💳 Cashfree Payments का बड़ा ESOP Buyback 400+ कर्मचारियों को मिलेगा लाभ

Cashfree Payments

बेंगलुरु‑आधारित फिनटेक कंपनी Cashfree Payments ने अपने कर्मचारियों के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए ESOP (Employee Stock Ownership Plan) Buyback प्रोग्राम की घोषणा की है। इस कार्यक्रम के तहत कंपनी ने 400 से अधिक कर्मचारियों को शामिल किया है, जिनमें 175 पूर्व कर्मचारी भी शामिल हैं। यह फैसला मौजूदा और पूर्व टीम सदस्यों को उनकी मेहनत का प्रत्यक्ष वित्तीय लाभ देने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।

👥 कर्मचारियों को मिली लिक्विडिटी

इस ESOP buyback का मुख्य उद्देश्य उन कर्मचारियों को लिक्विडिटी प्रदान करना है, जिनके पास पहले से वेस्टेड (vested) स्टॉक ऑप्शंस मौजूद हैं। यानी जिन कर्मचारियों ने कंपनी में काम करते हुए शेयर पाने का अधिकार अर्जित कर लिया था, वे अब उन शेयरों को बेचकर वास्तविक नकद लाभ हासिल कर सकेंगे।

हालांकि, Cashfree Payments ने इस buyback के कुल आकार (size) या किस वैल्यूएशन पर शेयर वापस खरीदे गए, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। इसके बावजूद, उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम कर्मचारियों के भरोसे और कंपनी की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

💰 फंडिंग के बाद आया बड़ा फैसला

Cashfree का यह ESOP buyback ऐसे समय में आया है, जब कंपनी ने पिछले साल $53 मिलियन (करीब ₹440 करोड़) की फंडिंग जुटाई थी। इस निवेश दौर का नेतृत्व Krafton ने किया था, जो पहले भी कई भारतीय टेक स्टार्टअप्स में निवेश कर चुका है।

अब तक Cashfree Payments ने कुल मिलाकर $95 मिलियन की फंडिंग जुटाई है। इसके प्रमुख निवेशकों में Y CombinatorSmilegate Investments और State Bank of India (SBI) जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इस मजबूत निवेश आधार ने कंपनी को कर्मचारियों के लिए ESOP buyback जैसे फैसले लेने में सक्षम बनाया है।

🏗️ कंपनी का परिचय और बिज़नेस मॉडल

2015 में स्थापित Cashfree Payments एक पेमेंट्स और पAYOUTS इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म के रूप में काम करती है। कंपनी का प्लेटफॉर्म स्टार्टअप्स से लेकर बड़ी इंटरनेट कंपनियों तक को भुगतान स्वीकार करने और भुगतान भेजने की सुविधाएं देता है।

Cashfree का दावा है कि वह सालाना $80 बिलियन से अधिक के भुगतान ट्रांजैक्शंस प्रोसेस करती है और इसके प्लेटफॉर्म पर 10 लाख से अधिक मर्चेंट्स जुड़े हुए हैं। इनमें ई‑कॉमर्स कंपनियां, फिनटेक स्टार्टअप्स और बड़े डिजिटल बिज़नेस शामिल हैं।

🌍 क्रॉस‑बॉर्डर पेमेंट्स पर फोकस

घरेलू बाजार के साथ‑साथ Cashfree Payments ने क्रॉस‑बॉर्डर पेमेंट्स बिज़नेस में भी तेजी से विस्तार किया है। फिलहाल यह सेगमेंट कंपनी के कुल रेवेन्यू में करीब 10% का योगदान देता है।

पिछले एक साल में अंतरराष्ट्रीय ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में मजबूत ग्रोथ देखने को मिली है, जिससे यह साफ है कि कंपनी भारत के बाहर भी अपने समाधान को स्केल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

📊 वित्तीय प्रदर्शन की तस्वीर

स्टार्टअप डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म TheKredible के अनुसार, Cashfree Payments का FY25 में ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹640 करोड़ रहा, जो FY24 के ₹643 करोड़ के लगभग बराबर है। यानी रेवेन्यू स्तर पर कंपनी की ग्रोथ फिलहाल स्थिर रही।

हालांकि, कंपनी का नेट लॉस बढ़कर ₹154 करोड़ हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष में ₹135 करोड़ था। इस तरह नुकसान में करीब 14% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ा हुआ नुकसान कंपनी के विस्तार, टेक्नोलॉजी निवेश और नए बिज़नेस सेगमेंट्स पर खर्च की वजह से हो सकता है।

🔄 2026 में ESOP Buyback की बढ़ती रफ्तार

Cashfree का यह ESOP buyback 2026 का तीसरा बड़ा ESOP लिक्विडिटी इवेंट है। इससे पहले:

  • 🏥 Innovaccer ने करीब $75 मिलियन का ESOP buyback पूरा किया
  • 💻 BrowserStack ने $125 मिलियन के ESOP लिक्विडिटी प्रोग्राम की घोषणा की

ये आंकड़े दिखाते हैं कि 2026 में स्टार्टअप्स दोबारा कर्मचारियों को शेयर‑आधारित रिवार्ड्स का वास्तविक लाभ देने की दिशा में सक्रिय हो रहे हैं।

📉 पिछले वर्षों से तुलना

अगर बीते वर्षों की बात करें तो:

  • 2025 में ESOP buybacks सिर्फ $75 मिलियन के आसपास रहे
  • 2024 में यह आंकड़ा करीब $190 मिलियन था
  • 2023 में ESOP payouts और buybacks $802 मिलियन के उच्च स्तर पर थे
  • 2022 में लगभग $200 मिलियन, और
  • 2021 में करीब $440 मिलियन का ESOP लिक्विडिटी देखने को मिला था

इस तुलना से साफ है कि 2026 में फिर से ESOP buyback गतिविधियों में तेजी लौट रही है।

🔮 आगे की राह

Cashfree Payments का ESOP buyback न सिर्फ कर्मचारियों के लिए एक सकारात्मक संकेत है, बल्कि यह भारतीय फिनटेक इकोसिस्टम की परिपक्वता को भी दर्शाता है। ऐसे कार्यक्रम स्टार्टअप्स को टैलेंट बनाए रखने, भरोसा मजबूत करने और दीर्घकालिक विकास के लिए अहम भूमिका निभाते हैं।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि Cashfree अपने रेवेन्यू ग्रोथ और मुनाफे के रास्ते को कैसे संतुलित करता है, और क्या वह आगे भी कर्मचारियों के लिए ऐसे और लिक्विडिटी इवेंट्स लेकर आती है।

