💳 Payments Council of India ने किया Vishwas Patel को दोबारा चेयरपर्सन नियुक्त

Payments Council of India

Payments Council of India (PCI), जो भारत में डिजिटल पेमेंट्स इंडस्ट्री की प्रमुख प्रतिनिधि संस्था है, ने 2025–27 कार्यकाल के लिए Vishwas Patel, Joint Managing Director, Infibeam Avenues Limited (CCAvenue) को सर्वसम्मति से दोबारा चेयरपर्सन चुना है।

इसके साथ ही PCI की Executive Council ने M. N. Srinivasu, Co-founder & Director, BillDesk, और Nalin Bansal, Chief of Corporate Fintech Relationships & Key Initiatives, NPCI को Co-Chairpersons नियुक्त किया है।


🙌 PCI की घोषणा और नेतृत्व का महत्व

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत की डिजिटल पेमेंट्स इंडस्ट्री लगातार तेज़ी से बढ़ रही है। UPI (Unified Payments Interface), Wallets, Cards, और Payment Gateways जैसे विकल्पों की वजह से देशभर में डिजिटल ट्रांज़ैक्शन का ग्राफ ऊपर जा रहा है।

Vishwas Patel के नेतृत्व में PCI को उम्मीद है कि आने वाले दो वर्षों में डिजिटल पेमेंट्स इंडस्ट्री को और मज़बूती मिलेगी।


🗣️ Vishwas Patel का बयान

अपने पुनर्निर्वाचन पर Vishwas Patel ने कहा:

“भारत की डिजिटल पेमेंट्स इंडस्ट्री एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है, जहाँ तेज़ी से अपनाने, बदलते रेगुलेशंस और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में प्रयास जारी हैं। PCI का मकसद है – इनोवेशन को बढ़ावा देना, कंज्यूमर ट्रस्ट बनाए रखना और रेगुलेटर्स के साथ मिलकर एक सस्टेनेबल पेमेंट्स इकोसिस्टम तैयार करना।”


🏦 Payments Council of India की भूमिका

PCI की स्थापना इस उद्देश्य से हुई थी कि भारत की डिजिटल पेमेंट्स इंडस्ट्री को एक यूनिफाइड प्लेटफॉर्म मिले और कंपनियाँ अपनी चुनौतियाँ और सुझाव सरकार व रेगुलेटर्स तक पहुँचा सकें।

PCI किन-किन को रिप्रेज़ेंट करता है?

  • Banks और Card Networks
  • UPI और Wallet Companies
  • Payment Gateways
  • Fintech Startups

PCI ने पिछले कुछ वर्षों में:

  • पॉलिसी डायलॉग को आगे बढ़ाया
  • इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स तय किए
  • सिक्योरिटी और कंज्यूमर ट्रस्ट पर ज़ोर दिया
  • भारत की Digital-First Economy की दिशा में योगदान किया

🌐 भारत की डिजिटल पेमेंट्स इंडस्ट्री की स्थिति

भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट्स मार्केट बन चुका है।

  • UPI ट्रांज़ैक्शन हर महीने बिलियन्स में हो रहे हैं।
  • छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े मॉल तक, हर जगह QR Code Payment आम हो चुका है।
  • 2024 में ही डिजिटल ट्रांज़ैक्शंस का वॉल्यूम कई पारंपरिक बैंकिंग ट्रांज़ैक्शंस से अधिक हो गया।

इसीलिए PCI की भूमिका और भी अहम हो जाती है, ताकि यह इंडस्ट्री सही दिशा में बढ़े और सभी स्टेकहोल्डर्स (बैंक्स, स्टार्टअप्स, कंज्यूमर्स और सरकार) के बीच तालमेल बना रहे।


👥 नए नेतृत्व से क्या उम्मीदें?

Vishwas Patel (Infibeam Avenues – CCAvenue)

  • पेमेंट गेटवे इंडस्ट्री में लंबे अनुभव के चलते वे नवाचार और रेगुलेशन बैलेंस बनाने पर ध्यान देंगे।

M. N. Srinivasu (BillDesk)

  • BillDesk भारत के सबसे पुराने और भरोसेमंद पेमेंट प्लेटफॉर्म्स में से एक है। Srinivasu का अनुभव PCI को स्थायित्व और स्केलेबिलिटी में मदद करेगा।

Nalin Bansal (NPCI)

  • NPCI, UPI और Rupay जैसे बड़े प्रोडक्ट्स का निर्माता है। उनके अनुभव से PCI को टेक्नोलॉजी-ड्रिवन इनोवेशन और ग्लोबल स्केलिंग में मदद मिलेगी।

🔑 आने वाले दो वर्षों के लिए प्रमुख फोकस एरिया

  1. Consumer Trust & Security – फ्रॉड रोकने और साइबर सिक्योरिटी पर ज़ोर
  2. Global Expansion – UPI जैसे मॉडल को दूसरे देशों में ले जाना
  3. Financial Inclusion – ग्रामीण और सेमी-Urban क्षेत्रों में डिजिटल पेमेंट्स को और आसान बनाना
  4. Policy Alignment – RBI और सरकार के साथ मिलकर नई गाइडलाइंस तैयार करना
  5. Technology Upgradation – AI, Blockchain और अन्य नई तकनीकों को पेमेंट्स सेक्टर में लागू करना

📌 निष्कर्ष

Payments Council of India में Vishwas Patel का पुनर्नियुक्त होना और BillDesk व NPCI जैसे बड़े नामों का शामिल होना इस बात का संकेत है कि आने वाले दो सालों में भारत की डिजिटल पेमेंट्स इंडस्ट्री नए मुकाम पर पहुँचने वाली है।

भारत का लक्ष्य है कि वह सिर्फ कैशलेस इकॉनमी न बने, बल्कि ग्लोबल डिजिटल पेमेंट्स लीडर भी बने। PCI का नया नेतृत्व इस दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।

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💰 Neo ने जुटाए ₹162 करोड़, वैल्यूएशन 2.7X बढ़कर पहुँचा $686 मिलियन

Neo

मुंबई आधारित Wealth & Asset Management फर्म Neo जल्द ही ₹162 करोड़ (लगभग $19 मिलियन) जुटाने जा रही है। यह फंडिंग राउंड VT Capital की अगुवाई में हो रहा है जिसमें कुल 18 निवेशक हिस्सा ले रहे हैं। कंपनी ने इसके लिए विशेष प्रस्ताव पास किया है और 1,887 इक्विटी शेयर ₹8,60,410 प्रति शेयर की दर से जारी किए जाएंगे।

🏦 कौन कर रहे हैं निवेश?

