💰Thoma Bravo ने जुटाए $34.4 बिलियन!

Thoma Bravo

शिकागो स्थित वैश्विक सॉफ्टवेयर निवेश फर्म Thoma Bravo ने हाल ही में अपने बायआउट फंड्स के लिए $34.4 बिलियन (लगभग ₹2.87 लाख करोड़) से अधिक की पूंजी प्रतिबद्धता जुटाने की घोषणा की है। यह आंकड़ा दुनिया की कुछ सबसे बड़ी प्राइवेट इक्विटी रेजिंग्स में से एक मानी जा रही है।

इस नए पूंजी संग्रह के साथ Thoma Bravo अब यूरोप में भी अपना पहला समर्पित निवेश फंड लॉन्च कर रहा है।


📦 किन फंड्स में जुटाई गई है पूंजी?

Thoma Bravo ने कुल तीन बायआउट फंड्स के लिए पूंजी जुटाई है:

  1. Thoma Bravo Fund XVI$24.3 बिलियन
  2. Thoma Bravo Discover Fund V$8.1 बिलियन
  3. Thoma Bravo Europe Fund I€1.8 बिलियन (लगभग $2 बिलियन)

इन तीनों फंड्स के ज़रिए कंपनी अब अमेरिका के साथ-साथ यूरोप में भी सॉफ्टवेयर कंपनियों में बड़े स्तर पर निवेश करने जा रही है।


🌐 कहाँ से आई इतनी बड़ी पूंजी?

यह पूंजी Thoma Bravo को उसके वैश्विक निवेशकों के व्यापक नेटवर्क से प्राप्त हुई है, जिनमें शामिल हैं:

  • सॉवरेन वेल्थ फंड्स
  • पब्लिक पेंशन फंड्स
  • मल्टीनेशनल कंपनियाँ
  • बीमा कंपनियाँ
  • फंड ऑफ फंड्स
  • विश्वविद्यालय ट्रस्ट और फाउंडेशंस
  • हाई नेट वर्थ फैमिली ऑफिसेस

इस बात से साफ है कि Thoma Bravo का ट्रैक रिकॉर्ड और सॉफ्टवेयर में केंद्रित निवेश रणनीति पर विश्वास का स्तर काफी ऊंचा है


📈 पिछले 12 महीनों में जबरदस्त निवेश गतिविधियाँ

Thoma Bravo ने पिछले एक साल में खरीद और बिक्री दोनों पक्षों पर तेज़ी से काम किया है। इसके तहत कंपनी ने:

  • कई सॉफ्टवेयर कंपनियों में निवेश (Buyouts) किया
  • कई निवेशों से निकासी (Exits/Realizations) भी की
  • कुल मिलाकर इन डील्स का मूल्य रहा लगभग $35 बिलियन

यह आंकड़ा बताता है कि Thoma Bravo सिर्फ निवेश नहीं कर रही, बल्कि रणनीतिक रूप से लाभ भी कमा रही है और पोर्टफोलियो पुनः संतुलित कर रही है।


🧠 अब तक 535+ सॉफ्टवेयर कंपनियों में निवेश

Thoma Bravo दुनिया की उन गिनी-चुनी निवेश कंपनियों में से है जो केवल सॉफ्टवेयर कंपनियों में विशेषज्ञता के साथ निवेश करती हैं। अब तक:

  • 💼 535 से अधिक सॉफ्टवेयर कंपनियों में निवेश
  • 📊 वर्तमान पोर्टफोलियो में 75+ एक्टिव कंपनियाँ
  • 💸 ये कंपनियाँ मिलकर $30 बिलियन की वार्षिक राजस्व उत्पन्न करती हैं
  • 👨‍💻 वैश्विक स्तर पर 93,000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं

इससे साफ है कि Thoma Bravo का प्रभाव केवल निवेश तक सीमित नहीं, बल्कि यह कंपनियों के विकास और वैश्विक स्केल तक फैला है।


🌍 यूरोप में पहला समर्पित फंड: एक नया अध्याय

Thoma Bravo के इस पूंजी संग्रह में सबसे महत्वपूर्ण पहलू है इसका पहला यूरोप-विशिष्ट फंड – Thoma Bravo Europe Fund I। इस फंड में €1.8 बिलियन की प्रतिबद्धता हासिल की गई है।

यूरोप में:

  • टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स और SaaS कंपनियाँ तेज़ी से उभर रही हैं
  • अमेरिकी फंड्स के लिए नए निवेश अवसर तैयार हो रहे हैं
  • Thoma Bravo अब इन कंपनियों में गहरा और विशिष्ट निवेश कर सकेगा

🏢 Thoma Bravo: कहाँ-कहाँ फैला है ऑफिस नेटवर्क?

Thoma Bravo के ऑफिस अब दुनिया के कई बड़े शहरों में मौजूद हैं:

  • 🇺🇸 शिकागो (मुख्यालय)
  • 🇺🇸 डलास
  • 🇺🇸 मियामी
  • 🇺🇸 न्यूयॉर्क
  • 🇺🇸 सैन फ्रांसिस्को
  • 🇬🇧 लंदन (यूरोप की गतिविधियों का केंद्र)

इस वैश्विक नेटवर्क के ज़रिए कंपनी स्थानीय बाजारों की समझ, कनेक्शन, और बिजनेस ग्रोथ में तेजी लाती है।


🤔 भारत के लिए क्या मायने हैं?

हालाँकि Thoma Bravo फिलहाल भारत-केंद्रित फंड नहीं चला रही, लेकिन इस तरह की गतिविधियाँ भारतीय सॉफ्टवेयर और SaaS स्टार्टअप्स के लिए एक संकेत हैं:

  • वैश्विक निवेशक अब सॉफ्टवेयर सेक्टर को सबसे बड़ा और स्थायी ग्रोथ इंजन मानते हैं
  • यूनिकॉर्न बनने के बाद अगर भारतीय स्टार्टअप्स मुनाफा दिखा सकें, तो ऐसे फंड्स से बड़े निवेश की उम्मीद की जा सकती है
  • खासकर SaaS, फिनटेक, क्लाउड और AI क्षेत्रों में आगामी अवसरों के द्वार खुल सकते हैं

📌 निष्कर्ष

Thoma Bravo का $34.4 बिलियन का यह फंडरेज़ सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में बढ़ते वैश्विक विश्वास को दर्शाता है। अमेरिका से लेकर यूरोप तक, यह फर्म अब नए बाजारों में तेज़ और आक्रामक विस्तार कर रही है।

भारत के स्टार्टअप्स के लिए यह एक संकेत है कि टेक्नोलॉजी और मुनाफे का सही संतुलन उन्हें भी इस वैश्विक निवेश की दौड़ में आगे ला सकता है।


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Read more :🚫 Zepto का IPO अब 2026 तक टला:

🚫 Zepto का IPO अब 2026 तक टला:

Zepto

भारत की प्रमुख क्विक कॉमर्स स्टार्टअप Zepto ने अब अपने IPO (Initial Public Offering) की योजना को 2026 तक स्थगित कर दिया है। पहले कंपनी के सह-संस्थापक और CEO आदित पालिचा ने 2025 में IPO लाने की बात कही थी, लेकिन अब आंतरिक समीक्षा के बाद कंपनी ने इसे एक साल आगे खिसका दिया है।

👉 Moneycontrol की एक रिपोर्ट के अनुसार, Zepto आने वाले महीनों में भले ही अपना DRHP (Draft Red Herring Prospectus) दाखिल कर दे, लेकिन 2025 में लिस्टिंग अब लगभग असंभव मानी जा रही है।


📉 क्यों टला IPO?