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💳📊 Pine Labs Setu के ज़रिये Agya Technologies में 100%

Pine Labs

फिनटेक यूनिकॉर्न Pine Labs 🦄 ने अपने बिज़नेस विस्तार की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। कंपनी अब RBI‑लाइसेंस प्राप्त अकाउंट एग्रीगेटर Agya Technologies में पूरी यानी 100% हिस्सेदारी लेने की तैयारी कर रही है। यह अधिग्रहण Pine Labs की फिनटेक इंफ्रास्ट्रक्चर यूनिट Setu के माध्यम से किया जाएगा।

🏦 RBI से मिली मंज़ूरी

नियामकीय फाइलिंग के मुताबिक, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने Setu (BrokenTusk Technologies Pvt Ltd) को Agya Technologies में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 100% करने की मंज़ूरी दे दी है। अभी तक Agya, Setu की एक सहयोगी (associate) कंपनी के रूप में काम कर रही थी।

📈 मौजूदा हिस्सेदारी और आगे की योजना

वर्तमान में Pine Labs के पास Agya Technologies में करीब 25% हिस्सेदारी है। कंपनी अब शेष हिस्सेदारी भी खरीदने की योजना बना रही है। यह अधिग्रहण एक या एक से अधिक चरणों (tranches) में पूरा किया जा सकता है।

यह कदम Pine Labs की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह अपने डिजिटल पेमेंट और डेटा‑आधारित फिनटेक इकोसिस्टम को और मज़बूत करना चाहती है।

💡 तीन डिजिटल पेमेंट लाइसेंस के बाद बड़ा दांव

यह फैसला ऐसे समय आया है जब Pine Labs ने हाल ही में RBI से तीनों डिजिटल पेमेंट लाइसेंस हासिल किए हैं 👇

  • 🏪 ऑफलाइन पेमेंट
  • 🛒 ऑनलाइन मर्चेंट पेमेंट
  • 🌍 क्रॉस‑बॉर्डर ट्रांजैक्शन

इन लाइसेंसों के साथ Pine Labs अब व्यापारियों को एंड‑टू‑एंड डिजिटल पेमेंट सॉल्यूशंस देने में सक्षम हो गई है।

💰 वित्तीय प्रदर्शन में सुधार

वित्तीय मोर्चे पर भी Pine Labs ने मज़बूत प्रदर्शन किया है 📊

  • Q2 FY26 में रेवेन्यू: ₹650 करोड़
  • Q2 FY25 में रेवेन्यू: ₹551 करोड़

इतना ही नहीं, कंपनी ने ₹6 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में उसे ₹32 करोड़ का नुकसान हुआ था। यह लागत नियंत्रण और बेहतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी का संकेत है।

📉➡️📈 शेयर बाज़ार में सफल एंट्री

Pine Labs ने शेयर बाज़ार में भी दमदार शुरुआत की 🚀

  • IPO प्राइस: ₹221
  • लिस्टिंग प्राइस: ₹242 (लगभग 9.5% प्रीमियम)

फिलहाल कंपनी का शेयर ₹240.85 पर ट्रेड कर रहा है और इसका मार्केट कैप करीब ₹26,406 करोड़ (लगभग $2.9 बिलियन) है।

🔗 Agya Technologies क्यों है अहम?

Agya Technologies एक RBI‑लाइसेंस प्राप्त अकाउंट एग्रीगेटर है, जो ग्राहकों की वित्तीय जानकारी को सुरक्षित और सहमति‑आधारित तरीके से साझा करने में मदद करता है 🔐। इससे

  • लोन प्रोसेसिंग
  • क्रेडिट असेसमेंट
  • फाइनेंशियल प्रोडक्ट डिलीवरी

तेज़ और पारदर्शी बनती है।

🔮 आगे की राह

Agya Technologies में 100% हिस्सेदारी Pine Labs को डेटा‑ड्रिवन फिनटेक सॉल्यूशंस में और मज़बूत बनाएगी। डिजिटल पेमेंट लाइसेंस, बेहतर फाइनेंशियल्स और सफल IPO के साथ Pine Labs भारतीय फिनटेक सेक्टर में अपनी पकड़ और मजबूत कर रही है 🇮🇳✨

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🚀 Rapido की तेज़ रफ्तार ग्रोथ बढ़ती कमाई, 

Rapido

मोबिलिटी प्लेटफॉर्म Rapido  बीते एक साल से लगातार सुर्खियों में बना हुआ है 📰। शुरुआती निवेशकों जैसे TVS, Swiggy, Prosus और Accel को शानदार रिटर्न मिलने के बाद रैपिडो को उस वक्त और ज्यादा पहचान मिली, जब Uber के CEO दारा खोसरोशाही ने इसे सार्वजनिक रूप से एक बड़ा प्रतिद्वंद्वी बताया 👀।
वित्त वर्ष 2025 (FY25) में कंपनी ने तेज़ रेवेन्यू ग्रोथ के साथ‑साथ अपने घाटे को भी काफ़ी हद तक कम किया है 💪।

📊 Rapido 44% की रेवेन्यू ग्रोथ

Registrar of Companies (RoC) में दाखिल आंकड़ों के मुताबिक, FY25 में रैपिडो का ऑपरेशनल रेवेन्यू बढ़कर 934 करोड़ रुपये हो गया 💰, जो FY24 में 648 करोड़ रुपये था।
यानी कंपनी ने सालाना आधार पर 44% की मजबूत ग्रोथ दर्ज की 🚀। यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है, जब भारत का मोबिलिटी सेक्टर कड़ी प्रतिस्पर्धा और नियमों की अनिश्चितता से जूझ रहा है ⚠️।

🔄 रेवेन्यू के बदलते स्रोत

रैपिडो की कमाई का बड़ा हिस्सा उसके प्लेटफॉर्म पर पूरी होने वाली दो‑पहिया, तीन‑पहिया और चार‑पहिया राइड्स से आता है 🛵🚕।
हालांकि FY25 में प्लेटफॉर्म‑आधारित राइड रेवेन्यू 23.5% घटकर 277 करोड़ रुपये रह गया, जो कुल रेवेन्यू का केवल 29% था 📉।

