🛏️ Wakefit का IPO फाइनल राउंड में!

Wakefit

भारत की होम और स्लीप सॉल्यूशन कंपनी Wakefit ने 30 नवंबर 2025 को अपना Red Herring Prospectus (RHP) फाइल कर दिया है। इसके साथ ही कंपनी के IPO की तैयारी अब अंतिम चरण में पहुँच चुकी है।
H1 FY26 के ताज़ा वित्तीय आंकड़ों ने निवेशकों में नई उत्साह पैदा की है क्योंकि Wakefit ने इस बार दमदार प्रदर्शन दिखाया है। आइए जानते हैं कंपनी के वित्तीय नतीजों, खर्चों, मुनाफे और IPO प्लान्स के बारे में विस्तार से।


📈 H1 FY26: Wakefit की मजबूत कमाई, राजस्व 724 करोड़ तक पहुँचा

Wakefit ने अपने RHP में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार H1 FY26 में ₹724 करोड़ का ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज किया है।
इसके अलावा कंपनी ने नॉन-ऑपरेटिंग सोर्सेज से ₹17 करोड़ कमाए, जिससे कुल राजस्व ₹741 करोड़ तक पहुँच गया।

यह प्रदर्शन काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले वित्तीय वर्ष में कंपनी ने कुछ दबाव झेला था, लेकिन इस साल की शुरुआत Wakefit के लिए काफी बेहतर रही है।


💸 खर्चों की तस्वीर: 44% खर्च सिर्फ सामग्री लागत पर

कंपनी के खर्चों का सबसे बड़ा हिस्सा कॉस्ट ऑफ मटेरियल था, जो कुल खर्च का 44% है।

  • कॉस्ट ऑफ मटेरियल: ₹313 करोड़
  • एम्प्लॉयी बेनिफिट एक्सपेंस: ₹79.5 करोड़
  • फाइनेंस कॉस्ट: ₹15 करोड़
  • डिप्रिशिएशन: ₹53 करोड़

कुल मिलाकर H1 FY26 में Wakefit का कुल खर्च ₹706 करोड़ रहा।

खर्च भले ही बड़े हों, लेकिन कंपनी ने लागत कंट्रोल और ऑपरेशन एफिशिएंसी में सुधार किया है, जिसकी वजह से इस बार कंपनी लाभ में रही।


💰 Wakefit ने H1 FY26 में कमाया 35.5 करोड़ का मुनाफा

साल 2024–25 में Wakefit को ₹35 करोड़ का घाटा हुआ था, लेकिन इस साल कंपनी ने रफ्तार पकड़ी और H1 FY26 में ₹35.5 करोड़ का शुद्ध मुनाफा (PAT) कमाया।

कंपनी के प्रमुख वित्तीय रेशियो भी बेहतर दिखे:

  • ROCE: 4.38%
  • EBITDA मार्जिन: 11.95%

यह संकेत देता है कि कंपनी का बिजनेस मॉडल अब अधिक स्थिर और प्रॉफिटेबल दिशा में बढ़ रहा है।


📊 प्रति ₹1 कमाने पर खर्च 98 पैसे—ऑपरेशन हुआ और कुशल

Wakefit ने बताया कि H1 FY26 में ऑपरेटिंग रेवेन्यू के हर ₹1 को कमाने के लिए कंपनी ने ₹0.98 खर्च किए।
यह आंकड़ा दर्शाता है कि Wakefit अपनी लागत प्रबंधन में लगातार सुधार कर रहा है और उसका ऑपरेशन अधिक lean और efficient होता जा रहा है।


🏦 Wakefit के एसेट्स और कैश पोजिशन

  • कुल करंट एसेट्स: ₹229 करोड़
  • कैश और बैंक बैलेंस: ₹23 करोड़

कंपनी की बैलेंस शीट पिछले वर्ष के मुकाबले मजबूत नज़र आती है, जो IPO लॉन्च के लिए काफी सकारात्मक संकेत है।


🧑‍💼 Wakefit के बड़े निवेशक कौन हैं?

RHP के अनुसार Wakefit के सबसे बड़े बाहरी निवेशक हैं:

  • Peak XV Partners: 22.47%
  • Verlinvest: 9.79%
  • Investcorp: 9.29%
  • SAI Global Investment: 5.35%
  • Elevation Capital: 4.68%
  • Paramark Fund: 1.63%

🚀 प्रमोटर्स में:

  • Ankit Garg: 33.03% (सबसे बड़ा शेयर)
  • Chaitanya Ramalingegowda: 9.98%

प्रमोटर्स की मज़बूत हिस्सेदारी से पता चलता है कि Wakefit के फाउंडर्स अब भी कंपनी की दीर्घकालिक ग्रोथ में डटे हुए हैं।


📢 Wakefit ने अपने IPO का आकार घटाया — यहाँ है नया प्लान

पहले दाखिल DRHP के अनुसार कंपनी:

  • ₹468 करोड़ का फ्रेश इश्यू
  • 5.84 करोड़ शेयर का OFS लाने वाली थी।

लेकिन अब अपडेटेड RHP में Wakefit ने अपने IPO साइज को छोटा किया है:

  • फ्रेश इश्यू: ₹377.2 करोड़
  • OFS: 4.68 करोड़ इक्विटी शेयर

इस बदलाव का उद्देश्य मार्केट सेंटिमेंट को ध्यान में रखते हुए IPO को अधिक आकर्षक और संतुलित बनाना माना जा रहा है।


🪑 Wakefit की ग्रोथ स्टोरी: मैट्रेस से लेकर फुल होम सॉल्यूशन तक का सफर

2016 में शुरू हुआ Wakefit आज भारत के सबसे भरोसेमंद स्लीप और होम फर्निशिंग ब्रांड्स में से एक बन चुका है।
कंपनी ने शुरुआत में सिर्फ मैट्रेस बेचे, लेकिन आज:

  • बेड
  • फर्नीचर
  • वॉर्डरोब
  • होम डेकोर
  • स्लीप प्रोडक्ट्स

जैसी पूरी श्रृंखला पेश करती है।

Wakefit का D2C मॉडल, ऑनलाइन-ऑफलाइन हाइब्रिड स्ट्रेटेजी और तेज़ डिलिवरी ने इसे एक लाखों घरों तक पहुँचने वाला ब्रांड बना दिया है।


🧭 आगे की राह: IPO के बाद क्या उम्मीदें?

Wakefit का मुनाफे में वापस आना, मजबूत आधे साल का प्रदर्शन और ऑपरेशन में सुधार यह दिखाता है कि कंपनी IPO के बाद और बड़े विस्तार की तैयारी में है।
संभावित फोकस क्षेत्र:

  • मैन्युफैक्चरिंग स्केल-अप
  • ओमनीचैनल उपस्थिती
  • नए प्रोडक्ट कैटेगरी
  • ब्रांड बिल्डिंग

निवेशक उम्मीद कर रहे हैं कि Wakefit का IPO भारत के बढ़ते D2C और होम सॉल्यूशन मार्केट में एक नया उदाहरण पेश करेगा।


🛑 निष्कर्ष

Wakefit ने H1 FY26 में शानदार वापसी की है — घाटे से निकलकर मुनाफे में जाना, ऑपरेटिंग दक्षता में सुधार और मजबूत रेवेन्यू ने कंपनी को IPO के लिए बेहतरीन स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है।

इसके सुधरे हुए वित्तीय संकेतक और बढ़ता बाजार विश्वास इसे 2026 के प्रमुख IPOs में से एक बना सकते हैं।

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🚀 Garuda Aerospace बनने जा रही Public Company

Garuda Aerospace

भारत की सबसे तेजी से बढ़ती ड्रोन टेक्नोलॉजी कंपनियों में शामिल Garuda Aerospace ने एक बड़ा कदम उठा लिया है। कंपनी अब Private Limited से Public Limited बनने जा रही है। ये बदलाव संकेत देता है कि कंपनी आने वाले समय में IPO लॉन्च करने की पूरी तैयारी कर रही है। 📈✨

कंपनी ने अपनी फाइलिंग में बताया कि बोर्ड ने आधिकारिक तौर पर निर्णय लिया है कि अब इसका नया नाम होगा— Garuda Aerospace Limited.

यह फैसला कंपनी की तेज़ी से बढ़ती ग्रोथ, बढ़ते निवेशकों के भरोसे और ड्रोन मार्केट में तेजी से उभरती उनकी मौजूदगी को दर्शाता है। आइए जानते हैं, Garuda Aerospace कैसे भारत की ड्रोन इंडस्ट्री का बड़ा चेहरा बन गई है। 🛩️🇮🇳


🏢 Public Company बनने का मतलब क्या है?

