Payments Council of India (PCI), जो भारत में डिजिटल पेमेंट्स इंडस्ट्री की प्रमुख प्रतिनिधि संस्था है, ने 2025–27 कार्यकाल के लिए Vishwas Patel, Joint Managing Director, Infibeam Avenues Limited (CCAvenue) को सर्वसम्मति से दोबारा चेयरपर्सन चुना है।
इसके साथ ही PCI की Executive Council ने M. N. Srinivasu, Co-founder & Director, BillDesk, और Nalin Bansal, Chief of Corporate Fintech Relationships & Key Initiatives, NPCI को Co-Chairpersons नियुक्त किया है।
🙌 PCI की घोषणा और नेतृत्व का महत्व
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत की डिजिटल पेमेंट्स इंडस्ट्री लगातार तेज़ी से बढ़ रही है। UPI (Unified Payments Interface), Wallets, Cards, और Payment Gateways जैसे विकल्पों की वजह से देशभर में डिजिटल ट्रांज़ैक्शन का ग्राफ ऊपर जा रहा है।
Vishwas Patel के नेतृत्व में PCI को उम्मीद है कि आने वाले दो वर्षों में डिजिटल पेमेंट्स इंडस्ट्री को और मज़बूती मिलेगी।
🗣️ Vishwas Patel का बयान
अपने पुनर्निर्वाचन पर Vishwas Patel ने कहा:
“भारत की डिजिटल पेमेंट्स इंडस्ट्री एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है, जहाँ तेज़ी से अपनाने, बदलते रेगुलेशंस और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में प्रयास जारी हैं। PCI का मकसद है – इनोवेशन को बढ़ावा देना, कंज्यूमर ट्रस्ट बनाए रखना और रेगुलेटर्स के साथ मिलकर एक सस्टेनेबल पेमेंट्स इकोसिस्टम तैयार करना।”
🏦 Payments Council of India की भूमिका
PCI की स्थापना इस उद्देश्य से हुई थी कि भारत की डिजिटल पेमेंट्स इंडस्ट्री को एक यूनिफाइड प्लेटफॉर्म मिले और कंपनियाँ अपनी चुनौतियाँ और सुझाव सरकार व रेगुलेटर्स तक पहुँचा सकें।
PCI किन-किन को रिप्रेज़ेंट करता है?
- Banks और Card Networks
- UPI और Wallet Companies
- Payment Gateways
- Fintech Startups
PCI ने पिछले कुछ वर्षों में:
- पॉलिसी डायलॉग को आगे बढ़ाया
- इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स तय किए
- सिक्योरिटी और कंज्यूमर ट्रस्ट पर ज़ोर दिया
- भारत की Digital-First Economy की दिशा में योगदान किया
🌐 भारत की डिजिटल पेमेंट्स इंडस्ट्री की स्थिति
भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट्स मार्केट बन चुका है।
- UPI ट्रांज़ैक्शन हर महीने बिलियन्स में हो रहे हैं।
- छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े मॉल तक, हर जगह QR Code Payment आम हो चुका है।
- 2024 में ही डिजिटल ट्रांज़ैक्शंस का वॉल्यूम कई पारंपरिक बैंकिंग ट्रांज़ैक्शंस से अधिक हो गया।
इसीलिए PCI की भूमिका और भी अहम हो जाती है, ताकि यह इंडस्ट्री सही दिशा में बढ़े और सभी स्टेकहोल्डर्स (बैंक्स, स्टार्टअप्स, कंज्यूमर्स और सरकार) के बीच तालमेल बना रहे।
👥 नए नेतृत्व से क्या उम्मीदें?
Vishwas Patel (Infibeam Avenues – CCAvenue)
- पेमेंट गेटवे इंडस्ट्री में लंबे अनुभव के चलते वे नवाचार और रेगुलेशन बैलेंस बनाने पर ध्यान देंगे।
M. N. Srinivasu (BillDesk)
- BillDesk भारत के सबसे पुराने और भरोसेमंद पेमेंट प्लेटफॉर्म्स में से एक है। Srinivasu का अनुभव PCI को स्थायित्व और स्केलेबिलिटी में मदद करेगा।
Nalin Bansal (NPCI)
- NPCI, UPI और Rupay जैसे बड़े प्रोडक्ट्स का निर्माता है। उनके अनुभव से PCI को टेक्नोलॉजी-ड्रिवन इनोवेशन और ग्लोबल स्केलिंग में मदद मिलेगी।
🔑 आने वाले दो वर्षों के लिए प्रमुख फोकस एरिया
- Consumer Trust & Security – फ्रॉड रोकने और साइबर सिक्योरिटी पर ज़ोर
- Global Expansion – UPI जैसे मॉडल को दूसरे देशों में ले जाना
- Financial Inclusion – ग्रामीण और सेमी-Urban क्षेत्रों में डिजिटल पेमेंट्स को और आसान बनाना
- Policy Alignment – RBI और सरकार के साथ मिलकर नई गाइडलाइंस तैयार करना
- Technology Upgradation – AI, Blockchain और अन्य नई तकनीकों को पेमेंट्स सेक्टर में लागू करना
📌 निष्कर्ष
Payments Council of India में Vishwas Patel का पुनर्नियुक्त होना और BillDesk व NPCI जैसे बड़े नामों का शामिल होना इस बात का संकेत है कि आने वाले दो सालों में भारत की डिजिटल पेमेंट्स इंडस्ट्री नए मुकाम पर पहुँचने वाली है।
भारत का लक्ष्य है कि वह सिर्फ कैशलेस इकॉनमी न बने, बल्कि ग्लोबल डिजिटल पेमेंट्स लीडर भी बने। PCI का नया नेतृत्व इस दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।
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