  • VT Capital → ₹50 करोड़
  • Ramesh Kunhikannan → ₹20 करोड़
  • Sattva Family Office, Biological E Ltd, Usha Reddy Chigarapalli और Akshat Greentech Pvt Ltd → ₹10-10 करोड़
  • बाकी निवेशक भी छोटे हिस्सों में योगदान करेंगे।

VT Capital, जो मुंबई स्थित एक proprietary trading platform है, पहले भी Purplle, Noble और Fractal Analytics जैसी कंपनियों में निवेश कर चुकी है।

📈 Neo की बढ़ती वैल्यूएशन

Entrackr की रिपोर्ट के अनुसार, इस फंडिंग के बाद Neo की वैल्यूएशन लगभग $686 मिलियन तक पहुँच जाएगी। यह पिछले राउंड की तुलना में 2.7X जंप है।

  • पिछली बार वैल्यूएशन → $250 मिलियन
  • अब अनुमानित वैल्यूएशन → $686 मिलियन

⏪ पिछली फंडिंग हिस्ट्री

Neo ने इससे पहले भी कई बड़े राउंड्स में पूंजी जुटाई थी:

  • अगस्त 2024 → $48 मिलियन
  • अक्टूबर 2023 (Series B) → $35 मिलियन
  • अब तक कुल फंडिंग → $120 मिलियन+

💼 Neo का बिज़नेस मॉडल

Neo मुख्य रूप से Wealthy Individuals और Family Offices को निवेश की सुविधा देता है। इसके दो बड़े फोकस एरिया हैं:

  1. Credit & Real Estate Investments
  2. Alternative Asset Management Funds

कंपनी का दावा है कि वह:

  • लगभग ₹35,000 करोड़ Wealth Management Assets मैनेज कर रही है।
  • और ₹6,000 करोड़ से अधिक Alternative Assets को भी संभाल रही है।

Neo न सिर्फ निवेशकों को stable returns देता है, बल्कि कंपनियों को growth capital भी मुहैया कराता है।

📊 ओनरशिप स्ट्रक्चर

फंडिंग से पहले Neo की शेयरहोल्डिंग इस तरह थी:

  • Peak XV Partners → 19.29% (सबसे बड़ा external stakeholder)
  • Crystal Investment Advisors LLP (Artha Group) → 6.74%
  • Co-founders:
    • Nitin Jain → 30.09%
    • Varun Bajpai → 15.04%
    • Hemant Daga → 4.51%

📌 नए फंड्स और SEBI रजिस्ट्रेशन

Neo Assets ने इस साल अपना दूसरा प्राइवेट क्रेडिट फंड लॉन्च किया था, जिसका पहला क्लोज ₹2,000 करोड़ पर हुआ। यह फंड SEBI-registered है और unlisted कंपनियों को credit solutions और secondary stake acquisitions की सुविधा देता है।

📊 वित्तीय प्रदर्शन (FY24)

  • Neo की Revenue → ₹149 करोड़ (YoY 2.4X ग्रोथ)
  • Losses → ₹13.7 करोड़ (पिछले साल से ज़्यादा)
    FY25 का रिजल्ट अभी फाइल नहीं हुआ है।

🚀 क्यों है यह फंडिंग अहम?

  • Neo की वैल्यूएशन ग्रोथ WealthTech सेक्टर में एक बड़ा संकेत है कि High Networth Individuals और Family Offices में investment demand लगातार बढ़ रही है।
  • यह फंडिंग Neo को product expansion, AUM (assets under management) growth और investor base बढ़ाने में मदद करेगी।
  • आने वाले समय में Neo का फोकस private credit और real estate-backed investments को और मज़बूत करना होगा।

👉 निष्कर्ष:
Neo का ₹162 करोड़ का नया फंडिंग राउंड WealthTech इंडस्ट्री में एक बड़ा मूव है। VT Capital और अन्य निवेशकों का विश्वास यह दर्शाता है कि भारत में alternative investments और family wealth management का बाजार तेज़ी से बढ़ रहा है।

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📢 BharatPe ने लीडरशिप टीम को किया मजबूत

BharatPe

भारत की प्रमुख फिनटेक कंपनी BharatPe ने अपने लीडरशिप स्ट्रक्चर को और मज़बूत करने के लिए दो बड़े रणनीतिक नियुक्तियों की घोषणा की है। कंपनी ने राजेश सी को हेड ऑफ फाइनेंस और हिमांशु नज़कानी को हेड ऑफ इन्वेस्टमेंट्स के पद पर नियुक्त किया है। ये दोनों नियुक्तियाँ ऐसे समय पर हुई हैं जब BharatPe अपने अगले विकास चरण और संभावित pre-IPO फंडिंग राउंड की तैयारी कर रही है।


👨‍💼 राजेश सी बने BharatPe के हेड ऑफ फाइनेंस

राजेश सी को फाइनेंस डिवीजन की कमान सौंपी गई है। वह कंपनी के फाइनेंस, ट्रेज़री और टैक्सेशन ऑपरेशंस को लीड करेंगे।

  • राजेश के पास 20 साल से अधिक का अनुभव है जिसमें फाइनेंशियल प्लानिंग, अकाउंटिंग और रेगुलेटरी रिपोर्टिंग शामिल है।
  • उन्होंने SBI Card, ABN Amro-RBS और GE Capital जैसी कंपनियों में नेतृत्वकारी भूमिकाएँ निभाई हैं।
  • वे SBI Card के IPO मैनेजमेंट टीम का हिस्सा भी रह चुके हैं।

उनकी नियुक्ति से कंपनी को वित्तीय अनुशासन और IPO की तैयारी में मजबूती मिलेगी।


📊 हिमांशु नज़कानी को मिला इन्वेस्टमेंट्स का जिम्मा

BharatPe ने हिमांशु नज़कानी को हेड ऑफ इन्वेस्टमेंट्स नियुक्त किया है। उनकी मुख्य जिम्मेदारी कंपनी के इन्वेस्टमेंट और इंश्योरेंस स्ट्रेटेजी को आगे बढ़ाना होगा।

  • वह म्यूचुअल फंड्स, डिजिटल गोल्ड, फिक्स्ड डिपॉज़िट्स और इंश्योरेंस जैसे प्रोडक्ट्स के लिए पार्टनरशिप्स विकसित करेंगे।
  • हिमांशु का करियर फिनटेक, वेल्थटेक और वेंचर कैपिटल सेक्टर में रहा है।
  • उन्होंने CarDekho Group, NYE Money, Kristal.ai, Elevar Equity और Religare Global Asset Management जैसी कंपनियों में काम किया है।

इस नियुक्ति के साथ BharatPe अपने यूज़र्स को वेल्थ मैनेजमेंट और इंश्योरेंस सॉल्यूशंस ऑफर करने की दिशा में और मजबूती से कदम बढ़ाएगा।


💹 BharatPe का मुनाफे की ओर कदम

इन नियुक्तियों का ऐलान ऐसे समय हुआ है जब BharatPe ने दावा किया है कि कंपनी ने FY25 में प्रॉफिटेबिलिटी हासिल की है।

  • कंपनी ने बताया कि उसने कर-पूर्व मुनाफा (PBT) ₹6 करोड़ का दर्ज किया है (ESOP कॉस्ट्स को छोड़कर)।
  • इस दौरान कंपनी का राजस्व ₹1,800 करोड़ रहा।
  • यह कंपनी के लिए एक बड़ा टर्नअराउंड है क्योंकि पिछले कई सालों से BharatPe घाटे में चल रही थी।

