साप्ताहिक भारतीय स्टार्टअप फंडिंग रिपोर्ट: 32 स्टार्टअप्स ने जुटाए $375.52 मिलियन

Last Week Indian startups

पिछले सप्ताह में, 32 भारतीय स्टार्टअप्स ने सामूहिक रूप से लगभग $375.52 मिलियन की फंडिंग प्राप्त की। इसमें 7 ग्रोथ-स्टेज डील्स और 22 अर्ली-स्टेज डील्स शामिल थीं। इसके अतिरिक्त, 3 स्टार्टअप्स ने अपने सौदे के विवरण साझा नहीं किए।

पिछले सप्ताह की तुलना में, जब 23 अर्ली और ग्रोथ-स्टेज स्टार्टअप्स ने कुल लगभग $137 मिलियन जुटाए थे, इस सप्ताह स्टार्टअप फंडिंग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

ग्रोथ-स्टेज फंडिंग डील्स

इस सप्ताह ग्रोथ-स्टेज फंडिंग में, कॉन्टैक्टलेस पेमेंट सॉल्यूशंस प्रदाता ToneTag ने $78 मिलियन की सीरीज़ B फंडिंग जुटाई, जिसका नेतृत्व ValueQuest S.C.A.L.E. Fund ने किया। वहीं, SpotDraft, जो एक कॉन्ट्रैक्ट लाइफसाइकिल मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म है, ने $54 मिलियन जुटाए, जिसमें Vertex Growth Singapore और Trident Partners प्रमुख निवेशक थे।

इसके अलावा, आधुनिक बैंकिंग टेक कंपनी Zeta ने $50 मिलियन की फंडिंग प्राप्त की, जिससे इसकी वैल्यूएशन $2 बिलियन हो गई। इस सप्ताह फंडिंग प्राप्त करने वाले अन्य ग्रोथ-स्टेज स्टार्टअप्स में AI स्टार्टअप 75F, मोबिलिटी कंपनी Rapido, इलेक्ट्रिक बस निर्माता PMI Electro Mobility और D2C फुटवियर ब्रांड JQR शामिल हैं।

अर्ली-स्टेज फंडिंग डील्स

इस सप्ताह 22 अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स ने कुल $64.82 मिलियन की फंडिंग प्राप्त की। इनमें Lucidity ने सबसे अधिक $21 मिलियन (सीरीज़ A) जुटाए। इसके बाद BorderPlus, Boldcare और CapGrid Solutions जैसे स्टार्टअप्स ने भी महत्वपूर्ण निवेश प्राप्त किया।

ऑनलाइन इंग्लिश ट्यूटरिंग ऐप Bambinos.live, हेल्थकेयर स्टार्टअप Lifesigns और फाइनेंशियल रिसर्च प्लेटफॉर्म Rubyworks ने भी निवेश प्राप्त किया, हालांकि उन्होंने राशि का खुलासा नहीं किया।

शहर और सेगमेंट के अनुसार फंडिंग डील्स

शहरवार फंडिंग ट्रेंड में बेंगलुरु सबसे आगे रहा, जहां 15 स्टार्टअप्स ने फंडिंग हासिल की। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और अन्य शहरों में स्टार्टअप्स ने निवेश प्राप्त किया।

सेगमेंट के हिसाब से, फिनटेक स्टार्टअप्स शीर्ष पर रहे, जिन्होंने 5 डील्स हासिल कीं। इसके बाद SaaS, AI और हेल्थटेक स्टार्टअप्स को 3-3 डील्स प्राप्त हुईं। एडटेक, ईवी, ई-कॉमर्स और अन्य स्टार्टअप्स ने भी निवेश जुटाया।

सीरीज़ के अनुसार फंडिंग ट्रेंड

इस सप्ताह सीड फंडिंग सबसे आगे रही, जिसमें 11 डील्स हुईं। इसके बाद सीरीज़ B, सीरीज़ A, प्री-सीड और प्री-सीरीज़ A डील्स हुईं।

साप्ताहिक फंडिंग ट्रेंड

साप्ताहिक तुलना में, स्टार्टअप फंडिंग 2.7X बढ़कर $375.52 मिलियन हो गई, जबकि पिछले सप्ताह यह $136.93 मिलियन थी।

पिछले 8 हफ्तों का औसत फंडिंग आंकड़ा $291.21 मिलियन रहा, जिसमें प्रति सप्ताह औसतन 25 डील्स हुईं।

महत्वपूर्ण नियुक्तियां और इस्तीफे

  • Navi Group ने राजीव नरेश को Navi Technologies का CEO और अभिषेक द्विवेदी को Navi Finserv का CEO नियुक्त किया।
  • EV निर्माता Euler Motors ने आशीष टंडन को ग्लोबल हेड ऑफ कस्टमर एक्सीलेंस बनाया।
  • पंकज त्रिपाठी ऑडियो प्लेटफॉर्म Velevet के को-फाउंडर बने।
  • Razorpay ने खिलन हरिया को CPO (Chief Product Officer) नियुक्त किया।
  • Peak XV के शैलेश लखानी और अभीक आनंद ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

अधिग्रहण (M&A) अपडेट

  • KiranaPro ने Joper.app का अधिग्रहण किया।
  • MSys Technologies ने फिनटेक कंपनी Gophers Lab का अधिग्रहण किया।

नए फंड लॉन्च

  • Triton VC ने ₹240 करोड़ ($28 मिलियन) के दूसरे फंड की पहली क्लोजिंग की।
  • IXP VC ने B2B स्टार्टअप्स के लिए एक नया फंड लॉन्च किया।
  • WTFund ने 22 नए युवा फाउंडर्स को ग्रांट और मेंटरशिप दी।

ESOP बायबैक

राइड-हेलिंग कंपनी Rapido ने पहली बार अपने कर्मचारियों के लिए ESOP लिक्विडेशन प्रोग्राम की घोषणा की।

नई लॉन्च और पार्टनरशिप

  • Exotel ने Knowmax के साथ साझेदारी की।
  • Tata Elxsi और Garuda Aerospace ने MoU साइन किया।
  • Rebel Foods ने QuickiES नामक 15-मिनट फूड डिलीवरी ऐप लॉन्च किया।
  • Rapido कर्नाटक में महिलाओं के लिए विशेष बाइक टैक्सी सेवा शुरू करेगी।

वित्तीय रिपोर्ट (Q3 FY25)

  • Nykaa का रेवेन्यू ₹2,267 करोड़ पहुंचा, प्रॉफिट 52% बढ़ा
  • Mamaearth की पैरेंट कंपनी Honasa फिर से मुनाफे में आई।
  • Ola का रेवेन्यू 11% गिरा, लेकिन EBITDA प्रॉफिटेबल हुआ।
  • Magicpin का रेवेन्यू ₹870 करोड़ पहुंचा, घाटा कम हुआ।
  • EaseMyTrip का प्रॉफिट घटा, जबकि Yatra का 10X बढ़ा

संभावित डील्स

  • Rapido ₹250 करोड़ जुटाने की तैयारी में है।
  • Lahori ₹400-450 करोड़ की फंडिंग जुटाने पर बातचीत कर रही है।
  • Solv और Jumbotail मर्जर की योजना बना रहे हैं।

समाप्ति

इस सप्ताह भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में तेज़ी से वृद्धि देखी गई। प्रमुख कंपनियों ने IPO की योजनाएं, नए निवेश, और स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की घोषणाएं कीं। आने वाले हफ्तों में स्टार्टअप सेक्टर और भी रोमांचक बदलाव देख सकता है।

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EaseMyTrip के Q3 FY25 वित्तीय नतीजे: राजस्व और लाभ में गिरावट दर्ज

