🧳 The Tarzan Way को ₹2 करोड़ की फंडिंग

The Tarzan Way

नोएडा स्थित ट्रैवलटेक स्टार्टअप The Tarzan Way (TTW) ने हाल ही में ₹2 करोड़ (लगभग $2.33 लाख) की सीड फंडिंग जुटाई है। इस निवेश दौर का नेतृत्व किया Inflection Point Ventures (IPV) ने, और इसमें कई अन्य बड़े नाम भी शामिल रहे।

इस स्टार्टअप का लक्ष्य है—आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के ज़रिए भारतीयों का ट्रैवल प्लानिंग अनुभव पूरी तरह बदल देना।


💰 कौन-कौन निवेशक बने?

TTW की इस फंडिंग राउंड में कई जाने-माने निवेशकों ने हिस्सा लिया:

🔹 Inflection Point Ventures (IPV) – लीड इन्वेस्टर
🔹 Your Trips Limited (UK)
🔹 Prateek Maheshwari – PhysicsWallah के को-फाउंडर
🔹 और कई अन्य एंजल निवेशक

इस फंडिंग से स्टार्टअप को बिजनेस ऑपरेशंस और तकनीकी इनोवेशन को और मजबूत करने का मौका मिलेगा।


📊 पैसा कहां खर्च होगा?

कंपनी ने साफ-साफ बताया है कि यह फंड कितने प्रतिशत किस काम के लिए इस्तेमाल होगा:

  • 🛠️ 35% – प्रोडक्ट डेवलपमेंट
  • ⚙️ 25% – ऑपरेशंस
  • 📢 20% – मार्केटिंग
  • 👥 15% – HR और एडमिन
  • 📦 5% – अन्य कार्य

इसका मकसद है ट्रैवल टेक्नोलॉजी को इतना सहज और स्मार्ट बनाना कि यूज़र्स चंद सेकंड में अपनी ट्रिप प्लान कर सकें।


🧠 क्या है The Tarzan Way?

The Tarzan Way की शुरुआत 2020 में शिखर चड्ढा और शिवांक त्रिपाठी ने की थी।

यह एक AI-आधारित ट्रैवलटेक प्लेटफॉर्म है जो उपयोगकर्ताओं को हाइपर-पर्सनलाइज्ड यात्रा अनुभव प्रदान करता है। यानी, आपकी पसंद, बजट, और शौक के अनुसार ट्रिप की पूरी योजना कुछ ही सेकंड में तैयार हो जाती है।


📱 जल्द आ रहा है ‘Exploration App’

कंपनी अब जल्द ही अपना नया ‘Exploration App’ लॉन्च करने जा रही है। इस ऐप के ज़रिए:

🔹 AI-बेस्ड बुकिंग इंजन
🔹 वन-क्लिक बुकिंग फीचर
🔹 24×7 कंसीयर्ज सपोर्ट

जैसी सुविधाएं यूज़र्स को मिलेंगी, जिससे यात्रा योजना पहले से कहीं आसान और तेज़ हो जाएगी।


📈 प्रदर्शन की झलक: जबरदस्त ग्रोथ!

The Tarzan Way अब तक का जो परफॉर्मेंस रहा है, वो काफी प्रभावशाली है:

  • 💰 ₹13.5 करोड़ की ग्रॉस बुकिंग वैल्यू
  • 📈 300% साल-दर-साल (YoY) रेवेन्यू ग्रोथ
  • 🚀 70% महीने-दर-महीने (MoM) यूज़र ग्रोथ
  • 🌐 35,000+ सोशल मीडिया फॉलोअर्स
  • 👀 1 करोड़ से ज़्यादा कंटेंट व्यूज़

ये आंकड़े बताते हैं कि भारतीय ट्रैवल मार्केट में इस स्टार्टअप की पकड़ तेज़ी से मज़बूत हो रही है।


🌍 इंडस्ट्री ग्रोथ में बड़ा मौका

भारत में टूरिज्म इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है। अनुमान है कि यह सेक्टर:

📊 2028 तक $512 बिलियन (₹43 लाख करोड़ से ज़्यादा) तक पहुंच जाएगा।

इसके साथ ही, आज के उपभोक्ता पर्सनलाइज्ड और टेक-ड्रिवन अनुभवों की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। The Tarzan Way जैसे प्लेटफॉर्म इसी मांग को ध्यान में रखकर नए इनोवेशन ला रहे हैं।


🧳 क्यों खास है The Tarzan Way?

  1. 🤖 AI-Driven Customization – यूज़र्स के इंटरेस्ट, बजट और ट्रैवल स्टाइल के अनुसार पर्सनलाइज्ड प्लान
  2. ⏱️ सेकंड्स में इटिनरेरी जनरेट
  3. 📞 24×7 कंसीयर्ज सपोर्ट
  4. 🌐 फुल-स्पेक्ट्रम ट्रैवल सर्विस – होटल, फ्लाइट, अनुभव, एक्टिविटी बुकिंग आदि

यह स्टार्टअप “स्मार्ट ट्रैवलिंग” की उस जरूरत को पूरा कर रहा है जो आज के डिजिटल युग में हर यात्री चाहता है।


🔮 आगे की रणनीति

The Tarzan Way अब भारत के अलावा अंतरराष्ट्रीय विस्तार की दिशा में भी सोच रहा है। इसके लिए कंपनी अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को AI, ML और डेटा एनालिटिक्स के ज़रिए और भी स्मार्ट बनाने में जुटी है।


📝 निष्कर्ष

The Tarzan Way की इस ताज़ा फंडिंग से यह साफ़ हो गया है कि ट्रैवल और टेक्नोलॉजी का संगम भारत में नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

एक ऐसा प्लेटफॉर्म जो:

  • ✅ स्मार्ट ट्रैवलिंग को बढ़ावा दे,
  • ✅ यूज़र्स के लिए हर कदम आसान बनाए,
  • ✅ और भारतीय टूरिज्म को नई पहचान दे,

वो आने वाले समय में AI-ट्रैवल टेक सेक्टर का बड़ा खिलाड़ी बन सकता है।


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Read more :💼 Syfe ने जुटाए $80 मिलियन

💼 Syfe ने जुटाए $80 मिलियन

Syfe

एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में संचालित डिजिटल वेल्थ मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म Syfe ने हाल ही में अपनी Series C फंडिंग राउंड में कुल $80 मिलियन (लगभग ₹660 करोड़) की पूंजी जुटाई है। इस फंडिंग में हालिया $53 मिलियन का Series C2 ऑल-इक्विटी राउंड भी शामिल है, जिसका नेतृत्व दो ब्रिटिश फैमिली ऑफिसेस ने किया।

इससे पहले अगस्त 2024 में कंपनी ने Series C1 राउंड में $27 मिलियन जुटाए थे, जिससे कुल मिलाकर Series C राउंड का आकार $80 मिलियन तक पहुंच गया है।


💸 किसने किया निवेश?

Syfe की इस फंडिंग राउंड में पुराने निवेशकों का भी भरोसा बरकरार रहा।

🔹 Unbound और
🔹 Valar Ventures (PayPal के को-फाउंडर Peter Thiel द्वारा समर्थित)

ने भी इस राउंड में भागीदारी की।

कंपनी ने साफ किया है कि यह एक पूरी तरह इक्विटी आधारित निवेश है, जिससे कंपनी पर कर्ज का कोई बोझ नहीं पड़ेगा और ग्रोथ पर सीधा फोकस रहेगा।


🌍 कहां खर्च होगा यह फंड?

