🤖 Neysa को मिला $30 मिलियन का निवेश,

Neysa

भारत की तेजी से उभरती जनरेटिव AI स्टार्टअप Neysa ने अपने सीरीज A फंडिंग राउंड में $30 मिलियन (करीब ₹252 करोड़) जुटाए हैं। इस राउंड का नेतृत्व NTT Venture Capital ने किया, वहीं अन्य निवेशकों में Nexus Venture Partners, Z47 (पूर्व में Matrix Partners India), Anchorage Capital और एंजेल इन्वेस्टर राजेश कुमार दुगर शामिल रहे।

कंपनी के संस्थापक और CEO शरद सांघी और CPO करन किर्पलानी ने भी इस राउंड में निजी रूप से निवेश किया है।


💸 Neysa निवेश का पूरा विवरण

Registrar of Companies (RoC) से प्राप्त जानकारी के अनुसार, Neysa के बोर्ड ने:

  • 1,11,532 Series A Compulsory Convertible Preference Shares (CCPS) ₹20,430 प्रति शेयर की दर से जारी किए
  • इसके साथ ही 12,592 इक्विटी शेयर भी आवंटित किए गए
  • कुल मिलाकर कंपनी ने ₹252 करोड़ ($30 मिलियन) जुटाए

इस राउंड में NTT Venture Capital ने ₹75.67 करोड़ ($8.9 मिलियन) का निवेश किया, उसके बाद:

  • Nexus Venture Partners और Z47 ने ₹67.26 करोड़ ($7.9 मिलियन)-₹₹ का योगदान किया
  • Anchorage Capital ने ₹16.8 करोड़ का निवेश किया
  • वहीं संस्थापक शरद सांघी ने ₹25.22 करोड़ के शेयर प्राप्त किए

बाकी राशि अन्य एंजेल निवेशकों और इंडिविजुअल्स द्वारा जुटाई गई।


🚀 फंडिंग से मिलेगी रफ्तार Gen AI इंफ्रास्ट्रक्चर को

Neysa ने बयान में बताया कि यह नया पूंजी निवेश कंपनी के AI इंफ्रास्ट्रक्चर को स्केल करने, रिसर्च एंड डेवलपमेंट को बढ़ावा देने और आने वाले समय में Generative AI Acceleration Cloud Service लॉन्च करने में सहायक होगा।

कंपनी ने हाल ही में संस्थापक शरद सांघी और Anchorage Capital को ₹20 करोड़ के इक्विटी शेयर भी अलॉट किए हैं, जिससे शेयरहोल्डिंग और वैल्यूएशन की तस्वीर और स्पष्ट हो गई है।


📊 वैल्यूएशन: ₹1,090 करोड़ तक पहुंची Neysa

Entrackr की रिपोर्ट के अनुसार, Series A शेयरों का कन्वर्जन रेशियो 1:2 होगा यानी एक CCPS के बदले दो इक्विटी शेयर मिलेंगे। इस आधार पर कंपनी की पोस्ट-अलॉटमेंट वैल्यूएशन करीब ₹1,090 करोड़ ($128 मिलियन) आंकी गई है।

यह भारत की AI और क्लाउड स्पेस में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जहां कंपनियाँ अब सिर्फ कोडिंग या SaaS से आगे बढ़कर AI इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सुरक्षा की ओर ध्यान दे रही हैं।


🧠 Neysa क्या करती है?

Neysa एक AI क्लाउड और प्लेटफ़ॉर्म-एज़-ए-सर्विस (PaaS) स्टार्टअप है, जो उपयोगकर्ताओं को Generative AI प्रोजेक्ट्स को स्केलेबल तरीके से क्लाउड पर मैनेज और डिप्लॉय करने की सुविधा देता है। इसके मुख्य प्रोडक्ट्स में शामिल हैं:

  1. Nebula – AI वर्कलोड को तैनात (deploy) और स्केल करने का प्लेटफॉर्म
  2. Palvera – नेटवर्क इंटेलिजेंस को ऑप्टिमाइज़ और ऑटोमेट करता है
  3. Aegis – AI/ML इकोसिस्टम को साइबर खतरों से सुरक्षित रखने के लिए डिजाइन किया गया

Neysa का लक्ष्य है कि वह व्यवसायों को अपने Gen AI सॉल्यूशन्स को फास्ट, सेफ और स्केलेबल तरीके से अपनाने में मदद करे।


🧑‍💼 शरद सांघी: अनुभवी लीडर का नेतृत्व

Neysa के संस्थापक और CEO शरद सांघी भारत के डेटा सेंटर और क्लाउड टेक्नोलॉजी क्षेत्र के अनुभवी लीडर माने जाते हैं। वह पहले Netmagic (NTT Group की सब्सिडियरी) के संस्थापक रहे हैं। उन्होंने AI के भविष्य को देखते हुए Neysa की शुरुआत की, और अब इसे एक ग्लोबल स्तर की AI इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी बनाने की दिशा में अग्रसर हैं।


📈 निवेशकों की रुचि क्यों?

Generative AI स्पेस में भारत का मार्केट तेजी से उभर रहा है, और कंपनियाँ अब केवल Chatbots से आगे बढ़कर सिक्योरिटी, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा गवर्नेंस पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

इस फंडिंग राउंड में:

  • NTT Venture Capital जैसे इंटरनेशनल प्लेयर की भागीदारी से साफ है कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स भारत की AI क्षमताओं में भरोसा जता रहे हैं
  • Nexus, Z47, और Anchorage जैसी फर्म्स का ट्रैक रिकॉर्ड मजबूत है, जो स्टार्टअप्स को लंबी अवधि की ग्रोथ देने में मदद करते हैं

🔮 आगे की राह

Neysa अब अपने Gen AI क्लाउड प्लेटफॉर्म को बाजार में लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। यह भारत की पहली ऐसी सेवाओं में शामिल होगी जो बड़े पैमाने पर AI मॉडल्स को रन और मैनेज करने के लिए टूल्स और सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदान करेगी।

यह सर्विस खासतौर पर एंटरप्राइज ग्राहकों, स्टार्टअप्स और रिसर्च संस्थानों को टारगेट करेगी, जो अपने AI प्रोजेक्ट्स को स्केल करने में जूझ रहे हैं।


🧩 निष्कर्ष

Neysa की यह फंडिंग भारत में AI क्षेत्र के तेजी से बढ़ते महत्व को दर्शाती है। एक समय था जब भारतीय कंपनियाँ सिर्फ AI को इंटीग्रेट करती थीं, अब वो खुद AI इंफ्रास्ट्रक्चर और प्लेटफॉर्म्स बना रही हैं।

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Read More:Ecom Express में 150 कर्मचारियों ने दिया इस्तीफा,

Ecom Express में 150 कर्मचारियों ने दिया इस्तीफा,

Ecom Express

भारत की ईकॉम लॉजिस्टिक्स इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। Delhivery द्वारा Ecom Express के अधिग्रहण से ठीक पहले कंपनी के करीब 150 मिड-लेवल और रीजनल ऑपरेशंस कर्मचारियों ने इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के अनुसार यह इस्तीफे स्वैच्छिक बताए जा रहे हैं, लेकिन आने वाले विलय से जुड़ी भूमिकाओं में दोहराव (redundancy) और कार्य संरचना में बदलाव (operational restructuring) के कारण यह कदम उठाया गया है।


🔄 45 दिनों में मिल सकती है CCI से मंज़ूरी

इस अधिग्रहण को लेकर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की मंज़ूरी अभी बाकी है, और उम्मीद है कि अगले 45 दिनों के भीतर यह अप्रूवल मिल जाएगा। Mint की रिपोर्ट के अनुसार, Ecom Express के CEO अजय चितकारा और अन्य सीनियर एक्जीक्यूटिव्स भी regulatory क्लियरेंस के बाद कंपनी से बाहर हो सकते हैं।