Zepto के अंदरूनी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि कंपनी इस वक्त अपने वित्तीय आँकड़ों को मजबूत करने में लगी है। मौजूदा समय में:

  • कंपनी का कैश बर्न (नकदी खर्च) ज़्यादा है
  • मुनाफे की स्थिति तक पहुँचने में अभी वक्त लगेगा
  • पब्लिक मार्केट में एंट्री से पहले ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार ज़रूरी है

इसलिए कंपनी ने IPO की जल्दबाज़ी न करते हुए मजबूत वित्तीय प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित किया है।


🔁 पहले भी बदली जा चुकी है IPO टाइमलाइन

Zepto ने 2023 और 2024 में भी अपने IPO की समय-सीमा को कई बार संशोधित किया था। पहले जहां लिस्टिंग 2024 के अंत तक मानी जा रही थी, बाद में इसे 2025 बताया गया, और अब 2026 तक के लिए टाल दिया गया है।

📌 यह इंडिकेशन देता है कि स्टार्टअप सेक्टर में निवेशकों का भरोसा अब सिर्फ ग्रोथ नहीं, बल्कि मुनाफे और स्थायित्व पर भी निर्भर है।


🏚️ Zepto Café: छोटे शहरों में बंद हुए कई यूनिट्स

Zepto की फूड सर्विस यूनिट Zepto Café को भी बड़े झटके लगे हैं। उत्तर भारत के कई छोटे शहरों जैसे:

  • आगरा
  • चंडीगढ़
  • मेरठ
  • मोहाली
  • अमृतसर

…में लगभग 44 कैफे अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। इन बंदियों से 400 से अधिक कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित हुई हैं।

📊 खर्च की बड़ी चुनौती

रिपोर्टों के मुताबिक, Zepto पिछले साल के अंत में हर महीने ₹250 करोड़ से ₹300 करोड़ तक खर्च कर रही थी। यह खर्च कंपनी के तेज़ी से विस्तार और ऑपरेशनल खर्च की वजह से हो रहा था, जिसमें वेयरहाउस, डिलीवरी, राइडर इनसेंटिव्स और कैफे यूनिट्स शामिल हैं।


💸 नया फाइनेंसिंग प्लान: ₹1,500 करोड़ की डेब्ट डील

IPO से पहले कंपनी अपने भारतीय निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इसी उद्देश्य से Zepto:

  • Edelweiss Alternative Asset और अन्य निवेशकों के साथ मिलकर
  • करीब ₹1,500 करोड़ (लगभग $175 मिलियन) की structured debt deal फाइनल कर रही है

इस फंड का उपयोग कंपनी अपने विदेशी निवेशकों से शेयर वापस खरीदने (Buyback) के लिए करेगी। इससे IPO से पहले कंपनी में भारतीय हिस्सेदारी को बढ़ाया जा सकेगा, जो सेबी के नियमों के तहत फायदेमंद माना जाता है।


🔍 Zepto का परिचय: तेज़ डिलीवरी की पहचान

Zepto की शुरुआत 2021 में आदित पालिचा और कौशल वार्धन ने की थी। मात्र 10 मिनट में ग्रोसरी और डेली नीड्स की डिलीवरी ने इस स्टार्टअप को तेजी से लोकप्रिय बना दिया।

  • 📍 प्रमुख शहरों में 200+ डार्क स्टोर
  • 📦 ग्रॉसरी, डेयरी, फल-सब्जी और डेली यूज़ प्रोडक्ट्स
  • 🛵 अत्याधुनिक सप्लाई चेन और राइडर नेटवर्क

Zepto ने Y Combinator, Glade Brook Capital, Nexus Venture Partners, और StepStone Group जैसे नामी निवेशकों से अब तक $560 मिलियन से अधिक फंडिंग जुटाई है।


📉 लेकिन मुनाफा अभी दूर…

तेज़ी से ग्रोथ के बावजूद Zepto अब भी प्रॉफिटबिलिटी से दूर है। भारी डिस्काउंट्स, प्रचार खर्च, और कैफे यूनिट्स जैसे नए एक्सपेरिमेंट्स ने लागत बढ़ा दी है।

📉 रिपोर्ट्स के अनुसार:

  • अब कंपनी कैफे जैसी गैर-मूल सेवाओं को बंद कर रही है
  • कोर ग्रोसरी डिलीवरी ऑपरेशंस पर फोकस बढ़ा रही है
  • क्लस्टर ऑप्टिमाइज़ेशन के ज़रिए डार्क स्टोर नेटवर्क को री-ऑर्गनाइज़ किया जा रहा है

🧠 एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

विशेषज्ञों का मानना है कि Zepto का IPO टालना एक रणनीतिक कदम है:

“IPO मार्केट अब सिर्फ रेवेन्यू ग्रोथ नहीं, बल्कि प्रॉफिटेबिलिटी को भी तवज्जो दे रहा है। ऐसे में Zepto जैसे हाई-बर्न स्टार्टअप्स को खुद को स्थिर साबित करना होगा।” — Startup Analyst


🔮 आगे की रणनीति

  • कैश बर्न कम करना
  • प्रॉफिटबिलिटी हासिल करना
  • भारतीय निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ाना
  • ✅ 2026 तक IPO के लिए तैयारी पूरी करना

Zepto यदि इन मोर्चों पर सफल रहता है, तो 2026 में इसका IPO भारत के सबसे चर्चित टेक लिस्टिंग्स में से एक बन सकता है।


📌 निष्कर्ष

Zepto की कहानी भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की एक झलक पेश करती है—जहां गति ज़रूरी है, लेकिन स्थिरता और मुनाफा अब निवेशकों की पहली प्राथमिकता बन चुके हैं।

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Read more :🥦 Handpickd को मिला ₹21.7 करोड़ का फंड

🥦 Handpickd को मिला ₹21.7 करोड़ का फंड

Handpickd

फार्म-टू-फोर्क मॉडल पर काम करने वाला Bengaluru स्थित स्टार्टअप Handpickd (पहले नाम Sorted) ने अपने Seed राउंड को आगे बढ़ाते हुए ₹21.7 करोड़ (लगभग $2.5 मिलियन) की फंडिंग जुटाई है। इस फंडिंग का नेतृत्व Nitin Gupta और Genesia Ventures ने किया, जिसमें BEENEXT, Stargazer Ventures, Eximius Ventures, और Sunrise Sunset Family Trust जैसे नामी निवेशकों ने भी भाग लिया।


💰 फंडिंग डिटेल्स: किसने कितना निवेश किया?

Registrar of Companies (RoC) में दर्ज मार्च 2025 की फाइलिंग के अनुसार, कंपनी ने कुल 10,547 Series Seed B CCPS शेयर ₹20,566 प्रति शेयर की दर से जारी करने की मंज़ूरी दी है, जिसके ज़रिए ₹21.7 करोड़ की पूंजी जुटाई जा रही है।

मुख्य निवेश इस प्रकार हैं:

  • 🧑‍💼 Nitin Gupta (GG Enterprises): ₹6.48 करोड़
  • 🌍 Genesia Ventures: ₹6 करोड़
  • 🌱 BEENEXT (पहले से मौजूदा निवेशक): ₹2.16 करोड़
  • 👨‍👩‍👦 Sunrise Sunset Family Office: ₹2 करोड़
  • 🤝 Eximius Ventures, Stargazer Ventures, Infinyte Club Angel Fund और Ankit Agarwal: शेष राशि का योगदान

अब तक कंपनी को ₹10.16 करोड़ की राशि मिल चुकी है, और बाकी फंड निकट भविष्य में आने की उम्मीद है।


📊 कंपनी का वैल्यूएशन और प्रोफाइल

इस फंडिंग राउंड के बाद Handpickd का अनुमानित वैल्यूएशन करीब ₹300 करोड़ (लगभग $35 मिलियन) है, जो दर्शाता है कि निवेशक इसके व्यवसाय मॉडल और स्केलेबिलिटी पर भरोसा कर रहे हैं।


🌾 Handpickd क्या करता है?