🏦 BharatPe की फंडिंग यात्रा

BharatPe की गिनती भारत के यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स में होती है।

  • कंपनी ने आखिरी बार अगस्त 2021 में इक्विटी राउंड उठाया था और इसी दौरान यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हुई थी।
  • अब तक BharatPe ने $650 मिलियन से अधिक इक्विटी और डेब्ट जुटाया है।
  • इसके निवेशकों में Tiger Global, Dragoneer Investment Group, Steadfast Capital, Coatue Management और Ribbit Capital जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

कंपनी अब pre-IPO फंडिंग राउंड की तैयारी कर रही है, जिससे उसकी वैल्यूएशन और मजबूत हो सकती है।


👥 हाल ही की अन्य नियुक्तियाँ

BharatPe ने पिछले कुछ महीनों में कई बड़े नेतृत्व परिवर्तन किए हैं।

  • जून 2025 में कंपनी ने सिद्धार्थ जैन को चीफ नेटवर्क ऑफिसर (CNO) नियुक्त किया।
  • अप्रैल 2025 में, BharatPe की NBFC यूनिट Trillionloans Fintech Private Limited (TFPL) ने संदीप सिंह को नया CEO बनाया।

ये बदलाव कंपनी की संगठनात्मक मजबूती और स्केलेबिलिटी को दर्शाते हैं।


🚀 BharatPe की भविष्य रणनीति

BharatPe का लक्ष्य सिर्फ पेमेंट्स बिज़नेस तक सीमित नहीं है। कंपनी अब तेजी से डिजिटल लेंडिंग, वेल्थ मैनेजमेंट और इंश्योरेंस जैसी सेवाओं की ओर बढ़ रही है।

  • नए नियुक्त नेताओं का अनुभव कंपनी की इन महत्वाकांक्षी योजनाओं को मजबूत दिशा देगा।
  • IPO से पहले BharatPe खुद को वित्तीय रूप से मज़बूत और ऑपरेशनल रूप से दक्ष साबित करना चाहती है।

📌 निष्कर्ष

BharatPe की दो नई नियुक्तियाँ उसके दीर्घकालिक विकास और IPO की तैयारी के लिहाज़ से बेहद अहम मानी जा रही हैं।

  • राजेश सी का अनुभव कंपनी की वित्तीय स्थिरता और निवेशकों के भरोसे को मजबूत करेगा।
  • वहीं, हिमांशु नज़कानी BharatPe को एक समग्र फिनटेक प्लेटफॉर्म बनाने में अहम योगदान देंगे।

इससे साफ है कि BharatPe अब केवल एक पेमेंट्स कंपनी नहीं रहना चाहती, बल्कि आने वाले समय में यह भारत की अग्रणी फिनटेक और वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी बनने की ओर बढ़ रही है।

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🚀 Boundless Ventures, 200 करोड़ रुपये का नया AI फंड

Boundless Ventures

भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई गति देने के लिए पूर्व Kae Capital पार्टनर नताशा मालपानी ने अपना नया वेंचर कैपिटल फंड Boundless Ventures लॉन्च किया है। यह शुरुआती चरण (early-stage) पर केंद्रित 200 करोड़ रुपये का फंड है, जिसका मुख्य फोकस AI-native स्टार्टअप्स को सपोर्ट करना होगा।


💡 Boundless Ventures का फोकस

Boundless Ventures मुख्य रूप से pre-seed और seed stage के स्टार्टअप्स में निवेश करेगा। इसका लक्ष्य उन कंपनियों को फंडिंग देना है जो—

  • Consumer AI applications बना रही हैं
  • AI infrastructure और agent tooling पर काम कर रही हैं
  • Vertical use cases जैसे हेल्थकेयर, लॉजिस्टिक्स आदि में AI लागू कर रही हैं
  • Make-in-India AI hardware विकसित कर रही हैं

💰 पहले से हो चुके 6 निवेश

Boundless Ventures ने अभी तक 6 स्टार्टअप्स में निवेश किया है। इनमें शामिल हैं:

  • SuperHealth (हेल्थकेयर स्टार्टअप)
  • Armatrix (रोबोटिक्स)
  • Piersight (स्पेसटेक वेंचर)
  • Knot (क्विक फैशन डिलीवरी)
  • दो स्टेल्थ मोड कंपनियां, जो AI इंफ्रास्ट्रक्चर और कंज्यूमर AI पर काम कर रही हैं।

🗣️ नताशा मालपानी का विज़न

Boundless Ventures लॉन्च करने के मौके पर नताशा मालपानी ने कहा:

“जो फाउंडर्स तकनीकी गहराई (technical depth) और सांस्कृतिक समझ (cultural fluency) को मिलाकर काम करेंगे, वही आने वाले समय की शर्तें तय करेंगे। Boundless ऐसे फाउंडर्स को सपोर्ट करने के लिए है—तेज़, भरोसेमंद और प्रभावशाली तरीके से।”


🌐 सिर्फ कैपिटल नहीं, पूरा सपोर्ट

Boundless Ventures का मकसद सिर्फ निवेश करना नहीं है, बल्कि फाउंडर्स को—

  • स्टोरीटेलिंग
  • मार्केट एक्सेस
  • नेटवर्क बिल्डिंग
    में भी मदद करना है।

इस तरह यह फंड शुरुआती चरण में मौजूद स्टार्टअप्स को तेजी से आगे बढ़ने में मदद करेगा।


👩‍💼 नताशा मालपानी का अनुभव

नताशा मालपानी इससे पहले Kae Capital की पार्टनर रह चुकी हैं।

  • उन्होंने Boundless Media की स्थापना की थी।
  • साथ ही Dice Media को सफलतापूर्वक स्केल किया है।

उनका यह अनुभव उन्हें फाउंडर्स के साथ न सिर्फ निवेशक बल्कि ऑपरेशनल और क्रिएटिव पार्टनर के रूप में भी मजबूत बनाता है।


📈 भारत में AI स्टार्टअप्स का बढ़ता बाजार

भारत में AI सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। हेल्थकेयर से लेकर लॉजिस्टिक्स, फिनटेक और मैन्युफैक्चरिंग तक, हर जगह AI का उपयोग बढ़ रहा है। ऐसे माहौल में Boundless Ventures जैसे फंड का लॉन्च होना शुरुआती स्टार्टअप्स के लिए बड़ा अवसर है।


🏁 निष्कर्ष

Boundless Ventures की शुरुआत भारत के AI स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई दिशा देने के लिए की गई है। नताशा मालपानी का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI-native स्टार्टअप्स भारत की तकनीकी क्रांति के केंद्र में होंगे। इस फंड के जरिए न सिर्फ कैपिटल बल्कि स्ट्रैटेजिक और क्रिएटिव सपोर्ट भी उपलब्ध होगा, जो स्टार्टअप्स की ग्रोथ को और तेज करेगा।