💰 ₹1,407 करोड़ में Delhivery का अधिग्रहण सौदा

Delhivery ने हाल ही में घोषणा की थी कि वह Ecom Express Limited में 99.4% हिस्सेदारी खरीदेगी। यह डील ₹1,407 करोड़ (लगभग $169.5 मिलियन) के कैश ट्रांज़ैक्शन के रूप में की जा रही है।

इस अधिग्रहण के बाद Delhivery को एक मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, ग्राहक आधार और पैन-इंडिया डिलीवरी क्षमता मिलेगी, जो उसे Amazon और Ekart जैसे दिग्गजों से मुकाबला करने में मदद करेगी।


🏢 Ecom Express: एक दशक पुराना लॉजिस्टिक्स ब्रांड

Ecom Express की स्थापना 2012 में हुई थी और इसका हेडक्वार्टर गुरुग्राम में स्थित है। यह कंपनी एक फुल-स्टैक, टेक्नोलॉजी-ड्रिवन लॉजिस्टिक्स सॉल्यूशन प्रोवाइडर है जो भारत भर में ईकॉमर्स कंपनियों को एंड-टू-एंड डिलीवरी सर्विस देती है।

अधिग्रहण से पहले Ecom Express ने लगभग $290 मिलियन (₹2,400 करोड़) से अधिक की फंडिंग जुटाई थी। इसके प्रमुख निवेशकों में Warburg Pincus, CDC Group और Partners Group जैसे नाम शामिल हैं।


📉 क्यों दे रहे हैं कर्मचारी इस्तीफा?

रिपोर्ट्स के अनुसार, कर्मचारियों के इस्तीफे “स्वैच्छिक” (voluntary) बताए जा रहे हैं, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि Delhivery के साथ प्रस्तावित एकीकरण के चलते:

  • भूमिकाओं में दोहराव (role overlap) बढ़ेगा
  • कई टीमों का री-स्ट्रक्चरिंग होगा
  • कुछ कर्मचारियों को ट्रांसफर या हटाने की नौबत आ सकती है

इसलिए, कई कर्मचारियों ने अधिग्रहण से पहले ही खुद हटने का निर्णय ले लिया।


🧑‍💼 टॉप मैनेजमेंट की भी होगी विदाई?

रिपोर्ट के अनुसार, Ecom Express के CEO अजय चितकारा के साथ-साथ कई सीनियर मैनेजमेंट लीडर्स भी regulatory अप्रूवल के बाद कंपनी छोड़ सकते हैं। यह कदम Delhivery द्वारा लाई जा रही नई रणनीतिक संरचना (strategic structure) के तहत लिया जा सकता है।


📈 कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन

Entrackr द्वारा रिव्यू किए गए एक इंटरनल डॉक्युमेंट के मुताबिक, Ecom Express ने FY25 की पहली तीन तिमाहियों में ₹1,912 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया। तुलना करें तो FY24 में कंपनी का कुल ऑपरेशनल रेवेन्यू ₹2,653 करोड़ था।

इससे स्पष्ट है कि कंपनी का प्रदर्शन स्थिर रहा है और उसकी मार्केट पोजिशन मजबूत बनी हुई है।


🚛 Delhivery को क्या मिलेगा इस डील से?

Delhivery, जो पहले ही भारत की सबसे बड़ी लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन कंपनियों में से एक है, इस अधिग्रहण से:

  • पिन कोड कवरेज बढ़ा सकेगी
  • रूरल डिलीवरी नेटवर्क मजबूत कर पाएगी
  • एक्सप्रेस डिलीवरी सेवाओं में Ecom Express के अनुभव का लाभ मिलेगा
  • और कस्टमर बेस का तेजी से विस्तार हो सकेगा

यह अधिग्रहण Delhivery की लॉन्ग टर्म ग्रोथ स्ट्रैटेजी का हिस्सा है, खासकर ऐसे समय में जब ईकॉमर्स लॉजिस्टिक्स सेक्टर में तेजी से प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।


🤐 Delhivery ने टिप्पणी से किया इनकार

इस पूरी स्थिति पर Delhivery की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। कंपनी ने मीडिया सवालों पर “No Comments” कहकर चुप्पी साध रखी है। यह संभवतः regulatory मंज़ूरी के कारण है, क्योंकि CCI की स्वीकृति के बाद ही सभी जानकारियाँ सार्वजनिक की जाएंगी।


🔍 निष्कर्ष: लॉजिस्टिक्स सेक्टर में Consolidation का संकेत

Ecom Express के अधिग्रहण और कर्मचारियों के इस्तीफों से साफ है कि भारतीय लॉजिस्टिक्स सेक्टर अब एक नए दौर के Consolidation की ओर बढ़ रहा है। बड़ी कंपनियाँ अब छोटे-परंतु-मजबूत नेटवर्क्स को अपने में समाहित कर रही हैं, ताकि:

  • लागत को घटाया जाए
  • नेटवर्क प्रभाव (Network effect) बढ़ाया जाए
  • और सर्विस एफिशिएंसी में सुधार लाया जा सके

📢 FundingRaised.in पर पढ़ते रहें ऐसे ही एक्सक्लूसिव स्टार्टअप न्यूज, अधिग्रहण अपडेट्स और सेक्टर इनसाइट्स।

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💸 Flipkart Internet को सिंगापुर पैरेंट से फिर मिले ₹2,225 करोड़,

Flipkart

वॉलमार्ट (Walmart) के स्वामित्व वाली भारत की प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनी Flipkart Internet को उसकी सिंगापुर स्थित मूल कंपनी से एक बार फिर ₹2,225 करोड़ (लगभग $262 मिलियन) की इंटरनल फंडिंग प्राप्त हुई है। यह फंडिंग ऐसे समय आई है जब कंपनी के IPO की तैयारी को लेकर चर्चाएं तेज़ हो रही हैं।

इससे दो महीने पहले ही, Flipkart Internet को ₹3,180 करोड़ ($382 मिलियन) की बड़ी फंडिंग मिली थी, जो कंपनी की मजबूत पूंजी रणनीति को दर्शाती है।


📑 RoC फाइलिंग से खुलासा, सिंगापुर यूनिट ने दिए शेयर

फ्लिपकार्ट के बोर्ड ने कंपनी की सिंगापुर स्थित इकाई Flipkart Marketplace Private Limited को ₹2,225 करोड़ के इक्विटी शेयर आवंटित किए हैं। यह जानकारी कंपनी की Registrar of Companies (RoC) में की गई कई फाइलिंग्स से सामने आई है।

यह ताजा निवेश दर्शाता है कि कंपनी ऑपरेशनल विस्तार और संभावित आईपीओ लॉन्च से पहले पूंजी सुदृढ़ करने में जुटी है।


👗 Myntra को भी मिला निवेश, फैशन सेगमेंट में भी होगा विस्तार

इस फंडिंग के साथ-साथ Flipkart की फैशन इकाई Myntra India को भी ₹1,040 करोड़ ($125 मिलियन) की फंडिंग मिली है, जो उसकी सिंगापुर स्थित पैरेंट कंपनी FK Myntra Holdings से आई है। इसका मतलब यह है कि Flipkart ग्रुप अपने सभी प्रमुख सेगमेंट को मजबूत करने की दिशा में रणनीतिक कदम उठा रहा है।


📈 IPO की तैयारी जोरों पर, $60-70 अरब की वैल्यूएशन का लक्ष्य

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Flipkart $60 से $70 बिलियन की वैल्यूएशन के साथ अपना IPO लॉन्च करने की योजना पर काम कर रही है। इसी के तहत कंपनी अपने हेडक्वार्टर को सिंगापुर से भारत शिफ्ट करने की प्रक्रिया में भी है।

इस बदलाव के साथ Flipkart उन भारतीय यूनिकॉर्न कंपनियों की कतार में शामिल हो जाएगी जो अपना मुख्यालय भारत में स्थानांतरित कर रही हैं — जैसे:

  • Pine Labs
  • Zepto
  • Meesho
  • Razorpay

यह कदम IPO से पहले भारत में कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर और टैक्स रेग्युलेशन को सहज बनाने के लिए उठाया जा रहा है।


🧾 शेयरहोल्डर्स की जानकारी: Walmart है मुख्य मालिक

स्टार्टअप डाटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म TheKredible के अनुसार, Flipkart Internet में वॉलमार्ट की हिस्सेदारी 85% है। कंपनी की अन्य सहायक इकाइयों में:

  • PhonePe
  • Myntra

शामिल हैं। अन्य प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं:

  • Tencent
  • CPP Investments
  • GIC
  • SoftBank
  • Microsoft

इस समय Flipkart की वैल्यूएशन लगभग $36 बिलियन बताई जा रही है।


📊 FY24 में बेहतर परफॉर्मेंस: रेवेन्यू बढ़ा, घाटा घटा

वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) में Flipkart ने ₹17,907 करोड़ का ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 20% की वृद्धि दर्शाता है। इतना ही नहीं, कंपनी ने अपने घाटे को 41% घटाकर ₹2,359 करोड़ कर लिया है, जो स्पष्ट संकेत है कि Flipkart अब लाभप्रदता की ओर बढ़ रही है।

यह प्रदर्शन कंपनी की दक्षता, लॉजिस्टिक्स में सुधार और कस्टमर बेस के विस्तार का परिणाम माना जा रहा है।


🔍 रणनीति: लॉन्ग-टर्म ग्रोथ और IPO के लिए तैयार

Flipkart की वर्तमान रणनीति इस प्रकार है:

  • IPO से पहले घरेलू रजिस्ट्रेशन करना, जिससे टैक्स और रेग्युलेशन में सुविधा हो
  • अपने ई-कॉमर्स ऑपरेशन को मजबूती देना, जिसमें ग्रॉसरी, फैशन, मोबाइल्स और होम डेकोर प्रमुख हैं
  • लॉजिस्टिक्स, टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन में निवेश बढ़ाना
  • Myntra और अन्य वर्टिकल्स के ज़रिए सेगमेंटेड यूज़र बेस को टारगेट करना

🧠 Flipkart क्यों जुटा रहा है पूंजी?

IPO से पहले पूंजी जुटाना एक आम रणनीति होती है ताकि:

  1. कंपनी के बैलेंस शीट को मजबूत किया जा सके
  2. विस्तार योजनाओं में तेजी लाई जा सके
  3. संभावित निवेशकों को दिखाया जा सके कि कंपनी में ग्रोथ की संभावना है

Flipkart द्वारा दो महीनों में ₹5,400 करोड़ से अधिक जुटाना इस बात का संकेत है कि कंपनी बेहद आक्रामक विस्तार और रणनीतिक IPO प्लान की तैयारी में है।


✅ निष्कर्ष: Flipkart IPO की ओर बढ़ता हुआ अगला भारतीय दिग्गज

Flipkart की ये ताज़ा फंडिंग दर्शाती है कि भारत का ई-कॉमर्स मार्केट न केवल प्रतिस्पर्धी हो रहा है, बल्कि अब निवेशकों और वैश्विक बाजारों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। वॉलमार्ट जैसे दिग्गज का मजबूत सपोर्ट, ऑपरेशनल सुधार और IPO की संभावनाएं इसे भारत की अगली बड़ी लिस्टेड इंटरनेट कंपनी बना सकती हैं।

अब देखने वाली बात होगी कि Flipkart IPO से पहले क्या और रणनीतिक कदम उठाती है — क्या इसमें निवेशकों को फायदा होगा? क्या यह ज़्यादा प्रतिस्पर्धी बनेगा?


लेखक की टिप्पणी: यदि आप Flipkart IPO से जुड़ी खबरें, वैल्यूएशन रिपोर्ट, या निवेश विश्लेषण चाहते हैं तो हमें फॉलो करें और जुड़े रहें www.fundingraised.in के साथ।

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📚 Unacademy के को-फाउंडर्स ने छोड़ी कंपनी,

Unacademy

भारत के अग्रणी एजटेक यूनिकॉर्न Unacademy के दो मूल संस्थापक — गौरव मुंजाल और रोमन सैनी — अब कंपनी से औपचारिक रूप से बाहर निकलने की तैयारी में हैं। दोनों अब अपना फोकस एक नई भाषा-शिक्षा ऐप AirLearn पर केंद्रित कर रहे हैं, जो अमेरिका में पहले ही अच्छा traction हासिल कर चुकी है।

यह एक दुर्लभ उदाहरण है जब किसी भारतीय एजटेक यूनिकॉर्न के मूल संस्थापक समूह ने कंपनी से पूरी तरह दूरी बना ली है। तीसरे को-फाउंडर हेमेश सिंह पहले ही जून 2024 में कंपनी छोड़ चुके हैं।


🚀 अब बागडोर संभालेंगे ग्राफ़ी के को-फाउंडर सुमित जैन

The Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार, Unacademy की सहायक कंपनी Graphy के को-फाउंडर सुमित जैन अब Unacademy के संचालन की कमान संभाल सकते हैं। सुमित 2020 में Unacademy से जुड़े थे, जब उनकी पिछली कंपनी Opentalk का अधिग्रहण हुआ था।

हालाँकि, कर्मचारियों को भेजे गए एक आंतरिक ईमेल में सुमित जैन ने इन खबरों को “अफवाह” बताया है और टीम से इन्हें नजरअंदाज़ करने को कहा है। Entrackr ने इस ईमेल की एक प्रति प्राप्त की है।


🌐 नई उड़ान: क्या है AirLearn?

गौरव मुंजाल और रोमन सैनी अब पूरी तरह से AirLearn पर ध्यान दे रहे हैं, जो एक AI-बेस्ड लैंग्वेज लर्निंग ऐप है। यह ऐप कुछ ही महीनों में $400,000 की सालाना recurring revenue (ARR) अमेरिका में हासिल कर चुकी है — जो कि किसी नए भारतीय स्टार्टअप के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है।

AirLearn का उद्देश्य दुनिया भर में भाषा शिक्षा को ज्यादा इंटरेक्टिव, तेज़ और किफायती बनाना है। यह ऐप फिलहाल अमेरिका में तेजी से लोकप्रिय हो रही है और अब भारत सहित अन्य देशों में विस्तार की तैयारी कर रही है।


📊 Unacademy: फाउंडर्स की हिस्सेदारी और मौजूदा हालात

Startup डेटा प्लेटफॉर्म TheKredible के मुताबिक, Unacademy के तीनों मूल को-फाउंडर्स की कंपनी में कुल मिलाकर 15% हिस्सेदारी है। Unacademy के बोर्ड में अभी भी बड़े नाम शामिल हैं:

  • SoftBank
  • General Atlantic
  • भाविन तुरकिया (Zeta)
  • सुजीत कुमार (Udaan)
  • गौरव मुंजाल और रोमन सैनी (अब तक)

अगर मुंजाल और सैनी कंपनी से बाहर निकलते हैं, तो यह बोर्ड संरचना में भी एक बड़ा बदलाव होगा।


💵 घाटा हुआ कम, बैलेंस शीट में स्थिरता

गौरव मुंजाल ने हाल ही में दावा किया था कि Unacademy ने अपने कोर एजुकेशन बिजनेस में कैश बर्न को ₹1,000 करोड़ सालाना से घटाकर ₹200 करोड़ तक कर लिया है। उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी के पास ₹1,200 करोड़ की नकद पूंजी उपलब्ध है और यह वित्तीय रूप से “स्थिर” स्थिति में है।

Unacademy की सहायक कंपनियाँ जैसे कि Graphy और PrepLadder हर महीने मुनाफा कमा रही हैं। यानी कंपनी का संचालन घाटे में नहीं बल्कि अब लाभ की दिशा में बढ़ रहा है।


