⚡ Battery Smart को Pre-Series C Funding में $7 मिलियन से ज्यादा निवेश,

Battery Smart

भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेज़ी से बढ़ावा देने वाली Battery Smart ने अपने Pre-Series C funding round की शुरुआत कर दी है। इस राउंड में कंपनी को अब तक $7 मिलियन (लगभग ₹66 करोड़) से ज्यादा का निवेश मिल चुका है।

यह निवेश Acacia Inclusion, Blume Ventures और PC-SBI Kurashi Visionary Fund जैसे प्रमुख निवेशकों ने किया है। यह जानकारी कंपनी की Regulatory Filings से सामने आई है।

दिलचस्प बात यह है कि अभी इस राउंड का कुल आकार (total round size) सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन शुरुआती निवेश से साफ है कि निवेशकों को भारत के EV battery swapping market में बड़ा अवसर दिखाई दे रहा है।


📑 Regulatory Filing में क्या जानकारी सामने आई?

कंपनी की Registrar of Companies (RoC) में दाखिल की गई फाइलिंग के अनुसार, Battery Smart के बोर्ड ने 12,158 Pre-Series C Compulsory Convertible Preference Shares (CCPS) जारी करने के लिए विशेष प्रस्ताव पास किया है।

इन शेयरों की कीमत ₹54,407 प्रति शेयर तय की गई है, जिससे कंपनी ने कुल मिलाकर ₹66 करोड़ (लगभग $7.4 मिलियन) जुटाए हैं।

निवेशकों का योगदान इस प्रकार रहा:

  • Acacia Inclusion: ₹36.3 करोड़
  • PC-SBI Kurashi Visionary Fund: ₹17.8 करोड़
  • Blume Ventures: ₹12 करोड़

हालांकि, जब इस निवेश के बारे में कंपनी से संपर्क किया गया तो Battery Smart ने इस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।


⚡ Battery Smart क्या करती है?

Battery Smart भारत में electric two-wheelers और three-wheelers के लिए battery swapping network चलाती है।

कंपनी का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़ी दो बड़ी समस्याओं को हल करना है:

  • Range anxiety (बैटरी खत्म होने का डर)
  • बैटरी की ऊंची कीमत

Battery Smart ने इसका समाधान Battery-as-a-Service (BaaS) मॉडल के जरिए निकाला है।

इस मॉडल में EV यूजर को बैटरी खरीदने की जरूरत नहीं होती। इसके बजाय वे कंपनी के battery swapping stations पर जाकर कुछ ही मिनटों में अपनी बैटरी बदल सकते हैं।


🚕 खास तौर पर Gig Economy Drivers को फायदा

Battery Smart का यह मॉडल खासतौर पर उन ड्राइवरों के लिए फायदेमंद है जो gig economy में काम करते हैं, जैसे:

  • EV ऑटो ड्राइवर
  • डिलीवरी पार्टनर
  • लास्ट माइल लॉजिस्टिक्स ऑपरेटर

इन ड्राइवरों को महंगी बैटरी खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे उनकी शुरुआती लागत काफी कम हो जाती है

साथ ही, बैटरी स्वैपिंग में सिर्फ कुछ मिनट लगते हैं, जिससे उनका काम बंद नहीं होता और कमाई पर असर नहीं पड़ता।


💰 अब तक $192 मिलियन से ज्यादा की फंडिंग

Battery Smart अब तक निवेशकों से करीब $192 मिलियन की कुल फंडिंग जुटा चुकी है।

इसमें शामिल हैं:

  • $65 मिलियन Series B funding
  • $29 मिलियन extended Series B round

कंपनी के निवेशकों की सूची में कई बड़े नाम शामिल हैं जैसे:

  • Tiger Global
  • Blume Ventures
  • Ecosystem Integrity Fund

इन निवेशकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत का EV ecosystem काफी तेजी से बढ़ेगा और battery swapping इसमें अहम भूमिका निभाएगा।


📊 Battery Smart का Revenue तेजी से बढ़ रहा

फाइनेंशियल प्रदर्शन की बात करें तो Battery Smart ने हाल के वर्षों में तेज़ ग्रोथ दर्ज की है।

कंपनी की operating revenue FY25 में 52% बढ़कर ₹249 करोड़ हो गई, जबकि FY24 में यह ₹164 करोड़ थी।

यह दिखाता है कि भारत में electric mobility adoption तेजी से बढ़ रही है और battery swapping services की मांग भी लगातार बढ़ रही है।


📈 EBITDA Positive भी हुई कंपनी

हाल ही में Battery Smart ने यह भी घोषणा की कि कंपनी ने operating break-even हासिल कर लिया है और अब EBITDA positive बन गई है।

स्टार्टअप दुनिया में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है क्योंकि कई EV स्टार्टअप अभी भी भारी घाटे में काम कर रहे हैं।

EBITDA positive होने का मतलब है कि कंपनी का core business अब मुनाफे की दिशा में बढ़ रहा है


🚀 फंडिंग का इस्तेमाल कहां होगा?

Regulatory filing के अनुसार, इस नए निवेश का इस्तेमाल कंपनी कई अहम क्षेत्रों में करेगी:

  • नए शहरों में business expansion
  • battery swapping infrastructure को बढ़ाना
  • capital expenditure
  • working capital requirements
  • अन्य general corporate purposes

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में EV adoption बढ़ने के साथ battery swapping नेटवर्क का विस्तार बेहद जरूरी होगा।


🇮🇳 भारत में EV बैटरी स्वैपिंग का बढ़ता बाजार

भारत सरकार भी electric vehicles को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है।

खासतौर पर two-wheelers और three-wheelers सेगमेंट में EV adoption तेजी से बढ़ रहा है।

ऐसे में battery swapping मॉडल कई कारणों से लोकप्रिय हो रहा है:

  • कम चार्जिंग समय
  • कम शुरुआती लागत
  • बेहतर वाहन उपयोग

Battery Smart इसी अवसर को पकड़ने की कोशिश कर रही है।


🔎 आगे क्या है Battery Smart की योजना?

EV इंडस्ट्री में तेजी से बढ़ते अवसरों को देखते हुए Battery Smart आने वाले समय में अपने battery swapping stations का नेटवर्क और मजबूत करना चाहती है।

कंपनी का लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा शहरों में अपनी सेवाएं उपलब्ध कराना है ताकि EV ड्राइवरों को तेज़ और सस्ती बैटरी सुविधा मिल सके।

अगर कंपनी इसी गति से विस्तार करती है, तो आने वाले वर्षों में Battery Smart भारत के EV infrastructure ecosystem का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।


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Read more :🏠 10 मिनट में होम सर्विस Pronto ने Series B में जुटाए $25 मिलियन,

🏠 10 मिनट में होम सर्विस Pronto ने Series B में जुटाए $25 मिलियन,

Pronto

ऑन-डिमांड होम सर्विसेज स्टार्टअप Pronto ने अपने Series B राउंड में $25 मिलियन (लगभग ₹228.9 करोड़) की फंडिंग जुटाई है। इस राउंड का नेतृत्व Epiq Capital ने किया, जबकि मौजूदा निवेशक Glade Brook Capital, General Catalyst और Bain Capital Ventures ने भी इसमें भाग लिया।

यह राउंड कंपनी के $11 मिलियन के Series A फंडिंग राउंड के केवल छह महीने बाद आया है, जो दर्शाता है कि निवेशकों का भरोसा इस उभरते सेगमेंट और कंपनी की ग्रोथ क्षमता पर लगातार बढ़ रहा है।


🚀 फंड का उपयोग कहां होगा?