Garuda Aerospace के Public Company बनने के पीछे कई कारण हैं:

  • 🏦 IPO की तैयारी को मजबूती
    पब्लिक कंपनी बनने के बाद IPO लाना आसान होता है।
  • 📊 अधिक पारदर्शिता और बेहतर गवर्नेंस
    Public entities में रिपोर्टिंग और डिस्क्लोज़र मजबूत होते हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ता है।
  • 🌍 ग्लोबल एक्सपेंशन को सपोर्ट
    कंपनी का प्लान 50 देशों में एक्सपोर्ट बढ़ाने का है, जिसके लिए कैपिटल और मजबूत स्ट्रक्चर जरूरी है।

👩‍💼👨‍💼 कंपनी ने की नई Independent Directors की नियुक्ति

Regulatory compliance पूरी करने के लिए कंपनी ने तीन नए Independent Directors नियुक्त किए हैं:

  • Asha Vijayaraghavan
  • Mandakulathur Ramachandran Venkatesh
  • Rithika Mohan

साथ ही,

  • Vishnu Jayaprakash को Additional Director बनाया गया है
  • Rithika Mohan को Whole-time Director की भी ज़िम्मेदारी दी गई है

ये सभी नियुक्तियाँ IPO और पब्लिक कंपनी की यात्रा के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। 🏛️📋


🚁 Garuda Aerospace: भारत की Drone-as-a-Service लीडर

2015 में शुरू हुई Garuda Aerospace आज भारत की सबसे बड़ी ड्रोन सेवाओं की कंपनी बन चुकी है। इसकी ताकत इसकी विविध सर्विसेज़ और विशाल ड्रोन फ्लीट में है।

🌟 कंपनी की खासियतें:

  • 🛸 400 से अधिक ड्रोन का फ्लीट – भारत में सबसे बड़ा
  • 👨‍✈️ 500 प्रशिक्षित ड्रोन पायलट
  • 🏙️ 84 शहरों में ऑपरेशन
  • 🔧 30 ड्रोन मॉडल और 50+ ड्रोन सर्विसेज़

कंपनी डिलीवरी, एग्रीकल्चर, डिज़ास्टर मैनेजमेंट और सर्विलांस जैसे कई क्षेत्रों में काम कर रही है।


💰 अब तक मिली कुल फंडिंग — $44 Million

Garuda Aerospace को अब तक कई बड़े निवेशकों ने सपोर्ट किया है। इनमे शामिल हैं:

  • 🏏 MS Dhoni (ब्रांड एंबेसडर और निवेशक)
  • Nagarajan Seyyadurai
  • Ocgrow Ventures
  • अन्य वैश्विक निवेशक

कंपनी ने हाल ही में Narotam Sekhsaria Family Office से भी फंडिंग जुटाई है, जिसका उपयोग वह अपनी ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने में करेगी।


🏭 मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में बड़ा विस्तार

कंपनी अभी सालाना 8,000 ड्रोन बनाती है, जिसे बढ़ाकर 12,000–15,000 ड्रोन प्रतिवर्ष करने की तैयारी है।

यह विस्तार Garuda Aerospace को केवल भारत ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मार्केट में भी मजबूत बनाएगा।✈️🌍

कंपनी का लक्ष्य है:

  • 🎯 साल के अंत तक 50 देशों में एक्सपोर्ट
  • 🎯 एग्रीटेक ड्रोन बिक्री में भारत की नंबर 1 कंपनी बनना
  • 🎯 सरकारी और BFSI सेगमेंट में सर्विलांस ड्रोन की मांग पूरा करना

📈 FY25 Financial Performance: Profit में बढ़ोतरी

MS Dhoni-backed Garuda Aerospace का FY25 का प्रदर्शन भी शानदार रहा।

📊 Financial Highlights:

  • Revenue (FY25): ₹118 Crore
    (पहले के ₹110 करोड़ से 7.3% बढ़ोतरी)
  • Net Profit (FY25): ₹17.5 Crore
    कंपनी लगातार मुनाफे में है, जो किसी भी IPO-bound कंपनी के लिए बड़ी बात है।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कंपनी न केवल बड़े स्तर पर ऑपरेशन कर रही है, बल्कि मजबूत वित्तीय प्रदर्शन भी दिखा रही है। 💹💼


🧭 IPO की प्लानिंग लेकिन जल्द नहीं…

Garuda Aerospace पहले भी संकेत दे चुकी है कि 2025 में IPO नहीं आएगा।
लेकिन अब जब कंपनी ने खुद को Public Company में कन्वर्ट करने का फैसला ले लिया है, तो IPO की दिशा में शुरुआती कदम तेज़ हो चुके हैं।

कंपनी फिलहाल ध्यान दे रही है:

  • 🏭 मैन्युफैक्चरिंग एक्सपेंशन
  • 🔬 R&D को मजबूत करने
  • 🌍 इंटरनेशनल बिजनेस एक्सपेंशन

IPO की टाइमलाइन शायद 2026–27 के आसपास हो सकती है।


📌 निष्कर्ष

Garuda Aerospace का Public Company बनना न सिर्फ कंपनी के लिए बल्कि भारत की पूरी ड्रोन इंडस्ट्री के लिए बड़ा कदम है। 🇮🇳🚁

⚡ कंपनी तेजी से ग्रो कर रही है
⚡ निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है
⚡ मैन्युफैक्चरिंग क्षमता एक्सपैंड हो रही है
⚡ ड्रोन सर्विसेज़ में कंपनी मार्केट लीडर है

IPO भले ही अभी दूर हो, लेकिन यह साफ है कि Garuda Aerospace भारत की ड्रोन क्रांति का केंद्र बनने वाली है।

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Droneacharya

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार का दिन निवेशकों के लिए किसी झटके से कम नहीं रहा। ड्रोन टेक्नोलॉजी सेक्टर की चर्चित कंपनी Droneacharya Aerial Innovations के शेयरों में अचानक लगभग 20% की गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों में घबराहट फैल गई।
यह गिरावट सीधे-सीधे SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) के उस सख्त आदेश के बाद देखने को मिली, जिसमें कंपनी और उसके प्रमोटर्स को दो साल के लिए सिक्योरिटीज मार्केट से प्रतिबंधित कर दिया गया है।


📉 शेयरों का तगड़ा क्रैश — 20% लोअर सर्किट पर पहुँच गया स्टॉक

सोमवार को शुरुआती ट्रेडिंग में ही कंपनी का शेयर Rs 45.38 पर गिरकर लोअर सर्किट पर पहुंच गया।
निवेशकों की बिकवाली इतनी भारी थी कि ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर ऑर्डर मैच ही नहीं हो पा रहे थे।

ध्यान देने वाली बात यह है कि Droneacharya ने दिसंबर 2022 में जब बाजार में लिस्टिंग की थी, तब इसके शेयर लगभग 90% प्रीमियम पर यानी Rs 102 के आसपास खुले थे।
IPO प्राइस μό Rs 54 था—यानी निवेशकों ने पहले ही दिन कंपनी का ज़बरदस्त स्वागत किया था।

लेकिन अब वही निवेशक अचानक कंपनी से दूर भाग रहे हैं।


⚠️ SEBI की बड़ी कार्रवाई — असली वजह क्या है?

SEBI के विस्तृत आदेश में खुलासा हुआ कि कंपनी ने कई गंभीर अनियमितताएँ की हैं, जिनमें शामिल हैं:

1. IPO की रकम में गड़बड़ी (फंड डायवर्शन)

कंपनी ने जिस उद्देश्य के लिए IPO से पैसे जुटाए थे, वह ठीक तरीके से इस्तेमाल नहीं किए गए।
यानी निवेशकों को बताए गए उपयोग और असली उपयोग में अंतर पाया गया।

2. Revenue को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना

SEBI ने बताया कि कंपनी ने अपनी आय (Revenue) को गलत तरीक़े से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया, ताकि कंपनी की ग्रोथ का गलत प्रभाव पड़े।

3. Misleading Corporate Announcements

कंपनी ने बाज़ार में कई भ्रामक घोषणाएँ कीं, जिससे निवेशकों को गलत तस्वीर दिखाई गई।

4. Related Party Transactions छुपाए गए

कुछ लेन-देन ऐसे लोगों/एंटिटीज़ के साथ किए गए जिन्हें कंपनी ने सार्वजनिक रूप से घोषित ही नहीं किया।
ये सबसे गंभीर उल्लंघनों में गिना जाता है।


🟥 SEBI का कहना — कंपनी ने “जानबूझकर” निवेशकों को गलत जानकारी दी

SEBI ने अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा कि कंपनी और उसके प्रमोटर्स ने:

“जानबूझकर गलत जानकारी दी और फाइनेंशियल्स को गलत तरीके से प्रस्तुत किया।”