🧭 नेतृत्व परिवर्तन का संकेत

संस्थापकों का बाहर निकलना और सुमित जैन का नेतृत्व संभालना, Unacademy के लिए एक नई दिशा और रणनीति की ओर इशारा कर रहा है। कंपनी अब मूल शिक्षा व्यवसाय से आगे बढ़कर नए वर्टिकल्स पर ध्यान दे रही है, जैसे:

  • प्रोफेशनल स्किल डेवलपमेंट
  • कंटेंट क्रिएशन (Graphy)
  • मेडिकल टेस्ट प्रेप (PrepLadder)

यह बदलाव Unacademy को एक व्यापक एडटेक प्लेटफॉर्म बनने की दिशा में ले जा रहा है, जो सिर्फ कोर्स बेचने तक सीमित नहीं रहना चाहता।


🇮🇳 भारत के एडटेक सेक्टर में बदलाव की लहर

Unacademy के संस्थापकों का यह कदम भारत के एडटेक सेक्टर में हो रहे व्यापक बदलावों को भी दर्शाता है। कोविड के दौरान एडटेक स्टार्टअप्स ने जितनी तेज़ी से ऊँचाई पाई थी, अब उतनी ही तीव्रता से उन्हें सस्टेनेबिलिटी, प्रॉफिटेबिलिटी और फोकस्ड बिजनेस मॉडल अपनाने की जरूरत महसूस हो रही है।

BYJU’S, Vedantu, upGrad, सभी इस समय घाटे से उबरने और नए नेतृत्व या बिजनेस मॉडल पर काम कर रहे हैं।


🔚 निष्कर्ष: एक अध्याय का अंत, नए सफर की शुरुआत

गौरव मुंजाल और रोमन सैनी का Unacademy से जाना एक युग के अंत जैसा है, खासकर उन छात्रों और युवाओं के लिए जिन्होंने इस प्लेटफॉर्म के ज़रिए UPSC, NEET, IIT-JEE जैसी परीक्षाओं की तैयारी की।

लेकिन साथ ही यह भारतीय उद्यमिता की सुंदरता भी दिखाता है — जहां एक उद्यमी एक सफल कंपनी खड़ी करने के बाद, नया सपना देखने की हिम्मत करता है। AirLearn उसी नई यात्रा की शुरुआत है, जो भारत की तकनीकी दुनिया में एक और सफल अध्याय जोड़ सकती है।

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🏢 Awfis FY25 की चौथी तिमाही में 47% रेवेन्यू ग्रोथ और 8 गुना मुनाफा

Awfis

नई दिल्ली, 26 मई 2025: भारत की अग्रणी को-वर्किंग स्पेस प्रोवाइडर कंपनी Awfis ने वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही (Q4 FY25) के शानदार नतीजे जारी किए हैं। कंपनी ने 47% की सालाना रेवेन्यू ग्रोथ और 8 गुना मुनाफे के साथ एक मजबूत वित्तीय प्रदर्शन किया है।


📈 रेवेन्यू में ज़बरदस्त उछाल

National Stock Exchange (NSE) पर दायर अनऑडिटेड कंसोलिडेटेड वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, Awfis का ऑपरेटिंग रेवेन्यू Q4 FY25 में ₹340 करोड़ रहा, जो Q4 FY24 में ₹232 करोड़ था। यानी सालाना आधार पर 47% की बढ़ोतरी हुई है।

पूरे वित्तीय वर्ष (FY25) की बात करें तो कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹1,208 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 40% ज्यादा है।


💰 मुनाफे में 8 गुना उछाल

सिर्फ रेवेन्यू ही नहीं, कंपनी ने इस बार मुनाफे में भी जबरदस्त प्रदर्शन किया है। Q4 FY25 में कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹11.2 करोड़ रहा, जो Q4 FY24 में मात्र ₹1.4 करोड़ था — यानी 8 गुना से ज्यादा की बढ़त

पूरे साल के स्तर पर Awfis ने ₹68 करोड़ का प्रॉफिट दर्ज किया है, जो इसे पहली बार सालाना आधार पर लाभ में ले आया है।


🏬 को-वर्किंग से सबसे ज्यादा कमाई

Awfis की कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू का 79% हिस्सा को-वर्किंग स्पेस रेंटल्स और उससे जुड़े सर्विसेस से आया है। इस सेगमेंट की कमाई 60% सालाना वृद्धि के साथ Q4 FY25 में ₹269 करोड़ रही, जबकि Q4 FY24 में यह ₹168 करोड़ थी।

अन्य स्रोतों से कंपनी ने निर्माण कार्य (construction & fit-outs), फैसिलिटी मैनेजमेंट, और खाने-पीने की चीज़ों की बिक्री से भी आय अर्जित की।

कंपनी ने इस तिमाही में ₹19.7 करोड़ की अन्य आय भी अर्जित की, जिससे कुल रेवेन्यू Q4 FY25 में ₹359.4 करोड़ तक पहुंच गया।


🧾 खर्चों में भी इजाफा

जहाँ आय में भारी वृद्धि हुई है, वहीं खर्च भी बढ़े हैं। Awfis का कुल खर्च Q4 FY25 में ₹347.5 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹240 करोड़ था — यानी 45% की वृद्धि

  • डिप्रिशिएशन और अमॉर्टाइज़ेशन सबसे बड़ा खर्च रहा, जो कुल खर्च का 23% था और ₹82 करोड़ तक पहुंच गया।
  • सब-कॉन्ट्रैक्टिंग और ट्रेडेड गुड्स की खरीदारी में 27% की बढ़त के साथ यह खर्च ₹66 करोड़ रहा।
  • फाइनेंस कॉस्ट में 79% की वृद्धि हुई और यह ₹42.6 करोड़ रहा।
  • कर्मचारी लाभ खर्च में उल्टा 19% की गिरावट आई और यह ₹29.5 करोड़ रहा।

📊 मजबूत फाइनेंशियल स्थिति और शेयर प्रदर्शन

Awfis ने मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के साथ-साथ शेयर बाजार में भी स्थिर प्रदर्शन किया है। 26 मई 2025 को कंपनी का शेयर ₹648.10 पर बंद हुआ, जिससे उसकी कुल मार्केट कैप ₹4,599 करोड़ (लगभग $541 मिलियन) हो गई है।


👨‍💼 नया CEO नियुक्त

Q4 FY25 के नतीजों के साथ-साथ Awfis ने अपने नेतृत्व में एक बड़ा बदलाव भी किया है। कंपनी ने Sumit Lakhani को Chief Executive Officer (CEO) नियुक्त किया है।

Sumit इससे पहले कंपनी में Deputy CEO थे और उन्होंने 2015 में Chief Marketing Officer (CMO) के रूप में Awfis में जॉइन किया था।

Sumit की लीडरशिप में कंपनी ने ब्रांडिंग और ग्रोथ में कई मील के पत्थर हासिल किए हैं।


🧠 Awfis की रणनीति क्या है?