कंपनी के अनुसार, जुटाई गई पूंजी का उपयोग अगले 12 से 18 महीनों में अधिक प्रोफेशनल्स की भर्ती और ट्रेनिंग, मौजूदा शहरों में ऑपरेशंस को मजबूत करने और नई सर्विस कैटेगरी को विस्तार देने में किया जाएगा।

Pronto का फोकस क्वालिटी और स्पीड पर है। कंपनी का लक्ष्य है कि ग्राहक को 10 मिनट के भीतर घरेलू सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। इसके लिए मजबूत ग्राउंड ऑपरेशंस और प्रशिक्षित वेरिफाइड वर्कफोर्स की जरूरत होती है, जिस पर अब यह निवेश किया जाएगा।


👩‍💼 2025 में शुरुआत, 10 मिनट में सर्विस का वादा

Pronto की स्थापना 2025 में अंजलि सरदाना ने की थी। कंपनी शहरी परिवारों को प्रशिक्षित और बैकग्राउंड-वेरिफाइड घरेलू सहायकों से जोड़ती है।

प्लेटफॉर्म के जरिए ग्राहक झाड़ू-पोंछा, बर्तन धोना, किचन और बाथरूम की सफाई, कपड़े धोने में सहायता और अन्य रोजमर्रा के काम बुक कर सकते हैं।

बुकिंग तीन तरह से की जा सकती है—

  • इंस्टेंट (तुरंत सेवा),
  • शेड्यूल्ड (निर्धारित समय पर),
  • या रिकरिंग (नियमित अंतराल पर)।

10 मिनट में सर्विस उपलब्ध कराने का मॉडल भारतीय होम सर्विस मार्केट में एक नया ट्रेंड बना रहा है।


📈 7 महीनों में 18 गुना उछाल

Pronto का दावा है कि पिछले सात महीनों में उसकी डेली बुकिंग्स लगभग 1,000 से बढ़कर 18,000 से अधिक हो गई हैं।

कंपनी 20% से अधिक की वीक-ऑन-वीक ग्रोथ दर्ज कर रही है, जो बेहद आक्रामक विस्तार को दर्शाता है।

वर्तमान में Pronto करीब 3,000 प्रोफेशनल्स के साथ काम कर रही है और उसकी कोर टीम में लगभग 60 कर्मचारी हैं।


🌆 किन शहरों में है मौजूदगी?

Pronto फिलहाल दिल्ली NCR, बेंगलुरु और मुंबई सहित कई प्रमुख शहरों में संचालित हो रही है।

हाल ही में कंपनी ने अपना मुख्यालय बेंगलुरु शिफ्ट किया है, जबकि कस्टमर सपोर्ट ऑपरेशंस गुरुग्राम में ही बनाए रखे हैं।

बेंगलुरु को टेक और स्टार्टअप हब माना जाता है, इसलिए मुख्यालय शिफ्ट करना कंपनी की ग्रोथ रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।


⚔️ प्रतिस्पर्धा भी कड़ी

इंस्टेंट होम सर्विस सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है। Pronto का मुकाबला Snabbit और Urban Company के Insta Help जैसे प्लेटफॉर्म्स से है।

  • Snabbit ने पिछले साल अक्टूबर में Series C राउंड में $30 मिलियन जुटाए थे।
  • Urban Company ने दावा किया है कि उसके Insta Help ने लॉन्च के एक साल के भीतर 50,000 दैनिक बुकिंग्स पार कर ली हैं।
  • वहीं Snabbit ने केवल फरवरी महीने में 8 लाख से अधिक बुकिंग्स दर्ज कीं।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि इंस्टेंट होम सर्विस मार्केट में मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन प्रतिस्पर्धा भी उतनी ही तीव्र है।


🏠 बदलती जीवनशैली और बढ़ती मांग

महानगरों में तेजी से बदलती जीवनशैली, कामकाजी दंपतियों की बढ़ती संख्या और समय की कमी ने ऑन-डिमांड होम सर्विसेज की मांग को बढ़ाया है।

लोग अब पारंपरिक घरेलू सहायकों पर निर्भर रहने के बजाय ऐप-आधारित, वेरिफाइड और ऑन-डिमांड सेवाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं।

Pronto जैसे प्लेटफॉर्म्स इस मांग को टेक्नोलॉजी और ऑपरेशनल एफिशिएंसी के जरिए पूरा कर रहे हैं।


💡 क्या टिक पाएगा 10 मिनट का मॉडल?

10 मिनट में सेवा उपलब्ध कराने का मॉडल सुनने में आकर्षक है, लेकिन इसे लंबे समय तक टिकाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

  • प्रोफेशनल्स की उपलब्धता
  • ट्रैफिक और लॉजिस्टिक्स
  • क्वालिटी कंट्रोल
  • और लागत प्रबंधन

ये सभी ऐसे कारक हैं, जो इस मॉडल की सफलता तय करेंगे।

हालांकि, मजबूत निवेशकों का समर्थन और लगातार बढ़ती बुकिंग्स संकेत देती हैं कि Pronto ने शुरुआती स्तर पर सही दिशा पकड़ी है।


📊 आगे की राह

Series B फंडिंग के बाद Pronto के पास विस्तार और मजबूती के लिए पर्याप्त पूंजी है।

यदि कंपनी अपने 3,000 प्रोफेशनल्स के नेटवर्क को और विस्तारित करती है, ट्रेनिंग और वेरिफिकेशन को मजबूत रखती है और ग्राहक अनुभव पर फोकस बनाए रखती है, तो वह इस सेगमेंट में एक प्रमुख खिलाड़ी बन सकती है।

हालांकि प्रतिस्पर्धा तीव्र है, लेकिन तेजी से बढ़ता बाजार सभी के लिए पर्याप्त अवसर भी प्रदान करता है।


🔎 निष्कर्ष

Pronto की $25 मिलियन की ताजा फंडिंग यह दर्शाती है कि इंस्टेंट होम सर्विस सेगमेंट में निवेशकों का भरोसा मजबूत है।

7 महीनों में 18,000 डेली बुकिंग्स तक पहुंचना और 20% वीक-ऑन-वीक ग्रोथ दर्ज करना कंपनी की मजबूत मांग और ऑपरेशनल स्केल का संकेत है।

अब असली परीक्षा यह होगी कि क्या Pronto अपनी स्पीड, क्वालिटी और लागत के बीच संतुलन बनाए रखते हुए दीर्घकालिक और लाभप्रद मॉडल तैयार कर पाता है या नहीं।

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Read more :🌾 AgroStar ने FY25 में पार किया ₹850 करोड़ का आंकड़ा,

🌾 AgroStar ने FY25 में पार किया ₹850 करोड़ का आंकड़ा,

AgroStar

पुणे स्थित एग्रीटेक कंपनी AgroStar ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में स्थिर और मजबूत प्रदर्शन करते हुए ₹850 करोड़ से अधिक का ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज किया। कंपनी ने न सिर्फ अपनी आय बढ़ाई, बल्कि घाटे में भी 56% की बड़ी कटौती की है।

Registrar of Companies (RoC) में दाखिल समेकित वित्तीय विवरण के अनुसार, AgroStar का ऑपरेटिंग रेवेन्यू FY24 के ₹747 करोड़ से बढ़कर FY25 में ₹853 करोड़ हो गया, जो 14.2% की सालाना वृद्धि दर्शाता है।


🚜 क्या है AgroStar का बिजनेस मॉडल?

AgroStar एक फुल-स्टैक एग्रीटेक प्लेटफॉर्म है, जो किसानों को बीज, क्रॉप प्रोटेक्शन और न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स जैसे कृषि-इनपुट्स उपलब्ध कराता है।

कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सलाह और विशेषज्ञ मार्गदर्शन के जरिए किसानों की एंगेजमेंट बढ़ाती है और रिपीट खरीदारी को प्रोत्साहित करती है।

इसके अलावा, AgroStar अपने ब्रांड Kimaye के जरिए सीमित आउटपुट लिंकज भी सक्षम करता है, जिससे किसानों को अपने उत्पाद के लिए बेहतर बाजार मिल सके।


📊 रेवेन्यू ब्रेकअप: प्रोडक्ट्स का दबदबा

FY25 में कंपनी की कुल ऑपरेटिंग आय का 97% हिस्सा प्रोडक्ट सेल्स से आया।

  • प्रोडक्ट सेल्स से रेवेन्यू 14.5% बढ़कर ₹827 करोड़ हो गया।
  • सर्विसेज से आय ₹13 करोड़ रही।
  • अन्य ऑपरेटिंग आय ने भी ₹13 करोड़ का योगदान दिया।

इस प्रकार FY25 में AgroStar की कुल आय ₹864 करोड़ रही।

यह स्पष्ट करता है कि कंपनी का मुख्य आधार प्रोडक्ट बिजनेस है, जबकि सर्विसेज का योगदान अपेक्षाकृत सीमित है।


💰 खर्च में नियंत्रण, घाटे में बड़ी कटौती

खर्च के मोर्चे पर AgroStar ने उल्लेखनीय सुधार दिखाया है।

  • “कॉस्ट ऑफ मटेरियल” कंपनी का सबसे बड़ा खर्च बना रहा, जो कुल खर्च का 56% है। यह 6% बढ़कर ₹567 करोड़ हो गया।
  • ट्रांसपोर्टेशन खर्च 31% बढ़कर ₹145.5 करोड़ पहुंच गया, जो लॉजिस्टिक्स विस्तार को दर्शाता है।
  • कर्मचारी लाभ खर्च मामूली घटकर ₹108 करोड़ रहा।
  • डिप्रिसिएशन खर्च में 72.3% की भारी गिरावट आई और यह ₹57 करोड़ रहा।
  • फाइनेंस कॉस्ट बढ़कर ₹36 करोड़ हो गई।