इसके उलट, कंपनी का डिलीवरी बिज़नेस तेज़ी से आगे बढ़ा 📦🔥।
खाना और पार्सल डिलीवरी से कमाई 28.3% बढ़कर 340 करोड़ रुपये हो गई, जिससे यह FY25 में रैपिडो का सबसे बड़ा रेवेन्यू सेगमेंट बन गया 🥇। FY24 में जहां पैसेंजर राइड्स सबसे आगे थीं, वहीं FY25 में डिलीवरी बिज़नेस ने बाज़ी मार ली।

⭐ सब्सक्रिप्शन बना ग्रोथ का नया इंजन

FY25 में रैपिडो के लिए सबसे बड़ा गेम‑चेंजर उसका सब्सक्रिप्शन मॉडल रहा 💳।
कैप्टन्स और यूज़र्स से राइड पास व अन्य बेनिफिट्स के जरिए मिलने वाली इनकम लगभग 14 गुना बढ़कर 275 करोड़ रुपये पहुंच गई 🚀।

इसके अलावा:

  • 🚗 पैसेंजर ट्रांसपोर्ट सर्विस: 21 करोड़ रुपये
  • 📢 विज्ञापन इनकम: 16 करोड़ रुपये
  • 🅿️ अन्य ऑपरेशनल इनकम: 5 करोड़ रुपये

निवेश से मिलने वाले ब्याज के रूप में कंपनी ने 69 करोड़ रुपये भी कमाए 💹। इस तरह FY25 में रैपिडो की कुल आय 1,003 करोड़ रुपये रही, जो FY24 में 579 करोड़ रुपये थी।

💸 खर्च और लागत का दबाव

खर्चों की बात करें तो कैप्टन्स को दिए जाने वाले इंसेंटिव और डिलीवरी चार्जेज सबसे बड़ा खर्च बने रहे 💸।
FY25 में यह खर्च 8.7% बढ़कर 500 करोड़ रुपये हो गया, जो कुल लागत का करीब 40% है।

अन्य बड़े खर्च:

  • 👨‍💼 कर्मचारी खर्च: 207 करोड़ रुपये (+20%)
  • 📣 विज्ञापन व प्रमोशन: 252 करोड़ रुपये
  • 🔬 रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D): 108 करोड़ रुपये

इन सभी के चलते FY25 में कुल खर्च 1,261 करोड़ रुपये पहुंच गया।

📉 घाटा घटा, लेकिन मुनाफ़ा अभी दूर

मजबूत ग्रोथ के चलते रैपिडो ने अपना नेट लॉस 30.5% घटाकर 258 करोड़ रुपये कर लिया 😌, जो FY24 में 371 करोड़ रुपये था।
हालांकि, EBITDA (-19.59%) और ROCE (-13.58%) अभी भी नेगेटिव हैं, यानी मुनाफ़े की मंज़िल अभी बाकी है ⏳।
यूनिट इकॉनॉमिक्स के हिसाब से कंपनी ने 1 रुपये कमाने के लिए 1.35 रुपये खर्च किए।

💼 फंडिंग और आगे की राह

स्टार्टअप डेटा प्लेटफॉर्म TheKredible के अनुसार, रैपिडो अब तक 550 मिलियन डॉलर से ज्यादा की फंडिंग जुटा चुका है 💵। इसमें WestBridge के नेतृत्व में 200 मिलियन डॉलर का यूनिकॉर्न राउंड भी शामिल है 🦄।

रेवेन्यू ब्रेक‑अप साफ़ दिखाता है कि गुड्स डिलीवरी बिज़नेस में ज्यादा ग्रोथ और बेहतर मार्जिन की संभावना है 📦📈, जबकि पैसेंजर सेगमेंट अभी भी चुनौती बना हुआ है।
दो‑पहिया राइड्स ने एक नया बाज़ार तैयार किया है और नियमों में बदलाव के लिए दबाव भी डाला है, जिससे रैपिडो एक मज़बूत चैलेंजर से लीडर की ओर बढ़ता दिख रहा है 🔥।

अब बड़ा सवाल यही है 🤔—
क्या रैपिडो लास्ट‑माइल डिलीवरी पर ज्यादा फोकस करेगा या फिर पैसेंजर बिज़नेस में नई ताकत के साथ वापसी करेगा? इसका जवाब आने वाला वक्त ही देगा ⏰।

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🤖🎙️ एआई वॉइस स्टार्टअप ElevenLabs की बड़ी छलांग

ElevenLabs

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में तेजी से उभर रही कंपनी ElevenLabs 🌍 एक बार फिर चर्चा में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह लंदन-आधारित एआई वॉइस टेक्नोलॉजी स्टार्टअप एक नए फंडिंग राउंड को बंद करने की तैयारी में है, जिससे इसका वैल्यूएशन लगभग दोगुना होकर $11 बिलियन (करीब ₹91,000 करोड़) तक पहुंच सकता है 💰। अगर यह फंडिंग पूरी होती है, तो ElevenLabs ब्रिटेन की सबसे मूल्यवान एआई कंपनी बन जाएगी 🇬🇧।

यह बातचीत ऐसे समय पर हो रही है जब कंपनी ने सिर्फ चार महीने पहले ही एक सेकेंडरी शेयर सेल के जरिए $6.6 बिलियन के वैल्यूएशन पर पूंजी जुटाई थी 📈। इतने कम समय में वैल्यूएशन में संभावित उछाल यह दिखाता है कि निवेशकों का भरोसा कंपनी पर लगातार मजबूत हो रहा है 🤝।


🚀 2022 में शुरुआत, असाधारण ग्रोथ

ElevenLabs की स्थापना 2022 में लंदन में पोलैंड मूल के उद्यमियों माती स्टैनिशेव्स्की और पिओत्र डाबकोव्स्की ने की थी 👨‍💻👨‍💻। बहुत कम समय में कंपनी ने जिस रफ्तार से विकास किया है, वह यूरोप के एआई स्टार्टअप इकोसिस्टम में इसे खास बनाता है ⭐।

कंपनी को Sequoia Capital, Iconiq और Andreessen Horowitz जैसे वैश्विक स्तर के निवेशकों का समर्थन मिला है 🏦। अब ElevenLabs सैकड़ों मिलियन डॉलर की नई फंडिंग जुटाने की योजना बना रही है, जिससे रिसर्च, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और अंतरराष्ट्रीय विस्तार को और मजबूती मिलेगी 🌐।