Syfe ने कहा कि इस नई पूंजी का उपयोग मुख्य रूप से सिंगापुर, हांगकांग और ऑस्ट्रेलिया में अपने संचालन को विस्तार देने के लिए किया जाएगा। इसके साथ-साथ:

🔧 गुरुग्राम (भारत) स्थित टेक हेडक्वार्टर में इंजीनियरिंग और प्रोडक्ट टीमों को और मजबूत किया जाएगा।
🤖 AI-आधारित टूल्स के विकास,
कस्टमर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने और
📈 प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को विस्तारित करने पर विशेष जोर रहेगा।


🏦 Syfe $10 अरब से ज्यादा की संपत्तियों का प्रबंधन

Syfe वर्तमान में $10 बिलियन (₹83,000 करोड़ से अधिक) की संपत्तियों का प्रबंधन करता है, जो इसे एशिया की प्रमुख डिजिटल वेल्थ टेक कंपनियों में से एक बनाता है।

📈 कंपनी ने दावा किया कि:

  • 2025 में हांगकांग में इसका कारोबार दोगुना हुआ,
  • और पिछले एक साल में कंपनी की कुल ग्रोथ भी लगभग दोगुनी रही।

🇦🇺 ऑस्ट्रेलिया में अधिग्रहण और विस्तार

हाल ही में Syfe ने ऑस्ट्रेलिया की पॉपुलर ऑनलाइन ब्रोकरेज फर्म Selfwealth का अधिग्रहण किया है, जिससे कंपनी को ऑस्ट्रेलियाई बाजार में मजबूत प्रवेश मिला है।

इसके ज़रिए Syfe अब एक ऐसा प्लेटफॉर्म बन गया है जो निवेशकों को स्टॉक्स, ETF, रिटायरमेंट प्लानिंग, और AI आधारित पोर्टफोलियो मैनेजमेंट जैसी सेवाएं देता है।


👨‍💼 सीनियर टैलेंट की भरती में तेजी

Syfe ने हाल ही में कई वरिष्ठ अधिकारियों को अपने साथ जोड़ा है:

  • संजीव मलिक (पूर्व में BlackRock)
  • डेन रिकेट्स (पूर्व में Procter & Gamble और Grab)

यह दिखाता है कि कंपनी न केवल तकनीकी विस्तार पर ध्यान दे रही है, बल्कि लीडरशिप लेवल पर भी ग्लोबल टैलेंट ला रही है।


🇮🇳 भारत में 15% हेडकाउंट ग्रोथ

भारत में कंपनी का फोकस तेजी से बढ़ रहा है:

  • Syfe ने अपनी गुरुग्राम टेक टीम का हेडकाउंट पिछले राउंड के बाद 15% तक बढ़ाया है।
  • कंपनी आगे भी स्टैटेजिक रूप से हायरिंग करती रहेगी।

भारत न केवल कंपनी का टेक हब है, बल्कि यहां से एशिया और अन्य वैश्विक बाजारों के लिए इनोवेशन और प्रोडक्ट डेवेलपमेंट भी किया जाता है।


🌏 60 देशों में मौजूदगी, अब एशियाई अमीर वर्ग पर फोकस

Syfe वर्तमान में:

  • सिंगापुर, हांगकांग और ऑस्ट्रेलिया में रजिस्टर्ड और लाइसेंस प्राप्त फिनटेक कंपनी है,
  • और इसके उपयोगकर्ता 60 से अधिक देशों में फैले हुए हैं।

अब कंपनी का ध्यान विशेष रूप से “Mass Affluent” यानी मध्यम से उच्च-आय वर्ग के निवेशकों पर है, जो एशिया में तेजी से बढ़ रहा है। Syfe उन्हें व्यक्तिगत निवेश, रिटायरमेंट, टैक्स प्लानिंग, और ETF-बेस्ड सेवाएं देने की तैयारी में है।


🤖 AI और फिनटेक का संगम

Syfe आने वाले महीनों में:

  • AI-असिस्टेड निवेश टूल्स लॉन्च करेगा
  • कस्टमर्स को ज़्यादा पर्सनलाइज्ड पोर्टफोलियो और
  • रीयल-टाइम एडवाइजरी सर्विसेस देगा।

यह उसे बाकी पारंपरिक फाइनेंशियल फर्मों से अलग बनाता है।


📝 निष्कर्ष

Syfe की यह ताज़ा फंडिंग एक अहम संकेत है कि एशिया के फिनटेक सेक्टर में निवेशकों का भरोसा बरकरार है।

  • भारत में इंजीनियरिंग टैलेंट पर फोकस,
  • AI-आधारित वेल्थ प्रोडक्ट्स का विस्तार,
  • और रणनीतिक अधिग्रहण जैसे कदम,

Syfe को एक ग्लोबल वेल्थटेक लीडर बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ा रहे हैं।


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⚖️ VerSe Innovation ने Builder.ai के साथ राजस्व घोटाले के आरोपों को किया खारिज,

VerSe

Dailyhunt और Josh जैसे लोकप्रिय ऐप्स की पैरेंट कंपनी VerSe Innovation ने हाल ही में UK आधारित सॉफ़्टवेयर प्लेटफॉर्म Builder.ai से जुड़े वित्तीय अनियमितता के आरोपों को सख्ती से खारिज किया है। कंपनी ने इन आरोपों को “तथ्यहीन, आधारहीन, मानहानिकारक और भ्रामक” करार दिया है।

इस विवाद ने भारतीय स्टार्टअप जगत में हलचल मचा दी है, लेकिन VerSe ने सबूतों के साथ जवाब देकर अपना पक्ष साफ़ कर दिया है।


📞 CEO उमंग बेदी ने दिए तकनीकी साक्ष्य

Entrackr को दिए एक टेलीफोनिक इंटरव्यू में VerSe Innovation के को-फाउंडर और CEO उमंग बेदी ने आरोपों को पूरी तरह नकारते हुए कई तकनीकी और वित्तीय सबूत साझा किए। इनमें शामिल हैं:

  • AWS पोर्टल पर वास्तविक मासिक उपयोग की जानकारी
  • Builder.ai द्वारा जारी मासिक इनवॉइस की प्रतियां
  • क्लाउड सेवाओं के लिए उठाए गए Jira टिकट्स
  • कस्टम ऐप डेवेलपमेंट के प्रमाण (Builder Home Portal पर आधारित)
  • 26+ वर्ज़न रिलीज़ और 18+ सॉफ्टवेयर अपडेट
  • ऐड सर्वर कैम्पेन डेटा जिसमें व्यूएबिलिटी और CTR मेट्रिक्स भी शामिल हैं
  • Builder.ai को दिए गए विज्ञापन सेवाओं के इनवॉइस

VerSe का दावा है कि ये सभी इनवॉइस और सेवाएं उनकी वित्तीय रिपोर्टिंग से मेल खाती हैं और पूरी तरह से ऑडिटेबल हैं।


🚫 “हमने कोई गड़बड़ी नहीं की” – VerSe का आधिकारिक बयान

कंपनी की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया:

“Builder.ai के साथ मिलकर राजस्व बढ़ाने, बिना सेवा के बिलिंग करने या इनवॉइस में हेरफेर करने का कोई भी आरोप पूरी तरह झूठा और गैर-जिम्मेदाराना है।”

VerSe ने स्पष्ट किया कि पिछले 5 वर्षों में उन्होंने Builder.ai से $80 मिलियन (₹665 करोड़) की सेवाएं लीं, जिनमें शामिल थे:

  • AWS इन्फ्रास्ट्रक्चर
  • क्लाउड सर्विस
  • सिस्टम माइग्रेशन
  • कस्टम ऐप डेवेलपमेंट

इसी दौरान Builder.ai ने VerSe से $53 मिलियन (₹440 करोड़) की विज्ञापन और मार्केटिंग सेवाएं लीं। कंपनी का कहना है कि यह सौदा व्यापारिक असंतुलन दिखाता है, जिससे किसी भी “मिलभगत” की आशंका स्वतः समाप्त हो जाती है।


✅ वित्तीय ऑडिट में कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई

VerSe ने यह भी स्पष्ट किया कि FY24 के स्टैच्यूटरी ऑडिट के दौरान Builder.ai से जुड़े हर एक ट्रांजैक्शन की गहन जांच हुई थी।