👉 देखा जाए तो यह कदम भारत को AI innovation hub बनाने की दिशा में एक अहम मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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💍 Bluestone ज्वेलरी IPO को कमजोर रिस्पॉन्स, निवेशकों की ठंडी प्रतिक्रिया

Bluestone

डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) ज्वेलरी ब्रांड Bluestone Jewellery का ₹1,500 करोड़ का IPO 11 से 13 अगस्त तक खुला रहा। हालांकि कंपनी को उम्मीद थी कि यह इश्यू निवेशकों के बीच ज़बरदस्त चर्चा बटोर लेगा, लेकिन सब्सक्रिप्शन आंकड़े बताते हैं कि बाजार की प्रतिक्रिया बेहद ठंडी रही।


📊 Bluestone सब्सक्रिप्शन का हाल

स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, IPO को कुल मिलाकर 2.57 गुना (X) सब्सक्रिप्शन मिला।

  • QIB (Qualified Institutional Buyers): 4.09X
  • NII (Non-Institutional Investors): केवल 0.53X
  • RII (Retail Individual Investors): 1.22X

कंपनी ने शेयर का प्राइस बैंड ₹492–₹517 रखा था।

इसका मतलब यह हुआ कि जहां बड़ी संस्थागत संस्थाओं ने दिलचस्पी दिखाई, वहीं रिटेल और HNI निवेशकों ने लगभग किनारा कर लिया।


📉 पिछली स्टार्टअप IPO से तुलना

अगर इस IPO को पुराने हाई-प्रोफाइल स्टार्टअप लिस्टिंग से तुलना करें, तो तस्वीर और भी निराशाजनक दिखती है।

  • Nykaa: 80X से अधिक सब्सक्रिप्शन
  • Zomato: 38X
  • Mamaearth: 7.6X

यहां तक कि छोटे डिजिटल-फर्स्ट ब्रांड्स को भी रिटेल निवेशकों और HNIs से मजबूत रिस्पॉन्स मिला। लेकिन Bluestone के मामले में उत्साह बेहद फीका रहा।


🕵️‍♂️ ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) भी ठंडा

IPO से पहले ग्रे-मार्केट में प्रीमियम को निवेशकों की भावनाओं का बैरोमीटर माना जाता है। Bluestone का GMP पहले करीब 2% था, जो घटकर 1% से भी नीचे आ गया, यह साफ इशारा है कि निवेशक लिस्टिंग गेन की बड़ी उम्मीद नहीं कर रहे हैं।


💰 ऊँची वैल्यूएशन पर सवाल

Bluestone इस IPO से खुद को करीब ₹7,800–₹8,100 करोड़ के वैल्यूएशन पर ला रहा है। यह उसे Titan की CaratLane जैसी कंपनियों की कैटेगरी में खड़ा करता है। लेकिन विश्लेषक मानते हैं कि Bluestone की प्रॉफिटेबिलिटी उतनी मजबूत नहीं है, जिससे इतनी ऊंची वैल्यूएशन पर निवेशकों की झिझक बढ़ गई है।


📈 कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन

वित्त वर्ष 2025 में Bluestone ने ₹1,770 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया। हालांकि कंपनी को अभी भी ₹222 करोड़ का नेट लॉस हुआ।

कंपनी का EBITDA मार्जिन सिंगल-डिजिट में रहा, यानी मुनाफे की क्षमता अभी सीमित है।

Bluestone का मॉडल ऑम्निचैनल (ऑनलाइन + ऑफलाइन) है। कंपनी के पास ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के अलावा 250 से अधिक फिजिकल स्टोर्स हैं। यह स्ट्रेटेजी ग्राहकों तक पहुँच बढ़ाने में मददगार रही, लेकिन साथ ही ऑपरेटिंग कॉस्ट भी बढ़ा दिया


📉 निवेशकों की सावधानी

IPO से जुड़े विश्लेषकों का कहना है कि यह कमजोर रिस्पॉन्स इस बात का संकेत है कि निवेशक अब नई-उम्र की कंज्यूमर ब्रांड कंपनियों पर सावधानी बरत रहे हैं। पहले जहाँ D2C और इंटरनेट-आधारित कंपनियों के लिए निवेशकों में जबरदस्त उत्साह देखा जाता था, वहीं अब वैल्यूएशन और प्रॉफिटेबिलिटी को लेकर निवेशक ज्यादा सतर्क हैं।


📅 लिस्टिंग कब और क्या उम्मीदें?

Bluestone के शेयर 19 अगस्त को स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होंगे।

बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि कम सब्सक्रिप्शन और कमजोर GMP की वजह से लिस्टिंग डे पर प्रदर्शन भी निराशाजनक रह सकता है।


🔮 D2C सेक्टर के लिए संकेत

यह IPO पूरे D2C और कंज्यूमर इंटरनेट सेक्टर के लिए एक टेस्ट केस बन गया है।

  • अगर Bluestone की लिस्टिंग कमजोर रहती है, तो आने वाले समय में अन्य स्टार्टअप IPO पर भी असर पड़ सकता है।
  • अगर किसी तरह निवेशकों की दिलचस्पी लिस्टिंग के दिन बढ़ती है, तो यह सेक्टर के लिए पॉजिटिव सेंटीमेंट का काम करेगा।

📌 निष्कर्ष

Bluestone Jewellery का IPO भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक मिश्रित संकेत लेकर आया है। एक ओर संस्थागत निवेशकों का भरोसा दिखता है, तो दूसरी ओर रिटेल और HNI निवेशकों की ठंडी प्रतिक्रिया इस बात की ओर इशारा करती है कि बाजार अब केवल ग्रोथ स्टोरी पर दांव लगाने के बजाय असली प्रॉफिटेबिलिटी और टिकाऊ बिज़नेस मॉडल देख रहा है।

अब सबकी नजरें 19 अगस्त की लिस्टिंग पर टिकी हैं—यहीं से तय होगा कि Bluestone निवेशकों का दिल जीत पाता है या नहीं।

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🧓Age Care Labs ने जुटाए ₹50 करोड़

Age Care Labs

भारत में तेजी से बढ़ते Eldercare सेक्टर में एक और बड़ी फंडिंग डील हुई है। Age Care Labs, जो Emoha और Epoch ब्रांड्स को ऑपरेट करता है, ने अपने Series B राउंड में ₹50 करोड़ (लगभग $6 मिलियन) जुटाए हैं। इस राउंड में Cork Products, Plutus Wealth Management और कई अन्य निवेशकों की भागीदारी रही है।


📑 डील की डिटेल्स

कंपनी के RoC (Registrar of Companies) में दर्ज रेगुलेटरी फाइलिंग के अनुसार, Emoha के बोर्ड ने 22,87,596 Series B प्रेफरेंस शेयर ₹218.6 प्रति शेयर के भाव से जारी करने का फैसला किया। इस इश्यू से कंपनी कुल ₹50 करोड़ जुटा रही है।

अब तक कंपनी को लगभग ₹31 करोड़ मिल चुके हैं, जो Cork Products, Plutus Wealth Management, Founders Collective Fund, Keymarrisa Realtors Private Limited और कई नामी इंडिविजुअल इन्वेस्टर्स जैसे नीरज अग्रवाल और उत्पल हेमेन्द्र शेट से आए हैं। बाकी रकम जल्द ही आने की उम्मीद है।