Handpickd, जिसकी स्थापना Anant Goel, Nitin Gupta और Sahil Madan ने की है, एक B2B2C मॉडल पर काम करता है। यह स्टार्टअप किसानों और छोटे विक्रेताओं से सीधे फलों और सब्जियों की ख़रीद करता है, और इन्हें अपने टेक्नोलॉजी-चालित सप्लाई चेन के ज़रिए ग्राहकों तक पहुँचाता है।

🧑‍🌾 कंपनी का यूनिक मॉडल स्थानीय माइक्रो-एंटरप्रेन्योर्स को जोड़ता है, जो अंतिम मील (last-mile) डिलीवरी की कुशलता से ज़िम्मेदारी निभाते हैं।


📈 वित्तीय प्रदर्शन: FY24 में शानदार ग्रोथ

डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफ़ॉर्म TheKredible के अनुसार, FY24 (मार्च 2024 तक) में कंपनी ने:

  • ₹17.5 करोड़ की ऑपरेटिंग इनकम दर्ज की — FY23 के ₹7.4 करोड़ की तुलना में 2.3 गुना ज़्यादा
  • घाटा लगभग ₹2.1 करोड़ रहा — पिछले साल के बराबर

यह साफ़ दर्शाता है कि कंपनी लागत नियंत्रण के साथ-साथ तेज़ी से रेवेन्यू ग्रोथ कर रही है।


🤝 पुराने निवेशक कौन-कौन?

Handpickd को अब तक कुल $9 मिलियन (₹75 करोड़ से ज़्यादा) की फंडिंग मिल चुकी है। इसके प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:

  • 🌟 BEENEXT
  • 🌱 Blume Ventures
  • 💼 Kunal Bahl और Rohit Bansal (Snapdeal के सह-संस्थापक)

🧺 किससे है मुकाबला?

Handpickd का सीधा मुकाबला उन स्टार्टअप्स से है जो farm-to-fork मॉडल पर काम करते हैं:

  • 🥕 Otipy – अब तक $49 मिलियन जुटा चुका है
  • 🥬 Fraazo$61 मिलियन फंडिंग के बाद भी ऑपरेशन बंद कर चुका है
  • 🍅 Deep Rooted$20 मिलियन उठाने के बावजूद संघर्ष कर रहा है
  • 🍏 Pluckk – करीना कपूर समर्थित स्टार्टअप जो अब $10 मिलियन जुटाने की तैयारी में है

📌 इन सभी के मुकाबले Handpickd का lean model और ग्रासरूट सप्लाई चेन इसे अलग बनाता है।


🌱 क्यों है Handpickd की ग्रोथ खास?

  • 🚛 माइक्रो-लॉजिस्टिक्स नेटवर्क: अंतिम मील की डिलीवरी को तेज़ और किफायती बनाता है
  • 📲 टेक इंटीग्रेशन: किसानों, डिलीवरी एग्जीक्यूटिव्स और ग्राहकों के लिए एकीकृत प्लेटफॉर्म
  • 🏪 स्थानीय सस्टेनेबिलिटी: छोटे विक्रेताओं को सशक्त बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती

🔮 भविष्य की राह

नए फंड का उपयोग कंपनी टेक्नोलॉजी अपग्रेड, सप्लाई चेन विस्तार, और नए शहरों में एंट्री के लिए करेगी। B2B2C मॉडल को और गहराई देने की योजना के साथ, Handpickd खुद को एक फ्यूचर-रेडी एग्री स्टार्टअप के रूप में स्थापित कर रहा है।


✍️ निष्कर्ष

जहां एक ओर कई farm-to-fork स्टार्टअप्स फंडिंग के बावजूद टिक नहीं पाए, वहीं Handpickd का संतुलित ग्रोथ, मुनाफा नियंत्रण और मजबूत माइक्रो-इकोनॉमी इकोसिस्टम इसको एक स्थायी मॉडल की तरह पेश करता है।

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Read more :⚡ Ola Electric से Hyundai और Kia का बाहर निकलना

⚡ Ola Electric से Hyundai और Kia का बाहर निकलना

ola electric

भारतीय इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। दक्षिण कोरिया की दो प्रमुख ऑटो कंपनियां — Hyundai Motor और Kia Corporation — ने भारत की EV कंपनी Ola Electric से अपना पूरा निवेश निकाल लिया है। दोनों कंपनियों ने मंगलवार को ब्लॉक डील के ज़रिए कुल ₹690 करोड़ में अपनी हिस्सेदारी बेच दी, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि वे भारत में अपने EV निवेश को रणनीतिक रूप से कम कर रही हैं।


💸 कितनी हिस्सेदारी बेची गई और किसे?

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बुल्क डील डेटा के मुताबिक:

  • Hyundai ने अपनी 2.47% हिस्सेदारी ₹552 करोड़ में बेची।
  • Kia ने अपनी 0.62% हिस्सेदारी ₹137 करोड़ में बेची।

इस डील का सबसे बड़ा खरीदार रहा Citigroup Global Markets Mauritius, जिसने Ola Electric की 1.95% हिस्सेदारी (8.61 करोड़ शेयर) ₹435 करोड़ में खरीदी।

📌 दिलचस्प बात यह रही कि बाकी खरीदारों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे डील को लेकर बाज़ार में कुछ सवाल भी उठे हैं।


📉 Ola Electric की गिरती आर्थिक स्थिति

Hyundai और Kia का Ola Electric से बाहर निकलना ऐसे समय पर हुआ है जब कंपनी की वित्तीय स्थिति लगातार कमजोर हो रही है।

🔻 FY25 की चौथी तिमाही में Ola Electric को ₹862 करोड़ का घाटा हुआ, जो कि पिछले साल की समान तिमाही (Q4 FY24) के ₹418 करोड़ के घाटे से दोगुना है।

📉 कंपनी की ऑपरेटिंग इनकम में भी भारी गिरावट आई है – यह 50% तक घटकर ₹611 करोड़ रह गई।

🔴 पूरे FY25 में, कंपनी को कुल ₹2,276 करोड़ का घाटा हुआ, जबकि FY24 में यह ₹1,584 करोड़ था।

इस वित्तीय दबाव का सीधा असर कंपनी के शेयर पर भी पड़ा है। बुधवार को Ola Electric का शेयर 8% से ज्यादा गिरकर ₹49.61 पर बंद हुआ, जिससे कंपनी का मार्केट कैप ₹21,882 करोड़ ($2.57 बिलियन) तक सिमट गया।


🔄 2019 में हुआ था बड़ा निवेश

बात करें पीछे की, तो 2019 में Hyundai और Kia ने संयुक्त रूप से $300 मिलियन (करीब ₹2,400 करोड़) का निवेश Ola Electric में किया था। यह निवेश भारत में उनके EV विस्तार की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा था।

लेकिन 5 साल बाद अब दोनों कंपनियों ने एक साथ कंपनी से पूरी तरह से बाहर निकलने का निर्णय लिया है। इसे ऑटोमोबाइल सेक्टर के विशेषज्ञ एक रणनीतिक रिव्यू के रूप में देख रहे हैं।


❓ Ola Electric के लिए आगे का रास्ता

Hyundai और Kia जैसे बड़े रणनीतिक निवेशकों का बाहर निकलना Ola Electric के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। इससे:

  • कंपनी की रणनीतिक स्थिरता पर असर पड़ सकता है।
  • इनोवेशन और प्रोडक्ट डिवेलपमेंट के लिए सहयोग की संभावनाएं घट सकती हैं।

हालांकि, Citigroup जैसे वैश्विक निवेशक का आना यह दर्शाता है कि Ola Electric में अब भी निवेशकों की रुचि बनी हुई है, लेकिन यह देखना बाकी है कि कंपनी किस तरह से FY26 तक मुनाफे की ओर बढ़ेगी


🕵️‍♂️ खरीदारों की पहचान क्यों नहीं बताई गई?