EaseMyTrip

भारत की प्रमुख ऑनलाइन ट्रैवल एग्रीगेटर (OTA) कंपनी EaseMyTrip ने शुक्रवार को अपने Q3 FY25 (अक्टूबर-दिसंबर 2024) के वित्तीय नतीजे जारी किए। इन नतीजों में कंपनी के राजस्व और मुनाफे में कमी, जबकि खर्चों में वृद्धि देखने को मिली है।

EaseMyTrip की वित्तीय स्थिति यात्रा और पर्यटन क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और वैश्विक आर्थिक परिवर्तनों के प्रभाव को दर्शाती है। हालांकि, कंपनी ने कुछ रणनीतिक कदम उठाए हैं, जो भविष्य में इसे लाभ की ओर ले जा सकते हैं।

EaseMyTrip के राजस्व में 6.3% की गिरावट

EaseMyTrip की कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू (Revenue from operations) Q3 FY25 में ₹150 करोड़ रही, जो पिछले साल इसी तिमाही (Q3 FY24) में ₹160 करोड़ थी।

  • यह 6.3% की गिरावट दर्शाता है, जो ट्रैवल सेक्टर में मांग की स्थिरता और अन्य कारकों के कारण हो सकता है।
  • EaseMyTrip का मुख्य राजस्व एयर टिकटिंग से आया, जो कुल राजस्व का 65% है।
  • होटल और पैकेज सेवाओं से 22% का योगदान रहा, जो कंपनी के बिजनेस पोर्टफोलियो में विविधता को दर्शाता है।

यात्रा उद्योग में तेज़ प्रतिस्पर्धा और संभावित डिस्काउंटिंग रणनीतियों के चलते कंपनी को अपनी औसत बुकिंग वैल्यू (ABV) और मार्जिन को बनाए रखने में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

EaseMyTrip के कुल खर्चों में 2.4% की वृद्धि

EaseMyTrip के कुल खर्च (Total Expenses) Q3 FY25 में ₹107 करोड़ रहे, जो Q3 FY24 के ₹105 करोड़ की तुलना में 2.4% अधिक है।

  • मुख्य खर्चों में शामिल हैं:
    • सेवा लागत (Service cost) – प्लेटफॉर्म संचालन और सर्विस डिलीवरी की लागत।
    • पेमेंट गेटवे शुल्क (Payment Gateway Fees) – डिजिटल ट्रांजेक्शन पर लगने वाला शुल्क।
    • कर्मचारी लाभ (Employee Benefits) – सैलरी, बोनस और अन्य मानव संसाधन लागत।
    • विज्ञापन और मार्केटिंग (Advertisement Cost) – ब्रांड प्रमोशन और नए ग्राहकों को आकर्षित करने की लागत।

EaseMyTrip को अपने ब्रांड की स्थिति बनाए रखने और प्रतिस्पर्धा में आगे रहने के लिए मार्केटिंग पर अधिक खर्च करना पड़ा, जिससे कुल खर्चों में वृद्धि देखी गई।

मुनाफे में 25% की गिरावट, EBITDA पर प्रभाव

कंपनी के मुनाफे में गिरावट का मुख्य कारण कम राजस्व और बढ़ते परिचालन खर्च रहे।

  • EaseMyTrip का शुद्ध लाभ (Net Profit) Q3 FY25 में ₹34 करोड़ रहा, जो Q3 FY24 में ₹45.6 करोड़ था।
  • यह 25% की गिरावट को दर्शाता है।
  • कंपनी को प्रत्येक ₹1 कमाने के लिए अधिक लागत उठानी पड़ी, जिससे मार्जिन पर असर पड़ा।
  • कंपनी के EBITDA (Earnings Before Interest, Tax, Depreciation, and Amortization) मार्जिन भी कम हुआ।

हालांकि EaseMyTrip अभी भी लाभ में है, लेकिन इसके मार्जिन में गिरावट यह दर्शाती है कि कंपनी को अपने लागत ढांचे को और अधिक कुशल बनाने की जरूरत है।

EaseMyTrip के शेयरों में गिरावट, बाज़ार पूंजीकरण में कमी

EaseMyTrip के वित्तीय नतीजों के बाद शेयर बाजार में कंपनी के स्टॉक में गिरावट दर्ज की गई।

  • EaseMyTrip का शेयर शुक्रवार को ₹12 पर बंद हुआ, जो कि 1.96% की गिरावट को दर्शाता है।
  • इस गिरावट के बाद, कंपनी का कुल मार्केट कैप (Market Capitalization) ₹4,252 करोड़ हो गया।

इस गिरावट का मुख्य कारण कंपनी के राजस्व और लाभ में कमी है, जिससे निवेशकों की भावनाएँ प्रभावित हुईं।

EaseMyTrip की भविष्य की रणनीति: सुधार के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?

EaseMyTrip को आने वाले महीनों में अपने मुनाफे और राजस्व में सुधार के लिए कई रणनीतिक कदम उठाने की जरूरत होगी।

नई सेवाओं का विस्तार:
EaseMyTrip को अपनी होटल और पैकेजिंग सेवाओं का विस्तार करना होगा, जिससे केवल एयर टिकटिंग पर निर्भरता कम हो और राजस्व में विविधता लाई जा सके।

मार्केटिंग और ब्रांडिंग रणनीति:
कंपनी को अपनी विज्ञापन लागत को बेहतर तरीके से मैनेज करना होगा, जिससे ब्रांड की पहुँच बढ़े लेकिन लागत सीमित रहे।

तकनीकी उन्नति:
EaseMyTrip को AI और डेटा एनालिटिक्स जैसी नई टेक्नोलॉजी अपनाकर अपने प्लेटफॉर्म को अधिक स्मार्ट और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाना होगा।

साझेदारी और अधिग्रहण:
संभावना है कि EaseMyTrip छोटे ट्रैवल स्टार्टअप्स के अधिग्रहण या नई साझेदारियों पर विचार कर सकती है, जिससे उसकी बाजार पकड़ और मजबूत हो।

लॉन्ग-टर्म निवेश:
EaseMyTrip को सर्विस क्वालिटी सुधारने और बिजनेस को लॉन्ग-टर्म स्थिरता की ओर ले जाने के लिए निवेश बढ़ाना होगा।

EaseMyTrip का भारतीय ट्रैवल बाजार में भविष्य

EaseMyTrip भारत में एक मजबूत ऑनलाइन ट्रैवल एग्रीगेटर (OTA) ब्रांड बना हुआ है और इसकी पहुँच लाखों उपभोक्ताओं तक है।

हालांकि, फिनटेक और ट्रैवल इंडस्ट्री में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण, कंपनी को अपने लाभ मार्जिन और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

संभावित ट्रेंड्स:

🔹 डिजिटल बुकिंग में वृद्धि: EaseMyTrip को डिजिटल इकोसिस्टम का पूरा फायदा उठाना होगा।
🔹 छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में विस्तार: कंपनी को Tier-2 और Tier-3 शहरों पर ज्यादा फोकस करने की जरूरत है।
🔹 इंटरनेशनल मार्केट में विस्तार: EaseMyTrip यदि विदेशों में अपनी सर्विस को बढ़ाता है, तो उसे बड़ा लाभ मिल सकता है।

निष्कर्ष: EaseMyTrip को कैसे सुधार लाना होगा?