💰 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

कंपनी के मुताबिक जुटाई गई रकम का इस्तेमाल:

  • 📌 कैपिटल बेस मजबूत करने
  • 📌 लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल रिक्वायरमेंट्स पूरा करने
  • 📌 जनरल कॉर्पोरेट पर्पज़
    के लिए किया जाएगा।

यह एक बड़े Series B राउंड का हिस्सा है, और कंपनी इस ट्रेंच में और भी फंडिंग जुटा सकती है।


📊 वैल्यूएशन में बढ़ोतरी

इस अलॉटमेंट के बाद Age Care Labs का वैल्यूएशन लगभग ₹500 करोड़ (लगभग $59 मिलियन) हो जाएगा। अगर कंपनी को इस चल रहे राउंड में और कैपिटल मिलती है, तो यह वैल्यूएशन और भी बढ़ सकता है।


🏥 Age Care Labs: बुजुर्गों के लिए समर्पित सेवाएं

Age Care Labs दो प्रमुख ब्रांड्स चलाता है:

  1. Emoha – इन-होम Eldercare प्लेटफ़ॉर्म
  2. Epoch – Assisted Living और Dementia Care चेन

इनके सर्विस मॉडल में शामिल हैं:

  • 🆘 24/7 इमरजेंसी सपोर्ट
  • 🩺 हेल्थ मॉनिटरिंग
  • 🧘 वेलनेस प्रोग्राम्स
  • 👥 कम्युनिटी एंगेजमेंट

🏡 बिजनेस मॉडल और विस्तार

  • Epoch एक Asset-light मॉडल अपनाता है, जिसमें कंपनी प्रॉपर्टीज़ को लीज़ पर लेकर ऑपरेटर्स के साथ पार्टनर करती है।
  • स्केलिंग के लिए कंपनी फ्रेंचाइज़ी पार्टनरशिप, इंस्टीट्यूशनल टाई-अप्स, और अक्विज़िशन्स पर फोकस करती है।
  • Emoha और Epoch मिलकर 120 शहरों में 60,000 से ज्यादा सीनियर्स को सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

📈 फंडिंग हिस्ट्री

अब तक Age Care Labs ने $20 मिलियन से ज्यादा फंडिंग जुटाई है।

  • 2023 में कंपनी ने $11 मिलियन प्री-Series B राउंड जुटाया था, जिसमें Rainmatter Capital (Zerodha का इन्वेस्टमेंट आर्म) और Gruhas (Nikhil Kamath और Abhijeet Pai का वेंचर कैपिटल फंड) लीड इन्वेस्टर्स थे।

🔮 मार्केट पोटेंशियल

भारत में Eldercare सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की आबादी 2040 तक दोगुनी होने का अनुमान है, ऐसे में इन-होम केयर, असिस्टेड लिविंग और हेल्थ सपोर्ट सेवाओं की मांग भी तेज़ी से बढ़ेगी।

Age Care Labs इस अवसर का फायदा उठाकर:

  • 🏙 और ज्यादा शहरों में एंट्री
  • 🛠 टेक्नोलॉजी-ड्रिवन सॉल्यूशंस
  • 🤝 स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप्स
    के जरिए अपने नेटवर्क का विस्तार करने की योजना बना रही है।

🗣 निष्कर्ष

Age Care Labs की यह ₹50 करोड़ की फंडिंग न केवल उनके बिजनेस एक्सपैंशन को सपोर्ट करेगी, बल्कि भारत के तेजी से बढ़ते सीनियर केयर सेक्टर में उनकी पोजीशन को भी मजबूत बनाएगी। Emoha और Epoch की सर्विसेज़ के जरिए कंपनी बुजुर्गों के जीवन को ज़्यादा सुरक्षित, हेल्दी और कनेक्टेड बनाने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा रही है।

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🏠 Altum Credo को मिला British International Investment

Altum Credo

भारत के हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर में सक्रिय Altum Credo को एक और बड़ी फंडिंग मिली है। ब्रिटिश इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट (British International Investment – BII) ने कंपनी में 70 करोड़ रुपये (लगभग $8.2 मिलियन) का निवेश किया है। खास बात यह है कि यह निवेश सिर्फ एक महीने में दूसरी बार हुआ है। पिछले महीने ही BII ने Altum Credo में 100 करोड़ रुपये लगाए थे।


💰 डील का पूरा विवरण

कंपनी के Registrar of Companies (RoC) में दर्ज फाइलिंग के अनुसार, Altum Credo के बोर्ड ने 40,46,243 Series C1 CCPS शेयर जारी करने का प्रस्ताव पास किया। ये शेयर 173 रुपये प्रति शेयर के भाव पर ब्रिटिश इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट को अलॉट किए गए, जिससे कुल 70 करोड़ रुपये जुटाए गए।

निवेश से पहले BII की कंपनी में हिस्सेदारी 9.04% थी, जो इस डील के बाद बढ़कर 12.55% हो जाएगी। फिलहाल, Aavishkaar Capital कंपनी का सबसे बड़ा शेयरहोल्डर है, जिसकी हिस्सेदारी 14.27% है।


📈 निवेश का उद्देश्य

Altum Credo इस नई फंडिंग का इस्तेमाल लेंडिंग ऑपरेशंस के विस्तार और भौगोलिक पहुंच बढ़ाने के लिए करेगी। कंपनी का फोकस खासतौर पर उन इलाकों में है जहां हाउसिंग फाइनेंस की पहुंच अब भी सीमित है, जैसे सेमी-अर्बन और ग्रामीण भारत


🔙 पहले का फंडिंग इतिहास

अप्रैल 2024 में, Altum Credo ने $40 मिलियन (करीब ₹332 करोड़) की फंडिंग जुटाई थी। यह फंडिंग Z3Partners और Oikocredit की अगुवाई में हुई थी और इसमें प्राइमरी और सेकेंडरी दोनों ट्रांजैक्शंस शामिल थे।

स्टार्टअप डेटा प्लेटफ़ॉर्म TheKredible के अनुसार, अब तक कंपनी कुल $80 मिलियन (₹664 करोड़) फंडिंग जुटा चुकी है। इस नई फंडिंग के बाद Entrackr का अनुमान है कि Altum Credo का वैल्यूएशन ₹1,777.5 करोड़ (लगभग $209 मिलियन) तक पहुंच जाएगा।


🏡 कंपनी का बिज़नेस मॉडल

2016 में स्थापित Altum Credo का लक्ष्य आर्थिक रूप से कमजोर और लो-इनकम ग्रुप के लोगों को घर का सपना पूरा करने में मदद करना है। कंपनी:

  • ₹4 लाख से ₹40 लाख तक के होम लोन देती है।
  • लोन की अवधि 5 से 20 साल होती है।
  • टारगेट ग्राहक पहली बार घर खरीदने वाले होते हैं।
  • खास फोकस सेमी-अर्बन और ग्रामीण क्षेत्रों पर है।