Hyundai और Kia ने जो हिस्सेदारी बेची, उसमें से 63% से ज्यादा हिस्सेदारी उन निवेशकों ने खरीदी जिनकी पहचान सामने नहीं आई है।

इससे बाज़ार में कुछ आशंकाएं भी जताई जा रही हैं, जैसे:

  • क्या ये निवेशक लंबे समय तक कंपनी में टिकेंगे?
  • क्या Ola Electric को कोई प्राइवेट इक्विटी या रणनीतिक निवेशक धीरे-धीरे टेकओवर कर रहा है?

इन सवालों का जवाब आने वाले समय में Ola Electric की फाइनेंशियल रिपोर्ट्स और बोर्ड स्ट्रक्चर में हो सकने वाले बदलावों से मिल सकता है।


📈 Ola Electric: भारत का EV फ्लैगशिप या संघर्षरत स्टार्टअप?

Ola Electric ने भारत के इलेक्ट्रिक स्कूटर बाजार में तेज़ी से पकड़ बनाई थी और अपने IPO के ज़रिए एक यूनिकॉर्न की तरह उभरी। लेकिन पिछले कुछ समय से कंपनी को लगातार:

  • उत्पादन में चुनौतियां,
  • वित्तीय घाटा,
  • और प्रौद्योगिकी संबंधी सवालों का सामना करना पड़ रहा है।

इन सबके बीच Hyundai और Kia जैसे दिग्गजों का बाहर निकलना Ola Electric के भविष्य के लिए सावधानी की घंटी हो सकता है।


✍️ निष्कर्ष

भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का भविष्य उज्ज्वल है, लेकिन यह रास्ता आसान नहीं है। Ola Electric जैसे स्टार्टअप्स को:

  • वित्तीय अनुशासन,
  • रणनीतिक साझेदारों की स्थिरता,
  • और तकनीकी नवाचार के साथ बाज़ार में टिकना होगा।

Hyundai और Kia का बाहर निकलना एक सिग्नल है कि बड़ी कंपनियां भी अब अपने EV निवेशों की समीक्षा कर रही हैं, और Ola Electric को अब अपने दम पर टिकने की ज़रूरत है।

📢 ऐसे ही EV और स्टार्टअप से जुड़ी हिंदी में विस्तृत खबरों के लिए पढ़ते रहिए – FundingRaised.in

Read more :🚨 CoinDCX में सीनियर लेवल पर भारी उथल-पुथल,

🚨 CoinDCX में सीनियर लेवल पर भारी उथल-पुथल,

CoinDCX

भारत की अग्रणी क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज CoinDCX इस समय एक और बड़ी आंतरिक चुनौती का सामना कर रही है। सूत्रों के अनुसार, कंपनी के कई शीर्ष अधिकारी – जैसे कि चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (CTO), हेड ऑफ फाइनेंस और हेड ऑफ लीगल – जल्द ही कंपनी से विदा लेने जा रहे हैं।

इससे पहले भी कंपनी ने लागत घटाने और संचालन को बेहतर करने के उद्देश्य से कई ढांचागत बदलाव किए थे, लेकिन अब यह टॉप-लेवल एग्जिट्स एक नए मोड़ की ओर इशारा कर रहे हैं।


🏢 CoinDCX में कौन-कौन छोड़ रहा है पद?

सूत्रों के अनुसार, CoinDCX के निम्न वरिष्ठ अधिकारी कंपनी छोड़ रहे हैं:

  • CTO (चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर)
  • हेड ऑफ फाइनेंस (वित्त प्रमुख)
  • हेड ऑफ लीगल (कानूनी प्रमुख)

इन पदों से हटना कंपनी के आंतरिक पुनर्गठन का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य संचालन को सरल बनाना और लागत में कटौती करना है।


🔁 फिर से छंटनी की शुरुआत

CoinDCX ने एक बार फिर लेऑफ (छंटनी) की प्रक्रिया शुरू कर दी है, हालांकि प्रभावित कर्मचारियों की संख्या स्पष्ट नहीं है।

📌 पिछली छंटनी – अगस्त 2023 में CoinDCX ने लगभग 12% कर्मचारियों को नौकरी से निकाला था, जो कि करीब 70 लोगों पर असर डालने वाला निर्णय था।


📉 कारोबार में गिरावट और नियमों की परेशानी

सूत्रों का कहना है कि यह बदलाव कंपनी के लिए चुनौतीपूर्ण समय में हो रहे हैं क्योंकि CoinDCX को ट्रेडिंग वॉल्यूम में गिरावट और बढ़ते नियामकीय दबाव (compliance headache) का सामना करना पड़ रहा है।

भारत में क्रिप्टो सेक्टर अभी भी स्पष्ट रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के इंतजार में है, और इससे जुड़े स्टार्टअप्स को लगातार वित्तीय और कानूनी जांच का सामना करना पड़ रहा है।


📣 CoinDCX ने दी प्रतिक्रिया

कंपनी के प्रवक्ता ने इन टॉप-लेवल एग्जिट्स की पुष्टि करते हुए कहा:

“हम अपनी टीमों को मजबूत बना रहे हैं और लीडरशिप बेंच को नए टैलेंट्स के साथ सशक्त कर रहे हैं। हमारे पास इस समय 100 से अधिक ओपन पोजीशन्स हैं, जिनमें CFO और जनरल काउंसल जैसी सीनियर भूमिकाएं शामिल हैं।”

उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी ने अपने अंतरराष्ट्रीय विस्तार से कारोबार में तेज़ी से ग्रोथ देखी है और यह ट्रेंड आगे भी जारी रहेगा।


🌍 MENA क्षेत्र में CoinDCX का विस्तार

CoinDCX ने हाल ही में बहरीन में अपनी सहायक कंपनी BitOasis के ज़रिए अपना परिचालन शुरू किया है। यह कदम MENA (Middle East & North Africa) क्षेत्र में कंपनी के विस्तार की रणनीति का हिस्सा है।

CEO सुमित गुप्ता के नेतृत्व में CoinDCX का लक्ष्य है कि भविष्य में कुल राजस्व का 30% इसी अंतरराष्ट्रीय बाजार से आए।


🦄 एक यूनिकॉर्न की कहानी

CoinDCX की यात्रा 2018 में शुरू हुई थी और अगस्त 2021 में यह कंपनी यूनिकॉर्न बनी, जब इसे $90 मिलियन की सीरीज़ C फंडिंग मिली थी।

इसके बाद अप्रैल 2022 में कंपनी ने $135 मिलियन जुटाए और इसका वैल्यूएशन $2 बिलियन से ऊपर पहुंच गया।

📉 हालांकि, पिछले तीन वर्षों में कंपनी ने कोई भी नई बाहरी फंडिंग नहीं जुटाई है, जो इंडस्ट्री की अनिश्चितता को दर्शाता है।


🔍 भारत में क्रिप्टो सेक्टर की चुनौतियां

भारत में क्रिप्टो कंपनियां एक लंबे समय से वित्तीय निगरानी एजेंसियों की जांच के दायरे में हैं।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने CoinDCX सहित कई कंपनियों को FEMA (Foreign Exchange Management Act) के संभावित उल्लंघनों की जांच के लिए समन भेजा है।

📄 रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार जून 2025 में एक डिस्कशन पेपर जारी करने की योजना बना रही है, जिसमें क्रिप्टो एसेट्स को लेकर संभावित नीतियों पर चर्चा होगी।

यह पेपर IMF (International Monetary Fund) और FSB (Financial Stability Board) की संयुक्त रिपोर्ट पर आधारित होगा।


🧠 CoinDCX के लिए आगे का रास्ता

CoinDCX के सामने इस समय कई मोर्चों पर चुनौतियां हैं:

  • बिज़नेस वॉल्यूम में गिरावट
  • रेगुलेटरी अनिश्चितता
  • अंदरूनी टीम में बड़े बदलाव

लेकिन कंपनी के प्रवक्ता और CEO का कहना है कि:

“हम लगातार अपने बिज़नेस मॉडल को मजबूत कर रहे हैं और इंटरनेशनल मार्केट्स में हमारी मौजूदगी तेज़ी से बढ़ रही है।”


