल्यू यूज़र्स में मजबूत स्थिति को दर्शाता है।

🏦 अन्य प्रमुख खिलाड़ी

  • Amazon Pay, ICICI Bank और Axis Bank जैसे अन्य ऐप्स ने भी अपनी खास यूज़र बेस के बीच सेवाएं दीं।
  • इन ऐप्स का वॉल्यूम और वैल्यू शेयर भले ही कम रहा, लेकिन इनका फोकस अपने टार्गेटेड यूज़र सेगमेंट पर केंद्रित रहा।

🛒 छोटे व्यापारियों को मिलेगा डिजिटल पेमेंट्स का प्रोत्साहन

भारत सरकार ने हाल ही में BHIM-UPI प्लेटफॉर्म के जरिए छोटे व्यापारियों को डिजिटल पेमेंट्स अपनाने के लिए ₹1,500 करोड़ की नई योजना को मंजूरी दी है। यह योजना न केवल छोटे कारोबारियों को डिजिटल पेमेंट अपनाने में मदद करेगी, बल्कि देशभर में कैशलेस इकॉनमी को भी और मज़बूती देगी।

सरकार का उद्देश्य है कि छोटे दुकानदार, किराना स्टोर, और लोकल सर्विस प्रोवाइडर्स जैसे लोग डिजिटल पेमेंट सिस्टम का लाभ लें और ग्राहकों को कैशलेस अनुभव दें। इस योजना से देश के दूर-दराज़ के इलाकों में भी UPI का उपयोग बढ़ेगा।

📱 UPI: भारत की डिजिटल शक्ति

UPI आज सिर्फ एक पेमेंट सिस्टम नहीं बल्कि भारत के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का प्रतीक बन चुका है। यह न केवल लेन-देन को आसान बनाता है, बल्कि वित्तीय समावेशन को भी बढ़ावा देता है। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी हब तक, हर जगह UPI का प्रभाव देखा जा सकता है।

🔮 आगे का रास्ता

UPI का भविष्य और भी उज्ज्वल नजर आ रहा है। ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में निरंतर बढ़त, उपयोगकर्ताओं की संख्या में इजाफा, और सरकार द्वारा डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने वाली नीतियाँ इस क्षेत्र को और मजबूत बनाएंगी। साथ ही, नए फीचर्स और इनोवेशन जैसे क्रेडिट ऑन UPI, इंटरनेशनल पेमेंट्स, और AI इंटीग्रेशन से UPI का उपयोग और भी सहज और स्मार्ट होता जाएगा।


📌 निष्कर्ष:
मार्च 2025 के आंकड़े साफ़ तौर पर दिखाते हैं कि UPI अब सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि जरूरत बन चुका है। PhonePe और Google Pay जैसे दिग्गज जहां ट्रांजैक्शन में दबदबा बनाए हुए हैं, वहीं CRED जैसी फिनटेक कंपनियां हाई-वैल्यू यूज़र्स को टार्गेट करके अपनी जगह बना रही हैं। UPI का बढ़ता दायरा और सरकार की नई योजनाएं भारत को कैशलेस इकॉनमी की ओर मजबूती से ले जा रही हैं।


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Read more :🧠 UPSC कोचिंग सेक्टर में PhysicsWallah की बड़ी एंट्री

🧠 UPSC कोचिंग सेक्टर में PhysicsWallah की बड़ी एंट्री

PhysicsWallah

नोएडा स्थित एडटेक यूनिकॉर्न Physicswallah (PW) यूपीएससी कोचिंग सेगमेंट में अपना विस्तार करने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रही है। सूत्रों के अनुसार, कंपनी अब दिल्ली बेस्ड प्रतिष्ठित UPSC कोचिंग प्लेटफॉर्म Sarrthi IAS को खरीदने की अंतिम बातचीत में है। यह सौदा करीब ₹120-130 करोड़ के बीच हो सकता है।


📚 Physics wallah UPSC सेगमेंट: नया फोकस एरिया

PW ने हाल ही में UPSC तैयारी से जुड़े कई प्लेटफॉर्म्स से बातचीत शुरू की थी, जिनमें Drishti IAS भी शामिल है। अब कंपनी ने Sarrthi IAS को अपने अगले अधिग्रहण के लिए चुना है। PW के एक करीबी सूत्र ने बताया:

Physics wallah ने UPSC सेगमेंट को अपनी अगली ग्रोथ कैटेगरी के रूप में चिन्हित किया है और Sarrthi IAS के साथ यह डील लगभग फाइनल स्टेज पर है।”


👨‍🏫 कौन है Sarrthi IAS?