  • सभी लेन-देन को सत्यापित किया गया
  • तीसरे पक्ष के ऑडिटर्स द्वारा समीक्षा की गई
  • ऑडिट रिपोर्ट में “अनमॉडिफाइड ओपिनियन” दिया गया – मतलब सभी आंकड़े सही और पारदर्शी पाए गए

हालांकि, रिपोर्ट में कुछ आंतरिक नियंत्रण (internal control) कमज़ोरियों की बात कही गई, लेकिन VerSe का कहना है कि इसका कोई असर वित्तीय सटीकता पर नहीं पड़ा


⚖️ झूठ फैलाने वालों पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

VerSe ने यह भी कहा कि वह इस मामले में कानूनी विकल्पों की समीक्षा कर रही है और आवश्यकता पड़ने पर मानहानि का मुकदमा भी दायर कर सकती है।

“हम पारदर्शिता और कानूनी मानकों के तहत काम करते हैं। हमारे सारे रिकॉर्ड किसी भी जांच को सहने में सक्षम हैं,” कंपनी के प्रवक्ता ने कहा।


🔮 आगे की रणनीति: FY26 की दूसरी छमाही तक ब्रेकइवन लक्ष्य

VerSe ने कहा कि अब यह विवाद पीछे छूट चुका है और कंपनी का ध्यान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने पर केंद्रित है।

कंपनी का फोकस अब निम्नलिखित उत्पादों पर होगा:

  • NexVerse.ai – AI आधारित प्रोडक्ट सूट
  • Dailyhunt Premium – सब्सक्रिप्शन-आधारित कंटेंट
  • Josh Audio Calling & Stories – शॉर्ट वीडियो के साथ ऑडियो कनेक्ट
  • VerSe Collab – कंटेंट क्रिएटर और ब्रांड्स को जोड़ने वाला प्लेटफॉर्म

VerSe को उम्मीद है कि इन प्रोडक्ट्स के ज़रिए FY26 की दूसरी छमाही तक कंपनी ब्रेकइवन तक पहुंच सकती है, यानी राजस्व और खर्च बराबर हो जाएंगे।


📌 निष्कर्ष: पारदर्शिता बनाम अफवाह

इस पूरे विवाद में VerSe Innovation ने अपने बचाव में स्पष्ट सबूत और डेटा प्रस्तुत किए हैं। वित्तीय पारदर्शिता, तीसरे पक्ष के ऑडिट और स्पष्ट बयानबाज़ी से यह साफ़ है कि कंपनी अपने रिकॉर्ड्स को लेकर आत्मविश्वास में है।

VerSe का अगला पड़ाव है – लाभदायक वृद्धि, AI-फोकस्ड इनोवेशन और यूज़र-ओरिएंटेड प्लेटफॉर्म्स पर ध्यान केंद्रित करना।


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Read more :💰Thoma Bravo ने जुटाए $34.4 बिलियन!

💰Thoma Bravo ने जुटाए $34.4 बिलियन!

Thoma Bravo

शिकागो स्थित वैश्विक सॉफ्टवेयर निवेश फर्म Thoma Bravo ने हाल ही में अपने बायआउट फंड्स के लिए $34.4 बिलियन (लगभग ₹2.87 लाख करोड़) से अधिक की पूंजी प्रतिबद्धता जुटाने की घोषणा की है। यह आंकड़ा दुनिया की कुछ सबसे बड़ी प्राइवेट इक्विटी रेजिंग्स में से एक मानी जा रही है।

इस नए पूंजी संग्रह के साथ Thoma Bravo अब यूरोप में भी अपना पहला समर्पित निवेश फंड लॉन्च कर रहा है।


📦 किन फंड्स में जुटाई गई है पूंजी?

Thoma Bravo ने कुल तीन बायआउट फंड्स के लिए पूंजी जुटाई है:

  1. Thoma Bravo Fund XVI$24.3 बिलियन
  2. Thoma Bravo Discover Fund V$8.1 बिलियन
  3. Thoma Bravo Europe Fund I€1.8 बिलियन (लगभग $2 बिलियन)

इन तीनों फंड्स के ज़रिए कंपनी अब अमेरिका के साथ-साथ यूरोप में भी सॉफ्टवेयर कंपनियों में बड़े स्तर पर निवेश करने जा रही है।


🌐 कहाँ से आई इतनी बड़ी पूंजी?

यह पूंजी Thoma Bravo को उसके वैश्विक निवेशकों के व्यापक नेटवर्क से प्राप्त हुई है, जिनमें शामिल हैं:

  • सॉवरेन वेल्थ फंड्स
  • पब्लिक पेंशन फंड्स
  • मल्टीनेशनल कंपनियाँ
  • बीमा कंपनियाँ
  • फंड ऑफ फंड्स
  • विश्वविद्यालय ट्रस्ट और फाउंडेशंस
  • हाई नेट वर्थ फैमिली ऑफिसेस

इस बात से साफ है कि Thoma Bravo का ट्रैक रिकॉर्ड और सॉफ्टवेयर में केंद्रित निवेश रणनीति पर विश्वास का स्तर काफी ऊंचा है


📈 पिछले 12 महीनों में जबरदस्त निवेश गतिविधियाँ

Thoma Bravo ने पिछले एक साल में खरीद और बिक्री दोनों पक्षों पर तेज़ी से काम किया है। इसके तहत कंपनी ने:

  • कई सॉफ्टवेयर कंपनियों में निवेश (Buyouts) किया
  • कई निवेशों से निकासी (Exits/Realizations) भी की
  • कुल मिलाकर इन डील्स का मूल्य रहा लगभग $35 बिलियन

यह आंकड़ा बताता है कि Thoma Bravo सिर्फ निवेश नहीं कर रही, बल्कि रणनीतिक रूप से लाभ भी कमा रही है और पोर्टफोलियो पुनः संतुलित कर रही है।


🧠 अब तक 535+ सॉफ्टवेयर कंपनियों में निवेश

Thoma Bravo दुनिया की उन गिनी-चुनी निवेश कंपनियों में से है जो केवल सॉफ्टवेयर कंपनियों में विशेषज्ञता के साथ निवेश करती हैं। अब तक:

  • 💼 535 से अधिक सॉफ्टवेयर कंपनियों में निवेश
  • 📊 वर्तमान पोर्टफोलियो में 75+ एक्टिव कंपनियाँ
  • 💸 ये कंपनियाँ मिलकर $30 बिलियन की वार्षिक राजस्व उत्पन्न करती हैं
  • 👨‍💻 वैश्विक स्तर पर 93,000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं

इससे साफ है कि Thoma Bravo का प्रभाव केवल निवेश तक सीमित नहीं, बल्कि यह कंपनियों के विकास और वैश्विक स्केल तक फैला है।


🌍 यूरोप में पहला समर्पित फंड: एक नया अध्याय

Thoma Bravo के इस पूंजी संग्रह में सबसे महत्वपूर्ण पहलू है इसका पहला यूरोप-विशिष्ट फंड – Thoma Bravo Europe Fund I। इस फंड में €1.8 बिलियन की प्रतिबद्धता हासिल की गई है।

यूरोप में:

  • टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स और SaaS कंपनियाँ तेज़ी से उभर रही हैं
  • अमेरिकी फंड्स के लिए नए निवेश अवसर तैयार हो रहे हैं
  • Thoma Bravo अब इन कंपनियों में गहरा और विशिष्ट निवेश कर सकेगा

🏢 Thoma Bravo: कहाँ-कहाँ फैला है ऑफिस नेटवर्क?

Thoma Bravo के ऑफिस अब दुनिया के कई बड़े शहरों में मौजूद हैं:

  • 🇺🇸 शिकागो (मुख्यालय)
  • 🇺🇸 डलास
  • 🇺🇸 मियामी
  • 🇺🇸 न्यूयॉर्क
  • 🇺🇸 सैन फ्रांसिस्को
  • 🇬🇧 लंदन (यूरोप की गतिविधियों का केंद्र)

इस वैश्विक नेटवर्क के ज़रिए कंपनी स्थानीय बाजारों की समझ, कनेक्शन, और बिजनेस ग्रोथ में तेजी लाती है।


🤔 भारत के लिए क्या मायने हैं?