इस तरह की भाषा SEBI बहुत खास मामलों में ही इस्तेमाल करता है।
यानी मामले की गंभीरता काफी बड़ी है।

SEBI के मुताबिक:

  • कंपनी ने निवेशकों के भरोसे को तोड़ा
  • गलत वित्तीय रिपोर्टिंग की
  • बिज़नेस ऐक्टिविटी को बढ़ा-चढ़ाकर बताया
  • पारदर्शिता के नियमों की बार-बार अनदेखी की

इसी कारण, SEBI ने न सिर्फ कंपनी बल्कि उसके प्रमोटर्स को भी दो साल के लिए मार्केट से बाहर कर दिया।


💸 Rs 75 Lakh का जुर्माना भी लगाया गया

सिर्फ बैन ही नहीं—SEBI ने कंपनी पर Rs 75 लाख का पेनल्टी भी लगाया है।

यह कदम साफ दिखाता है कि वित्तीय अनियमितताओं और गलत कॉर्पोरेट व्यवहार को अब मार्केट रेगुलेटर्स बिल्कुल बर्दाश्त नहीं कर रहे।


😨 मार्केट में घबराहट — निवेशकों का भरोसा टूटता दिखा

SEBI की कार्रवाई की खबर आते ही बाजार में भय का माहौल बन गया।
खासतौर पर छोटे निवेशक जिन्होंने IPO के समय भारी उम्मीदों के साथ निवेश किया था, अब शेयर बेचने के लिए दौड़ पड़े।

20% का क्रैश बताता है कि निवेशक कंपनी पर भरोसा खो चुके हैं।

यह गिरावट यह भी दर्शाती है कि:

  • बाज़ार में कंप्लायंस (अनुपालन) को लेकर जागरूकता बढ़ी है
  • गलत रिपोर्टिंग करने वाली कंपनियों के लिए निवेशक अब बिल्कुल भी जगह नहीं छोड़ रहे
  • एक खराब खबर पूरे सेंटिमेंट को मिनटों में बदल सकती है

🧭 अब आगे क्या? क्या शेयर और टूटेंगे?

मार्केट विश्लेषकों का मानना है:

  • जब तक SEBI के ऑर्डर की छाया बनी रहेगी, शेयर में recovery मुश्किल है
  • लोअर सर्किट के कारण liquidity लगभग रुक गई है
  • कई निवेशक बाहर निकलना चाहेंगे लेकिन buyers नहीं मिलने से फँस सकते हैं

कुल मिलाकर ये मामला startup ecosystem के लिए एक बड़ा सबक है कि:

✔️ पारदर्शिता

✔️ साफ वित्तीय रिपोर्टिंग

✔️ और ethical practices

किसी भी कीमत पर जरूरी हैं।


🔍 निष्कर्ष — एक चेतावनी की घंटी

Droneacharya का मामला निवेशकों और स्टार्टअप दोनों के लिए एक बड़ा lesson है।
एक मजबूत बिजनेस मॉडल होने के बावजूद, यदि वित्तीय रिपोर्टिंग में साफ-साफ पारदर्शिता नहीं दिखती, तो बाजार तुरंत सज़ा देता है।

SEBI की यह कार्रवाई भविष्य में अन्य कंपनियों के लिए भी एक संदेश है कि:

“नियमों की अवहेलना करोगे, तो बाज़ार में टिक नहीं पाओगे।”

निवेशक भी अब पहले से ज्यादा जागरूक हैं और किसी भी गलत गतिविधि का असर शेयरों में तुरंत दिखाई देने लगा है।

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🚀 Atomberg ने उठाए ₹212 करोड़

Atomberg

भारत के consumer appliances सेक्टर में धूम मचाने वाली Atomberg ने एक बार फिर बड़ा फंड जुटाकर अपनी ग्रोथ स्टोरी को और मजबूत कर दिया है। कंपनी ने हाल ही में Series C राउंड के एक्सटेंशन में ₹212 करोड़ (लगभग $24 मिलियन) जुटाए हैं। इस निवेश का नेतृत्व किया है Jongsong Investments (Temasek) ने, जबकि कंपनी के co-founders और मौजूदा निवेशकों ने भी खुलकर साथ दिया है।
आइए जानते हैं कि इस राउंड में क्या हुआ, कितनी हिस्सेदारी किसकी रही और आखिर Atomberg आगे क्या प्लान कर रही है! ⚡


💰 किसने कितना निवेश किया? – निवेशकों की बड़ी एंट्री

RoC के regulatory filings के अनुसार, कंपनी ने 10,006 Series C1 और C2 preference shares जारी किए, जिनकी कीमत थी ₹2,11,835 रुपये प्रति शेयर

👉 इस राउंड में मुख्य निवेश ऐसे रहे:

  • Temasek ➝ ₹132 करोड़
  • Jungle Ventures ➝ ₹17.8 करोड़
  • Inflexor Fund ➝ ₹17.9 करोड़
  • Atomberg के Co-founders
    • Manoj Kumar Meena
    • Sibabrata Das
      ➝ दोनों ने मिलकर ₹44 करोड़ का निवेश किया

यह राउंड सिर्फ शुरुआत है क्योंकि यह बताया जा रहा है कि कंपनी अभी एक बड़े ongoing funding round पर काम कर रही है। यानी आगे और भी फंड आने की संभावना है!


📈 ₹500 मिलियन की वैल्यूएशन—Atomberg का दमदार मूल्यांकन

Entrackr के अनुमान के अनुसार, इस नए फंडिंग अलॉटमेंट के बाद Atomberg का post-money valuation लगभग $500 मिलियन तक पहुँच गया है।

यानि, Atomberg अब आधा-बिलियन डॉलर वैल्यू वाली कंपनी बन चुकी है — एक बड़ी उपलब्धि! 🌟


💡 कुल जुटाई गई फंडिंग अब $150 मिलियन से अधिक

अब तक Atomberg कुल मिलाकर $150 मिलियन से ज्यादा का निवेश जुटा चुकी है।
याद दिला दें—मई 2023 में कंपनी ने $86 मिलियन का Series C राउंड बंद किया था, जिसका नेतृत्व Temasek और Steadview Capital ने किया था।


🛠️ Atomberg क्या बनाती है? – स्मार्ट और एनर्जी सेविंग प्रोडक्ट्स

Atomberg की USP है कि कंपनी ने R&D यानी रिसर्च और डेवलपमेंट पर बहुत फोकस किया है। इसी वजह से उसके प्रोडक्ट मार्केट में अलग पहचान रखते हैं।

🌀 Atomberg के प्रमुख प्रोडक्ट:

  • BLDC आधारित energy-efficient fans
  • Smart fans
  • Mixer grinders
  • Smart locks

कंपनी का दावा है कि उनके fans 65% तक electricity बचाते हैं—यही बात उन्हें मार्केट में और भी पॉपुलर बनाती है।


🛒 15,000+ Retail Touchpoints – पूरे भारत में मजबूत मौजूदगी

Atomberg ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी distribution network पर बहुत जोर दिया है। आज कंपनी का रिटेल footprint देशभर में 15,000 से ज्यादा टचपॉइंट्स तक पहुंच चुका है—ये किसी भी consumer appliance स्टार्टअप के लिए बहुत बड़ी बात है।

पहले कंपनी ने अपनी journey B2B segment से शुरू की थी।

👔 शुरुआती बड़े B2B ग्राहक:

  • Tata Group
  • Infosys
  • Indian Railways

इसके बाद कंपनी ने Flipkart और Amazon के जरिए B2C मार्केट में एंट्री ली और 2018 के बाद offline retail को तेजी से expand किया।


📊 Financial Performance: बढ़ती कमाई, घटते नुकसान

कंपनी ने अभी FY25 की financials फाइल नहीं की हैं, लेकिन FY24 के उपलब्ध आंकड़े काफी प्रभावशाली हैं।

📌 FY24 Performance Highlights:

  • Revenue from operations ➝ ₹848 करोड़, यानी 31% YoY growth
  • Losses में गिरावट ➝ 31.7% की कमी

ये संकेत देते हैं कि Atomberg सिर्फ ग्रोथ ही नहीं कर रही, बल्कि नुकसान भी तेजी से कम कर रही है — यानी sustainable scalability की ओर बढ़ रही है।


🔮 आगे का रास्ता: मजबूत ग्रोथ + नए फंड = नया अध्याय

इस नए फंडिंग राउंड और मजबूत वैल्यूएशन के साथ, Atomberg अब अगले लेवल पर पहुंचने के लिए तैयार दिख रही है। उम्मीद है कि कंपनी बड़े पैमाने पर:

  • नए प्रोडक्ट लॉन्च करेगी
  • R&D और टेक्नोलॉजी में और निवेश करेगी
  • अपनी offline और online distribution को मजबूत करेगी
  • मार्केट शेयर बढ़ाने पर फोकस करेगी