✍️ निष्कर्ष

भारत में क्रिप्टो सेक्टर का भविष्य अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन CoinDCX जैसी कंपनियों का विकास और चुनौतियों से निपटने की रणनीति इस पूरे क्षेत्र के लिए एक टेस्ट केस की तरह है।

जहां एक ओर टॉप लेवल एग्जिट्स और छंटनी से कंपनी को आंतरिक रूप से झटका लगा है, वहीं दूसरी ओर इंटरनेशनल विस्तार और नेतृत्व पुनर्गठन से नई उम्मीदें भी जगी हैं।

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Read more :🤖 Veris AI को मिला $8.5 मिलियन Seed फंडिंग 📈

🤖 Veris AI को मिला $8.5 मिलियन Seed फंडिंग 📈

Veris AI

AI एजेंट्स की सुरक्षित ट्रेनिंग और टेस्टिंग के लिए विकसित प्लेटफॉर्म को मिला वेंचर कैपिटल का साथ

न्यूयॉर्क आधारित एडवांस्ड AI ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म Veris AI ने हाल ही में $8.5 मिलियन (लगभग ₹71 करोड़) की Seed फंडिंग जुटाई है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Decibel Ventures और Acrew Capital ने किया, जिसमें कई प्रमुख एंजल निवेशकों जैसे Ian Livingstone, The House Fund, Idris Mokhtarzada और Dorothy Chang ने भाग लिया।


🎯 क्या करता है Veris AI?

Veris AI एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो कंपनियों को AI एजेंट्स (जैसे चैटबॉट्स और वर्चुअल असिस्टेंट्स) को सुरक्षित, रियलिस्टिक और हाई-फिडेलिटी सिमुलेटेड एनवायरनमेंट में ट्रेन और टेस्ट करने की सुविधा देता है।

मुख्य विशेषताएं:

  • अनुभवात्मक ट्रेनिंग ग्राउंड
  • रिइनफोर्समेंट लर्निंग सपोर्ट
  • उद्योगों के लिए कस्टम सिमुलेशन
  • नियमित सुधार और प्रदर्शन विश्लेषण

इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य कंपनियों को AI मॉडल को वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षण करने में सहायता देना है — बिना किसी वास्तविक नुकसान या जोखिम के


💡 CEO Mehdi Jamei की अगुवाई में बढ़ता प्रभाव

Veris AI के CEO मेहदी जमेई (Mehdi Jamei) के नेतृत्व में यह कंपनी शुरुआती ग्राहकों के साथ फोकस इंडस्ट्रीज में पायलट प्रोजेक्ट चला रही है। इसमें शामिल हैं:

  • वित्तीय सेवा (Fintech)
  • एंटरप्राइज़ प्रोडक्टिविटी
  • मैन्युफैक्चरिंग

🧪 प्रमुख उपयोग मामलों की झलक

1️⃣ फिनटेक कंपनी के लिए रेगुलेटरी-सुरक्षित चैटबॉट्स

एक कंज़्यूमर फिनटेक कंपनी Veris AI का उपयोग करके ऐसे चैटबॉट्स डेवलप कर रही है जो नियामकीय (regulatory) फ्रेमवर्क के भीतर कार्य करते हैं। इसमें शामिल हैं:

  • संवेदनशील जानकारी का लीक न होना
  • संभावित रेगुलेटरी उल्लंघन की पहचान
  • यूज़र संवाद की रियलिस्टिक सिमुलेशन

इससे कंपनी को बिना नियामकीय जोखिम बढ़ाए नई यूज़र एंगेजमेंट चैनल्स खोलने में मदद मिल रही है।


2️⃣ HR टेक स्टार्टअप के लिए विश्वसनीय AI असिस्टेंट्स

एक HR टेक कंपनी Veris का उपयोग करके ऐसे AI असिस्टेंट्स ट्रेन कर रही है जो:

  • जटिल मीटिंग शेड्यूलिंग
  • गोपनीय जानकारी शेयरिंग
  • प्रफेशनल ईमेलिंग

जैसे कार्यों को सुरक्षित और जिम्मेदारी से कर सकें। यह विशेष रूप से उन संगठनों के लिए जरूरी है जहां एक छोटी गलती भी भरोसे को नुकसान पहुंचा सकती है।


3️⃣ मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सप्लाई चेन एजेंट की ट्रेनिंग

एक निर्माण कंपनी Veris AI का इस्तेमाल कर रही है सप्लाई चेन ऑप्टिमाइजेशन एजेंट को सिखाने के लिए। इसमें निम्न कार्य शामिल हैं:

  • सप्लायर रिसर्च
  • RFP जनरेशन
  • ईमेल कम्युनिकेशन
  • रेट नेगोसिएशन
  • रिस्क इवैल्युएशन

AI को पहले से इन पर सिमुलेटेड वातावरण में अभ्यास कराकर, कंपनी संभावित वित्तीय हानि, ब्रांड डैमेज या कानूनी जोखिमों से बच रही है।


📊 फंडिंग का उपयोग

Veris AI इस फंडिंग का उपयोग मुख्यतः तीन प्रमुख क्षेत्रों में करेगी:

  1. टीम का विस्तार – इंजीनियरिंग, डेटा साइंस और नीति विशेषज्ञों की नियुक्ति
  2. प्रोडक्ट डेवलपमेंट – प्लेटफॉर्म की परफॉर्मेंस और यूज़र इंटरफेस को और बेहतर बनाना
  3. ऑपरेशनल स्केलिंग – और अधिक उद्यमों के लिए AI एजेंट ट्रेनिंग की सेवाएं उपलब्ध कराना

🌐 क्यों है Veris AI खास?

आज के समय में जब AI तेजी से हर इंडस्ट्री में घुस रहा है, कंपनियों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे अपने AI सिस्टम्स को असली दुनिया जैसे हालातों में परखें – लेकिन बिना किसी हानि के।

Veris AI यह समाधान देकर:

  • कंपनियों को AI के साइड इफेक्ट्स से बचाता है
  • रीइनफोर्समेंट लर्निंग का सुरक्षित प्लेटफॉर्म देता है
  • और उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले, भरोसेमंद और कॉम्प्लायंट AI एजेंट्स बनाने में मदद करता है।

🧠 भारत के लिए क्या मायने?

भारत में भी AI तेजी से हेल्थटेक, फिनटेक, एग्रीटेक और एंटरप्राइज़ सॉल्यूशंस में प्रवेश कर रहा है। Veris AI जैसे प्लेटफॉर्म आने वाले समय में भारतीय कंपनियों के लिए भी अहम भूमिका निभा सकते हैं, खासकर:

  • BFSI सेक्टर के लिए रेगुलेटरी AI
  • Edtech के लिए पर्सनलाइज्ड बॉट्स
  • HR और Productivity Tools में भरोसेमंद AI असिस्टेंट्स

📌 निष्कर्ष

Veris AI का $8.5 मिलियन फंडिंग राउंड यह संकेत देता है कि AI को सुरक्षित और असरदार ढंग से स्केल करने की ज़रूरत वैश्विक हो चुकी है। कंपनी के द्वारा उपलब्ध कराया गया सिमुलेटेड ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म एंटरप्राइज़ AI को एक नई दिशा दे रहा है।

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read more :Probo ने नीति प्रमुख के रूप में Shimal Kapoor की नियुक्ति की,

Probo ने नीति प्रमुख के रूप में Shimal Kapoor की नियुक्ति की,

Probo

भारत के तेजी से उभरते opinion trading प्लेटफॉर्म Probo ने नीति और विनियामक मामलों को मज़बूती देने के लिए Shimal Kapoor को अपना नया Head of Policy नियुक्त किया है। कंपनी का कहना है कि यह नियुक्ति भारत के स्किल-बेस्ड गेमिंग सेक्टर में नीतिगत संवाद को दिशा देने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।


🎯 नियामकों से संवाद में मिलेगी मज़बूती

Probo, जो वर्तमान में 3.4 करोड़ से अधिक यूज़र्स को सेवाएं दे रहा है, ने कहा कि यह रणनीतिक नियुक्ति कंपनी की उस योजना का हिस्सा है जिसके तहत वह देश में स्किल-बेस्ड गेमिंग के लिए मजबूत रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को सहयोग देना चाहता है।

🧩 Shimal Kapoor कौन हैं?