हालाँकि Thoma Bravo फिलहाल भारत-केंद्रित फंड नहीं चला रही, लेकिन इस तरह की गतिविधियाँ भारतीय सॉफ्टवेयर और SaaS स्टार्टअप्स के लिए एक संकेत हैं:

  • वैश्विक निवेशक अब सॉफ्टवेयर सेक्टर को सबसे बड़ा और स्थायी ग्रोथ इंजन मानते हैं
  • यूनिकॉर्न बनने के बाद अगर भारतीय स्टार्टअप्स मुनाफा दिखा सकें, तो ऐसे फंड्स से बड़े निवेश की उम्मीद की जा सकती है
  • खासकर SaaS, फिनटेक, क्लाउड और AI क्षेत्रों में आगामी अवसरों के द्वार खुल सकते हैं

📌 निष्कर्ष

Thoma Bravo का $34.4 बिलियन का यह फंडरेज़ सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में बढ़ते वैश्विक विश्वास को दर्शाता है। अमेरिका से लेकर यूरोप तक, यह फर्म अब नए बाजारों में तेज़ और आक्रामक विस्तार कर रही है।

भारत के स्टार्टअप्स के लिए यह एक संकेत है कि टेक्नोलॉजी और मुनाफे का सही संतुलन उन्हें भी इस वैश्विक निवेश की दौड़ में आगे ला सकता है।


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Read more :🚫 Zepto का IPO अब 2026 तक टला:

🚫 Zepto का IPO अब 2026 तक टला:

Zepto

भारत की प्रमुख क्विक कॉमर्स स्टार्टअप Zepto ने अब अपने IPO (Initial Public Offering) की योजना को 2026 तक स्थगित कर दिया है। पहले कंपनी के सह-संस्थापक और CEO आदित पालिचा ने 2025 में IPO लाने की बात कही थी, लेकिन अब आंतरिक समीक्षा के बाद कंपनी ने इसे एक साल आगे खिसका दिया है।

👉 Moneycontrol की एक रिपोर्ट के अनुसार, Zepto आने वाले महीनों में भले ही अपना DRHP (Draft Red Herring Prospectus) दाखिल कर दे, लेकिन 2025 में लिस्टिंग अब लगभग असंभव मानी जा रही है।


📉 क्यों टला IPO?

Zepto के अंदरूनी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि कंपनी इस वक्त अपने वित्तीय आँकड़ों को मजबूत करने में लगी है। मौजूदा समय में:

  • कंपनी का कैश बर्न (नकदी खर्च) ज़्यादा है
  • मुनाफे की स्थिति तक पहुँचने में अभी वक्त लगेगा
  • पब्लिक मार्केट में एंट्री से पहले ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार ज़रूरी है

इसलिए कंपनी ने IPO की जल्दबाज़ी न करते हुए मजबूत वित्तीय प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित किया है।


🔁 पहले भी बदली जा चुकी है IPO टाइमलाइन

Zepto ने 2023 और 2024 में भी अपने IPO की समय-सीमा को कई बार संशोधित किया था। पहले जहां लिस्टिंग 2024 के अंत तक मानी जा रही थी, बाद में इसे 2025 बताया गया, और अब 2026 तक के लिए टाल दिया गया है।

📌 यह इंडिकेशन देता है कि स्टार्टअप सेक्टर में निवेशकों का भरोसा अब सिर्फ ग्रोथ नहीं, बल्कि मुनाफे और स्थायित्व पर भी निर्भर है।


🏚️ Zepto Café: छोटे शहरों में बंद हुए कई यूनिट्स

Zepto की फूड सर्विस यूनिट Zepto Café को भी बड़े झटके लगे हैं। उत्तर भारत के कई छोटे शहरों जैसे:

  • आगरा
  • चंडीगढ़
  • मेरठ
  • मोहाली
  • अमृतसर

…में लगभग 44 कैफे अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। इन बंदियों से 400 से अधिक कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित हुई हैं।

📊 खर्च की बड़ी चुनौती

रिपोर्टों के मुताबिक, Zepto पिछले साल के अंत में हर महीने ₹250 करोड़ से ₹300 करोड़ तक खर्च कर रही थी। यह खर्च कंपनी के तेज़ी से विस्तार और ऑपरेशनल खर्च की वजह से हो रहा था, जिसमें वेयरहाउस, डिलीवरी, राइडर इनसेंटिव्स और कैफे यूनिट्स शामिल हैं।


💸 नया फाइनेंसिंग प्लान: ₹1,500 करोड़ की डेब्ट डील

IPO से पहले कंपनी अपने भारतीय निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इसी उद्देश्य से Zepto:

  • Edelweiss Alternative Asset और अन्य निवेशकों के साथ मिलकर
  • करीब ₹1,500 करोड़ (लगभग $175 मिलियन) की structured debt deal फाइनल कर रही है

इस फंड का उपयोग कंपनी अपने विदेशी निवेशकों से शेयर वापस खरीदने (Buyback) के लिए करेगी। इससे IPO से पहले कंपनी में भारतीय हिस्सेदारी को बढ़ाया जा सकेगा, जो सेबी के नियमों के तहत फायदेमंद माना जाता है।


🔍 Zepto का परिचय: तेज़ डिलीवरी की पहचान

Zepto की शुरुआत 2021 में आदित पालिचा और कौशल वार्धन ने की थी। मात्र 10 मिनट में ग्रोसरी और डेली नीड्स की डिलीवरी ने इस स्टार्टअप को तेजी से लोकप्रिय बना दिया।

  • 📍 प्रमुख शहरों में 200+ डार्क स्टोर
  • 📦 ग्रॉसरी, डेयरी, फल-सब्जी और डेली यूज़ प्रोडक्ट्स
  • 🛵 अत्याधुनिक सप्लाई चेन और राइडर नेटवर्क

Zepto ने Y Combinator, Glade Brook Capital, Nexus Venture Partners, और StepStone Group जैसे नामी निवेशकों से अब तक $560 मिलियन से अधिक फंडिंग जुटाई है।


📉 लेकिन मुनाफा अभी दूर…

तेज़ी से ग्रोथ के बावजूद Zepto अब भी प्रॉफिटबिलिटी से दूर है। भारी डिस्काउंट्स, प्रचार खर्च, और कैफे यूनिट्स जैसे नए एक्सपेरिमेंट्स ने लागत बढ़ा दी है।

📉 रिपोर्ट्स के अनुसार:

  • अब कंपनी कैफे जैसी गैर-मूल सेवाओं को बंद कर रही है
  • कोर ग्रोसरी डिलीवरी ऑपरेशंस पर फोकस बढ़ा रही है
  • क्लस्टर ऑप्टिमाइज़ेशन के ज़रिए डार्क स्टोर नेटवर्क को री-ऑर्गनाइज़ किया जा रहा है

🧠 एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

विशेषज्ञों का मानना है कि Zepto का IPO टालना एक रणनीतिक कदम है:

“IPO मार्केट अब सिर्फ रेवेन्यू ग्रोथ नहीं, बल्कि प्रॉफिटेबिलिटी को भी तवज्जो दे रहा है। ऐसे में Zepto जैसे हाई-बर्न स्टार्टअप्स को खुद को स्थिर साबित करना होगा।” — Startup Analyst


🔮 आगे की रणनीति

  • कैश बर्न कम करना
  • प्रॉफिटबिलिटी हासिल करना
  • भारतीय निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ाना
  • ✅ 2026 तक IPO के लिए तैयारी पूरी करना

Zepto यदि इन मोर्चों पर सफल रहता है, तो 2026 में इसका IPO भारत के सबसे चर्चित टेक लिस्टिंग्स में से एक बन सकता है।


📌 निष्कर्ष

Zepto की कहानी भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की एक झलक पेश करती है—जहां गति ज़रूरी है, लेकिन स्थिरता और मुनाफा अब निवेशकों की पहली प्राथमिकता बन चुके हैं।

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Read more :🥦 Handpickd को मिला ₹21.7 करोड़ का फंड

🥦 Handpickd को मिला ₹21.7 करोड़ का फंड

Handpickd

फार्म-टू-फोर्क मॉडल पर काम करने वाला Bengaluru स्थित स्टार्टअप Handpickd (पहले नाम Sorted) ने अपने Seed राउंड को आगे बढ़ाते हुए ₹21.7 करोड़ (लगभग $2.5 मिलियन) की फंडिंग जुटाई है। इस फंडिंग का नेतृत्व Nitin Gupta और Genesia Ventures ने किया, जिसमें BEENEXT, Stargazer Ventures, Eximius Ventures, और Sunrise Sunset Family Trust जैसे नामी निवेशकों ने भी भाग लिया।


💰 फंडिंग डिटेल्स: किसने कितना निवेश किया?