भारत में energy-efficient और smart-home products का मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, और Atomberg उस ट्रेंड का नेतृत्व करने की तैयारी में है।


🎯 निष्कर्ष

Atomberg का ₹212 करोड़ का नया फंडिंग राउंड कंपनी के लिए एक और मजबूत कदम साबित हुआ है। बढ़ती रिटेल मौजूदगी, इनोवेटिव प्रोडक्ट लाइन और लगातार बढ़ती कमाई—ये सभी factors बताते हैं कि कंपनी आने वाले वर्षों में भारतीय appliances मार्केट में बड़ा नाम बनने जा रही है।


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🛏️ Wakefit का IPO आया बाज़ार में धूम मचाने

Wakefit

भारत की लोकप्रिय होम और स्लीप सॉल्यूशन कंपनी Wakefit अब स्टॉक मार्केट में उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है। 30 नवंबर 2025 को कंपनी ने अपना Red Herring Prospectus (RHP) फाइल किया और 5 दिसंबर से पब्लिक इश्यू खोलने की घोषणा कर दी।

Wakefit के IPO ने निवेशकों में जोरदार उत्साह पैदा किया है, क्योंकि यह D2C (डायरेक्ट-टू-कंज़्यूमर) ब्रांड पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से बढ़ा है और भारतीय मैट्रेस व फ़र्नीचर मार्केट में बड़ी पहचान बना चुका है।


📌 IPO के मुख्य पॉइंट्स एक नज़र में

  • 🗓️ IPO खुलने की तारीख: 5 दिसंबर 2025
  • 🗓️ बंद होने की तारीख: 8 दिसंबर 2025
  • 💰 फ्रेश इश्यू: ₹377.2 करोड़
  • 📦 OFS (Offer for Sale): 4.68 करोड़ equity shares
  • बुक-रनिंग लीड मैनेजर्स: Axis Capital, IIFL Capital, Nomura
  • 📝 रजिस्ट्रार: MUFG Intime

🚀 Wakefit ने IPO साइज़ घटाया — क्यों?

कंपनी के पहले DRHP में फ्रेश इश्यू ₹468 करोड़ का था और OFS 5.84 करोड़ शेयरों का।
लेकिन फाइनल RHP में कंपनी ने साइज़ कम कर दिया:

  • 👉 फ्रेश इश्यू: ₹468 करोड़ ➝ ₹377.2 करोड़
  • 👉 OFS: 5.84 करोड़ shares ➝ 4.68 करोड़ shares

मार्केट कंडीशन्स और कैपिटल रिक्वायरमेंट के हिसाब से यह रणनीतिक फैसला लिया गया, ताकि इश्यू मॉडरेट और इन्वेस्टर्स के लिए एट्रैक्टिव बना रहे।


👥 कौन बेच रहे हैं शेयर? (OFS ब्रेकअप)

सबसे ज्यादा हिस्सेदारी बेचने वाले निवेशक:

  • 🟣 Peak XV Partners (पूर्व में Sequoia India): 2 करोड़ shares
  • 🔵 Verlinvest: 1 करोड़ shares
  • 🟡 Paramark Ventures: 25.54 लाख shares
  • 🔴 Redwood Trust
  • 🟢 SAI Global
  • 🔵 कुछ अन्य मौजूदा निवेशक

साथ ही कंपनी के को-फाउंडर्स भी अपनी थोड़ी हिस्सेदारी बेच रहे हैं:

  • Ankit Garg + Chaitanya Ramalingegowda = 1.21 करोड़ शेयर OFS में

💼 कंपनी में किसकी कितनी हिस्सेदारी है?

RHP के अनुसार:

🔹 सबसे बड़े निवेशक:

  • Peak XV: 22.47%
  • Verlinvest: 9.79%
  • Investcorp: 9.29%
  • SAI Global: 5.35%
  • Elevation Capital: 4.68%

🔸 प्रमोटर्स:

  • Ankit Garg: 33.03%
  • Chaitanya Ramalingegowda: 9.98%

Wakefit में प्रमोटर्स की मजबूत हिस्सेदारी निवेशकों के लिए एक पॉज़िटिव संकेत माना जाता है।


💡 IPO से जुटाए गए पैसे कहाँ खर्च होंगे?

Wakefit अपनी ग्रोथ को और तेज़ करने की तैयारी में है। कंपनी ने फंड का इस्तेमाल इस तरह प्लान किया है:

🏬 1. स्टोर्स के लिए किराया, सब-लीज़िंग, लाइसेंस फ़ीस — ₹161.5 करोड़

देशभर में Wakefit के अनुभवात्मक स्टोर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

📣 2. मार्केटिंग और विज्ञापन खर्च — ₹108.4 करोड़

डिजिटल और ऑफ़लाइन मार्केटिंग से ब्रांड की पहचान और मज़बूत होगी।

🏪 3. नए 117 COCO स्टोर्स खोलने और विस्तार — ₹30.8 करोड़

COCO: Company-Owned, Company-Operated

Wakefit का उद्देश्य ब्रांड की रीच सीधे उपभोक्ताओं तक पहुँचाना है।

⚙️ 4. उपकरण व मशीनरी खरीद — ₹15.4 करोड़

🧾 5. जनरल कॉर्पोरेट उपयोग

कंपनी के ऑपरेशन्स को मजबूत करने में खर्च।


📊 Wakefit की वित्तीय स्थिति: बढ़ती बिक्री, नियंत्रित घाटा

Wakefit ने पिछले कुछ वर्षों में दमदार प्रदर्शन किया है।

📅 H1 FY26 (पहली छमाही):

  • 📈 Revenue: ₹724 करोड़
  • 💵 Net Profit: ₹35.57 करोड़

यानी कंपनी मुनाफे की तरफ बढ़ चुकी है।

📅 FY25:

  • 📈 Revenue: ₹986 करोड़ ➝ ₹1,274 करोड़ (30% YoY growth)
  • Net Loss: ₹35 करोड़

FY25 में लॉस के बावजूद FY26 में कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार दिख रहा है, जो IPO निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत है।


🛍️ Wakefit की सफलता की कहानी: मैट्रेस से लेकर होम फर्निशिंग तक

Wakefit ने मैट्रेस श्रेणी से शुरुआत की थी, लेकिन अब यह एक फुल-स्केल होम सॉल्यूशन ब्रांड बन चुका है:

  • ✔️ मैट्रेस
  • ✔️ बेड
  • ✔️ सोफा
  • ✔️ फ़र्नीचर
  • ✔️ होम सॉल्यूशंस

D2C मॉडल के कारण कंपनी की कीमतें प्रतिस्पर्धी रहती हैं, और इसका बड़ा ग्राहक आधार है।


🌟 IPO क्यों है खास?

  • 🇮🇳 भारत में होम सॉल्यूशंस बाजार तेज़ी से बढ़ रहा है
  • 🛍️ D2C ब्रांड होने से मार्जिन बेहतर
  • 🧱 मजबूत ऑफलाइन-स्टोर नेटवर्क
  • 💸 FY26 में कंपनी फिर से मुनाफे में
  • 🌐 ऑनलाइन + ऑफलाइन हाइब्रिड रणनीति सफल

🔚 निष्कर्ष: क्या Wakefit का IPO निवेशकों के लिए फायदेमंद होगा?

Wakefit का IPO भारतीय उपभोक्ता ब्रांड्स में एक मजबूत अवसर के रूप में देखा जा रहा है। कंपनी तेज़ी से बढ़ रही है, स्टोर नेटवर्क विस्तार कर रही है और प्रॉफिटेबिलिटी की दिशा में आगे बढ़ चुकी है।

IPO से जुटाई गई राशि मार्केटिंग, स्टोर विस्तार और ओपनिंग में उपयोग होगी — जिससे Wakefit आने वाले वर्षों में और भी मजबूत बनेगा।

होम और फ़र्नीचर मार्केट में Wakefit की पकड़, D2C मॉडल और लगातार बढ़ती राजस्व रेखा इसे एक आकर्षक लिस्टिंग बना सकती है।

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🚀 नवंबर 2025 भारतीय स्टार्टअप फंडिंग में मंदी, लेकिन IPO की धूम!