कुल मिलाकर, कंपनी ने अपने कुल खर्च को 7.4% घटाकर ₹1,008 करोड़ कर दिया, जो FY24 में ₹1,089 करोड़ था।

राजस्व में बढ़ोतरी और खर्च पर नियंत्रण की संयुक्त रणनीति के चलते AgroStar का घाटा 56% घटकर ₹143.5 करोड़ रह गया, जो पिछले वर्ष ₹327 करोड़ था।


📉 मार्जिन और यूनिट इकॉनॉमिक्स

हालांकि घाटा कम हुआ है, लेकिन कंपनी अभी भी लाभप्रदता से दूर है।

  • ROCE -140.48% रहा।
  • EBITDA मार्जिन -7.15% रहा।

फिर भी यूनिट इकॉनॉमिक्स में सुधार दिखा है। FY25 में कंपनी ने ₹1 कमाने के लिए ₹1.18 खर्च किए, जबकि FY24 में यह आंकड़ा ₹1.46 था।

मार्च 2025 तक AgroStar के पास ₹120 करोड़ का कैश और बैंक बैलेंस था, जबकि करंट एसेट्स ₹437 करोड़ थे, जो कंपनी को परिचालन स्थिरता प्रदान करते हैं।


💵 अब तक $186 मिलियन की फंडिंग

AgroStar अब तक लगभग $186 मिलियन जुटा चुका है। हाल ही में कंपनी ने $30 मिलियन का फंडिंग राउंड उठाया, जिसका नेतृत्व Just Climate ने किया।

इसके प्रमुख निवेशकों में Aavishkaar India, Bertelsmann, Evolvence India, Chiratae Ventures और Hero Enterprises शामिल हैं।

बाजार में AgroStar का मुकाबला Ninjacart, DeHaat और WayCool जैसी कंपनियों से है।


🤔 क्या सर्विस बिजनेस वैल्यू बढ़ा रहा है?

AgroStar के आंकड़े एक महत्वपूर्ण सवाल उठाते हैं — क्या सर्विसेज बिजनेस वास्तव में कंपनी के लिए वैल्यू ऐड कर रहा है?

कुल आय में सर्विसेज का योगदान बेहद कम है, जबकि इस तरह के बिजनेस में सर्विस ऑपरेशंस अक्सर ज्यादा समय और संसाधन लेते हैं।

एग्रीटेक सेक्टर में बड़ा एड्रेसेबल मार्केट जरूर है, जो ग्रोथ का भरोसा देता है, लेकिन मार्जिन हमेशा चुनौती बने रहते हैं।

AgroStar के लिए सबसे बड़ी कुंजी बेहतर मार्जिन अनलॉक करना है। प्रोडक्ट कॉस्ट का हिस्सा 56% पर नियंत्रित रहना एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन लॉजिस्टिक्स और अन्य खर्चों को और बेहतर तरीके से ऑप्टिमाइज करना होगा।


🔎 निष्कर्ष

FY25 AgroStar के लिए स्थिरता और सुधार का वर्ष रहा। ₹853 करोड़ का ऑपरेटिंग रेवेन्यू और 56% घाटा कटौती यह दिखाती है कि कंपनी सही दिशा में आगे बढ़ रही है।

हालांकि अभी लाभप्रदता दूर है, लेकिन यूनिट इकॉनॉमिक्स में सुधार और खर्च नियंत्रण से संकेत मिलता है कि कंपनी ने मजबूत नींव रखी है।

अब AgroStar के सामने असली चुनौती मार्जिन सुधारने और बिजनेस मॉडल को अधिक फोकस्ड बनाने की है। यदि कंपनी प्रोडक्ट-ड्रिवन ग्रोथ को मजबूत रखते हुए ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाती है, तो आने वाले वर्षों में यह एग्रीटेक सेक्टर में अग्रणी भूमिका निभा सकती है।

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🐶 पेटकेयर स्टार्टअप Supertails का FY25 में बड़ा उछाल

Supertails

भारत में तेजी से बढ़ रहे पेटकेयर मार्केट के बीच बेंगलुरु आधारित स्टार्टअप Supertails ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में शानदार ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू 68% की सालाना बढ़त के साथ ₹100 करोड़ के पार पहुंच गया। हालांकि, आक्रामक विस्तार और मार्केटिंग खर्च के चलते कंपनी का घाटा भी 28% बढ़कर ₹52.5 करोड़ हो गया।

Registrar of Companies (RoC) में दाखिल वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, Supertails का ऑपरेशनल रेवेन्यू FY25 में बढ़कर ₹108.3 करोड़ हो गया, जो FY24 में ₹64.6 करोड़ था। यह ग्रोथ दिखाती है कि भारत में पेट पैरेंट्स (Pet Parents) की संख्या और उनकी खर्च करने की क्षमता दोनों तेजी से बढ़ रही हैं।


🐾 क्या करती है Supertails?

साल 2021 में वरुण सदाना, अमन टेकरीवाल और विनीत खन्ना द्वारा स्थापित Supertails खुद को एक “फुल-स्टैक डिजिटल पेटकेयर प्लेटफॉर्म” के रूप में पेश करती है। कंपनी का फोकस पेट पैरेंट्स की बदलती जरूरतों को पूरा करने पर है।

Supertails ऐप पर 30,000 से ज्यादा पेटकेयर प्रोडक्ट्स उपलब्ध हैं, जिनमें पेट फूड, ट्रीट्स, एक्सेसरीज, हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स और अन्य जरूरी सामान शामिल हैं। इन प्रोडक्ट्स की बिक्री से कंपनी को FY25 में ₹102.5 करोड़ की आय हुई, जो उसके कुल ऑपरेशनल रेवेन्यू का लगभग 95% है।

इसके अलावा कंपनी वेटरनरी सर्विसेज भी देती है—जैसे ऑनलाइन और ऑफलाइन कंसल्टेशन, वैक्सीनेशन, ग्रूमिंग और प्रिवेंटिव केयर। हालांकि, इन सेवाओं से कंपनी को सिर्फ ₹2.65 करोड़ की कमाई हुई, जो कुल आय के मुकाबले काफी कम है।

फ्रेंचाइजी फीस और विज्ञापन (Ad Monetisation) से भी कुछ आय हुई, जबकि निवेश पर लाभ और ब्याज आय जैसे नॉन-ऑपरेशनल स्रोतों से कंपनी ने ₹5 करोड़ कमाए। इस तरह FY25 में कंपनी की कुल आय ₹113.3 करोड़ रही।


📊 खर्च में भी तेज बढ़ोतरी

जहां रेवेन्यू में 68% की ग्रोथ हुई, वहीं खर्च भी तेजी से बढ़े। FY25 में कंपनी का कुल खर्च 53% बढ़कर ₹165.8 करोड़ हो गया, जो FY24 में ₹108.4 करोड़ था।

सबसे बड़ा खर्च “कॉस्ट ऑफ मटेरियल” रहा, जो कुल खर्च का लगभग 50% है। यह खर्च 45% बढ़कर ₹83.3 करोड़ हो गया। यह दर्शाता है कि कंपनी अपने प्रोडक्ट बिजनेस पर भारी निर्भर है।

एम्प्लॉयी बेनिफिट्स खर्च 15% बढ़कर ₹25.3 करोड़ पहुंच गया। मार्केटिंग और विज्ञापन पर कंपनी ने ₹22.9 करोड़ खर्च किए, जो पिछले साल की तुलना में 37% ज्यादा है। यह दिखाता है कि Supertails ब्रांड बिल्डिंग और कस्टमर एक्विजिशन पर आक्रामक तरीके से निवेश कर रही है।

इसके अलावा शिपिंग चार्जेज, वेयरहाउसिंग, लीगल और प्रोफेशनल फीस, और सॉफ्टवेयर खर्च मिलाकर ₹34.3 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ा।


📉 घाटा बढ़ा, लेकिन यूनिट इकॉनॉमिक्स में सुधार

हालांकि कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू खर्च से तेज गति से बढ़ा, फिर भी कुल घाटा 28% बढ़कर ₹52.5 करोड़ हो गया, जो FY24 में ₹41 करोड़ था।

कंपनी का ROCE -52.58% और EBITDA मार्जिन -48.9% रहा, जो दर्शाता है कि अभी कंपनी प्रॉफिटेबिलिटी से काफी दूर है।

हालांकि एक सकारात्मक संकेत यह है कि FY25 में कंपनी ने हर ₹1 कमाने के लिए ₹1.53 खर्च किए, जो FY24 की तुलना में थोड़ा बेहतर है। यानी यूनिट इकॉनॉमिक्स में मामूली सुधार दिख रहा है।

मार्च 2025 तक कंपनी के पास ₹39 करोड़ का कैश और बैंक बैलेंस था, जबकि कुल करंट एसेट्स ₹100 करोड़ के करीब थे। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी के पास निकट भविष्य में ऑपरेशंस चलाने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं।


💰 अब तक $51 मिलियन की फंडिंग

Supertails अब तक करीब $51 मिलियन की फंडिंग जुटा चुकी है। हाल ही में कंपनी ने $30 मिलियन का फंडिंग राउंड उठाया, जिसका नेतृत्व Venturi Partners ने किया। इस राउंड में Nippon India, Titan Capital, Fireside Ventures और RPSG Capital Ventures सहित अन्य निवेशकों ने भाग लिया।


🧐 क्या प्रोडक्ट बिजनेस ही असली ताकत?