EaseMyTrip के लिए Q3 FY25 एक मिश्रित तिमाही रही, जहां उसे राजस्व और लाभ में गिरावट का सामना करना पड़ा।

हालांकि, कंपनी अभी भी लाभदायक बनी हुई है, लेकिन उसे बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ऑपरेशनल लागत में हो रही वृद्धि को मैनेज करना होगा।

आने वाले तिमाही में, यह देखना दिलचस्प होगा कि EaseMyTrip कैसे अपने बिजनेस मॉडल को एडजस्ट करता है और क्या रणनीतियाँ अपनाता है, जिससे कंपनी फिर से ग्रोथ पथ पर लौट सके।

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Navi Technologies राजीव नरेश बने CEO, सचिन बंसल होंगे एग्जीक्यूटिव चेयरमैन

Navi Finserv

भारत की अग्रणी फिनटेक कंपनी Navi Technologies ने अपने नेतृत्व में बड़े बदलाव की घोषणा की है। कंपनी के सह-संस्थापक सचिन बंसल, जो अब तक Navi Technologies Limited और Navi Finserv Limited के CEO थे, अब Navi Group के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की भूमिका निभाएंगे। उनकी जगह, राजीव नरेश को Navi Technologies का नया CEO और अभिषेक द्विवेदी को Navi Finserv का नया CEO नियुक्त किया गया है।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब Navi Group अपनी व्यवसाय रणनीति को पुनर्गठित कर रहा है और नए अवसरों की तलाश में है।

Navi में वर्षों का अनुभव रखते हैं नए CEO

राजीव नरेश और अभिषेक द्विवेदी, दोनों ही Navi की शुरुआती टीम का हिस्सा रहे हैं और पिछले छह वर्षों में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभा चुके हैं। कंपनी के अनुसार, इन दोनों अधिकारियों ने Navi को एक मजबूत वित्तीय संस्थान के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

इस नेतृत्व परिवर्तन की घोषणा करते हुए सचिन बंसल ने कहा:

“यह बदलाव हमारी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। राजीव और अभिषेक ने कंपनी की वृद्धि में अहम भूमिका निभाई है। मुझे विश्वास है कि वे अपनी नई भूमिकाओं में Navi को और ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।”

सचिन बंसल की नई भूमिका

अब सचिन बंसल Navi Group के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में कार्य करेंगे। उनकी नई जिम्मेदारी कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति, विस्तार, फंडिंग, अधिग्रहण (M&A), जोखिम प्रबंधन और टेक्नोलॉजी इनोवेशन पर केंद्रित होगी।

इसके अलावा, वे Navi में डिजिटल टेक्नोलॉजी और डेटा साइंस को और बेहतर बनाने पर काम करेंगे।

CEO के नए कार्यक्षेत्र

इस नेतृत्व परिवर्तन के बाद,

  • अभिषेक द्विवेदी Navi Finserv की लेंडिंग बिजनेस को संभालेंगे।
  • राजीव नरेश Navi Technologies के नॉन-लेंडिंग बिजनेस का संचालन करेंगे।

इससे कंपनी को अपने विभिन्न व्यवसाय क्षेत्रों में अधिक स्पष्टता और दक्षता लाने में मदद मिलेगी।

RBI की पाबंदियों के बाद आया यह बदलाव

इस नेतृत्व परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण पहलू भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा हाल ही में Navi Finserv पर लगाए गए प्रतिबंधों का हटाया जाना है।

अक्टूबर 2024 में, RBI ने Navi Finserv और तीन अन्य NBFCs (नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों) को लोन देने से रोक दिया था। इसका कारण था नियामक दिशानिर्देशों का सही ढंग से पालन न करना। लेकिन अब RBI ने यह प्रतिबंध हटा दिया है, जिससे Navi Finserv दोबारा लोन वितरण शुरू कर सकती है।

क्या है Navi Group की भविष्य की रणनीति?

Navi Technologies इस बदलाव के साथ एक मजबूत और टिकाऊ विकास की ओर बढ़ना चाहती है।

आने वाले समय में, कंपनी की रणनीति निम्नलिखित मुख्य क्षेत्रों पर केंद्रित रहेगी:
नए फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स लॉन्च करना – खासकर डिजिटल लेंडिंग और बीमा क्षेत्र में।
कस्टमर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाना – टेक्नोलॉजी और डेटा साइंस के माध्यम से।
बड़े पैमाने पर निवेश जुटाना – जिससे कंपनी के विस्तार को बढ़ावा मिलेगा।
नए अधिग्रहण (M&A) और साझेदारियाँ करना – जिससे Navi अपनी सेवाओं को और विस्तृत कर सके।

भारतीय फिनटेक सेक्टर में Navi की स्थिति होगी मजबूत

Navi Group का यह पुनर्गठन भारतीय फिनटेक और डिजिटल बैंकिंग इंडस्ट्री में कंपनी की स्थिति को और मज़बूत करेगा।

इस बदलाव से:
📌 Navi Finserv अपने लोन बिजनेस को नए स्तर पर ले जा सकेगी।
📌 Navi Technologies अपने अन्य वित्तीय उत्पादों पर अधिक ध्यान दे सकेगी।
📌 सचिन बंसल कंपनी के दीर्घकालिक विज़न पर फोकस कर पाएंगे।

निष्कर्ष

Navi Technologies द्वारा किया गया यह नेतृत्व परिवर्तन कंपनी की विकास रणनीति का हिस्सा है, जो इसे भारत के तेजी से बढ़ते फिनटेक बाजार में और मजबूत बनाएगा।

अब देखने वाली बात यह होगी कि नए CEO के नेतृत्व में कंपनी कितना आगे बढ़ती है और किस तरह भारतीय फिनटेक क्षेत्र में अपने लिए एक नई पहचान बनाती है।

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Anscer Robotics ने सीड फंडिंग में जुटाए $2 मिलियन,

Anscer Robotics

भारतीय डीपटेक स्टार्टअप ANSCER ROBOTICS ने अपने सीड फंडिंग राउंड में $2 मिलियन (करीब 16.5 करोड़ रुपये) जुटाए हैं। इस निवेश दौर का नेतृत्व Info Edge Ventures ने किया है। कंपनी इस फंडिंग का उपयोग नई टेक्नोलॉजी विकसित करने, अपने उत्पाद पोर्टफोलियो को मजबूत करने और नए बाजारों में विस्तार करने के लिए करेगी।

क्या है ANSCER ROBOTICS?

ANSCER ROBOTICS एक ऑटोमेशन और रोबोटिक्स स्टार्टअप है, जो फैक्ट्री, वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स इंडस्ट्री के लिए स्मार्ट रोबोट बनाता है। कंपनी के ऑटोनॉमस मोबाइल रोबोट्स (AMRs) वेयरहाउस और फैक्ट्रियों में सामान के मूवमेंट को आसान और अधिक कुशल बनाते हैं।

संस्थापकों के बारे में:

Anscer Robotics की स्थापना रिबिन मैथ्यू, एबिन सनी, रघु वेंकटेश और बृजेश सीए ने की थी। संस्थापक टीम रोबोटिक्स और ऑटोमेशन टेक्नोलॉजी में गहरी विशेषज्ञता रखती है और कंपनी का उद्देश्य भारत और वैश्विक बाजार में ऑटोमेशन को नई ऊंचाइयों तक ले जाना है।


Anscer Robotics के प्रमुख रोबोटिक उत्पाद

कंपनी के प्रमुख उत्पाद वेयरहाउस और फैक्ट्री ऑपरेशंस को स्वचालित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। इनमें शामिल हैं:

पैलेट मूवर्स – वेयरहाउस में भारी सामान को ले जाने के लिए स्वचालित रोबोट
टगर्स – औद्योगिक क्षेत्रों में बड़े कंटेनरों को खींचने के लिए
कन्वेयर सिस्टम – उत्पादन और लॉजिस्टिक्स प्रक्रिया को तेज और कुशल बनाने के लिए
लिफ्टर्स – ऊंचाई पर मौजूद वस्तुओं को स्वचालित तरीके से उठाने के लिए

👉 कंपनी के रोबोट 2 टन तक का भार उठा सकते हैं, जिससे वे बड़ी इंडस्ट्रीज़ के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहे हैं।


वैश्विक बाजार में मजबूत उपस्थिति

Anscer Robotics पहले ही अमेरिका, भारत, सिंगापुर और जापान में अपने 15 एंटरप्राइज़ ग्राहकों के साथ काम कर रहा है।

कंपनी अपने स्मार्ट रोबोट्स को इन देशों के बड़े लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स में तैनात कर चुकी है। इस फंडिंग के जरिए कंपनी नए देशों में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की योजना बना रही है।


