💼 Cashfree Payments ने नियुक्त किया नया CFO,

Cashfree Payments

भारत के अग्रणी फिनटेक स्टार्टअप्स में शामिल Cashfree Payments ने अपने वरिष्ठ नेतृत्व में बड़ा बदलाव करते हुए Piyush Anchliya को नया मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) नियुक्त किया है। यह नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है जब कंपनी अपने वित्तीय प्लेटफॉर्म को और अधिक सशक्त बनाने और बड़े पैमाने पर ट्रांजैक्शन हैंडलिंग पर ध्यान केंद्रित कर रही है।


👨‍💼 कौन हैं Piyush Anchliya?

Piyush Anchliya एक अनुभवी फाइनेंस प्रोफेशनल हैं, जो वित्तीय रणनीति और निवेश प्रबंधन में दो दशकों से अधिक का अनुभव रखते हैं। उन्होंने इससे पहले Bandhan Asset Management Company (पूर्व में IDFC AMC) में CFO के रूप में काम किया है।

उनके अन्य प्रमुख अनुभव:

  • Barclays Investment Bank, न्यूयॉर्क
  • Lehman Brothers, लंदन

अब वह Cashfree के सह-संस्थापक आकश सिन्हा को रिपोर्ट करेंगे और कंपनी की समग्र वित्तीय योजना और परिचालन की जिम्मेदारी संभालेंगे।


🔄 CFO परिवर्तन: विदाई Vikas Guru को

Anchliya ने Vikas Guru का स्थान लिया है, जिन्होंने पिछले चार वर्षों तक Cashfree में CFO की भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल में कंपनी ने महत्वपूर्ण नियामकीय स्वीकृतियां और मजबूत वित्तीय वृद्धि हासिल की।


💰 Cashfree Payments की फंडिंग और विस्तार की दिशा

हाल ही में Cashfree Payments ने $53 मिलियन (लगभग ₹440 करोड़) की फंडिंग जुटाई थी, जिसका नेतृत्व Krafton और Apis Partners ने किया था। यह फंडिंग कंपनी की विकास योजनाओं और नए प्रोडक्ट्स के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


📊 Cashfree का परिचालन और कारोबार

  • कंपनी का दावा है कि वह सालाना $80 बिलियन (₹6.6 लाख करोड़ से अधिक) के ट्रांजैक्शंस प्रोसेस करती है।
  • यह सेवा भारत के 8 लाख से अधिक बिजनेसों को उपलब्ध कराती है।
  • इसके ग्राहकों में ईकॉमर्स कंपनियां, NBFCs, एजुकेशन प्लेटफॉर्म्स और लॉजिस्टिक्स कंपनियां शामिल हैं।

🏦 RBI की मंजूरी: पेमेंट एग्रीगेटर के रूप में बड़ा कदम

दिसंबर 2023 में, Cashfree को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से पेमेंट एग्रीगेटर के रूप में संचालन की मंजूरी मिली थी। अब यह कंपनी:

  • डोमेस्टिक और
  • क्रॉस-बॉर्डर दोनों तरह के पेमेंट प्रोसेस कर सकती है।

साथ ही, Cashfree को Prepaid Payment Instruments (PPI) जैसे मोबाइल वॉलेट जारी करने का भी लाइसेंस मिला है।


🔍 कंपनी का रणनीतिक फोकस: टेक्नोलॉजी और स्केलेबिलिटी

CFO की भूमिका में Anchliya के आने के बाद Cashfree की रणनीति होगी:

  • ट्रांजैक्शन प्रोसेसिंग स्केल को और मज़बूत करना
  • नई वित्तीय सेवाओं और प्रोडक्ट्स को लॉन्च करना
  • रिस्क मैनेजमेंट और रेगुलेटरी अनुपालन को ऑप्टिमाइज़ करना
  • सस्टेनेबल फाइनेंशियल प्लानिंग को अपनाना

🌐 भारतीय फिनटेक इकोसिस्टम में Cashfree की भूमिका

Cashfree आज भारत के सबसे तेज़ी से बढ़ते फिनटेक पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म्स में से एक है। इसकी सेवाएं निम्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं:

  • पेआउट सॉल्यूशंस
  • इंस्टैंट रिफंड सिस्टम
  • सब्सक्रिप्शन बिलिंग
  • एपीआई-बेस्ड पेमेंट गेटवे
  • ऑटोमेटेड वेंडर पेमेंट्स

इसके प्रतिस्पर्धी Razorpay, PayU, Instamojo और Juspay जैसे प्लेटफॉर्म्स हैं, लेकिन Cashfree ने सरल इंटरफेस, तेजी से सेवा और व्यापक API इंटीग्रेशन के माध्यम से अपना एक अलग स्थान बना लिया है।


🗣️ संस्थापकों की प्रतिक्रिया

सह-संस्थापक और CEO आकश सिन्हा ने कहा:

“हमारे लिए यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है। Piyush के पास फाइनेंशियल ऑपरेशंस, स्ट्रैटेजी और फंडरेजिंग का समृद्ध अनुभव है, जो हमें अगली विकास यात्रा के लिए तैयार करेगा।”


📌 निष्कर्ष

Piyush Anchliya की CFO के रूप में नियुक्ति दर्शाती है कि Cashfree अपने नेतृत्व ढांचे को मजबूत कर, आगे की वित्तीय और तकनीकी चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। पेमेंट्स, फिनटेक इंफ्रास्ट्रक्चर और रेगुलेटरी अनुपालन जैसे क्षेत्रों में अब Cashfree का भविष्य और भी स्पष्ट और सशक्त दिख रहा है। रणनीतिक कदम है जो Cashfree को वैश्विक स्तर पर ले जाने की दिशा में प्रेरित करेगा।


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Eruditus ने FY24 में ₹3,733 करोड़ का राजस्व पार किया,

Eruditus

मुंबई: ग्लोबल एडटेक कंपनी Eruditus ने वित्त वर्ष 2024 (FY24) में 12% सालाना वृद्धि के साथ ₹3,733 करोड़ ($448 मिलियन) का परिचालन राजस्व पार कर लिया। इसके साथ ही, कंपनी ने अपने घाटे को 83% तक कम करने में सफलता हासिल की।

👉 Eruditus का वित्तीय वर्ष जुलाई से जून तक चलता है, जिससे यह अन्य एडटेक कंपनियों से अलग वित्तीय रिपोर्टिंग करता है।

🚀 इस प्रदर्शन के साथ Eruditus भारतीय एडटेक कंपनियों के मुकाबले कहीं आगे नजर आ रहा है।


📊 Eruditus बनाम अन्य एडटेक कंपनियां

Eruditus का FY24 में राजस्व 👉 ₹3,733 करोड़
PhysicsWallah का FY24 राजस्व 👉 ₹2,015 करोड़
upGrad का FY24 राजस्व 👉 ₹1,487 करोड़

📢 Eruditus का राजस्व PhysicsWallah से 1.8 गुना और upGrad से दोगुना से भी अधिक है।

📌 इससे साफ है कि Eruditus वैश्विक स्तर पर भारतीय एडटेक कंपनियों की तुलना में कहीं बड़ा और मजबूत खिलाड़ी बनकर उभर रहा है।


🌍 80+ देशों में फैला ग्लोबल नेटवर्क

Eruditus की शिक्षा सेवाएं 80 से अधिक देशों में फैली हुई हैं, और कंपनी के 80 से ज्यादा प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी है।

🎓 प्रमुख विश्वविद्यालयों के साथ Eruditus की साझेदारी:
अमेरिका
यूरोप
लैटिन अमेरिका
दक्षिण पूर्व एशिया
भारत
चीन

📢 हालांकि, कंपनी ने अभी तक यह नहीं बताया है कि उसकी किस भौगोलिक क्षेत्र से कितनी कमाई हुई है।