कंपनी के आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि उसका प्रोडक्ट बिजनेस सबसे मजबूत है। कुल आय का 95% प्रोडक्ट सेल से आता है, जबकि सर्विसेज से बेहद सीमित योगदान है।

पेटकेयर सेक्टर की प्रकृति को देखते हुए, जहां पालतू जानवरों के लिए अक्सर फिजिकल वेट विजिट को प्राथमिकता दी जाती है, डिजिटल या फोन कंसल्टेशन का स्केल सीमित हो सकता है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या कंपनी को अपने संसाधन मुख्य रूप से प्रोडक्ट बिजनेस पर केंद्रित करने चाहिए?

Supertails का सोर्सिंग कॉस्ट 50% से कम रहना इस बात का संकेत है कि प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में बेहतर मार्जिन की संभावना है, खासकर अगर कंपनी क्यूरेटेड और हाई-मार्जिन प्रोडक्ट्स पर ध्यान दे।


🏪 क्या आएगा कोई “डिस्काउंट डिसरप्टर”?

पिछले तीन सालों में पेटकेयर सेक्टर में कई स्टार्टअप्स और निवेश देखने को मिले हैं। लेकिन अब तक इस स्पेस में कोई बड़ा “नो-फ्रिल्स डिस्काउंट प्लेयर” सामने नहीं आया है, जबकि मौजूदा प्लेटफॉर्म्स पर भारी डिस्काउंटिंग देखने को नहीं मिलती।

अगर कोई कंपनी कम मार्जिन और हाई वॉल्यूम मॉडल अपनाती है, तो यह सेक्टर में बड़ा बदलाव ला सकती है। फिलहाल Supertails अपने मजबूत यूजर बेस और रिपीट कस्टमर्स के दम पर निवेशकों के लिए लंबी दौड़ का खिलाड़ी साबित हो सकता है—बशर्ते वह अपने बिजनेस मॉडल को और ज्यादा फोकस्ड और प्रॉफिटेबल बनाए।

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Read more :📊 साप्ताहिक स्टार्टअप Funding report 43 स्टार्टअप्स ने जुटाए $222.87 मिलियन,

📊 साप्ताहिक स्टार्टअप Funding report 43 स्टार्टअप्स ने जुटाए $222.87 मिलियन,

Funding report

इस हफ्ते भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम Funding report में कुल 43 स्टार्टअप्स ने लगभग $222.87 मिलियन की फंडिंग जुटाई। इनमें 3 ग्रोथ-स्टेज और 36 अर्ली-स्टेज डील्स शामिल रहीं, जबकि 4 स्टार्टअप्स ने अपनी फंडिंग राशि का खुलासा नहीं किया।

पिछले हफ्ते 29 स्टार्टअप्स ने सामूहिक रूप से लगभग $1.3 बिलियन जुटाए थे। यानी वीक-ऑन-वीक आधार पर फंडिंग में 83% की भारी गिरावट दर्ज की गई।


🚀 ग्रोथ-स्टेज डील्स: $45.2 मिलियन

इस सप्ताह ग्रोथ-स्टेज स्टार्टअप्स ने कुल $45.2 मिलियन जुटाए।

  • डिफेंस टेक स्टार्टअप Constelli ने $20 मिलियन की Series A फंडिंग जुटाई, जिसका नेतृत्व General Catalyst ने किया।
  • क्रिएटर-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Wishlink ने $17.5 मिलियन की Series B फंडिंग हासिल की, जिसमें Vertex Ventures शामिल रहा।
  • D2C होम और किचन ब्रांड Home Essentials ने 360 ONE Asset के नेतृत्व में 70 करोड़ रुपये जुटाए।

🌱 अर्ली-स्टेज डील्स का दबदबा

इस सप्ताह फंडिंग गतिविधि में अर्ली-स्टेज डील्स का दबदबा रहा, जहां 36 स्टार्टअप्स ने कुल $177.68 मिलियन जुटाए।

  • वेयरेबल स्टार्टअप Temple, जिसे Deepinder Goyal ने स्थापित किया, ने $54 मिलियन की शुरुआती फंडिंग जुटाई।
  • B2B क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स स्टार्टअप Xflow ने $16.6 मिलियन जुटाए।
  • MSME लेंडिंग प्लेटफॉर्म Prayaan Capital ने $12 मिलियन हासिल किए।
  • AI आधारित प्लेटफॉर्म MeltPlan ने $10 मिलियन जुटाए।

डेब्ट फंडिंग में SIDBI ने GalaxEye को 5 करोड़ और Agrizy को 10 करोड़ रुपये दिए।

इसके अलावा Gushwork, Spintly, ZeroHarm Sciences और FREED ने भी पूंजी जुटाई।


🏙️ शहर और सेगमेंट ट्रेंड

शहरवार देखें तो बेंगलुरु 21 डील्स के साथ शीर्ष पर रहा, जबकि दिल्ली-NCR में 11 डील्स दर्ज की गईं।

सेगमेंट के आधार पर AI और डीप-टेक में 7-7 डील्स हुईं। हेल्थटेक और ई-कॉमर्स में क्रमशः 6 और 5 डील्स दर्ज की गईं।

सीरीज के आधार पर Seed राउंड सबसे आगे रहा (19 डील्स), इसके बाद Series A (10 डील्स) और Pre-Seed (5 डील्स) रहे।


📉 वीक-ऑन-वीक गिरावट

इस सप्ताह की कुल फंडिंग $222.87 मिलियन रही, जो पिछले सप्ताह के $1.3 बिलियन के मुकाबले 83% कम है।

पिछले आठ हफ्तों का औसत देखें तो हर सप्ताह लगभग $354 मिलियन और 32 डील्स दर्ज की गई हैं।


👔 प्रमुख नियुक्तियां और इस्तीफे

  • Aakash Educational Services ने अलका गर्ग को CFO नियुक्त किया।
  • PRISM (OYO की पैरेंट कंपनी) ने अजय त्यागी को स्वतंत्र निदेशक बनाया।
  • Pine Labs ने शालिनी पिल्लई को CMO नियुक्त किया।
  • Unacademy ने 50 करोड़ रुपये का ESOP बायबैक शुरू किया।

वहीं, Bewakoof के सह-संस्थापक प्रभकिरण सिंह और Livspace के CBO ललित मित्तल ने इस्तीफा दिया।


💼 फंड लॉन्च

  • Sauce VC ने 750 करोड़ रुपये का Opportunities Fund क्लोज किया।
  • Info Edge ने 250 करोड़ रुपये का B8 Fund-I लॉन्च किया।

🤝 M&A गतिविधियां

  • LAT Aerospace ने Sharang Shakti का अधिग्रहण किया।
  • BillDesk ने Worldline SA के भारतीय ऑपरेशन को $70.8 मिलियन में खरीदने का समझौता किया।
  • upGrad ने Internshala का लगभग 100 करोड़ रुपये में अधिग्रहण किया।

🔔 न्यूज़ फ्लैश

  • Coronation Fund ने Ixigo में हिस्सेदारी 5% से अधिक की।
  • Urban Company की InstaHelp ने 50,000 डेली बुकिंग्स पार कीं।
  • BRND.ME ने सिंगापुर से भारत में डोमिसाइल शिफ्ट किया।

🧾 निष्कर्ष

इस सप्ताह फंडिंग में भारी गिरावट जरूर देखने को मिली, लेकिन डील्स की संख्या और विविधता यह दिखाती है कि भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम सक्रिय बना हुआ है।

AI, डीप-टेक और फिनटेक जैसे सेक्टर्स में निरंतर निवेश संकेत देता है कि निवेशकों का फोकस लॉन्ग-टर्म टेक्नोलॉजी इनोवेशन पर बना हुआ है।

हालांकि वीक-ऑन-वीक गिरावट ने बाजार को थोड़ा सतर्क किया है, लेकिन आने वाले हफ्तों में बड़े राउंड्स की वापसी से तस्वीर बदल सकती है।

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🎓 Unacademy का 50 करोड़ रुपये का ESOP बायबैक,

Unacademy

एडटेक कंपनी Unacademy ने अपने कर्मचारियों के लिए 50 करोड़ रुपये का ESOP (Employee Stock Ownership Plan) बायबैक प्रोग्राम शुरू किया है। कंपनी के सह-संस्थापक Gaurav Munjal ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी घोषणा की।

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब एडटेक सेक्टर पोस्ट-पैंडेमिक दौर में चुनौतियों का सामना कर रहा है और कई स्टार्टअप्स अपने बिजनेस मॉडल को पुनर्गठित (strategic reset) कर रहे हैं।


💰 कर्मचारियों को कितना फायदा?