फंडिंग डिटेल्स और निवेशकों की भूमिका

Info Edge Ventures इस दौर का प्रमुख निवेशक है। Info Edge भारत में कई उभरते स्टार्टअप्स में निवेश करता रहा है।

Info Edge Ventures के हालिया निवेश:

📌 Shoppin (फैशन सर्च इंजन) – $1 मिलियन निवेश
📌 ZingBus – ट्रैवल और मोबिलिटी सेक्टर में निवेश
📌 Culture Circle – नए जमाने के कंटेंट प्लेटफॉर्म में निवेश

Anscer Robotics को Info Edge Ventures से फंडिंग मिलना यह दर्शाता है कि कंपनी की टेक्नोलॉजी और बाजार क्षमता को लेकर निवेशकों में बड़ा विश्वास है।


भारत में रोबोटिक्स इंडस्ट्री का विकास

भारत में रोबोटिक्स और ऑटोमेशन इंडस्ट्री तेजी से आगे बढ़ रही है

🔹 रोबोटिक्स और AI आधारित टेक्नोलॉजी से इंडस्ट्रीज़ में लागत कम हो रही है और उत्पादकता बढ़ रही है।
🔹 Statista की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रोबोटिक्स मार्केट 2028 तक $6 बिलियन तक पहुंचने की संभावना है।
🔹 ऑटोमेशन और लॉजिस्टिक्स इंडस्ट्री में AI-ड्रिवन रोबोट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है।

👉 Anscer Robotics जैसी कंपनियां इस क्षेत्र में भारत को ग्लोबल लीडर बनाने की दिशा में काम कर रही हैं।


Anscer Robotics क्यों है खास?

स्मार्ट वेयरहाउसिंग सॉल्यूशंस: कंपनी के रोबोट्स से लॉजिस्टिक्स सेक्टर की लागत घटती है और उत्पादकता बढ़ती है।
AI-ड्रिवन टेक्नोलॉजी: कंपनी अपने रोबोट्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर रही है ताकि वे और अधिक कुशल बन सकें।
मजबूत निवेशक समर्थन: Info Edge Ventures जैसे निवेशकों का सहयोग कंपनी के भविष्य के विकास को दर्शाता है।
वैश्विक विस्तार: अमेरिका, सिंगापुर, जापान और भारत में पहले से उपस्थिति।


भविष्य की योजनाएं

Anscer Robotics इस फंडिंग के जरिए निम्नलिखित योजनाओं पर कार्य करेगा:

✔️ नई टेक्नोलॉजी और उत्पादों का विकास
✔️ वर्तमान बाजार में अपनी उपस्थिति को और मजबूत बनाना
✔️ अमेरिका, यूरोप और अन्य एशियाई देशों में विस्तार करना
✔️ AI और ऑटोमेशन में और अधिक निवेश करना


निष्कर्ष

Anscer Robotics ने $2 मिलियन की सीड फंडिंग जुटाकर अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को और मजबूत करने तथा वैश्विक विस्तार की योजना बनाई है।

👉 अगर कंपनी अपनी टेक्नोलॉजी को लगातार विकसित करती है और नए बाजारों में प्रवेश करती है, तो यह भारत की सबसे बड़ी डीपटेक कंपनियों में से एक बन सकती है। 🚀

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SpotDraft ने सीरीज B फंडिंग में जुटाए $54 मिलियन,

SpotDraft

कॉन्ट्रैक्ट लाइफसाइकिल मैनेजमेंट (CLM) प्लेटफॉर्म SpotDraft ने अपने सीरीज B फंडिंग राउंड में $54 मिलियन (लगभग 450 करोड़ रुपये) जुटाए हैं। इस निवेश दौर का नेतृत्व Vertex Growth Singapore और Trident Partners ने किया, जबकि Xeed VC, Arkam Ventures, Prosus Ventures और Premji Invest ने भी भागीदारी की।

इस ताजा फंडिंग से SpotDraft अपनी AI-ड्रिवन प्रोडक्ट्स में निवेश और अपने बाजार विस्तार को मजबूत करेगा


SpotDraft की अब तक की फंडिंग

SpotDraft इससे पहले मार्च 2023 में अपने सीरीज A फंडिंग राउंड में $26 मिलियन जुटा चुका है

कंपनी का कहना है कि इस नए फंडिंग से वह अपनी AI टेक्नोलॉजी को और उन्नत बनाएगी, कानूनी टीमों के लिए अधिक प्रभावी समाधान विकसित करेगी और अपनी वैश्विक मौजूदगी बढ़ाएगी

SpotDraft के CEO और को-फाउंडर शशांक बिजापुर ने कहा:

“हम मानते हैं कि 2025 हमारी टीम के लिए एक बड़ा बदलाव लेकर आएगा। हम न सिर्फ अपने मार्केट को बढ़ाएंगे बल्कि AI का गहरा एकीकरण करके कानूनी टीमों को और अधिक सक्षम बनाएंगे।”


SpotDraft क्या करता है?

SpotDraft एक कॉन्ट्रैक्ट लाइफसाइकिल मैनेजमेंट (CLM) प्लेटफॉर्म है, जो कंपनियों की इन-हाउस लीगल टीमों को स्मार्ट और ऑटोमेटेड कानूनी समाधान प्रदान करता है

इसके प्रमुख फीचर्स में शामिल हैं:

AI-असिस्टेड रेडलाइ닝 – कानूनी दस्तावेजों की समीक्षा और संपादन में मदद
ई-सिग्नेचर (E-Signatures) – डिजिटल रूप से कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर करने की सुविधा
कॉन्ट्रैक्ट रिपॉजिटरी (Contract Repository) – सभी अनुबंधों को व्यवस्थित तरीके से स्टोर और मैनेज करना
थर्ड-पार्टी पेपर मैनेजमेंट – बाहरी कानूनी दस्तावेजों की आसान ट्रैकिंग और हैंडलिंग

SpotDraft का उद्देश्य कंपनियों के कानूनी विभागों को पारंपरिक, धीमी और जटिल प्रक्रियाओं से मुक्त कराना है, जिससे वे अधिक प्रभावी और तेज़ी से काम कर सकें


AI-ड्रिवन इनोवेशन और भविष्य की रणनीति

SpotDraft ने स्पष्ट किया है कि यह नया निवेश AI-संचालित कानूनी समाधान विकसित करने के लिए उपयोग किया जाएगा

AI का गहरा एकीकरण – SpotDraft अपने प्रोडक्ट्स में AI और मशीन लर्निंग का उपयोग करके कानूनी अनुबंधों की समीक्षा और ऑटोमेशन को और बेहतर बनाएगा
बाजार विस्तार – कंपनी नई भौगोलिक जगहों पर विस्तार करेगी और कानूनी सेवाओं को और व्यापक बनाएगी
प्रतिभा अधिग्रहण (Talent Acquisition) – SpotDraft नई लीडरशिप हायरिंग और टॉप-टियर टैलेंट को जोड़ने की योजना बना रहा है


SpotDraft का वैश्विक विस्तार

बेंगलुरु और न्यूयॉर्क में मुख्यालय रखने वाली इस कंपनी के वर्तमान में 250 से अधिक कर्मचारी हैं

नए निवेश के साथ, SpotDraft अपने ग्लोबल ऑपरेशंस को और मजबूत करने के लिए नई प्रतिभाओं को जोड़ने पर ध्यान केंद्रित करेगा

कंपनी का मुख्य फोकस अमेरिकी, यूरोपीय और एशियाई बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत करने पर है


CLM मार्केट में SpotDraft की संभावनाएं

दुनियाभर में कॉन्ट्रैक्ट मैनेजमेंट सॉल्यूशंस की मांग तेजी से बढ़ रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 2028 तक ग्लोबल CLM मार्केट $3.2 बिलियन से अधिक का हो सकता है

SpotDraft इस बढ़ते बाजार में एक अग्रणी खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है।


SpotDraft क्यों है खास?