📊 वित्तीय प्रदर्शन (FY24)

मार्च 2024 को समाप्त वित्त वर्ष में, Altum Credo का प्रदर्शन शानदार रहा:

  • ऑपरेटिंग रेवेन्यू 67% बढ़कर ₹112.87 करोड़ हुआ।
  • नेट प्रॉफिट दोगुने से ज्यादा बढ़कर ₹20 करोड़ पहुंच गया।

यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि हाउसिंग फाइनेंस की मांग छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में तेजी से बढ़ रही है और Altum Credo उस गैप को सफलतापूर्वक भर रहा है।


🌍 निवेशकों के लिए आकर्षण का कारण

BII जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय निवेशक का लगातार निवेश करना इस बात का सबूत है कि भारत का अफोर्डेबल हाउसिंग फाइनेंस मार्केट आने वाले वर्षों में बहुत तेज़ी से बढ़ने वाला है। इसके प्रमुख कारण:

  1. सरकारी स्कीमें – प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) जैसी योजनाएं।
  2. रियल एस्टेट में स्थिर वृद्धि – खासकर छोटे शहरों में।
  3. डिजिटल लेंडिंग और आसान प्रोसेस – लोन अप्रूवल में तेजी।

🔮 आगे की राह

Altum Credo का फोकस आने वाले समय में और ज्यादा ग्रामीण और टियर-2/3 शहरों में पहुंच बढ़ाने पर होगा। साथ ही, कंपनी तकनीकी समाधान (Tech-enabled services) के जरिए लोन प्रोसेस को और आसान और तेज बनाने की योजना पर काम कर रही है।

BII की लगातार दूसरी फंडिंग यह दिखाती है कि कंपनी न केवल अपने बिज़नेस मॉडल को स्केल करने में सक्षम है, बल्कि निवेशकों का भरोसा भी लगातार मजबूत कर रही है।


📌 निष्कर्ष

Altum Credo की यह डील भारत के अफोर्डेबल हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर के लिए एक सकारात्मक संकेत है। तेजी से बढ़ते हाउसिंग लोन मार्केट, सरकारी प्रोत्साहन और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती मांग के साथ, आने वाले सालों में यह सेक्टर और ज्यादा निवेश आकर्षित कर सकता है।

Read more : जुलाई में UPI पर PhonePe और Google Pay का दबदबा,

📱 जुलाई में UPI पर PhonePe और Google Pay का दबदबा,

UPI

भारत का डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम जुलाई 2025 में एक नए रिकॉर्ड पर पहुँच गया है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने इस महीने अब तक का सबसे ऊँचा आंकड़ा छुआ – 19.47 बिलियन ट्रांज़ैक्शन जिनकी वैल्यू रही ₹25.08 लाख करोड़।

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के ताज़ा डेटा के मुताबिक, PhonePe और Google Pay ने मिलकर UPI ट्रांज़ैक्शनों के वॉल्यूम और वैल्यू दोनों में 81% से अधिक का शेयर हासिल किया है।


📊 PhonePe नंबर 1, Google Pay दूसरे नंबर पर

  • PhonePe: 8.93 बिलियन ट्रांज़ैक्शन (वॉल्यूम शेयर 45.88%)
    • वैल्यू शेयर: ₹12,19,000 करोड़ (48.64%)
  • Google Pay: 6.92 बिलियन ट्रांज़ैक्शन (वॉल्यूम शेयर 35.56%)
    • वैल्यू शेयर: ₹8,91,000 करोड़ (35.53%)

यानी दोनों कंपनियों का संयुक्त योगदान:

  • वॉल्यूम में 81.44%
  • वैल्यू में 84.17%

यह साफ़ दिखाता है कि भारत का UPI मार्केट फिलहाल दो कंपनियों के इर्द-गिर्द सिमटा हुआ है


💳 Paytm, Navi और CRED जैसे प्लेयर्स का प्रदर्शन

  • Paytm: 1.36 बिलियन ट्रांज़ैक्शन (7.02% वॉल्यूम), ₹1,43,650 करोड़ वैल्यू (5.73%)
  • Navi: 444.06 मिलियन ट्रांज़ैक्शन (2.28% वॉल्यूम), ₹23,562 करोड़ वैल्यू (0.94%)
  • Flipkart super.money: 252.85 मिलियन (1.30% वॉल्यूम)
  • CRED: 144.38 मिलियन (0.74% वॉल्यूम), लेकिन वैल्यू शेयर 2.20% – यानी हाई-वैल्यू ट्रांज़ैक्शन पर फोकस

📉 छोटे प्लेयर्स की स्थिति

  • FamApp by Trio: 0.64% वॉल्यूम, 0.06% वैल्यू
  • Amazon Pay: 0.52% वॉल्यूम, 0.43% वैल्यू
  • BHIM: 0.45% वॉल्यूम, 0.58% वैल्यू
  • WhatsApp Pay: 0.38% वॉल्यूम, 0.22% वैल्यू
  • Axis Bank Apps: 27.79 मिलियन ट्रांज़ैक्शन (0.14% वॉल्यूम), ₹5,483 करोड़ वैल्यू (0.22%)

🛒 किस सेक्टर में हुई सबसे ज़्यादा UPI ट्रांज़ैक्शन?

NPCI ने इस बार पहली बार कैटेगरी-वाइज UPI डेटा जारी किया है।

  • ग्रोसरी और सुपरमार्केट: 3.03 बिलियन ट्रांज़ैक्शन, ₹64,882 करोड़ वैल्यू
  • फास्ट फूड: 1.22 बिलियन ट्रांज़ैक्शन
  • रेस्टोरेंट्स: 1.15 बिलियन ट्रांज़ैक्शन
  • सर्विस स्टेशन और टेलिकॉम सर्विसेज़: वॉल्यूम कम लेकिन हाई-वैल्यू स्पेंड
  • छोटे कैटेगरी जैसे डिजिटल गुड्स, फार्मेसी, बेकरी में भी UPI का इस्तेमाल बढ़ रहा है

📈 क्यों PhonePe और Google Pay का दबदबा कायम है?