गौरव मुंजाल के अनुसार, इस बायबैक प्रोग्राम के जरिए:

  • 8 कर्मचारियों को 1 करोड़ रुपये से अधिक मिलेंगे।
  • 17 कर्मचारियों को 50 लाख रुपये से ज्यादा प्राप्त होंगे।
  • 38 कर्मचारियों को 10 लाख रुपये से अधिक की राशि मिलने की संभावना है।

यह कार्यक्रम कर्मचारियों को उनके वेस्टेड ESOPs के बदले नकद (cash liquidity) प्रदान करेगा।

मुंजाल ने कहा कि कंपनी के बोर्ड ने कर्मचारियों के लिए एक कैश पूल तैयार किया है, भले ही वर्तमान वैल्यूएशन कंपनी के पिछले फंडरेज़ की तुलना में काफी कम है।


📉 कम वैल्यूएशन के बावजूद बायबैक

Unacademy का मौजूदा वैल्यूएशन उसके पिछले फंडिंग राउंड्स से कम बताया जा रहा है।

फिर भी कंपनी ने कर्मचारियों को लिक्विडिटी देने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है।

स्टार्टअप इकोसिस्टम में ESOP बायबैक एक महत्वपूर्ण टूल माना जाता है, क्योंकि यह कर्मचारियों को उनके योगदान का वास्तविक आर्थिक लाभ देता है, खासकर तब जब IPO या बड़े अधिग्रहण की संभावना निकट न हो।


🕒 पूर्व कर्मचारियों के लिए 30 दिन की विंडो

हाल ही में गौरव मुंजाल ने ESOP एक्सरसाइज टर्म्स और वैल्यूएशन पर कंपनी का रुख स्पष्ट किया था।

Unacademy ने पूर्व कर्मचारियों के लिए एक बार का 30 दिन का विंडो पीरियड दिया, जिसमें वे अपने वेस्टेड स्टॉक ऑप्शंस एक्सरसाइज कर सकते हैं।

हालांकि, कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि:

  • मौजूदा वैल्यूएशन पिछले फंडिंग राउंड्स से कम है।
  • प्रेफरेंस शेयरहोल्डर्स को इक्विटी होल्डर्स पर प्राथमिकता प्राप्त है।

इसका मतलब यह है कि किसी लिक्विडेशन इवेंट या एग्जिट की स्थिति में पहले प्रेफरेंस निवेशकों को भुगतान किया जाएगा।


🔄 एडटेक सेक्टर में रणनीतिक बदलाव

कोविड-19 महामारी के दौरान एडटेक कंपनियों में तेज़ी से वृद्धि देखी गई थी। ऑनलाइन लर्निंग की मांग में भारी उछाल आया, जिससे Unacademy जैसी कंपनियों ने बड़े पैमाने पर फंडिंग जुटाई और विस्तार किया।

लेकिन महामारी के बाद स्थिति बदल गई। ऑफलाइन शिक्षा की वापसी, बढ़ती लागत और घटती मांग ने कई एडटेक कंपनियों को अपने मॉडल की समीक्षा करने पर मजबूर किया।

Unacademy भी इस दौर से गुजर रही है और कंपनी ने हाल ही में अपने बिजनेस मॉडल में बदलाव की घोषणा की है।


🏫 ऑफलाइन सेंटर्स से फ्रेंचाइजी मॉडल की ओर

कंपनी ने अपने स्वयं संचालित (company-run) ऑफलाइन लर्निंग सेंटर्स को फ्रेंचाइजी-आधारित मॉडल में बदलने की योजना बनाई है।

इसका उद्देश्य है:

  • लागत में कमी लाना
  • यूनिट इकॉनॉमिक्स में सुधार
  • ऑपरेशनल दक्षता बढ़ाना

फ्रेंचाइजी मॉडल के जरिए कंपनी पूंजीगत खर्च (capex) कम कर सकती है और जोखिम को साझेदारों के साथ साझा कर सकती है।


🤝 अधिग्रहण वार्ता और विफल सौदा

Unacademy ने हाल के महीनों में कंसोलिडेशन (consolidation) के अवसर भी तलाशे हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी की upGrad के साथ संभावित अधिग्रहण को लेकर बातचीत चल रही थी।

हालांकि, दोनों पक्ष वैल्यूएशन पर सहमत नहीं हो सके और यह वार्ता अंततः समाप्त हो गई।

यह घटनाक्रम दर्शाता है कि मौजूदा बाजार परिस्थितियों में एडटेक कंपनियों के लिए सही वैल्यूएशन पर सौदा करना चुनौतीपूर्ण है।


📊 ESOP बायबैक का व्यापक महत्व

ESOP बायबैक केवल वित्तीय लेनदेन नहीं है, बल्कि यह कर्मचारियों के मनोबल और भरोसे को मजबूत करने का एक तरीका भी है।

स्टार्टअप्स में कर्मचारी अक्सर कम वेतन के बदले ESOPs स्वीकार करते हैं, इस उम्मीद में कि भविष्य में कंपनी की वैल्यू बढ़ने पर उन्हें बड़ा लाभ मिलेगा।

ऐसे में बायबैक प्रोग्राम कर्मचारियों को उनके योगदान का प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ देता है और संगठन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को बढ़ाता है।


🔮 आगे की राह

Unacademy का 50 करोड़ रुपये का ESOP बायबैक प्रोग्राम ऐसे समय में आया है जब कंपनी रणनीतिक पुनर्गठन के दौर से गुजर रही है।

कम वैल्यूएशन और बाजार की चुनौतियों के बावजूद, कर्मचारियों को लिक्विडिटी देना एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।

हालांकि, कंपनी के सामने अभी भी कई चुनौतियां हैं—जैसे लाभप्रदता में सुधार, बाजार हिस्सेदारी बनाए रखना और प्रतिस्पर्धा से निपटना।

आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या Unacademy अपने नए फ्रेंचाइजी मॉडल और लागत नियंत्रण रणनीति के जरिए स्थिरता और विकास की नई राह बना पाती है या नहीं।

फिलहाल, ESOP बायबैक ने कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय अवसर जरूर प्रदान किया है। 🎓💼

Read more:🚗 FY25 में Cars24 India की रफ्तार धीमी,

🚗 FY25 में Cars24 India की रफ्तार धीमी,

Cars24

यूज्ड कार मार्केटप्लेस Cars24 India के लिए वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) चुनौतीपूर्ण रहा। FY24 में 25% साल-दर-साल वृद्धि दर्ज करने के बाद कंपनी की ऑपरेटिंग स्केल FY25 में 10% घट गई। इसी दौरान कंपनी का शुद्ध घाटा भी 9% बढ़कर ₹543 करोड़ तक पहुंच गया।

Registrar of Companies (RoC) में दाखिल समेकित वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, FY25 में कंपनी का ग्रॉस रेवेन्यू ₹6,910 करोड़ से घटकर ₹6,233 करोड़ रह गया।


📉 कार बिक्री से आय में गिरावट

Cars24 की कुल आय का लगभग 92% हिस्सा कारों की बिक्री—ऑक्शन बिजनेस और रिटेल—से आता है।

FY25 में यह आय 11% घटकर ₹5,733 करोड़ रह गई, जो FY24 में ₹6,432 करोड़ थी।

यह गिरावट बताती है कि सेकेंड-हैंड कार बाजार में मांग और सप्लाई के बीच संतुलन, कीमतों में उतार-चढ़ाव और उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव का असर कंपनी के प्रदर्शन पर पड़ा।