AI-ड्रिवन कानूनी सॉल्यूशंस – कानूनी टीमों के लिए ऑटोमेटेड और स्मार्ट समाधान
कॉर्पोरेट और स्टार्टअप्स दोनों के लिए उपयुक्त – हर तरह की कंपनियों के लिए आसान कानूनी प्रबंधन
वैश्विक विस्तार पर फोकस – अमेरिका, यूरोप और एशिया में अपनी पहुंच बढ़ाने की योजना
इन-हाउस लीगल टीम्स के लिए डिज़ाइन किया गया प्लेटफॉर्म


निष्कर्ष

SpotDraft ने $54 मिलियन की सीरीज B फंडिंग जुटाकर अपने AI-ड्रिवन कानूनी समाधान और बाजार विस्तार को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है

यदि कंपनी अपनी तकनीकी क्षमताओं को और विकसित करती है और बाजार में अपनी पहुंच को बढ़ाती है, तो यह CLM इंडस्ट्री में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभर सकता है

इस क्षेत्र में SpotDraft की रणनीति इसे दुनियाभर में कानूनी टेक्नोलॉजी का भविष्य बना सकती है। 🚀

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Vidysea, Zee Learn से मिली $1 मिलियन की फंडिंग,

Vidysea

विद्यार्थियों को विदेश में पढ़ाई के लिए व्यक्तिगत गाइडेंस और करियर सलाह देने वाला एडटेक स्टार्टअप Vidysea ने अपने सीड फंडिंग राउंड में $1 मिलियन (लगभग 8.3 करोड़ रुपये) जुटाए हैं। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Zee Learn Limited (ZLL) और Aarvi Family LLP ने किया, साथ ही कंपनी के संस्थापकों और अन्य शेयरधारकों ने भी योगदान दिया

Vidysea फंडिंग का उपयोग कैसे करेगा?

Vidysea इस नई फंडिंग का उपयोग अपने प्रोडक्ट को मजबूत करने और टीम का विस्तार करने के लिए करेगा। स्टार्टअप का उद्देश्य छात्रों को बेहतर सेवाएं और सहायता प्रदान करना है, ताकि वे विदेश में पढ़ाई से जुड़े निर्णय आसानी से ले सकें।

स्टार्टअप छात्रों को उनके प्रोफाइल को मजबूत करने, कॉलेज सिलेक्शन, एडमिशन प्रोसेस, और पोस्ट-एडमिशन सहायता देने के लिए काम कर रहा है। इस फंडिंग से कंपनी को अपने टेक प्लेटफॉर्म को और बेहतर बनाने और अधिक छात्रों तक अपनी सेवाएं पहुंचाने में मदद मिलेगी


Vidysea: विदेश में पढ़ाई के लिए एक स्मार्ट समाधान

Vidysea की स्थापना सितंबर 2024 में करुण कांडोई (Karunn Kandoi) द्वारा की गई थी। स्टार्टअप का उद्देश्य एक ऐसा एडवांस प्रोडक्ट तैयार करना है जो विदेश में पढ़ाई करने की योजना बना रहे छात्रों के लिए निर्णय लेने की प्रक्रिया को आसान बनाए

Vidysea छात्रों को K-12 स्कूलों, कॉलेजों और ग्रेजुएट स्कूलों से कनेक्ट करने में मदद करता है। इसके अलावा, यह एडमिशन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए आवश्यक डॉक्यूमेंटेशन, सेलेक्शन प्रोसेस और पोस्ट-सेलेक्शन सपोर्ट भी प्रदान करता है।


Vidysea छात्रों की कैसे मदद करता है?

विदेश में पढ़ाई करना कई छात्रों का सपना होता है, लेकिन एडमिशन प्रक्रिया जटिल और लंबी होती है। Vidysea इस प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और सरल बनाकर छात्रों को सहायता प्रदान करता है।

1. सही संस्थान चुनने में मदद

विद्यार्थी Vidysea के माध्यम से दुनियाभर के स्कूलों, कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज को एक्सप्लोर कर सकते हैं। Vidysea छात्रों की रुचि, करियर गोल्स और फाइनेंशियल स्थिति के आधार पर उनके लिए सही संस्थान चुनने में मदद करता है

2. एडमिशन प्रक्रिया को आसान बनाना

विदेशी यूनिवर्सिटीज में एडमिशन की प्रक्रिया लंबी और जटिल होती है। Vidysea छात्रों को एडमिशन आवश्यकताओं, एंट्रेंस एग्जाम्स, और एप्लिकेशन प्रोसिजर के बारे में डिटेल में जानकारी देता है

3. प्रोफाइल स्ट्रेंथनिंग और डॉक्यूमेंटेशन सपोर्ट

Vidysea सिर्फ एडमिशन प्रक्रिया को सरल नहीं बनाता, बल्कि छात्रों के अकादमिक और एक्स्ट्रा-करीकुलर प्रोफाइल को भी मजबूत करने में मदद करता है। इसमें शामिल हैं:

एक्स्ट्रा-करीकुलर एक्टिविटीज – छात्र की प्रोफाइल को अधिक प्रभावी बनाने के लिए गाइडेंस
एस्से और स्टेटमेंट ऑफ पर्पस (SOP) लिखने में सहायता
सिफारिश पत्र (Recommendation Letters) तैयार करने में मदद

4. पोस्ट-एडमिशन सपोर्ट

विदेश में पढ़ाई के लिए सिर्फ एडमिशन लेना ही काफी नहीं होता, बल्कि वहां का कल्चर, रहन-सहन और पढ़ाई के तरीके को समझना भी जरूरी होता है। Vidysea छात्रों को नई जगह पर आसानी से एडजस्ट करने में मदद करने के लिए परामर्श और गाइडेंस भी देता है


एडटेक सेक्टर में Vidysea की संभावनाएं

भारत से विदेश में पढ़ने जाने वाले छात्रों की संख्या हर साल बढ़ रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में 7.5 लाख भारतीय छात्र विदेश में पढ़ाई करने गए, और यह संख्या 2025 तक 10 लाख तक पहुंच सकती है

ऐसे में Vidysea का यह कदम विद्यार्थियों के लिए बहुत मददगार साबित हो सकता है


Zee Learn और अन्य निवेशकों का विश्वास

Zee Learn Limited (ZLL) भारत की एक प्रमुख एजुकेशन कंपनी है, जो K-12 एजुकेशन, प्री-स्कूल और अन्य शैक्षणिक सेवाओं में कार्यरत है।

Vidysea को ZLL और Aarvi Family LLP से मिली फंडिंग यह दिखाती है कि निवेशकों को विदेशी शिक्षा क्षेत्र में Vidysea की अपार संभावनाओं पर भरोसा है


Vidysea क्यों है अलग?