Shimal Kapoor कानून और पब्लिक पॉलिसी की दुनिया में एक अनुभवी चेहरा हैं। उन्होंने इससे पहले:

  • Meta (पूर्व में Facebook)
  • World Bank Group
  • और भारत की प्रमुख लॉ फर्म Shardul Amarchand Mangaldas & Co. में काम किया है।

अब वह Probo में नीति निर्माण, सरकारी निकायों से संवाद और रेगुलेटरी एडवोकेसी की जिम्मेदारी संभालेंगी।


📢 Shimal Kapoor का बयान

अपनी नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए Shimal ने कहा:

“भारत का स्किल-बेस्ड गेमिंग सेक्टर एक बड़े बदलाव के मोड़ पर है, जो डिजिटल इनोवेशन और आर्थिक प्रगति दोनों में योगदान दे रहा है। Probo ने बहुत कम समय में खुद को opinion trading में अग्रणी बना लिया है। मैं अपनी विशेषज्ञता से कंपनी को नीति-निर्माताओं और स्टेकहोल्डर्स से बेहतर जुड़ाव में सहयोग करने के लिए उत्साहित हूं।”


📱 क्या है Probo?

Probo एक opinion trading platform है, जहां यूज़र्स खेल, एंटरटेनमेंट और करंट अफेयर्स जैसे असली दुनिया के इवेंट्स पर अपनी राय देकर ट्रेडिंग कर सकते हैं।

इसके फीचर्स में शामिल हैं:

  • Yes/No type predictions
  • Real-time opinion market
  • Rewards based on market outcomes

Probo का दावा है कि वह भारत का सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय ओपिनियन ट्रेडिंग ऐप बन चुका है।


💹 जबरदस्त राजस्व वृद्धि

TheKredible के आंकड़ों के अनुसार, Probo ने वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) में ऑपरेशनल रेवेन्यू में जबरदस्त छलांग लगाई है:

वित्तीय वर्षऑपरेशनल रेवेन्यूनेट प्रॉफिट
FY23₹86 करोड़₹3.7 करोड़
FY24₹459 करोड़₹92 करोड़

यह कंपनी के स्केलेबिलिटी और प्रभावशाली ग्रोथ को दर्शाता है। बहुत कम भारतीय स्टार्टअप्स इतने कम समय में प्रॉफिटेबिलिटी हासिल कर पाते हैं।


💼 निवेशकों का भरोसा

Probo को देश-विदेश के प्रमुख वेंचर कैपिटल फर्म्स का समर्थन प्राप्त है, जिनमें शामिल हैं:

  • Peak XV Partners (पूर्व में Sequoia India)
  • Elevation Capital
  • Fundamentum Partnership

इन निवेशकों का उद्देश्य Probo को भारत में स्किल-बेस्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लीडर्स में लाना है।


🧠 क्यों ज़रूरी है नीति प्रमुख की नियुक्ति?

भारत में ऑनलाइन गेमिंग और स्किल-बेस्ड गेमिंग से जुड़े नियम अभी भी विकासशील अवस्था में हैं। केंद्र और राज्य सरकारें विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रही हैं, जैसे:

  • गेमिंग को लेकर टैक्सेशन नीति
  • कौन-से गेम skill-based हैं और कौन-से chance-based
  • यूज़र्स की सुरक्षा
  • विज्ञापन और प्रचार के नियम

ऐसे समय में किसी कंपनी का सरकार और नीति-निर्माताओं से संवाद में सक्रिय होना बहुत आवश्यक हो जाता है। Shimal Kapoor जैसे अनुभवी नीति विशेषज्ञ के जुड़ने से Probo को:

  • विनियामक परिवेश को समझने
  • सरकार के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने
  • और स्किल-बेस्ड गेमिंग को मान्यता दिलाने में सहायता मिलेगी।

📍 आगे का रास्ता

Probo की रणनीति स्पष्ट है — वह न केवल टेक्नोलॉजी और यूज़र एक्सपीरियंस में अग्रणी बनना चाहता है, बल्कि भारत में ओपिनियन ट्रेडिंग के लिए एक सशक्त और जिम्मेदार फ्रेमवर्क का हिस्सा भी बनना चाहता है।

Shimal Kapoor की नियुक्ति इसी दिशा में एक निर्णायक कदम है। आने वाले महीनों में हम देखेंगे कि Probo भारत के गेमिंग, टेक और नीति निर्माण के संगम पर कैसे अपनी पहचान और मजबूत करता है।


📢 निष्कर्ष

भारत में स्किल-बेस्ड गेमिंग इंडस्ट्री को एक स्पष्ट, पारदर्शी और यूज़र-फ्रेंडली रेगुलेटरी वातावरण की ज़रूरत है। Probo ने यह संकेत दिया है कि वह न सिर्फ इस सेक्टर को लीड करना चाहता है, बल्कि इसे नीति के स्तर पर भी सुरक्षित और स्थिर बनाना चाहता है।

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💰 Stable Money को मिला ₹173 करोड़ का निवेश,

Stable Money

बेंगलुरु स्थित वेल्थटेक प्लेटफॉर्म Stable Money ने अपने नवीनतम फंडिंग राउंड में ₹173 करोड़ (लगभग $20 मिलियन) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व Fundamentum Partnership ने किया है, जबकि मौजूदा निवेशक Z47, RTP Global, और Lightspeed ने भी भागीदारी की है। इसके अलावा Aditya Birla Ventures भी इस निवेश राउंड में शामिल हुआ है।


📊 निवेश विवरण

यह फंडिंग Stable Money के लिए अब तक का सबसे बड़ा राउंड है। Entrackr ने इस डील की जानकारी पिछले महीने एक्सक्लूसिव रूप से दी थी।

इससे पहले कंपनी ने Series A और Seed राउंड्स में भी ₹173 करोड़ ($20 मिलियन) जुटाए थे, जिनमें निवेशकों में Z47, Lightspeed, RTP Global और कई जाने-माने एंजेल इन्वेस्टर्स जैसे Sriharsha Majety (Swiggy), Kunal Bahl, और Rohit Bansal (Snapdeal) शामिल थे।


🚀 निवेश का उपयोग कहां होगा?

Stable Money इस ताज़ा निवेश का उपयोग निम्नलिखित लक्ष्यों के लिए करेगा:

  • 🔹 अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को और विस्तारित करना
  • 🔹 नए बैंकिंग और NBFC पार्टनर्स को ऑनबोर्ड करना
  • 🔹 अपने डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क को स्केल करना

कंपनी का लक्ष्य है कि 2025 में कम से कम 8 नए बैंक और एनबीएफसी अपने प्लेटफॉर्म से जोड़ें।


🏦 Stable Money क्या करता है?

Stable Money एक WealthTech प्लेटफॉर्म है जिसे 2022 में सौरभ जैन और हरीश रेड्डी ने शुरू किया था। इसका उद्देश्य यूज़र्स को स्थिर और सुनिश्चित रिटर्न देने वाले फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में निवेश की सुविधा देना है।

🔐 यह प्लेटफॉर्म निम्नलिखित प्रोडक्ट्स ऑफर करता है:

  • फिक्स्ड डिपॉजिट (FD)
  • रिकरिंग डिपॉजिट (RD)
  • सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड
  • बांड्स

यह प्लेटफॉर्म विशेष रूप से उन निवेशकों को टार्गेट करता है जो बिना जोखिम के रिटर्न चाहते हैं और पारंपरिक निवेश के भरोसेमंद विकल्प की तलाश में रहते हैं।


🤝 कौन-कौन से बैंक जुड़े हैं?