🔊 वॉइस टेक्नोलॉजी से ग्लोबल रेवेन्यू इंजन तक

ElevenLabs की सबसे बड़ी ताकत इसकी AI-पावर्ड वॉइस जेनरेशन टेक्नोलॉजी है 🎧, जो बेहद वास्तविक और मानवीय आवाज़ें तैयार करती है। इस तकनीक का उपयोग कई क्षेत्रों में तेजी से बढ़ा है, जैसे:

  • 📞 कस्टमर सर्विस और कॉल सेंटर्स
  • 📝 टेक्स्ट-टू-स्पीच प्लेटफॉर्म
  • 🌍 मल्टी-लैंग्वेज डबिंग
  • 📚 ऑडियोबुक और डिजिटल कंटेंट

इस बढ़ती मांग का असर कंपनी की कमाई पर भी साफ दिखता है 💹। पिछले साल ElevenLabs ने $330 मिलियन की एनुअल रिकरिंग रेवेन्यू (ARR) दर्ज की, जो कुछ ही महीनों पहले बताए गए $200 मिलियन ARR से कहीं ज्यादा है 🚀।


🌎 वैश्विक मौजूदगी और अमेरिकी बाजार पर फोकस

हालांकि ElevenLabs की जड़ें लंदन में हैं 🇬🇧, लेकिन कंपनी का विज़न पूरी तरह ग्लोबल है 🌐। इसके मुख्यालय लंदन और न्यूयॉर्क में हैं, जबकि वारसॉ, बेंगलुरु और टोक्यो में भी इसके ऑफिस मौजूद हैं 🏢।

अमेरिका में कंपनी का इनकॉरपोरेशन उसे वहां के वेंचर कैपिटल नेटवर्क तक आसान पहुंच देता है 🇺🇸, जिससे यह दुनिया के सबसे प्रतिस्पर्धी एआई फंडिंग मार्केट में मजबूती से खड़ी है 💪।


💸 फंडिंग इतिहास और निवेशकों का भरोसा

ElevenLabs का फंडिंग सफर इसकी ग्रोथ स्टोरी को साफ दिखाता है 📊।

  • 🗓️ जनवरी 2025 में कंपनी ने $180 मिलियन जुटाए, तब वैल्यूएशन $3.3 बिलियन था।
  • 🗓️ सितंबर 2025 में वैल्यूएशन दोगुना हो गया और कर्मचारियों को $100 मिलियन के शेयर बेचने का मौका मिला 👏।

इसके अलावा NEA, Smash Capital और FT Ventures जैसे बड़े निवेशक भी कंपनी से जुड़े हुए हैं 🤝।


🌍 यूरोप बनाम अमेरिका: एआई की रेस

अगर ElevenLabs का वैल्यूएशन $11 बिलियन तक पहुंचता है, तो यह यूरोप की टॉप एआई कंपनियों में शामिल हो जाएगी 🏆। यह फ्रांस की Mistral (लगभग $12 बिलियन) के करीब होगी और यूके की Wayve और Nscale जैसी कंपनियों से आगे निकल जाएगी 📈।

हालांकि, अमेरिका अब भी इस दौड़ में काफी आगे है 🇺🇸। उदाहरण के लिए, OpenAI का वैल्यूएशन लगभग $500 बिलियन बताया जाता है और यह आगे चलकर $800 बिलियन तक जा सकता है 🤯। इससे साफ है कि यूरोप में टैलेंट होने के बावजूद कैपिटल स्केलिंग एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।


🌟 यूरोप के लिए उम्मीद की किरण

इन सबके बीच ElevenLabs एक उम्मीद की किरण बनकर उभरा है ✨। यह उन चुनिंदा यूरोपीय एआई कंपनियों में से है जो बेहतरीन तकनीक और मजबूत कमर्शियल मॉडल दोनों को सफलतापूर्वक जोड़ पा रही हैं 🔗।

ElevenLabs की नई फंडिंग बातचीत सिर्फ एक वैल्यूएशन स्टोरी नहीं है, बल्कि यह संकेत भी है कि यूरोप भी अब वैश्विक स्तर की एआई कंपनियां खड़ी कर सकता है 🌍। आने वाले समय में यह स्टार्टअप न सिर्फ यूके, बल्कि पूरी दुनिया के एआई इकोसिस्टम में अहम भूमिका निभा सकता है 🚀।

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🚀 Verdict Capital Niko Bonatsos की नई वेंचर पारी

Niko Bonatsos

स्टार्टअप और वेंचर कैपिटल की दुनिया में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। 🌍
General Catalyst के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर Niko Bonatsos अब अपने नए वेंचर कैपिटल फंड की तैयारी में हैं। 🤝

💼 नया फंड, नई पहचान

निको ने उद्यमी और निवेशक माइकल फर्टिक के साथ मिलकर Verdict Capital नाम से नया फंड शुरू करने की योजना बनाई है।
इस फंड के लिए $250–300 मिलियन (करीब ₹2,000–2,500 करोड़) जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। 💰

⭐ हाई-ग्रोथ स्टार्टअप्स का अनुभव

निको बोनाट्सोस को शुरुआती निवेशों के लिए जाना जाता है।
उन्होंने पहले Discord 📱 और Mercor जैसे स्टार्टअप्स में निवेश किया है, जो आगे चलकर बड़ी कंपनियां बनीं।
General Catalyst में उन्होंने शुरुआती चरण के निवेशों का नेतृत्व किया और कई उभरते स्टार्टअप्स को पहचान दिलाई। 📈

🤖 माइकल फर्टिक की अहम भूमिका

माइकल फर्टिक पहले Heroic Ventures चला चुके हैं और डेवलपर टूल स्टार्टअप Cursor (Anysphere) के शुरुआती समर्थक रहे हैं।
वह अब भी सक्रिय उद्यमी हैं और जनरेटिव टेक्नोलॉजी पर आधारित एक नई कंपनी पर काम कर रहे हैं। 🧠⚙️

🌐 किन स्टार्टअप्स पर होगा फोकस?

Verdict Capital का फोकस होगा:

  • 🏗️ शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स
  • 💡 एडवांस टेक्नोलॉजी और इनोवेशन
  • 📍 सैन फ्रांसिस्को, न्यूयॉर्क और इज़राइल जैसे स्टार्टअप हब्स

⚖️ बदलती वेंचर कैपिटल इंडस्ट्री

आज कई वरिष्ठ निवेशक बड़ी फर्म्स छोड़कर अपने खुद के फंड शुरू कर रहे हैं।
हालांकि नया फंड जुटाना चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि लगभग 75% निवेश स्थापित फर्म्स को ही मिलता है। 📊
फिर भी, Verdict Capital अपने अनुभव और नेटवर्क के दम पर मजबूत शुरुआत की उम्मीद कर रहा है। 🔑

🔮 आगे क्या?