💳 Loans24 से ब्याज आय

कंपनी की फाइनेंशियल सर्विसेज वर्टिकल Loans24 के जरिए भी आय होती है। यह यूनिट थर्ड-पार्टी लोन की सुविधा देती है।

FY25 में ब्याज से होने वाली आय लगभग ₹215 करोड़ रही।

इसके अलावा, कंपनी सर्विस फीस, पार्किंग फीस, इंश्योरेंस असिस्टेंस और वारंटी जैसी सेवाओं से भी आय अर्जित करती है।


💰 नॉन-ऑपरेटिंग आय का सहारा

गुरुग्राम स्थित इस कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष में ₹125 करोड़ की नॉन-ऑपरेटिंग आय भी दर्ज की।

यह आय बैंक डिपॉजिट्स, कमर्शियल पेपर्स, डिबेंचर्स और अन्य स्रोतों से ब्याज के रूप में आई।

इसे जोड़ने पर FY25 में Cars24 India की कुल आय ₹6,358 करोड़ तक पहुंच गई।


🌏 सिंगापुर होल्डिंग और ग्लोबल उपस्थिति

Cars24 की होल्डिंग कंपनी सिंगापुर में पंजीकृत है और भारत, ऑस्ट्रेलिया, यूएई और थाईलैंड में 12 सहायक कंपनियों को नियंत्रित करती है।

ध्यान देने योग्य है कि सिंगापुर स्थित होल्डिंग इकाई के वित्तीय आंकड़े भारतीय इकाई द्वारा RoC में दाखिल आंकड़ों से अलग हो सकते हैं।


📊 खर्चों का विश्लेषण

Cars24 के लिए कारों की खरीद (procurement) सबसे बड़ा खर्च केंद्र बना रहा।

  • यह कुल खर्च का 81% था।
  • FY25 में यह खर्च 9% घटकर ₹5,555 करोड़ रहा, जो FY24 में अधिक था।

हालांकि, कुछ अन्य खर्चों में बढ़ोतरी हुई:

  • कर्मचारी लाभ खर्च 15% बढ़कर ₹604 करोड़ हो गया।
  • इसमें ₹36.5 करोड़ ESOP (Employee Stock Ownership Plan) लागत शामिल थी।
  • मार्केटिंग और विज्ञापन खर्च 25% घटकर ₹106 करोड़ रह गया।

टेक्नोलॉजी, लीगल फीस, ब्रोकर कमीशन, वित्तीय परिसंपत्तियों पर इम्पेयरमेंट लॉस और अन्य ओवरहेड्स मिलाकर कंपनी का कुल खर्च ₹6,898 करोड़ रहा, जो FY24 के ₹7,488 करोड़ से कम है।


📉 घाटा और मार्जिन पर दबाव

ऑपरेशन में 10% की गिरावट का सीधा असर कंपनी के घाटे पर पड़ा।

FY25 में शुद्ध घाटा 9% बढ़कर ₹543 करोड़ हो गया, जो FY24 में ₹498 करोड़ था।

  • ROCE (Return on Capital Employed) -21.13% रहा।
  • EBITDA मार्जिन -6.77% तक बिगड़ गया।

यूनिट इकॉनॉमिक्स के स्तर पर कंपनी ने FY25 में ₹1 कमाने के लिए ₹1.11 खर्च किए—यानि प्रति रुपये पर 11 पैसे का घाटा।


🏦 बैलेंस शीट की स्थिति

मार्च 2025 तक कंपनी के पास ₹1,988 करोड़ के करंट एसेट्स थे।

  • इसमें ₹155 करोड़ कैश और बैंक बैलेंस शामिल थे।

यह दर्शाता है कि कंपनी के पास परिचालन जारी रखने के लिए पर्याप्त तरलता है, लेकिन लाभप्रदता की दिशा में सुधार जरूरी है।


🚀 FY26 में सुधार के संकेत?

SoftBank समर्थित इस कंपनी ने दावा किया है कि FY26 की पहली छमाही में उसका एडजस्टेड नेट रेवेन्यू 18% बढ़कर ₹651 करोड़ हो गया।

साथ ही एडजस्टेड EBITDA घाटा 36% घटकर ₹162 करोड़ रह गया।

यह संकेत देता है कि कंपनी लागत नियंत्रण और ऑपरेशनल दक्षता पर काम कर रही है।


🔄 हालिया अधिग्रहण

Cars24 ने हाल ही में वाहन सूचना और मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म CarInfo का अधिग्रहण किया।

इससे पहले कंपनी ऑटोमोटिव कम्युनिटी प्लेटफॉर्म Team-BHP का भी अधिग्रहण कर चुकी है।

इन अधिग्रहणों के जरिए कंपनी अपने इकोसिस्टम को मजबूत करने और यूजर एंगेजमेंट बढ़ाने की कोशिश कर रही है।


💵 फंडिंग और निवेशक

Cars24 ने पिछले तीन वर्षों में कोई बाहरी फंडिंग नहीं जुटाई है।

दिसंबर 2021 में कंपनी ने $450 मिलियन जुटाए थे, उस समय उसका वैल्यूएशन $3.3 बिलियन था।

इसके प्रमुख निवेशकों में SoftBank, Alpha Wave, Tencent और DST Global शामिल हैं।


🔍 आगे की राह

यूज्ड कार बाजार में प्रतिस्पर्धा तेज है और उपभोक्ता अब बेहतर कीमत, पारदर्शिता और आसान फाइनेंस विकल्प चाहते हैं।

Cars24 के लिए FY25 चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन FY26 की शुरुआती झलक कुछ सुधार के संकेत देती है।

कंपनी को लाभप्रदता हासिल करने के लिए लागत प्रबंधन, टेक्नोलॉजी इनोवेशन और फाइनेंशियल सर्विसेज विस्तार पर फोकस करना होगा।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या Cars24 अपनी ग्रोथ की रफ्तार फिर से पकड़ पाता है और घाटे को कम कर पाता है या नहीं। 🚗📊

Read more :🏢 Table Space की IPO की तैयारी,

🏢 Table Space की IPO की तैयारी,

Table Space

भारत के तेजी से बढ़ते फ्लेक्सी-वर्कस्पेस बाजार में एक और बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है। मैनेज्ड वर्कस्पेस स्टार्टअप Table Space ने प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लाने की तैयारी शुरू कर दी है।

सूत्रों और नियामकीय फाइलिंग्स के अनुसार, कंपनी का IPO लगभग 1,000 करोड़ रुपये तक के फ्रेश इश्यू (Fresh Issue) और साथ में ऑफर फॉर सेल (OFS) घटक का मिश्रण हो सकता है।


💰 प्री-IPO में 200 करोड़ रुपये जुटाए

पब्लिक इश्यू से पहले कंपनी ने 200 करोड़ रुपये का प्री-IPO फंडरेज़ निजी प्लेसमेंट (Private Placement) के जरिए सफलतापूर्वक पूरा किया है।

यह प्रस्ताव पिछले महीने आयोजित एक असाधारण आम बैठक (EGM) में मंजूर किया गया था।

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) में दाखिल दस्तावेजों के अनुसार, यह प्री-IPO राउंड प्रस्तावित फ्रेश इश्यू साइज का लगभग 20% है। इससे संकेत मिलता है कि IPO में फ्रेश इश्यू का आकार करीब 1,000 करोड़ रुपये हो सकता है।


🚀 2017 में हुई थी शुरुआत

Table Space की स्थापना 2017 में Amit Banerji ने की थी।

कंपनी कॉरपोरेट क्लाइंट्स के लिए कस्टमाइज्ड को-वर्किंग और मैनेज्ड ऑफिस स्पेस उपलब्ध कराती है।

स्टार्टअप का दावा है कि उसके पास 1 करोड़ वर्ग फुट (10 मिलियन स्क्वायर फीट) से अधिक क्षमता है और वह 7 शहरों—जिनमें बेंगलुरु प्रमुख है—में 290 से अधिक यूनिक क्लाइंट्स को सेवा दे रहा है।


📈 वित्तीय प्रदर्शन में जोरदार उछाल

वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में Table Space ने राजस्व के मामले में बड़ी छलांग लगाई।

  • कंपनी का रेवेन्यू 50% की साल-दर-साल वृद्धि के साथ ₹906 करोड़ से बढ़कर ₹1,360 करोड़ हो गया।
  • इस दौरान कंपनी ने ₹1,000 करोड़ के राजस्व का आंकड़ा पार कर लिया।

यदि एक्सेप्शनल आइटम (असाधारण मद) को अलग कर दिया जाए, तो कंपनी का शुद्ध लाभ लगभग तीन गुना बढ़कर ₹14.6 करोड़ तक पहुंच गया।

यह प्रदर्शन दर्शाता है कि फ्लेक्सी-वर्कस्पेस की बढ़ती मांग का कंपनी को अच्छा लाभ मिल रहा है।


⚠️ एक्सेप्शनल आइटम का क्या मतलब?