  1. यूज़र-फ्रेंडली ऐप इंटरफ़ेस
  2. तेज़ और सुरक्षित ट्रांज़ैक्शन
  3. लॉयल्टी और कैशबैक प्रोग्राम
  4. मर्चेंट नेटवर्क का मज़बूत कवरेज
  5. पार्टनरशिप और ब्रांड ट्रस्ट

इन कारणों से नए प्लेयर्स के लिए इस डुओपॉली को तोड़ना मुश्किल हो रहा है।


🆚 नए प्लेयर्स की रणनीति

  • CRED: हाई-वैल्यू और प्रीमियम यूज़र टारगेट
  • Navi: फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स से जुड़ा क्रॉस-सेल
  • super.money: ई-कॉमर्स यूज़र्स पर फोकस
  • WhatsApp Pay: सोशल मैसेजिंग इंटीग्रेशन के ज़रिए ग्रोथ की कोशिश

🏦 भविष्य की तस्वीर

  • नियामकीय बदलाव: NPCI ट्रांज़ैक्शन लिमिट और मार्केट शेयर कैप जैसी नीतियों पर विचार कर सकता है
  • नवाचार की ज़रूरत: छोटे प्लेयर्स को पर्सनलाइज़्ड ऑफ़र और निच सेगमेंट में पैठ बनाने पर ध्यान देना होगा
  • UPI ग्लोबल: भारत सरकार के प्रयास से UPI अंतरराष्ट्रीय मार्केट में भी एंट्री कर रहा है, जिससे बड़े प्लेयर्स को और बढ़त मिलेगी

📌 निचोड़

जुलाई 2025 में UPI ने रिकॉर्ड-ब्रेकिंग प्रदर्शन किया, लेकिन मार्केट में PhonePe और Google Pay का दबदबा पहले से भी ज़्यादा मज़बूत हुआ है। Paytm और बाकी प्लेयर्स के सामने चुनौती है कि वे कैसे यूज़र बेस बढ़ाएँ और डुओपॉली को तोड़ें

डिजिटल पेमेंट्स का यह सफ़र अभी लंबा है, और आने वाले महीनों में हम और नए इनोवेशन, कैटेगरी डेटा और कॉम्पिटिशन देखने वाले हैं।

Read more : Q1 FY26 में Indiqube की मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ,

📊 Q1 FY26 में Indiqube की मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ,

IndiQube

Managed workspace solutions देने वाली कंपनी Indiqube ने NSE पर लिस्ट होने के बाद पहली बार अपने Q1 FY26 (अप्रैल–जून 2025) के वित्तीय नतीजे जारी किए हैं। कंपनी ने इस तिमाही में 27% की राजस्व वृद्धि हासिल की है और घाटे को 12% तक कम करने में भी सफलता पाई है।


📈 रेवेन्यू में दमदार उछाल

कंपनी के Revenue from Operations Q1 FY25 के ₹242 करोड़ से बढ़कर Q1 FY26 में ₹309 करोड़ पहुंच गए। वहीं, कुल आय (Total Income) ₹251 करोड़ से बढ़कर ₹324 करोड़ रही।

  • इस तिमाही में कंपनी को ₹15 करोड़ अन्य आय (Other Income) से भी प्राप्त हुए।
  • हालांकि, कंपनी ने तिमाही के लिए रेवेन्यू का सेगमेंट-वाइज ब्रेकडाउन जारी नहीं किया।

💰 खर्चों में भी बढ़ोतरी

रेवेन्यू के साथ-साथ कंपनी के खर्च भी बढ़े हैं।

  • Employee Benefits में 18% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹20 करोड़ पहुंच गया।
  • Finance Cost में 49% की तेज वृद्धि हुई, जो Q1 FY25 के ₹74 करोड़ से बढ़कर Q1 FY26 में ₹110 करोड़ हो गई।
  • Depreciation & Amortization भी बढ़कर ₹143 करोड़ पहुंच गया।

कुल मिलाकर, कंपनी के Total Expenses ₹290 करोड़ से बढ़कर ₹374 करोड़ हो गए, जो 29% की वृद्धि है।


📉 घाटे में कमी, EBITDA पॉज़िटिव

खर्च बढ़ने के बावजूद Indiqube ने अपना घाटा कम किया है —

  • Q1 FY25 में ₹42 करोड़ का घाटा था, जो Q1 FY26 में घटकर ₹37 करोड़ रह गया (12% की कमी)।
  • कंपनी का EBITDA पॉज़िटिव ₹203 करोड़ रहा, क्योंकि वित्तीय लागत और डीप्रिसिएशन मिलाकर कुल खर्च का 68% हिस्सा थे।
  • यूनिट इकॉनॉमिक्स के हिसाब से, कंपनी ने ₹1 कमाने के लिए ₹1.21 खर्च किए।

📜 IGAAP स्टैंडर्ड के हिसाब से नतीजे

इंडियन अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स के अलावा, अगर IGAAP Equivalent मानकों के अनुसार देखें तो —

  • रेवेन्यू ₹313 करोड़
  • प्रॉफिट ₹19 करोड़
    रहा, जो कंपनी की ऑपरेशनल मजबूती को दर्शाता है।

💹 IPO और लिस्टिंग का सफर

Indiqube ने जुलाई 2025 में ₹700 करोड़ का IPO लॉन्च किया था, जिसमें ₹650 करोड़ का Fresh Issue और ₹50 करोड़ का Offer for Sale शामिल था।

  • IPO का प्राइस बैंड ₹225 से ₹237 प्रति शेयर तय हुआ।
  • लिस्टिंग से पहले कंपनी ने एंकर निवेशकों से ऊपरी बैंड पर ₹374 करोड़ जुटाए।
  • IPO को 12.41 गुना सब्सक्रिप्शन मिला, और ग्रे मार्केट में 4–10% लिस्टिंग गेन की उम्मीद थी।

लेकिन हकीकत में—

  • NSE पर लिस्टिंग प्राइस ₹216 रहा, जो इश्यू प्राइस से 8.9% डिस्काउंट था।
  • BSE पर ₹218.70 पर लिस्ट हुआ, जो 7.7% डिस्काउंट रहा।

📊 मौजूदा शेयर प्राइस और मार्केट कैप

13:26 PM के डेटा के अनुसार—

  • Indiqube का शेयर प्राइस ₹219.81 है।
  • कंपनी का मार्केट कैप ₹4,634 करोड़ (लगभग $528 मिलियन) है।

🏢 Indiqube का बिज़नेस मॉडल

Indiqube एक Managed Workspace Solutions Provider है, जो स्टार्टअप्स, SMEs और बड़े कॉरपोरेट्स को फ्लेक्सिबल ऑफिस सॉल्यूशंस देती है।

  • इनके मॉडल में Coworking + Customizable Office Spaces शामिल हैं।
  • कंपनी का नेटवर्क भारत के कई बड़े शहरों में फैला हुआ है।

🔍 विश्लेषण: ग्रोथ बनाम चुनौतियाँ

Q1 FY26 के नतीजे साफ़ दिखाते हैं कि Indiqube ने रेवेन्यू में तो दमदार ग्रोथ दिखाई है, लेकिन Finance Cost और Depreciation का दबाव अभी भी भारी है।

  • पॉज़िटिव EBITDA निवेशकों के लिए राहत की बात है।
  • हालांकि, घाटे में कमी के बावजूद लिस्टिंग डिस्काउंट ने बाजार में हल्की निराशा पैदा की।

🚀 आगे की रणनीति

कंपनी को अगले क्वार्टर्स में खर्चों पर कंट्रोल और ऑक्युपेंसी रेट बढ़ाने पर फोकस करना होगा।

  • ऑफिस स्पेस डिमांड में बढ़ोतरी से मिड-टर्म में बेहतर रेवेन्यू ग्रोथ संभव है।
  • अगर कंपनी अपना नेट लॉस घटाकर नेट प्रॉफिट में बदल पाती है, तो शेयरहोल्डर वैल्यू में तेजी आ सकती है।