पर्सनलाइज्ड करियर गाइडेंस – हर छात्र को उसकी जरूरत के अनुसार सही सलाह
सभी प्रमुख देशों और यूनिवर्सिटीज की जानकारी एक जगह
एडमिशन से लेकर पोस्ट-एडमिशन सपोर्ट
प्रोफाइल सुधारने के लिए एक्स्ट्रा-करीकुलर, एस्से और रिकमेंडेशन लेटर गाइडेंस


निष्कर्ष

Vidysea ने $1 मिलियन की फंडिंग हासिल कर अपने प्रोडक्ट को और मजबूत करने और अधिक छात्रों तक अपनी सेवाएं पहुंचाने का लक्ष्य रखा है

यदि कंपनी अपने एडमिशन और करियर गाइडेंस सेवाओं को और विकसित करती है, तो यह भारत के छात्रों के लिए विदेश में पढ़ाई करने की प्रक्रिया को बहुत आसान बना सकता है

Zee Learn और अन्य निवेशकों का समर्थन इस बात को दर्शाता है कि Vidysea में भविष्य की अपार संभावनाएं हैं और यह एडटेक इंडस्ट्री में एक बड़ा नाम बन सकता है। 🚀

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Freshworks ने Q4 में 21.6% की ग्रोथ दर्ज की,

Freshworks

भारत की प्रमुख SaaS (Software as a Service) कंपनी Freshworks ने 2024 के चौथे तिमाही (Q4) में 21.6% की सालाना वृद्धि दर्ज की। साथ ही, कंपनी ने अपने घाटे को 21.8% तक कम किया, जिससे इसकी वित्तीय स्थिति और मजबूत हो गई।

Freshworks का ऑपरेटिंग रेवेन्यू Q4 CY24 में $194.5 मिलियन तक पहुंच गया, जो Q4 CY23 में $160 मिलियन था। पूरे कैलेंडर वर्ष (CY24) में, कंपनी ने 20.8% की सालाना वृद्धि दर्ज की और इसका कुल राजस्व CY23 में $596 मिलियन से बढ़कर CY24 में $720 मिलियन हो गया।

Freshworks: SaaS इंडस्ट्री में एक मजबूत खिलाड़ी

Freshworks एक ग्लोबल SaaS कंपनी है, जो बिजनेस ऑटोमेशन, सेल्स, कस्टमर सपोर्ट और IT सर्विसेज में समाधान प्रदान करती है। इसके प्रमुख प्रोडक्ट्स इस प्रकार हैं:

  • Freshservice – IT सर्विस मैनेजमेंट टूल
  • Freshdesk – कस्टमर सपोर्ट समाधान
  • Freshmarketer – मार्केटिंग ऑटोमेशन टूल
  • Freshchat – लाइव चैट समाधान
  • Freshsales – सेल्स CRM सॉल्यूशन

Freshworks के प्रोडक्ट्स दुनियाभर की कंपनियों द्वारा उपयोग किए जाते हैं, जिससे यह एक तेजी से बढ़ती SaaS कंपनी के रूप में उभर रहा है।


राजस्व और व्यय का विश्लेषण

Freshworks की तेजी से बढ़ती राजस्व दर और लागत नियंत्रण रणनीति ने इसे एक मजबूत स्थिति में ला दिया है।

1. ऑपरेटिंग रेवेन्यू (Revenue Growth)

📌 Q4 CY24 का रेवेन्यू$194.5 मिलियन
📌 Q4 CY23 का रेवेन्यू$160 मिलियन
📌 CY24 में कुल ग्रोथ20.8% वृद्धि के साथ $720 मिलियन

2. खर्च और लागत नियंत्रण (Cost Management)

Freshworks ने अपने खर्च को नियंत्रित रखने में सफलता हासिल की, जिससे इसकी लाभप्रदता में सुधार हुआ।

सेल्स और मार्केटिंग खर्च – कुल खर्च का 46%
Q4 CY24 में मार्केटिंग खर्च$90.6 मिलियन (सिर्फ 1.8% की वृद्धि)
कुल खर्च$216.4 मिलियन
कंपनी का घाटा$21.9 मिलियन (Q4 CY23 में $28 मिलियन था)

कंपनी की लागत नियंत्रण रणनीति ने इसे बेहतर वित्तीय प्रदर्शन करने में मदद की, जिससे घाटे में 21.8% की कमी दर्ज की गई।


Freshworks के नए ग्राहक और प्रमुख नियुक्तियां

Freshworks ने Q4 CY24 में कई नए वैश्विक ग्राहक जोड़े, जिनमें शामिल हैं:

  • New Balance (लोकप्रिय फुटवियर ब्रांड)
  • Rawlings Sporting Goods
  • Sophos (साइबर सिक्योरिटी कंपनी)
  • Onfido
  • Mesa Airlines

इसके अलावा, Freshworks ने अपनी नेतृत्व टीम को और मजबूत किया

👨‍💼 श्रीनिवासन राघवन – नए चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर (CPO) नियुक्त
👨‍💼 वेंकटेश सुब्रमणियनसीनियर वाइस प्रेसिडेंट (प्रोडक्ट मैनेजमेंट और कस्टमर एक्सपीरियंस)

इन नियुक्तियों से Freshworks के प्रोडक्ट इनोवेशन और ग्राहक सेवा में और अधिक सुधार होने की उम्मीद है।


Freshworks की भविष्य की योजनाएं और संभावनाएं

Freshworks ने 2025 के पहले तिमाही (Q1 CY25) में $190-$193 मिलियन के बीच राजस्व का अनुमान लगाया है।

📌 CY25 के लिए कुल वार्षिक राजस्व लक्ष्य$809 मिलियन

कंपनी अपने ग्रोथ पाथ पर बनी हुई है और आने वाले वर्षों में SaaS सेक्टर में और मजबूती से अपनी पकड़ बनाने के लिए तैयार है


Freshworks की सफलता के पीछे क्या कारण हैं?

1️⃣ इनोवेटिव SaaS प्रोडक्ट्स – Freshworks के समाधान दुनिया भर में हजारों कंपनियों द्वारा उपयोग किए जा रहे हैं।
2️⃣ स्मार्ट कस्टमर एक्विजिशन – कंपनी ने अपने ग्राहक आधार को लगातार बढ़ाया है, जिससे इसकी ग्रोथ मजबूत बनी हुई है।
3️⃣ लागत नियंत्रण रणनीति – मार्केटिंग खर्च को सीमित रखते हुए, कंपनी ने अपनी लागत को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया है।
4️⃣ नेतृत्व में मजबूती – नए CXO स्तर के अपॉइंटमेंट से कंपनी की रणनीतिक दिशा को और मजबूती मिलेगी।
5️⃣ ग्लोबल मार्केट में बढ़ता प्रभाव – Freshworks अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों में तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।


निष्कर्ष

Freshworks ने 2024 में शानदार प्रदर्शन किया, जिससे इसका राजस्व बढ़ा और घाटा कम हुआग्राहक आधार बढ़ाने, लागत को नियंत्रित करने और रणनीतिक नियुक्तियों की बदौलत कंपनी की स्थिति मजबूत बनी हुई है।

अगर Freshworks इसी गति से आगे बढ़ता रहा, तो यह भारत की टॉप SaaS कंपनियों में शामिल होते हुए ग्लोबल मार्केट में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है। 🚀

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Rapido ने सीरीज E फंडिंग राउंड में ₹250 करोड़ जुटाए,

Rapido

भारत की प्रमुख माइक्रो-मोबिलिटी फर्म Rapido ने सीरीज E फंडिंग राउंड में ₹250 करोड़ (~$29.7 मिलियन) जुटाए हैं। इस राउंड में Prosus मुख्य निवेशक के रूप में शामिल हुआ है। यह निवेश उस फंडिंग के सिर्फ 7 महीने बाद आया है, जब Rapido ने WestBridge के नेतृत्व में $120 मिलियन जुटाए थे

फंडिंग ब्रेकअप: Rapido कैसे जुटाए गए ₹250 करोड़?