हालांकि, कंपनी की वित्तीय रिपोर्ट में ₹1,568 करोड़ का एक “एक्सेप्शनल आइटम” भी दर्ज है।

यह राशि उसके CCPS-A इंस्ट्रूमेंट्स (Compulsorily Convertible Preference Shares) की फेयर वैल्यूएशन में हुए नॉन-कैश लॉस से संबंधित है।

इन प्रेफरेंस शेयरों की संरचना ऐसी है कि ये केवल लिक्विडेशन इवेंट—जैसे IPO—से ठीक पहले या निवेशकों की सहमति से पहले इक्विटी में परिवर्तित होते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक अकाउंटिंग एडजस्टमेंट है और कंपनी के परिचालन प्रदर्शन को सीधे प्रभावित नहीं करता।


🏙️ तेजी से बदलता फ्लेक्सी-वर्कस्पेस बाजार

भारत में हाइब्रिड वर्क मॉडल और स्टार्टअप संस्कृति के बढ़ने से फ्लेक्सी-वर्कस्पेस की मांग तेजी से बढ़ी है।

कंपनियां लंबी अवधि के लीज़ एग्रीमेंट के बजाय फ्लेक्सिबल और कस्टमाइज्ड ऑफिस सॉल्यूशंस को प्राथमिकता दे रही हैं।

इस बाजार में पहले से कई लिस्टेड कंपनियां मौजूद हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • WeWork India Management
  • Smartworks Coworking Spaces
  • IndiQube Spaces
  • Awfis Space Solutions

इनमें से WeWork India को राजस्व और स्केल के आधार पर सेक्टर का प्रमुख खिलाड़ी माना जाता है और हाल के IPO ट्रेंड में इसकी अहम भूमिका रही है।


📊 निवेशकों के लिए क्या मायने?

Table Space का IPO ऐसे समय आ रहा है जब भारतीय शेयर बाजार में रियल एस्टेट और ऑफिस स्पेस से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है।

कंपनी का मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ और लाभ में सुधार संभावित निवेशकों को आकर्षित कर सकता है।

हालांकि, प्रतिस्पर्धा और बाजार की अनिश्चितता को देखते हुए निवेशकों को कंपनी के मार्जिन, कैश फ्लो और विस्तार रणनीति का बारीकी से विश्लेषण करना होगा।


🔮 आगे की राह

Table Space का IPO न केवल कंपनी के लिए पूंजी जुटाने का अवसर होगा, बल्कि यह उसके ब्रांड वैल्यू और बाजार स्थिति को भी मजबूत करेगा।

फ्रेश इश्यू से जुटाई गई राशि का उपयोग संभवतः नए शहरों में विस्तार, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और कर्ज चुकाने जैसे उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।

फ्लेक्सी-वर्कस्पेस सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है, लेकिन बाजार का आकार भी तेजी से विस्तार कर रहा है।

यदि कंपनी अपनी 50% वार्षिक वृद्धि दर को बरकरार रख पाती है और लाभप्रदता में सुधार जारी रखती है, तो यह IPO भारतीय बाजार में एक महत्वपूर्ण इवेंट साबित हो सकता है।

आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि Table Space का पब्लिक इश्यू निवेशकों के बीच कितनी मांग पैदा करता है और क्या यह फ्लेक्स-वर्कस्पेस सेक्टर में एक नई दिशा तय कर पाता है। 🚀

Read more :💼 Info Edge ने लॉन्च किया 250 करोड़ रुपये

💼 Info Edge ने लॉन्च किया 250 करोड़ रुपये

Info Edge

भारत की प्रमुख इंटरनेट कंपनी Info Edge ने स्टार्टअप निवेश के क्षेत्र में एक और बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने 250 करोड़ रुपये की पूंजी प्रतिबद्धता (capital commitment) के साथ एक नया ग्रोथ-स्टेज इन्वेस्टमेंट फंड लॉन्च किया है। यह कंपनी का पहला समर्पित (dedicated) फंड होगा, जो खास तौर पर लेटर-स्टेज यानी ग्रोथ-फेज कंपनियों में निवेश करेगा।

इस नए निवेश वाहन का नाम B8 Fund-I रखा गया है। कंपनी ने संकेत दिया है कि यह फंड बाहरी निवेशकों (external sponsors) से भी पूंजी जुटा सकता है, जिससे इसका कुल कॉर्पस शुरुआती 250 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।


📊 अब तक चार अर्ली-स्टेज प्लेटफॉर्म

Info Edge पहले से ही चार अर्ली-स्टेज निवेश प्लेटफॉर्म संचालित कर रही है। इनमें प्रमुख हैं:

  • Info Edge Ventures – जिसने तीन फंड्स के जरिए कुल 2,300 करोड़ रुपये जुटाए हैं।
  • Capital 2B – जिसका कॉर्पस 280 करोड़ रुपये है।
  • Redstart Labs – जो AI-आधारित स्टार्टअप्स पर केंद्रित है।
  • बैलेंस शीट के जरिए डायरेक्ट निवेश।

इन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से कंपनी ने शुरुआती चरण में कई सफल स्टार्टअप्स का समर्थन किया है।


🚀 किन स्टार्टअप्स में किया निवेश?

Info Edge ने अपने वेंचर प्लेटफॉर्म्स के जरिए कई उभरती कंपनियों में निवेश किया है, जिनमें शामिल हैं:

  • Gnani AI
  • Ixigo
  • Shiprocket
  • Zingbus
  • Truemeds

इसके अलावा, कंपनी ने अपनी बैलेंस शीट के माध्यम से शुरुआती वर्षों में Zomato और Policybazaar जैसी दिग्गज कंपनियों में निवेश किया था, जो बाद में सफल IPO तक पहुंचीं।


🏢 अब ग्रोथ-स्टेज पर फोकस

नया 250 करोड़ रुपये का फंड मुख्य रूप से भारत में टेक-इनेबल्ड (tech-enabled) ग्रोथ-स्टेज कंपनियों में निवेश करेगा। कंपनी ने नियामक फाइलिंग में कहा है कि यह फंड उन कंपनियों को समर्थन देगा, जो भारत में संचालित हैं या जिनका मुख्य फोकस भारतीय बाजार है।

यह फंड भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के साथ कैटेगरी II वैकल्पिक निवेश फंड (Alternative Investment Fund) के रूप में पंजीकृत है।

इस फंड की अवधि (tenure) पहले क्लोजिंग से आठ वर्ष होगी।


📈 संस्थागत निवेश की दिशा में रणनीति

पिछले वर्ष मई में Info Edge ने घोषणा की थी कि उसके शेयरधारकों ने कंपनी की निवेश रणनीति को संस्थागत स्वरूप देने के लिए Info Edge Ventures के तीसरे फंड में 1,000 करोड़ रुपये तक निवेश की योजना को मंजूरी दी है।

Info Edge Ventures के फंड्स का प्रबंधन 50:50 साझेदारी में सिंगापुर के संप्रभु संपत्ति कोष Temasek के साथ किया जाता है।

यह साझेदारी Info Edge को न केवल वित्तीय मजबूती देती है, बल्कि वैश्विक निवेश अनुभव और नेटवर्क का भी लाभ प्रदान करती है।


💰 वित्तीय प्रदर्शन भी मजबूत

दिसंबर 31 को समाप्त तिमाही में Info Edge का प्रदर्शन भी मजबूत रहा।

  • ऑपरेटिंग रेवेन्यू बढ़कर 819 करोड़ रुपये हो गया।
  • शुद्ध लाभ (Net Profit) साल-दर-साल 10% बढ़कर 317 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 288 करोड़ रुपये था।

यह आंकड़े दर्शाते हैं कि कंपनी का कोर बिजनेस भी स्थिर और लाभदायक बना हुआ है, जिससे उसे नए निवेश फंड लॉन्च करने का आत्मविश्वास मिलता है।


🔍 क्यों अहम है B8 Fund-I?

भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम अब परिपक्व हो रहा है। शुरुआती चरण के निवेश के बाद कंपनियों को स्केल-अप के लिए बड़े और धैर्यपूर्ण पूंजी की जरूरत होती है।

B8 Fund-I के जरिए Info Edge इस गैप को भरने की कोशिश कर रही है।

ग्रोथ-स्टेज निवेश का मतलब है कि कंपनी उन स्टार्टअप्स में निवेश करेगी जो पहले ही अपने बिजनेस मॉडल को साबित कर चुके हैं और अब विस्तार के चरण में हैं।

इससे जोखिम अपेक्षाकृत कम और रिटर्न की संभावना अधिक संतुलित रहती है।


🌱 स्टार्टअप इकोसिस्टम पर असर

Info Edge पहले ही भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी है।

Zomato और Policybazaar जैसी कंपनियों में शुरुआती निवेश ने यह साबित किया है कि कंपनी लंबी अवधि के दृष्टिकोण के साथ निवेश करती है।

अब ग्रोथ-स्टेज फंड के जरिए वह उन कंपनियों का समर्थन करेगी, जो अगले कुछ वर्षों में IPO या बड़े अधिग्रहण की दिशा में बढ़ सकती हैं।


🔮 आगे की राह

250 करोड़ रुपये का यह नया फंड Info Edge की निवेश रणनीति में एक महत्वपूर्ण विस्तार है।

अगर बाहरी निवेशकों से अतिरिक्त पूंजी जुटाई जाती है, तो इसका आकार और प्रभाव दोनों बढ़ सकते हैं।

भारत में टेक-इनेबल्ड कंपनियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, और ग्रोथ-स्टेज निवेश की मांग भी बढ़ रही है।

ऐसे में B8 Fund-I Info Edge को स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक और मजबूत स्तंभ के रूप में स्थापित कर सकता है।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनी किन ग्रोथ-स्टेज स्टार्टअप्स को समर्थन देती है और क्या वह अपनी पिछली निवेश सफलताओं को दोहरा पाती है। 🚀

Read more :🌸 Ferns N Petals (FNP) की FY25 में 22% ग्रोथ,

🌸 Ferns N Petals (FNP) की FY25 में 22% ग्रोथ,

Ferns N Petals

भारत की प्रमुख गिफ्टिंग और फ्लोरल रिटेल कंपनी Ferns N Petals (FNP) ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में मजबूत ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी ने जहां अपने रेवेन्यू में 22% की बढ़ोतरी की, वहीं घाटे को भी कम करने में सफलता हासिल की। हालांकि, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और क्विक डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के दबाव के बीच मुनाफे की राह अभी भी आसान नहीं दिखती।


📈 22% बढ़ा ऑपरेटिंग रेवेन्यू

Registrar of Companies (RoC) में दाखिल वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, FNP का ऑपरेटिंग रेवेन्यू FY25 में बढ़कर ₹861.5 करोड़ हो गया, जो FY24 में ₹705 करोड़ था।

कंपनी की आय में यह बढ़ोतरी उसके ओमनी-चैनल मॉडल की मजबूती को दर्शाती है। FNP अपनी वेबसाइट, थर्ड-पार्टी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स, कंपनी-स्वामित्व वाले स्टोर्स और फ्रेंचाइजी नेटवर्क के माध्यम से केक, फूल और कस्टमाइज्ड गिफ्टिंग सॉल्यूशंस बेचती है।


🎂🌹 प्रोडक्ट सेल्स से आता है 91% रेवेन्यू

FNP की कमाई का मुख्य स्रोत केक, फूल और गिफ्ट प्रोडक्ट्स की बिक्री है।

  • इन प्रोडक्ट्स से FY25 में ₹781 करोड़ की आय हुई, जो पिछले वर्ष ₹641 करोड़ थी।
  • कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू में इनकी हिस्सेदारी 91% रही।

इसके अलावा कंपनी डिलीवरी चार्ज, कंवीनियंस फीस, पैकेजिंग चार्ज और फ्रेंचाइजी से होने वाली आय (ऑनबोर्डिंग फीस और मासिक रॉयल्टी) से भी कमाई करती है।

सर्विसेज से होने वाली आय 25% बढ़कर ₹80 करोड़ हो गई।

अगर ₹7.5 करोड़ की अन्य आय जोड़ दी जाए, तो कंपनी की कुल आय FY25 में ₹869 करोड़ तक पहुंच गई, जो FY24 में ₹712 करोड़ थी।


💸 खर्चों में भी हुई बढ़ोतरी

राजस्व बढ़ने के साथ-साथ कंपनी के खर्चों में भी वृद्धि दर्ज की गई।

  • मटेरियल कॉस्ट कुल खर्च का 43% रही और 21.5% बढ़कर ₹379 करोड़ हो गई (FY24 में ₹312 करोड़)।
  • विज्ञापन खर्च 17% बढ़कर ₹184 करोड़ पहुंच गया।
  • कर्मचारी लाभ खर्च 18% बढ़कर ₹146 करोड़ हो गया।
  • किराया खर्च ₹15 करोड़ रहा।
  • डिप्रिसिएशन बढ़कर ₹16 करोड़ हो गया।

कुल मिलाकर FNP का कुल खर्च FY25 में 21% बढ़कर ₹890 करोड़ हो गया।


📉 घाटे में 8.3% की कमी

सकारात्मक पक्ष यह रहा कि कंपनी ने अपने घाटे को कम किया।

FY25 में FNP का घाटा 8.3% घटकर ₹22 करोड़ रह गया।

हालांकि, EBITDA मार्जिन -1.25% और ROCE -29.13% रहा, जो यह दर्शाता है कि कंपनी अभी भी मुनाफे के मोर्चे पर संघर्ष कर रही है।

यूनिट इकॉनॉमिक्स के स्तर पर देखें तो कंपनी ने एक रुपये कमाने के लिए ₹1.03 खर्च किए — यानी अभी भी प्रति रुपये पर हल्का घाटा हो रहा है।


💰 बैलेंस शीट की स्थिति

FY25 के अंत में कंपनी के पास ₹74 करोड़ का कैश और बैंक बैलेंस था।

  • करंट एसेट्स ₹138 करोड़
  • कुल एसेट्स ₹225 करोड़

यह संकेत देता है कि कंपनी के पास परिचालन जारी रखने और ग्रोथ योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं।


💵 अब तक $27 मिलियन की फंडिंग

FNP अब तक लगभग $27 मिलियन की फंडिंग जुटा चुकी है। इसके प्रमुख निवेशकों में Lighthouse शामिल है।

कंपनी केवल गिफ्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि हॉस्पिटैलिटी और वेडिंग सेगमेंट में भी सक्रिय है। यह Udman Hotels और FNP Weddings and Events के माध्यम से अपने व्यवसाय का विस्तार कर चुकी है।


⚔️ कड़ी प्रतिस्पर्धा

गिफ्टिंग और फ्लोरल सेगमेंट में FNP को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।

इसके प्रमुख प्रतिस्पर्धियों में IGP, FlowerAura, Winni और Archies शामिल हैं।

इसके अलावा, क्विक-कॉमर्स और इंस्टेंट डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स भी तेजी से गिफ्टिंग और केक-फूल डिलीवरी स्पेस में एंट्री कर रहे हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा और तीव्र हो रही है।


🔎 क्या मुनाफे की राह आसान है?

हालांकि FNP का घाटा कंपनी के आकार के हिसाब से बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन सवाल यह है कि क्या कंपनी भविष्य में अपनी लाभप्रदता में बड़ा सुधार कर पाएगी?

फिलहाल कंपनी “इन्क्रिमेंटल गेंस” यानी छोटे-छोटे सुधारों के जरिए आगे बढ़ रही है।

लेकिन क्विक डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स का बढ़ता दबाव और ग्राहकों की बदलती अपेक्षाएं इसे चुनौतीपूर्ण बना रही हैं।

अगर कंपनी को अपने मार्जिन बेहतर करने हैं, तो उसे सप्लाई चेन ऑप्टिमाइजेशन, टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन और हाई-मार्जिन कैटेगरी में विस्तार पर ध्यान देना होगा।


🚀 निष्कर्ष

FY25 में 22% की ग्रोथ और घाटे में कमी FNP के लिए सकारात्मक संकेत हैं।

कंपनी ने अपने ब्रांड, नेटवर्क और ओमनी-चैनल मॉडल के दम पर मजबूत पकड़ बनाई है।

लेकिन मुनाफे की दिशा में निर्णायक कदम उठाने के लिए उसे लागत नियंत्रण और प्रतिस्पर्धी रणनीति पर और अधिक फोकस करना होगा।

आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या FNP तेजी से बदलते गिफ्टिंग बाजार में अपनी बढ़त बनाए रख पाती है या नहीं।

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