निष्कर्ष 📝
Indiqube के Q1 FY26 नतीजे बताते हैं कि कंपनी ग्रोथ ट्रैक पर है, लेकिन प्रॉफिटेबिलिटी तक का सफर अभी बाकी है। निवेशकों के लिए यह एक ग्रोथ-फोकस्ड प्ले है, जहाँ धैर्य और लंबे समय की सोच की जरूरत होगी।

Read more : Allen Digital की CEO अाभा महेश्वरी ने दिया इस्तीफा,

🚀 Allen Digital की CEO अाभा महेश्वरी ने दिया इस्तीफा,

Allen Digital

Allen Career Institute की डिजिटल यूनिट Allen Digital की CEO और पूर्व Meta एक्जीक्यूटिव आभा महेश्वरी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में घोषणा की कि वह अपने अगले कदम से पहले एक छोटा ब्रेक लेंगी।


✨ 2 साल का सफर: WeWork ऑफिस से बड़े डिजिटल मिशन तक

आभा ने याद किया कि 2022 में जब उन्होंने Allen Digital जॉइन किया, तब उनकी टीम सिर्फ 15–20 लोगों की थी, जो WeWork ऑफिस से काम करती थी।

“हम स्क्रैपी, महत्वाकांक्षी और कुछ अर्थपूर्ण बनाने के लिए समर्पित थे। आज मैं एक ऐसे ऑफिस को छोड़ रही हूं जो जोश से भरा है, बड़े आइडियाज और मजबूत टीम के साथ,” उन्होंने लिखा।

दो साल में, उन्होंने Allen Digital को भारत के टॉप EdTech प्लेयर्स को चुनौती देने वाली ताकत में बदला।


💰 Allen का डिजिटल प्लान और बड़ी फंडिंग

  • अप्रैल 2022 में, Allen Career Institute ने अपनी 100% सहायक कंपनी Allen Digital लॉन्च की थी।
  • यह कदम Allen को भारत के मल्टी-बिलियन डॉलर EdTech मार्केट में उतारने के लिए उठाया गया था।
  • सिर्फ एक महीने पहले, Allen ने Bodhi Tree Systems से $600 मिलियन (लगभग ₹4,500 करोड़) की मेगा फंडिंग हासिल की थी।
  • Bodhi Tree Systems, जेम्स मर्डोक और पूर्व Disney एशिया-पैसिफिक चेयरमैन उदय शंकर का निवेश प्लेटफ़ॉर्म है।

🤝 बड़े अधिग्रहण और डील्स

आभा के कार्यकाल में Allen Digital ने कई स्ट्रेटेजिक कदम उठाए —

  1. Doubtnut का अधिग्रहण 🧠 — जुलाई 2023 में, Allen Digital ने AI-पावर्ड डाउट-सॉल्विंग प्लेटफ़ॉर्म Doubtnut को एक slump sale में खरीदा। डील का मूल्य लगभग $10 मिलियन बताया गया।
  2. Unacademy डील की चर्चा 📚 — दिसंबर 2024 में रिपोर्ट्स आईं कि Allen, Unacademy को लगभग $800 मिलियन वैल्यूएशन पर खरीदने के शुरुआती चरण में है। हालांकि, Unacademy के CEO गौरव मुंजाल ने इस खबर को सार्वजनिक रूप से नकार दिया।

🎯 डिजिटल-फर्स्ट विज़न और टेक्नोलॉजी इनोवेशन

आभा ने बताया कि Allen Digital का विज़न learning outcomes पर आधारित था।

  • AI-पावर्ड लर्निंग टूल्स
  • ऑफ़लाइन और ऑनलाइन का seamless integration
  • छात्र-फ्रेंडली टेक सॉल्यूशन्स
  • एजुकेशन को और ज़्यादा accessible बनाना

उन्होंने लिखा,

“हमने ऐसी टेक्नोलॉजी लॉन्च की जो बदलाव लाने वाली थी, तेजी से स्केल किया, और छात्रों की ज़िंदगी में असली फर्क डाला।”


📈 Allen की वित्तीय स्थिति (FY24)

  • रेवेन्यू ग्रोथ: 42% साल-दर-साल बढ़कर ₹3,244.7 करोड़
  • मुख्य कारण: मजबूत ऑफलाइन एनरोलमेंट्स + डिजिटल एक्सपैंशन
  • प्रॉफिट: 44% गिरकर ₹136 करोड़
  • डिजिटल विस्तार के बावजूद, कंपनी की ऑफलाइन ताकत अभी भी उसका सबसे बड़ा ड्राइविंग फैक्टर रही।

🔍 इस्तीफे के पीछे की संभावनाएं

हालांकि आभा ने इस्तीफे का सीधा कारण नहीं बताया, लेकिन इंडस्ट्री इनसाइडर्स का मानना है कि —

  • EdTech सेक्टर में प्रतिस्पर्धा
  • ऑफलाइन-ऑनलाइन बैलेंस बनाने की चुनौती
  • और IPO या बड़े स्ट्रेटेजिक शिफ्ट की तैयारी
    … इन सबने उनके निर्णय में भूमिका निभाई हो सकती है।

🌟 Allen Digital का आगे का रास्ता

आभा के जाने के बाद Allen Digital के लिए बड़ी चुनौती होगी —

  • नए लीडरशिप के तहत ग्रोथ बनाए रखना
  • AI और पर्सनलाइज्ड लर्निंग सॉल्यूशन्स को और आगे बढ़ाना
  • Byju’s, Unacademy, और Physics Wallah जैसे बड़े प्रतिद्वंद्वियों से मुकाबला करना

कंपनी के ऑफलाइन स्ट्रॉन्गहोल्ड को डिजिटल स्केल में बदलना अब अगले CEO का मुख्य मिशन होगा।


🗣️ इंडस्ट्री में चर्चा

EdTech इंडस्ट्री में आभा की लीडरशिप को लेकर पॉज़िटिव राय है। Meta और अन्य टेक कंपनियों में उनके अनुभव ने Allen Digital को टेक-ड्रिवन बिजनेस मॉडल अपनाने में मदद की।

एक स्टार्टअप विश्लेषक के अनुसार,

“Allen Digital का AI और हाइब्रिड लर्निंग पर फोकस आने वाले सालों में मार्केट का बड़ा हिस्सा जीत सकता है, बशर्ते वे लगातार इनोवेशन और सही प्राइसिंग बनाए रखें।”


📌 निष्कर्ष

आभा महेश्वरी का Allen Digital में दो साल का सफर एक स्क्रैपी स्टार्टअप से लेकर बड़े डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म तक की कहानी है। उनके जाने के बाद Allen के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि नया नेतृत्व उनकी बनाई नींव पर कैसे आगे बढ़ता है।

Allen Digital अब ऐसे मोड़ पर है जहां ग्रोथ, टेक्नोलॉजी और प्रतिस्पर्धा — तीनों को संतुलित करना ज़रूरी है।

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