भारतीय स्टार्टअप

मोएंगेज की $100M डील बनी हेडलाइन, कुल फंडिंग $1B के नीचे

नवंबर 2025 भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए मिला-जुला महीना रहा। जहां एक ओर फंडिंग $1 बिलियन के स्तर को पार नहीं कर पाई, वहीं दूसरी ओर Lenskart, Groww, PhysicsWallah, Pine Labs और Capillary जैसी बड़ी कंपनियों की स्टॉक मार्केट लिस्टिंग ने पूरे इकोसिस्टम में उत्साह भर दिया।

📌 कुल फंडिंग: $969 मिलियन
📌 कुल डील्स: 108
📌 सबसे बड़ी डील: MoEngage – $100M (Series F)


💸 फंडिंग ओवरव्यू: अक्टूबर के मुक़ाबले बड़ी गिरावट

अक्टूबर 2025 भारतीय स्टार्टअप्स के लिए साल का दूसरा सबसे बड़ा फंडिंग महीना था, जहां $1.73 बिलियन जुटाए गए। लेकिन नवंबर में यह गिरकर $969 मिलियन पर आ गया।

➡️ मंथ-ऑन-मंथ गिरावट: तेज़
➡️ ईयर-ऑन-ईयर ट्रेंड: लगभग स्थिर (2024 में भी $970M)

फिर भी यह महीने भर में 108 डील्स का संकेत देता है कि स्टार्टअप एक्टिविटी मजबूत बनी हुई है, भले ही बड़े चेक धीमे पड़े हों।


🏢 ग्रॉथ-स्टेज फंडिंग: 26 डील्स, $695M

सबसे ज्यादा पैसा ग्रॉथ-स्टेज स्टार्टअप्स को मिला। इनकी लिस्ट में मोएंगेज टॉप पर रहा।

🔝 टॉप 10 ग्रॉथ-स्टेज डील्स (नवंबर 2025)

1️⃣ MoEngage — $100M (Series F)
2️⃣ Finnable — $58.5M
3️⃣ Candi Solar — $52M
4️⃣ Yubi Group — $46.3M
5️⃣ Ripplr — $45M
6️⃣ Spacewood
7️⃣ Ace International
8️⃣ Square Yards
9️⃣ AgroStar
🔟 Isprava Group ($28.4M)

फाइनेंस, क्लीनटेक, सप्लाई चेन, और एग्रीटेक ने इस लिस्ट में खास जगह बनाई।


🚀 Early-Stage Funding: 74 डील्स, $274M

एंजल व सीड लेवल निवेशकों ने शुरुआती स्टार्टअप्स में रुचि बरकरार रखी।

🧩 टॉप 10 अर्ली-स्टेज डील्स

1️⃣ Giga — $61M (Series A)
2️⃣ Tetr College — $18M
3️⃣ Pidge — $15M
4️⃣ 3ev Industries — $13M
5️⃣ Brandworks Technologies — $11M
6️⃣ Redrob
7️⃣ Zinit
8️⃣ MindTalk
9️⃣ Pibit AI
🔟 Mirana Toys ($7M)

AI, एडटेक, ईवी मोबिलिटी और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में शुरुआती कंपनियों ने दमदार पकड़ बनाई।


🔄 Mergers & Acquisitions: रणनीतिक विस्तार का दौर

नवंबर में कई महत्वपूर्ण अधिग्रहण हुए जो टेक व डिजिटल-फर्स्ट बिज़नेस मॉडल को और मजबूत बनाते हैं:

  • Zupee → Nucanon
  • PB Health → Fitterfly
  • Unnati Agri → Gramophone
  • Spinny → GoMechanic (probable acquisition)
  • VideoDB, Icertis, Xoriant ने छोटे टेक प्लेयर्स खरीदे
  • Vyapar व Black Gold Recycling ने भी रणनीतिक बाय किए

इन M&A से यह साफ है कि कंपनियां क्षमता बढ़ाने और प्रोडक्ट मजबूत करने की दिशा में काम कर रही हैं।


🏙️ कौन सा शहर रहा सबसे बड़ा फंडिंग हब?

🌆 Bengaluru = $446.53M (45 डील्स)
दिल्ली-NCR + मुंबई इसके बाद रहे।

📍 शहरवार फंडिंग ब्रेकअप:

  • Bengaluru: $446.53M (46%)
  • Delhi NCR: $178.77M (18.45%)
  • Mumbai: $144.17M (14.88%)
  • Pune: $43.26M
  • Chennai: $75.30M

बेंगलुरु ने फिर साबित किया कि वह देश की स्टार्टअप कैपिटल है।


🏷️ सेक्टरवार फंडिंग: Fintech सबसे आगे

🌟 Fintech — $202.57M (13 deals)
🤖 AI — $104.49M (13 deals)
🛒 E-commerce — $90.75M (14 deals)
🍔 F&B — $39M
🏥 Healthtech — $31.8M

भारत में AI और फिनटेक का तेज़ उभार इस सूची से भी साफ दिखता है।


📊 Series-wise Funding Breakdown

  • Series A: $186.48M (16 deals) — सबसे ज़्यादा
  • Seed: $69.30M (34 deals)
  • Pre-Series A: $25.27M
  • Pre-Seed: $9.98M
  • Undisclosed: $75.10M

इससे पता चलता है कि निवेशक शुरुआती स्टार्टअप्स पर दांव लगाने को तैयार हैं, लेकिन बड़े ग्रोथ चेक सीमित हो रहे हैं।


⚠️ Layoffs, Shutdowns & Exits: महीना रहा झटका-भरा

नवंबर 2025 में कई बुरे अपडेट भी देखने को मिले:

  • Porter + Junglee Games → 650–700 कर्मचारियों की छंटनी
  • Agritech BharatAgri → शटडाउन
  • 6 स्टार्टअप एक्सिट्स
  • 24+ CXO लेवल हायरिंग

स्टार्टअप्स लागत कम करने और प्रॉफिटेबिलिटी पर फोकस कर रहे हैं।


📈 Trends to Watch: भविष्य की दिशा

1️⃣ IPO की लहर तेज़ 🚀

Lenskart, Groww, PW जैसी लिस्टिंग्स के बाद दिसंबर में
➡️ Meesho
➡️ Wakefit
➡️ Aequs
जैसी कंपनियां भी IPO लाने जा रही हैं।

2️⃣ Debt Funding में उछाल 📉➡📈

नवंबर में 23% फंडिंग डेब्ट रही, जो यह संकेत देती है कि
स्टार्टअप्स रनवे बढ़ाने के लिए नई रणनीतियाँ अपना रहे हैं।

3️⃣ CarTrade–CarDekho डील का रुकना 🙅‍♂️

ऑटो-टेक सेक्टर में बड़े कंसोलिडेशन की रफ्तार धीमी दिखी।


📝 निष्कर्ष

नवंबर 2025 का महीना निवेश के लिहाज से धीमा रहा, लेकिन IPO मार्केट की गर्माहट और शुरुआती स्टेज फंडिंग की मजबूती ने भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम को सकारात्मक मोड में रखा। AI, फिनटेक और ई-कॉमर्स जैसे सेक्टर्स में बढ़ती दिलचस्पी यह दिखाती है कि आने वाला समय इनोवेशन-फर्स्ट कंपनियों का होगा।

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⚡️TVS Motor फिर नंबर 1 पर! Ola Electric की 50% गिरावट

ola electric

भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (E2W) सेक्टर में नवंबर 2025 बिल्कुल ड्रामेटिक रहा। जहां TVS Motor ने एक बार फिर से बाज़ार का ताज अपने नाम कर लिया है, वहीं कभी नंबर-1 रहने वाली Ola Electric में लगभग 50% की भारी गिरावट दर्ज हुई और कंपनी अब पांचवें स्थान पर लुढ़क गई है।

आइए जानते हैं नवंबर महीने का पूरा हाल 👇


🏍️ TVS Motor बना मार्केट किंग — 25.92% मार्केट शेयर

VAHAN डेटा के अनुसार, TVS Motor ने नवंबर 2025 में 29,756 रजिस्ट्रेशन दर्ज किए, और इसी के साथ वह 25.92% मार्केट शेयर लेकर पहली पोजीशन पर पहुंच गया।
रुचिकर बात यह है कि जहां बाकी सभी बड़ी कंपनियों की बिक्री गिरी, वहीं TVS लगभग स्थिर रहा और मार्केट में मजबूती दिखाता रहा।


📉 कुल E2W बिक्री में 20% से ज्यादा की गिरावट

नवंबर में इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक की कुल बिक्री 1.15 लाख यूनिट रही, जो अक्टूबर की 1.44 लाख यूनिट से लगभग 20% कम है।
अक्टूबर में त्योहारों के कारण डिमांड ज़्यादा थी, लेकिन उसके बाद नवंबर में मार्केट ठंडा पड़ गया।


🥈 Bajaj Auto दूसरे नंबर पर — बिक्री में 20% गिरावट

Bajaj Auto की बिक्री अक्टूबर के 31,392 यूनिट से गिरकर नवंबर में 25,085 यूनिट पर आ गई।
मार्केट शेयर घटकर 21.85% रह गया।