Awfis की स्थापना 2015 में की गई थी और तब से यह भारत के स्टार्टअप्स, SMEs और बड़े कॉर्पोरेशनों के लिए कस्टमाइज़्ड ऑफिस स्पेस और ancillary services (जैसे F&B, IT support, इंटरनेट, फर्नीचर आदि) प्रदान करती आ रही है।

कंपनी का उद्देश्य सिर्फ एक को-वर्किंग स्पेस प्रोवाइडर बनना नहीं है, बल्कि एक संपूर्ण ऑफिस सॉल्यूशन इकोसिस्टम बनाना है जो स्केलेबल हो, टेक-सक्षम हो, और क्लाइंट्स की विविध ज़रूरतों को पूरा कर सके।


🔮 आगे की दिशा

इस मजबूत वित्तीय प्रदर्शन से Awfis ने यह संकेत दे दिया है कि वह आने वाले समय में भी ग्रोथ की रफ्तार बनाए रखने में सक्षम है।

  • तेजी से बढ़ता को-वर्किंग कल्चर और हाइब्रिड वर्क मॉडल आने वाले वर्षों में कंपनी की ग्रोथ को और रफ्तार दे सकते हैं।
  • कंपनी को कॉस्ट मैनेजमेंट और मार्जिन सुधार पर ध्यान देना होगा ताकि यह लाभप्रदता बनाए रख सके।

📌 निष्कर्ष

Awfis ने FY25 में राजस्व और मुनाफे दोनों में शानदार छलांग लगाकर खुद को एक सस्टेनेबल और प्रॉफिटेबल बिज़नेस मॉडल के रूप में स्थापित किया है।

जहाँ दूसरी को-वर्किंग कंपनियाँ अभी भी घाटे से जूझ रही हैं, वहीं Awfis ने न सिर्फ लाभ कमाया है बल्कि खुद को मार्केट लीडरशिप की दिशा में आगे बढ़ते हुए दिखाया है।

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👶 FirstCry की पैरेंट कंपनी BrainBees का रिपोर्ट कार्ड जारी FY25 में रेवेन्यू बढ़ा,

FirstCry

नई दिल्ली, 26 मई 2025: बच्चों पर केंद्रित ओम्नीचैनल रिटेलर FirstCry की पैरेंट कंपनी BrainBees Solutions ने वित्तीय वर्ष 2024-25 (FY25) की चौथी तिमाही (Q4) की रिपोर्ट जारी कर दी है। रिपोर्ट से पता चलता है कि कंपनी ने मध्यम स्तर की ग्रोथ तो दर्ज की है, लेकिन साथ ही घाटा भी 74% बढ़कर ₹75 करोड़ पर पहुंच गया है।


📈 FirstCry रेवेन्यू में 16% की सालाना वृद्धि

National Stock Exchange (NSE) से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, FirstCry का ऑपरेटिंग रेवेन्यू Q4 FY25 में ₹1,930 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही Q4 FY24 के ₹1,667 करोड़ से करीब 16% अधिक है।

वहीं पूरे वित्तीय वर्ष की बात करें तो, BrainBees का कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹7,660 करोड़ रहा, जो FY24 के ₹6,481 करोड़ से 18% ज्यादा है।


🛒 कहां से आई कमाई?

FirstCry की आमदनी मुख्य रूप से ऑफलाइन स्टोर्स, वेबसाइट और इंटरनेशनल मार्केट में प्रोडक्ट्स की बिक्री से हुई, जो कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू का 69% हिस्सा है।

वहीं इसकी सब्सिडियरी कंपनी GlobalBees ने Q4 FY25 में ₹398 करोड़ की कमाई की। इसके अलावा, BrainBees को ₹48 करोड़ का ब्याज से प्राप्त हुआ, जिससे इसका कुल रेवेन्यू Q4 FY25 में ₹1,979 करोड़ रहा, जबकि Q4 FY24 में यह ₹1,685 करोड़ था।


💸 खर्च भी बढ़े, खासतौर पर रॉ मटेरियल्स और कर्मचारी सैलरी में

कंपनी का खर्च भी रेवेन्यू के साथ-साथ बढ़ा है। रॉ मटेरियल की खरीद पर सबसे ज्यादा खर्च हुआ, जो कुल खर्च का 58% था। यह खर्च Q4 FY24 में ₹1,055 करोड़ से बढ़कर Q4 FY25 में ₹1,206 करोड़ हो गया — यानी 14% की बढ़ोतरी

कर्मचारी लाभ (employee benefits) के तहत Q4 FY25 में ₹229 करोड़ खर्च हुए, जिसमें ₹82 करोड़ केवल ESOP (Employee Stock Ownership Plan) के रूप में शामिल हैं।


📊 कुल खर्च और घाटा

Q4 FY25 में कुल खर्च ₹2,060 करोड़ पहुंच गया, जो पिछले साल की समान तिमाही Q4 FY24 में ₹1,737 करोड़ था। पूरे FY25 में कंपनी का कुल खर्च ₹7,992 करोड़ रहा।

घाटे की बात करें तो, BrainBees का Q4 FY25 में घाटा ₹75 करोड़ रहा — यह पिछले साल की तुलना में 74% ज्यादा है।

हालांकि, पूरे वित्तीय वर्ष के स्तर पर FY25 में कंपनी का घाटा ₹215 करोड़ रहा, जो FY24 के ₹321 करोड़ से कम है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस आंकड़े में ₹37 करोड़ के exceptional items को शामिल नहीं किया गया है


📉 स्टॉक मार्केट पर असर

BrainBees ने स्टॉक एक्सचेंज पर ₹446 के इश्यू प्राइस पर लिस्टिंग की थी। लेकिन 26 मई 2025 को इसका शेयर ₹376.5 पर ट्रेड कर रहा है, जिससे कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹19,631 करोड़ पर आ गया है।

यह गिरावट निवेशकों के लिए थोड़ा निराशाजनक हो सकती है, खासकर तब जब घाटा बढ़ रहा हो और लाभप्रदता (profitability) की कोई स्पष्ट समयरेखा सामने न हो।


📌 क्या कहता है यह डेटा?

FirstCry का बिज़नेस मॉडल ओम्नीचैनल रिटेल पर आधारित है — यानी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों प्लेटफॉर्म से बिक्री करना। भारत जैसे विविधता वाले देश में यह मॉडल काफी सफल रहा है, खासकर बच्चों की जरूरतों पर केंद्रित ब्रांड के लिए।

हालांकि, बढ़ते खर्च और लाभ में कमी इस बात की ओर इशारा करते हैं कि लॉन्ग टर्म स्केलेबिलिटी के लिए कंपनी को खर्चों पर नियंत्रण और प्रॉफिटेबल ग्रोथ पर ध्यान देना होगा।


🤔 आगे की राह

BrainBees ने अभी तक FY26 के लिए कोई भविष्यवाणी नहीं की है, लेकिन मौजूदा ट्रेंड्स को देखते हुए यह स्पष्ट है कि:

  • कंपनी को ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर काम करना होगा।
  • मार्केटिंग और टेक्नोलॉजी खर्च को ऑप्टिमाइज़ करना ज़रूरी होगा।
  • GlobalBees जैसे सब्सिडियरी मॉडल्स से नए रेवेन्यू चैनल्स को और बेहतर बनाना होगा।

🧠 निष्कर्ष

FirstCry और उसकी पैरेंट कंपनी BrainBees ने बच्चों के रिटेल मार्केट में अपनी जगह पक्की की है, लेकिन अब अगला फोकस होना चाहिए — प्रॉफिटेबल ग्रोथ

एक तरफ रेवेन्यू लगातार बढ़ रहा है, दूसरी तरफ बढ़ते खर्च और घाटा कंपनी के सामने चुनौती के रूप में खड़े हैं।

क्या BrainBees आने वाले वर्षों में लाभ में बदलाव ला पाएगी? निवेशक और इंडस्ट्री दोनों की नजर इस पर टिकी है।

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🚀 Blinkit का बड़ा कदम अब खुद रखेगा स्टॉक, बढ़ेगी कमाई की रफ्तार

Blinkit

Eternal Limited, जिसे पहले आप Zomato के नाम से जानते थे, अब अपने क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म Blinkit में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी में है। कंपनी अब खुद इन्वेंट्री (स्टॉक) रखने की योजना बना रही है — यानी अब प्रोडक्ट्स सीधे Eternal के पास होंगे, न कि थर्ड पार्टी सेलर्स के जरिए।

यह रणनीतिक बदलाव कंपनी के हाल ही में Indian-Owned and Controlled Company (IOCC) बनने के बाद संभव हुआ है। Eternal ने हाल ही में शेयरहोल्डर्स को भेजे एक लेटर में इसकी जानकारी दी।


📦 इन्वेंट्री मॉडल क्यों ज़रूरी है?