Stable Money इस समय 8 बैंकों और 2 NBFCs के साथ पार्टनरशिप में काम कर रहा है। प्रमुख बैंकिंग पार्टनर्स में शामिल हैं:

  • IndusInd Bank
  • South Indian Bank
  • Slice Small Finance Bank
  • Ujjivan Small Finance Bank
  • Unity SFB
  • Suryoday SFB

कंपनी आने वाले महीनों में कई और संस्थानों के साथ जुड़ने की योजना बना रही है।


📈 यूज़र बेस और AUM

कंपनी का दावा है कि उनके प्लेटफॉर्म पर इस समय 1.5 लाख से ज्यादा यूज़र्स रजिस्टर्ड हैं और उनका Assets Under Management (AUM) ₹3,000 करोड़ से भी ज्यादा है।

यह आंकड़ा कंपनी के मजबूत वितरण नेटवर्क और बढ़ती यूज़र विश्वास को दर्शाता है।


🧾 वित्तीय प्रदर्शन

Stable Money ने अब तक वित्त वर्ष 2025 (FY25) के लिए अपनी फाइनेंशियल रिपोर्ट दाखिल नहीं की है। लेकिन वित्त वर्ष 2024 (मार्च में समाप्त) की रिपोर्ट के अनुसार:

  • कंपनी की ऑपरेटिंग इनकम ₹35.3 लाख रही।
  • वहीं नेट लॉस ₹12.29 करोड़ का रहा।
  • यानी, कंपनी अभी भी प्रि-रेवेन्यू स्टेज में है और रेवेन्यू जनरेशन के शुरुआती चरणों में काम कर रही है।

इसका मतलब है कि कंपनी का फोकस अभी रेवेन्यू से ज़्यादा यूज़र ग्रोथ, नेटवर्क विस्तार और प्रोडक्ट डेवलपमेंट पर है।


🧠 निवेशकों की सोच

Fundamentum Partnership के पार्टनर Ashish Kumar ने कहा,

“Stable Money एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो भारत में सुरक्षित निवेश को डिजिटल रूप में पेश करने का काम कर रहा है। मौजूदा समय में जब ज्यादातर निवेश हाई रिस्क की ओर झुके हुए हैं, Stable Money एक बैलेंस्ड और भरोसेमंद विकल्प देता है।”

Lightspeed और RTP Global जैसे मौजूदा निवेशकों की लगातार भागीदारी यह दिखाती है कि उन्हें कंपनी के बिज़नेस मॉडल और टीम पर पूरा विश्वास है।


📌 निष्कर्ष

Stable Money का फोकस है भारत के मिडल-क्लास और यंग इनवेस्टर्स को ऐसी सेवाएं देना जो पारंपरिक बैंकों से आगे बढ़कर टेक्नोलॉजी की मदद से आसान और तेज़ हो। निवेशकों का बढ़ता भरोसा, और यूज़र बेस में बढ़ोतरी, इसे भारत के टॉप वेल्थटेक स्टार्टअप्स की लिस्ट में ले जा रही है।

आने वाले महीनों में कंपनी क्या नई प्रोडक्ट्स और पार्टनरशिप्स लेकर आती है, उस पर सभी की नजरें रहेंगी।


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Plush को मिला ₹30.56 करोड़ का नया फंडिंग राउंड

Plush

चेन्नई आधारित फेमिनिन केयर ब्रांड Plush ने अपने सीरीज़ B फंडिंग राउंड में ₹30.56 करोड़ (लगभग $3.6 मिलियन) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व एंजेल इन्वेस्टर अजय कुमार अग्रवाल ने किया, जिसमें Careernet Technologies, OTP Ventures, Blume Ventures और 11 अन्य निवेशकों ने भी भाग लिया।

📌 फंडिंग डिटेल्स
Plush के बोर्ड ने हाल ही में एक स्पेशल रिजोल्यूशन पास किया है जिसके तहत कंपनी ने 4,099 सीरीज़ B प्रेफरेंस शेयर्स ₹7,457 प्रति शेयर की दर से जारी करने की मंजूरी दी है। यह जानकारी कंपनी की ROC (रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़) में दर्ज फाइलिंग के जरिए सामने आई है।

इस फंडिंग में प्रमुख निवेशक Ajay Kumar Aggarwal ने ₹6 करोड़ का योगदान दिया है। वहीं मौजूदा निवेशकों में Careernet Technologies ने ₹5 करोड़, OTP Ventures ने ₹3 करोड़ और Blume Ventures ने ₹4 करोड़ का निवेश किया है। शेष राशि Rahul Garg, Sumit Jalan, Blue Ashva Varenya Fund, Rahul Kayan और सात अन्य एंजेल इन्वेस्टर्स ने मिलकर लगाई है।


📈 वैल्यूएशन में 3 गुना उछाल

Entrackr की रिपोर्ट के अनुसार, इस फंडिंग के बाद Plush की वैल्यूएशन लगभग ₹281 करोड़ (करीब $33 मिलियन) तक पहुंचने की संभावना है। यह कंपनी की पिछले प्री-सीरीज़ B राउंड की तुलना में लगभग तीन गुना बढ़ोतरी दर्शाता है।

फंडिंग के बाद शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर में बदलाव हुआ है:

  • Ajay Kumar Aggarwal की हिस्सेदारी 19.64% हो गई है।
  • Careernet Technologies के पास 16.37% हिस्सेदारी है।
  • Blume Ventures की हिस्सेदारी 13.08% तक पहुंच गई है।

👉 विस्तृत शेयरहोल्डिंग पैटर्न देखने के लिए TheKredible वेबसाइट पर विजिट करें।


🧼 Plush क्या करता है?

2019 में Sahiba Taneja द्वारा शुरू किया गया Plush महिलाओं की हाइजीन और वेलनेस की जरूरतों को पूरा करने वाला एक D2C (डायरेक्ट-टू-कंज़्यूमर) ब्रांड है। कंपनी मुख्य रूप से पीरियड केयर, हेयर रिमूवल, इंटिमेट वेलनेस और स्किनकेयर प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराती है।

Plush अपने प्रोडक्ट्स को अपनी वेबसाइट, ई-कॉमर्स चैनलों और ऑफलाइन रिटेल स्टोर्स के ज़रिए बेचता है। कंपनी का दावा है कि इसके प्रोडक्ट्स फिलहाल बेंगलुरु, चेन्नई, मुंबई, दिल्ली और हैदराबाद के 500 से ज्यादा स्टोर्स में उपलब्ध हैं।

🚀 कंपनी का लक्ष्य अगले 6 महीनों में 2,000 स्टोर्स तक अपनी ऑफलाइन मौजूदगी को विस्तार देना है।


📊 फाइनेंशियल परफॉर्मेंस

पिछले वित्त वर्ष (मार्च 2024 में समाप्त) में Plush ने ₹28.87 करोड़ का राजस्व अर्जित किया, जो साल-दर-साल आधार पर 84% की ग्रोथ है। हालांकि, इस दौरान कंपनी को ₹4.4 करोड़ का घाटा हुआ।

Plush का लक्ष्य है कि वह वित्त वर्ष 2025 (FY25) को ₹60 करोड़ के राजस्व के साथ बंद करे। इसका मतलब है कि कंपनी आने वाले महीनों में तेज़ी से अपने बिक्री चैनलों, कस्टमर बेस और प्रोडक्ट कैटेगरीज़ का विस्तार करेगी।


📦 क्या है कंपनी की अगली रणनीति?