⚡️ Ather Energy की 30% गिरावट लेकिन पोजीशन बरकरार

Ather Energy ने नवंबर में 20,018 यूनिट बेचीं, जो अक्टूबर की 28,405 यूनिट से करीब 30% कम है।
फिर भी कंपनी मार्केट में तीसरे स्थान पर बनी रही।

💰 Ather का बिज़नेस ग्रोथ:

  • Q2 FY26 में ₹899 करोड़ revenue
  • मार्केट कैप: ₹27,216 करोड़ ($3B)

यह Ola Electric से ज़्यादा है — यानी Ather अब सिर्फ बिक्री में ही नहीं, बल्कि वैल्यूएशन और फाइनेंशियल परफॉर्मेंस में भी मजबूत है।


🏍️ Hero MotoCorp चौथे नंबर पर

Hero MotoCorp ने नवंबर में 11,795 यूनिट दर्ज कीं, जो अक्टूबर की तुलना में 26% कम हैं।
इसके बावजूद कंपनी एक पोजीशन ऊपर चढ़कर चौथे स्थान पर पहुंच गई।

मार्केट शेयर: 10.27%


📉🔥 Ola Electric को सबसे बड़ा झटका — बिक्री टूटी आधी

नवंबर में Ola Electric की बिक्री सीधे 49% गिर गई।
अक्टूबर में जहां 16,013 यूनिट बिके थे, वहीं नवंबर में यह गिरकर 8,254 यूनिट रह गई।

📉 Ola की पोजीशन:

  • अक्टूबर: 3rd
  • नवंबर: 5th

📉 Ola Electric Share Price:

  • शेयर ₹41.38 पर बंद
  • एक महीने में 17.67% गिरावट
  • मार्केट कैप: ₹18,252 करोड़ ($2B)

Ola के लिए यह लगातार दूसरा कमजोर महीना है, जिससे कंपनी पर निवेशकों का भरोसा हिल रहा है।


🚲 अन्य कंपनियों का प्रदर्शन

6️⃣ Greaves Electric Mobility

  • बिक्री: 5,692 यूनिट
  • गिरावट: 25.4%
  • मार्केट शेयर: 4.96%

7️⃣ BGAUSS

  • बिक्री: 2,557 यूनिट
  • मार्केट शेयर: 2.23%

📈✨ River Mobility और Kinetic Green — दो चमकते सितारे

जब लगभग सभी कंपनियों की बिक्री नीचे गई, तब दो ब्रांड ने उल्टा ग्रोथ दिखाया:

⭐ River Mobility

  • ग्रोथ: 8.8%

⭐ Kinetic Green

  • ग्रोथ: 12.34%

इन दोनों कंपनियों ने टॉप-10 में जगह बनाई और बाजार में अपनी पकड़ मजबूत की।


🔟 Pure EV की भारी गिरावट

Pure EV ने नवंबर में 37.84% की गिरावट दर्ज की और कंपनी फिसलकर दसवें स्थान पर पहुंच गई।


📉 क्यों गिरी नवंबर में बिक्री? — Expert Insights

👉 अक्टूबर में दिवाली और त्योहारों की वजह से खरीदारी ज्यादा हुई
👉 नवंबर में मांग सामान्य स्तर पर वापस आ गई
👉 E2W सेक्टर में प्राइसिंग, सब्सिडी, और सर्विस नेटवर्क भी बिक्री को प्रभावित करते हैं
👉 Ola जैसी कंपनियों पर रिकॉल, रेंज शिकायतें और आफ्टर-सेल्स सर्विस के कारण भरोसा कम हुआ


🔍 मार्केट का भविष्य क्या संकेत देता है?

  • 📌 TVS और Ather आने वाले महीनों में मार्केट को लीड कर सकते हैं
  • 📌 Ola Electric को वापसी के लिए अगली दो तिमाहियों में मजबूत परफॉर्मेंस दिखानी होगी
  • 📌 EV इंडस्ट्री में激 competition अब और तेज होने वाला है
  • 📌 Tier-2 और Tier-3 शहरों में डिमांड तेजी से बढ़ रही है
  • 📌 नए प्लेयर्स (River, Kinetic Green) मजबूत पकड़ बना रहे हैं

🏁 निष्कर्ष

नवंबर 2025 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट के लिए बड़ा मोड़ साबित हुआ।
जहां कुल बिक्री में गिरावट आई, वहीं TVS Motor ने बेहतरीन प्रदर्शन किया, जबकि Ola Electric के लिए महीना बेहद कठिन रहा

Ather और Hero MotoCorp ने स्थिरता दिखाई, और नए खिलाड़ी भी बाजार में पहले से ज्यादा आत्मविश्वास के साथ उभर कर सामने आ रहे हैं।

आने वाले महीने यह तय करेंगे कि 2026 में ई-स्कूटर का असली बादशाह कौन बनेगा! ⚡🏍️

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🇮🇳💸 UPI ने नवंबर 2025 में किया 20.47 बिलियन ट्रांज़ैक्शंस का आंकड़ा पार!

UPI

भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम लगातार नई ऊँचाइयों को छू रहा है, और नवंबर 2025 इसका एक और बड़ा प्रमाण है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने नवंबर महीने में 20.47 बिलियन ट्रांज़ैक्शंस दर्ज किए। यह आंकड़ा अक्टूबर 2025 के 20.70 बिलियन के मुकाबले थोड़ा कम है, लेकिन फिर भी UPI ने पिछले साल की तुलना में जबरदस्त 32% की सालाना वृद्धि दिखाई है।

फेस्टिवल सीजन के बाद यह हल्की गिरावट पूरी तरह सामान्य मानी जा रही है। आइए पूरा विश्लेषण समझते हैं👇


📊 UPI ट्रांज़ैक्शंस: महीने-दर-महीना और साल-दर-साल तुलना

  • नवंबर 2025: 20.47 बिलियन ट्रांज़ैक्शंस
  • अक्टूबर 2025: 20.70 बिलियन ट्रांज़ैक्शंस
  • YoY ग्रोथ: 32%
  • यह UPI इतिहास में तीसरी बार है जब मासिक ट्रांज़ैक्शंस ने 20 बिलियन का आंकड़ा पार किया है।

पहली बार यह उपलब्धि अगस्त 2025 में मिली थी, और दूसरी बार अक्टूबर 2025 में।


💰 ट्रांज़ैक्शन वैल्यू: त्योहारी खर्च के बाद हल्की गिरावट

नवंबर में कुल ट्रांज़ैक्शन वैल्यू रही: ₹26.32 लाख करोड़
अक्टूबर में यह थी: ₹27.28 लाख करोड़

यानी, करीब ₹1 लाख करोड़ की कमी।

  • सालाना वृद्धि (YoY): 22%
  • मंथली गिरावट: अक्टूबर के फेस्टिवल शॉपिंग लहर के बाद सामान्य कूल-ऑफ।

📅 डेली एवरेज ट्रांज़ैक्शन: लगातार मजबूत

  • प्रतिदिन औसत UPI ट्रांज़ैक्शन: 682 मिलियन
  • प्रतिदिन औसत ट्रांज़ैक्शन वैल्यू: ₹87,721 करोड़
    (अक्टूबर की तुलना में मामूली कमी, तब था ₹87,993 करोड़)

यानी, नवंबर में भी भारत में हर दिन 68 करोड़ से ज़्यादा UPI पेमेंट्स हुए—यह खुद में एक रिकॉर्ड है!


📱 UPI ऐप्स: अक्टूबर में PhonePe ने फिर मारी बाज़ी

नवंबर के ऐप-वार डेटा अभी जारी नहीं किए गए हैं, लेकिन अक्टूबर के आंकड़े बताते हैं—

  • PhonePe: 9.4 बिलियन ट्रांज़ैक्शंस
  • उसके बाद Google Pay और Paytm

PhonePe लंबे समय से UPI का सबसे बड़ा खिलाड़ी बना हुआ है और इसका दबदबा बदस्तूर जारी है।


🌍 UPI का ग्लोबल विस्तार: भारत की डिजिटल ताकत अब दुनिया में

UPI सिर्फ भारत की सीमा तक सीमित नहीं है। पिछले एक साल में UPI ने तेजी से विदेशों में विस्तार किया है।

UPI अब इन देशों में लाइव है:

  • 🇸🇬 सिंगापुर
  • 🇦🇪 UAE
  • 🇧🇹 भूटान
  • 🇳🇵 नेपाल
  • 🇫🇷 फ्रांस
  • 🇱🇰 श्रीलंका
  • 🇲🇺 मॉरीशस

इन जगहों पर भारतीय पर्यटक और व्यापारी सीधे UPI से पेमेंट कर सकते हैं — यह डिजिटल इंडिया की सबसे बड़ी ताकतों में से एक बन चुकी है।


🇪🇺 नया बड़ा कदम: यूरोपीय पेमेंट सिस्टम से UPI का इंटरलिंक

हाल ही में एक बड़ी घोषणा हुई—
UPI को यूरो सिस्टम के TARGET Instant Payment Settlement (TIPS) के साथ जोड़ा जाएगा।

इससे क्या बदलाव आएंगे?