कंपनी का मानना है कि इन्वेंट्री को खुद कंट्रोल करना Blinkit को:

  • बेहतर मार्जिन दिलाएगा
  • ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाएगा
  • और बाज़ार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा से बेहतर तरीके से निपटने में मदद करेगा

Eternal का कहना है कि 100% इन्वेंट्री मॉडल को अपनाने के लिए उन्हें केवल ₹1,000 करोड़ की वर्किंग कैपिटल की जरूरत होगी — जो कि FY25 में Blinkit के अनुमानित ₹22,000 करोड़ Net Order Value (NOV) का सिर्फ 5% हिस्सा है।


💬 CFO ने क्या कहा?

जब कंपनी से पूछा गया कि इतनी बड़ी इन्वेंट्री केवल ₹1,000 करोड़ में कैसे संभव होगी, तो Eternal के CFO अक्षंत गोयल ने कहा:

“Quick commerce में इन्वेंट्री बहुत तेज़ी से मूव करती है। इसलिए वर्किंग कैपिटल की ज़रूरत बिज़नेस के कुल स्केल के मुकाबले कम रहती है।”

यानी Blinkit जितनी तेज़ी से सामान बेचता है, उसे उतनी ही तेज़ी से नए प्रोडक्ट्स लाने की जरूरत होती है — और यह साइकिल कम पूंजी में भी चल सकती है।


🏪 Blinkit की आक्रामक ग्रोथ

FY25 की चौथी तिमाही में Blinkit ने 294 नए स्टोर खोले और 10 लाख वर्ग फुट से ज्यादा वेयरहाउस स्पेस जोड़ा। इसके साथ ही कंपनी के कुल स्टोर की संख्या अब 1,301 हो गई है।

📈 लेकिन इस तेज़ ग्रोथ का एक दूसरा पहलू भी है — EBITDA (कमाई से पहले का लाभ) घाटा बढ़ा है:

  • Q3 FY25 में: ₹103 करोड़
  • Q4 FY25 में: ₹178 करोड़

यानि स्टोर और वेयरहाउस बढ़ाने से खर्च में भी बड़ा उछाल आया है।


💰 लॉन्ग टर्म में मुनाफे की उम्मीद

हालांकि Blinkit को अभी घाटा हो रहा है, लेकिन Eternal को लंबी अवधि में क्विक कॉमर्स से जबरदस्त मुनाफे की उम्मीद है

कंपनी अभी तो प्राइवेट लेबल (यानि अपने ब्रांड वाले प्रोडक्ट्स) लॉन्च करने की योजना नहीं बना रही है, लेकिन इन्वेंट्री कंट्रोल से उन्हें उम्मीद है कि EBITDA मार्जिन 5-6% से भी ऊपर जा सकता है।


🔄 इन्वेंट्री मॉडल बनाम मार्केटप्लेस मॉडल

अब तक Blinkit मार्केटप्लेस मॉडल पर काम करता था, जिसमें थर्ड पार्टी सेलर्स अपने प्रोडक्ट्स लिस्ट करते थे और Blinkit सिर्फ डिलीवरी करता था।

लेकिन अब इन्वेंट्री मॉडल अपनाने का मतलब है:

  • Blinkit खुद सामान खरीदेगा
  • वेयरहाउस में स्टॉक रखेगा
  • और ग्राहकों को सीधे डिलीवर करेगा

📌 इससे डिलीवरी टाइम घटेगा, मार्जिन बढ़ेगा और कस्टमर एक्सपीरियंस और बेहतर होगा।


🏁 भारत में क्विक कॉमर्स की रेस तेज़

क्विक कॉमर्स की दुनिया में Blinkit के अलावा Zepto, Swiggy Instamart और BigBasket जैसे बड़े खिलाड़ी भी मैदान में हैं।

सभी का फोकस है:

  • 10-15 मिनट में डिलीवरी
  • किराना, फ्रेश फूड, हाउसहोल्ड और डेली यूज आइटम्स
  • बेहतर कस्टमर लॉयल्टी

इस तेजी से बढ़ते सेगमेंट में इन्वेंट्री कंट्रोल एक बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है।


🧠 Eternal Limited: Zomato से आगे का सफर

Zomato ने जब Blinkit को अधिग्रहित किया था, तब यह एक अलग ही तरह की चुनौती थी। अब Eternal Limited बनकर कंपनी फूड डिलीवरी से आगे बढ़कर:

  • क्विक कॉमर्स
  • लॉजिस्टिक्स
  • और अन्य डिजिटल सर्विसेस में प्रवेश कर रही है।

Blinkit की यह इन्वेंट्री रणनीति Eternal को एक समग्र डिजिटल कॉमर्स ब्रांड बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।


📌 निष्कर्ष: बड़ा दांव, बड़ा मुनाफा?

Eternal Limited का इन्वेंट्री मॉडल अपनाना एक साहसिक लेकिन सोच-समझकर उठाया गया कदम है। ₹1,000 करोड़ जैसी सीमित पूंजी में इतने बड़े स्केल पर ऑपरेशन करना आसान नहीं होगा, लेकिन अगर कंपनी की रणनीति सफल रही, तो यह Blinkit को:

  • तेज़ ग्रोथ
  • बेहतर मार्जिन
  • और दीर्घकालिक स्थिरता

सब दिला सकता है।

अब देखना होगा कि यह मॉडल Blinkit को प्रतियोगियों से आगे निकालता है या नहीं। लेकिन इतना तय है कि Eternal अब एक नए युग में प्रवेश कर चुका है।

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📉📈 अप्रैल में UPI ट्रांजैक्शनों में मामूली गिरावट, लेकिन साल-दर-साल ग्रोथ बरकरार

UPI

भारत के सबसे लोकप्रिय डिजिटल भुगतान सिस्टम UPI (Unified Payments Interface) ने अप्रैल 2025 में 17.89 अरब ट्रांजैक्शन दर्ज किए। यह संख्या मार्च में हुए 18.30 अरब ट्रांजैक्शनों की तुलना में 2.24% कम है। वहीं, ट्रांजैक्शन वैल्यू के हिसाब से भी अप्रैल में 3.3% की हल्की गिरावट दर्ज की गई — मार्च के ₹24.77 लाख करोड़ के मुकाबले अप्रैल में कुल वैल्यू ₹23.95 लाख करोड़ रही।

हालांकि, सालाना आधार पर ग्रोथ काफी मजबूत रही। अप्रैल 2024 की तुलना में इस साल अप्रैल में ट्रांजैक्शन की संख्या में 34% की बढ़त और वैल्यू में 22% का इजाफा देखा गया, जो यह दर्शाता है कि भारत में डिजिटल भुगतान की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।


📊 आंकड़ों की गहराई से समझ

NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) के अनुसार:

  • अप्रैल में औसतन हर दिन 596 मिलियन (59.6 करोड़) ट्रांजैक्शन हुए।
  • मार्च में यह संख्या 590 मिलियन (59 करोड़) थी।
  • अप्रैल के प्रतिदिन के ट्रांजैक्शन वैल्यू की बात करें तो यह ₹79,831 करोड़ रहा, जो मार्च के ₹79,910 करोड़ के मुकाबले मामूली कम है।

इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि भले ही कुल मासिक ट्रांजैक्शन में गिरावट आई हो, लेकिन दैनिक उपयोग में वृद्धि हुई है।


📅 दिन कम, असर ज्यादा?