Registrar of Companies (RoC) में दर्ज मार्च 2025 की फाइलिंग के अनुसार, कंपनी ने कुल 10,547 Series Seed B CCPS शेयर ₹20,566 प्रति शेयर की दर से जारी करने की मंज़ूरी दी है, जिसके ज़रिए ₹21.7 करोड़ की पूंजी जुटाई जा रही है।

मुख्य निवेश इस प्रकार हैं:

  • 🧑‍💼 Nitin Gupta (GG Enterprises): ₹6.48 करोड़
  • 🌍 Genesia Ventures: ₹6 करोड़
  • 🌱 BEENEXT (पहले से मौजूदा निवेशक): ₹2.16 करोड़
  • 👨‍👩‍👦 Sunrise Sunset Family Office: ₹2 करोड़
  • 🤝 Eximius Ventures, Stargazer Ventures, Infinyte Club Angel Fund और Ankit Agarwal: शेष राशि का योगदान

अब तक कंपनी को ₹10.16 करोड़ की राशि मिल चुकी है, और बाकी फंड निकट भविष्य में आने की उम्मीद है।


📊 कंपनी का वैल्यूएशन और प्रोफाइल

इस फंडिंग राउंड के बाद Handpickd का अनुमानित वैल्यूएशन करीब ₹300 करोड़ (लगभग $35 मिलियन) है, जो दर्शाता है कि निवेशक इसके व्यवसाय मॉडल और स्केलेबिलिटी पर भरोसा कर रहे हैं।


🌾 Handpickd क्या करता है?

Handpickd, जिसकी स्थापना Anant Goel, Nitin Gupta और Sahil Madan ने की है, एक B2B2C मॉडल पर काम करता है। यह स्टार्टअप किसानों और छोटे विक्रेताओं से सीधे फलों और सब्जियों की ख़रीद करता है, और इन्हें अपने टेक्नोलॉजी-चालित सप्लाई चेन के ज़रिए ग्राहकों तक पहुँचाता है।

🧑‍🌾 कंपनी का यूनिक मॉडल स्थानीय माइक्रो-एंटरप्रेन्योर्स को जोड़ता है, जो अंतिम मील (last-mile) डिलीवरी की कुशलता से ज़िम्मेदारी निभाते हैं।


📈 वित्तीय प्रदर्शन: FY24 में शानदार ग्रोथ

डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफ़ॉर्म TheKredible के अनुसार, FY24 (मार्च 2024 तक) में कंपनी ने:

  • ₹17.5 करोड़ की ऑपरेटिंग इनकम दर्ज की — FY23 के ₹7.4 करोड़ की तुलना में 2.3 गुना ज़्यादा
  • घाटा लगभग ₹2.1 करोड़ रहा — पिछले साल के बराबर

यह साफ़ दर्शाता है कि कंपनी लागत नियंत्रण के साथ-साथ तेज़ी से रेवेन्यू ग्रोथ कर रही है।


🤝 पुराने निवेशक कौन-कौन?

Handpickd को अब तक कुल $9 मिलियन (₹75 करोड़ से ज़्यादा) की फंडिंग मिल चुकी है। इसके प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:

  • 🌟 BEENEXT
  • 🌱 Blume Ventures
  • 💼 Kunal Bahl और Rohit Bansal (Snapdeal के सह-संस्थापक)

🧺 किससे है मुकाबला?

Handpickd का सीधा मुकाबला उन स्टार्टअप्स से है जो farm-to-fork मॉडल पर काम करते हैं:

  • 🥕 Otipy – अब तक $49 मिलियन जुटा चुका है
  • 🥬 Fraazo$61 मिलियन फंडिंग के बाद भी ऑपरेशन बंद कर चुका है
  • 🍅 Deep Rooted$20 मिलियन उठाने के बावजूद संघर्ष कर रहा है
  • 🍏 Pluckk – करीना कपूर समर्थित स्टार्टअप जो अब $10 मिलियन जुटाने की तैयारी में है

📌 इन सभी के मुकाबले Handpickd का lean model और ग्रासरूट सप्लाई चेन इसे अलग बनाता है।


🌱 क्यों है Handpickd की ग्रोथ खास?

  • 🚛 माइक्रो-लॉजिस्टिक्स नेटवर्क: अंतिम मील की डिलीवरी को तेज़ और किफायती बनाता है
  • 📲 टेक इंटीग्रेशन: किसानों, डिलीवरी एग्जीक्यूटिव्स और ग्राहकों के लिए एकीकृत प्लेटफॉर्म
  • 🏪 स्थानीय सस्टेनेबिलिटी: छोटे विक्रेताओं को सशक्त बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती

🔮 भविष्य की राह

नए फंड का उपयोग कंपनी टेक्नोलॉजी अपग्रेड, सप्लाई चेन विस्तार, और नए शहरों में एंट्री के लिए करेगी। B2B2C मॉडल को और गहराई देने की योजना के साथ, Handpickd खुद को एक फ्यूचर-रेडी एग्री स्टार्टअप के रूप में स्थापित कर रहा है।


✍️ निष्कर्ष

जहां एक ओर कई farm-to-fork स्टार्टअप्स फंडिंग के बावजूद टिक नहीं पाए, वहीं Handpickd का संतुलित ग्रोथ, मुनाफा नियंत्रण और मजबूत माइक्रो-इकोनॉमी इकोसिस्टम इसको एक स्थायी मॉडल की तरह पेश करता है।

📢 ऐसे ही फंडिंग अपडेट्स और स्टार्टअप इनसाइट्स के लिए पढ़ते रहिए — FundingRaised.in

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⚡ Ola Electric से Hyundai और Kia का बाहर निकलना

ola electric

भारतीय इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। दक्षिण कोरिया की दो प्रमुख ऑटो कंपनियां — Hyundai Motor और Kia Corporation — ने भारत की EV कंपनी Ola Electric से अपना पूरा निवेश निकाल लिया है। दोनों कंपनियों ने मंगलवार को ब्लॉक डील के ज़रिए कुल ₹690 करोड़ में अपनी हिस्सेदारी बेच दी, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि वे भारत में अपने EV निवेश को रणनीतिक रूप से कम कर रही हैं।


💸 कितनी हिस्सेदारी बेची गई और किसे?