  • यूरोपीय देशों में रियल-टाइम पेमेंट आसान होंगे
  • भारतीय पर्यटकों, छात्रों और बिज़नेस ट्रैवलर्स को सीधा फायदा
  • ग्लोबल पेमेंट नेटवर्क में भारत की पकड़ और मजबूत

ये साझेदारी यह साबित करती है कि भारत डिजिटल भुगतान के वैश्विक भविष्य में बड़ी भूमिका निभा रहा है।


🧭 UPI की ग्रोथ को क्या चला रहा है?

  1. झंझट-मुक्त पेमेंट सिस्टम — QR स्कैन करो, पेमेंट हो गया!
  2. हर उम्र और शहर के लोगों की पहुंच में
  3. फास्ट, फ्री और 24×7 उपलब्ध
  4. बिजनेस और दुकानदारों के लिए आसान
  5. बढ़ते डिजिटल ऐप्स, वॉलेट्स और बैंकिंग इकोसिस्टम

UPI अब सिर्फ पेमेंट प्लेटफॉर्म नहीं—
यह भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का “दिल” बन चुका है।


🔮 2026 की ओर: क्या बना रह सकता है ट्रेंड?

  • UPI 25 बिलियन मासिक ट्रांज़ैक्शंस को छू सकता है
  • इंटरनेशनल अपनाने की गति और तेज़ होगी
  • UPI क्रेडिट, UPI ATM और UPI Tap-and-Pay जैसे फीचर्स आम होंगे
  • ई-कॉमर्स, किराना और ऑफलाइन दुकानों में UPI उपयोग और बढ़ेगा

भारत दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट मार्केट बनने की ओर पहले ही कदम बढ़ा चुका है।


📝 निष्कर्ष

नवंबर 2025 में UPI के ट्रांज़ैक्शन थोड़े कम हुए, लेकिन सालाना वृद्धि और ग्लोबल विस्तार ने भारत की डिजिटल पेमेंट ताकत को फिर साबित किया।

  • 20.47 बिलियन ट्रांज़ैक्शंस
  • ₹26.32 लाख करोड़ की वैल्यू
  • 32% की सालाना वृद्धि
  • दुनिया के कई देशों में विस्तार

UPI अब सिर्फ भारत की भुगतान प्रणाली नहीं—
यह भारत की वैश्विक पहचान और डिजिटल शक्ति का प्रतीक है। 🇮🇳🚀

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🇮🇳 India Startup Trends 2025

India Startup

🚀 2025 में भारत का स्टार्टअप परिदृश्य: नए ट्रेंड, नई दिशा, नई रफ्तार

2025 का साल भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए बेहद परिवर्तनकारी साबित हो रहा है। यह वह समय है जब भारतीय स्टार्टअप न केवल घरेलू स्तर पर तेज़ी से बढ़ रहे हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी पहचान बना रहे हैं। इस साल कई ऐसे ट्रेंड उभर कर सामने आए हैं जिन्होंने यह साफ कर दिया है कि आने वाले वर्षों में भारतीय उद्यमिता किस दिशा में आगे बढ़ेगी।

नीचे 2025 के सबसे बड़े स्टार्टअप ट्रेंड्स का आसान और विस्तृत सार दिया गया है:


🤖 1. AI और डीप-टेक स्टार्टअप्स की सबसे तेज़ ग्रोथ

2025 में जो सेक्टर सबसे ज्यादा बढ़ रहा है, वह है AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस)
AI-आधारित स्टार्टअप्स — चाहे वे जेनरेटिव AI हों, AI-सॉफ्टवेयर, AI एजेंट्स, साइबर सिक्योरिटी AI या हेल्थ-AI — इनकी मांग और फंडिंग दोनों में भारी बढ़ोतरी हुई है।

क्यों?

  • कंपनियाँ ऑटोमेशन चाहती हैं
  • लागत कम करना चाहती हैं
  • तेज़, डेटा-ड्रिवन निर्णय लेना चाहती हैं

AI-स्टार्टअप अब बहुत कम समय में यूनिकॉर्न बनने लगे हैं। यदि पहले किसी कंपनी को 7 साल लगते थे, तो अब कई AI-स्टार्टअप सिर्फ 5–6 साल में ही $1 बिलियन की वैल्यू छू रहे हैं।


🌱 2. सस्टेनेबिलिटी और क्लीन-टेक का बूम

2025 के स्टार्टअप ट्रेंड में दूसरा बड़ा उछाल क्लीन-टेक, ग्रीन-एनर्जी, और सस्टेनेबल इनोवेशन का है।
ऊर्जा संकट, प्रदूषण, जलवायु बदलाव जैसी चुनौतियों ने ग्रीन स्टार्टअप्स को तेज़ी से आगे बढ़ने का मौका दिया है।

मुख्य फोकस क्षेत्रों में शामिल हैं:

  • EV चार्जिंग
  • सौर ऊर्जा समाधान
  • वेस्ट मैनेजमेंट
  • पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग
  • रीसाइक्लिंग-टेक

2025 में निवेशक उन स्टार्टअप्स में अधिक पैसा लगा रहे हैं जो पृथ्वी, पर्यावरण और ऊर्जा-सेक्टर से जुड़े समाधान दे रहे हैं।


🏥 3. हेल्थ-टेक और डिजिटल हेल्थ सेवाओं की मांग

स्वास्थ्य क्षेत्र में 2025 में सबसे बड़ा बदलाव यह देखने को मिल रहा है कि लोग अब ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक अपनाने लगे हैं।

ट्रेंड्स में शामिल हैं:

  • टेलीमेडिसिन
  • ऑनलाइन डॉक्टर कंसल्टेशन
  • रिमोट हेल्थ मॉनिटिरिंग
  • AI-आधारित डायग्नोस्टिक
  • डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड

भारत जैसे बड़े देश में यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान हो रही है।


💳 4. FinTech का विस्तार और एंबेडेड फाइनेंस का उभार

भारत पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल भुगतान देश है, लेकिन 2025 में FinTech स्टार्टअप्स का दायरा और भी बढ़ गया है।

2025 के प्रमुख FinTech ट्रेंड्स:

  • डिजिटल लेंडिंग
  • BNPL (Buy Now Pay Later)
  • इंश्योरेंस-टेक
  • वेल्थ मैनेजमेंट ऐप्स
  • ब्लॉकचेन आधारित फाइनेंस
  • एंबेडेड फाइनेंस (ऐप में सीधे फाइनेंस सुविधा)

FinTech स्टार्टअप MSMEs, छोटे व्यापारियों और डिजिटल उपभोक्ताओं के बीच बेहद तेज़ी से लोकप्रिय हो रहे हैं।


🛍️ 5. D2C ब्रांड्स और क्विक-कॉमर्स की तेजी

2025 में Direct-to-Consumer (D2C) मॉडल फिर से तेज़ी से उभर रहा है।
लोग अब सीधा ब्रांड से खरीदारी करना पसंद कर रहे हैं, बजाए ऑफ़लाइन स्टोर या बड़े मार्केटप्लेस के।

D2C किन क्षेत्र में बढ़ रहा है?

  • स्किनकेयर
  • फैशन
  • हेल्थ सप्लिमेंट
  • पैकेज्ड फूड
  • होम प्रोडक्ट्स

इसके साथ, 10–20 मिनट डिलीवरी देने वाला क्विक-कॉमर्स मॉडल भी भारत में मजबूत हो रहा है — अब छोटे शहर भी क्विक-डिलीवरी की मांग कर रहे हैं।


🏙️ 6. Tier-2 और Tier-3 शहरों का उभार

एक बड़ा बदलाव यह है कि 2025 में स्टार्टअप सिर्फ बेंगलुरु, दिल्ली या मुंबई तक सीमित नहीं हैं।
अब जयपुर, इंदौर, पुणे, लखनऊ, नागपुर, कोच्चि, चंडीगढ़, पटना जैसे शहर भी नए स्टार्टअप हब बन रहे हैं।

क्यों?

  • कम लागत
  • स्थानीय प्रतिभा
  • बेहतर इंटरनेट
  • सरकारी सहयोग
  • छोटे शहरों में बड़ी मांग

इससे देशभर में उद्यमिता की पहुंच बढ़ रही है।


💼 7. कॉर्पोरेट + स्टार्टअप सहयोग बढ़ा

2025 में बड़ी कंपनियाँ स्टार्टअप्स में निवेश, एक्सीलरेटर प्रोग्राम और पार्टनरशिप मॉडल को तेजी से अपना रही हैं।
इसका फायदा क्या हो रहा है?