मार्च में जहां 31 दिन थे, वहीं अप्रैल में केवल 30 दिन। अगर अप्रैल में एक अतिरिक्त दिन होता और उसी औसत से ट्रांजैक्शन होते, तो कुल ट्रांजैक्शन संख्या मार्च के बराबर या उससे थोड़ी अधिक हो सकती थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि वित्तीय वर्ष की समाप्ति (FY-end) के कारण मार्च में ट्रांजैक्शनों में अस्थायी उछाल देखने को मिला था। अप्रैल में यह उछाल थोड़ा थम गया, जो एक प्राकृतिक स्थिरीकरण है।


📱 कौन सबसे आगे? PhonePe बना नंबर 1 UPI ऐप

UPI ट्रांजैक्शनों की दुनिया में PhonePe ने एक बार फिर से सबसे आगे रहते हुए अपनी बादशाहत कायम रखी। मार्च के आंकड़ों के अनुसार:

  • 📲 PhonePe: 8.64 अरब ट्रांजैक्शन, 47.25% मार्केट शेयर
  • 📲 Google Pay: 6.59 अरब ट्रांजैक्शन, 36.04% मार्केट शेयर
  • 📲 इसके बाद Paytm, Navi और Super.money जैसे ऐप्स का स्थान रहा।

PhonePe और Google Pay ने मिलकर कुल UPI ट्रांजैक्शन का 83% से अधिक हिस्सा संभाला, जो इन दोनों कंपनियों के दबदबे को दर्शाता है।


💡 सरकार का नया कदम: छोटे व्यापारियों को बढ़ावा

UPI इकोसिस्टम को और मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने हाल ही में एक नई योजना की मंजूरी दी है, जिसमें ₹1,500 करोड़ का बजट रखा गया है। इस योजना का उद्देश्य है:

  • छोटे व्यापारियों को BHIM-UPI प्लेटफॉर्म के ज़रिए डिजिटल भुगतान अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना।
  • QR कोड आधारित पेमेंट को ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक ले जाना।
  • कैशलेस इकॉनमी को सशक्त बनाना।

यह पहल खासकर स्ट्रीट वेंडर, किराना दुकानदार और स्थानीय व्यापारी वर्ग के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है।


🔍 UPI: भारत की डिजिटल क्रांति की रीढ़

UPI की शुरुआत 2016 में हुई थी, और तब से अब तक यह भारत की सबसे भरोसेमंद और तेज़ पेमेंट प्रणाली बन चुकी है। इसकी खासियतें हैं:

  • 💸 तुरंत ट्रांजैक्शन (24×7)
  • 🔐 मजबूत सुरक्षा
  • 📲 मोबाइल-आधारित सरल इंटरफेस
  • 🤝 सभी प्रमुख बैंकों और पेमेंट ऐप्स के साथ इंटीग्रेशन

2024-25 में UPI न केवल देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय लेवल पर भी अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। हाल ही में सिंगापुर, UAE और नेपाल जैसे देशों के साथ क्रॉस-बॉर्डर UPI पेमेंट्स की शुरुआत भी हो चुकी है।


📈 भविष्य की दिशा: क्या है आगे?

हालांकि अप्रैल में हल्की गिरावट देखी गई है, लेकिन UPI की लंबी अवधि की ग्रोथ कहानी पूरी तरह से मजबूत है। आने वाले महीनों में:

  • सरकारी प्रोत्साहन योजनाएं
  • नए फिचर्स जैसे UPI-ATM, क्रेडिट-ऑन-UPI
  • ग्रामीण भारत में बढ़ती पहुंच

इन सभी से UPI की पकड़ और भी मज़बूत होगी।


🧠 निष्कर्ष

अप्रैल 2025 के आंकड़े बताते हैं कि भारत में UPI अब सिर्फ एक पेमेंट सिस्टम नहीं, बल्कि एक डिजिटल जीवनशैली बन चुका है। मामूली गिरावट के बावजूद यह स्पष्ट है कि युवाओं से लेकर दुकानदारों तक, हर कोई अब डिजिटल की ओर बढ़ रहा है।

सरकार, बैंक, और फिनटेक कंपनियों की साझेदारी से भारत की डिजिटल इकोनॉमी आने वाले वर्षों में वैश्विक मंच पर मिसाल कायम कर सकती है।

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🏠💼 Urban Company का IPO फाइल हुआ, 930 करोड़ की कमाई और मुनाफे के साथ शानदार वापसी

Urban Company

भारत की प्रमुख होम सर्विस मार्केटप्लेस Urban Company ने सोमवार को SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) के पास अपना Draft Red Herring Prospectus (DRHP) फाइल कर दिया है। इस बहुप्रतीक्षित IPO के साथ ही कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2024-25 की पहली तीन तिमाहियों (अप्रैल–दिसंबर 2024) के अपने वित्तीय आंकड़े भी सार्वजनिक किए हैं, जो निवेशकों के लिए कई संकेत छोड़ते हैं।


📈 राजस्व में 40% से ज़्यादा की ग्रोथ

Urban Company ने FY25 की पहली 9 महीनों में ₹846 करोड़ की ऑपरेशनल इनकम दर्ज की, जो FY24 की समान अवधि में ₹601 करोड़ थी। यानी कंपनी ने 40% से अधिक की सालाना वृद्धि दर्ज की है।

इसके अलावा, कंपनी ने ₹84.2 करोड़ की अन्य आय (मुख्य रूप से ज़ीरो-कूपन बॉन्ड और फिक्स्ड डिपॉज़िट से ब्याज) भी अर्जित की, जिससे कुल मिलाकर FY25 की पहली तीन तिमाहियों में कंपनी की कुल आय ₹930 करोड़ तक पहुंच गई।


🧴 सेवाओं और प्रोडक्ट्स से कमाई का ब्रेकअप

Urban Company की कमाई दो मुख्य हिस्सों से आती है:

🔧 सेवाएं (75% हिस्सा)

  • स्पा और सैलून ट्रीटमेंट
  • एसी रिपेयर और इलेक्ट्रिकल वर्क
  • पेंटिंग और वॉल पैनल इंस्टॉलेशन
  • पेस्ट कंट्रोल और अन्य घरेलू सेवाएं

इन सेवाओं से FY25 की पहली 9 महीनों में कंपनी को ₹639 करोड़ की कमाई हुई, जो पिछले साल की तुलना में 31% की वृद्धि है।

🛍️ प्रोडक्ट बिक्री (25% हिस्सा)

  • सैलून उपयोग के लिए व्हाइट-लेबल प्रोडक्ट्स
  • लॉक, पैनल, और RO सिस्टम जैसे घरेलू सामान

इस श्रेणी से कंपनी ने ₹207 करोड़ की कमाई की। खास बात यह रही कि RO सिस्टम जैसी वस्तुओं की बिक्री FY24 के ₹10.8 करोड़ से बढ़कर FY25 में ₹75.8 करोड़ हो गई, यानी 7 गुना ग्रोथ!


🌍 इंटरनेशनल बिज़नेस से ₹116 करोड़ की कमाई

Urban Company की सेवाएं सिर्फ भारत तक सीमित नहीं हैं। FY25 की पहली 3 तिमाहियों में कंपनी ने ₹116.4 करोड़ की कमाई इंटरनेशनल बाजारों से भी की, जिससे यह साफ है कि कंपनी का ग्लोबल फुटप्रिंट भी मजबूत हो रहा है।


💰 खर्चों का लेखा-जोखा

कंपनी के खर्चों में भी कुछ प्रमुख बिंदु रहे:

  • कर्मचारी वेतन और लाभ: ₹258 करोड़ (कुल खर्च का 28.5%)
  • विज्ञापन और प्रमोशन: ₹160 करोड़
  • प्रोक्योरमेंट कॉस्ट (सामान की खरीद): ₹148 करोड़

इसके अलावा, कंपनी ने प्रोफेशनल इंसेंटिव, आउटसोर्सिंग, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, लीगल फीस और अन्य खर्चों में भी निवेश किया, जिससे कुल खर्च FY24 की 9M अवधि के ₹733 करोड़ से बढ़कर FY25 में ₹903 करोड़ हो गया — यानी 23.2% की वृद्धि


💹 मुनाफे में शानदार वापसी!