निको और माइकल की यह साझेदारी दिखाती है कि बड़े निवेशक अब सिर्फ स्टार्टअप्स पर नहीं, बल्कि खुद पर भी भरोसा कर रहे हैं। 🚀
आने वाले समय में Verdict Capital किन स्टार्टअप्स को सपोर्ट करेगा, इस पर सबकी नजर रहेगी। 👀

Read more :📘 FY25 में Simplilearn की चुनौतियाँ राजस्व में गिरावट,

📘 FY25 में Simplilearn की चुनौतियाँ राजस्व में गिरावट,

Simplilearn

अपस्किलिंग पर केंद्रित एडटेक प्लेटफॉर्म Simplilearn के लिए वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) चुनौतीपूर्ण रहा। जहां एक ओर कंपनी के परिचालन राजस्व (Operating Revenue) में भारी गिरावट दर्ज की गई, वहीं दूसरी ओर खर्चों में कटौती और बेहतर लागत प्रबंधन के चलते कंपनी अपने घाटे को काफी हद तक कम करने में सफल रही। यह जानकारी कंपनी के समेकित वित्तीय विवरणों से सामने आई है, जो रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़ (RoC) के पास दाखिल किए गए हैं।

📉 राजस्व में 26% की गिरावट

FY25 में Simplilearn का परिचालन राजस्व घटकर 556 करोड़ रुपये रह गया, जो FY24 में 750 करोड़ रुपये था। यानी साल-दर-साल आधार पर कंपनी के राजस्व में करीब 26% की गिरावट आई। इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण कंपनी के सेल्फ-लर्निंग (Self-learning) सेगमेंट में आई तेज गिरावट रही।

🎓 Simplilearn क्या करता है?

Simplilearn एक डिजिटल अपस्किलिंग प्लेटफॉर्म है, जो आईटी और प्रोफेशनल स्किल्स पर आधारित कोर्सेज प्रदान करता है। इसके प्रमुख कोर्स क्षेत्रों में शामिल हैं:

  • साइबर सिक्योरिटी
  • क्लाउड कंप्यूटिंग
  • डेटा साइंस
  • डिजिटल मार्केटिंग
  • प्रोजेक्ट मैनेजमेंट

कंपनी पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम, मास्टर प्रोग्राम और विभिन्न सर्टिफिकेशन कोर्सेज भी ऑफर करती है, जो खास तौर पर वर्किंग प्रोफेशनल्स को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं।

📉 सेल्फ-लर्निंग सेगमेंट में भारी गिरावट

FY25 में ऑनलाइन सेल्फ-लर्निंग कोर्सेज से होने वाली आय में 95% की भारी गिरावट दर्ज की गई। यह आय FY24 के 451 करोड़ रुपये से घटकर FY25 में सिर्फ 23 करोड़ रुपये रह गई। अब यह सेगमेंट कंपनी के कुल परिचालन राजस्व का केवल 4% हिस्सा रह गया है।

📈 लाइव लर्निंग बना सहारा

जहां सेल्फ-लर्निंग सेगमेंट कमजोर पड़ा, वहीं लाइव लर्निंग प्रोग्राम्स ने कंपनी को बड़ी राहत दी। FY25 में लाइव लर्निंग से होने वाली आय 65% बढ़कर 565 करोड़ रुपये हो गई, जो FY24 में 341.5 करोड़ रुपये थी।
अन्य आय (Other Income) के रूप में कंपनी ने 22 करोड़ रुपये कमाए, जिससे FY25 में कंपनी की कुल आय 578 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

💸 खर्चों में बड़ी कटौती

राजस्व में गिरावट के बावजूद Simplilearn ने अपने खर्चों पर सख्त नियंत्रण रखा, जिसका सीधा असर घाटे में कमी के रूप में देखने को मिला।

  • कर्मचारी लाभ खर्च (Employee Benefit Expense) में 42.5% की कटौती की गई और यह 325 करोड़ रुपये से घटकर 187 करोड़ रुपये रह गया।
  • विज्ञापन और मार्केटिंग खर्च 35% घटकर 134 करोड़ रुपये रह गया।
  • मटेरियल कॉस्ट में 11.5% की गिरावट आई और यह 162 करोड़ रुपये रहा।
  • डेप्रिसिएशन खर्च 10% बढ़कर 63 करोड़ रुपये हो गया।
  • सब्सक्रिप्शन फीस 50% बढ़कर 24 करोड़ रुपये हो गई।
  • फाइनेंस कॉस्ट FY25 में 6 करोड़ रुपये रहा।

कुल मिलाकर, कंपनी का कुल खर्च 29% घटकर 621 करोड़ रुपये रह गया, जो FY24 में 879 करोड़ रुपये था।

📉 घाटा 60% घटा

FY25 में Simplilearn का शुद्ध घाटा घटकर 43 करोड़ रुपये रह गया, जबकि FY24 में यह 107 करोड़ रुपये था। यानी कंपनी ने अपने घाटे में 60% की कमी की।

हालांकि, FY25 में कंपनी ने 141 करोड़ रुपये का एक्सेप्शनल खर्च भी दर्ज किया, जो मुख्य रूप से कंटेंट लाइब्रेरी के अमॉर्टाइजेशन से जुड़ा था। यह एक नॉन-कैश खर्च था। अगर इस खर्च को हटाकर देखा जाए, तो कंपनी की वास्तविक परिचालन स्थिति और बेहतर नजर आती है।

📊 यूनिट इकॉनॉमिक्स और वित्तीय स्थिति

FY25 में Simplilearn को 1 रुपये कमाने के लिए 1.12 रुपये खर्च करने पड़े, जबकि FY24 में यह आंकड़ा 1.17 रुपये था। इससे स्पष्ट है कि कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार हुआ है।

मार्च 2025 तक:

  • कैश और बैंक बैलेंस: 145 करोड़ रुपये (FY24 में 236 करोड़ रुपये)
  • करंट एसेट्स: 319 करोड़ रुपये (लगभग स्थिर)