📈 वित्तीय प्रदर्शन और लागत नियंत्रण

💰 राजस्व वृद्धि 👉 12% बढ़कर ₹3,733 करोड़ हुआ
📉 घाटे में कमी 👉 83% घटकर ₹69 करोड़ ($8.3 मिलियन) रह गया
📊 समायोजित EBITDA घाटा 👉 ₹417 करोड़ से ₹69 करोड़ तक गिरा

💸 लागत में कटौती से Eruditus को बड़ा फायदा मिला:
📉 मार्केटिंग खर्च 18.85% घटकर ₹1,007 करोड़ हुआ
📉 अन्य परिचालन खर्च 32.16% घटकर ₹1,045 करोड़ हुआ

👉 इस लागत सुधार ने कंपनी की वित्तीय स्थिति को मजबूत किया है और मुनाफे की ओर बढ़ने में मदद की है।


💰 निवेश और पूंजी विस्तार

🚀 Eruditus को निवेशकों का जबरदस्त समर्थन प्राप्त है:
📌 TPG
📌 Chan Zuckerberg Initiative
📌 SoftBank Vision Fund 2
📌 Prosus Ventures
📌 Accel
📌 Peak XV Partners

📢 अक्टूबर 2024 में, Eruditus ने $150 मिलियन का निवेश जुटाया था।
👉 यह PhysicsWallah के $210 मिलियन के निवेश के बाद साल का दूसरा सबसे बड़ा एडटेक निवेश था।

📌 इन फंडिंग राउंड्स ने कंपनी को अपने बाजार विस्तार और नए सेगमेंट में प्रवेश करने का अवसर दिया है।


💡 FY25 में Eruditus की रणनीति

📌 FY25 के लिए कंपनी के पास ₹800 करोड़ ($96 मिलियन) का डिफर्ड रेवेन्यू (Deferred Revenue) है।
📌 यह संकेत देता है कि आने वाले साल में Eruditus का प्रदर्शन और बेहतर हो सकता है।
📌 कंपनी का लक्ष्य FY25 में मुनाफा कमाने की दिशा में आगे बढ़ना है।

👉 Eruditus अपनी ब्रांड वैल्यू को और मजबूत करने के लिए मार्केटिंग खर्च को कम करते हुए स्मार्ट इन्वेस्टमेंट पर फोकस करेगा।

🚀 शिक्षा क्षेत्र में अच्छी ब्रांड्स समय के साथ और बेहतर होती हैं, और Eruditus इसी राह पर आगे बढ़ रहा है।


📢 निष्कर्ष: क्या Eruditus भारत की सबसे बड़ी एडटेक कंपनी बनने की ओर है?

📈 Eruditus का FY24 का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा है:
₹3,733 करोड़ का राजस्व पार
83% तक घाटे में कमी
वैश्विक स्तर पर मजबूत उपस्थिति

👉 PhysicsWallah और upGrad जैसे प्रतिस्पर्धियों से आगे निकलते हुए, Eruditus ने यह दिखा दिया कि वह भारतीय एडटेक सेक्टर में अग्रणी बन सकता है।

🚀 यदि कंपनी लागत प्रबंधन और रणनीतिक निवेश जारी रखती है, तो यह जल्द ही भारत की सबसे बड़ी एडटेक कंपनी बन सकती है।

📌 अब सबकी नजर इस पर है कि क्या Eruditus FY25 में मुनाफा कमाने में सफल होगा?

⚡ आपकी क्या राय है? क्या Eruditus एडटेक सेक्टर का अगला बड़ा लीडर बन सकता है? हमें कमेंट में बताएं! 🚀

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HRTech स्टार्टअप ZingHR की जबरदस्त ग्रोथ,

ZingHR

मुंबई स्थित क्लाउड-आधारित HRTech स्टार्टअप ZingHR ने बीते वित्तीय वर्ष में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी का परिचालन से राजस्व 47% की बढ़ोतरी के साथ 124 करोड़ रुपये को पार कर गया। इसके साथ ही, कंपनी ने अपने घाटे को दो-तिहाई तक कम कर लिया है।

आइए विस्तार से समझते हैं कि ZingHR ने कैसे अपनी फाइनेंशियल परफॉर्मेंस को बेहतर किया।


FY24 में ZingHR का प्रदर्शन

ZingHR का राजस्व FY23 में 84 करोड़ रुपये था, जो FY24 में बढ़कर 124 करोड़ रुपये हो गया। इस 47% ग्रोथ का मुख्य कारण कंपनी की सेवाओं की बढ़ती मांग और नए ग्राहकों की संख्या में वृद्धि रही।

कंपनी BFSI, रिटेल, IT और अन्य सेक्टर्स में स्टाफिंग और टैलेंट एक्विजिशन सेवाएं देती है। इसके अलावा, ZingHR का मुख्य रेवेन्यू सोर्स सब्सक्रिप्शन-बेस्ड सॉफ्टवेयर सेवाओं की बिक्री से आता है।


सबसे ज्यादा खर्च कर्मचारी वेतन पर

किसी भी HRTech प्लेटफॉर्म की तरह, ZingHR का सबसे बड़ा खर्चा कर्मचारियों का वेतन और लाभ (Employee Benefits) ही रहा।

  • FY24 में कंपनी ने इस मद में कुल 81 करोड़ रुपये खर्च किए, जो पिछले साल की तुलना में 37% अधिक है (FY23 में यह खर्च 59 करोड़ रुपये था)।
  • कुल खर्चों में कर्मचारियों की सैलरी का योगदान 61% रहा।

इसके अलावा, कंपनी ने अन्य मदों में भी खर्च बढ़ाया:

  • सर्वर और डेटा सिक्योरिटी पर खर्च 71% बढ़कर 12 करोड़ रुपये हो गया।
  • प्रोडक्ट मेंटेनेंस पर खर्च 50% की बढ़ोतरी के साथ 9 करोड़ रुपये हो गया।
  • हालांकि, प्रोफेशनल फीस और अन्य खर्चों में हल्की गिरावट देखने को मिली।

कुल मिलाकर, ZingHR का कुल खर्च 24% बढ़कर 133 करोड़ रुपये हो गया।


ZingHR ने दो-तिहाई घाटा कम किया

बढ़ते खर्चों के बावजूद, ZingHR ने अपने घाटे को 67% कम कर लिया है

  • FY23 में कंपनी का कुल घाटा 21 करोड़ रुपये था, जो FY24 में घटकर सिर्फ 7 करोड़ रुपये रह गया।
  • यह सुधार कंपनी की बेहतर लागत-प्रबंधन रणनीति और बढ़ते राजस्व की वजह से हुआ है।

कंपनी का ROCE (Return on Capital Employed) -24.69% और EBITDA मार्जिन -5.52% दर्ज किया गया।


प्रत्येक 1 रुपये की कमाई के लिए खर्च किए 1.07 रुपये

वित्तीय वर्ष 2024 में, ZingHR ने प्रत्येक 1 रुपये के ऑपरेटिंग रेवेन्यू के लिए 1.07 रुपये खर्च किए। हालांकि, यह घाटे को दर्शाता है, लेकिन इसमें पिछले साल की तुलना में सुधार हुआ है।


कैश और एसेट्स का मजबूत पोर्टफोलियो

ZingHR ने FY24 में 56 करोड़ रुपये के करंट एसेट्स दर्ज किए, जिनमें 12 करोड़ रुपये कैश और बैंक बैलेंस के रूप में थे।


ZingHR की भविष्य की योजनाएं

ZingHR अपनी सेवाओं का विस्तार करने के लिए कई नई रणनीतियों पर काम कर रही है। कंपनी की योजना है कि वह:

  1. HRTech में नई तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाएगी ताकि कंपनियों को और अधिक एडवांस्ड सॉल्यूशंस मिल सकें।
  2. AI और ऑटोमेशन जैसी तकनीकों के जरिए टैलेंट हायरिंग को आसान बनाएगी।
  3. नए ग्राहकों को जोड़ने और सब्सक्रिप्शन-बेस्ड रेवेन्यू मॉडल को मजबूत करने पर ध्यान देगी।

निष्कर्ष: ZingHR की ग्रोथ जारी, प्रॉफिटेबिलिटी की ओर बढ़ रहा है स्टार्टअप

ZingHR ने FY24 में शानदार प्रदर्शन किया है, जहां कंपनी ने अपने राजस्व में 47% की बढ़ोतरी की और घाटे को 67% कम किया

हालांकि, कंपनी को अभी भी ऑपरेटिंग प्रोफिट तक पहुंचने के लिए और सुधार करने होंगे। लेकिन जिस गति से ZingHR आगे बढ़ रही है, यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले वर्षों में कंपनी एक सस्टेनेबल और प्रॉफिटेबल HRTech स्टार्टअप बनने की ओर अग्रसर है। 🚀

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Glance ने Stride Ventures से ₹200 करोड़ का कर्ज जुटाया,

Glance

मोबाइल-फर्स्ट कंटेंट प्लेटफॉर्म Glance ने अपनी पहली डेट फंडिंग हासिल की है। कंपनी ने Stride Ventures से ₹200 करोड़ (लगभग $23 मिलियन) का कर्ज जुटाया है। यह फंडिंग कंपनी के लिए तीन साल बाद पहली पूंजी निवेश है। इससे पहले, फरवरी 2022 में, Jio Platforms से मिले $200 मिलियन के सीरीज D राउंड के बाद कंपनी को कोई नई फंडिंग नहीं मिली थी।


Glance कर्ज जुटाने की प्रक्रिया

📌 Glance के बोर्ड ने Stride Ventures को 20,000 नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) जारी करने की मंजूरी दी है।
📌 प्रत्येक डिबेंचर की कीमत ₹1,00,000 तय की गई है, जिससे कुल ₹200 करोड़ जुटाए जाएंगे।
📌 Registrar of Companies (RoC) के पास दायर रेगुलेटरी फाइलिंग से यह जानकारी सामने आई है।

📊 इस फंडिंग का उपयोग Glance अपनी ग्रोथ, विस्तार और सामान्य कॉर्पोरेट गतिविधियों के लिए करेगा।


Glance: मोबाइल-फर्स्ट कंटेंट प्लेटफॉर्म

Glance एक मोबाइल-फर्स्ट कंटेंट प्लेटफॉर्म है, जो स्मार्टफोन लॉक स्क्रीन पर डायरेक्ट कंटेंट और विज्ञापन उपलब्ध कराता है।

🔹 Glance Lock Screen: उपयोगकर्ता को मोबाइल लॉक स्क्रीन पर समाचार, मूवी, स्पोर्ट्स, यात्रा, गेम्स और अन्य आकर्षक कंटेंट दिखाया जाता है।
🔹 Home Screen फीचर: उपयोगकर्ता अपने डिवाइस की होम स्क्रीन को व्यक्तिगत पसंद के अनुसार कस्टमाइज़ कर सकते हैं।

📊 Glance की यह खासियत इसे अन्य कंटेंट प्लेटफॉर्म्स से अलग बनाती है और विज्ञापनदाताओं के लिए एक अनोखा अवसर प्रदान करती है।


Glance के प्रमुख निवेशक और अब तक जुटाई गई फंडिंग

Startup डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म TheKredible के अनुसार, Glance ने अब तक कुल $390 मिलियन की इक्विटी फंडिंग जुटाई है।

इसके प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:

Reliance-स्वामित्व वाली Jio Platforms
Google
Mithril Capital

📌 दिसंबर 2020 में, Glance ने Google और US-आधारित वेंचर कैपिटल फर्म Mithril से $145 मिलियन जुटाकर यूनिकॉर्न स्टार्टअप का दर्जा प्राप्त किया था।
📌 कंपनी 2023 में Google के नेतृत्व में $250 मिलियन जुटाने की योजना बना रही थी, लेकिन सौदा आगे नहीं बढ़ पाया।

💰 Glance की पेरेंट कंपनी InMobi ने भी 2023 में MARS Growth Capital (MUFG और Liquidity Group का जॉइंट वेंचर) से $100 मिलियन की डेट फंडिंग जुटाई थी।


Glance की वित्तीय स्थिति और FY24 परफॉर्मेंस

📈 Glance ने वित्त वर्ष 2024 (FY24) में ₹600 करोड़ का ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 90% अधिक था।
हालांकि, कंपनी को ₹929 करोड़ का भारी नुकसान हुआ।

📉 FY24 में बढ़े हुए खर्च और ऑपरेशनल कॉस्ट्स के कारण कंपनी को घाटा सहना पड़ा।

📌 Glance को अपनी फाइनेंशियल स्थिति सुधारने के लिए फंडिंग की जरूरत थी, और यही कारण है कि कंपनी ने पहली बार डेट फाइनेंसिंग का रास्ता अपनाया।


Glance का भविष्य और नई फंडिंग का प्रभाव

🚀 Glance अपनी नई फंडिंग का उपयोग किन क्षेत्रों में करेगा?

1️⃣ ग्रोथ और विस्तार – कंपनी अपनी सेवाओं का विस्तार और नए बाजारों में प्रवेश करने के लिए इस पूंजी का उपयोग करेगी।
2️⃣ तकनीकी उन्नति – कंटेंट डिलीवरी, यूजर एक्सपीरियंस और पर्सनलाइज़ेशन को बेहतर बनाने के लिए निवेश होगा।
3️⃣ नई साझेदारियाँ और विज्ञापन रणनीति – अधिक विज्ञापनदाताओं को आकर्षित करने और रेवेन्यू बढ़ाने के लिए कंपनी नई साझेदारियाँ कर सकती है।

📌 कंपनी की रणनीति मोबाइल विज्ञापन और AI-ड्रिवन कंटेंट पर्सनलाइज़ेशन को बेहतर बनाने की है, ताकि अधिक यूजर्स को जोड़ा जा सके और रेवेन्यू बढ़ाया जा सके।


क्या Glance बाजार में मजबूत स्थिति बनाए रख पाएगा?

🔹 Glance भारतीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए लगातार नए फीचर्स और बिजनेस मॉडल पर काम कर रहा है।
🔹 हालांकि, भारी घाटे के चलते कंपनी को अपने लागत प्रबंधन और रेवेन्यू जनरेशन रणनीति पर ध्यान देना होगा।
🔹 डेट फंडिंग से कंपनी को अस्थायी राहत मिलेगी, लेकिन दीर्घकालिक लाभ के लिए मुनाफे पर ध्यान केंद्रित करना जरूरी होगा।

📊 क्या Glance इस नई फंडिंग के जरिए अपने वित्तीय प्रदर्शन को बेहतर बना पाएगा? यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा! 🚀

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Flipkart Super.money ने BharatX का अधिग्रहण किया,

Flipkart

भारत में डिजिटल भुगतान और UPI आधारित क्रेडिट सेवाओं को और मजबूत करने के उद्देश्य से Flipkart Super.money ने फिनटेक स्टार्टअप BharatX का अधिग्रहण किया है

📌 यह अधिग्रहण विशेष रूप से “चेकआउट फाइनेंसिंग” सेगमेंट को मजबूत करने के लिए किया गया है
📌 हालांकि, इस डील के वित्तीय विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं
📌 BharatX की कोर टीम अब Super.money के साथ मिलकर काम करेगी और UPI पर क्रेडिट ऑफरिंग्स को स्केल करने में मदद करेगी