जहां पिछले साल इसी अवधि में Urban Company को ₹57.7 करोड़ का घाटा हुआ था, वहीं FY25 की पहली तीन तिमाहियों में कंपनी ने ₹27.1 करोड़ का प्री-टैक्स मुनाफा दर्ज किया है। यह कंपनी की बेहतर लागत नियंत्रण रणनीति और मजबूत राजस्व वृद्धि का नतीजा है।

अन्य वित्तीय संकेतक:

  • EBITDA मार्जिन: 6.78%
  • ROCE (रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड): 1.84%
  • यूनिट इकोनॉमिक्स: हर ₹1 की ऑपरेशनल इनकम के लिए खर्च ₹1.07

💼 IPO से ₹1,900 करोड़ जुटाने की योजना

Urban Company की योजना है कि वह ₹1,900 करोड़ के IPO के ज़रिए पूंजी जुटाएगी:

  • ₹429 करोड़ का फ्रेश इश्यू
  • ₹1,471 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS)

इस OFS में Accel, VY Capital, Prosus, Bessemer, और Elevation Capital जैसे निवेशक अपनी आंशिक हिस्सेदारी बेचेंगे।

Tiger Global समर्थित इस कंपनी ने अभी अपना प्राइस बैंड घोषित नहीं किया है, लेकिन इसके आस-पास बाजार में उत्सुकता चरम पर है।


🏦 बैलेंस शीट: मज़बूत स्थिति में कंपनी

दिसंबर 2024 तक, Urban Company के पास ₹1,514 करोड़ के करंट एसेट्स थे, जिसमें से ₹591 करोड़ नकद और बैंक बैलेंस के रूप में मौजूद हैं। यानी कंपनी के पास कैश फ्लो मजबूत है और यह आगे के निवेश और विस्तार के लिए पूरी तरह तैयार है।


🔍 निष्कर्ष: Urban Company IPO क्यों महत्वपूर्ण है?

Urban Company का IPO भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक और मील का पत्थर साबित हो सकता है। एक ऐसी कंपनी जो घाटे से मुनाफे में लौटी है, इंटरनेशनल मार्केट में ग्रोथ कर रही है और यूनिट इकोनॉमिक्स पर नियंत्रण रख रही है — वह निवेशकों के लिए एक आकर्षक अवसर बन सकती है।

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🎧 Boult Audio की दमदार ग्रोथ: FY24 में 40% बढ़ी कमाई,

Boult Audio

भारतीय कंज़्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांड Boult Audio, ने वित्त वर्ष 2023-24 में शानदार टॉपलाइन ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 40% बढ़कर ₹697 करोड़ हो गया, जो कि इसके प्रतिस्पर्धियों जैसे boAt और Noise के मुकाबले सबसे तेज़ ग्रोथ है।

हालांकि, इस तेज़ ग्रोथ की कीमत कंपनी को अपने मुनाफे में भारी गिरावट के रूप में चुकानी पड़ी, जहां नेट प्रॉफिट 37% घटकर ₹2.5 करोड़ रह गया, जो पिछले साल ₹4 करोड़ था।


🏭 Boult Audio का बिजनेस मॉडल: प्रोडक्ट बेस्ड रेवेन्यू 📦

Boult Audio, जिसकी शुरुआत 2017 में हुई थी, मुख्य रूप से वायरलेस ईयरबड्स, हेडफोन, स्मार्टवॉच और स्पीकर्स डिजाइन, डेवलप और मैन्युफैक्चर करता है।

कंपनी की कुल आय उत्पादों की बिक्री से ही आती है, यानि इसका रेवेन्यू मॉडल पूरी तरह से प्रोडक्ट-बेस्ड है।

  • FY23 में कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹498 करोड़ था
  • FY24 में यह बढ़कर ₹697 करोड़ हो गया — 40% की ग्रोथ

🇮🇳 भारत में बंपर बिक्री, एक्सपोर्ट स्थिर

Boult Audio की ग्रोथ का बड़ा हिस्सा भारत से आया:

  • डोमेस्टिक सेल्स (भारत में बिक्री): ₹620 करोड़, जो पिछले साल से 45% ज्यादा है
  • ओवरसीज सेल्स (विदेश बिक्री): ₹77 करोड़, जो कंपनी की कुल आय का 11% हिस्सा है और पिछले साल के समान स्तर पर बनी रही

इसके अलावा Boult को ₹5 करोड़ की नॉन-ऑपरेटिंग इनकम (जैसे कि ब्याज आदि) भी मिली, जिससे कंपनी का कुल रेवेन्यू ₹702 करोड़ हो गया, जो कि FY23 में ₹501 करोड़ था।


📉 खर्च बढ़े तो मुनाफा घटा

Boult की इनकम तो बढ़ी, लेकिन इसके साथ-साथ खर्चों में भी भारी इज़ाफा हुआ:

🧾 मुख्य खर्च:

  • मटेरियल कॉस्ट: ₹402 करोड़, जो कुल खर्च का 58% है — पिछले साल से 25% ज़्यादा
  • एडवर्टाइजिंग खर्च: ₹162 करोड़ — 74% की बढ़त
  • डिस्काउंट्स व पोस्ट-सप्लाई ऑफर्स: ₹70 करोड़ — 84% की बढ़त
  • कर्मचारी लाभ खर्च: ₹26 करोड़ — सालाना 50% की बढ़ोतरी
  • अन्य ओवरहेड्स (एडमिन व जनरल खर्च): ₹39 करोड़

इन सभी मदों को मिलाकर कंपनी का कुल खर्च ₹699 करोड़ हो गया, जो पिछले साल से 41% ज्यादा है।


📉 नेट प्रॉफिट में 37% की गिरावट

चूंकि खर्चों की रफ्तार रेवेन्यू से तेज़ रही, इसलिए कंपनी का नेट प्रॉफिट FY23 के ₹4 करोड़ से घटकर FY24 में ₹2.5 करोड़ रह गया — यानि 37% की गिरावट।

  • ROCE (Return on Capital Employed): 52.94%
  • EBITDA मार्जिन: 2.64%
  • हर ₹1 की कमाई के लिए Boult को ₹1.00 खर्च करना पड़ा — यानि कंपनी ब्रेक-ईवन के करीब है।

💼 बैलेंस शीट: इन्वेंटरी में बड़ा स्टॉक, कैश लिमिटेड

मार्च 2024 के अंत तक Boult की बैलेंस शीट कुछ यूं दिखी:

  • करंट असेट्स: ₹211 करोड़
    • जिसमें से ₹9 करोड़ कैश और बैंक बैलेंस में थे
  • इन्वेंट्री: ₹964.5 करोड़ — जो FY23 के मुकाबले 63% ज्यादा है

इतनी बड़ी इन्वेंटरी यह संकेत देती है कि कंपनी शायद त्योहारी सीजन या नए प्रोडक्ट लॉन्च की तैयारी कर रही है।


🔍 इंडस्ट्री में Boult की स्थिति

Boult Audio ने जिस तरह से बूटस्ट्रैप्ड (स्व-वित्त पोषित) होकर ₹700 करोड़ के टॉपलाइन आंकड़े तक पहुंच बनाई है, वह अपने आप में काबिल-ए-तारीफ है।

boAt और Noise जैसी कंपनियां जहां फंडिंग के सहारे आगे बढ़ रही हैं, वहीं Boult ने प्रॉफिटेबिलिटी और स्केलेबिलिटी के बैलेंस पर फोकस किया है।


📌 निष्कर्ष: ग्रोथ शानदार, लेकिन मुनाफा चिंता का विषय

Boult Audio की FY24 परफॉर्मेंस एक मिश्रित तस्वीर पेश करती है:

✅ मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ
✅ घरेलू बाजार में अच्छी पकड़
❌ मुनाफे में गिरावट
❌ बढ़ती इन्वेंटरी और खर्च

अगर कंपनी आने वाले महीनों में मार्जिन और ऑपरेशनल एफिशिएंसी सुधारने में सफल होती है, तो Boult भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट में boAt और Noise को कड़ी टक्कर दे सकती है।


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