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बुल्क डील डेटा के मुताबिक:

  • Hyundai ने अपनी 2.47% हिस्सेदारी ₹552 करोड़ में बेची।
  • Kia ने अपनी 0.62% हिस्सेदारी ₹137 करोड़ में बेची।

इस डील का सबसे बड़ा खरीदार रहा Citigroup Global Markets Mauritius, जिसने Ola Electric की 1.95% हिस्सेदारी (8.61 करोड़ शेयर) ₹435 करोड़ में खरीदी।

📌 दिलचस्प बात यह रही कि बाकी खरीदारों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे डील को लेकर बाज़ार में कुछ सवाल भी उठे हैं।


📉 Ola Electric की गिरती आर्थिक स्थिति

Hyundai और Kia का Ola Electric से बाहर निकलना ऐसे समय पर हुआ है जब कंपनी की वित्तीय स्थिति लगातार कमजोर हो रही है।

🔻 FY25 की चौथी तिमाही में Ola Electric को ₹862 करोड़ का घाटा हुआ, जो कि पिछले साल की समान तिमाही (Q4 FY24) के ₹418 करोड़ के घाटे से दोगुना है।

📉 कंपनी की ऑपरेटिंग इनकम में भी भारी गिरावट आई है – यह 50% तक घटकर ₹611 करोड़ रह गई।

🔴 पूरे FY25 में, कंपनी को कुल ₹2,276 करोड़ का घाटा हुआ, जबकि FY24 में यह ₹1,584 करोड़ था।

इस वित्तीय दबाव का सीधा असर कंपनी के शेयर पर भी पड़ा है। बुधवार को Ola Electric का शेयर 8% से ज्यादा गिरकर ₹49.61 पर बंद हुआ, जिससे कंपनी का मार्केट कैप ₹21,882 करोड़ ($2.57 बिलियन) तक सिमट गया।


🔄 2019 में हुआ था बड़ा निवेश

बात करें पीछे की, तो 2019 में Hyundai और Kia ने संयुक्त रूप से $300 मिलियन (करीब ₹2,400 करोड़) का निवेश Ola Electric में किया था। यह निवेश भारत में उनके EV विस्तार की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा था।

लेकिन 5 साल बाद अब दोनों कंपनियों ने एक साथ कंपनी से पूरी तरह से बाहर निकलने का निर्णय लिया है। इसे ऑटोमोबाइल सेक्टर के विशेषज्ञ एक रणनीतिक रिव्यू के रूप में देख रहे हैं।


❓ Ola Electric के लिए आगे का रास्ता

Hyundai और Kia जैसे बड़े रणनीतिक निवेशकों का बाहर निकलना Ola Electric के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। इससे:

  • कंपनी की रणनीतिक स्थिरता पर असर पड़ सकता है।
  • इनोवेशन और प्रोडक्ट डिवेलपमेंट के लिए सहयोग की संभावनाएं घट सकती हैं।

हालांकि, Citigroup जैसे वैश्विक निवेशक का आना यह दर्शाता है कि Ola Electric में अब भी निवेशकों की रुचि बनी हुई है, लेकिन यह देखना बाकी है कि कंपनी किस तरह से FY26 तक मुनाफे की ओर बढ़ेगी


🕵️‍♂️ खरीदारों की पहचान क्यों नहीं बताई गई?

Hyundai और Kia ने जो हिस्सेदारी बेची, उसमें से 63% से ज्यादा हिस्सेदारी उन निवेशकों ने खरीदी जिनकी पहचान सामने नहीं आई है।

इससे बाज़ार में कुछ आशंकाएं भी जताई जा रही हैं, जैसे:

  • क्या ये निवेशक लंबे समय तक कंपनी में टिकेंगे?
  • क्या Ola Electric को कोई प्राइवेट इक्विटी या रणनीतिक निवेशक धीरे-धीरे टेकओवर कर रहा है?

इन सवालों का जवाब आने वाले समय में Ola Electric की फाइनेंशियल रिपोर्ट्स और बोर्ड स्ट्रक्चर में हो सकने वाले बदलावों से मिल सकता है।


📈 Ola Electric: भारत का EV फ्लैगशिप या संघर्षरत स्टार्टअप?

Ola Electric ने भारत के इलेक्ट्रिक स्कूटर बाजार में तेज़ी से पकड़ बनाई थी और अपने IPO के ज़रिए एक यूनिकॉर्न की तरह उभरी। लेकिन पिछले कुछ समय से कंपनी को लगातार:

  • उत्पादन में चुनौतियां,
  • वित्तीय घाटा,
  • और प्रौद्योगिकी संबंधी सवालों का सामना करना पड़ रहा है।

इन सबके बीच Hyundai और Kia जैसे दिग्गजों का बाहर निकलना Ola Electric के भविष्य के लिए सावधानी की घंटी हो सकता है।


✍️ निष्कर्ष

भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का भविष्य उज्ज्वल है, लेकिन यह रास्ता आसान नहीं है। Ola Electric जैसे स्टार्टअप्स को:

  • वित्तीय अनुशासन,
  • रणनीतिक साझेदारों की स्थिरता,
  • और तकनीकी नवाचार के साथ बाज़ार में टिकना होगा।

Hyundai और Kia का बाहर निकलना एक सिग्नल है कि बड़ी कंपनियां भी अब अपने EV निवेशों की समीक्षा कर रही हैं, और Ola Electric को अब अपने दम पर टिकने की ज़रूरत है।

📢 ऐसे ही EV और स्टार्टअप से जुड़ी हिंदी में विस्तृत खबरों के लिए पढ़ते रहिए – FundingRaised.in

Read more :🚨 CoinDCX में सीनियर लेवल पर भारी उथल-पुथल,

🚨 CoinDCX में सीनियर लेवल पर भारी उथल-पुथल,

CoinDCX

भारत की अग्रणी क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज CoinDCX इस समय एक और बड़ी आंतरिक चुनौती का सामना कर रही है। सूत्रों के अनुसार, कंपनी के कई शीर्ष अधिकारी – जैसे कि चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (CTO), हेड ऑफ फाइनेंस और हेड ऑफ लीगल – जल्द ही कंपनी से विदा लेने जा रहे हैं।

इससे पहले भी कंपनी ने लागत घटाने और संचालन को बेहतर करने के उद्देश्य से कई ढांचागत बदलाव किए थे, लेकिन अब यह टॉप-लेवल एग्जिट्स एक नए मोड़ की ओर इशारा कर रहे हैं।


🏢 CoinDCX में कौन-कौन छोड़ रहा है पद?

सूत्रों के अनुसार, CoinDCX के निम्न वरिष्ठ अधिकारी कंपनी छोड़ रहे हैं:

  • CTO (चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर)
  • हेड ऑफ फाइनेंस (वित्त प्रमुख)
  • हेड ऑफ लीगल (कानूनी प्रमुख)

इन पदों से हटना कंपनी के आंतरिक पुनर्गठन का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य संचालन को सरल बनाना और लागत में कटौती करना है।


🔁 फिर से छंटनी की शुरुआत

CoinDCX ने एक बार फिर लेऑफ (छंटनी) की प्रक्रिया शुरू कर दी है, हालांकि प्रभावित कर्मचारियों की संख्या स्पष्ट नहीं है।

📌 पिछली छंटनी – अगस्त 2023 में CoinDCX ने लगभग 12% कर्मचारियों को नौकरी से निकाला था, जो कि करीब 70 लोगों पर असर डालने वाला निर्णय था।


📉 कारोबार में गिरावट और नियमों की परेशानी

सूत्रों का कहना है कि यह बदलाव कंपनी के लिए चुनौतीपूर्ण समय में हो रहे हैं क्योंकि CoinDCX को ट्रेडिंग वॉल्यूम में गिरावट और बढ़ते नियामकीय दबाव (compliance headache) का सामना करना पड़ रहा है।

भारत में क्रिप्टो सेक्टर अभी भी स्पष्ट रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के इंतजार में है, और इससे जुड़े स्टार्टअप्स को लगातार वित्तीय और कानूनी जांच का सामना करना पड़ रहा है।


📣 CoinDCX ने दी प्रतिक्रिया

कंपनी के प्रवक्ता ने इन टॉप-लेवल एग्जिट्स की पुष्टि करते हुए कहा:

“हम अपनी टीमों को मजबूत बना रहे हैं और लीडरशिप बेंच को नए टैलेंट्स के साथ सशक्त कर रहे हैं। हमारे पास इस समय 100 से अधिक ओपन पोजीशन्स हैं, जिनमें CFO और जनरल काउंसल जैसी सीनियर भूमिकाएं शामिल हैं।”

उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी ने अपने अंतरराष्ट्रीय विस्तार से कारोबार में तेज़ी से ग्रोथ देखी है और यह ट्रेंड आगे भी जारी रहेगा।