Plush इस फंडिंग का इस्तेमाल निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए करने जा रही है:

  • 🔹 रिटेल विस्तार – अधिक शहरों और स्टोर्स तक पहुंच बढ़ाना
  • 🔹 नए प्रोडक्ट लॉन्च – स्किनकेयर, इंटिमेट वेलनेस आदि कैटेगरी में विस्तार
  • 🔹 ब्रांड मार्केटिंग – ज़्यादा कस्टमर्स तक पहुंचने के लिए डिजिटल और ऑफलाइन कैंपेन
  • 🔹 टीम ग्रोथ – इनोवेशन और सप्लाई चेन को बेहतर बनाने के लिए टीम विस्तार

🌸 फेमिनिन केयर मार्केट में मुकाबला

Plush का मुकाबला इस समय Nykaa, Sirona, Azah, और Carmesi जैसे अन्य फेमिनिन हाइजीन ब्रांड्स से है। हालांकि, Plush ने अपने ट्रेंडी और प्रीमियम प्रोडक्ट्स, किफायती कीमतों और मजबूत D2C स्ट्रेटेजी के चलते एक खास जगह बनाई है।


✨ निष्कर्ष

Plush की ये नई फंडिंग न केवल इसके फ्यूचर ग्रोथ के लिए अहम है बल्कि यह भी दिखाती है कि भारत में फेमिनिन केयर सेगमेंट में निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। कंपनी की आक्रामक रणनीति और ग्राहकों के प्रति समर्पण इसे भारत के टॉप ब्रांड्स में शामिल कर सकता है।

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🧼 Snabbit को मिला ₹162 करोड़ का Series B फंडिंग,

Snabbit

घरों के लिए ऑन-डिमांड प्रोफेशनल सेवाएं उपलब्ध कराने वाला प्लेटफॉर्म Snabbit ने हाल ही में ₹162.35 करोड़ (लगभग $19 मिलियन) की Series B फंडिंग जुटाई है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व किया है Lightspeed Venture Partners ने, जबकि Nexus Venture Partners और Elevation Capital ने भी दोबारा निवेश किया है।

यह ताज़ा निवेश ऐसे समय में आया है जब भारत में घरेलू सेवाओं की मांग तेज़ी से बढ़ रही है, और Snabbit इस सेगमेंट में टेक्नोलॉजी और क्विक डिलीवरी के दम पर नया मुकाम हासिल कर रहा है।


💰 कौन-कितना निवेश कर रहा है?

Registrar of Companies (RoC) में दाखिल रेगुलेटरी फाइलिंग के अनुसार, Snabbit की बोर्ड मीटिंग में 65,165 Series B अनिवार्य रूप से कन्वर्ट होने वाले प्रेफरेंस शेयर्स (CCPS) को ₹24,914.93 प्रति शेयर की कीमत पर जारी करने की मंजूरी दी गई है। इससे कुल ₹162.35 करोड़ जुटाए जाएंगे।

इसमें:

  • Lightspeed: ₹94 करोड़ (लगभग $11 मिलियन)
  • Nexus Venture Partners: ₹34.18 करोड़ (लगभग $4 मिलियन)
  • Elevation Capital: ₹34.18 करोड़ (लगभग $4 मिलियन)

📊 वैल्यूएशन में 3.5 गुना उछाल

Entrackr की रिपोर्ट के मुताबिक, इस नए राउंड के बाद Snabbit की वैल्यूएशन ₹684 करोड़ (लगभग $80 मिलियन) हो जाएगी। यह पिछली Series A फंडिंग के मुकाबले 3.5 गुना ज्यादा है, जब कंपनी की वैल्यूएशन लगभग $23 मिलियन थी।

इससे साफ होता है कि निवेशक Snabbit की ग्रोथ, बिज़नेस मॉडल और संभावनाओं पर गहरा भरोसा जता रहे हैं।


🛠️ Snabbit क्या करता है?

2024 में Aayush Agarwal द्वारा स्थापित Snabbit, एक क्विक सर्विस प्लेटफॉर्म है जो भारत के शहरी इलाकों में रहने वाले घरों को साफ-सफाई, बर्तन धोने, कपड़े धोने जैसी घरेलू सेवाएं प्रोफेशनल्स के ज़रिए तुरंत उपलब्ध कराता है।

  • 🧽 सेवाएं: क्लीनिंग, डिशवॉशिंग, लॉन्ड्री आदि
  • ⏱️ बुकिंग: घंटे के हिसाब से एक्सपर्ट्स को बुक किया जा सकता है
  • 🚪 डिलीवरी टाइम: बुकिंग के 10 मिनट के अंदर प्रोफेशनल घर पहुँच जाते हैं
  • 👷 वर्कफोर्स: वर्तमान में 600+ प्रोफेशनल्स हैं, जो हर महीने दोगुने हो रहे हैं

📈 क्यों है Snabbit की मांग में उछाल?

Snabbit का यूएसपी है — “सिर्फ 10 मिनट में एक्सपर्ट घर पर”। यह आज की भाग-दौड़ भरी ज़िंदगी में उन उपभोक्ताओं के लिए बेहद उपयोगी है जिन्हें समय की कमी है, लेकिन भरोसेमंद और प्रशिक्षित घरेलू सहायकों की आवश्यकता है।

भारत में:

  • 👩‍👩‍👧‍👦 न्यूक्लियर फैमिली कल्चर बढ़ा है
  • 🏙️ शहरीकरण तेजी से हो रहा है
  • 📱 ऑनलाइन सेवाओं को लेकर विश्वास बढ़ा है
  • 💼 वर्किंग कपल्स की संख्या बढ़ी है

इन सभी कारणों से Snabbit जैसे मॉडल का स्केलेबिलिटी और डिमांड बहुत तेज़ है।


🧑‍💼 Aayush Agarwal का विज़न

Snabbit के फाउंडर और सीईओ आयुष अग्रवाल ने कहा:

“हम Snabbit को भारत का सबसे तेज़ और भरोसेमंद घरेलू सेवा प्लेटफॉर्म बनाना चाहते हैं। हर परिवार को हाई-क्वालिटी सर्विसेज केवल कुछ मिनटों में उपलब्ध हो — यही हमारा लक्ष्य है।”

उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी हर महीने नए शहरों में एंट्री कर रही है और उनकी टीम 600 से अधिक प्रोफेशनल्स को ऑनबोर्ड कर चुकी है। यह संख्या हर महीने दोगुनी हो रही है।


🏗️ आगे की योजना: विस्तार और तकनीकी मजबूती

फंडिंग से मिले पैसे का इस्तेमाल कंपनी निम्नलिखित कार्यों के लिए करेगी:

  1. 🌆 नई सिटी में विस्तार
  2. 📲 मोबाइल ऐप और बुकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना
  3. 👷‍♂️ वर्कफोर्स ट्रेनिंग और ऑनबोर्डिंग स्केल करना
  4. 🧠 AI और डेटा एनालिटिक्स के ज़रिए सर्विस ऑप्टिमाइजेशन
  5. 📣 मार्केटिंग और ब्रांड बिल्डिंग पर ध्यान देना

🛍️ प्रतियोगिता और बाजार में स्थिति

Snabbit की टक्कर भारत के अन्य ऑन-डिमांड घरेलू सेवा प्लेटफॉर्म्स से है जैसे:

  • Urban Company
  • Broomees
  • Helper4U

लेकिन Snabbit की “10 मिनट डिलीवरी” और “घंटे के हिसाब से बुकिंग” जैसी सुविधाएं इसे अलग बनाती हैं।


📌 निष्कर्ष: तेजी से बढ़ते घरेलू सेवा सेक्टर में एक मजबूत खिलाड़ी

Snabbit का बिज़नेस मॉडल उस वक्त सामने आया है जब “क्विक कॉमर्स” और “क्विक सर्विस” जैसे कॉन्सेप्ट भारत में ज़ोर पकड़ रहे हैं। ऐसे में एक ऐसा प्लेटफॉर्म जो समय की बचत, भरोसेमंद प्रोफेशनल्स और टेक्नोलॉजी से युक्त हो — वह मार्केट में लंबी पारी खेल सकता है।

₹162 करोड़ की फंडिंग से Snabbit को निश्चित रूप से अपने मिशन को और तेज़ी से आगे बढ़ाने का मौका मिलेगा, और यह भारत में घरेलू सेवाओं की परिभाषा बदल सकता है।


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