  • स्टार्टअप को ग्राहक मिलते हैं
  • बड़े ब्रांड को इनोवेशन मिलता है
  • फंडिंग आसान होती है
  • नए प्रोडक्ट तेज़ी से बाजार में आते हैं

कॉर्पोरेट वेंचर कैपिटल (CVC) इस साल के बड़े ट्रेंड्स में से एक है।


📉 8. फंडिंग चुनौतियाँ — लेकिन वृद्धि बरकरार

2025 की शुरुआत में वैश्विक आर्थिक मंदी की वजह से फंडिंग में गिरावट देखने को मिली।
लेकिन इसके बावजूद भारत में निवेशकों की दिलचस्पी बरकरार है।

क्योंकि भारत:

  • दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था है
  • युवा आबादी है
  • स्टार्टअप-फ्रेंडली सरकार है
  • विशाल उपभोक्ता बाजार है

इसलिए, फंडिंग में उतार-चढ़ाव आने के बावजूद, भारत में नवाचार की रफ्तार धीमी नहीं हुई।


🔮 निष्कर्ष: 2025 – भारतीय स्टार्टअप्स का “टेक और इनोवेशन वाला साल”

2025 का पूरा भारतीय स्टार्टअप परिदृश्य चार मुख्य बातों पर आधारित है:

  1. AI हर क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है
  2. सस्टेनेबल और क्लीन-टेक स्टार्टअप तेज़ी से उभर रहे हैं
  3. छोटे शहरों का योगदान बढ़ रहा है
  4. D2C, FinTech और हेल्थ-टेक सबसे तेजी से बढ़ने वाले सेक्टर हैं

कुल मिलाकर, 2025 भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम को ग्लोबल स्तर पर मजबूती से स्थापित करने वाला साल साबित हो रहा है।

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🚀 Uttar Pradesh Startup Ecosystem Report 2025

Founder artical

भारत का स्टार्टअप लैंडस्केप तेजी से बदल रहा है, और 2025 की Startup Ecosystem Report ने इस बदलाव में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की बड़ी छलांग को साफ-साफ दिखा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, यूपी देश का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बन गया है, जहां अब तक 14,000+ मान्यता प्राप्त स्टार्टअप उभर चुके हैं और 26 स्टार्टअप यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हो चुके हैं।

यह प्रगति सिर्फ नंबरों में ही नहीं, बल्कि ग्राउंड-लेवल इकोसिस्टम में भी दिखाई देती है।


🌟 #1 यूपी का स्टार्टअप इकोसिस्टम कैसे हुआ मजबूत?

Startup Ecosystem Report-2025 के अनुसार, उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में स्टार्टअप फ्रेंडली माहौल बनाने में शानदार काम किया है।

🔹 49 जिलों में एक्टिव स्टार्टअप्स – देश में पहला राज्य!

पहले स्टार्टअप्स सिर्फ नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ और कानपुर जैसे बड़े शहरों तक सीमित थे, लेकिन अब यह संस्कृति छोटे शहरों और टियर-2 व टियर-3 इलाकों में भी फैल चुकी है।

यह बदलाव दर्शाता है कि:

  • लोगों में उद्यमिता की समझ बढ़ रही है
  • सरकार द्वारा दी जा रही स्कीमें असर दिखा रही हैं
  • कॉलेज-स्तर पर इनोवेशन का माहौल विकसित हुआ है

🏙️ #2 यूपी के टॉप 10 स्टार्टअप हब – कौन है नंबर 1?

रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के 10 सबसे सक्रिय स्टार्टअप हब इस प्रकार रहे:

रैंकशहरस्टार्टअप्स की संख्या
1️⃣नोएडा3,418
2️⃣लखनऊ1,789
3️⃣गाजियाबाद1,582
4️⃣कानपुर586
5️⃣वाराणसी406
6️⃣आगरा359
7️⃣मेरठ291
8️⃣प्रयागराज283
9️⃣गोरखपुर201
🔟बरेली177

📌 नोएडा उत्तर भारत का सबसे बड़ा टेक-स्टार्टअप क्लस्टर बनकर उभरा है।


🇮🇳 #3 देश के स्टार्टअप ग्रोथ में यूपी का योगदान

यूपी अब राष्ट्रीय स्टार्टअप इकोनॉमी में बड़ी भूमिका निभा रहा है:

  • यूपी का योगदान: 9.6%
  • दिल्ली का योगदान: 10%
  • कर्नाटक का योगदान: 10.6%

📈 यूपी की ग्रोथ रफ्तार बताती है कि आने वाले वर्षों में वह देश का दूसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बन सकता है।


🦄 यूनिकॉर्न क्या होता है? ( आसान भाषा में )

स्टार्टअप की दुनिया में यूनिकॉर्न (Unicorn) ऐसा प्राइवेट स्टार्टअप होता है जिसकी वैल्यूएशन 1 बिलियन डॉलर (₹8,200 करोड़+) से ऊपर पहुंच जाती है।

🎯 यूनिकॉर्न की खास बातें:

✔️ 1. डिसरप्टिव इनोवेशन

यूनिकॉर्न वो कंपनियां होती हैं जो अपने सेक्टर में बड़ा बदलाव लाती हैं।
उदाहरण: Uber ने पूरी ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री को बदल दिया।

✔️ 2. टेक्नोलॉजी-ड्रिवन

लगभग सभी यूनिकॉर्न नई टेक्नोलॉजी पर आधारित बिजनेस मॉडल पर चलते हैं।

✔️ 3. कंज़्यूमर-सेंट्रिक

इनका फोकस यूजर्स की असल समस्या को आसान तरीके से हल करना होता है।

✔️ 4. प्राइवेट ओनरशिप

ज्यादातर यूनिकॉर्न स्टॉक मार्केट में लिस्ट नहीं होते।
इनकी वैल्यू तब बढ़ती है जब बड़े निवेशक इनमें पैसा लगाते हैं।

✔️ 5. सॉफ्टवेयर-फर्स्ट अप्रोच

ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार:

  • 87% यूनिकॉर्न्स सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट बनाते हैं
  • 7% हार्डवेयर
  • 6% अन्य प्रोडक्ट/सर्विसेज

🚀 यूपी के 26 यूनिकॉर्न: राज्य के लिए बड़ा माइलस्टोन

उत्तर प्रदेश में अब तक 26 स्टार्टअप यूनिकॉर्न बन चुके हैं, जो इसे भारत के प्रमुख नवाचार केंद्रों में से एक बनाते हैं।
इन यूनिकॉर्न्स का योगदान:

  • रोजगार के नए अवसर
  • छोटे शहरों में इनक्यूबेशन और फंडिंग के विकल्प
  • डिजिटल और टेक-आधारित समाधानों में तेजी से वृद्धि

🌐 छोटे शहरों की बड़ी उड़ान — क्यों खास है यूपी का मॉडल?

यूपी का मॉडल देश में अनोखा है क्योंकि यह सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। छोटे शहरों में भी:

✨ इनोवेशन लैब्स
✨ स्टार्टअप इनक्यूबेटर्स
✨ कॉलेज-आधारित आइडिया प्रोग्राम
✨ सरकारी ग्रांट और फंडिंग

जैसी सुविधाएँ तेजी से बढ़ रही हैं।

इससे छात्र, स्थानीय उद्यमी और टेक-लर्नर्स भी अपना स्टार्टअप शुरू कर पा रहे हैं।


💼 यूपी की तेजी का कारण — सरकार + इकोसिस्टम का सही तालमेल

यूपी सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में कई कदम उठाए:

  • Startup Policy 2020
  • MSME स्टार्टअप प्रोग्राम
  • Incubation Centers
  • Seed Fund & Venture Fund सपोर्ट
  • वर्कशॉप्स और मेंटोरशिप

इसका सीधा फायदा नए उद्यमियों को मिला है।


🏁 निष्कर्ष: भारत का नया स्टार्टअप इंजन — उत्तर प्रदेश

Startup Ecosystem Report-2025 साफ दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश सिर्फ स्मार्ट शहरों तक सीमित नहीं, बल्कि छोटे-बड़े सभी जिलों को साथ लेकर एक विशाल स्टार्टअप इकोसिस्टम बना रहा है।

🚀 14,000+ स्टार्टअप
🦄 26 यूनिकॉर्न
🌍 49 जिलों में एक्टिव इनोवेशन

यह बताता है कि आने वाले वर्षों में यूपी भारत का स्टार्टअप पावरहाउस बनने की पूरी क्षमता रखता है।

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