💡 इस अधिग्रहण के साथ, Super.money का लक्ष्य सरल, फ्लेक्सिबल और पेपरलेस क्रेडिट सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाना है।


Super.money और BharatX के एकीकरण से UPI क्रेडिट को नया आयाम

Super.money ने कहा कि इस अधिग्रहण के तहत उन्होंने BharatX की टेक्नोलॉजी, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP), और पूरी टीम को शामिल किया है

📌 हालांकि, BharatX फिलहाल अपने मौजूदा लोन साइकल्स को पूरा करने के लिए ऑपरेट करेगा, जिसके बाद इसे बंद कर दिया जाएगा
📌 इस अधिग्रहण के बाद Super.money की क्रेडिट ऑफरिंग्स और मजबूत होंगी, जिससे UPI पर आसान फाइनेंसिंग का फायदा यूजर्स को मिलेगा

💡 यह अधिग्रहण भारत में डिजिटल पेमेंट और UPI इकोसिस्टम में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है, खासकर क्रेडिट और इंस्टेंट लोन सेक्टर में।


Super.money: Flipkart समर्थित UPI सुपर ऐप

Super.money एक फिनटेक सुपर ऐप है जिसे ई-कॉमर्स दिग्गज Flipkart ने जून 2023 में लॉन्च किया था

📌 Super.money अपने प्लेटफॉर्म पर पेमेंट्स, क्रेडिट, डिपॉजिट्स और अन्य डिजिटल वित्तीय सेवाएं प्रदान करता है
📌 BharatX के अधिग्रहण से अब Super.money अपने ग्राहकों को अधिक क्रेडिट ऑप्शंस दे सकेगा


UPI मार्केट में Super.money की स्थिति

भारत में UPI भुगतान मार्केट तेजी से बढ़ रहा है और इसमें कई बड़े खिलाड़ी सक्रिय हैं।

📊 UPI ऐप्स की मौजूदा बाजार हिस्सेदारी इस प्रकार है:

PhonePe – 47.67% मार्केट शेयर (सबसे बड़ा UPI ऐप)
Google Pay – 36.38% मार्केट शेयर
Paytm – 6.78% मार्केट शेयर
Super.money – शीर्ष 10 UPI ऐप्स में शामिल

💡 Super.money अभी बड़े UPI ऐप्स के मुकाबले नया खिलाड़ी है, लेकिन यह तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।


Checkout Financing: भारत में नई क्रेडिट क्रांति?

Checkout financing एक नया और उभरता हुआ फिनटेक सेगमेंट है, जिसमें ग्राहक ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान आसान और त्वरित क्रेडिट का लाभ उठा सकते हैं

📌 इस मॉडल में यूजर्स को तत्काल क्रेडिट दिया जाता है, जिसे वे बाद में किश्तों में चुका सकते हैं
📌 भारत में “बाय नाउ, पे लेटर (BNPL)” और इंस्टेंट लोन सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है, और इसी को ध्यान में रखते हुए Super.money ने यह अधिग्रहण किया है
📌 BharatX की तकनीक के साथ, Super.money अब अपने ग्राहकों को अधिक सुविधाजनक फाइनेंसिंग ऑप्शंस दे पाएगा

💡 Checkout Financing से न केवल ऑनलाइन शॉपिंग आसान होगी, बल्कि यह भारत में डिजिटल क्रेडिट अपनाने की दर को भी बढ़ाएगा।


Super.money का भविष्य: क्या यह UPI क्रेडिट मार्केट में लीडर बन सकता है?

Super.money तेजी से अपनी जगह बना रहा है और BharatX के अधिग्रहण से इसे और मजबूती मिलेगी।

Super.money की ग्रोथ को किन चीजों से मदद मिलेगी?

Checkout Financing में विस्तार – BharatX के तकनीकी समाधान से Super.money ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचेगा।
Flipkart का समर्थन – Flipkart पहले से ही डिजिटल पेमेंट स्पेस में मजबूत उपस्थिति रखता है, जिससे Super.money को फायदा मिलेगा।
UPI क्रेडिट की बढ़ती मांग – भारत में डिजिटल लेन-देन बढ़ने के साथ-साथ क्रेडिट आधारित UPI सेवाओं की मांग भी तेजी से बढ़ रही है।
कॉम्पिटीशन से निपटना – Super.money को PhonePe, Google Pay, और Paytm जैसे बड़े खिलाड़ियों से मुकाबला करना होगा, लेकिन Checkout Financing जैसे नए सेगमेंट में यह आगे निकल सकता है।

💡 क्या Super.money UPI क्रेडिट मार्केट में एक बड़ा नाम बन पाएगा? यह आने वाले महीनों में देखना दिलचस्प होगा! 🚀

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The Ayurveda Co (TAC) 66% की ग्रोथ के बावजूद घाटा तीन गुना बढ़ा

TAC

D2C आयुर्वेदिक ब्रांड The Ayurveda Co (TAC) ने वित्त वर्ष 2024 (FY24) में 66% सालाना ग्रोथ दर्ज की, लेकिन खर्चों में भारी वृद्धि के कारण इसका घाटा तीन गुना बढ़कर ₹68 करोड़ हो गया

The Ayurveda Co Sixth Sense Ventures द्वारा समर्थित एक लोकप्रिय ब्रांड है, जो आयुर्वेदिक ब्यूटी, पर्सनल केयर, हेयर केयर, स्किनकेयर, मेकअप और वेलनेस प्रोडक्ट्स बनाता और बेचता है। हालांकि, बिक्री बढ़ने के बावजूद कंपनी की बिजनेस स्ट्रैटेजी और फाइनेंशियल हेल्थ पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।


TAC FY24 में कंपनी का राजस्व ₹62 करोड़, लेकिन लागत दोगुनी हुई

कंपनी ने वित्त वर्ष 2024 में ₹62 करोड़ का कुल राजस्व अर्जित किया, जिसमें:

  • ₹59.6 करोड़ की आमदनी प्रोडक्ट्स की बिक्री से हुई, जो FY23 के ₹36 करोड़ की तुलना में 66% अधिक है।
  • ₹2.4 करोड़ का अतिरिक्त रेवेन्यू ब्याज और अन्य स्रोतों से आया।

हालांकि, तेजी से बढ़ते खर्चों ने मुनाफे पर दबाव डाल दिया, जिससे कंपनी के घाटे में बड़ा उछाल आया।


खर्चों में जबरदस्त बढ़ोतरी, कच्चे माल और विज्ञापन सबसे बड़े खर्च

FY24 में The Ayurveda Co (TAC)के कुल खर्चों में 97% की वृद्धि हुई, जिससे यह ₹109.5 करोड़ तक पहुंच गया

📌 मुख्य खर्च:
कच्चे माल (Raw Material) का खर्च: ₹12 करोड़ (FY23) → ₹28.6 करोड़ (FY24) (2.4 गुना वृद्धि)
विज्ञापन और मार्केटिंग खर्च: ₹15 करोड़ (FY23) → ₹26 करोड़ (FY24) (73.3% वृद्धि)
कर्मचारियों के वेतन और अन्य लाभ: ₹8.6 करोड़ (FY23) → ₹15.5 करोड़ (FY24) (80.2% वृद्धि)
भर्ती और कर्मचारी प्रबंधन का खर्च: ₹11.3 करोड़

कंपनी ने अपने ब्रांड को मजबूत करने के लिए भारी विज्ञापन और मार्केटिंग खर्च किए, लेकिन इनका असर कंपनी की लाभप्रदता पर पड़ा है।


तीन गुना बढ़ा घाटा, ₹1 कमाने पर ₹1.84 खर्च

इतने अधिक खर्चों के कारण FY24 में The Ayurveda Co को ₹68 करोड़ का घाटा हुआ, जो FY23 के ₹21 करोड़ के घाटे से 3.2 गुना अधिक है।

📊 महत्वपूर्ण फाइनेंशियल आंकड़े:
ROCE (Return on Capital Employed): -700%
EBITDA मार्जिन: -100.65%
प्रत्येक ₹1 कमाने के लिए कंपनी को ₹1.84 खर्च करना पड़ा।


क्या The Ayurveda Co सही बिजनेस मॉडल पर चल रही है?