🌍 MENA क्षेत्र में CoinDCX का विस्तार

CoinDCX ने हाल ही में बहरीन में अपनी सहायक कंपनी BitOasis के ज़रिए अपना परिचालन शुरू किया है। यह कदम MENA (Middle East & North Africa) क्षेत्र में कंपनी के विस्तार की रणनीति का हिस्सा है।

CEO सुमित गुप्ता के नेतृत्व में CoinDCX का लक्ष्य है कि भविष्य में कुल राजस्व का 30% इसी अंतरराष्ट्रीय बाजार से आए।


🦄 एक यूनिकॉर्न की कहानी

CoinDCX की यात्रा 2018 में शुरू हुई थी और अगस्त 2021 में यह कंपनी यूनिकॉर्न बनी, जब इसे $90 मिलियन की सीरीज़ C फंडिंग मिली थी।

इसके बाद अप्रैल 2022 में कंपनी ने $135 मिलियन जुटाए और इसका वैल्यूएशन $2 बिलियन से ऊपर पहुंच गया।

📉 हालांकि, पिछले तीन वर्षों में कंपनी ने कोई भी नई बाहरी फंडिंग नहीं जुटाई है, जो इंडस्ट्री की अनिश्चितता को दर्शाता है।


🔍 भारत में क्रिप्टो सेक्टर की चुनौतियां

भारत में क्रिप्टो कंपनियां एक लंबे समय से वित्तीय निगरानी एजेंसियों की जांच के दायरे में हैं।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने CoinDCX सहित कई कंपनियों को FEMA (Foreign Exchange Management Act) के संभावित उल्लंघनों की जांच के लिए समन भेजा है।

📄 रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार जून 2025 में एक डिस्कशन पेपर जारी करने की योजना बना रही है, जिसमें क्रिप्टो एसेट्स को लेकर संभावित नीतियों पर चर्चा होगी।

यह पेपर IMF (International Monetary Fund) और FSB (Financial Stability Board) की संयुक्त रिपोर्ट पर आधारित होगा।


🧠 CoinDCX के लिए आगे का रास्ता

CoinDCX के सामने इस समय कई मोर्चों पर चुनौतियां हैं:

  • बिज़नेस वॉल्यूम में गिरावट
  • रेगुलेटरी अनिश्चितता
  • अंदरूनी टीम में बड़े बदलाव

लेकिन कंपनी के प्रवक्ता और CEO का कहना है कि:

“हम लगातार अपने बिज़नेस मॉडल को मजबूत कर रहे हैं और इंटरनेशनल मार्केट्स में हमारी मौजूदगी तेज़ी से बढ़ रही है।”


✍️ निष्कर्ष

भारत में क्रिप्टो सेक्टर का भविष्य अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन CoinDCX जैसी कंपनियों का विकास और चुनौतियों से निपटने की रणनीति इस पूरे क्षेत्र के लिए एक टेस्ट केस की तरह है।

जहां एक ओर टॉप लेवल एग्जिट्स और छंटनी से कंपनी को आंतरिक रूप से झटका लगा है, वहीं दूसरी ओर इंटरनेशनल विस्तार और नेतृत्व पुनर्गठन से नई उम्मीदें भी जगी हैं।

📢 भारत में क्रिप्टो रेगुलेशन और स्टार्टअप दुनिया की ताज़ा खबरों के लिए पढ़ते रहिए FundingRaised.in

Read more :🤖 Veris AI को मिला $8.5 मिलियन Seed फंडिंग 📈

🤖 Veris AI को मिला $8.5 मिलियन Seed फंडिंग 📈

Veris AI

AI एजेंट्स की सुरक्षित ट्रेनिंग और टेस्टिंग के लिए विकसित प्लेटफॉर्म को मिला वेंचर कैपिटल का साथ

न्यूयॉर्क आधारित एडवांस्ड AI ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म Veris AI ने हाल ही में $8.5 मिलियन (लगभग ₹71 करोड़) की Seed फंडिंग जुटाई है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Decibel Ventures और Acrew Capital ने किया, जिसमें कई प्रमुख एंजल निवेशकों जैसे Ian Livingstone, The House Fund, Idris Mokhtarzada और Dorothy Chang ने भाग लिया।


🎯 क्या करता है Veris AI?

Veris AI एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो कंपनियों को AI एजेंट्स (जैसे चैटबॉट्स और वर्चुअल असिस्टेंट्स) को सुरक्षित, रियलिस्टिक और हाई-फिडेलिटी सिमुलेटेड एनवायरनमेंट में ट्रेन और टेस्ट करने की सुविधा देता है।

मुख्य विशेषताएं:

  • अनुभवात्मक ट्रेनिंग ग्राउंड
  • रिइनफोर्समेंट लर्निंग सपोर्ट
  • उद्योगों के लिए कस्टम सिमुलेशन
  • नियमित सुधार और प्रदर्शन विश्लेषण

इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य कंपनियों को AI मॉडल को वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षण करने में सहायता देना है — बिना किसी वास्तविक नुकसान या जोखिम के


💡 CEO Mehdi Jamei की अगुवाई में बढ़ता प्रभाव

Veris AI के CEO मेहदी जमेई (Mehdi Jamei) के नेतृत्व में यह कंपनी शुरुआती ग्राहकों के साथ फोकस इंडस्ट्रीज में पायलट प्रोजेक्ट चला रही है। इसमें शामिल हैं:

  • वित्तीय सेवा (Fintech)
  • एंटरप्राइज़ प्रोडक्टिविटी
  • मैन्युफैक्चरिंग

🧪 प्रमुख उपयोग मामलों की झलक

1️⃣ फिनटेक कंपनी के लिए रेगुलेटरी-सुरक्षित चैटबॉट्स

एक कंज़्यूमर फिनटेक कंपनी Veris AI का उपयोग करके ऐसे चैटबॉट्स डेवलप कर रही है जो नियामकीय (regulatory) फ्रेमवर्क के भीतर कार्य करते हैं। इसमें शामिल हैं:

  • संवेदनशील जानकारी का लीक न होना
  • संभावित रेगुलेटरी उल्लंघन की पहचान
  • यूज़र संवाद की रियलिस्टिक सिमुलेशन

इससे कंपनी को बिना नियामकीय जोखिम बढ़ाए नई यूज़र एंगेजमेंट चैनल्स खोलने में मदद मिल रही है।


2️⃣ HR टेक स्टार्टअप के लिए विश्वसनीय AI असिस्टेंट्स

एक HR टेक कंपनी Veris का उपयोग करके ऐसे AI असिस्टेंट्स ट्रेन कर रही है जो:

  • जटिल मीटिंग शेड्यूलिंग
  • गोपनीय जानकारी शेयरिंग
  • प्रफेशनल ईमेलिंग

जैसे कार्यों को सुरक्षित और जिम्मेदारी से कर सकें। यह विशेष रूप से उन संगठनों के लिए जरूरी है जहां एक छोटी गलती भी भरोसे को नुकसान पहुंचा सकती है।


3️⃣ मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सप्लाई चेन एजेंट की ट्रेनिंग

एक निर्माण कंपनी Veris AI का इस्तेमाल कर रही है सप्लाई चेन ऑप्टिमाइजेशन एजेंट को सिखाने के लिए। इसमें निम्न कार्य शामिल हैं:

  • सप्लायर रिसर्च
  • RFP जनरेशन
  • ईमेल कम्युनिकेशन
  • रेट नेगोसिएशन
  • रिस्क इवैल्युएशन

AI को पहले से इन पर सिमुलेटेड वातावरण में अभ्यास कराकर, कंपनी संभावित वित्तीय हानि, ब्रांड डैमेज या कानूनी जोखिमों से बच रही है।


📊 फंडिंग का उपयोग

Veris AI इस फंडिंग का उपयोग मुख्यतः तीन प्रमुख क्षेत्रों में करेगी:

  1. टीम का विस्तार – इंजीनियरिंग, डेटा साइंस और नीति विशेषज्ञों की नियुक्ति
  2. प्रोडक्ट डेवलपमेंट – प्लेटफॉर्म की परफॉर्मेंस और यूज़र इंटरफेस को और बेहतर बनाना
  3. ऑपरेशनल स्केलिंग – और अधिक उद्यमों के लिए AI एजेंट ट्रेनिंग की सेवाएं उपलब्ध कराना

🌐 क्यों है Veris AI खास?