Rapido के बोर्ड ने एक विशेष प्रस्ताव पारित किया है, जिसके तहत 47,743 सीरीज E प्रेफरेंस शेयर्स को ₹52,467 प्रति शेयर की कीमत पर जारी किया गया है। इस राउंड में कुल ₹250 करोड़ ($29.7 मिलियन) जुटाए गए हैं।

👉 सीरीज E राउंड में कुल निवेश – $200 मिलियन
👉 Rapido की मौजूदा वैल्यूएशन – $1.1 बिलियन (~₹8,726 करोड़)

Prosus की Rapido में हिस्सेदारी

इस नए निवेश के बाद Prosus की Rapido में हिस्सेदारी लगभग 2.9% हो जाएगी। इसके साथ ही, कंपनी की कुल वैल्यूएशन ₹8,726 करोड़ (~$1.1 बिलियन) तक पहुंच गई है, जो इसे यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स की सूची में बनाए रखता है

Rapido की ग्रोथ: मजबूत राजस्व और घाटे में कमी

Rapido ने वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) में 46.3% सालाना ग्रोथ दर्ज की और कंपनी का राजस्व ₹648 करोड़ तक पहुंच गया।

👉 राजस्व (FY24) – ₹648 करोड़
👉 घाटा (FY24) – ₹371 करोड़ (45% की कमी)

कंपनी ने अपने घाटे को 45% तक कम किया, जो पहले की तुलना में एक महत्वपूर्ण सुधार है। यह दर्शाता है कि Rapido अपनी फाइनेंशियल हेल्थ को मजबूत कर रहा है और प्रॉफिटेबिलिटी की ओर बढ़ रहा है

Rapido: भारत की अग्रणी बाइक टैक्सी सर्विस

Rapido एक राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है, जो मुख्य रूप से बाइक टैक्सी, ऑटो रिक्शा और डिलीवरी सेवाएं प्रदान करता है। यह भारत के 100+ शहरों में काम कर रहा है और तेजी से अपने नेटवर्क का विस्तार कर रहा है।

Rapido की सफलता के पीछे की रणनीति

  1. बाइक टैक्सियों की लोकप्रियता – बड़े शहरों में ट्रैफिक की समस्या के कारण, बाइक टैक्सियों की डिमांड बढ़ रही है।
  2. कम लागत, ज्यादा सुविधा – Rapido की सेवाएं अन्य राइड-हेलिंग कंपनियों की तुलना में सस्ती हैं, जिससे यह आम लोगों के लिए किफायती विकल्प बनता है।
  3. डिजिटल पेमेंट और ऑफर्स – कंपनी अपने प्लेटफॉर्म पर डिजिटल वॉलेट और डिस्काउंट ऑफर्स के जरिए ग्राहकों को आकर्षित कर रही है।
  4. ऑटो और डिलीवरी सेगमेंट में विस्तार – Rapido सिर्फ बाइक टैक्सियों तक सीमित नहीं है; अब यह ऑटो राइड्स और डिलीवरी सर्विसेज में भी अपनी पकड़ बना रहा है।

Rapido की भविष्य की योजनाएं

👉 अधिक शहरों में विस्तार – कंपनी आने वाले समय में नए भारतीय शहरों में अपनी सेवाएं लॉन्च कर सकती है।
👉 ऑटो और डिलीवरी सेगमेंट को मजबूत करना – बाइक टैक्सियों के अलावा, Rapido ऑटो सेवाओं और हाइपरलोकल डिलीवरी पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है।
👉 प्रॉफिटेबिलिटी पर फोकस – घाटे को और कम करने और कंपनी को प्रॉफिटेबल बनाने के लिए नए बिजनेस मॉडल अपनाए जाएंगे।

निष्कर्ष

Rapido की ₹250 करोड़ (~$29.7 मिलियन) की ताजा फंडिंग से यह साफ है कि भारत में माइक्रो-मोबिलिटी और बाइक टैक्सी सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। Prosus जैसे बड़े निवेशकों की भागीदारी इस बात को दर्शाती है कि Rapido का भविष्य उज्ज्वल है।

अगर कंपनी अपनी मौजूदा ग्रोथ को बनाए रखती है, तो यह आने वाले वर्षों में भारत की सबसे बड़ी राइड-हेलिंग कंपनियों में शामिल हो सकती है। 🚀

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The Whole Truth ने सीरीज C फंडिंग राउंड में ₹133.3 करोड़ जुटाए,

The Whole Truth

क्लीन-लेबल हेल्थ फूड ब्रांड The Whole Truth ने ₹133.3 करोड़ (~$15.8 मिलियन) की सीरीज C फंडिंग जुटाई है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Sofina Ventures ने किया, जिसमें Peak XV और Matrix Partners ने भी भाग लिया।

कंपनी की RoC (Registrar of Companies) फाइलिंग के अनुसार, The Whole Truth के बोर्ड ने 45,097 सीरीज C प्रेफरेंस शेयर्स को ₹29,556.5 प्रति शेयर की कीमत पर जारी करने की मंजूरी दी है।

फंडिंग ब्रेकअप: The Whole Truth कौन कितना निवेश कर रहा है?

इस निवेश राउंड में कई प्रमुख निवेशकों ने भाग लिया:

  • Sofina Ventures – ₹65.8 करोड़
  • Peak XV Partners – ₹25 करोड़
  • Matrix Partners – ₹29.5 करोड़
  • Sauce Continued Fund – ₹13 करोड़

The Whole Truth की नई वैल्यूएशन

इस नए निवेश के साथ, मुंबई स्थित The Whole Truth की कुल वैल्यूएशन ₹2,135 करोड़ (~$254 मिलियन) तक पहुंच गई है। यह पिछले सीरीज B राउंड की तुलना में 3.6 गुना अधिक वृद्धि है, जब कंपनी की वैल्यूएशन $70 मिलियन थी।

The Whole Truth में प्रमुख निवेशकों की हिस्सेदारी

नए फंडिंग राउंड के बाद कंपनी में प्रमुख निवेशकों की हिस्सेदारी इस प्रकार होगी:

  • Peak XV – 21.14%
  • Matrix Partners – 21.4%
  • Sofina Ventures – 3.08%
  • Sauce Continuity – 3.77%

फंडिंग का उपयोग: बिजनेस एक्सपेंशन और फाइनेंशियल जरूरतें

कंपनी ने इस ताजा फंडिंग को अपने वित्तीय जरूरतों को पूरा करने और बिजनेस के विस्तार के लिए उपयोग करने की योजना बनाई है।

The Whole Truth और संभावित अतिरिक्त फंडिंग

रिपोर्ट्स के अनुसार, The Whole Truth इस फंडिंग राउंड में कुल $25 मिलियन जुटाने की योजना बना रही थी। अभी तक कंपनी ने $15.8 मिलियन सुरक्षित कर लिए हैं और यह संभावना है कि राउंड आगे बढ़ने पर अतिरिक्त निवेश प्राप्त हो सकता है

The Whole Truth: क्या ऑफर करता है यह ब्रांड?

The Whole Truth एक क्लीन-लेबल हेल्थ फूड ब्रांड है, जो प्रोटीन बार, पीनट बटर, डार्क चॉकलेट, एनर्जी बार, इम्यूनिटी बॉल्स और म्यूसली जैसे हेल्दी प्रोडक्ट्स ऑफर करता है।

कंपनी की सेल्स स्ट्रैटेजी

  • The Whole Truth अपने ग्राहकों को सब्सक्रिप्शन मॉडल भी प्रदान करता है।
  • कंपनी का दावा है कि उसकी 80-85% सेल्स उसकी वेबसाइट से होती हैं।
  • शेष राजस्व पार्टनरशिप और अन्य चैनलों से आता है।

The Whole Truth की बढ़ती लोकप्रियता

भारत में हेल्दी और क्लीन-लेबल फूड प्रोडक्ट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। उपभोक्ता अब केमिकल-फ्री, शुगर-फ्री और प्रिजर्वेटिव-फ्री प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं। इस ट्रेंड का फायदा उठाकर The Whole Truth ने खुद को इस सेगमेंट में एक प्रमुख ब्रांड के रूप में स्थापित किया है।

The Whole Truth की भविष्य की योजनाएं

👉 प्रोडक्ट पोर्टफोलियो का विस्तार – कंपनी आने वाले समय में नई हेल्दी फूड कैटेगरीज में प्रवेश कर सकती है।
👉 मार्केट एक्सपेंशन – The Whole Truth भारतीय मार्केट के अलावा अंतरराष्ट्रीय मार्केट में भी विस्तार करने की योजना बना सकती है।
👉 डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) मॉडल को मजबूत बनाना – कंपनी अपनी वेबसाइट और डिजिटल चैनलों पर फोकस बढ़ा रही है ताकि ग्राहकों से सीधे जुड़ सके।