बिजनेस मॉडल की मौजूदा स्थिति:

The Ayurveda Co D2C (Direct-to-Consumer) मॉडल पर आधारित है, जहां यह अपने प्रोडक्ट्स को ऑनलाइन स्टोर्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बेचती है। हालांकि, D2C मॉडल की अपनी चुनौतियां होती हैं, जिनमें सबसे बड़ी चुनौती उच्च मार्केटिंग खर्च और ब्रांड बिल्डिंग है।

📌 मुख्य समस्याएं:
D2C मार्केट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा – Mamaearth, Plum, और Forest Essentials जैसी कंपनियों से सीधा मुकाबला।
ऑपरेशनल कॉस्ट का तेज़ी से बढ़ना – सप्लाई चेन, वेयरहाउसिंग और डिलीवरी में अधिक खर्च।
कस्टमर रिटेंशन की चुनौती – बार-बार नए ग्राहकों को लाना महंगा पड़ता है।


The Ayurveda Co को मुनाफे में कैसे लाया जा सकता है?

अगर The Ayurveda Co को मजबूत ब्रांड और फाइनेंशियल रूप से स्थिर कंपनी बनना है, तो इसे अपने बिजनेस मॉडल में सुधार करने होंगे

मार्केटिंग खर्च को स्मार्ट तरीके से नियंत्रित करना
✔ डिजिटल मार्केटिंग को ऑर्गेनिक ग्रोथ पर केंद्रित करना
✔ इंफ्लुएंसर मार्केटिंग पर अधिक ध्यान देना
✔ ब्रांड अवेयरनेस पर खर्च को सीमित रखना

उच्च मार्जिन वाले नए प्रोडक्ट्स लॉन्च करना
✔ स्किनकेयर और हेल्थ सेगमेंट में प्रीमियम प्रोडक्ट्स जोड़ना
✔ सब्सक्रिप्शन मॉडल अपनाना (जैसे मासिक हेल्थ बॉक्स)

ऑफलाइन स्टोर्स और रिटेल चैनलों में विस्तार करना
✔ D2C के साथ-साथ मल्टी-ब्रांड रिटेल स्टोर्स में एंट्री लेना
✔ बड़े शहरों में एक्सक्लूसिव स्टोर्स खोलना

सप्लाई चेन ऑप्टिमाइजेशन से लागत कम करना
✔ प्रोडक्शन कॉस्ट को नियंत्रित करने के लिए लोकल सप्लायर्स के साथ काम करना
✔ डिलीवरी पार्टनरशिप्स को मजबूत करना


क्या The Ayurveda Co का भविष्य सुरक्षित है?

The Ayurveda Co ने पिछले कुछ सालों में तेजी से ग्रोथ दर्ज की है, लेकिन उच्च लागत और लगातार बढ़ते घाटे के कारण कंपनी की लॉन्ग-टर्म स्थिरता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

संभावनाएं:
🚀 अगर कंपनी अपनी मार्केटिंग और ऑपरेशनल स्ट्रैटेजी में बदलाव करती है, तो यह भविष्य में एक मजबूत और लाभदायक ब्रांड बन सकती है।
💡 लेकिन अगर कंपनी इसी तरह उच्च खर्चों के साथ बिना मुनाफे पर ध्यान दिए आगे बढ़ती रही, तो इसके लिए टिके रहना मुश्किल हो सकता है।

निष्कर्ष: ग्रोथ है, लेकिन सतर्क रणनीति अपनाने की जरूरत

📌 The Ayurveda Co के पास आगे बढ़ने की बड़ी संभावनाएं हैं, लेकिन इसे फाइनेंशियल प्लानिंग और रणनीतिक खर्च पर ध्यान देने की जरूरत है।
📌 अगर कंपनी सही कदम उठाती है, तो यह आने वाले वर्षों में D2C सेगमेंट में एक लीडिंग ब्रांड बन सकती है। 🚀

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साप्ताहिक भारतीय स्टार्टअप फंडिंग रिपोर्ट: 32 स्टार्टअप्स ने जुटाए $375.52 मिलियन

Last Week Indian startups

पिछले सप्ताह में, 32 भारतीय स्टार्टअप्स ने सामूहिक रूप से लगभग $375.52 मिलियन की फंडिंग प्राप्त की। इसमें 7 ग्रोथ-स्टेज डील्स और 22 अर्ली-स्टेज डील्स शामिल थीं। इसके अतिरिक्त, 3 स्टार्टअप्स ने अपने सौदे के विवरण साझा नहीं किए।

पिछले सप्ताह की तुलना में, जब 23 अर्ली और ग्रोथ-स्टेज स्टार्टअप्स ने कुल लगभग $137 मिलियन जुटाए थे, इस सप्ताह स्टार्टअप फंडिंग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

ग्रोथ-स्टेज फंडिंग डील्स

इस सप्ताह ग्रोथ-स्टेज फंडिंग में, कॉन्टैक्टलेस पेमेंट सॉल्यूशंस प्रदाता ToneTag ने $78 मिलियन की सीरीज़ B फंडिंग जुटाई, जिसका नेतृत्व ValueQuest S.C.A.L.E. Fund ने किया। वहीं, SpotDraft, जो एक कॉन्ट्रैक्ट लाइफसाइकिल मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म है, ने $54 मिलियन जुटाए, जिसमें Vertex Growth Singapore और Trident Partners प्रमुख निवेशक थे।

इसके अलावा, आधुनिक बैंकिंग टेक कंपनी Zeta ने $50 मिलियन की फंडिंग प्राप्त की, जिससे इसकी वैल्यूएशन $2 बिलियन हो गई। इस सप्ताह फंडिंग प्राप्त करने वाले अन्य ग्रोथ-स्टेज स्टार्टअप्स में AI स्टार्टअप 75F, मोबिलिटी कंपनी Rapido, इलेक्ट्रिक बस निर्माता PMI Electro Mobility और D2C फुटवियर ब्रांड JQR शामिल हैं।

अर्ली-स्टेज फंडिंग डील्स

इस सप्ताह 22 अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स ने कुल $64.82 मिलियन की फंडिंग प्राप्त की। इनमें Lucidity ने सबसे अधिक $21 मिलियन (सीरीज़ A) जुटाए। इसके बाद BorderPlus, Boldcare और CapGrid Solutions जैसे स्टार्टअप्स ने भी महत्वपूर्ण निवेश प्राप्त किया।

ऑनलाइन इंग्लिश ट्यूटरिंग ऐप Bambinos.live, हेल्थकेयर स्टार्टअप Lifesigns और फाइनेंशियल रिसर्च प्लेटफॉर्म Rubyworks ने भी निवेश प्राप्त किया, हालांकि उन्होंने राशि का खुलासा नहीं किया।

शहर और सेगमेंट के अनुसार फंडिंग डील्स

शहरवार फंडिंग ट्रेंड में बेंगलुरु सबसे आगे रहा, जहां 15 स्टार्टअप्स ने फंडिंग हासिल की। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और अन्य शहरों में स्टार्टअप्स ने निवेश प्राप्त किया।

सेगमेंट के हिसाब से, फिनटेक स्टार्टअप्स शीर्ष पर रहे, जिन्होंने 5 डील्स हासिल कीं। इसके बाद SaaS, AI और हेल्थटेक स्टार्टअप्स को 3-3 डील्स प्राप्त हुईं। एडटेक, ईवी, ई-कॉमर्स और अन्य स्टार्टअप्स ने भी निवेश जुटाया।