आज के समय में जब AI तेजी से हर इंडस्ट्री में घुस रहा है, कंपनियों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे अपने AI सिस्टम्स को असली दुनिया जैसे हालातों में परखें – लेकिन बिना किसी हानि के।

Veris AI यह समाधान देकर:

  • कंपनियों को AI के साइड इफेक्ट्स से बचाता है
  • रीइनफोर्समेंट लर्निंग का सुरक्षित प्लेटफॉर्म देता है
  • और उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले, भरोसेमंद और कॉम्प्लायंट AI एजेंट्स बनाने में मदद करता है।

🧠 भारत के लिए क्या मायने?

भारत में भी AI तेजी से हेल्थटेक, फिनटेक, एग्रीटेक और एंटरप्राइज़ सॉल्यूशंस में प्रवेश कर रहा है। Veris AI जैसे प्लेटफॉर्म आने वाले समय में भारतीय कंपनियों के लिए भी अहम भूमिका निभा सकते हैं, खासकर:

  • BFSI सेक्टर के लिए रेगुलेटरी AI
  • Edtech के लिए पर्सनलाइज्ड बॉट्स
  • HR और Productivity Tools में भरोसेमंद AI असिस्टेंट्स

📌 निष्कर्ष

Veris AI का $8.5 मिलियन फंडिंग राउंड यह संकेत देता है कि AI को सुरक्षित और असरदार ढंग से स्केल करने की ज़रूरत वैश्विक हो चुकी है। कंपनी के द्वारा उपलब्ध कराया गया सिमुलेटेड ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म एंटरप्राइज़ AI को एक नई दिशा दे रहा है।

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Probo ने नीति प्रमुख के रूप में Shimal Kapoor की नियुक्ति की,

Probo

भारत के तेजी से उभरते opinion trading प्लेटफॉर्म Probo ने नीति और विनियामक मामलों को मज़बूती देने के लिए Shimal Kapoor को अपना नया Head of Policy नियुक्त किया है। कंपनी का कहना है कि यह नियुक्ति भारत के स्किल-बेस्ड गेमिंग सेक्टर में नीतिगत संवाद को दिशा देने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।


🎯 नियामकों से संवाद में मिलेगी मज़बूती

Probo, जो वर्तमान में 3.4 करोड़ से अधिक यूज़र्स को सेवाएं दे रहा है, ने कहा कि यह रणनीतिक नियुक्ति कंपनी की उस योजना का हिस्सा है जिसके तहत वह देश में स्किल-बेस्ड गेमिंग के लिए मजबूत रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को सहयोग देना चाहता है।

🧩 Shimal Kapoor कौन हैं?

Shimal Kapoor कानून और पब्लिक पॉलिसी की दुनिया में एक अनुभवी चेहरा हैं। उन्होंने इससे पहले:

  • Meta (पूर्व में Facebook)
  • World Bank Group
  • और भारत की प्रमुख लॉ फर्म Shardul Amarchand Mangaldas & Co. में काम किया है।

अब वह Probo में नीति निर्माण, सरकारी निकायों से संवाद और रेगुलेटरी एडवोकेसी की जिम्मेदारी संभालेंगी।


📢 Shimal Kapoor का बयान

अपनी नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए Shimal ने कहा:

“भारत का स्किल-बेस्ड गेमिंग सेक्टर एक बड़े बदलाव के मोड़ पर है, जो डिजिटल इनोवेशन और आर्थिक प्रगति दोनों में योगदान दे रहा है। Probo ने बहुत कम समय में खुद को opinion trading में अग्रणी बना लिया है। मैं अपनी विशेषज्ञता से कंपनी को नीति-निर्माताओं और स्टेकहोल्डर्स से बेहतर जुड़ाव में सहयोग करने के लिए उत्साहित हूं।”


📱 क्या है Probo?

Probo एक opinion trading platform है, जहां यूज़र्स खेल, एंटरटेनमेंट और करंट अफेयर्स जैसे असली दुनिया के इवेंट्स पर अपनी राय देकर ट्रेडिंग कर सकते हैं।

इसके फीचर्स में शामिल हैं:

  • Yes/No type predictions
  • Real-time opinion market
  • Rewards based on market outcomes

Probo का दावा है कि वह भारत का सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय ओपिनियन ट्रेडिंग ऐप बन चुका है।


💹 जबरदस्त राजस्व वृद्धि

TheKredible के आंकड़ों के अनुसार, Probo ने वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) में ऑपरेशनल रेवेन्यू में जबरदस्त छलांग लगाई है:

वित्तीय वर्षऑपरेशनल रेवेन्यूनेट प्रॉफिट
FY23₹86 करोड़₹3.7 करोड़
FY24₹459 करोड़₹92 करोड़

यह कंपनी के स्केलेबिलिटी और प्रभावशाली ग्रोथ को दर्शाता है। बहुत कम भारतीय स्टार्टअप्स इतने कम समय में प्रॉफिटेबिलिटी हासिल कर पाते हैं।


💼 निवेशकों का भरोसा

Probo को देश-विदेश के प्रमुख वेंचर कैपिटल फर्म्स का समर्थन प्राप्त है, जिनमें शामिल हैं:

  • Peak XV Partners (पूर्व में Sequoia India)
  • Elevation Capital
  • Fundamentum Partnership

इन निवेशकों का उद्देश्य Probo को भारत में स्किल-बेस्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लीडर्स में लाना है।


🧠 क्यों ज़रूरी है नीति प्रमुख की नियुक्ति?

भारत में ऑनलाइन गेमिंग और स्किल-बेस्ड गेमिंग से जुड़े नियम अभी भी विकासशील अवस्था में हैं। केंद्र और राज्य सरकारें विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रही हैं, जैसे:

  • गेमिंग को लेकर टैक्सेशन नीति
  • कौन-से गेम skill-based हैं और कौन-से chance-based
  • यूज़र्स की सुरक्षा
  • विज्ञापन और प्रचार के नियम

ऐसे समय में किसी कंपनी का सरकार और नीति-निर्माताओं से संवाद में सक्रिय होना बहुत आवश्यक हो जाता है। Shimal Kapoor जैसे अनुभवी नीति विशेषज्ञ के जुड़ने से Probo को:

  • विनियामक परिवेश को समझने
  • सरकार के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने
  • और स्किल-बेस्ड गेमिंग को मान्यता दिलाने में सहायता मिलेगी।

📍 आगे का रास्ता

Probo की रणनीति स्पष्ट है — वह न केवल टेक्नोलॉजी और यूज़र एक्सपीरियंस में अग्रणी बनना चाहता है, बल्कि भारत में ओपिनियन ट्रेडिंग के लिए एक सशक्त और जिम्मेदार फ्रेमवर्क का हिस्सा भी बनना चाहता है।

Shimal Kapoor की नियुक्ति इसी दिशा में एक निर्णायक कदम है। आने वाले महीनों में हम देखेंगे कि Probo भारत के गेमिंग, टेक और नीति निर्माण के संगम पर कैसे अपनी पहचान और मजबूत करता है।


📢 निष्कर्ष

भारत में स्किल-बेस्ड गेमिंग इंडस्ट्री को एक स्पष्ट, पारदर्शी और यूज़र-फ्रेंडली रेगुलेटरी वातावरण की ज़रूरत है। Probo ने यह संकेत दिया है कि वह न सिर्फ इस सेक्टर को लीड करना चाहता है, बल्कि इसे नीति के स्तर पर भी सुरक्षित और स्थिर बनाना चाहता है।

ऐसे ही और स्टार्टअप अपडेट्स और नीति बदलावों के लिए पढ़ते रहें FundingRaised.in

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