💰 निवेश और फंडिंग

स्टार्टअप डेटा प्लेटफॉर्म TheKredible के अनुसार, Simplilearn अब तक 118 मिलियन डॉलर से अधिक की फंडिंग जुटा चुका है। कंपनी के प्रमुख निवेशकों में Blackstone और GSV Ventures शामिल हैं।

🔚 निष्कर्ष

FY25 Simplilearn के लिए बदलाव और पुनर्संतुलन का वर्ष रहा। जहां एक ओर कंपनी को राजस्व में गिरावट का सामना करना पड़ा, वहीं लाइव लर्निंग मॉडल पर फोकस और खर्चों में सख्त नियंत्रण के चलते कंपनी ने अपने घाटे को काफी हद तक कम कर लिया। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि Simplilearn किस तरह अपने बिजनेस मॉडल को और मजबूत करता है और ग्रोथ की राह पर लौटता है।

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33&Brew

भारत के तेजी से बढ़ते क्राफ्ट बीयर सेक्टर में एक अनोखी पहचान बना चुकी विनाइल‑थीम्ड माइक्रोब्रुअरी 33&Brew ने अपने सीरीज़‑A फंडिंग राउंड में 20 करोड़ रुपये (लगभग 2.2 मिलियन डॉलर) जुटाए हैं 💰। इस निवेश राउंड का नेतृत्व Optimistic Capital ने किया है, जो खास तौर पर माइक्रोब्रुअरी और क्राफ्ट बीयर उद्योग पर केंद्रित एक वेंचर कैपिटल फर्म है।

🍻 क्राफ्ट बीयर सेक्टर पर Optimistic Capital का फोकस
Optimistic Capital ने पहले ही 200 करोड़ रुपये का बीयर‑फोकस्ड फंड लॉन्च करने की घोषणा की थी। अब तक इस फंड से 30 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है, जबकि शेष 170 करोड़ रुपये अगले तीन वर्षों में निवेश किए जाएंगे 📈। यह पूंजी बोतलिंग, केगिंग और क्राफ्ट बीयर से जुड़े अन्य व्यवसायों को बढ़ावा देने में इस्तेमाल होगी।

🏗️ विस्तार और निर्माण पर खर्च होगी राशि
कंपनी के अनुसार, इस फंडिंग का उपयोग निर्माण कार्यों, आउटलेट विस्तार और नए प्रोजेक्ट्स के लिए किया जाएगा। 33&Brew का लक्ष्य केवल एक माइक्रोब्रुअरी न रहकर एक एक्सपीरियंस‑ड्रिवन ब्रांड बनना है।

🎵 संगीत और बीयर का अनोखा अनुभव
2024 में कार्तिक चंद्रशेखरन द्वारा स्थापित 33&Brew, अपने नाम की तरह ही 33⅓ RPM विनाइल रिकॉर्ड्स से प्रेरित है। यहां आने वाले ग्राहक 🎧 अपनी पसंद के विनाइल रिकॉर्ड चुनकर म्यूजिक चला सकते हैं और साथ ही क्राफ्ट बीयर का आनंद ले सकते हैं 🍺। डिजिटल दौर में एनालॉग म्यूजिक का यह अनुभव इसे बाकी माइक्रोब्रुअरी से अलग बनाता है।

🍽️ शेफ सब्यसाची गोराई के साथ खास मेन्यू
33&Brew का फूड कॉन्सेप्ट मशहूर शेफ सब्यसाची गोराई के सहयोग से तैयार किया गया है 👨‍🍳। यहां परोसा जाने वाला प्रोग्रेसिव इंडियन फूड, ग्लोबल फ्लेवर और सिग्नेचर कॉकटेल्स 🍹 के साथ एक यादगार अनुभव देता है।

🏙️ बेंगलुरु के माइक्रोब्रुअरी बाजार में अलग पहचान
भारत की माइक्रोब्रुअरी राजधानी कहे जाने वाले बेंगलुरु में 33&Brew, क्राफ्ट ब्रूइंग और एनालॉग म्यूजिक कल्चर के मेल से अपनी अलग पहचान बना रहा है 🎶🍻। युवा वर्ग और म्यूजिक लवर्स के बीच यह तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

📊 Optimistic Capital की आगे की योजना
Optimistic Capital आने वाले समय में केंद्रीय बेंगलुरु में दो और माइक्रोब्रुअरी में निवेश करने की योजना बना रहा है। फर्म का मानना है कि भारत में क्राफ्ट बीयर सेक्टर में आगे चलकर तेज़ ग्रोथ देखने को मिलेगी 🚀।

🔚 निष्कर्ष
33&Brew की यह फंडिंग दर्शाती है कि भारत में एक्सपीरियंस‑बेस्ड हॉस्पिटैलिटी और क्राफ्ट बीयर ब्रांड्स के लिए निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। संगीत, भोजन और बीयर के अनोखे संयोजन के साथ 33&Brew आने वाले समय में और भी बड़े स्तर पर विस्तार की तैयारी में है 🌟।

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Samunnati

चेन्नई स्थित एग्री-वैल्यू चेन प्लेटफॉर्म Samunnati ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में सीमित वृद्धि दर्ज की है 📊। कंपनी की समेकित वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार, उसका सकल राजस्व FY24 में ₹2,404 करोड़ से बढ़कर FY25 में ₹2,434 करोड़ हो गया 💰। हालांकि यह बढ़ोतरी मामूली रही, लेकिन कंपनी प्री-टैक्स स्तर पर लाभ में बनी रही।

🚜 कृषि इकोसिस्टम को मजबूत करने पर फोकस

2014 में स्थापित Samunnati एक विशेषीकृत एग्री इकोसिस्टम प्लेटफॉर्म है 🌱। यह कंपनी कृषि क्षेत्र में वित्तीय और गैर-वित्तीय दोनों तरह की सेवाएं प्रदान करती है। Samunnati मुख्य रूप से Farmer Producer Organisations (FPOs), एग्री-SMEs और एग्रीटेक स्टार्टअप्स के साथ काम करती है।

कंपनी का दावा है कि वह देशभर में 6,000 से अधिक किसान समूहों से जुड़ी हुई है 🤝 और इसके माध्यम से लाखों छोटे व सीमांत किसानों को लाभ पहुंचा रही है।