सीरीज़ के अनुसार फंडिंग ट्रेंड

इस सप्ताह सीड फंडिंग सबसे आगे रही, जिसमें 11 डील्स हुईं। इसके बाद सीरीज़ B, सीरीज़ A, प्री-सीड और प्री-सीरीज़ A डील्स हुईं।

साप्ताहिक फंडिंग ट्रेंड

साप्ताहिक तुलना में, स्टार्टअप फंडिंग 2.7X बढ़कर $375.52 मिलियन हो गई, जबकि पिछले सप्ताह यह $136.93 मिलियन थी।

पिछले 8 हफ्तों का औसत फंडिंग आंकड़ा $291.21 मिलियन रहा, जिसमें प्रति सप्ताह औसतन 25 डील्स हुईं।

महत्वपूर्ण नियुक्तियां और इस्तीफे

  • Navi Group ने राजीव नरेश को Navi Technologies का CEO और अभिषेक द्विवेदी को Navi Finserv का CEO नियुक्त किया।
  • EV निर्माता Euler Motors ने आशीष टंडन को ग्लोबल हेड ऑफ कस्टमर एक्सीलेंस बनाया।
  • पंकज त्रिपाठी ऑडियो प्लेटफॉर्म Velevet के को-फाउंडर बने।
  • Razorpay ने खिलन हरिया को CPO (Chief Product Officer) नियुक्त किया।
  • Peak XV के शैलेश लखानी और अभीक आनंद ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

अधिग्रहण (M&A) अपडेट

  • KiranaPro ने Joper.app का अधिग्रहण किया।
  • MSys Technologies ने फिनटेक कंपनी Gophers Lab का अधिग्रहण किया।

नए फंड लॉन्च

  • Triton VC ने ₹240 करोड़ ($28 मिलियन) के दूसरे फंड की पहली क्लोजिंग की।
  • IXP VC ने B2B स्टार्टअप्स के लिए एक नया फंड लॉन्च किया।
  • WTFund ने 22 नए युवा फाउंडर्स को ग्रांट और मेंटरशिप दी।

ESOP बायबैक

राइड-हेलिंग कंपनी Rapido ने पहली बार अपने कर्मचारियों के लिए ESOP लिक्विडेशन प्रोग्राम की घोषणा की।

नई लॉन्च और पार्टनरशिप

  • Exotel ने Knowmax के साथ साझेदारी की।
  • Tata Elxsi और Garuda Aerospace ने MoU साइन किया।
  • Rebel Foods ने QuickiES नामक 15-मिनट फूड डिलीवरी ऐप लॉन्च किया।
  • Rapido कर्नाटक में महिलाओं के लिए विशेष बाइक टैक्सी सेवा शुरू करेगी।

वित्तीय रिपोर्ट (Q3 FY25)

  • Nykaa का रेवेन्यू ₹2,267 करोड़ पहुंचा, प्रॉफिट 52% बढ़ा
  • Mamaearth की पैरेंट कंपनी Honasa फिर से मुनाफे में आई।
  • Ola का रेवेन्यू 11% गिरा, लेकिन EBITDA प्रॉफिटेबल हुआ।
  • Magicpin का रेवेन्यू ₹870 करोड़ पहुंचा, घाटा कम हुआ।
  • EaseMyTrip का प्रॉफिट घटा, जबकि Yatra का 10X बढ़ा

संभावित डील्स

  • Rapido ₹250 करोड़ जुटाने की तैयारी में है।
  • Lahori ₹400-450 करोड़ की फंडिंग जुटाने पर बातचीत कर रही है।
  • Solv और Jumbotail मर्जर की योजना बना रहे हैं।

समाप्ति

इस सप्ताह भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में तेज़ी से वृद्धि देखी गई। प्रमुख कंपनियों ने IPO की योजनाएं, नए निवेश, और स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की घोषणाएं कीं। आने वाले हफ्तों में स्टार्टअप सेक्टर और भी रोमांचक बदलाव देख सकता है।

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Paytm ने Q3 FY25 राजस्व ₹1,828 करोड़, घाटा ₹208 करोड़

Paytm

फिनटेक कंपनी Paytm ने मौजूदा वित्तीय वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही (Q3 FY25) के वित्तीय नतीजे सोमवार को जारी किए। नोएडा स्थित इस कंपनी ने ₹1,828 करोड़ का राजस्व और ₹208 करोड़ का शुद्ध घाटा दर्ज किया है।

Paytm राजस्व में गिरावट, तिमाही दर तिमाही सुधार

Paytm द्वारा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में दायर अ-ऑडिटेड कंसोलिडेटेड रिपोर्ट के अनुसार:

  • कंपनी का संचालन से राजस्व साल-दर-साल 35.9% घटकर ₹2,850 करोड़ (Q3 FY24) से ₹1,828 करोड़ (Q3 FY25) हो गया।
  • हालांकि, पिछली तिमाही (Q2 FY25) की तुलना में राजस्व में 10% की वृद्धि दर्ज की गई।

राजस्व स्रोत

पेटीएम का कुल संचालन राजस्व मुख्य रूप से तीन प्रमुख खंडों से आया:

  1. भुगतान सेवा राजस्व:
    • कुल राजस्व का 55%, यानी ₹1,003 करोड़।
  2. वित्तीय और मार्केटिंग सेवाएं:
    • वित्तीय सेवाओं से ₹502 करोड़ और मार्केटिंग सेवाओं से ₹267 करोड़ का योगदान।
  3. गैर-परिचालन आय:
    • अन्य गैर-परिचालन स्रोतों से ₹189 करोड़ का इजाफा, जिससे कुल राजस्व ₹2,016.5 करोड़ तक पहुंचा।

कंपनी के खर्चों में गिरावट

पेटीएम ने अपने खर्चों में उल्लेखनीय कमी की, जो कि कंपनी के घाटे को कम करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।

  1. कर्मचारी लाभ:
    • कुल खर्च का 34% हिस्सा, ₹756 करोड़।
    • इसमें ₹182 करोड़ ESOP (इक्विटी शेयर आधारित भुगतान) का गैर-नकद खर्च शामिल है।
    • FY24 की तुलना में कर्मचारी लागत में 36% की कमी।
  2. भुगतान प्रसंस्करण शुल्क और मार्केटिंग लागत:
    • भुगतान प्रसंस्करण शुल्क ₹982 करोड़ से घटकर ₹570 करोड़ हो गया (42% की कमी)।
    • मार्केटिंग लागत ₹275 करोड़ से घटकर ₹141 करोड़ हो गई (48.7% की कमी)।
  3. अन्य खर्च:
    • सॉफ्टवेयर, संचार, कानूनी, कैशबैक और अन्य ओवरहेड खर्च Q3 FY24 में ₹3,216 करोड़ से घटकर Q3 FY25 में ₹2,220 करोड़ हो गए।

आर्थिक प्रदर्शन का अवलोकन

  • कंपनी का घाटा ₹208 करोड़ रहा, जो पिछले वित्तीय वर्ष की समान तिमाही की तुलना में कम है।
  • तिमाही दर तिमाही प्रदर्शन में सुधार ने कंपनी की संचालन क्षमता में सुधार को दर्शाया।

प्रमुख संकेतक और रणनीतिक दिशा

पेटीएम के नतीजे उसके बढ़ते ऑपरेशनल एफिशिएंसी और खर्च नियंत्रण के प्रयासों को दर्शाते हैं। कंपनी ने अपने भुगतान प्रोसेसिंग शुल्क और मार्केटिंग लागत में कटौती की है, जिससे उसके घाटे में कमी आई है।