निष्कर्ष

The Whole Truth की ₹133.3 करोड़ (~$15.8 मिलियन) की सीरीज C फंडिंग से यह साफ है कि भारत में हेल्दी फूड और D2C ब्रांड्स का मार्केट तेजी से बढ़ रहा है। Sofina Ventures, Peak XV, और Matrix Partners जैसे बड़े निवेशकों की भागीदारी यह दर्शाती है कि The Whole Truth का भविष्य उज्जवल है।

अगर कंपनी अपनी मौजूदा ग्रोथ को बनाए रखती है, तो यह आने वाले वर्षों में भारत का सबसे बड़ा हेल्दी फूड ब्रांड बन सकता है। 🚀

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Awfis ने Q3 FY25 में 44% की वृद्धि दर्ज की, ₹15.1 करोड़ का लाभ हासिल किया

Awfis

भारत की प्रमुख को-वर्किंग स्पेस प्रोवाइडर कंपनी Awfis ने चालू वित्त वर्ष (FY25) की तीसरी तिमाही (Q3) में 44% सालाना (YoY) वृद्धि दर्ज की है। दिल्ली स्थित इस स्टार्टअप का मुनाफा इसी अवधि में ₹15.1 करोड़ पर पहुंच गया।

Awfis की राजस्व (Revenue) आय Q3 FY25 में बढ़कर ₹318 करोड़ हो गई, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि (Q3 FY24) में ₹221 करोड़ थी।

Awfis की ग्रोथ और बिजनेस मॉडल

Awfis की स्थापना 2015 में हुई थी और यह स्टार्टअप्स, छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs), और बड़ी कंपनियों के लिए कस्टमाइज्ड ऑफिस स्पेस प्रदान करता है। इसके अलावा, यह फूड और बेवरेजेस, IT सपोर्ट, इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज जैसी एडिशनल सर्विसेज भी ऑफर करता है।

कंपनी की ग्रोथ का प्रमुख कारण भारत में हाइब्रिड और फ्लेक्सिबल वर्किंग मॉडल की बढ़ती मांग है। स्टार्टअप्स और बड़ी कंपनियां पारंपरिक ऑफिस लीज़ के बजाय शॉर्ट-टर्म और फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे को-वर्किंग स्पेस इंडस्ट्री तेजी से ग्रोथ कर रही है

Awfis के कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू का 76.7% हिस्सा को-वर्किंग स्पेस रेंटल और इससे जुड़ी सेवाओं से आया।

  • को-वर्किंग स्पेस रेंटल और संबंधित सेवाओं से कंपनी की आय Q3 FY25 में ₹244 करोड़ रही, जो कि Q3 FY24 के ₹160 करोड़ से 52.5% अधिक है।
  • कंस्ट्रक्शन, फिट-आउट प्रोजेक्ट्स, फैसिलिटी मैनेजमेंट और फूड आइटम्स की बिक्री भी कंपनी के अन्य राजस्व स्रोत रहे।

कंपनी ने चालू वित्त वर्ष (FY25) की पहली 9 महीनों में ₹868 करोड़ का कुल राजस्व अर्जित किया और इस दौरान इसका शुद्ध लाभ (Net Profit) ₹56.6 करोड़ दर्ज किया गया।

Awfis के खर्चों में बढ़ोतरी

कंपनी का कुल खर्च Q3 FY25 में 36.6% बढ़कर ₹317 करोड़ हो गया, जबकि Q3 FY24 में यह ₹232 करोड़ था।

प्रमुख खर्चों की श्रेणियां:

सब-कॉन्ट्रैक्टिंग और ट्रेडेड गुड्स की खरीद – कुल खर्च का 22%
एम्प्लॉयी बेनेफिट्स (Employee Benefits)
डिप्रिसिएशन और एमॉर्टाइज़ेशन (Depreciation & Amortization)
फाइनेंस कॉस्ट्स (Finance Costs)

इन बढ़ते खर्चों के बावजूद, कंपनी की राजस्व वृद्धि और ऑपरेशनल एफिशिएंसी ने इसे लाभ में बनाए रखा है।

मुनाफे में जबरदस्त उछाल

Awfis ने Q3 FY25 में ₹15.1 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया, जबकि पिछले साल (Q3 FY24) में इसे ₹6.2 करोड़ का नुकसान हुआ था।

हालांकि, दूसरी तिमाही (Q2 FY25) में कंपनी का शुद्ध लाभ ₹38.6 करोड़ था, जिससे Q3 में सीक्वेंशियल रूप से गिरावट देखी गई।

शेयर बाजार में प्रदर्शन

Awfis का शेयर ₹664 प्रति शेयर पर बंद हुआ, जो 3.36% की गिरावट को दर्शाता है।

वर्तमान में, कंपनी की कुल बाजार पूंजी (Market Capitalization) ₹4,702 करोड़ (~$559 मिलियन) है।

भारत में को-वर्किंग स्पेस इंडस्ट्री का विस्तार

Awfis की ग्रोथ से साफ संकेत मिलता है कि भारत में को-वर्किंग स्पेस इंडस्ट्री तेजी से आगे बढ़ रही है

किन कारणों से को-वर्किंग स्पेस की मांग बढ़ रही है?
📌 हाइब्रिड वर्क कल्चर का बढ़ना – कोविड-19 के बाद कई कंपनियां स्थायी रूप से हाइब्रिड वर्क मॉडल अपनाने लगी हैं।
📌 कॉर्पोरेट्स और स्टार्टअप्स का झुकाव – कई बड़ी कंपनियां और स्टार्टअप्स फिक्स्ड ऑफिस लीज़ के बजाय फ्लेक्सिबल स्पेस को चुन रहे हैं।
📌 मेट्रो और टियर-2 शहरों में विस्तार – कंपनियां दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों के अलावा टियर-2 शहरों में भी को-वर्किंग स्पेस की मांग बढ़ा रही हैं।

Awfis इस बढ़ती मांग का फायदा उठाकर अपनी सेवाओं का विस्तार कर सकता है और नए शहरों में अपने सेंटर खोल सकता है।

Awfis की भविष्य की रणनीति

आने वाले समय में, Awfis अपने कारोबार को और अधिक डिजिटल और टेक-इनेबल्ड समाधान के साथ आगे बढ़ाने की योजना बना सकता है।

👉 नए शहरों में विस्तार – कंपनी आने वाले वर्षों में भारत के प्रमुख टियर-2 और टियर-3 शहरों में अपनी मौजूदगी बढ़ा सकती है।
👉 कॉर्पोरेट पार्टनरशिप बढ़ाना – Awfis बड़ी कंपनियों के साथ लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स साइन कर सकता है।
👉 डिजिटल बुकिंग और ऑन-डिमांड वर्कस्पेस – कंपनी AI और ऑटोमेशन की मदद से अपने ग्राहकों को तेजी से सर्विस दे सकती है।
👉 नए रेवेन्यू मॉडल – Awfis फिट-आउट और कस्टम वर्कस्पेस डिजाइन जैसी एडिशनल सर्विसेज को बढ़ाकर अपनी आमदनी बढ़ा सकता है।

निष्कर्ष

Awfis ने Q3 FY25 में 44% की सालाना ग्रोथ के साथ शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी की राजस्व आय ₹318 करोड़ तक पहुंच गई और ₹15.1 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया गया।

भारत में को-वर्किंग स्पेस इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है और Awfis इस बढ़ती मांग का सबसे अधिक लाभ उठा सकता है।

अगर कंपनी अपने विस्तार और टेक्नोलॉजी-संचालित सेवाओं पर ध्यान केंद्रित करती है, तो आने वाले वर्षों में यह भारत की सबसे बड़ी को-वर्किंग स्पेस प्रोवाइडर बन सकती है। 🚀

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