📦 ट्रेडिंग से आया सबसे ज्यादा राजस्व

FY25 में भी Samunnati की कुल आय का लगभग 90% हिस्सा ट्रेडिंग और उससे जुड़ी गतिविधियों से आया 🧾। इस सेगमेंट से कंपनी ने ₹2,205 करोड़ की कमाई की।
वहीं, फाइनेंसिंग और लेंडिंग बिजनेस से भी आय हुई, लेकिन इसका योगदान अभी सीमित है।

💸 खर्चों में तेज़ बढ़ोतरी

कंपनी के कुल खर्चों में प्रोक्योरमेंट (खरीद) खर्च सबसे बड़ा हिस्सा रहा, जो FY25 में बढ़कर ₹2,084 करोड़ हो गया 📈। यह कुल खर्च का करीब 85% है।

इसके अलावा, कर्मचारी लाभ खर्च भी 8% बढ़कर ₹76 करोड़ पहुंच गया 👨‍💼👩‍💼। लेंडिंग बिजनेस के विस्तार के कारण कंपनी का फाइनेंस कॉस्ट भी 42.9% बढ़कर ₹215.8 करोड़ हो गया।

⚖️ प्री-टैक्स मुनाफा, लेकिन टैक्स से नुकसान

बढ़ते खर्चों के बावजूद Samunnati ने FY25 में ₹5.3 करोड़ का प्री-टैक्स प्रॉफिट (EBT) दर्ज किया ✅।
हालांकि, ₹74 करोड़ के डिफर्ड टैक्स खर्च के चलते कंपनी को साल के अंत में ₹74 करोड़ का शुद्ध घाटा झेलना पड़ा ❌।

⚙️ लगभग ब्रेक-ईवन पर ऑपरेशन

FY25 में कंपनी ने लगभग 1 रुपये खर्च कर 1 रुपये की कमाई की, जिससे यह साफ होता है कि Samunnati का कारोबार लगभग ब्रेक-ईवन स्थिति में है ⚖️।

मार्च 2025 तक कंपनी की कुल चालू परिसंपत्तियां ₹2,103 करोड़ रहीं, जिनमें ₹308 करोड़ नकद और बैंक बैलेंस शामिल है 🏦।

💼 निवेशकों का भरोसा कायम

फंडिंग के मोर्चे पर Samunnati को लगातार समर्थन मिला है 🤝। कंपनी ने मई 2024 में $44 मिलियन की Series E फंडिंग जुटाई थी। इससे पहले वह कुल मिलाकर $135 मिलियन से अधिक की पूंजी उठा चुकी है 💵।

इसके निवेशकों में Tata Capital, Poonawalla Fincorp, Hinduja Leyland Finance, Wint Wealth, Alteria Capital जैसे बड़े नाम शामिल हैं ⭐।

🔮 आगे की राह

हालांकि FY25 में ग्रोथ धीमी रही और टैक्स के कारण घाटा हुआ, लेकिन Samunnati की मजबूत ऑपरेशनल पकड़कृषि क्षेत्र में गहरी समझ और निवेशकों का भरोसा इसे भविष्य के लिए मजबूत स्थिति में रखता है 🌟।

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Salty

भारत के तेजी से बढ़ते डायरेक्ट-टू-कंज़्यूमर (D2C) सेक्टर में एक और बड़ी फंडिंग डील सामने आई है 💼। किफायती फैशन एक्सेसरीज़ ब्रांड Salty ने अपने नए फंडिंग राउंड में ₹30.1 करोड़ जुटाए हैं 💰। इस राउंड का नेतृत्व MG Investment ने किया है, जबकि Anicut CapitalAll In CapitalJK Group और कई नए एंजेल निवेशकों ने भी इसमें भाग लिया है 🤝।

🛠️ फंड का इस्तेमाल कहां होगा?

कंपनी के अनुसार, इस पूंजी का उपयोग

  • 👥 कोर टीम को मजबूत करने
  • 🛒 ई‑कॉमर्स और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर विस्तार
  • 🚚 पूरे देश में डिलीवरी स्पीड बेहतर करने
    के लिए किया जाएगा।

Salty ने पिछले एक साल में 18,000 से अधिक पिनकोड्स में डिलीवरी की है 📦, जिससे साफ है कि ब्रांड की मांग अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही 🌍।

💎 ज्वेलरी से आगे, नई कैटेगरी में एंट्री

अब तक Salty की पहचान एक ट्रेंडी और किफायती ज्वेलरी ब्रांड के रूप में रही है ✨। लेकिन अब कंपनी

  • ⌚ घड़ियां
  • 🕶️ सनग्लासेस
  • 🧣 स्कार्फ
  • 👝 बेल्ट और बैग चार्म्स
    जैसी कैटेगरी में भी कदम बढ़ा चुकी है।

इसके अलावा, कंपनी जल्द ही “Salty Bags” 👜 लॉन्च करने की तैयारी में है, जिससे उसका प्रोडक्ट पोर्टफोलियो और मजबूत होगा।

🏬 पहला ऑफलाइन फ्लैगशिप स्टोर

डिजिटल‑फर्स्ट ब्रांड होने के बावजूद Salty अब ऑफलाइन रिटेल में भी प्रवेश करने जा रहा है 🏪। कंपनी अपने पहले फ्लैगशिप स्टोर को खोलने की योजना बना रही है, जिससे ग्राहकों को बेहतर और भरोसेमंद शॉपिंग अनुभव मिल सके।

📱 क्रिएटर और सेलेब्रिटी मार्केटिंग पर फोकस

Salty अपनी ब्रांड ग्रोथ के लिए

  • 🎥 क्रिएटर‑लेड कोलैबोरेशन
  • 🌟 सेलेब्रिटी‑बैक्ड प्रोडक्ट लॉन्च
  • 🤝 ब्रांड पार्टनरशिप्स
    पर भी खर्च बढ़ाने की योजना बना रहा है।

👩‍💼👨‍💼 संस्थापक और विज़न

Salty की स्थापना Kanishka GargSonaal Goel और Twisha Gupta ने की थी। संस्थापकों का मानना है कि भारत में युवा ग्राहकों के बीच किफायती लेकिन स्टाइलिश एक्सेसरीज़ की मांग तेजी से बढ़ रही है 🔥।

📈 निवेशकों का भरोसा

निवेशकों की भागीदारी यह दर्शाती है कि उन्हें Salty के बिज़नेस मॉडल और भविष्य की योजनाओं पर पूरा भरोसा है ✅। D2C सेक्टर में Salty जैसे ब्रांड्स तेजी से मजबूत पहचान बना रहे हैं।