  1. भुगतान सेवाओं में स्थिरता:
    • पेटीएम का प्रमुख राजस्व स्रोत भुगतान सेवा बना हुआ है, जो उसकी मजबूत बाजार उपस्थिति को दर्शाता है।
  2. वित्तीय सेवाओं का बढ़ता योगदान:
    • वित्तीय और मार्केटिंग सेवाओं ने कुल राजस्व में 42% से अधिक का योगदान दिया।
  3. गैर-परिचालन आय:
    • गैर-परिचालन आय से कंपनी को ₹189 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ।

चुनौतियाँ और अवसर

  1. चुनौतियाँ:
    • राजस्व में साल-दर-साल गिरावट कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
    • बढ़ते प्रतिस्पर्धात्मक माहौल और बाजार स्थितियों ने राजस्व पर असर डाला।
  2. अवसर:
    • पेटीएम अपनी वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में अधिक विस्तार कर सकता है।
    • खर्च नियंत्रण की मौजूदा रणनीति कंपनी को लाभप्रदता की ओर ले जा सकती है।

पेटीएम का भविष्य

कंपनी ने तिमाही दर तिमाही प्रदर्शन में सुधार दिखाया है, जो इसके दीर्घकालिक विकास और लाभप्रदता की संभावना को दर्शाता है।

  • प्रबंधन का ध्यान: खर्चों को नियंत्रित करने और उच्च राजस्व वृद्धि वाले क्षेत्रों में निवेश पर है।
  • डिजिटल भुगतान और वित्तीय सेवाओं का विस्तार: पेटीएम को इस क्षेत्र में अपनी स्थिति को और मजबूत करने का मौका मिल सकता है।

निष्कर्ष

पेटीएम के Q3 FY25 के नतीजे इसके खर्च प्रबंधन और ऑपरेशनल सुधार को दर्शाते हैं।

  • जबकि साल-दर-साल राजस्व में गिरावट एक चिंता का विषय है, तिमाही दर तिमाही सुधार कंपनी की रिकवरी रणनीति की सफलता को इंगित करता है।
  • पेटीएम का फोकस लाभप्रदता और बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने पर है, जिससे यह भारतीय फिनटेक उद्योग में अपनी पहचान बनाए रखने में सफल हो सकता है।

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Prantae Solutions ने जुटाए ₹5 करोड़,

Prantae

भुवनेश्वर स्थित डीप-टेक कंपनी prantae सॉल्यूशन्स (prantae Solutions) ने अपने सीड फंडिंग राउंड में ₹5 करोड़ की धनराशि जुटाई है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व आईएएन ग्रुप (IAN Group) ने किया, जिसमें IAN अल्फा फंड, समीर कालिया, दीपंक कुमार, और नितिन ज़मरे जैसे निवेशकों ने भाग लिया।

prantae फंडिंग का उपयोग

prantae सॉल्यूशन्स ने प्रेस रिलीज़ में कहा कि यह धनराशि निम्नलिखित उद्देश्यों में इस्तेमाल की जाएगी:

  1. किडनी स्वास्थ्य और डायबिटीज़ केयर के लिए नए डायग्नोस्टिक सॉल्यूशन्स लॉन्च करना।
  2. उत्पाद पोर्टफोलियो का विस्तार करना।
  3. अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश।

कंपनी का परिचय

2015 में सुमोना कर्जे मिश्रा और असीम मिश्रा द्वारा स्थापित प्रांते सॉल्यूशन्स एक डीप-टेक फोकस्ड कंपनी है। कंपनी मजबूत बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) और विशिष्ट उत्पादों पर जोर देती है। इसका उद्देश्य हेल्थकेयर को समावेशी और सशक्त बनाने के लिए अगली पीढ़ी के डायग्नोस्टिक इनोवेशन का उपयोग करना है।

कंपनी की विशेषताएँ और योगदान

  1. पॉइंट-ऑफ-केयर (POC) डायग्नोस्टिक्स:
    • प्रांते सॉल्यूशन्स ऐसे अत्याधुनिक समाधान विकसित करता है जो तुरंत और सटीक जानकारी प्रदान करते हैं।
    • इन समाधानों के माध्यम से स्वास्थ्य देखभाल में तेजी और प्रभावशीलता लाई जा सकती है।
  2. चिकित्सा सुलभता में सुधार:
    • कंपनी चिकित्सा सेवाओं को अधिक पहुंच योग्य बनाने का प्रयास करती है।
    • यह विशेष रूप से क्रॉनिक कंडीशन्स के शुरुआती पहचान और प्रबंधन के लिए पहचानी जाती है।
  3. डीप-टेक और इनोवेशन पर जोर:
    • प्रांते सॉल्यूशन्स ने हेल्थकेयर को नवाचार और तकनीकी समाधानों के माध्यम से सशक्त बनाया है।
    • यह कंपनी हेल्थकेयर में उच्च-गुणवत्ता और वैकल्पिक समाधान प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

डायग्नोस्टिक्स मार्केट की स्थिति

  1. भारत में पॉइंट-ऑफ-केयर (POC) डायग्नोस्टिक्स का बाजार:
    • FY2024 में भारतीय बाजार का मूल्यांकन $1.41 बिलियन (लगभग ₹11,600 करोड़) है।
    • यह बाजार 8.47% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़कर FY2032 तक $2.71 बिलियन (लगभग ₹22,300 करोड़) तक पहुँचने की उम्मीद है।
  2. वैश्विक बाजार परिदृश्य:
    • वैश्विक POC डायग्नोस्टिक्स बाजार 2023 में $30.87 बिलियन था।
    • 2032 तक यह बाजार $51.19 बिलियन तक पहुँचने की उम्मीद है, जो हेल्थकेयर इनोवेशन में बढ़ती रुचि को दर्शाता है।

प्रांते सॉल्यूशन्स की रणनीति और दृष्टिकोण

  1. समावेशिता और सशक्तिकरण:
    • कंपनी का लक्ष्य हेल्थकेयर को एक ऐसा क्षेत्र बनाना है, जहाँ हर किसी को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएँ सुलभ हों।
  2. जल्दी पहचान और प्रबंधन:
    • कंपनी की तकनीक क्रॉनिक बीमारियों की जल्दी पहचान और प्रबंधन के लिए डिज़ाइन की गई है।
    • इसके समाधान डॉक्टरों और मरीजों दोनों को सटीक और तुरंत उपयोगी जानकारी प्रदान करते हैं।
  3. नए समाधान लाना:
    • कंपनी किडनी और डायबिटीज़ केयर के लिए नए समाधान विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
    • इस क्षेत्र में इनोवेशन का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना और मरीजों की ज़रूरतों को पूरा करना है।

फाउंडर्स का विज़न

प्रांते सॉल्यूशन्स की सह-संस्थापक सुमोना कर्जे मिश्रा और असीम मिश्रा का कहना है कि उनका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को न केवल सुलभ बल्कि प्रभावी बनाना है।

  • सुमोना कर्जे मिश्रा ने कहा, “हमारा ध्यान तकनीकी समाधानों को ऐसे उत्पादों में बदलने पर है जो स्वास्थ्य सेवाओं को नए आयाम पर ले जाए।”
  • कंपनी की प्राथमिकता है कि उनके उत्पाद क्रॉनिक बीमारियों के प्रभावी समाधान प्रदान करें।

निवेशकों का भरोसा

आईएएन ग्रुप और अन्य निवेशकों का समर्थन प्रांते सॉल्यूशन्स की तकनीकी विशेषज्ञता और उनके बिजनेस मॉडल में विश्वास को दर्शाता है।

  • निवेशकों का मानना है कि प्रांते सॉल्यूशन्स के समाधान भारत और वैश्विक बाजार में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
  • स्वास्थ्य देखभाल में तकनीकी समाधान लाने वाली इस कंपनी ने कई निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है।