Sarrthi IAS की स्थापना वरुण जैन और शिविन चौधरी ने की थी। यह प्लेटफॉर्म UPSC अभ्यर्थियों को मेंटरशिप-आधारित कोर्स प्रदान करता है जिसमें शामिल हैं:

  • GS Foundation कोर्स
  • Mains Modules
  • Prelims Revision
  • Interview Guidance

Sarrthi ने FY25 में लगभग ₹35 करोड़ का राजस्व और ₹20 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया है — यह इसे एक प्रॉफिटेबल टारगेट बनाता है।


💼 डील के पीछे की रणनीति

PhysicsWallah की यह रणनीति UPSC कोचिंग मार्केट में अपनी पकड़ मज़बूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। कंपनी पहले से ही ₹2,500–3,000 करोड़ की डील में Drishti IAS को अधिग्रहण करने की कोशिश कर रही है। Sarrthi IAS के साथ बातचीत उसी दिशा में एक और प्रयास है।

दिल्ली बेस्ड Sarrthi IAS भी पिछले कुछ समय से एक बड़े खिलाड़ी के साथ विलय की संभावनाएं तलाश रही थी। PW के साथ यह डील उसे एक बड़ा एक्सपोज़र दे सकती है।


🧾 कंपनी की प्रतिक्रिया

जब Entrackr ने संपर्क किया तो Sarrthi IAS के सह-संस्थापक वरुण जैन ने बातचीत की पुष्टि नहीं की और कहा कि दी गई जानकारी “सटीक नहीं” है। वहीं PhysicsWallah की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।


💰 IPO की तैयारी में PW

PW सिर्फ अधिग्रहण की ओर ही नहीं बढ़ रही, बल्कि कंपनी IPO (Initial Public Offering) की दिशा में भी बड़ी तैयारी कर रही है। कंपनी ने हाल ही में तीन स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति की है और अब $5 बिलियन वैल्यूएशन पर $500 मिलियन जुटाने की योजना बना रही है।

FY24 में कंपनी ने ₹1,940.4 करोड़ का राजस्व दर्ज किया और इसका वर्तमान वैल्यूएशन $2.8 बिलियन है। अब तक PW ने $300 मिलियन से अधिक की फंडिंग जुटाई है।


📦 पिछली अधिग्रहण गतिविधियां

Sarrthi IAS का यह अधिग्रहण करीब दो साल बाद PW का पहला बड़ा अधिग्रहण होगा। इससे पहले, कंपनी ने जून 2023 में केरल स्थित Xylem Learning में नियंत्रक हिस्सेदारी ली थी। इसके अलावा, उसने UAE की K-12 लर्निंग स्टार्टअप Knowledge Planet, और भारत की कई एडटेक कंपनियों जैसे iNeuron, Altis Vortex, PrepOnline और FreeCo का अधिग्रहण किया है।

हालांकि, इनमें से अधिकतर अधिग्रहणों के बाद कोई बड़ा ग्रोथ देखने को नहीं मिला है, जिससे यह नया अधिग्रहण और भी महत्वपूर्ण बन जाता है।


🔍 निष्कर्ष: UPSC सेगमेंट में बाज़ी मारने की होड़

PhysicsWallah की UPSC कोचिंग स्पेस में यह आक्रामक एंट्री कंपनी को एक नए ग्राहक वर्ग तक पहुंच दिला सकती है। जहाँ एक ओर PW भारत के छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पकड़ बढ़ा रही है, वहीं UPSC एक ऐसा मार्केट है जहाँ छात्रों की मांग लगातार बढ़ रही है।

अगर Sarrthi IAS की डील फाइनल हो जाती है, तो यह PhysicsWallah को UPSC परीक्षा की तैयारी करने वाले लाखों छात्रों तक पहुंचने में मदद करेगी — और यह कदम उसे एक ऑल-राउंड एडटेक लीडर बनाने की दिशा में मज़बूत कर सकता है। 🔮


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