🔚 निष्कर्ष

नई फंडिंग के साथ Salty अब

  • मल्टी‑कैटेगरी ब्रांड बनने
  • ऑफलाइन मौजूदगी बढ़ाने
  • और तेज़ डिलीवरी नेटवर्क तैयार करने
    की दिशा में आगे बढ़ रहा है 🚀।

Read more :💰 AssetPlus को ₹175 करोड़ की फंडिंग, 

💰 AssetPlus को ₹175 करोड़ की फंडिंग, 

AssetPlus

भारत के तेजी से बढ़ते वेल्थ‑टेक सेक्टर में एक और बड़ी खबर सामने आई है। चेन्नई स्थित वेल्थ‑टेक स्टार्टअप AssetPlus ने हाल ही में ₹175 करोड़ (लगभग 19.3 मिलियन डॉलर) की फंडिंग जुटाई है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Nexus Venture Partners ने किया, जबकि कंपनी के मौजूदा निवेशक Eight Roads Ventures और Rainmatter Fund ने भी इसमें भाग लिया। 🚀

इस नई पूंजी से AssetPlus अपनी तकनीक को और मजबूत करने, नए प्रोडक्ट लॉन्च करने और निवेशकों के लिए बेहतर डिजिटल अनुभव तैयार करने की योजना बना रहा है।


🏦 AssetPlus क्या करता है?

साल 2016 में विश्रांत सुरेश और अवनीश राज द्वारा स्थापित AssetPlus एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो Mutual Fund Distributors (MFDs) और निवेशकों को एक ही जगह पर जोड़ता है। 📊

यह प्लेटफॉर्म म्यूचुअल फंड निवेश की प्रक्रिया को आसान और टेक्नोलॉजी‑आधारित बनाता है, जिससे निवेशक और डिस्ट्रिब्यूटर दोनों को फायदा मिलता है। AssetPlus का मुख्य लक्ष्य है —
👉 फाइनेंस को आम लोगों के लिए सरल, पारदर्शी और सुलभ बनाना।


🤖 टेक्नोलॉजी और AI पर बड़ा फोकस

AssetPlus खुद को सिर्फ एक निवेश प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रखता। कंपनी AI‑based advisory solutionsONDC integration, और स्मार्ट डिजिटल टूल्स के जरिए निवेश को ज्यादा समझदारी और डेटा‑ड्रिवन बना रही है।

नई फंडिंग का एक बड़ा हिस्सा कंपनी अपने technology stack को मजबूत करने में लगाएगी, ताकि निवेशकों को बेहतर एनालिटिक्स, पर्सनलाइज्ड सलाह और तेज़ सर्विस मिल सके। ⚙️


🛡️ इंश्योरेंस और रिटायरमेंट प्रोडक्ट्स में विस्तार

म्यूचुअल फंड के अलावा AssetPlus ने अब अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को भी काफी हद तक बढ़ा लिया है। कंपनी अब:

  • Term Insurance
  • Health Insurance
  • Fixed Deposits
  • Retirement‑focused investment products

भी ऑफर कर रही है। 🧾

इसके अलावा, आने वाले 6 महीनों में कंपनी:
✔️ Portfolio Management Services (PMS)
✔️ Global Investment Options (GIFT City के जरिए)

लॉन्च करने की तैयारी में है, जिससे भारतीय निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच मिल सके।


👥 मजबूत MFD नेटवर्क और बढ़ता ग्राहक आधार

AssetPlus का दावा है कि वह इस समय भारत भर में 18,000 से ज्यादा Mutual Fund Distributors के साथ काम कर रहा है। इस मजबूत नेटवर्क के जरिए कंपनी:

  • ₹7,250 करोड़ से ज्यादा की Assets Under Management (AUM) संभाल रही है
  • ₹100 करोड़+ का मासिक SIP बुक मैनेज कर रही है
  • 1.5 लाख से ज्यादा ग्राहकों को सेवाएं दे रही है 📈

कंपनी के अनुसार, उसके ज्यादातर ग्राहक retail investors हैं, जिनका निवेश पोर्टफोलियो आमतौर पर ₹5 लाख से ₹2 करोड़ के बीच होता है।


💸 SIP निवेश में भी मजबूत पकड़

SIP (Systematic Investment Plan) AssetPlus की ग्रोथ का एक अहम हिस्सा है। कंपनी के प्लेटफॉर्म पर निवेशक औसतन:
👉 ₹10,000 से ₹12,000 प्रति माह SIP में निवेश करते हैं।

यह दिखाता है कि AssetPlus मिडिल‑क्लास और अपर‑मिडिल‑क्लास निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।


📉 फाइनेंशियल परफॉर्मेंस की स्थिति

वित्त वर्ष FY25 (मार्च 2025 तक) में AssetPlus ने:

  • ₹33.9 करोड़ का रेवेन्यू
  • ₹21 करोड़ का नेट लॉस

रिपोर्ट किया है। हालांकि, वेल्थ‑टेक स्टार्टअप्स के शुरुआती चरण में यह आम बात मानी जाती है, क्योंकि इस दौर में कंपनियां ज्यादा निवेश टेक्नोलॉजी और ग्रोथ पर करती हैं।


🇮🇳 भारतीय वेल्थ‑टेक सेक्टर का हाल

Entrackr के आंकड़ों के अनुसार, 2024 और 2025 के दौरान भारतीय वेल्थ‑टेक स्टार्टअप्स ने:

  • $634 मिलियन+ फंडिंग
  • 51 डील्स
  • 39 स्टार्टअप्स

के जरिए जुटाई है।

हालांकि, बड़े साइज की फंडिंग डील्स सीमित रहीं। $30 मिलियन से ज्यादा की सिर्फ 6 डील्स हुईं, जिनमें Smallcase, Dezerv, Neo और Syfe जैसे नाम शामिल हैं। हाल ही में Wint Wealth ने भी $28 मिलियन की Series‑B फंडिंग जुटाई है।


🔮 आगे का रास्ता

AssetPlus की यह फंडिंग दिखाती है कि निवेशकों को कंपनी के बिज़नेस मॉडल, टेक्नोलॉजी और लॉन्ग‑टर्म विज़न पर भरोसा है। अगर कंपनी अपनी योजनाओं को सही तरीके से लागू करती है, तो आने वाले समय में AssetPlus भारत के टॉप वेल्थ‑टेक प्लेटफॉर्म्स में अपनी जगह और मजबूत कर सकता है। 🌱

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