भविष्य की योजनाएँ

  1. उत्पाद पोर्टफोलियो का विस्तार:
    • कंपनी स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में और अधिक नवाचार करना चाहती है।
  2. अनुसंधान और विकास में निवेश:
    • नए समाधानों के लिए तकनीकी अनुसंधान को प्राथमिकता दी जा रही है।
  3. भारतीय और वैश्विक बाजार में उपस्थिति:
    • प्रांते सॉल्यूशन्स भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी सेवाओं को विस्तारित करने की योजना बना रहा है।

निष्कर्ष

प्रांते सॉल्यूशन्स ने हेल्थकेयर इनोवेशन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान बनाया है।

  • इस फंडिंग के माध्यम से कंपनी क्रॉनिक बीमारियों की पहचान और प्रबंधन को आसान बनाने के लिए नए उत्पाद विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करेगी।
  • उनकी तकनीक और दृष्टिकोण भारतीय स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांति ला सकते हैं।
  • कंपनी का लक्ष्य न केवल रोगियों बल्कि हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स को भी सशक्त बनाना है।

प्रांते सॉल्यूशन्स की यात्रा उन सभी के लिए प्रेरणा है जो तकनीक और नवाचार के माध्यम से समाज में बदलाव लाने का सपना देखते हैं।

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भारतीय स्टार्टअप एक हफ्ते में $780 मिलियन की फंडिंग और अन्य महत्वपूर्ण अपडेट

Indian startups

पिछले हफ्ते Indian startups इकोसिस्टम में उल्लेखनीय गतिविधियाँ देखी गईं, जहाँ 37 स्टार्टअप्स ने लगभग $780 मिलियन की फंडिंग जुटाई। इनमें 11 ग्रोथ-स्टेज और 22 अर्ली-स्टेज डील्स शामिल थीं, जबकि 4 स्टार्टअप्स ने अपने लेनदेन का विवरण गोपनीय रखा।

ग्रोथ-स्टेज डील्स: भारतीय स्टार्टअप बड़े लेनदेन का दबदबा

ग्रोथ-स्टेज फंडिंग के तहत, डेटा एनालिटिक्स और एआई सॉल्यूशन प्रदाता Impetus Technologies ने $350 मिलियन की सीरीज डी फंडिंग जुटाई।

  • हेल्थटेक कंपनी Aragen ने $100 मिलियन प्राप्त किए।
  • SaaS स्टार्टअप Netradyne ने $90 मिलियन की सीरीज डी फंडिंग क्लोज की।
  • D2C स्किनकेयर ब्रांड Foxtale ने $30 मिलियन जुटाए, जिसमें Kose Corporation लीड निवेशक थी।

अर्ली-स्टेज डील्स: नए स्टार्टअप्स की उपलब्धियाँ

22 अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स ने कुल ₹64.92 करोड़ की फंडिंग हासिल की।

  • Micromitti (Proptech) ने इस श्रेणी में नेतृत्व किया।
  • अन्य प्रमुख स्टार्टअप्स:
    • Sarla Aviation (एयरोस्पेस)
    • Astrosure.ai (स्पिरिचुअल-टेक)
    • Eccentric Engine (SaaS)
    • WeVOIS (वेस्ट मैनेजमेंट)
    • Bolt.Earth (EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर)

कुछ अन्य स्टार्टअप्स जैसे Indiyanet (ऑटोमोटिव), Velocity.travel (ट्रैवलटेक), और Khushi Baby (हेल्थटेक) ने भी फंडिंग जुटाई, लेकिन राशि का खुलासा नहीं किया।

शहर और सेगमेंट के अनुसार डील्स

  • शहरों के हिसाब से:
    • बेंगलुरु सबसे आगे रहा, जहाँ 10 डील्स हुईं।
    • इसके बाद दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और पुणे का स्थान रहा।
  • सेगमेंट के अनुसार:
    • हेल्थटेक और SaaS स्टार्टअप्स ने 5-5 डील्स की।
    • ई-कॉमर्स और फूडटेक ने 4-4 डील्स कीं।

फंडिंग ट्रेंड्स: साप्ताहिक विश्लेषण

  • इस हफ्ते फंडिंग में 67.2% की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले हफ्ते के $466.45 मिलियन की तुलना में $779.92 मिलियन तक पहुँच गई।
  • औसतन, पिछले 8 हफ्तों में प्रति सप्ताह $332.12 मिलियन की फंडिंग हुई है।

प्रमुख नियुक्तियाँ और पदत्याग

स्टार्टअप इकोसिस्टम में इस हफ्ते प्रमुख नेतृत्व परिवर्तन भी हुए:

  1. Angel One ने Google Pay के पूर्व वीपी अंबरिश केंघे को ग्रुप सीईओ नियुक्त किया।
  2. Zetwerk ने अपनी यूएस सब्सिडियरी Unimacts के सीईओ के रूप में वडिम याकुबोव को चुना।
  3. 5Paisa ने गौरव सेठ को नया सीईओ नियुक्त किया।
  4. Curefoods ने गोकुल कांधी को मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) पद पर प्रमोट किया।

मर्जर और अधिग्रहण

  1. Amazon, फिनटेक कंपनी Axio (पूर्व में Capital Float) का अधिग्रहण करने जा रहा है।
  2. MoEVing, एक EV फ्लीट ऑपरेटर, ने Euler Motors के मोबिलिटी डिवीजन EVonGO का अधिग्रहण किया।

फंड लॉन्चेस

  1. Cornerstone Ventures, एक SaaS-केंद्रित वेंचर कैपिटल फर्म, ने अपने दूसरे फंड का पहला क्लोज $40 मिलियन पर किया।
  2. Avendus Future Leaders Fund III ने ₹850 करोड़ ($100 मिलियन) का पहला क्लोज हासिल किया।
  3. RevX Capital ने दूसरा फंड लॉन्च करने की योजना बनाई, जिसका लक्ष्य ₹750 करोड़ ($86.6 मिलियन) जुटाना है।

छंटनी (Layoffs)

  • Breath Well Being ने 100 कर्मचारियों को निकाला।
  • ShareChat ने परफॉर्मेंस रिव्यू के तहत 5% कर्मचारियों को हटा दिया।
  • Pocket FM ने 75 कर्मचारियों की छंटनी की।

नई लॉन्चिंग और पार्टनरशिप

  • MobiKwik ने Piramal Finance के साथ साझेदारी कर व्यक्तिगत ऋण सेवा शुरू की।
  • Droom ने ऑटोमोबाइल रेंटल क्षेत्र में कदम रखा।
  • Bounce Infinity ने 15-मिनट चार्ज स्कूटर लॉन्च किया।
  • Spencer’s Retail ने क्विक कॉमर्स सेक्टर में प्रवेश किया।
  • MapmyIndia ने Qualcomm के साथ साझेदारी की।
  • Digantara ने अपने उपग्रह को SpaceX रॉकेट के माध्यम से लॉन्च करने की तैयारी की।

प्रमुख वित्तीय प्रदर्शन

  • Foxtale का FY24 राजस्व ₹83 करोड़ तक पहुँचा, लेकिन घाटा बढ़ा।
  • PlanetSpark ने FY24 में 70% घाटा कम किया।
  • Isprava ने FY24 में राजस्व दोगुना किया।
  • Wonderchef FY24 में मुनाफे में आया।

निष्कर्ष

यह सप्ताह भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए कई सकारात्मक संकेत लेकर आया। फंडिंग में तेज़ वृद्धि, प्रमुख नेतृत्व परिवर्तन, और मर्जर-अधिग्रहण ने इकोसिस्टम की गतिशीलता को रेखांकित किया।

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